ओपिनियन पोल 2026 लाइव: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए खतरे की आशंका, जानें असम में हिमंता का हाल, सर्वे में किसे देखें

विधानसभा चुनाव ओपिनियन पोल 2026 लाइव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (पश्चिम बंगाल चुनाव ओपिनियन पोल 2026) को लेकर साझीम के आओ ओपिनियन पोल (ओपिनियन पोल 2026) राज्य की पारंपरिक शास्त्रीय कांग्रेस को बड़ा झटका लग रहा है। बंगाल ओपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी को 130 से 150 फीसदी मिल सकती है तो वहीं दूसरी तरफ एनबीए को 140 से 160 फीसदी बढ़त मिल सकती है. 294 विधानसभा वाली को लेकर ये मैट्रिज़ ओपीनियन पोलकैंट का मुकाबला बता रहा है। (टैग्सटूट्रांसलेट)मैट्रिज(टी)मैट्रिज ओपिनियन पोल(टी)असम इलेक्शन 2026(टी)असम ओपिनियन पोल 2026(टी)असम इलेक्शन ओपिनियन पोल 2026(टी)असम इलेक्शन ओपिनियन पोल(टी)ओपिनियन पोल 2026(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)एआईयूडीएफ(टी)एबीपी ओपिनियन पोल(टी)हिमंता बिस्वा सरमा(टी)चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026
भिंड में बारिश-ओलावृष्टि का कहर, बिजली के खंभे टूटे:कांग्रेस ने मुआवजा और सर्वे की उठाई मांग, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

भिंड जिले में हाल ही में हुई ओलावृष्टि और तेज बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गोहद, मौ, रौन, अटेर, मिहोना, लहार सहित भिंड के कई इलाकों में तैयार खड़ी गेहूं की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। इसको लेकर जिला कांग्रेस कमेटी भिंड शहर ने जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के नेतृत्व में प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर किसानों को शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग उठाई। ज्ञापन में बताया गया कि ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जिससे किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं। कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि फसलों का तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। कई जगह बिजली के खंभे और लाइनें क्षतिग्रस्त इसके अलावा तेज आंधी-बारिश के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिरने से बिजली के खंभे और लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बाधित है। कांग्रेस ने इन्हें जल्द से जल्द दुरुस्त कराने की मांग भी उठाई। ज्ञापन में मालनपुर स्थित वन स्टॉप सेंटर में एक नाबालिग बालिका के साथ मारपीट कर उसे बाथरूम में बंद करने की घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं, प्राकृतिक आपदा के चलते कई स्थानों पर मकान गिरने से जनहानि हुई है और लोग घायल हुए हैं। कांग्रेस ने मृतकों के परिजनों और घायलों को शासन की ओर से उचित आर्थिक सहायता देने की मांग भी रखी। ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व विधानसभा प्रत्याशी डॉ. राधेश्याम शर्मा, वरिष्ठ नेता रामहर्ष सिंह कुशवाह, नगर कांग्रेस अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी, समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
तमिल इलेक्शन में नंबर गेम या 69 प्रतिशत नट? किसी दल ने भी क्यों नहीं निकाला ब्राह्मण प्रत्याशी, जानें वजह

तमिल की सूची में इस बार बड़ा उल्टेफेर देखने को मिल रहा है। आगामी चुनाव के मद्देनजर ना सिर्फ डीएमके और कांग्रेस बल्कि एआईएडीएमके और बीजेपी तक ने किसी भी ब्राह्मण को अपना हित नहीं बनाया है। करीब साढ़े तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ जब अन्नाद्रमुक ने किसी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। द्रविड़ आंदोलन का कितना प्रभावद्रविड़ आंदोलन के दक्षिण के इस राज्य में ब्राह्मण राजनीति ना सिर्फ हाशिए पर चली गई है बल्कि इस बार चुनावों में प्रमुख आश्रमों ने ब्राह्मणों को टिकटें बांटने से भी मना कर दिया है और ब्राह्मणों का समर्थन हासिल करने वाली बीजेपी ने भी पार्टी बना ली है। बीजेपी ने अपने कोटे की 27 विधानसभा सीटों में से किसी भी सीट पर ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा घोषित नहीं की है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि ये सब तमिलनाडु में ये घटिया प्रतिभाएं का नतीजा है या फिर मजबूरी है। बता दें कि तमिल के 234 विधानमंडलों में भारतीय गठबंधन में डीएमके 164 और कांग्रेस 28 के प्राइमरी चुनावों में लड़ाई जारी है, लेकिन दोनों में से किसी ने भी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। इसके अलावा उनके सहयोगी लेफ्ट, वीसीके और मुस्लिम लीग ने भी किसी ब्राह्मण पर भरोसा नहीं किया। विपक्षी गठबंधन में अन्नाद्रमुक 178 रिपब्लिकन उम्मीदवार 27 और अन्य 18 रिपब्लिकन उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन एक भी सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार को नहीं उतारा गया है। बिजनेसमैन की पार्टी ने भी बनाई दूरीदिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनके निधन के करीब 10 साल बाद भी उनकी पार्टी ने किसी भी ब्राह्मण को मैदान में नहीं उतारा। एआईएडीएमके ने 2021 में ब्राह्मण समाज से आने वाले पूर्व पुलिस गोदाम और नटराज को उम्मीदवार बनाया था, इस बार भी टिकट नहीं दिया गया। ब्राह्मणों ने टिकटें निकालींअभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कजगम (टीवीके) ने 2 ब्राह्मण दावेदारों को मैदान में उतारा। इसके अलावा तमिल राष्ट्रवादी नेता सीमान की पार्टी के नाम तमिलर दास ने 6 ब्राह्मणों के टिकट दिए हैं। इन दोनों ने ही मायलापुर और श्रीरंगम जैसे इलाक़ों को चुना है, जहाँ ब्राह्मण चर्च की संख्या सबसे ज़्यादा है। एनईटीके द्वारा 6 ब्राह्मणों को मैदान में पीछे के सिद्धांतों का कहना है कि सरटेन ने तमिलनाडु में पेरियार-विरोधी रुख अपनाया है। आरएसएस से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि वो द्रविड़ दीवार को गिराने का काम करेंगे। वे अपने राजनीतिक अनुसंधान में भी जाति और पहचान का फ्रैंक का उपयोग करते हैं। क्या कहते हैं राजनीतिक पंडितटाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक अरुण जेटली का कहना है कि अन्नाद्रमुक ने कई दशकों तक ब्राह्मण समाज का समर्थन किया, लेकिन हाल ही में इसमें बदलाव आया है। व्यापारियों के निधन के बाद ब्राह्मण ईसाइयों का गुट भाजपा के पक्ष में हुआ। इसके चलते एआईएडीएमके ने ही ब्राह्मणों से दूरी बना ली है, लेकिन बीजेपी के संयोजक बनने की वजह से लोग जरूर चिंतित हैं। ब्राह्मणों की सूचीतमिल की कुल सूची में ब्राह्मणों की दुकान मात्र 3 प्रतिशत है। वेबसाइटों की संख्या अधिक है। मुथुरैयर, थेवर, वन्नियार और गौंडर। कम संख्या में ब्राह्मणों को वोट बैंक के रूप में देखा नहीं गया। इसके अलावा राज्य में 69 प्रतिशत शून्य लागू है। विचारधारा ने अपनी राजनीति को ओबीसी और विचारधारा के उद्घोषणा के साथ जोड़ा- गिरफ़्तार है। द्रविड़ राजनीति में ब्राह्मणों को आर्य या बाहरी माना जाता है, जबकि गैर-ब्राह्मणों को मूल द्रविड़ माना जाता है। यही कारण है कि किसी भी ब्राह्मण नेता के लिए खुद को तमिल हितों की रक्षा साबित करना आपके लिए एक बड़ी चुनौती है। ये भी पढ़ें पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘बंगाल के लोगों को भूख लगती है मोदी सरकार’, केंद्र पर अभिषेक बनर्जी ने कहा- झूठ बोला तो दो मुझे जेल भेज दिया (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)टीएन चुनाव 2026(टी)डीएमके(टी)कांग्रेस(टी)ब्राह्मण उम्मीदवार(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी) डीएमके(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)ब्राह्मण(टी)प्रत्याशी(टी)द्रविड़
पहलवान बिस्वा शर्मा का बड़ा आरोप- ‘कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी के आधार पर मेरी पत्नी पर लगाया आरोप’

असम के मुख्यमंत्री हिमंत शर्मा विश्व ने अपने परिवार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने मेरी पत्नी के खिलाफ आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा,” मेरी पत्नी के खिलाफ ग़रीब पति-पत्नी को लेकर कांग्रेस नेता पवन सह-लेखक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मेरी पत्नी के खिलाफ कांग्रेस के आरोप में असमंजस की स्थिति को प्रभावित करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं, इसके लिए कॉलेज की सजा हो सकती है।” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “…कोई भी 199 अमेरिकी डॉलर कंपनी का रजिस्ट्रेशन करा सकता है। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उन्होंने रिंकी के नाम से एक और बनाई कंपनी…कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से प्राप्त पासपोर्ट और शेयरहोल्डिंग की स्थिति का इस्तेमाल किया। गौरव गोगोई ने भी एक सोशल मीडिया ग्रुप की मदद की। पाकिस्तान किस तरह असम चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, यह बहुत महत्वपूर्ण है।” #घड़ी | गुवाहाटी: असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कहते हैं, “…कोई भी 199 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करके एक कंपनी पंजीकृत कर सकता है। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, उन्होंने रिनिकी के नाम पर एक और कंपनी बनाई…कांग्रेस ने एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया से प्राप्त पासपोर्ट और दस्तावेजों की छवियों का इस्तेमाल किया… https://t.co/S5bBLdtBKn pic.twitter.com/zPQr9lJs0V – एएनआई (@ANI) 6 अप्रैल 2026 क्या है मामला असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन अलग-अलग पासपोर्ट कैसे हैं? उन्हें तीन पासपोर्ट रखने की क्या आवश्यकता है? क्या वे कोई अपराधी हैं? कांग्रेस के एक्स हैंडल पर पवन एसोसिएट का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया, ”असम की जनता पूछ रही है।” हिमंता बिस्वा सरमा की पूरी राजनीतिक छवि के खिलाफ अपमान पर आधारित है, लेकिन उनकी पत्नी दो मुस्लिम देशों के पासपोर्ट दर्ज हैं, कैसे? भारत के कानून के खाते से आप द्विपक्षीय नागरिकता नहीं रख सकते हैं, तो क्या रिंकी भू लाइसेंस सरमा भारत का पासपोर्ट भी रखता है? हिमंता बिस्वा सरमा, अमित शाह के दत्तक पुत्र क्या हैं? और किस देश के मठाधीश को ये जानकारी थी कि उनके दत्तक पुत्र की पत्नी के 3 पासपोर्ट हैं? अमित शाह का जवाब- वो एसआईटी सहायक इस मामले की जांच क्या करेगी?” (टैग्सटूट्रांसलेट)असम चुनाव 2026(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा शर्मा(टी)कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा शर्मा(टी)कांग्रेस
Punjab Raghav Chaddha controversy; congress MP Gandhi Statement

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी (AAP) के झगड़े में कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी की एंट्री। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी (AAP) के झगड़े में पटियाला से कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी की भी एंट्री हो गई है। एक पॉडकास्ट के दौरान डॉ. गांधी ने कहा कि जब वह AAP से पटियाला के सांसद थे तो राघव चड्ढा ने उन्हें चिट्ठी देकर लोकसभा म . हालांकि उन्होंने राघव की लाई चिट्ठी फाड़कर उनके मुंह पर मार दी और गेटआउट कहकर पंजाब भवन से निकाल दिया। डॉक्टर गांधी ने एक निजी सोशल मीडिया चैनल से बात करते हुए ये बातें कहीं। वहीं राघव चड्ढा भी लगातार AAP को जवाब दे रहे हैं। 2 वीडियो जारी करने के बाद रविवार (5 अप्रैल) को उन्होंने पंजाब के लिए उठाए मुद्दों के बारे में बताते हुए लिखा कि यह छोटा सा ट्रेलर है, पूरी पिक्चर अभी बाकी है। AAP ने आरोप लगाया कि राघव ने BJP और PM नरेंद्र मोदी के खिलाफ किए सारे ट्वीट डिलीट कर दिए। राघव इससे पहले AAP को सैलाब बनकर आने और घातक होने की चेतावनी दे चुके हैं। कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने कहा कि मैंने चिट्ठी पकड़ी और फाड़कर राघव चड्ढा के मुंह पर मार दी। अब पढ़िए सांसद गांधी की 5 अहम बातें… राघव पंजाब भवन आया, मुझे चिट्ठी देकर कहा- ये बोलना है: पटियाला से कांग्रेस के लोकसभा सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने कहा- 2014 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर मेरा पहला लेक्चर था। राघव चड्ढा मेरे पास पंजाब भवन में आया। चिट्ठी लिखकर ले आए कि आपने कल बोलना है। मैंने कहा कि पता है कि मुझे बोलना है। राघव चड्ढा ने चिट्ठी देते हुए कहा कि आपको ये बोलना है। मैंने कहा- हू आर यू, मुझे पता क्या बोलना: डॉ. गांधी ने आगे कहा- मैंने कहा- हू आर यू, मुझे सब पता है। 1975 में जेल गया, 1970 से मैं इस लाइन में घूम रहा। 45 साल हो गए। मुझे नहीं पता कि क्या बोलना है। इस पर राघव चड्ढा ने कहा- आप नेशनल पार्टी के लीडर हो। नेशनल स्पोक्सपर्सन हो। LOP हो। मैंने कहा कि चिट्ठी पकड़ाओ, देखता हूं कि क्या बोलने को कह रहे। मैंने कहा- 4 में से तुम्हारी एक मांग बोलूंगा: डॉ. गांधी ने कहा- मैंने वह चिट्ठी देखी, उसमें चारों मुद्दे दिल्ली के थे। दिल्ली की बिजली और पानी का मुद्दा था। मैंने कहा कि बात सुन, मैं पहले बोलूंगा गाजा पट्टी पर, वहां बड़ा जुल्म हुआ। फिर मैं बदायूं रेप केस पर बोलूंगा। फिर पंजाब के कर्जे, नशे और खेती संकट पर बोलना है। इसके बाद 4 में से एक मांग तुम्हारी बोल दूंगा। मैंने चड्ढा को कहा– तुम बताने वाले कौन: डॉ. गांधी ने कहा- मेरे ये कहने पर राघव चड्ढा ने मुझे कहा, नहीं, नहीं, आपको सिर्फ यही बोलना है। मैंने पूछा कि तुम मुझे बताने वाले कौन हो। राघव ने कहा- आप पार्टी लीडर हो, आपको इंडियन पर्सपेक्टिव में ही बोलना होगा। मैंने कहा कि ये चिट्ठी तो दिल्ली पर्सपेक्टिव की है, इंडियन तो है ही नहीं। मैंने चिट्ठी पकड़कर फाड़ी, कहा-मुझसे बात मत करना: डॉ. गांधी ने आगे कहा- मैंने राघव को बताया कि जो मुद्दे मैं बता रहा हूं, वह इंटरनेशनल और इंडियन पर्सपेक्टिव के हैं। राघव ने कहा कि नहीं ये चिट्ठी लो। मैंने चिट्ठी पकड़ी और फाड़कर राघव चड्ढा के मुंह पर मार दी और गेटआउट कहते हुए बोला कि मुझसे बात मत करना। पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने दूसरा वीडियो जारी किया था। कहा- मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया झूठ भी सच लगने लगता। राघव चड्ढा के मामले में अब तक क्या–क्या हुआ AAP ने उपनेता पद से हटाया 2 अप्रैल को AAP ने राघव चड्ढा को AAP के राज्यसभा सांसदों के उपनेता पद से हटा दिया। इस बारे में राज्यसभा सेक्रेटरिएट को चिट्ठी दी गई, जिसमें यह भी कहा गया कि उन्हें पार्टी के कोटे से बोलने का टाइम न दिया जाए। AAP ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU), फगवाड़ा के वाइस चासंलर अशोक मित्तल को उपनेता बना दिया। राघव 2022 से पंजाब से AAP के राज्यसभा सांसद हैं। उनकी टर्म 2028 तक है। राघव चड्ढा ने कहा- खामोश कराया, हारा नहीं हूं इसके बाद 3 अप्रैल को राघव चड्ढा ने वीडियो जारी कर कहा- मैंने संसद में जनता के मुद्दे उठाए, क्या यह अपराध है। ये मुद्दे उठाने से आम आदमी का फायदा हुआ तो AAP का क्या नुकसान हुआ? जिन लोगों ने पार्लियामेंट में मेरे बोलने का अधिकार मुझसे छीन लिया, मुझे खामोश कर दिया, मैं उन्हें भी कुछ कहना चाहता हूं। मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना। मैं वो दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है। AAP नेता सामने आए, कहा- पार्टी लाइन से हटे राघव के वीडियो के सामने आते ही अनुराग ढांडा, सौरभ भारद्वाज, आतिशी मार्लेना, सीएम भगंवत मान जैसे कई AAP नेता सामने आए। उन्होंने कहा कि जब केजरीवाल अरेस्ट हुए तो राघव चड्ढा आंखों के ऑपरेशन की बात कह UK में थे। संसद में केंद्र सरकार और PM मोदी से सवाल नहीं पूछते, वह मोदी से डरते हैं। राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय समोसे के रेट जैसे छोटे मुद्दे उठाते हैं। पश्चिम बंगाल को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्ताव में साइन करने से राघव चड्ढा ने इनकार किया। पार्टी के वॉकआउट पर सदन से बाहर नहीं आए। राघव ने VIDEO जारी कर कहा- स्क्रिप्टेड कैंपेन चला रहे राघव ने 4 अप्रैल को दूसरा वीडियो जारी कर कहा- कल से मेरे खिलाफ एक स्क्रिप्टेड कैंपेन चलाया जा रहा है। वही भाषा, वही बातें, वही आरोप। यह कोई कोइंसिडेंस नहीं, बल्कि एक को-ऑर्डिनेटेड अटैक है। पहले मुझे लगा कि मुझे इसका जवाब नहीं देना चाहिए। फिर लगा कि एक झूठ को सौ बार बोला जाए तो कहीं लोग मान न लें। इसलिए, मैंने सोचा कि जवाब दूं। मैं संसद में शोर मचाने, चिल्लाने, माइक तोड़ने या गाली देने नहीं गया, बल्कि जनता के मुद्दे उठाने के लिए गया हूं। आखिर में घायल हूं, इसलिए घातक हूं कहते हुए AAP को चेतावनी दी। राघव चड्ढा बोले- ये तो ट्रेलर, पिक्चर अभी बाकी है
‘कांग्रेस ने जमीन पर कब्ज़ा किया, अवैध यात्रा को बढ़ावा दिया’, मारियानी में नारा दिया, ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित असम में होने वाले अप्रैल वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में मचे सियासी दंगल के बीच ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने रविवार (5, 2026) को जनता पार्टी (बीजेपी) के समर्थन में भारतीय रूपज्योति कुर्मी के समर्थन में मारियानी विधानसभा क्षेत्र में एक निवेशक को चुनावी मैदान में उतारा। अपने अर्थशास्त्र में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने असम में पिछले एक दशक में हुए बदलावों को देखते हुए भाजपा सरकार की वकालत की। उन्होंने कहा कि पहले असम की ओर से अवशेषों और दांतों से जुड़े अवशेषों की पहचान की गई थी, लेकिन आज मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य में शांति स्थापित हुई है। वर्तमान सरकार ने राज्य के मापदंडों को दी सुरक्षाः माझी ओडिशा के मुख्यमंत्री ने असम की अपार संपदा का जिक्र करते हुए यहां के पर्यटन और स्मारक क्षेत्रों के बारे में विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने काजीरंगा नेशनल पार्क का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान कई गैंडों का शिकार हुआ था, जबकि वर्तमान सरकार ने पोटाशों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की थी। माझी ने बड़े पैमाने पर अवैध पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रस्ताव का भी आरोप लगाया, जिससे भूमि व्यवस्था की समस्या गंभीर हो गई। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार ने इस मुद्दे पर कठोर रुख अपनाया है और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में इस पर प्रभावी कार्रवाई की गई है. असम के विकास का कर रहे नेतृत्व माझी उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि वे न सिर्फ असम के विकास का नेतृत्व कर रहे हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की प्रगति में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। माझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को श्रेय देते हुए कहा कि उनके घोटाले में असम का विकास प्रमुखता से किया जा रहा है, इसी कारण राज्य अब देश के विकास की दृष्टि का केंद्र बन गया है। इसके अलावा, ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि माझी ने चीन पर आक्रमण के समय का ज़िक्र किया था और कहा था कि उस दौर में प्रधानमंत्री सचिवालय नेहरू ने असम के लिए कम्युनिस्ट चिंता की लहर रखी थी, जबकि वर्तमान नेतृत्व ने ठोस विकास कार्य किए हैं। डबल इंजन सरकार ने नाव से मुक्त कराई भूमि माझी असम की आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान पर प्रकाश डाला गया ओडिशा के सीएम मोहन चरण माझी ने असम चाय की वैश्विक पहचान और मुगा और एरी रेशम की अंतर्राष्ट्रीय ख्याति का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि डबल इंजन सरकार बनने के बाद लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की शेष भूमि को मुक्त कराया गया है। माझी ने कहा कि भाजपा सरकार की विभिन्न योजनाओं से गरीबों, महिलाओं को लाभ मिला है और उनकी सरकार में सुधार हुआ है। चाय बागानों के बागानों को, जो लंबे समय से भूमि अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे थे, अब भूमि आवंटन दिए जा रहे हैं और उनके दैनिक स्वामित्व में भी वृद्धि हुई है। ओडिशा के सीएम ने मारियानी से बीजेपी की ओर से समर्थन मांगा हालाँकि, मारियानी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित मिश्रा के दौरान भाजपा प्रत्याशी रूपज्योति कुर्मी उपस्थित नहीं थे, फिर भी माझी ने आगामी चुनाव में जनता से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भाजपा की जीत से क्षेत्र में शांति और विकास की शांति बनी रहेगी। उन्होंने मारियानी की जनता से भाजपा उम्मीदवार को स्थिरता और प्रगति के लिए समर्थन देने की अपील की। यह भी पढ़ें: असम विधानसभा चुनाव 2026: ‘हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी के पास 3 पासपोर्ट कैसे?’ कांग्रेस पर भड़के असम के सीएम, कहा- 48 घंटे के अंदर… (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)ओडिशा(टी)मोहन चरण माझी(टी)हिमंता बिस्वा सरमा(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)पीएम मोदी(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)ओडिशा(टी)मोहन चरण माझी(टी)हिमंता बिस्वा सरमा(टी)भाजपा(टी)कांग्रेस(टी)पीएम मोदी
Haryana Congress MLAs Cross-Voting | Suspension Decision Likely

चंडीगढ़ में 3 अप्रैल को हरियाणा प्रदेश कांग्रेस की डिसिप्लिनरी कमेटी की मीटिंग हुई थी। इस कमेटी ने 4 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह को भेज दी। हरियाणा कांग्रेस की डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी (DAC) ने राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोट करने वाले पांचों विधायकों से जुड़ी अपनी रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह को सौंप दी है। DAC ने अपनी रिपोर्ट ई-मेल के जरिए भेजी। इसमें पांचों विधायकों को सस्प . अब हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह इस रिपोर्ट को पार्टी हाईकमान को भेजेंगे। उसके बाद आखिरी फैसला हाईकमान के लेवल से लिया जाएगा। अगर पार्टी इन विधायकों को सस्पेंड करती है तो उस सूरत में ये MLA आगे भी सदन के अंदर पार्टी व्हिप मानने को बाध्य होंगे। शुक्रवार को चंडीगढ़ में हुई DAC की मीटिंग में इस बात पर गंभीरता से चर्चा हुई थी कि पांचों विधायकों को ऐसी सजा दी जाए कि उन्हें फ्यूचर में सदन के अंदर व्यवहार करने की किसी तरह की खुली छूट न मिल पाए। कोशिश यही रखी जाए कि ये विधायक न इधर के रहें और न उधर के। और अंतत: खुद ही पार्टी छोड़ने को मजबूर हो जाएं। अब जानिए DAC की सवा घंटे चली की मीटिंग में क्या-क्या हुआ… सुबह 10 बजे दो विधायकों ने वॉट्सएप पर मांगा मौका: नारायणगढ़ विधायक शैली चौधरी और साढौरा विधायक रेनू बाला की ओर से अनुशासन समिति के चेयरमैन धर्मपाल मलिक को वॉट्सएप पर टाइप्ड लेटर भेजा गया। जिसमें कोई भी फैसला लेने से पहले व्यक्तिगत पेशी (पर्सनल हियरिंग) का मौका मांगा। जिसे स्वीकार कर लिया गया। 4 बजे दोनों विधायक पहुंचीं मीटिंग मेंः चंडीगढ़ में कांग्रेस मुख्यालय में अनुशासन समिति की बैठक शुरू होने का समय शाम 4 बजे निर्धारित था। उससे पहले ही शैली चौधरी और रेनू बाला वहां पहुंच गईं। रेनू ने मीडिया से बात किए बगैर अंदर चली गईं, जबकि शैली ने कहा कि उन्हें बुलाया गया था, इसलिए आईं। 10-10 मिनट दोनों को पक्ष रखने का मौका मिलाः दोनों विधायकों को कमेटी के साथ बात रखने के लिए 10-10 मिनट मिले। पहले रेनू बाला ने अपनी बात रखी। उन्होंने दोहराया कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को ही वोट दिया। उसके बाद शैली चौधरी अंदर गईं, उन्होंने भी यही बात कही। सूत्रों के मुताबिक एक विधायक ने कहा कि उन्होंने CLP भूपेंद्र सिंह हुड्डा को वोट दिखाया था, जबकि दूसरी ने कहा कि उन्होंने पार्टी प्रभारी बीके हरिप्रसाद को वोट दिखाया था। एक घंटा कमेटी सदस्यों ने आपस में चर्चा कीः दोनों विधायकों का पक्ष सुनने के बाद कमेटी ने करीब 1 घंटे तक आपस में चर्चा की। इस दौरान तीनों विधायकों के लिखित जवाबों को पढ़ा गया। सूत्रों के मुताबिक कमेटी इस बात पर एकमत है कि सख्त संदेश दिया जाए, लेकिन टेक्निकल पेचिदगियों पर भी चर्चा हुई। पुन्हाना विधायक मोहम्मद इलियास व हथीन विधायक मोहम्मद इजराइल के शोकॉज नोटिस का जवाब न देने पर प्राइमा-फेसिया माना गया कि उन्होंने क्रॉस वोटिंग की है। पार्टी से नहीं निकालेंगे, निलंबन का फैसला संभव पार्टी सूत्रों के मुताबिक क्रॉस वोटिंग के आरोपी विधायकों को लेकर 2 ही विकल्पों पर चर्चा हुई। निलंबित किया जाए या पार्टी से बाहर निकाला जाए। दोनों ही स्थितियों में MLA की विधानसभा सदस्यता पर खतरा नहीं होगा। निलंबन की स्थिति में पार्टी का व्हिप मान्य होगा, यानी उन्हें सदन में यदि कांग्रेस किसी मामले में व्हिप जारी करती है, तो इन विधायकों का मानना पड़ेगा। टेक्निकल आधार पर अयोग्य ठहराने का मौका देखेंगे कांग्रेस की मंशा है कि इन विधायकों को किसी तरह टेक्निकल आधार पर अयोग्य ठहराया जा सके। यदि पार्टी किसी बिल या प्रस्ताव के पक्ष या विपक्ष में वोट करने का व्हिप (अनिवार्य आदेश) जारी करती है और विधायक इसका उल्लंघन करते हैं तो एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत उन्हें अयोग्य ठहराया जा सकता है। ऐसे में उनका विधायक पद चला जाता है। कमेटी ने 4 नेताओं को भी नोटिस भेजा कमेटी ने 2024 विधानसभा चुनाव में पंचकूला से कांग्रेस उम्मीदवार चंद्रमोहन के खिलाफ काम करने और पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल रहने के आरोप में कांग्रेस नेता उपेंद्र वालिया, नरेश रावल, रविंद्र रावल और धनेंद्र वालिया को शोकॉज नोटिस जारी किया है। चारों नेताओं को 7 दिन में जवाब देने को कहा गया है। ————————— ये खबर भी पढ़ें :- कांग्रेस ने 2 विधायकों को क्रॉस वोटिंग का दोषी माना:डिसिप्लिनरी कमेटी अध्यक्ष बोले- 3 MLA ने अपना पक्ष रखा, आखिरी फैसला हाईकमान करेगा हरियाणा राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर शुक्रवार को चंडीगढ़ में कांग्रेस की डिसिप्लिनरी एक्शन कमेटी (DPC) की बैठक हुई। क्रॉस वोटिंग के आरोपों में घिरीं नारायणगढ़ विधायक शैली चौधरी और साढौरा विधायक रेनू बाला भी बैठक में पहुंचीं। पढ़ें पूरी खबर…
कांग्रेस बोली- किसान कल्याण नहीं किसान शोषण वर्ष मना रहे:खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा- पश्चिम एशिया में युद्ध के हालातों के बाद भी 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी करेंगे

बारदानों की कमी को लेकर कांग्रेस के हमले के बीच खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए इस वर्ष 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। उधर, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा है कि मोहन सरकार किसान शोषण वर्ष मना रही है और किसानों को सुविधा नहीं दे रही है। खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत ने कहा कि किसानों को इस वर्ष 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ ही 40 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है। उन्होंने बताया है कि इस वर्ष किसानों का पंजीकृत रकबा 41.58 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल से 6.65 लाख हेक्टेयर अधिक है। मंत्री राजपूत ने कहा कि किसानों को उपार्जन केंद्रों पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए उपार्जन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल 2026 से तथा शेष संभागों में 15 अप्रैल 2026 से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था। इस वर्ष वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य तय किया है। मंत्री राजपूत ने कहा कि पश्चिम एशिया में पिछले एक माह से युद्ध की स्थिति के कारण पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका थी, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की नियमित आपूर्ति की जा रही है, जिससे आमजन को किसी प्रकार की समस्या न हो। 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन मंत्री राजपूत ने कहा कि एलपीजी गैस की उपलब्धता बनाए रखने और औद्योगिक उपयोग में पेट्रोलियम पदार्थों की सीमाओं के कारण बारदानों की उपलब्धता में आई संभावित कठिनाइयों का भी समाधान कर लिया है। भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन किया है। साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए HDP/PP बैग और एक बार उपयोग होने वाले जूट बारदाने के उपयोग की अनुमति भी दी गई है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार लगातार बारदाना उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा कर राज्य सरकार को सहयोग प्रदान कर रही है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए आवश्यक बारदानों की व्यवस्था उपार्जन प्रारंभ होने से पूर्व पूरी कर ली जाएगी। मंत्री राजपूत ने बताया कि जिन जिलों में भंडारण क्षमता सीमित है, वहां संयुक्त भागीदारी योजना के तहत गोदाम की क्षमता के 120 प्रतिशत तक भंडारण की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। साथ ही केंद्र सरकार के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत मार्च-अप्रैल तथा मई-जून 2026 का खाद्यान्न एक साथ वितरित किया जाएगा, जिससे लगभग 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक अतिरिक्त भंडारण क्षमता उपलब्ध हो सकेगी। “किसान कल्याण वर्ष नहीं, किसान शोषण वर्ष”- पटवारी दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में “किसान कल्याण वर्ष” के नाम पर “किसान शोषण वर्ष” मनाया जा रहा है। प्रदेशभर में किसानों को खाद के लिए लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ा, जहां महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की हुई, लाठियां चलीं और कई बुजुर्गों की जान तक चली गई, जबकि सरकार लगातार खाद की कमी से इनकार करती रही। पटवारी ने कहा कि सरकार युद्ध का हवाला देकर गेहूं खरीदी में देरी कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि वर्ष 2026 में 10 करोड़ बारदाने की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार ने मात्र 2 करोड़ 60 लाख बारदाने का ही आवेदन किया। लगभग 7.5 करोड़ बारदाने की कमी सरकार की घोर लापरवाही को दर्शाती है। पटवारी ने कहा कि बारदाना (जूट बैग) की कमी को लेकर सरकार युद्ध का हवाला देकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि सच्चाई कुछ और है। उन्होंने कहा, यह कमी किसी युद्ध या बाहरी कारण से नहीं, बल्कि सरकार की अकर्मण्यता और लापरवाही का परिणाम है, जिसका खामियाजा प्रदेश के किसान भुगत रहे हैं। कांग्रेस करेगी मंडियों में प्रदर्शन पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा कि गेहूं खरीदी की तारीखें लगातार आगे बढ़ाई जा रही हैं। पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल और अब 10 अप्रैल, और आगे भी बढ़ने की संभावना है। इस कुप्रबंधन के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचनी पड़ी,लगभग 50 प्रतिशत किसान डिफाल्टर हो गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी किसानों के समर्थन में प्रदेशभर की मंडियों में प्रदर्शन करेगी। भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ता एक दिन के उपवास पर बैठेंगे और कृषि मंत्री के निवास के बाहर धरना देकर किसानों की आवाज बुलंद करेंगे।
कांग्रेस बोली- किसान कल्याण नहीं किसान शोषण वर्ष मना रहे:खाद्य मंत्री राजपूत ने कहा- पश्चिम एशिया में युद्ध के हालातों के बाद भी 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी करेंगे

बारदानों की कमी को लेकर कांग्रेस के हमले के बीच खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए इस वर्ष 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। उधर, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा है कि मोहन सरकार किसान शोषण वर्ष मना रही है और किसानों को सुविधा नहीं दे रही है। खाद्य मंत्री गोविंद राजपूत ने कहा कि किसानों को इस वर्ष 2585 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य के साथ ही 40 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है। उन्होंने बताया है कि इस वर्ष किसानों का पंजीकृत रकबा 41.58 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल से 6.65 लाख हेक्टेयर अधिक है। मंत्री राजपूत ने कहा कि किसानों को उपार्जन केंद्रों पर इंतजार न करना पड़े, इसके लिए उपार्जन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल 2026 से तथा शेष संभागों में 15 अप्रैल 2026 से समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन प्रारंभ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा था। इस वर्ष वैश्विक परिस्थितियों और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी चुनौतियों के बावजूद किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन का लक्ष्य तय किया है। मंत्री राजपूत ने कहा कि पश्चिम एशिया में पिछले एक माह से युद्ध की स्थिति के कारण पेट्रोल, डीजल, एलपीजी गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका थी, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की नियमित आपूर्ति की जा रही है, जिससे आमजन को किसी प्रकार की समस्या न हो। 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन मंत्री राजपूत ने कहा कि एलपीजी गैस की उपलब्धता बनाए रखने और औद्योगिक उपयोग में पेट्रोलियम पदार्थों की सीमाओं के कारण बारदानों की उपलब्धता में आई संभावित कठिनाइयों का भी समाधान कर लिया है। भारत सरकार ने मध्यप्रदेश को 50 हजार जूट की गठानों का अतिरिक्त आवंटन किया है। साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए HDP/PP बैग और एक बार उपयोग होने वाले जूट बारदाने के उपयोग की अनुमति भी दी गई है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार लगातार बारदाना उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा कर राज्य सरकार को सहयोग प्रदान कर रही है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए आवश्यक बारदानों की व्यवस्था उपार्जन प्रारंभ होने से पूर्व पूरी कर ली जाएगी। मंत्री राजपूत ने बताया कि जिन जिलों में भंडारण क्षमता सीमित है, वहां संयुक्त भागीदारी योजना के तहत गोदाम की क्षमता के 120 प्रतिशत तक भंडारण की व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। साथ ही केंद्र सरकार के निर्देशानुसार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत मार्च-अप्रैल तथा मई-जून 2026 का खाद्यान्न एक साथ वितरित किया जाएगा, जिससे लगभग 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक अतिरिक्त भंडारण क्षमता उपलब्ध हो सकेगी। “किसान कल्याण वर्ष नहीं, किसान शोषण वर्ष”- पटवारी दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में “किसान कल्याण वर्ष” के नाम पर “किसान शोषण वर्ष” मनाया जा रहा है। प्रदेशभर में किसानों को खाद के लिए लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ा, जहां महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की हुई, लाठियां चलीं और कई बुजुर्गों की जान तक चली गई, जबकि सरकार लगातार खाद की कमी से इनकार करती रही। पटवारी ने कहा कि सरकार युद्ध का हवाला देकर गेहूं खरीदी में देरी कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि वर्ष 2026 में 10 करोड़ बारदाने की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार ने मात्र 2 करोड़ 60 लाख बारदाने का ही आवेदन किया। लगभग 7.5 करोड़ बारदाने की कमी सरकार की घोर लापरवाही को दर्शाती है। पटवारी ने कहा कि बारदाना (जूट बैग) की कमी को लेकर सरकार युद्ध का हवाला देकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि सच्चाई कुछ और है। उन्होंने कहा, यह कमी किसी युद्ध या बाहरी कारण से नहीं, बल्कि सरकार की अकर्मण्यता और लापरवाही का परिणाम है, जिसका खामियाजा प्रदेश के किसान भुगत रहे हैं। कांग्रेस करेगी मंडियों में प्रदर्शन पीसीसी चीफ पटवारी ने कहा कि गेहूं खरीदी की तारीखें लगातार आगे बढ़ाई जा रही हैं। पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल और अब 10 अप्रैल, और आगे भी बढ़ने की संभावना है। इस कुप्रबंधन के कारण किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचनी पड़ी,लगभग 50 प्रतिशत किसान डिफाल्टर हो गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने घोषणा की कि कांग्रेस पार्टी किसानों के समर्थन में प्रदेशभर की मंडियों में प्रदर्शन करेगी। भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ता एक दिन के उपवास पर बैठेंगे और कृषि मंत्री के निवास के बाहर धरना देकर किसानों की आवाज बुलंद करेंगे।
असम चुनाव 2026: ‘डबल इंजन नहीं, डबल लूट और डबल धोखे की सरकार’, असम में नाकाम दंगल से पहले कांग्रेस का बीजेपी सरकार पर बड़ा आरोप

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित असम के जोरहाट में उग्रवादियों के बीच कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार (3 अप्रैल, 2026) को राज्य की सतारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर उग्र दबाव बनाया है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार को लेकर कहा कि यह सरकार डबल इंजन की नहीं, बल्कि डबल लूट और डबल धोखे की सरकार बनी है, जो जनता के विश्वास को पहुंचाती है। बीजेपी पर जनता की आवाज का आरोप बिहार के ज़ोराहाट स्थित कांग्रेस भवन में शुक्रवार (3 अप्रैल, 2026) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस प्रेस वार्ता में राजस्थान के पूर्व विधायक और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की राष्ट्रीय सचिव दिव्या मदेरणा ने राज्य की अंतिम स्थिति पर विस्तार से अपनी बात रखी। इस दौरान उनके साथ एआईसीसी के मीडिया को-ऑर्डिनेटर हरमीत बवेजा और जोरहाट मीडिया के सुपरस्टार त्रिशंकु शर्मा भी मौजूद रहे। प्रेस वार्ता को स्पष्ट करते हुए दिव्या मदेरणा ने असम के संकल्प को दोगुना करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सरकार डबल इंजन की नहीं, बल्कि डबल लूट और डबल धोखे की सरकार बनी है, जिसे जनता का विश्वास दिलाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि असम की करीब 3.5 करोड़ जनता की आवाज छीनी जा रही है। विशेष रूप से युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हैं, भविष्य का साथ दे रहे हैं। उन्होंने राज्य में मजबूत स्थिरता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार इसे समेकित करने के बजाय निजीकरण में लगी है। शासन व्यवस्था एवं विकास पर प्रश्न उन्होंने पिछले एक दशक से राज्य में बीजेपी सरकार के शासनकाल में पार्टी की हिस्सेदारी पर कहा कि असम का ढांचा कमजोर हो गया है और सरकार केवल जुमलेबाजी तक सीमित रह गई है. उनके अनुसार, राज्य में गुड कन्वेंशन की कमी है और विकास के सिद्धांतों के बजाय धार्मिक और राजनीतिक विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे वास्तविक उद्देश्यों को पीछे छोड़ दिया जा रहा है। सिंडिकेट राज और विकास स्टूडियो में गिरावट दिव्या मदेरणा ने आरोप लगाया कि असम में सिंडिकेट राज का कब्जा है, जहां क्षेत्र में कोयला, सुपारी और रेत जैसे अवैध नेटवर्क सक्रिय हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि असम के 23 वें स्थान पर पहुंच वाले राज्य की वास्तविक स्थिति का विवरण दिया गया है। आर्थिक संकट और भारी कर्ज राज्य की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि असम की इंडस्ट्री आईसीयू (इंटेसिव केयर यूनिट) में है। राज्य पर कर्ज़ का बोझ लगभग 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक नवजात बच्चे पर औसतन 57,000 रुपये का कर्ज है, जो सरकार की आर्थिक अर्थव्यवस्था की विफलता है। बेरोजगारी और सामाजिक संकट रोज़गार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में 21 लाख से अधिक युवा आबाद हैं, जबकि रोज़गार के अवसर बहुत सीमित हैं। उन्होंने युवाओं में बढ़ती आत्महत्या के मामलों पर भी चिंता जताई और इसे गंभीर सामाजिक संकट के बारे में बताया। शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव दिव्या मदेरणा ने आरोप लगाया कि असम में 8,000 से 9,000 सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इससे गरीब और ग्रामीण छात्र शिक्षा प्रभावित हो रहे हैं। इसके निजी दस्तावेजों का विखंडन बढ़ रहा है और शैक्षिक दस्तावेजों का चलन जारी है। स्वास्थ्य सेवाओं की अंतिम स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मियों में 97% तक मेडिकल स्टाफ की कमी है। साथ ही, मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति को दर्शाता है। चाय बागान की स्थिति उन्होंने कहा कि चाइ लेबल्स के लेबल 351 रुपये प्रतिदिन के होते हैं, लेकिन आज भी वे लगभग 250 रुपये ही मिल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चाय बागानों में 57% महिलाएँ विकलांग हैं, जो एक गंभीर सामाजिक समस्या है। प्रधानमंत्री के दौरे और मधुमेह समस्या पर प्रश्न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरों पर तंज कसते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ये केवल फोटो सत्र तक सीमित रह जाते हैं और ज़मीन पर स्तर की समस्याओं का समाधान नहीं होता। बाढ़ के मुद्दे पर उन्होंने सरकार के 2031 तक असम को बाढ़ मुक्त बनाने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या तब तक बाढ़ प्रभावित लोग इंतजार करना चाहेंगे? बदलाव की मांग और सुरक्षित असम का संकल्प कांग्रेस नेताओं ने कहा कि स्थिर सरकार ने असम के विकास और जनता के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने असम के अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और आने वाले समय में इसका स्पष्ट जवाब है। कांग्रेस पार्टी के इस बयान में कहा गया है कि असम की राजनीति में एक बार फिर विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे समर्थकों को केंद्र में लाया गया है। इससे आने वाले समय में राजनीतिक माहौल और गरमी की संभावना है। यह भी पढ़ें: असम विधानसभा चुनाव 2026: ‘कांग्रेस की सरकार आई तो घुसपैठिये भी आएंगे’, ग्वालपाड़ा में गृह मंत्री अमित शाह का तीखा वार (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)कांग्रेस(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)जोरहाट(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)बीजेपी(टी)गौरव गोगोई(टी)असम(टी)कांग्रेस(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)जोरहाट(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)भाजपा(टी)गौरव गोगोई







