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Book Review; Chhoti-Chhoti Aadaton Se Layen Bade Badlaaw | Habits

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30 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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किताब का नाम: ‘छोटी-छोटी आदतों से लाएं बड़े बदलाव’

(‘द रोड टू बेटर हैबिट्स’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक: डेरियस फरू

प्रकाशक: पेंगुइन

अनुवाद: अंजलि तिवारी

मूल्य: 250 रुपए

आज की तेज रफ्तार दुनिया में हर कोई बेहतर करियर और संतुलित जीवन चाहता है। इसकी शुरुआत छोटे कदमों से होती है।

लेखक और आंत्रप्रेन्योर डेरियस फरू की किताब ‘छोटी-छोटी आदतों से लाएं बड़े बदलाव’ इसी विचार को सरल और प्रैक्टिकल तरीके से समझाती है।

109 पेजों की इस किताब का हर पेज इम्पैक्टफुल है। फरू का मानना है कि हम वही बनते हैं, जो रोज करते हैं। इसलिए जिंदगी बदलने के लिए खराब आदतें बदलनी होंगी।

यह किताब सिखाती है कि अच्छे बदलाव के लिए किसी जादुई ट्रांसफॉर्मेशन की जरूरत नहीं, सिर्फ सही दिशा में छोटे-छोटे कदम उठाने की जरूरत है।

फरू की लेखन शैली की खासियत ये है कि वो जटिल साइकोलॉजी को दोस्ताना अंदाज में बताते हैं, जैसे कोई दोस्त चाय की चुस्की के साथ सलाह दे रहा हो।

किताब का मकसद और अहमियत

अमूमन लोग बदलाव के लिए बहुत ऊंचे लक्ष्य रखते हैं, जब उन्हें हासिल नहीं कर पाते तो निराश हो जाते हैं। किताब का मुख्य उद्देश्य इसी सोच को बदलना है।

किताब प्रेरणा के साथ ग्रोथ ट्रैक करने, जवाबदेही तय करने और भटकने पर बिना गिल्ट ट्रैक पर लौटने की प्रैक्टिकल अप्रोच देती है।

किताब सिखाती है कि सफलता एक रात में नहीं मिलती। यह नियमित रूप से किए गए छोटे प्रयासों का परिणाम है। नीचे दिए ग्राफिक से किताब के मुख्य सबक समझिए-

लेखक डेरियस फरू ने अपनी किताब में अच्छी आदतों के लिए एक स्पष्ट और तार्किक रोडमैप दिया है, जिसे 5 सरल स्टेप्स में समझा जा सकता है।

बुरी आदतें एक साथ छोड़ें

लेखक फरू कहते हैं कि सभी बुरी आदतों को एक ही बार में छोड़ देना चाहिए। वह तर्क देते हैं कि अच्छी आदतें बनाने के लिए एक साफ स्लेट की जरूरत होती है। पुरानी नकारात्मक आदतों के साथ नई सकारात्मक आदतें बनाना मुश्किल है।

एक बार में सिर्फ एक अच्छी आदत अपनाएं

लेखक की सलाह है कि एक बार जब बुरी आदतों से छुटकारा पा लेते हैं तो एक-एक करके अच्छी आदतें अपनाना शुरू करें।

हम एक साथ बहुत सारे अच्छे काम करने की कोशिश करते हैं (जैसे जिम जाना, रोज पढ़ना, जर्नलिंग करना), लेकिन यह हमें सिर्फ ओवरवेल्म यानी अभिभूत करता है।

इससे दिमाग और शरीर पर बोझ बढ़ता है, लेकिन नतीजा हमारे पक्ष में नहीं जाता है। सारी मेहनत बिखर सी जाती है।

फरू कहते हैं कि अपनी सारी एनर्जी एक आदत को मजबूत करने में लगाएं। जब वह आदत आपके जीवन का सहज हिस्सा बन जाए, तभी अगली आदत पर जाएं।

शुरुआत को बहुत आसान रखें

लेखक कहते हैं, किसी भी अच्छी आदत की शुरुआत बहुत आसान रखें। उदाहरण के लिए-

  • अगर रोज दौड़ना चाहते हैं तो पहले दिन बस जूते पहनकर दरवाजे तक जाएं।
  • अगर रोज पढ़ना चाहते हैं तो पहले दिन बस एक पैराग्राफ पढ़ें।
  • अगर किताब लिखना चाहते हैं तो पहले दिन एक वाक्य लिखें।

शुरुआत को आसान बनाने से आप कभी असफल नहीं होते। इससे ब्रेन में सफलता की भावना पैदा होती है और निरंतरता बनी रहती है। यह ‘शून्य’ से बेहतर है।

अपनी प्रोग्रेस को ट्रैक करें

लेखक कहते हैं कि अपनी प्रोग्रेस को ट्रैक करना जरूरी है। अगर प्रोग्रेस को लगातार ट्रैक किया जाए तो हम अपनी प्रगति के प्रति सचेत बने रहते हैं। इससे ‘आंतरिक जवाबदेही’ की भावना पैदा होती है।

जब आप अपनी ‘सफलता की लकीर’ देखते हैं तो यह आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। यह विजुअल रिमाइंडर है कि आप अपने जीवन को बदल रहे हैं।

जब भटक जाएं तो क्या करें

असफलता जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। फरू की सलाह है कि “जब आप लक्ष्य से भटकते हैं तो खुद को दोषी महसूस न करें। तुरंत ट्रैक पर वापस आ जाएं।”

एक दिन की चूक को पूरे सिस्टम की विफलता न मानें। एक दिन की चूक को दो दिन की चूक में न बदलने दें। यह माइंडसेट लंबे समय तक अच्छी आदतों पर टिके रहने में मदद करता है।

यह किताब किसे पढ़नी चाहिए?

अगर आप अपनी लाइफस्टाइल में सुधार, फोकस और अनुशासन लाना चाहते हैं तो यह किताब आपके लिए एक ‘स्टार्टर गाइड’ है। ग्राफिक में देखिए ये किताब किसे पढ़नी चाहिए-

किताब के बारे में मेरी राय

यह किताब बेहद सरल, स्पष्ट और व्यावहारिक है। लेखक का ध्यान केवल ‘क्या करना है’ पर नहीं, बल्कि ‘कैसे करना है’ पर है। ‘सभी बुरी आदतों को एक बार में छोड़ दें’ का सिद्धांत पावरफुल है। यह किताब रीडर को तुरंत एक्शन के लिए प्रेरित करती है।

……………

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किताब का नाम: ‘छोटी-छोटी आदतों से लाएं बड़े बदलाव’

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लेखक: डेरियस फरू

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