MeitY Directs Meta: Roadmap for Deepfake & Propaganda Control

Hindi News Business MeitY Directs Meta: Roadmap For Deepfake & Propaganda Control | 2026 Update नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को अपने एल्गोरिदम में जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कंपनी से एक डिटेल्ड कम्प्लायंस रोडमैप भी मांगा है। इस रोडमैप में कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स से प्रोपेगैंडा, डीपफेक और अवैध कंटेंट को वायरल होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। यह निर्देश IT मिनिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारियों और मेटा के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दिए गए। बैठक में मेटा की टेक्निकल टीम ने नुकसानदेह ऑनलाइन कंटेंट से निपटने के लिए अपने मौजूदा सिस्टम्स और जारी प्रयासों पर एक प्रेजेंटेशन भी पेश किया। सरकार के निर्देशों की 3 प्रमुख बातें एल्गोरिदम में बदलाव: सरकार ने मेटा को अपने रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में ऐसे बदलाव करने को कहा है, जिससे प्रोपेगैंडा, डीपफेक, मॉर्फ्ड इमेज और किसी भी तरह के हेरफेर किए गए कंटेंट की रीच को सीमित किया जा सके। डेटा लोकलाइजेशन: कंपनी को भारत के डेटा लोकलाइजेशन नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। कंटेंट तुरंत हटाना: अधिकृत सरकारी एजेंसियों द्वारा फ्लैग किए गए आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने की प्रोसेस को तेज करने के लिए कहा गया है। मेटा को सरकारी विभागों के साथ मिलकर काम करना होगा केंद्र सरकार ने मेटा से कहा है कि वह भारत सरकार के सभी विभागों की क्विक रिस्पॉन्स टीम्स (QRTs) के साथ नजदीकी तालमेल स्थापित करें और उन्हें मिलकर काम करना होगा। इस कदम का मकसद डीपफेक वीडियो, एडिटेड तस्वीरों और भ्रामक कंटेंट की रियल-टाइम में तेजी से पहचान करना और उन्हें तुरंत हटाना सुनिश्चित करना है। इससे झूठी और नुकसानदेह जानकारियों को तेजी से वायरल होने से रोका जा सकेगा। मेटा ने स्वीकार कीं अपने सिस्टम की कमियां सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इसके कुछ ही घंटे पहले मेटा ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ चर्चा के दौरान अपने एल्गोरिदम सिस्टम में कमियां होने की बात स्वीकार की थी। बातचीत के दौरान कंपनी के रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में मौजूद गैप्स और भारतीय कानूनों के पालन से जुड़े मुद्दों पर मुख्य रूप से फोकस किया गया। मेटा की ग्लोबल टीम भारत में ही रुककर करेगी चर्चा सरकार की चिंताओं और तकनीकी पहलुओं को सुलझाने के लिए मेटा की ग्लोबल टेक्निकल टीम भारत में ही रुककर आगे की बैठकों में हिस्सा लेगी। आने वाले दिनों में IT मिनिस्ट्री के साथ कुछ और दौर की चर्चाएं होनी तय हैं। जवाबदेही और AI तकनीक पर सरकार का रुख बैठक का मुख्य फोकस डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करना और सरकारी एजेंसियों व मेटा के बीच सहयोग को बढ़ाना था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए फर्जी व भ्रामक कंटेंट बनाने की बढ़ती घटनाओं पर सरकार ने गहरी चिंता जताई है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को एआई-जनरेटेड और मैनिपुलेटेड कंटेंट रोकने के लिए अपने स्तर पर तकनीकी सेफगार्ड्स तुरंत लागू करने होंगे और कानूनी व रेग्युलेटरी जरूरतों का समय पर पालन करना होगा। क्या होता है एल्गोरिदम और क्विक रिस्पॉन्स टीम्स? सोशल मीडिया एल्गोरिदम: यह एक तरह का डिजिटल कोड या मैथमेटिकल फॉर्मूला होता है जो यह तय करता है कि आपकी फीड में कौन सा वीडियो या पोस्ट सबसे ऊपर दिखेगा। कंपनियां यूजर के एंगेजमेंट (लाइक, शेयर, कमेंट) के आधार पर ऐसा कंटेंट ज्यादा पुश करती हैं। क्विक रिस्पॉन्स टीम: यह किसी आपात स्थिति, अफवाह या फर्जी जानकारी को सोशल मीडिया पर वायरल होने से रोकने के लिए बनाई गई साइबर विशेषज्ञों की इंस्टेंट एक्शन टीम होती है। यह टीम 24×7 ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी करती है और आपत्तिजनक मामलों पर तुरंत कार्रवाई कराती है। ये खबर भी पढ़ें… फेसबुक-इंस्टाग्राम से युवाओं की मेंटल हेल्थ बिगड़ी: Meta पर अमेरिकी कोर्ट ने ₹9030 करोड़ का जुर्माना लगाया, युवाओं के इलाज पर ₹3993 करोड़ खर्च होंगे अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको की अदालत ने गुरुवार को इंस्टाग्राम-फेसबुक की पेरेंट कंपनी Meta पर 942 मिलियन डॉलर यानी 9030 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने कहा कि प्लेटफॉर्म से युवाओं की मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंचा। जुर्माने की रकम में से 420 मिलियन डॉलर यानी 3993 करोड़ रुपए युवाओं के इलाज पर खर्च होंगे। बाकी की रकम अगले 5 साल में अवेयरनेस, प्रिवेंशन, स्क्रीनिंग सर्विस पर खर्च की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Bombay HC Allows Nitin Gadkari to Sue Over Ethanol Deepfake Videos

कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी अब मेटा प्लेटफॉर्म्स, एक्स और गूगल एलएलसी के खिलाफ सिविल सुट दायर कर सकते हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को गडकरी को एथेनॉल विवाद से जुड़ी एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो और डिजिटल कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दे दी है। गडकरी ने अपनी याचिका में कहा है कि इन वीडियो में उन्हें एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (ईबीपी) प्रोग्राम और ई20 पहल से गलत तरीके से जोड़ा गया है। सोशल मीडिया पर डीपफेक-वीडियो का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। केस में मांग की गई है कि कंटेंट ऐसे को हटाया जाए। याचिका के मुताबिक, ये दोनों प्रोजेक्ट पूरी तरह से केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के हैं और इनमें गडकरी की कोई भूमिका नहीं है। भारत में क्यों हो रहा है E20 पेट्रोल का विरोध? भारत में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल के इस मिश्रण (E20) का विरोध हो रहा है। खासकर 2023 से पहले बनी पेट्रोल गाड़ियों के मालिक परेशान हैं। उनका दावा है कि इस फ्यूल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, मेंटेनेंस का खर्च बढ़ गया है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। सरकारी मंत्रालयों को भी बनाया गया प्रतिवादी इस मामले में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा दूरसंचार मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया गया है। गडकरी ने स्पष्ट किया है कि इस मुकदमे का उद्देश्य सार्वजनिक चर्चा या सरकारी नीतियों की आलोचना को रोकना नहीं है। याचिका में कहा गया है कि इसका मकसद जनता को किसी भी सरकारी फैसले पर निष्पक्ष बहस या आलोचना से रोकना नहीं है। गडकरी का तर्क है कि सोशल मीडिया पर मौजूद कंटेंट पूरी तरह से झूठा, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण है। याचिका के मुताबिक, अज्ञात लोगों ने एआई वीडियो के जरिए यह गलत धारणा फैलाई कि गडकरी और उनका परिवार ईबीपी और ई20 पहल से लाभ कमा रहा है। —————————————- ये खबर भी पढ़ें… गडकरी बोले- 2004 से पेट्रोल में एथेनॉल मिल रहा:गाड़ियों को नुकसान का कोई सबूत नहीं, माइलेज सड़क और ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर देश में ई-20 पेट्रोल, एथेनॉल, माइलेज और गाड़ियों पर इसके असर को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में इन सभी सवालों के जवाब दिए। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Madhuri Dixit Deepfake AI Video Viral

6 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक्ट्रेस एक रिवीलिंग ब्लैक ड्रेस में दिख रही हैं, जिसे देखकर कई लोगों ने उनके पहनावे पर कमेंट करने शुरू कर दिए। हालांकि, वीडियो को लेकर पत्रकार जयदीप पांडेय ने दावा किया कि यह वीडियो डीपफेक AI वीडियो है। जयदीप ने एक यूजर को रिप्लाई करते हुए लिखा, यह माधुरी दीक्षित का AI से बनाया गया फर्जी वीडियो है। कृपया ऐसी कोई भी चीज पोस्ट या शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच जरूर कर लें। कई यूजर्स ने इस वीडियो को शेयर किया। वहीं, एक यूजर की पोस्ट पर कम्यूनिटी नोट जारी कर X (पूर्व में ट्विटर) ने कहा कि वीडियो पूरी तरह से AI की मदद से तैयार किया गया है। X की पोस्ट। पहले भी कई सेलिब्रिटी एआई-जनरेटेड कंटेंट का शिकार हो चुके हैं, जिनमें रश्मिका मंदाना, कैटरीना कैफ और कीर्ति सुरेश शामिल हैं। हाल ही में फेक एआई से बने वीडियो और तस्वीरों को लेकर साउथ एक्ट्रेस रुक्मिणी वसंत भड़क गई थीं। रुक्मिणी ने शनिवार को अपने एक्स अकाउंट पर एक नोट शेयर कर लिखा था, ‘मेरी टीम और मैंने सोशल मीडिया पर कुछ एआई से बनाई गई तस्वीरें देखी हैं, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वो मेरी हैं। मैं साफ कहना चाहती हूं कि ये तस्वीरें पूरी तरह फर्जी और बनाई गई हैं। इस तरह की एडिटेड तस्वीरें बनाना और फैलाना बहुत गैरजिम्मेदाराना है। यह किसी की प्राइवेसी का बड़ा उल्लंघन भी है।’ रुक्मिणी वसंत की पोस्ट। उन्होंने आगे लिखा था, ‘हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। इन तस्वीरों को बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी और साइबर क्राइम कार्रवाई शुरू की जा रही है। मैं सभी लोगों से अपील करती हूं कि ऐसे कंटेंट को शेयर न करें और न ही उसे बढ़ावा दें।’ फेक तस्वीरें और एआई से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… AI से बना रश्मिका मंदाना का फेक वीडियो वायरल:अमिताभ बच्चन ने किया अलर्ट, बोले- दोषी के खिलाफ लीगल एक्शन लिया जाए नवंबर 2023 में एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक महिला लिफ्ट में एंटर करती नजर आ रही थी जो देखने में तो बिल्कुल रश्मिका जैसी लगती थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Madhuri Dixit Deepfake AI Video Viral

12 मिनट पहले कॉपी लिंक माधुरी दीक्षित का जो वीडियो सामने आया है, उसमें वह एक अवॉर्ड फंक्शन में बैठी दिखाई दे रही हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक्ट्रेस एक रिवीलिंग ब्लैक ड्रेस में दिख रही हैं, जिसे देखकर कई लोगों ने उनके पहनावे पर कमेंट करने शुरू कर दिए। हालांकि, वीडियो को लेकर पत्रकार जयदीप पांडेय ने दावा किया कि यह वीडियो फेक AI वीडियो है। जयदीप ने एक यूजर को रिप्लाई करते हुए लिखा, ‘यह माधुरी दीक्षित का AI से बनाया गया फर्जी वीडियो है। कृपया ऐसी कोई भी चीज पोस्ट या शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई की जांच जरूर कर लें।’ जयदीप पांडेय की पोस्ट। वायरल वीडियो में माधुरी दीक्षित जिस तरह की ड्रेस में दिख रही हैं, वैसी ही ड्रेस उन्होंने 2026 में न्यूज 18 के अवॉर्ड शो में पहनी थी। कई यूजर्स ने इस वीडियो को शेयर किया। वहीं, एक यूजर की पोस्ट पर कम्यूनिटी नोट जारी कर X (पूर्व में ट्विटर) ने कहा कि वीडियो पूरी तरह से AI की मदद से तैयार किया गया है। X की पोस्ट। कई सेलेब्स के AI-जनरेटेड पोस्ट बने हैं गौरतलब है कि कई सेलिब्रिटी एआई-जनरेटेड कंटेंट का शिकार हो चुके हैं, जिनमें रश्मिका मंदाना, कैटरीना कैफ और कीर्ति सुरेश शामिल हैं। हाल ही में फेक एआई से बने वीडियो और तस्वीरों को लेकर साउथ एक्ट्रेस रुक्मिणी वसंत भड़क गई थीं। रुक्मिणी ने शनिवार को अपने एक्स अकाउंट पर एक नोट शेयर कर लिखा था, ‘मेरी टीम और मैंने सोशल मीडिया पर कुछ एआई से बनाई गई तस्वीरें देखी हैं, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वो मेरी हैं। मैं साफ कहना चाहती हूं कि ये तस्वीरें पूरी तरह फर्जी और बनाई गई हैं। इस तरह की एडिटेड तस्वीरें बनाना और फैलाना बहुत गैरजिम्मेदाराना है। यह किसी की प्राइवेसी का बड़ा उल्लंघन भी है।’ रुक्मिणी वसंत की पोस्ट। उन्होंने आगे लिखा था, ‘हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। इन तस्वीरों को बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी और साइबर क्राइम कार्रवाई शुरू की जा रही है। मैं सभी लोगों से अपील करती हूं कि ऐसे कंटेंट को शेयर न करें और न ही उसे बढ़ावा दें।’ रश्मिका का डीपफेक वीडियो सामने आया था नवंबर 2023 में रश्मिका का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह काले रंग के कपड़ों में एक लिफ्ट के अंदर जाती हुई दिख रही थीं। यह वीडियो पूरी तरह फेक था। मूल वीडियो ब्रिटिश-भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जारा पटेल का था। AI डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके जारा के चेहरे की जगह रश्मिका का चेहरा लगा दिया गया था। फेक तस्वीरें और एआई से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… AI से बना रश्मिका मंदाना का फेक वीडियो वायरल:अमिताभ बच्चन ने किया अलर्ट, बोले- दोषी के खिलाफ लीगल एक्शन लिया जाए नवंबर 2023 में एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें एक महिला लिफ्ट में एंटर करती नजर आ रही थी जो देखने में तो बिल्कुल रश्मिका जैसी लगती थी। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
AI Content Rules 2026; Social Media Deepfake Labelling Regulations

नई दिल्ली14 घंटे पहले कॉपी लिंक अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो एआई की मदद से बनाया गया है, तो उस पर ‘लेबल’ लगाना जरूरी कर दिया गया है। इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को शिकायत मिलने के महज 3 घंटे के भीतर हटाना होगा। ये नए नियम 20 फरवरी 2026 से लागू हो गए हैं। 10 फरवरी को इसका नोटिफिकेशन जारी हुआ था। पीएम बोले- कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत इन नियमों के लागू होने से एक दिन पहले यानी, 19 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI समिट में भी लेबल को लेकर सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या फैब्रिकेटेड, यानी एआई से बनाया गया है। मेटाडेटा से छेड़छाड़ की तो डिलीट होगा पोस्ट 1. एआई लेबल: वीडियो पर ‘डिजिटल स्टैम्प’ जैसे खाने के पैकेट पर लिखा होता है कि वह ‘शाकाहारी’ है या ‘मांसाहारी’, ठीक वैसे ही अब हर एआई वीडियो, फोटो या ऑडियो पर एक लेबल लगा होगा। मान लीजिए आपने एआई से एक वीडियो बनाया जिसमें कोई नेता भाषण दे रहा है, तो उस वीडियो के कोने में साफ लिखा होना चाहिए- “AI जनरेटेड”। 2. टेक्निकल मार्कर: डिजिटल डीएनए मेटाडेटा को आप उस फाइल का ‘डिजिटल डीएनए’ मान सकते हैं। यह स्क्रीन पर तो नहीं दिखता, लेकिन फाइल की कोडिंग के अंदर छिपा होता है। इसमें यह जानकारी दर्ज होगी कि यह फोटो या वीडियो किस तारीख को बना, किस AI टूल से बना और किस प्लेटफॉर्म पर पहली बार अपलोड हुआ। अगर कोई एआई का इस्तेमाल करके अपराध करता है, तो पुलिस इस ‘टेक्निकल मार्कर’ के जरिए उसके असली सोर्स तक पहुंच सकेगी। 3. छेड़छाड़ पर रोक: मिटाया नहीं जा सकेगा लेबल पहले लोग एआई से बनी फोटो का कोना काटकर या एडिटिंग करके उसका ‘वॉटरमार्क’ हटा देते थे ताकि वह असली लगे। अब सरकार ने इसे गैर-कानूनी बना दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीक अपनानी होगी कि अगर कोई उस लेबल या मेटाडेटा को हटाने की कोशिश करे, तो या तो वह कंटेंट ही डिलीट हो जाए। चाइल्ड पोर्नोग्राफी और डीपफेक पर सख्त एक्शन अगर AI का इस्तेमाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों से जुड़ी जानकारी या किसी की नकल उतारने के लिए किया जाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा। नवंबर में रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। सचिन तेंदुलकर का डीपफेक वीडियो, जिसमें वे गेमिंग ऐप को प्रमोट करते दिखे थे। 3 घंटे की डेडलाइन, पहले 36 घंटे का समय मिलता था आईटी नियमों में हुए नए बदलाव के बाद अब सोशल मीडिया कंपनियों के पास कार्रवाई के लिए बहुत कम समय होगा। पहले किसी गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था, जिसे अब घटाकर सिर्फ 3 घंटे कर दिया गया है। यूजर ने गलत जानकारी दी तो प्लेटफॉर्म जिम्मेदार अब जब भी कोई यूजर सोशल मीडिया पर कुछ अपलोड करेगा, तो प्लेटफॉर्म को उससे यह डिक्लेरेशन लेनी होगी कि क्या यह कंटेंट एआई से बनाया गया है। कंपनियों को ऐसे टूल्स तैनात करने होंगे जो यूजर के इस दावे की जांच कर सकें। अगर कोई प्लेटफॉर्म एआई कंटेंट को बिना डिस्क्लोजर के पब्लिश होने देता है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार माना जाएगा। केंद्र ने कहा- इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साफ कहा कि ये स्टेप ‘ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट’ बनाने के लिए है। यह जनरेटिव AI से आने वाली मिस-इनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा। इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। सरकार के नोटिफिकेशन में दिए जरूरी सवालों के जवाब… सेक्शन 1: नए नियम और उनके उद्देश्य 1. आईटी संशोधन नियम, 2026 क्या हैं? यह नियम 2021 के आईटी नियमों को मजबूत करते हैं, ताकि एआई द्वारा बनाई गई जानकारी (SGI) और ऑनलाइन होने वाले नुकसानों को रोका जा सके । 2. इन संशोधनों की जरूरत क्यों पड़ी? एआई के जरिए अब असली दिखने वाले डीपफेक बनाना आसान हो गया है । इनसे गलत सूचनाएं फैलने, पहचान चोरी होने और अश्लीलता (NCII) जैसे खतरों को रोकने के लिए ये नियम लाए गए हैं। ये नियम 20 फरवरी, 2026 से पूरे देश में लागू हो चुके हैं । सेक्शन 2: मुख्य परिभाषाएं और दायरा 3. ‘ऑडियो, विजुअल या ऑडियो-विजुअल जानकारी’ का क्या मतलब है? कंप्यूटर के जरिए बनाई या बदली गई कोई भी आवाज, फोटो, ग्राफिक या वीडियो कंटेंट। 4. ‘सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन’ (SGI) क्या है? ऐसी जानकारी जिसे एआई या एल्गोरिदम से बनाया गया हो और वह बिल्कुल असली व्यक्ति या घटना की तरह लगे। जिसे देखकर कोई भी धोखा खा जाए। 5. किन चीजों को SGI नहीं माना जाएगा? फोटो की ब्राइटनेस बढ़ाना, वीडियो कंप्रेस करना या बैकग्राउंड शोर कम करना । या फिर पीपीटी बनाना, डायग्राम बनाना या रिसर्च के लिए काल्पनिक केस स्टडी बनाना । वीडियो में सबटाइटल जोड़ना, अनुवाद करना या ऑडियो को टेक्स्ट में बदलना। वहीं अगर एआई से फर्जी मार्कशीट या सरकारी लेटर बनाया, तो उसे छूट नहीं मिलेगी। 6. क्या ये नियम सिर्फ वीडियो पर लागू हैं? SGI मुख्य रूप से फोटो, वीडियो और ऑडियो पर केंद्रित है। सिर्फ टेक्स्ट SGI नहीं है, लेकिन अगर टेक्स्ट का इस्तेमाल गैर-कानूनी काम में होता है, तो IT नियमों के दायरे में आएगा । सेक्शन 3: यूजर्स और कंपनियों की जिम्मेदारी 7. क्या प्लेटफॉर्म्स पर ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा बनी रहेगी? हां, अगर कंपनियां इन नियमों का पालन करते हुए एआई कंटेंट को हटाती हैं, तो उनकी कानूनी सुरक्षा (धारा 79) बनी रहेगी । यानी, कंपनी पर कार्रवाई नहीं होगी। सेफ हार्बर’ को आसान भाषा में ऐसे समझें: कानूनी ढाल: यह सोशल मीडिया कंपनियों को मिला एक सुरक्षा कवच है, जो कहता है कि अगर किसी यूजर ने प्लेटफॉर्म पर कोई गलत पोस्ट या वीडियो डाला है, तो उसके लिए कंपनी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा। शर्तिया सुरक्षा: यह सुरक्षा तभी तक मिलती है जब तक कंपनियां सरकार के नियमों को मानती हैं। अगर वे शिकायत मिलने पर 3 घंटे के भीतर SGI नहीं हटातीं, तो
PM Modi AI Summit: Deepfake Labeling Essential

नई दिल्ली17 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर AI समिट से जुड़ी रही। यहां पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि जैसे खाने के पैकेट पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ होना चाहिए। वहीं सेंसेक्स 1236 अंक (1.48%) की गिरावट के साथ 82,498 के स्तर पर बंद हुआ। उधर, सोना-चांदी में बढ़त देखी गई। सोना करीब 3 हजार और चांदी 8 हजार रुपए महंगी हो गई है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… नई दिल्ली में चल रही AI समिट का पांचवां दिन है। आज शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. PM बोले-डीपफेक रोकने के लिए AI कंटेंट पर लेबल लगे:AI समिट में अंबानी ने कहा- डेटा की तरह सस्ता होगा AI, ₹10 लाख करोड़ का निवेश करेंगे दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI के सुरक्षित इस्तेमाल का नया फॉर्मूला दिया। पीएम ने कहा कि जैसे खाने के पैकेट पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ होना चाहिए ताकि फर्क पता चल सके। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. सेंसेक्स 1236 अंक टूटा, 82,498 पर बंद:निफ्टी भी 365 अंक गिरकर 25,454 पर आया; ऑटो और रियल्टी शेयर्स में बिकवाली शेयर बाजार में आज यानी 19 फरवरी को गिरावट है। सेंसेक्स 1236 अंक (1.48%) की गिरावट के साथ 82,498 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 365 अंक (1.41%) की गिरावट रही, ये 25,454 के स्तर पर बंद हुा। ऑटो, रियल्टी और बैंकिंग शेयर्स ज्यादा टूटे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3.सोना ₹2986 महंगा हुआ, ₹1.55 लाख पर पहुंचा:इस साल 21 हजार रुपए चढ़ा; चांदी एक दिन में ₹7974 महंगी सोना-चांदी के दाम में 19 फरवरी को लगातार दूसरे दिन तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,986 रुपए बढ़कर होकर ₹1.55 लाख पहुंच गया है। वहीं, एक किलो चांदी 7,974 रुपए बढ़कर ₹2.45 लाख पर पहुंच गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अनिल अंबानी बोले- बिना अनुमति देश छोड़कर नहीं जाऊंगा:₹40 हजार करोड़ के बैंक फ्रॉड केस में SC में हलफनामा, जांच में सहयोग भी करेंगे अनिल अंबानी ने आज यानी 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है। इसमें उन्होंने वचन दिया है कि वे अदालत की अनुमति के बिना भारत छोड़कर नहीं जाएंगे। यह हलफनामा उनके रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की कंपनियों से जुड़ी 40,000 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी की जांच के बीच आया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. AI समिट से पीछे हटे बिल गेट्स:एपस्टीन केस की फाइलों में नाम आने पर लिया फैसला; अब गेट्स फाउंडेशन के अंकुर वोरा स्पीच देंगे माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स नई दिल्ली में चल रही AI समिट में अपना मुख्य भाषण नहीं देंगे। गेट्स फाउंडेशन ने इसकी जानकारी दी। फाउंडेशन ने कहा कि यह फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया गया है ताकि समिट का पूरा ध्यान अपनी प्राथमिकताओं पर बना रहे। फाउंडेशन ने बताया कि समिट में बिल गेट्स की जगह अब अंकुर वोरा फाउंडेशन का पक्ष रखेंगे। अंकुर वोरा गेट्स फाउंडेशन के अफ्रीका और भारत कार्यालयों के प्रेसिडेंट हैं। वे आज समिट के एक सत्र में अपनी बात रखेंगे। अंकुर वोरा फाउंडेशन के कामों को लंबे समय से देख रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… कल दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर मार्केट और सोना-चांदी का हाल जानिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जानिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
India IT Rules 2026 | Deepfake Video-Photo 3 Hr Removal & AI Content Labeling

Hindi News Tech auto India IT Rules 2026 | Deepfake Video Photo 3 Hr Removal & AI Content Labeling नई दिल्ली1 दिन पहले कॉपी लिंक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे X (ट्विटर), यू-ट्यूब, स्नैपचैट और फेसबुक को कल 20 जनवरी से अपने प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जाने वाले AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) कंटेंट पर लेबल लगाना होगा। इसके साथ ही अगर कोई डीपफेक वीडियो-फोटो अपलोड करता है, तो उसे 3 में हटाने होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इसके लिए IT रूल्स 2021 में बदलाव किया है। इसका ड्राफ्ट 22 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था। मंत्रालय ने 10 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी कर प्लेटफॉर्म्स को नए नियम का पालन करने का आदेश जारी किया था। नए नियम डीपफेक और AI से बने कंटेंट को लेबल और ट्रेस करने के लिए हैं। अब AI कंटेंट में साफ लिखना होगा कि यह असली नहीं, AI की मदद से बनाया गया है। इससे मिस इनफॉर्मेशन और चुनावी धांधली जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी। पीएम बोले- कंटेंट पर ‘ऑथेंटिसिटी लेबल’ की जरूरत पीएम ने आज AI समिट के दौरान सुझाव दिया कि जैसे खाने के सामान पर ‘न्यूट्रिशन लेबल’ होता है, वैसे ही डिजिटल कंटेंट पर भी स्पष्ट लेबल होना चाहिए। इससे लोगों को पता चल सकेगा कि क्या असली है और क्या एआई द्वारा बनाया गया (फैब्रिकेटेड) है। सभी AI ऑडियो-वीडियो में लेबल लगाना होगा नए रूल 3 (3) के तहत, जो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म AI कंटेंट जैसी ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन’ क्रिएट करेगा, उसे हर ऐसे कंटेंट पर प्रॉमिनेंट लेबल लगाना होगा। परमानेंट यूनिक मेटाडेटा/आइडेंटिफायर एम्बेड भी करना पड़ेगा। ये लेबल विजुअल में कम से कम 10% एरिया कवर करेगा या ऑडियो में पहले 10% टाइम में सुनाई देगा। मेटाडेटा को कोई चेंज, हाइड या डिलीट नहीं कर पाएगा। प्लेटफॉर्म्स को टेक्निकल तरीके अपनाने पड़ेंगे ताकि अपलोड होने से पहले ही चेक हो जाए कि ये AI वाला है या नहीं। नवंबर में रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। सचिन तेंदुलकर का डीपफेक वीडियो, जिसमें वे गेमिंग ऐप को प्रमोट करते दिखे थे। नए IT नियमों में ये 3 बदलाव भी लेबल हटाना या छिपाना अब मुमकिन नहीं : सोशल मीडिया कंपनियां अब AI लेबल या उसके मेटाडेटा (पहचान की जानकारी) को हटाने या छिपाने की इजाजत नहीं दे सकतीं। एक बार लेबल लग गया, तो उसे वैसे ही रखना होगा। गंदे और भ्रामक कंटेंट पर लगाम : सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स (सॉफ्टवेयर) इस्तेमाल करें, जो AI के जरिए बनाए गए गैर-कानूनी, अश्लील या धोखाधड़ी वाले कंटेंट को रोक सकें। हर 3 महीने में चेतावनी देना अनिवार्य : कंपनियों को हर 3 महीने में कम से कम एक बार अपने यूजर्स को वॉर्निंग देनी होगी। उन्हें बताना होगा कि अगर उन्होंने AI का गलत इस्तेमाल किया या नियम तोड़े, तो उन्हें सजा या जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। यूजर्स और इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा? यूजर्स अब फेक कंटेंट आसानी से पहचान सकेंगे। मिसइनफॉर्मेशन कम होगी। लेकिन क्रिएटर्स को एक्स्ट्रा स्टेप्स लेने पड़ेंगे, जैसे लेबल लगाना। इंडस्ट्री के लिए चैलेंज ये होगा कि उन्हें मेटाडेटा और वेरिफिकेशन के लिए टेक इन्वेस्टमेंट करना होगा, जो ऑपरेशंस को थोड़ा महंगा कर सकता है। ओवरऑल, ये AI मिसयूज रोकने में मददगार साबित होगा। मंत्रालय ने इन नियमों पर क्या कहा? सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने साफ कहा कि ये स्टेप ‘ओपन, सेफ, ट्रस्टेड और अकाउंटेबल इंटरनेट’ बनाने के लिए है। यह जनरेटिव AI से आने वाली मिसइनफॉर्मेशन, इम्पर्सनेशन और इलेक्शन मैनिपुलेशन जैसी रिस्क्स को हैंडल करेगा। इससे इंटरनेट ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। क्या है डीपफेक? डीपफेक एक तरह की फेक वीडियो होती है, जिसमें किसी शख्स के चेहरे, आवाज और एक्सप्रेशन बदले जाते हैं। AI टूल्स के जरिए एडिटिंग इतनी सफाई से होती है कि सही और फेक वीडियो में पहचान कर पाना काफी मुश्किल होता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… X ने अश्लील AI कंटेंट पर सरकार को जवाब सौंपा:आईटी मंत्रालय जांच कर रहा, महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें क्रिएट कर शेयर करने का आरोप दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी इलॉन मस्क के AI चैटबॉट ग्रोक (Grok) के जरिए महिलाओं और बच्चों की अश्लील तस्वीरें बनाने के मामले में भारत सरकार को अपना जवाब सौंप दिया है। आईटी मंत्रालय ने 2 दिसंबर को मस्क की कंपनी को बुधवार शाम 5 बजे तक का समय दिया था। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कंपनी ने एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल कर दी है, जिसकी मंत्रालय जांच कर रहा है। सरकार ने चेतावनी दी थी कि अगर AI टूल्स के गलत इस्तेमाल पर कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो X को भारतीय कानूनों के तहत मिल रही कानूनी सुरक्षा खत्म कर दी जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








