Pawan Singh Divorce Case | Wife Jyoti Singh IVF Center Visit Controversy

25 मिनट पहले कॉपी लिंक भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह का रिश्ता इन दिनों चर्चा में है। दोनों का तलाक का मामला कोर्ट में चल रहा है। ज्योति अपनी शादीशुदा जिंदगी को बचाना चाहती हैं, लेकिन पवन सिंह उनसे अलग होना चाहते हैं। इस बीच ज्योति सिंह ने मां बनने की इच्छा जाहिर की है। हाल ही में ज्योति सिंह एक IVF सेंटर पहुंचीं। वहां उन्होंने कहा कि मैं भी एक महिला हूं और मेरा भी मन होता है कि मेरा एक बच्चा हो। मैं भी मां बनूं। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में अगर ऐसा कुछ होता है, तो वह इसी सेंटर में आएंगी। यह कहते हुए ज्योति सिंह हंसने लगीं। IVF से मां बनने पर क्या बोलीं ज्योति? जब ज्योति से पूछा गया कि क्या वह भी IVF के जरिए बच्चा करेंगी, तो उन्होंने कहा कि बिल्कुल, क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि अगर मैं लोगों को जागरूक कर रही हूं, तो भविष्य में मुझे ऐसा लगा तो मैं जरूर IVF से मां बनूंगी। ज्योति की बातों से साफ है कि वह मां बनना चाहती हैं, लेकिन मौजूदा हालातों के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रही हैं। घरेलू हिंसा का लगा चुकी हैं आरोप पवन सिंह ने पहली पत्नी के निधन के बाद 2018 में ज्योति सिंह से शादी की थी। शादी के कुछ साल बाद ही दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई। ज्योति सिंह ने पवन सिंह पर घरेलू हिंसा के आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि पवन सिंह ने जबरदस्ती उनका अबॉर्शन कराया था। हालांकि, पवन सिंह इन सभी आरोपों को हमेशा से नकारते आए हैं। अब जानिए भोजपुरी स्टार पवन सिंह और ज्योति सिंह के तलाक का पूरा मामला क्या है? ज्योति, पवन सिंह की दूसरी पत्नी हैं। अप्रैल 2022 में ज्योति सिंह ने तलाक के लिए अर्जी दाखिल की। पवन सिंह ने भी आरा फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाई। 25 मार्च को सुलह की कोशिश के लिए कोर्ट में दोनों को हाजिर होना था। पवन सिंह आए लेकिन ज्योति नहीं आई। पवन सिंह आरा फैमिली कोर्ट पहुंचे थे, उन्होंने कोर्ट में जज से कहा, “न्यायालय जो भी फैसला देगा, मुझे मंजूर होगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे वन-टाइम सेटलमेंट के लिए तैयार हैं, ताकि यह मामला जल्द से जल्द समाप्त हो सके। उन्होंने कहा कि ज्योति सिंह की वजह से मेरा करियर भी प्रभावित हो रहा है, मैं अपना काम भी नहीं कर पा रहा हूं। इसी वजह से मैं अब इस रिश्ते से बाहर निकलकर नई जिंदगी शुरू करना चाहता हूं। मैं ज्योति सिंह से तलाक चाहता हूं। आगे उन्होंने कहा, “शादी के बाद से ही मुझे लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। ज्योति ने न सिर्फ मुझे परेशान किया, बल्कि मेरे परिवार को भी क्रूर तरीके से तोड़ने की कोशिश की है। इस रिश्ते का असर मेरे करियर पर भी पड़ रहा है। मैं ठीक से अपना काम भी नहीं कर पा रहा हूं। अब साथ रहने का कोई चांस नहीं है।” पहली पत्नी ने 2015 में किया था सुसाइड बता दें कि पवन सिंह की पहली पत्नी नीलम सिंह ने साल 2015 में आत्महत्या कर लिया था। उसके बाद भोजपुरी सुपर स्टार पवन सिंह के अफेयर की चर्चा जाने-माने भोजपुरी अभिनेत्री अक्षरा सिंह के साथ होने लगी । लेकिन पवन सिंह ने उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले रामबाबू सिंह की बेटी ज्योति सिंह के साथ 7 मार्च 2018 को शादी की। इन्होंने बलिया के एक शंकर होटल से बड़े ही धूमधाम से शादी कर अपने फैंस को हैरत में डाल दिया था । लेकिन पवन की दूसरी शादी भी लंबे समय तक नहीं चल पाई। रियलिटी शो का हिस्सा बने पवन सिंह पवन सिंह इन दिनों रियलिटी शो भोजपुरी बवाल में नजर आ रहे हैं। ये शो 2 अगस्त से जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम किया जा रहा है। इसमें दर्शकों को भोजपुरी इंडस्ट्री के सितारों के काम और निजी जिंदगी से जुड़े कई मजेदार पल देखने मिल रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Allahabad High Court Over UP TGT Exam Controversy

Hindi News Career Allahabad High Court Over UP TGT Exam Controversy | Paper Leak Update 5 मिनट पहले कॉपी लिंक इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परीक्षा में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न पाए जाने पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आयोग यह बताए कि प्रश्नपत्र कैसे तैयार किया जाता है और परीक्षा कराने की पूरी प्रक्रिया क्या है। पेपर का एक चौथाई हिस्सा गलत टीजीटी इंग्लिश के पेपर में कुल 125 प्रश्नों में से 33 प्रश्न गलत पाए गए हैं। शुरुआत में 29 प्रश्न सिलेबस से बाहर बताए गए थे। वहीं, कुछ उम्मीदवारों ने 4 और प्रश्नों पर ऑब्जेक्शन दर्ज किए थे। कोर्ट के निर्देश पर एक्सपर्ट्स ने इसकी जांच की, जिसमें वे 4 प्रश्न भी गलत पाए गए। इस तरह कुल 33 प्रश्न गलत निकले, जो पूरे पेपर का लगभग एक चौथाई हिस्सा हैं। आयोग ने अदालत को बताया कि गलत प्रश्नों के मार्क्स बाकी सही प्रश्नों में बांट दिए गए हैं और नई संशोधित चयन लिस्ट जारी की गई है। कोर्ट ने बताई परीक्षा प्रक्रिया की जांच की जरूरत हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था पर असंतोष जताया। कोर्ट ने कहा कि जब 25% से अधिक प्रश्न गलत हैं तो केवल मार्क्स बांटना इसका समाधान नहीं माना जा सकता। अदालत ने प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जांच की जरूरत बताई है। —————————————————————————– ये खबर भी पढ़ें IBPS क्लर्क के 11,403 पदों पर भर्ती निकली:किसी भी स्ट्रीम के ग्रेजुएट्स करें अप्लाई, 10-11 अक्टूबर को होगा प्रीलिम्स इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) राष्ट्रीय बैंकों में 11,403 पदों पर भर्ती निकली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट ibpsonline.ibps.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं। इस भर्ती के लिए फीस जमा करने की आखिरी तारीख भी 21 अगस्त 2026 तय की गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Meta IT Ministry Meeting | PM Modi Post Block Controversy & Zuckerberg

7 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी ने 23 जुलाई को छात्रों को संबोधित करते हुए वीडियो पोस्ट किया था। फेसबुक ने इसे हटा दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से हटाने के मामले में संसदीय समिति ने मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग से 3 दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मेटा को भारत में मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और कुछ छूट वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। इसी मामले में आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच दो दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दिन था। पीएम मोदी ने 23 जुलाई को यह वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक को बड़ी समस्या बताया था। उन्होंने ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी बात कही थी। यह वीडियो कुछ समय के लिए फेसबुक से हटा दिया गया था। बाद में मेटा ने इसे फिर से फेसबुक पर डाल दिया। मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कापलान की अगुआई में एक हाई लेवल कमेटी ने आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन से मुलाकात की। 7 सवालों के जवाब से जानिए विवाद से जुड़ी जरूरी बातें सवाल 1. संसदीय समिति ने मार्क जुकरबर्ग और मेटा को लेकर क्या निर्देश दिया है? जवाब: समिति ने मेटा के CEO मार्क जुकरबर्ग से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। समिति ने कहा है कि अगर तय समय में माफी नहीं मांगी गई, तो मेटा को आईटी कानून के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और छूट वापस ली जा सकती है। इसके बाद कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। सवाल 2. IT मंत्रालय ने मेटा के अधिकारियों को क्यों तलब किया है? जवाब: IT मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने बताया कि बैठक में मंत्रालय यह जांचेगा कि मेटा भारतीय कानूनों का कितना पालन कर रही हैे। वीआईपी अकाउंट की सुरक्षा के लिए बनाए गए उसके ‘सेफगार्ड्स’ क्यों फेल हुए। इसके अलावा वॉट्सऐप की यूजरनेम पॉलिसी और इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) की मौजूदगी को लेकर भी सवाल पूछे जाएंगे। सवाल 3. इस विवाद की मुख्य वजह क्या है? जवाब: 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर युवाओं के नाम एक वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक के मामलों में सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। कुछ समय बाद मेटा ने यह पोस्ट हटा दी। बाद में कंपनी ने पोस्ट फिर से बहाल कर दी और कहा कि यह तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ था। मेटा ने इस पर माफी भी मांगी, लेकिन आईटी मंत्रालय ने कंपनी की सफाई को संतोषजनक नहीं माना। वीडियो में लिखा आ रहा था कि ये वीडियो भारत में उपलब्ध नहीं है। सवाल 4. सरकार इस मामले में क्या कह रही है? जवाब: आईटी सचिव एस. कृष्णन ने 4 अगस्त को कहा कि मेटा दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक है, इसलिए उसके सिस्टम इतने मजबूत होने चाहिए कि ऐसी गलती दोबारा न हो। उन्होंने कहा कि सरकार यह जानना चाहती है कि मेटा भारतीय कानूनों को कितना समझती है और उनका पालन कराने के लिए उसके पास क्या व्यवस्था है। सवाल 5. पीएम मोदी के पोस्ट हटाने के मामले पर मेटा का पक्ष क्या है? जवाब: मेटा ने कहा कि पोस्ट गलती से हट गई थी। यह तकनीकी समस्या थी, किसी नीति या जानबूझकर की गई कार्रवाई का हिस्सा नहीं था। पोस्ट बाद में बहाल कर दी गई। सवाल 6. इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है? जवाब: हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाकर बनाए गए मॉर्फ्ड और AI-जनरेटेड पोस्ट के मामले में मेटा इंडिया के हेड अरुण श्रीनिवास और कुछ फेसबुक व इंस्टाग्राम अकाउंट्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सवाल 7. इस मीटिंग में और क्या मुद्दे हैं? जवाब: 5 और 6 अगस्त की मीटिंग में केवल पीएम मोदी की पोस्ट का मुद्दा ही नहीं है। मंत्रालय मेटा से वॉट्सऐप की नई यूजरनेम पॉलिसी और इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाले कंटेंट की मौजूदगी पर जारी किए गए पुराने नोटिसों का भी ब्योरा और जवाब मांगेगा। सवाल 8. इसका आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: भारत मेटा का सबसे बड़ा बाजार है। देश में वाट्सएप के 60 करोड़ से ज्यादा, इंस्टाग्राम के करीब 48 करोड़ और फेसबुक के करीब 40 करोड़ यूजर हैं। इसलिए मेटा के किसी भी फैसले का असर सीधे करोड़ों भारतीयों पर पड़ता है। सोशल मीडिया कंपनियों के कंटेंट हटाने के नियमों पर ज्यादा निगरानी हो सकती है। गलत तरीके से हटाई गई पोस्ट या अकाउंट के मामलों में कंपनियों पर जवाबदेही बढ़ सकती है। भारत में काम कर रही बड़ी टेक कंपनियों को कंटेंट मॉडरेशन के नियम और सख्ती से लागू करने पड़ सकते हैं। 23 जुलाई को पीएम ने वीडियो मैसेज पोस्ट किया था 23 जुलाई की रात 12 बजे X हैंडल पर पोस्ट किए गए 2.56 मिनट के वीडियो मैसेज में मोदी ने कहा- पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है। लाखों छात्रों, उनके माता-पिता के लिए पीड़ादायक है। इसलिए पेपर लीक से अब तक, पिछले ढाई महीनों में कई कदम उठाए हैं। गुनहगारों को पकड़ा है, वे जेल में हैं। हमारी जिम्मेदारी थी कि छात्रों का साल बर्बाद न हो, इसलिए कम समय में 22 लाख छात्रों का एग्जाम कराया। 19 जुलाई को रिजल्ट भी आ गया। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्देश दिया… उन्होंने यह भी कहा- हम इतने से संतोष करने वाले नहीं हैं। इसलिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्देश दिया है।दरअसल, यह पूरा मामला 3 मई को हुए NEET UG पेपर लीक से जुड़ा है। ———————– ये खबर भी पढ़ें… अगले 2 महीने सस्ता लोन नहीं, EMI भी नहीं घटेगी: RBI गवर्नर बोले- दुनिया में उथल-पुथल से महंगाई बढ़ी; ब्याज दर 5.25% पर बरकरार अगर आप घर, गाड़ी या पर्सनल जरूरत के लिए सस्ते लोन का इंतजार कर रहे हैं, तो फिलहाल ये उम्मीद पूरी नहीं हो सकेगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि RBI ने ब्याज दर को 5.25% पर
PoK Protest | Pakistan Reserved Seats Controversy & Government Stand

मुजफ्फराबाद10 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर को लेकर कई बार युद्ध हो चुका है। दोनों देश इस हिमालयी इलाके पर अपना दावा करते हैं। भारत के साथ कश्मीर विवाद पर पाकिस्तान का पूरा ध्यान रहा। इसलिए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों की अपनी राजनीतिक समस्याएं लंबे समय तक दबकर रह गईं। लेकिन अब वहां हालात ऐसे हो गए हैं कि पाकिस्तान सरकार के लिए उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है। महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल चुका है। इसे कई वर्षों में पाकिस्तान सरकार के सामने PoK से उठी सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। पिछले सप्ताह मुजफ्फराबाद में सुरक्षा बल गश्त करते हुए दिखाई दिए। PoK में आंदोलन की कमान किसके हाथ में है? PoK में आंदोलन का नेतृत्व जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। इसका गठन 2023 में हुआ था। इसमें व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय राजनीतिक नेता शामिल हैं। शुरुआत में संगठन ने महंगी बिजली और आटे की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था। 2024 और 2025 में हुए प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान सरकार को झुकना पड़ा। सरकार ने बिजली की दरें कम कीं और आटे पर सब्सिडी दी। इसके बाद PoK में आटा पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों की तुलना में काफी सस्ता मिलने लगा। 12 रिजर्व सीटें रद्द करने की मांग पर आंदोलन आंदोलनों के सफल होने से JAAC का जनाधार बढ़ा। अब संगठन महंगाई के मुद्दे से आगे बढ़कर PoK को ज्यादा स्वायत्तता और राजनीतिक अधिकार देने की मांग कर रहा है। सबसे बड़ी मांग PoK विधानसभा की 45 सीटों में से 12 आरक्षित सीटों को खत्म करने की है। ये सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहते हैं। JAAC का कहना है कि जो लोग पाकिस्तान के दूसरे शहरों में रहते हैं, उन्हें PoK की सरकार बनाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। JAAC के मुताबिक इन 12 सीटों की वजह से स्थानीय मतदाताओं की राय का असर कम हो जाता है और अक्सर केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। लॉन्ग मार्च पर रोक, कई नेता गिरफ्तार हुए जून की शुरुआत में JAAC ने 9 जून को रावलकोट से राजधानी मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया। रावलकोट को JAAC का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। यह जगह LoC से करीब 20 मील दूर है। लॉन्ग मार्च शुरू होने से पहले ही 5 जून को पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध लगा दिया। कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बावजूद आंदोलन नहीं रुका। रावलकोट में समर्थकों ने कई हफ्तों तक धरना जारी रखा, जबकि दूसरी तरफ सरकार और आंदोलन के बीच बातचीत भी चलती रही। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक जून की शुरुआत से 27 जुलाई तक प्रदर्शनकारियों, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों समेत कम से कम 30 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार ने LoC को दुनिया के बाकी हिस्से से काटा न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर जब पिछले सप्ताह इलाके में पहुंचे तो उन्होंने पाया कि पाकिस्तान सरकार ने PoK के कई हिस्सों को लगभग बाहरी दुनिया से काट दिया है। पूरे इलाके में कई हफ्तों से इंटरनेट सेवा बंद थी। इसका असर सिर्फ मोबाइल और सोशल मीडिया पर नहीं पड़ा, बल्कि बैंक और ATM सेवाएं भी प्रभावित हुईं। मुजफ्फराबाद जाने वाली सड़कों पर जगह-जगह पुलिस की चौकियां बनाई गई थीं। नीलम और झेलम नदी के आसपास की ठंडी और हरी-भरी घाटियां, जहां आमतौर पर गर्मियों में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, इस बार लगभग खाली दिखाई दीं। पाकिस्तान के सामने कई संकट PoK में उठा यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है, जब पाकिस्तान पहले से कई मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सेना लंबे समय से उग्रवादी संगठनों के खिलाफ अभियान चला रही है, जिसमें हाल के वर्षों में हजारों सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं। ऐसे माहौल में पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर अब तक अपेक्षाकृत शांत माना जाता था। लेकिन JAAC के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन ने इस धारणा को बदल दिया है। अब पहली बार पाकिस्तान को उसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसे वह लंबे समय से स्थिर और शांत बताता रहा है। आंदोलनकारियों और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा सरकार और आंदोलन के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अब पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी का कहना है कि सरकार ने संगठन की लगभग सभी मांगें मान ली थीं। सिर्फ संवैधानिक बदलाव की मांग स्वीकार नहीं की गई। उन्होंने कहा, “अब यह विरोध प्रदर्शन नहीं रहा। ये लोग अब प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि दंगाई हैं।” दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार का कहना है कि PoK की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव करने से भारत के साथ कश्मीर विवाद पर उसकी कूटनीतिक स्थिति कमजोर हो जाएगी। सरकार का मानना है कि अगर विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें खत्म कर दी गईं, तो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहने वाले कश्मीरी इस प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। इससे कश्मीर पर उसके दावे को नुकसान पहुंच सकता है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की राजधानी मुजफ्फराबाद में पिछले सप्ताह प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनावी बैनर लगे दिखाई दिए। भारत के फैसले के बाद बढ़ा PoK में तनाव एक्सपर्ट्स का मानना है कि PoK में चल रहे आंदोलन की शुरुआत 2019 की घटनाओं के बाद हुई। उसी साल भारत ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था। इसके विरोध में PoK में भी प्रदर्शन हुए और लोग नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार रहने वाले कश्मीरियों के समर्थन में सड़कों पर उतरे। मुजफ्फराबाद के राजनीतिक कार्यकर्ता जाहिद अमीन का कहना है कि लोगों की नाराजगी सिर्फ भारत के फैसले से नहीं थी। उन्हें इस बात का भी गुस्सा था कि भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यही से पाकिस्तानी नेताओं के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़नी शुरू हुई। JAAC बोली- पाकिस्तान
PoK Protest | Pakistan Reserved Seats Controversy & Government Stand

मुजफ्फराबाद2 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान और भारत के बीच कश्मीर को लेकर कई बार युद्ध हो चुका है। दोनों देश इस हिमालयी इलाके पर अपना दावा करते हैं। भारत के साथ कश्मीर विवाद पर पाकिस्तान का पूरा ध्यान रहा। इसलिए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों की अपनी राजनीतिक समस्याएं लंबे समय तक दबकर रह गईं। लेकिन अब वहां हालात ऐसे हो गए हैं कि पाकिस्तान सरकार के लिए उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है। महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल चुका है। इसे कई वर्षों में पाकिस्तान सरकार के सामने PoK से उठी सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। PoK में 3 चरणों में चुनाव हो रहे हैं। इस दौरान राजधानी मुजफ्फराबाद में सिक्योरिटी फोर्स गश्त करते हुए दिखाई दिए। PoK में आंदोलन की कमान किसके हाथ में है? PoK में आंदोलन का नेतृत्व जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है। इसका गठन 2023 में हुआ था। इसमें व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय राजनीतिक नेता शामिल हैं। शुरुआत में संगठन ने महंगी बिजली और आटे की बढ़ती कीमतों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था। 2024 और 2025 में हुए प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान सरकार को झुकना पड़ा। सरकार ने बिजली की दरें कम कीं और आटे पर सब्सिडी दी। इसके बाद PoK में आटा पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों की तुलना में काफी सस्ता मिलने लगा। 12 रिजर्व सीटें रद्द करने की मांग पर आंदोलन आंदोलनों के सफल होने से JAAC का जनाधार बढ़ा। अब संगठन महंगाई के मुद्दे से आगे बढ़कर PoK को ज्यादा स्वायत्तता और राजनीतिक अधिकार देने की मांग कर रहा है। सबसे बड़ी मांग PoK विधानसभा की 45 सीटों में से 12 आरक्षित सीटों को खत्म करने की है। ये सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहते हैं। JAAC का कहना है कि जो लोग पाकिस्तान के दूसरे शहरों में रहते हैं, उन्हें PoK की सरकार बनाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। JAAC के मुताबिक इन 12 सीटों की वजह से स्थानीय मतदाताओं की राय का असर कम हो जाता है और अक्सर केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। लॉन्ग मार्च पर रोक, कई नेता गिरफ्तार हुए JAAC ने 9 जून को रावलकोट से राजधानी मुजफ्फराबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया। रावलकोट को JAAC का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। यह जगह LoC से करीब 20 मील दूर है। लॉन्ग मार्च होने से पहले ही 5 जून को पाकिस्तान सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध लगा दिया। कई प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बावजूद आंदोलन नहीं रुका। रावलकोट में समर्थकों ने कई हफ्तों तक धरना जारी रखा, जबकि दूसरी तरफ सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत भी चलती रही। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक जून की शुरुआत से 27 जुलाई तक प्रदर्शनकारियों, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों समेत कम से कम 30 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार ने LoC को दुनिया के बाकी हिस्से से काटा न्यूयॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर जब पिछले सप्ताह इलाके में पहुंचे तो उन्होंने पाया कि पाकिस्तान सरकार ने PoK के कई हिस्सों को लगभग बाहरी दुनिया से काट दिया है। पूरे इलाके में कई हफ्तों से इंटरनेट सेवा बंद थी। इसका असर सिर्फ मोबाइल और सोशल मीडिया पर नहीं पड़ा, बल्कि बैंक और ATM सेवाएं भी प्रभावित हुईं। मुजफ्फराबाद जाने वाली सड़कों पर जगह-जगह पुलिस की चौकियां बनाई गई थीं। नीलम और झेलम नदी के आसपास की ठंडी और हरी-भरी घाटियां, जहां आमतौर पर गर्मियों में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, इस बार लगभग खाली दिखाई दीं। पाकिस्तान के सामने कई संकट PoK में उठा यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है, जब पाकिस्तान पहले से कई मोर्चों पर सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में सेना लंबे समय से उग्रवादी संगठनों के खिलाफ अभियान चला रही है, जिसमें हाल के वर्षों में हजारों सुरक्षाकर्मी मारे जा चुके हैं। ऐसे माहौल में पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर अब तक तुलना में शांत माना जाता था। लेकिन JAAC के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन ने इस धारणा को बदल दिया है। अब पहली बार पाकिस्तान को उसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसे वह लंबे समय से स्थिर और शांत बताता रहा है। आंदोलनकारियों और सरकार के बीच बातचीत बेनतीजा सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। अब पाकिस्तान सरकार ने आंदोलन के खिलाफ कार्रवाई तेज करने का फैसला किया है। पाकिस्तान के गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी का कहना है कि सरकार ने संगठन की लगभग सभी मांगें मान ली थीं। सिर्फ संवैधानिक बदलाव की मांग स्वीकार नहीं की गई। उन्होंने कहा, “अब यह विरोध प्रदर्शन नहीं रहा। ये लोग अब प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि दंगाई हैं।” पाकिस्तान सरकार का कहना है कि PoK की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव करने से भारत के साथ कश्मीर विवाद पर उसकी कूटनीतिक स्थिति कमजोर हो जाएगी। सरकार का मानना है कि अगर विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें खत्म कर दी गईं, तो पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रहने वाले कश्मीरी इस प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। इससे कश्मीर पर उसके दावे को नुकसान पहुंच सकता है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की राजधानी मुजफ्फराबाद में पिछले सप्ताह प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनावी बैनर लगे दिखाई दिए। भारत के फैसले के बाद बढ़ा PoK में तनाव एक्सपर्ट्स का मानना है कि PoK में चल रहे आंदोलन की शुरुआत 2019 की घटनाओं के बाद हुई। उसी साल भारत ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था। इसके विरोध में PoK में भी प्रदर्शन हुए और लोग नियंत्रण रेखा (LoC) के उस पार रहने वाले कश्मीरियों के समर्थन में सड़कों पर उतरे। मुजफ्फराबाद के राजनीतिक कार्यकर्ता जाहिद अमीन का कहना है कि लोगों की नाराजगी सिर्फ भारत के फैसले से नहीं थी। उन्हें इस बात का भी गुस्सा था कि भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यही से पाकिस्तानी नेताओं के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़नी शुरू
Sunny Deol Controversy | Actor Statement Pakistan Mausi Social Media Trolling

13 मिनट पहले कॉपी लिंक सनी देओल की फिल्म ‘बंटवारा 1947’ 14 अगस्त 2026 को रिलीज होगी फिल्म ‘बंटवारा 1947’ की रिलीज से पहले सनी देओल अपने एक बयान को लेकर विवादों में आ गए। पटना में फिल्म के प्रमोशन के दौरान उन्होंने अपने पिता धर्मेंद्र के एक पुराने बयान का जिक्र करते हुए पाकिस्तान को मौसी बताया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उन्हें ट्रोल किया। दरअसल सनी से सवाल किया गया कि यह मूवी, जो पाकिस्तान में शूट की गई है, तो आप पाकिस्तान को एक देश या माहौल के तौर पर कैसे देखते हैं? क्या आप कुछ बताना चाहेंगे? इस पर सनी ने बताया कि फिल्म की शूटिंग पाकिस्तान में नहीं हुई, बल्कि फिल्म हिंदुस्तान में ही शूट हुई है। उन्होंने आगे कहा, “हम कोई ऐसी बातें नहीं करते, क्योंकि पूरा देश एक ही था। जैसे पापा ने कहा था कि मेरी मां (भारत) तो वो मेरी मौसी (पाकिस्तान) है, जो आप लोग अच्छी तरह से समझते हैं। हम सब एक तरह से हैं, तो कहीं न कहीं से जुड़े हुए हैं।” सनी देओल के इस बयान पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने प्रतिक्रिया दी। कुछ यूजर्स ने उनके बयान की आलोचना की। एक यूजर ने लिखा, “सनी देओल हर नए वीडियो से अपनी छवि को और नुकसान पहुंचा रहे हैं।” दूसरे ने कहा, “मुझे यह व्यक्ति बिल्कुल पसंद नहीं है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “पूरे परिवार को बर्बाद करने वाली मौसी वाली बात सही है।” फिल्म के ट्रेलर में सनी देओल दमदार एक्शन करते नजर आ रहे हैं। ‘बंटवारा 1947’ विभाजन की कहानी पर आधारित है बता दें कि सनी देओल की अपकमिंग फिल्म ‘बंटवारा 1947’ भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म की कहानी हिंसा, विस्थापन और पारिवारिक संघर्ष से जूझ रहे एक परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म में सनी देओल के साथ शबाना आजमी, प्रीति जिंटा, अली फजल और अभिमन्यु सिंह भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म की रिलीज से पहले सनी देओल रविवार देर शाम पटना में स्थित तख्त श्री हरमंदिर जी पटना साहिब पहुंचे। यहां उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्मस्थान पर मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के पदाधिकारियों ने सनी देओल का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उन्हें सिरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया और गुरु घर की परंपराओं से अवगत कराया गया। इसके बाद उन्होंने फिल्म के प्रमोशन में हिस्सा लिया। देखें तस्वीरें… पटना साहिब गुरुद्वारे में बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल। हाथ जोड़कर लिया आशीर्वाद। पटना साहिब गुरुद्वारे में सनी देओल को सम्मानित किया गया। गुरु इतिहास की जानकारी के साथ पूरा गुरुद्वारा घूमा सनी देओल लगभग 20 मिनट तक गुरुद्वारा परिसर में रहे। इस दौरान उन्होंने तख्त श्री हरमंदिर साहिब के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण किया, गुरु इतिहास की जानकारी ली और श्रद्धालुओं के साथ समय बिताया। उन्होंने गुरु का पावन प्रसाद भी ग्रहण किया। दर्शन के बाद सनी देओल ने कहा कि गुरु के दरबार में आकर उन्हें अद्भुत शांति और आत्मिक सुकून का अनुभव हुआ। उन्होंने बताया, “मेरा हमेशा से मन था कि जब भी बिहार आऊं, सबसे पहले तख्त श्री हरिमंदिर साहिब में मत्था टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद जरूर लूं। आज मेरा यह सपना पूरा हो गया।” सनी देओल को सम्मानित किया गया। …………………. सनी देओल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पिता धर्मेन्द्र को याद कर रो पड़े सनी देओल:’बंटवारा 1947′ के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में छलके आंसू; करण देओल, शबाना आजमी-जावेद अख्तर भी नजर आए फिल्म ‘बंटवारा 1947’ का ट्रेलर लॉन्च इवेंट में सनी देओल रो पड़े। इवेंट के दौरान डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने दिवंगत अभिनेता धर्मेन्द्र पर बात की जिसे सुनकर सनी देओल की आंखों में आंसू आ गए। संतोषी ने कहा की धर्मेन्द्र जी ने आखिरी फिल्म भी बटवारा देखी थी। उन्होंने कहा था ये फिल्म हिट होगी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Faizan Ansari Complaint Against Abhijeet Deepke

32 मिनट पहले कॉपी लिंक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने दावा किया कि दीपके से जुड़े लोगों ने उन पर हमला किया था। वहीं उन्होंने उर्फी जावेद पर 1 लाख रुपए और पूनम पांडे पर 20 हजार रुपए लेने का भी आरोप लगाया। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में फैजान अंसारी ने कहा, “अभिजीत दीपके के अगेंस्ट आज मैंने दिल्ली डीसीपी को लिखित शिकायत दर्ज कराई है, क्योंकि मेरे ऊपर अभिजीत दीपके के लोगों ने हमला किया था। पुणे में मेरे ऊपर अटैक हुआ, औरंगाबाद में मेरे ऊपर अटैक हुआ। पहले से ही दो केस उसके खिलाफ फाइल हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैं चाहता हूं कि दिल्ली पुलिस तुरंत अभिजीत दीपके को गिरफ्तार करे, ताकि आगे कोई भी दंगा-फसाद या कोई भी समस्या न हो सके।” फैजान अंसारी मीडिया से बात करते हुए। वहीं, शिकायत में फैजान अंसारी ने लिखा, “मैं आज मुंबई से दिल्ली डीसीपी के पास कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की लिखित शिकायत करने आया हूं। अभिजीत दीपके एक पाकिस्तानी एजेंट है। उमर खालिद का समर्थक है, जिसने कहा था, ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे।’ बॉलीवुड से भी सेलिब्रिटीज को अभिजीत दीपके ने पैसे देकर जंतर-मंतर बुलाया था। उर्फी जावेद ने 1 लाख रुपए लिए थे और पूनम पांडे ने 20 हजार रुपए लिए थे। मैं यह चाहता हूं कि उमर खालिद की तरह अभिजीत दीपके को भी जेल होनी चाहिए। आप प्लीज तुरंत एफआईआर करके इसे जेल भेजो। अभिजीत दीपके देश का माहौल बिगाड़ रहा है और अगर इसे नहीं रोका गया, तो यह भारत में दंगे-फसाद भी करवा देगा।” फैजान अंसारी की शिकायत। फैजान ने तान्या के खिलाफ भी शिकायत की थी फैजान अंसारी एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उनके इंस्टाग्राम पर 1.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं। वो अपने बयानों और पुलिस शिकायतों के कारण चर्चा में रहते हैं। अक्टूबर 2025 में फैजान ने बिग बॉस फेम तान्या मित्तल के खिलाफ शिकायत की थी। उन्होंने तान्या पर लोगों को पैसों के लिए धोखा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि तान्या ने ‘बिग बॉस’ शो में अपने परिवार और व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़े सैकड़ों झूठ बोले हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… सोहेल खान, मृणाल ठाकुर और टाइगर श्रॉफ के साथ फैजान अंसारी की तस्वीरें। खुशी मुखर्जी को ₹100 करोड़ का नोटिस भेजा था साथ ही उन्होंने क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव के समर्थन में एक्ट्रेस खुशी मुखर्जी के खिलाफ 100 करोड़ रुपए का मानहानि का नोटिस भेजा था। फैजान अंसारी ने आरोप लगाया था कि खुशी मुखर्जी ने सूर्यकुमार यादव को लेकर जानबूझकर ऐसे बयान दिए, जिससे एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। उनका कहना था कि ये बयान बिना किसी सबूत के और गलत नीयत से दिए गए हैं। दरअसल, खुशी मुखर्जी ने दिसंबर 2025 में कहा था कि भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव उन्हें पहले अक्सर मैसेज किया करते थे। हालांकि, उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके और सूर्यकुमार के बीच कभी कोई रोमांटिक रिश्ता नहीं रहा। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
'उर्फी जावेद ने लिए थे ₹1 लाख':CJP प्रोटेस्ट को लेकर इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी का दावा, हमले को लेकर अभिजीत दीपके के खिलाफ शिकायत की

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने दावा किया कि दीपके से जुड़े लोगों ने उन पर हमला किया था। वहीं, उन्होंने उर्फी जावेद पर 1 लाख रुपए और पूनम पांडे पर 20 हजार रुपए लेने का भी आरोप लगाया। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में फैजान अंसारी ने कहा, ‘अभिजीत दीपके के अगेंस्ट आज मैंने दिल्ली डीसीपी को लिखित शिकायत दर्ज कराई है, क्योंकि मेरे ऊपर अभिजीत दीपके के लोगों ने हमला किया था। पुणे में मेरे ऊपर अटैक हुआ, औरंगाबाद में मेरे ऊपर अटैक हुआ। पहले से ही दो केस उसके खिलाफ फाइल हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैं चाहता हूं कि दिल्ली पुलिस तुरंत अभिजीत दीपके को गिरफ्तार करे, ताकि आगे कोई भी दंगा-फसाद या कोई भी समस्या न हो सके।’ वहीं, शिकायत में फैजान अंसारी ने लिखा, ‘मैं आज मुंबई से दिल्ली डीसीपी के पास कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके की लिखित शिकायत करने आया हूं। अभिजीत दीपके एक पाकिस्तानी एजेंट है। उमर खालिद का समर्थक है, जिसने कहा था, ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे।’ बॉलीवुड से भी सेलिब्रिटीज को अभिजीत दीपके ने पैसे देकर जंतर-मंतर बुलाया था।’ उसमें आगे लिखा, ‘उर्फी जावेद ने 1 लाख रुपए लिए थे और पूनम पांडे ने 20 हजार रुपए लिए थे। मैं यह चाहता हूं कि उमर खालिद की तरह अभिजीत दीपके को भी जेल होनी चाहिए। आप प्लीज तुरंत एफआईआर करके इसे जेल भेजो। अभिजीत दीपके देश का माहौल बिगाड़ रहा है और अगर इसे नहीं रोका गया, तो यह भारत में दंगे-फसाद भी करवा देगा।’ फैजान ने तान्या के खिलाफ भी शिकायत की थी फैजान अंसारी एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उनके इंस्टाग्राम पर 1.1 मिलियन फॉलोअर्स हैं। वो अपने बयानों और पुलिस शिकायतों के कारण चर्चा में रहते हैं। अक्टूबर 2025 में फैजान ने बिग बॉस फेम तान्या मित्तल के खिलाफ शिकायत की थी। उन्होंने तान्या पर लोगों को पैसों के लिए धोखा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि तान्या ने ‘बिग बॉस’ शो में अपने परिवार और व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़े सैकड़ों झूठ बोले हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… खुशी मुखर्जी को ₹100 करोड़ का नोटिस भेजा था साथ ही उन्होंने क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव के समर्थन में एक्ट्रेस खुशी मुखर्जी के खिलाफ 100 करोड़ रुपए का मानहानि का नोटिस भेजा था। फैजान ने आरोप लगाया था कि खुशी ने सूर्यकुमार को लेकर जानबूझकर ऐसे बयान दिए, जिससे एक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी की छवि को नुकसान पहुंच सकता है। उनका कहना था कि ये बयान बिना किसी सबूत के और गलत नीयत से दिए गए हैं। दरअसल, खुशी मुखर्जी ने दिसंबर 2025 में कहा था कि भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव उन्हें पहले अक्सर मैसेज किया करते थे। हालांकि, उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके और सूर्यकुमार के बीच कभी कोई रोमांटिक रिश्ता नहीं रहा। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Nishikant Dubey Demands Meta Apology Over PM Modi Video Controversy

Hindi News National Nishikant Dubey Demands Meta Apology Over PM Modi Video Controversy | Delhi 6 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पोस्ट किए वीडियो में पेपर लीक को गंभीर विषय बताया था। मामले पर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही थी। कम्युनिकेशन और IT की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने सोमवार को कहा कि पीएम मोदी का वीडियो हटाने के लिए मेटा सीईओ मार्क जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कमेटी ने पिछले महीने फेसबुक से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने को गंभीरता से लिया है। इन कंपनियों की नीति नए लोगों को प्राथमिकता देने की है। अगर वे माफी नहीं मांगते तो IT एक्ट 79 के तहत मिलने वाला सेफ हार्बर प्रोटेक्शन वापस ले लिया जाएगा। दरअसल, पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक को गंभीर विषय बताते हुए एक वीडियो जारी किया था। इसे मेटा ने रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक हटा दिया था। लेकिन बाद में उसे रिस्टोर कर दिया गया। मेटा ने अपनी सफाई में कहा कि दरअसल, यह एक टेक्निकल एरर था। क्या है सेफ हार्बर प्रोटेक्शन? IT एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाला सेफ हार्बर एक कानूनी सुरक्षा कवच है, जो इंटरनेट प्लेटफॉर्मों को उनके यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई किसी भी गलत या गैर-कानूनी सामग्री के लिए जिम्मेदार होने से बचाता है। इसका मतलब है कि यूजर के अपराध के लिए कंपनी या उसके अधिकारियों को सजा नहीं होगी, बशर्ते वे सरकार का आदेश मिलने पर वह पोस्ट हटा दें। मेटा के अलावा यह सुरक्षा यूट्यूब, एक्स (ट्विटर), गूगल, अमेज़न, फ्लिपकार्ट और जियो व एयरटेल को भी मिलती है। मेटा की ग्लोबल टीम से पूछताछ करेगी सरकार हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस ने मेटा इंडिया के हेड अरुण श्रीनिवास समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट हैंडलर्स के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायत पर दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। श्रीनिवास को दोनों मामलों में सह-आरोपी बनाया गया है। सोशल मीडिया अकाउंट्स से वीडियो शेयर करने वालों को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस AI मॉर्फ्ड वीडियो बनाने वाले, सबसे पहले अपलोड करने और वायरल करने वालों की जांच कर रही है। साथ ही फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी कंटेंट रोकने वाले मेटा के सिस्टम और सुरक्षा उपायों की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मेटा की टीम से एल्गोरिदम में पक्षपात, एल्गोरिदम की कार्यप्रणाली और पब्लिक ऑर्डर में कंपनी की भूमिका पर सवाल पूछे जाएंगे। मेटा की ग्लोबल टीम अगले हफ्ते दिल्ली आएगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने बेंगलुरु शो रद्द किए:हिंदू संगठनों ने किया था विरोध, CJP प्रोटेस्ट में राम-सीता के बयान से भी हुआ था विवाद

बेंगलुरु में स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने अपने शो रद्द कर दिए हैं। व्हाइटफील्ड इलाके में होने वाले इन शो का हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया था। पुलिस ने सोमवार को इस बारे में जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, कुणाल कामरा ने रविवार को खुद व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन जाकर अधिकारियों को सूचित किया कि वे अपने निर्धारित शो आगे नहीं बढ़ाएंगे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कामरा ने हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते व्हाइटफील्ड में होने वाला इवेंट रद्द करने का फैसला लिया है। कोरमंगला में शिफ्ट किए गए शो कुणाल कामरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि सोमवार, मंगलवार, बुधवार और गुरुवार के शो अब कोरमंगला के एक वेन्यू में शिफ्ट कर दिए गए हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि व्हाइटफील्ड शो के लिए खरीदे गए टिकटों का रिफंड बुकमायशो (BookMyShow) प्लेटफॉर्म द्वारा प्रोसेस किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने दर्शकों से कोरमंगला वेन्यू के लिए टिकट बुक करने का आग्रह किया है, जहां सीटों की संख्या सीमित है। इससे पहले कुणाल कामरा ने उनके शोज की आलोचना करने वाले एक ट्रोलर को सोशल मीडिया चेतावनी भी दी थी। साथ ही उन्होंने बताया था कि वो 2 अगस्त को पुलिस स्टेशन जाएंगे। हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने के थे आरोप यह घटनाक्रम तब हुआ जब हाल ही में हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने बेंगलुरु पुलिस को एक याचिका सौंपी थी। इसमें 3 अगस्त को यूआरयू (URU) व्हाइटफील्ड में होने वाले कामरा के स्टैंड-अप शो को रद्द करने की मांग की गई थी। समिति ने तर्क दिया था कि कामरा के शो से कानून-व्यवस्था और धार्मिक सद्भाव बिगड़ने का खतरा है। उनका आरोप था कि कामरा ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान किया है। CJP प्रोटेस्ट के बयान से भी लगे थे धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप 15 जुलाई को कुणाल कामरा जंतर-मंतर में हुए कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मंच पर भगवान राम और माता सीता पर बयान दिया। बयान सामने आने के बाद कुणाल कामरा के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में शिकायत दर्ज हुई थी। हाईकोर्ट के वकील विभु वीरभद्र सैनी ने याचिका में कहा कि 15 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुणाल कामरा ने भगवान राम और माता सीता को लेकर कथित विवादित टिप्पणी की, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील विभु वीरभद्र सैनी ने 24 जुलाई को कुणाल कामरा के खिलाफ याचिका दायर की। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान कॉमेडियन कुणाल कामरा ने भगवान राम व माता सीता के प्रति अभद्र टिप्पणी की। याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकील की याचिका पर चंडीगढ़ पुलिस से रिपोर्ट तलब कर ली है। कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि आरोपों में प्रथम दृष्टया कोई आधार बनता है या नहीं और एफआईआर दर्ज करने की जरूरत है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। कुणाल कामरा के ये विवाद भी पढ़िए- 2025- एकनाथ शिंदे पर ‘गद्दार’ टिप्पणी: अपने स्टैंड-अप शो नया भारत में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर व्यंग्य किया और उन्हें कथित तौर पर “गद्दार” कहकर संबोधित किया। वीडियो वायरल होने के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं ने मुंबई के द हैबिटेट कॉमेडी क्लब में तोड़फोड़ की। कामरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। 2025- सलमान खान पर जोक: एक शो में सलमान खान के 1998 के काला हिरण शिकार और 2002 के हिट-एंड-रन मामले पर चुटकुले सुनाए। विवाद के बावजूद कुणाल कामरा ने माफी मांगने से इनकार कर दिया। 2022- गुरुग्राम शो रद्द: विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के विरोध के बाद उनका 2022 में होने वाला गुरुग्राम शो रद्द कर दिया गया। इसके बाद कामरा ने सार्वजनिक रूप से VHP को नाथूराम गोडसे की निंदा करने की चुनौती दी, जिससे विवाद और बढ़ गया। 2022- पीएम मोदी के लिए गाना गाने वाले बच्चे का एडिटेड वीडियो: जर्मनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए गाना गाने वाले एक बच्चे के वीडियो को एडिट कर सोशल मीडिया पर शेयर किया। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने वीडियो हटाने को कहा। बाद में कामरा ने वीडियो हटा दिया और कहा कि उनका उद्देश्य सरकार की आर्थिक नीतियों पर व्यंग्य करना था, बच्चे पर नहीं। 2020- सुप्रीम कोर्ट पर ‘ब्राह्मण-बनिया’ टिप्पणी: एक स्टैंड-अप शो में सुप्रीम कोर्ट को लेकर “ब्राह्मण-बनिया” संबंधी टिप्पणी की। इस पर भी अदालत की अवमानना की याचिकाएं दायर हुईं। 2020- इंडिगो फ्लाइट में अर्नब गोस्वामी से बहस: मुंबई-लखनऊ इंडिगो फ्लाइट में पत्रकार अर्नब गोस्वामी से सवाल-जवाब करते हुए उनका वीडियो रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर साझा किया। इंडिगो ने पहले 6 महीने का फ्लाइट बैन लगाया, जिसे बाद में घटाकर 3 महीने किया गया। एयर इंडिया, स्पाइसजेट और गोएयर ने भी कुछ समय के लिए उड़ान प्रतिबंध लगाए थे।






