Thursday, 25 Jun 2026 | 12:03 PM

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Karan Aujla Delhi Show Controversy

Karan Aujla Delhi Show Controversy

करन औजला के दिल्ली शो से पहले विवाद बढ़ा। नोटिस जारी हुआ। (फाइल फोटो) पंजाबी सिंगर करन औजला दिल्ली में ‘पी पॉप कल्चर इंडिया टूर’ से पहले मुश्किल में फंस गए हैं। औजला इस शो में अपने कई हिट सॉन्ग नहीं गा पाएंगे। वो यहां अपने कई हिट गाने जैसे ‘अधिया’, ‘चिट्टा कुर्ता’, ‘एल्कोहल 2’, ‘फ्यू डे’ और ‘बंदूक’ पर परफॉर्म करने वाले . दरअसल, साउथ ईस्ट दिल्ली की चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट ने औजला के गानों को लेकर शो के आयोजकों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि लाइव शो में शराब और ड्रग को ग्लोरिफाई करने वाले गाने नहीं गाने चाहिए। इस संबंध में चंडीगढ़ के प्रोफेसर धरनेरव राव ने एक आवेदन दायर किया था। उन्होंने मांग की थी कि ऐसे गानों से शराब की खपत, ड्रग्स के इस्तेमाल, गन कल्चर और महिलाओं के प्रति असम्मान को बढ़ावा मिलता है, इसलिए इन पर रोक लगाई जानी चाहिए। सिंगर करन औजला के शो को लेकर नोटिस जारी। अब जानिए क्या है पूरा मामला… गानों में ड्रग-गन कल्चर को बढ़ावा देने की बातः दरअसल, शिकायतकर्ता चंडीगढ़ के प्रोफेसर धरनेरव राव ने आरोप लगाया है कि करण औजला के गाने शराब की खपत, ड्रग्स एब्यूज, गन कल्चर को ग्लोरिफाई करते हैं और महिलाओं के प्रति अपमान को दिखाते है। इसके बाद यह नोटिस जारी हुआ है। हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दियाः नोटिस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 22 जुलाई 2019 के फैसले (CWP No. 6213 of 2016) का हवाला दिया गया है। जिसमें स्पष्ट निर्देश हैं कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कोई भी लाइव शो या इवेंट में शराब, ड्रग्स, हिंसा को ग्लोरिफाई करने वाले गाने नहीं बजाए/गाए जाएं। कोर्ट ने डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को इसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे। नोटिस में ये कहा गयाः नोटिस में कहा गया है कि चूंकि इवेंट में बच्चे भी मौजूद रहेंगे, इसलिए ऐसे गानों की परफॉर्मेंस से बचना चाहिए। गैर-पालना पर हाईकोर्ट की अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। आयोजकों को ईमेल के जरिए यह निर्देश भेजा गया है। हाईकोर्ट के निर्देश में यह कहा गया था प्रोफेसर राव की तरफ से यूनिट को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश की कॉपी दी गई थी। जिसमें पंजाब, हरियाणा और संघ शासित प्रदेश, चंडीगढ़ में पुलिस के डीजीपी को निर्देश दिया गया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी गीत में, यहां तक ​​कि लाइव शो में भी, शराब, मादक पदार्थों और हिंसा का महिमामंडन करने वाले गाने न बजाए जाएं। उस आर्डर में यह भी कहा गया है कि 12 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को सिनेमा हॉल/मल्टीप्लेस में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जहां “ए” प्रमाणपत्र वाली फिल्में प्रदर्शित की जाती हैं। जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि पंजाब, हरियाणा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के किसी भी जिले में शैक्षणिक संस्थान के पास नग्न पोस्टर, अर्ध-निर्मित पोस्टर और अश्लील पोस्टर प्रदर्शित न किए जाएं।

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘द केरल स्टोरी’ के पहले भाग ने देशभर में तीखी बहस को जन्म दिया था। फिल्म को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब इसका दूसरा भाग एक नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों के सामने आने वाला है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता सुमित गहलावत सलीम नामक एक अहम और परतदार किरदार निभा रहे हैं। लगभग 12 वर्षों से इंडस्ट्री में सक्रिय सुमित का कहना है कि यह उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने फिल्म, विवाद, संघर्ष और अपने सफर पर खुलकर बात की हैं। आपकी फिल्में, जैसे द केरल स्टोरी और बस्तर: द नक्सल स्टोरी, अक्सर राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म देती हैं। एक कलाकार के रूप में आप इन प्रतिक्रियाओं और विवादों को किस नजरिए से देखते हैं? मैं व्यक्तिगत रूप से हर फिल्म को सिर्फ सिनेमा के रूप में देखता हूं। एक अभिनेता के तौर पर मेरा काम है अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना। विषय राजनीतिक है, सामाजिक है या विवादित है यह लेखक और निर्देशक का दृष्टिकोण होता है। मैं स्क्रिप्ट पढ़ते समय यही देखता हूं कि मेरे किरदार में कितनी गहराई है, कितनी चुनौती है और मैं उसमें कितना सच्चापन ला सकता हूं। मैं इस इंडस्ट्री में इसलिए आया हूं ताकि अलग-अलग तरह के रोल निभा सकूं। इसलिए मेरा चयन हमेशा भूमिका और स्क्रिप्ट के आधार पर होता है, किसी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं। ऐसी फिल्मों में ‘प्रोपेगेंडा बनाम सच्चाई’ की बहस शुरू हो जाती है। क्या यह आपको प्रभावित करती है? बहस होना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी दुख इस बात का होता है कि अभिनय की चर्चा पीछे रह जाती है। हम कलाकार महीनों तैयारी करते हैं, मानसिक रूप से किरदार में उतरते हैं, कई सालों के संघर्ष के बाद ऐसे मौके मिलते हैं। जब फिल्म रिलीज होती है तो चर्चा कहानी से ज्यादा राजनीतिक एंगल पर होने लगती है। मैं राजनीति में नहीं पड़ता। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग यह भी देखें कि कलाकार ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर अनुराग कश्यप और प्रकाश राज जैसे फिल्मी हस्तियों ने आलोचना की। इस पर आपका क्या कहना है? मैं इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगा। हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। जरूरी नहीं कि हर फिल्म या ट्रेलर सबको पसंद आए। कई बार हमें भी कोई ट्रेलर पसंद नहीं आता और हम आपस में खुलकर बोल देते हैं। अगर किसी को अच्छा नहीं लगा तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। बहुत से लोग तारीफ भी कर रहे हैं। जो अच्छा कह रहे हैं, उनका भी सम्मान है और जो आलोचना कर रहे हैं, उनका भी। हमारा काम है मेहनत करना और आगे और बेहतर करने की कोशिश करना। ट्रेलर में दिखाए गए एक ‘बीफ’ से जुड़े दृश्य को लेकर विवाद हुआ। क्या उस सीन को हटाने या बदलने पर कोई चर्चा हुई? ऐसे फैसले पूरी तरह निर्देशक और निर्माता के होते हैं। एक अभिनेता के रूप में हमारा काम है कि जो सीन हमें दिया गया है, उसे पूरी सच्चाई और प्रभाव के साथ निभाएं। वह दृश्य भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन अगर दर्शक मेरे किरदार सलीम से नफरत महसूस करते हैं, तो एक अभिनेता के रूप में मैं समझूंगा कि मैंने अपना काम सही तरीके से किया। नेगेटिव किरदार को इस तरह निभाना कि वह वास्तविक लगे यही अभिनय की सफलता है। द केरला स्टोरी पार्ट 2 में आपका किरदार कितना अलग है? इस बार कहानी पूरी तरह नई है। मैं सलीम का किरदार निभा रहा हूं। यह एक लेयर्ड रोल है। शुरुआत में वह पढ़ा-लिखा, समझदार और सभ्य व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन परिस्थितियों के साथ उसका दूसरा रूप सामने आता है। यह किरदार केवल पूरी तरह नकारात्मक या सकारात्मक नहीं है। उसकी एक यात्रा है एक बदलाव है। उस जर्नी को निभाना मेरे लिए बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। नेगेटिव रोल करने से क्या इमेज या फैन बेस पर असर पड़ सकता है? बिल्कुल नहीं। एक अभिनेता का काम हर तरह के भाव निभाना है। अगर आप उदाहरण देखें तो मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकारों ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाएं की हैं। आज दर्शक समझदार हैं। वे जानते हैं कि अभिनेता और उसका किरदार अलग होते हैं। नेगेटिव रोल में अक्सर ज्यादा चैलेंज होता है और अभिनेता को अपने अभिनय की रेंज दिखाने का मौका मिलता है। एक आउटसाइडर के तौर पर इंडस्ट्री में आपका संघर्ष कैसा रहा? जब मैं मुंबई आया तो मुझे शहर की बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। ऑडिशन के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था। कई बार ‘फिट नहीं’ कहकर मना कर दिया जाता था। मैंने शुरू से तय कर लिया था कि कम से कम 10 साल इस इंडस्ट्री को देने होंगे। यहां कोई गारंटी नहीं है। एक फिल्म मिलने का मतलब यह नहीं कि दूसरी भी मिल जाएगी। हर स्तर पर खुद को साबित करना पड़ता है। धैर्य सबसे जरूरी है। अगर धैर्य नहीं है, तो इस क्षेत्र में टिक पाना मुश्किल है। दर्शकों के लिए द केरला स्टोरी पार्ट 2 खास क्यों है और उन्हें यह फिल्म देखने के लिए क्या संदेश या अनुभव मिलेगा? यह फिल्म बहुत मेहनत से बनी है। निर्देशक से लेकर तकनीकी टीम और कलाकारों तक, सभी ने पूरी लगन से काम किया है। हम नए कलाकार हैं और हमारे लिए दर्शकों का भरोसा बहुत मायने रखता है। हम बस यही चाहते हैं कि दर्शक एक मौका दें। अगर उन्हें हमारा काम पसंद आए, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी।

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘द केरल स्टोरी’ के पहले भाग ने देशभर में तीखी बहस को जन्म दिया था। फिल्म को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब इसका दूसरा भाग एक नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों के सामने आने वाला है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता सुमित गहलावत सलीम नामक एक अहम और परतदार किरदार निभा रहे हैं। लगभग 12 वर्षों से इंडस्ट्री में सक्रिय सुमित का कहना है कि यह उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने फिल्म, विवाद, संघर्ष और अपने सफर पर खुलकर बात की हैं। आपकी फिल्में, जैसे द केरल स्टोरी और बस्तर: द नक्सल स्टोरी, अक्सर राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म देती हैं। एक कलाकार के रूप में आप इन प्रतिक्रियाओं और विवादों को किस नजरिए से देखते हैं? मैं व्यक्तिगत रूप से हर फिल्म को सिर्फ सिनेमा के रूप में देखता हूं। एक अभिनेता के तौर पर मेरा काम है अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना। विषय राजनीतिक है, सामाजिक है या विवादित है यह लेखक और निर्देशक का दृष्टिकोण होता है। मैं स्क्रिप्ट पढ़ते समय यही देखता हूं कि मेरे किरदार में कितनी गहराई है, कितनी चुनौती है और मैं उसमें कितना सच्चापन ला सकता हूं। मैं इस इंडस्ट्री में इसलिए आया हूं ताकि अलग-अलग तरह के रोल निभा सकूं। इसलिए मेरा चयन हमेशा भूमिका और स्क्रिप्ट के आधार पर होता है, किसी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं। ऐसी फिल्मों में ‘प्रोपेगेंडा बनाम सच्चाई’ की बहस शुरू हो जाती है। क्या यह आपको प्रभावित करती है? बहस होना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी दुख इस बात का होता है कि अभिनय की चर्चा पीछे रह जाती है। हम कलाकार महीनों तैयारी करते हैं, मानसिक रूप से किरदार में उतरते हैं, कई सालों के संघर्ष के बाद ऐसे मौके मिलते हैं। जब फिल्म रिलीज होती है तो चर्चा कहानी से ज्यादा राजनीतिक एंगल पर होने लगती है। मैं राजनीति में नहीं पड़ता। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग यह भी देखें कि कलाकार ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर अनुराग कश्यप और प्रकाश राज जैसे फिल्मी हस्तियों ने आलोचना की। इस पर आपका क्या कहना है? मैं इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगा। हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। जरूरी नहीं कि हर फिल्म या ट्रेलर सबको पसंद आए। कई बार हमें भी कोई ट्रेलर पसंद नहीं आता और हम आपस में खुलकर बोल देते हैं। अगर किसी को अच्छा नहीं लगा तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। बहुत से लोग तारीफ भी कर रहे हैं। जो अच्छा कह रहे हैं, उनका भी सम्मान है और जो आलोचना कर रहे हैं, उनका भी। हमारा काम है मेहनत करना और आगे और बेहतर करने की कोशिश करना। ट्रेलर में दिखाए गए एक ‘बीफ’ से जुड़े दृश्य को लेकर विवाद हुआ। क्या उस सीन को हटाने या बदलने पर कोई चर्चा हुई? ऐसे फैसले पूरी तरह निर्देशक और निर्माता के होते हैं। एक अभिनेता के रूप में हमारा काम है कि जो सीन हमें दिया गया है, उसे पूरी सच्चाई और प्रभाव के साथ निभाएं। वह दृश्य भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन अगर दर्शक मेरे किरदार सलीम से नफरत महसूस करते हैं, तो एक अभिनेता के रूप में मैं समझूंगा कि मैंने अपना काम सही तरीके से किया। नेगेटिव किरदार को इस तरह निभाना कि वह वास्तविक लगे यही अभिनय की सफलता है। द केरला स्टोरी पार्ट 2 में आपका किरदार कितना अलग है? इस बार कहानी पूरी तरह नई है। मैं सलीम का किरदार निभा रहा हूं। यह एक लेयर्ड रोल है। शुरुआत में वह पढ़ा-लिखा, समझदार और सभ्य व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन परिस्थितियों के साथ उसका दूसरा रूप सामने आता है। यह किरदार केवल पूरी तरह नकारात्मक या सकारात्मक नहीं है। उसकी एक यात्रा है एक बदलाव है। उस जर्नी को निभाना मेरे लिए बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। नेगेटिव रोल करने से क्या इमेज या फैन बेस पर असर पड़ सकता है? बिल्कुल नहीं। एक अभिनेता का काम हर तरह के भाव निभाना है। अगर आप उदाहरण देखें तो मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकारों ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाएं की हैं। आज दर्शक समझदार हैं। वे जानते हैं कि अभिनेता और उसका किरदार अलग होते हैं। नेगेटिव रोल में अक्सर ज्यादा चैलेंज होता है और अभिनेता को अपने अभिनय की रेंज दिखाने का मौका मिलता है। एक आउटसाइडर के तौर पर इंडस्ट्री में आपका संघर्ष कैसा रहा? जब मैं मुंबई आया तो मुझे शहर की बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। ऑडिशन के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था। कई बार ‘फिट नहीं’ कहकर मना कर दिया जाता था। मैंने शुरू से तय कर लिया था कि कम से कम 10 साल इस इंडस्ट्री को देने होंगे। यहां कोई गारंटी नहीं है। एक फिल्म मिलने का मतलब यह नहीं कि दूसरी भी मिल जाएगी। हर स्तर पर खुद को साबित करना पड़ता है। धैर्य सबसे जरूरी है। अगर धैर्य नहीं है, तो इस क्षेत्र में टिक पाना मुश्किल है। दर्शकों के लिए द केरला स्टोरी पार्ट 2 खास क्यों है और उन्हें यह फिल्म देखने के लिए क्या संदेश या अनुभव मिलेगा? यह फिल्म बहुत मेहनत से बनी है। निर्देशक से लेकर तकनीकी टीम और कलाकारों तक, सभी ने पूरी लगन से काम किया है। हम नए कलाकार हैं और हमारे लिए दर्शकों का भरोसा बहुत मायने रखता है। हम बस यही चाहते हैं कि दर्शक एक मौका दें। अगर उन्हें हमारा काम पसंद आए, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी।

भाजपा नेता के गृह प्रवेश में देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी:मोहल्ले में तनाव, कैलाशपुरी में दो पक्ष आमने-सामने

भाजपा नेता के गृह प्रवेश में देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी:मोहल्ले में तनाव, कैलाशपुरी में दो पक्ष आमने-सामने

रीवा शहर के कैलाशपुरी इलाके में गुरुवार शाम एक भाजपा नेता के घर गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया। आरोप है कि लाउड स्पीकर से देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। घटना के बाद मोहल्ले में आक्रोश फैल गया और कुछ देर के लिए दो पक्ष आमने-सामने आ गए। बैकुंठपुर से भाजपा नेता सीताराम साकेत के घर गृह प्रवेश कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम के दौरान सुबह करीब 10 बजे से लाउड स्पीकर पर भगवान शंकर, मां दुर्गा, भगवान कृष्ण सहित अन्य देवी-देवताओं के लिए अपशब्द कहे जा रहे थे। मोहल्ले की निवासी रागिनी सिंह बघेल ने बताया कि शुरुआत में लगा कि कार्यक्रम का शोर-शराबा है और बात थम जाएगी, लेकिन आपत्तिजनक टिप्पणियां लगातार जारी रहीं। जब वे और अन्य लोग समझाने पहुंचे तो विवाद की स्थिति बन गई और मारपीट जैसी नौबत आ गई। इसके बाद तत्काल डायल 100 को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर फीडबैक लिया। स्थानीय लोगों ने मामले की लिखित शिकायत थाने में देने की बात कही है। इस बीच भाजपा नेता के भतीजे, जो करहिया मंडी में शासकीय सेवक बताए जा रहे हैं, पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उधर, पूरे घटनाक्रम पर भाजपा नेता सीताराम साकेत का कहना है कि उनके घर कार्यक्रम में कई लोग आए थे। “किसी ने कुछ कह दिया होगा। यदि ऐसा हुआ है तो मैं इसे स्वीकार करता हूं और इसके लिए खेद प्रकट करता हूं। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन तनाव का माहौल बना हुआ है।

Congress AI Summit Protest Row; Himachal Pradesh Vs Delhi Police

Congress AI Summit Protest Row; Himachal Pradesh Vs Delhi Police

दिल्ली पुलिस के हिमाचल में गिरफ्तार किए गए यूथ कांग्रेस के 3 नेताओं को कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया जा रहा है। दिल्ली में AI समिट में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने के आरोप में 3 यूथ कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर बुधवार को हिमाचल और दिल्ली पुलिस में टकराव हो गया। दिल्ली पुलिस ने शिमला के एक होटल से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 3 नेताओं को गिरफ्तार किया, . हिमाचल पुलिस का तर्क था कि इस बारे में दिल्ली पुलिस ने कोई औपचारिक सूचना नहीं दी। हिमाचल में सादे कपड़ों में आकर मेहमानों को उठाया गया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी दोनों पुलिस में बहस होती रही। इसके बाद जज ने फाइल तैयार करने को कहा तो दिल्ली पुलिस फिर बिना कागजी कार्रवाई के तीनों नेताओं को ले गई। इसका पता चलते ही हिमाचल पुलिस ने फिर उन्हें रोक लिया। इसके बाद तीनों नेताओं को कोर्ट में पेश कर दिल्ली पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड लिया। करीब 18 घंटे तक दिल्ली और हिमाचल पुलिस के बीच ड्रामा चलता रहा। फिर गुरुवार सुबह करीब पौने 6 बजे दिल्ली पुलिस तीनों नेताओं को लेकर चली गई। दरअसल, 20 फरवरी को इंडियन यूथ कांग्रेस के 11 सदस्यों ने भारत मंडपम में घुसकर AI समिट के दौरान शर्टलैस होकर PM मोदी की फोटो वाली टी-शर्ट लहराई थी। इस दौरान पीएम मोदी कॉम्प्रोमाइज्ड के नारे लगाए थे। दिल्ली में AI समिट के दौरान टी शर्ट उतारकर प्रदर्शन करते हुए युवा कांग्रेस कार्यकर्ता- फाइल फोटो। सिलसिलेवार जानिए पूरा मामला… दिल्ली पुलिस सिविल वर्दी में पहुंची, होटल से 3 नेता अरेस्ट किए दिल्ली पुलिस के 18 कर्मचारियों की टीम सिविल वर्दी में बुधवार, 25 फरवरी सुबह 3 गाड़ियों में सवार होकर शिमला से लगभग 120 किलोमीटर दूर रोहड़ू के चिड़गांव पहुंची। दिल्ली पुलिस को इनपुट था कि AI समिट में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने वाले मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के रहने वाले यूथ कांग्रेस के 3 नेता रोहड़ू के चांशल होटल में ठहरे हैं। जिनके नाम अरबाज, सौरव और सिद्धार्थ हैं। दिल्ली पुलिस ने यहां आकर तीनों को गिरफ्तार कर लिया। सबूत के लिए होटल से सीसीटीवी की डीवीआर और रजिस्टर भी कब्जे में लिया। हिमाचल पुलिस ने 3 जगह नाका लगाकर रोका, नेताओं को छुड़ाया दिल्ली पुलिस तीनों को गिरफ्तार कर ले जाने लगी, तभी हिमाचल पुलिस को इसकी भनक लगी कि उन्हें सूचना दिए बगैर पूरी कार्रवाई की जा रही है। हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस को रोकने के लिए शिमला बस स्टैंड, शोघी और सोलन के धर्मपुर में नाकाबंदी कर दी। इसके बाद एक गाड़ी बस स्टैंड शिमला, दूसरी शोघी और 2 गाड़ियां सोलन के धर्मपुर में रोक दी गईं। हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस के गिरफ्तार किए यूथ कांग्रेस के तीनों नेताओं को छुड़ाकर अपनी कस्टडी में ले लिया और शिमला में चक्कर कोर्ट लेकर पहुंच गई। कोर्ट में चली बहस, हिमाचल पुलिस बोली- प्रॉपर इन्फॉर्मेशन नहीं दी हिमाचल पुलिस के पीछे-पीछे दिल्ली पुलिस की टीम भी शिमला की चक्कर कोर्ट पहुंच गई। बुधवार शाम पौने 5 बजे उन्हें कोर्ट में पेश किया गया और 6 बजे तक सुनवाई चलती रही। सुनवाई के दौरान हिमाचल पुलिस ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली पुलिस ने स्टेट पुलिस को सूचना दिए बगैर यह पूरी कार्रवाई की। प्रॉपर इन्फॉर्मेशन न होने की वजह से दिल्ली पुलिस को रोका गया। दोनों पुलिस के बीच कोर्ट में बहस होती रही। इस पर कोर्ट ने इस मामले की पूरी फाइल तैयार करने को कहा। शिमला के शोघी में शिमला पुलिस ने दिल्ली पुलिस को रोका और पूछताछ की। बिना कोर्ट के आदेश के दिल्ली पुलिस फिर ले गई, हिमाचल पुलिस ने फिर रोके इसके बाद हिमाचल पुलिस के सीनियर अधिकारी लौट गए। फिर वहां जिला कोर्ट में ही दिल्ली और हिमाचल पुलिस में बातचीत चलती रही। इसके बाद बुधवार शाम करीब 7.25 बजे गिरफ्तार यूथ कांग्रेस वर्करों को दिल्ली पुलिस फिर अपने साथ ले गई। दिल्ली पुलिस शिमला से रवाना हो गई। इसके बाद फिर अचानक शिमला के शोघी के पास दिल्ली पुलिस को रोक दिया गया। इसके बाद दोनों राज्यों की पुलिस में बहस और बढ़ गई। हिमाचल पुलिस बोली- वैध दस्तावेज नहीं, FIR की चेतावनी दी हिमाचल पुलिस का कहना था कि दिल्ली पुलिस के पास उनके एरिया से गिरफ्तारी कर ले जाने का कोई वैध दस्तावेज नहीं है। अगर वह कोर्ट के आदेश पर ले जा रहे हैं तो उनके पास ट्रांजिट रिमांड होना चाहिए। इस वजह से वहां देर रात तक बहस चली। हिमाचल पुलिस ने चेतावनी दी कि अगर वह जबरन ले जाने की कोशिश करेंगे तो दिल्ली पुलिस पर FIR दर्ज कर दी जाएगी। इसके बाद हिमाचल पुलिस ने तीनों नेताओं को दिल्ली पुलिस की कस्टडी से अपनी हिरासत में ले लिया। इस दौरान दिल्ली पुलिस के एसीपी राहुल विक्रम ने कहा कि ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद आरोपियों को दिल्ली ले जाया जा रहा था, लेकिन शिमला पुलिस कार्रवाई में बाधा डाल रही है। हालांकि हिमाचल पुलिस का कहना था कि इनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। तीनों का मेडिकल कराया, कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लिया, दिल्ली ले गए इसके बाद बुधवार रात 11.30 बजे हिमाचल पुलिस गिरफ्तार कांग्रेस नेताओं को मेडिकल कराने के लिए शिमला के रिपन अस्पताल लेकर पहुंची। यहां उनका मेडिकल कराया गया। बुधवार रात 2 बजे यूथ कांग्रेस के एडवोकेट ने गिरफ्तार नेताओं से बात की। इसके बाद इन्हें चक्कर कोर्ट के CJM के घर पर पेश किया गया। जहां से उनका ट्रांजिट रिमांड लिया गया। फिर गुरुवार सुबह 5.45 बजे दिल्ली पुलिस तीनों नेताओं को लेकर दिल्ली रवाना हो गए। शिमला से लगभग 15 किलोमीटर दूर शोघी बैरियर पर देर रात मौजूद शिमला और दिल्ली पुलिस के जवान। दिल्ली पुलिस की जांच में क्या निकला दिल्ली पुलिस के सोर्सेज के मुताबिक जिन 3 नेताओं, अरबाज, सौरव और सिद्धार्थ होटल से गिरफ्तार किया गया, उन्हें लोकल कांग्रेसी नेता ने होटल में कमरा दिलाया था। ये तीनों 24 फरवरी से यहां पर गिरफ्तारी से बचने के लिए छुपे हुए थे। हालांकि कमरा किसके नाम पर बुक कराया गया था, इसके बारे में होटल के कागजात खंगाले जा रहे हैं। पुलिस CCTV फुटेज के जरिए यह भी पता लगा रही

NCERT Class 8 Social Science Chapter Removed Over Judicial Corruption Controversy

NCERT Class 8 Social Science Chapter Removed Over Judicial Corruption Controversy

Hindi News National NCERT Class 8 Social Science Chapter Removed Over Judicial Corruption Controversy 5 मिनट पहले कॉपी लिंक यह पहली बार है जब 8वीं के बच्चे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या होता है इसके बारे में पढ़ेंगे। क्लास 8 की सोशल साइंस की टेक्स्टबुक में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ विवाद पर NCERT ने बुधवार को पहली प्रतिक्रिया दी। NCERT ने कहा कि वे ज्यूडिशियरी का बहुत सम्मान करते हैं। किताब में गलती अनजाने में हुई है और NCERT को उस चैप्टर में गलत मटीरियल शामिल करने का अफसोस है। NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्‍स्‍टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्‍कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्‍शन इन द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्‍यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने किताब की बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही कहा कि, विवादित चैप्टर को फिर से लिखा जाएगा। किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र है। अब पढ़िए NCERT का पूरा बयान ‘तय प्रोसेस के अनुसार, NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के लिए सोशल साइंस की टेक्स्टबुक, एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, वॉल्यूम II निकाली। टेक्स्टबुक मिलने पर यह देखा गया कि कुछ गलत टेक्स्ट मटीरियल अनजाने में चैप्टर नंबर 4 में आ गया। मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन ने भी ऐसा ही ऑब्ज़र्वेशन किया और निर्देश दिया कि अगले ऑर्डर तक इस किताब का डिस्ट्रीब्यूशन पूरी तरह से रोक दिया जाए। NCERT दोहराता है कि नई टेक्स्टबुक्स का मकसद संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करना है। स्टूडेंट्स के बीच लिटरेसी, इंस्टीट्यूशनल रिस्पेक्ट, और डेमोक्रेटिक पार्टिसिपेशन की जानकारी देना था। हमारा किसी भी कॉन्स्टिट्यूशनल बॉडी के अधिकार पर सवाल उठाने या उसे कम करने का कोई इरादा नहीं है। NCERT कंस्ट्रक्टिव फीडबैक के लिए तैयार है। इसलिए विवादित चैप्टर को सही अथॉरिटी से सलाह लेकर फिर से लिखा जाएगा और एकेडमिक सेशन 2026-27 के शुरू होने पर क्लास 8 के स्टूडेंट्स को अवेलेबल कराया जाएगा। NCERT एक बार फिर इस फैसले की गलती पर अफसोस जताता है।’ नई किताब में ज्यूडीशियरी से जुड़े अहम पॉइंट्स… इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया है। करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है। ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं। किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं। किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है। बच्चे पढ़ेंगे कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है। चैप्टर में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है। यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है। किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।” CJI बोले- न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे सिब्बल ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह निंदनीय है। सिंघवी ने कहा कि NCERT ने मान लिया है कि राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार है ही नहीं। इसपर CJI सूर्यकांत ने कहा- दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है।मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा। हम इस बारे में और कुछ नहीं कहना चाहते। NCERT की किताब वेबसाइट पर मौजूद नहीं NCERT की 8वीं क्लास की सोशल साइंस का पार्ट 2 इसी हफ्ते जारी हुआ था। CJI की टिप्‍पणी के बाद ये किताब NCERT की वेबसाइट पर उपलब्‍ध नहीं है। एक न्‍यूज रिपोर्ट के मुताबिक किताबों की ऑफलाइन बिक्री भी मंगलवार 24 फरवरी से बंद कर दी गई है। हालांकि अब तक NCERT की तरफ इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। NCERT की वेबसाइट पर किताब का दूसरा पार्ट लिस्ट में मौजूद नहीं है। NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्‍लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्‍स को बदलकर नए टॉपिक्‍स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं। ——————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

NCERT Judicial Corruption Chapter Controversy; CJI Surya Kant

NCERT Judicial Corruption Chapter Controversy; CJI Surya Kant

Hindi News National NCERT Judicial Corruption Chapter Controversy; CJI Surya Kant | 8th Social Science Book नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने NCERT की क्लास 8 की नई किताब में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” का चैप्टर शामिल किए जाने पर नाराजगी जताई है। बुधवार को CJI ने कहा- किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। कानून अपना काम करेगा। कोर्ट इस मामले पर खुद एक्शन लेने के लिए विचार कर रहा है। दरअसल, नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में ज्यूडिशियरी में करप्शन पर एक सेक्शन शुरू किया है। इस चैप्टर में सुप्रीम कोर्ट के 81 हजार, हाईकोर्ट्स के 62 लाख 40, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है। सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुंचा मामला बुधवार को सीनियर एडवोकेट कपिल सिबल ने कोर्ट में NCERT के इस कदम के बारे में बताया। उन्होंने कहा- 8वीं के छात्रों को न्यायिक भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह चिंता का विषय है। हम यहां बार की चिंता लेकर आए हैं। एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सेलेक्टिविटी, यह दूसरे एरिया में भी है लेकिन ज्यूडिशियल करप्शन में नहीं। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह किताब बेसिक स्ट्रक्चर के ही खिलाफ लगती है। CJI सूर्यकांत ने कहा- “प्लीज कुछ दिन इंतजार करें। बार और बेंच सभी परेशान हैं। सभी हाई कोर्ट के जज परेशान हैं। मैं इस मामले को खुद से देखूंगा। कानून अपना काम करेगा। किताब के चैप्टर का एक हिस्सा जिसमें पेंडिंग केस का जिक्र है… नए सेक्शन में ज्यूडीशियरी से जुड़े पॉइंट इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया है। करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है। ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं। किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं। किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है। बच्चे पढ़ेंगे कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है। चैप्टर में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है। यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है। किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।” दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Kerala High Court on The Kerala Story 2: State Image at Risk

Kerala High Court on The Kerala Story 2: State Image at Risk

36 मिनट पहले कॉपी लिंक ‘केरल स्टोरी 2’ का ट्रेलर जारी होते ही फिल्म विवादों में घिर गई है। फिल्म के सर्टिफिकेशन और केरल राज्य को कथित तौर पर गलत तरीके से दिखाए जाने को लेकर केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म राज्य की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान केरल हाई कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केरल एक शांत और सौहार्दपूर्ण राज्य है, लेकिन फिल्म में उसे गलत ढंग से दिखाया गया है, जिससे उसकी छवि प्रभावित हो सकती है। दोपहर बाद जब मामले की दोबारा सुनवाई हुई तो अदालत को बताया गया कि फिल्म के मेकर्स टीजर वापस लेने के लिए तैयार हैं। इसके बाद अदालत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी। उस दिन यह तय किया जाएगा कि कोर्ट 27 फरवरी रिलीज से पहले फिल्म देखेगी या नहीं। हालांकि, दोपहर की सुनवाई से पहले अदालत ने कहा था कि वह कोई भी आदेश देने से पहले फिल्म देखना चाहती है। साथ ही, अदालत ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से यह भी पूछा कि क्या फिल्म सभी आवश्यक दिशानिर्देशों का पालन करती है। बता दें, याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में फिल्म के कुछ हिस्सों में बदलाव की मांग की है, जिसमें फिल्म का टाइटल बदलने की मांग भी शामिल है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) द्वारा सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणित किया गया है, जबकि कथित रूप से यह सिनेमैटोग्राफी अधिनियम, 1952 के प्रावधानों का पालन नहीं करती। शिकायत के अनुसार, विवाद फिल्म के टीजर और ट्रेलर से शुरू हुआ है। इनमें अलग-अलदग राज्यों की महिलाओं की कहानियां दिखाई गई हैं, लेकिन फिल्म का टाइटल ‘केरल स्टोरी’ होने के कारण कथित आतंकवाद, जबरन धर्मांतरण और जनसांख्यिकीय साजिश जैसे मुद्दों को विशेष रूप से केरल से जोड़कर दिखाए गए हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India T20 World Cup 2026 Playing 11 Controversy; Axar Patel Washington Sundar

India T20 World Cup 2026 Playing 11 Controversy; Axar Patel Washington Sundar

स्पोर्ट्स डेस्क4 मिनट पहले कॉपी लिंक वॉशिंगटन सुंदर को अक्षर पटेल की जगह प्लेइंग-11 में शामिल किया गया था। भारत को टी-20 वर्ल्डकप के अपने पहले सुपर-8 मुकाबले में साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद जो बात सबसे ज्यादा चर्चा में रही वो प्लेइंग इलेवन का सिलेक्शन रहा। इस मैच में उपकप्तान अक्षर पटेल की जगह वॉशिंगटन सुंदर को चुना गया। सुंदर के सिलेक्शन को लेकर मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के असिस्टेंट कोच रयान टेन डेशकाटे ने इस पर खुलकर बात की। पावरप्ले को ध्यान में रखकर सिलेक्शन किया गया डेशकाटे ने कहा, हमारी एनालिसिस में हमने पाया कि क्विंटन डी कॉक, रयान रिकलटन और डेविड मिलर ही सबसे बड़ा खतरा होने वाले हैं। जब आप दो विकल्पों में से केवल एक ही चुन सकते हैं तो हमें उसकी ओर जाना पड़ा जो पावरप्ले में गेंदबाजी करने का आदी है। अक्षर भी कभी-कभार पावरप्ले में गेंदबाजी करते हैं। लेकिन हमें लगा कि सुंदर इस स्टेज में ज्यादा प्रभाव छोड़ सकते हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ वॉशिंगटन सुंदर ने 11 रन बनाए थे। वहीं, बॉलिंग में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था। रणनीति पहले से तैयार की गई थी भारत ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ सुंदर से पावरप्ले में उनसे गेंदबाजी नहीं कराई। अर्शदीप सिंह (3 ओवर), जसप्रीत बुमराह (2 ओवर) और वरुण चक्रवर्ती (1 ओवर) ने ही पावरप्ले में बॉलिंग किया। डेशकाटे ने आगे कहा, शुरुआती समझ के हिसाब से ही रणनीति तैयार की गई थी। इस तरह के टूर्नामेंट में आप चाहते और उम्मीद करते हैं कि खिलाड़ी इस बात को समझेंगे कि हर फैसला सही उद्देश्य के साथ लिया जाता है। किसी निर्धारित मैच के लिए हम सबसे मजबूत प्लेइंग इलेवन चुनना चाहते हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि अक्षर भी इसे उसी तरह देखेंगे। सेमीफाइनल के लिए बड़ी जीत जरूरी भारतीय टीम ग्रुप-1 का पहला ही मैच 76 रन के बड़े अंतर से हार गई है। इससे टीम का नेट रन रेट -3.800 हो गया है। ऐसे में टीम इंडिया को अगले दोनों मैच बड़े अंतर से जीतने होंगे। ताकि उसका नेट रन रेट अन्य टीम से बेहतर हो। भारत 76 रन से हारा वर्ल्ड चैंपियन टीम इंडिया को रविवार को साउथ अफ्रीका ने तीसरे सुपर-8 मैच में 76 रन से हराया। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में अफ्रीकी टीम ने टॉस जीतकर बैटिंग चुनी। टीम ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 187 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 18.5 ओवर में 111 रन पर ऑलआउट हो गई। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ पर घमासान:कामाख्या नारायण सिंह ने अनुराग कश्यप को बताया मानसिक रूप से दुर्बल, बीफ सीन पर छिड़ी नई बहस

फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ पर घमासान:कामाख्या नारायण सिंह ने अनुराग कश्यप को बताया मानसिक रूप से दुर्बल, बीफ सीन पर छिड़ी नई बहस

रिलीज से पहले ही विवादों में घिर चुकी ‘द केरल स्टोरी 2’ के निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह ने मशहूर फिल्ममेकर अनुराग कश्यप को अपने तीखे बयान के जवाब में गंभीर आरोप लगाए हैं। यह विवाद खास तौर पर फिल्म के एक सीन को लेकर शुरू हुआ है, जिसमें ट्रेलर में दिखाया गया है कि एक मुस्लिम परिवार एक्ट्रेस को जबरदस्ती गोमांस खिला रहा है। कुछ दिनों पहले अनुराग कश्यप ने इस सीन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि कोई किसी को इस तरह गोमांस नहीं खिलाता, तो क्या खिचड़ी तक कोई जबरदस्ती नहीं खिला सकता। उन्होंने फिल्म को पूरी तरह बकवास और प्रोपगैंडा करार दिया था तथा फिल्म के उद्देश्यों पर भी सवाल उठाए थे। अब इसी टिप्पणी के जवाब में निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने अनुराग कश्यप पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अनुराग मानसिक रूप से दुर्बल” हो गए हैं और उन्हें हर चीज से शिकायत रहती है। चाहे वह फिल्म इंडस्ट्री हो, ब्राह्मण समुदाय हो या नेटफ्लिक्स। कामाख्या ने कहा, “अनुराग कश्यप जी अब मानसिक रूप से दुर्बल हो गए हैं। इनको हर चीज से दिक्कत है।” कामाख्या ने अपने वीडियो में यह भी कहा कि समाज में कुछ निर्दोष लड़कियों को धर्म परिवर्तन कराने के लिए गोमांस खिलाया जाता है, और यह एक गंभीर अपराध है। उन्होंने अनुराग कश्यप की फिल्म ‘ द गर्ल इन येलो बूट्स’ का भी जिक्र किया और उस पर तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अनुराग ने उस फिल्म में एक पिता-बेटी के रिश्ते को अवैध तरीके से दर्शाया था, जो सभ्य समाज में सोचना भी मुश्किल है। सिंह ने कहा कि अनुराग की फिल्में पिछले कुछ समय से फ्लॉप चल रही हैं और वह चाहते हैं कि उन्हें अक्ल आए। उन्होंने यह भी कहा कि ‘द केरल स्टोरी 2’ तथ्यों पर आधारित है और ट्रेलर को दर्शकों द्वारा अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। दूसरी तरफ, अनुराग कश्यप ने मीडिया से बातचीत में फिल्म को बकवास बताते हुए कहा था कि इससे विभाजन और सौहार्द को नुकसान पहुँच सकता है। यह विवाद तब और बढ़ गया जब कई फिल्म हस्तियों और राजनीतिक हस्तियों ने भी फिल्म पर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। फिल्म 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है, लेकिन इस विवाद ने पहले से ही इसके आसपास बहस का एक बड़ा विषय तैयार कर दिया है।