Sunday, 12 Apr 2026 | 08:44 PM

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Retirement Funds Investment Options Explained

Retirement Funds Investment Options Explained

2 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर अवेयरनेस बहुत कम है। देश में ऐसे लाखों लोग हैं, जो समय रहते रिटायरमेंट प्लान नहीं करते हैं। इसकी वजह से उन्हें बुढ़ापे में फाइनेंशियल क्राइसिस का सामना करना पड़ता है। भारत की लीडिंग प्रोफेशनल सर्विस फर्म ‘ग्रांट थॉर्नटॉन’ के एक सर्वे के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त बचत नहीं कर रहे हैं। साल 2025 में हुए इस सर्वे के मुताबिक, प्राइवेट सेक्टर के करीब 50% कर्मचारी रिटायरमेंट के लिए बहुत कम पैसे निवेश करते हैं, जबकि अधिकांश लोग अपनी आय का सिर्फ 1-10% ही इसके लिए अलग रखते हैं। इसलिए आज ‘आपका पैसा’ कॉलम में जानेंगे कि- बुढ़ापे में फाइनेंशियल फ्रीडम क्यों जरूरी है? खुद का रिटायरमेंट फंड कैसे बनाएं? रिटायरमेंट फंड के लिए कहां और कितना निवेश करें? सवाल- रिटायरमेंट फंड क्या है और यह क्यों जरूरी है? जवाब- रिटायरमेंट फंड भविष्य की आपात स्थितियों से निपटने में मदद करता है। साथ ही रिटायरमेंट के बाद परिवार और रिश्तेदारों पर निर्भरता खत्म करता है। क्यों जरूरी है? पेंशन का अभाव: कुछ सरकारी नौकरियों को छोड़कर बाकी में अब पेंशन की सुविधा नहीं है। महंगाई: 6% वार्षिक महंगाई दर के हिसाब से आज का 50,000 रुपए का मासिक खर्च 20 साल बाद 1.6 लाख रुपए हो सकता है। लाइफ एक्सपेक्टेंसी: अभी औसत जीवन दर 75 साल के करीब है। ऐसे में रिटायर होने के बाद भी 15-20 साल का फंड चाहिए। मेडिकल खर्च: बुढ़ापे में स्वास्थ्य संबंधी खर्चे बढ़ जाते हैं, जिनके लिए पर्याप्त बचत जरूरी है। सवाल- बुढ़ापे में फाइनेंशियल फ्रीडम क्यों जरूरी है? जवाब- फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब है अपने खर्च खुद उठाना। रिटायरमेंट के बाद नियमित इनकम का सोर्स खत्म हो जाता है। बचत न होने पर दूसरों पर निर्भर होना पड़ सकता है। फाइनेंशियल फ्रीडम इसलिए जरूरी है क्योंकि- यह सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करती है। मानसिक तनाव कम करती है। आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ाती है। सवाल- रिटायरमेंट फंड बनाने की शुरुआत कैसे करें? जवाब- रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए एक प्लानिंग की जरूरत होती है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं- सवाल- जल्दी निवेश शुरू करने से क्या फायदा होता है? जवाब- सभी फायदे पॉइंटर्स से समझिए- सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग का होता है। निवेश पर मिले रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता है। कम उम्र में छोटा निवेश भी बड़ा फंड बना सकता है। जल्दी निवेश शुरू करने से कम मेहनत में बड़ा कॉर्पस (फंड) बनता है। देर से शुरूआत करने पर ज्यादा पैसे लगते हैं। सवाल- रिटायरमेंट फंड के लिए कहां निवेश करें? जवाब- निवेश का विकल्प आपकी उम्र, जोखिम क्षमता और रिटायरमेंट तक बचे समय पर निर्भर करता है। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- रिटायरमेंट प्लानिंग में महंगाई का क्या रोल है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- महंगाई भविष्य के खर्च को कई गुना बढ़ा देती है। आज का खर्च भविष्य में काफी ज्यादा हो सकता है। महंगाई को नजरअंदाज करने से फंड कम पड़ सकता है। 6-7% सालाना महंगाई दर मानकर योजना बनानी चाहिए। इससे सही अनुमान लगाने में मदद मिलती है। सवाल- रिटायरमेंट प्लानिंग के क्या फायदे हैं? जवाब- सही रिटायरमेंट प्लानिंग के कई फायदे हैं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। सवाल- किन लोगों को रिटायरमेंट प्लानिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए? जवाब- रिटायरमेंट प्लानिंग हर किसी के लिए जरूरी है, लेकिन कुछ लोगों को इसे ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए। जिनकी नौकरी में पेंशन नहीं है। जो लोग फ्रीलांस करते हैं। जिनके पास इमरजेंसी फंड नहीं है। जिनकी अस्थिर और अनियमित इनकम है। युवा प्रोफेशनल्स को जल्दी शुरुआत का फायदा उठाना चाहिए। सवाल- रिटायरमेंट प्लानिंग के दौरान कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- रिटायरमेंट फंड के समय कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए। आइए इन्हें ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- रिटायरमेंट के लिए कितनी बचत जरूरी है? जवाब- इसका जवाब व्यक्ति की लाइफस्टाइल और उसके खर्च पर निर्भर करता है- आमतौर पर वार्षिक जरूरत का 20-25 गुना फंड होना चाहिए। मासिक खर्च के आधार पर लक्ष्य तय किया जाता है। महंगाई, मेडिकल खर्च और लाइफ एक्सपेक्टेंसी ध्यान में रखें। सही प्लानिंग से पूरी उम्र के लिए पर्याप्त फंड बन सकता है। सवाल- रिटायरमेंट प्लानिंग में हेल्थ इंश्योरेंस कितना जरूरी है? जवाब- हेल्थ इंश्योरेंस रिटायरमेंट प्लानिंग का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि- उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों का खतरा और इलाज का खर्च बढ़ता है। बिना इंश्योरेंस के छोटी मेडिकल इमरजेंसी भी बड़ी आर्थिक समस्या बन सकती है। इससे आपकी जमा की हुई बचत जल्दी खत्म हो सकती है। सही और पर्याप्त कवरेज वाला प्लान लेना जरूरी है। कम उम्र में पॉलिसी लेने पर प्रीमियम कम होता है। यह रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा और मानसिक शांति देता है। बेहतर इलाज फाइनेंशियल स्ट्रेस के बिना संभव हो पाता है। सवाल- रिटायरमेंट के बाद इनकम के सोर्स कैसे बनाए जा सकते हैं? जवाब- रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम बनाए रखना जरूरी है। पैसिव इनकम के सोर्स तैयार करें। घर किराये पर देना स्थिर आय का विकल्प है। डिविडेंड देने वाले निवेश (शेयर/फंड) मददगार होते हैं। सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS) नियमित आय का सोर्स है। स्किल के आधार पर पार्ट-टाइम काम या फ्रीलांसिंग कर सकते हैं। कंसल्टिंग से भी अतिरिक्त इनकम प्राप्त की जा सकती है। ……………… ये खबर भी पढ़िए आपका पैसा- SIP और लंप सम में क्या बेहतर: आपकी जरूरत के मुताबिक क्या सही, एक्सपर्ट से जानें दोनों के जोखिम और फायदे हर व्यक्ति अपने भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाना चाहता है। इसके लिए लोग अपनी कमाई का एक हिस्सा भविष्य के लिए बचाते हैं या निवेश करते हैं। हालांकि, कुछ लोग यह नहीं जानते हैं कि कहां और कैसे निवेश करें। उन्हें यह नहीं पता होता कि बड़ा फंड बनाने के लिए SIP या लंप सम में कौन सा तरीका बेहतर है? आगे पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

8th Pay Commission Salary Calculator Scam Explained; APK File

8th Pay Commission Salary Calculator Scam Explained; APK File

3 घंटे पहले कॉपी लिंक बीते कुछ महीनों से 8वें वेतन आयोग से जुड़े अपडेट्स खबरों में हैं। वेतन आयोग भारत सरकार की एक ‘एडमिनिस्ट्रेटिव बॉडी’ है, यह लगभग हर 10 साल में केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में बढ़ोत्तरी की सिफारिश करती है। नए अपडेट्स के कारण केंद्रीय कर्मचारी अपनी बढ़ी सैलरी जानने के लिए उत्सुक हैं। साइबर ठग इस मौके का फायदा उठाकर ठगी कर रहे हैं। इंडियन साइबर क्राइम कोऑडिनेशन सेंटर (I4C) ने भी इसे लेकर अलर्ट जारी किया है। आज ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में ‘8th पे कमीशन सैलरी स्कैम’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- ठग इस स्कैम में लोगों को कैसे फंसा रहे हैं? ऐसे किसी भी साइबर स्कैम से बचने के लिए क्या करें? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- ‘8th पे कमीशन सैलरी कैलकुलेटर स्कैम’ क्या है? जवाब- यह एक साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को वॉट्सएप पर फर्जी मैसेज भेजते हैं। इसमें सैलरी बढ़ोतरी की जानकारी देने के नाम पर APK फाइल डाउनलोड करने को कहा जाता है। जब यूजर इस फाइल को डाउनलोड और इंस्टॉल करता है, स्कैमर्स उसके मोबाइल का एक्सेस ले लेते हैं और बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं। सवाल- इंडियन साइबर क्राइम कोऑडिनेशन सेंटर (I4C) ने लोगों को इस स्कैम से सचेत करने के लिए क्या चेतावनी दी है? जवाब- I4C ने कहा है कि- ‘8th पे कमीशन सैलरी’ के नाम पर फर्जी मैसेज भेजे जा रहे हैं। इन मैसेज में APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है, जो खतरनाक है। ऐसी फाइल्स से मोबाइल डेटा और बैंक से जुड़ी सेंसेटिव जानकारी चुराई जा सकती है। इसलिए किसी भी अनजान लिंक या फाइल पर क्लिक न करें। केवल ऑफिशियल सोर्स से ही जानकारी लें। किसी भी संदिग्ध मैसेज को तुरंत रिपोर्ट करें। सवाल- ठग ‘8th पे सैलरी कैलकुलेटर स्कैम’ में लोगों को कैसे फंसा रहे हैं? जवाब- स्कैमर इस ठगी को कैसे अंजाम देते हैं, इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- लोग इतनी आसानी से ठगों के झांसे में क्यों आ जाते हैं? जवाब- दरअसल लोगों के मन में ये जानने को लेकर उत्सुकता होती है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिश के बाद उनके अकाउंट में कितने रुपए बढ़कर आएंगे। ठग इसी उत्सुकता और लालच का फायदा उठाते हैं। सवाल- ठग ‘8th पे सैलरी कैलकुलेटर स्कैम’ में किन लोगों को टारगेट बना रहे हैं? जवाब- ठग इसमें खासतौर पर केंद्रीय कर्मचारी टारगेट कर रहे हैं। साथ ही पेंशनर्स भी ठगों के निशाने पर हैं। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- APK फाइल डाउनलोड करने से मोबाइल कैसे हैक हो जाता है? जवाब- APK एंड्रॉयड एप इंस्टॉल करने की फाइल होती है। फर्जी APK में मालवेयर (वायरस) हो सकता है। इंस्टॉल होते ही यह एप कुछ परमिशन मांगता है। परमिशन मिलते ही, एप को मोबाइल का एक्सेस मिल जाता है। बैंकिंग एप और OTP की जानकारी भी चोरी हो सकती है। कुछ मालवेयर स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर सकते हैं। पर्सनल डेटा हैकर के सर्वर तक भेजा जाता है और स्कैमर मोबाइल हैक कर लेते हैं। सवाल- ऐसे किसी भी साइबर स्कैम से बचना है तो क्या करें? जवाब- I4C ने इसके लिए कुछ सलाह दी है। सभी टिप्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- स्कैमर्स के मैसेज में क्या रेड फ्लैग होते हैं? इन्हें कैसे पहचानें? जवाब- I4C के अनुसार, स्कैमर्स के मैसेज में कई रेड फ्लैग होते हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर गलती से APK डाउनलोड हो जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसा होने पर तुरंत करें ये काम- सबसे पहले इंटरनेट (Wi-Fi/मोबाइल डेटा) तुरंत बंद करें। संदिग्ध APK से इंस्टॉल हुआ एप तुरंत अनइंस्टॉल करें। मोबाइल की सेटिंग में जाकर सभी अनजान एप्स चेक करें। एंटीवायरस से फोन को स्कैन करें और मालवेयर हटाएं। बैंकिंग एप्स और ईमेल के पासवर्ड तुरंत बदलें। अपने बैंक को तुरंत सूचित करें और ट्रांजैक्शन अस्थाई रूप से ब्लॉक कराएं। OTP, PIN या कोई भी सेंसिटिव डिटेल शेयर न करें। जरूरी हो तो फोन को ‘फैक्ट्री रीसेट’ करवाएं। सवाल- ऐसे अनऑथराइज्ड एप्स से बचने के लिए मोबाइल फोन में कौन-सी सिक्योरिटी सेटिंग्स ऑन रखनी चाहिए? जवाब- मोबाइल फोन में ऑन करें ये सेटिंग्स- हमेशा गूगल प्ले प्रोटेक्ट ऑन रखें ताकि संदिग्ध एप्स डाउनलोड न हो। ‘इंस्टॉल फ्रॉम अननोन सोर्सेस’ ऑप्शन बंद कर दें। मोबाइल फोन अपडेटेड रखें। सिर्फ जरूरी एप्स को ही कैमरा, माइक्रोफोन और फाइल का एक्सेस दें। स्ट्रॉन्ग स्क्रीन लॉक और बायोमेट्रिक सिक्योरिटी ऑन रखें। टू-फैक्टर एसोसिएशन (2FA) एक्टिव रखें। एंटीवायरस या मोबाइल सिक्योरिटी एप का इस्तेमाल करें। सवाल- अगर शक है कि स्कैम हो रहा है तो बैंक अकाउंट को तुरंत कैसे सिक्योर करें? जवाब- ऐसा हो तो तुरंत करें ये काम- तुरंत अपने बैंक की हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके सूचना दें या ब्रांच से संपर्क करें। इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग अस्थाई रूप से ब्लॉक करवाएं। ATM/डेबिट और क्रेडिट कार्ड तुरंत ब्लॉक करें। सभी पासवर्ड और UPI PIN तुरंत बदलें। संदिग्ध ट्रांजैक्शन की तुरंत शिकायत दर्ज करें। SMS/ईमेल अलर्ट एक्टिव रखें। सवाल- इस तरह के साइबर फ्रॉड की शिकायत कहां और कैसे करें? जवाब- ऐसे करें शिकायत- नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर ऑनलाइन शिकायत करें। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें। अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में रिपोर्ट दर्ज कराएं। बैंक से जुड़े फ्रॉड में तुरंत अपने बैंक को सूचित करें। शिकायत करते समय स्क्रीनशॉट, मैसेज, लिंक जैसे सबूत साथ रखें। अपनी पूरी जानकारी सही और स्पष्ट रूप से दें। शिकायत नंबर/रसीद सुरक्षित रखें। जल्दी शिकायत करने से पैसा रिकवरी की संभावना बढ़ती है। ……………… ये खबर भी पढ़िए साइबर लिटरेसी- फास्टैग रिचार्ज स्कैम: जानें कैसे फंसते हैं लोग, सस्ते के लालच में न आएं, रीचार्ज कराते हुए बरतें 10 सावधानियां डिजिटल टोल सिस्टम ने नेशनल हाइवे पर सफर को आसान बनाया है। लेकिन साइबर ठग अब इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। इसके चलते बीते कुछ दिनों में FASTag (फास्टैग) रीचार्ज और एनुअल पास के नाम पर ऑनलाइन ठगी के कई मामले सामने आए हैं। आगे पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

PAN-Based CAS Statement Explained; Mutual Funds

PAN-Based CAS Statement Explained; Mutual Funds

6 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक आजकल ज्यादातर निवेशक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या एप के जरिए SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) करते हैं। निवेशक कुछ SIP जारी रखते हैं, कुछ बीच में ही बंद कर देते हैं, जबकि समय बीतने पर कुछ फंड्स के तो नाम तक भूल जाते हैं। इसके बाद जब टैक्स फाइलिंग या फाइनेंशियल प्लानिंग की जरूरत होती है, तब इन्वेस्टमेंट डॉक्यूमेंट्स, लॉगिन आईडी और स्टेटमेंट ढूंढना मुश्किल हो जाता है। ऐसी कंडीशंस के लिए PAN बेस्ड कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) एक आसान तरीका है। इसके जरिए निवेशक अपने म्यूचुअल फंड्स के सभी निवेश एक ही जगह देख सकते हैं। इससे निवेश की ट्रैकिंग आसान होती है, ओवरलैप का जोखिम भी नहीं होता है। आज ‘आपका पैसा’ कॉलम में हम ‘PAN बेस्ड कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- कैसे इसका इस्तेमाल करें? इसके जरिए क्या-क्या जानकारी मिल सकती है? सवाल- क्या वाकई सिर्फ PAN से सारी SIP की जानकारी मिल सकती है? जवाब- हां, निवेशक PAN नंबर के जरिए SEBI-रजिस्टर्ड RTA (रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट) प्लेटफॉर्म से अपने म्यूचुअल फंड निवेश की पूरी जानकारी एक जगह देख सकते हैं। ये एजेंसियां फंड हाउस के निवेश रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से मेंटेन करती हैं। PAN आधारित CAS में निवेशक को म्यूचुअल फंड्स से जुड़ी सारी जानकारी मिलती है। यह सुविधा निवेश की पारदर्शिता बढ़ाती है और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बिखरे निवेश को व्यवस्थित तरीके से समझने में मदद करती है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। सवाल- PAN कार्ड के जरिए SIP और म्यूचुअल फंड की सारी जानकारी पाने का सही तरीका क्या है? जवाब- आप CAMS या KFintech जैसी ऑफिशियल RTA की वेबसाइट पर जाकर अपना PAN नंबर और रजिस्टर्ड ईमेल/मोबाइल नंबर डालकर सभी म्यूचुअल फंड SIP की जानकारी पा सकते हैं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। सवाल- यह स्टेटमेंट किन इन्वेस्टमेंट्स और SIP को कवर करता है? जवाब- PAN बेस्ड CAS स्टेटमेंट में सभी एक्टिव और बंद SIP देखी जा सकती हैं। आइए इसे पॉइंटर्स में देखिए- ‘इक्विटी’ म्यूचुअल फंड में किया गया निवेश। ‘डेट’ म्यूचुअल फंड में किया गया निवेश। ‘ELSS’ (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) फंड में किया गया निवेश। ‘हाइब्रिड’ फंड में किया गया निवेश। ‘लिक्विड’ फंड में किया गया निवेश। ‘गोल्ड’ में किया गया निवेश। ‘लंप-सम’ (एकमुश्त) निवेश। यह निवेशक को अपने पूरे पोर्टफोलियो का ओवरऑल व्यू देता है। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि कुल निवेश किस एसेट क्लास में ज्यादा है और कहां बैलेंस बनाने की जरूरत है। यह जानकारी लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए बेहद उपयोगी साबित होती है। सवाल- क्या CAS स्टेटमेंट ओवरलैप और डुप्लीकेट SIP से बचा सकता है? जवाब- PAN नंबर के जरिए अपनी SIPs की जानकारी देखकर ओवरलैप और डुप्लीकेट निवेश से बच सकते हैं। अक्सर निवेशक अलग-अलग एप्स से SIP करते हैं और फिर भूल जाते हैं कि उनका पैसा कहां लगा है। इससे कई बार एक ही कैटेगरी के कई फंड्स में निवेश हो जाता है, जिन्हें डुप्लीकेट फंड्स कहते हैं। बहुत ज्यादा फंड्स रखने से रिटर्न कमजोर हो सकता है और पोर्टफोलियो मैनेज करना भी मुश्किल हो सकता है। PAN बेस्ड रिपोर्ट निवेशक को यह समझने में मदद करती है कि किन फंड्स को बनाए रखना है और किन्हें मर्ज या बंद करना बेहतर है। सवाल- टैक्स फाइलिंग और प्लानिंग में यह रिपोर्ट कैसे मददगार है? जवाब- CAS स्टेटमेंट निवेशक को कैपिटल गेन, ELSS डिडक्शन और कुल निवेश की स्पष्ट जानकारी देता है। इससे टैक्स फाइलिंग के दौरान सही आंकड़े दर्ज करना आसान हो जाता है और गलती की आशंका कम हो जाती है। निवेशक यह भी देख सकते हैं कि किस निवेश पर लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म टैक्स लागू होगा। इसके अलावा यह रिपोर्ट फाइनेंशियल गोल्स जैसे रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने की योजना बनाने में भी मदद करती है। इसके सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या CAS स्टेटमेंट सर्विस पूरी तरह सुरक्षित है? जवाब- हां, PAN बेस्ड SIP स्टेटमेंट सर्विस SEBI-रजिस्टर्ड एजेंसियां ही देती हैं। इसलिए यह विश्वसनीय है। डेटा ट्रांसमिशन एन्क्रिप्टेड (वॉट्सएप चैट की तरह) होता है और OTP बेस्ड वेरिफिकेशन के बाद ही स्टेटमेंट जारी किया जाता है। रिपोर्ट केवल रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर भेजी जाती है, जिससे अनऑफिशियल एक्सेस का जोखिम नहीं होता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने PAN, ईमेल और मोबाइल की जानकारी अपडेट रखें और स्टेटमेंट केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही डाउनलोड करें। इससे साइबर फ्रॉड का रिस्क कम होता है। सवाल- क्या मोबाइल पर भी यह स्टेटमेंट देख सकते हैं? जवाब- हां, CAMS और KFintech जैसी वेबसाइट मोबाइल फ्रेंडली हैं। मेल पर आई स्टेटमेंट (PDF फाइल) को स्मार्टफोन में आसानी से खोला जा सकता है। निवेशक इसे सेव, शेयर या प्रिंट भी कर सकते हैं। कुछ फंड हाउस RTA एप्स के जरिए भी पोर्टफोलियो ट्रैकिंग की सुविधा देते हैं। मोबाइल पर स्टेटमेंट मिलने से निवेश की रेगुलर रिव्यू करना आसान हो जाता है। निवेशक जरूरत के अनुसार समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर सकते हैं। सवाल- क्या PAN बेस्ड रिपोर्ट से इन्वेस्ट स्ट्रेटजी बनाने में मदद मिलती है? जवाब- हां, पूरे पोर्टफोलियो को एक साथ देखकर एसेट एलोकेशन और रिस्क प्रोफाइल समझने में आसानी होती है। इससे यह तय करना आसान होता है कि इक्विटी, डेट या गोल्ड में निवेश का अनुपात सही है या नहीं। PAN रिपोर्ट लॉन्ग टर्म में ‘इन्वेस्टमेंट डिसिप्लिन’ को मजबूत करती है और इमोशनल डिसीजन को कम करने में मदद करती है। रेगुलर रिव्यू से निवेशक खराब परफॉर्मेंस वाले फंड्स को समय रहते बदल सकते हैं और बेहतर अवसरों का फायदा उठा सकते हैं। सवाल- अगर कोई SIP भूल गए हैं या बंद करना चाहते हैं तो क्या करें? जवाब- CAS स्टेटमेंट में इनएक्टिव या लो परफॉर्मेंस वाली SIP का पता चल जाता है। निवेशक उसे बंद या मॉडिफाई कर सकते हैं। हालांकि, SIP बंद करने से पहले यह समझना जरूरी है कि इसके लिए आपको कोई चार्ज तो नहीं देना पड़ेगा, टैक्स कितना लगेगा और आपके फाइनेंशियल गोल्स पर क्या असर होगा। कुछ मामलों में SIP को पूरी तरह बंद करने की बजाय उसकी रकम कम करना या पैसा किसी बेहतर फंड में डालना ज्यादा सही फैसला है। ऐसा

Silent Heart Attack Symptoms Explained; Warning Signs

Silent Heart Attack Symptoms Explained; Warning Signs

6 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक खांसी, छींक, थकान और बुखार। ये सब सर्दी-जुकाम और फ्लू के कॉमन लक्षण हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कई बार ये ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ जैसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। मैकगिल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक 55 साल से कम उम्र की 1 से 5 महिलाओं को हार्ट अटैक के दौरान सीने में दर्द बिल्कुल नहीं होता। उन्हें बस मामूली थकान, मतली या बुखार जैसे संकेत दिखते हैं। साइलेंट हार्ट अटैक में हार्ट तक ब्लड फ्लो कम हो जाता है, लेकिन इसके संकेत हल्के या अस्पष्ट होते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को तनाव, थकान या फ्लू समझकर अनदेखा कर देते हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार महिलाओं में मौत का सबसे बड़ा कारण हार्ट डिजीज है। वहीं वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक, हर साल लगभग तीन में से एक महिला की मौत दिल की बीमारी से जुड़ी होती है। इसलिए आज फिजिकल हेल्थ में हम बात करेंगे महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक की। साथ ही जानेंगे कि- महिलाओं में इसके संभावित संकेत क्या हो सकते हैं? किन महिलाओं में इसका जोखिम ज्यादा होता है? एक्सपर्ट: डॉ. हेमंत मदान, सीनियर डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक क्या होता है? जवाब– साइलेंट हार्ट अटैक भी एक तरह का हार्ट अटैक ही होता है। इसमें दिल तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि ऐसा होने पर कोई साफ संकेत दिखाई नहीं देता, न महसूस होता है। साइलेंट हार्ट अटैक होने पर आर्टरीज में रुकावट पैदा होती है, जिससे हार्ट की मांसपेशियों को नुकसान होने लगता है, लेकिन शरीर तेज दर्द के रूप में ‘अलार्म’ नहीं देता। कई बार यह इसलिए होता है क्योंकि नर्व्स की संवेदनशीलता कम हो जाती है। इसलिए दर्द महसूस नहीं होता या बहुत हल्का होता है। यानी अंदर से हार्ट को उतना ही नुकसान हो रहा होता है, जितना सामान्य हार्ट अटैक में होता है। बस फर्क इतना है कि शरीर आपको जोर से संकेत नहीं देता। इसलिए इसे ‘साइलेंट’ हार्ट अटैक कहा जाता है। सवाल– साइलेंट हार्ट अटैक और सामान्य हार्ट अटैक में क्या फर्क है? जवाब– इन दोनों के लक्षण, संकेतों और उसके फर्क को नीचे ग्राफिक से समझते हैं- सवाल– पुरुषों की तुलना में महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक ज्यादा कॉमन क्यों है? जवाब– नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए– 1. ब्लॉकेज पैटर्न अलग होना महिला और पुरुष में ब्लॉकेज का पैटर्न अलग-अलग होता है। पुरुषों में बड़ी आर्टरी में “ब्लॉकेज” ज्यादा साफ होता है। महिलाओं के शरीर में बहुत छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं में समस्या होती है। 2. हॉर्मोन्स का फर्क महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन काफी हद तक हार्ट को प्रोटेक्ट करता है, लेकिन मेनोपॉज के बाद उनमें यह जोखिम बढ़ जाता है। 3. दर्द महसूस करने का तरीका महिलाओं और पुरुषों में दर्द को महसूस करने का तरीका या पेन परसेप्शन भी अलग हो सकता है। महिलाओं को या तो दर्द कम महसूस होता है। या वो दर्द को इग्नोर करने की आदी होती हैं। 4. सारी स्टडीज पुरुषों पर हार्ट अटैक को लेकर लंबे समय तक हुई सारी स्टडीज पुरुषों पर आधारित रही हैं। इसलिए हमें महिलाओं के संबंध में ज्यादा जानकारी और डेटा ही नहीं है। सवाल- महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के संभावित संकेत क्या हो सकते हैं? जवाब– महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर बहुत हल्के या सामान्य समस्याओं जैसे लग सकते हैं। इसलिए कई बार इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है। ग्राफिक में इसके संकेत देखिए- सवाल– क्या सिर्फ थकान या कमजोरी भी साइलेंट हार्ट अटैक का संकेत हो सकती है? जवाब– हां, हार्वर्ड हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अचानक और बिना कारण होने वाली ज्यादा थकान भी हार्ट प्रॉब्लम की ओर इशारा करती है। वहीं हार्ट फाउंडेशन से जुड़ी एक स्टडी में कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक से कुछ महीनों पहले तक लगातार ज्यादा थकान महसूस हो रही थी। सवाल- क्या मानसिक तनाव या डिप्रेशन भी साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकता है? जवाब– हां, लंबे समय तक तनाव या डिप्रेशन रहने पर शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रिनेलिन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सवाल- किन महिलाओं को साइलेंट हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब– कुछ महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम ज्यादा हो सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं कि किन्हें ज्यादा रिस्क रहता है- जिन्हें डायबिटीज है। जो मोटापे से ग्रस्त हैं। जो फिजिकल एक्टिविटी नहीं करतीं। जो स्मोकिंग करती हैं। जो ज्यादा स्ट्रेस में रहती हैं। जिन्हें डिप्रेशन है। जिन्हें ऑटोइम्यून डिजीज (जैसे-लूपस या रूमेटॉइड आर्थराइटिस) है। जिन्हें PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम) है। जिन्हें प्रेग्नेंसी से जुड़े कॉम्पलिकेशन्स (जैसे- प्री-एक्लेम्प्सिया) हैं। जिनका ब्लड प्रेशर हाई रहता है। जिनका मेनोपॉज हो चुका है। जिनका कोलेस्ट्रॉल हाई रहता है। इन लोगों को अपनी हार्ट हेल्थ पर खास ध्यान देना चाहिए और नियमित हेल्थ चेकअप कराना चाहिए। सवाल- क्या हॉर्मोनल बदलाव (जैसे मेनोपॉज) के बाद महिलाओं में इसका खतरा बढ़ जाता है? जवाब– हां, इसका मुख्य कारण एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का स्तर कम होना है। एस्ट्रोजेन वो हॉर्मोन है, जो प्रजनन उम्र में महिलाओं के हार्ट और ब्लड वेसेल्स की सुरक्षा करता है। इसके अलावा हॉर्मोनल बदलाव शरीर के ‘पेन सिग्नल’ को भी प्रभावित कर सकते हैं। सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक का कोई भी संकेत दिखने पर महिलाओं को तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब– इस स्थिति में सबसे जरूरी है कि बिना देर किए तुरंत मेडिकल मदद ली जाए और नजदीकी अस्पताल में जाकर हार्ट से जुड़ी जांच कराई जाए। पॉइंटर्स से समझते हैं- सांस फूले या अचानक बहुत असहजता महसूस हो तो इसे इग्नोर न करें। लक्षण दिखने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या किसी की मदद से अस्पताल पहुंचें। अपने लक्षणों के बारे में किसी करीबी या आसपास मौजूद व्यक्ति को तुरंत जानकारी दें। अगर घर में अकेले रहते हैं तो पैनिक बटन लगवाकर रखें। ऐसी किसी भी इमरजेंसी कंडीशन में पैनिक बटन दबाएं। अगर घर में एस्पिरिन (300mg) है तो एक गोली चबा लें। इसे निगलें नहीं, धीरे-धीरे चबाएं। दरअसल

Goal Investment & SIP Strategy Explained

Goal Investment & SIP Strategy Explained

Hindi News Business Dainik Bhaskar & Aditya Birla MF Workshop: Goal Investment & SIP Strategy Explained जोधपुर16 मिनट पहले कॉपी लिंक पाली के सुशील मूंदड़ा, जोनल हैड ललित शर्मा, जोधपुर के विशेषज्ञ सुरेश अरोड़ा, चेतन लाखोटिया और सुशील मूंदड़ा ने सवालों के जवाब दिए। दैनिक भास्कर और आदित्य बिड़ला म्यूचुअल फंड की ओर से शनिवार को ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत’ विषय पर अवेयरनेस वर्कशॉप हुई। पांचबत्ती स्थित एक होटल में हुई इस वर्कशॉप में देशभर से आए विशेषज्ञों ने सही समय पर और लक्ष्य आधारित निवेश के बारे में प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में आयोजित पैनल डिस्कशन में शहर के युवा, बुजुर्ग और महिलाओं ने निवेश से जुड़े सवाल पूछे। पाली के सुशील मूंदड़ा, जोनल हैड ललित शर्मा, जोधपुर के विशेषज्ञ सुरेश अरोड़ा, चेतन लाखोटिया और सुशील मूंदड़ा ने उनके सवालों के जवाब दिए। पैनल डिस्कशन में शहर के युवा, बुजुर्ग और महिलाओं ने निवेश से जुड़े सवाल पूछे। म्यूचुअल फंड राजस्थान के रीजनल हैड मयंक कुमार सिंह ने बताया कि सेबी और इन्वेस्टर आईपी के माध्यम से निवेशकों को फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की जानकारी दी गई। वर्कशॉप की शुरुआत आईआईटी जोनल हैड ललित शर्मा ने प्रेजेंटेशन के जरिए आज के दौर में निवेश कर लक्ष्य हासिल करने की रणनीति समझाते हुए की। उन्होंने म्यूचुअल फंड, बैंक डिपॉजिट, प्रॉपर्टी और इंश्योरेंस जैसे निवेश विकल्पों के बारे में जानकारी दी। 30 से 35 वर्ष की उम्र में निवेश के फायदे उन्होंने बताया कि 30 से 35 वर्ष की उम्र में निवेश शुरू करने पर मासिक या साप्ताहिक निवेश के साथ लंबी अवधि के विकल्प बेहतर परिणाम दे सकते हैं। 18 वर्ष से अधिक आयु और केवाईसी पूर्ण करने वाले युवा नौकरी, विवाह, बच्चों की पढ़ाई जैसे लक्ष्यों के लिए निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। महिलाओं की पारंपरिक बचत से निवेश की सीख विशेषज्ञों ने कहा कि जिस तरह कई घरों में महिलाएं अलग-अलग डिब्बों में पैसे रखकर बचत करती हैं, उसी तरह निवेश भी अलग-अलग विकल्पों में करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर यह राशि काम आती है। उन्होंने म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय फाइनेंशियल एडवाइजर की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई। लक्ष्य के अनुसार निवेश जरूरी विशेषज्ञों ने बताया कि निवेश हमेशा लक्ष्य के अनुसार करना चाहिए, जैसे बच्चों की शिक्षा, विवाह या भविष्य की जरूरतें आदि। निवेश में कोई गारंटी नहीं होती, इसलिए विशेषज्ञ सलाह जरूरी है। यदि किसी की 5-5 हजार रुपए की चार एसआईपी चल रही हैं तो उन्हें एक ही दिन के बजाय 20-25 दिन के अंतराल पर रखना बेहतर रहता है। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का लाभ मिल सकता है और रिटर्न बेहतर हो सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Instagram Phishing Scam Explained; Fake Messages – OTP Fraud

Instagram Phishing Scam Explained; Fake Messages - OTP Fraud

Hindi News Lifestyle Instagram Phishing Scam Explained; Fake Messages OTP Fraud | Cyber Crime Alert 35 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक आज के समय में इंस्टाग्राम सिर्फ फोटो-वीडियो शेयर करने का प्लेटफॉर्म नहीं है। यह पहचान और कमाई का जरिया भी बन चुका है। यही वजह है कि साइबर अपराधियों की नजर इंस्टाग्राम के आम यूजर्स से लेकर क्रिएटर्स और बिजनेस अकाउंट्स, सभी पर है। बीते कुछ महीनों में इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस स्कैम में साइबर ठग फेक ईमेल या नकली मैसेज भेजकर यूजर्स का अकाउंट हैक करने की कोशिश करते हैं। इन फेक मेल/मैसेज में अक्सर लिखा होता है कि आपका सोशल मीडिया अकाउंट बंद होने वाला है या आपने कोई नियम तोड़ा है। डर के कारण लोग बिना सोचे-समझे भेजे गए लिंक पर क्लिक कर देते हैं। यहीं से स्कैम शुरू होता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को कैसे सुरक्षित रखें। इसलिए आज साइबर लिटरेसी कॉलम में बात इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम की। साथ ही जानेंगे कि- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम से बचने के लिए कौन-सी सावधानियां बरतनी चाहिए? अगर गलती से फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया तो क्या करें? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम क्या है? जवाब- यह एक ऑनलाइन धोखाधड़ी है, जिसमें ठग इंस्टाग्राम के नाम से फर्जी ईमेल, मैसेज या लिंक भेजकर यूजर की लॉगिन डिटेल्स चुराते हैं। इसके बाद अकाउंट हैक कर लेते हैं। सवाल- स्कैमर इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं? जवाब- साइबर अपराधी इस स्कैम में यूजर्स को ऐसे ईमेल या मैसेज भेजते हैं, जो देखने में बिल्कुल ऑफिशियल लगते हैं। इस मैसेज में अक्सर डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, जैसेकि– “आपका अकाउंट कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन कर रहा है।” “अगले 24 घंटों में आपका इंस्टाग्राम अकाउंट बंद कर दिया जाएगा।” “आपका अकाउंट बंद होने वाला है।” “अकाउंट ब्लॉक से बचने के लिए इस लिंक पर जाएं।” इस फेक मैसेज के साथ एक लिंक भी होता है, जो – ऐसा दिखता है जैसे Meta या Instagram की ओर से आया है। यह लिंक असली जैसी दिखने वाली एक नकली वेबसाइट पर लेकर जाता है। यह एक फर्जी लॉगिन पेज होता है। उस पेज पर यूजर अपने क्रेडेंशियल्स दर्ज करता है। फिर वो फर्जी पेज वेरिफिकेशन के लिए OTP मांगता है। OTP डालते ही आपका अकाउंट हैक हो जाता है। स्कैमर्स उसे अपने कंट्रोल में ले लेते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- लोग इतनी आसानी से इस स्कैम के झांसे में कैसे फंस जाते हैं? जवाब- इसके कई कारण हैं। जैसेकि- स्कैमर्स सबसे पहले डर पैदा करते हैं। अकाउंट सस्पेंड होने, पोस्ट हटने या नियमों को उल्लंघन करने जैसे मैसेज देखकर यूजर घबरा जाते हैं। ऊपर से ये ईमेल और मैसेज दिखने में बिल्कुल ऑफिशियल लगते हैं, जिससे शक नहीं होता है। जल्दबाजी में लोग लिंक की जांच नहीं करते और सोचते हैं कि तुरंत लॉगिन करना ही समाधान है। अवेयरनेस की कमी भी एक बड़ी वजह है, जिसके कारण लोग अपनी लॉगिन डिटेल्स खुद ही स्कैमर्स को दे बैठते हैं। सवाल- हैकर्स इंस्टाग्राम अकाउंट को हैक करके क्या-क्या नुकसान पहुंचा सकते हैं? जवाब- हैकर्स पासवर्ड बदलकर अकाउंट पर पूरा कंट्रोल ले सकते हैं और इस तरह के नुकसान पहुंचा सकते हैं– आपका पासवर्ड बदल देना। आपका ईमेल/फोन नंबर हटा देना। आपको आपके ही अकाउंट से बाहर कर देना। अकाउंट रिकवरी का ऑप्शन बदल देना। आर्थिक क्षति पहुंचाना। फॉलोअर्स से ‘इन्वेस्टमेंट’ के नाम पर पैसे मांगना। फर्जी Giveaway या Crypto स्कीम चलाना। आपत्तिजनक या अश्लील पोस्ट डालना। राजनीतिक/विवादित कंटेंट शेयर करना। फर्जी स्टोरी लगाकर बदनाम करना। पर्सनल डेटा चोरी करना। पर्सनल चैट पढ़ना/ब्लैकमेल करना। निजी फोटो/वीडियो यूज करना। आपके नाम से दूसरों को ठगना। दोस्तों को फिशिंग लिंक भेजना। सवाल- क्या इंस्टाग्राम कभी भी ऐसा मैसेज भेजता है कि “24 घंटे के अंदर आपका अकाउंट बंद कर दिया जाएगा?” जवाब- हां, अगर आपका अकाउंट कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने की वजह से सस्पेंड किया जाता है तो इंस्टाग्राम इन-एप नोटिफिकेशन या आधिकारिक ईमेल के जरिए इसकी जानकारी देता है। हालांकि, डायरेक्ट मैसेज (DMs) के जरिए ‘24-48 घंटों के अंदर अकाउंट बंद करने की धमकी’ देने वाले ईमेल आमतौर पर फिशिंग स्कैम होते हैं। सवाल- फिशिंग ईमेल आईडी की पहचान कैसे करें? जवाब- इंस्टाग्राम के नाम से आए फेक ईमेल की पहचान करने के लिए सबसे पहले भेजने वाले की ईमेल आईडी ध्यान से जांचें। इंस्टाग्राम/Meta से जुड़े वैध ईमेल डोमेन की लिस्ट नीचे देखिए। notification@facebookmail.com noreply@facebookmail.com @business.fb.com @support.facebook.com @fb.com @meta.com @account.meta.com @internal.metamail.com @go.metamail.com advertise-noreply@facebookmail.com update@em.facebookmail.com @mediapartnerships.fb.com @global.metamail.com अगर मेल इन आधिकारिक डोमेन से नहीं आया है, तो वह फेक हो सकता है। अक्सर फर्जी ईमेल डोमेन में स्पेलिंग में थोड़ा बहुत हेरफेर होता है। इसलिए डोमेन की स्पेलिंग बहुत ध्यान से पढ़ें। ऐसे किसी भी मेल या मैसेज पर भरोसा न करें, जिसमें- पैसों की डिमांड की गई हो। गिफ्ट का लालच दिया गया हो। अकाउंट डिलीट/बैन करने की धमकी दी गई हो। सवाल- क्या इंस्टाग्राम कभी भी मैसेज भेजकर सिक्योरिटी पासवर्ड मांगता है? जवाब- नहीं, इंस्टाग्राम कभी भी मैसेज, ईमेल या कॉल के जरिए आपकी लॉगिन डिटेल्स, ओटीपी या कोई भी सिक्योरिटी डिटेल नहीं मांगता है। सवाल- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम से बचने के लिए कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- थोड़ी-सी सतर्कता आपके इंस्टाग्राम अकाउंट को सुरक्षित रख सकती है। इसलिए कुछ बुनियादी बातों का खास ख्याल रखें। इसे नीचे दिए गए ग्राफिक से समझिए- सवाल- अगर गलती से फिशिंग लिंक पर क्लिक हो जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसे में तुरंत अपना इंस्टाग्राम पासवर्ड बदलें। सभी डिवाइसेज से लॉगआउट करें और टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करें। साथ ही ईमेल सिक्योर करें और संदिग्ध एक्टिविटी को इंस्टाग्राम में रिपोर्ट करें। सवाल- इंस्टाग्राम से आए आधिकारिक ईमेल की पुष्टि कैसे करें? जवाब- इंस्टाग्राम से आए आधिकारिक ईमेल की पुष्टि के लिए सीधे इंस्टाग्राम एप खोलें। सेटिंग्स के सिक्योरिटी वाले ऑप्शन पर क्लिक करके ‘Emails from Instagram’ में जाएं। यहां आपको इंस्टाग्राम द्वारा भेजे गए सभी असली ईमेल की लिस्ट मिल जाती है, जिससे पता चल जाता है कि मेल रियल है या फेक। ……………… साइबर लिटरेसी से जड़ी ये खबर भी पढ़िए साइबर लिटरेसी- मैट्रिमोनियल प्लेटफार्म

Will Making FAQs; Testament Legal Documents List & Process Explained

Will Making FAQs; Testament Legal Documents List & Process Explained

Hindi News Lifestyle Will Making FAQs; Testament Legal Documents List & Process Explained | Vasiyat 38 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक लोग जीवन भर भागदौड़ करते हैं, ताकि अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर सकें और संपत्ति बना सकें। लेकिन इस सबके बीच अक्सर यह तय करना भूल जाते हैं कि उनके बाद इस संपत्ति का क्या होगा? इसका सबसे अच्छा हल है, वसीयत। यह एक कानूनी डॉक्यूमेंट है, जिसमें व्यक्ति ये तय करता है कि उसकी संपत्ति, बैंक बैलेंस, निवेश और अन्य कीमती चीजें उसके बाद किसे मिलेंगी। वसीयत परिवार को विवाद, तनाव और कानूनी झंझटों से भी बचा सकती है। आज ‘आपका पैसा‘ कॉलम में वसीयत की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- वसीयत बनाना क्यों जरूरी है? इसका कंप्लीट प्रोसेस क्या है? एक्सपर्ट: रुद्र विक्रम सिंह, एडवोकेट, सुप्रीम कोर्ट सवाल- वसीयत क्या होती है? जवाब- वसीयत एक लिखित कानूनी डॉक्यूमेंट है, जिसमें व्यक्ति ये स्पष्ट निर्देश देता है कि मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का मालिक कौन होगा। इसमें बैंक बैलेंस, प्रॉपर्टी, निवेश, गहने और अन्य संपत्तियों का बंटवारा तय किया जाता है। सवाल- वसीयत कौन बना सकता है? जवाब- भारत में कोई भी व्यक्ति, जिसकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक है और जो मानसिक रूप से स्वस्थ है, वसीयत बना सकता है। हालांकि, व्यक्ति को यह साबित करने में सक्षम होना चाहिए कि उसने यह डॉक्यूमेंट किसी दबाव, धोखे या लालच के बिना तैयार किया है। सवाल- वसीयत बनाना क्यों जरूरी है? जवाब- इससे व्यक्ति ये तय कर सकता है कि मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति का मालिक कौन होगा। अगर वसीयत न बनाई जाए तो कानून अपने हिसाब से संपत्ति का बंटवारा करता है, जो व्यक्ति की इच्छाओं के खिलाफ भी हो सकता है। इसके अलावा वसीयत से परिवार में विवाद की आशंका कम हो जाती है और कानूनी प्रक्रिया भी सरल हो जाती है। यह खासतौर पर तब और भी जरूरी है, जब परिवार के कई सदस्य संपत्ति के दावेदार हों। इसके सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- वसीयत कैसे लिखें? जवाब- वसीयत लिखने का कोई तय फॉर्मेट नहीं होता, लेकिन इसमें कुछ नियमों को फॉलो करना जरूरी है। जैसेकि- सबसे पहले व्यक्ति को यह घोषित करना होता है कि वसीयत लिखते समय वह दिमागी रूप से स्वस्थ है और इसे बिना किसी दबाव के लिख रहा है। इसके बाद उसे अपनी सभी संपत्तियों की सूची तैयार करनी होती है। वसीयत के कागज पर यह स्पष्ट रूप से लिखना जरूरी है कि कौन-सी संपत्ति किसे दी जानी है। अगर बच्चे नाबालिग हैं, तो वसीयतनामा पर गार्जियन का नाम लिखना जरूरी है, जो संपत्ति की रक्षा करेगा। बच्चों के बालिग होने पर उन्हें सौंपेगा। इसका पूरा प्रोसेस ग्राफिक से समझिए- सवाल- वसीयत में कौन-कौन सी जानकारी होनी चाहिए? जवाब- वसीयत में आपकी पर्सनल और फाइनेंशियल जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज होनी चाहिए। इसमें वसीयत लिख रहे व्यक्ति का पूरा नाम, जन्मतिथि, पता और पहचान संबंधी जानकारी होनी चाहिए। यह जानकारी आधार और पैन कार्ड के मुताबिक होनी चाहिए। इसमें अपनी सभी चल और अचल संपत्तियों का विवरण देना जरूरी है, जैसे घर, जमीन, बैंक अकाउंट, निवेश आदि। इसमें और कौन-कौन सी जानकारियां जरूरी हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या वसीयत रजिस्टर कराना जरूरी है? जवाब- भारत में वसीयत को रजिस्टर कराना अनिवार्य नहीं है। आप इसे साधारण कागज पर लिखकर भी कानूनी रूप से वैध बना सकते हैं, बशर्ते सभी आवश्यक शर्तें पूरी की गई हों। हालांकि, वसीयत का रजिस्ट्रेशन करवाने से इसकी प्रामाणिकता बढ़ जाती है और भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में इसे चुनौती देना मुश्किल होता है। रजिस्ट्रेशन से डॉक्यूमेंट्स सुरक्षित रहते हैं और इससे छेड़छाड़ की आशंका कम हो जाती है। सवाल- वसीयत में कौन-कौन से कानूनी शब्द होते हैं? इनका क्या मतलब है? जवाब- इसमें कई महत्वपूर्ण कानूनी शब्द होते हैं। आइए इन्हें एक-एक करके समझते हैं। टेस्टेटर- जो व्यक्ति वसीयत बना रहा है। एग्जीक्यूटर- जो व्यक्ति वसीयत को लागू करेगा। बेनिफिशियरी- जिसे/जिन्हें संपत्ति मिलेगी। कोडोसिल- वसीयत में किया गया बदलाव या सुधार। प्रोबेट- अदालत द्वारा वसीयत की पुष्टि। इंटेस्टेट- अगर किसी व्यक्ति की वसीयत लिखे बिना मृत्यु हो जाती है। सवाल- डिजिटल वसीयत (Digital Will) क्या है? जवाब- डिजिटल वसीयत एक ऐसा डॉक्यूमेंट है, जो अक्सर ऑनलाइन सुरक्षित रखा जाता है। इसमें यह लिखा होता है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति की डिजिटल संपत्तियां किसे मिलेंगी, जैसे- सोशल मीडिया अकाउंट क्रिप्टोकरेंसी क्लाउड फाइल्स ईमेल अकाउंट ऑनलाइन बैंकिंग अकाउंट डिजिटल वॉलेट इसमें यह स्पष्ट किया जाता है कि इन अकाउंट्स का एक्सेस किन लोगों को मिलेगा। यह आधुनिक समय में उतनी ही जरूरी है, जितनी पारंपरिक वसीयत। सवाल- अगर वसीयत न लिखी गई हो तो क्या होगा? जवाब- अगर वसीयत लिखे बिना ही किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसकी संपत्ति का बंटवारा कानून के अनुसार होता है। हिन्दू उत्तराधिकार कानून- हिंदुओं के लिए। इंडियन सक्सेशन एक्ट- ईसाइयों और पारसियों के लिए। शरीयत कानून- मुसलमानों के लिए। इस स्थिति में व्यक्तिगत इच्छाओं का कोई महत्व नहीं दिया जाता और संपत्ति तय कानूनी नियमों के अनुसार बांटी जाती है। सवाल- क्या वसीयत बदली जा सकती है? जवाब- हां, वसीयत को जीवित रहते किसी भी समय बदला जा सकता है। अगर आपकी संपत्ति, पारिवारिक स्थिति या इच्छाओं में बदलाव आता है तो आप नई वसीयत बना सकते हैं। इसमें संशोधन भी किया जा सकता है। नई वसीयत बनाते ही पुरानी अपने आप निरस्त हो जाती है। संशोधन करते समय भी नई वसीयत की तरह ही पूरी प्रक्रिया अपनानी होती है। सवाल- क्या नॉमिनी ही वसीयत का असली मालिक होता है? जवाब- नहीं, नॉमिनी केवल ट्रस्टी होता है, वह असली मालिक नहीं होता है। उसका काम संपत्ति को सुरक्षित रखना और उसे सही वारिस तक पहुंचाना होता है। कानूनी मालिक वही होता है, जिसका नाम वसीयत में बेनीफिशियरी के रूप में लिखा होता है। सवाल- क्या वसीयत को चुनौती दी जा सकती है? जवाब- हां, वसीयत को चुनौती दी जा सकती है, लेकिन यह सिर्फ सीमित परिस्थितियों में होता है, जैसे- अगर दबाव बनाकर वसीयत लिखवाई गई हो। अगर धोखाधड़ी की गई हो। अगर मानसिक अस्थिरता में वसीयत लिखवाई गई हो। अगर गवाह मुकर जाएं। अगर डॉक्यूमेंट्स अस्पष्ट हैं। इसलिए इसे साफ भाषा, सही प्रक्रिया और

Soya Chunks Health Benefits Explained; Protein – Nutritional Value

Soya Chunks Health Benefits Explained; Protein - Nutritional Value

Hindi News Lifestyle Soya Chunks Health Benefits Explained; Protein Nutritional Value | Side Effects 28 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक सोया चंक्स शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स है। इसमें प्रोटीन के साथ फाइबर, कैल्शियम और आयरन जैसे कई जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं। ये मसल्स और हड्डियों को मजबूत रखने व शरीर की इम्यूनिटी को सपोर्ट करने में मदद करता है। ‘नेशनल सेंटर फॉर कॉम्प्लिमेंटरी एंड इंटीग्रेटिव हेल्थ (NCCIH)’ के मुताबिक, सोया चंक्स कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने में मददगार हैं। इससे महिलाओं में मेनोपॉज के दौरान होने वाले हॉट फ्लैशेज (अचानक तेज गर्मी महसूस होना) से भी राहत मिलती है। कुछ स्टडीज में पता चला है कि इससे ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क भी कम हो सकता है। साथ ही यह हड्डियों को मजबूत रखने और ब्लड प्रेशर को संतुलित करने में भी मददगार है। हालांकि, हर व्यक्ति में इसका प्रभाव अलग हो सकता है। फिर भी संतुलित मात्रा में सोया चंक्स आमतौर पर सेहत के लिए फायदेमंद है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में हम सोया चंक्स की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सोया चंक्स में कौन-कौन से न्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं? क्या ज्यादा सोया चंक्स खाने के कोई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं? किन लोगों को सोया चंक्स नहीं खाना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइडटुडे’ सवाल- सोया चंक्स में कौन-कौन से पोषक तत्व पाए जाते हैं? जवाब- ‘यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA)’ के मुताबिक, 100 ग्राम सोया चंक्स में लगभग 50 ग्राम प्रोटीन होता है, जो मसल बिल्डिंग और रिकवरी के लिए बेहद फायदेमंद है। सोया चंक्स वेजिटेरियन और वीगन लोगों के लिए प्रोटीन का एक बेहतरीन सोर्स है। इसमें कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे कई जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं। नीचे दिए ग्राफिक में पानी में भिगोए हुए 100 ग्राम सोया चंक्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू देखिए- सवाल- सोया चंक्स कैसे तैयार किए जाते हैं? जवाब- सोयाबीन से तेल निकालने के बाद बचे हुए हिस्से काे बारीक पीस लिया जाता है। फिर इसे प्रोसेस करके ‘सोया चंक्स’ बनाए जाते हैं। इसे बनाने की प्रक्रिया समझिए- कच्चे सोयाबीन से तेल निकालकर बचे हुए ‘डी-फैटेड सोया फ्लोर’ को पानी के साथ मिक्सर में मिलाया जाता है, जिससे गाढ़ी स्लरी बनती है। यह स्लरी सोया नगेट ‘एक्सट्रूडर कुकिंग मशीन’ में डाली जाती है। इसके अंदर स्लरी को हाई टेम्परेचर और प्रेशर पर पकाया जाता है। मशीन पके हुए सोया पेस्ट को कटर की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देती है। यह प्रक्रिया हाई प्रेशर में होती है, जिससे सोया चंक्स को स्पंजी टेक्सचर मिलता है। इन छोटे-छोटे टुकड़ों को ड्रायर में सुखा लिया जाता है। इनकी क्वालिटी जांचकर अंत में पैक करके बाजार में भेज दिया जाता है। सवाल- सोया चंक्स हमारी सेहत के लिए कितने फायदेमंद हैं? जवाब- सोया चंक्स एक हाई-प्रोटीन, लो-फैट और फाइबर से भरपूर फूड है, जो शरीर की कई जरूरतों को पूरा करता है। जैसेकि- सोया चंक्स में लगभग 52% प्रोटीन होता है, जो मसल्स ग्रोथ और रिपेयर में मदद करता है। हाई फाइबर और लो फैट होने के कारण इससे पेट देर तक भरा रहता है। यह वेट मैनेजमेंट में सपोर्ट करता है। बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) कम करके हार्ट हेल्थ को सपोर्ट करता है। कैल्शियम और फॉस्फोरस से भरपूर होने के कारण हड्डियों और दांतों को मजबूती देता है। आयरन से भरपूर होने के कारण हीमोग्लोबिन लेवल सुधारने में मदद करता है। इसमें मौजूद डाइटरी फाइबर पाचन बेहतर करता है। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करने में भी मदद करता है। सोया चंक्स में पौधे में पाया जाने वाला ‘आइसोफ्लेवोन्स’ कंपाउंड होता है। ये मेनोपॉज से गुजर रही महिलाओं में हॉट फ्लैशेज जैसी समस्याओं को कम करता है। इसमें मौजूद फॉस्फोरस ब्रेन फंक्शन और मेमोरी को सपोर्ट करता है। नीचे दिए ग्राफिक में इसके हेल्थ बेनिफिट्स देखिए- सवाल- सोया चंक्स को अपनी डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं? जवाब- इसे अपनी रोजमर्रा की डाइट में आसानी से शामिल कर सकते हैं। जैसेकि- इसे सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। चावल से बने व्यंजन जैसे, पुलाव या फ्राइड राइस में इस्तेमाल हो सकता है। इसे सूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। सोया चंक्स को उबालकर सलाद में मिला सकते हैं। इसे सब्जियों के साथ हल्का सा भूनकर भी खा सकते हैं। सवाल- क्या सोया चंक्स के ज्यादा सेवन से कोई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं? जवाब- हां, इसके ज्यादा सेवन के कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। जैसेकि- गैस सूजन अपच दस्त कुछ लोगों में सोया से एलर्जी भी होती है, जिससे खुजली, रैशेज या सांस लेने में परेशानी हो सकती है। सोया में मौजूद ‘फाइटोएस्ट्रोजेन थायरॉइड’ से पीड़ित लोगों में हाॅर्मोनल असंतुलन हो सकता है। सवाल- एक दिन में कितना सोया चंक्स खाना सुरक्षित है? जवाब- सीनियर डाइटीशियन डाॅ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि आमतौर पर एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए एक दिन में 25 से 30 ग्राम सोया चंक्स सुरक्षित है। पकाने के बाद यह मात्रा लगभग ½ से 1 कटोरी हो जाती है। सवाल- क्या डायबिटिक लोग सोया चंक्स खा सकते हैं? जवाब- हां, इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स लो होता है। इसलिए यह ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ाता है। यह डायबिटिक लोगों के लिए बेहतर विकल्प है। सवाल- क्या बच्चों को सोया चंक्स देना सही है? जवाब- हां, सीमित मात्रा में बच्चों को सोया चंक्स दिया जा सकता है। ये उनकी ग्रोथ, मसल डेवलपमेंट और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। अगर बच्चे को कोई हेल्थ कंडीशन है तो पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। सवाल- किन लोगों को सोया चंक्स नहीं खाना चाहिए? जवाब- डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि कुछ लोगों के लिए सोया चंक्स नुकसानदायक हो सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक में देखिए- सवाल- मार्केट से सोया चंक्स खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- सोया चंक्स खरीदते समय उनकी क्वालिटी पर ध्यान देना जरूरी है। इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें। जैसेकि- पैकेट पर FSSAI नंबर जरूर देखें। मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट भी चेक करें। देखें कि पैकेट सील्ड है या नहीं। अजीब गंध वाले सोया चंक्स न खरीदें। ब्रांडेड और भरोसेमंद कंपनी के सोया चंक्स चुनें। इंग्रीडिएंट लिस्ट देखें। चेक करें कि इसमें अनावश्यक

Why Laser Is Used in Surgery Medical Science Explained Benefits | सर्जरी में लेजर का इस्तेमाल क्यों होता है जानें वैज्ञानिक कारण

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Last Updated:February 25, 2026, 11:41 IST Laser Surgery Benefits for Surgery: आजकल अधिकतर सर्जरी लेजर के जरिए की जा रही हैं. एक्सपर्ट्स की मानें तो लेजर सर्जरी बेहद सटीक होती है और इसमें कम ब्लीडिंग होती है. इस तकनीक से मरीजों की रिकवरी भी तेजी से होती है. यही वजह है कि सर्जरी में लेजर लाइट का इस्तेमाल होता है. यह तकनीक कई प्रक्रियाओं को ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी बना सकती है. ख़बरें फटाफट लेजर सर्जरी को ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. Why Laser Light Good for Surgery: मेडिकल साइंस में लगातार नए बदलाव हो रहे हैं और इलाज के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी सामने आ रही हैं. कई दशक पहले जहां अधिकतर सर्जरी सर्जिकल ब्लेड से चीरा लगाकर की जाती थीं, लेकिन अब ज्यादातर सर्जरी लेजर के जरिए की जा रही हैं. आज आंख, स्किन, पेट, किडनी, दांत और कुछ कैंसर संबंधी ऑपरेशन भी लेजर की मदद से किए जा रहे हैं. अक्सर लोगों के मन में सवाल यह उठता है कि आखिर सर्जरी में लेजर लाइट का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है? अगर आप भी इसका जवाब जानना चाहते हैं, तो इस पूरी खबर को पढ़ लीजिए. अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक लेजर का पूरा नाम लाइट एंप्लिफिकेशन बाइ स्टिम्युलेटेड एमिशन ऑफ रेडिएशन (LASER) है. लेजर लाइट फोकस्ड, एक दिशा में जाने वाली और हाई एनर्जी वाली वाली होती है. यही विशेषताएं इसे सर्जरी के लिए उपयुक्त बनाती हैं. लेजर की सबसे बड़ी खासियत उसकी सटीकता (precision) है. पारंपरिक सर्जिकल ब्लेड की तुलना में लेजर लाइट बहुत ही कंट्रोल तरीके से टिश्यूज को काट सकती है. लेजर सर्जरी में आसपास के स्वस्थ टिश्यूज को कम से कम नुकसान पहुंचता है, क्योंकि डॉक्टर बहुत छोटे और सटीक क्षेत्र पर एनर्जी केंद्रित कर सकते हैं. इससे ऑपरेशन के दौरान अनावश्यक कटाव और चोट की संभावना घट जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. US फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट बताती है कि लेजर लाइट जब टिश्यूज को काटती है, तब वह सी समय छोटे ब्लड वेसल्स को सील भी कर देती है. इस प्रोसेस को मेडिकल साइंस में कोएगुलेशन कहा जाता है. इससे खून बहना कम होता है और सर्जरी ज्यादा सुरक्षित बनती है. पारंपरिक सर्जरी में ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती थी, लेकिन लेजर में ब्लीडिंग कम होती है. यही वजह है कि कई कॉस्मेटिक और डर्मेटोलॉजी प्रक्रियाओं में लेजर को प्राथमिकता दी जाती है. आजकल आंखों की अधिकतर सर्जरी लेजर लाइट से की जाती हैं, क्योंकि इससे कई तरह के खतरे कम हो जाते हैं. मेडिकल एक्सपर्ट्स की मानें तो लेजर का उपयोग इंफेक्शन के जोखिम को भी कम कर सकता है. लेजर सर्जरी में ब्लेड की तरह बॉडी से डायरेक्ट संपर्क नहीं होता है. इसलिए बैक्टीरिया के फैलने का खतरा घटता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार सर्जरी के बाद इंफेक्शन दुनियाभर में एक बड़ी चुनौती है. लेजर तकनीक इस इंफेक्शन को कम करती है और मरीज की रिकवरी को बेहतर बना सकती हैं. हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि संक्रमण की रोकथाम केवल लेजर पर निर्भर नहीं करती, बल्कि प्रॉपर प्रोटोकॉल पर आधारित होती है. लेजर सर्जरी का एक बड़ा फायदा फास्ट रिकवरी है. कम कट और कम ब्लीडिंग के कारण सूजन और दर्द भी कम होता है. आई डिजीज जैसे मोतियाबिंद या रेटिना संबंधी प्रक्रियाओं में लेजर का खूब इस्तेमाल किया जाता है. अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी के अनुसार आंखों की कई बीमारियों में लेजर ट्रीटमेंट असरदार और अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है. हालांकि इस तरह की सर्जरी हमेशा क्वालिफाइड एक्सपर्ट से ही करानी चाहिए. लेजर हर सर्जरी के लिए उपयुक्त नहीं है. इसकी कुछ लिमिटेशंस भी होती हैं. कुछ जटिल या गहरे आंतरिक ऑपरेशन में पारंपरिक सर्जिकल तकनीक ज्यादा प्रभावी हो सकती है. इसके अलावा लेजर उपकरण महंगे होते हैं और इनके लिए स्पेशल ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 25, 2026, 11:41 IST

SCSS Benefits Explained; Senior Citizen Savings Scheme Interest Rate & Rules

SCSS Benefits Explained; Senior Citizen Savings Scheme Interest Rate & Rules

Hindi News Lifestyle SCSS Benefits Explained; Senior Citizen Savings Scheme Interest Rate & Rules 30 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक रिटायरमेंट के बाद सबसे बड़ा सवाल होता है कि अब नियमित इनकम के बिना खर्च कैसे चलेगा? ऐसे में अगर पहले से प्लानिंग न की जाए तो आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। अगर आपने पहले से पेंशन की कोई प्लानिंग नहीं की है, तो दिक्कतें और बढ़ सकती हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि भारत सरकार ने सीनियर सिटिजन्स के लिए ऐसी कई योजनाएं बनाई हैं, जिनसे उन्हें हर महीने तय राशि मिलती है। इन्हीं में से एक स्कीम है– सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, जिसमें 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को सुरक्षित रिटर्न मिलता है। इसलिए आज ‘आपका पैसा‘ कॉलम में ‘सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- इस सरकारी योजना का लाभ किसे मिल सकता है? इसमें हर महीने कितनी पेंशन मिल सकती है? एक्सपर्ट: राजशेखर, फाइनेंशियल एक्सपर्ट सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SCSS) क्या है? जवाब- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SCSS) एक सरकारी बचत और पेंशन योजना है। यह खासतौर पर 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए बनाई गई है। इस सेविंग स्कीम में पैसे जमा करने पर ब्याज के साथ हर तीन महीने में पेंशन भी मिलती है, जिससे रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम बनी रहती है। इसमें टैक्स में छूट भी मिलती है। इसलिए यह सीनियर सिटिजंस के लिए निवेश और पेंशन का अच्छा विकल्प है। सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में कौन निवेश कर सकता है? जवाब- SCSS स्कीम में निवेश करने के लिए कुछ क्राइटेरिया को पूरा करना जरूरी होता है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में कितना निवेश कर सकते हैं? जवाब- इसमें आप एक बार में अधिकतम 30 लाख रुपए तक निवेश कर सकते हैं। अगर पति और पत्नी दोनों के खाते अलग हैं, तो कुल मिलाकर 60 लाख रुपए तक जमा किए जा सकते हैं। इस स्कीम में कम-से-कम 1,000 रुपए से निवेश शुरू किया जा सकता है। ध्यान देने की बात ये है कि पैसे हमेशा 1,000 के गुणांक में ही जमा किए जा सकते हैं। यानी 1000, 2000, 3000… इसमें पैसा एक साथ यानी एकमुश्त जमा करना होता है, किस्तों में नहीं दे सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम जैसे पीएफ (प्रोविडेंट फंड) या ग्रेच्युटी को यहां लगाकर आप हर तिमाही अच्छे ब्याज के साथ नियमित कमाई कर सकते हैं। सवाल- सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में कितनी ब्याज दर और कितनी पेंशन मिलती है? जवाब- इसमें वर्तमान ब्याज दर 8.2% सालाना है। ब्याज हर तीन महीने में खाते में क्रेडिट हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, 30 लाख रुपए के निवेश पर सालाना 2.46 लाख रुपए यानी लगभग 20,500 रुपए प्रति माह के बराबर नियमित आय मिलती है। सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम की सभी विशेषताओं को विस्तार से समझते हैं। सुरक्षित निवेश: यह सरकारी योजना है। इसलिए इसमें लगाया गया पैसा सुरक्षित रहता है और तय समय पर निश्चित रिटर्न मिलता है। ब्याज दर: वर्तमान में 8.2% प्रतिवर्ष की दर से ब्याज दिया जाता है (वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के लिए)। निवेश सीमा: न्यूनतम निवेश 1,000 और अधिकतम 30 लाख रुपए तक किया जा सकता है। निवेश का तरीका: एक लाख रुपए तक का निवेश नकद किया जा सकता है। इससे अधिक राशि के लिए चेक के माध्यम से भुगतान अनिवार्य है। समयावधि: योजना की मूल अवधि 5 साल है, जिसे 3 साल और बढ़ाया जा सकता है। विस्तार के लिए मैच्योरिटी के एक साल के भीतर आवेदन करना होता है। खाता ट्रांसफर सुविधा: खाता पोस्ट ऑफिस और बैंक के बीच ट्रांसफर किया जा सकता है। यह सुविधा पूरे भारत में उपलब्ध है। नॉमिनी सुविधा: खाता खोलते समय या बाद में नॉमिनी नियुक्त किया जा सकता है। सवाल- क्या सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में निवेश करने पर टैक्स में भी छूट मिलती है? जवाब- हां, SCSS में निवेश करने पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपए तक की छूट मिलती है। यह छूट केवल मूल निवेश राशि पर लागू होती है। स्कीम में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है। सालाना ब्याज 50,000 रुपए से ज्यादा होने पर TDS कटता है। फॉर्म 15H/15G जमा करके TDS से राहत ली जा सकती है। टैक्स प्लानिंग के लिए SCSS उपयोगी है, लेकिन ब्याज पर टैक्स ध्यान रखें। सवाल- क्या मैच्योरिटी से पहले पैसा निकाल सकते हैं? जवाब- हां, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में मैच्योरिटी से पहले पैसा निकाला जा सकता है, लेकिन इस पर पेनल्टी लग सकती है। अगर खाता एक साल के भीतर बंद किया जाता है, तो मूलधन पर मिला ब्याज वापस लिया जाता है। 1-2 साल के बीच 1.5% और 2 साल बाद 1% की कटौती होती है। सवाल- SCSS खाता कहां और कैसे खोलें? जवाब- SCSS खाता किसी भी अधिकृत बैंक या पोस्ट ऑफिस में खोला जा सकता है। इसके लिए आधार कार्ड, PAN कार्ड और आयु प्रमाण जैसे डॉक्यूमेंट्स जरूरी होते हैं। निर्धारित फॉर्म भरकर और एकमुश्त राशि जमा करके खाता आसानी से खोला जा सकता है, जिससे तिमाही आय शुरू हो जाती है। सवाल- क्या एक से ज्यादा खाते खोल सकते हैं? जवाब- हां, एक व्यक्ति SCSS में एक से ज्यादा खाते खोल सकता है, लेकिन सभी खातों में कुल निवेश 30 लाख रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा जॉइंट अकाउंट केवल लाइफ पार्टनर के साथ ही खोला जा सकता है। इस खाते में जमा राशि पहले अकाउंट होल्डर के नाम पर मानी जाती है। सवाल- क्या इसमें नॉमिनी जोड़ सकते हैं? जवाब- हां, SCSS खाते में नॉमिनी जोड़ने की सुविधा उपलब्ध है। खाता खोलते समय या बाद में भी नॉमिनी नामित किया जा सकता है। एक या एक से अधिक नॉमिनी जोड़े जा सकते हैं, जिससे खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में राशि का ट्रांसफर आसान और सुरक्षित हो जाता है। सवाल- क्या ब्याज दर बदल सकती है? जवाब- SCSS की ब्याज दर सरकार द्वारा हर तिमाही तय की जाती है। इसलिए समय-समय पर इसमें बदलाव हो सकता है। हालांकि एक बार जब आप निवेश