60 Days Supply; Forex $703B; Govt Loss ₹1000 Cr Daily

Hindi News National India Petrol Diesel Stock: 60 Days Supply; Forex $703B; Govt Loss ₹1000 Cr Daily नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में वेस्ट एशिया पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक हुई। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि बढ़ती वैश्विक कीमतों के बावजूद तेल कंपनियां रोज करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं, ताकि आम लोगों पर बोझ न पड़े। हालांकि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में वेस्ट एशिया पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक हुई। इसमें पेट्रोलियम, रेलवे, सिविल एविएशन, उर्वरक, पोर्ट और साइंस से जुड़े मंत्री शामिल हुए रहे। बताया गया कि भारत के पास 60 दिन का कच्चा तेल और गैस का स्टॉक मौजूद है, जबकि LPG का 45 दिन का स्टॉक है। लोगों को घबराने या पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, देश की विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति भी मजबूत है और यह $703 अरब पर है। इधर पीएम मोदी ने 24 लगातार दूसरी बार देशवासियों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील की। बैठक में पेट्रोलियम, रेलवे, सिविल एविएशन, उर्वरक, पोर्ट और साइंस से जुड़े मंत्री शामिल रहे। तेल कंपनियों पर बढ़ा बोझ, ₹2 लाख करोड़ तक अंडर-रिकवरी अधिकारियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसके चलते देश पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ रहा है। भारत उन गिने-चुने देशों में है जहां 70 दिन से ज्यादा समय से वैश्विक संकट के बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं। हालांकि, इसके लिए तेल कंपनियां रोज करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं। पहली तिमाही में ही अंडर-रिकवरी करीब ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच गई है, ताकि वैश्विक कीमतों का असर सीधे उपभोक्ताओं पर न पड़े। PM लगातार दूसरे दिन बोले- पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करें पीएम नरेंद्र मोदी ने लगातार दूसरे दिन लोगों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करें और मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। वडोदरा में मोदी ने कहा कि जैसे देश ने मिलकर कोरोना संकट का सामना किया था, वैसे ही मौजूदा संकट से भी देश बाहर निकल जाएगा। विदेश में रहने वाले भारतीयों से कहूंगा कि कम से कम पांच विदेशी मेहमानों को भारत घुमाने लाइए। उन्होंने कहा कि सोने के आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। जब तक हालात सामान्य न हों हम सोने की खरीद टालें। गोल्ड की जरूरत नहीं है। मोदी ने खाने के तेल की खपत कम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल के आयात पर भी देश की बड़ी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर लोग खाने के तेल का कम उपयोग करें तो इससे देश और शहर दोनों को फायदा होगा। पूरी खबर पढ़ें… …………. यह खबर भी पढ़ें… तेल-कंपनियों को हर दिन ₹1,700 करोड़ का नुकसान: 10-हफ्ते में ₹1 लाख करोड़ का घाटा, वजह- वैश्विक तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 50% तक बढ़ चुकी हैं। इसके बावजूद भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले दो साल के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं। सरकारी तेल कंपनियां देश के उपभोक्ताओं को ग्लोबल एनर्जी शॉक से बचाने के लिए भारी वित्तीय बोझ यानी नुकसान उठा रही हैं। पिछले 10 हफ्तों में इन कंपनियों को ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
60 Days Supply; Forex $703B; Govt Loss ₹1000 Cr Daily

Hindi News National India Petrol Diesel Stock: 60 Days Supply; Forex $703B; Govt Loss ₹1000 Cr Daily नई दिल्ली48 मिनट पहले कॉपी लिंक रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में वेस्ट एशिया पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक हुई। केंद्र सरकार विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए इमरजेंसी एक्शन पर विचार कर रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के असर और बढ़ती तेल कीमतों के बीच सरकार ईंधन सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर सकती है। TOI की खबर के मुताबिक इसका मकसद बढ़ती तेल कीमतों के असर को कंट्रोल करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और RBI के अधिकारियों के बीच इस पर चर्चा हुई है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इधर, सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में वेस्ट एशिया पर मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक हुई। इसमें कहा गया कि बढ़ती वैश्विक कीमतों के बावजूद तेल कंपनियां रोज करीब ₹1000 करोड़ का नुकसान झेल रही हैं, ताकि आम लोगों पर बोझ न पड़े। बैठक में पेट्रोलियम, रेलवे, सिविल एविएशन, उर्वरक, पोर्ट और साइंस से जुड़े मंत्री शामिल रहे। देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं बैठक में पेट्रोलियम, रेलवे, सिविल एविएशन, उर्वरक, पोर्ट और साइंस से जुड़े मंत्री शामिल हुए रहे। इसमें बताया भारत के पास 60 दिन का कच्चा तेल और गैस का स्टॉक मौजूद है, जबकि LPG का 45 दिन का स्टॉक है। लोगों को घबराने या पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगाने की जरूरत नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, देश की विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति भी मजबूत है और यह $703 अरब पर है। सरकार सोना-इलेक्ट्रॉनिक्स इम्पोर्ट सीमित करने का सोच रही ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार सोना और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी आयात को सीमित करने के उपाय भी देख रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन चीजों के आयात पर रोक या नियंत्रण लगाया जा सकता है, हालांकि इस पर भी अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। PM लगातार दूसरे दिन बोले- पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करें पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवा को लगातार दूसरे दिन लोगों से ईंधन और संसाधनों का कम इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करें और मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें। वडोदरा में मोदी ने कहा कि जैसे देश ने मिलकर कोरोना संकट का सामना किया था, वैसे ही मौजूदा संकट से भी देश बाहर निकल जाएगा। विदेश में रहने वाले भारतीयों से कहूंगा कि कम से कम पांच विदेशी मेहमानों को भारत घुमाने लाइए। उन्होंने कहा कि सोने के आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। जब तक हालात सामान्य न हों हम सोने की खरीद टालें। गोल्ड की जरूरत नहीं है। मोदी ने खाने के तेल की खपत कम करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि खाद्य तेल के आयात पर भी देश की बड़ी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर लोग खाने के तेल का कम उपयोग करें तो इससे देश और शहर दोनों को फायदा होगा। पूरी खबर पढ़ें… …………. यह खबर भी पढ़ें… तेल-कंपनियों को हर दिन ₹1,700 करोड़ का नुकसान: 10-हफ्ते में ₹1 लाख करोड़ का घाटा, वजह- वैश्विक तनाव के बीच पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 50% तक बढ़ चुकी हैं। इसके बावजूद भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले दो साल के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं। सरकारी तेल कंपनियां देश के उपभोक्ताओं को ग्लोबल एनर्जी शॉक से बचाने के लिए भारी वित्तीय बोझ यानी नुकसान उठा रही हैं। पिछले 10 हफ्तों में इन कंपनियों को ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









