Wednesday, 12 Aug 2026 | 12:47 PM

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Govinda on David Dhawan: Affair was Dangerous for Career

Govinda on David Dhawan: Affair was Dangerous for Career

2 घंटे पहले कॉपी लिंक 90 के दशक में बॉलीवुड को कई सुपरहिट कॉमेडी फिल्में देने वाली गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी की कड़वाहट एक बार फिर सामने आई है। गोविंदा ने हाल ही में इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि डेविड धवन उनके प्रति वफादार नहीं थे। गोविंदा के मुताबिक, जब उन्हें लगा कि मामला अब उनके करियर के लिए खतरनाक हो रहा है, तो उन्होंने इस जोड़ी से दूरी बनाना ही बेहतर समझा। गोविंदा ने कहा, मुझे ऐसा लगता है कि डेविड अपने बेटे वरुण के साथ वैसी फिल्में नहीं कर पाएंगे जैसी उन्होंने मेरे साथ की थीं। गोविंद और डेविड की जोड़ी ने साल 2007 में फिल्म ‘पार्टनर’ में आखिरी बार काम किया था। गोविंदा बोले- डेविड के मन में कुछ और था इंटरव्यू में गोविंदा ने डेविड धवन अपने काम के प्रति तो ईमानदार थे, लेकिन एक दोस्त और एक्टर के तौर पर वफादार नहीं रहे। उन्होंने आगे कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में वफादारी का बहुत महत्व है। अगर आपकी वफादारी किसी और के प्रति है, तो ईमानदारी पर सवाल उठेंगे ही। मुझे कभी नहीं लगा कि वह कोई अजनबी हैं, लेकिन मुझे महसूस हुआ कि कुछ लोग उन्हें मेरे खिलाफ भड़का रहे थे।गोविंदा ने बताया कि एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें लगा कि अब चीजें हाथ से बाहर निकल रही हैं। उन्होंने कहा, मुझे लगा कि ये मामला अब खतरनाक हो गया है, इसलिए इससे बाहर निकलना ही ठीक है। बता दें कि साल 2007 में फिल्म ‘पार्टनर’ के लिए यह जोड़ी दोबारा साथ आई थी। गोविंदा ने ही डेविड को सलाह दी थी कि इस फिल्म में सलमान खान को साथ लिया जाए। फिल्म ब्लॉकबस्टर रही, लेकिन इसके बाद दोनों ने फिर कभी साथ काम नहीं किया। 90 के दशक में गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी ने करीब 15 सुपरहिट फिल्में दीं। चश्मे बद्दूर’ फिल्म ने बढ़ाई थी कड़वाहट गोविंदा और डेविड के बीच दरार तब और गहरी हुई जब 2013 में ‘चश्मे बद्दूर’ की रीमेक बनी। गोविंदा का दावा है कि इस फिल्म का आइडिया उन्होंने ही डेविड को दिया था, लेकिन डेविड ने उन्हें बिना बताए फिल्म किसी और के साथ बना ली। गोविंदा ने कहा कि जब उन्होंने अपनी 18वीं फिल्म साथ करने के लिए डेविड को फोन किया, तो डायरेक्टर ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। वरुण धवन के साथ वैसा जादू मुश्किल इंटरव्यू के दौरान जब गोविंदा से वरुण धवन के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि डेविड अब वही सफलता अपने बेटे के साथ दोहराना चाहते हैं। गोविंदा बोले, मुझे ऐसा लगता है कि वह अपने बेटे के साथ वैसी फिल्में नहीं कर पाएंगे जैसी उन्होंने मेरे साथ की थीं। वैसा जादू दोबारा क्रिएट करना बहुत मुश्किल काम है। सुपरहिट रही गोविंदा-डेविड धवन की जोड़ी 90 के दशक में गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी ने मिलकर ‘कुली नंबर 1’, ‘हीरो नंबर 1’, ‘साजन चले ससुराल’ और ‘राजा बाबू’ जैसी करीब 15 सुपरहिट फिल्में दीं। उस दौर में डेविड के निर्देशन और गोविंदा की कॉमेडी का बॉक्स ऑफिस पर एकतरफा राज था, लेकिन बाद में आपसी मनमुटाव के कारण यह जोड़ी टूट गई। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को मिली धमकियां:बताया क्यों नहीं हैं द केरल स्टोरी पार्ट 2 में शामिल, ‘चरक’ से लौटे, हाथरस कांड को लाएंगे सामने

डायरेक्टर सुदीप्तो सेन को मिली धमकियां:बताया क्यों नहीं हैं द केरल स्टोरी पार्ट 2 में शामिल, ‘चरक’ से लौटे, हाथरस कांड को लाएंगे सामने

‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन एक बार फिर अपनी नई फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ को लेकर सुर्खियों में हैं। सामाजिक और संवेदनशील मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले सेन इस बार आस्था और अंधविश्वास के टकराव को बड़े पर्दे पर पेश कर रहे हैं। ‘चरक’ केवल एक ऐतिहासिक उत्सव की कहानी नहीं है, बल्कि परंपरा, तर्क, समाज और अंधविश्वास के बीच के जटिल संबंधों को दिखाने की कोशिश है। फिल्म की रिसर्च प्रक्रिया, विवाद, सेंसर बोर्ड के मुद्दे, आलोचनाओं और उनके खिलाफ उठ रही आवाजों के बारे में सुदीप्तो ने खुलकर अपने विचार साझा किए हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में सुदीप्तो ने बताया कि उनके लिए सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज से सवाल पूछने और जागरूकता फैलाने का एक जरिया है। ‘द केरल स्टोरी’ के बाद आप फिर एक सामाजिक मुद्दे पर फिल्म लेकर आ रहे हैं। ‘चरक फेयर ऑफ फेथ’ के बारे में बताइए। कितनी रिसर्च की गई है? ‘चरक’ कोई नई परंपरा नहीं है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि यह उत्सव लगभग एक हजार साल से भी अधिक समय से पूर्वी भारत बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड साथ ही दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में मनाया जाता रहा है। चैत्र महीने (करीब 15 मार्च से 15 मई) के बीच यह उत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित होता है। पश्चिम बंगाल में जैसे दुर्गा पूजा की लोकप्रियता है, उसी तरह ‘चरक’ भी अत्यंत लोकप्रिय है। इसे मां काली और भगवान शिव की आराधना से जोड़ा जाता है। लोकविश्वास है कि इस दौरान देवी-देवता धरती पर आकर भक्तों के बीच निवास करते हैं। बचपन में हम जेब खर्च बचाकर इस मेले का इंतजार करते थे। हजारों लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम इससे जुड़े हैं। लेकिन इस उत्सव का एक दूसरा पक्ष भी है तांत्रिक साधनाएं और अघोरी प्रथाएं। इतिहास में कुछ स्थानों पर ऐसी प्रथाएं रही हैं, जिन्हें अब कानूनन प्रतिबंधित किया जा चुका है। हमारी फिल्म इसी ‘फेथ’ यानी आस्था और अंधविश्वास के बीच की रेखा को सवालों के कटघरे में खड़ा करती है। आपकी फिल्में अक्सर विवादों में घिर जाती हैं। क्या आपको लगता है लोग सच से डरते हैं? हमारे समाज में विज्ञान, तर्क और शिक्षा को हम सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हैं। जहां हमें फायदा दिखता है, वहां लॉजिक अपनाते हैं, और जहां परंपरा टकराती है, वहां चुप हो जाते हैं। मैं एक उदाहरण देता हूं। कई घरों में लड़कियों को रात में खुले बाल लेकर बाहर न जाने या कुछ विशेष रंग के कपड़े न पहनने की सलाह दी जाती है। इन बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता, लेकिन वे पीढ़ियों से चली आ रही हैं। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब अंधविश्वास हिंसा में बदल जाता है। जैसे किसी दंपती को संतान न हो तो किसी मासूम की बलि देने की सोच, यह भयावह है। हाथरस की एक घटना ने मुझे झकझोर दिया, जहां कथित तौर पर स्कूल का रिजल्ट सुधारने के नाम पर एक बच्चे की बलि देने की बात सामने आई। जब तक समाज इन घटनाओं पर सवाल नहीं उठाएगा, तब तक बदलाव कैसे आएगा? ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज डेट टल गई है। आप इस प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा रहे हैं। इसे आप कैसे देखते हैं? लोकतंत्र में असहमति स्वाभाविक है। आप किसी फिल्म से असहमत हो सकते हैं, आलोचना कर सकते हैं, बहस कर सकते हैं। लेकिन कला को रोक देना समाधान नहीं है। मेरे लिए आर्ट का काम है जो सच दबाया जा रहा है, उसे सामने लाना। सरकारें आएंगी-जाएंगी, राजनीतिक दल बदलेंगे, लेकिन समाज और आने वाली पीढ़ियां यहीं रहेंगी। इसलिए कलाकार की जिम्मेदारी है कि वह ईमानदारी से अपनी बात कहे। ‘द केरल स्टोरी 2’ में आप निर्देशक के तौर पर नजर नहीं आएंगे। इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या प्रोडक्शन टीम के साथ किसी प्रकार का मतभेद हुआ था? ऐसी कोई अनबन नहीं है। शुरुआत में मुझे ही निर्देशन करना था, लेकिन कहानी का दायरा केरल से आगे बढ़ाया गया। मेरा रिसर्च मुख्यतः केरल पर आधारित था और मैंने उस पर लगभग दस साल काम किया। मैं अखबार की खबरों या सोशल मीडिया फॉरवर्ड के आधार पर फिल्म नहीं बना सकता। जिस विषय को छूता हूं, उस पर गहन अध्ययन करता हूं। इसलिए मैंने आगे बढ़ने का फैसला किया। ‘द केरल स्टोरी’ और ‘बस्तर’ के बाद आपको धमकियां भी मिलीं। क्या कभी डर लगा? सच कहूं तो हां, शुरुआत में डर लगा। ‘द केरला स्टोरी’ के बाद और खासकर ‘बस्तर’ के दौरान मेरे नाम पर बाकायदा “रेट कार्ड” चल रहा था किसी ने कहा आंख निकालने का इतना, हाथ काटने का इतना। ये सब सोशल मीडिया पर फैलाया गया। एक-दो दिन के लिए मन में डर आया, लेकिन फिर लगा कि अगर मैं डर गया तो फिल्म बनाना ही छोड़ दूं। मैं यह मानने को तैयार नहीं हूं कि कोई फिल्म सिर्फ प्रोपेगेंडा के दम पर इतनी बड़ी सफलता हासिल कर सकती है। अगर दर्शक जुड़ते हैं तो उसकी वजह कहानी होती है, इरादा होता है। फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के पार्ट 2 को लेकर कई फिल्मकारों ने भी प्रतिक्रिया दी है। अनुराग कश्यप ने इसे ‘बकवास’ कहा, वहीं प्रकाश राज ने भी फिल्म को बेकार बताया। आप इन आलोचनाओं को कैसे देखते हैं? देखिए, लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है। अगर अनुराग कश्यप या प्रकाश राज को मेरी फिल्म पसंद नहीं आई, तो उन्हें यह कहने की पूरी स्वतंत्रता है। मैं उनके अधिकार का सम्मान करता हूं। लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी फिल्म को ट्रेलर या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर जज नहीं करना चाहिए। पूरी फिल्म देखने के बाद असहमति हो तो खुलकर आलोचना कीजिए, बहस कीजिए। हमारा संविधान हमें सवाल करने और तर्क करने का अधिकार देता है। आप सोशल मीडिया पर लिखिए, लेख लिखिए, चर्चा कीजिए मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन किसी फिल्म को रुकवाने या बैन करने की मांग करना सही परंपरा नहीं है। अगर आपको फिल्म खराब लगती है तो दर्शकों से कहिए कि मत देखिए। लेकिन कला को रोकना समाधान नहीं है। कला नदी की तरह है उसे

‘धुरंधर में अक्षय खन्ना के रोल पर उठा सवाल:शोभा डे बोलीं- प्रमोशन में किरदार और डांस मूव्स को बढ़ा-चढ़ाकर किया गया पेश

‘धुरंधर में अक्षय खन्ना के रोल पर उठा सवाल:शोभा डे बोलीं- प्रमोशन में किरदार और डांस मूव्स को बढ़ा-चढ़ाकर किया गया पेश

राइटर-कॉलमिस्ट शोभा डे ने फिल्म धुरंधर में अक्षय खन्ना के रोल को लेकर हो रही हाइप पर सवाल उठाया। एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा कि उनके रोल और डांस मूव्स को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है। शोभा डे ने रेडिफ ओरिजिनल्स पॉडकास्ट में फिल्म के बारे में अपनी राय शेयर करते हुए कहा, “मुझे लगा कि जिस तरह का माहौल बनाया गया, वह थोड़ा मैनिपुलेटिव था। ऐसा दिखाया गया मानो अक्षय खन्ना रणवीर से बड़े स्टार हों और उन्होंने पूरी फिल्म को अपने दम पर संभाल लिया हो। उनके डांस को भी खास तरह से पेश किया गया। हालांकि डांस वाकई शानदार था और वायरल भी हुआ, लेकिन उसे जिस तरह प्रमोट किया गया, वह सोच-समझकर बनाई गई रणनीति जैसा लगा।” वहीं, जब पॉडकास्ट में फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर जब ऋतिक रोशन के बयान का जिक्र किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें फिल्म पसंद आई, लेकिन वह इसकी राजनीति से सहमत नहीं हैं, शोभा डे ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी ने ऋतिक से यह नहीं पूछा था कि वह फिल्म की राजनीति से सहमत हैं या नहीं। उनके मुताबिक, यह उनकी अपनी पसंद थी कि उन्होंने इस पहलू पर टिप्पणी की। शोभा डे ने हल्के अंदाज में कहा कि वह चाहते तो सिर्फ इतना कह सकते थे कि उन्हें फिल्म पसंद आई। राजनीति पर राय देना जरूरी नहीं था। फिल्म को लेकर ऋतिक ने क्या कहा था? बता दें कि ऋतिक ने फिल्म देखने के बाद इंस्टाग्राम पर लिखा था कि उन्हें फिल्म की स्टोरीटेलिंग पसंद आई। उन्होंने कहा था कि वह फिल्म की राजनीति से सहमत नहीं हैं, लेकिन सिनेमा के स्टूडेंट के तौर पर उन्होंने इससे बहुत कुछ सीखा। ऋतिक ने लिखा, “मुझे सिनेमा पसंद है। मुझे वे लोग पसंद हैं जो कहानी में पूरी तरह डूब जाते हैं। धुरंधर इसका उदाहरण है। मुझे इसकी कहानी कहने का तरीका अच्छा लगा। मैं इसकी राजनीति से सहमत नहीं हूं। फिर भी इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” हालांकि, कुछ घंटों बाद उन्होंने एक्स और इंस्टाग्राम पर फिर पोस्ट किया। उन्होंने डायरेक्टर आदित्य धर और एक्टर रणवीर सिंह की तारीफ की। उन्होंने लिखा कि फिल्म अभी भी उनके दिमाग में चल रही है। फिल्म धुरंधर 5 दिसंबर को रिलीज हुई थी। इसमें रणवीर सिंह एक भारतीय जासूस बने थे। रणवीर के अलावा फिल्म में अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर माधवन भी थे। फिल्म ने दुनियाभर में 1300 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजनेस किया था।

Badshah Visits Sonipat for Teteri Song Promotion, Jokes on Sarpanch Controversy

Badshah Visits Sonipat for Teteri Song Promotion, Jokes on Sarpanch Controversy

राम सिंहमार, सोनीपत5 घंटे पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड मशहूर रैपर एवं सिंगर बादशाह सोनीपत के गांव असदपुर नांदनोर पहुंचे और अपने नए सॉन्ग टटीरी पर परफोर्मेंस दी। कैथल के पट्‌टी अफगान गांव में भी सिंगर ने हरियाणवी सॉन्ग पर जमकर ठुमके लगाए। बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह ने हरियाणवी फॉक सॉन्ग टटीरी का रैप वर्जन रिकॉर्ड किया है। इसी सिलसिले में सिंगर अपनी टीम के साथ सोनीपत के गांव असदनपुर-नांदनोर पहुंचे, यहां उन्हें बैल-बुग्गी पर बैठाकर गांव की गलियों में घुमाया गया। सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी खाना खाया। गांव के स्कूल में रखे गए कार्यक्रम के दौरान मंच से घोषणा की गई कि सिंगर बादशाह असदपुर और नांदनोर गांवों के सरपंचों का सम्मानित करेंगे। इस पर सिंगर ने माइक थामकर कहा- वैसे तो इन लोगों को मुझे सम्मानित करना चाहिए था। फिर मजाकिया अंदाज में बोले-मासूम शर्मा वाली वीडियो तो देखी ही होगी आपने…। दरअसल, जींद में 18 फरवरी को हुए कार्यक्रम के दौरान हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने चिल्लाकर पूर्व सरपंच को मंच से उतार दिया था। कहा था- मेरे गाने के प्रोग्राम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। आप चाहे सरपंच हो मेरा परफॉर्मेंस नीचे बैठकर देखो। फिलहाल, यह बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सरपंच एसोसिएशन ने सिंगर को माफी मांगने के लिए 3 दिन की मोहलत दे रखी है। यह भी कह रखा है कि जब तक मासूम शर्मा सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगेंगे, हरियाणा प्रदेश की किसी भी पंचायत में उनके शो आयोजित नहीं होने दिए जाएंगे। कैथल में हरियाणवी सॉन्ग पर डांस करते रैपर बादशाह। अपने नए गीत ‘टटीरी’ के प्रमोशन के सिलसिले में बादशाह बुग्गी में बैठकर गांव पहुंचे। उन्होंने बच्चों के बीच रैप किया। बच्चे झूमते नजर आए और खुशी जाहिर की। एक छोटी बच्ची को गोद में उठाकर भी उन्होंने डांस किया। सिंगर बदमाश को देखने के लिए खूब भीड़ जुटी। यहां जानिए बॉलीवुड रैपर-सिंगर बादशाह का कैसा हुआ वेलकम… ढोल के साथ बुग्गी पर बैठाकर लाए ग्रामीण : सिंगर बादशाह के गांव में पहुंचने की सूचना से ग्रामीण जुट गए। गांव की सीमा पर ढोल बजाकर उनका स्वागत किया गया और फूलमालाएं पहनाई गईं। अनुराज आंतिल, सरपंच राजवीर आंतिल सहित अन्य व्यक्तियों ने उनका अभिनंदन किया। गांव की एंट्री पर उनके लिए विशेष रूप से बैल-बुग्गी मंगवाई गई। बुग्गी पर गद्दे बिछाए गए और करीब 500 मीटर तक उन्हें बुग्गी में बैठाकर राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मैदान स्थित कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। बच्चों में दिखा जबरदस्त उत्साह, म्यूजिक सिस्टम भेंट किया : बादशाह को देखने के लिए बच्चे दौड़ते हुए पहुंचे। कई बच्चे हाथों में उनके पोस्टर लिए खड़े नजर आए। विद्यार्थियों के लिए बादशाह ने 40 हजार रुपए का सोनी कंपनी का म्यूजिक सिस्टम गिफ्ट किया। हरियाणवी संस्कृति और संगीत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्यालय को यह स्पीकर सेट भेंट किया गया। मंच से बच्चों संग मस्ती, ‘पार्टी’ का एलान: मंच से संबोधित करते हुए बादशाह ने बच्चों से पूछा कि आज स्कूल लगा था या छुट्टी थी। बच्चों ने जवाब दिया कि छुट्टी हो गई है। इस पर बादशाह ने कहा, “अब पार्टी करनी है… पार्टी करनी है तो शोर मचाओ…”। हरियाणवी अंदाज में बच्चों ने जोरदार किलकी लगाई। उन्होंने मंच से एक बुजुर्ग ताऊ को आवाज देते हुए कहा, “राम-राम ताऊ… तन्ये पार्टी नहीं करनी के…”। ग्राम प्रतिनिधियों ने किया सम्मान : इस दौरान सरपंच रणवीर उर्फ नाना, सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू, जिला प्रसाद संत कुमार अंतिल और राजबीर अंतिल एडवोकेट सहित अन्य गणमान्य लोगों ने बादशाह का स्वागत किया। ग्राम प्रतिनिधियों और आयोजन समिति की ओर से भी उन्हें सम्मानित किया गया। बादशाह ने सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी भोजन का आनंद लिया। सरपंच के घर देसी पकवानों का आनंद गांव पहुंचने के बाद बादशाह ने सरपंच मुकेश उर्फ बल्लू के घर पर देसी भोजन का आनंद लिया। घर में सरपंच की पत्नी और उनकी मां मक्की की रोटी बनाती नजर आई। वीडियो में बादशाह पीछे खड़े होकर पूछते दिखाई दिए कि “सरसों का है या किसी और का…”, जिस पर जवाब मिला कि सरसों का साग है। बादशाह की टीम के हिमाचल से आए एक सदस्य ने पूछा कि आप क्या कहना चाहोगे, तो बादशाह ने हंसते हुए कहा, “आज तक तूने मुझे कुछ नहीं खिलाया है…” इसके बाद उन्होंने सरसों का साग, मक्की की रोटी, मक्खन और लस्सी के साथ भोजन किया। मंच से “मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है ना…” कहकर चल रहे सरपंच विवाद पर भी हल्के-फुल्के अंदाज में मजे लिए, जिससे माहौल में जोश और बढ़ गया। सम्मान समारोह में बादशाह ने सिंगर मासूम शर्मा का जिक्र किया कार्यक्रम के दौरान सरपंच रणवीर सिंह मंच संभाले हुए थे। उन्होंने कहा कि बादशाह ने गांव को जो प्रेरणा दी है, उसके लिए पूरा गांव आभारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वह हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे संसार की शान हैं। सरपंच रणवीर सिंह उर्फ नाना ने कहा कि असदपुर और नांदनोर एक ही गांव हैं और दोनों का एक ही सरकारी स्कूल है। दोनों सरपंचों को बादशाह सम्मानित करेंगे। बादशाह ने मजाकिया अंदाज में कहा कि “वैसे तो इन्हें मुझे सम्मानित करना चाहिए…” रणवीर सिंह ने जवाब दिया कि बादशाह को पहले ही सम्मानित किया जा चुका है और “हम उल्हाणा नहीं ओटेंगे…” बादशाह ने रणवीर सिंह और बल्लू प्रधान को पटका पहनाकर सम्मानित किया। इसी बीच बादशाह ने माइक लेकर कहा, “मासूम शर्मा वाली वीडियो देखी है ना…” इतना सुनते ही भीड़ में किलकियां गूंज उठी। बता दें कि इन दिनों मासूम शर्मा और सरपंचों के बीच विवाद चर्चा में है। वहीं मंच पर सरपंचों को सम्मानित करवाए जाने के दौरान बादशाह ने इसी संदर्भ में मंच से मासूम शर्मा के वीडियो को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की गई, जिसकी गांव में खूब चर्चा रही। —————- ये खबर भी पढ़ें… हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच को धमकाया, VIDEO:मंच से उतारकर बोले- MLA-मंत्री तक को कुछ नहीं समझता, भीड़ से भी धक्का-मुक्की की हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। एक लाइव शो के दौरान उन्होंने स्टेज पर खड़े पूर्व सरपंच व समर्थकों पर चिल्लाते

Karan Aujla Delhi Show Controversy

Karan Aujla Delhi Show Controversy

करन औजला के दिल्ली शो से पहले विवाद बढ़ा। नोटिस जारी हुआ। (फाइल फोटो) पंजाबी सिंगर करन औजला दिल्ली में ‘पी पॉप कल्चर इंडिया टूर’ से पहले मुश्किल में फंस गए हैं। औजला इस शो में अपने कई हिट सॉन्ग नहीं गा पाएंगे। वो यहां अपने कई हिट गाने जैसे ‘अधिया’, ‘चिट्टा कुर्ता’, ‘एल्कोहल 2’, ‘फ्यू डे’ और ‘बंदूक’ पर परफॉर्म करने वाले . दरअसल, साउथ ईस्ट दिल्ली की चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट ने औजला के गानों को लेकर शो के आयोजकों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि लाइव शो में शराब और ड्रग को ग्लोरिफाई करने वाले गाने नहीं गाने चाहिए। इस संबंध में चंडीगढ़ के प्रोफेसर धरनेरव राव ने एक आवेदन दायर किया था। उन्होंने मांग की थी कि ऐसे गानों से शराब की खपत, ड्रग्स के इस्तेमाल, गन कल्चर और महिलाओं के प्रति असम्मान को बढ़ावा मिलता है, इसलिए इन पर रोक लगाई जानी चाहिए। सिंगर करन औजला के शो को लेकर नोटिस जारी। अब जानिए क्या है पूरा मामला… गानों में ड्रग-गन कल्चर को बढ़ावा देने की बातः दरअसल, शिकायतकर्ता चंडीगढ़ के प्रोफेसर धरनेरव राव ने आरोप लगाया है कि करण औजला के गाने शराब की खपत, ड्रग्स एब्यूज, गन कल्चर को ग्लोरिफाई करते हैं और महिलाओं के प्रति अपमान को दिखाते है। इसके बाद यह नोटिस जारी हुआ है। हाईकोर्ट के फैसले का हवाला दियाः नोटिस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 22 जुलाई 2019 के फैसले (CWP No. 6213 of 2016) का हवाला दिया गया है। जिसमें स्पष्ट निर्देश हैं कि पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में कोई भी लाइव शो या इवेंट में शराब, ड्रग्स, हिंसा को ग्लोरिफाई करने वाले गाने नहीं बजाए/गाए जाएं। कोर्ट ने डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को इसकी सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के आदेश दिए थे। नोटिस में ये कहा गयाः नोटिस में कहा गया है कि चूंकि इवेंट में बच्चे भी मौजूद रहेंगे, इसलिए ऐसे गानों की परफॉर्मेंस से बचना चाहिए। गैर-पालना पर हाईकोर्ट की अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। आयोजकों को ईमेल के जरिए यह निर्देश भेजा गया है। हाईकोर्ट के निर्देश में यह कहा गया था प्रोफेसर राव की तरफ से यूनिट को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेश की कॉपी दी गई थी। जिसमें पंजाब, हरियाणा और संघ शासित प्रदेश, चंडीगढ़ में पुलिस के डीजीपी को निर्देश दिया गया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसी भी गीत में, यहां तक ​​कि लाइव शो में भी, शराब, मादक पदार्थों और हिंसा का महिमामंडन करने वाले गाने न बजाए जाएं। उस आर्डर में यह भी कहा गया है कि 12 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को सिनेमा हॉल/मल्टीप्लेस में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जहां “ए” प्रमाणपत्र वाली फिल्में प्रदर्शित की जाती हैं। जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि पंजाब, हरियाणा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के किसी भी जिले में शैक्षणिक संस्थान के पास नग्न पोस्टर, अर्ध-निर्मित पोस्टर और अश्लील पोस्टर प्रदर्शित न किए जाएं।

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘द केरल स्टोरी’ के पहले भाग ने देशभर में तीखी बहस को जन्म दिया था। फिल्म को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब इसका दूसरा भाग एक नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों के सामने आने वाला है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता सुमित गहलावत सलीम नामक एक अहम और परतदार किरदार निभा रहे हैं। लगभग 12 वर्षों से इंडस्ट्री में सक्रिय सुमित का कहना है कि यह उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने फिल्म, विवाद, संघर्ष और अपने सफर पर खुलकर बात की हैं। आपकी फिल्में, जैसे द केरल स्टोरी और बस्तर: द नक्सल स्टोरी, अक्सर राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म देती हैं। एक कलाकार के रूप में आप इन प्रतिक्रियाओं और विवादों को किस नजरिए से देखते हैं? मैं व्यक्तिगत रूप से हर फिल्म को सिर्फ सिनेमा के रूप में देखता हूं। एक अभिनेता के तौर पर मेरा काम है अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना। विषय राजनीतिक है, सामाजिक है या विवादित है यह लेखक और निर्देशक का दृष्टिकोण होता है। मैं स्क्रिप्ट पढ़ते समय यही देखता हूं कि मेरे किरदार में कितनी गहराई है, कितनी चुनौती है और मैं उसमें कितना सच्चापन ला सकता हूं। मैं इस इंडस्ट्री में इसलिए आया हूं ताकि अलग-अलग तरह के रोल निभा सकूं। इसलिए मेरा चयन हमेशा भूमिका और स्क्रिप्ट के आधार पर होता है, किसी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं। ऐसी फिल्मों में ‘प्रोपेगेंडा बनाम सच्चाई’ की बहस शुरू हो जाती है। क्या यह आपको प्रभावित करती है? बहस होना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी दुख इस बात का होता है कि अभिनय की चर्चा पीछे रह जाती है। हम कलाकार महीनों तैयारी करते हैं, मानसिक रूप से किरदार में उतरते हैं, कई सालों के संघर्ष के बाद ऐसे मौके मिलते हैं। जब फिल्म रिलीज होती है तो चर्चा कहानी से ज्यादा राजनीतिक एंगल पर होने लगती है। मैं राजनीति में नहीं पड़ता। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग यह भी देखें कि कलाकार ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर अनुराग कश्यप और प्रकाश राज जैसे फिल्मी हस्तियों ने आलोचना की। इस पर आपका क्या कहना है? मैं इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगा। हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। जरूरी नहीं कि हर फिल्म या ट्रेलर सबको पसंद आए। कई बार हमें भी कोई ट्रेलर पसंद नहीं आता और हम आपस में खुलकर बोल देते हैं। अगर किसी को अच्छा नहीं लगा तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। बहुत से लोग तारीफ भी कर रहे हैं। जो अच्छा कह रहे हैं, उनका भी सम्मान है और जो आलोचना कर रहे हैं, उनका भी। हमारा काम है मेहनत करना और आगे और बेहतर करने की कोशिश करना। ट्रेलर में दिखाए गए एक ‘बीफ’ से जुड़े दृश्य को लेकर विवाद हुआ। क्या उस सीन को हटाने या बदलने पर कोई चर्चा हुई? ऐसे फैसले पूरी तरह निर्देशक और निर्माता के होते हैं। एक अभिनेता के रूप में हमारा काम है कि जो सीन हमें दिया गया है, उसे पूरी सच्चाई और प्रभाव के साथ निभाएं। वह दृश्य भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन अगर दर्शक मेरे किरदार सलीम से नफरत महसूस करते हैं, तो एक अभिनेता के रूप में मैं समझूंगा कि मैंने अपना काम सही तरीके से किया। नेगेटिव किरदार को इस तरह निभाना कि वह वास्तविक लगे यही अभिनय की सफलता है। द केरला स्टोरी पार्ट 2 में आपका किरदार कितना अलग है? इस बार कहानी पूरी तरह नई है। मैं सलीम का किरदार निभा रहा हूं। यह एक लेयर्ड रोल है। शुरुआत में वह पढ़ा-लिखा, समझदार और सभ्य व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन परिस्थितियों के साथ उसका दूसरा रूप सामने आता है। यह किरदार केवल पूरी तरह नकारात्मक या सकारात्मक नहीं है। उसकी एक यात्रा है एक बदलाव है। उस जर्नी को निभाना मेरे लिए बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। नेगेटिव रोल करने से क्या इमेज या फैन बेस पर असर पड़ सकता है? बिल्कुल नहीं। एक अभिनेता का काम हर तरह के भाव निभाना है। अगर आप उदाहरण देखें तो मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकारों ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाएं की हैं। आज दर्शक समझदार हैं। वे जानते हैं कि अभिनेता और उसका किरदार अलग होते हैं। नेगेटिव रोल में अक्सर ज्यादा चैलेंज होता है और अभिनेता को अपने अभिनय की रेंज दिखाने का मौका मिलता है। एक आउटसाइडर के तौर पर इंडस्ट्री में आपका संघर्ष कैसा रहा? जब मैं मुंबई आया तो मुझे शहर की बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। ऑडिशन के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था। कई बार ‘फिट नहीं’ कहकर मना कर दिया जाता था। मैंने शुरू से तय कर लिया था कि कम से कम 10 साल इस इंडस्ट्री को देने होंगे। यहां कोई गारंटी नहीं है। एक फिल्म मिलने का मतलब यह नहीं कि दूसरी भी मिल जाएगी। हर स्तर पर खुद को साबित करना पड़ता है। धैर्य सबसे जरूरी है। अगर धैर्य नहीं है, तो इस क्षेत्र में टिक पाना मुश्किल है। दर्शकों के लिए द केरला स्टोरी पार्ट 2 खास क्यों है और उन्हें यह फिल्म देखने के लिए क्या संदेश या अनुभव मिलेगा? यह फिल्म बहुत मेहनत से बनी है। निर्देशक से लेकर तकनीकी टीम और कलाकारों तक, सभी ने पूरी लगन से काम किया है। हम नए कलाकार हैं और हमारे लिए दर्शकों का भरोसा बहुत मायने रखता है। हम बस यही चाहते हैं कि दर्शक एक मौका दें। अगर उन्हें हमारा काम पसंद आए, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी।

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘अनुराग कश्यप ने ट्रेलर कहा बकवास:सुमित गहलावत बोले- सबकी अपनी सोच है, द केरला स्टोरी 2 का बीफ सीन हर कोई देखें

‘द केरल स्टोरी’ के पहले भाग ने देशभर में तीखी बहस को जन्म दिया था। फिल्म को लेकर राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। अब इसका दूसरा भाग एक नई कहानी और नए किरदारों के साथ दर्शकों के सामने आने वाला है। फिल्म के इस भाग में अभिनेता सुमित गहलावत सलीम नामक एक अहम और परतदार किरदार निभा रहे हैं। लगभग 12 वर्षों से इंडस्ट्री में सक्रिय सुमित का कहना है कि यह उनके करियर की अब तक की सबसे बड़ी और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने फिल्म, विवाद, संघर्ष और अपने सफर पर खुलकर बात की हैं। आपकी फिल्में, जैसे द केरल स्टोरी और बस्तर: द नक्सल स्टोरी, अक्सर राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म देती हैं। एक कलाकार के रूप में आप इन प्रतिक्रियाओं और विवादों को किस नजरिए से देखते हैं? मैं व्यक्तिगत रूप से हर फिल्म को सिर्फ सिनेमा के रूप में देखता हूं। एक अभिनेता के तौर पर मेरा काम है अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाना। विषय राजनीतिक है, सामाजिक है या विवादित है यह लेखक और निर्देशक का दृष्टिकोण होता है। मैं स्क्रिप्ट पढ़ते समय यही देखता हूं कि मेरे किरदार में कितनी गहराई है, कितनी चुनौती है और मैं उसमें कितना सच्चापन ला सकता हूं। मैं इस इंडस्ट्री में इसलिए आया हूं ताकि अलग-अलग तरह के रोल निभा सकूं। इसलिए मेरा चयन हमेशा भूमिका और स्क्रिप्ट के आधार पर होता है, किसी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं। ऐसी फिल्मों में ‘प्रोपेगेंडा बनाम सच्चाई’ की बहस शुरू हो जाती है। क्या यह आपको प्रभावित करती है? बहस होना स्वाभाविक है, लेकिन कभी-कभी दुख इस बात का होता है कि अभिनय की चर्चा पीछे रह जाती है। हम कलाकार महीनों तैयारी करते हैं, मानसिक रूप से किरदार में उतरते हैं, कई सालों के संघर्ष के बाद ऐसे मौके मिलते हैं। जब फिल्म रिलीज होती है तो चर्चा कहानी से ज्यादा राजनीतिक एंगल पर होने लगती है। मैं राजनीति में नहीं पड़ता। मैं सिर्फ इतना चाहता हूं कि लोग यह भी देखें कि कलाकार ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया है। फिल्म के ट्रेलर को लेकर अनुराग कश्यप और प्रकाश राज जैसे फिल्मी हस्तियों ने आलोचना की। इस पर आपका क्या कहना है? मैं इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं देना चाहूंगा। हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है। जरूरी नहीं कि हर फिल्म या ट्रेलर सबको पसंद आए। कई बार हमें भी कोई ट्रेलर पसंद नहीं आता और हम आपस में खुलकर बोल देते हैं। अगर किसी को अच्छा नहीं लगा तो यह उनकी व्यक्तिगत पसंद है। बहुत से लोग तारीफ भी कर रहे हैं। जो अच्छा कह रहे हैं, उनका भी सम्मान है और जो आलोचना कर रहे हैं, उनका भी। हमारा काम है मेहनत करना और आगे और बेहतर करने की कोशिश करना। ट्रेलर में दिखाए गए एक ‘बीफ’ से जुड़े दृश्य को लेकर विवाद हुआ। क्या उस सीन को हटाने या बदलने पर कोई चर्चा हुई? ऐसे फैसले पूरी तरह निर्देशक और निर्माता के होते हैं। एक अभिनेता के रूप में हमारा काम है कि जो सीन हमें दिया गया है, उसे पूरी सच्चाई और प्रभाव के साथ निभाएं। वह दृश्य भावनात्मक रूप से कठिन था। लेकिन अगर दर्शक मेरे किरदार सलीम से नफरत महसूस करते हैं, तो एक अभिनेता के रूप में मैं समझूंगा कि मैंने अपना काम सही तरीके से किया। नेगेटिव किरदार को इस तरह निभाना कि वह वास्तविक लगे यही अभिनय की सफलता है। द केरला स्टोरी पार्ट 2 में आपका किरदार कितना अलग है? इस बार कहानी पूरी तरह नई है। मैं सलीम का किरदार निभा रहा हूं। यह एक लेयर्ड रोल है। शुरुआत में वह पढ़ा-लिखा, समझदार और सभ्य व्यक्ति दिखाई देता है, लेकिन परिस्थितियों के साथ उसका दूसरा रूप सामने आता है। यह किरदार केवल पूरी तरह नकारात्मक या सकारात्मक नहीं है। उसकी एक यात्रा है एक बदलाव है। उस जर्नी को निभाना मेरे लिए बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण अनुभव रहा। नेगेटिव रोल करने से क्या इमेज या फैन बेस पर असर पड़ सकता है? बिल्कुल नहीं। एक अभिनेता का काम हर तरह के भाव निभाना है। अगर आप उदाहरण देखें तो मनोज बाजपेयी और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकारों ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाएं की हैं। आज दर्शक समझदार हैं। वे जानते हैं कि अभिनेता और उसका किरदार अलग होते हैं। नेगेटिव रोल में अक्सर ज्यादा चैलेंज होता है और अभिनेता को अपने अभिनय की रेंज दिखाने का मौका मिलता है। एक आउटसाइडर के तौर पर इंडस्ट्री में आपका संघर्ष कैसा रहा? जब मैं मुंबई आया तो मुझे शहर की बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। ऑडिशन के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता था। कई बार ‘फिट नहीं’ कहकर मना कर दिया जाता था। मैंने शुरू से तय कर लिया था कि कम से कम 10 साल इस इंडस्ट्री को देने होंगे। यहां कोई गारंटी नहीं है। एक फिल्म मिलने का मतलब यह नहीं कि दूसरी भी मिल जाएगी। हर स्तर पर खुद को साबित करना पड़ता है। धैर्य सबसे जरूरी है। अगर धैर्य नहीं है, तो इस क्षेत्र में टिक पाना मुश्किल है। दर्शकों के लिए द केरला स्टोरी पार्ट 2 खास क्यों है और उन्हें यह फिल्म देखने के लिए क्या संदेश या अनुभव मिलेगा? यह फिल्म बहुत मेहनत से बनी है। निर्देशक से लेकर तकनीकी टीम और कलाकारों तक, सभी ने पूरी लगन से काम किया है। हम नए कलाकार हैं और हमारे लिए दर्शकों का भरोसा बहुत मायने रखता है। हम बस यही चाहते हैं कि दर्शक एक मौका दें। अगर उन्हें हमारा काम पसंद आए, तो वही हमारी सबसे बड़ी सफलता होगी।

भाजपा नेता के गृह प्रवेश में देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी:मोहल्ले में तनाव, कैलाशपुरी में दो पक्ष आमने-सामने

भाजपा नेता के गृह प्रवेश में देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी:मोहल्ले में तनाव, कैलाशपुरी में दो पक्ष आमने-सामने

रीवा शहर के कैलाशपुरी इलाके में गुरुवार शाम एक भाजपा नेता के घर गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया। आरोप है कि लाउड स्पीकर से देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। घटना के बाद मोहल्ले में आक्रोश फैल गया और कुछ देर के लिए दो पक्ष आमने-सामने आ गए। बैकुंठपुर से भाजपा नेता सीताराम साकेत के घर गृह प्रवेश कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम के दौरान सुबह करीब 10 बजे से लाउड स्पीकर पर भगवान शंकर, मां दुर्गा, भगवान कृष्ण सहित अन्य देवी-देवताओं के लिए अपशब्द कहे जा रहे थे। मोहल्ले की निवासी रागिनी सिंह बघेल ने बताया कि शुरुआत में लगा कि कार्यक्रम का शोर-शराबा है और बात थम जाएगी, लेकिन आपत्तिजनक टिप्पणियां लगातार जारी रहीं। जब वे और अन्य लोग समझाने पहुंचे तो विवाद की स्थिति बन गई और मारपीट जैसी नौबत आ गई। इसके बाद तत्काल डायल 100 को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर फीडबैक लिया। स्थानीय लोगों ने मामले की लिखित शिकायत थाने में देने की बात कही है। इस बीच भाजपा नेता के भतीजे, जो करहिया मंडी में शासकीय सेवक बताए जा रहे हैं, पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उधर, पूरे घटनाक्रम पर भाजपा नेता सीताराम साकेत का कहना है कि उनके घर कार्यक्रम में कई लोग आए थे। “किसी ने कुछ कह दिया होगा। यदि ऐसा हुआ है तो मैं इसे स्वीकार करता हूं और इसके लिए खेद प्रकट करता हूं। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन तनाव का माहौल बना हुआ है।

Congress AI Summit Protest Row; Himachal Pradesh Vs Delhi Police

Congress AI Summit Protest Row; Himachal Pradesh Vs Delhi Police

दिल्ली पुलिस के हिमाचल में गिरफ्तार किए गए यूथ कांग्रेस के 3 नेताओं को कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया जा रहा है। दिल्ली में AI समिट में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने के आरोप में 3 यूथ कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी को लेकर बुधवार को हिमाचल और दिल्ली पुलिस में टकराव हो गया। दिल्ली पुलिस ने शिमला के एक होटल से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 3 नेताओं को गिरफ्तार किया, . हिमाचल पुलिस का तर्क था कि इस बारे में दिल्ली पुलिस ने कोई औपचारिक सूचना नहीं दी। हिमाचल में सादे कपड़ों में आकर मेहमानों को उठाया गया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान भी दोनों पुलिस में बहस होती रही। इसके बाद जज ने फाइल तैयार करने को कहा तो दिल्ली पुलिस फिर बिना कागजी कार्रवाई के तीनों नेताओं को ले गई। इसका पता चलते ही हिमाचल पुलिस ने फिर उन्हें रोक लिया। इसके बाद तीनों नेताओं को कोर्ट में पेश कर दिल्ली पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड लिया। करीब 18 घंटे तक दिल्ली और हिमाचल पुलिस के बीच ड्रामा चलता रहा। फिर गुरुवार सुबह करीब पौने 6 बजे दिल्ली पुलिस तीनों नेताओं को लेकर चली गई। दरअसल, 20 फरवरी को इंडियन यूथ कांग्रेस के 11 सदस्यों ने भारत मंडपम में घुसकर AI समिट के दौरान शर्टलैस होकर PM मोदी की फोटो वाली टी-शर्ट लहराई थी। इस दौरान पीएम मोदी कॉम्प्रोमाइज्ड के नारे लगाए थे। दिल्ली में AI समिट के दौरान टी शर्ट उतारकर प्रदर्शन करते हुए युवा कांग्रेस कार्यकर्ता- फाइल फोटो। सिलसिलेवार जानिए पूरा मामला… दिल्ली पुलिस सिविल वर्दी में पहुंची, होटल से 3 नेता अरेस्ट किए दिल्ली पुलिस के 18 कर्मचारियों की टीम सिविल वर्दी में बुधवार, 25 फरवरी सुबह 3 गाड़ियों में सवार होकर शिमला से लगभग 120 किलोमीटर दूर रोहड़ू के चिड़गांव पहुंची। दिल्ली पुलिस को इनपुट था कि AI समिट में अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने वाले मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के रहने वाले यूथ कांग्रेस के 3 नेता रोहड़ू के चांशल होटल में ठहरे हैं। जिनके नाम अरबाज, सौरव और सिद्धार्थ हैं। दिल्ली पुलिस ने यहां आकर तीनों को गिरफ्तार कर लिया। सबूत के लिए होटल से सीसीटीवी की डीवीआर और रजिस्टर भी कब्जे में लिया। हिमाचल पुलिस ने 3 जगह नाका लगाकर रोका, नेताओं को छुड़ाया दिल्ली पुलिस तीनों को गिरफ्तार कर ले जाने लगी, तभी हिमाचल पुलिस को इसकी भनक लगी कि उन्हें सूचना दिए बगैर पूरी कार्रवाई की जा रही है। हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस को रोकने के लिए शिमला बस स्टैंड, शोघी और सोलन के धर्मपुर में नाकाबंदी कर दी। इसके बाद एक गाड़ी बस स्टैंड शिमला, दूसरी शोघी और 2 गाड़ियां सोलन के धर्मपुर में रोक दी गईं। हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस के गिरफ्तार किए यूथ कांग्रेस के तीनों नेताओं को छुड़ाकर अपनी कस्टडी में ले लिया और शिमला में चक्कर कोर्ट लेकर पहुंच गई। कोर्ट में चली बहस, हिमाचल पुलिस बोली- प्रॉपर इन्फॉर्मेशन नहीं दी हिमाचल पुलिस के पीछे-पीछे दिल्ली पुलिस की टीम भी शिमला की चक्कर कोर्ट पहुंच गई। बुधवार शाम पौने 5 बजे उन्हें कोर्ट में पेश किया गया और 6 बजे तक सुनवाई चलती रही। सुनवाई के दौरान हिमाचल पुलिस ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली पुलिस ने स्टेट पुलिस को सूचना दिए बगैर यह पूरी कार्रवाई की। प्रॉपर इन्फॉर्मेशन न होने की वजह से दिल्ली पुलिस को रोका गया। दोनों पुलिस के बीच कोर्ट में बहस होती रही। इस पर कोर्ट ने इस मामले की पूरी फाइल तैयार करने को कहा। शिमला के शोघी में शिमला पुलिस ने दिल्ली पुलिस को रोका और पूछताछ की। बिना कोर्ट के आदेश के दिल्ली पुलिस फिर ले गई, हिमाचल पुलिस ने फिर रोके इसके बाद हिमाचल पुलिस के सीनियर अधिकारी लौट गए। फिर वहां जिला कोर्ट में ही दिल्ली और हिमाचल पुलिस में बातचीत चलती रही। इसके बाद बुधवार शाम करीब 7.25 बजे गिरफ्तार यूथ कांग्रेस वर्करों को दिल्ली पुलिस फिर अपने साथ ले गई। दिल्ली पुलिस शिमला से रवाना हो गई। इसके बाद फिर अचानक शिमला के शोघी के पास दिल्ली पुलिस को रोक दिया गया। इसके बाद दोनों राज्यों की पुलिस में बहस और बढ़ गई। हिमाचल पुलिस बोली- वैध दस्तावेज नहीं, FIR की चेतावनी दी हिमाचल पुलिस का कहना था कि दिल्ली पुलिस के पास उनके एरिया से गिरफ्तारी कर ले जाने का कोई वैध दस्तावेज नहीं है। अगर वह कोर्ट के आदेश पर ले जा रहे हैं तो उनके पास ट्रांजिट रिमांड होना चाहिए। इस वजह से वहां देर रात तक बहस चली। हिमाचल पुलिस ने चेतावनी दी कि अगर वह जबरन ले जाने की कोशिश करेंगे तो दिल्ली पुलिस पर FIR दर्ज कर दी जाएगी। इसके बाद हिमाचल पुलिस ने तीनों नेताओं को दिल्ली पुलिस की कस्टडी से अपनी हिरासत में ले लिया। इस दौरान दिल्ली पुलिस के एसीपी राहुल विक्रम ने कहा कि ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद आरोपियों को दिल्ली ले जाया जा रहा था, लेकिन शिमला पुलिस कार्रवाई में बाधा डाल रही है। हालांकि हिमाचल पुलिस का कहना था कि इनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। तीनों का मेडिकल कराया, कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड लिया, दिल्ली ले गए इसके बाद बुधवार रात 11.30 बजे हिमाचल पुलिस गिरफ्तार कांग्रेस नेताओं को मेडिकल कराने के लिए शिमला के रिपन अस्पताल लेकर पहुंची। यहां उनका मेडिकल कराया गया। बुधवार रात 2 बजे यूथ कांग्रेस के एडवोकेट ने गिरफ्तार नेताओं से बात की। इसके बाद इन्हें चक्कर कोर्ट के CJM के घर पर पेश किया गया। जहां से उनका ट्रांजिट रिमांड लिया गया। फिर गुरुवार सुबह 5.45 बजे दिल्ली पुलिस तीनों नेताओं को लेकर दिल्ली रवाना हो गए। शिमला से लगभग 15 किलोमीटर दूर शोघी बैरियर पर देर रात मौजूद शिमला और दिल्ली पुलिस के जवान। दिल्ली पुलिस की जांच में क्या निकला दिल्ली पुलिस के सोर्सेज के मुताबिक जिन 3 नेताओं, अरबाज, सौरव और सिद्धार्थ होटल से गिरफ्तार किया गया, उन्हें लोकल कांग्रेसी नेता ने होटल में कमरा दिलाया था। ये तीनों 24 फरवरी से यहां पर गिरफ्तारी से बचने के लिए छुपे हुए थे। हालांकि कमरा किसके नाम पर बुक कराया गया था, इसके बारे में होटल के कागजात खंगाले जा रहे हैं। पुलिस CCTV फुटेज के जरिए यह भी पता लगा रही

NCERT Class 8 Social Science Chapter Removed Over Judicial Corruption Controversy

NCERT Class 8 Social Science Chapter Removed Over Judicial Corruption Controversy

Hindi News National NCERT Class 8 Social Science Chapter Removed Over Judicial Corruption Controversy 5 मिनट पहले कॉपी लिंक यह पहली बार है जब 8वीं के बच्चे ज्यूडीशियरी में करप्शन क्या होता है इसके बारे में पढ़ेंगे। क्लास 8 की सोशल साइंस की टेक्स्टबुक में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ विवाद पर NCERT ने बुधवार को पहली प्रतिक्रिया दी। NCERT ने कहा कि वे ज्यूडिशियरी का बहुत सम्मान करते हैं। किताब में गलती अनजाने में हुई है और NCERT को उस चैप्टर में गलत मटीरियल शामिल करने का अफसोस है। NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्‍स्‍टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्‍कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था। किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्‍शन इन द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले और जजों की भारी कमी ज्‍यूडिशियल सिस्टम के सामने प्रमुख चुनौतियों में शामिल हैं। विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने किताब की बिक्री पर रोक लगा दी है। साथ ही कहा कि, विवादित चैप्टर को फिर से लिखा जाएगा। किताब का वो हिस्सा जिसमें करप्शन और पेंडिंग केस का जिक्र है। अब पढ़िए NCERT का पूरा बयान ‘तय प्रोसेस के अनुसार, NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के लिए सोशल साइंस की टेक्स्टबुक, एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड, वॉल्यूम II निकाली। टेक्स्टबुक मिलने पर यह देखा गया कि कुछ गलत टेक्स्ट मटीरियल अनजाने में चैप्टर नंबर 4 में आ गया। मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन ने भी ऐसा ही ऑब्ज़र्वेशन किया और निर्देश दिया कि अगले ऑर्डर तक इस किताब का डिस्ट्रीब्यूशन पूरी तरह से रोक दिया जाए। NCERT दोहराता है कि नई टेक्स्टबुक्स का मकसद संवैधानिक अधिकारों को मजबूत करना है। स्टूडेंट्स के बीच लिटरेसी, इंस्टीट्यूशनल रिस्पेक्ट, और डेमोक्रेटिक पार्टिसिपेशन की जानकारी देना था। हमारा किसी भी कॉन्स्टिट्यूशनल बॉडी के अधिकार पर सवाल उठाने या उसे कम करने का कोई इरादा नहीं है। NCERT कंस्ट्रक्टिव फीडबैक के लिए तैयार है। इसलिए विवादित चैप्टर को सही अथॉरिटी से सलाह लेकर फिर से लिखा जाएगा और एकेडमिक सेशन 2026-27 के शुरू होने पर क्लास 8 के स्टूडेंट्स को अवेलेबल कराया जाएगा। NCERT एक बार फिर इस फैसले की गलती पर अफसोस जताता है।’ नई किताब में ज्यूडीशियरी से जुड़े अहम पॉइंट्स… इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया है। करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ कंडक्ट से बंधे होते हैं जो न केवल कोर्ट में बल्कि कोर्ट के बाहर भी उनके व्यवहार को कंट्रोल करता है। ज्यूडिशियरी के अंदरूनी अकाउंटेबिलिटी सिस्टम को भी समझाया गया है। सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायतें लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं। किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 ज्यादा शिकायतें मिली थीं। किताब में गंभीर मामलों में जजों को हटाने के संवैधानिक नियम के बारे में भी बताया गया है कि पार्लियामेंट इंपीचमेंट मोशन पास करके जज को हटा सकती है। बच्चे पढ़ेंगे कि ऐसे मोशन पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है। चैप्टर में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग लेवल पर करप्शन का सामना करते हैं। गरीबों और जरूरतमंदों की न्याय तक पहुंच की समस्या और बिगड़ सकती है। यह भी बताया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिशें कर रहे हैं। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल और करप्शन के मामलों के खिलाफ फास्ट एक्शन लेना शामिल है। किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का भी जिक्र किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी जिक्र है, जिन्होंने जुलाई 2025 में कहा था कि ज्यूडिशियरी के अंदर करप्शन और गलत कामों के मामलों का पब्लिक ट्रस्ट पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “हालांकि, इस ट्रस्ट को फिर से बनाने का रास्ता इन मुद्दों को सुलझाने के लिए उठाए गए तेज, निर्णायक और ट्रांसपेरेंट एक्शन में है… ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।” CJI बोले- न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे सिब्बल ने CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा है। यह निंदनीय है। सिंघवी ने कहा कि NCERT ने मान लिया है कि राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार है ही नहीं। इसपर CJI सूर्यकांत ने कहा- दुनिया में किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। यह एक सोची-समझी और गहरी साजिश लगती है। मुझे पता है इससे कैसे निपटना है।मैं यह केस खुद हैंडल करूंगा। हम इस बारे में और कुछ नहीं कहना चाहते। NCERT की किताब वेबसाइट पर मौजूद नहीं NCERT की 8वीं क्लास की सोशल साइंस का पार्ट 2 इसी हफ्ते जारी हुआ था। CJI की टिप्‍पणी के बाद ये किताब NCERT की वेबसाइट पर उपलब्‍ध नहीं है। एक न्‍यूज रिपोर्ट के मुताबिक किताबों की ऑफलाइन बिक्री भी मंगलवार 24 फरवरी से बंद कर दी गई है। हालांकि अब तक NCERT की तरफ इसको लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। NCERT की वेबसाइट पर किताब का दूसरा पार्ट लिस्ट में मौजूद नहीं है। NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्‍लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्‍स को बदलकर नए टॉपिक्‍स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं। ——————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…