Kangana Ranaut Statement on Naseeruddin Shah Controversy

4 मिनट पहले कॉपी लिंक नसीरुद्दीन शाह और कंगना ने किसी फिल्म में स्क्रीन शेयर नहीं की है। हालांकि, साल 2018 में दोनों ने ‘फिल्म कम्पैनियन’ के एक टॉक शो में एक-दूसरे के साथ बातचीत की थी। कंगना रनोट ने सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ कहने को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री का यह रवैया नया नहीं है। कंगना के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पर कई लोगों ने ‘घड़ियाली आंसू’ बहाए थे, लेकिन अब झारखंड में बच्चों के साथ कथित ज्यादती पर वही लोग चुप हैं। कंगना ने कहा, ‘जब संसद पर अटैक हो रहा था, मेरे कई सांसद दोस्तों की गाड़ियों पर लोग चढ़ गए थे और उनके शीशे तोड़ दिए गए थे। मेरे घर के बाहर भी करीब 2,500 लोग जमा थे। इतनी पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी कि रात को हम सो नहीं पाए। उस समय ये लोग घड़ियाली आंसू रो रहे थे, लेकिन अब जब झारखंड में बच्चों पर जुल्म हो रहे हैं, तो क्या वो Gen Z नहीं हैं?’ उन्होंने आगे कहा कि देश और प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने वालों को ही Gen Z मानना गलत है। कंगना बोलीं कि वह खुद युवा हैं, कामकाजी महिला हैं और करियर बनाने वाली महिला हैं। इसलिए उन्हें युवा-विरोधी बताना सही नहीं है। कंगना मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी की सांसद हैं। कंगना ने फिल्म इंडस्ट्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जंतर-मंतर के मुद्दे पर आंसू बहाने वालों को झारखंड में बच्चों के लिए भी आवाज उठानी चाहिए। नसीरुद्दीन शाह के वीडियो का जिक्र करते हुए कंगना ने कहा कि उन्होंने वीडियो में ऐसी बातें और धमकियां दी थीं, जिन्हें वह बेहद आपत्तिजनक मानती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश के निर्वाचित नेता हैं और लोकतंत्र की गरिमा के तहत उनके पद का सम्मान किया जाना चाहिए। कंगना ने कहा, इतनी गंदी-गंदी, इतनी भद्दी-भद्दी बातें और धमकाना, ‘देश से निकल जाओ’, ‘तुम्हें जला देंगे’, ‘तुम्हें मार देंगे’, यह क्या, कोई आपको लगता है, क्या यह सभ्य बातें हैं? पाकिस्तान प्रेम पर कंगना ने सवाल उठाया कंगना ने कहा, ‘और जब देखो, जो चाहे उनकी फिल्में हों, चाहे उनकी बातें हों, चाहे उनके इंटरव्यूज हों, यह पाकिस्तान की प्रेम कथा कब खत्म होगी? जब देखो पाकिस्तान के प्रेम में यह मरे रहते हैं। मैं जानना चाहती हूं कि अब बंटवारे को इतने साल बीत चुके हैं, फिर यह प्रेम कहानी खत्म क्यों नहीं हो रही है?’ उन्होंंने आगे कहा, ;जब इतने ज्यादा, चाहे वो पहलगाम अटैक हो, चाहे वो हमने ऑपरेशन सिंदूर किया हो, देश कहीं और जा रहा है, सेनाएं कहीं और जा रही हैं, नागरिकों का कहीं कुछ और संघर्ष हैं पड़ोसी देशों को लेकर, यह बॉलीवुड की लव स्टोरी पाकिस्तान के साथ खत्म कब होगी?’ नसीरुद्दीन शाह को लेकर कंगना ने क्या कहा था? दरअसल, नसीरुद्दीन शाह पर पीयूष मिश्रा के बयान पर रिएक्शन देते हुए कंगना रनोट ने मंगलवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा था, सच तो यह है कि हर कोई किसी न किसी का कुत्ता है, लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मैं जिस घर (देश) की रोटी खाती हूं, उसकी रखवाली करती हूं और उसके लिए लड़ती हूं। नसीर साहब खाते तो इस देश का हैं, लेकिन लड़ते पड़ोसी देश के लिए हैं। आज के समय में इंसानों के लिए कुत्ता कहलाना भी एक तारीफ है, क्योंकि वफादारी और क्यूटनेस अब बहुत दुर्लभ हो गई है। नसीरुद्दीन जैसे लोमड़ी बनने से तो कुत्ता बनना ही बेहतर है। कंगना की स्टोरी। क्या था नसीरुद्दीन शाह का बयान? दरअसल, दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर शुरुआत में सेलेब्स की चुप्पी पर बात करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने द वायर से बात करते हुए कहा था, ‘सेलेब्स तब बोलेंगे, जब उनका जमीर उनसे ऐसा करने को बोलेगा। एक कहावत है कि जिस कुत्ते के मुंह में हड्डी होती है, वो भौंक नहीं सकता। जैसे ही हड्डी उसके मुंह से गिरेगी या दांत टूटेंगे, तब वो भौंकेगा।’ …………. कंगना रनोट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ‘गटर जेनरेशन’ टिप्पणी मामले में अभिनेत्री कंगना की बढ़ी मुश्किल:आगरा कार्ट में परिवाद दर्ज, 21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई जंतर-मंतर पर पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं को लेकर कंगना रनोट की टिप्पणी अब आगरा कोर्ट पहुंच गई है। प्रदर्शनकारियों को ‘गटर जेनरेशन’ बताने और उनकी परवरिश पर सवाल उठाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में आगरा की स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए में परिवाद दाखिल किया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Kangana Ranaut Statement on Naseeruddin Shah Controversy

22 मिनट पहले कॉपी लिंक नसीरुद्दीन शाह और कंगना ने किसी फिल्म में स्क्रीन शेयर नहीं की है। हालांकि, साल 2018 में दोनों ने ‘फिल्म कम्पैनियन’ के एक टॉक शो में एक-दूसरे के साथ बातचीत की थी। कंगना रनोट ने सीनियर एक्टर नसीरुद्दीन शाह को ‘लोमड़ी’ कहने को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री का यह रवैया नया नहीं है। कंगना के मुताबिक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पर कई लोगों ने ‘घड़ियाली आंसू’ बहाए थे, लेकिन अब झारखंड में बच्चों के साथ कथित ज्यादती पर वही लोग चुप हैं। कंगना ने कहा, ‘जब संसद पर अटैक हो रहा था, मेरे कई सांसद दोस्तों की गाड़ियों पर लोग चढ़ गए थे और उनके शीशे तोड़ दिए गए थे। मेरे घर के बाहर भी करीब 2,500 लोग जमा थे। इतनी पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी कि रात को हम सो नहीं पाए। उस समय ये लोग घड़ियाली आंसू रो रहे थे, लेकिन अब जब झारखंड में बच्चों पर जुल्म हो रहे हैं, तो क्या वो Gen Z नहीं हैं?’ उन्होंने आगे कहा कि देश और प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने वालों को ही Gen Z मानना गलत है। कंगना बोलीं कि वह खुद युवा हैं, कामकाजी महिला हैं और करियर बनाने वाली महिला हैं। इसलिए उन्हें युवा-विरोधी बताना सही नहीं है। कंगना मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी की सांसद हैं। कंगना ने फिल्म इंडस्ट्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जंतर-मंतर के मुद्दे पर आंसू बहाने वालों को झारखंड में बच्चों के लिए भी आवाज उठानी चाहिए। नसीरुद्दीन शाह के वीडियो का जिक्र करते हुए कंगना ने कहा कि उन्होंने वीडियो में ऐसी बातें और धमकियां दी थीं, जिन्हें वह बेहद आपत्तिजनक मानती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश के निर्वाचित नेता हैं और लोकतंत्र की गरिमा के तहत उनके पद का सम्मान किया जाना चाहिए। कंगना ने कहा, इतनी गंदी-गंदी, इतनी भद्दी-भद्दी बातें और धमकाना, ‘देश से निकल जाओ’, ‘तुम्हें जला देंगे’, ‘तुम्हें मार देंगे’, यह क्या, कोई आपको लगता है, क्या यह सभ्य बातें हैं? पाकिस्तान प्रेम पर कंगना ने सवाल उठाया कंगना ने कहा, ‘और जब देखो, जो चाहे उनकी फिल्में हों, चाहे उनकी बातें हों, चाहे उनके इंटरव्यूज हों, यह पाकिस्तान की प्रेम कथा कब खत्म होगी? जब देखो पाकिस्तान के प्रेम में यह मरे रहते हैं। मैं जानना चाहती हूं कि अब बंटवारे को इतने साल बीत चुके हैं, फिर यह प्रेम कहानी खत्म क्यों नहीं हो रही है?’ उन्होंंने आगे कहा, ;जब इतने ज्यादा, चाहे वो पहलगाम अटैक हो, चाहे वो हमने ऑपरेशन सिंदूर किया हो, देश कहीं और जा रहा है, सेनाएं कहीं और जा रही हैं, नागरिकों का कहीं कुछ और संघर्ष हैं पड़ोसी देशों को लेकर, यह बॉलीवुड की लव स्टोरी पाकिस्तान के साथ खत्म कब होगी?’ नसीरुद्दीन शाह को लेकर कंगना ने क्या कहा था? दरअसल, नसीरुद्दीन शाह पर पीयूष मिश्रा के बयान पर रिएक्शन देते हुए कंगना रनोट ने मंगलवार को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा था, सच तो यह है कि हर कोई किसी न किसी का कुत्ता है, लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मैं जिस घर (देश) की रोटी खाती हूं, उसकी रखवाली करती हूं और उसके लिए लड़ती हूं। नसीर साहब खाते तो इस देश का हैं, लेकिन लड़ते पड़ोसी देश के लिए हैं। आज के समय में इंसानों के लिए कुत्ता कहलाना भी एक तारीफ है, क्योंकि वफादारी और क्यूटनेस अब बहुत दुर्लभ हो गई है। नसीरुद्दीन जैसे लोमड़ी बनने से तो कुत्ता बनना ही बेहतर है। कंगना की स्टोरी। क्या था नसीरुद्दीन शाह का बयान? दरअसल, दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर शुरुआत में सेलेब्स की चुप्पी पर बात करते हुए नसीरुद्दीन शाह ने द वायर से बात करते हुए कहा था, ‘सेलेब्स तब बोलेंगे, जब उनका जमीर उनसे ऐसा करने को बोलेगा। एक कहावत है कि जिस कुत्ते के मुंह में हड्डी होती है, वो भौंक नहीं सकता। जैसे ही हड्डी उसके मुंह से गिरेगी या दांत टूटेंगे, तब वो भौंकेगा।’ …………. कंगना रनोट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ‘गटर जेनरेशन’ टिप्पणी मामले में अभिनेत्री कंगना की बढ़ी मुश्किल:आगरा कार्ट में परिवाद दर्ज, 21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई जंतर-मंतर पर पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं को लेकर कंगना रनोट की टिप्पणी अब आगरा कोर्ट पहुंच गई है। प्रदर्शनकारियों को ‘गटर जेनरेशन’ बताने और उनकी परवरिश पर सवाल उठाने वाली सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में आगरा की स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए में परिवाद दाखिल किया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
JNU Controversy | Umar Khalid Book Event Cancelled & Campus Protest

Hindi News Career JNU Controversy | Umar Khalid Book Event Cancelled & Campus Protest 1 मिनट पहले कॉपी लिंक जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में 10 अगस्त 2026 को उमर खालिद की किताब फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज : आदिवासी हिस्ट्रीज एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर पर चर्चा के लिए कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम का आयोजन जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े छात्रों ने किया। इसमें कई शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं बुलाया गया। आखिरी वक्त पर जेएनयू प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए बुक किए गए SSS-1 ऑडिटोरियम की बुकिंग रद्द कर दी। प्रशासन का कहना था कि कार्यक्रम की पूरी जानकारी विश्वविद्यालय को नहीं दी गई और कुछ फैक्ट्स छिपाए गए। ऑडिटोरियम नहीं मिलने के बावजूद छात्र पीछे नहीं हटे। उन्होंने कैंपस में दूसरे स्थान पर चर्चा आयोजित करने का फैसला किया। बड़ी संख्या में छात्र वहां पहुंचे। JNUSU का कहना था कि किसी सभागार की बुकिंग रद्द होने से छात्रों के बीच होने वाली चर्चा और बातचीत को नहीं रोका जा सकता। इसके बाद छात्रसंघ ने कार्यक्रम के लिए दूसरी जगह चुनी। 10 अगस्त को दोपहर करीब 3 बजे SSS-2 भवन के बाहर चर्चा शुरू की गई। JNU ने अपने पक्ष में कहा कि प्रशासन के अनुसार, कार्यक्रम की अनुमति देने और उसे रद्द करने की कार्रवाई दोनों SSS के डीन की ओर से की गई। डीन की ओर से SSS के प्रोफेसर अविनाश कुमार को भी लेटर भेजकर कार्यक्रम रद्द किए जाने की जानकारी दी गई थी। विरोध करने वाले छात्रों ने नारे लगाए SSS-2 ऑडिटोरियम में चर्चा के दौरान नारेबाजी और विरोध हुआ जिससे कार्यक्रम कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक तरफ कार्यक्रम समर्थक छात्र मौजूद थे, वहीं दूसरी तरफ विरोध करने वाले छात्र भी नारे लगा रहे थे। कार्यक्रम में दिखी भारी भीड़ इस कार्यक्रम का आयोजन JNU छात्रसंघ (JNUSU) की ओर से किया गया। छात्रसंघ के मुताबिक यह चर्चा अंतरराष्ट्रीय विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर रखी गई। SSS – 2 ऑडिटोरियम में वक्ताओं के लिए कुर्सियों की व्यवस्था की गई। कार्यक्रम स्थल के बाहर उमर खालिद की किताब का स्टॉल भी लगाया गया। चर्चा में किताब के विषय, आदिवासी इतिहास और सत्ता के सवालों पर बात शुरू हुई। यह विवाद इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि उमर खालिद जेएनयू के पूर्व छात्र हैं और 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आरोपी हैं। वे फिलहाल जेल में हैं। उमर खालिद की यह किताब पीएचडी थीसिस पर आधारित है। इसमें झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र के आदिवासी समाज, उनके इतिहास और उस दौर में सत्ता-संबंधों का जिक्र किया गया है। ——————————————————— ये खबर भी पढ़ें IBPS क्लर्क की 11,409 भर्तियां:एमपी में पटवारी की 2106 वैकेंसी, देशभर में 20,593 नौकरियां; देखें हफ्ते की टॉप जॉब्स इस हफ्ते निकली हैं IBPS और राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम सहित कई विभागों में 20,593 पदों पर नौकरियां। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 6 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 6 ग्राफिक्स के जरिए जानिए। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Honey Singh Badshah Controversy | Rapper Stage Name Viral Video Update

6 मिनट पहले कॉपी लिंक रैपर बादशाह और यो यो हनी सिंह का पुराना विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। कॉमेडियन समय रैना के शो के दौरान समय ने बादशाह से उनके स्टेज नाम ‘बादशाह’ को लेकर सवाल किया। बादशाह ने जवाब दिया कि यह नाम उन्होंने खुद रखा है। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना वीडियो वायरल होने लगा, जिसमें वे इस नाम का क्रेडिट हनी सिंह को देते दिख रहे हैं। मामला तब बढ़ा जब हनी सिंह ने इस क्लिप पर कमेंट करते हुए बादशाह को ‘नालायक औलाद’ कह दिया। हनी सिंह और बादशाह साथ में कई गाने बना चुके हैं। समय रैना ने स्टेज नेम पर पूछा सवाल ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ के इस एपिसोड में बादशाह के साथ हर्ष लिम्बाचिया, सौरव जोशी और रजत सूद भी मौजूद थे। एक कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस के बाद समय रैना ने बादशाह से पूछा कि उन्हें यह स्टेज नाम किसने दिया। आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया यानी बादशाह ने कहा कि यह नाम उन्होंने खुद चुना है। इस बयान के तुरंत बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने बादशाह का एक पुराना इंटरव्यू खोज निकाला। उस वीडियो में बादशाह कह रहे थे, “यह नाम मुझे हनी सिंह पाजी ने दिया था। वे कहते थे कि तुम बादशाह की तरह रहते हो।” हनी सिंह ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो पुराना वीडियो सामने आने के बाद यो यो हनी सिंह ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट की स्टोरी पर समय और बादशाह की बातचीत का क्लिप शेयर किया। वीडियो शेयर करते हुए हनी सिंह ने लिखा “मेरी नालायक औलाद।” इसके साथ ही हनी सिंह ने एक अन्य पोस्ट में ‘मेरी गंदी औलाद’ लिखकर भी तंज कसा। इस कमेंट के बाद दोनों रैपर्स के बीच ‘माफिया मुंडीर’ के दिनों की पुरानी खींचतान दोबारा चर्चा में आ गई है। माफिया मुंडीर से शुरू हुआ था दोनों का विवाद बादशाह और हनी सिंह कभी एक साथ हिप-हॉप ग्रुप ‘माफिया मुंडीर’ का हिस्सा हुआ करते थे। ग्रुप टूटने के बाद से ही दोनों के बीच गानों के क्रेडिट को लेकर विवाद चला आ रहा है। दोनों कलाकार गानों के लेखन और कंपोजिशन पर अलग-अलग दावे करते हैं। विवाद की मुख्य वजह सुपरहिट गाना ‘ब्राउन रंग’ रहा है। बादशाह का दावा है कि इस गाने के बोल उन्होंने लिखे थे। दूसरी तरफ हनी सिंह का कहना है कि गाने का म्यूजिक और बीट्स उनकी अपनी थीं। इससे पहले जुलाई 2025 में भी बादशाह ने हनी सिंह की एक पोस्ट पर क्रेडिट्स को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। ये खबर भी पढ़ें हनी सिंह-बादशाह को अश्लील गाने पर हाई कोर्ट की फटकार:सभी जगह से हटाने के आदेश; कहा- अश्लीलता और महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को सिंगर हनी सिंह और बादशाह के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उनके करीब दो दशक पुराने विवादित गाने ‘माफिया मुंडीर’ वॉल्यूम 1 को इंटरनेट के सभी प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने इस गाने के बोल को ‘बेहद अश्लील’ और महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Honey Singh Badshah Controversy | Rapper Stage Name Viral Video Update

3 घंटे पहले कॉपी लिंक रैपर बादशाह और यो यो हनी सिंह का पुराना विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। कॉमेडियन समय रैना के शो के दौरान समय ने बादशाह से उनके स्टेज नाम ‘बादशाह’ को लेकर सवाल किया। बादशाह ने जवाब दिया कि यह नाम उन्होंने खुद रखा है। इसके बाद सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना वीडियो वायरल होने लगा, जिसमें वे इस नाम का क्रेडिट हनी सिंह को देते दिख रहे हैं। मामला तब बढ़ा जब हनी सिंह ने इस क्लिप पर कमेंट करते हुए बादशाह को ‘नालायक औलाद’ कह दिया। हनी सिंह और बादशाह साथ में कई गाने बना चुके हैं। समय रैना ने स्टेज नेम पर पूछा सवाल ‘इंडियाज गॉट लेटेंट 2’ के इस एपिसोड में बादशाह के साथ हर्ष लिम्बाचिया, सौरव जोशी और रजत सूद भी मौजूद थे। एक कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस के बाद समय रैना ने बादशाह से पूछा कि उन्हें यह स्टेज नाम किसने दिया। आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया यानी बादशाह ने कहा कि यह नाम उन्होंने खुद चुना है। इस बयान के तुरंत बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने बादशाह का एक पुराना इंटरव्यू खोज निकाला। उस वीडियो में बादशाह कह रहे थे, “यह नाम मुझे हनी सिंह पाजी ने दिया था। वे कहते थे कि तुम बादशाह की तरह रहते हो।” हनी सिंह ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो पुराना वीडियो सामने आने के बाद यो यो हनी सिंह ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट की स्टोरी पर समय और बादशाह की बातचीत का क्लिप शेयर किया। वीडियो शेयर करते हुए हनी सिंह ने लिखा “मेरी नालायक औलाद।” इसके साथ ही हनी सिंह ने एक अन्य पोस्ट में ‘मेरी गंदी औलाद’ लिखकर भी तंज कसा। इस कमेंट के बाद दोनों रैपर्स के बीच ‘माफिया मुंडीर’ के दिनों की पुरानी खींचतान दोबारा चर्चा में आ गई है। माफिया मुंडीर से शुरू हुआ था दोनों का विवाद बादशाह और हनी सिंह कभी एक साथ हिप-हॉप ग्रुप ‘माफिया मुंडीर’ का हिस्सा हुआ करते थे। ग्रुप टूटने के बाद से ही दोनों के बीच गानों के क्रेडिट को लेकर विवाद चला आ रहा है। दोनों कलाकार गानों के लेखन और कंपोजिशन पर अलग-अलग दावे करते हैं। विवाद की मुख्य वजह सुपरहिट गाना ‘ब्राउन रंग’ रहा है। बादशाह का दावा है कि इस गाने के बोल उन्होंने लिखे थे। दूसरी तरफ हनी सिंह का कहना है कि गाने का म्यूजिक और बीट्स उनकी अपनी थीं। इससे पहले जुलाई 2025 में भी बादशाह ने हनी सिंह की एक पोस्ट पर क्रेडिट्स को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। ये खबर भी पढ़ें हनी सिंह-बादशाह को अश्लील गाने पर हाई कोर्ट की फटकार:सभी जगह से हटाने के आदेश; कहा- अश्लीलता और महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को सिंगर हनी सिंह और बादशाह के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उनके करीब दो दशक पुराने विवादित गाने ‘माफिया मुंडीर’ वॉल्यूम 1 को इंटरनेट के सभी प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने इस गाने के बोल को ‘बेहद अश्लील’ और महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया है। पूरी खबर पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
CINTAA Controversy | Poonam Dhillon Slams Allegations & Resignation News

6 मिनट पहले कॉपी लिंक पूनम ढिल्लों मई 2024 से CINTAA की अध्यक्ष हैं। उन्हें साल 2024 से 2027 तक के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष चुना गया है। सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) की एग्जीक्यूटिव कमेटी के 8 सदस्यों ने अपने पदों और कमेटी से इस्तीफा दे दिया। इन सदस्यों ने आरोप लगाया है कि उन्हें संगठन की मौजूदा लीडरशिप पर कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने नए चुनाव कराने की मांग भी की है। इस विवाद के बीच, CINTAA की प्रेसिडेंट पूनम ढिल्लों ने अपने और वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे के खिलाफ लगे आरोपों को बहुत आपत्तिजनक बताया है। दरअसल, इस्तीफा देने वाले 8 निर्वाचित सदस्यों में हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा, हेतल परमार, पुनीत इस्सर, विंदू दारा सिंह, विकास वर्मा और दीपक पाराशर शामिल हैं। उनका आरोप है कि कार्यकारी समिति से सलाह या मंजूरी लिए बिना महत्वपूर्ण फैसले बार-बार किए गए। दरअसल, आठों सदस्यों ने संयुक्त इस्तीफा पत्र में आरोप लगाया कि एसोसिएशन का कामकाज पूनम, पद्मिनी और कुछ दूसरे सदस्यों तक सीमित होकर रह गया। उन्होंने सामूहिक फैसले, सलाह-मशवरे और संविधान के नियमों के बार-बार उल्लंघन की बात भी कही। इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने क्या आरोप लगाए टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस्तीफा पत्र के एक हिस्से में कथित तौर पर लिखा गया, अध्यक्ष पूनम ढिल्लों बार-बार एकतरफा फैसले लेती रही हैं। उन्होंने अपनी ID का इस्तेमाल करके सरकारी अधिकारियों को ऑफ़िशियल मैसेज भेजे हैं और CINTAA की ऑफ़िशियल ID का इस्तेमाल करके इंडस्ट्री ऑर्गनाइजेशन को भेजे गए मैसेज पर भी अकेले ही फैसला किया है। पत्र में आगे कहा गया, उन्होंने एग्जीक्यूटिव कमेटी की जानकारी, सलाह और मंजूरी के बिना, सरकार, क्वासी-ज्यूडिशियल और इंडस्ट्री बॉडीज के सामने और सबके सामने एसोसिएशन को रिप्रेजेंट किया। इससे कलेक्टिव रिस्पॉन्सिबिलिटी के प्रिंसिपल को कमजोर किया गया। CINTAA की महासचिव उपासना सिंह ने ANI से इस्तीफे की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि कुल 11 सदस्यों ने इस्तीफा दिया है, जिनमें कार्यकारी समिति के 8 सदस्य भी शामिल हैं। उपासना सिंह ने कहा था, उन्होंने अपनी शिकायतें भी दी हैं। उनका कहना है कि पद्मिनी कोल्हापुरी और पूनम ढिल्लों अपने पदों का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि, एसोसिएशन के कानूनी सलाहकार ने साफ किया कि कार्यकारी समिति भंग नहीं हुई है। पूनम बोलीं- मानहानि का केस कर सकते थे पूनम ढिल्लों ने अपने खिलाफ लगाए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने ANI से बात करते हुए कहा, बात यह थी कि चीजें उनके हिसाब से नहीं हो रही थीं। वे CAWT (सिने आर्टिस्ट्स वेलफेयर ट्रस्ट) के जरिए CINTAA सदस्यों पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर रहे थे। जब ऐसा नहीं हो पाया तो उन्होंने हमारे खिलाफ अजीब और गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। पूनम ने आरोपों की भाषा पर नाराजगी जताते हुए कहा, आप यकीन नहीं करेंगे कि आरोप कितने अश्लील थे। वे इतने आपत्तिजनक थे कि अगर हम चाहते तो इसमें शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई करने पर विचार कर सकते थे। ऐसे आरोप, दुख पहुंचाने वाले बयान और आपत्तिजनक भाषा बड़े स्तर पर फैलाई गई। पूनम ढिल्लों ने नूरी (1979), त्रिशूल (1978), सोनी महिवाल (1984) जैसी कई फिल्मों में काम किया है। पूनम ने बताया कि इस विवाद का उन पर इमोशनल असर पड़ा और उन्होंने कई बार कार्यकारी समिति से इस्तीफा देने के बारे में सोचा। उन्होंने कहा कि दो या तीन लोग, जिन्हें उन्होंने ‘पेड प्रवक्ता’ बताया, इसी तरह की बातें करते थे। उन्होंने कहा कि उनमें से एक या दो CINTAA के सदस्य भी थे। उन्होंने बहुत अनुचित और दुख पहुंचाने वाले बयान दिए। फिर भी हमने चुप रहना चुना। पूनम ने आत्मसम्मान को सबसे जरूरी बताया पूनम ने कहा कि मैं सिर्फ एक बात कहना चाहूंगी। मेरा आत्मसम्मान और ईमानदारी मेरे लिए बहुत जरूरी है। हमने जो कुछ वर्षों में कमाया है, वह एक-दो साल में नहीं कमाया। हमने अपने व्यवहार, गरिमा, मौजूदगी और लोगों के साथ व्यवहार व बातचीत के तरीके से दशकों में अपनी प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान बनाया है। हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक और इंटरव्यू में पूनम ने कहा कि वह और पद्मिनी CINTAA के लिए गुडविल बनाने के लिए अपने रिसोर्स और कनेक्शन का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका मकसद पर्सनल फायदा नहीं है। पूनम ने कहा कि संगठन के सदस्यों के लिए कुछ करने की पहल कोई और नहीं कर रहा था, इसलिए मैं उनके आरोपों से हैरान हूं। CAWT और कार्यक्रम से जुटाई रकम पर सफाई पूनम ने कहा कि इस्तीफा देने वाले सदस्य CAWT को बचाने की कोशिश कर रहे थे। यह ट्रस्ट दिवंगत दिलीप कुमार, अमरीश पुरी, अमजद खान और दूसरे वरिष्ठ कलाकारों ने बनाया था। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट ने सदस्यों को मेडिकल सुविधाएं देने की अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की है। पूनम के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों में मौजूदा समिति के किसी सदस्य ने CAWT के लिए रकम नहीं जुटाई। उन्होंने बताया कि हाल में एक कार्यक्रम के जरिए रकम जुटाई गई। कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाली कलाकार कविता कृष्णमूर्ति और मधुश्री को साड़ियां दी गईं, जबकि बिना फीस प्रस्तुति देने वाले नितिन मुकेश को कुर्ता दिया गया। पूनम ने कहा, इस्तीफा देने वाले सदस्य हम पर साड़ियां खरीदने का आरोप लगा रहे हैं। क्या हमने वे साड़ियां अपने लिए खरीदी थीं? हम यह मानते हैं कि इन कलाकारों ने बिना फीस हमारे लिए प्रस्तुति दी थी, इसलिए उन्हें ये उपहार दिए गए। पद्मिनी और मैंने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था और अपने अनुरोध पर उनसे प्रस्तुति करवाई थी। इन गायकों ने CINTAA के लिए मदद की। हमने इन परफॉर्मेंस से 1 करोड़ रुपए जुटाए। ऐसे में अगर हम कलाकारों के उपहारों पर 1 लाख रुपए खर्च करते हैं तो इसमें समस्या क्या है? ‘42 साल से इंडस्ट्री में हूं, क्या ऐसा विश्वासघात कर सकती हूं’ पूनम ने सवाल किया कि फिल्म इंडस्ट्री में दशकों तक काम करने के बाद क्या उन पर संगठन से विश्वासघात करने का आरोप लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, हम इस इंडस्ट्री में 42 साल से हैं। कुछ लोग 45 साल से और कुछ 48 साल से इसका हिस्सा हैं। क्या आपको सच में लगता है कि इतने वर्षों बाद हम
CINTAA Controversy | Poonam Dhillon Slams Allegations & Resignation News

9 मिनट पहले कॉपी लिंक पूनम ढिल्लों मई 2024 से CINTAA की अध्यक्ष हैं। उन्हें साल 2024 से 2027 तक के कार्यकाल के लिए अध्यक्ष चुना गया है। सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) की एग्जीक्यूटिव कमेटी के 8 सदस्यों ने हाल ही में अपने पदों और कमेटी से इस्तीफा दे दिया। इन सदस्यों ने आरोप लगाया है कि उन्हें संगठन की मौजूदा लीडरशिप पर कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने नए चुनाव कराने की मांग भी की। इस विवाद के बीच, CINTAA की प्रेसिडेंट पूनम ढिल्लों ने सोमवार को अपने और वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे के खिलाफ लगे आरोपों को बहुत आपत्तिजनक बताया। दरअसल, इस्तीफा देने वाले 8 निर्वाचित सदस्यों में हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा, हेतल परमार, पुनीत इस्सर, विंदू दारा सिंह, विकास वर्मा और दीपक पाराशर शामिल हैं। उनका आरोप है कि कार्यकारी समिति से सलाह या मंजूरी लिए बिना महत्वपूर्ण फैसले बार-बार किए गए। दरअसल, आठों सदस्यों ने संयुक्त इस्तीफा पत्र में आरोप लगाया कि एसोसिएशन का कामकाज पूनम, पद्मिनी और कुछ दूसरे सदस्यों तक सीमित होकर रह गया। उन्होंने सामूहिक फैसले, सलाह-मशवरे और संविधान के नियमों के बार-बार उल्लंघन की बात भी कही। इस्तीफा देने वाले सदस्यों ने क्या आरोप लगाए टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस्तीफा पत्र के एक हिस्से में कथित तौर पर लिखा गया, अध्यक्ष पूनम ढिल्लों बार-बार एकतरफा फैसले लेती रही हैं। उन्होंने अपनी ID का इस्तेमाल करके सरकारी अधिकारियों को ऑफिशियल मैसेज भेजे हैं और CINTAA की ऑफिशियल ID का इस्तेमाल करके इंडस्ट्री ऑर्गनाइजेशन को भेजे गए मैसेज पर भी अकेले ही फैसला किया है। पत्र में आगे कहा गया, उन्होंने एग्जीक्यूटिव कमेटी की जानकारी, सलाह और मंजूरी के बिना, सरकार, क्वासी-ज्यूडिशियल और इंडस्ट्री बॉडीज के सामने और सबके सामने एसोसिएशन को रिप्रेजेंट किया। इससे कलेक्टिव रिस्पॉन्सिबिलिटी के प्रिंसिपल को कमजोर किया गया। CINTAA की महासचिव उपासना सिंह ने ANI से इस्तीफे की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि कुल 11 सदस्यों ने इस्तीफा दिया है, जिनमें कार्यकारी समिति के 8 सदस्य भी शामिल हैं। उपासना सिंह ने कहा था, उन्होंने अपनी शिकायतें भी दी हैं। उनका कहना है कि पद्मिनी कोल्हापुरे और पूनम ढिल्लों अपने पदों का गलत इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि, एसोसिएशन के कानूनी सलाहकार ने साफ किया कि कार्यकारी समिति भंग नहीं हुई है। पूनम बोलीं- मानहानि का केस कर सकते थे पूनम ढिल्लों ने अपने खिलाफ लगाए आरोपों को खारिज किया। उन्होंने ANI से बात करते हुए कहा, बात यह थी कि चीजें उनके हिसाब से नहीं हो रही थीं। वे CAWT (सिने आर्टिस्ट्स वेलफेयर ट्रस्ट) के जरिए CINTAA सदस्यों पर नियंत्रण रखने की कोशिश कर रहे थे। जब ऐसा नहीं हो पाया तो उन्होंने हमारे खिलाफ अजीब और गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए। पूनम ने आरोपों की भाषा पर नाराजगी जताते हुए कहा, आप यकीन नहीं करेंगे कि आरोप कितने अश्लील थे। वे इतने आपत्तिजनक थे कि अगर हम चाहते तो इसमें शामिल हर व्यक्ति के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई करने पर विचार कर सकते थे। ऐसे आरोप, दुख पहुंचाने वाले बयान और आपत्तिजनक भाषा बड़े स्तर पर फैलाई गई। पूनम ढिल्लों ने नूरी (1979), त्रिशूल (1978), सोहनी महिवाल (1984) जैसी कई फिल्मों में काम किया है। पूनम ने बताया कि इस विवाद का उन पर इमोशनल असर पड़ा और उन्होंने कई बार कार्यकारी समिति से इस्तीफा देने के बारे में सोचा। उन्होंने कहा कि दो या तीन लोग, जिन्हें उन्होंने पेड प्रवक्ता बताया, इसी तरह की बातें करते थे। उन्होंने कहा कि उनमें से एक या दो CINTAA के सदस्य भी थे। उन्होंने बहुत अनुचित और दुख पहुंचाने वाले बयान दिए। फिर भी हमने चुप रहना चुना। पूनम ने आत्मसम्मान को सबसे जरूरी बताया पूनम ने कहा कि मैं सिर्फ एक बात कहना चाहूंगी। मेरा आत्मसम्मान और ईमानदारी मेरे लिए बहुत जरूरी है। हमने जो कुछ वर्षों में कमाया है, वह एक-दो साल में नहीं कमाया। हमने अपने व्यवहार, गरिमा, मौजूदगी और लोगों के साथ व्यवहार व बातचीत के तरीके से दशकों में अपनी प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान बनाया है। हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक और इंटरव्यू में पूनम ने कहा कि वह और पद्मिनी CINTAA के लिए गुडविल बनाने के लिए अपने रिसोर्स और कनेक्शन का इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसका मकसद पर्सनल फायदा नहीं है। पूनम ने कहा कि संगठन के सदस्यों के लिए कुछ करने की पहल कोई और नहीं कर रहा था, इसलिए मैं उनके आरोपों से हैरान हूं। CAWT और कार्यक्रम से जुटाई रकम पर सफाई पूनम ने कहा कि इस्तीफा देने वाले सदस्य CAWT को बचाने की कोशिश कर रहे थे। यह ट्रस्ट दिवंगत दिलीप कुमार, अमरीश पुरी, अमजद खान और दूसरे वरिष्ठ कलाकारों ने बनाया था। उन्होंने कहा कि इस ट्रस्ट ने सदस्यों को मेडिकल सुविधाएं देने की अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं की है। पूनम के मुताबिक, पिछले कुछ दशकों में मौजूदा समिति के किसी सदस्य ने CAWT के लिए रकम नहीं जुटाई। उन्होंने बताया कि हाल में एक कार्यक्रम के जरिए रकम जुटाई गई। कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाली कलाकार कविता कृष्णमूर्ति और मधुश्री को साड़ियां दी गईं, जबकि बिना फीस प्रस्तुति देने वाले नितिन मुकेश को कुर्ता दिया गया। पूनम ने कहा, इस्तीफा देने वाले सदस्य हम पर साड़ियां खरीदने का आरोप लगा रहे हैं। क्या हमने वे साड़ियां अपने लिए खरीदी थीं? हम यह मानते हैं कि इन कलाकारों ने बिना फीस हमारे लिए प्रस्तुति दी थी, इसलिए उन्हें ये उपहार दिए गए। पद्मिनी और मैंने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था और अपने अनुरोध पर उनसे प्रस्तुति करवाई थी। इन गायकों ने CINTAA के लिए मदद की। हमने इन परफॉर्मेंस से 1 करोड़ रुपए जुटाए। ऐसे में अगर हम कलाकारों के उपहारों पर 1 लाख रुपए खर्च करते हैं तो इसमें समस्या क्या है? ‘42 साल से इंडस्ट्री में हूं, क्या ऐसा विश्वासघात कर सकती हूं’ पूनम ने सवाल किया कि फिल्म इंडस्ट्री में दशकों तक काम करने के बाद क्या उन पर संगठन से विश्वासघात करने का आरोप लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, हम इस इंडस्ट्री में 42 साल से हैं। कुछ लोग 45 साल से और कुछ 48 साल से इसका हिस्सा हैं। क्या आपको सच में लगता है कि इतने
Dabur Moves Delhi High Court Against FSSAI Over 100% Claim Ban Controversy

Hindi News Business Dabur Moves Delhi High Court Against FSSAI Over 100% Claim Ban Controversy नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक एफएमसीजी कंपनी डाबर ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने FSSAI पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा कंपनी ने FSSAI पर कॉम्पिटिटर्स में शामिल अन्य मैन्युफैक्चरर्स के कॉमर्शियल हितों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। डाबर का दावा है कि प्रॉडक्ट्स पर 100% दावे के इस्तेमाल को तुरंत बैन करने के आदेश से उसकी 150 करोड़ रुपए की वैल्यू की इन्वेंट्री यानी माल नष्ट होने के जोखिम में आ गया था। 6 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में डाबर ने FSSAI के इस आदेश को बिना सोच-समझकर जारी किया गया और एकतरफा बताया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनी को राहत देते हुए FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगा दिया। कोर्ट ने माना कि ऐसा कोई भी निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। क्या है पूरा विवाद: 100% क्लेम पर बैन और FSSAI की कार्रवाई फूड रेगुलेटर FSSAI ने प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों और लेबल्स पर 100% प्योर, 100% नेचुरल या 100% ऑर्गेनिक जैसे दावों को भ्रामक माना है। FSSAI के अनुसार, इस तरह के दावे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवर्टाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशन, 2018 का उल्लंघन करते हैं। FSSAI ने तुरंत प्रभाव से 100% क्लेम वाले प्रॉडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगा दी थी और डाबर से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी थी। FSSAI का तर्क है कि ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से अन्य कंपनियों के प्रोडक्ट्स की छवि प्रभावित होती है। डाबर का तर्क: अन्य मैन्युफैक्चरर्स के बिजनेस इंटरेस्ट को बढ़ावा दे रहा FSSAI डाबर ने अपनी रिट याचिका में FSSAI के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि 100% क्लेम बिना किसी दूसरे मैन्युफैक्चरर का रेफरेंस दिए स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह पूरी इंडस्ट्री में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला शब्द है। कंपनी के अनुसार, यह स्पष्ट है कि यह बैन जनहित में जारी नहीं किया गया है, बल्कि अन्य मैन्युफैक्चरर के कॉमर्शियल हितों को साधने के लिए जारी किया गया। डाबर ने दावा किया कि FSSAI ने बिना किसी कारण बताओ नोटिस या सुधार का अवसर दिए ही सीधे बैन लगा दिया। ₹150 करोड़ का स्टॉक दांव पर, 11 फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स प्रभावित FSSAI की इस कार्रवाई से डाबर के 11 प्रमुख फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें डाबर हनी, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल और रियल एक्टिव कोकोनट वॉटर जैसे बड़े ब्रांड्स शामिल हैं। डाबर का आरोप है कि FSSAI ने लेबल्स की जांच किए बिना आदेश जारी किया है। कंपनी के अनुसार, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर कोल्ड प्रेस्ड सेसम ऑयल के लेबल पर कभी 100% का दावा लिखा ही नहीं गया था, फिर भी उन्हें बैन की लिस्ट में शामिल किया। इससे कंपनी की ₹150 करोड़ की इन्वेंट्री बर्बाद होने की कगार पर है। क्विक-कॉमर्स और होटलों से सप्लाई चेन पर असर FSSAI के इस आदेश को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जाने के बाद डाबर की रिटेल सप्लाई चेन अचानक प्रभावित हो गई। कई रिटेल और ऑनलाइन चैनल्स को कंपनी के 100% क्लेम वाले प्रॉडक्ट्स न बेचने की सलाह दी गई। 4 अगस्त को जोमैटो के क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट ने डाबर को अल्टीमेटम जारी करते हुए उसके प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग को तुरंत डिसेबल कर दिया। ब्लिंकिट ने ईमेल में स्पष्ट किया कि इस मामले से पैदा होने वाली किसी भी कानूनी या वित्तीय देनदारी के लिए वह जिम्मेदार नहीं होगा। वहीं हॉस्पिटैलिटी ब्रांड हिल्टन होटल्स ने भी विवाद सुलझने तक प्रभावित प्रोडक्ट्स को अपनी सप्लाई से बाहर करने का प्रस्ताव रखा। कंपनी पहले ही कर रही थी लेबल्स में बदलाव डाबर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह FSSAI के लेटर में बताए गए प्रोडक्ट्स के लेबल्स से 100% क्लेम हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी थी। कंपनी के पिछले हफ्ते जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आदेश में मेंशन ज्यादातर प्रोडक्ट्स के लेबल्स, विज्ञापनों और वेबसाइट रेफरेंस को बिना 100% क्लेम वाले नए लेबल्स में बदल दिया गया है या बदलने की फाइनल प्रोसेस में हैं। FSSAI का बड़ा क्रैकडाउन और आगे का रास्ता FSSAI हाल के दिनों में एफएमसीजी कंपनियों के भ्रामक विज्ञापनों, आर्टिफिशियल इंग्रीडिएंट्स के इस्तेमाल और हाइजीन से जुड़े मामलों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। रेगुलेटर ने प्रोसेस्ड फूड्स पर बिना किसी सॉलिड वेरिफिकेशन के इस्तेमाल किए जाने वाले मार्केटिंग शब्दों पर रोक लगाई है। फिलहाल FSSAI ने इस कानूनी मामले और डाबर के आरोपों पर तुरंत कोई आधिकारिक जवाब या प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। दिल्ली हाईकोर्ट की दी गई 24 अगस्त तक की राहत के बाद अब सभी की निगाहें अगली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या कहता है FSSAI का ‘क्लेम्स रेगुलेशन’? शो-कॉज नोटिस अनिवार्य: खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अगर FSSAI को किसी प्रोडक्ट के विज्ञापन या क्लेम पर आपत्ति होती है, तो पहले फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) को स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस देना होता है। सिंगल बनाम मल्टी-इन्ग्रीडिएंट: FSSAI का मानना है कि प्रोसेस्ड या मल्टी-इन्ग्रीडिएंट फूड में ‘100% Pure’ लिखना गलत है, जबकि कंपनियां तर्क देती हैं कि शहद या शुद्ध नारियल पानी जैसे प्राकृतिक प्रोडक्ट्स में यह दावा जायज है। ये खबर भी पढ़ें… डाबर के ‘100% प्योर’ दावे वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे; डाबर हनी-घी बिकते रहेंगे दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI का बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Dabur Moves Delhi High Court Against FSSAI Over 100% Claim Ban Controversy

Hindi News Business Dabur Moves Delhi High Court Against FSSAI Over 100% Claim Ban Controversy नई दिल्ली50 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को राहत देते हुए FSSAI के बैन के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगा दिया। एफएमसीजी कंपनी डाबर ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने FSSAI पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा कंपनी ने FSSAI पर कॉम्पिटिटर्स में शामिल अन्य मैन्युफैक्चरर्स के कॉमर्शियल हितों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। डाबर का दावा है कि प्रोडक्ट्स पर 100% दावे के इस्तेमाल को तुरंत बैन करने के आदेश से उसकी 150 करोड़ रुपए की वैल्यू की इन्वेंट्री यानी माल नष्ट होने के जोखिम में आ गया था। 6 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में डाबर ने FSSAI के इस आदेश को बिना सोच-समझकर जारी किया गया और एकतरफा बताया है। हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगाया याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनी को राहत देते हुए FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगा दिया। कोर्ट ने माना कि ऐसा कोई भी निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। क्या है पूरा विवाद: 100% क्लेम पर बैन और FSSAI की कार्रवाई फूड रेगुलेटर FSSAI ने प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों और लेबल्स पर 100% प्योर, 100% नेचुरल या 100% ऑर्गेनिक जैसे दावों को भ्रामक माना है। FSSAI के अनुसार, इस तरह के दावे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवर्टाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशन, 2018 का उल्लंघन करते हैं। FSSAI ने तुरंत प्रभाव से 100% क्लेम वाले प्रॉडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगा दी थी और डाबर से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी थी। FSSAI का तर्क है कि ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से अन्य कंपनियों के प्रोडक्ट्स की छवि प्रभावित होती है। डाबर का तर्क: अन्य मैन्युफैक्चरर्स के बिजनेस इंटरेस्ट को बढ़ावा दे रहा FSSAI डाबर ने अपनी रिट याचिका में FSSAI के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि 100% क्लेम बिना किसी दूसरे मैन्युफैक्चरर का रेफरेंस दिए स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह पूरी इंडस्ट्री में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला शब्द है। कंपनी के अनुसार, यह स्पष्ट है कि यह बैन जनहित में जारी नहीं किया गया है, बल्कि अन्य मैन्युफैक्चरर के कॉमर्शियल हितों को साधने के लिए जारी किया गया। डाबर ने दावा किया कि FSSAI ने बिना किसी कारण बताओ नोटिस या सुधार का अवसर दिए ही सीधे बैन लगा दिया। ₹150 करोड़ का स्टॉक दांव पर, 11 फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स प्रभावित FSSAI की इस कार्रवाई से डाबर के 11 प्रमुख फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें डाबर हनी, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल और रियल एक्टिव कोकोनट वॉटर जैसे बड़े ब्रांड्स शामिल हैं। डाबर का आरोप है कि FSSAI ने लेबल्स की जांच किए बिना आदेश जारी किया है। कंपनी के अनुसार, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर कोल्ड प्रेस्ड सेसम ऑयल के लेबल पर कभी 100% का दावा लिखा ही नहीं गया था, फिर भी उन्हें बैन की लिस्ट में शामिल किया। इससे कंपनी की ₹150 करोड़ की इन्वेंट्री बर्बाद होने की कगार पर है। क्विक-कॉमर्स और होटलों से सप्लाई चेन पर असर FSSAI के इस आदेश को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जाने के बाद डाबर की रिटेल सप्लाई चेन अचानक प्रभावित हो गई। कई रिटेल और ऑनलाइन चैनल्स को कंपनी के 100% क्लेम वाले प्रॉडक्ट्स न बेचने की सलाह दी गई। 4 अगस्त को जोमैटो के क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट ने डाबर को अल्टीमेटम जारी करते हुए उसके प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग को तुरंत डिसेबल कर दिया। ब्लिंकिट ने ईमेल में स्पष्ट किया कि इस मामले से पैदा होने वाली किसी भी कानूनी या वित्तीय देनदारी के लिए वह जिम्मेदार नहीं होगा। वहीं हॉस्पिटैलिटी ब्रांड हिल्टन होटल्स ने भी विवाद सुलझने तक प्रभावित प्रोडक्ट्स को अपनी सप्लाई से बाहर करने का प्रस्ताव रखा। कंपनी पहले ही कर रही थी लेबल्स में बदलाव डाबर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह FSSAI के लेटर में बताए गए प्रोडक्ट्स के लेबल्स से 100% क्लेम हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी थी। कंपनी के पिछले हफ्ते जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आदेश में मेंशन ज्यादातर प्रोडक्ट्स के लेबल्स, विज्ञापनों और वेबसाइट रेफरेंस को बिना 100% क्लेम वाले नए लेबल्स में बदल दिया गया है या बदलने की फाइनल प्रोसेस में हैं। FSSAI का बड़ा क्रैकडाउन और आगे का रास्ता FSSAI कुछ दिनों से एफएमसीजी कंपनियों के भ्रामक विज्ञापनों, आर्टिफिशियल इंग्रीडिएंट्स के इस्तेमाल और हाइजीन से जुड़े मामलों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। रेगुलेटर ने प्रोसेस्ड फूड्स पर बिना किसी सॉलिड वेरिफिकेशन के इस्तेमाल किए जाने वाले मार्केटिंग शब्दों पर रोक लगाई है। फिलहाल FSSAI ने इस कानूनी मामले और डाबर के आरोपों पर तुरंत कोई आधिकारिक जवाब या प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। दिल्ली हाईकोर्ट की दी गई 24 अगस्त तक की राहत के बाद अब सभी की निगाहें अगली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या कहता है FSSAI का ‘क्लेम्स रेगुलेशन’? शो-कॉज नोटिस अनिवार्य: खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अगर FSSAI को किसी प्रोडक्ट के विज्ञापन या क्लेम पर आपत्ति होती है, तो पहले फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) को स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस देना होता है। सिंगल बनाम मल्टी-इन्ग्रीडिएंट: FSSAI का मानना है कि प्रोसेस्ड या मल्टी-इन्ग्रीडिएंट फूड में ‘100% Pure’ लिखना गलत है, जबकि कंपनियां तर्क देती हैं कि शहद या शुद्ध नारियल पानी जैसे प्राकृतिक प्रोडक्ट्स में यह दावा जायज है। ये खबर भी पढ़ें… डाबर के ‘100% प्योर’ दावे वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे; डाबर हनी-घी बिकते रहेंगे दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI
Preity Zinta Reacts To Aamir Khan Controversy

5 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रीति की आखिरी रिलीज फिल्म ‘भैयाजी सुपरहिट’ 2018 में आई थी। प्रीति जिंटा ने फिल्म ‘बटवारा 1947’ के प्रमोशन के दौरान आमिर खान को नजरअंदाज करने के दावों को खारिज किया। प्रीति ने पोस्ट को ‘क्लिकबेट कंटेंट’ बताया और कहा कि उन्होंने उस समय आमिर को देखा ही नहीं था। दरअसल, एक पैपराजी अकाउंट ने फिल्म के प्रमोशनल इवेंट का वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में प्रीति अपनी वैनिटी वैन से बाहर निकलकर फोटोग्राफर्स से पूछती दिखीं, ‘एक मिनट, गाइज, कहां जाना है?’ प्रीति लगभग 8 साल के बाद आमिर खान द्वारा निर्मित फिल्म ‘बंटवारा 1947’ से बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। फोटोग्राफर्स के दिशा बताने के बाद प्रीति दूसरी तरफ चली गईं। आमिर अपनी वैनिटी वैन के पास खड़े थे, लेकिन प्रीति ने उनकी ओर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद एक पैपराजी पेज ने वीडियो के साथ कैप्शन लिखा, ‘ओह नो, प्रीति जिंटा ने आमिर खान को नजरअंदाज किया?’ दावे वाली पोस्ट। यूजर्स ने दोनों के बीच अनबन की अटकलें लगाईं वीडियो के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने दोनों एक्टर्स के बीच किसी विवाद या असहज रिश्ते को लेकर अटकलें लगानी शुरू कर दीं। प्रीति ने बाद में इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए वीडियो को पेश करने के तरीके की आलोचना की। उन्होंने लिखा, ‘इस तरह का क्लिकबेट कंटेंट ठीक नहीं है। मैंने आमिर को नहीं देखा, क्योंकि मैं अंदर कुछ शॉट्स शूट करने की जल्दी में थी और फिर ‘बंटवारा 1947’ के प्रमोशन के लिए फ्लाइट पकड़नी थी।’ प्रीति की पोस्ट। प्रीति ने आगे लिखा, ‘अगली बार, अगर आपका इरादा किसी भी तरह की नेगेटिविटी को बढ़ावा देना है, तो मुझसे यह उम्मीद न करें कि मैं रुककर तस्वीरें खिंचवाऊंगी। आमिर के लिए मेरे मन में बहुत प्यार और सम्मान है, इसलिए यह पोस्ट अच्छी बात नहीं है।’ बता दें कि प्रीति जिंटा जल्द अपकमिंगम फिल्म ‘बंटवारा 1947’ में नजर आएंगे। फिल्म में सनी देओल, करण देओल, शबाना आजमी, अली फजल और अभिमन्यु सिंह भी हैं। फिल्म के डायरेक्टर राजकुमार संतोषी हैं और इसके प्रोड्यूसर आमिर खान (आमिर खान प्रोडक्शंस) तथा अपर्णा पुरोहित हैं। फिल्म बंटवारा 1947 का पोस्टर। फिल्म भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म की कहानी हिंसा, विस्थापन और पारिवारिक संघर्ष से जूझ रहे एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। ‘बंटवारा 1947’ 14 अगस्त 2026 को रिलीज होगी। ………………. प्रीति जिंटा जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. प्रीति जिंटा बोलीं- मोहाली मेरा घर, यह सबसे प्यारी घरवापसी:सनी देओल संग पंजाब आईं, चंडीगढ़ के बाद जालंधर-अमृतसर भी पहुंचीं बॉलीवुड एक्टर सनी देओल और प्रीति जिंटा शनिवार को पंजाब पहुंचे। यहां उन्होंने चंडीगढ़, मोहाली, जालंधर और अमृतसर में अपनी आने वाली फिल्म बंटवारा 1947 के प्रमोशनल इवेंट्स में हिस्सा लिया। फिल्म प्रमोशन के दौरान सनी देओल और प्रीति जिंटा ने स्टूडेंट्स से मुलाकात की और उन्हें फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों में आने का न्योता दिया। उनके साथ सनी देओल के बेटे करण देओल भी मौजूद थे। इसके अलावा उनकी सुरक्षा और प्रमोशनल टीम भी वहां थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔






