Deepika Padukone Success Story Explained; Om Shanti Om | Movies List

सादगी, स्टाइल और स्टारडम की असली मिसाल दीपिका पादुकोण। दीपिका पादुकोण ने 2007 में फिल्म ‘ओम शांति ओम’ से डेब्यू कर स्टारडम हासिल किया, लेकिन उन्हें आलोचना और तानों का सामना करना पड़ा। उनकी डायलॉग डिलीवरी और एक्सेंट का मजाक उड़ाया गया, जिससे वह मानसिक रूप से टूटने लगीं। करियर के पीक पर होने के बावजूद 2014 . उन्होंने थैरेपी और आत्मविश्वास के सहारे खुद को संभाला। इस दौर के बाद ‘कॉकटेल’, ‘ये जवानी है दीवानी’, ‘पद्मावत’ और ‘पठान’ से उन्होंने टॉप एक्ट्रेसेस में जगह बनाई। आज दीपिका की नेटवर्थ ₹500 करोड़ से ज्यादा ज्यादा है। आज की सक्सेस स्टोरी में दीपिका पादुकोण के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें जानते हैं। मॉडलिंग करियर के चलते पढ़ाई बीच में छोड़ दी दीपिका पादुकोण का जन्म 5 जनवरी 1986 को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में हुआ था। उनके पिता प्रकाश पादुकोण मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। बचपन में उनका परिवार बेंगलुरु शिफ्ट हो गया। उन्होंने स्कूली पढ़ाई सोफिया हाई स्कूल से की और आगे माउंट कार्मेल कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन मॉडलिंग करियर के चलते पढ़ाई छोड़ दी। दीपिका के माता-पिता काम के सिलसिले में कोपेनहेगन में थे, इसलिए उनका जन्म वहीं हुआ। मॉडलिंग में एंट्री और पहला ब्रेक दीपिका शुरुआत में अपने पिता की तरह बैडमिंटन खिलाड़ी बनना चाहती थीं, लेकिन टीनेज में उनका झुकाव मॉडलिंग की ओर हो गया। उन्होंने छोटे प्रोजेक्ट्स से शुरुआत की और पहचान बनाई। उन्हें बड़ा ब्रेक तब मिला जब उन्होंने ज्वेलरी ब्रांड तनिष्क के लिए मॉडलिंग की। इसके बाद लैक्मे फैशन वीक में रैंप वॉक किया, जिससे वह इंडस्ट्री में नोटिस हुईं। सूटकेस साथ कैब में ही सो जाती थीं मॉडलिंग के दौरान मुंबई आने पर दीपिका को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। दीपिका कहती हैं- मैं एक नए शहर में अकेले आई थी। मेरे पास सिर्फ मेरा बैग था, और मैं उसे लेकर इधर-उधर भटकती रहती थी। मैं देर रात तक काम करती थी और सूटकेस लेकर कैब में हर जगह जाती थी। कई बार मैं उसी कैब में सो जाती थी। कन्नड़ फिल्म ऐश्वर्या में दीपिका पादुकोण ने उपेंद्र के ओपॉजित काम किया था। कन्नड़ फिल्म से एक्टिंग डेब्यू मॉडलिंग में सफलता के बाद दीपिका को फिल्म का ऑफर मिला। उन्होंने 2006 में कन्नड़ फिल्म ‘ऐश्वर्या’ से एक्टिंग करियर शुरू किया। यह फिल्म बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ने फिल्ममेकर्स का ध्यान खींचा। बॉलीवुड में एंट्री और चुनौतियां मॉडलिंग के दौरान दीपिका पादुकोण ने हिमेश रेशमिया के म्यूजिक वीडियो ‘नाम है तेरा’ में काम किया था। इसी से उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और कॉन्फिडेंस ने डायरेक्टर फराह खान का ध्यान खींचा। फराह खान नई और फ्रेश फेस की तलाश में थीं। उन्हें लगा कि 70 के दशक की अभिनेत्री शांति प्रिया के किरदार के लिए दीपिका फिट हैं। इसके बाद उनका ऑडिशन हुआ और उन्हें फिल्म के लिए फाइनल किया गया। डायलॉग डिलीवरी और एक्टिंग स्किल्स पर सवाल उठे शाहरुख खान के साथ उनकी बॉलीवुड डेब्यू फिल्म ‘ओम शांति ओम’ बनी, जो 2007 की बड़ी हिट फिल्मों में रही और दीपिका स्टार बन गईं। इस दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनके एक्सेंट और डायलॉग डिलीवरी का मजाक उड़ाया गया, एक्टिंग स्किल्स पर सवाल उठे और आउटसाइडर होने का दबाव बना रहा। दीपिका पादुकोण ने इंडिया टीवी को दिए इंटरव्यू में बताया था- जब मेरी फिल्म ‘ओम शांति ओम’ रिलीज हुई, तो मेरे एक्सेंट और डिक्शन को लेकर लोगों ने काफी मजाक उड़ाया। यह मेरे लिए बहुत हर्टफुल था, और उस वक्त ऐसी बातें सुनना आसान नहीं था। कई रिव्यूज में मेरी एक्टिंग, एक्सेंट और टैलेंट तक पर सवाल उठाए गए। मुझे ट्रोल भी किया गया, और इससे मैं मानसिक रूप से काफी परेशान हो गई थी। निगेटिविटी को खुद पर हावी नहीं होने दिया दीपिका बताती हैं- उस समय मुझे लगा था कि लोग मेरी परफॉर्मेंस से खुश नहीं हैं या मुझे राइट ऑफ कर दिया गया था। मैं टूट सकती थी, निराश हो सकती थी, या कह सकती थी कि अब मैं यह नहीं कर सकती। लेकिन मैंने उस निगेटिविटी को खुद पर हावी नहीं होने दिया। एक खराब रिव्यू ने मुझे खुद पर काम करने के लिए प्रेरित किया। मैं मानती हूं कि निगेटिविटी भी अच्छी हो सकती है- यह इस पर निर्भर करता है कि आप उसे कैसे लेते हैं। मुश्किल दौर से निकलकर इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई ‘ओम शांति ओम’ के बाद दीपिका पादुकोण ने ‘बचना ऐ हसीनों’, ‘चांदनी चौक टू चाइना’, ‘लव आजकल’, ‘कार्तिक कॉलिंग कार्तिक’, ‘हाउसफुल’, ‘लफंगे परिंदे’, ‘ब्रेक के बाद’, ‘खेले हम जी जान से’, ‘आरक्षण’ और ‘देसी बॉयज’ जैसी फिल्में कीं। इनमें ‘लव आजकल’, ‘हाउसफुल’ और ‘बचना ऐ हसीनों ’हिट रहीं, बाकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रहीं। 2012 में रिलीज फिल्म ‘कॉकटेल’ को उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जाता है। इसमें उनके वेरोनिका डी’कोस्टा किरदार को सराहा गया था और उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए नामांकन मिला था। इसके बाद ‘ये जवानी है दीवानी’, ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ और ‘गोलियों की रासलीला- रामलीला’ जैसी हिट फिल्में देकर उन्होंने खुद को टॉप एक्ट्रेस के रूप में स्थापित किया। करियर के पीक पर टूटीं, डिप्रेशन ने घेरा करियर के पीक समय पर दीपिका पादुकोण 2014 के आसपास डिप्रेशन से जूझ रही थीं। वो अंदर से टूट चुकी थीं। केबीसी में दीपिका ने कहा था- मैं अपने करियर के पीक पर थी, सब कुछ बाहर से बिल्कुल परफेक्ट लग रहा था, तब एक सुबह मुझे अचानक बहुत अजीब सा एहसास हुआ। कुछ दिनों में मुझे समझ आया कि मैं डिप्रेशन में हूं। अकेलेपन में जंग, किसी से नहीं कही बात मैंने किसी को नहीं बताया। मैं अकेली मुंबई में रहती थी और अंदर ही अंदर टूट रही थी। कई दिनों तक मैं रोती रहती थी, मुझे जीने का मन नहीं करता था और सब कुछ खाली लगने लगा था। मैं किसी से बात नहीं करती थी। मां के सामने टूटा सब्र, शुरू हुई पहचान जब मेरी मां मुंबई आईं और वापस जाने लगीं, तो मैं खुद को रोक नहीं पाई और उनके सामने रो पड़ी। तब उन्हें समझ आया कि कुछ गलत हो रहा है। इसके बाद मुझे पता चला कि यह डिप्रेशन है और मैंने
EHS Sleep Disorder; Exploding Head Syndrome Symptoms Reason Treatment Explained

Hindi News Lifestyle EHS Sleep Disorder; Exploding Head Syndrome Symptoms Reason Treatment Explained 52 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक कभी-कभी सोते वक्त या नींद से ठीक पहले अचानक तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई देती है। पल भर के लिए ऐसा लगता है, जैसे कोई बम फट गया हो, दरवाजा जोर से बंद हुआ हो या बिजली गिरी हो। डर से नींद टूट जाती है और हार्ट बीट बढ़ जाती है। यह एक ‘स्लीपिंग कंडीशन’ है, जिसे ‘एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम’ कहते हैं। इसमें सुनाई देने वाली आवाज असली नहीं होती, बल्कि दिमागी भ्रम होता है। इससे घबराहट और नींद टूटने की समस्या हो सकती है। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- किन लोगों को ये दिक्कत ज्यादा होती है? कब डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है? इससे बचाव के तरीके क्या हैं? सवाल- नींद में अचानक तेज धमाके जैसी आवाज क्यों सुनाई देती है? जवाब- पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर पीयूष गोयल बताते हैं कि सोने और जागने के बीच ब्रेन का कंट्रोल सिस्टम कुछ सेकेंड के लिए इंबैलेंस हो जाता है। उसी समय ब्रेन ऐसे सिग्नल बनाता है, जिससे तेज आवाज का अहसास होता है, जबकि असल में कोई आवाज नहीं होती। सवाल- क्या यह कोई बीमारी है या ब्रेन का नॉर्मल रिएक्शन है? जवाब- डॉक्टर पीयूष कहते हैं कि यह कोई बीमारी नहीं है। यह दिमाग का असामान्य, लेकिन हार्मलेस रिएक्शन है। नींद के दौरान ब्रेन धीरे-धीरे रेस्ट मोड में जाता है। कभी-कभी इसमें रुकावट होती है। ऐसे में ब्रेन अजीब सिग्नल बनाने लगता है। इससे तेज आवाज का भ्रम होता है। मेडिकल टेस्ट में रिपोर्ट नॉर्मल आती है। ब्रेन, नर्व्स या कान में कोई खराबी नहीं मिलती। EEG (इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम) जैसे टेस्ट भी सामान्य आते हैं। इसलिए डॉक्टर इसे ब्रेन की अस्थायी कंडीशन मानते हैं। ज्यादातर लोगों को यह समस्या जिंदगी में एक-दो बार होती है और अपने आप ठीक हो जाती है। सवाल- क्या इससे ब्रेन या शरीर को कोई नुकसान होता है? जवाब- नहीं, इससे कोई नुकसान नहीं होता। इसके कारण ब्रेन में कोई स्ट्रक्चरल डैमेज नहीं होता। दिमाग की नसें, ब्रेन सेल्स और कान सुरक्षित रहते हैं। इस कंडीशन में दर्द नहीं होता। इसमें सिर्फ डर, घबराहट, तेज हार्ट बीट या पसीना आता है। डर के कारण कुछ लोगों की नींद खराब हो सकती है। इसका असर धीरे-धीरे कम हो जाता है। सवाल- क्या यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर का संकेत हो सकता है? जवाब- आमतौर पर ऐसा नहीं होता। एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम का हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर से सीधा संबंध नहीं है। पहली बार होने पर लोग डर जाते हैं। उन्हें लगता है कि ब्रेन में गंभीर रिएक्शन हुआ है। जबकि मेडिकल टेस्ट में यह किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। सिर्फ तेज आवाज सुनाई देना आमतौर पर बीमारी का संकेत नहीं है। अगर इसके साथ शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी, बोलने में दिक्कत या दर्द जैसे लक्षण हों तो टेस्ट कराना चाहिए। सवाल- किन लोगों को यह समस्या ज्यादा होती है? जवाब- यह समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- डॉक्टर मानते हैं कि स्ट्रेस और थकान से ब्रेन सोते समय पूरी तरह रेस्ट मोड में नहीं जा पाता। इससे नींद का बैलेंस बिगड़ता है। कुछ मामलों में यह जेनेटिक भी हो सकता है। सवाल- इस कंडीशन में घबराने की बजाय क्या करना चाहिए? जवाब- सबसे पहले यह समझें कि यह खतरनाक कंडीशन नहीं है। इसलिए– खुद को शांत रखें। गहरी सांस लें। डर से दिल की धड़कन तेज हो सकती है। इसके लिए तैयार रहें। रोज एक तय समय पर सोएं। रोज 7-8 घंटे की क्वालिटी स्लीप लें। सोने से पहले मोबाइल और स्क्रीन से दूरी रखें। रिलैक्सेशन एक्सरसाइज करें। डीप ब्रीदिंग, ध्यान या हल्की स्ट्रेचिंग करें। ज्यादा थकान और तनाव से बचें। अगर आवाज के बाद नींद टूट जाए तो खुद को याद दिलाएं कि यह ब्रेन का सिर्फ इंबैलेंस्ड रिएक्शन भर है, असली धमाका नहीं। धीरे-धीरे ब्रेन इस डर से बाहर आ जाता है। सवाल- कब डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है? जवाब- अगर यह समस्या बार-बार होने लगे तो डॉक्टर से मिलना जरूरी है। ग्राफिक में देखिए कब डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए- कुछ कंडीशंस में डॉक्टर EEG, MRI या स्लीप टेस्ट करा सकते हैं। इससे यह पक्का किया जाता है कि कोई दूसरी बीमारी तो नहीं है। ज्यादातर मामलों में जांच सामान्य आती है, जिससे मरीज को मानसिक राहत मिलती है। सवाल- क्या इसमें दवाओं की जरूरत पड़ती है या ये अपने आप ठीक हो जाती है? जवाब- अधिकतर मामलों में यह समस्या बिना दवा के ठीक हो जाती है। इसके अलावा- सिर्फ स्लीप क्वालिटी सुधारने और स्ट्रेस कम करने से भी आराम मिलता है। अगर ये समस्या बार-बार हो और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही हो, तब डॉक्टर दवाएं दे सकते हैं। ये दवाएं आमतौर पर नर्व्स को रिलेैक्स करने के लिए होती हैं। जैसे कुछ एंटीडिप्रेसेंट या एंटी-सीजर दवाएं। ज्यादातर लोगों को सिर्फ सही जानकारी और लाइफस्टाइल सुधार से राहत मिल जाती है। सवाल- इस समस्या से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- इसके लिए पूरी नींद लेना सबसे जरूरी है। साथ ही कुछ और बाताें का ख्याल रखें। जैसेकि- रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें। सोने से पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद करें। कैफीन, शराब और स्मोकिंग कम करें। बहुत ज्यादा थकान हो तो तुरंत न सोएं। पहले थोड़ा रिलैक्स करें। तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या वॉक करें। पीठ के बल सोने से कुछ लोगों में समस्या बढ़ती है, इसलिए साइड में सोने की कोशिश करें। अगर दवाएं ले रहे हैं, तो उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के अचानक बंद न करें। ……………… ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- वरुण धवन की बेटी को DDH: डॉक्टर से जानें क्या है ये बीमारी, इसके लक्षण, डायग्नोसिस, सही इलाज और जरूरी सावधानियां बॉलीवुड एक्टर वरुण धवन ने कुछ दिन पहले एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी बेटी लारा को डेढ़ साल की उम्र में DDH डायग्नोज हुआ था। DDH यानी ‘डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ हिप।’ यह
Heat Headache Symptoms Explained; Trigger Points & Treatment

Hindi News Lifestyle Heat Headache Symptoms Explained; Trigger Points & Treatment | Dehydration Sunlight 19 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक गर्मियों में कुछ लोगों को सिरदर्द, भारीपन जैसी समस्याएं होती हैं। कभी अचानक चक्कर आ जाता है। कई बार तो इसकी वजह से डेली रुटीन तक प्रभावित हो जाता है। तेज गर्मी में शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है। पसीने के साथ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी निकलते हैं। इससे सिरदर्द, थकान, चक्कर या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस होते हैं। मेडिसिन की भाषा में इसे ‘हीट हेडेक’ कहते हैं। यह कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर का एक संकेत है कि वह गर्मी से परेशान है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि- हीट हेडेक क्या है? ये क्यों होता है? इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट- डॉ. अली शेर, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- हीट हेडेक (सिरदर्द) क्या होता है? जवाब- हीट हेडेक गर्म टेम्परेचर की वजह से होने वाला सिरदर्द है। यह तेज गर्मी, धूप या शरीर के ज्यादा गर्म होने की वजह से होता है। इसे ‘हीट-इंड्यूस्ड हेडेक’ भी कहा जाता है। पॉइंटर्स से इसे समझिए- हीट हेडेक शरीर की एक प्रतिक्रिया है। जब शरीर को ज्यादा गर्मी लगती है या पानी की कमी होती है तो सिरदर्द हो सकता है। यह दर्द अक्सर सिर के दोनों तरफ या कनपटियों के पास महसूस होता है। कुछ लोगों को चक्कर, ज्यादा प्यास, कमजोरी या थकान भी महसूस हो सकती है। सवाल- हीट हेडेक क्यों होता है? जवाब- हीट हेडेक आमतौर पर तीन मुख्य कारणों से होता है- डिहाइड्रेशन। इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी। बॉडी टेम्परेचर इंबैलेंस। इसे ऐसे समझिए– मौसम बहुत गर्म होने पर शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना निकालता है। इससे शरीर से पानी और सोडियम-पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स कम हो जाते हैं। गर्मी में शरीर को ठंडा रखने के लिए ब्लड फ्लो भी बढ़ जाता है। इससे सिर की नसों पर दबाव बढ़ सकता है और सिरदर्द शुरू हो सकता है। लंबे समय तक धूप में रहने, कम पानी कम पीने या बहुत ज्यादा थकान से हीट हेडेक का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- क्या हीट हेडेक नॉर्मल हेडेक या माइग्रेन से अलग होता है? जवाब- हीट हेडेक सामान्य सिरदर्द या माइग्रेन से अलग है, क्योंकि इसका मुख्य कारण गर्मी और शरीर में पानी की कमी है। सामान्य सिरदर्द अक्सर तनाव, थकान या नींद की कमी से होता है। माइग्रेन में सिर के एक तरफ तेज दर्द के साथ मतली और उल्टी हो सकती है। तेज रोशनी और आवाज से दर्द ट्रिगर हो सकता है। सवाल- किन स्थितियों में हीट हेडेक होने का रिस्क बढ़ जाता हैं? जवाब- कुछ परिस्थितियों में हीट हेडेक का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- हीट हेडेक के लक्षण और संकेत क्या होते हैं? जवाब- हीट हेडेक के लक्षण शुरुआत में अमूमन हल्के होते हैं, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो ये बढ़ सकते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- गर्मियों में कौन-सी आदतें हीट हेडेक को ट्रिगर करती हैं? जवाब- गर्मियों में रोजमर्रा की कुछ आदतें हीट हेडेक बढ़ा सकती हैं। पॉइंटर्स से समझिए- 1. बॉडी सिग्नल इग्नोर करना प्यास लगने पर पानी न पीना। सिर भारी लगने पर भी ब्रेक न लेना। थकान को नजरअंदाज करना। 2. गलत टाइमिंग तेज धूप में बाहर निकलना। गलत टाइम पर वर्कआउट करना। देर रात तक जागना। सुबह डिहाइड्रेटेड उठना। 3. इंस्टेंट एनर्जी पर निर्भरता बार-बार चाय/कॉफी पीना। शुगरी ड्रिंक्स पीना। 4. रेस्ट और रिकवरी की कमी बिना ब्रेक के लगातार काम करना। AC/कूल एरिया में टाइम न बिताना। ट्रैवल के दौरान खुद को कूल न रखना। सवाल- गर्मियों में किन लोगों को हीट हेडेक का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- कुछ लोगों में हीट हेडेक का जोखिम दूसरों की तुलना में ज्यादा होता है। इस ग्राफिक में देखिए- सवाल- हीट हेडेक से बचने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- कुछ आसान आदतें अपनाकर हीट हेडेक से काफी हद तक बचा जा सकता है। सभी हेल्दी आदतें ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर हीट हेडेक हो तो क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- कुछ लोग सिरदर्द होने पर कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जिससे समस्या बढ़ सकती है। जैसेकि– ज्यादा चाय-कॉफी पीना। मसालेदार या हैवी डाइट लेना। तेज धूप में काम करना। कम पानी पीना। शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना। सवाल- क्या सनस्ट्रोक और हीट हेडेक में कोई रिलेशन होता है? जवाब- हां, कई बार हीट हेडेक सनस्ट्रोक या हीट-इलनेस का शुरुआती संकेत हो सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं- जब बॉडी का टेम्परेचर बढ़ जाता है और वह खुद को ठंडा नहीं कर पाता तो हीट एग्जॉशन या सनस्ट्रोक जैसी कंडीशन बन सकती है। इन कंडीशंस में सिरदर्द के साथ चक्कर, उल्टी, तेज बुखार या बेहोशी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। अगर सिरदर्द के साथ बुखार के लक्षण हों, उल्टी हो या बेहोशी आए तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें। सवाल- क्या बार-बार होने वाला हीट हेडेक किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है? जवाब- हां, कभी-कभी ये गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। कब चिंता की बात हो सकती है? अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना। तेज बुखार। गर्दन अकड़ना। लगातार उल्टी होना। चक्कर या बेहोशी। बार-बार ब्लड प्रेशर बढ़ना। सवाल- किस स्थिति में डॉक्टर को दिखाने की जरूरत होती है? जवाब- ये लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं- दर्द बहुत तेज हो। दर्द लंबे समय तक बना रहे। उल्टी, चक्कर, तेज बुखार या बेहोशी के लक्षण दिखें। कुल मिलाकर, हीट हेडेक के रूप में शरीर हमसे ये कह रहा होता है कि मुझे पानी, आराम और ठंडे माहौल की जरूरत है। गर्मियों में बस थोड़ी–सी सावधानी बरतकर और शरीर को हाइड्रेटेड रखकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। …………………………. ये खबर भी पढ़ें… जरूरत की खबर- गर्मियों में ज्यादा आइसक्रीम न खाएं:इसमें हैं खतरनाक इंग्रीडिएंट, जानें 7 हेल्थ रिस्क, डॉक्टर से समझें इसका साइंस गर्मियों में लोग आइसक्रीम को ‘कूलिंग फूड’ मानकर खाते हैं। लेकिन ज्यादा आइसक्रीम खाने से कई हेल्थ रिस्क हो सकते हैं। ‘वर्ल्ड जर्नल ऑफ फार्मास्यूटिकल्स एंड लाइफ साइंस’ (WJPLS) में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, आइसक्रीम में हाई शुगर और सैचुरेटेड फैट होता
Emotional Loneliness Meaning Signs Explained; How To Overcome

Hindi News Lifestyle Emotional Loneliness Meaning Signs Explained; How To Overcome | Mental Health 21 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल– मेरी उम्र 23 साल है। मैं रांची में रहती हूं और होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रही हूं। हमारी जॉइंट फैमिली है। कॉलेज में भी ढेर सारे दोस्त हैं। फिर भी मुझे हर वक्त एक अजीब सा अकेलापन महसूस होता है। हर वक्त मेरे चारों ओर लोग होते हैं और मैं उन सबसे भागकर अकेली होना चाहती हूं। मुझे लगता है कि कोई मेरा अपना नहीं है। चाहे दोस्त हों या फैमिली, कोई मुझे समझता नहीं है। मैं बाहर से खुश दिखती हूं, लेकिन अंदर-ही-अंदर दुखी रहती हूं। क्या सब लोग ऐसा ही फील करते हैं? क्या ये फीलिंग नॉर्मल है या मेरे अंदर ही कोई प्रॉब्लम है। एक्सपर्ट– डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। सवाल पूछने के लिए बहुत शुक्रिया। इमोशनल लोनलीनेस (भावनात्मक अकेलापन) आज मेंटल हेल्थ डिसकशन का एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। पहली नजर में यह साधारण ‘अकेलेपन’ जैसा लगता है, लेकिन मनोविज्ञान इसे कहीं अधिक गहराई से समझता है। इमोशनल लोनलीनेस क्या है ? आधुनिक मनोविज्ञान में इस विषय पर रॉबर्ट वाइस का काम आधारभूत माना जाता है। उन्होंने 1973 में यह बताया कि लोनलीनेस कोई एक अनुभव नहीं है। इसके अलग-अलग प्रकार होते हैं। हर व्यक्ति के लिए यह अनुभव अलग हो सकता है। वाइस के अनुसार, अकेलेपन का एक रूप वह है, जब व्यक्ति के पास कोई ऐसा घनिष्ठ, भरोसेमंद और भावनात्मक रूप से सुरक्षित रिश्ता नहीं होता, जिसमें वह खुलकर अपनी बात कह सके। इसे ही इमोशनल लोनलीनेस कहते हैं। दूसरा रूप वह है, जब व्यक्ति के पास व्यापक सामाजिक दायरा, जैसे परिवार, दोस्त, परिचित या कम्युनिटी नहीं होती है। इसे सोशल लोनलीनेस कहते हैं। भीड़ में अकेलापन आगे चलकर न्यूजीलैंड के दो प्रसिद्ध समाजशास्त्रियों जेनी डे योंग हीरफेल्ड और थियो वान टिलबुर्ख ने इस अंतर को और साफ किया और इसे मापने के लिए कई वैज्ञानिक उपकरण विकसित किए। आज इमोशनल लोनलीनेस सिर्फ ‘अकेले रहना’ नहीं है। इमोशनल लोनलीनेस का मतलब है, लोगों से घिरे होने और भीड़ में रहने के बावजूद यह महसूस करना कि- मुझे कोई समझता नहीं। मुझे कोई सुनता नहीं। मुझे कोई प्यार नहीं करता। इसी संदर्भ में इमोशनल लोनलीनेस और सोशल लोनलीनेस के बीच अंतर समझना जरूरी है। कई बार व्यक्ति के पास परिवार होता है, दोस्त होते हैं, और वह सामाजिक रूप से सक्रिय भी रहता है। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति संयुक्त परिवार में रह सकता है, कॉलेज में उसके कई दोस्त हो सकते हैं और वह अक्सर लोगों से घिरा रह सकता है। इसके बावजूद यदि उसके भीतर लगातार खालीपन, दूरी या “कोई मुझे समझता नहीं” जैसी भावना बनी रहती है, तो यह इमोशनल लोनलीनेस का संकेत है। सोशल लोनलीनेस में व्यक्ति की मुख्य शिकायत होती है—“मेरे पास लोग नहीं हैं।” इसके विपरीत, इमोशनल लोनलीनेस में व्यक्ति कहता है—“लोग तो हैं, लेकिन कोई सच में मेरा नहीं है।” यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे समस्या की जड़ साफ होती है। यहां चुनौती लोगों की संख्या नहीं, बल्कि रिश्तों की गुणवत्ता है। ऐसे मामलों में व्यक्ति अक्सर यह भी महसूस करता है कि सामाजिक संपर्क उसे सुकून देने की बजाय थका देता है। वह लोगों के बीच रहते हुए भी भावनात्मक रूप से जुड़ नहीं पाता। “कोई मुझे समझता नहीं,” जैसी सोच इस बात की ओर इशारा करती है कि उसके अनुभवों को समझा और स्वीकारा नहीं जा रहा, जिसे मनोविज्ञान में “इमोशनल एट्यूनमेंट” की कमी कहते हैं। कोई ऐसा जो हमें सुने, समझे इस प्रकार, इमोशनल लोनलीनेस हमें यह समझने में मदद करती है कि केवल लोगों से घिरे रहना काफी नहीं है। मानसिक संतुलन और संतुष्टि के लिए जरूरी है कि हमारे जीवन में ऐसे रिश्ते हों, जहां हम बिना झिझक अपने असली भाव व्यक्त कर सकें और खुद को सच में समझा हुआ महसूस करें। क्या आप इमोशनली अकेले हैं? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 10 सवाल हैं। आपको इन सवालों को ध्यान से पढ़ना है और 0 से 3 के स्केल पर इसे रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब ‘कभी नहीं’ है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘लगभग हर दिन’ है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें। नंबर के हिसाब से उसका इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया है। अगर आपका टोटल स्कोर 0 से 7 के बीच है तो आप में बहुत मामूली पैटर्न है। ये नॉर्मल है लेकिन अगर आपका स्कोर 24 से 30 के बीच है तो यह बहुत स्ट्रॉन्ग इमोशनल लोनलीनेस का संकेत है। ऐसे में प्रोफेशनल हेल्प के बारे में सोचना चाहिए। डिटेल टेस्ट नीचे ग्राफिक में देखिए। कहीं ये लो मूड/डिप्रेशन तो नहीं इस एसेसमेंट टेस्ट के अलावा यह देखना भी जरूरी है कि कहीं ये लो मूड/डिप्रेशन का केस तो नहीं है। इसलिए खुद से ये दो सवाल भी पूछें– क्या अकेलेपन की यह फीलिंग दो हफ्तों से भी ज्यादा समय से लगातार बनी हुई है? क्या इस फीलिंग के साथ ये चीजें भी प्रभावित हो रही हैं– नींद भूख पढ़ाई एनर्जी लेवल क्या इसके अलावा ये भी हो रहा है– बीच–बीच में खूब रोना आ रहा है। निराशा महसूस हो रही है। खुद को नुकसान पहुंचाने का ख्याल आ रहा है। यदि आपका उत्तर “हां” है, तो यहां पर लो मूड/डिप्रेशन को भी एक बार प्रोफेशनल लेंस से जरूर देखना चाहिए। HSE (हेल्थ एंड सेफ्टी एक्जीक्यूटिव, यूके) और NHS (नेशनल हेल्थ सर्विस, यूके), दोनों सलाह देते हैं कि अगर 2 हफ्ते से अधिक समय तक लगातार लो मूड रहे, कोप करने में कठिनाई हो, या सेल्फ हेल्प से कोई फायदा न हो तो प्रोफेशनल हेल्प लेनी चाहिए. 4 सप्ताह का CBT आधारित सेल्फ हेल्प प्लान सप्ताह 1 पहचानना और समझाना लक्ष्य: फीलिंग को नाम देना, दबाना नहीं पहले हफ्ते में आपका लक्ष्य अपनी भावनाओं को दबाना नहीं, बल्कि उन्हें पहचानना और नाम देना है। दिन में कम-से-कम एक बार एक छोटा-सा मूड लॉग भरें, जिसमें चार चीजें लिखें— सिचुएशन (क्या हुआ) थॉट (दिमाग में
Retirement Funds Investment Options Explained

2 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर अवेयरनेस बहुत कम है। देश में ऐसे लाखों लोग हैं, जो समय रहते रिटायरमेंट प्लान नहीं करते हैं। इसकी वजह से उन्हें बुढ़ापे में फाइनेंशियल क्राइसिस का सामना करना पड़ता है। भारत की लीडिंग प्रोफेशनल सर्विस फर्म ‘ग्रांट थॉर्नटॉन’ के एक सर्वे के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त बचत नहीं कर रहे हैं। साल 2025 में हुए इस सर्वे के मुताबिक, प्राइवेट सेक्टर के करीब 50% कर्मचारी रिटायरमेंट के लिए बहुत कम पैसे निवेश करते हैं, जबकि अधिकांश लोग अपनी आय का सिर्फ 1-10% ही इसके लिए अलग रखते हैं। इसलिए आज ‘आपका पैसा’ कॉलम में जानेंगे कि- बुढ़ापे में फाइनेंशियल फ्रीडम क्यों जरूरी है? खुद का रिटायरमेंट फंड कैसे बनाएं? रिटायरमेंट फंड के लिए कहां और कितना निवेश करें? सवाल- रिटायरमेंट फंड क्या है और यह क्यों जरूरी है? जवाब- रिटायरमेंट फंड भविष्य की आपात स्थितियों से निपटने में मदद करता है। साथ ही रिटायरमेंट के बाद परिवार और रिश्तेदारों पर निर्भरता खत्म करता है। क्यों जरूरी है? पेंशन का अभाव: कुछ सरकारी नौकरियों को छोड़कर बाकी में अब पेंशन की सुविधा नहीं है। महंगाई: 6% वार्षिक महंगाई दर के हिसाब से आज का 50,000 रुपए का मासिक खर्च 20 साल बाद 1.6 लाख रुपए हो सकता है। लाइफ एक्सपेक्टेंसी: अभी औसत जीवन दर 75 साल के करीब है। ऐसे में रिटायर होने के बाद भी 15-20 साल का फंड चाहिए। मेडिकल खर्च: बुढ़ापे में स्वास्थ्य संबंधी खर्चे बढ़ जाते हैं, जिनके लिए पर्याप्त बचत जरूरी है। सवाल- बुढ़ापे में फाइनेंशियल फ्रीडम क्यों जरूरी है? जवाब- फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब है अपने खर्च खुद उठाना। रिटायरमेंट के बाद नियमित इनकम का सोर्स खत्म हो जाता है। बचत न होने पर दूसरों पर निर्भर होना पड़ सकता है। फाइनेंशियल फ्रीडम इसलिए जरूरी है क्योंकि- यह सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करती है। मानसिक तनाव कम करती है। आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना बढ़ाती है। सवाल- रिटायरमेंट फंड बनाने की शुरुआत कैसे करें? जवाब- रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए एक प्लानिंग की जरूरत होती है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं- सवाल- जल्दी निवेश शुरू करने से क्या फायदा होता है? जवाब- सभी फायदे पॉइंटर्स से समझिए- सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग का होता है। निवेश पर मिले रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता है। कम उम्र में छोटा निवेश भी बड़ा फंड बना सकता है। जल्दी निवेश शुरू करने से कम मेहनत में बड़ा कॉर्पस (फंड) बनता है। देर से शुरूआत करने पर ज्यादा पैसे लगते हैं। सवाल- रिटायरमेंट फंड के लिए कहां निवेश करें? जवाब- निवेश का विकल्प आपकी उम्र, जोखिम क्षमता और रिटायरमेंट तक बचे समय पर निर्भर करता है। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- रिटायरमेंट प्लानिंग में महंगाई का क्या रोल है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- महंगाई भविष्य के खर्च को कई गुना बढ़ा देती है। आज का खर्च भविष्य में काफी ज्यादा हो सकता है। महंगाई को नजरअंदाज करने से फंड कम पड़ सकता है। 6-7% सालाना महंगाई दर मानकर योजना बनानी चाहिए। इससे सही अनुमान लगाने में मदद मिलती है। सवाल- रिटायरमेंट प्लानिंग के क्या फायदे हैं? जवाब- सही रिटायरमेंट प्लानिंग के कई फायदे हैं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। सवाल- किन लोगों को रिटायरमेंट प्लानिंग पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए? जवाब- रिटायरमेंट प्लानिंग हर किसी के लिए जरूरी है, लेकिन कुछ लोगों को इसे ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए। जिनकी नौकरी में पेंशन नहीं है। जो लोग फ्रीलांस करते हैं। जिनके पास इमरजेंसी फंड नहीं है। जिनकी अस्थिर और अनियमित इनकम है। युवा प्रोफेशनल्स को जल्दी शुरुआत का फायदा उठाना चाहिए। सवाल- रिटायरमेंट प्लानिंग के दौरान कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए? जवाब- रिटायरमेंट फंड के समय कुछ गलतियां नहीं करनी चाहिए। आइए इन्हें ग्राफिक से समझते हैं- सवाल- रिटायरमेंट के लिए कितनी बचत जरूरी है? जवाब- इसका जवाब व्यक्ति की लाइफस्टाइल और उसके खर्च पर निर्भर करता है- आमतौर पर वार्षिक जरूरत का 20-25 गुना फंड होना चाहिए। मासिक खर्च के आधार पर लक्ष्य तय किया जाता है। महंगाई, मेडिकल खर्च और लाइफ एक्सपेक्टेंसी ध्यान में रखें। सही प्लानिंग से पूरी उम्र के लिए पर्याप्त फंड बन सकता है। सवाल- रिटायरमेंट प्लानिंग में हेल्थ इंश्योरेंस कितना जरूरी है? जवाब- हेल्थ इंश्योरेंस रिटायरमेंट प्लानिंग का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि- उम्र बढ़ने के साथ बीमारियों का खतरा और इलाज का खर्च बढ़ता है। बिना इंश्योरेंस के छोटी मेडिकल इमरजेंसी भी बड़ी आर्थिक समस्या बन सकती है। इससे आपकी जमा की हुई बचत जल्दी खत्म हो सकती है। सही और पर्याप्त कवरेज वाला प्लान लेना जरूरी है। कम उम्र में पॉलिसी लेने पर प्रीमियम कम होता है। यह रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा और मानसिक शांति देता है। बेहतर इलाज फाइनेंशियल स्ट्रेस के बिना संभव हो पाता है। सवाल- रिटायरमेंट के बाद इनकम के सोर्स कैसे बनाए जा सकते हैं? जवाब- रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम बनाए रखना जरूरी है। पैसिव इनकम के सोर्स तैयार करें। घर किराये पर देना स्थिर आय का विकल्प है। डिविडेंड देने वाले निवेश (शेयर/फंड) मददगार होते हैं। सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS) नियमित आय का सोर्स है। स्किल के आधार पर पार्ट-टाइम काम या फ्रीलांसिंग कर सकते हैं। कंसल्टिंग से भी अतिरिक्त इनकम प्राप्त की जा सकती है। ……………… ये खबर भी पढ़िए आपका पैसा- SIP और लंप सम में क्या बेहतर: आपकी जरूरत के मुताबिक क्या सही, एक्सपर्ट से जानें दोनों के जोखिम और फायदे हर व्यक्ति अपने भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाना चाहता है। इसके लिए लोग अपनी कमाई का एक हिस्सा भविष्य के लिए बचाते हैं या निवेश करते हैं। हालांकि, कुछ लोग यह नहीं जानते हैं कि कहां और कैसे निवेश करें। उन्हें यह नहीं पता होता कि बड़ा फंड बनाने के लिए SIP या लंप सम में कौन सा तरीका बेहतर है? आगे पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
8th Pay Commission Salary Calculator Scam Explained; APK File

3 घंटे पहले कॉपी लिंक बीते कुछ महीनों से 8वें वेतन आयोग से जुड़े अपडेट्स खबरों में हैं। वेतन आयोग भारत सरकार की एक ‘एडमिनिस्ट्रेटिव बॉडी’ है, यह लगभग हर 10 साल में केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में बढ़ोत्तरी की सिफारिश करती है। नए अपडेट्स के कारण केंद्रीय कर्मचारी अपनी बढ़ी सैलरी जानने के लिए उत्सुक हैं। साइबर ठग इस मौके का फायदा उठाकर ठगी कर रहे हैं। इंडियन साइबर क्राइम कोऑडिनेशन सेंटर (I4C) ने भी इसे लेकर अलर्ट जारी किया है। आज ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में ‘8th पे कमीशन सैलरी स्कैम’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- ठग इस स्कैम में लोगों को कैसे फंसा रहे हैं? ऐसे किसी भी साइबर स्कैम से बचने के लिए क्या करें? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- ‘8th पे कमीशन सैलरी कैलकुलेटर स्कैम’ क्या है? जवाब- यह एक साइबर फ्रॉड है, जिसमें ठग सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को वॉट्सएप पर फर्जी मैसेज भेजते हैं। इसमें सैलरी बढ़ोतरी की जानकारी देने के नाम पर APK फाइल डाउनलोड करने को कहा जाता है। जब यूजर इस फाइल को डाउनलोड और इंस्टॉल करता है, स्कैमर्स उसके मोबाइल का एक्सेस ले लेते हैं और बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं। सवाल- इंडियन साइबर क्राइम कोऑडिनेशन सेंटर (I4C) ने लोगों को इस स्कैम से सचेत करने के लिए क्या चेतावनी दी है? जवाब- I4C ने कहा है कि- ‘8th पे कमीशन सैलरी’ के नाम पर फर्जी मैसेज भेजे जा रहे हैं। इन मैसेज में APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है, जो खतरनाक है। ऐसी फाइल्स से मोबाइल डेटा और बैंक से जुड़ी सेंसेटिव जानकारी चुराई जा सकती है। इसलिए किसी भी अनजान लिंक या फाइल पर क्लिक न करें। केवल ऑफिशियल सोर्स से ही जानकारी लें। किसी भी संदिग्ध मैसेज को तुरंत रिपोर्ट करें। सवाल- ठग ‘8th पे सैलरी कैलकुलेटर स्कैम’ में लोगों को कैसे फंसा रहे हैं? जवाब- स्कैमर इस ठगी को कैसे अंजाम देते हैं, इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- लोग इतनी आसानी से ठगों के झांसे में क्यों आ जाते हैं? जवाब- दरअसल लोगों के मन में ये जानने को लेकर उत्सुकता होती है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिश के बाद उनके अकाउंट में कितने रुपए बढ़कर आएंगे। ठग इसी उत्सुकता और लालच का फायदा उठाते हैं। सवाल- ठग ‘8th पे सैलरी कैलकुलेटर स्कैम’ में किन लोगों को टारगेट बना रहे हैं? जवाब- ठग इसमें खासतौर पर केंद्रीय कर्मचारी टारगेट कर रहे हैं। साथ ही पेंशनर्स भी ठगों के निशाने पर हैं। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- APK फाइल डाउनलोड करने से मोबाइल कैसे हैक हो जाता है? जवाब- APK एंड्रॉयड एप इंस्टॉल करने की फाइल होती है। फर्जी APK में मालवेयर (वायरस) हो सकता है। इंस्टॉल होते ही यह एप कुछ परमिशन मांगता है। परमिशन मिलते ही, एप को मोबाइल का एक्सेस मिल जाता है। बैंकिंग एप और OTP की जानकारी भी चोरी हो सकती है। कुछ मालवेयर स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर सकते हैं। पर्सनल डेटा हैकर के सर्वर तक भेजा जाता है और स्कैमर मोबाइल हैक कर लेते हैं। सवाल- ऐसे किसी भी साइबर स्कैम से बचना है तो क्या करें? जवाब- I4C ने इसके लिए कुछ सलाह दी है। सभी टिप्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- स्कैमर्स के मैसेज में क्या रेड फ्लैग होते हैं? इन्हें कैसे पहचानें? जवाब- I4C के अनुसार, स्कैमर्स के मैसेज में कई रेड फ्लैग होते हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- अगर गलती से APK डाउनलोड हो जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसा होने पर तुरंत करें ये काम- सबसे पहले इंटरनेट (Wi-Fi/मोबाइल डेटा) तुरंत बंद करें। संदिग्ध APK से इंस्टॉल हुआ एप तुरंत अनइंस्टॉल करें। मोबाइल की सेटिंग में जाकर सभी अनजान एप्स चेक करें। एंटीवायरस से फोन को स्कैन करें और मालवेयर हटाएं। बैंकिंग एप्स और ईमेल के पासवर्ड तुरंत बदलें। अपने बैंक को तुरंत सूचित करें और ट्रांजैक्शन अस्थाई रूप से ब्लॉक कराएं। OTP, PIN या कोई भी सेंसिटिव डिटेल शेयर न करें। जरूरी हो तो फोन को ‘फैक्ट्री रीसेट’ करवाएं। सवाल- ऐसे अनऑथराइज्ड एप्स से बचने के लिए मोबाइल फोन में कौन-सी सिक्योरिटी सेटिंग्स ऑन रखनी चाहिए? जवाब- मोबाइल फोन में ऑन करें ये सेटिंग्स- हमेशा गूगल प्ले प्रोटेक्ट ऑन रखें ताकि संदिग्ध एप्स डाउनलोड न हो। ‘इंस्टॉल फ्रॉम अननोन सोर्सेस’ ऑप्शन बंद कर दें। मोबाइल फोन अपडेटेड रखें। सिर्फ जरूरी एप्स को ही कैमरा, माइक्रोफोन और फाइल का एक्सेस दें। स्ट्रॉन्ग स्क्रीन लॉक और बायोमेट्रिक सिक्योरिटी ऑन रखें। टू-फैक्टर एसोसिएशन (2FA) एक्टिव रखें। एंटीवायरस या मोबाइल सिक्योरिटी एप का इस्तेमाल करें। सवाल- अगर शक है कि स्कैम हो रहा है तो बैंक अकाउंट को तुरंत कैसे सिक्योर करें? जवाब- ऐसा हो तो तुरंत करें ये काम- तुरंत अपने बैंक की हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके सूचना दें या ब्रांच से संपर्क करें। इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग अस्थाई रूप से ब्लॉक करवाएं। ATM/डेबिट और क्रेडिट कार्ड तुरंत ब्लॉक करें। सभी पासवर्ड और UPI PIN तुरंत बदलें। संदिग्ध ट्रांजैक्शन की तुरंत शिकायत दर्ज करें। SMS/ईमेल अलर्ट एक्टिव रखें। सवाल- इस तरह के साइबर फ्रॉड की शिकायत कहां और कैसे करें? जवाब- ऐसे करें शिकायत- नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर ऑनलाइन शिकायत करें। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें। अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल में रिपोर्ट दर्ज कराएं। बैंक से जुड़े फ्रॉड में तुरंत अपने बैंक को सूचित करें। शिकायत करते समय स्क्रीनशॉट, मैसेज, लिंक जैसे सबूत साथ रखें। अपनी पूरी जानकारी सही और स्पष्ट रूप से दें। शिकायत नंबर/रसीद सुरक्षित रखें। जल्दी शिकायत करने से पैसा रिकवरी की संभावना बढ़ती है। ……………… ये खबर भी पढ़िए साइबर लिटरेसी- फास्टैग रिचार्ज स्कैम: जानें कैसे फंसते हैं लोग, सस्ते के लालच में न आएं, रीचार्ज कराते हुए बरतें 10 सावधानियां डिजिटल टोल सिस्टम ने नेशनल हाइवे पर सफर को आसान बनाया है। लेकिन साइबर ठग अब इसका गलत फायदा उठा रहे हैं। इसके चलते बीते कुछ दिनों में FASTag (फास्टैग) रीचार्ज और एनुअल पास के नाम पर ऑनलाइन ठगी के कई मामले सामने आए हैं। आगे पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
PAN-Based CAS Statement Explained; Mutual Funds

6 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक आजकल ज्यादातर निवेशक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या एप के जरिए SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) करते हैं। निवेशक कुछ SIP जारी रखते हैं, कुछ बीच में ही बंद कर देते हैं, जबकि समय बीतने पर कुछ फंड्स के तो नाम तक भूल जाते हैं। इसके बाद जब टैक्स फाइलिंग या फाइनेंशियल प्लानिंग की जरूरत होती है, तब इन्वेस्टमेंट डॉक्यूमेंट्स, लॉगिन आईडी और स्टेटमेंट ढूंढना मुश्किल हो जाता है। ऐसी कंडीशंस के लिए PAN बेस्ड कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) एक आसान तरीका है। इसके जरिए निवेशक अपने म्यूचुअल फंड्स के सभी निवेश एक ही जगह देख सकते हैं। इससे निवेश की ट्रैकिंग आसान होती है, ओवरलैप का जोखिम भी नहीं होता है। आज ‘आपका पैसा’ कॉलम में हम ‘PAN बेस्ड कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- कैसे इसका इस्तेमाल करें? इसके जरिए क्या-क्या जानकारी मिल सकती है? सवाल- क्या वाकई सिर्फ PAN से सारी SIP की जानकारी मिल सकती है? जवाब- हां, निवेशक PAN नंबर के जरिए SEBI-रजिस्टर्ड RTA (रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट) प्लेटफॉर्म से अपने म्यूचुअल फंड निवेश की पूरी जानकारी एक जगह देख सकते हैं। ये एजेंसियां फंड हाउस के निवेश रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से मेंटेन करती हैं। PAN आधारित CAS में निवेशक को म्यूचुअल फंड्स से जुड़ी सारी जानकारी मिलती है। यह सुविधा निवेश की पारदर्शिता बढ़ाती है और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बिखरे निवेश को व्यवस्थित तरीके से समझने में मदद करती है। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। सवाल- PAN कार्ड के जरिए SIP और म्यूचुअल फंड की सारी जानकारी पाने का सही तरीका क्या है? जवाब- आप CAMS या KFintech जैसी ऑफिशियल RTA की वेबसाइट पर जाकर अपना PAN नंबर और रजिस्टर्ड ईमेल/मोबाइल नंबर डालकर सभी म्यूचुअल फंड SIP की जानकारी पा सकते हैं। आइए इसे ग्राफिक के जरिए समझते हैं। सवाल- यह स्टेटमेंट किन इन्वेस्टमेंट्स और SIP को कवर करता है? जवाब- PAN बेस्ड CAS स्टेटमेंट में सभी एक्टिव और बंद SIP देखी जा सकती हैं। आइए इसे पॉइंटर्स में देखिए- ‘इक्विटी’ म्यूचुअल फंड में किया गया निवेश। ‘डेट’ म्यूचुअल फंड में किया गया निवेश। ‘ELSS’ (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) फंड में किया गया निवेश। ‘हाइब्रिड’ फंड में किया गया निवेश। ‘लिक्विड’ फंड में किया गया निवेश। ‘गोल्ड’ में किया गया निवेश। ‘लंप-सम’ (एकमुश्त) निवेश। यह निवेशक को अपने पूरे पोर्टफोलियो का ओवरऑल व्यू देता है। इससे यह समझना आसान हो जाता है कि कुल निवेश किस एसेट क्लास में ज्यादा है और कहां बैलेंस बनाने की जरूरत है। यह जानकारी लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए बेहद उपयोगी साबित होती है। सवाल- क्या CAS स्टेटमेंट ओवरलैप और डुप्लीकेट SIP से बचा सकता है? जवाब- PAN नंबर के जरिए अपनी SIPs की जानकारी देखकर ओवरलैप और डुप्लीकेट निवेश से बच सकते हैं। अक्सर निवेशक अलग-अलग एप्स से SIP करते हैं और फिर भूल जाते हैं कि उनका पैसा कहां लगा है। इससे कई बार एक ही कैटेगरी के कई फंड्स में निवेश हो जाता है, जिन्हें डुप्लीकेट फंड्स कहते हैं। बहुत ज्यादा फंड्स रखने से रिटर्न कमजोर हो सकता है और पोर्टफोलियो मैनेज करना भी मुश्किल हो सकता है। PAN बेस्ड रिपोर्ट निवेशक को यह समझने में मदद करती है कि किन फंड्स को बनाए रखना है और किन्हें मर्ज या बंद करना बेहतर है। सवाल- टैक्स फाइलिंग और प्लानिंग में यह रिपोर्ट कैसे मददगार है? जवाब- CAS स्टेटमेंट निवेशक को कैपिटल गेन, ELSS डिडक्शन और कुल निवेश की स्पष्ट जानकारी देता है। इससे टैक्स फाइलिंग के दौरान सही आंकड़े दर्ज करना आसान हो जाता है और गलती की आशंका कम हो जाती है। निवेशक यह भी देख सकते हैं कि किस निवेश पर लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म टैक्स लागू होगा। इसके अलावा यह रिपोर्ट फाइनेंशियल गोल्स जैसे रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने की योजना बनाने में भी मदद करती है। इसके सभी फायदे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या CAS स्टेटमेंट सर्विस पूरी तरह सुरक्षित है? जवाब- हां, PAN बेस्ड SIP स्टेटमेंट सर्विस SEBI-रजिस्टर्ड एजेंसियां ही देती हैं। इसलिए यह विश्वसनीय है। डेटा ट्रांसमिशन एन्क्रिप्टेड (वॉट्सएप चैट की तरह) होता है और OTP बेस्ड वेरिफिकेशन के बाद ही स्टेटमेंट जारी किया जाता है। रिपोर्ट केवल रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर भेजी जाती है, जिससे अनऑफिशियल एक्सेस का जोखिम नहीं होता है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने PAN, ईमेल और मोबाइल की जानकारी अपडेट रखें और स्टेटमेंट केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही डाउनलोड करें। इससे साइबर फ्रॉड का रिस्क कम होता है। सवाल- क्या मोबाइल पर भी यह स्टेटमेंट देख सकते हैं? जवाब- हां, CAMS और KFintech जैसी वेबसाइट मोबाइल फ्रेंडली हैं। मेल पर आई स्टेटमेंट (PDF फाइल) को स्मार्टफोन में आसानी से खोला जा सकता है। निवेशक इसे सेव, शेयर या प्रिंट भी कर सकते हैं। कुछ फंड हाउस RTA एप्स के जरिए भी पोर्टफोलियो ट्रैकिंग की सुविधा देते हैं। मोबाइल पर स्टेटमेंट मिलने से निवेश की रेगुलर रिव्यू करना आसान हो जाता है। निवेशक जरूरत के अनुसार समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर सकते हैं। सवाल- क्या PAN बेस्ड रिपोर्ट से इन्वेस्ट स्ट्रेटजी बनाने में मदद मिलती है? जवाब- हां, पूरे पोर्टफोलियो को एक साथ देखकर एसेट एलोकेशन और रिस्क प्रोफाइल समझने में आसानी होती है। इससे यह तय करना आसान होता है कि इक्विटी, डेट या गोल्ड में निवेश का अनुपात सही है या नहीं। PAN रिपोर्ट लॉन्ग टर्म में ‘इन्वेस्टमेंट डिसिप्लिन’ को मजबूत करती है और इमोशनल डिसीजन को कम करने में मदद करती है। रेगुलर रिव्यू से निवेशक खराब परफॉर्मेंस वाले फंड्स को समय रहते बदल सकते हैं और बेहतर अवसरों का फायदा उठा सकते हैं। सवाल- अगर कोई SIP भूल गए हैं या बंद करना चाहते हैं तो क्या करें? जवाब- CAS स्टेटमेंट में इनएक्टिव या लो परफॉर्मेंस वाली SIP का पता चल जाता है। निवेशक उसे बंद या मॉडिफाई कर सकते हैं। हालांकि, SIP बंद करने से पहले यह समझना जरूरी है कि इसके लिए आपको कोई चार्ज तो नहीं देना पड़ेगा, टैक्स कितना लगेगा और आपके फाइनेंशियल गोल्स पर क्या असर होगा। कुछ मामलों में SIP को पूरी तरह बंद करने की बजाय उसकी रकम कम करना या पैसा किसी बेहतर फंड में डालना ज्यादा सही फैसला है। ऐसा
Silent Heart Attack Symptoms Explained; Warning Signs

6 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक खांसी, छींक, थकान और बुखार। ये सब सर्दी-जुकाम और फ्लू के कॉमन लक्षण हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कई बार ये ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ जैसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। मैकगिल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के मुताबिक 55 साल से कम उम्र की 1 से 5 महिलाओं को हार्ट अटैक के दौरान सीने में दर्द बिल्कुल नहीं होता। उन्हें बस मामूली थकान, मतली या बुखार जैसे संकेत दिखते हैं। साइलेंट हार्ट अटैक में हार्ट तक ब्लड फ्लो कम हो जाता है, लेकिन इसके संकेत हल्के या अस्पष्ट होते हैं। कई बार लोग इन लक्षणों को तनाव, थकान या फ्लू समझकर अनदेखा कर देते हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार महिलाओं में मौत का सबसे बड़ा कारण हार्ट डिजीज है। वहीं वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन के मुताबिक, हर साल लगभग तीन में से एक महिला की मौत दिल की बीमारी से जुड़ी होती है। इसलिए आज फिजिकल हेल्थ में हम बात करेंगे महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक की। साथ ही जानेंगे कि- महिलाओं में इसके संभावित संकेत क्या हो सकते हैं? किन महिलाओं में इसका जोखिम ज्यादा होता है? एक्सपर्ट: डॉ. हेमंत मदान, सीनियर डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, नारायणा हॉस्पिटल, गुरुग्राम सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक क्या होता है? जवाब– साइलेंट हार्ट अटैक भी एक तरह का हार्ट अटैक ही होता है। इसमें दिल तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई बाधित होती है। फर्क सिर्फ इतना है कि ऐसा होने पर कोई साफ संकेत दिखाई नहीं देता, न महसूस होता है। साइलेंट हार्ट अटैक होने पर आर्टरीज में रुकावट पैदा होती है, जिससे हार्ट की मांसपेशियों को नुकसान होने लगता है, लेकिन शरीर तेज दर्द के रूप में ‘अलार्म’ नहीं देता। कई बार यह इसलिए होता है क्योंकि नर्व्स की संवेदनशीलता कम हो जाती है। इसलिए दर्द महसूस नहीं होता या बहुत हल्का होता है। यानी अंदर से हार्ट को उतना ही नुकसान हो रहा होता है, जितना सामान्य हार्ट अटैक में होता है। बस फर्क इतना है कि शरीर आपको जोर से संकेत नहीं देता। इसलिए इसे ‘साइलेंट’ हार्ट अटैक कहा जाता है। सवाल– साइलेंट हार्ट अटैक और सामान्य हार्ट अटैक में क्या फर्क है? जवाब– इन दोनों के लक्षण, संकेतों और उसके फर्क को नीचे ग्राफिक से समझते हैं- सवाल– पुरुषों की तुलना में महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक ज्यादा कॉमन क्यों है? जवाब– नीचे दिए पॉइंटर्स से समझिए– 1. ब्लॉकेज पैटर्न अलग होना महिला और पुरुष में ब्लॉकेज का पैटर्न अलग-अलग होता है। पुरुषों में बड़ी आर्टरी में “ब्लॉकेज” ज्यादा साफ होता है। महिलाओं के शरीर में बहुत छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं में समस्या होती है। 2. हॉर्मोन्स का फर्क महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजेन हॉर्मोन काफी हद तक हार्ट को प्रोटेक्ट करता है, लेकिन मेनोपॉज के बाद उनमें यह जोखिम बढ़ जाता है। 3. दर्द महसूस करने का तरीका महिलाओं और पुरुषों में दर्द को महसूस करने का तरीका या पेन परसेप्शन भी अलग हो सकता है। महिलाओं को या तो दर्द कम महसूस होता है। या वो दर्द को इग्नोर करने की आदी होती हैं। 4. सारी स्टडीज पुरुषों पर हार्ट अटैक को लेकर लंबे समय तक हुई सारी स्टडीज पुरुषों पर आधारित रही हैं। इसलिए हमें महिलाओं के संबंध में ज्यादा जानकारी और डेटा ही नहीं है। सवाल- महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के संभावित संकेत क्या हो सकते हैं? जवाब– महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर बहुत हल्के या सामान्य समस्याओं जैसे लग सकते हैं। इसलिए कई बार इन्हें पहचानना मुश्किल हो जाता है। ग्राफिक में इसके संकेत देखिए- सवाल– क्या सिर्फ थकान या कमजोरी भी साइलेंट हार्ट अटैक का संकेत हो सकती है? जवाब– हां, हार्वर्ड हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अचानक और बिना कारण होने वाली ज्यादा थकान भी हार्ट प्रॉब्लम की ओर इशारा करती है। वहीं हार्ट फाउंडेशन से जुड़ी एक स्टडी में कई महिलाओं ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक से कुछ महीनों पहले तक लगातार ज्यादा थकान महसूस हो रही थी। सवाल- क्या मानसिक तनाव या डिप्रेशन भी साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ा सकता है? जवाब– हां, लंबे समय तक तनाव या डिप्रेशन रहने पर शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रिनेलिन जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन का लेवल बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट बढ़ता है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सवाल- किन महिलाओं को साइलेंट हार्ट अटैक का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब– कुछ महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक का जोखिम ज्यादा हो सकता है। पॉइंटर्स से समझते हैं कि किन्हें ज्यादा रिस्क रहता है- जिन्हें डायबिटीज है। जो मोटापे से ग्रस्त हैं। जो फिजिकल एक्टिविटी नहीं करतीं। जो स्मोकिंग करती हैं। जो ज्यादा स्ट्रेस में रहती हैं। जिन्हें डिप्रेशन है। जिन्हें ऑटोइम्यून डिजीज (जैसे-लूपस या रूमेटॉइड आर्थराइटिस) है। जिन्हें PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम) है। जिन्हें प्रेग्नेंसी से जुड़े कॉम्पलिकेशन्स (जैसे- प्री-एक्लेम्प्सिया) हैं। जिनका ब्लड प्रेशर हाई रहता है। जिनका मेनोपॉज हो चुका है। जिनका कोलेस्ट्रॉल हाई रहता है। इन लोगों को अपनी हार्ट हेल्थ पर खास ध्यान देना चाहिए और नियमित हेल्थ चेकअप कराना चाहिए। सवाल- क्या हॉर्मोनल बदलाव (जैसे मेनोपॉज) के बाद महिलाओं में इसका खतरा बढ़ जाता है? जवाब– हां, इसका मुख्य कारण एस्ट्रोजेन हॉर्मोन का स्तर कम होना है। एस्ट्रोजेन वो हॉर्मोन है, जो प्रजनन उम्र में महिलाओं के हार्ट और ब्लड वेसेल्स की सुरक्षा करता है। इसके अलावा हॉर्मोनल बदलाव शरीर के ‘पेन सिग्नल’ को भी प्रभावित कर सकते हैं। सवाल- साइलेंट हार्ट अटैक का कोई भी संकेत दिखने पर महिलाओं को तुरंत क्या करना चाहिए? जवाब– इस स्थिति में सबसे जरूरी है कि बिना देर किए तुरंत मेडिकल मदद ली जाए और नजदीकी अस्पताल में जाकर हार्ट से जुड़ी जांच कराई जाए। पॉइंटर्स से समझते हैं- सांस फूले या अचानक बहुत असहजता महसूस हो तो इसे इग्नोर न करें। लक्षण दिखने पर तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या किसी की मदद से अस्पताल पहुंचें। अपने लक्षणों के बारे में किसी करीबी या आसपास मौजूद व्यक्ति को तुरंत जानकारी दें। अगर घर में अकेले रहते हैं तो पैनिक बटन लगवाकर रखें। ऐसी किसी भी इमरजेंसी कंडीशन में पैनिक बटन दबाएं। अगर घर में एस्पिरिन (300mg) है तो एक गोली चबा लें। इसे निगलें नहीं, धीरे-धीरे चबाएं। दरअसल
Goal Investment & SIP Strategy Explained

Hindi News Business Dainik Bhaskar & Aditya Birla MF Workshop: Goal Investment & SIP Strategy Explained जोधपुर16 मिनट पहले कॉपी लिंक पाली के सुशील मूंदड़ा, जोनल हैड ललित शर्मा, जोधपुर के विशेषज्ञ सुरेश अरोड़ा, चेतन लाखोटिया और सुशील मूंदड़ा ने सवालों के जवाब दिए। दैनिक भास्कर और आदित्य बिड़ला म्यूचुअल फंड की ओर से शनिवार को ‘शिक्षित निवेशक, विकसित भारत’ विषय पर अवेयरनेस वर्कशॉप हुई। पांचबत्ती स्थित एक होटल में हुई इस वर्कशॉप में देशभर से आए विशेषज्ञों ने सही समय पर और लक्ष्य आधारित निवेश के बारे में प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में आयोजित पैनल डिस्कशन में शहर के युवा, बुजुर्ग और महिलाओं ने निवेश से जुड़े सवाल पूछे। पाली के सुशील मूंदड़ा, जोनल हैड ललित शर्मा, जोधपुर के विशेषज्ञ सुरेश अरोड़ा, चेतन लाखोटिया और सुशील मूंदड़ा ने उनके सवालों के जवाब दिए। पैनल डिस्कशन में शहर के युवा, बुजुर्ग और महिलाओं ने निवेश से जुड़े सवाल पूछे। म्यूचुअल फंड राजस्थान के रीजनल हैड मयंक कुमार सिंह ने बताया कि सेबी और इन्वेस्टर आईपी के माध्यम से निवेशकों को फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स की जानकारी दी गई। वर्कशॉप की शुरुआत आईआईटी जोनल हैड ललित शर्मा ने प्रेजेंटेशन के जरिए आज के दौर में निवेश कर लक्ष्य हासिल करने की रणनीति समझाते हुए की। उन्होंने म्यूचुअल फंड, बैंक डिपॉजिट, प्रॉपर्टी और इंश्योरेंस जैसे निवेश विकल्पों के बारे में जानकारी दी। 30 से 35 वर्ष की उम्र में निवेश के फायदे उन्होंने बताया कि 30 से 35 वर्ष की उम्र में निवेश शुरू करने पर मासिक या साप्ताहिक निवेश के साथ लंबी अवधि के विकल्प बेहतर परिणाम दे सकते हैं। 18 वर्ष से अधिक आयु और केवाईसी पूर्ण करने वाले युवा नौकरी, विवाह, बच्चों की पढ़ाई जैसे लक्ष्यों के लिए निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। महिलाओं की पारंपरिक बचत से निवेश की सीख विशेषज्ञों ने कहा कि जिस तरह कई घरों में महिलाएं अलग-अलग डिब्बों में पैसे रखकर बचत करती हैं, उसी तरह निवेश भी अलग-अलग विकल्पों में करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर यह राशि काम आती है। उन्होंने म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय फाइनेंशियल एडवाइजर की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई। लक्ष्य के अनुसार निवेश जरूरी विशेषज्ञों ने बताया कि निवेश हमेशा लक्ष्य के अनुसार करना चाहिए, जैसे बच्चों की शिक्षा, विवाह या भविष्य की जरूरतें आदि। निवेश में कोई गारंटी नहीं होती, इसलिए विशेषज्ञ सलाह जरूरी है। यदि किसी की 5-5 हजार रुपए की चार एसआईपी चल रही हैं तो उन्हें एक ही दिन के बजाय 20-25 दिन के अंतराल पर रखना बेहतर रहता है। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का लाभ मिल सकता है और रिटर्न बेहतर हो सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Instagram Phishing Scam Explained; Fake Messages – OTP Fraud

Hindi News Lifestyle Instagram Phishing Scam Explained; Fake Messages OTP Fraud | Cyber Crime Alert 35 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक आज के समय में इंस्टाग्राम सिर्फ फोटो-वीडियो शेयर करने का प्लेटफॉर्म नहीं है। यह पहचान और कमाई का जरिया भी बन चुका है। यही वजह है कि साइबर अपराधियों की नजर इंस्टाग्राम के आम यूजर्स से लेकर क्रिएटर्स और बिजनेस अकाउंट्स, सभी पर है। बीते कुछ महीनों में इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस स्कैम में साइबर ठग फेक ईमेल या नकली मैसेज भेजकर यूजर्स का अकाउंट हैक करने की कोशिश करते हैं। इन फेक मेल/मैसेज में अक्सर लिखा होता है कि आपका सोशल मीडिया अकाउंट बंद होने वाला है या आपने कोई नियम तोड़ा है। डर के कारण लोग बिना सोचे-समझे भेजे गए लिंक पर क्लिक कर देते हैं। यहीं से स्कैम शुरू होता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को कैसे सुरक्षित रखें। इसलिए आज साइबर लिटरेसी कॉलम में बात इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम की। साथ ही जानेंगे कि- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम से बचने के लिए कौन-सी सावधानियां बरतनी चाहिए? अगर गलती से फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया तो क्या करें? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम क्या है? जवाब- यह एक ऑनलाइन धोखाधड़ी है, जिसमें ठग इंस्टाग्राम के नाम से फर्जी ईमेल, मैसेज या लिंक भेजकर यूजर की लॉगिन डिटेल्स चुराते हैं। इसके बाद अकाउंट हैक कर लेते हैं। सवाल- स्कैमर इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं? जवाब- साइबर अपराधी इस स्कैम में यूजर्स को ऐसे ईमेल या मैसेज भेजते हैं, जो देखने में बिल्कुल ऑफिशियल लगते हैं। इस मैसेज में अक्सर डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, जैसेकि– “आपका अकाउंट कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन कर रहा है।” “अगले 24 घंटों में आपका इंस्टाग्राम अकाउंट बंद कर दिया जाएगा।” “आपका अकाउंट बंद होने वाला है।” “अकाउंट ब्लॉक से बचने के लिए इस लिंक पर जाएं।” इस फेक मैसेज के साथ एक लिंक भी होता है, जो – ऐसा दिखता है जैसे Meta या Instagram की ओर से आया है। यह लिंक असली जैसी दिखने वाली एक नकली वेबसाइट पर लेकर जाता है। यह एक फर्जी लॉगिन पेज होता है। उस पेज पर यूजर अपने क्रेडेंशियल्स दर्ज करता है। फिर वो फर्जी पेज वेरिफिकेशन के लिए OTP मांगता है। OTP डालते ही आपका अकाउंट हैक हो जाता है। स्कैमर्स उसे अपने कंट्रोल में ले लेते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- लोग इतनी आसानी से इस स्कैम के झांसे में कैसे फंस जाते हैं? जवाब- इसके कई कारण हैं। जैसेकि- स्कैमर्स सबसे पहले डर पैदा करते हैं। अकाउंट सस्पेंड होने, पोस्ट हटने या नियमों को उल्लंघन करने जैसे मैसेज देखकर यूजर घबरा जाते हैं। ऊपर से ये ईमेल और मैसेज दिखने में बिल्कुल ऑफिशियल लगते हैं, जिससे शक नहीं होता है। जल्दबाजी में लोग लिंक की जांच नहीं करते और सोचते हैं कि तुरंत लॉगिन करना ही समाधान है। अवेयरनेस की कमी भी एक बड़ी वजह है, जिसके कारण लोग अपनी लॉगिन डिटेल्स खुद ही स्कैमर्स को दे बैठते हैं। सवाल- हैकर्स इंस्टाग्राम अकाउंट को हैक करके क्या-क्या नुकसान पहुंचा सकते हैं? जवाब- हैकर्स पासवर्ड बदलकर अकाउंट पर पूरा कंट्रोल ले सकते हैं और इस तरह के नुकसान पहुंचा सकते हैं– आपका पासवर्ड बदल देना। आपका ईमेल/फोन नंबर हटा देना। आपको आपके ही अकाउंट से बाहर कर देना। अकाउंट रिकवरी का ऑप्शन बदल देना। आर्थिक क्षति पहुंचाना। फॉलोअर्स से ‘इन्वेस्टमेंट’ के नाम पर पैसे मांगना। फर्जी Giveaway या Crypto स्कीम चलाना। आपत्तिजनक या अश्लील पोस्ट डालना। राजनीतिक/विवादित कंटेंट शेयर करना। फर्जी स्टोरी लगाकर बदनाम करना। पर्सनल डेटा चोरी करना। पर्सनल चैट पढ़ना/ब्लैकमेल करना। निजी फोटो/वीडियो यूज करना। आपके नाम से दूसरों को ठगना। दोस्तों को फिशिंग लिंक भेजना। सवाल- क्या इंस्टाग्राम कभी भी ऐसा मैसेज भेजता है कि “24 घंटे के अंदर आपका अकाउंट बंद कर दिया जाएगा?” जवाब- हां, अगर आपका अकाउंट कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने की वजह से सस्पेंड किया जाता है तो इंस्टाग्राम इन-एप नोटिफिकेशन या आधिकारिक ईमेल के जरिए इसकी जानकारी देता है। हालांकि, डायरेक्ट मैसेज (DMs) के जरिए ‘24-48 घंटों के अंदर अकाउंट बंद करने की धमकी’ देने वाले ईमेल आमतौर पर फिशिंग स्कैम होते हैं। सवाल- फिशिंग ईमेल आईडी की पहचान कैसे करें? जवाब- इंस्टाग्राम के नाम से आए फेक ईमेल की पहचान करने के लिए सबसे पहले भेजने वाले की ईमेल आईडी ध्यान से जांचें। इंस्टाग्राम/Meta से जुड़े वैध ईमेल डोमेन की लिस्ट नीचे देखिए। notification@facebookmail.com noreply@facebookmail.com @business.fb.com @support.facebook.com @fb.com @meta.com @account.meta.com @internal.metamail.com @go.metamail.com advertise-noreply@facebookmail.com update@em.facebookmail.com @mediapartnerships.fb.com @global.metamail.com अगर मेल इन आधिकारिक डोमेन से नहीं आया है, तो वह फेक हो सकता है। अक्सर फर्जी ईमेल डोमेन में स्पेलिंग में थोड़ा बहुत हेरफेर होता है। इसलिए डोमेन की स्पेलिंग बहुत ध्यान से पढ़ें। ऐसे किसी भी मेल या मैसेज पर भरोसा न करें, जिसमें- पैसों की डिमांड की गई हो। गिफ्ट का लालच दिया गया हो। अकाउंट डिलीट/बैन करने की धमकी दी गई हो। सवाल- क्या इंस्टाग्राम कभी भी मैसेज भेजकर सिक्योरिटी पासवर्ड मांगता है? जवाब- नहीं, इंस्टाग्राम कभी भी मैसेज, ईमेल या कॉल के जरिए आपकी लॉगिन डिटेल्स, ओटीपी या कोई भी सिक्योरिटी डिटेल नहीं मांगता है। सवाल- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम से बचने के लिए कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- थोड़ी-सी सतर्कता आपके इंस्टाग्राम अकाउंट को सुरक्षित रख सकती है। इसलिए कुछ बुनियादी बातों का खास ख्याल रखें। इसे नीचे दिए गए ग्राफिक से समझिए- सवाल- अगर गलती से फिशिंग लिंक पर क्लिक हो जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसे में तुरंत अपना इंस्टाग्राम पासवर्ड बदलें। सभी डिवाइसेज से लॉगआउट करें और टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करें। साथ ही ईमेल सिक्योर करें और संदिग्ध एक्टिविटी को इंस्टाग्राम में रिपोर्ट करें। सवाल- इंस्टाग्राम से आए आधिकारिक ईमेल की पुष्टि कैसे करें? जवाब- इंस्टाग्राम से आए आधिकारिक ईमेल की पुष्टि के लिए सीधे इंस्टाग्राम एप खोलें। सेटिंग्स के सिक्योरिटी वाले ऑप्शन पर क्लिक करके ‘Emails from Instagram’ में जाएं। यहां आपको इंस्टाग्राम द्वारा भेजे गए सभी असली ईमेल की लिस्ट मिल जाती है, जिससे पता चल जाता है कि मेल रियल है या फेक। ……………… साइबर लिटरेसी से जड़ी ये खबर भी पढ़िए साइबर लिटरेसी- मैट्रिमोनियल प्लेटफार्म








