इस बड़े राज्य में सिर्फ 8 डिविजनल स्ट्रेंथ पर बीजेपी हो सकती है, इस ओपिनियन पोल में इम्प्लांट स्ट्रक्चर है

चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर अब पूरी तैयारी हो चुकी है। जहां सभी की नजरें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव पर हैं वहीं दक्षिण राज्य केरल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर भी हर जगह चर्चा हो रही है। इन दो राज्यों में बीजेपी की संभावना की मात्रा यहां लेकर भी है। इसी बीच एक ओपिनियन पोल ने अनुमान लगाया कि केरल में बीजेपी की हालत बेहद खराब है। टीवी पर दिए गए मैट्रिज ओपिनियन पोल के अनुसार केरल में एलडीएफ को 62-68 एंट्री, यूडीएफ को 67-73 एंट्री, बीजेपी को 05-08 एंट्री और अन्य को 0-3 एंट्री पर भारत का अनुमान है। यानि साफ है बीजेपी अपने दम पर केरल में कोई बड़ा चमत्कार नहीं कर रही है। यह सर्वे कांग्रेस के नेतृत्व वाले यू एफ आई सी के लिए बेहद शानदार खबर लेकर आया है। गठबंधन में बहुमत मिलने की संभावना है. एलडीएफ पिछले करीब एक दशक से केरल में सरकार चला रही है। केरल चुनाव के लिए आज थमेगा सार्वजनिक प्रचार केरल में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान मंगलवार को कांग्रेस के बीच समाप्त होने जा रहा है, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कम्युनिस्ट डेमोक्रेटिक मोर्चा (एल एफसी) ने सोमवार को एक-दूसरे पर जोरदार हमले किए। एल एफईसी ने एक प्रोग्रेस रिपोर्ट जारी कर दावा किया है कि वह 2021 के अपने 97 प्रतिशत वादे पूरे कर रहे हैं। एक्टर्स कमीशन की ओर से उपलब्ध कराए गए कलाकारों के आंकड़े के अनुसार, 1.32 करोड़ पुरुष, 1.39 करोड़ महिलाएं और 273 तृतीय लिंग सहित कुल 2.71 करोड़ कलाकार और 2.42 लाख से अधिक मित्रतापूर्ण फ्रेंचाइजी का उपयोग करने के पात्र हैं। यह चुनाव 140 सीट के लिए मैदान में प्रवेश 890 उम्मीदवारों के भाग्य का निर्णय है। चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और भाजपा के बीच ”समझौते” का आरोप लगाया। उन्होंने वायनाड में इलिनोइस के आवास के लिए कांग्रेस द्वारा आयोजित राइस के कुप्रबंधन का आरोप लगाया। इन वाद्ययंत्रों को लेकर आश्रमों के बीच समझौता बयानबाजी हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के समर्थन में कई रैलियों और रोड शो किये। राज्य की राजनीति पर लंबे समय से कांग्रेस नीत डेमोक्रेटिक डेमोक्रेट (यू इफ़ेक्ट) और नीत एल इफ़ेक्ट का अर्थशास्त्र चल रहा है। इस महत्वपूर्ण चुनाव के लिए गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के शीर्ष राष्ट्रीय नेताओं और कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच सोमवार को राज्य में उल्टी गिनती शुरू हो गई। एफ़एलएफ़एल के प्रचार अभियान का नेतृत्व नेपोलियन के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री एवं पिनराई विजयन ने किया। शाह ने केरल के तटीय जिले अलाप्पुझा के हरिपद में राजग प्रतियोगी संदीप वाचस्पति के समर्थन में एक विशाल रोड शो किया। राहुल और प्रियंका ने कांग्रेस में त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम और कजाकिस्तान गठबंधन के समर्थन में अलग-अलग तरह की चुनावी सभाओं को निशाना बनाया और आरोप लगाया कि बीजेपी और समर्थकों के बीच नीट यू.एस. को समर्थन देने का आरोप लगाया गया है। इस बीच, परमाणु ऊर्जा निगमित एलएफसी ने शेयर बाजार में अपनी प्रगति रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दावा किया गया है कि 2021 में लगभग 97 प्रतिशत वादे पूरे कर दिए गए हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)केरल चुनाव 2026(टी)मैट्रिज ओपिनियन पोल(टी)कांग्रेस(टी)यूडीएफ(टी)एलडीएफ(टी)बीजेपी(टी)केरल चुनाव 2026(टी)मैट्रिज जनमत सर्वेक्षण(टी)कांग्रेस(टी)यू ब्लॉग
MP CM Mohan Yadav Compares NSG Commandos to Bajrangbali; Congress Leaders Statement baat khari hai

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। . सीएम ने एनएसजी कमाडो की तुलना बजरंगबली से की भोपाल में एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) ने अपना शौर्य और पराक्रम दिखाया। कमांडोज ने आतंकवादियों से मुकाबला करने की डेमो प्रस्तुति दी। इस दौरान उनके एक्शन को देखकर कार्यक्रम में मौजूद सीएम डॉ. मोहन यादव भी दंग रह गए। सीएम ने एनएसजी कमांडोज की तुलना भगवान बजरंगबली से कर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने ट्रेंड डॉग को ‘स्वान देवता’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कालभैरव के गणों ने भी कमाल कर दिया। सीएम ने कहा- हेलिकॉप्टर से कमांडोज ऐसे उतरे, जैसे हवा में उड़ते हुए बजरंगबली आ रहे हों। स्पाइडर मैन तो अब तक फिल्मों में ही देखा था, लेकिन यहां हमारे सामने कमांडोज ने उल्टा लटककर स्पाइडर मैन जैसा एहसास करा दिया। इतनी ऊंची बिल्डिंग से वे ऐसे उतर रहे थे, मानो टहलते हुए जा रहे हों। उन्होंने आगे कहा- हमारे ‘स्वान देवता’ ने भी गजब की ट्रेनिंग पाई है। कालभैरव के गण ने गजब कर दिया। उसने आतंकवादी पर हमला किया और उसकी बंदूक उठाकर ले गया। यह देखकर वाकई आनंद आ गया। सीएम ने जवानों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने निहत्थे होकर भी कई लोगों को जिस तरह उठाकर पटका, वह काबिल-ए-तारीफ है। कुल मिलाकर, कार्यक्रम में मौजूद हर कोई एनएसजी कमांडोज का शौर्य देखकर दंग रह गया। सीएम डॉ. मोहन यादव ने एनएसजी कमांडोज के शौर्य और पराक्रम की जमकर तारीफ की। सुर्खियों में ‘साफा’, एक-दूसरे के सीएम बनने की कामना हाल ही में सीएम डॉ. मोहन यादव का साफा बांधने का टैलेंट सामने आया था, जब एक मंच पर उन्होंने महज 50 सेकेंड में खुद ही अपने सिर पर साफा बांध लिया था। अब ऐसा ही टैलेंट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी दिखाया है। उन्होंने 30–35 सेकेंड में अपने सिर पर खुद ही साफा बांध लिया। हालांकि बाद में उन्होंने यह साफा उसी कार्यकर्ता को पहना दिया, जो उनके स्वागत के लिए साफा लेकर आया था। अब लोग चटकारे लेकर कह रहे हैं कि मुकाबला तगड़ा है। हालांकि कांग्रेस नेता कुछ और ही मानकर चल रहे हैं। दरअसल, हाल ही में हरदा में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और हरियाणा से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा साथ थे। वहां दोनों नेताओं ने बातों-बातों में एक-दूसरे को ‘मुखिया’ का साफा पहना दिया, यानी एक-दूसरे के मुख्यमंत्री बनने की कामना कर दी। हुआ यूं कि मंच पर दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने जीतू पटवारी की जमकर तारीफ की। उन्होंने हरियाणा को लेकर कहा कि आने वाले समय में ऐसा आशीर्वाद मिले कि वहां कांग्रेस की सरकार बने। इस पर जीतू पटवारी ने बीच में बात काटते हुए कहा- और दीपू भैया मुख्यमंत्री बनें। जीतू पटवारी के ऐसा कहने पर दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी चुप नहीं रहे। उन्होंने तुरंत कहा- जीतू भैया भी मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें। इस संवाद का वीडियो सामने आने के बाद लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि लगता है कांग्रेस का फोकस सरकार बनाने से ज्यादा इस बात पर है कि सीएम कौन बनेगा। वैसे भी अभी दोनों राज्यों में चुनाव काफी दूर हैं। हरियाणा से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा- जीतू पटवारी एमपी के सीएम बनें। ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाते ही खाने पर टूट पड़े लोग शिवपुरी में एक कार्यक्रम से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की जैसे ही रवानगी हुई, वहां मौजूद लोग खाने पर टूट पड़े। खाने की प्लेट लेने और उसमें खाना भरने की होड़ मच गई। इस दौरान धक्का-मुक्की भी देखने को मिली और माहौल अफरा-तफरी जैसा हो गया। दरअसल, शिवपुरी में आभार समारोह आयोजित किया गया था, जिसमें सिंधिया भी मौजूद थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद सभी मेहमानों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी। खुद सिंधिया ने लोगों को अपने हाथों से खाना परोसा। यहां तक सब कुछ व्यवस्थित रहा। लेकिन जैसे ही सिंधिया वहां से रवाना हुए, भोजन व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ गई। हालांकि कुछ देर बाद स्थिति सामान्य हो गई, लेकिन इस अव्यवस्था का वीडियो सामने आने के बाद कार्यक्रम की किरकिरी हो गई। अब लोग चटकारे लेते हुए कह रहे हैं कि जब पेट में चूहे कूद रहे हों, तो फिर कुछ और दिखाई नहीं देता। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम में उनके वहां से जाते ही लोग खाने पर टूट पड़े। एक तीर से दो निशाने: भाजपा और कलेक्टर को घेरा रतलाम में जनता के मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने नगर निगम का घेराव किया। लेकिन इस दौरान पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता पारस सकलेचा को भाजपा नेताओं की भी चिंता सताने लगी। उन्होंने भाजपा नेताओं के बहाने कलेक्टर मिशा सिंह पर जमकर निशाना साधा। पारस सकलेचा ने कहा कि अगर कांग्रेस की सरकार होती, तो 15 मिनट में कलेक्टर का ट्रांसफर करा देते। वहीं भाजपा नेताओं को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें इस स्थिति पर शर्म आनी चाहिए। दरअसल, हाल ही में जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके पति ने कलेक्ट्रेट में धरना दिया था। उनका आरोप था कि कलेक्टर ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया। वहीं, तीन दिन पहले भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय भी कलेक्टर के इंतजार में करीब आधे घंटे तक सीढ़ियों पर बैठे रहे थे। इन दोनों मामलों का जिक्र करते हुए सकलेचा ने कहा कि एक एससी वर्ग की जिला पंचायत अध्यक्ष चार घंटे तक कलेक्टर से मिलने के लिए बैठी रहीं, लेकिन कलेक्टर ने उसे देखा तक नहीं की। वहीं भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय को भी आधे घंटे तक इंतजार कराया गया। पूर्व विधायक ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा- तुम लोगों ने रतलाम की क्या हालत कर दी है। पहले जहां जनप्रतिनिधियों के लिए कलेक्टर खड़े हुआ करते थे, आज वहां मिलने तक नहीं आते। अब लोग कह रहे हैं कि कांग्रेस ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं- एक तरफ सत्ताधारी दल के नेताओं की स्थिति उजागर कर दी, तो दूसरी तरफ यह भी दिखा दिया कि प्रशासन किस तरह जनप्रतिनिधियों
Navjot Kaur Launches Bharatiya Rashtravadi Party Sidhus Wife Announces New Political Option

डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पार्टी की घोषणा की। – फाइल फोटो पूर्व क्रिकेटर व कांग्रेस के पूर्व पंजाब अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू ने नई पार्टी बना ली है। नवजोत कौर सिद्धू ने अपने X हैंडल पर पोस्ट करते हुए नई पार्टी की घोषणा की। . नवजोत कौर सिद्धू ने एक फोटो पोस्ट की है, जिसके बैकग्राउंड में नई पार्टी का नाम भारतीय राष्ट्रवादी पार्टी लिखा है। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि बहुप्रतीक्षित घोषणा। उसमें उन्होंने लिखा है- हमने राष्ट्रीय स्तर पर एक नए विकल्प का काम किया है, जिसमें हमने वर्तमान राजनीतिक नेताओं के प्रदर्शन मानकों का गहराई से अध्ययन और मूल्यांकन किया है। हम केवल अपने देश के लिए अपना जीवन समर्पित करना चाहते हैं और लोगों को वही देना चाहते हैं, जिसके वे वास्तव में हकदार हैं और हमसे अपेक्षा रखते हैं। डॉ. नवजोत कौर ने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट देर रात अपलोड की है। हालांकि, पार्टी की घोषणा करते वक्त उनके साथ उनके पति नवजोत सिंह सिद्धू नहीं दिख रहे। नवजोत कौर को पिछले साल कांग्रेस पार्टी से निकाला गया था। इसके बाद वह भाजपा से नजदीकियां बढ़ा रही थीं। नवजोत कौर सिद्धू ने सोशल मीडिया पर यह फोटो पोस्ट की है। नवजोत कौर ने पार्टी की घोषणा के लिए की गई पोस्ट में ये लिखा… एक जैसी सोच के लोगों को जोड़ा: नवजोत कौर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह एक दिव्य प्रेरणा है, जिसने कुछ समान सोच वाले लोगों को एक साथ जोड़ा है, जिनमें क्षमता, आत्मविश्वास, साहस और दृढ़ संकल्प है कि वे हर राज्य में एक समान लक्ष्य के साथ काम करें। न्याय, शांति और प्रेम के माध्यम से उच्च चेतना की ऊर्जा के साथ कार्य करते हुए वही प्रदान करें जो वाहेगुरु जी हमसे चाहते हैं। पंजाब को खोई हुई गरिमा वापस दिलाएंगे: डॉ नवजोत कौर ने पोस्ट में आगे लिखा कि हम पंजाब को उसकी खोई हुई गरिमा दिलाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे, ताकि वह फिर से एक स्वर्णिम राज्य बन सके। जहां लोग प्रेम, साझेदारी, न्याय, स्वतंत्रता के अधिकार और निःस्वार्थ सेवा के उद्देश्य के साथ आध्यात्मिक विकास की राह पर चलें और बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अपने लक्ष्य, मूल्यों और दृष्टिकोण को प्राप्त करें। जनता द्वारा चलने वाली सरकार देंगे: डॉ नवजोत कौर सिद्धू ने लिखा कि हम एक ऐसी सरकार देंगे जो जनता की हो, जनता के लिए हो और जनता द्वारा चलाई जाए। पंजाब के लोगों की सरकार होगी। सत्य और प्रेम के मार्ग पर चलते हुए, आध्यात्मिक गुरुओं की सहायता से लोगों के घायल मनों को ठीक किया जाएगा। भाजपा में जाने के लगाए जा रहे थे कयास डॉ. नवजोत कौर ने जब कांग्रेस में सीएम की कुर्सी 500 करोड़ में बिकने वाला आरोप लगाया तो उसके बाद पंजाब की राजनीति में उथल-पुथल मच गई। कांग्रेस के स्थानीय नेता से लेकर हाईकमान तक सब विपक्ष के निशाने पर आ गए। उसके बाद पार्टी ने सख्त रवैया दिखाते हुए नवजोत कौर को शोकॉज नोटिस जारी किया। पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखाती, उससे पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। कांग्रेस छोड़ने के बाद नवजोत कौर ने मोदी सरकार की तारीफ करनी शुरू की तो कयास लगाए जा रहे थे कि वह भाजपा में शामिल होंगी, लेकिन देर रात सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर पार्टी लॉन्च करके उन्होंने सभी को हैरत में डाल दिया। सिद्धू दंपती का कांग्रेस से यह है विवाद… कैप्टन को CM पद से हटाने पर विवाद हुआ: यह मामला 2021 में शुरू हुआ था, जब कांग्रेस ने नवजोत सिद्धू की लॉबिंग के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह को CM पद से हटा दिया। नया मुख्यमंत्री बनाने की बारी आई तो पहले सुनील जाखड़ (मौजूदा पंजाब भाजपा प्रधान) का नाम आया। कांग्रेस हाईकमान भी इसमें सहमत था। हालांकि, तब चर्चा चली कि पंजाब सिख स्टेट है और यहां किसी हिंदू को मुख्यमंत्री बनाना ठीक नहीं। इसके बाद जाखड़ का पत्ता कट गया। रंधावा का नाम आते ही सिद्धू अड़ गए: इसके बाद सुखजिंदर रंधावा का नाम फाइनल हो गया। उनके घर लड्डू बंट गए और ढोल भी बज गए। इससे नवजोत सिद्धू अड़ गए कि अगर किसी जट्ट सिख को बनाना है तो फिर मुझे मुख्यमंत्री बनाया जाए, अन्यथा किसी दलित चेहरे को बना दें। सिद्धू की नाराजगी देख अचानक चरणजीत चन्नी का नाम सामने किया गया और वह मुख्यमंत्री बना दिए गए। सिद्धू बोले- चन्नी CM चेहरा हैं तो वही सीटें जिताएं: इसके बाद सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस प्रधान होने के बावजूद 2022 के चुनाव में प्रचार नहीं किया। सिद्धू का कहना था कि चन्नी सीएम चेहरा हैं तो वही सीटें जिताएं। मगर, कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई। सिद्धू भी अमृतसर ईस्ट से चुनाव हार गए। इसके बाद सिद्धू ने एक्टिव पॉलिटिक्स से दूरी बना ली और टीवी व क्रिकेट में बिजी हो गए। 500 करोड़ की अटैची वाले बयान पर नवजोत कौर सस्पेंड: पिछले साल उनकी पत्नी नवजोत कौर चंडीगढ़ में गवर्नर से मिली, जहां सिद्धू को सीएम बनाने की बात आई तो उन्होंने कहा कि हमारे पास सीएम बनने के लिए 500 करोड़ की अटैची नहीं है। अगर कांग्रेस उन्हें सीएम चेहरा बनाए तो ही वह एक्टिव होंगे। इसके बाद कांग्रेस पर आरोप लगे कि वहां सीएम बनाने के लिए 500 करोड़ लेते हैं। नवजोत कौर यहीं नहीं रुकी, उन्होंने वड़िंग और रंधावा पर भी टिकट बेचने के आरोप लगा दिए। इसके बाद 8 दिसंबर को नवजोत कौर सिद्धू को सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में निकाल दिया। ॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… कांग्रेस ने सिद्धू की पत्नी को पार्टी से निकाला:नवजोत कौर ने लिखा- पप्पू ने अपने नाम पर मुहर लगाई; BJP ने मेरे टैलेंट को पहचाना पंजाब में पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को पार्टी से निकाल दिया गया है। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने इसकी जानकारी दी है। हालांकि इससे कुछ दिन पहले ही नवजोत कौर सिद्धू ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया था। पूरी खबर पढ़ें…
ओपिनियन पोल 2026: बंगाल, असम, तमिलनाडु से लेकर केरल तक… किसकी सरकार? सर्वे में हैरान करने वाले आंकड़े

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित जनमत सर्वेक्षण 2026: भारत के चार राज्यों- पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर विधानसभा चुनाव काफी तेज है। इस बीच उत्तर-पूर्वी राज्यों के ओपिनियन पोल आ गए हैं, जिसमें उत्तर-पूर्वी राज्यों में किस पार्टी या गठबंधन को बढ़त मिल रही है, यह साफ हो गया है। पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में चुनाव होने वाले हैं, जहां सीएम ममता बनर्जी की सत्तारूढ़ पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी (टीएमसी) का मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ है, वहीं 126 विधानसभा सीटों पर विपक्ष के खिलाफ असम में बीजेपी की कांग्रेस पार्टी विपक्षी मैदान में सामने है। तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करने के लिए केरल की 234 विधानसभा सीटों पर बीजेपी और एआईएडीएमके वाली एनडीए गठबंधन के साथ सीएम स्टालिन की पार्टी गठबंधन एलडीएफ, कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों के साथ यूडीएफ गठबंधन और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन मैदान में है। ओपिनियन पोल बंगाल में किसकी बन रही सरकार? मैट्रिज़ के ताज़ा ओपिनियन पोल के अनुसार, पश्चिम बंगाल की नागरिकता चुनाव से पहले ही मुकाबला काफी दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। ओपीनियन पोल में सामने आए आंकड़े सभी राजनीतिक आश्रमों की सांसे अटकाने वाली हैं। मैट्रिस के सर्वेक्षण के अनुसार, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में फूड डिपो कांग्रेस (टीएमसी) को 43 प्रतिशत वोट के साथ 140 से 160 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 41 प्रतिशत वोट के साथ 130 से 150 प्रतिशत पर जीत हासिल कर सकती है, जबकि राज्य की अन्य पार्टियां 16 प्रतिशत वोट के साथ राज्य में 8 से 16 प्रतिशत वोट हासिल कर सकती है। पश्चिम बंगाल में बहुमत का आंकड़ा 148 है। ऐसे में अपॉइंटमेंट के पास ओपिनियन पोल में 2 प्रतिशत की मामूली बढ़त जरूर है, लेकिन अंतर इतना कम है कि किसी भी समय विक्सित पिक्चर्स में बदलाव हो सकता है। ओपीनियन पोल में असम में बीजेपी को साफ करें मैत्रिज (मैट्रिज) और चाणक्य (चाणक्य) की ओर से किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, असम में होने वाले चुनाव में बीजेपी-नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन मजबूत स्थिति में है और उनकी संस्था सत्ता में आने या सत्ता बनाए रखने की संभावना ज्यादा दिख रही है। मैट्रिज के मुताबिक, वोट शेयर की बात करें तो बीजेपी+ गठबंधन को 46 फीसदी, कांग्रेस+ गठबंधन को 36 फीसदी और अन्य को 18 फीसदी वोट मिल सकते हैं. भाजपा+ गठबंधन को 92 से 102 पायदान, कांग्रेस+ गठबंधन को 22 से 32 पायदान और अन्य को 4 से 7 पायदान मिलने की संभावना है। वहीं, चाणक के सर्वे के मुताबिक, असम में जनता पार्टी का गठबंधन 83 से 90 सीट, कांग्रेस+ गठबंधन 30 से 36 सीट और अन्य को 3 से 6 सीट मिल सकती है। तमिल में एनडीए का चमकता सितारा हो सकता है इंडिया टीवी पर दिए गए मैट्रिज ओपिनियन पोल के मुताबिक, इस बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके नेतृत्व वाली एनडीए का सितारा चमक सकता है। ओपनियन पोल के मुताबिक, चुनाव में एमके स्टालिन की पार्टी टीचर्स को 102 से 115 बेस मिल सकते हैं। जबकि बीजेपी और एआईएडीएमके के एनडीए गठबंधन को 107 से 120 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं, अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय की तमिलगा वेत्री कजगम (टीवीके) को 5 से 12 तक प्रवेश मिल सकता है और अन्य के टिकट में एक से छह प्रवेश की संभावना है। केरल के तीन तरफा चर्च में कौन सी स्थितियाँ होंगी? इंडिया टीवी पर दिए गए MATRIZE ओपिनियन पोल के अनुसार, केरल में 62 से 68 प्रतिशत गठबंधन के साथ 68 प्रतिशत की भागीदारी वाले यूडीएफ गठबंधन की संभावना है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के 67 से 73 के नामांकन के साथ चुनावी नतीजे सामने आ रहे हैं। जबकि राज्य में भारतीय जनता पार्टी 15 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 5 से 8 प्रतिशत पर जीत हासिल कर सकती है और अन्य के मुकाबले शून्य से तीन प्रवेश की संभावना है। यह भी पढ़ेंः ‘ईडी, सीबीआई, एनआईए के बाद धार्मिक अधिकारी और अब सीआरपीएफ…’, बीजेपी, टीएमसी को ‘भड़काऊ भाईजान कमेटी’ पर ममता का बयान (टैग्सटूट्रांसलेट)ओपिनियन पोल 2026(टी)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)असम चुनाव 2026(टी)केरल(टी)तमिलनाडु(टी)मैट्रिज(टी)मैट्रिज ओपिनियन पोल(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल ओपिनियन पोल 2026(टी)बंगाल ओपिनियन पोल 2026(टी)बंगाल चुनाव ओपिनियन पोल(टी)ओपिनियन पोल 2026(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)ममता बनर्जी(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम ओपिनियन पोल 2026(टी)असम चुनाव ओपिनियन पोल 2026(टी)असम चुनाव ओपिनियन पोल(टी)ओपिनियन पोल 2026(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)एआईयूडीएफ(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026(टी)केरल विधानसभा चुनाव 2026(टी)ओपिनियन पोल 2026
MP Congress Leaders Out of New Committee Get Space in Bharat Krishak Samaj

खंडवा में ग्रामीण जिलाध्यक्ष लक्ष्मीचंद्र गुर्जर को बनाया गया। मध्यप्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक हलचल के बीच अब नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। पूर्व पीसीसी अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री रहे अरुण यादव ने भारत कृषक समाज के माध्यम से ऐसे नेताओं को मंच देना शुरू कर दिया है, जो हाल ही में कांग्रेस की टीम से बाहर हो गए . सोमवार को खरगोन जिले के बोरावा में आयोजित किसान गोष्ठी के दौरान 1956 में गठित हुए भारत कृषक समाज नाम के संगठन का विस्तार करते हुए कई अहम नियुक्तियां की गईं। खंडवा शहर इकाई के लिए अर्ष पाठक को शहर जिलाध्यक्ष बनाया गया, जबकि दक्षिण ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में विनोद यादव और उत्तर ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में इकबाल कुरैशी को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में मूंदी के किसान नेता लक्ष्मीचंद्र गुर्जर को खंडवा जिले का ग्रामीण जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया। सभी को नियुक्ति पत्र स्वयं अरुण यादव ने सौंपे। कार्यक्रम में अरूण यादव के भाई कसरावद विधायक सचिन यादव (पूर्व कृषि मंत्री) सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। नियुक्तियों के राजनीतिक मायने हाल ही में जीतू पटवारी की अगुवाई में कांग्रेस संगठन में हुए फेरबदल के बाद कई नेता सक्रिय भूमिका से बाहर हो गए थे। ऐसे में अरुण यादव द्वारा उन्हें भारत कृषक समाज में स्थान देना एक नई राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम न केवल संगठन विस्तार बल्कि असंतुष्ट नेताओं को साधने की कोशिश भी माना जा रहा है। किसानों पर फोकस, क्षेत्रीय समीकरण भी अरुण यादव ने कहा कि किसानों की आवाज को मजबूत करने के लिए संगठन का विस्तार जरूरी है। उन्होंने नए पदाधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं को उठाएं और संगठन को सक्रिय बनाएं। इधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्तियां सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत भी हो सकती है।
ओपिनियन पोल 2026 लाइव: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के लिए खतरे की आशंका, जानें असम में हिमंता का हाल, सर्वे में किसे देखें

विधानसभा चुनाव ओपिनियन पोल 2026 लाइव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (पश्चिम बंगाल चुनाव ओपिनियन पोल 2026) को लेकर साझीम के आओ ओपिनियन पोल (ओपिनियन पोल 2026) राज्य की पारंपरिक शास्त्रीय कांग्रेस को बड़ा झटका लग रहा है। बंगाल ओपिनियन पोल के मुताबिक बीजेपी को 130 से 150 फीसदी मिल सकती है तो वहीं दूसरी तरफ एनबीए को 140 से 160 फीसदी बढ़त मिल सकती है. 294 विधानसभा वाली को लेकर ये मैट्रिज़ ओपीनियन पोलकैंट का मुकाबला बता रहा है। (टैग्सटूट्रांसलेट)मैट्रिज(टी)मैट्रिज ओपिनियन पोल(टी)असम इलेक्शन 2026(टी)असम ओपिनियन पोल 2026(टी)असम इलेक्शन ओपिनियन पोल 2026(टी)असम इलेक्शन ओपिनियन पोल(टी)ओपिनियन पोल 2026(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)एआईयूडीएफ(टी)एबीपी ओपिनियन पोल(टी)हिमंता बिस्वा सरमा(टी)चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026
भिंड में बारिश-ओलावृष्टि का कहर, बिजली के खंभे टूटे:कांग्रेस ने मुआवजा और सर्वे की उठाई मांग, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

भिंड जिले में हाल ही में हुई ओलावृष्टि और तेज बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। गोहद, मौ, रौन, अटेर, मिहोना, लहार सहित भिंड के कई इलाकों में तैयार खड़ी गेहूं की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। इसको लेकर जिला कांग्रेस कमेटी भिंड शहर ने जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के नेतृत्व में प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर किसानों को शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग उठाई। ज्ञापन में बताया गया कि ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार उत्पादन में भारी गिरावट आई है, जिससे किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं। कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि फसलों का तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा प्रदान किया जाए। कई जगह बिजली के खंभे और लाइनें क्षतिग्रस्त इसके अलावा तेज आंधी-बारिश के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिरने से बिजली के खंभे और लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बाधित है। कांग्रेस ने इन्हें जल्द से जल्द दुरुस्त कराने की मांग भी उठाई। ज्ञापन में मालनपुर स्थित वन स्टॉप सेंटर में एक नाबालिग बालिका के साथ मारपीट कर उसे बाथरूम में बंद करने की घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं, प्राकृतिक आपदा के चलते कई स्थानों पर मकान गिरने से जनहानि हुई है और लोग घायल हुए हैं। कांग्रेस ने मृतकों के परिजनों और घायलों को शासन की ओर से उचित आर्थिक सहायता देने की मांग भी रखी। ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व विधानसभा प्रत्याशी डॉ. राधेश्याम शर्मा, वरिष्ठ नेता रामहर्ष सिंह कुशवाह, नगर कांग्रेस अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी, समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
तमिल इलेक्शन में नंबर गेम या 69 प्रतिशत नट? किसी दल ने भी क्यों नहीं निकाला ब्राह्मण प्रत्याशी, जानें वजह

तमिल की सूची में इस बार बड़ा उल्टेफेर देखने को मिल रहा है। आगामी चुनाव के मद्देनजर ना सिर्फ डीएमके और कांग्रेस बल्कि एआईएडीएमके और बीजेपी तक ने किसी भी ब्राह्मण को अपना हित नहीं बनाया है। करीब साढ़े तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ जब अन्नाद्रमुक ने किसी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। द्रविड़ आंदोलन का कितना प्रभावद्रविड़ आंदोलन के दक्षिण के इस राज्य में ब्राह्मण राजनीति ना सिर्फ हाशिए पर चली गई है बल्कि इस बार चुनावों में प्रमुख आश्रमों ने ब्राह्मणों को टिकटें बांटने से भी मना कर दिया है और ब्राह्मणों का समर्थन हासिल करने वाली बीजेपी ने भी पार्टी बना ली है। बीजेपी ने अपने कोटे की 27 विधानसभा सीटों में से किसी भी सीट पर ब्राह्मणों की प्रतिष्ठा घोषित नहीं की है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि ये सब तमिलनाडु में ये घटिया प्रतिभाएं का नतीजा है या फिर मजबूरी है। बता दें कि तमिल के 234 विधानमंडलों में भारतीय गठबंधन में डीएमके 164 और कांग्रेस 28 के प्राइमरी चुनावों में लड़ाई जारी है, लेकिन दोनों में से किसी ने भी ब्राह्मण को टिकट नहीं दिया। इसके अलावा उनके सहयोगी लेफ्ट, वीसीके और मुस्लिम लीग ने भी किसी ब्राह्मण पर भरोसा नहीं किया। विपक्षी गठबंधन में अन्नाद्रमुक 178 रिपब्लिकन उम्मीदवार 27 और अन्य 18 रिपब्लिकन उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं, लेकिन एक भी सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार को नहीं उतारा गया है। बिजनेसमैन की पार्टी ने भी बनाई दूरीदिलचस्प बात यह है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज से जुड़े हुए हैं, लेकिन उनके निधन के करीब 10 साल बाद भी उनकी पार्टी ने किसी भी ब्राह्मण को मैदान में नहीं उतारा। एआईएडीएमके ने 2021 में ब्राह्मण समाज से आने वाले पूर्व पुलिस गोदाम और नटराज को उम्मीदवार बनाया था, इस बार भी टिकट नहीं दिया गया। ब्राह्मणों ने टिकटें निकालींअभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कजगम (टीवीके) ने 2 ब्राह्मण दावेदारों को मैदान में उतारा। इसके अलावा तमिल राष्ट्रवादी नेता सीमान की पार्टी के नाम तमिलर दास ने 6 ब्राह्मणों के टिकट दिए हैं। इन दोनों ने ही मायलापुर और श्रीरंगम जैसे इलाक़ों को चुना है, जहाँ ब्राह्मण चर्च की संख्या सबसे ज़्यादा है। एनईटीके द्वारा 6 ब्राह्मणों को मैदान में पीछे के सिद्धांतों का कहना है कि सरटेन ने तमिलनाडु में पेरियार-विरोधी रुख अपनाया है। आरएसएस से जुड़े एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि वो द्रविड़ दीवार को गिराने का काम करेंगे। वे अपने राजनीतिक अनुसंधान में भी जाति और पहचान का फ्रैंक का उपयोग करते हैं। क्या कहते हैं राजनीतिक पंडितटाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक अरुण जेटली का कहना है कि अन्नाद्रमुक ने कई दशकों तक ब्राह्मण समाज का समर्थन किया, लेकिन हाल ही में इसमें बदलाव आया है। व्यापारियों के निधन के बाद ब्राह्मण ईसाइयों का गुट भाजपा के पक्ष में हुआ। इसके चलते एआईएडीएमके ने ही ब्राह्मणों से दूरी बना ली है, लेकिन बीजेपी के संयोजक बनने की वजह से लोग जरूर चिंतित हैं। ब्राह्मणों की सूचीतमिल की कुल सूची में ब्राह्मणों की दुकान मात्र 3 प्रतिशत है। वेबसाइटों की संख्या अधिक है। मुथुरैयर, थेवर, वन्नियार और गौंडर। कम संख्या में ब्राह्मणों को वोट बैंक के रूप में देखा नहीं गया। इसके अलावा राज्य में 69 प्रतिशत शून्य लागू है। विचारधारा ने अपनी राजनीति को ओबीसी और विचारधारा के उद्घोषणा के साथ जोड़ा- गिरफ़्तार है। द्रविड़ राजनीति में ब्राह्मणों को आर्य या बाहरी माना जाता है, जबकि गैर-ब्राह्मणों को मूल द्रविड़ माना जाता है। यही कारण है कि किसी भी ब्राह्मण नेता के लिए खुद को तमिल हितों की रक्षा साबित करना आपके लिए एक बड़ी चुनौती है। ये भी पढ़ें पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘बंगाल के लोगों को भूख लगती है मोदी सरकार’, केंद्र पर अभिषेक बनर्जी ने कहा- झूठ बोला तो दो मुझे जेल भेज दिया (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)तमिलनाडु चुनाव 2026(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)टीएन चुनाव 2026(टी)डीएमके(टी)कांग्रेस(टी)ब्राह्मण उम्मीदवार(टी)कांग्रेस(टी)बीजेपी(टी) डीएमके(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)ब्राह्मण(टी)प्रत्याशी(टी)द्रविड़
पहलवान बिस्वा शर्मा का बड़ा आरोप- ‘कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी के आधार पर मेरी पत्नी पर लगाया आरोप’

असम के मुख्यमंत्री हिमंत शर्मा विश्व ने अपने परिवार पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने मेरी पत्नी के खिलाफ आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया ग्रुप से मिली जानकारी का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा,” मेरी पत्नी के खिलाफ ग़रीब पति-पत्नी को लेकर कांग्रेस नेता पवन सह-लेखक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मेरी पत्नी के खिलाफ कांग्रेस के आरोप में असमंजस की स्थिति को प्रभावित करने के उद्देश्य से लगाए गए हैं, इसके लिए कॉलेज की सजा हो सकती है।” असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “…कोई भी 199 अमेरिकी डॉलर कंपनी का रजिस्ट्रेशन करा सकता है। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद उन्होंने रिंकी के नाम से एक और बनाई कंपनी…कांग्रेस ने सोशल मीडिया ग्रुप से प्राप्त पासपोर्ट और शेयरहोल्डिंग की स्थिति का इस्तेमाल किया। गौरव गोगोई ने भी एक सोशल मीडिया ग्रुप की मदद की। पाकिस्तान किस तरह असम चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, यह बहुत महत्वपूर्ण है।” #घड़ी | गुवाहाटी: असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कहते हैं, “…कोई भी 199 अमेरिकी डॉलर का भुगतान करके एक कंपनी पंजीकृत कर सकता है। कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, उन्होंने रिनिकी के नाम पर एक और कंपनी बनाई…कांग्रेस ने एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया से प्राप्त पासपोर्ट और दस्तावेजों की छवियों का इस्तेमाल किया… https://t.co/S5bBLdtBKn pic.twitter.com/zPQr9lJs0V – एएनआई (@ANI) 6 अप्रैल 2026 क्या है मामला असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन अलग-अलग पासपोर्ट कैसे हैं? उन्हें तीन पासपोर्ट रखने की क्या आवश्यकता है? क्या वे कोई अपराधी हैं? कांग्रेस के एक्स हैंडल पर पवन एसोसिएट का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा गया, ”असम की जनता पूछ रही है।” हिमंता बिस्वा सरमा की पूरी राजनीतिक छवि के खिलाफ अपमान पर आधारित है, लेकिन उनकी पत्नी दो मुस्लिम देशों के पासपोर्ट दर्ज हैं, कैसे? भारत के कानून के खाते से आप द्विपक्षीय नागरिकता नहीं रख सकते हैं, तो क्या रिंकी भू लाइसेंस सरमा भारत का पासपोर्ट भी रखता है? हिमंता बिस्वा सरमा, अमित शाह के दत्तक पुत्र क्या हैं? और किस देश के मठाधीश को ये जानकारी थी कि उनके दत्तक पुत्र की पत्नी के 3 पासपोर्ट हैं? अमित शाह का जवाब- वो एसआईटी सहायक इस मामले की जांच क्या करेगी?” (टैग्सटूट्रांसलेट)असम चुनाव 2026(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा शर्मा(टी)कांग्रेस(टी)असम चुनाव 2026(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा शर्मा(टी)कांग्रेस
Punjab Raghav Chaddha controversy; congress MP Gandhi Statement

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी (AAP) के झगड़े में कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी की एंट्री। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी (AAP) के झगड़े में पटियाला से कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी की भी एंट्री हो गई है। एक पॉडकास्ट के दौरान डॉ. गांधी ने कहा कि जब वह AAP से पटियाला के सांसद थे तो राघव चड्ढा ने उन्हें चिट्ठी देकर लोकसभा म . हालांकि उन्होंने राघव की लाई चिट्ठी फाड़कर उनके मुंह पर मार दी और गेटआउट कहकर पंजाब भवन से निकाल दिया। डॉक्टर गांधी ने एक निजी सोशल मीडिया चैनल से बात करते हुए ये बातें कहीं। वहीं राघव चड्ढा भी लगातार AAP को जवाब दे रहे हैं। 2 वीडियो जारी करने के बाद रविवार (5 अप्रैल) को उन्होंने पंजाब के लिए उठाए मुद्दों के बारे में बताते हुए लिखा कि यह छोटा सा ट्रेलर है, पूरी पिक्चर अभी बाकी है। AAP ने आरोप लगाया कि राघव ने BJP और PM नरेंद्र मोदी के खिलाफ किए सारे ट्वीट डिलीट कर दिए। राघव इससे पहले AAP को सैलाब बनकर आने और घातक होने की चेतावनी दे चुके हैं। कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने कहा कि मैंने चिट्ठी पकड़ी और फाड़कर राघव चड्ढा के मुंह पर मार दी। अब पढ़िए सांसद गांधी की 5 अहम बातें… राघव पंजाब भवन आया, मुझे चिट्ठी देकर कहा- ये बोलना है: पटियाला से कांग्रेस के लोकसभा सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने कहा- 2014 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर मेरा पहला लेक्चर था। राघव चड्ढा मेरे पास पंजाब भवन में आया। चिट्ठी लिखकर ले आए कि आपने कल बोलना है। मैंने कहा कि पता है कि मुझे बोलना है। राघव चड्ढा ने चिट्ठी देते हुए कहा कि आपको ये बोलना है। मैंने कहा- हू आर यू, मुझे पता क्या बोलना: डॉ. गांधी ने आगे कहा- मैंने कहा- हू आर यू, मुझे सब पता है। 1975 में जेल गया, 1970 से मैं इस लाइन में घूम रहा। 45 साल हो गए। मुझे नहीं पता कि क्या बोलना है। इस पर राघव चड्ढा ने कहा- आप नेशनल पार्टी के लीडर हो। नेशनल स्पोक्सपर्सन हो। LOP हो। मैंने कहा कि चिट्ठी पकड़ाओ, देखता हूं कि क्या बोलने को कह रहे। मैंने कहा- 4 में से तुम्हारी एक मांग बोलूंगा: डॉ. गांधी ने कहा- मैंने वह चिट्ठी देखी, उसमें चारों मुद्दे दिल्ली के थे। दिल्ली की बिजली और पानी का मुद्दा था। मैंने कहा कि बात सुन, मैं पहले बोलूंगा गाजा पट्टी पर, वहां बड़ा जुल्म हुआ। फिर मैं बदायूं रेप केस पर बोलूंगा। फिर पंजाब के कर्जे, नशे और खेती संकट पर बोलना है। इसके बाद 4 में से एक मांग तुम्हारी बोल दूंगा। मैंने चड्ढा को कहा– तुम बताने वाले कौन: डॉ. गांधी ने कहा- मेरे ये कहने पर राघव चड्ढा ने मुझे कहा, नहीं, नहीं, आपको सिर्फ यही बोलना है। मैंने पूछा कि तुम मुझे बताने वाले कौन हो। राघव ने कहा- आप पार्टी लीडर हो, आपको इंडियन पर्सपेक्टिव में ही बोलना होगा। मैंने कहा कि ये चिट्ठी तो दिल्ली पर्सपेक्टिव की है, इंडियन तो है ही नहीं। मैंने चिट्ठी पकड़कर फाड़ी, कहा-मुझसे बात मत करना: डॉ. गांधी ने आगे कहा- मैंने राघव को बताया कि जो मुद्दे मैं बता रहा हूं, वह इंटरनेशनल और इंडियन पर्सपेक्टिव के हैं। राघव ने कहा कि नहीं ये चिट्ठी लो। मैंने चिट्ठी पकड़ी और फाड़कर राघव चड्ढा के मुंह पर मार दी और गेटआउट कहते हुए बोला कि मुझसे बात मत करना। पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने दूसरा वीडियो जारी किया था। कहा- मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया झूठ भी सच लगने लगता। राघव चड्ढा के मामले में अब तक क्या–क्या हुआ AAP ने उपनेता पद से हटाया 2 अप्रैल को AAP ने राघव चड्ढा को AAP के राज्यसभा सांसदों के उपनेता पद से हटा दिया। इस बारे में राज्यसभा सेक्रेटरिएट को चिट्ठी दी गई, जिसमें यह भी कहा गया कि उन्हें पार्टी के कोटे से बोलने का टाइम न दिया जाए। AAP ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU), फगवाड़ा के वाइस चासंलर अशोक मित्तल को उपनेता बना दिया। राघव 2022 से पंजाब से AAP के राज्यसभा सांसद हैं। उनकी टर्म 2028 तक है। राघव चड्ढा ने कहा- खामोश कराया, हारा नहीं हूं इसके बाद 3 अप्रैल को राघव चड्ढा ने वीडियो जारी कर कहा- मैंने संसद में जनता के मुद्दे उठाए, क्या यह अपराध है। ये मुद्दे उठाने से आम आदमी का फायदा हुआ तो AAP का क्या नुकसान हुआ? जिन लोगों ने पार्लियामेंट में मेरे बोलने का अधिकार मुझसे छीन लिया, मुझे खामोश कर दिया, मैं उन्हें भी कुछ कहना चाहता हूं। मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना। मैं वो दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है। AAP नेता सामने आए, कहा- पार्टी लाइन से हटे राघव के वीडियो के सामने आते ही अनुराग ढांडा, सौरभ भारद्वाज, आतिशी मार्लेना, सीएम भगंवत मान जैसे कई AAP नेता सामने आए। उन्होंने कहा कि जब केजरीवाल अरेस्ट हुए तो राघव चड्ढा आंखों के ऑपरेशन की बात कह UK में थे। संसद में केंद्र सरकार और PM मोदी से सवाल नहीं पूछते, वह मोदी से डरते हैं। राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय समोसे के रेट जैसे छोटे मुद्दे उठाते हैं। पश्चिम बंगाल को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रस्ताव में साइन करने से राघव चड्ढा ने इनकार किया। पार्टी के वॉकआउट पर सदन से बाहर नहीं आए। राघव ने VIDEO जारी कर कहा- स्क्रिप्टेड कैंपेन चला रहे राघव ने 4 अप्रैल को दूसरा वीडियो जारी कर कहा- कल से मेरे खिलाफ एक स्क्रिप्टेड कैंपेन चलाया जा रहा है। वही भाषा, वही बातें, वही आरोप। यह कोई कोइंसिडेंस नहीं, बल्कि एक को-ऑर्डिनेटेड अटैक है। पहले मुझे लगा कि मुझे इसका जवाब नहीं देना चाहिए। फिर लगा कि एक झूठ को सौ बार बोला जाए तो कहीं लोग मान न लें। इसलिए, मैंने सोचा कि जवाब दूं। मैं संसद में शोर मचाने, चिल्लाने, माइक तोड़ने या गाली देने नहीं गया, बल्कि जनता के मुद्दे उठाने के लिए गया हूं। आखिर में घायल हूं, इसलिए घातक हूं कहते हुए AAP को चेतावनी दी। राघव चड्ढा बोले- ये तो ट्रेलर, पिक्चर अभी बाकी है









