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Silent Heart Attack Symptoms Explained; Warning Signs

Silent Heart Attack Symptoms Explained; Warning Signs

6 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा

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खांसी, छींक, थकान और बुखार। ये सब सर्दी-जुकाम और फ्लू के कॉमन लक्षण हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कई बार ये ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ जैसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। मैकगिल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक 55 साल से कम उम्र की 1 से 5 महिलाओं को हार्ट अटैक के दौरान सीने में दर्द बिल्कुल नहीं होता। उन्हें बस मामूली थकान, मतली या बुखार जैसे संकेत दिखते हैं।

साइलेंट हार्ट अटैक में हार्ट तक ब्लड फ्लो कम हो जाता है, लेकिन इसके संकेत हल्के या अस्पष्ट होते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को तनाव, थकान या फ्लू समझकर अनदेखा कर देते हैं।

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार महिलाओं में मौत का सबसे बड़ा कारण हार्ट डिजीज है। वहीं वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक, हर साल लगभग तीन में से एक महिला की मौत दिल की बीमारी से जुड़ी होती है।

इसलिए आज फिजिकल हेल्थ में हम बात करेंगे महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक की। साथ ही जानेंगे कि-

  • महिलाओं में इसके संभावित संकेत क्या हो सकते हैं?
  • किन महिलाओं में इसका जोखिम ज्यादा होता है?

एक्सपर्ट: डॉ. हेमंत मदान, सीनियर डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम

सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक क्या होता है?

जवाब– साइलेंट हार्ट अटैक भी एक तरह का हार्ट अटैक ही होता है। इसमें दिल तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि ऐसा होने पर कोई साफ संकेत दिखाई नहीं देता, न महसूस होता है। साइलेंट हार्ट अटैक होने पर आर्टरीज में रुकावट पैदा होती है, जिससे हार्ट की मांसपेशियों को नुकसान होने लगता है, लेकिन शरीर तेज दर्द के रूप में ‘अलार्म’ नहीं देता।

कई बार यह इसलिए होता है क्योंकि नर्व्स की संवेदनशीलता कम हो जाती है। इसलिए दर्द महसूस नहीं होता या बहुत हल्का होता है। यानी अंदर से हार्ट को उतना ही नुकसान हो रहा होता है, जितना सामान्य हार्ट अटैक में होता है। बस फर्क इतना है कि शरीर आपको जोर से संकेत नहीं देता। इसलिए इसे ‘साइलेंट’ हार्ट अटैक कहा जाता है।

सवाल– साइलेंट हार्ट अटैक और सामान्य हार्ट अटैक में क्या फर्क है?

जवाब– इन दोनों के लक्षण, संकेतों और उसके फर्क को नीचे ग्राफिक से समझते हैं-

सवाल– पुरुषों की तुलना में महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक ज्यादा कॉमन क्यों है?

जवाब– नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए–

1. ब्लॉकेज पैटर्न अलग होना

महिला और पुरुष में ब्लॉकेज का पैटर्न अलग-अलग होता है। पुरुषों में बड़ी आर्टरी में “ब्लॉकेज” ज्यादा साफ होता है। महिलाओं के शरीर में बहुत छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं में समस्या होती है।

2. हॉर्मोन्स का फर्क

महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन काफी हद तक हार्ट को प्रोटेक्ट करता है, लेकिन मेनोपॉज के बाद उनमें यह जोखिम बढ़ जाता है।

3. दर्द महसूस करने का तरीका

महिलाओं और पुरुषों में दर्द को महसूस करने का तरीका या पेन परसेप्शन भी अलग हो सकता है। महिलाओं को या तो दर्द कम महसूस होता है। या वो दर्द को इग्नोर करने की आदी होती हैं।

4. सारी स्टडीज पुरुषों पर

हार्ट अटैक को लेकर लंबे समय तक हुई सारी स्टडीज पुरुषों पर आधारित रही हैं। इसलिए हमें महिलाओं के संबंध में ज्यादा जानकारी और डेटा ही नहीं है।

सवाल- महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के संभावित संकेत क्या हो सकते हैं?

जवाब– महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर बहुत हल्के या सामान्य समस्याओं जैसे लग सकते हैं। इसलिए कई बार इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है। ग्राफिक में इसके संकेत देखिए-

सवाल– क्या सिर्फ थकान या कमजोरी भी साइलेंट हार्ट अटैक का संकेत हो सकती है?

जवाब– हां, हार्वर्ड हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अचानक और बिना कारण होने वाली ज्यादा थकान भी हार्ट प्रॉब्लम की ओर इशारा करती है। वहीं हार्ट फाउंडेशन से जुड़ी एक स्टडी में कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक से कुछ महीनों पहले तक लगातार ज्यादा थकान महसूस हो रही थी।

सवाल- क्या मानसिक तनाव या डिप्रेशन भी साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकता है?

जवाब– हां, लंबे समय तक तनाव या डिप्रेशन रहने पर शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रिनेलिन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

सवाल- किन महिलाओं को साइलेंट हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब– कुछ महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम ज्यादा हो सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं कि किन्हें ज्यादा रिस्क रहता है-

  • जिन्हें डायबिटीज है।
  • जो मोटापे से ग्रस्त हैं।
  • जो फिजिकल एक्टिविटी नहीं करतीं।
  • जो स्मोकिंग करती हैं।
  • जो ज्यादा स्ट्रेस में रहती हैं।
  • जिन्हें डिप्रेशन है।
  • जिन्हें ऑटोइम्यून डिजीज (जैसे-लूपस या रूमेटॉइड आर्थराइटिस) है।
  • जिन्हें PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम) है।
  • जिन्हें प्रेग्नेंसी से जुड़े कॉम्पलिकेशन्स (जैसे- प्री-एक्लेम्प्सिया) हैं।
  • जिनका ब्लड प्रेशर हाई रहता है।
  • जिनका मेनोपॉज हो चुका है।
  • जिनका कोलेस्ट्रॉल हाई रहता है।

इन लोगों को अपनी हार्ट हेल्थ पर खास ध्यान देना चाहिए और नियमित हेल्थ चेकअप कराना चाहिए।

सवाल- क्या हॉर्मोनल बदलाव (जैसे मेनोपॉज) के बाद महिलाओं में इसका खतरा बढ़ जाता है?

जवाब– हां, इसका मुख्य कारण एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का स्तर कम होना है। एस्ट्रोजेन वो हॉर्मोन है, जो प्रजनन उम्र में महिलाओं के हार्ट और ब्लड वेसेल्स की सुरक्षा करता है। इसके अलावा हॉर्मोनल बदलाव शरीर के ‘पेन सिग्नल’ को भी प्रभावित कर सकते हैं।

सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक का कोई भी संकेत दिखने पर महिलाओं को तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब– इस स्थिति में सबसे जरूरी है कि बिना देर किए तुरंत मेडिकल मदद ली जाए और नजदीकी अस्पताल में जाकर हार्ट से जुड़ी जांच कराई जाए। पॉइंटर्स से समझते हैं-

  • सांस फूले या अचानक बहुत असहजता महसूस हो तो इसे इग्नोर न करें।
  • लक्षण दिखने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या किसी की मदद से अस्पताल पहुंचें।
  • अपने लक्षणों के बारे में किसी करीबी या आसपास मौजूद व्यक्ति को तुरंत जानकारी दें।
  • अगर घर में अकेले रहते हैं तो पैनिक बटन लगवाकर रखें। ऐसी किसी भी इमरजेंसी कंडीशन में पैनिक बटन दबाएं।
  • अगर घर में एस्पिरिन (300mg) है तो एक गोली चबा लें। इसे निगलें नहीं, धीरे-धीरे चबाएं। दरअसल एस्पिरिन एक ब्लड थिनर है, जो क्लॉट को बढ़ने से रोकता है।
  • कहीं बैठकर पीठ टिकाएं, पैर जमीन पर रखें। इस दौरान लेटना या घूमना खतरनाक हो सकता है।
  • ऐसी कंडीशन में बहुत आराम से धीरे-धीरे सांस लें।

सवाल– डॉक्टर साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट करते हैं?

जवाब– साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए डॉक्टर कई तरह की जांचें करते हैं, जिनसे हार्ट कंडीशन और धमनियों में ब्लॉकेज का पता लगाया जा सकता है। जैसे-

ब्लड टेस्ट– ब्लड टेस्ट में ट्रॉपोनिन जैसे प्रोटीन चेक किए जाते हैं, जो दिल की मांसपेशियों के अंदर होते हैं। जब हार्ट को नुकसान होता है, तो ये खून में बढ़ जाते हैं।

ईसीजी– यह टेस्ट हार्ट की इलेक्ट्रिकल गतिविधि को रिकॉर्ड करता है और हार्ट अटैक के संकेत दिखा सकता है।

कार्डिएक कैथेटराइजेशन और कोरोनरी एंजियोग्राफी– इसमें एक पतली ट्यूब के जरिए हार्ट की आर्टरीज में डाई डालकर एक्स-रे से ब्लॉकेज या संकुचन देखा जाता है।

सीटी स्कैन (CT Scan)- यह दिल और कोरोनरी आर्टरीज में ब्लॉकेज या कैल्शियम जमाव का पता लगाने में मदद करता है।

एमआरआई (MRI) – इससे हार्ट मसल्स की संरचना और किसी पुराने नुकसान का पता लगाया जा सकता है।

एक्सरसाइज स्ट्रेस टेस्ट– इस टेस्ट में ट्रेडमिल या एक्सरसाइज के दौरान हार्ट की कार्यक्षमता और ब्लड फ्लो को जांचा जाता है।

न्यूक्लियर स्ट्रेस टेस्ट– इस टेस्ट में एक विशेष रेडियोएक्टिव ट्रेसर की मदद से हार्ट तक ब्लड फ्लो को देखा जाता है।

इकोकार्डियोग्राम (ECHO) – यह अल्ट्रासाउंड आधारित टेस्ट है, जिससे हार्ट के वाल्व और पंपिंग क्षमता का आकलन किया जाता है।

सवाल– अगर किसी महिला को डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है तो क्या उसे अतिरिक्त सावधान रहना चाहिए? किस तरह की सावधानियां जरूरी हैं?

जवाब– हां, ऐसी महिलाओं को हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा हो सकता है। इसलिए उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए। पॉइंटर्स से समझते हैं कि उन्हें किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए-

  • ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखें।
  • समय-समय पर हार्ट हेल्थ की जांच कराएं।
  • संतुलित और हेल्दी डाइट लें।
  • शारीरिक गतिविधि करते रहें।
  • रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें।
  • धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • तनाव कंट्रोल करें ।
  • कोई भी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सवाल– क्या साइलेंट हार्ट अटैक जानलेवा भी हो सकता है?

जवाब– हां, इसमें लक्षण साफ नहीं होते। इसलिए कई बार लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें हार्ट अटैक हुआ है। ऐसे में समय पर इलाज न मिलने से हार्ट को ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। इसके कारण गंभीर कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं और कई मामलों में मौत का रिस्क हो सकता है।

सवाल– अगर साइलेंट हार्ट अटैक का समय पर इलाज न हो तो इसके क्या खतरे हो सकते हैं?

जवाब– अगर साइलेंट हार्ट अटैक का समय पर इलाज नहीं होता, तो इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जैसे-

  • हार्ट की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान।
  • हार्ट फेलियर का रिस्क।
  • फेटल हार्ट अटैक का रिस्क।
  • कार्डियक अरेस्ट का रिस्क।
  • एरिथमिया (असामान्य धड़कन)।
  • इस्केमिक स्ट्रोक।

सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक से बचाव के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव जरूरी हैं?

जवाब- साइलेंट हार्ट अटैक से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि दिल की सेहत का ध्यान रखा जाए और लाइफस्टाइल को हेल्दी बनाया जाए।

संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और रिस्क फैक्टर्स को कंट्रोल में रखने से हार्ट डिजीज और साइलेंट हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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साइलेंट हार्ट अटैक में हार्ट तक ब्लड फ्लो कम हो जाता है, लेकिन इसके संकेत हल्के या अस्पष्ट होते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को तनाव, थकान या फ्लू समझकर अनदेखा कर देते हैं।

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार महिलाओं में मौत का सबसे बड़ा कारण हार्ट डिजीज है। वहीं वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक, हर साल लगभग तीन में से एक महिला की मौत दिल की बीमारी से जुड़ी होती है।

इसलिए आज फिजिकल हेल्थ में हम बात करेंगे महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक की। साथ ही जानेंगे कि-

  • महिलाओं में इसके संभावित संकेत क्या हो सकते हैं?
  • किन महिलाओं में इसका जोखिम ज्यादा होता है?

एक्सपर्ट: डॉ. हेमंत मदान, सीनियर डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम

सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक क्या होता है?

जवाब– साइलेंट हार्ट अटैक भी एक तरह का हार्ट अटैक ही होता है। इसमें दिल तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि ऐसा होने पर कोई साफ संकेत दिखाई नहीं देता, न महसूस होता है। साइलेंट हार्ट अटैक होने पर आर्टरीज में रुकावट पैदा होती है, जिससे हार्ट की मांसपेशियों को नुकसान होने लगता है, लेकिन शरीर तेज दर्द के रूप में ‘अलार्म’ नहीं देता।

कई बार यह इसलिए होता है क्योंकि नर्व्स की संवेदनशीलता कम हो जाती है। इसलिए दर्द महसूस नहीं होता या बहुत हल्का होता है। यानी अंदर से हार्ट को उतना ही नुकसान हो रहा होता है, जितना सामान्य हार्ट अटैक में होता है। बस फर्क इतना है कि शरीर आपको जोर से संकेत नहीं देता। इसलिए इसे ‘साइलेंट’ हार्ट अटैक कहा जाता है।

सवाल– साइलेंट हार्ट अटैक और सामान्य हार्ट अटैक में क्या फर्क है?

जवाब– इन दोनों के लक्षण, संकेतों और उसके फर्क को नीचे ग्राफिक से समझते हैं-

सवाल– पुरुषों की तुलना में महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक ज्यादा कॉमन क्यों है?

जवाब– नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए–

1. ब्लॉकेज पैटर्न अलग होना

महिला और पुरुष में ब्लॉकेज का पैटर्न अलग-अलग होता है। पुरुषों में बड़ी आर्टरी में “ब्लॉकेज” ज्यादा साफ होता है। महिलाओं के शरीर में बहुत छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं में समस्या होती है।

2. हॉर्मोन्स का फर्क

महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन काफी हद तक हार्ट को प्रोटेक्ट करता है, लेकिन मेनोपॉज के बाद उनमें यह जोखिम बढ़ जाता है।

3. दर्द महसूस करने का तरीका

महिलाओं और पुरुषों में दर्द को महसूस करने का तरीका या पेन परसेप्शन भी अलग हो सकता है। महिलाओं को या तो दर्द कम महसूस होता है। या वो दर्द को इग्नोर करने की आदी होती हैं।

4. सारी स्टडीज पुरुषों पर

हार्ट अटैक को लेकर लंबे समय तक हुई सारी स्टडीज पुरुषों पर आधारित रही हैं। इसलिए हमें महिलाओं के संबंध में ज्यादा जानकारी और डेटा ही नहीं है।

सवाल- महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के संभावित संकेत क्या हो सकते हैं?

जवाब– महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर बहुत हल्के या सामान्य समस्याओं जैसे लग सकते हैं। इसलिए कई बार इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है। ग्राफिक में इसके संकेत देखिए-

सवाल– क्या सिर्फ थकान या कमजोरी भी साइलेंट हार्ट अटैक का संकेत हो सकती है?

जवाब– हां, हार्वर्ड हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अचानक और बिना कारण होने वाली ज्यादा थकान भी हार्ट प्रॉब्लम की ओर इशारा करती है। वहीं हार्ट फाउंडेशन से जुड़ी एक स्टडी में कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक से कुछ महीनों पहले तक लगातार ज्यादा थकान महसूस हो रही थी।

सवाल- क्या मानसिक तनाव या डिप्रेशन भी साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकता है?

जवाब– हां, लंबे समय तक तनाव या डिप्रेशन रहने पर शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रिनेलिन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

सवाल- किन महिलाओं को साइलेंट हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा होता है?

जवाब– कुछ महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम ज्यादा हो सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं कि किन्हें ज्यादा रिस्क रहता है-

  • जिन्हें डायबिटीज है।
  • जो मोटापे से ग्रस्त हैं।
  • जो फिजिकल एक्टिविटी नहीं करतीं।
  • जो स्मोकिंग करती हैं।
  • जो ज्यादा स्ट्रेस में रहती हैं।
  • जिन्हें डिप्रेशन है।
  • जिन्हें ऑटोइम्यून डिजीज (जैसे-लूपस या रूमेटॉइड आर्थराइटिस) है।
  • जिन्हें PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम) है।
  • जिन्हें प्रेग्नेंसी से जुड़े कॉम्पलिकेशन्स (जैसे- प्री-एक्लेम्प्सिया) हैं।
  • जिनका ब्लड प्रेशर हाई रहता है।
  • जिनका मेनोपॉज हो चुका है।
  • जिनका कोलेस्ट्रॉल हाई रहता है।

इन लोगों को अपनी हार्ट हेल्थ पर खास ध्यान देना चाहिए और नियमित हेल्थ चेकअप कराना चाहिए।

सवाल- क्या हॉर्मोनल बदलाव (जैसे मेनोपॉज) के बाद महिलाओं में इसका खतरा बढ़ जाता है?

जवाब– हां, इसका मुख्य कारण एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का स्तर कम होना है। एस्ट्रोजेन वो हॉर्मोन है, जो प्रजनन उम्र में महिलाओं के हार्ट और ब्लड वेसेल्स की सुरक्षा करता है। इसके अलावा हॉर्मोनल बदलाव शरीर के ‘पेन सिग्नल’ को भी प्रभावित कर सकते हैं।

सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक का कोई भी संकेत दिखने पर महिलाओं को तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब– इस स्थिति में सबसे जरूरी है कि बिना देर किए तुरंत मेडिकल मदद ली जाए और नजदीकी अस्पताल में जाकर हार्ट से जुड़ी जांच कराई जाए। पॉइंटर्स से समझते हैं-

  • सांस फूले या अचानक बहुत असहजता महसूस हो तो इसे इग्नोर न करें।
  • लक्षण दिखने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या किसी की मदद से अस्पताल पहुंचें।
  • अपने लक्षणों के बारे में किसी करीबी या आसपास मौजूद व्यक्ति को तुरंत जानकारी दें।
  • अगर घर में अकेले रहते हैं तो पैनिक बटन लगवाकर रखें। ऐसी किसी भी इमरजेंसी कंडीशन में पैनिक बटन दबाएं।
  • अगर घर में एस्पिरिन (300mg) है तो एक गोली चबा लें। इसे निगलें नहीं, धीरे-धीरे चबाएं। दरअसल एस्पिरिन एक ब्लड थिनर है, जो क्लॉट को बढ़ने से रोकता है।
  • कहीं बैठकर पीठ टिकाएं, पैर जमीन पर रखें। इस दौरान लेटना या घूमना खतरनाक हो सकता है।
  • ऐसी कंडीशन में बहुत आराम से धीरे-धीरे सांस लें।

सवाल– डॉक्टर साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट करते हैं?

जवाब– साइलेंट हार्ट अटैक का पता लगाने के लिए डॉक्टर कई तरह की जांचें करते हैं, जिनसे हार्ट कंडीशन और धमनियों में ब्लॉकेज का पता लगाया जा सकता है। जैसे-

ब्लड टेस्ट– ब्लड टेस्ट में ट्रॉपोनिन जैसे प्रोटीन चेक किए जाते हैं, जो दिल की मांसपेशियों के अंदर होते हैं। जब हार्ट को नुकसान होता है, तो ये खून में बढ़ जाते हैं।

ईसीजी– यह टेस्ट हार्ट की इलेक्ट्रिकल गतिविधि को रिकॉर्ड करता है और हार्ट अटैक के संकेत दिखा सकता है।

कार्डिएक कैथेटराइजेशन और कोरोनरी एंजियोग्राफी– इसमें एक पतली ट्यूब के जरिए हार्ट की आर्टरीज में डाई डालकर एक्स-रे से ब्लॉकेज या संकुचन देखा जाता है।

सीटी स्कैन (CT Scan)- यह दिल और कोरोनरी आर्टरीज में ब्लॉकेज या कैल्शियम जमाव का पता लगाने में मदद करता है।

एमआरआई (MRI) – इससे हार्ट मसल्स की संरचना और किसी पुराने नुकसान का पता लगाया जा सकता है।

एक्सरसाइज स्ट्रेस टेस्ट– इस टेस्ट में ट्रेडमिल या एक्सरसाइज के दौरान हार्ट की कार्यक्षमता और ब्लड फ्लो को जांचा जाता है।

न्यूक्लियर स्ट्रेस टेस्ट– इस टेस्ट में एक विशेष रेडियोएक्टिव ट्रेसर की मदद से हार्ट तक ब्लड फ्लो को देखा जाता है।

इकोकार्डियोग्राम (ECHO) – यह अल्ट्रासाउंड आधारित टेस्ट है, जिससे हार्ट के वाल्व और पंपिंग क्षमता का आकलन किया जाता है।

सवाल– अगर किसी महिला को डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है तो क्या उसे अतिरिक्त सावधान रहना चाहिए? किस तरह की सावधानियां जरूरी हैं?

जवाब– हां, ऐसी महिलाओं को हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा हो सकता है। इसलिए उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए। पॉइंटर्स से समझते हैं कि उन्हें किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए-

  • ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखें।
  • समय-समय पर हार्ट हेल्थ की जांच कराएं।
  • संतुलित और हेल्दी डाइट लें।
  • शारीरिक गतिविधि करते रहें।
  • रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें।
  • धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
  • पर्याप्त नींद लें।
  • तनाव कंट्रोल करें ।
  • कोई भी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सवाल– क्या साइलेंट हार्ट अटैक जानलेवा भी हो सकता है?

जवाब– हां, इसमें लक्षण साफ नहीं होते। इसलिए कई बार लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें हार्ट अटैक हुआ है। ऐसे में समय पर इलाज न मिलने से हार्ट को ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। इसके कारण गंभीर कॉम्प्लिकेशन हो सकते हैं और कई मामलों में मौत का रिस्क हो सकता है।

सवाल– अगर साइलेंट हार्ट अटैक का समय पर इलाज न हो तो इसके क्या खतरे हो सकते हैं?

जवाब– अगर साइलेंट हार्ट अटैक का समय पर इलाज नहीं होता, तो इसके कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जैसे-

  • हार्ट की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान।
  • हार्ट फेलियर का रिस्क।
  • फेटल हार्ट अटैक का रिस्क।
  • कार्डियक अरेस्ट का रिस्क।
  • एरिथमिया (असामान्य धड़कन)।
  • इस्केमिक स्ट्रोक।

सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक से बचाव के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव जरूरी हैं?

जवाब- साइलेंट हार्ट अटैक से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि दिल की सेहत का ध्यान रखा जाए और लाइफस्टाइल को हेल्दी बनाया जाए।

संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और रिस्क फैक्टर्स को कंट्रोल में रखने से हार्ट डिजीज और साइलेंट हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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गर्मियों में टेम्परेचर बढ़ने पर शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है। यह कॉमन है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पानी ब्लड सर्कुलेशन और दिल की धड़कनों को भी कंट्रोल करता है? जब शरीर में फ्लूइड कम होता है तो खून गाढ़ा होने लगता है। साथ ही हॉर्मोनल सिस्टम में गड़बड़ी होने लगती है। इससे ब्लड प्रेशर (BP) अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

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