Clacton UK Election | Count Binface vs Nigel Farage Bizarre Candidate

लंदन2 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन के क्लैक्टन संसदीय क्षेत्र में होने वाला उपचुनाव इस बार एक अनोखे उम्मीदवार की वजह से चर्चा में है। यहां दक्षिणपंथी पार्टी रिफॉर्म यूके के नेता नाइजेल फराज के सामने काउंट बिनफेस चुनाव लड़ रहे हैं। बिनफेस की खास बात यह है कि वे चुनाव प्रचार के दौरान कचरे के डिब्बे जैसी पोशाक पहनते हैं और खुद को मजाकिया अंदाज में ‘ग्रह सिग्मा IX का एलियन’ बताते हैं। काउंट बिनफेस का दावा है कि चुनाव का नतीजा चाहे जो भी हो, जीत आखिर उनकी ही होगी। काउंट बिनफेस अपने अजीबोगरीब वादों की वजह से खूब चर्चा में है। वह हर नागरिक को सस्ता घर देने का वादा कर रहे हैं। लंदन के एक स्टूडियो में पिछले महीने इंटरव्यू के दौरान काउंट बिनफेस। उनका किरदार कॉमेडियन जॉन हार्वे निभाते हैं। कॉपीराइट को लेकर विवाद हुआ, फिर नाम पड़ा काउंट बिनफेस काउंट बिनफेस का किरदार 46 वर्षीय लेखक और कॉमेडियन जॉन हार्वे निभाते हैं। वे काउंट बिनफेस नाम से कई बार चुनाव लड़ चुके हैं। हार्वे ने पहली बार 2017 के ब्रिटिश आम चुनाव में लॉर्ड बकेटहेड नाम से तत्कालीन पीएम थेरेसा मे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस नाम को लेकर कॉपीराइट विवाद हो गया। दरअसल, लॉर्ड बकेटहेड भी एक व्यंग्यात्मक काल्पनिक किरदार है। यह काले रंग की टोपी पहनता है जो कि बाल्टी जैसा दिखता है। सबसे पहले 1984 में माइक ली नाम के एक शख्स ने लॉर्ड बकेटहेड नाम से यह चुनाव लड़ा था। इसके बाद हार्वे को लॉर्ड बकेटहेड नाम छोड़ना पड़ा। इसके बाद हार्वे ने काउंट बिनफेस को 2018 में चुनाव से कुछ महीने पहले लॉन्च किया। जॉन हार्वे ने पहला चुनाव लॉर्ड बकेटहेड के नाम से साल 2018 में लड़ा था। काउंट बिनफेस नाम का मतलब क्या है यह नाम 3 शब्दों से मिलकर बना है। काउंट, बिन और फेस। काउंट राजशाही से जुड़ी एक उपाधि है। जैसे कि लॉर्ड, अर्ल या बैरन भी एक उपाधि है। ऐसे में काउंट बिन फेस का मतलब है- कूड़ेदान के चेहरे वाला काउंट। काउंट बिनफेस ने 2019 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसके बाद वे 2021 और 2024 के लंदन मेयर चुनाव, 2023 उपचुनाव, 2024 आम चुनाव और 2026 में एक उपचुनाव में भी उम्मीदवार रहे। इस साल मेकरफील्ड उपचुनाव में ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम (बीच में), काउंट बिनफेस (बाएं) और लोमड़ी की पोशाक पहनने वाले एनिमल राइट एक्टिविस्ट रॉबर्ट पाउनॉल भी उम्मीदवार थे। काउंट बिनफेस क्या चुनाव जीत पाएंगे? मौजूदा हालात में काउंट बिनफेस चुनाव जीत जाएंगे इसकी संभावना बहुत कम है। दरअसल, क्लैक्टन सीट से फराज सांसद रह चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्हें 46% वोट मिले थे। हालिया सर्वेक्षणों में उन्हें करीब 73% वोट मिलने का अनुमान जताया गया है। ब्रिटेन की लेबर, कंजर्वेटिव और लिबरल डेमोक्रेट जैसी बड़ी पार्टियों ने इस उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारा है। इससे फराज की जीत की संभावना और मजबूत हो गई है। काउंट बिनफेस इस चुनाव में फराज के सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन वे अकेले नहीं हैं। इस उपचुनाव में कुल 33 उम्मीदवार मैदान में हैं। काउंट बिनफेस के लिए असली जीत सीट जीतना नहीं, बल्कि अच्छा वोट हासिल करना होगा। अब तक उन्हें सबसे ज्यादा 2021 के लंदन मेयर चुनाव में करीब 1% वोट मिले थे। क्लैक्टन उपचुनाव में बड़ी पार्टियों शामिल नहीं होने से काउंट बिनफेस फराज के सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्वी बन गए हैं। अगर उन्हें 5% या उससे ज्यादा वोट मिल जाते हैं, तो उनकी 500 पाउंड की जमानत राशि वापस मिल जाएगी। इसे उनके लिए बड़ी सफलता माना जाएगा। काउंट बिनफेस के चर्चित चुनावी वादे काउंट बिनफेस के चुनावी वादे भी पूरी तरह मजाक और व्यंग्य से भरे होते हैं। वे कहते हैं कि अगर जीत गए तो कम से कम एक सस्ता घर जरूर बनवाएंगे। यह उन सरकारों पर तंज है, जो हर चुनाव में लाखों सस्ते घर बनाने का वादा करती हैं, लेकिन अक्सर अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पातीं। वे यह भी कहते हैं, ‘आपका टैक्स कम करेंगे और बाकी सभी का बढ़ा देंगे।’ यह भी एक व्यंग्य है, क्योंकि हर नेता जनता से टैक्स कम करने का वादा करता है। उनका एक और मजाकिया वादा है कि वे ब्रिटेन की मशहूर गायिका एडेल को सरकारी संपत्ति घोषित कर देंगे। एडेल ब्रिटेन की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली गायिका हैं। काउंट उनके नाम का इस्तेमाल एक असंभव वादा करके राजनीतिक व्यंग्य करने के लिए करते हैं। पिछले महीने मध्य लंदन स्थित डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर एक शख्स काउंट बिनफेस का पोस्टर दिखाता हुआ। काउंट बिनफेस जैसे 3 और उम्मीदवार फराज के खिलाफ काउंट बिनफेस के अलावा 3 और उम्मीदवार हैं जो अपने व्यंग्यात्मक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। ये तीनों उम्मीदवार ऑफिशियल मॉन्स्टर रेविंग लूनी पार्टी से हैं। यह ब्रिटेन की व्यंग्यात्मक राजनीतिक पार्टी है जो चुनाव में ऐसे उम्मीदवार उतारने के लिए जानी जाती है।इसकी स्थापना 1983 में संगीतकार डेविड सैच ने की थी। इस पार्टी के उम्मीदवार अक्सर अजीब पोशाक पहनते हैं और ऐसे चुनावी वादे करते हैं, जिनका मकसद लोगों को हंसाने के साथ-साथ राजनीतिक व्यवस्था की कमियों की ओर ध्यान दिलाना होता है। हालांकि पार्टी के कई मजाकिया सुझाव बाद में सच भी साबित हुए। इनमें 24 घंटे पब खोलने की अनुमति, पालतू जानवरों के पासपोर्ट और जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के जरिए फैसले जैसे विचार शामिल हैं, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सरकारों ने अलग-अलग समय पर लागू किया। ब्रिटेन में ऐसे उम्मीदवारों की पुरानी परंपरा ब्रिटेन में 18 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी ब्रिटिश, आयरिश या पात्र कॉमनवेल्थ नागरिक संसदीय चुनाव लड़ सकता है। इसके लिए 500 पाउंड की जमानत राशि जमा करनी होती है और स्थानीय क्षेत्र के 10 लोगों का समर्थन चाहिए। इसी वजह से ब्रिटेन के चुनावों में अक्सर मजाकिया या व्यंग्यात्मक उम्मीदवार भी मैदान में उतरते हैं। कोई कार्टून किरदार की पोशाक पहनता है तो कोई अजीब वेशभूषा में प्रचार करता है। इनका मकसद चुनाव जीतने से ज्यादा चर्चा में आना और राजनीति पर व्यंग्य करना होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Clacton UK Election | Count Binface vs Nigel Farage Bizarre Candidate

लंदनकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन के क्लैक्टन संसदीय क्षेत्र में होने वाला उपचुनाव इस बार एक अनोखे उम्मीदवार की वजह से चर्चा में है। यहां दक्षिणपंथी पार्टी रिफॉर्म यूके के नेता नाइजेल फराज के सामने काउंट बिनफेस चुनाव लड़ रहे हैं। बिनफेस की खास बात यह है कि वे चुनाव प्रचार के दौरान कचरे के डिब्बे जैसी पोशाक पहनते हैं और खुद को मजाकिया अंदाज में ‘ग्रह सिग्मा IX का एलियन’ बताते हैं। काउंट बिनफेस का दावा है कि चुनाव का नतीजा चाहे जो भी हो, जीत आखिर उनकी ही होगी। काउंट बिनफेस अपने अजीबोगरीब वादों की वजह से खूब चर्चा में है। वह हर नागरिक को सस्ता घर देने का वादा कर रहे हैं। लंदन के एक स्टूडियो में पिछले महीने इंटरव्यू के दौरान काउंट बिनफेस। उनका किरदार कॉमेडियन जॉन हार्वे निभाते हैं। कॉपीराइट को लेकर विवाद हुआ, फिर नाम पड़ा काउंट बिनफेस काउंट बिनफेस का किरदार 46 वर्षीय लेखक और कॉमेडियन जॉन हार्वे निभाते हैं। वे काउंट बिनफेस नाम से कई बार चुनाव लड़ चुके हैं। हार्वे ने पहली बार 2017 के ब्रिटिश आम चुनाव में लॉर्ड बकेटहेड नाम से तत्कालीन पीएम थेरेसा मे के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस नाम को लेकर कॉपीराइट विवाद हो गया। दरअसल, लॉर्ड बकेटहेड भी एक व्यंग्यात्मक काल्पनिक किरदार है। यह काले रंग की टोपी पहनता है जो कि बाल्टी जैसा दिखता है। सबसे पहले 1984 में माइक ली नाम के एक शख्स ने लॉर्ड बकेटहेड नाम से यह चुनाव लड़ा था। इसके बाद हार्वे को लॉर्ड बकेटहेड नाम छोड़ना पड़ा। इसके बाद हार्वे ने काउंट बिनफेस को 2018 में चुनाव से कुछ महीने पहले लॉन्च किया। काउंट बिनफेस नाम का मतलब क्या है यह नाम 3 शब्दों से मिलकर बना है। काउंट, बिन और फेस। काउंट राजशाही से जुड़ी एक उपाधि है। जैसे कि लॉर्ड, अर्ल या बैरन भी एक उपाधि है। ऐसे में काउंट बिन फेस का मतलब है- कूड़ेदान के चेहरे वाला काउंट। काउंट बिनफेस ने 2019 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसके बाद वे 2021 और 2024 के लंदन मेयर चुनाव, 2023 उपचुनाव, 2024 आम चुनाव और 2026 में एक उपचुनाव में भी उम्मीदवार रहे। इस साल मेकरफील्ड उपचुनाव में ब्रिटेन के मौजूदा प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम (बीच में), काउंट बिनफेस (बाएं) और लोमड़ी की पोशाक पहनने वाले एनिमल राइट एक्टिविस्ट रॉबर्ट पाउनॉल भी उम्मीदवार थे। काउंट बिनफेस क्या चुनाव जीत पाएंगे? मौजूदा हालात में काउंट बिनफेस चुनाव जीत जाएंगे इसकी संभावना बहुत कम है। दरअसल, क्लैक्टन सीट से फराज सांसद रह चुके हैं। पिछले चुनाव में उन्हें 46% वोट मिले थे। हालिया सर्वेक्षणों में उन्हें करीब 73% वोट मिलने का अनुमान जताया गया है। ब्रिटेन की लेबर, कंजर्वेटिव और लिबरल डेमोक्रेट जैसी बड़ी पार्टियों ने इस उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारा है। इससे फराज की जीत की संभावना और मजबूत हो गई है। काउंट बिनफेस इस चुनाव में फराज के सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन वे अकेले नहीं हैं। इस उपचुनाव में कुल 33 उम्मीदवार मैदान में हैं। काउंट बिनफेस के लिए असली जीत सीट जीतना नहीं, बल्कि अच्छा वोट हासिल करना होगा। अब तक उन्हें सबसे ज्यादा 2021 के लंदन मेयर चुनाव में करीब 1% वोट मिले थे। क्लैक्टन उपचुनाव में बड़ी पार्टियों शामिल नहीं होने से काउंट बिनफेस फराज के सबसे चर्चित प्रतिद्वंद्वी बन गए हैं। अगर उन्हें 5% या उससे ज्यादा वोट मिल जाते हैं, तो उनकी 500 पाउंड की जमानत राशि वापस मिल जाएगी। इसे उनके लिए बड़ी सफलता माना जाएगा। काउंट बिनफेस के चर्चित चुनावी वादे काउंट बिनफेस के चुनावी वादे भी पूरी तरह मजाक और व्यंग्य से भरे होते हैं। वे कहते हैं कि अगर जीत गए तो कम से कम एक सस्ता घर जरूर बनवाएंगे। यह उन सरकारों पर तंज है, जो हर चुनाव में लाखों सस्ते घर बनाने का वादा करती हैं, लेकिन अक्सर अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पातीं। वे यह भी कहते हैं, ‘आपका टैक्स कम करेंगे और बाकी सभी का बढ़ा देंगे।’ यह भी एक व्यंग्य है, क्योंकि हर नेता जनता से टैक्स कम करने का वादा करता है। उनका एक और मजाकिया वादा है कि वे ब्रिटेन की मशहूर गायिका एडेल को सरकारी संपत्ति घोषित कर देंगे। एडेल ब्रिटेन की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली गायिका हैं। काउंट उनके नाम का इस्तेमाल एक असंभव वादा करके राजनीतिक व्यंग्य करने के लिए करते हैं। पिछले महीने मध्य लंदन स्थित डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर एक शख्स काउंट बिनफेस का पोस्टर दिखाता हुआ। काउंट बिनफेस जैसे 3 और उम्मीदवार फराज के खिलाफ काउंट बिनफेस के अलावा 3 और उम्मीदवार हैं जो अपने व्यंग्यात्मक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। ये तीनों उम्मीदवार ऑफिशियल मॉन्स्टर रेविंग लूनी पार्टी से हैं। यह ब्रिटेन की व्यंग्यात्मक राजनीतिक पार्टी है जो चुनाव में ऐसे उम्मीदवार उतारने के लिए जानी जाती है।इसकी स्थापना 1983 में संगीतकार डेविड सैच ने की थी। इस पार्टी के उम्मीदवार अक्सर अजीब पोशाक पहनते हैं और ऐसे चुनावी वादे करते हैं, जिनका मकसद लोगों को हंसाने के साथ-साथ राजनीतिक व्यवस्था की कमियों की ओर ध्यान दिलाना होता है। हालांकि पार्टी के कई मजाकिया सुझाव बाद में सच भी साबित हुए। इनमें 24 घंटे पब खोलने की अनुमति, पालतू जानवरों के पासपोर्ट और जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के जरिए फैसले जैसे विचार शामिल हैं, जिन्हें बाद में ब्रिटिश सरकारों ने अलग-अलग समय पर लागू किया। ब्रिटेन में ऐसे उम्मीदवारों की पुरानी परंपरा ब्रिटेन में 18 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी ब्रिटिश, आयरिश या पात्र कॉमनवेल्थ नागरिक संसदीय चुनाव लड़ सकता है। इसके लिए 500 पाउंड की जमानत राशि जमा करनी होती है और स्थानीय क्षेत्र के 10 लोगों का समर्थन चाहिए। इसी वजह से ब्रिटेन के चुनावों में अक्सर मजाकिया या व्यंग्यात्मक उम्मीदवार भी मैदान में उतरते हैं। कोई कार्टून किरदार की पोशाक पहनता है तो कोई अजीब वेशभूषा में प्रचार करता है। इनका मकसद चुनाव जीतने से ज्यादा चर्चा में आना और राजनीति पर व्यंग्य करना होता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
वीसीके के बाद आईयूएमएल ने भी टीवीके को दिया समर्थन, तमिल में 120 ऑर्केस्ट्रा के साथ विजय चिलचिलाती सरकार

तमिल की विजय सरकार का सत्य असेंबल का रास्ता साफ हो गया है। वीसीके ने शनिवार को टीवीके को समर्थन देने का निर्णय लिया है। विजय के पास 116 बजरे का समर्थन था। इधर, टीवीके को इंडियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएलएस) उन्होंने भी समर्थन दिया है. अब पात्र 120 हो गया है. शनिवार की शाम को वसीके की अहम मुलाकात थी. इसमें टीवीके को समर्थन प्रस्ताव पर निर्णय लिया गया था. उदाहरण में विजय को समर्थन देने पर सहमति बनी। अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री विजय बन सकते हैं। वीसीके ने बिना किसी शर्त के टीवीके को सपोर्ट दिया है। 4 मई को आये नतीजों ने तमिल में सभी को चौंका दिया था. यहां टीवीके ने टीचर्स और मैथ्यूज को पछाड़ा, राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी। हालाँकि, 108 के आँकड़े ही शिखर तक पहुँचे, और बहुमत से 10 सीट पीछे रह गए। इसके बाद कांग्रेस के पांच बेंचमार्क का समर्थन टीवी को मिला, वहीं, सी स्टूडियो और सीपीआईएम के दो दो बैच ने भी समर्थन किया। इस तरह का प्रदर्शन 116 पर पहुंच गया। अब वीसीके ने टीवीके को सपोर्ट दिया है। टीवीके ने सभी सपोर्ट करने वाली व्रिवेच्योर का डंका बजा दिया है, साथ ही पार्टी के नेता अर्जुन ने कहा है कि अब विजय सरकार बनाने की तैयारी है. एआईएडीएमके प्रमुख का बयान, पहले ही बढ़ाया दी थी हलचलइधर, कुछ देर पहले एआईएडीएमके के प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी की एक पोस्ट ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी थी। उन्होंने एक पोस्ट में सरकार बनाने वाली पार्टी को बधाई दी थी. ऐसे में टीवीके के सपोर्ट को लेकर रेस्टॉरेंट तेजी से हो गया। पलानीस्वामी ने एक पोस्ट करते हुए कहा था कि हाल ही में 17वें तमिलनाडु विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न राजनीतिक दलों ने चुनावी लड़ाई लड़ी है। जीत दर्ज करें. मैं तमिलनाडु में सरकार बनाने वाली पार्टी को अपनी हार्दिक बधाई देता हूं। यह भी पढ़ेंः एकनाथ शिंदे ऑन बीजेपी: बंगाल की जीत पर एकनाथ शिंदे का बयान, कहा- ‘मोदी-शाह रणनीति की जीत’ (टैग्सटूट्रांसलेट)टीवीके(टी)एआईएडीएमके(टी)तमिलनाडु(टी)ताजा समाचार(टी)हिंदी समाचार(टी)तमिलनाडु सरकार गठन(टी)एआईएडीएमके(टी)डीएमके(टी)विजय थलापति(टी)चुनाव समाचार(टी)दक्षिण समाचार(टी)टीवीके(टी)समेतो शोमाके(टी)तमिलनाडु(टी)नवीनतम समाचार(टी)हिंदी समाचार(टी)तमिलनाडु सरकार गठन(टी) धर्मशालाए डॉक्यूमेंट्री(टी) क्रोमाके(टी)विजय थलपति(टी)चुनाव समाचार(टी)दक्षिणी समाचार
बंगाल में फालता सीट पर 21 मई को दोबारा वोटिंग:ममता के भतीजे बोले- गुजराती गैंग को डायमंड हार्बर मॉडल तोड़ने में दस जन्म लगेंगे

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना की फालता विधानसभा सीट के सभी 285 पोलिंग बूथों पर 21 मई को दोबारा मतदान होगा। यहां 29 अप्रैल को दूसरे चरण में वोटिंग के दौरान चुनाव आयोग को हिंसा, ईवीएम से छेड़छाड़ की शिकायतें मिली थीं। एक बूथ पर भाजपा के चुनाव चिह्न पर टेप लगा था। नई तारीख के मुताबिक मतगणना 24 मई को होगी। इससे पहले 2 मई को मगरहाट पश्चिम के 11 बूथों और डायमंड हार्बर के 4 बूथों पर दोबारा मतदान हुआ। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक दोनों विधानसभा क्षेत्रों के 15 बूथों पर करीब 90% वोटिंग हुई है। इधर, ममता के भतीजे और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बैनर्जी ने BJP को चैलेंज दिया है कि दम है तो बांग्ला विरोधी गुजराती गैंग फाल्टा से चुनाव लड़कर दिखाए। अभिषेक ने दावा किया कि उनके डायमंड हार्बर मॉडल में सेंध लगाने के लिए दस जन्म भी कम पड़ेंगे। यह रिएक्शन BJP नेता अमित मालवीय के X पोस्ट पर आया। जिसमें अमित ने रीपोलिंग के आदेश के बाद लिखा था- डायमंड हार्बर मॉडल टूट गया। पश्चिम बंगाल- 8 एग्जिट पोल में से 6 में भाजपा, 2 में TMC सरकार बंगाल से जुड़े पोस्ट इलेक्शन अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
भाजपा के सभी उम्मीदवार आज अपने क्षेत्रों के मंदिर जाएंगे:महिला कार्यकर्ता हर स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर अगले 24 घंटे सतर्कता प्रदर्शन करेंगी

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद भी लगातार नए-नए घटनाक्रम हो रहे हैं। सेकंड फेज की वोटिंग के दौरान हुई हिंसा, भवानीपुर स्ट्रॉन्ग रूम में ममता के बिताए 4 घंटे और 2 मई को रीपोलिंग के बाद दक्षिण 24 परगना की फालता विधानसभा सीट के सभी 285 पोलिंग बूथों पर 21 मई को दोबारा मतदान का ऐलान किया। इसी दौरान भाजपा के सभी उम्मीदवार आज यानी रविवार को अपने-अपने क्षेत्रों में पूजा-अर्चना करने मंदिर जाएंगे। जबकि भाजपा की महिला कार्यकर्ता प्रदेशभर में स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर 24 घंटे का सतर्कता प्रदर्शन करेंगी। पश्चिम बंगाल- 8 एग्जिट पोल में से 6 में भाजपा, 2 में TMC सरकार बंगाल से जुड़े पोस्ट इलेक्शन अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Trinamool Congress protest EVM strongroom in Kolkata, mamata banerjee, TMC West Bengal Chief Electoral Office, Election updates

Hindi News National Trinamool Congress Protest EVM Strongroom In Kolkata, Mamata Banerjee, TMC West Bengal Chief Electoral Office, Election Updates कोलकाता2 मिनट पहलेलेखक: सृष्टि मिश्रा और सुनील मौर्य कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बुधवार देर रात 1 बजे कहा, ‘अगर EVM लूटने और मतगणना में हेरफेर की कोशिश हुई तो हम जान की बाजी लगा देंगे।’ वे भवानीपुर के शेखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्ग रूम 4 घंटे से ज्यादा वक्त रहीं। दरअसल, टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग के अधिकारी मतपेटियां खोलने की कोशिश कर रहे हैं। सबूत में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी शेयर किया। इसके बाद विवाद बढ़ गया। पार्टी के कार्यकर्ता अनुशीलन केंद्र के स्ट्रॉन्ग रूम पहुंच गए। यहां धरना शुरू कर दिया। उधर, चुनाव आयोग ने कहा, ‘पोस्टल बैलेट की छंटाई हो रही थी, पार्टियों को बुलाया, लेकिन कोई नहीं आया। बाद में CCTV को लेकर चिंता जताई। अब सब कुछ ठीक है।’ फोटोज में देखिए TMC-BJP धरना-प्रर्दशन बुधवार शाम 8 बजे धरना शुरू टीएमसी उम्मीदवार कुणाल घोष (बाएं से दूसरे), शशि पांजा (बीच में) और टीएमसी कार्यकर्ताओं ने खुदीराम अनुशीलन केंद्र स्थित स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरने पर बैठे। रात 8:20 बजे चुनाव आयोग के अफसरों ने समझाया कुणाल घोष और शशि पांजा को चुनाव आयोग के अफसरों ने समझाया, लेकिन वह नहीं माने करीब 9 बजे तक धरने पर बैठे रहे। 9 बजे सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र स्थित स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई। बाहर टीएमसी के कार्यकर्ता नारेबाजी कर रहे थे। 9:30 बजे कार्यकर्ताओं ने घुसने की कोशिश की टीएमसी कार्यकर्ता के बाद भाजपा कार्यकर्ता भी पहुंच गए। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और लोगों को रोका। खुदीराम अनुशीलन केंद्र स्थित स्ट्रॉन्ग रूम की 24 घंटे निगरानी हो रही है। इसकी रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। देखिए वह VIDEO जिसके बाद हंगामा हुआ… TMC ने X पर वीडियो पोस्ट कर लिखा- CCTV फुटेज में साफ दिख रहा है कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर खुलेआम चुनाव में धांधली कर रहे हैं। बंगाल चुनाव से जुड़ी पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं… अपडेट्स 29 मिनट पहले कॉपी लिंक कोलकाता पुलिस के लाठीचार्ज में घायल BJP कार्यकर्ता बोला- ये सब ममता का नाटक 29 मिनट पहले कॉपी लिंक EVM से छेड़खानी का पूरा विवाद समझें भास्कर रिपोर्टर सुनील मौर्य और सृष्टि मिश्रा से 30 मिनट पहले कॉपी लिंक भाजपा प्रवक्ता बोले- खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे, ममता हार के डर से बौखलाईं भाजपा के प्रवक्ता नवीन मिश्रा ने आरोप लगाया कि TMC की जिस गाड़ी को कलकत्ता पुलिस ने स्ट्रॉन्ग रूम के बैकसाइड पर पार्क करवाया था, उसमें निश्चित तौर पर EVM रही होंगी, जिन्हें बदलने के लिए यह पूरी साजिश रची गई है। ममता बनर्जी को समझ आ गया है कि वे चुनाव हार रही हैं। खिसयानी बिल्ली खंबा नोंचे। ममता ने आज दोपहर ही अपनी गुंडावाहिनी को एक्टिव रहने का मैसेज दिया था। वे पूरे बंगाल में स्ट्रॉन्ग रूम में हंगामा करवाना चाहती हैं, ताकि बंगाल और उसकी संस्कृति बदनाम हो। लेकिन जनता ने अपना फैसला कर दिया है। 31 मिनट पहले कॉपी लिंक चुनाव आयोग बोला- पोस्टल बैलेट छंट रहे थे, पार्टियों को बुलाया, लोग आए नहीं पश्चिम बंगाल के CEO मनोज कुमार अग्रवाल ने स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर चल रहे विवाद पर कहा, “पोस्टल बैलेट की छंटाई शाम 4 बजे की गई थी; पार्टियों ने आमंत्रण को नजरअंदाज कर दिया, और बाद में CCTV को लेकर चिंता जताई। अब सब कुछ ठीक है।” DEO स्मिता पांडे ने बताया- आज जो हुआ वह हमारी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें पोस्टल बैलेट्स को अलग-अलग किया जाता है। अलग-अलग जिलों में, जो पोलिंग कर्मचारी ड्यूटी पर होते हैं, वे भी वोट डालते हैं और वे पोस्टल बैलेट्स के जरिए ऐसा करते हैं। 31 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता का आरोप- EVM लूटने की कोशिश हुई, हम ऐसा नहीं होने देंगे ममता ने मीडिया के सवाल पर बताया कि जब उनके पास EVM से छेड़छाड़ करने वाला वीडियो पहुंचा, तभी वे यहां आईं। EVM लूटने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। यह हमारा फर्ज है कि हम यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों के वोटों को ठीक से सुरक्षित रखा जाए और कुछ जानकारी मिलने के आधार पर, हम यहां आए हैं।” ममता बोलीं- “जब से चुनाव की घोषणा हुई है, वे कह रहे हैं कि वे चुनाव आयोग के अधीन हैं। और कोई ‘सुपर पावर’ काम कर रही है और उन पर दबाव डाल रही है। और हर दिन वे वीडियो कॉल, मीटिंग या वॉट्सऐप के जरिए संपर्क कर रहे हैं… वहां सिर्फ ऑब्ज़र्वर मौजूद हैं; इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है…” 32 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता बोलीं- केंद्रीय सुरक्षा बलों ने मुझे अंदर जाने से रोका ममता ने बाहर आने के बाद कार्यकर्ताओं और मीडिया को बताया- “मैं यहां इसलिए आई हूं, क्योंकि यहां EVMs के लिए एक स्ट्रॉन्ग रूम है। हमें कई जगहों पर गड़बड़ियां मिलीं, इसलिए जब मैंने TV पर यह देखा, तो मुझे लगा कि मुझे यहां आकर देखना चाहिए। मैं आई, लेकिन केंद्रीय बलों ने मुझे रोक दिया। मैंने उनसे कहा कि मुझे अंदर जाने का अधिकार है; चुनाव नियमों के अनुसार, उम्मीदवारों को सील किए गए कमरे के बाहर तक जाने की अनुमति होती है। इसके बाद मुझे अंदर जाने दिया गया… अगर कोई गड़बड़ी हुई है, तो हम इसके खिलाफ लड़ेंगे।” 33 मिनट पहले कॉपी लिंक भवानीपुर स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर हंगामा, BJP कार्यकर्ता से मारपीट; 2 वीडियो पहला वीडियो: EVM स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर BJP कार्यकर्ता वहां तैनात सुरक्षा बलों से बहस करते दिख रहे हैं। वे पूछ रहे हैं कि यहां TMC का कैंपेन व्हीकल क्यों आया है। दूसरा वीडियो: इस वीडियो में सुरक्षाबल भाजपा के एक कार्यकर्ता को खदेड़ रहे हैं। यह कहा जा रहा है कि स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर केवल मीडिया और अधिकृत एजेंट को ही जाने की परमिशन है। 34 मिनट पहले कॉपी लिंक आईपैक डायरेक्टर को जमानत, शाम को आदेश-इन्हें छोड़ा न जाए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में आईपैक के
West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today

Hindi News National West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today | 152 Seats Bengal First Phase कोलकाता/चेन्नई13 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज वोटिंग है। बंगाल में फर्स्ट फेज के 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर चुनाव होंगे। वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी। बंगाल में TMC और BJP के बीच मुख्य मुकाबला है। यहां के सभी बूथों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनीटरिंग) होगी। राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। रिजल्ट 4 मई को आएंगे। तमिलनाडु में DMK+ कांग्रेस और AIADMK+ BJP के बीच मुकाबला है। तमिल एक्टर थलापति विजय की नई पार्टी TVK इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है। महाराष्ट्र की बारामती सीट पर भी उपचुनाव है। यह सीट महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद से खाली है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के खिलाफ विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) की ओर से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है। चुनाव तैयारी से जुड़ी 2 तस्वीरें… पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में महिला कर्मचारी ईवीएम लेकिन पोलिंग बूथ पहुंची है। पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में चुनाव कर्मचारी ने धूप से बचने के लिए अपना सिर ढंक लिया। पश्चिम बंगाल: कुल 6.80 करोड़ वोटर्स, 5.23 लाख पहली बार मतदान करेंगे पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटे हैं। जिसमें 210 जनरल सीटें हैं। वहीं 68 सीटें एससी और 10 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 6.8 करोड़ वोटर्स हैं। पांच लाख से ज्यादा लोग पहली बार वोट डालेंगे। वहीं 3.79 लाख वोटर्स 85 से ज्यादा उम्र के हैं। फर्स्ट फेज में 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग होगी। 44,376 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। पश्चिम बंगाल: 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री बंगाल में 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं। ममता ने 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म किया, 15 साल से सत्ता में आजादी के बाद शुरुआती दौर (1947–1967) में कांग्रेस का वर्चस्व रहा और राज्य में स्थिर सरकारें रहीं। 1967 के बाद कांग्रेस कमजोर हुई और राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हुआ, कई गठबंधन सरकारें बनीं। 1977 में वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) सत्ता में आया और ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने। 1977 से 2011 तक करीब 34 साल तक लेफ्ट फ्रंट का लगातार शासन रहा। 2000 के दशक में औद्योगीकरण (सिंगूर, नंदीग्राम) को लेकर विवाद हुआ, जिससे लेफ्ट की पकड़ कमजोर हुई। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने किसान आंदोलनों के जरिए बड़ा जनसमर्थन हासिल किया। 2011 में TMC ने लेफ्ट को हराकर सत्ता हासिल की, 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म हुआ। 2016 और 2021 में TMC ने दोबारा जीत दर्ज की और ममता बनर्जी का दबदबा कायम रहा। वर्तमान में राजनीति TMC vs BJP के बीच मुख्य मुकाबले में बदल गई है, जबकि कांग्रेस-लेफ्ट सीमित भूमिका में हैं। तमिलनाडु- 12.51 लाख वोटर्स पहली बार वोटिंग करेंगे तमिलनाडु- कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आ सकी आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है। फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही। 1967 में पहली बार DMK ने कांग्रेस को हराया, द्रविड़ विचारधारा पर राजनीति आजादी के बाद (1947–1967) तक राज्य में कांग्रेस का वर्चस्व रहा, के. कामराज प्रमुख नेता थे। इसी दौर में पेरियार के नेतृत्व में द्रविड़ आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें सामाजिक न्याय और हिंदी विरोध मुख्य मुद्दे थे। 1967 में DMK ने कांग्रेस को हराकर पहली बार क्षेत्रीय राजनीति को सत्ता में स्थापित किया। सी.एन. अन्नादुरई पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री बने, यहीं से द्रविड़ राजनीति का दौर शुरू हुआ। उनके बाद एम. करुणानिधि ने DMK को मजबूत किया और संस्कृति-भाषा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाया। 1972 में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने AIADMK बनाई, जिससे दो-दलीय राजनीति (DMK vs AIADMK) स्थापित हुई। 1970 के दशक से 2010 तक DMK और AIADMK बारी-बारी से सत्ता में आती रहीं। जयललिता के दौर में AIADMK ने ‘अम्मा स्कीम्स’ के जरिए वेलफेयर पॉलिटिक्स को मजबूत किया। 2016 के बाद जयललिता और करुणानिधि के निधन से नेतृत्व परिवर्तन का दौर शुरू हुआ। 2021 के बाद एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK सत्ता में है, और आज भी राज्य की राजनीति द्रविड़ विचारधारा पर आधारित है। ————————– राज्यों में चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इलेक्शन एक्सप्लेनर: मुस्लिम बहुल 6 जिले ममता को बनाते हैं अजेय, TMC की आधी सीटें यहीं से; क्या ममता के ‘चिकन नेक’ पर शिकंजा कसेगी बीजेपी हवा का रुख: तमिलनाडु में BJP का खाता खुलना मुश्किल, 120-140 सीटों के साथ स्टालिन की वापसी के आसार, थलापति विजय को 5 से 15 सीटें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
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Hindi News National West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today | 152 Seats Bengal First Phase कोलकाता/चेन्नईकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज वोटिंग है। बंगाल में फर्स्ट फेज के 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर चुनाव होंगे। वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी। बंगाल में TMC और BJP के बीच मुख्य मुकाबला है। यहां के सभी बूथों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनीटरिंग) होगी। राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। रिजल्ट 4 मई को आएंगे। तमिलनाडु में DMK+ कांग्रेस और AIADMK+ BJP के बीच मुकाबला है। तमिल एक्टर थलापति विजय की नई पार्टी TVK इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है। महाराष्ट्र की बारामती सीट पर भी उपचुनाव है। यह सीट महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद से खाली है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के खिलाफ विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) की ओर से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है। चुनाव तैयारी से जुड़ी 2 तस्वीरें… पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में महिला कर्मचारी ईवीएम लेकिन पोलिंग बूथ पहुंची है। पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में चुनाव कर्मचारी ने धूप से बचने के लिए अपना सिर ढंक लिया। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की वोटिंग से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं… अपडेट्स 5 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल: कुल 6.80 करोड़ वोटर्स, 5.23 लाख पहली बार मतदान करेंगे पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटे हैं। जिसमें 210 जनरल सीटें हैं। वहीं 68 सीटें एससी और 10 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 6.8 करोड़ वोटर्स हैं। पांच लाख से ज्यादा लोग पहली बार वोट डालेंगे। वहीं 3.79 लाख वोटर्स 85 से ज्यादा उम्र के हैं। फर्स्ट फेज में 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग होगी। 44,376 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। 5 मिनट पहले कॉपी लिंक 29 अप्रैल को दूसरे फेज में 142 सीटों पर मतदान होगा 6 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल: पिछले 2 चुनाव से 80% से ज्यादा वोटिंग 7 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल: 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री बंगाल में 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं। 8 मिनट पहले कॉपी लिंक पहले फेज में पश्चिम बंगाल की 4 हॉट सीटें 9 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता ने 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म किया, 15 साल से सत्ता में आजादी के बाद शुरुआती दौर (1947–1967) में कांग्रेस का वर्चस्व रहा और राज्य में स्थिर सरकारें रहीं। 1967 के बाद कांग्रेस कमजोर हुई और राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हुआ, कई गठबंधन सरकारें बनीं। 1977 में वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) सत्ता में आया और ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने। 1977 से 2011 तक करीब 34 साल तक लेफ्ट फ्रंट का लगातार शासन रहा। 2000 के दशक में औद्योगीकरण (सिंगूर, नंदीग्राम) को लेकर विवाद हुआ, जिससे लेफ्ट की पकड़ कमजोर हुई। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने किसान आंदोलनों के जरिए बड़ा जनसमर्थन हासिल किया। 2011 में TMC ने लेफ्ट को हराकर सत्ता हासिल की, 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म हुआ। 2016 और 2021 में TMC ने दोबारा जीत दर्ज की और ममता बनर्जी का दबदबा कायम रहा। वर्तमान में राजनीति TMC vs BJP के बीच मुख्य मुकाबले में बदल गई है, जबकि कांग्रेस-लेफ्ट सीमित भूमिका में हैं। 10 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु- 12.51 लाख वोटर्स पहली बार वोटिंग करेंगे 10 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु में पिछले 2 चुनाव से 75% से कम वोटिंग 12 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु- कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है। फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही। 12 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु की 4 हॉट सीटें: सीएम स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि भी मैदान में 14 मिनट पहले कॉपी लिंक 1967 में पहली बार DMK ने कांग्रेस को हराया, द्रविड़ विचारधारा पर राजनीति आजादी के बाद (1947–1967) तक राज्य में कांग्रेस का वर्चस्व रहा, के. कामराज प्रमुख नेता थे। इसी दौर में पेरियार के नेतृत्व में द्रविड़ आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें सामाजिक न्याय और हिंदी विरोध मुख्य मुद्दे थे। 1967 में DMK ने कांग्रेस को हराकर पहली बार क्षेत्रीय राजनीति को सत्ता में स्थापित किया। सी.एन. अन्नादुरई पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री बने, यहीं से द्रविड़ राजनीति का दौर शुरू हुआ। उनके बाद एम. करुणानिधि ने DMK को मजबूत किया और संस्कृति-भाषा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाया। 1972 में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने AIADMK बनाई, जिससे दो-दलीय राजनीति (DMK vs AIADMK) स्थापित हुई। 1970 के दशक से 2010 तक DMK और AIADMK बारी-बारी से सत्ता में आती रहीं। जयललिता के दौर में AIADMK ने ‘अम्मा स्कीम्स’ के जरिए वेलफेयर पॉलिटिक्स को मजबूत किया। 2016 के बाद जयललिता और करुणानिधि के निधन से नेतृत्व परिवर्तन का दौर शुरू हुआ। 2021 के बाद एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK सत्ता में है, और आज भी राज्य की राजनीति द्रविड़ विचारधारा पर आधारित है। दैनिक भास्कर को Google पर 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बंगाल-मतदान से 2 दिन पहले नाम जुड़ा,तो वोट कर सकेंगे:सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा- सप्लीमेंट्री लिस्ट अपडेट करें; 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव से दो दिन पहले तक सप्लीमेंट्री लिस्ट में नाम जुड़ने वाले वोटर्स मतदान कर सकेंगे। जिन वोटर्स की आपत्ति ट्रिब्यूनल में पेडिंग होगी, उन्हें वोट डालने की इजाजत नहीं होगी। बंगाल में 2 फेज में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल्स को पहले फेज के चुनाव के लिए 21 अप्रैल तक और दूसरे फेज में 27 अप्रैल तक आपत्तियों का निपटारा करने को कहा है। जैसे ही ट्रिब्यूनल नाम जोड़ने का आदेश देगा, इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तुरंत सूची में संशोधन करेंगे और लिस्ट जारी की जाएगी। दरअसल, बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में 90.83 लाख वोटर्स के नाम काट दिए गए हैं। इन वोटर्स की अपील सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। CJI सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। ट्रिब्यूनल पर ज्यादा बोझ नहीं डाला जाना चाहिए सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल पर ज्यादा बोझ नहीं डाला जाना चाहिए, लेकिन एक मजबूत अपील प्रणाली जरूरी है ताकि असली वोटर्स के अधिकार सुरक्षित रह सकें। अगर बड़ी संख्या में वोटर्स बाहर रह जाते हैं और चुनाव में जीत का अंतर कम होता है, तो नतीजों पर सवाल उठ सकते हैं। इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) और राज्य सरकार ट्रिब्यूनल को पूरा सहयोग दें। 19 ट्रिब्यूनल के सामने 34 लाख से ज्यादा अपीलें सुनवाई के दौरान बताया गया कि 19 ट्रिब्यूनल के सामने 34 लाख से ज्यादा अपीलें लंबित हैं। ये ट्रिब्यूनल रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों की अगुवाई में बनाए गए हैं। पश्चिम बंगाल में SIR अभियान का मकसद वोटर लिस्ट से डुप्लिकेट और अयोग्य नाम हटाना बताया जा रहा है। हालांकि इस पर सियासी विवाद तेज है। सत्ताधारी पार्टी ने बड़े पैमाने पर मतदाताओं को बाहर करने का आरोप लगाया है, जबकि ECI इसे निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी बता रहा है। बंगाल में 11.85% नाम हटे, ज्यादातर बांग्लादेश बॉर्डर के पास पश्चिम बंगाल में अक्टूबर 2025 में कुल वोटर 7.66 करोड़ थे। इनमें से अब तक 90.83 लाख नाम हटाए गए। लगभग 11.85% वोटर कम हो गए। यानी अब राज्य में 6.76 करोड़ वोटर हैं। चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए। बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में भी बड़े स्तर पर नाम हटे। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम हटे। वहीं, 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटे। 8 अप्रैल: TMC चुनाव आयोग से मिला, आरोप- भगा दिया गया 8 अप्रैल को सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के नेतृत्व में TMC का प्रतिनिधि मंडल ने दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलने पहुंचा था। लेकिन बैठक के बाद डेरेक ने कहा कि हमने SIR के मुद्दे पर समय मांगा था, लेकिन मीटिंग के दौरान हमारे साथ खराब व्यवहार किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने हमें सिर्फ 5 मिनट में भगा दिया। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, डेरेक ओ’ब्रायन ने CEC को बोलने से रोका और धमकी दी। वह कोई बात सुन ही नहीं रहे थे। —————————————————– ये खबर भी पढें… पश्चिम बंगाल में SIR ही सबसे बड़ा मुद्दा:नई वोटर लिस्ट से CM ममता की परेशानी बढ़ी, 50 सीटों पर TMC को ज्यादा चुनौती 8 अप्रैल की सुबह बूंदाबांदी के बीच करीब सुबह 10:25 बजे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी समर्थकों के हुजूम के साथ पैदल ही हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित अपने घर से नामांकन के लिए निकलीं। पूरी खबर पढे़ं…
विधानसभा चुनाव 2026: केरल-असम और पुडुचेरी में जोरदार वोट, मुख्य चुनाव आयुक्त बोले- दुनिया के लिए लोकतंत्र का उदाहरण

देश के दो राज्यों असम, केरलम और साथ में केंद्र प्रदेश पुडुचेरी में चल रहे विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर 9 अप्रैल 2026 यानी गुरुवार को चल रही क्रिसमस शाम 6 बजे तक है। अबाबोर पेटी में कई धुरंधरों की किस्मत कैद हो गई है। चुनाव आयोग ने नासिक और वीवीपेट सील करना शुरू कर दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक शाम 5 बजे तक असम में 84.42%, केरलम में 75.01% और पुडुचेरी में 86.92% वोटिंग हुई। पुड्डुचेरी में सीएम रंगास्वामी ने वोट डाला, केरल में रक्षा मंत्री ने एके एंटनी वोट डाला। इसके अलावा असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कामाख्या मंदिर में पूजा की, अपनी पत्नी के साथ जालुक बाबा में वोट डाला. अब सभी को 4 मई का इंतजार है, जब राज्यों के चुनाव नतीजे सामने आएंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि 2026 के चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि असम, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनाव न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लोकतंत्र के लिए एक ऐतिहासिक उदाहरण हैं। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की ओर से प्रदर्शित राज्यों के सभी जिलों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी और कहा कि यह लोकतांत्रिक भागीदारी एक शानदार है। सीईसी ने अपने संदेश में “चुनाव का पर्व, लोकतंत्र का गौरव” का उल्लेख करते हुए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी और लोकतंत्र के प्रति उनके प्रतीक चिन्ह का उल्लेख किया। असम की इन पर नजर अगर असम की बात करें तो यहां 3 बड़े दर्शन, जिनपर सभी के संबंध हैं। इनकी पहली तिमाही जलुक बबंरी विधानसभा है. यहां बीजेपी के उम्मीदवार और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा मैदान में हैं. उनके खिलाफ बिदिशा नियोग कांग्रेस से मैदान में उतरे हैं। यहां लगातार पांच बार से हिमंत चुनाव जीत रहे हैं। यह बीजेपी का गढ़ माना जाता है. दिसपुर बीजेपी के उम्मीदवार प्रद्युत बोर्डोलोइ इलिनोइस मैदान में हैं. यहां से कांग्रेस ने मीरा बोरठाठाकुर को टाउनशिप मैदान में उतारा है। यह कांग्रेस की पारंपरिक सीट चल रही है, लेकिन गुटसी उद्योग की कंपनी है। असम की तीसरी सीट जोरहाट पर भी सभी के परस्पर विरोधी हैं। यहां से हितेंद्र नाथ गोस्वामी बीजेपी से चुनावी लड़ाई लड़ रहे हैं. तो गौरव गोई कांग्रेस से इलिनोइस मैदान में हैं। गोगोई पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। केरल की इन प्रवेश द्वार पर नजर केरल की दो बड़ी परियोजनाएं हैं, जिनपर सभी के परस्पर विरोधी हैं। नेमोम सीट सेबीजा पार्टिसिपेंट्स राजीव गांधी सचिवालय मैदान में हैं। उनके खिलाफ वी. शिवनकुट्टी सी.पी.आई.एम. से चुनावी मैदान में हैं। धर्मदम सीट बीजेपी के सीके पद्मनाभन टाउनशिप मैदान में हैं। सी.पी.पी. उम्मीदवार पिनाराई विजयनगरम मैदान में हैं। पुड्डुचेरी में बीजेपी डबल एकजुटता गठबंधन सरकार? अगर पुड्डुचेरी की करें तो यहां 30 प्रमुख जगहें हैं। यहां 20 डेवलपर्स के 294 उम्मीदवार मैदान में हैं। सभी की किस्मत का स्टॉक और वीवीपेट में कैद हो गया है। पुद्दचेरी की राजनीति में हमेशा से गठबंधन कायम है। यहां कभी बीजेपी भारी रही तो कभी कांग्रेस ने अपना स्टार्टअप बनाया। यहां उद्योग संघ और पेट्रोकेमिकल इंजीनियर्स गबंधन की सरकार है। उनके पास कुल 16 सीटें हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस बार बीजेपी गठबंधन इस चुनाव में अपनी जीत को दोहराएगा। यह भी पढ़ें: त्रिशूर में वोट देने की कतार में 62 साल का वोट पाना, मतदान करना ही हुई मौत (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)केरल(टी)पुडुचेरी(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)केरल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026(टी)ताजा समाचार अपडेट(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)बड़ी खबर(टी)हिंदी समाचार(टी)चुनाव समाचार(टी)असम(टी)केरल(टी)पुडुचेरी(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)केरल विधानसभा चुनाव 2026(टी)पुडुचेरी विधानसभा चुनाव 2026(टी)ताजा समाचार अपडेट(टी)ब्रेकिंग न्यूज(टी)बड़ी खबर(टी)हिंदी समाचार(टी)चुनाव समाचार









