Left Govt Ends, Congress Returns

2 मिनट पहलेलेखक: ऐश्वर्य राज कॉपी लिंक केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। केरलम में इस हार के बाद 49 साल में यह पहली होने जा रहा है जब देश के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं है। जानते हैं देश में वामपंथ के विस्तार, जीत और हार से जुड़ी प्रमुख बातें… इससे पहले जानिए लेफ्ट यानी कम्युनिस्ट विचारधारा के बारे में। 1947 में मिली आजादी को मानने से इंकार किया भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने 1947 में भारत को मिली आजादी को असली आजादी मानने से इंकार कर दिया था। उस वक्त पार्टी का कहना था कि यह आजादी अधूरी और समझौतों का परिणाम है, जिसे उन्होंने ‘झूठी आजादी’ का नाम दिया। इस हकीकत को पूरी तरह स्वीकार करने में पार्टी को 5 साल से ज्यादा का समय लग गया। मार्च 1948 में पार्टी के भीतर एक बड़ा बदलाव हुआ। पीसी. जोशी की जगह बीटी. रणदिवे (BTR) नए जनरल सेक्रेटरी बने। उनके आते ही पार्टी में ‘रणदिवे लाइन’ लागू हुई, जो बेहद कट्टर और आक्रामक थी। इसी सोच के तहत जनवरी 1950 में संविधान लागू होने से पहले ही CPI ने इसका विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस के नेता भारतीय जनता पर ‘गुलामी का संविधान’ थोप रहे हैं। लेफ्ट पार्टी ने नेहरू सरकार को हिंसक तरीके से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। 1948 और 1949 के दौरान यह नीति पूरी तरह विफल रही। इसके बाद मई-जून 1950 में बीटी. रणदिवे को पद से हटा दिया गया। पार्टी की सेंट्रल कमेटी ने यह स्वीकार किया कि बिना सोचे-समझे 9 मार्च 1949 को देशव्यापी हड़ताल और विद्रोह का जो आह्वान किया गया था, वह बड़ी भूल थी। करीब 6 साल के बाद CPI अपनी कट्टर विचारधारा छोड़कर देश की आजादी की सच्चाई स्वीकार करने के लिए मजबूर हुई। दुनिया की पहली चुनी हुई लोकतांत्रिक लेफ्ट सरकार 5 अप्रैल 1957, केरल के पहले सीएम के रूप में शपथ लेते हुए ईएमएस नंबूदरिपाद । 1956 में त्रावणकोर, कोचीन और मालाबार को मिलाकर एक नया राज्य केरलम बना। मार्च 1957 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। 126 सीटों वालीं विधानसभा में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी CPI को 60 सीट मिलीं। 5 निर्दलीय को मिलाकर उसने सरकार बना ली। ये दुनिया में लेफ्ट की पहली चुनी हुई सरकार थी। ईएमएस नंबूदरीपाद ने मुख्यमंत्री बनने के एक हफ्ते बाद ही दो बड़े कानून लागू किए। पहला- भूमि सुधार कानून और दूसरा- शिक्षा में सुधार को लेकर। भूमि सुधार कानून के बाद बटाईदार किसानों को जमीन खरीदने की छूट मिल गई। लैंडहोल्डिंग की लिमिट तय हो गई। वहीं, एजुकेशन बिल के जरिए प्राइवेट संस्थानों को रेगुलेट करने के लिए सख्त नियम बना दिए। 2 फरवरी 1959 को इंदिरा गांधी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। इसके बाद वो केरलम गईं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नेहरू को सौंप दी। 31 जुलाई 1959 को केरलम सरकार बर्खास्त कर दी गई। गांधी की तस्वीरें हटाईं, माओ–स्टालिन की लगाईं इसी बीच केरलम के स्कूल-कॉलेजों से गांधी की तस्वीर हटाकर माओ और स्टालिन की तस्वीर लगाई जाने लगीं। कहा जाने लगा कि नंबूदरीपाद की सरकार बनाने के लिए कम्युनिस्ट देशों ने फंड भेजे हैं। इसके विरोध में केरलम के गांधी कहे जाने वाले मन्नथ पिल्लई की अगुआई में लाखों लोग सड़कों पर उतर गए। हजारों लोग जेल में डाल दिए गए। आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें मछुआरे कम्युनिटी की एक प्रेग्नेंट महिला की जान चली गई। आंदोलन और भड़क उठा। जगह-जगह हिंसा होने लगीं। चीन युद्ध पर सरकार से अलग रुख के कारण दूसरा बड़ा विभाजन 1962 के भारत–चीन युद्ध ने CPI के भीतर वैचारिक दरार बढ़ा दिया। पार्टी का एक धड़ा नेहरू सरकार के समर्थन में था। दूसरा धड़ा चीन को आक्रमणकारी मानने को तैयार नहीं था। ‘राष्ट्रवाद बनाम अंतरराष्ट्रीय साम्यवाद’ की इस बहस के बीच, चीन समर्थक माने जाने वाले नेताओं को जेल में डाल दिया गया। इसी तनाव ने पार्टी के आधार को हिला दिया और कम्युनिस्ट आंदोलन दो फाड़ हो गया। युद्ध के दो साल बाद, 1964 में मतभेद इतने बढ़ गए कि कम्युनिस्ट पार्टी आधिकारिक रूप से विभाजित हो गई। सोवियत संघ की नरम नीति के समर्थक CPI में रहे, जबकि क्रांतिकारी रुख अपनाने वाले नेताओं ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) का गठन किया। साल 1964, CPI (M) की स्थापना के दौरान बाएं से दूसरे नंबर पर ज्योति बसु (पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम) और दूसरी पंक्ति में बाएं से तीसरे नंबर पर केरल के पहले सीएम ईएमएस नंबूदिरीपाद। बंगाल में 1967 में लेफ्ट पश्चिम बंगाल में पहली बार लेफ्ट ने 1967 में ‘यूनाइटेड फ्रंट’ गठबंधन के जरिए सरकार में आई। उस समय अजय मुखर्जी मुख्यमंत्री बने थे और ज्योति बसु डिप्टी सीएम थे। हालांकि, सरकार बहुत अस्थिर रही। 1975 में जब इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई, तो CPI ने शुरुआत में इंदिरा गांधी और इमरजेंसी का समर्थन किया था, जबकि CPI(M) ने इसका विरोध किया था और उनके कई नेता जेल भी गए थे। 1977 के विधानसभा चुनावों में लेफ्ट को बंगाल में भारी बहुमत मिला और यहीं से राज्य में कम्युनिस्टों के लंबे शासन की असली शुरुआत हुई। ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने और लगातार 2000 तक राज्य के सीएम रहे। उनके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने राज्य में उद्योगों को लाने की कोशिश की। लेकिन सिंगूर और नंदीग्राम जैसे भूमि अधिग्रहण विवादों के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में कम्युनिस्टों के 34 साल पुराने शासन को खत्म कर दिया। उस वक्त के सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य खुद अपना चुनाव हार गए। 90 के दशक में ज्योति बसु को 3 बार PM बनाने का मौका CBI के पूर्व डायरेक्टर अरुण प्रसाद मुखर्जी ने अपनी किताब ‘राजीव गांधी, ज्योति बसु, इंद्रजीत गुप्त के अनछुए पहलू’ में बताया है कि 1990 और 1991 के उथल-पुथल भरे दौर में राजीव गांधी चाहते थे कि ज्योति बसु देश के प्रधानमंत्री बनें। पहली बार अक्टूबर 1990 में राजीव गांधी ने ज्योति बसु
Left Govt Ends, Congress Returns

23 मिनट पहलेलेखक: ऐश्वर्य राज कॉपी लिंक केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। केरलम में इस हार के बाद 49 साल में यह पहली होने जा रहा है जब देश के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं है। जानते हैं देश में वामपंथ के विस्तार, जीत और हार से जुड़ी प्रमुख बातें… इससे पहले जानिए लेफ्ट यानी कम्युनिस्ट विचारधारा के बारे में। 1947 में मिली आजादी को मानने से इंकार किया भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने 1947 में भारत को मिली आजादी को असली आजादी मानने से इंकार कर दिया था। उस वक्त पार्टी का कहना था कि यह आजादी अधूरी और समझौतों का परिणाम है, जिसे उन्होंने ‘झूठी आजादी’ का नाम दिया। इस हकीकत को पूरी तरह स्वीकार करने में पार्टी को 5 साल से ज्यादा का समय लग गया। मार्च 1948 में पार्टी के भीतर एक बड़ा बदलाव हुआ। पीसी. जोशी की जगह बीटी. रणदिवे (BTR) नए जनरल सेक्रेटरी बने। उनके आते ही पार्टी में ‘रणदिवे लाइन’ लागू हुई, जो बेहद कट्टर और आक्रामक थी। इसी सोच के तहत जनवरी 1950 में संविधान लागू होने से पहले ही CPI ने इसका विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस के नेता भारतीय जनता पर ‘गुलामी का संविधान’ थोप रहे हैं। लेफ्ट पार्टी ने नेहरू सरकार को हिंसक तरीके से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। 1948 और 1949 के दौरान यह नीति पूरी तरह विफल रही। इसके बाद मई-जून 1950 में बीटी. रणदिवे को पद से हटा दिया गया। पार्टी की सेंट्रल कमेटी ने यह स्वीकार किया कि बिना सोचे-समझे 9 मार्च 1949 को देशव्यापी हड़ताल और विद्रोह का जो आह्वान किया गया था, वह बड़ी भूल थी। करीब 6 साल के बाद CPI अपनी कट्टर विचारधारा छोड़कर देश की आजादी की सच्चाई स्वीकार करने के लिए मजबूर हुई। दुनिया की पहली चुनी हुई लोकतांत्रिक लेफ्ट सरकार 5 अप्रैल 1957, केरल के पहले सीएम के रूप में शपथ लेते हुए ईएमएस नंबूदरीपाद। 1956 में त्रावणकोर, कोचीन और मालाबार को मिलाकर एक नया राज्य केरलम बना। मार्च 1957 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। 126 सीटों वालीं विधानसभा में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी CPI को 60 सीट मिलीं। 5 निर्दलीय को मिलाकर उसने सरकार बना ली। ये दुनिया में लेफ्ट की पहली चुनी हुई सरकार थी। ईएमएस नंबूदरीपाद ने मुख्यमंत्री बनने के एक हफ्ते बाद ही दो बड़े कानून लागू किए। पहला- भूमि सुधार कानून और दूसरा- शिक्षा में सुधार को लेकर। भूमि सुधार कानून के बाद बटाईदार किसानों को जमीन खरीदने की छूट मिल गई। लैंडहोल्डिंग की लिमिट तय हो गई। वहीं, एजुकेशन बिल के जरिए प्राइवेट संस्थानों को रेगुलेट करने के लिए सख्त नियम बना दिए। 2 फरवरी 1959 को इंदिरा गांधी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। इसके बाद वो केरलम गईं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नेहरू को सौंप दी। 31 जुलाई 1959 को केरलम सरकार बर्खास्त कर दी गई। गांधी की तस्वीरें हटाईं, माओ–स्टालिन की लगाईं इसी बीच केरलम के स्कूल-कॉलेजों से गांधी की तस्वीर हटाकर माओ और स्टालिन की तस्वीर लगाई जाने लगीं। कहा जाने लगा कि नंबूदरीपाद की सरकार बनाने के लिए कम्युनिस्ट देशों ने फंड भेजे हैं। इसके विरोध में केरलम के गांधी कहे जाने वाले मन्नथ पिल्लई की अगुआई में लाखों लोग सड़कों पर उतर गए। हजारों लोग जेल में डाल दिए गए। आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें मछुआरे कम्युनिटी की एक प्रेग्नेंट महिला की जान चली गई। आंदोलन और भड़क उठा। जगह-जगह हिंसा होने लगीं। चीन युद्ध पर सरकार से अलग रुख के कारण दूसरा बड़ा विभाजन 1962 के भारत–चीन युद्ध ने CPI के भीतर वैचारिक दरार बढ़ा दिया। पार्टी का एक धड़ा नेहरू सरकार के समर्थन में था। दूसरा धड़ा चीन को आक्रमणकारी मानने को तैयार नहीं था। ‘राष्ट्रवाद बनाम अंतरराष्ट्रीय साम्यवाद’ की इस बहस के बीच, चीन समर्थक माने जाने वाले नेताओं को जेल में डाल दिया गया। इसी तनाव ने पार्टी के आधार को हिला दिया और कम्युनिस्ट आंदोलन दो फाड़ हो गया। युद्ध के दो साल बाद, 1964 में मतभेद इतने बढ़ गए कि कम्युनिस्ट पार्टी आधिकारिक रूप से विभाजित हो गई। सोवियत संघ की नरम नीति के समर्थक CPI में रहे, जबकि क्रांतिकारी रुख अपनाने वाले नेताओं ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) का गठन किया। साल 1964, CPI (M) की स्थापना के दौरान बाएं से दूसरे नंबर पर ज्योति बसु (पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम) और दूसरी पंक्ति में बाएं से तीसरे नंबर पर केरल के पहले सीएम ईएमएस नंबूदिरीपाद। बंगाल में 1967 में लेफ्ट पश्चिम बंगाल में पहली बार लेफ्ट ने 1967 में ‘यूनाइटेड फ्रंट’ गठबंधन के जरिए सरकार में आई। उस समय अजय मुखर्जी मुख्यमंत्री बने थे और ज्योति बसु डिप्टी सीएम थे। हालांकि, सरकार बहुत अस्थिर रही। 1975 में जब इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई, तो CPI ने शुरुआत में इंदिरा गांधी और इमरजेंसी का समर्थन किया था, जबकि CPI(M) ने इसका विरोध किया था और उनके कई नेता जेल भी गए थे। 1977 के विधानसभा चुनावों में लेफ्ट को बंगाल में भारी बहुमत मिला और यहीं से राज्य में कम्युनिस्टों के लंबे शासन की असली शुरुआत हुई। ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने और लगातार 2000 तक राज्य के सीएम रहे। उनके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने राज्य में उद्योगों को लाने की कोशिश की। लेकिन सिंगूर और नंदीग्राम जैसे भूमि अधिग्रहण विवादों के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में कम्युनिस्टों के 34 साल पुराने शासन को खत्म कर दिया। उस वक्त के सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य खुद अपना चुनाव हार गए। 90 के दशक में ज्योति बसु को 3 बार PM बनाने का मौका CBI के पूर्व डायरेक्टर अरुण प्रसाद मुखर्जी ने अपनी किताब ‘राजीव गांधी, ज्योति बसु, इंद्रजीत गुप्त के अनछुए पहलू’ में बताया है कि 1990 और 1991 के उथल-पुथल भरे दौर में राजीव गांधी चाहते थे कि ज्योति बसु देश के प्रधानमंत्री बनें। पहली बार अक्टूबर 1990 में राजीव गांधी ने ज्योति बसु से
Modi, Mamata, Rahuls Memorable Moments

Hindi News National Bengal Election Campaign Moments: Modi, Mamata, Rahuls Memorable Moments 20 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी में कैंपेन के दौरान कई ऐसे नजारे दिखे, जो चुनाव से ज्यादा चर्चा में रहे। पीएम मोदी ने बंगाल में झालमुड़ी खाई, तो राहुल गांधी केरलम में साइकिल से घूमे। ममता ने सब्जी खरीदी तो मोदी ने नाव चलाने वाले को गले लगा लिया। 51 दिन के 8 बेस्ट मोमेंट्स… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
‘बंगाला में बीजेपी सत्ता में आई तो…’ बांग्लादेश की संसद में विधानसभा चुनाव को लेकर क्या बोला बांग्लादेशी अल्पसंख्यक, मचा हंगामा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की वोट पूरी हो गई है। बंगाल की सत्ता कौन बनाएगा, इसका फैसला तो 4 मई को नतीजे आने के बाद ही हो सकता है, लेकिन इससे पहले ज्यादातर एगलिट पोल राज्य में पहली बार कमल खिलता दिखा रहे हैं। एक्जालिट पोल्स की चर्चा बंगाल और भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में भी इसकी चर्चा दे रही है। वहां के एक सांसद का बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. चर्चा में बांग्लादेशी न्यूमेरिक का बयान बांग्लादेश की रंगपुर सीट से नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के मोमिन अख्तर हुसैन का पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर नया बयान दिया गया है। अख्तर ने बंगाल में बीजेपी की जगह को लेकर चिंता जताई है। बांग्लादेशी सांसद ने कहा कि बंगाल में समाजवादी पार्टी और चुनावी रुझानों में भारतीय जनता पार्टी को आगे दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि अगर बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी तो ढेका को संकट का सामना करना पड़ सकता है. बांग्लादेशी आतंकियों ने कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशियों को बंगाल से वापस ले जाने वाले दल के विनाश की पेशकश करते हुए कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार सफल हो जाती है तो वह उन लोगों को सीमा पार भेज देंगे, जिनमें अवैध घुसपैठिया शामिल हैं। क्या बोले एनसीपी मौलाना अख्तर हुसैन ? बांग्लादेशी बहुमत में शामिल एनसीपी सांसद ने कहा, ‘अगर पश्चिम बंगाल के चुनावी सर्वेक्षण में बीजेपी की जीत होती है और अगर बीजेपी वहां सरकार बनाती है, तो वे सभी ‘कांगलू’ लोगों को बांग्लादेश में बुलाएंगे।’ हमारे लिए एक बड़ा मानव, आर्थिक और सितारा संकट खड़ा होगा। हम इस बात को लेकर चिंतित हैं।’ ‘कांगलू’ शब्द का इस्तेमाल बांग्लादेश से आया बांग्लादेशी अवैध मुस्लिम आक्रमणकारियों के लिए किया जाता है। 4 मई को आएंगे बंगाल चुनाव के नतीजे पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को 142 विधानसभा सीटों पर चुनाव के दूसरे चरण में 92.47 प्रतिशत वोट हुए। इस तरह, दोनों स्टेज का कुल औसत प्रतिशत प्रतिशत रिकॉर्ड 92.85 तक पहुंच गया। ज्यादातर डिजिटल पोल्स में बीजेपी को बढ़त मिलती दिख रही है। हालांकि 4 मई को नतीजे आने के बाद ही साफ हो जाएगा कि राज्य में किसकी सरकार बनेगी। (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)बांग्लादेश समाचार(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)चुनाव 2026(टी)एग्जिट पोल(टी)टीएमसी(टी)बांग्लादेश(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)बांग्लादेश नामांकन बयान(टी)हुसैन अख्तर बयान(टी)बीजेपी(टी)बंगाल कांग्रेस पोल
एग्जिट पोल: DMK-AIADMK में क्या है एग्जिट पोल?

तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026: तमिल के एक्जिट पोल में एम के स्टालिन के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सरकारी फिल्म बनी हुई है। जाहिर है कि ये स्टूडेंटस के लिए संजीवनी का काम है, क्योंकि लगातार 10 साल की सरकार के बाद जो एंटी इंकंबेंसी है, स्टालिन कम करने में कामयाब रहे हैं। और वो भी तब जब विक्ट्री की टीवी के इस चुनाव में बेहद स्ट्रैटिजी लड़की है और उसका प्रदर्शन भी शानदार रहा है. इसके बावजूद अगर स्टालिन जीत की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं तो ये आने वाले दिनों में उस हिंदी विरोध को और धराशायी हो जाएंगे, जिसके जरिए वे बीजेपी को तमिल में घुमाएंगे। यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026: 15 साल बाद बंगाल में बदलेगी सत्ता? भाजपा बहुमत का जादुई पात्र हो सकती है रही बात आइआइए की, तो उद्यमियों के बाद पार्टी में जो टूट गई, उसकी पढ़ाई वो अब तक नहीं कर पाई है। बीजेपी के साथ लेने के बाद भी ई पलनीस्वामी तमिल में 30 से ज्यादा इंच की बढ़त की स्थिति में नहीं दिख रहे हैं। जबकि राजनीति में नए-नए आए सुपर स्टार विजय अपनी पार्टी टीवी के जरिए न सिर्फ प्लास्टिक उपस्थिति दर्ज करवाकर ए आईए मीडियाके की जगह को खत्म करते दिख रहे हैं, बल्कि कुछ एकजुटता पोल में तो सबसे बड़ी विजय पार्टी उभरती हुई नजर आ रही हैं। एक्सिस माई इंडिया का लेक्चरर वाला तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हुए कई चुनावी सर्वेक्षण किए गए हैं। एक्सिस माई इंडिया के अनुमानों के अनुसार, अभिनेता विक्ट्री की पार्टी तमीजगा वेत्री कदमगम (टीवीके) इस बार का सबसे बड़ा उलटफेर कर सकता है, जिसमें 98 से 120 एडवेंचर मीटिंग का अनुमान लगाया गया है। दूसरी ओर, फ्रांसिस्को डीएमके को 92 से 110 फ्रेमवर्क के साथ सीक्वल की झलक दिख रही है, जबकि दूसरी ओर राज्य की दूसरी प्रमुख शक्ति एआईएडीएमके को 22 से 32 फ्रेमवर्क पर नजर आ रही है। विजय की पार्टी का प्रदर्शन न केवल द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक समीकरणों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि उन्हें सत्ता की कुंजी के रूप में यह दर्जा भी कायम रखा जा रहा है। यह भी पढ़ें- ‘मैं 1984 से चुनाव लड़ रही हूं, लेकिन इस बार…’, बंगाल में जीत को लेकर क्या बोल गईं ममता (टैग्सटूट्रांसलेट)डीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026(टी)एग्जिट पोल 2026(टी)चुनाव 2026(टी)विधानसभा चुनाव 2026(टी)एमके स्टालिन(टी) डीएमके(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)तमिलनाडु डाकिट पोल 2026(टी)एग्जिट पोल 2026(टी)चुनाव 2026(टी)विधानसभा चुनाव 2026
Modi Eats Jhalmuri in Bengal, Rides Mamatas Scooty; Rahul Cycles in Kerala

Hindi News National Modi Eats Jhalmuri In Bengal, Rides Mamatas Scooty; Rahul Cycles In Kerala | Election 2026 गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुडुचेरी19 मिनट पहले कॉपी लिंक बंगाल में दूसरे फेज की वोटिंग खत्म होने के साथ ही पांच राज्यों में चुनाव खत्म हो गए हैं। बंगाल में दो फेज (23 और 29 अप्रैल) को वोटिंग हुई। वहीं 23 अप्रैल को तमिलनाडु और केरलम, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग हुई। अब सभी राज्यों में 4 मई को नतीजे आएंगे। करीब एक महीने चले चुनाव प्रचार में कई मोमेंट्स देखने को मिले। पीएम मोदी ने बंगाल में झालमुड़ी खाई तो ममता ने स्कूटी की सवारी की। राहुल गांधी केरलम में साइकिल से घूमे, तो बस में सफर भी किया। सबसे पहले देखिए पश्चिम बंगाल की 4 तस्वीरें… पीएम मोदी पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में रैली के बाद एक दुकान पर रुके और झालमुड़ी खरीदी। दुकानदार ने मोदी को 10 रुपए की झालमुड़ी बनाकर दी। पीएम ने उसे खाया और वहां मौजूद बच्चों को भी बांटा। ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में स्कूटी में पीछे बैठकर चुनाव प्रचार किया। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में SIR से जुड़े 7 इलेक्शन ऑब्जर्वर को 9 घंटे बंधक बनाए रखा गया था। हिंसा भी हुई थी। असम की 2 तस्वीरें: पीएम ने चायपत्ती तोड़ी, सेल्फी खिंचाई पीएम मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में चाय बागान का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने चायपत्ती भी तोड़ी थी। पीएम चाय बागान में करीब 30 मिनट रुके थे। उन्होंने वहां महिला कामगारों के साथ सेल्फी भी खिंचाई। केरलम की 3 तस्वीरें: राहुल साइकिल से चले, बस की सवारी की राहुल गांधी ने केरलम के कोट्टायम में मौजूदा विधायक चांडी ओमन के साथ साइकिल चलाई। राहुल ने केरलम में बस की सवारी की। उन्होंने बालुसेरी से नानमंडा तक यात्रा की। राहुल गांधी ने बस यात्रा के दौरान यमराज के भेष में शख्स से मुलाकात की। पुडुचेरी की 2 तस्वीरें: सीएम बाइक से पहुंचे, रोबोट से वेलकम पुडुचेरी के सीएम CM रंगास्वामी वोट डालने के लिए पोलिंग बूथ तक बाइक से पहुंचे। पुडुचेरी में मतदान केंद्र पर रोबोट ने मतदाताओं का फूलों से स्वागत किया। ————————— ये खबर भी पढ़ें… बंगाल- 7 एग्जिट पोल में से 5 में भाजपा सरकार: असम में BJP, तमिलनाडु में DMK की वापसी पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम, असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के नतीजे आ चुके हैं। पढ़ें बारी-बारी से…पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
West Bengal Election 2026 LIVE Update; Mamata Banerjee Suvendu Adhikari BJP TMC

Hindi News National West Bengal Election 2026 LIVE Update; Mamata Banerjee Suvendu Adhikari BJP TMC | Kolkata Howrah Hooghly Birbhum Voting Percentage कोलकाता4 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल की 254 विधानसभा सीटों में से 142 सीटों पर बुधवार को वोटिंग हुई। चुनाव आयोग के मुताबिक, सेकेंड फेज में 92.32% वोटिंग हुई। बंगाल में दो फेज में चुनाव हुए। पहले फेज की 152 सीटों पर 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 93% मतदान हुआ था। दोनों फेज को मिलाकर 92.75% वोटिंग हुई है। यह बंगाल के इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा वोटिंग है। इससे पहले बंगाल में 2011 में 84.72% मतदान दर्ज किया गया था। बंगाल के अलावा तमिलनाडु में 23 अप्रैल, केरलम, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। पांचों राज्यों में केरलम में सबसे कम 78.03% वोटिंग हुई। 4 मई को सभी राज्यों के रिजल्ट आएंगे। बंगाल में सेकेंड फेज की वोटिंग के दौरान हिंसा-लाठीचार्ज; 7 घटनाएं… EVM में BJP के बटन पर टेप लगाया: भाजपा ने आरोप लगाया कि डायमंड हार्बर के फालता में EVM में BJP का बटन टेप लगाकर ब्लॉक किया गया। चुनाव आयोग ने कहा कि जहां भी शिकायतें सही मिलीं, वहां दोबारा चुनाव होंगे। पानीहाटी में EVM पर BJP के बटन पर इंक का दाग होने की शिकायत सामने आई। उसे सैनिटाइजर से साफ किया गया। भाजपा ने फालता में EVM मशीन का वीडियो जारी किया, जिसमें BJP का बटन टेप से ब्लॉक दिखा। सुवेंदु के खिलाफ ‘गो बैक’ और ‘चोर-चोर’ के नारे: भवानीपुर में ममता के खिलाफ चुनाव लड़ रहे भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी को घेरकर TMC समर्थकों ने चोर-चोर के नारे लगाए। सुवेंदु एक पोलिंग बूथ का इंस्पेक्शन करने पहुंचे थे। सुवेंदु ममता के आवास से करीब 100 मीटर दूर सड़क से गुजर रहे थे, तब लोगों ने ‘गो बैक’ के नारे लगाए। सुवेंदु ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाकर TMC समर्थकों को जवाब दिया। हावड़ा में वोट डालने आए बुजुर्ग की मौत: हावड़ा के उदयनारायणपुर में वोट डालने आए एक बुजुर्ग की मौत हो गई। TMC ने दावा किया कि बुजुर्ग अपने बेटे के साथ वोट डालने गए थे। केंद्रीय बलों ने उन्हें धक्का दिया और मारपीट की। बुजुर्ग को अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। हावड़ा में वोटरों पर लाठीचार्ज: हावड़ा के बाली विधानसभा क्षेत्र के लिलुआ में बूथ नंबर 151, 152 और 153 पर केंद्रीय बलों ने वोटरों पर लाठीचार्ज किया। आरोप है कि EVM मशीनों में खराबी के कारण वोटर लंबे समय तक लाइन में खड़े थे। बाद में उन्होंने हंगामा किया तो उनपर लाठीचार्ज हुआ। केंद्रीय बलों ने वोटरों पर लाठीचार्ज किया। कुछ को हिरासत में भी लिया। साउथ 24 परगना में सुरक्षाबलों-वोटरों के बीच धक्का-मुक्की: साउथ 24 परगना के कैनिंग में TMC ने आरोप लगाया कि एक बूथ पर पोलिंग एजेंट को CRPF कर्मियों ने पीटा और बूथ से बाहर घसीट दिया। बूथ से आई तस्वीरों में महिलाएं सहित कई लोग सुरक्षाबलों से धक्का-मुक्की करते दिखे। साउथ 24 परगना के कैनिंग में बूथ नंबर 113 पर सुरक्षाबलों और वोटरों के बीच धक्का-मुक्की हुई। हावड़ा में EVM में गड़बड़ी के बाद हंगामा: हावड़ा के बाली में EVM में गड़बड़ी की बात को लेकर हंगामा हो गया है। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे 2 लोगों को CRPF ने हिरासत में लिया। CRPF और पुलिस के जवान लोगों के हाथ और पैर से पकड़कर उठा ले गए। TMC-भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प: नॉर्थ 24 परगना के अरविंद रैली में TMC और भाजपा कार्यकर्ताओं में हिंसक झड़प हुई। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को दौड़ा-दौड़ाकर मुक्के, लाठियों से हमले किए। सुरक्षाबलों की मौजूदगी के बावजूद TMC-भाजपा कार्यकर्ता मारपीट करते दिखे। पश्चिम बंगाल में पहली बार 90% से ज्यादा वोटिंग बंगाल में वोट प्रतिशत बढ़ने की 4 वजहें… SIR का असर: राज्य में 91 लाख से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जिससे कुल वोटरों की संख्या घटी। लेकिन दिलचस्प यह है कि 2024 लोकसभा चुनाव में इन्हीं 152 सीटों पर मतदान करीब 80% और 2021 विधानसभा चुनाव में 82.17% रहा था। यानी मतदाता कम हुए, पर वोट डालने वालों की संख्या लगभग उतनी ही या उससे ज्यादा रही, जिससे प्रतिशत अपने आप बढ़ गया। एंटी इनकंबेंसी और ध्रुवीकरण: राज्य में पिछले 15 साल से TMC की सरकार है। ऐसे में नेताओं के खिलाफ नाराजगी, रोजगार, भ्रष्टाचार और घुसपैठियों को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे मतदाताओं को ज्यादा संख्या में बाहर लाए। वहीं, मुस्लिम बहुल और सीमावर्ती इलाकों में SIR और NRC के डर ने भी मतदान को प्रभावित किया। दूसरी तरफ, तेज ध्रुवीकरण के चलते हिंदू वोटरों की भागीदारी भी बढ़ी मानी जा रही है। प्रवासी कामगारों की वापसी: इस बार बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर सिर्फ वोट डालने के लिए दूसरे राज्यों से बंगाल लौटे। उन्हें लगा कि अगर इस बार मतदान नहीं किया, तो उनका अधिकार छिन सकता है। TMC ने आरोप लगाया कि भाजपा ट्रेनों में भर-भरकर लोगों को वोटिंग के लिए ला रही है, जिससे यह मुद्दा और चर्चा में रहा। निर्वाचन आयोग की सख्ती: चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी और 2.40 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती ने माहौल बदला। सुरक्षा बढ़ने से मतदाताओं में भरोसा आया और उन्होंने बिना डर के मतदान किया, जिसका असर सीधे वोटिंग प्रतिशत पर दिखा। बाकी 4 राज्यों में कितनी वोटिंग हुई, सिलसिलेवार पढ़िए… तमिलनाडु में रिकॉर्ड 85.14% वोटिंग : तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 85.14% वोटिंग हुई। 1967 से अब तक राज्य में कभी इतनी वोटिंग नहीं हुई। सबसे ज्यादा मतदान 2011 में 78.29% था। असम के 26 से ज्यादा जिलों में 80% से ऊपर वोटिंग : असम में 9 अप्रैल को 126 सीटों पर रिकॉर्ड 85.91% वोटिंग हुई। 35 जिलों में से 26 से ज्यादा जिलों में 80% से ऊपर वोटिंग हुई। सबसे ज्यादा 95.56% मतदान साउथ सलमारा मनकचर जिले में हुआ। सबसे कम 75.25% वोटिंग वेस्ट कार्बी आंगलॉन्ग में हुई। केरलम के कोझिकोड में सबसे ज्यादा 81.32% वोटिंग : केरलम में 140 विधानसभा सीटों 78.27% वोटिंग हुई। 14 जिले में से दो जिलों में 80% से ऊपर मतदान हुआ। 10 जिलों में 70% से ज्यादा वोटिंग हुई है। केरलम में 2.71 करोड़ वोटर 890 उम्मीदवारों में से अपना नेता चुन रहे
‘सब बीजेपी के गठन पर नाच रहे’, बंगाल में वोट के बीच टूट गई ममता बनर्जी, जानें क्या आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव के दौरान केंद्रीय सेना और बाहरी पर्यवेक्षकों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में सामुहिकता नहीं देखी जा रही है और भाजपा के सिद्धांतों को धर्मशास्त्र में शामिल किया जा रहा है। चुनाव आयोग पर आधारित संरचना ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘ऐसे कई पर्यवेक्षक आए हैं जो पूरी तरह से भाजपा के नामांकन के अनुसार काम कर रहे हैं।’ उन्होंने मतदान की स्थिति पर असन्तोष जताते हुए अनुरोध किया, ‘जनता को अपना वोट देना है, लेकिन इस तरह के लोकतांत्रिक मतदान संभव क्या है?’ मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि चुनाव से पहले ही उनकी पार्टी के सभी झंडे और पोस्टर हटा दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बाहरी तत्व अपनी मनमर्जी कर रहे हैं और स्थानीय प्रशासन को नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘वे वार्ड नंबर 70 के ताकतों को बाहर तक नहीं छोड़ दे रहे हैं। हमारे सोसल को चुन-चुन कर उठाया जा रहा है। स्थिति की विशिष्टता को देखते हुए अभिषेक और मैं पूरी रात जागते रहे।’ ‘पर्यवेक्षक बीजेपी के समर्थकों पर नाच रहे’ – ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चुनाव आयोग का कार्यभार संभाला। उन्होंने कहा, चुनाव आयोग का सदस्य हमें टोक रहा है। ‘इसमें कोर्ट के समर्थकों का नोटिस भेजा गया है, बाहरी पर्यवेक्षकों को बंगाल लाया गया है, ये खुले तौर पर बीजेपी के समर्थकों पर नाच रहे हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘चक्रबेरिया जाइए, आप खुद देखें कि हमारे सभी पोस्ट हटाए गए हैं। क्या चुनाव इसी तरह के उपकरण चलते हैं? ये लोग बाहर से कुछ लोगों को पसंद आते हैं, और ये लोग झील में डर और आतंक फैलाते हैं, इसके अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं। ये जल्द ही चले जायेंगे.’ यह भी पढ़ें – पहले चरण में रिकॉर्ड वोटों के बाद 1448 रिकॉर्ड्स पर किस्मत, 142 पर 142 वोटों का फैसला शामिल होगा बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को पहले चरण में 152 क्वार्टर पर वोटिंग पूरी हो चुकी है। पहले चरण में बंगाल में रिकॉर्ड 93.2 फीसदी की भारी वोटिंग हुई है. 29 अप्रैल यानि आज दूसरे चरण के लिए मतदान हो रहा है। महिलाएं भी मतदान में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। दूसरे चरण की और प्रमुख हस्तियों के होने के बाद 4 मई को वोटों की गिनती की जाएगी, चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: पिछली बार सीएम ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में किसको हराया था, अब भवानीपुर में दे रहे हैं उन्हें टक्कर, जानें क्यों हैं ये सीट (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)ईसी(टी)चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 चरण 2(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 अपडेट(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव तारीख 2026(टी)पश्चिम बंगाल 2026 चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)बंगाल दूसरे चरण का मतदान(टी)ममता बनर्जी(टी)ममता बनर्जी चुनाव आयोग पर प्रचार(टी)टीएमसी(टी)बीजेपी(टी)बंगाल चुनाव मतदान
‘ठीक से काम नहीं कर रही ईवीएम’, बंगाल में वोट के बीच बीजेपी का आरोप

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल यानि आज मतदान है। वोटिंग को लेकर अजीबो-गरीब उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह-सवेरे ही कई वोटिंग टिकट पर लंबी कतारें लग गईं। पानीहाटी से बीजेपी उम्मीदवार रत्ना देबनाथ (आरजी कर रेप-हत्या की मां) ने अपना वोट डाला। रत्ना देबनाथ ने कहा, ‘हम जीतेंगे, हमें न्याय मिलेगा। लोग हमें वोट देंगे।’ ईवीएम को लेकर शिकायत उन्होंने ईवीएम के बारे में जवाब देते हुए एक याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि वोटिंग मशीन के बटन में कोई दिक्कत है, वह धीरे-धीरे चल रही है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, देबनाथ ने कहा कि ‘उन्हें लगता है कि नोटबुक के बटन में कुछ दिक्कत है। इसमें समय लग रहा है, मैं अधिकारी को सूचित कर रहा हूं।’ पानीहाटी से बीजेपी ने बनाया गद्दा कोलकाता के आरजी कर हॉस्पिटल में रेप के बाद जिस महिला डॉक्टर की हत्या कर दी गई थी, उनकी मां ने बीजेपी ने पानीहाटी सीट से सीट बनाई है। नामांकन के समय उनके साथ भाजपा नेता स्मृति ईरानी और पार्टी के अन्य बड़े नेता भी मौजूद थे। नामांकन के बाद उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य बंगाल में तीन कांग्रेस के शासन को उखाड़ फेंकना है, जिससे राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो और आरजी कर केस की कहानियों को फिर से स्थापित किया जा सके। पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 | पानीहाटी: आरजी कर मेडिकल कॉलेज के कलाकार और कलाकार की मां और पानीहाटी सीट से बीजेपी उम्मीदवार रत्ना देबनाथ ने कहा, “हम जीतेंगे, हमें न्याय मिलेगा। लोग हमें वोट देंगे।” https://t.co/ADeUwuvnwS pic.twitter.com/lJ5jp76nEW – ANI_हिन्दीन्यूज़ (@Aहिन्दीन्यूज़) 29 अप्रैल 2026 वोटिंग को लेकर वोटर्स में उत्साह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के मतदान में रविवार को टोकियो में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह-सवेरे ही कई वोटिंग टिकट पर लंबी कतारें लग गईं। महिलाएं भी मतदान में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। उत्तर 24 परगना जिले के एक मतदान केंद्र पर बड़ी संख्या में महिलाएं मतदान के लिए लाइन में खड़ी नजर आईं। चुनाव शुरू होने से पहले 142 विधानसभा के विभिन्न मतदान प्रस्ताव मॉक पोल पर भी चले गए, जिससे मतदान प्रक्रिया ठीक से चल सके। यह भी पढ़ें- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: पिछली बार सीएम ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में किसको हराया था, अब भवानीपुर में दे रहे हैं उन्हें टक्कर, जानें क्यों हैं ये सीट 4 मई को नतीजे आएंगे इससे पहले 23 अप्रैल को पहले चरण में 152 क्वार्टर का पूरा भुगतान किया गया था। पहले चरण में बंगाल में 93.2 प्रतिशत की भारी वोटिंग हुई है, जो एक नया रिकॉर्ड है। इस भारी मतदान के बाद टीएमसी और बीजेपी दोनों ही अपनी-अपनी जीत के बड़े दावे कर रही हैं। दूसरे चरण की वोटिंग बुधवार को जारी है। दूसरे चरण की और प्रमुख हस्तियों के होने के बाद 4 मई को वोटों की गिनती की जाएगी, चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे। 1448 फ़्रॉब्स्ट की किस्मत का निर्णय दूसरे चरण में 3.21 करोड़ से अधिक कलाकार 1448 की किस्मत का फैसला होगा। निर्वाचन आयोग के अनुसार, 142 पदों पर कुल 3,21,73,837 पंजीकृत पदधारी हैं। इनमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाएं और 792 श्रद्धेय जेंडर शामिल हैं। यह भी पढ़ें – पहले चरण में रिकॉर्ड वोटों के बाद 1448 रिकॉर्ड्स पर किस्मत, 142 पर 142 वोटों का फैसला शामिल होगा (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)चुनाव 2026(टी)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 चरण 2(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 अपडेट(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव तिथि 2026(टी)पश्चिम बंगाल 2026 चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)बंगाल दूसरे चरण की वोटिंग(टी)पानीहाटी बीजेपी हंगामा
बंगाल में वोटिंग से पहले चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, यूपी के ‘सिंघम’ के इस अधिकारी को हटाया गया

पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल यानि आज दूसरे चरण की वोटिंग होगी। इससे ठीक एक दिन पहले चुनाव आयोग ने एक मुख्य स्थानीय अधिकारी सौरव हाजरा की नियुक्ति कर दी थी। दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विवाद के बीच विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक बाजीगरी और याचिका के बाद उठाव हुआ। उन पर आईपीएस अजय पाल शर्मा के सहयोग से एक्शन लिया गया। राम्या भट्टाचार्य को मिली जिम्मेदारी फाल्टा के जाइंट बोल्टन बोरा हाजरा का रेलवे स्टेशन पुरुलिया मुख्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है। मंगलवार (28 अप्रैल) को डाइरेक्टर लेकर एक अधिसूचना जारी की गई, जिसमें उनकी जगह स्पेशल ड्यूटी पर तैनात अधिकारी राम्या भट्टाचार्य को नियुक्त किया गया है। हाजरा फाल्टा विधानसभा सीट के सहायक रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में भी काम कर रहे थे। आयोग ने अपने आदेश को मंजूरी दे दी और स्वचालित रूप से लागू करने का निर्देश दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब चुनाव आयोग के एक पर्यवेक्षक के दौरे पर, कांग्रेस में शामिल प्रतिभागियों ने विरोध प्रदर्शन किया और मतदान से पहले केंद्रीय समर्थन के समर्थन वाली याचिका के बाद फाल्टा सीट एक प्रेरक केंद्र बन गई। कैसे हुई विवाद की शुरुआत? विवाद की शुरुआत तब हुई, जब पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के पर्यवेक्षकों के विशेष रूप से उत्तर प्रदेश कैडर के सदस्य अजय पाल शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें सोमवार देर रात वह कांग्रेस के प्रतियोगी थे, जहां जागीर खान के आवास पर दिखाई दिए। वीडियो में शर्मा ने चेतावनी दी है कि लाइब्रेरी को डराने-धमकाने की कोशिश करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह भी पढ़ें- बंगाल एग्जिट पोल लाइव स्ट्रीमिंग: बीजेपी की सरकार बनेगी या ममता के फिर सिर सजेगा ताज? कब-कहाँ देखें बंगाल चुनाव सर्वेक्षण देहरादून ने किया विरोध इस रिवाल्वर के बाद, नोएडा बिल्डर्स फाल्टा में जमा हो गए और शर्मा के दौरे के नारे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। फ़ोकस ने वोटिंग से पहले पार्टी सोसाइटी पर “डराने-धमकाने” का आरोप लगाया था, क्योंकि उनका काफिला सेंट्रल कॉन्सटी के साथ उस इलाक़े से गुजरा था। दूसरे चरण के लिए वोट आज पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण के लिए सभी मतदान पूर्ण हो चुके हैं। कोलकाता सहित छह मूर्तिकला के 142 विधानसभा क्षेत्र में 29 अप्रैल को मतदान होगा। इस चरण में 3.21 करोड़ से अधिक 1,448 बच्चे की किस्मत का फैसला। निर्वाचन आयोग के अनुसार, 142 पदों पर कुल 3,21,73,837 पंजीकृत पदधारी हैं। इनमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाएं और 792 श्रद्धेय जेंडर शामिल हैं। यह भी पढ़ें – ‘संदेश’ में नागरिकता, बंगाल चुनाव 2026 में मिठाइयों पर टीएमसी-बीजेपी के सिंबल, 142 की जंग में ‘डेमोक्रेसी का स्वाद’ (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)चुनाव 2026(टी)ईसी ने बीडीओ(टी)जहांगीर खान पुष्पा टिप्पणी(टी)टीएमसी विरोध फाल्टा(टी)(टी)चुनाव 2026(टी)बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)चुनाव आयोग का एक्शन(टी)जहांगीर खान(टी)एमसीएमसी(टी)आईपीएस अजय पाल शर्मा(टी)सौरव टी हाजरा को निलंबित कर दिया









