Friday, 09 Oct 2026 | 03:56 PM

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Diljit Dosanjh Film Removed From ZEE5

Diljit Dosanjh Film Removed From ZEE5

दिलजीत की फिल्म ओटीटी प्लेटफार्म से हटाई गई। पंजाब 95 नाम बदलकर ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज की गई दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज को दो दिन बाद प्लेटफॉर्म से अचानक हटा दिया गया। इस पर दिलजीत का कहना है कि जो फिल्म के साथ हुआ है, वही खालड़ा साहब के साथ हुआ था। . वहीं, ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, अगले आदेश तक ‘सतलुज’ उपलब्ध नहीं रहेगा। हम कानूनी प्रक्रिया के तहत हर उचित विकल्प तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि जल्द से जल्द इस फिल्म को फिर से दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके। इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। तीन दिन पहले हुई रिलीज दरअसल, तीन साल के लंबे संघर्ष के बाद पंजाब 95 फिल्म को सतलुज नाम से रिलीज किया गया था। फिल्म चली, इस बीच अचानक इसे हटा दिया गया। कंपनी की तरफ से कहा गया, “सतलुज” को दर्शकों से बहुत प्यार और अच्छा रिस्पॉन्स मिला। फिल्म देखने और समर्थन करने वाले सभी लोगों का हम दिल से धन्यवाद करते हैं। आपका प्यार और भरोसा हमारे लिए बहुत मायने रखता है। ZEE5 को “सतलुज” और इसे बनाने वाली टीम पर पूरा भरोसा है। हमारा मानना है कि अच्छी कहानियां लोगों पर गहरा असर छोड़ती हैं। इसलिए हम आगे भी ऐसी बेहतरीन कहानियां लाते रहेंगे। फिलहाल कुछ परिस्थितियों के कारण “सतलुज” ZEE5 पर उपलब्ध नहीं होगी। हम इसे दोबारा जल्द से जल्द वापस लाने के लिए सभी जरूरी कानूनी और अन्य प्रयास कर रहे हैं। हम अच्छी और सच्ची कहानियों के साथ हमेशा मजबूती से खड़े रहेंगे। फिल्म को इस तरह चुप नहीं करवाया जा सकता शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल ने कहा कि भारत में ZEE5 से सतलुज को अचानक हटाए जाने की खबर से मैं स्तब्ध और दुखी हूं। पंजाब के दर्दनाक इतिहास को सामने लाने और सरदार जसवंत सिंह जी खालड़ा के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि देने वाली इस दमदार फिल्म को इस तरह चुप नहीं कराया जा सकता। यह सिर्फ सेंसरशिप नहीं है, बल्कि हमारी सामूहिक यादों, सच और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। मैं इस फैसले की कड़ी निंदा करता हूं। पंजाब को अपने अतीत का ईमानदारी से सामना करने का अधिकार है, उसे दबाया नहीं जाना चाहिए। शिरोमणि अकाली दल ने फिल्म को हटाने पर ऐतराज जताया है। अब तक फिल्म के सफर को चार प्वाइंट में जानिए 1. अधिकतर शूटिंग पंजाब में हुई 2022 फिल्म बनाने की घोषणा की। फिल्म का शुरुआती नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया था, जिसका अर्थ ‘नरसंहार’ होता है। फिल्म की शूटिंग पंजाब के विभिन्न हिस्सों, खासकर अमृतसर में पूरी हुई। अभिनेता दिलजीत ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए अपने लुक और शारीरिक बनावट में बदलाव किया। 2. मंजूरी मिलने से पहले नाम बदलने का सुझाब साल 2023 में फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया, तो बोर्ड ने फिल्म के शीर्षक पर आपत्ति जताई और कई बदलाव तथा कट्स सुझाए। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ रखा गया। 3.फिल्म फेस्टिवल में काफी सराहना हुई साल 2023 में फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। 4. 127 कट लगाने को कहा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBFC ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए। इनमें कुछ ऐतिहासिक संदर्भों, स्थानों और पात्रों के नामों में बदलाव की मांग भी शामिल थी। हालांकि, CBFC ने सार्वजनिक रूप से इन सभी प्रस्तावित बदलावों का विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया। भारत में सेंसर की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी। इसके बाद 7 फरवरी 2025 को इसे चुनिंदा देशों में रिलीज किया गया। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा, जिनके जीवन पर सतलुज फिल्म् आधारित है। श्मशान घाटों का दौरा कर जुटाई जानकारियां खालड़ा ने पंजाब पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही इन गुमशुदगियों और हत्याओं को उजागर किया था। उन्होंने उस समय अमृतसर के श्मशान घाटों का दौरा कर यह जानकारी जुटाई कि वहां 6,000 से अधिक शवों का गुप्त रूप से अंतिम संस्कार किया गया था। यह जानकारी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी साझा की, जिससे भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हुए। 1995 में हुई थी हत्या खालड़ा को सिखों के हकों के लिए लड़ने का खामियाजा अपनी जान देकर चुकाना पड़ा था। परिवार का आरोप है कि 6 सितंबर, 1995 को पुलिस ने खालड़ा का उनके घर से अपहरण कर लिया। इसके बाद उन्हें पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज नहीं की, जिसके बाद जसवंत की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद कोर्ट ने सीबीआई को जांच का आदेश दिया था।

दिलजीत दोसांझ के बयान से निराश हुई कॉकरोच जनता पार्टी:प्रवक्ता बोले- युवाओं के मुद्दों पर बोलना चाहिए; दिलजीत ने कहा- मुझे प्रदर्शन से दूर रखो

दिलजीत दोसांझ के बयान से निराश हुई कॉकरोच जनता पार्टी:प्रवक्ता बोले- युवाओं के मुद्दों पर बोलना चाहिए; दिलजीत ने कहा- मुझे प्रदर्शन से दूर रखो

दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरभ दास ने सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ के बयान पर निराशा जताई है। हालिया बातचीत में सौरभ दास ने कहा कि वे दिलजीत के रुख से थोड़े अपसेट हैं। दिलजीत को गानों की तरह अपने शब्दों से भी देश के युवाओं के मुद्दों और इस आंदोलन पर बात करनी चाहिए। इससे पहले दिलजीत दोसांझ ने अपने इंस्टाग्राम लाइव में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से खुद को दूर रखने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वे राजनेता नहीं, बल्कि सिर्फ एक कलाकार हैं। युवाओं का जोश बढ़ाएं दिलजीत सोशल मीडिया सामने वीडियो में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरभ दास मीडिया से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। शुरुआत में सौरभ ने कहा कि उनके पास एक्टर-सिंगर दिलजीत के लिए कोई संदेश नहीं है। हालांकि, जब उनसे दिलजीत के हालिया बयान को लेकर सीधा सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “यह बहुत दुखद है। मुझे लगता है कि उन्हें इस आंदोलन पर कुछ बोलना चाहिए ताकि युवाओं का जोश बढ़े। वे अपने गानों से तो जोश बढ़ाते ही हैं, लेकिन उन्हें अपने शब्दों से भी देश के युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बात करनी चाहिए।” दिलजीत ने प्रदर्शन से खुद को अलग किया यह पूरा विवाद दिलजीत दोसांझ के एक इंस्टाग्राम लाइव सेशन के बाद शुरू हुआ। लाइव बातचीत के दौरान एक फैन ने दिलजीत से दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को लेकर राय मांगी थी। इस पर दिलजीत ने जवाब दिया था, “भाई, मुझे इन प्रदर्शन जैसी चीजों से दूर ही रखो। मैं एक कलाकार हूं, कोई नेता नहीं हूं।” दिलजीत ने साफ कर दिया था कि वे खुद को केवल मनोरंजन की दुनिया तक ही सीमित रखना चाहते हैं और उनका किसी भी राजनीतिक दल या आंदोलन से कोई सीधा संबंध नहीं है। नीट पेपर लीक पर प्रदर्शन कर रही है CJP ककरोच जनता पार्टी पिछले कुछ समय से दिल्ली के जंतर मंतर पर लगातार आंदोलन कर रही है। यह संगठन नीट (NEET) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस डिजिटल सटायर ग्रुप की शुरुआत अभिजीत दिपके ने की थी, जो अब युवाओं से जुड़े मुद्दों पर जमीन पर उतरकर प्रदर्शन कर रहा है। इस आंदोलन को कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी समर्थन मिला है, जिसके कारण यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। किसान आंदोलन में एक्टिव थे, अब बनाई दूरी सोशल मीडिया पर दिलजीत दोसांझ के इस बदले रुख को लेकर काफी चर्चा हो रही है। साल 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान दिलजीत ने खुलकर किसानों का समर्थन किया था। वे खुद दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे धरने में शामिल होने पहुंचे थे और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी आर्थिक मदद भी की थी। हालांकि, उसके बाद से दिलजीत ने राजनीतिक और सामाजिक विवादों से पूरी तरह दूरी बना ली है। इसी साल मई में उन्होंने राजनीति में आने की खबरों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया था।

ककरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर बोले दिलजीत दोसांझ:मैं केवल एक कलाकार हूं, नेता नहीं; राजनीति और प्रदर्शनों से मुझे दूर ही रखें

ककरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर बोले दिलजीत दोसांझ:मैं केवल एक कलाकार हूं, नेता नहीं; राजनीति और प्रदर्शनों से मुझे दूर ही रखें

सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर एक लाइव सेशन के दौरान दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे ककरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ किया है कि वे एक कलाकार हैं और उनका राजनीति या किसी भी तरह के प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। दिलजीत ने फैंस से अपील की है कि उन्हें इन मामलों से दूर रखा जाए। ककरोच जनता पार्टी पिछले कुछ समय से नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। इंस्टाग्राम लाइव में फैन ने पूछा था सवाल दिलजीत दोसांझ ने बुधवार शाम को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से फैंस के साथ लाइव बातचीत की। इस दौरान एक फैन ने उनसे दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर उनकी राय मांगी। इस सवाल का जवाब देते हुए दिलजीत ने कहा, “जंतर मंतर कहां है प्रदर्शन के लिए? भाई, मुझे प्रदर्शन जैसी चीजों से दूर ही रखो। मैं एक कलाकार हूं, मैं कोई नेता नहीं हूं।” दिलजीत ने आगे कहा कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं है कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं, लेकिन वे खुद को सिर्फ मनोरंजन की दुनिया तक सीमित रखना चाहते हैं। दुनिया में सब कुछ कभी ठीक नहीं हो सकता लाइव सेशन के दौरान दिलजीत ने गुरु ग्रंथ साहिब की एक पंक्ति “नानक दुखिया सब संसार, सो सुखिया जिस नाम अधार” का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जीवन में सब कुछ कभी ठीक नहीं हो सकता है। इस दुनिया में सब कुछ सही होना मुमकिन नहीं है।” इसके बाद उन्होंने विवाद पर सीधे बोलने से बचते हुए मजाकिया अंदाज में कहा, “जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें भी बधाई और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उन्हें भी बधाई। मुझे इस बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है।” शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही CJP दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व ककरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही है। इस संगठन की शुरुआत एक डिजिटल सटायर (व्यंग्य) ग्रुप के रूप में हुई थी, जिसके फाउंडर अभिजीत दिपके हैं। यह संगठन 20 जून से नीट (NEET) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक विवाद को लेकर जंतर मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। 2020 में किया था किसान आंदोलन का समर्थन सोशल मीडिया पर दिलजीत के इस बयान के बाद उनके पुराने स्टैंड की चर्चा शुरू हो गई है। साल 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान दिलजीत ने खुलकर किसानों का समर्थन किया था। वे खुद दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे और आर्थिक मदद भी की थी। हालांकि, पिछले कुछ समय से उन्होंने राजनीतिक मुद्दों पर बोलने से पूरी तरह दूरी बना ली है। इसी साल मई में एक सामाजिक संगठन ने उनसे राजनीति में आने की अपील की थी, जिसे उन्होंने साफ मना कर दिया था। राजनीति में आने से पहले ही कर चुके हैं इनकार राजनीति में आने की चर्चाओं पर दिलजीत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर स्थिति साफ की थी। उन्होंने लिखा था, “मेरा काम सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना है। मैं अपने इसी क्षेत्र में बहुत खुश हूं।” वर्क फ्रंट की बात करें तो दिलजीत को हाल ही में डायरेक्टर इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में देखा गया था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म को सिनेमाघरों में काफी पसंद किया जा रहा है। इसके अलावा वे अपने ‘ऑरा टूर 2026’ के तहत दुनिया भर में म्यूजिक कॉन्सर्ट कर रहे हैं।

ककरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट पर बोले दिलजीत दोसांझ:मैं केवल एक कलाकार हूं, नेता नहीं; राजनीति और प्रदर्शनों से मुझे दूर ही रखें

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सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर एक लाइव सेशन के दौरान दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे ककरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ किया है कि वे एक कलाकार हैं और उनका राजनीति या किसी भी तरह के प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। दिलजीत ने फैंस से अपील की है कि उन्हें इन मामलों से दूर रखा जाए। ककरोच जनता पार्टी पिछले कुछ समय से नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। इंस्टाग्राम लाइव में फैन ने पूछा था सवाल दिलजीत दोसांझ ने बुधवार शाम को अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट से फैंस के साथ लाइव बातचीत की। इस दौरान एक फैन ने उनसे दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को लेकर उनकी राय मांगी। इस सवाल का जवाब देते हुए दिलजीत ने कहा, “जंतर मंतर कहां है प्रदर्शन के लिए? भाई, मुझे प्रदर्शन जैसी चीजों से दूर ही रखो। मैं एक कलाकार हूं, मैं कोई नेता नहीं हूं।” दिलजीत ने आगे कहा कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं है कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं, लेकिन वे खुद को सिर्फ मनोरंजन की दुनिया तक सीमित रखना चाहते हैं। दुनिया में सब कुछ कभी ठीक नहीं हो सकता लाइव सेशन के दौरान दिलजीत ने गुरु ग्रंथ साहिब की एक पंक्ति “नानक दुखिया सब संसार, सो सुखिया जिस नाम अधार” का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “जीवन में सब कुछ कभी ठीक नहीं हो सकता है। इस दुनिया में सब कुछ सही होना मुमकिन नहीं है।” इसके बाद उन्होंने विवाद पर सीधे बोलने से बचते हुए मजाकिया अंदाज में कहा, “जो लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें भी बधाई और जिनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है, उन्हें भी बधाई। मुझे इस बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है।” शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही CJP दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व ककरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही है। इस संगठन की शुरुआत एक डिजिटल सटायर (व्यंग्य) ग्रुप के रूप में हुई थी, जिसके फाउंडर अभिजीत दिपके हैं। यह संगठन 20 जून से नीट (NEET) परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और पेपर लीक विवाद को लेकर जंतर मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। 2020 में किया था किसान आंदोलन का समर्थन सोशल मीडिया पर दिलजीत के इस बयान के बाद उनके पुराने स्टैंड की चर्चा शुरू हो गई है। साल 2020-21 में हुए किसान आंदोलन के दौरान दिलजीत ने खुलकर किसानों का समर्थन किया था। वे खुद दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे और आर्थिक मदद भी की थी। हालांकि, पिछले कुछ समय से उन्होंने राजनीतिक मुद्दों पर बोलने से पूरी तरह दूरी बना ली है। इसी साल मई में एक सामाजिक संगठन ने उनसे राजनीति में आने की अपील की थी, जिसे उन्होंने साफ मना कर दिया था। राजनीति में आने से पहले ही कर चुके हैं इनकार राजनीति में आने की चर्चाओं पर दिलजीत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर स्थिति साफ की थी। उन्होंने लिखा था, “मेरा काम सिर्फ लोगों का मनोरंजन करना है। मैं अपने इसी क्षेत्र में बहुत खुश हूं।” वर्क फ्रंट की बात करें तो दिलजीत को हाल ही में डायरेक्टर इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में देखा गया था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बैकग्राउंड पर बनी इस फिल्म को सिनेमाघरों में काफी पसंद किया जा रहा है। इसके अलावा वे अपने ‘ऑरा टूर 2026’ के तहत दुनिया भर में म्यूजिक कॉन्सर्ट कर रहे हैं।

थिएटर में फिल्म देखने पहुंचे शरवरी और वेदांग रैना:मैं वापस आऊंगा' पर एक्ट्रेस ने लिखा इमोशनल नोट, कहा- दर्शकों ने फिल्म को अपनाया

थिएटर में फिल्म देखने पहुंचे शरवरी और वेदांग रैना:मैं वापस आऊंगा' पर एक्ट्रेस ने लिखा इमोशनल नोट, कहा- दर्शकों ने फिल्म को अपनाया

फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ सिनेमाघरों में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हाल ही में फिल्म के मुख्य कलाकार शरवरी और वेदांग रैना दर्शकों के साथ एक स्पेशल स्क्रीनिंग में शामिल होने थिएटर पहुंचे। फिल्म को मिल रहे अच्छे रिस्पॉन्स को देखकर शरवरी ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल नोट शेयर कर फैंस का शुक्रिया अदा किया है। यह फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर के बैकग्राउन्ड पर आधारित एक इमोशनल ड्रामा है, जिसमें नसीरुद्दीन शाह और दिलजीत दोसांझ भी अहम किरदारों में हैं। देखें थिएटर में एक्टर्स की तस्वीरें.… शरवरी ने लिखा इमोशनल नोट थिएटर विजिट की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए शरवरी ने दर्शकों का आभार जताया। उन्होंने लिखा कि कुछ कहानियां क्रेडिट रोल होने के बाद खत्म नहीं होतीं। वे हर इमोशन, हर बातचीत और सोशल मीडिया रील्स में जिंदा रहती हैं। शरवरी ने आगे लिखा कि दर्शकों ने जिया और कीनू (फिल्म के किरदार) को अपने दिल में जगह दी और इस फिल्म को पूरी तरह अपना बना लिया। उन्होंने प्रशंसकों के एक सोशल मीडिया ट्रेंड को रीक्रिएट करके उन्हें थैंक्यू कहा। फिल्म को पाकिस्तान से मिल चुकी तारीफ इससे पहले ‘मैं वापस आऊंगा’ को पाकिस्तान से भी तारीफ मिल चुकी है। पाकिस्तानी फिल्ममेकर उमर नासिर अली ने इस फिल्म की जमकर तारीफ करते हुए इसे एक बेहद खूबसूरत और गहरी भावनात्मक फिल्म बताया है। उमर नासिर के मुताबिक, यह फिल्म उनके दिल के बेहद करीब है क्योंकि वे खुद भी इसी विषय के आसपास एक फिल्म बना रहे हैं। इस बीच फिल्म को मिल रहे अच्छे रिस्पॉन्स का असर इसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर भी दिख रहा है और फिल्म की कमाई सोमवार को कामकाजी दिन होने के बावजूद बढ़ गई है। सिनेमाघरों में आम दर्शकों के अलावा फिल्म इंडस्ट्री के लोग भी इस पीरियड ड्रामा की तारीफ कर रहे हैं। फिल्ममेकर जोया अख्तर, अनुराग कश्यप और अनुभव सिन्हा ने भी फिल्म की सराहना की है। जोया अख्तर ने सोशल मीडिया पर पूरी टीम को बधाई दी। अनुभव सिन्हा ने लिखा कि इम्तियाज की फिल्म का हर फ्रेम उनके कला के प्रति विश्वास को दिखाता है। तीन पीढ़ियों के अधूरे सफर की कहानी फिल्म की कहानी तीन पीढ़ियों के भावनात्मक सफर को दिखाती है, जिसमें बंटवारे के जख्मों को एक प्रेम कहानी के साथ पेश किया गया है। कहानी पाकिस्तान के सरगोधा से भारत आए एक सिख परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। बंटवारे के समय युवा कीनू (वेदांग रैना) अपनी प्रेमिका अफसाना (शरवरी) से अलग हो जाता है। करीब 70 साल बाद, 95 साल के हो चुके कीनू (नसीरुद्दीन शाह)अपने जीवन के आखिरी पड़ाव पर एक आखिरी बार सरगोधा वापस जाना चाहते हैं। इस यात्रा में उनका पोता निरवैर (दिलजीत दोसांझ) उनकी मदद करता है। ये खबर भी पढ़ें ‘मैं वापस आऊंगा’ को एंटी-नेशनल बताने पर हंसे एआर रहमान:इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया पोस्ट; फिल्म को पाकिस्तान से मिल चुकी तारीफ इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को एंटी-नेशनल बताए जाने पर संगीतकार एआर रहमान ने रिएक्शन दिया है। दरअसल सोशल मीडिया पर फिल्म को एक वर्ग एंटी-नेशनल बता रहा है, क्योंकि इसमें पाकिस्तान को जासूसों और आतंकवादियों के बिना दिखाया गया है। पूरी खबर पढ़ें

थिएटर में फिल्म देखने पहुंचे शरवरी और वेदांग रैना:मैं वापस आऊंगा' पर एक्ट्रेस ने लिखा इमोशनल नोट, कहा- दर्शकों ने फिल्म को अपनाया

थिएटर में फिल्म देखने पहुंचे शरवरी और वेदांग रैना:मैं वापस आऊंगा' पर एक्ट्रेस ने लिखा इमोशनल नोट, कहा- दर्शकों ने फिल्म को अपनाया

फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ सिनेमाघरों में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है। हाल ही में फिल्म के मुख्य कलाकार शरवरी और वेदांग रैना दर्शकों के साथ एक स्पेशल स्क्रीनिंग में शामिल होने थिएटर पहुंचे। फिल्म को मिल रहे अच्छे रिस्पॉन्स को देखकर शरवरी ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल नोट शेयर कर फैंस का शुक्रिया अदा किया है। यह फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर के बैकग्राउन्ड पर आधारित एक इमोशनल ड्रामा है, जिसमें नसीरुद्दीन शाह और दिलजीत दोसांझ भी अहम किरदारों में हैं। देखें थिएटर में एक्टर्स की तस्वीरें.… शरवरी ने लिखा इमोशनल नोट थिएटर विजिट की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए शरवरी ने दर्शकों का आभार जताया। उन्होंने लिखा कि कुछ कहानियां क्रेडिट रोल होने के बाद खत्म नहीं होतीं। वे हर इमोशन, हर बातचीत और सोशल मीडिया रील्स में जिंदा रहती हैं। शरवरी ने आगे लिखा कि दर्शकों ने जिया और कीनू (फिल्म के किरदार) को अपने दिल में जगह दी और इस फिल्म को पूरी तरह अपना बना लिया। उन्होंने प्रशंसकों के एक सोशल मीडिया ट्रेंड को रीक्रिएट करके उन्हें थैंक्यू कहा। फिल्म को पाकिस्तान से मिल चुकी तारीफ इससे पहले ‘मैं वापस आऊंगा’ को पाकिस्तान से भी तारीफ मिल चुकी है। पाकिस्तानी फिल्ममेकर उमर नासिर अली ने इस फिल्म की जमकर तारीफ करते हुए इसे एक बेहद खूबसूरत और गहरी भावनात्मक फिल्म बताया है। उमर नासिर के मुताबिक, यह फिल्म उनके दिल के बेहद करीब है क्योंकि वे खुद भी इसी विषय के आसपास एक फिल्म बना रहे हैं। इस बीच फिल्म को मिल रहे अच्छे रिस्पॉन्स का असर इसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शन पर भी दिख रहा है और फिल्म की कमाई सोमवार को कामकाजी दिन होने के बावजूद बढ़ गई है। सिनेमाघरों में आम दर्शकों के अलावा फिल्म इंडस्ट्री के लोग भी इस पीरियड ड्रामा की तारीफ कर रहे हैं। फिल्ममेकर जोया अख्तर, अनुराग कश्यप और अनुभव सिन्हा ने भी फिल्म की सराहना की है। जोया अख्तर ने सोशल मीडिया पर पूरी टीम को बधाई दी। अनुभव सिन्हा ने लिखा कि इम्तियाज की फिल्म का हर फ्रेम उनके कला के प्रति विश्वास को दिखाता है। तीन पीढ़ियों के अधूरे सफर की कहानी फिल्म की कहानी तीन पीढ़ियों के भावनात्मक सफर को दिखाती है, जिसमें बंटवारे के जख्मों को एक प्रेम कहानी के साथ पेश किया गया है। कहानी पाकिस्तान के सरगोधा से भारत आए एक सिख परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। बंटवारे के समय युवा कीनू (वेदांग रैना) अपनी प्रेमिका अफसाना (शरवरी) से अलग हो जाता है। करीब 70 साल बाद, 95 साल के हो चुके कीनू (नसीरुद्दीन शाह)अपने जीवन के आखिरी पड़ाव पर एक आखिरी बार सरगोधा वापस जाना चाहते हैं। इस यात्रा में उनका पोता निरवैर (दिलजीत दोसांझ) उनकी मदद करता है। ये खबर भी पढ़ें ‘मैं वापस आऊंगा’ को एंटी-नेशनल बताने पर हंसे एआर रहमान:इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर किया पोस्ट; फिल्म को पाकिस्तान से मिल चुकी तारीफ इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को एंटी-नेशनल बताए जाने पर संगीतकार एआर रहमान ने रिएक्शन दिया है। दरअसल सोशल मीडिया पर फिल्म को एक वर्ग एंटी-नेशनल बता रहा है, क्योंकि इसमें पाकिस्तान को जासूसों और आतंकवादियों के बिना दिखाया गया है। पूरी खबर पढ़ें

दिलजीत दोसांझ के शो से खालिस्तानी धक्के मारकर निकाले:टोरंटो के कॉन्सर्ट में झंडे लेकर पहुंचे, पुलिस ने भीड़ से खींच-खींचकर पकड़े

दिलजीत दोसांझ के शो से खालिस्तानी धक्के मारकर निकाले:टोरंटो के कॉन्सर्ट में झंडे लेकर पहुंचे, पुलिस ने भीड़ से खींच-खींचकर पकड़े

पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ के 31 मई की रात टोरंटो कॉन्सर्ट में खालिस्तानी झंडे लेकर पहुंच गए। कनाडा के टोरंटो स्थित फेमस रॉजर्स सेंटर स्टेडियम में शो के बीच कुछ दर्शकों ने खालिस्तानी झंडे लहराए और शो को खराब करने की कोशिश की। घटना पर इस बार पहले से तैयार पुलिस टीम ने भीड़ में घुसकर खालिस्तानियों को धक्के देकर बाहर निकाल दिया। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें साफ दिख रहा है कि सुरक्षाकर्मी स्टेडियम की भीड़ से गुजरते हुए झंडा लहराने वालों को धक्का देकर बाहर निकाल रहे हैं। घटना उस समय हुई जब दिलजीत परफॉर्म कर रहे थे और हजारों फैंस उनका उत्साह बढ़ा रहे थे। आयोजकों और लोकल पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया, जिससे शो बिना ज्यादा रुकावट के जारी रहा। इस घटना ने सोशल मीडिया पर खालिस्तानियों को लेकर बहस छेड़ दी है। फैंस दिलजीत के स्टैंड की तारीफ कर रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रो-खालिस्तान एक्टिविस्ट्स इसे मुद्दा बना रहे हैं। 3 पॉइंट में जानिए शो के दौरान क्या हुआ… दिलजीत कह चुके, हुड़दंगियों को बाहर निकालें इस घटना से पहले दिलजीत ने 11 मई 2026 को इंस्टाग्राम स्टोरीज पर खालिस्तानियों और उनके शो में हुड़दंग करने वालों को लेकर लिखा था कि बाहर प्रोटेस्ट करना किसी का भी अधिकार है, लेकिन अंदर आकर मेरे फैंस को हरास करना बर्दाश्त नहीं होगा। अगर कोई बैनर या झंडा लेकर आता है तो वह सपोर्ट दिखाने के लिए हो सकता है, लेकिन अगर बाहर गाली-गलौज कर रहे हैं और अंदर भी वही ड्रामा करेंगे तो नहीं चलेगा। मैंने सिक्योरिटी को कहा है कि जो प्रोग्राम खराब करे, उसे उठाकर बाहर फेंक दो। मैं किसी झंडे या बैनर के खिलाफ नहीं हूं, फेक नैरेटिव न फैलाएं। जानें कब-कब खालिस्थानी डाल चुके खलल ***************** ये खबर भी पढ़ें: पंजाबी सिंगर दिलजीत नहीं लड़ेंगे चुनाव: बोले-मैं नि:स्वार्थ सेवा करता हूं, वोट नहीं चाहिए; बचपन के दोस्त को भी करवाया रूबरू पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ ने कनाडा के शो में अपने दोस्त तजिंदर सिंह कोहली को लोगों के रू-ब-रू करवाया। दिलजीत ने कहा कि ये वो लड़ता है जिसने पंजाब में बाढ़ के दिनों में काम किया। ये 6 महीने तक अपने घर नहीं गया। मैंने इलेक्शन नहीं लड़ता है और न ही किसी से वोट लेने हैं। (पढ़ेंं पूरी खबर)

Khalistan Army Threatens Diljit Dosanjh

Khalistan Army Threatens Diljit Dosanjh

लुधियाना की मेयर और दिलजीत दोसांझ। लुधियाना शहर में उस वक्त भारी सनसनी फैल गई जब लुधियाना नगर निगम के उच्च अधिकारियों को एक धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ। ईमेल में लुधियाना के मेयर ऑफिस और मशहूर पंजाबी गायक दिलजीत दोसांझ के घर को बम से उड़ाने की सीधी धमकी दी गई है। यह ईमेल सोमवार, 25 मई क . क्या लिखा है धमकी भरे ईमेल में? सुबह करीब 7:28 बजे आई ईमेल आईडी का विषय “B”0mb Blast – Mayor Office Ludhiana!” रखा गया है। ईमेल में धमाकों का समय भी निर्धारित किया गया है। दोपहर 1:11 बजे लुधियाना मेयर पर हमले की धमकी दी गई है। इसके साथ ही रात 9:11 बजे दिलजीत दोसांझ के लुधियाना स्थित घर पर धमाके की चेतावनी दी है। हमलावरों ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि “कोई भी मदद दिलजीत दोसांझ करेगा, मारा जाएगा।” लुधियाना में भेजा गया धमकी भरा मेल। 1984 के दंगों का जिक्र, 6 जून तक का अल्टीमेटम ईमेल में 1984 के सिख दंगों का हवाला देते हुए “खून का बदला खून” की बात लिखी गई है। धमकी देने वालों ने लिखा है कि 6 जून तक बम धमाकों के जरिए निशाना बनाया जाएगा। किसने भेजी है यह धमकी? ईमेल के अंत में इसे ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’ (KHALISTAN National ARMY) की तरफ से भेजा गया बताया गया है। इसमें भेजने वालों के रूप में दो नाम लिखे गए हैं: 1. इंजीनियर गुरनख सिंह (रुकन शाहवाला) 2. डॉ. गुरनिरवैर सिंह (खान राजादा) पुलिस महकमा और साइबर सेल पूरी तरह अलर्ट धमकी के बाद पुलिस महकमा और साइबर सेल पूरी तरह अलर्ट पर है। ईमेल के आईपी एड्रेस और सेंडर को ट्रेस करने की त्वरित जांच शुरू कर दी गई है। मेयर कार्यालय और महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा कड़ी किए जाने की संभावना है।

रॉकस्टार का सीक्वल नहीं बनाएंगे इम्तियाज अली:कहा- जिसे पसंद हो, वो बनाए, अपकमिंग फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में अधूरा प्यार और बिछड़ने का दर्द दिखेगा

रॉकस्टार का सीक्वल नहीं बनाएंगे इम्तियाज अली:कहा- जिसे पसंद हो, वो बनाए, अपकमिंग फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में अधूरा प्यार और बिछड़ने का दर्द दिखेगा

रॉकस्टार का सीक्वल नहीं बनाएंगे इम्तियाज अली, लेकिन उनकी आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में एक बार फिर अधूरे प्यार, बिछड़ने और लौटकर आने की कसक देखने को मिलेगी। दिलजीत दोसांझ, शरवरी, वेदांग रैना और नसीरुद्दीन शाह स्टारर यह फिल्म सिर्फ लव स्टोरी नहीं, बल्कि यादों, माइग्रेशन और इमोशनल टूटन की कहानी है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में इम्तियाज अली ने बताया कि वह ‘रॉकस्टार’ का सीक्वल क्यों नहीं बनाना चाहते। वहीं उन्होंने दिलजीत दोसांझ, ए.आर. रहमान और अपनी फिल्मों में बार-बार दिखने वाले दर्द व बिछड़ने के एहसास पर भी खुलकर बात की। शरवरी और वेदांग ने भी फिल्म से अपने भावनात्मक जुड़ाव और किरदारों की तैयारी के अनुभव साझा किए। सवाल: आपकी फिल्मों में इश्क मिलने से ज्यादा बिछड़ने में दिखता है। क्या ये आपकी निजी सोच से आता है? जवाब/इम्तियाज अली: जब मैं फिल्म बनाता हूं, तब अपने बारे में नहीं सोच रहा होता। शायद मैं कहानियां बनाकर खुद से भागने की कोशिश करता हूं। लेकिन ये सच है कि जब आप किसी शहर को छोड़ रहे होते हैं, तभी उसकी सबसे ज्यादा याद आती है। मुझे याद है, जब मैं दिल्ली और जमशेदपुर के बीच ट्रेन से सफर करता था, तो अपना शहर सबसे खूबसूरत तब लगता था जब उसे छोड़ रहा होता था। कहते हैं, “A city looks most beautiful from the light of the burning bridge.” यानी जब वापसी का रास्ता खत्म हो जाता है, तब उस जगह के लिए प्यार और बढ़ जाता है। सवाल: वेदांग, ‘मैं वापस आऊंगा’ आपके लिए क्या मायने रखती है? जवाब/वेदांग रैना: शुरुआत में मेरे लिए सबसे बड़ी बात सिर्फ इम्तियाज सर के साथ काम करना था। लेकिन जब स्क्रिप्ट आगे बढ़ी, तब महसूस हुआ कि यह कहानी मुझसे बहुत जुड़ी हुई है, क्योंकि मैं भी कश्मीरी पंडित हूं। मेरी फैमिली ने माइग्रेशन देखा है। इसलिए इस फिल्म से मेरा भावनात्मक जुड़ाव हो गया। ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। सवाल: शरवरी, आपके लिए इस फिल्म का मतलब क्या है? जवाब/शरवरी: ये एक सिंपल लव स्टोरी है। प्यार सिर्फ किसी इंसान से नहीं, अपनी मिट्टी और अपनेपन से भी हो सकता है। इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत उसका प्यार है। एक एक्टर के तौर पर भी ये मेरे लिए नया अनुभव था। इस किरदार को निभाते हुए मैंने खुद को भी थोड़ा और समझा। सवाल: इम्तियाज, आपके लिए इश्क क्या है? क्या आप ‘लव एट फर्स्ट साइट’ में भरोसा करते हैं? जवाब/इम्तियाज अली: जैसे-जैसे मैं बड़ा हो रहा हूं, प्यार को लेकर और कन्फ्यूज होता जा रहा हूं। शायद फिल्मों के जरिए ही उसे समझने की कोशिश करता हूं। मुझे लगता है प्यार कुछ भी हो सकता है। पहली नजर में भी हो सकता है, बार-बार भी हो सकता है और सिर्फ एक बार भी हो सकता है। जैसे भगवान को हर इंसान अपने तरीके से समझता है, वैसे ही प्यार भी है। सवाल: आपकी फिल्मों में टूटना, बिछड़ना और फिर लौटकर आना बार-बार क्यों दिखता है? जवाब/इम्तियाज अली: ये सब बचपन की यादों और लोगों की कहानियों से आता है। पंजाब में शूटिंग के दौरान कई बुजुर्गों ने मुझे पार्टिशन के किस्से सुनाए। किसी ने बताया कि उनके बुजुर्ग वाघा बॉर्डर तक पहुंच गए थे और कह रहे थे, “मुझे लाहौर जाना है,” क्योंकि उन्हें याद नहीं था कि पार्टिशन हो चुका है। किसी ने वीडियो कॉल पर अपने बचपन की जगह का रास्ता समझाया, जहां वो खुद नहीं जा सकते थे। ऐसी कई छोटी-छोटी बातें मेरे दिमाग में जमा होती गईं और फिर इस फिल्म की कहानी बन गई। सवाल: वेदांग, आपके लिए इश्क क्या है? जवाब/वेदांग रैना: अगर प्यार को सिर्फ रोमांटिक तरीके से ना देखें, तो कोई चीज आपको बहुत गहराई से छू जाए, वो भी प्यार हो सकता है। मुझे नहीं पता कि मुझे ‘लव एट फर्स्ट साइट’ हुआ है या नहीं, लेकिन किसी चीज से गहराई से प्रभावित होना शायद प्यार ही है। सवाल: क्या आपका दिल टूटा है? जवाब/वेदांग रैना: हां, जरूर टूटा है। शायद उस वक्त लगा था कि दिल टूट गया है, लेकिन अब मैच्योर नजरिए से देखूं तो शायद वो कुछ और था। लेकिन वो एहसास मैंने महसूस किया है। सवाल: दिल टूटने ने आपको कितना बदला? जवाब/वेदांग रैना: हर अनुभव इंसान को बदलता है और दिल टूटना जिंदगी का बड़ा मोड़ होता है। उसके बाद लोगों, रिश्तों और दुनिया को देखने का नजरिया बदल जाता है। शायद वही चीज इंसान को और समझदार बनाती है। सवाल: शरवरी, आपके लिए प्यार क्या है? जवाब/शरवरी: हम सब जिंदगी भर प्यार को समझते रहते हैं। बचपन से लेकर परिवार और रिश्तों तक, हर जगह प्यार मौजूद होता है। मेरे लिए प्यार का मतलब एक वादा है, एक सच्चाई है। हमारी फिल्म भी इसी भावना पर बनी है, एक ऐसा प्यार जो बहुत प्योर है। सवाल: क्या कभी दिल टूटा? और उससे कैसे बाहर निकलीं? जवाब/शरवरी: जब मैं इम्तियाज सर की फिल्में देखती हूं, तो उनमें दर्द के साथ एक खूबसूरती भी दिखती है। मैं मानती हूं कि कोई रिश्ता कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता। शायद उनकी फिल्मों ने मुझे यही सिखाया है। सवाल: इम्तियाज अली के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/ शरवरी: हमने शूटिंग से पहले उनके साथ रेकी की थी। वहीं हमें समझ आया कि फिल्म क्या है और किरदार कैसे सोचते हैं। पंजाब में शूटिंग के दौरान वहां के लोगों और खाने से भी बहुत प्यार मिला। सवाल: रेकी के दौरान की क्या खास यादें है? जवाब/वेदांग रैना: हम लोग लोकेशन पर सिर्फ साथ घूम रहे थे और समझ रहे थे कि फिल्म कैसे बनती है। तभी एहसास हुआ कि असली मेहनत डायरेक्टर और उनकी टीम करती है। सवाल: पंजाब शूट के दौरान सबसे मजेदार चीज क्या रही? जवाब/शरवरी: हमने रेकी के दौरान खूब स्टफ्ड कुलचे खाए। मुझे अभी भी पनीर-छोले याद हैं। वहां का खाना और लोग दोनों बेहद प्यारे थे। उसी दौरान हमने फिल्म और किरदारों को बेहतर तरीके से समझा। सवाल: आपकी फिल्मों में ट्रेन का सफर हमेशा खास क्यों होता है? जवाब/इम्तियाज अली: मुझे ट्रेन में शूटिंग और सफर करना हमेशा अच्छा लगता है। इस फिल्म के लिए हमने रेवाड़ी से पुराना

रॉकस्टार का सीक्वल नहीं बनाएंगे इम्तियाज अली:कहा- जिसे पसंद हो, वो बनाए, अपकमिंग फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में अधूरा प्यार और बिछड़ने का दर्द दिखेगा

रॉकस्टार का सीक्वल नहीं बनाएंगे इम्तियाज अली:कहा- जिसे पसंद हो, वो बनाए, अपकमिंग फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में अधूरा प्यार और बिछड़ने का दर्द दिखेगा

रॉकस्टार का सीक्वल नहीं बनाएंगे इम्तियाज अली, लेकिन उनकी आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में एक बार फिर अधूरे प्यार, बिछड़ने और लौटकर आने की कसक देखने को मिलेगी। दिलजीत दोसांझ, शरवरी, वेदांग रैना और नसीरुद्दीन शाह स्टारर यह फिल्म सिर्फ लव स्टोरी नहीं, बल्कि यादों, माइग्रेशन और इमोशनल टूटन की कहानी है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में इम्तियाज अली ने बताया कि वह ‘रॉकस्टार’ का सीक्वल क्यों नहीं बनाना चाहते। वहीं उन्होंने दिलजीत दोसांझ, ए.आर. रहमान और अपनी फिल्मों में बार-बार दिखने वाले दर्द व बिछड़ने के एहसास पर भी खुलकर बात की। शरवरी और वेदांग ने भी फिल्म से अपने भावनात्मक जुड़ाव और किरदारों की तैयारी के अनुभव साझा किए। सवाल: आपकी फिल्मों में इश्क मिलने से ज्यादा बिछड़ने में दिखता है। क्या ये आपकी निजी सोच से आता है? जवाब/इम्तियाज अली: जब मैं फिल्म बनाता हूं, तब अपने बारे में नहीं सोच रहा होता। शायद मैं कहानियां बनाकर खुद से भागने की कोशिश करता हूं। लेकिन ये सच है कि जब आप किसी शहर को छोड़ रहे होते हैं, तभी उसकी सबसे ज्यादा याद आती है। मुझे याद है, जब मैं दिल्ली और जमशेदपुर के बीच ट्रेन से सफर करता था, तो अपना शहर सबसे खूबसूरत तब लगता था जब उसे छोड़ रहा होता था। कहते हैं, “A city looks most beautiful from the light of the burning bridge.” यानी जब वापसी का रास्ता खत्म हो जाता है, तब उस जगह के लिए प्यार और बढ़ जाता है। सवाल: वेदांग, ‘मैं वापस आऊंगा’ आपके लिए क्या मायने रखती है? जवाब/वेदांग रैना: शुरुआत में मेरे लिए सबसे बड़ी बात सिर्फ इम्तियाज सर के साथ काम करना था। लेकिन जब स्क्रिप्ट आगे बढ़ी, तब महसूस हुआ कि यह कहानी मुझसे बहुत जुड़ी हुई है, क्योंकि मैं भी कश्मीरी पंडित हूं। मेरी फैमिली ने माइग्रेशन देखा है। इसलिए इस फिल्म से मेरा भावनात्मक जुड़ाव हो गया। ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। सवाल: शरवरी, आपके लिए इस फिल्म का मतलब क्या है? जवाब/शरवरी: ये एक सिंपल लव स्टोरी है। प्यार सिर्फ किसी इंसान से नहीं, अपनी मिट्टी और अपनेपन से भी हो सकता है। इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत उसका प्यार है। एक एक्टर के तौर पर भी ये मेरे लिए नया अनुभव था। इस किरदार को निभाते हुए मैंने खुद को भी थोड़ा और समझा। सवाल: इम्तियाज, आपके लिए इश्क क्या है? क्या आप ‘लव एट फर्स्ट साइट’ में भरोसा करते हैं? जवाब/इम्तियाज अली: जैसे-जैसे मैं बड़ा हो रहा हूं, प्यार को लेकर और कन्फ्यूज होता जा रहा हूं। शायद फिल्मों के जरिए ही उसे समझने की कोशिश करता हूं। मुझे लगता है प्यार कुछ भी हो सकता है। पहली नजर में भी हो सकता है, बार-बार भी हो सकता है और सिर्फ एक बार भी हो सकता है। जैसे भगवान को हर इंसान अपने तरीके से समझता है, वैसे ही प्यार भी है। सवाल: आपकी फिल्मों में टूटना, बिछड़ना और फिर लौटकर आना बार-बार क्यों दिखता है? जवाब/इम्तियाज अली: ये सब बचपन की यादों और लोगों की कहानियों से आता है। पंजाब में शूटिंग के दौरान कई बुजुर्गों ने मुझे पार्टिशन के किस्से सुनाए। किसी ने बताया कि उनके बुजुर्ग वाघा बॉर्डर तक पहुंच गए थे और कह रहे थे, “मुझे लाहौर जाना है,” क्योंकि उन्हें याद नहीं था कि पार्टिशन हो चुका है। किसी ने वीडियो कॉल पर अपने बचपन की जगह का रास्ता समझाया, जहां वो खुद नहीं जा सकते थे। ऐसी कई छोटी-छोटी बातें मेरे दिमाग में जमा होती गईं और फिर इस फिल्म की कहानी बन गई। सवाल: वेदांग, आपके लिए इश्क क्या है? जवाब/वेदांग रैना: अगर प्यार को सिर्फ रोमांटिक तरीके से ना देखें, तो कोई चीज आपको बहुत गहराई से छू जाए, वो भी प्यार हो सकता है। मुझे नहीं पता कि मुझे ‘लव एट फर्स्ट साइट’ हुआ है या नहीं, लेकिन किसी चीज से गहराई से प्रभावित होना शायद प्यार ही है। सवाल: क्या आपका दिल टूटा है? जवाब/वेदांग रैना: हां, जरूर टूटा है। शायद उस वक्त लगा था कि दिल टूट गया है, लेकिन अब मैच्योर नजरिए से देखूं तो शायद वो कुछ और था। लेकिन वो एहसास मैंने महसूस किया है। सवाल: दिल टूटने ने आपको कितना बदला? जवाब/वेदांग रैना: हर अनुभव इंसान को बदलता है और दिल टूटना जिंदगी का बड़ा मोड़ होता है। उसके बाद लोगों, रिश्तों और दुनिया को देखने का नजरिया बदल जाता है। शायद वही चीज इंसान को और समझदार बनाती है। सवाल: शरवरी, आपके लिए प्यार क्या है? जवाब/शरवरी: हम सब जिंदगी भर प्यार को समझते रहते हैं। बचपन से लेकर परिवार और रिश्तों तक, हर जगह प्यार मौजूद होता है। मेरे लिए प्यार का मतलब एक वादा है, एक सच्चाई है। हमारी फिल्म भी इसी भावना पर बनी है, एक ऐसा प्यार जो बहुत प्योर है। सवाल: क्या कभी दिल टूटा? और उससे कैसे बाहर निकलीं? जवाब/शरवरी: जब मैं इम्तियाज सर की फिल्में देखती हूं, तो उनमें दर्द के साथ एक खूबसूरती भी दिखती है। मैं मानती हूं कि कोई रिश्ता कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता। शायद उनकी फिल्मों ने मुझे यही सिखाया है। सवाल: इम्तियाज अली के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/ शरवरी: हमने शूटिंग से पहले उनके साथ रेकी की थी। वहीं हमें समझ आया कि फिल्म क्या है और किरदार कैसे सोचते हैं। पंजाब में शूटिंग के दौरान वहां के लोगों और खाने से भी बहुत प्यार मिला। सवाल: रेकी के दौरान की क्या खास यादें है? जवाब/वेदांग रैना: हम लोग लोकेशन पर सिर्फ साथ घूम रहे थे और समझ रहे थे कि फिल्म कैसे बनती है। तभी एहसास हुआ कि असली मेहनत डायरेक्टर और उनकी टीम करती है। सवाल: पंजाब शूट के दौरान सबसे मजेदार चीज क्या रही? जवाब/शरवरी: हमने रेकी के दौरान खूब स्टफ्ड कुलचे खाए। मुझे अभी भी पनीर-छोले याद हैं। वहां का खाना और लोग दोनों बेहद प्यारे थे। उसी दौरान हमने फिल्म और किरदारों को बेहतर तरीके से समझा। सवाल: आपकी फिल्मों में ट्रेन का सफर हमेशा खास क्यों होता है? जवाब/इम्तियाज अली: मुझे ट्रेन में शूटिंग और सफर करना हमेशा अच्छा लगता है। इस फिल्म के लिए हमने रेवाड़ी से पुराना