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IPL 2026 Schedule Change | T20 World Cup Impact; Election Impact

IPL 2026 Schedule Change | T20 World Cup Impact; Election Impact

स्पोर्ट्स डेस्क40 मिनट पहले कॉपी लिंक IPL 2025 का सीजन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने जीता था। IPL 2026 की शुरुआत 28 मार्च को होगी। इसकी घोषणा रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने वाले भारत-न्यूजीलैंड टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल से पहले ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स ने की। पहले टूर्नामेंट 26 मार्च से शुरू होना था, लेकिन तमिलनाडु, केरल, असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में होने वाले चुनावों के कारण शेड्यूल में बदलाव किया गया है। हालांकि IPL की ओर से अभी तक टूर्नामेंट का पूरा कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है। चेपॉक, ईडन गार्डन्स में होते हैं मैच विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में तीन ऐसे प्रमुख स्टेडियम हैं जो IPL वेन्यू के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं। तमिलनाडु के चेन्नई स्थित एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) चेन्नई सुपर किंग्स का होम ग्राउंड है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में स्थित ईडन गार्डन्स कोलकाता नाइट राइडर्स का घरेलू मैदान है, जबकि असम के गुवाहाटी में बना बारसापारा क्रिकेट स्टेडियम राजस्थान रॉयल्स का सेकेंड होम वेन्यू रहा है। चुनाव के कारण दो चरणों में आ सकता है शेड्यूल 2008 में IPL शुरू होने के बाद जब भी देश में आम चुनाव (2009, 2014, 2019 और 2024) या किसी राज्य में विधानसभा चुनाव हुए हैं, टूर्नामेंट का शेड्यूल दो हिस्सों में जारी किया गया है। ऐसे में संभावना है कि इस बार भी BCCI ऐसा ही करेगा। बेंगलुरु में होगा ओपनिंग और फाइनल मैच कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन (KCA) के सेक्रेटरी संतोष मेनन ने कन्फर्म किया कि बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में ही ओपनिंग और फाइनल मैच खेले जाएंगे। होम टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) इस बार अपने 5 होम मैच चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेलेगी। RCB के बाकी दो होम मैच छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होंगे। पिछले सीजन की चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने 2025 के फाइनल में अहमदाबाद में पंजाब किंग्स को 6 रन से हराया था। IPL में परंपरा रही है कि टूर्नामेंट का ओपनिंग मैच, क्वालिफायर-2 और फाइनल मुकाबला डिफेंडिंग चैंपियन टीम के होमग्राउंड पर रखा जाए। पिछले साल का ओपनिंग मैच 2024 की चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स के होमग्राउंड पर हुआ था। इसी तरह इस बार के मैच चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले जाएंगे। RCB के IPL विक्ट्री सेलिब्रेशन में 11 फैंस की मौत हो गई थी। ऑक्शन में 26 मार्च बताया गया था BCCI ने पिछले साल दिसंबर में अबू धाबी में हुई IPL नीलामी के दौरान फ्रेंचाइजियों को बताया था कि सीजन 26 मार्च से 31 मई तक चलेगा। उस समय 26 मार्च से शुरुआत तय मानी जा रही थी। हालांकि, अगर ओपनिंग डेट आगे बढ़ती है तो फाइनल की तारीख नहीं बदलेगी। क्योंकि 31 मई को रविवार है और अक्सर बड़े स्पोर्ट्स टूर्नामेंट में खिताबी मुकाबले रविवार को ही होते हैं। IPL 2026 का ऑक्शन अबू धाबी में हुआ था। ——————————– IPL 2026 से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… रियान पराग राजस्थान रॉयल्स के नए कप्तान होंगे IPL 2026 से पहले राजस्थान रॉयल्स (RR) की टीम ने ऑलराउंडर रियान पराग को टीम का अगला कप्तान नियुक्त किया है। यह फैसला संजू सैमसन के चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) में चले जाने के बाद लिया गया है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Nepal Election 2026 Analysis; Next Prime Minister Name

Nepal Election 2026 Analysis; Next Prime Minister Name

‘गफ धेरै भयो, अब काम चाहिन्छ, नेपालको मुहार फेर्ने, बालेन चाहिन्छ। पुरानोलाई बिदाइ, नयांलाई अवसर, सबैको एउटै नारा- ‘अबकी बार, बालेन सरकार’। . एक महीने पहले तक ये एक गाना था। अब नेपाल की हकीकत है। नेपाल में बालेन सरकार आनी तय है। बालेन शाह राजनीति में आने से पहले रैपर रहे हैं। नेपाल चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ कि किसी नेता के लिए पॉप कल्चर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। 165 सीटों पर हुए चुनाव में बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी 7 मार्च की रात 8 बजे तक 64 सीटें जीत चुकी है और 58 पर आगे है। यानी पार्टी को कुल 122 सीटों पर बढ़त मिली है। नेपाल में सरकार बनाने के लिए 138 सीटों की जरूरत है। इसे ऊपर दिए गीत के हिंदी में मतलब से समझिए- ‘बातें बहुत हो गईं, अब काम चाहिए, नेपाल की सूरत बदलने के लिए बालेन चाहिए।’ ‘पुरानों को विदाई और नए को अवसर, सबका एक ही नारा है- अबकी बार, बालेन सरकार।’ बालेन शाह छापा-5 सीट से 49,614 वोट से जीत गए हैं। उनकी पार्टी जीत रही है, लेकिन ये भारत के लिए बुरी खबर हो सकती है। छोटे से पॉलिटिकल करियर में बालेन शाह भारत के खिलाफ खुलकर बयानबाजी करते रहे हैं। नेपाल सरकार और कोर्ट को भारत का गुलाम बता चुके हैं। बालेन ने नवंबर 2025 में सोशल मीडिया पर भारत, चीन और अमेरिका के लिए गाली लिख दी थी। बालेन शाह के सत्ता में आने पर क्या नेपाल-भारत के रिश्ते बिगड़ेंगे, नेपाल के लोग भारत के साथ कैसे रिश्ते चाहते हैं? इस पर हमने काठमांडू में आम लोगों, Gen Z लीडर्स, बालेन की पार्टी के नेताओं और एक्सपर्ट से बात की। राजनीति में आते ही बालेन का भारत विरोध शुरू नेपाल में 5 मार्च को वोटिंग हुई थी। चुनाव के अभी सिर्फ रुझान आए हैं, पूरे नतीजे 20 मार्च तक आएंगे। शुरुआती रुझानों में बालेन शाह की पार्टी एकतरफा जीत रही है। मई, 2022 में बालेन शाह काठमांडू के मेयर बने थे। इसके बाद से ही भारत विरोधी रुख के लिए चर्चा में रहे हैं। उन्होंने अपनी छवि राष्ट्रवादी नेता के तौर पर बनाई है। 2022 में मेयर रहते हुए फिल्म ‘आदिपुरुष’ से नाराज होकर काठमांडू में भारतीय फिल्में बैन कर दी थीं। उनका आरोप था कि आदिपुरुष में सीता को भारत की बेटी बताया गया है, जो नेपाल का अपमान है। हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद बैन हट गया। बालेन शाह का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया पर नेपाल सरकार और कोर्ट का भारत का गुलाम बता दिया। भारत के साथ चीन के भी विरोधी 2023 में भारतीय संसद में अखंड भारत का नक्शा दिखाए जाने के जवाब में बालेन शाह ने अपने ऑफिस में ग्रेटर नेपाल का मैप लगा लिया। इसमें भारत की कई जगहों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। काठमांडू का मेयर रहते हुए बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था। इसमें हिमाचल के पश्चिमी कांगड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल में पूर्वी तीस्ता के एरिया को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया है। सबसे ज्यादा विवाद नवंबर 2025 में फेसबुक पर की उनकी पोस्ट के बाद हुआ। बालेन शाह ने भारत, चीन समेत कुछ और देशों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए पोस्ट किया। बाद में इसे डिलीट भी कर दिया। हालांकि, तब तक ये पोस्ट वायरल हो चुकी थी। लोग बोले- राजनीति के लिए भारत से दोस्ती न टूटे बालेन शाह का रुख भले ही भारत विरोधी रहा हो, लेकिन नेपाल के लोग भारत से अच्छे रिश्ते चाहते है। काठमांडू यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले 23 साल के समीर मानते हैं कि भारत, नेपाल और चीन को मिलकर रहना चाहिए। बालेन शाह के भारत और चीन विरोधी बयानों को समीर राजनीति बताते हैं। वे कहते हैं, ‘नेपाल के लोगों में भारत के खिलाफ कोई भावना नहीं है। हम भारत से प्यार करते हैं। हमारा रोटी-बेटी का रिश्ता है। कई बार नेता अपने फायदे और वोट के लिए अलग-अलग बातें करते हैं।’ ‘भारत भी बालेन शाह पर भरोसा दिखाए’ 55 साल के कृष्णा विश्वकर्मा नई सरकार से भारत के साथ दोस्ताना बर्ताव की उम्मीद जताते हैं। वे कहते हैं कि हमारे बीच भाईचारा होना चाहिए। चीन पड़ोसी देश है, इसलिए उसे भी साथ लेकर चलना चाहिए। कृष्णा मानते हैं कि भारत और नेपाल के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई रिश्ते बहुत गहरे हैं। वे कहते हैं कि अभी लोगों में बालेन शाह के नेतृत्व को लेकर उम्मीद और भरोसा दिख रहा है। 40 साल के मिलन मानते हैं कि नेपाल को भारत और चीन का छोड़कर अपने बारे में सोचना चाहिए। बालेन शाह को भारत विरोधी बयानों पर मिलन कहते हैं, ‘भारत और नेपाल के रिश्तों के खिलाफ बोलना सही नहीं है। कुछ नेता या लोग अपने-अपने तरीके से बातें करते हैं, लेकिन आम लोगों की सोच ऐसी नहीं है। हमें आपसी रिश्तों को खराब करने की बजाय बेहतर बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।’ Gen Z लीडर बोले- बांटने वाली राजनीति से बचें बालेन नेपाल में सितंबर में Gen Z प्रोटेस्ट हुआ था। इसके बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। उस वक्त भी बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने की खबरें थी। वे युवाओं में पॉपुलर भी हैं। हमने Gen Z प्रोटेस्ट को लीड करने वाले नेताओं से भी बात की। 25 साल की तनुजा पांडे प्रोटेस्ट के बड़े चेहरों में से एक हैं। वे बालेन शाह की राजनीति को पॉपुलिस्ट और बांटने वाली मानती हैं। तनुजा कहती हैं कि बालेन युवा नेता हैं और लोगों को उनसे उम्मीदें हैं, लेकिन काठमांडू का मेयर रहते हुए उन्होंने काम नहीं किए। उनके ‘हम बनाम वे’ की राजनीति और उकसाने वाले बयान सुनकर फिक्र होती है। हम प्रोटेस्ट के समय इसी तरह की राजनीति से छुटकारा चाहते थे। तनुजा आगे कहती हैं कि नेपाल अपनी लोकेशन की वजह से अहम देश है। इसमें भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों की दिलचस्पी स्वाभाविक है। हमारी लीडरशिप पर निर्भर करता है कि वह इसे मौके में कैसे बदले। Gen Z प्रोटेस्ट के लीडर टंका धामी भी बालेन शाह से नाराज हैं। वे कहते हैं- हमें बालेन शाह के एजेंडे और डेवलपमेंट

Maharashtra Rajya Sabha Election: BJP Candidates List Released

Maharashtra Rajya Sabha Election: BJP Candidates List Released

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 4 प्रत्याशियों के नाम वाली दूसरी लिस्ट जारी की है। इसमें केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले, महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष विनोद तावड़े और माया चिंतामन इवनाते और रामराव वडकुते के नाम हैं। 3 मार्च: 9 प्रत्याशियों के नाम की पहली लिस्ट एक दिन पहले भाजपा ने राज्यसभा के लिए पार्टी उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसमें 6 राज्यों से 9 नाम शामिल थे। अब 7 राज्यों से कुल 13 प्रत्याशियों के नाम का ऐलान हो चुका है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी बिहार से राज्यसभा भेजे जाएंगे। उनके अलावा बिहार से शिवेश कुमार का भी नाम है। छत्तीसगढ़ से भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। असम से तेराश गोवाला, जोगेन मोहन, हरियाणा से संजय भाटिया, ओडिशा मनमोहन सामल, सुजीत कुमार और पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा उम्मीदवार हैं। 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराया जाएगा। 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच वोटिंग होगी और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती की जाएगी। राज्यसभा के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल पूरा ये सभी सीटें संबंधित सदस्यों के कार्यकाल पूरा होने के कारण रिक्त हो रही हैं। राज्यसभा का कार्यकाल छह साल का होता है। जिन सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त हो रहा है, उनकी सीटों पर ये चुनाव कराए जा रहे हैं। निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल उनके शपथ ग्रहण की तिथि से आगामी छह वर्षों, यानी 2032 तक रहेगा। संबंधित राज्यों की जिन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, वहीं ये सीटें रिक्त मानी जाएंगी। 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव चुनाव आयोग ने 18 फरवरी को 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था। 37 सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है। जो सीटें खाली हो रही हैं, उनमें 12 एनडीए के पास हैं, 25 पर विपक्षका कब्जा है। सबसे ज्यादा महाराष्ट्र की 7, तमिलनाडु की 6 और पश्चिम बंगाल-बिहार की 5-5 सीटों पर चुनाव कराया जाना है। शरद पवार, रामदास अठावले, कणिमोझी, तिरुचि शिवा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश का कार्यकाल 2 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच वोटिंग होगी और उसी दिन शाम 5 बजे वोटों की गिनती की जाएगी। बैलेट पेपर पर खास पेन से होगी वोटिंग चुनाव आयोग ने कहा है कि वोट डालते समय केवल रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से दिए गए तय मानक का वॉयलेट रंग का स्केच पेन ही इस्तेमाल होगा। किसी अन्य पेन का उपयोग मान्य नहीं होगा। आयोग ने कहा है कि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में EVM और VVPAT को लेकर जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। आयोग के मुताबिक 5 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में 1.20 लाख से ज्यादा लोगों ने डेमो कैंप में हिस्सा लिया। 1.16 लाख से ज्यादा लोगों ने मॉक वोट डाले। 10 फरवरी तक 29 हजार से ज्यादा पोलिंग स्टेशन लोकेशन मोबाइल डेमो वैन से कवर किए जा चुके हैं। यह अभियान EVM डेमो सेंटर और मोबाइल वैन के जरिए चलाया जा रहा है। ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं। राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है। महाराष्ट्र की 7 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 7 हैं। कुल विधायकों की संख्या x 100/ (राज्यसभा की सीटें+1) = +1 288X100/(7+1)= +1 28800/8= +1 3600= +1 3601 चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसलिए महाराष्ट्र में अभी एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए कम से कम 36 विधायकों की जरूरत होगी। अब समझिए राज्यों का समीकरण… बिहार: चिराग पासवान मां को बनवाएंगे सांसद, हरिवंश रिपीट हो सकते हैं जदयू के जिन दो नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर का नाम है। बड़े पद पर होने और सीएम के करीबी होने के कारण चर्चा है कि इन्हें एक बार फिर से रिपीट किया जा सकता है। चिराग के लिए यही परीक्षा होगी। विधानसभा चुनाव के दौरान भी मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया गया था कि वे अपनी मां के लिए राज्यसभा के एक सीट की डिमांड कर रहे है। पूरी खबर पढ़ें… छत्तीसगढ़: केटीएस तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल हो रहा खत्म छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी और फूलो देवी नेताम का कार्यकाल 2 अप्रैल 2026 को समाप्त हो जाएगा। केटीएस तुलसी सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील हैं। वह 2020 में छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद चुने गए थे। वहीं, फूलो देवी नेताम बस्तर क्षेत्र से आने वाली आदिवासी नेता हैं। वह छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। सामाजिक और जनजातीय मुद्दों पर उनकी मजबूत आवाज रही है। वह भी 2020 में राज्यसभा सांसद चुनी गई थीं। पूरी खबर पढ़ें… हरियाणा: किरण चौधरी-रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल खत्म हो रहा भाजपा के दो राज्यसभा सांसद किरण चौधरी और रामचंद्र जांगड़ा का कार्यकाल 9 अप्रैल तक है। राज्यसभा सांसद राम चंद्र जांगड़ा मार्च 2020 में राज्यसभा सांसद

Iran Assembly Experts Voting | Khamenei Funeral Mashhad; New Leader Soon

Iran Assembly Experts Voting | Khamenei Funeral Mashhad; New Leader Soon

तेल अवीव/तेहरान5 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज पांचवां दिन है। श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत पर पनडुब्बी से हमला हुआ है। श्रीलंका नेवी के मुताबिक जहाज से कई शव बरामद हुए हैं। हमले में 32 लोग घायल हैं, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद समुद्र में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। नेवी प्रवक्ता के अनुसार घायलो को बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। शुरुआत में नेवी ने बताया था कि हमले के बाद 101 लोग लापता और 78 घायल हुए हैं, लेकिन बाद में प्रवक्ता ने साफ किया कि पहले जारी किए गए आंकड़े सही नहीं थे। दूसरी ओर ईरान ने पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुन लेने का दावा किया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद होगी। वहीं, इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि अगर अली खामेनेई के बाद ईरान में जो भी नया नेता बनेगा उसे भी खत्म कर दिया जाएगा। काट्ज ने यह भी कहा कि नाम या जगह से कोई फर्क नहीं पड़ता, इजराइल उसे ढूंढ लेगा। ईरान ने सऊदी अरब की बड़ी तेल रिफाइनरी रास तनूरा पर हमला किया है। यहां हमले के बाद धुंआ उठता नजर आया। जंग में अमेरिका के दावे… ईरान के 17 जहाज तबाह कर दिए गए, जिनमें एक पनडुब्बी भी शामिल है। इस ऑपरेशन में 50,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक शामिल हैं। करीब 200 फाइटर जेट, दो एयरक्राफ्ट कैरियर और बम गिराने वाले विमान शामिल हैं। ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइलें और ड्रोन को भारी नुकसान हुआ है। अमेरिका ने इस जंग को एपिक फ्यूरी नाम दिया है। इसका मतलब भयंकर गुस्सा होता है। इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… 150 लड़कियों के अंतिम संस्कार के लिए एक साथ मिनाब शहर में कब्र खोदी गई थीं। ईरान की राजधानी तेहरान में इजराइली हमले का फुटेज। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने ईरान के ड्रोन पर हमले का फुटेज जारी किया है। इजराइली एयर डिफेंस सिस्टम का सोमवार रात ईरानी मिसाइल को गिराने का फुटेज। इजराइल-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 6 मिनट पहले कॉपी लिंक नाटो ने तुर्किये की तरफ बढ़ रही ईरानी मिसाइल मार गिराई तुर्किये ने कहा है कि नाटो के एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान से दागी गई एक मिसाइल को उसके एयरस्पेस में पहुंचने से पहले मार गिराया। तुर्किये के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक मिसाइल इराक और सीरिया के ऊपर से गुजरते हुए हताय इलाके की दिशा में आ रही थी। बयान के अनुसार सुरक्षा खतरे को देखते हुए नाटो एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव किया गया और मिसाइल को तुर्किये के हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया गया। 23 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका ने नागरिकों से कतर छोड़ने को कहा अमेरिका ने कतर में अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है। कतर स्थित अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि अगर सुरक्षित हो तो अमेरिकी नागरिक जल्द से जल्द कतर से निकल जाएं। अमेरिकी विदेश विभाग ने 3 मार्च को कतर में तैनात गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया था। दूतावास के मुताबिक फिलहाल कतर का हवाई क्षेत्र और समुद्री मार्ग बंद हैं। हालांकि कतर और सऊदी अरब के बीच सलवा लैंड बॉर्डर क्रॉसिंग खुली हुई है, जहां से लोग देश से बाहर जा सकते हैं। 38 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,045 हुई  अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,045 हो गई है। यह जानकारी ईरान की अर्ध-सरकारी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के अलग-अलग शहरों में हुए हमलों के बाद मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। 50 मिनट पहले कॉपी लिंक खामेनेई की अंतिम विदाई का समारोह टला ईरान की राजधानी तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई के लिए बुधवार रात होने वाला समारोह टाल दिया गया है। तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक आयोजन से जुड़ी लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण कार्यक्रम स्थगित किया गया। रिपोर्ट के अनुसार यह समारोह बुधवार रात 10 बजे शुरू होना था और इसमें देश के अलग-अलग प्रांतों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद थी। एक अधिकारी ने बताया कि कई प्रांतों से लोगों ने कार्यक्रम में शामिल होने का अनुरोध किया था, जिसके चलते आयोजन की व्यवस्थाओं को लेकर दिक्कतें सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार समारोह की नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी। 11:19 AM4 मार्च 2026 कॉपी लिंक सर्च ऑपरेशन में ईरानी युद्धपोत से शव मिले श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत से सर्च ऑपरेशन के दौरान कुछ शव बरामद किए गए हैं। श्रीलंका नेवी के प्रवक्ता के मुताबिक जहाज से पहले डिस्टेस कॉल मिला था। युद्धपोत पर पनडुब्बी से हमला किया गया है। नेवी के अनुसार सर्च एंड रेस्क्यू अभियान के दौरान समुद्र से कुछ शव बरामद किए गए हैं। आशंका है कि ये जहाज के क्रू मेंबर के हो सकते हैं, हालांकि मृतकों की संख्या को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। 11:06 AM4 मार्च 2026 कॉपी लिंक श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत पर पनडुब्बी से हमला श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत पर पनडुब्बी से हमला हुआ है। श्रीलंका नेवी के मुताबिक इस हमले में 32 लोग घायल हुए हैं, जबकि कई लोग लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद समुद्र में सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। नेवी प्रवक्ता के अनुसार घायल लोगों को बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। शुरुआत में नेवी ने बताया था कि हमले के बाद 101 लोग लापता और 78 घायल हुए हैं, लेकिन बाद में प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि पहले जारी किए गए आंकड़े सही नहीं थे और स्थिति की जानकारी अपडेट की जा रही है। 10:58 AM4 मार्च 2026 कॉपी लिंक इजराइली हमलों से

युवा, जातिगत गणित और वफादारी के रूप में भाजपा ने खेला लंबा खेल राज्यसभा चयन: सूची में कौन हैं? | राजनीति समाचार

Pakistan Vs England Live Cricket Score, T20 World Cup 2026 Super 8s: Stay updated with PAK vs ENG Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Pallekele. (Picture Credit: AP)

आखरी अपडेट:मार्च 03, 2026, 16:12 IST बिहार में बीजेपी ने नितिन नबीन और शिवेश कुमार पर दांव लगाया है, जबकि ओडिशा में पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल को चुना है. पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की पसंद विशेष रूप से उल्लेखनीय है। फ़ाइल चित्र/एक्स राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण कदम में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) केंद्रीय चुनाव समिति ने मंगलवार को अपने उम्मीदवारों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी की। 6ए दीन दयाल उपाध्याय मार्ग मुख्यालय में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा अनुमोदित चयन, एक सावधानीपूर्वक संतुलन कार्य को दर्शाता है। जटिल क्षेत्रीय जाति समीकरणों को संबोधित करने के साथ-साथ संगठनात्मक वफादारों को पुरस्कृत करके, भाजपा का लक्ष्य राज्यसभा में अपने विधायी पदचिह्न को मजबूत करना है। राष्ट्रीय महासचिव और मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह द्वारा हस्ताक्षरित सूची में बिहार, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर सहित महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र शामिल हैं। बिहार: गठबंधन और युवा नेतृत्व को मजबूत करना बिहार में बीजेपी ने नितिन नबीन और शिवेश कुमार पर दांव लगाया है. पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की पसंद विशेष रूप से उल्लेखनीय है; एक पूर्व मंत्री और एक प्रमुख युवा चेहरे के रूप में, राज्यसभा में उनका उत्थान हिंदी पट्टी में नेतृत्व की एक नई पीढ़ी को तैयार करने के पार्टी के इरादे का संकेत देता है। इस चयन को शहरी मध्यम वर्ग और कायस्थ समुदाय के लिए एक रणनीतिक मंजूरी के रूप में देखा जाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ढांचे के भीतर उनका प्रतिनिधित्व मजबूत बना रहे। असम और छत्तीसगढ़: क्षेत्रीय एंकर भगवा पार्टी के लिए पूर्वोत्तर अभी भी प्राथमिकता बनी हुई है। असम से जोगेन मोहन और तेराश गोवाल्ला का नामांकन चाय जनजाति समुदाय और ऊपरी असम पर पार्टी के फोकस को उजागर करता है। दोनों नेताओं की राज्य के प्रशासनिक और सामाजिक ताने-बाने में गहरी जड़ें हैं। इस बीच, छत्तीसगढ़ में, पार्टी ने महिलाओं के प्रतिनिधित्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए और राज्य में अपने ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) समर्थन आधार को मजबूत करते हुए, लक्ष्मी वर्मा को नामांकित किया है, जहां भाजपा ने हाल ही में एक शानदार जनादेश हासिल किया है। हरियाणा और ओडिशा: पुरस्कृत प्रदर्शन हरियाणा से संजय भाटिया का नामांकन उनके संगठनात्मक अनुशासन और पिछले लोकसभा चुनावों में भारी जीत के अंतर का स्पष्ट पुरस्कार है। ओडिशा में, भाजपा ने हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी के ऐतिहासिक प्रभारी का नेतृत्व करने वाले राज्य अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को चुना है। ये विकल्प उस राज्य में गति बनाए रखने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं जहां भाजपा अब दीर्घकालिक सत्ताधारियों की जगह प्राथमिक राजनीतिक ताकत के रूप में उभरी है। पश्चिम बंगाल: वैचारिक मोहरा पश्चिम बंगाल के लिए पार्टी ने अनुभवी नेता राहुल सिन्हा पर भरोसा किया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व में पार्टी के वैचारिक संघर्ष का एक जाना-पहचाना चेहरा, सिन्हा का नामांकन सभी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाला है। यह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ अपनी आक्रामक मुद्रा जारी रखने के भाजपा के संकल्प को रेखांकित करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि एक अनुभवी आवाज उच्च सदन में बंगाल के हितों और पार्टी की शिकायतों का प्रतिनिधित्व करती है। रणनीतिक संदर्भ: बहुमत तक का रास्ता ये द्विवार्षिक चुनाव भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह राज्यसभा में आरामदायक बहुमत के करीब है, एक मील का पत्थर जो विवादास्पद विधायी सुधारों के पारित होने को काफी आसान बना देगा। अनुभवी “युद्ध-कठिन” दिग्गजों और नए चेहरों का मिश्रण चुनकर, पार्टी सिर्फ सीटें नहीं भर रही है; यह सुनिश्चित कर रहा है कि संसद में इसकी बेंच स्ट्रेंथ 2026-2032 के कार्यकाल की विधायी चुनौतियों के लिए सुसज्जित है। जैसे ही नामांकन की जांच शुरू होती है, अब ध्यान संबंधित राज्य विधानसभाओं की ओर केंद्रित हो जाता है, जहां भाजपा की गणितीय ताकत इन उम्मीदवारों के लिए एक आसान रास्ता सुनिश्चित करती है। पहले प्रकाशित: मार्च 03, 2026, 16:12 IST समाचार राजनीति युवा, जातिगत गणित और वफादारी के रूप में भाजपा ने खेला लंबा खेल राज्यसभा चयन: सूची में कौन हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)राज्यसभा(टी)नितिन नबीन(टी)ओडिशा(टी)बिहार(टी)चुनाव

Tamil Nadu Election 2026 Polling Booth; Gyanesh Kumar

Tamil Nadu Election 2026 Polling Booth; Gyanesh Kumar

Hindi News National Tamil Nadu Election 2026 Polling Booth; Gyanesh Kumar | TN SIR Voters Count चेन्नईकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चेन्नई में शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। चीफ इलेक्शन कमिश्नर(CEC) ज्ञानेश कुमार ने चुनावी प्रक्रिया को तमिलनाडु की शान बताया। उन्होंने शुक्रवार को चेन्नई में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। CEC ने राज्य के सभी वोटरों से आने वाले विधानसभा चुनावों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि हाल ही में राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन(SIR) कराया गया है। इसके बाद वर्तमान में यहां 5 करोड़ 67 लाख वोटर हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में लगभग 75,000 पोलिंग स्टेशन होंगे, जिनमें से 44,000 ग्रामीण इलाकों में होंगे। ट्रांसपेरेंसी पक्का करने के लिए हर पोलिंग बूथ पर 100% वेबकास्टिंग होगी। ज्ञानेश कुमार ने और क्या बताया… हाल ही में चुनाव आयोग ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इसमें 72 देशों के चीफ इलेक्शन कमिश्नर, इलेक्शन कमिश्नर और चुनावी स्टाफ ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में तमिलनाडु के 10वीं सदी के “कुडावोलाई सिस्टम” के बारे में जानकारी दी गई। आयोग पिछले कुछ दिनों से तमिलनाडु में है। जिला कलेक्टर, SP, DIG, IG, 24 प्रवर्तन एजेंसियों, राज्य सरकार, चीफ सेक्रेटरी और DGP के साथ तैयारियों की समीक्षा की गई। 27 अक्टूबर 2025 से 23 फरवरी 2026 तक SIR किया गया। उद्देश्य था कि कोई भी योग्य मतदाता छूटे नहीं और कोई अयोग्य व्यक्ति शामिल न हो। राज्य में कुल 5 करोड़ 67 लाख मतदाता हैं। हर पोलिंग स्टेशन पर औसतन 756 मतदाता होंगे। 258 बूथ पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित होंगे। 47 बूथ दिव्यांगों द्वारा संचालित होंगे। 265 मॉडल पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। चुनाव आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने का भरोसा दिया। सभी प्रवर्तन एजेंसियों को सख्ती से काम करने और वोटरों को लालच देने वाली गतिविधियों पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया। 23 फरवरी: तमिलनाडु में SIR की फाइनल लिस्ट पब्लिश हुई, 74 लाख नाम कटे चुनाव आयोग (ECI) ने सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) 2026 के तहत तमिलनाडु की फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश कर दी है। इसके मुताबिक राज्य में अब कुल 5.67 करोड़ वोटर के नाम हैं। इस प्रोसेस में करीब 74 लाख लोगों के नाम काटे गए हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं जिसके बाद राज्य में 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं। राज्य में इसी साल चुनाव होने हैं। चेन्नई की हार्बर विधानसभा में सबसे कम वोटर सबसे ज्यादा 5,36,991 वोटर चेंगलपट्टू जिले की विधानसभा नंंबर 27 शोझांगनल्लूर में हैं। वहीं सबसे कम 1,16,896 वोटर चेन्नई जिले की विधानसभा नंबर 18 हार्बर में दर्ज हुए हैं। ————- ये खबर भी पढ़ें… AIADMK से निष्कासित पूर्व CM पन्नीरसेल्वम DMK में शामिल:मुख्यमंत्री स्टालिन ने सदस्यता दिलाई, तीन बार तमिलनाडु के CM रह चुके तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व AIADMK नेता ओ पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) ने शुक्रवार को DMK का दामन थाम लिया। उन्होंने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की मौजूदगी में पार्टी जॉइन की। यह कदम अप्रैल-मई में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले उठाया गया है। तीन बार सीएम रहे पन्नीरसेल्वम जे जयललिता के करीबी ओ.पन्नीरसेल्वम पहली बार 2001 में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थे। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

supreme court on NOTA in election voting leader quality

supreme court on NOTA in election voting leader quality

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को NOTA (इनमें से कोई नहीं) विकल्प की उपयोगिता और असर पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने मंगलवार को सरकार से पूछा कि इसका क्या फायदा है, क्या NOTA के आने से चुने गए नेताओं की क्वालिटी में सुधार हुआ है? कोर्ट ने कहा कि NOTA किसी भी सीट को भर नहीं सकता और इसीलिए इसका प्रभाव सीमित है। यदि किसी सीट पर सिर्फ एक ही उम्मीदवार होता है तो क्या इसके बाद भी इसकी जरूरत है? चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो 1951 के रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट के उस प्रावधान को चुनौती देती है जो निर्विरोध (एकल) प्रत्याशी वाले चुनावों में मतदाताओं को NOTA का विकल्प नहीं देता। याचिका में मांग की गई है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ही नहीं, बल्कि अगर चुनाव में सिर्फ एक ही उम्मीदवार खड़ा हो, तब भी NOTA का विकल्प दिया जाए। मामले में अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी। जस्टिस बागची ने पूछा- NOTA से कितना असर होता है सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा- क्या इसके आने के बाद से अच्छे नेता चुनकर आए हैं? एक चिंता की बात यह है कि पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से मजबूत लोग अक्सर कम वोट डालते हैं। वहीं महिलाएं और कम पढ़े-लिखे लोग ज्यादा संख्या में मतदान करते हैं। ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि NOTA का असली असर कितना पड़ता है और क्या यह सच में चुनाव के नतीजों या नेताओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर पा रहा है। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह याचिका केवल कल्पना और अंदाजों पर आधारित है, इसके पीछे ठोस वजह नहीं है। वोट डालना एक संवैधानिक अधिकार है और चुनाव से जुड़े नियम कानून के अनुसार तय होते हैं। NOTA के बारे में जानें… इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के जरिए मतदान के दौरान वोटर्स को NOTA का विकल्प मिलता है जो सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने की सुविधा देता है। साथ ही उनके वोट की गोपनीयता को बनाए रखता है। तकनीकी रूप से यह चुनाव परिणाम को प्रभावित नहीं करता है। मतलब यह हुआ कि यदि NOTA को किसी भी उम्मीदवार से ज्यादा वोट मिलते हैं तब भी सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीत जाता है। लेकिन यह नागरिकों को यह शक्ति देता है कि वे चुनावी प्रक्रिया से दूर रहे बिना अपने असंतोष को जाहिर कर सकें। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें… पश्चिम बंगाल SIR-ओडिशा-झारखंड के सिविल जज करेंगे वेरिफिकेशन में मदद, सुप्रीम कोर्ट बोला- इनका खर्च चुनाव आयोग उठाए सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में सामने आए 80 लाख क्लेम निपटाने के लिए 2 राज्यों से सिविल जजों को तैनात करने की परमिशन दे दी है। कोर्ट ने आदेश दिया कि कलकत्ता हाईकोर्ट पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट SIR प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए झारखंड-ओडिशा के सिविल जजों की मदद ले सकता है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

West Bengal Politics: Mamata vs Modi Election Race

West Bengal Politics: Mamata vs Modi Election Race

कोलकाता2 घंटे पहलेलेखक: प्रदीप पांडेय कॉपी लिंक SIR को लेकर घमासान के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में गरमाहट बढ़ रही है। बंगाल की सियासी हवा में अभी ‘एम’ हावी है। एम यानी- महिला, मुस्लिम, मस्जिद, मंदिर, मटन, मछली, मनी पॉवर, मसल पॉवर…, ममता और मोदी। बंगाल की राजनीति यहां के दो सबसे बड़े फुटबॉल क्लबों- मोहन बागान या ईस्ट बंगाल की तरह दो ध्रुवों में बंटी है। पहले बंगाल की राजनीति कांग्रेस बनाम लेफ्ट थी, फिर 34 साल लेफ्ट का राज रहा। अब 15 साल से तृणमूल सत्ता में है और पिछले पांच साल से उसका सीधा मुकाबला भाजपा से है। टीएमसी के लिए आज भी ममता का फेस वाममोर्चा के 34 साल का ‘लाल किला’ भेदकर सीएम बनीं ममता बनर्जी डेढ़ दशक की सत्ता के बाद भी आक्रामक शैली में मोर्चे पर हैं। टीएमसी के लिए आज भी ममता का फेस, लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाएं और मुस्लिमों का एकजुट वोट, जीत का फॉर्मूला है। वहीं, भाजपा पीएम मोदी के चेहरे, अनुशासित संगठन और ‘डबल इंजन’ के नारे के साथ मैदान में है। हालांकि, सड़क पर मुकाबले के लिए उसे अभी भी ऐसे ‘मुद्दे, मौके और स्थानीय बड़े चेहरे’ की तलाश है, जो उसकी विधानसभा सीटें 77 से 148 तक पहुंचा सके। स्थानीय स्तर पर ममता के कद के नेता की कमी बड़ी चुनौती है। इस बीच, वाममोर्चा व कांग्रेस राज्य में अपना अस्तित्व बचाने का संघर्ष कर रहे हैं। जो सड़क जीते सरकार उसी की एक बंगाली दैनिक के सीनियर पत्रकार कहते हैं कि यहां जो सड़क जीत लेता है वह चुनाव जीत लेता है और फिलहाल सड़क पर ममता ही दिख रही हैं। दूसरी ओर, कोलकाता में रेस्टोरेंट चलाने वाले यूपी मूल के एक युवक ने कहा- पिछले पांच साल में भाजपा का वोटर बेस बढ़ा है, पर पार्टी को यह भरोसा दिलाना होगा कि सरकार बदल रही है। अगर ऐसा होता है तो सपोर्ट वोट में बदल पाएगा। टीएमसी; एसआईआर से संगठन एक्टिव… अब टिकट पर मंथन ममता की सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार, भर्ती घोटाले में मंत्रियों की गिरफ्तारी, 25 हजार से ज्यादा नियुक्तियां रद्द होना, आरजी कर जैसी घटना और डेढ़ दशक की सत्ता की एंटी इन्कंबेंसी है। हालांकि ममता के ईडी छापे के बीच घुसकर फाइल निकालने, एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने और सड़क पर मोर्चा संभालने से पार्टी का कैडर गांव-गांव तक एक्टिव हो गया। यही कारण है कि चुनाव से तीन महीने पहले पार्टी मैदान में दिख रही है। ममता के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी भाजपा के आरोपों को काउंटर करने के साथ ही संगठन का मैनेजमेंट संभाल रहे हैं। भाजपा; कई राज्यों के नेता मैदान में, अभी से डोर टू डोर भाजपा घुसपैठ, भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मुद्दे पर ममता की घेराबंदी बढ़ा रही है। नेता प्रतिपक्ष सुभेंदु अधिकारी सड़क पर मुखर हैं तो प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्‌टाचार्य संगठन की मजबूती के साथ बंगाली भद्रलोक को साध रहे हैं। पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के दौरों के साथ पार्टी इस बार बूथ लेवल पर फोकस कर रही है। हर सीट पर एक-एक सीनियर नेता को लगाया गया है। यूपी, बिहार, ओडिशा, उत्तराखंड सहित कई राज्यों के इन सीनियर नेताओं को डोर टू डोर दस्तक देकर हर बूथ को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ——————– ये खबर भी पढ़ें… प. बंगाल में SIR,हर सीट पर औसतन 19000 नाम हटे: TMC बोली- सवा करोड़ बंगाली लाइन में लगे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो-तीन माह ही बचे हैं। यहां अभी भाषण और रैलियों का शोर नहीं है। लेकिन, सियासत भरपूर गर्म है। कोलकाता के न्यू मार्केट से चांदनी चौक, न्यू टाउन से जेसप बिल्डिंग और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से बर्द्धमान तक करीब 600 किमी के सफर में साफ हो गया कि अभी वोटर लिस्ट ही चुनावी रणभूमि बनी हुई है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

West Bengal Voter List Row

West Bengal Voter List Row

Hindi News National West Bengal Voter List Row | TMC Claims 1.25 Cr Bengalis In Line; BJP Alleges Mamata Fears Ghost Vot कोलकाता4 मिनट पहले कॉपी लिंक 2021 में पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 166 पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो-तीन माह ही बचे हैं। यहां अभी भाषण और रैलियों का शोर नहीं है। लेकिन, सियासत भरपूर गर्म है। कोलकाता के न्यू मार्केट से चांदनी चौक, न्यू टाउन से जेसप बिल्डिंग और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से बर्द्धमान तक करीब 600 किमी के सफर में साफ हो गया कि अभी वोटर लिस्ट ही चुनावी रणभूमि बनी हुई है। कोलकाता के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि ममता बनर्जी ने SIR की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट ले जाकर अपनी जुझारू छवि फिर हाईलाइट की है। टीएमसी उनके सुप्रीम कोर्ट के वीडियो वायरल कर रही है। जगह-जगह ममता की काले कोट में होर्डिंग लगे हैं। भाजपा SIR को घुसपैठियों के खिलाफ लड़ाई बता रही थी। पर, ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ यानी विसंगति के आधार पर जारी सवा करोड़ बंगाली लाइन में लग गए हैं। हर सीट पर औसतन 19 हजार से ज्यादा नाम हटे हैं। टीएमसी बोली- ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में खड़ा कर दिया टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं, भाजपा ने SIR से हमारी लड़ाई आसान कर दी। 15 साल की सत्ता की कुछ एंटी-इंकंबेंसी होगी, तो खत्म हो गई। एसआईआर भाजपा के लिए उल्टा तीर हो गया। वे फील्ड में नहीं जा पा रहे। ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में लगवा दिया। भाजपा का आरोप- ममता अपने ‘घोस्ट वोटर्स’ के नाम कटने से डर में हैं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष समिक भट्टाचार्य कहते हैं कि ममता ‘घोस्ट’ वोटर्स और घुसपैठियों के नाम कटने से डरी हैं। वह इनकी बदौलत जीतती थीं। मैं ऐसे लोगों को जानता हूं, जो कई साल पहले गुजर चुके, लेकिन उनके वोट पड़ते थे। सिर्फ वोटर लिस्ट की सफाई नहीं हो रही, यह ममता के विसर्जन का रास्ता बन रहा है। एनालिस्ट ने बताया नाम कटने से जीत-हार का गणित एक पार्टी के लिए काम कर रहे डेटा एनालिस्ट बताते हैं कि 2021 में पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 166 पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था। इनमें टीएमसी 102 और भाजपा 64 सीट जीती थी। एसआईआर के तहत ड्राफ्ट सूची से प्रति सीट औसतन 19,795 नाम हटे हैं। जहां जीत का अंतर कम था, वहां मतदाता सूची में बदलाव का असर ज्यादा दिख सकता है। वे यह भी कहते हैं कि टीएमसी 68 सीटें 25,001 से 50,000 के अंतर से जीती थी, जबकि भाजपा को ऐसी 12 ही सीटें मिली थीं। 50 हजार से ज्यादा अंतर से टीएमसी 43 और भाजपा सिर्फ एक सीट जीती थी। यानी जहां मुकाबला करीबी था, वहां अंतिम सूची की बारीकी राजनीतिक रूप से ज्यादा मायने रखेगी। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के तहत ज्यादातर नोटिस SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58 लाख 20 हजार 898 नाम हटे हैं। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ तथा ‘अनमैप्ड’ श्रेणियों को मिलाकर करीब 1.26 करोड़ नोटिस जारी हुए हैं। निर्वाचन आयोग के दफ्तरों में दस्तावेज अपलोड करने और जांच की आपाधापी है। कोलकाता नॉर्थ के जिला निर्वाचन ऑफिस जेसप बिल्डिंग में 14 फरवरी को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ की सुनवाई में मूल रूप से बिहार के रहने वाले एक बुजुर्ग पत्नी और बेटे के साथ आए। वे लंबे समय से कोलकाता में हैं, पहले वोट दे चुके हैं, लेकिन इस बार नोटिस मिला। कोलकाता की बबीता ने बताया कि वोटर लिस्ट में उनके पिता के नाम में ‘कुमार’ है, लेकिन 2002 की लिस्ट में ‘KR’ लिखा है। इसलिए मेरा नाम लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में आ गया। एक अन्य महिला के पति का नाम ‘Ashok’ लिखा है लेकिन लिस्ट में नाम ‘Asoke’ है। इसलिए सुनवाई में आना पड़ा। देवी की स्पेलिंग ‘Devi’ या ‘Debi’ होना, गांगुली और गंगोपाध्याय, चटर्जी और चट्टोपाध्याय को लेकर बड़ी संख्या में नोटिस मिले हैं। वोटर लिस्ट से नाम हटने पर क्या करें? चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम जरूर जांच लें। मतदाता eci.gov.in पर जाकर अपना नाम और EPIC नंबर देखकर पुष्टि कर सकते हैं। अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं। पूरी प्रक्रिया 6 आसान सवाल-जवाब में पढ़ें… सवालः फॉर्म-6 कहां से मिलेगा? जवाबः फॉर्म-6 आप अपने नजदीकी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से ले सकते हैं। यह चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इसके अलावा तहसील, SDM कार्यालय या इलेक्शन ऑफिस से भी फॉर्म-6 मिल जाता है। सवालः फॉर्म-6 कैसे भरें? जवाबः फॉर्म-6 भरते समय अपना पूरा नाम, सही पता, उम्र और मोबाइल नंबर ध्यान से लिखें। अगर पहले कहीं आपका नाम वोटर लिस्ट में था और उसकी जानकारी याद हो तो वह भी दर्ज करें। फॉर्म पूरा भरने के बाद अंत में अपना हस्ताक्षर करना न भूलें। सवालः कौन-से दस्तावेज लगेंगे? जवाबः फॉर्म के साथ पहचान के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट की कॉपी लगानी होगी। पते के प्रमाण के रूप में राशन कार्ड, बिजली का बिल या बैंक पासबुक की कॉपी दी जा सकती है। उम्र के प्रमाण के लिए जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट की कॉपी लगानी होगी। सवालः फॉर्म जमा कहां करें? जवाबः फॉर्म आप अपने इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को दे सकते हैं। चाहें तो इसे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी इलेक्शन ऑफिस में जाकर भी फॉर्म जमा किया जा सकता है। सवालः जांच और सुनवाई कैसे होगी? जवाबः फॉर्म जमा होने के बाद बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) आपके बताए पते पर आकर जांच करेगा। अगर किसी जानकारी को लेकर जरूरत पड़ी, तो आपको सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है। सवालः नाम कब तक जुड़ेगा? जवाबः जांच पूरी होने के बाद अगर सब जानकारी सही पाई जाती है, तो आपका नाम अंतिम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। ……………………………….. SIR से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… तमिलनाडु में SIR से 97 लाख वोटर के नाम कटे: गुजरात में 73 लाख नाम हटाए; राजस्थान-बंगाल में 1 करोड़ से ज्यादा

West Bengal Voter List Controversy; BJP TMC Mamata Banerjee

West Bengal Voter List Controversy; BJP TMC Mamata Banerjee

Hindi News National West Bengal Voter List Controversy; BJP TMC Mamata Banerjee | Election 2026 कोलकाता17 घंटे पहले कॉपी लिंक 2021 में पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 166 पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दो-तीन माह ही बचे हैं। यहां अभी भाषण और रैलियों का शोर नहीं है। लेकिन, सियासत भरपूर गर्म है। कोलकाता के न्यू मार्केट से चांदनी चौक, न्यू टाउन से जेसप बिल्डिंग और मुर्शिदाबाद के बेलडांगा से बर्द्धमान तक करीब 600 किमी के सफर में साफ हो गया कि अभी वोटर लिस्ट ही चुनावी रणभूमि बनी हुई है। कोलकाता के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि ममता बनर्जी ने SIR की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट ले जाकर अपनी जुझारू छवि फिर हाईलाइट की है। टीएमसी उनके सुप्रीम कोर्ट के वीडियो वायरल कर रही है। जगह-जगह ममता की काले कोट में होर्डिंग लगे हैं। भाजपा SIR को घुसपैठियों के खिलाफ लड़ाई बता रही थी। पर, ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ यानी विसंगति के आधार पर जारी सवा करोड़ बंगाली लाइन में लग गए हैं। हर सीट पर औसतन 19 हजार से ज्यादा नाम हटे हैं। टीएमसी बोली- ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में खड़ा कर दिया टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं, भाजपा ने SIR से हमारी लड़ाई आसान कर दी। 15 साल की सत्ता की कुछ एंटी-इंकंबेंसी होगी, तो खत्म हो गई। एसआईआर भाजपा के लिए उल्टा तीर हो गया। वे फील्ड में नहीं जा पा रहे। ‘भाजपा आयोग’ ने सवा करोड़ बंगालियों को लाइनों में लगवा दिया। भाजपा का आरोप- ममता अपने ‘घोस्ट वोटर्स’ के नाम कटने से डर में हैं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष समिक भट्टाचार्य कहते हैं कि ममता ‘घोस्ट’ वोटर्स और घुसपैठियों के नाम कटने से डरी हैं। वह इनकी बदौलत जीतती थीं। मैं ऐसे लोगों को जानता हूं, जो कई साल पहले गुजर चुके, लेकिन उनके वोट पड़ते थे। सिर्फ वोटर लिस्ट की सफाई नहीं हो रही, यह ममता के विसर्जन का रास्ता बन रहा है। एनालिस्ट ने बताया नाम कटने से जीत-हार का गणित एक पार्टी के लिए काम कर रहे डेटा एनालिस्ट बताते हैं कि 2021 में पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 166 पर जीत का अंतर 25 हजार से कम था। इनमें टीएमसी 102 और भाजपा 64 सीट जीती थी। एसआईआर के तहत ड्राफ्ट सूची से प्रति सीट औसतन 19,795 नाम हटे हैं। जहां जीत का अंतर कम था, वहां मतदाता सूची में बदलाव का असर ज्यादा दिख सकता है। वे यह भी कहते हैं कि टीएमसी 68 सीटें 25,001 से 50,000 के अंतर से जीती थी, जबकि भाजपा को ऐसी 12 ही सीटें मिली थीं। 50 हजार से ज्यादा अंतर से टीएमसी 43 और भाजपा सिर्फ एक सीट जीती थी। यानी जहां मुकाबला करीबी था, वहां अंतिम सूची की बारीकी राजनीतिक रूप से ज्यादा मायने रखेगी। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के तहत ज्यादातर नोटिस SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58 लाख 20 हजार 898 नाम हटे हैं। ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ तथा ‘अनमैप्ड’ श्रेणियों को मिलाकर करीब 1.26 करोड़ नोटिस जारी हुए हैं। निर्वाचन आयोग के दफ्तरों में दस्तावेज अपलोड करने और जांच की आपाधापी है। कोलकाता नॉर्थ के जिला निर्वाचन ऑफिस जेसप बिल्डिंग में 14 फरवरी को ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ की सुनवाई में मूल रूप से बिहार के रहने वाले एक बुजुर्ग पत्नी और बेटे के साथ आए। वे लंबे समय से कोलकाता में हैं, पहले वोट दे चुके हैं, लेकिन इस बार नोटिस मिला। कोलकाता की बबीता ने बताया कि वोटर लिस्ट में उनके पिता के नाम में ‘कुमार’ है, लेकिन 2002 की लिस्ट में ‘KR’ लिखा है। इसलिए मेरा नाम लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में आ गया। एक अन्य महिला के पति का नाम ‘Ashok’ लिखा है लेकिन लिस्ट में नाम ‘Asoke’ है। इसलिए सुनवाई में आना पड़ा। देवी की स्पेलिंग ‘Devi’ या ‘Debi’ होना, गांगुली और गंगोपाध्याय, चटर्जी और चट्टोपाध्याय को लेकर बड़ी संख्या में नोटिस मिले हैं। वोटर लिस्ट से नाम हटने पर क्या करें? चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना नाम जरूर जांच लें। मतदाता eci.gov.in पर जाकर अपना नाम और EPIC नंबर देखकर पुष्टि कर सकते हैं। अगर आपका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हट गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप फॉर्म-6 भरकर दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं। पूरी प्रक्रिया 6 आसान सवाल-जवाब में पढ़ें… सवालः फॉर्म-6 कहां से मिलेगा? जवाबः फॉर्म-6 आप अपने नजदीकी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से ले सकते हैं। यह चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी उपलब्ध है। इसके अलावा तहसील, SDM कार्यालय या इलेक्शन ऑफिस से भी फॉर्म-6 मिल जाता है। सवालः फॉर्म-6 कैसे भरें? जवाबः फॉर्म-6 भरते समय अपना पूरा नाम, सही पता, उम्र और मोबाइल नंबर ध्यान से लिखें। अगर पहले कहीं आपका नाम वोटर लिस्ट में था और उसकी जानकारी याद हो तो वह भी दर्ज करें। फॉर्म पूरा भरने के बाद अंत में अपना हस्ताक्षर करना न भूलें। सवालः कौन-से दस्तावेज लगेंगे? जवाबः फॉर्म के साथ पहचान के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड या पासपोर्ट की कॉपी लगानी होगी। पते के प्रमाण के रूप में राशन कार्ड, बिजली का बिल या बैंक पासबुक की कॉपी दी जा सकती है। उम्र के प्रमाण के लिए जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट की कॉपी लगानी होगी। सवालः फॉर्म जमा कहां करें? जवाबः फॉर्म आप अपने इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को दे सकते हैं। चाहें तो इसे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी इलेक्शन ऑफिस में जाकर भी फॉर्म जमा किया जा सकता है। सवालः जांच और सुनवाई कैसे होगी? जवाबः फॉर्म जमा होने के बाद बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) आपके बताए पते पर आकर जांच करेगा। अगर किसी जानकारी को लेकर जरूरत पड़ी, तो आपको सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है। सवालः नाम कब तक जुड़ेगा? जवाबः जांच पूरी होने के बाद अगर सब जानकारी सही पाई जाती है, तो आपका नाम अंतिम वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। ……………………………….. 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