कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन, पंजाबी एक्टर-सिंगर बंटे:बब्बू मान बोले- हर बार हम ही क्यों लाठी खाएं; सोनम बाजवा ने टूटे दिल की इमोजी लगाई

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन पर पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री बंट गई है। एक तरफ दिलजीत दोसांझ और सोनू सूद ने लाठीचार्ज पर सवाल उठाए। उन्होंने छात्रों के अधिकारों और उनकी मांगों को जायज ठहराया है। वहीं बब्बू मान ने आंदोलन के समर्थन से इनकार कर दिया। बब्बू मान ने तो सीधे सवाल उठाया कि जब 2020 में दिल्ली में किसान आंदोलन हुआ तो CJP बनाने वाले अभिजीत दीपके वहां आए थे क्या?। पंजाबी हर बार लाठियां खाने के लिए आगे नहीं आ सकते। वहीं जसबीर जस्सी ने सभी पार्टियों को अपील की कि इस मामले को संवेदनशीलता से देखा जाए। इसका राजनीतिकरण न किया जाए। एक्ट्रेस सोनम बाजवा ने इंस्टाग्राम पर टूटे हुए दिल की इमोजी लगाई। जानिए, CJP के आंदोलन पर किसने क्या कहा… दिलजीत दोसांझ बोले- स्टूडेंट्स की बात सुनी जाए दिलजीत दोसांझ ने कहा- आज जो हुआ, बहुत बुरा हुआ। स्टूडेंट्स के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए था। मेरी अधिकारियों से गुजारिश है कि स्टूडेंट्स की मांगों को सुना जाए। लोगों की आवाज रब की आवाज होती है। मुझ पर पहले ही एंटी नेशनलिस्ट का टैग बहुत बार लग चुका है। अब भी मुझे एंटी नेशनलिस्ट कहा जाएगा। किसान आंदोलन के बाद मुझे काफी कानूनी दिक्कतें आईं, जिनके बारे में मैं डिस्कस भी नहीं कर सकता। दिलजीत की पोस्ट.. जस्सी जसबीर बोले- प्यार से बात करना चाहिए ‘दिल ले गई कुड़ी गुजरात दी’ फेम पंजाबी सिंगर जस्सी जसबीर ने सोशल मीडिया पर लिखा- छात्र आखिरकार हमारे अपने बच्चों की तरह हैं। इसलिए उनसे प्यार और सम्मान के साथ बात की जानी चाहिए। उनकी बात और उनकी चिंताओं को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए। इस पूरे मामले में किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। जस्सी ने आगे कहा- छात्रों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। इस पोस्ट के साथ उन्होंने भाजपा, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, अभिनेता विजय, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आज तक, राष्ट्रपति भवन और शिक्षा मंत्रालय समेत कई प्रमुख नेताओं, राजनीतिक दलों और संस्थानों को भी टैग किया है। सोनू सूद ने लाठीचार्ज पर सवाल उठाए पंजाब में मोगा के रहने वाले बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस की लाठियों की नहीं, बल्कि गले लगाने वाले प्यार भरे हाथों और सहानुभूति की ज़रूरत है। सोनू सूद ने शासन और प्रशासन से अपील की कि वे छात्रों के मुद्दों को आक्रामकता के बजाय संवेदनशीलता और बातचीत के साथ हल करने का प्रयास करें। सोनम बाजवा बोलीं- सवाल करना कब से गलत हो गया पंजाबी एक्ट्रेस सोनम बाजवा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक भावुक पोस्ट साझा किया है। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, सवाल करना कब से इतना गलत हो गया?” इसके साथ उन्होंने टूटे हुए दिल का इमोजी भी लगाया। हालांकि पोस्ट में उन्होंने किसी व्यक्ति, घटना या विवाद का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे CJP के आंदोलन में हुए लाठीचार्ज से जोड़कर देखा जा रहा है। बब्बू मान बोले- हर बार पंजाबी ही लाठियां क्यों खाएं मशहूर पंजाबी सिंगर बब्बू मान ने कहा कि 1947 के विभाजन से लेकर 1984 और हालिया किसान आंदोलन तक, पंजाबियों ने हर संघर्ष में सबसे आगे रहकर बहुत कुछ सहा और खोया है। जब किसान आंदोलन चल रहा था, तब क्या CJP प्रमुख अभिजीत दीपके उनके समर्थन में आए थे?। मान ने कहा- अगर वे तब साथ नहीं खड़े थे, तो पंजाबियों को अब बिना सोचे-समझे उनके समर्थन में क्यों जाना चाहिए?। पंजाबियों की भी अपनी जिंदगी है और वे हमेशा ही लाठियां खाने के लिए आगे नहीं आ सकते। इसी वजह से कई पंजाबी और वे खुद इस प्रदर्शन का समर्थन नहीं कर रहे हैं।
दिलजीत की फिल्म सतलुज पूरी तरह बैन:ZEE5 ग्लोबल कैटेगरी से भी हटाई, सेंट्रल कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी; अब आगे क्या? जानिए सवाल-जवाब में सबकुछ

पंजाबी एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज अब पूरी तरह बैन हो गई है। इसे OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 की ग्लोबल कैटेगरी से भी हटा दिया गया है। इस फिल्म को अब विदेश में भी नहीं देखा जा सकेगा। इसी के साथ फिल्म के कंटेंट की जांच के लिए गठित केंद्रीय समिति ने भी सिफारिश कर दी है कि फिल्म को बैन ही रहने दिया जाए। क्योंकि, फिल्म भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ है। सरकारी सूत्रों से हवाले से यह जानकारी शनिवार को न्यूज एजेंसी PTI ने दी। सूत्रों के अनुसार, समिति ने इस बात पर जोर दिया कि IT अधिनियम की धारा 69A के तहत फिल्म पर प्रतिबंध लगाना उचित था। इसमें पाया गया कि फिल्म की कहानी संतुलित नहीं है, क्योंकि यह उग्रवादियों के कृत्यों को छिपाती है। जबकि, उग्रवाद के दौरान पंजाब में सुरक्षा बलों की ओर से की गई ज्यादतियों को उजागर करती है। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन को दर्शाती है, जिन्होंने 1984 और 1994 के बीच पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के दाह संस्कार की जांच की थी। 1995 में पंजाब पुलिस ने उनका अपहरण कर हत्या कर दी थी। सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 3 जुलाई को रिलीज होने के 2 दिन बाद ही इस फिल्म को भारत में ZEE5 से हटा दिया था। इसके बाद मंत्रालय ने फिल्म की विस्तृत जांच के लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के तहत एक अंतर-विभागीय समिति (आईडीसी) का गठन किया था। उसी समिति ने इसे बैन रखने की सिफारिश की है। पंजाब में यह मुद्दा राजनीतिक रंग ले चुका है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने प्रतिबंध हटाने की मांग की है और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने राज्य भर में फिल्म प्रदर्शित करने की घोषणा की है। ऐसा क्या है इस फिल्म में, जो इस बैन किया जा रहा है, क्या यह फिल्म फिर से रिलीज होगी? सवाल-जवाब में जानते हैं सभी सवालों के जवाब। इस फिल्म में ऐसा क्या है, जिससे इसे बैन किया गया? यह फिल्म प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है। फिल्म में खालड़ा का रोल दिलजीत दोसांझ ने निभाया है। इसमें खालड़ा द्वारा 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौर में पुलिस की ओर से लावारिस बताकर जलाए गए सिखों के शवों की खोज और उनके दस्तावेजीकरण की कहानी को दर्शाया गया है। फिल्म दिखाती है कि खालड़ा ने अमृतसर और तरनतारन के श्मशान घाटों से नगर निगम के रिकॉर्ड हासिल किए, जिससे साबित हुआ कि पुलिस ने हजारों युवाओं को अवैध हिरासत में लेकर मार डाला। इस दौरान साहस दिखाकर राज्य के सिस्टम के सामने खालड़ा खड़े रहे। दुनिया के सामने सच लाने के बाद सितंबर 1995 में पंजाब पुलिस ने खालड़ा की भी हत्या कर दी। फिल्म की किन चीजों पर विवाद हुआ? बैन पर राजनीतिक हुई, पार्टियों ने क्या-क्या कहा? शिरोमणि अकाली दल (SAD) SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस बैन को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया। उन्होंने लिखा, “यह केवल सेंसरशिप नहीं है, बल्कि हमारी सामूहिक स्मृति, सच्चाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक हमला है। पंजाब अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का हकदार है, दमन से नहीं।” अकाली दल ने घोषणा की कि सरकार के इस बैन को चुनौती देने के लिए पंजाब के हर गांव और गुरुद्वारों में इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग करेंगे, ताकि युवा अपनी पहचान और इतिहास को जान सकें। कांग्रेस वरिष्ठ नेता व विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने केंद्र सरकार के इस कदम की निंदा की। उन्होंने कहा कि खालड़ा के अपहरण और पुलिस बर्बरता के सच को दिखाने वाली फिल्म को रोकना अन्यायपूर्ण है। पार्टी के अन्य नेताओं ने आरोप लगाया कि जब द कश्मीर फाइल्स और द केरल स्टोरी जैसी संवेदनशील नैरेटिव वाली फिल्मों को बिना किसी बाधा के अनुमति मिल सकती है, तो तथ्यों और अदालती फैसलों पर आधारित सतलुज पर प्रतिबंध लगाना केंद्र सरकार के दोहरे मापदंड को दर्शाता है। आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब की सत्ताधारी AAP ने भी फिल्म को ZEE5 से हटाने के फैसले की आलोचना की। पार्टी प्रवक्ताओं ने मांग की कि फिल्म को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए, क्योंकि नई पीढ़ी के लिए राज्य के इस दर्दनाक और ऐतिहासिक सच को समझना बेहद जरूरी है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) सिख धार्मिक मामलों की सर्वोच्च संस्था SGPC ने फिल्म का पूरी तरह समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा का बलिदान सिख कौम के लिए सर्वोच्च है और फिल्म के माध्यम से उनकी आवाज को दबाने की कोशिशें कभी कामयाब नहीं होंगी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म की टाइमिंग और उसके नैरेटिव पर सवाल उठाए। बीजेपी का तर्क है कि चुनाव या संवेदनशील समय में ऐसी फिल्में पंजाब में दोबारा अशांति फैला सकती हैं। केंद्र ने फिल्म के खिलाफ क्या कहा? फिल्म रिलीज के बाद केंद्र सरकार ने क्या किया? 1. IT एक्ट की धारा 69A का उपयोग कर फिल्म तुरंत हटवाई फिल्म के रिलीज होने के ठीक 48 घंटे के भीतर केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने IT एक्ट की धारा 69A और IT नियम, 2021 के तहत प्राप्त आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया। सरकार ने सुरक्षा चिंताओं और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए ZEE5 को तुरंत इस फिल्म को भारत में अपने प्लेटफॉर्म से हटाने का लिखित निर्देश जारी किया। 2. हाई-लेवल स्पेशल कमेटी का गठन फिल्म को केवल हटाने तक ही केंद्र नहीं रुका। इसके कंटेंट की गहराई से जांच करने के लिए केंद्र सरकार ने IT नियम 2021 के नियम 14 के तहत एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय समिति बनाई। इस विशेष समिति को फिल्म के दृश्यों, नैरेटिव और उसके संभावित सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों की समीक्षा कर सरकार को अंतिम सिफारिश सौंपने का जिम्मा दिया गया। 3. CBFC के नियमों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत केंद्र सरकार ने साफ किया कि कोई भी फिल्म प्रोड्यूसर सेंसर बोर्ड (CBFC) के सर्टिफिकेशन प्रोसेस को बायपास कर सीधे ओटीटी पर ऐसी संवेदनशील फिल्में रिलीज नहीं कर सकता। सरकार ने रुख अपनाया कि यदि फिल्म को दोबारा भारत में स्ट्रीम
दिलजीत दोसांझ से फैन ने पूछा अमेरिकी नागरिकता पर सवाल:बोले- कुछ भी बोलूंगा तो खबर बन जाएगी; डोनाल्ड ट्रंप की बेटी पर भी किया खुलासा

सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ ने अपनी अमेरिकी नागरिकता के दावों पर सीधा जवाब देने से परहेज किया है। हाल ही में एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के दौरान जब फैंस ने उनसे यूएस ग्रीन कार्ड और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर सवाल किए, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिलजीत के पास साल 2022 से ही अमेरिकी नागरिकता होने का दावा किया जा रहा है। दिलजीत दरअसल अपनी फिल्म ‘सतलुज’ को भारत में जी5 प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के विवाद पर बात करने के लिए लाइव आए थे। ग्रीन कार्ड के सुझाव पर दिया मजाकिया जवाब इंस्टाग्राम लाइव के दौरान एक फैन ने दिलजीत को अमेरिकी ग्रीन कार्ड के लिए अप्लाई करने का सुझाव दिया। इस पर मुस्कुराते हुए दिलजीत ने कहा कि मैं एक कार्ड लूंगा और उस पर हरा रंग कर लूंगा। उन्होंने आगे कहा कि मैं इस पर कुछ नहीं बोल रहा हूं, नहीं तो सब कुछ छोड़कर इस पर न्यूज बन जाएगी। दुनिया का यह ड्रामा कभी खत्म नहीं होगा। दिलजीत ने कहा कि उनका मानना है कि हर किसी को बिना वीजा के किसी भी देश में जाने की इजाजत होनी चाहिए और पूरी दुनिया को एक हो जाना चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप की बेटी को लेकर कही यह बात लाइव सेशन में ही एक दूसरे फैन ने मजाक में दिलजीत से कहा कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करके सभी के लिए अमेरिकी नागरिकता पक्की करवा दें। इस पर हंसते हुए दिलजीत ने कहा कि आप लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं? मैं सिर्फ एक कलाकार हूं। मैं उनसे नागरिकता के मुद्दों को हल करने के लिए कैसे कह सकता हूं? उन्होंने खुलासा किया कि ट्रंप की बेटी उन्हें इंस्टाग्राम पर फॉलो करती है, लेकिन उन्होंने कभी उनसे बात नहीं की है। दिलजीत ने कहा कि वे कभी किसी से फेवर नहीं मांगते। रिपोर्ट में अमरीकी नागरिकता का दावा दिलजीत की नागरिकता को लेकर यह चर्चा कुछ महीने पहले इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थी। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दिलजीत साल 2022 में अमेरिका के नागरिक बन चुके हैं और 1 सितंबर 2022 से अमेरिकी पासपोर्ट पर सफर कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उनका आखिरी भारतीय पासपोर्ट साल 2018 में मुंबई से जारी हुआ था। इसमें यह भी दावा किया गया था कि उनकी पत्नी संदीप कौर भी अमेरिकी नागरिक हैं और दिलजीत ने कैलिफोर्निया के एक पॉश इलाके में पांच बेडरूम का बंगला अपना पता बताया है। हालांकि दिलजीत ने अब तक इस पर कोई साफ बयान नहीं दिया है। फिल्म ‘सतलुज’ को हटाए जाने पर जताई चिंता दिलजीत मुख्य रूप से अपनी फिल्म ‘सतलुज’ से जुड़े विवाद पर बात करने के लिए लाइव आए थे। यह फिल्म भारत में रिलीज होने के महज 48 घंटे के भीतर ही जी5 प्लेटफॉर्म से हटा दी गई थी। इससे पहले फिल्म को सेंसर बोर्ड से सर्टिफिकेट लेने के लिए करीब तीन साल तक लंबा इंतजार करना पड़ा था। दिलजीत ने दर्शकों से इस फिल्म को देखने की अपील करते हुए इसे पंजाब और भारत के इतिहास का एक बेहद जरूरी हिस्सा बताया। सरकारी आदेश पर हटाई गई फिल्म सतलुज टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने फिल्म ‘सतलुज’ को ZEE5 से हटाने का निर्देश दिया। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला सुरक्षा संबंधी चिंताओं और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) रूल, 2021 के तहत तय दायित्वों का हवाला देते हुए लिया गया। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, फिल्म निर्माताओं ने 2022 में ‘पंजाब 95’ टाइटल से CBFC से सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन किया था। हालांकि, सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए 127 कट स्वीकार नहीं किए गए, जिसके बाद फिल्म की रिलीज रोक दी गई। अधिकारी ने कहा, “फिल्ममेकर्स ने सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए कट लागू नहीं किए और बाद में फिल्म का नाम बदलकर चुपचाप OTT पर रिलीज कर दिया। चूंकि OTT, CBFC के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसलिए मामला सरकार के संज्ञान में आने पर ZEE5 को फिल्म हटाने के लिए कहा गया।” क्यों विवादों में है फिल्म सतलुज
OTT से हटी, गुरुद्वारों में फ्री दिखेगी दिलजीत की 'सतलुज':स्पेशल स्क्रीनिंग शुरू; फिल्म में पंजाब में फर्जी मुठभेड़ में 25 हजार हत्याओं का दावा

OTT प्लेटफॉर्म से हटाई गई दिलजीत दोसांझ स्टारर फिल्म ‘सतलुज’ अब फ्री में पंजाब में गुरुद्वारों दिखाई जाएगी। यह फिल्म पंजाब में आतंकवाद के दौर यानी 90 के दशक में फर्जी मुठभेड़ में 25 हजार युवाओं की हत्या का दावा करने वाले ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट जसवंत खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है। गुरदासपुर से गुरुद्वारों में फिल्म दिखाने की शुरूआत हो चुकी है। यहां गांव मानचोपड़ा में गुरुद्वारा साहिब से अनाउंसमेंट कर गांव के लोगों को फिल्म दिखाई गई। मोगा के गुरुद्वारे में भी फिल्म दिखाई गई। अब बुधवार और गुरुवार को पठानकोट के 2 प्रमुख गुरुद्वारों गुरुद्वारा सिंह सभा, मॉडल टाउन और गुरुद्वारा सिंह सभा सेंट्रल (रानीपुर) में इसकी स्क्रीनिंग का ऐलान कर दिया गया है। भारतीय किसान यूनियन के पंजाब यूथ अध्यक्ष इंद्रपाल सिंह बैंस ने कहा कि फिल्म को पंजाब के अन्य जिलों और गांव-गांव तक ले जाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें। वहीं दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने स्कूल-कॉलेजों में भी फिल्म की स्क्रीनिंग का ऐलान कर दिया है। गुरुद्वारा प्रबंधकों का दावा- इतिहास दबाने की कोशिश हुई पठानकोट के गुरुद्वारा प्रबंधक मनप्रीत सिंह का कहना है कि फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित है। उनका आरोप है कि पंजाब के इतिहास के एक अहम अध्याय को लोगों तक पहुंचने से रोकने के लिए फिल्म को जानबूझकर OTT प्लेटफॉर्म से हटाया गया। उनका कहना है कि अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फिल्म नहीं दिखाई जाएगी तो गुरुघरों के माध्यम से इसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी खालड़ा के संघर्ष, मानवाधिकारों की लड़ाई और उनके बलिदान से परिचित हो सके। सीनियर वकील बोले- गुरुद्वारों में स्क्रीनिंग गैरकानूनी नहीं OTT से हटाने के बावजूद इसकी सार्वजनिक स्क्रीनिंग को लेकर पठानकोट के सीनियर एडवोकेट विशाल कोहली ने कहा कि गुरुद्वारों में संगत के लिए फिल्म की स्क्रीनिंग करना किसी कानून का उल्लंघन नहीं है। उनके मुताबिक, फिल्म की सामग्री पहले ही अलग-अलग ऑनलाइन माध्यमों पर लोगों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में सामाजिक जागरूकता के उद्देश्य से इसका प्रदर्शन करना गैरकानूनी नहीं माना जा सकता। DSGMC का ऐलान- गुरुद्वारों के साथ स्कूल-कॉलेजों में भी दिखाई जाएगी फिल्म दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) भी फिल्म के समर्थन में खुलकर सामने आ गई है। कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी इस फिल्म को रोकना इतिहास को दबाने की कोशिश है। उन्होंने घोषणा की कि दिल्ली के गुरुद्वारों में फिल्म की सार्वजनिक स्क्रीनिंग कराई जाएगी। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन, संघर्ष और मानवाधिकारों पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। सभी गुरुद्वारा कमेटियों से फिल्म को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की अपील भी की गई है। दिलजीत की फिल्म में क्या दिखाया गया, जिस पर एतराज? दिलजीत की इस फिल्म में पूर्व CM बेअंत सिंह की बम ब्लास्ट में हत्या का सीन भी दिखाया गया है। फिल्म की कहानी के लिए इस सीन को पुलिस की क्रूरता के एक टर्निंग पॉइंट के रूप में दिखाया गया है। फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि कैसे पुलिस की क्रूरता और निर्दोष लोगों पर बढ़ते अत्याचारों के कारण एक आम आदमी अंदर से टूट जाता है और आतंकवाद या इस तरह के कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाता है। इसमें तत्कालीन DGP केपीएल गिल को IPS बिट्टा के तौर पर दिखाया गया है। फिल्म में दिखाया गया है 31 अगस्त 1995 को तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या होती है और इस घटना के ठीक एक हफ्ते बाद यानी 6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालड़ा का भी अपहरण कर लिया जाता है। मुख्यमंत्री की मौत के बाद जब राजनीतिक माहौल बदला, तो पुलिस को डर था कि खालड़ा उनके इस 25 हजार अवैध दाह-संस्कार के काले राज को दुनिया के सामने न ले आएं, इसलिए वे खालड़ा का अपहरण करने का कदम उठाते हैं। फिल्म हटाने को लेकर केंद्र की क्या चिंता, आगे क्या फैसला लिया? केंद्र ने फिल्म हटाने को लेकर अभी औपचारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। हालांकि सरकारी सोर्सेज के जरिए मीडिया के मुताबिक फिल्म के कुछ हिस्सों का भारत विरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग किए जाने की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक, चिंता है कि फिल्म के कुछ दृश्य और सामग्री का इस्तेमाल खालिस्तान समर्थक आंदोलन के पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया जा सकता है। खासकर पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ऐसा हो सकता है। सरकार का मानना है कि “ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे सबसे ऊपर होते हैं। यह राजनीति का विषय नहीं है। हालांकि केंद्र ने भाजपा के पंजाब प्रधान केवल सिंह ढिल्लों की अपील के बाद इस पर रिव्यू कमेटी बनाई है। कमेटी फिल्म की सामग्री, तथ्यों और प्रस्तुत किए गए विषयों का अध्ययन करेगी। जसवंत सिंह खालड़ा के बारे में जानिए, जिनके जीवन पर यह फिल्म बनी बैंक में काम करते थे, लावारिश लाशें खोजनी शुरू कर दीं 1990 के दशक के पंजाब के कई इलाकों में खालिस्तान की मांग जोर पकड़ रही थी। ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार’ में 6 जून 1984 को खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह ‘भिंडरांवाले’ की मौत हो गई। जवाब में 31 अक्टूबर, 1984 को पीएम इंदिरा गांधी की उनके ही 2 सिख बॉडीगार्ड्स ने हत्या कर दी। इसके बाद खालिस्तान मूवमेंट को कुचलने का दौर शुरू हुआ। 1992 में बेअंत सिंह सीएम बने। तब के पंजाब पुलिस के DGP कंवर पाल सिंह गिल (केपीएस गिल) ने एंटी-टेररिज्म अभियान चलाया। पुलिस को खुली छूट थी। पंजाब के कई इलाकों से हजारों नौजवान रातोंरात गायब हो रहे थे। पुलिस पर निहत्थे लोगों को हिरासत में लेने और फर्जी एनकाउंटर के आरोप लग रहे थे। 1952 में अमृतसर जिले के खालड़ा गांव में जन्मे जसवंत सिंह, तब अमृतसर के एक बैंक में काम करते थे। जनवरी 1995 में वे शिरोमणि अकाली दल की मानवाधिकार यूनिट के महासचिव भी थे। लापता लोगों के डेथ सर्टिफिकेट न होने के चलते उनके परिवार वाले न उनकी संपत्ति पर दावा कर सकते थे और न ही बैंक में उनके खातों से पैसा निकाल पा रहे थे। ऐसे में जसवंत ने लापता लोगों, पुलिस हिरासत में हुई मौतों और श्मशानों में
पंजाब- इंसाफ के लिए 16 साल लड़ी बीबी खालड़ा:पुलिस ने न सुनी तो सुप्रीम कोर्ट गई; इन्हीं के पति पर OTT से हटी दिलजीत की फिल्म

पंजाबी एक्टर दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज (पंजाब 95) रिलीज के 2 ही दिन बाद OTT प्लेटफॉर्म से हटने के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा फिर चर्चा में हैं। जसवंत खालड़ा ने श्मशान घाट, नगर निगम समेत अन्य जगहों से रिकॉर्ड इकट्ठा कर दावा किया था कि आतंकवाद के दौर में पंजाब में पुलिस के फर्जी एनकाउंटर में 25 हजार युवकों की हत्या की गई। फिर उन्हें लावारिस की तरह फूंक दिया गया। जसवंत खालड़ा को घर के बाहर से किडनैप कर उनकी हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने 16 साल की लंबी लड़ाई लड़ी। जिसके बाद दोषी पुलिस वालों को सजा हुई। वह पति के इंसाफ के लिए ट्रायल कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ीं। हालांकि उन्हें आज भी इस बात का मलाल है कि उन्होंने दोषियों को तो सजा दिला दी लेकिन उनके पति के साथ क्या हुआ, आज तक पता नहीं चला। घर से किडनैपिंग के बाद उनका कत्ल कैसे किया गया, किसी ने इसके बारे में राज नहीं उगला। पति को इंसाफ दिलाने के लिए बीबी खालड़ा ने क्या किया, गवाह न मुकरें, इसके लिए क्या कोशिश की, आखिर कैसे CBI जांच शुरू हुई, ये सब जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. पति को इंसाफ के लिए परमजीत कौर खालड़ा का संघर्ष जानिए:- *************** ये खबर भी पढ़ें… दिलजीत की 2 दिन पहले रिलीज ‘सतलुज’ OTT से हटाई:फिल्म में दावा- पंजाब में फर्जी मुठभेड़ में 25 हजार मारे; दोसांझ ने पायरेसी की अपील की पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फिल्म को अचानक OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। खालड़ा ने आतंकवाद के दौर में पंजाब में फेक एनकाउंटर में 25 हजार युवाओं को मारने का दावा किया था। यह फिल्म 3 साल की रोक के बाद 2 दिन पहले ही नाम बदलकर रिलीज की गई थी। पहले इसका नाम ‘पंजाब 95’ था, जिसे ‘सतलुज’ नाम से OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया था (पढ़ें पूरी खबर)
Diljit Dosanjh Film Removed From ZEE5

दिलजीत की फिल्म ओटीटी प्लेटफार्म से हटाई गई। पंजाब 95 नाम बदलकर ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज की गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को दो दिन बाद प्लेटफॉर्म से अचानक हटा दिया गया। इस पर दिलजीत का कहना है कि जो फिल्म के साथ हुआ है, वही खालड़ा साहब के साथ हुआ था। . वहीं, ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, अगले आदेश तक ‘सतलुज’ उपलब्ध नहीं रहेगा। हम कानूनी प्रक्रिया के तहत हर उचित विकल्प तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि जल्द से जल्द इस फिल्म को फिर से दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके। इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। तीन दिन पहले हुई रिलीज दरअसल, तीन साल के लंबे संघर्ष के बाद पंजाब 95 फिल्म को सतलुज नाम से रिलीज किया गया था। फिल्म चली, इस बीच अचानक इसे हटा दिया गया। कंपनी की तरफ से कहा गया, “सतलुज” को दर्शकों से बहुत प्यार और अच्छा रिस्पॉन्स मिला। फिल्म देखने और समर्थन करने वाले सभी लोगों का हम दिल से धन्यवाद करते हैं। आपका प्यार और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। ZEE5 को “सतलुज” और इसे बनाने वाली टीम पर पूरा भरोसा है। हमारा मानना है कि अच्छी कहानियां लोगों पर गहरा असर छोड़ती हैं। इसलिए हम आगे भी ऐसी बेहतरीन कहानियां लाते रहेंगे। फिलहाल कुछ परिस्थितियों के कारण “सतलुज” ZEE5 पर उपलब्ध नहीं होगी। हम इसे दोबारा जल्द से जल्द वापस लाने के लिए सभी जरूरी कानूनी और अन्य प्रयास कर रहे हैं। हम अच्छी और सच्ची कहानियों के साथ हमेशा मजबूती से खड़े रहेंगे। फिल्म को इस तरह चुप नहीं करवाया जा सकता शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कहा कि भारत में ZEE5 से सतलुज को अचानक हटाए जाने की खबर से मैं स्तब्ध और दुखी हूं। पंजाब के दर्दनाक इतिहास को सामने लाने और सरदार जसवंत सिंह जी खालड़ा के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि देने वाली इस दमदार फिल्म को इस तरह चुप नहीं कराया जा सकता। यह सिर्फ सेंसरशिप नहीं है, बल्कि हमारी सामूहिक यादों, सच और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। मैं इस फैसले की कड़ी निंदा करता हूं। पंजाब को अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का अधिकार है, उसे दबाया नहीं जाना चाहिए। शिरोमणि अकाली दल ने फिल्म को हटाने पर ऐतराज जताया है। अब तक फिल्म के सफर को चार प्वाइंट में जानिए 1. अधिकतर शूटिंग पंजाब में हुई 2022 फिल्म बनाने की घोषणा की। फिल्म का शुरुआती नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया था, जिसका अर्थ ‘नरसंहार’ होता है। फिल्म की शूटिंग पंजाब के विभिन्न हिस्सों, खासकर अमृतसर में पूरी हुई। अभिनेता दिलजीत ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए अपने लुक और शारीरिक बनावट में बदलाव किया। 2. मंजूरी मिलने से पहले नाम बदलने का सुझाब साल 2023 में फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया, तो बोर्ड ने फिल्म के शीर्षक पर आपत्ति जताई और कई बदलाव तथा कट्स सुझाए। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ रखा गया। 3.फिल्म फेस्टिवल में काफी सराहना हुई साल 2023 में फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। 4. 127 कट लगाने को कहा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBFC ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए। इनमें कुछ ऐतिहासिक संदर्भों, स्थानों और पात्रों के नामों में बदलाव की मांग भी शामिल थी। हालांकि, CBFC ने सार्वजनिक रूप से इन सभी प्रस्तावित बदलावों का विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया। भारत में सेंसर की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी। इसके बाद 7 फरवरी 2025 को इसे चुनिंदा देशों में रिलीज किया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा, जिनके जीवन पर सतलुज फिल्म् आधारित है। श्मशान घाटों का दौरा कर जुटाई जानकारियां खालड़ा ने पंजाब पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही इन गुमशुदगियों और हत्याओं को उजागर किया था। उन्होंने उस समय अमृतसर के श्मशान घाटों का दौरा कर यह जानकारी जुटाई कि वहां 6,000 से अधिक शवों का गुप्त रूप से अंतिम संस्कार किया गया था। यह जानकारी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी साझा की, जिससे भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हुए। 1995 में हुई थी हत्या खालड़ा को सिखों के हकों के लिए लड़ने का खामियाजा अपनी जान देकर चुकाना पड़ा था। परिवार का आरोप है कि 6 सितंबर, 1995 को पुलिस ने खालड़ा का उनके घर से अपहरण कर लिया। इसके बाद उन्हें पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज नहीं की, जिसके बाद जसवंत की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया था।
दिलजीत दोसांझ के बयान से निराश हुई कॉकरोच जनता पार्टी:प्रवक्ता बोले- युवाओं के मुद्दों पर बोलना चाहिए; दिलजीत ने कहा- मुझे प्रदर्शन से दूर रखो

दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरभ दास ने सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ के बयान पर निराशा जताई है। हालिया बातचीत में सौरभ दास ने कहा कि वे दिलजीत के रुख से थोड़े अपसेट हैं। दिलजीत को गानों की तरह अपने शब्दों से भी देश के युवाओं के मुद्दों और इस आंदोलन पर बात करनी चाहिए। इससे पहले दिलजीत दोसांझ ने अपने इंस्टाग्राम लाइव में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से खुद को दूर रखने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वे राजनेता नहीं, बल्कि सिर्फ एक कलाकार हैं। युवाओं का जोश बढ़ाएं दिलजीत सोशल मीडिया सामने वीडियो में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास मीडिया से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। शुरुआत में सौरभ ने कहा कि उनके पास एक्टर-सिंगर दिलजीत के लिए कोई संदेश नहीं है। हालांकि, जब उनसे दिलजीत के हालिया बयान को लेकर सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “यह बहुत दुखद है। मुझे लगता है कि उन्हें इस आंदोलन पर कुछ बोलना चाहिए ताकि युवाओं का जोश बढ़े। वे अपने गानों से तो जोश बढ़ाते ही हैं, लेकिन उन्हें अपने शब्दों से भी देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बात करनी चाहिए।” दिलजीत ने प्रदर्शन से खुद को अलग किया यह पूरा विवाद दिलजीत दोसांझ के एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के बाद शुरू हुआ। लाइव बातचीत के दौरान एक फैन ने दिलजीत से दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर राय मांगी थी। इस पर दिलजीत ने जवाब दिया था, “भाई, मुझे इन प्रदर्शन जैसी चीजों से दूर ही रखो। मैं एक कलाकार हूं, कोई नेता नहीं हूं।” दिलजीत ने साफ कर दिया था कि वे खुद को केवल मनोरंजन की दुनिया तक ही सीमित रखना चाहते हैं और उनका किसी भी राजनीतिक दल या आंदोलन से कोई सीधा संबंध नहीं है। नीट पेपर लीक पर प्रदर्शन कर रही है CJP ककरोच जनता पार्टी पिछले कुछ समय से दिल्ली के जंतर मंतर पर लगातार आंदोलन कर रही है। यह संगठन नीट (NEET) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस डिजिटल सटायर ग्रुप की शुरुआत अभिजीत दिपके ने की थी, जो अब युवाओं से जुड़े मुद्दों पर जमीन पर उतरकर प्रदर्शन कर रहा है। इस आंदोलन को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी समर्थन मिला है, जिसके कारण यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। किसान आंदोलन में एक्टिव थे, अब बनाई दूरी सोशल मीडिया पर दिलजीत दोसांझ के इस बदले रुख को लेकर काफी चर्चा हो रही है। साल 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान दिलजीत ने खुलकर किसानों का समर्थन किया था। वे खुद दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे धरने में शामिल होने पहुंचे थे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी आर्थिक मदद भी की थी। हालांकि, उसके बाद से दिलजीत ने राजनीतिक और सामाजिक विवादों से पूरी तरह दूरी बना ली है। इसी साल मई में उन्होंने राजनीति में आने की खबरों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया था।
ककरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर बोले दिलजीत दोसांझ:मैं केवल एक कलाकार हूं, नेता नहीं; राजनीति और प्रदर्शनों से मुझे दूर ही रखें

सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर एक लाइव सेशन के दौरान दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे ककरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ किया है कि वे एक कलाकार हैं और उनका राजनीति या किसी भी तरह के प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। दिलजीत ने फैंस से अपील की है कि उन्हें इन मामलों से दूर रखा जाए। ककरोच जनता पार्टी पिछले कुछ समय से नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। इंस्टाग्राम लाइव में फैन ने पूछा था सवाल दिलजीत दोसांझ ने बुधवार शाम को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से फैंस के साथ लाइव बातचीत की। इस दौरान एक फैन ने उनसे दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर उनकी राय मांगी। इस सवाल का जवाब देते हुए दिलजीत ने कहा, “जंतर मंतर कहां है प्रदर्शन के लिए? भाई, मुझे प्रदर्शन जैसी चीजों से दूर ही रखो। मैं एक कलाकार हूं, मैं कोई नेता नहीं हूं।” दिलजीत ने आगे कहा कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं है कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं, लेकिन वे खुद को सिर्फ मनोरंजन की दुनिया तक सीमित रखना चाहते हैं। दुनिया में सब कुछ कभी ठीक नहीं हो सकता लाइव सेशन के दौरान दिलजीत ने गुरु ग्रंथ साहिब की एक पंक्ति “नानक दुखिया सब संसार, सो सुखिया जिस नाम अधार” का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जीवन में सब कुछ कभी ठीक नहीं हो सकता है। इस दुनिया में सब कुछ सही होना मुमकिन नहीं है।” इसके बाद उन्होंने विवाद पर सीधे बोलने से बचते हुए मजाकिया अंदाज में कहा, “जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें भी बधाई और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उन्हें भी बधाई। मुझे इस बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है।” शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही CJP दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व ककरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही है। इस संगठन की शुरुआत एक डिजिटल सटायर (व्यंग्य) ग्रुप के रूप में हुई थी, जिसके फाउंडर अभिजीत दिपके हैं। यह संगठन 20 जून से नीट (NEET) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक विवाद को लेकर जंतर मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। 2020 में किया था किसान आंदोलन का समर्थन सोशल मीडिया पर दिलजीत के इस बयान के बाद उनके पुराने स्टैंड की चर्चा शुरू हो गई है। साल 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान दिलजीत ने खुलकर किसानों का समर्थन किया था। वे खुद दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे और आर्थिक मदद भी की थी। हालांकि, पिछले कुछ समय से उन्होंने राजनीतिक मुद्दों पर बोलने से पूरी तरह दूरी बना ली है। इसी साल मई में एक सामाजिक संगठन ने उनसे राजनीति में आने की अपील की थी, जिसे उन्होंने साफ मना कर दिया था। राजनीति में आने से पहले ही कर चुके हैं इनकार राजनीति में आने की चर्चाओं पर दिलजीत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर स्थिति साफ की थी। उन्होंने लिखा था, “मेरा काम सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना है। मैं अपने इसी क्षेत्र में बहुत खुश हूं।” वर्क फ्रंट की बात करें तो दिलजीत को हाल ही में डायरेक्टर इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में देखा गया था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म को सिनेमाघरों में काफी पसंद किया जा रहा है। इसके अलावा वे अपने ‘ऑरा टूर 2026’ के तहत दुनिया भर में म्यूजिक कॉन्सर्ट कर रहे हैं।
ककरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर बोले दिलजीत दोसांझ:मैं केवल एक कलाकार हूं, नेता नहीं; राजनीति और प्रदर्शनों से मुझे दूर ही रखें

सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर एक लाइव सेशन के दौरान दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे ककरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ किया है कि वे एक कलाकार हैं और उनका राजनीति या किसी भी तरह के प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। दिलजीत ने फैंस से अपील की है कि उन्हें इन मामलों से दूर रखा जाए। ककरोच जनता पार्टी पिछले कुछ समय से नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। इंस्टाग्राम लाइव में फैन ने पूछा था सवाल दिलजीत दोसांझ ने बुधवार शाम को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से फैंस के साथ लाइव बातचीत की। इस दौरान एक फैन ने उनसे दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर उनकी राय मांगी। इस सवाल का जवाब देते हुए दिलजीत ने कहा, “जंतर मंतर कहां है प्रदर्शन के लिए? भाई, मुझे प्रदर्शन जैसी चीजों से दूर ही रखो। मैं एक कलाकार हूं, मैं कोई नेता नहीं हूं।” दिलजीत ने आगे कहा कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं है कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं, लेकिन वे खुद को सिर्फ मनोरंजन की दुनिया तक सीमित रखना चाहते हैं। दुनिया में सब कुछ कभी ठीक नहीं हो सकता लाइव सेशन के दौरान दिलजीत ने गुरु ग्रंथ साहिब की एक पंक्ति “नानक दुखिया सब संसार, सो सुखिया जिस नाम अधार” का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जीवन में सब कुछ कभी ठीक नहीं हो सकता है। इस दुनिया में सब कुछ सही होना मुमकिन नहीं है।” इसके बाद उन्होंने विवाद पर सीधे बोलने से बचते हुए मजाकिया अंदाज में कहा, “जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें भी बधाई और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उन्हें भी बधाई। मुझे इस बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है।” शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही CJP दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व ककरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही है। इस संगठन की शुरुआत एक डिजिटल सटायर (व्यंग्य) ग्रुप के रूप में हुई थी, जिसके फाउंडर अभिजीत दिपके हैं। यह संगठन 20 जून से नीट (NEET) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक विवाद को लेकर जंतर मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। 2020 में किया था किसान आंदोलन का समर्थन सोशल मीडिया पर दिलजीत के इस बयान के बाद उनके पुराने स्टैंड की चर्चा शुरू हो गई है। साल 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान दिलजीत ने खुलकर किसानों का समर्थन किया था। वे खुद दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे और आर्थिक मदद भी की थी। हालांकि, पिछले कुछ समय से उन्होंने राजनीतिक मुद्दों पर बोलने से पूरी तरह दूरी बना ली है। इसी साल मई में एक सामाजिक संगठन ने उनसे राजनीति में आने की अपील की थी, जिसे उन्होंने साफ मना कर दिया था। राजनीति में आने से पहले ही कर चुके हैं इनकार राजनीति में आने की चर्चाओं पर दिलजीत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर स्थिति साफ की थी। उन्होंने लिखा था, “मेरा काम सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना है। मैं अपने इसी क्षेत्र में बहुत खुश हूं।” वर्क फ्रंट की बात करें तो दिलजीत को हाल ही में डायरेक्टर इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में देखा गया था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म को सिनेमाघरों में काफी पसंद किया जा रहा है। इसके अलावा वे अपने ‘ऑरा टूर 2026’ के तहत दुनिया भर में म्यूजिक कॉन्सर्ट कर रहे हैं।
थिएटर में फिल्म देखने पहुंचे शरवरी और वेदांग रैना:मैं वापस आऊंगा' पर एक्ट्रेस ने लिखा इमोशनल नोट, कहा- दर्शकों ने फिल्म को अपनाया

फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ सिनेमाघरों में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हाल ही में फिल्म के मुख्य कलाकार शरवरी और वेदांग रैना दर्शकों के साथ एक स्पेशल स्क्रीनिंग में शामिल होने थिएटर पहुंचे। फिल्म को मिल रहे अच्छे रिस्पॉन्स को देखकर शरवरी ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल नोट शेयर कर फैंस का शुक्रिया अदा किया है। यह फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर के बैकग्राउन्ड पर आधारित एक इमोशनल ड्रामा है, जिसमें नसीरुद्दीन शाह और दिलजीत दोसांझ भी अहम किरदारों में हैं। देखें थिएटर में एक्टर्स की तस्वीरें.… शरवरी ने लिखा इमोशनल नोट थिएटर विजिट की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए शरवरी ने दर्शकों का आभार जताया। उन्होंने लिखा कि कुछ कहानियां क्रेडिट रोल होने के बाद खत्म नहीं होतीं। वे हर इमोशन, हर बातचीत और सोशल मीडिया रील्स में जिंदा रहती हैं। शरवरी ने आगे लिखा कि दर्शकों ने जिया और कीनू (फिल्म के किरदार) को अपने दिल में जगह दी और इस फिल्म को पूरी तरह अपना बना लिया। उन्होंने प्रशंसकों के एक सोशल मीडिया ट्रेंड को रीक्रिएट करके उन्हें थैंक्यू कहा। फिल्म को पाकिस्तान से मिल चुकी तारीफ इससे पहले ‘मैं वापस आऊंगा’ को पाकिस्तान से भी तारीफ मिल चुकी है। पाकिस्तानी फिल्ममेकर उमर नासिर अली ने इस फिल्म की जमकर तारीफ करते हुए इसे एक बेहद खूबसूरत और गहरी भावनात्मक फिल्म बताया है। उमर नासिर के मुताबिक, यह फिल्म उनके दिल के बेहद करीब है क्योंकि वे खुद भी इसी विषय के आसपास एक फिल्म बना रहे हैं। इस बीच फिल्म को मिल रहे अच्छे रिस्पॉन्स का असर इसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर भी दिख रहा है और फिल्म की कमाई सोमवार को कामकाजी दिन होने के बावजूद बढ़ गई है। सिनेमाघरों में आम दर्शकों के अलावा फिल्म इंडस्ट्री के लोग भी इस पीरियड ड्रामा की तारीफ कर रहे हैं। फिल्ममेकर जोया अख्तर, अनुराग कश्यप और अनुभव सिन्हा ने भी फिल्म की सराहना की है। जोया अख्तर ने सोशल मीडिया पर पूरी टीम को बधाई दी। अनुभव सिन्हा ने लिखा कि इम्तियाज की फिल्म का हर फ्रेम उनके कला के प्रति विश्वास को दिखाता है। तीन पीढ़ियों के अधूरे सफर की कहानी फिल्म की कहानी तीन पीढ़ियों के भावनात्मक सफर को दिखाती है, जिसमें बंटवारे के जख्मों को एक प्रेम कहानी के साथ पेश किया गया है। कहानी पाकिस्तान के सरगोधा से भारत आए एक सिख परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। बंटवारे के समय युवा कीनू (वेदांग रैना) अपनी प्रेमिका अफसाना (शरवरी) से अलग हो जाता है। करीब 70 साल बाद, 95 साल के हो चुके कीनू (नसीरुद्दीन शाह)अपने जीवन के आखिरी पड़ाव पर एक आखिरी बार सरगोधा वापस जाना चाहते हैं। इस यात्रा में उनका पोता निरवैर (दिलजीत दोसांझ) उनकी मदद करता है। ये खबर भी पढ़ें ‘मैं वापस आऊंगा’ को एंटी-नेशनल बताने पर हंसे एआर रहमान:इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया पोस्ट; फिल्म को पाकिस्तान से मिल चुकी तारीफ इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को एंटी-नेशनल बताए जाने पर संगीतकार एआर रहमान ने रिएक्शन दिया है। दरअसल सोशल मीडिया पर फिल्म को एक वर्ग एंटी-नेशनल बता रहा है, क्योंकि इसमें पाकिस्तान को जासूसों और आतंकवादियों के बिना दिखाया गया है। पूरी खबर पढ़ें









