Tuesday, 11 Aug 2026 | 06:08 AM

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supreme court on NOTA in election voting leader quality

supreme court on NOTA in election voting leader quality

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को NOTA (इनमें से कोई नहीं) विकल्प की उपयोगिता और असर पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने मंगलवार को सरकार से पूछा कि इसका क्या फायदा है, क्या NOTA के आने से चुने गए नेताओं की क्वालिटी में सुधार हुआ है? कोर्ट ने कहा कि NOTA किसी भी सीट को भर नहीं सकता और इसीलिए इसका प्रभाव सीमित है। यदि किसी सीट पर सिर्फ एक ही उम्मीदवार होता है तो क्या इसके बाद भी इसकी जरूरत है? चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो 1951 के रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट के उस प्रावधान को चुनौती देती है जो निर्विरोध (एकल) प्रत्याशी वाले चुनावों में मतदाताओं को NOTA का विकल्प नहीं देता। याचिका में मांग की गई है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ही नहीं, बल्कि अगर चुनाव में सिर्फ एक ही उम्मीदवार खड़ा हो, तब भी NOTA का विकल्प दिया जाए। मामले में अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। जस्टिस बागची ने पूछा- NOTA से कितना असर होता है सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा- क्या इसके आने के बाद से अच्छे नेता चुनकर आए हैं? एक चिंता की बात यह है कि पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से मजबूत लोग अक्सर कम वोट डालते हैं। वहीं महिलाएं और कम पढ़े-लिखे लोग ज्यादा संख्या में मतदान करते हैं। ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि NOTA का असली असर कितना पड़ता है और क्या यह सच में चुनाव के नतीजों या नेताओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर पा रहा है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह याचिका केवल कल्पना और अंदाजों पर आधारित है, इसके पीछे ठोस वजह नहीं है। वोट डालना एक संवैधानिक अधिकार है और चुनाव से जुड़े नियम कानून के अनुसार तय होते हैं। NOTA के बारे में जानें… इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के जरिए मतदान के दौरान वोटर्स को NOTA का विकल्प मिलता है जो सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने की सुविधा देता है। साथ ही उनके वोट की गोपनीयता को बनाए रखता है। तकनीकी रूप से यह चुनाव परिणाम को प्रभावित नहीं करता है। मतलब यह हुआ कि यदि NOTA को किसी भी उम्मीदवार से ज्यादा वोट मिलते हैं तब भी सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीत जाता है। लेकिन यह नागरिकों को यह शक्ति देता है कि वे चुनावी प्रक्रिया से दूर रहे बिना अपने असंतोष को जाहिर कर सकें। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें… पश्चिम बंगाल SIR-ओडिशा-झारखंड के सिविल जज करेंगे वेरिफिकेशन में मदद, सुप्रीम कोर्ट बोला- इनका खर्च चुनाव आयोग उठाए सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में सामने आए 80 लाख क्लेम निपटाने के लिए 2 राज्यों से सिविल जजों को तैनात करने की परमिशन दे दी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि कलकत्ता हाईकोर्ट पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट SIR प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए झारखंड-ओडिशा के सिविल जजों की मदद ले सकता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

West Bengal Politics: Mamata vs Modi Election Race

West Bengal Politics: Mamata vs Modi Election Race

कोलकाता2 घंटे पहलेलेखक: प्रदीप पांडेय कॉपी लिंक SIR को लेकर घमासान के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमाहट बढ़ रही है। बंगाल की सियासी हवा में अभी ‘एम’ हावी है। एम यानी- महिला, मुस्लिम, मस्जिद, मंदिर, मटन, मछली, मनी पॉवर, मसल पॉवर…, ममता और मोदी। बंगाल की राजनीति यहां के दो सबसे बड़े फुटबॉल क्लबों- मोहन बागान या ईस्ट बंगाल की तरह दो ध्रुवों में बंटी है। पहले बंगाल की राजनीति कांग्रेस बनाम लेफ्ट थी, फिर 34 साल लेफ्ट का राज रहा। अब 15 साल से तृणमूल सत्ता में है और पिछले पांच साल से उसका सीधा मुकाबला भाजपा से है। टीएमसी के लिए आज भी ममता का फेस वाममोर्चा के 34 साल का ‘लाल किला’ भेदकर सीएम बनीं ममता बनर्जी डेढ़ दशक की सत्ता के बाद भी आक्रामक शैली में मोर्चे पर हैं। टीएमसी के लिए आज भी ममता का फेस, लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाएं और मुस्लिमों का एकजुट वोट, जीत का फॉर्मूला है। वहीं, भाजपा पीएम मोदी के चेहरे, अनुशासित संगठन और ‘डबल इंजन’ के नारे के साथ मैदान में है। हालांकि, सड़क पर मुकाबले के लिए उसे अभी भी ऐसे ‘मुद्दे, मौके और स्थानीय बड़े चेहरे’ की तलाश है, जो उसकी विधानसभा सीटें 77 से 148 तक पहुंचा सके। स्थानीय स्तर पर ममता के कद के नेता की कमी बड़ी चुनौती है। इस बीच, वाममोर्चा व कांग्रेस राज्य में अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष कर रहे हैं। जो सड़क जीते सरकार उसी की एक बंगाली दैनिक के सीनियर पत्रकार कहते हैं कि यहां जो सड़क जीत लेता है वह चुनाव जीत लेता है और फिलहाल सड़क पर ममता ही दिख रही हैं। दूसरी ओर, कोलकाता में रेस्टोरेंट चलाने वाले यूपी मूल के एक युवक ने कहा- पिछले पांच साल में भाजपा का वोटर बेस बढ़ा है, पर पार्टी को यह भरोसा दिलाना होगा कि सरकार बदल रही है। अगर ऐसा होता है तो सपोर्ट वोट में बदल पाएगा। टीएमसी; एसआईआर से संगठन एक्टिव… अब टिकट पर मंथन ममता की सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार, भर्ती घोटाले में मंत्रियों की गिरफ्तारी, 25 हजार से ज्यादा नियुक्तियां रद्द होना, आरजी कर जैसी घटना और डेढ़ दशक की सत्ता की एंटी इन्कंबेंसी है। हालांकि ममता के ईडी छापे के बीच घुसकर फाइल निकालने, एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने और सड़क पर मोर्चा संभालने से पार्टी का कैडर गांव-गांव तक एक्टिव हो गया। यही कारण है कि चुनाव से तीन महीने पहले पार्टी मैदान में दिख रही है। ममता के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी भाजपा के आरोपों को काउंटर करने के साथ ही संगठन का मैनेजमेंट संभाल रहे हैं। भाजपा; कई राज्यों के नेता मैदान में, अभी से डोर टू डोर भाजपा घुसपैठ, भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मुद्दे पर ममता की घेराबंदी बढ़ा रही है। नेता प्रतिपक्ष सुभेंदु अधिकारी सड़क पर मुखर हैं तो प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्‌टाचार्य संगठन की मजबूती के साथ बंगाली भद्रलोक को साध रहे हैं। पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के दौरों के साथ पार्टी इस बार बूथ लेवल पर फोकस कर रही है। हर सीट पर एक-एक सीनियर नेता को लगाया गया है। यूपी, बिहार, ओडिशा, उत्तराखंड सहित कई राज्यों के इन सीनियर नेताओं को डोर टू डोर दस्तक देकर हर बूथ को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ——————– ये खबर भी पढ़ें… प. बंगाल में SIR,हर सीट पर औसतन 19000 नाम हटे: TMC बोली- सवा करोड़ बंगाली लाइन में लगे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो-तीन माह ही बचे हैं। यहां अभी भाषण और रैलियों का शोर नहीं है। लेकिन, सियासत भरपूर गर्म है। कोलकाता के न्यू मार्केट से चांदनी चौक, न्यू टाउन से जेसप बिल्डिंग और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से बर्द्धमान तक करीब 600 किमी के सफर में साफ हो गया कि अभी वोटर लिस्ट ही चुनावी रणभूमि बनी हुई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

West Bengal Voter List Row

West Bengal Voter List Row

Hindi News National West Bengal Voter List Row | TMC Claims 1.25 Cr Bengalis In Line; BJP Alleges Mamata Fears Ghost Vot कोलकाता4 मिनट पहले कॉपी लिंक 2021 में पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 166 पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो-तीन माह ही बचे हैं। यहां अभी भाषण और रैलियों का शोर नहीं है। लेकिन, सियासत भरपूर गर्म है। कोलकाता के न्यू मार्केट से चांदनी चौक, न्यू टाउन से जेसप बिल्डिंग और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से बर्द्धमान तक करीब 600 किमी के सफर में साफ हो गया कि अभी वोटर लिस्ट ही चुनावी रणभूमि बनी हुई है। कोलकाता के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि ममता बनर्जी ने SIR की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट ले जाकर अपनी जुझारू छवि फिर हाईलाइट की है। टीएमसी उनके सुप्रीम कोर्ट के वीडियो वायरल कर रही है। जगह-जगह ममता की काले कोट में होर्डिंग लगे हैं। भाजपा SIR को घुसपैठियों के खिलाफ लड़ाई बता रही थी। पर, ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ यानी विसंगति के आधार पर जारी सवा करोड़ बंगाली लाइन में लग गए हैं। हर सीट पर औसतन 19 हजार से ज्यादा नाम हटे हैं। टीएमसी बोली- ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में खड़ा कर दिया टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं, भाजपा ने SIR से हमारी लड़ाई आसान कर दी। 15 साल की सत्ता की कुछ एंटी-इंकंबेंसी होगी, तो खत्म हो गई। एसआईआर भाजपा के लिए उल्टा तीर हो गया। वे फील्ड में नहीं जा पा रहे। ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में लगवा दिया। भाजपा का आरोप- ममता अपने ‘घोस्ट वोटर्स’ के नाम कटने से डर में हैं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष समिक भट्टाचार्य कहते हैं कि ममता ‘घोस्ट’ वोटर्स और घुसपैठियों के नाम कटने से डरी हैं। वह इनकी बदौलत जीतती थीं। मैं ऐसे लोगों को जानता हूं, जो कई साल पहले गुजर चुके, लेकिन उनके वोट पड़ते थे। सिर्फ वोटर लिस्ट की सफाई नहीं हो रही, यह ममता के विसर्जन का रास्ता बन रहा है। एनालिस्ट ने बताया नाम कटने से जीत-हार का गणित एक पार्टी के लिए काम कर रहे डेटा एनालिस्ट बताते हैं कि 2021 में पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 166 पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था। इनमें टीएमसी 102 और भाजपा 64 सीट जीती थी। एसआईआर के तहत ड्राफ्ट सूची से प्रति सीट औसतन 19,795 नाम हटे हैं। जहां जीत का अंतर कम था, वहां मतदाता सूची में बदलाव का असर ज्यादा दिख सकता है। वे यह भी कहते हैं कि टीएमसी 68 सीटें 25,001 से 50,000 के अंतर से जीती थी, जबकि भाजपा को ऐसी 12 ही सीटें मिली थीं। 50 हजार से ज्यादा अंतर से टीएमसी 43 और भाजपा सिर्फ एक सीट जीती थी। यानी जहां मुकाबला करीबी था, वहां अंतिम सूची की बारीकी राजनीतिक रूप से ज्यादा मायने रखेगी। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के तहत ज्यादातर नोटिस SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58 लाख 20 हजार 898 नाम हटे हैं। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ तथा ‘अनमैप्ड’ श्रेणियों को मिलाकर करीब 1.26 करोड़ नोटिस जारी हुए हैं। निर्वाचन आयोग के दफ्तरों में दस्तावेज अपलोड करने और जांच की आपाधापी है। कोलकाता नॉर्थ के जिला निर्वाचन ऑफिस जेसप बिल्डिंग में 14 फरवरी को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ की सुनवाई में मूल रूप से बिहार के रहने वाले एक बुजुर्ग पत्नी और बेटे के साथ आए। वे लंबे समय से कोलकाता में हैं, पहले वोट दे चुके हैं, लेकिन इस बार नोटिस मिला। कोलकाता की बबीता ने बताया कि वोटर लिस्ट में उनके पिता के नाम में ‘कुमार’ है, लेकिन 2002 की लिस्ट में ‘KR’ लिखा है। इसलिए मेरा नाम लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में आ गया। एक अन्य महिला के पति का नाम ‘Ashok’ लिखा है लेकिन लिस्ट में नाम ‘Asoke’ है। इसलिए सुनवाई में आना पड़ा। देवी की स्पेलिंग ‘Devi’ या ‘Debi’ होना, गांगुली और गंगोपाध्याय, चटर्जी और चट्टोपाध्याय को लेकर बड़ी संख्या में नोटिस मिले हैं। वोटर लिस्ट से नाम हटने पर क्या करें? चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम जरूर जांच लें। मतदाता eci.gov.in पर जाकर अपना नाम और EPIC नंबर देखकर पुष्टि कर सकते हैं। अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं। पूरी प्रक्रिया 6 आसान सवाल-जवाब में पढ़ें… सवालः फॉर्म-6 कहां से मिलेगा? जवाबः फॉर्म-6 आप अपने नजदीकी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से ले सकते हैं। यह चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इसके अलावा तहसील, SDM कार्यालय या इलेक्शन ऑफिस से भी फॉर्म-6 मिल जाता है। सवालः फॉर्म-6 कैसे भरें? जवाबः फॉर्म-6 भरते समय अपना पूरा नाम, सही पता, उम्र और मोबाइल नंबर ध्यान से लिखें। अगर पहले कहीं आपका नाम वोटर लिस्ट में था और उसकी जानकारी याद हो तो वह भी दर्ज करें। फॉर्म पूरा भरने के बाद अंत में अपना हस्ताक्षर करना न भूलें। सवालः कौन-से दस्तावेज लगेंगे? जवाबः फॉर्म के साथ पहचान के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट की कॉपी लगानी होगी। पते के प्रमाण के रूप में राशन कार्ड, बिजली का बिल या बैंक पासबुक की कॉपी दी जा सकती है। उम्र के प्रमाण के लिए जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट की कॉपी लगानी होगी। सवालः फॉर्म जमा कहां करें? जवाबः फॉर्म आप अपने इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को दे सकते हैं। चाहें तो इसे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी इलेक्शन ऑफिस में जाकर भी फॉर्म जमा किया जा सकता है। सवालः जांच और सुनवाई कैसे होगी? जवाबः फॉर्म जमा होने के बाद बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) आपके बताए पते पर आकर जांच करेगा। अगर किसी जानकारी को लेकर जरूरत पड़ी, तो आपको सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है। सवालः नाम कब तक जुड़ेगा? जवाबः जांच पूरी होने के बाद अगर सब जानकारी सही पाई जाती है, तो आपका नाम अंतिम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। ……………………………….. SIR से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु में SIR से 97 लाख वोटर के नाम कटे: गुजरात में 73 लाख नाम हटाए; राजस्थान-बंगाल में 1 करोड़ से ज्यादा

West Bengal Voter List Controversy; BJP TMC Mamata Banerjee

West Bengal Voter List Controversy; BJP TMC Mamata Banerjee

Hindi News National West Bengal Voter List Controversy; BJP TMC Mamata Banerjee | Election 2026 कोलकाता17 घंटे पहले कॉपी लिंक 2021 में पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 166 पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो-तीन माह ही बचे हैं। यहां अभी भाषण और रैलियों का शोर नहीं है। लेकिन, सियासत भरपूर गर्म है। कोलकाता के न्यू मार्केट से चांदनी चौक, न्यू टाउन से जेसप बिल्डिंग और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से बर्द्धमान तक करीब 600 किमी के सफर में साफ हो गया कि अभी वोटर लिस्ट ही चुनावी रणभूमि बनी हुई है। कोलकाता के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि ममता बनर्जी ने SIR की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट ले जाकर अपनी जुझारू छवि फिर हाईलाइट की है। टीएमसी उनके सुप्रीम कोर्ट के वीडियो वायरल कर रही है। जगह-जगह ममता की काले कोट में होर्डिंग लगे हैं। भाजपा SIR को घुसपैठियों के खिलाफ लड़ाई बता रही थी। पर, ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ यानी विसंगति के आधार पर जारी सवा करोड़ बंगाली लाइन में लग गए हैं। हर सीट पर औसतन 19 हजार से ज्यादा नाम हटे हैं। टीएमसी बोली- ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में खड़ा कर दिया टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं, भाजपा ने SIR से हमारी लड़ाई आसान कर दी। 15 साल की सत्ता की कुछ एंटी-इंकंबेंसी होगी, तो खत्म हो गई। एसआईआर भाजपा के लिए उल्टा तीर हो गया। वे फील्ड में नहीं जा पा रहे। ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में लगवा दिया। भाजपा का आरोप- ममता अपने ‘घोस्ट वोटर्स’ के नाम कटने से डर में हैं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष समिक भट्टाचार्य कहते हैं कि ममता ‘घोस्ट’ वोटर्स और घुसपैठियों के नाम कटने से डरी हैं। वह इनकी बदौलत जीतती थीं। मैं ऐसे लोगों को जानता हूं, जो कई साल पहले गुजर चुके, लेकिन उनके वोट पड़ते थे। सिर्फ वोटर लिस्ट की सफाई नहीं हो रही, यह ममता के विसर्जन का रास्ता बन रहा है। एनालिस्ट ने बताया नाम कटने से जीत-हार का गणित एक पार्टी के लिए काम कर रहे डेटा एनालिस्ट बताते हैं कि 2021 में पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 166 पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था। इनमें टीएमसी 102 और भाजपा 64 सीट जीती थी। एसआईआर के तहत ड्राफ्ट सूची से प्रति सीट औसतन 19,795 नाम हटे हैं। जहां जीत का अंतर कम था, वहां मतदाता सूची में बदलाव का असर ज्यादा दिख सकता है। वे यह भी कहते हैं कि टीएमसी 68 सीटें 25,001 से 50,000 के अंतर से जीती थी, जबकि भाजपा को ऐसी 12 ही सीटें मिली थीं। 50 हजार से ज्यादा अंतर से टीएमसी 43 और भाजपा सिर्फ एक सीट जीती थी। यानी जहां मुकाबला करीबी था, वहां अंतिम सूची की बारीकी राजनीतिक रूप से ज्यादा मायने रखेगी। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के तहत ज्यादातर नोटिस SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58 लाख 20 हजार 898 नाम हटे हैं। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ तथा ‘अनमैप्ड’ श्रेणियों को मिलाकर करीब 1.26 करोड़ नोटिस जारी हुए हैं। निर्वाचन आयोग के दफ्तरों में दस्तावेज अपलोड करने और जांच की आपाधापी है। कोलकाता नॉर्थ के जिला निर्वाचन ऑफिस जेसप बिल्डिंग में 14 फरवरी को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ की सुनवाई में मूल रूप से बिहार के रहने वाले एक बुजुर्ग पत्नी और बेटे के साथ आए। वे लंबे समय से कोलकाता में हैं, पहले वोट दे चुके हैं, लेकिन इस बार नोटिस मिला। कोलकाता की बबीता ने बताया कि वोटर लिस्ट में उनके पिता के नाम में ‘कुमार’ है, लेकिन 2002 की लिस्ट में ‘KR’ लिखा है। इसलिए मेरा नाम लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में आ गया। एक अन्य महिला के पति का नाम ‘Ashok’ लिखा है लेकिन लिस्ट में नाम ‘Asoke’ है। इसलिए सुनवाई में आना पड़ा। देवी की स्पेलिंग ‘Devi’ या ‘Debi’ होना, गांगुली और गंगोपाध्याय, चटर्जी और चट्टोपाध्याय को लेकर बड़ी संख्या में नोटिस मिले हैं। वोटर लिस्ट से नाम हटने पर क्या करें? चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम जरूर जांच लें। मतदाता eci.gov.in पर जाकर अपना नाम और EPIC नंबर देखकर पुष्टि कर सकते हैं। अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं। पूरी प्रक्रिया 6 आसान सवाल-जवाब में पढ़ें… सवालः फॉर्म-6 कहां से मिलेगा? जवाबः फॉर्म-6 आप अपने नजदीकी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से ले सकते हैं। यह चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इसके अलावा तहसील, SDM कार्यालय या इलेक्शन ऑफिस से भी फॉर्म-6 मिल जाता है। सवालः फॉर्म-6 कैसे भरें? जवाबः फॉर्म-6 भरते समय अपना पूरा नाम, सही पता, उम्र और मोबाइल नंबर ध्यान से लिखें। अगर पहले कहीं आपका नाम वोटर लिस्ट में था और उसकी जानकारी याद हो तो वह भी दर्ज करें। फॉर्म पूरा भरने के बाद अंत में अपना हस्ताक्षर करना न भूलें। सवालः कौन-से दस्तावेज लगेंगे? जवाबः फॉर्म के साथ पहचान के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट की कॉपी लगानी होगी। पते के प्रमाण के रूप में राशन कार्ड, बिजली का बिल या बैंक पासबुक की कॉपी दी जा सकती है। उम्र के प्रमाण के लिए जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट की कॉपी लगानी होगी। सवालः फॉर्म जमा कहां करें? जवाबः फॉर्म आप अपने इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को दे सकते हैं। चाहें तो इसे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी इलेक्शन ऑफिस में जाकर भी फॉर्म जमा किया जा सकता है। सवालः जांच और सुनवाई कैसे होगी? जवाबः फॉर्म जमा होने के बाद बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) आपके बताए पते पर आकर जांच करेगा। अगर किसी जानकारी को लेकर जरूरत पड़ी, तो आपको सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है। सवालः नाम कब तक जुड़ेगा? जवाबः जांच पूरी होने के बाद अगर सब जानकारी सही पाई जाती है, तो आपका नाम अंतिम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। ……………………………….. 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Priyanka Gandhi Vs Himanta Sarma; Assam Election Politics

Priyanka Gandhi Vs Himanta Sarma; Assam Election Politics

Hindi News National Priyanka Gandhi Vs Himanta Sarma; Assam Election Politics | Gaurav Gogoi गुवाहाटी16 घंटे पहले कॉपी लिंक कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी दो दिन के असम दौरे पर हैं। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने शुक्रवार को कहा कि गौरव गोगोई और उनके परिवार को ‘पाकिस्तान लिंक’ के आरोपों में घसीटना गलत राजनीति है। प्रियंका ने कहा कि असम के सीएम चुनाव से पहले डर गए हैं, इसलिए इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। उन्हें निजी आरोपों की बजाय राज्य के विकास पर बात करनी चाहिए। प्रियंका बोली- गौरव जी और उनके परिवार को जिस तरह निशाना बनाया जा रहा है, उससे साफ है कि यह गलत राजनीति है। असम की जनता जानती है कि दूसरी तरफ के लोग उनसे घबराए हुए हैं। वह सही रास्ते पर चल रहे हैं। यह उनके लिए सम्मान की बात है। प्रियंका गांधी का आज असम दौरे का दूसरा दिन है। सुबह वह गुवाहाटी के पास सोनापुर पहुंचीं। गायक जुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत की। प्रियंका की बातों के तीन बड़े पॉइंट्स… मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि उन्होंने असम के विकास के लिए क्या किया है। असम की युवा पीढ़ी को नौकरी और रोजगार की जरूरत है। जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां चुनाव से पहले महिलाओं को पैसा दिया जाता है, लेकिन क्या उन्हें पांच साल सुरक्षा मिली? कितनी महिलाओं को रोजगार मिला और कितनों को आत्मनिर्भर बनाया गया? राज्य की संपत्ति जनता के हाथ से निकलकर ‘एक परिवार’ के पास जा रही है और योजनाओं का इस्तेमाल सिर्फ चुनावी फायदा लेने के लिए किया जा रहा है। हिमंता के CM नहीं बनाने पर भी तंज प्रियंका गांधी ने हिमंता के उस बयान का भी जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस ने उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के लिए कई कारक तय करते हैं। अगर वे दस साल बाद भी मुख्यमंत्री नहीं बनने देने कि बात पर रो रहे हैं, तो मुझे और कुछ कहने की जरूरत नहीं है। असम सरकार के खिलाफ 20 पॉइंट्स की चार्जशीट जारी प्रियंका गांधी ने असम विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार के खिलाफ 20 पॉइंट्स की चार्जशीट जारी की। यह चार्जशीट असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से तैयार की गई है। कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि प्रियंका गांधी असम की जनता की भावनाएं समझने आई हैं और कांग्रेस पार्टी आगामी चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। असम की राजनीति में हाल के तीन बड़े घटनाक्रम… 18 फरवरी: गौरव गोगोई बोले- CM हिमंता असम के जिन्ना, नेताओं को ‘हिंदू सर्टिफिकेट’ देना बंद करें असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- हिमंता ने बोरा को कांग्रेस का आखिरी हिंदू नेता बताया है। हिमंता ‘असम के जिन्ना’ हैं, उन्हें नेताओं को ‘हिंदू सर्टिफिकेट’ देना बंद करना चाहिए। गोगोई ने ये भी कहा- भाजपा में शामिल होने वाले नेता अपनी पार्टी के लिए गैरजरूरी हो जाते हैं। ऐसा ही हाल असम कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा का होगा। पूरी खबर पढ़ें… 17 फरवरी: असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने पार्टी छोड़ी, भाजपा जॉइन करेंगे असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा के भाजपा जॉइन करने की अटकलों पर मुहर लगी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बोरा के घर जाकर उनसे मुलाकात की। इसके बाद CM ने बोरा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया कि वे 22 फरवरी को पार्टी की सदस्यता लेंगे। बोरा ने एक दिन पहले कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। उन्होंने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के को अपना इस्तीफा पत्र सौंपा। पूरी खबर पढ़ें… 16 फरवरी: हिमंता बोले- कांग्रेस सांसद ने पाकिस्तान की यात्रा की, उनकी पत्नी ने भारत की जानकारी शेयर की असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से जुड़े कथित पाकिस्तान लिंक के मामले की जांच अब केंद्र सरकार करेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले से जुड़े सभी सबूत केंद्र को सौंप दिए हैं और अब केंद्रीय एजेंसी इसकी जांच करेगी। मुख्यमंत्री सरमा ने आरोप लगाया कि गौरव गोगोई और उनकी पत्नी का पाकिस्तान से जुड़े कुछ लोगों से संबंध रहा है और यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। पूरी खबर पढ़ें… —— ये खबर भी पढ़ें… असम विधानसभा चुनाव सिंगल फेज में हो सकता है:अप्रैल के पहले हफ्ते में वोटिंग संभव; BJP-कांग्रेस की EC से अपील- तारीख बिहू के आसपास हो असम विधानसभा के चुनाव अप्रैल के पहले हफ्ते में हो सकते हैं। चुनाव आयोग इसका ऐलान अगले महीने 4 से 8 मार्च के बीच कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सभी 126 सीटों के लिए एक या अधिकतम दो फेज में वोटिंग होने की संभावना है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bangladesh Election Manipulation Allegations | PM Tarique Rahman engineer

Bangladesh Election Manipulation Allegations | PM Tarique Rahman engineer

ढाका3 दिन पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि तारिक रहमान चुनाव नतीजों में हेरफेर करने वाले इंजीनियर हैं। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव में ‘इंजीनियरिंग’ यानी हेरफेर की गई और इसी वजह से BNP को 200 से ज्यादा सीटें मिलीं। बांग्लादेश में करीब 20 साल बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने आम चुनाव में बड़ी जीत हासिल की। जमात ए इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन और उसकी सहयोगी पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने आरोप लगाया है कि कई सीटों पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई। तारिक रहमान 12वीं पास हैं NCP नेता नसीरुद्दीन पटवारी ने सबसे पहले फेसबुक पर तारिक रहमान को ‘इंजीनियर’ कहा। उनका पोस्ट लाखों लोगों तक पहुंचा और इसके बाद सोशल मीडिया पर मीम्स और मजाक की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने एआई से बनी तस्वीरें शेयर कीं, जिनमें तारिक रहमान को इंजीनियर की हेलमेट पहने दिखाया गया। कुछ लोगों ने तंज कसते हुए लिखा कि ‘लंदन से इंजीनियर पास’, क्योंकि तारिक रहमान 17 साल तक लंदन में निर्वासन में रहे थे। एक अन्य पोस्ट में लिखा गया कि ‘बिना पढ़ाई के इंजीनियर बन गए।’ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अपने हलफनामे में तारिक रहमान ने अपनी शैक्षणिक योग्यता ‘हायर सेकेंडरी’ यानी 12वीं तक बताई है। तारिक रहमान ने 17 फरवरी को पीएम पद की शपथ ली। बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बना।ंं चुनाव आयोग के पास शिकायत दर्ज की गई NCP नेता आसिफ महमूद ने दावा किया कि उनके पास नतीजों से छेड़छाड़ के सबूत हैं। उनका कहना था कि कुछ जगहों पर वोटों की गिनती पूरी होने से पहले ही विजेता घोषित कर दिए गए और आंकड़ों में बदलाव किया गया। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने भी कहा कि वोटिंग तो ठीक हुई, लेकिन गिनती के दौरान गड़बड़ी हुई। उन्होंने 32 सीटों को लेकर चुनाव आयोग में औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है। 14 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब तारिक रहमान से पूछा गया कि क्या उन्होंने चुनाव जीतने के लिए ‘इंजीनियरिंग’ की, तो उन्होंने शांत लहजे में जवाब दिया कि उनकी ‘इंजीनियरिंग’ सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने लोगों को अपने पक्ष में वोट देने के लिए मनाया। पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे हैं तारिक रहमान तारिक रहमान पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। उन्होंने 1988 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) जॉइन की। 2001 के चुनाव में संगठनात्मक काम से उन्हें पहचान मिली, लेकिन 2006 के बाद उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और 2007 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2008 में इलाज के लिए वे लंदन चले गए और करीब 17 साल तक देश से बाहर रहे। इस दौरान वे पार्टी के सीनियर उपाध्यक्ष और बाद में कार्यकारी अध्यक्ष बने। उन पर कई मामले दर्ज हुए, लेकिन बाद में अदालतों ने उन्हें बरी कर दिया। पिछले साल वे बांग्लादेश लौटे और मां के निधन के बाद पार्टी की कमान संभाली। हालिया चुनाव में BNP की जीत के बाद तारिक रहमान देश के प्रधानमंत्री बने। BNP+गठबंधन ने 212 सीटें हासिल कीं बांग्लादेश में पिछले गुरुवार को हुए आम चुनाव में BNP ने बड़ी जीत दर्ज की। प्रथोम ओलो के मुताबिक BNP+गठबंधन ने 299 सीटों में से 212 सीटें हासिल की। जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को 77 सीटें मिलीं। देश में करीब 20 साल बाद BNP की सरकार बनी। 2008 से 2024 तक वहां शेख हसीना की आवामी लीग सत्ता में थी। तारिक ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत हासिल की है। तारिक रहमान की जीत पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें बधाई दी थी। उन्होंने कहा, ‘मेरे भाई तारिक, उनकी टीम और बाकी सभी को बधाई। बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बना। 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 से 2024 तक देश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा। ये दोनों ही प्रधानमंत्री बनती रहीं। ——————- यह खबर भी पढ़ें… तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने:मंत्रिमंडल में 1 हिंदू-1 बौद्ध समेत 49 मंत्री; पीएम मोदी ने भारत आने का न्योता दिया बांग्लादेश में BNP अध्यक्ष तारिक रहमान नए प्रधानमंत्री बन गए हैं। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने संसद भवन में तारिक को पीएम पद की शपथ दिलाई। तारिक रहमान पहली बार प्रधानमंत्री बने हैं। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बेटे हैं। 17 साल तक लंदन में रहने के बाद वह दो महीने पहले ही बांग्लादेश लौटे थे। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

‘द्रमुक अपनी सरकार बनाएगी’: 2026 के चुनावों से पहले कांग्रेस के साथ सीट साझा करने की चर्चा के बीच स्टालिन | राजनीति समाचार

India Vs West Indies Live Cricket Score, T20 World Cup 2026: Stay updated with IND vs WI Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Kolkata. (Picture Credit: AP)

आखरी अपडेट:11 फरवरी, 2026, 13:29 IST स्टालिन ने एनडीए पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि एनडीए “डबल इंजन” नहीं बल्कि “डब्बा इंजन” या एक खाली जहाज है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (फोटो: पीटीआई/फाइल) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विश्वास जताया कि 2026 के विधानसभा चुनाव में डीएमके अपने दम पर सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि सहयोगियों के बीच दरार की चर्चा के बीच पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ेगी। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कांग्रेस में चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर चर्चा अभी शुरू नहीं हुई है। एक समाचार चैनल के कार्यक्रम में बोलते हुए, स्टालिन, जो लगातार दूसरे कार्यकाल की मांग कर रहे हैं, ने डीएमके के सामने चुनौतियों, एनडीए फैक्टर और राहुल गांधी के साथ अपने समीकरण के बारे में बात की। स्टालिन ने कांग्रेस के बारे में क्या कहा? कांग्रेस के साथ तनाव की अफवाहों को खारिज करते हुए स्टालिन ने कहा कि राहुल गांधी के साथ उनका ‘भाईचारा जैसा लगाव’ है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि गठबंधन के सत्ता में लौटने पर द्रमुक कांग्रेस के साथ सत्ता साझा करेगी या नहीं। स्टालिन ने कहा, “द्रमुक अपनी सरकार बनाएगी।” उन्होंने कहा कि पार्टी 2021 की तुलना में “और भी अधिक बढ़त” बनाने के लिए आश्वस्त है। उन्होंने कहा, “तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन मजबूत है। साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। अब सरकार में सत्ता साझा करने का सवाल ही नहीं उठता।” तमिलनाडु चुनाव 2021 के विधानसभा चुनाव में डीएमके ने 234 में से 133 सीटें जीतीं और अपने दम पर सरकार बनाई। सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस ने 25 में से 18 सीटें जीतीं लेकिन उसे कोई मंत्री पद नहीं दिया गया। इस बार दोनों पार्टियों के बीच तल्खी सामने आ गई है. कांग्रेस ने डीएमके पर राज्य में उसे दरकिनार करने का आरोप लगाया है और सीटों में बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही है। इसने गठबंधन के दोबारा जीतने पर सत्ता साझेदारी का मुद्दा भी उठाया है। पिछले महीने राहुल गांधी ने डीएमके सांसद कनिमोझी से मुलाकात की थी. चर्चाओं में कथित तौर पर कैबिनेट पद, सीटों का बड़ा हिस्सा और राज्यसभा बर्थ शामिल थे। डीएमके ने घोषणा की है कि सीटों के बंटवारे पर औपचारिक बातचीत 22 फरवरी से शुरू होगी. स्टालिन ने एनडीए पर हमला किया, इसे ‘डब्बा इंजन’ बताया स्टालिन ने एनडीए पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि एनडीए “डबल इंजन” नहीं बल्कि “डब्बा इंजन” या एक खाली जहाज है। चुनाव को आर्यन-द्रविड़ लड़ाई का एक और चरण बताते हुए स्टालिन ने एनडीए पर चुनाव से पहले “झूठ, नफरत और सांप्रदायिक तनाव” फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “तथाकथित डबल इंजन एक खाली जहाज है। यह डबल इंजन नहीं है, बल्कि डब्बा इंजन है।” स्टालिन ने एनडीए पर लोगों को बांटने का आरोप लगाया स्टालिन ने आरोप लगाया कि एनडीए राज्य में अल्पसंख्यकों के बीच विभाजन को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोग एनडीए को उसके कार्यों के लिए “बड़ी निराशा” देंगे और ऐसी विभाजनकारी राजनीति के लिए राज्य में कोई जगह नहीं है। यह टिप्पणी तब आई है जब भाजपा तमिलनाडु में अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है। पार्टी एडप्पादी के पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके और टीटीवी दिनाकरन की एएमएमके को एनडीए में ले आई है। पीएमके भी गठबंधन का हिस्सा है. पहले प्रकाशित: 11 फरवरी, 2026, 13:29 IST समाचार राजनीति ‘द्रमुक अपनी सरकार बनाएगी’: 2026 के चुनावों से पहले कांग्रेस के साथ सीट साझा करने की चर्चा के बीच स्टालिन अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)स्टालिन(टी)डीएमके(टी)डीएमके कांग्रेस गठबंधन(टी)तमिलनाडु में डीएमके कांग्रेस(टी)तमिलनाडु चुनाव(टी)चुनाव(टी)एनडीए(टी)बीजेपी(टी)एमके स्टालिन