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supreme court on NOTA in election voting leader quality

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को NOTA (इनमें से कोई नहीं) विकल्प की उपयोगिता और असर पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने मंगलवार को सरकार से पूछा कि इसका क्या फायदा है, क्या NOTA के आने से चुने गए नेताओं की क्वालिटी में सुधार हुआ है?

कोर्ट ने कहा कि NOTA किसी भी सीट को भर नहीं सकता और इसीलिए इसका प्रभाव सीमित है। यदि किसी सीट पर सिर्फ एक ही उम्मीदवार होता है तो क्या इसके बाद भी इसकी जरूरत है?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो 1951 के रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट के उस प्रावधान को चुनौती देती है जो निर्विरोध (एकल) प्रत्याशी वाले चुनावों में मतदाताओं को NOTA का विकल्प नहीं देता।

याचिका में मांग की गई है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ही नहीं, बल्कि अगर चुनाव में सिर्फ एक ही उम्मीदवार खड़ा हो, तब भी NOTA का विकल्प दिया जाए। मामले में अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।

जस्टिस बागची ने पूछा- NOTA से कितना असर होता है

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा- क्या इसके आने के बाद से अच्छे नेता चुनकर आए हैं? एक चिंता की बात यह है कि पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से मजबूत लोग अक्सर कम वोट डालते हैं।

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वहीं महिलाएं और कम पढ़े-लिखे लोग ज्यादा संख्या में मतदान करते हैं। ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि NOTA का असली असर कितना पड़ता है और क्या यह सच में चुनाव के नतीजों या नेताओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर पा रहा है।

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अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह याचिका केवल कल्पना और अंदाजों पर आधारित है, इसके पीछे ठोस वजह नहीं है। वोट डालना एक संवैधानिक अधिकार है और चुनाव से जुड़े नियम कानून के अनुसार तय होते हैं।

NOTA के बारे में जानें…

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के जरिए मतदान के दौरान वोटर्स को NOTA का विकल्प मिलता है जो सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने की सुविधा देता है। साथ ही उनके वोट की गोपनीयता को बनाए रखता है। तकनीकी रूप से यह चुनाव परिणाम को प्रभावित नहीं करता है।

मतलब यह हुआ कि यदि NOTA को किसी भी उम्मीदवार से ज्यादा वोट मिलते हैं तब भी सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीत जाता है। लेकिन यह नागरिकों को यह शक्ति देता है कि वे चुनावी प्रक्रिया से दूर रहे बिना अपने असंतोष को जाहिर कर सकें।

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कोर्ट ने कहा कि NOTA किसी भी सीट को भर नहीं सकता और इसीलिए इसका प्रभाव सीमित है। यदि किसी सीट पर सिर्फ एक ही उम्मीदवार होता है तो क्या इसके बाद भी इसकी जरूरत है?

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याचिका में मांग की गई है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में ही नहीं, बल्कि अगर चुनाव में सिर्फ एक ही उम्मीदवार खड़ा हो, तब भी NOTA का विकल्प दिया जाए। मामले में अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।

जस्टिस बागची ने पूछा- NOTA से कितना असर होता है

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा- क्या इसके आने के बाद से अच्छे नेता चुनकर आए हैं? एक चिंता की बात यह है कि पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से मजबूत लोग अक्सर कम वोट डालते हैं।

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