RBI Draft Framework: ₹25k Digital Fraud Compensation

Hindi News Business RBI Draft Framework: ₹25k Digital Fraud Compensation | 6 April Suggestions नई दिल्ली3 दिन पहले कॉपी लिंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल ट्रांजैक्शन में होने वाले फ्रॉड से ग्राहकों को बचाने के लिए नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क ‘कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजैक्शंस’ जारी किया है। इसके तहत अगर किसी ग्राहक के साथ डिजिटल धोखाधड़ी होती है और वह इसकी तुरंत रिपोर्ट करता है, तो उसे 25,000 रुपए तक का मुआवजा मिल सकता है। नए नियमों का उद्देश्य बैंक शिकायतों के निपटारे में लगने वाले समय को कम करना और छोटे मूल्य के फ्रॉड के लिए एक बेहतर मुआवजा मैकेनिज्म तैयार करना है। आरबीआई ने इस ड्राफ्ट पर जनता और स्टेकहोल्डर्स से 6 अप्रैल, 2026 तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद सरकार इसे लागू करेगी। फ्रॉड की रकम का 85% तक वापस मिल सकेगा प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि 50,000 रुपए तक का डिजिटल फ्रॉड होता है और ग्राहक समय पर इसकी सूचना देता है, तो उसे नुकसान का 85% या ₹25,000 (जो भी कम हो) वापस मिल सकता है। RBI का मानना है कि इससे न केवल ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि डिजिटल पेमेंट ईकोसिस्टम और भी सुरक्षित होगा। यह मुआवजा मैकेनिज्म लागू होने की तारीख से एक साल तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद इसके अनुभवों के आधार पर इसकी समीक्षा की जाएगी। उदाहरण से समझें फ्रॉड होने पर कितना पैसा वापस मिलेगा पहली स्थिति : अगर ₹10,000 का फ्रॉड हुआ, तो 85% के हिसाब से ₹8,500 वापस मिलेंगे। दूसरी स्थिति : अगर ₹40,000 का फ्रॉड हुआ, तो 85% के हिसाब से ₹34,000 बनते हैं, लेकिन लिमिट ₹25,000 है, इसलिए ₹25,000 ही मिलेंगे। 2017 के नियमों में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? आरबीआई ने बताया कि मौजूदा नियम साल 2017 में जारी किए गए थे। पिछले 7-8 सालों में डिजिटल बैंकिंग और पेमेंट का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। अब अनधिकृत ट्रांजैक्शन के अलावा भी कई तरह के नए इलेक्ट्रॉनिक फ्रॉड सामने आ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुराने नियमों का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया गया है ताकि हर तरह की डिजिटल धोखाधड़ी को इसमें कवर किया जा सके। जल्द निपटेंगे शिकायत के मामले, बैंकों पर बढ़ेगी जवाबदेही नए ड्राफ्ट का एक मुख्य उद्देश्य बैंकों द्वारा शिकायतों को प्रोसेस करने में लगने वाले समय को घटाना है। अक्सर देखा जाता है कि फ्रॉड होने के बाद ग्राहकों को रिफंड के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। RBI चाहता है कि बैंक और वित्तीय संस्थान इस प्रक्रिया को तेज करें। भविष्य में आरबीआई मुआवजे के भुगतान में अपनी हिस्सेदारी कम करने और बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी विचार करेगा। 6 अप्रैल तक सुझाव दे सकते हैं आम लोग RBI ने इस ड्राफ्ट को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। रेगुलेटेड एंटिटीज (बैंक/NBFCs) और आम जनता इस पर अपनी प्रतिक्रिया ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। फीडबैक मिलने के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
RBI Draft Framework: ₹25k Digital Fraud Compensation

Hindi News Business RBI Draft Framework: ₹25k Digital Fraud Compensation | 6 April Suggestions नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल ट्रांजैक्शन में होने वाले फ्रॉड से ग्राहकों को बचाने के लिए एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क ‘कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजैक्शंस’ जारी किया है। इसके तहत अगर किसी ग्राहक के साथ डिजिटल धोखाधड़ी होती है और वह इसकी तुरंत रिपोर्ट करता है, तो उसे ₹25,000 तक का मुआवजा मिल सकता है। नए नियमों का उद्देश्य बैंक शिकायतों के निपटारे में लगने वाले समय को कम करना और छोटे मूल्य के फ्रॉड के लिए एक बेहतर मुआवजा मैकेनिज्म तैयार करना है। आरबीआई ने इस ड्राफ्ट पर जनता और स्टेकहोल्डर्स से 6 अप्रैल, 2026 तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद सरकार इसे लागू करेगी। फ्रॉड की रकम का 85% तक वापस मिल सकेगा प्रस्तावित नियमों के अनुसार, यदि 50,000 रुपए तक का डिजिटल फ्रॉड होता है और ग्राहक समय पर इसकी सूचना देता है, तो उसे नुकसान का 85% या ₹25,000 (जो भी कम हो) वापस मिल सकता है। RBI का मानना है कि इससे न केवल ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि डिजिटल पेमेंट ईकोसिस्टम और भी सुरक्षित होगा। यह मुआवजा मैकेनिज्म लागू होने की तारीख से एक साल तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद इसके अनुभवों के आधार पर इसकी समीक्षा की जाएगी। उदाहरण से समझें फ्रॉड होने पर कितना पैसा वापस मिलेगा पहली स्थिति : अगर ₹10,000 का फ्रॉड हुआ, तो 85% के हिसाब से ₹8,500 वापस मिलेंगे। दूसरी स्थिति : अगर ₹40,000 का फ्रॉड हुआ, तो 85% के हिसाब से ₹34,000 बनते हैं, लेकिन लिमिट ₹25,000 है, इसलिए ₹25,000 ही मिलेंगे। 2017 के नियमों में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? आरबीआई ने बताया कि मौजूदा नियम साल 2017 में जारी किए गए थे। पिछले 7-8 सालों में डिजिटल बैंकिंग और पेमेंट का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। अब अनधिकृत ट्रांजैक्शन के अलावा भी कई तरह के नए इलेक्ट्रॉनिक फ्रॉड सामने आ रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए पुराने नियमों का दायरा बढ़ाने का फैसला लिया गया है ताकि हर तरह की डिजिटल धोखाधड़ी को इसमें कवर किया जा सके। जल्द निपटेंगे शिकायत के मामले, बैंकों पर बढ़ेगी जवाबदेही नए ड्राफ्ट का एक मुख्य उद्देश्य बैंकों द्वारा शिकायतों को प्रोसेस करने में लगने वाले समय को घटाना है। अक्सर देखा जाता है कि फ्रॉड होने के बाद ग्राहकों को रिफंड के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। RBI चाहता है कि बैंक और वित्तीय संस्थान इस प्रक्रिया को तेज करें। भविष्य में आरबीआई मुआवजे के भुगतान में अपनी हिस्सेदारी कम करने और बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी विचार करेगा। 6 अप्रैल तक सुझाव दे सकते हैं आम लोग RBI ने इस ड्राफ्ट को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। रेगुलेटेड एंटिटीज (बैंक/NBFCs) और आम जनता इस पर अपनी प्रतिक्रिया ईमेल के जरिए भेज सकते हैं। फीडबैक मिलने के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Instagram Phishing Scam Explained; Fake Messages – OTP Fraud

Hindi News Lifestyle Instagram Phishing Scam Explained; Fake Messages OTP Fraud | Cyber Crime Alert 35 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक आज के समय में इंस्टाग्राम सिर्फ फोटो-वीडियो शेयर करने का प्लेटफॉर्म नहीं है। यह पहचान और कमाई का जरिया भी बन चुका है। यही वजह है कि साइबर अपराधियों की नजर इंस्टाग्राम के आम यूजर्स से लेकर क्रिएटर्स और बिजनेस अकाउंट्स, सभी पर है। बीते कुछ महीनों में इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस स्कैम में साइबर ठग फेक ईमेल या नकली मैसेज भेजकर यूजर्स का अकाउंट हैक करने की कोशिश करते हैं। इन फेक मेल/मैसेज में अक्सर लिखा होता है कि आपका सोशल मीडिया अकाउंट बंद होने वाला है या आपने कोई नियम तोड़ा है। डर के कारण लोग बिना सोचे-समझे भेजे गए लिंक पर क्लिक कर देते हैं। यहीं से स्कैम शुरू होता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को कैसे सुरक्षित रखें। इसलिए आज साइबर लिटरेसी कॉलम में बात इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम की। साथ ही जानेंगे कि- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम से बचने के लिए कौन-सी सावधानियां बरतनी चाहिए? अगर गलती से फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया तो क्या करें? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम क्या है? जवाब- यह एक ऑनलाइन धोखाधड़ी है, जिसमें ठग इंस्टाग्राम के नाम से फर्जी ईमेल, मैसेज या लिंक भेजकर यूजर की लॉगिन डिटेल्स चुराते हैं। इसके बाद अकाउंट हैक कर लेते हैं। सवाल- स्कैमर इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम को कैसे अंजाम देते हैं? जवाब- साइबर अपराधी इस स्कैम में यूजर्स को ऐसे ईमेल या मैसेज भेजते हैं, जो देखने में बिल्कुल ऑफिशियल लगते हैं। इस मैसेज में अक्सर डराने वाली भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, जैसेकि– “आपका अकाउंट कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन कर रहा है।” “अगले 24 घंटों में आपका इंस्टाग्राम अकाउंट बंद कर दिया जाएगा।” “आपका अकाउंट बंद होने वाला है।” “अकाउंट ब्लॉक से बचने के लिए इस लिंक पर जाएं।” इस फेक मैसेज के साथ एक लिंक भी होता है, जो – ऐसा दिखता है जैसे Meta या Instagram की ओर से आया है। यह लिंक असली जैसी दिखने वाली एक नकली वेबसाइट पर लेकर जाता है। यह एक फर्जी लॉगिन पेज होता है। उस पेज पर यूजर अपने क्रेडेंशियल्स दर्ज करता है। फिर वो फर्जी पेज वेरिफिकेशन के लिए OTP मांगता है। OTP डालते ही आपका अकाउंट हैक हो जाता है। स्कैमर्स उसे अपने कंट्रोल में ले लेते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- लोग इतनी आसानी से इस स्कैम के झांसे में कैसे फंस जाते हैं? जवाब- इसके कई कारण हैं। जैसेकि- स्कैमर्स सबसे पहले डर पैदा करते हैं। अकाउंट सस्पेंड होने, पोस्ट हटने या नियमों को उल्लंघन करने जैसे मैसेज देखकर यूजर घबरा जाते हैं। ऊपर से ये ईमेल और मैसेज दिखने में बिल्कुल ऑफिशियल लगते हैं, जिससे शक नहीं होता है। जल्दबाजी में लोग लिंक की जांच नहीं करते और सोचते हैं कि तुरंत लॉगिन करना ही समाधान है। अवेयरनेस की कमी भी एक बड़ी वजह है, जिसके कारण लोग अपनी लॉगिन डिटेल्स खुद ही स्कैमर्स को दे बैठते हैं। सवाल- हैकर्स इंस्टाग्राम अकाउंट को हैक करके क्या-क्या नुकसान पहुंचा सकते हैं? जवाब- हैकर्स पासवर्ड बदलकर अकाउंट पर पूरा कंट्रोल ले सकते हैं और इस तरह के नुकसान पहुंचा सकते हैं– आपका पासवर्ड बदल देना। आपका ईमेल/फोन नंबर हटा देना। आपको आपके ही अकाउंट से बाहर कर देना। अकाउंट रिकवरी का ऑप्शन बदल देना। आर्थिक क्षति पहुंचाना। फॉलोअर्स से ‘इन्वेस्टमेंट’ के नाम पर पैसे मांगना। फर्जी Giveaway या Crypto स्कीम चलाना। आपत्तिजनक या अश्लील पोस्ट डालना। राजनीतिक/विवादित कंटेंट शेयर करना। फर्जी स्टोरी लगाकर बदनाम करना। पर्सनल डेटा चोरी करना। पर्सनल चैट पढ़ना/ब्लैकमेल करना। निजी फोटो/वीडियो यूज करना। आपके नाम से दूसरों को ठगना। दोस्तों को फिशिंग लिंक भेजना। सवाल- क्या इंस्टाग्राम कभी भी ऐसा मैसेज भेजता है कि “24 घंटे के अंदर आपका अकाउंट बंद कर दिया जाएगा?” जवाब- हां, अगर आपका अकाउंट कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन करने की वजह से सस्पेंड किया जाता है तो इंस्टाग्राम इन-एप नोटिफिकेशन या आधिकारिक ईमेल के जरिए इसकी जानकारी देता है। हालांकि, डायरेक्ट मैसेज (DMs) के जरिए ‘24-48 घंटों के अंदर अकाउंट बंद करने की धमकी’ देने वाले ईमेल आमतौर पर फिशिंग स्कैम होते हैं। सवाल- फिशिंग ईमेल आईडी की पहचान कैसे करें? जवाब- इंस्टाग्राम के नाम से आए फेक ईमेल की पहचान करने के लिए सबसे पहले भेजने वाले की ईमेल आईडी ध्यान से जांचें। इंस्टाग्राम/Meta से जुड़े वैध ईमेल डोमेन की लिस्ट नीचे देखिए। notification@facebookmail.com noreply@facebookmail.com @business.fb.com @support.facebook.com @fb.com @meta.com @account.meta.com @internal.metamail.com @go.metamail.com advertise-noreply@facebookmail.com update@em.facebookmail.com @mediapartnerships.fb.com @global.metamail.com अगर मेल इन आधिकारिक डोमेन से नहीं आया है, तो वह फेक हो सकता है। अक्सर फर्जी ईमेल डोमेन में स्पेलिंग में थोड़ा बहुत हेरफेर होता है। इसलिए डोमेन की स्पेलिंग बहुत ध्यान से पढ़ें। ऐसे किसी भी मेल या मैसेज पर भरोसा न करें, जिसमें- पैसों की डिमांड की गई हो। गिफ्ट का लालच दिया गया हो। अकाउंट डिलीट/बैन करने की धमकी दी गई हो। सवाल- क्या इंस्टाग्राम कभी भी मैसेज भेजकर सिक्योरिटी पासवर्ड मांगता है? जवाब- नहीं, इंस्टाग्राम कभी भी मैसेज, ईमेल या कॉल के जरिए आपकी लॉगिन डिटेल्स, ओटीपी या कोई भी सिक्योरिटी डिटेल नहीं मांगता है। सवाल- इंस्टाग्राम फिशिंग स्कैम से बचने के लिए कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए? जवाब- थोड़ी-सी सतर्कता आपके इंस्टाग्राम अकाउंट को सुरक्षित रख सकती है। इसलिए कुछ बुनियादी बातों का खास ख्याल रखें। इसे नीचे दिए गए ग्राफिक से समझिए- सवाल- अगर गलती से फिशिंग लिंक पर क्लिक हो जाए तो क्या करें? जवाब- ऐसे में तुरंत अपना इंस्टाग्राम पासवर्ड बदलें। सभी डिवाइसेज से लॉगआउट करें और टू-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करें। साथ ही ईमेल सिक्योर करें और संदिग्ध एक्टिविटी को इंस्टाग्राम में रिपोर्ट करें। सवाल- इंस्टाग्राम से आए आधिकारिक ईमेल की पुष्टि कैसे करें? जवाब- इंस्टाग्राम से आए आधिकारिक ईमेल की पुष्टि के लिए सीधे इंस्टाग्राम एप खोलें। सेटिंग्स के सिक्योरिटी वाले ऑप्शन पर क्लिक करके ‘Emails from Instagram’ में जाएं। यहां आपको इंस्टाग्राम द्वारा भेजे गए सभी असली ईमेल की लिस्ट मिल जाती है, जिससे पता चल जाता है कि मेल रियल है या फेक। ……………… साइबर लिटरेसी से जड़ी ये खबर भी पढ़िए साइबर लिटरेसी- मैट्रिमोनियल प्लेटफार्म
Anil Ambani CBI ₹2220 Cr Fraud Case

नई दिल्ली49 मिनट पहले कॉपी लिंक अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) के खिलाफ CBI ने धोखाधड़ी का एक नया मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने साल 2013 से 2017 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के साथ 2,220 करोड़ रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी की है। बैंक की शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने गुरुवार को अनिल अंबानी के घर और रिलायंस कम्युनिकेशन के दफ्तरों पर छापेमारी की, जहां से लोन ट्रांजैक्शन से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इससे पहले अनिल अंबानी आज एक अन्य मामले में ED के सामने पेश हुए थे। अनिल अंबानी सुबह करीब 11 बजे जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। फोटो- PTI फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए पैसा डायवर्ट करने का आरोप CBI के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक से लोन लिया, लेकिन उस पैसे का इस्तेमाल तय काम के लिए करने के बजाय अपनी ही दूसरी कंपनियों (रिलेटेड पार्टीज) में फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाकर डायवर्ट कर दिया। जांच में सामने आया है कि इस हेरफेर की वजह से बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा हुआ है। हाई कोर्ट से स्टे हटने के बाद कार्रवाई अधिकारियों के मुताबिक, अनिल अंबानी की कंपनी का यह खाता 2017 में ही एनपीए (NPA) घोषित हो चुका था। हालांकि, अनिल अंबानी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने इस खाते को ‘फ्रॉड’ घोषित करने पर रोक लगा दी थी। यह स्टे 23 फरवरी 2026 को हटा लिया गया। स्टे हटते ही बैंक ऑफ बड़ौदा ने शिकायत दर्ज कराई और सीबीआई ने तुरंत एक्शन लेते हुए केस दर्ज कर लिया। कहां गया लोन का पैसा? शिकायत के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM), रिलायंस इंफ्राटेल (RITL) और रिलायंस टेलीकॉम (RTL) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल 31,580 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसमें से: 6,265.85 करोड़ रुपए दूसरे बैंकों के लोन चुकाने में खर्च किए गए। 5,501.56 करोड़ रुपए अपनी ही जुड़ी हुई कंपनियों को दिए गए। 3,674.85 करोड़ रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए, जिन्हें तुरंत निकालकर दूसरी पार्टियों को भुगतान कर दिया गया। बैंक का कहना है कि यह साफ तौर पर लोन की शर्तों का उल्लंघन है। रिलायंस इंफ्राटेल द्वारा जुटाए गए 1,783.65 करोड़ रुपए का इस्तेमाल भी RCOM ने अपनी देनदारियां चुकाने या जुड़ी हुई कंपनियों को ट्रांसफर करने में किया। फॉरेंसिक जांच में हुआ खुलासा 5 जून 2017 को इस खाते को एनपीए घोषित किया गया था, क्योंकि कंपनी लोन चुकाने में नाकाम रही थी। बाद में हुई फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि फंड के साथ हेराफेरी की गई है और यह सब जानबूझकर धोखाधड़ी की नीयत से किया गया। FIR में यह भी कहा गया है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों ने एक सोची-समझी आपराधिक साजिश के तहत बैंक को नुकसान पहुंचाया और खुद को फायदा देने के लिए पैसों का गबन किया। SBI के केस से अलग है मामला SBI पहले से ही 11 बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) की अगुवाई कर रहे एसबीआई (SBI) की शिकायत पर RCOM के खिलाफ एक केस दर्ज कर चुकी है। हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा उस ग्रुप का हिस्सा नहीं था। CBI ने साफ किया कि यह बैंक ऑफ बड़ौदा, तत्कालीन विजया बैंक और देना बैंक से लिए गए अलग लोन का मामला है। ED के सामने भी पेश हुए अनिल अंबानी इससे पहले दिन में अनिल अंबानी कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश हुए। अधिकारियों ने बताया कि पीएमएलए (PMLA) के तहत उनका बयान दर्ज किया गया है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी उनसे पूछताछ हुई थी। यह जांच उनकी ग्रुप कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा की गई 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
IDFC First Bank Fraud | Stock Slips 10% to ₹75.16

मुंबई11 मिनट पहले कॉपी लिंक बैंक ने BSE को मामले की जानकारी दी है। (फाइल फोटो) IDFC फर्स्ट बैंक के शेयरो में आज यानी 23 फरवरी को 10% का लोअर सर्किट लग गया और यह 75.16 रुपए के भाव पर आ गया है। दरअसल, बैंक ने BSE को जानकारी दी है कि उसकी चंडीगढ़ की एक शाखा में करीब 590 करोड़ रुपए का फर्जीवाड़ा सामने आया है। मामला तब खुला जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने बैंक को कुछ संदिग्ध ट्रांजेक्शन को लेकर जानकारी दी। बैंक ने फिलहाल इस मामले में शामिल 4 संदिग्ध कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। हरियाणा सरकार के खातों में हुई गड़बड़ी बैंक ने बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह धोखाधड़ी चंडीगढ़ की एक विशेष शाखा में हरियाणा सरकार के कुछ खातों के साथ हुई है। बैंक के मुताबिक, अभी उन खातों के मिलान की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें करीब 590 करोड़ रुपए की राशि शामिल है। बैंक अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह गड़बड़ी कब से चल रही थी। बाहरी लोगों के साथ मिलीभगत का शक बैंक को संदेह है कि इस फर्जीवाड़े में बैंक कर्मचारियों के साथ कुछ बाहरी लोग या इकाइयां भी शामिल हो सकती हैं। बैंक ने RBI को इसकी सूचना दे दी है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जाएगा ताकि इस धोखाधड़ी की सही से जांच हो सके। पैसे रिकवर करने की कोशिशें शुरू IDFC फर्स्ट बैंक ने उन बैंकों को भी ‘रिकॉल रिक्वेस्ट’ भेजी है, जिनके खातों में संदिग्ध पैसा ट्रांसफर किया गया है। बैंक ने दूसरे बैंकों से उन ‘संदिग्ध खातों’ में मौजूद बैलेंस को होल्ड करने की रिक्वेस्ट की है, ताकि पैसे की रिकवरी की जा सके। बैंक का कहना है कि नुकसान का सही आकलन जांच और रिकवरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो पाएगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
IDFC Bank Chandigarh Fraud | 4 Employees Suspended

चंडीगढ़3 घंटे पहले कॉपी लिंक बैंक ने BSE को मामले की जानकारी दी है। (फाइल फोटो) IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ स्थित एक ब्रांच में करीब 590 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। बैंक ने खुद शेयर बाजार (BSE) को दी जानकारी में बताया कि इस फ्रॉड में बैंक के ही कुछ कर्मचारी शामिल हैं। मामला तब खुला जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने बैंक को कुछ संदिग्ध ट्रांजेक्शन को लेकर जानकारी दी। बैंक ने फिलहाल इस मामले में शामिल 4 संदिग्ध कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। हरियाणा सरकार के खातों में हुई गड़बड़ी बैंक ने बताया कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह धोखाधड़ी चंडीगढ़ की एक विशेष शाखा में हरियाणा सरकार के कुछ खातों के साथ हुई है। बैंक के मुताबिक, अभी उन खातों के मिलान की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें करीब 590 करोड़ रुपए की राशि शामिल है। बैंक अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह गड़बड़ी कब से चल रही थी। बाहरी लोगों के साथ मिलीभगत का शक बैंक को संदेह है कि इस फर्जीवाड़े में बैंक कर्मचारियों के साथ कुछ बाहरी लोग या इकाइयां भी शामिल हो सकती हैं। बैंक ने RBI को इसकी सूचना दे दी है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दिया जाएगा ताकि इस धोखाधड़ी की सही से जांच हो सके। 4 कर्मचारी सस्पेंड, फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश गड़बड़ी सामने आने के बाद बैंक ने तुरंत एक्शन लेते हुए 4 संदिग्ध अधिकारियों को जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया है। बैंक ने कहा है कि वह दोषी कर्मचारियों और बाहरी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। इसके साथ ही, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से ‘फॉरेंसिक ऑडिट’ कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। बैंक ने बुलाई बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग इस गंभीर मामले को देखते हुए बैंक की ‘स्पेशल कमेटी फॉर मॉनिटरिंग फ्रॉड्स’ की बैठक 20 फरवरी को बुलाई गई थी। इसके बाद 21 फरवरी को बैंक के ऑडिट कमेटी और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग हुई, जिसमें इस धोखाधड़ी की जानकारी साझा की गई। पैसे रिकवर करने की कोशिशें शुरू IDFC फर्स्ट बैंक ने उन बैंकों को भी ‘रिकॉल रिक्वेस्ट’ भेजी है, जिनके खातों में संदिग्ध पैसा ट्रांसफर किया गया है। बैंक ने दूसरे बैंकों से उन ‘संदिग्ध खातों’ में मौजूद बैलेंस को होल्ड करने की रिक्वेस्ट की है, ताकि पैसे की रिकवरी की जा सके। बैंक का कहना है कि नुकसान का सही आकलन जांच और रिकवरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो पाएगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
रायसेन में संतान सुख का झांसा देकर ठगी:पूजा के बहाने अफसर की पत्नी से लाखों के जेवर लेकर महिला फरार

रायसेन की शीतल सिटी कॉलोनी में शनिवार को ठगी की एक चौंकाने वाली वारदात सामने आई है। यहां संतान प्राप्ति का झांसा देकर एक बुजुर्ग महिला ने अधिकारी की पत्नी से लाखों रुपए के जेवर ठग लिए और फरार हो गई। घटना वित्त विभाग में पदस्थ असिस्टेंट डायरेक्टर ध्रुव पटेल के निवास की है। उनकी पत्नी मिथिलेश उस समय घर पर अकेली थीं। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला भिक्षा मांगने उनके घर पहुंची। गेट पर ही भिक्षा देने से इनकार करने पर महिला ने बाहर आकर देने या अंदर बुलाने की बात कही। सहज विश्वास में आकर मिथिलेश ने उसे घर के भीतर बुला लिया। संतान सुख और पूजा-पाठ का दिया लालच घर के अंदर पहुंचते ही आरोपी महिला ने संतान प्राप्ति और विशेष पूजा-पाठ का जिक्र शुरू किया। उसने दावा किया कि खास अनुष्ठान से घर में खुशियां आएंगी और इसी बहाने मिथिलेश को अपने भरोसे में ले लिया। पूजा के नाम पर पहले गले में पहना एक मंगलसूत्र उतरवाया, फिर दूसरा मंगलसूत्र और एक सोने की अंगूठी भी मंगवा ली। जैसे ही मौका मिला, बुजुर्ग महिला जेवर लेकर चुपचाप घर से निकल गई। कुछ देर बाद मिथिलेश को ठगी का एहसास हुआ, लेकिन तब तक आरोपी फरार हो चुकी थी। घटना की खबर फैलते ही कॉलोनी में हड़कंप मच गया। पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी खंगाले जा रहे सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। हालांकि, पुलिस को यह भी पता चला है कि घर में लगे सीसीटीवी कैमरे पहले ही चोरी हो चुके हैं, जिससे आरोपी की पहचान में दिक्कत आ रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अजनबी को घर में प्रवेश देने से पहले सतर्क रहें। विशेष रूप से पूजा-पाठ, संतान सुख या किसी चमत्कार का लालच देने वाले लोगों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
Anil Ambani Bank Fraud Case Affidavit; ED CBI

नई दिल्ली1 दिन पहले कॉपी लिंक अनिल अंबानी ने आज यानी 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया है। इसमें उन्होंने वचन दिया है कि वे अदालत की अनुमति के बिना भारत छोड़कर नहीं जाएंगे। यह हलफनामा उनके रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की कंपनियों से जुड़ी 40,000 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी की जांच के बीच आया है। अंबानी ने अदालत को यह भी भरोसा दिलाया है कि वे ED और CBI द्वारा की जा रही जांच में पूरी तरह से सहयोग करेंगे। ये दोनों एजेंसियां अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की कंपनियों के खिलाफ जांच कर रही हैं। वकील मुकुल रोहतगी की तरफ से किए मौखिक वादे की पुष्टि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अनिल अंबानी ने अपने हलफनामे में आधिकारिक तौर पर उस अंडरटेकिंग (वचन) को अपना लिया है, जो उनकी ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने 4 फरवरी को कोर्ट में पेश की थी। तब रोहतगी ने अदालत को मौखिक रूप से आश्वस्त किया था कि अंबानी देश छोड़कर नहीं जाएंगे। अब लिखित हलफनामा दाखिल होने के बाद यह कानूनी रूप से जरूरी हो गया है। क्या है ₹40,000 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला? यह पूरी कानूनी कार्यवाही पूर्व ब्यूरोक्रेट ईएएस सरमा की तरफ से दायर एक याचिका के जवाब में हो रही है। याचिका में आरोप है कि ADAG ग्रुप की कंपनियों ने अलग-अलग बैंकों के साथ मिलकर 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का लोन फ्रॉड किया है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए, ताकि सच सामने आ सके। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसियों को कड़े निर्देश दिए हैं। बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी होगी जांच सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच एजेंसियों को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि एजेंसियां इस बात की भी तुरंत जांच करें कि क्या बैंक अधिकारियों की इस धोखाधड़ी में कोई मिलीभगत थी। जांच में फंड्स के गलत इस्तेमाल का खुलासा ED ने अब तक की अपनी जांच में पाया है कि रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL) और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस (RCFL) में बड़े पैमाने पर फंड्स का गलत इस्तेमाल हुआ। 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने RHFL में 2,965 करोड़ और RCFL में 2,045 करोड़ का इन्वेस्टमेंट किया था। दिसंबर 2019 तक ये अमाउंट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बन गए। RHFL का 1,353 करोड़ और RCFL का 1,984 करोड़ अभी तक बकाया है। कुल मिलाकर यस बैंक को 2,700 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। ED के मुताबिक ये फंड्स रिलायंस ग्रुप की दूसरी कंपनियों में डायवर्ट किए गए। लोन अप्रूवल प्रोसेस में भी कई गड़बड़ियां मिलीं। जैसे, कुछ लोन उसी दिन अप्लाई, अप्रूव और डिस्बर्स हो गए। फील्ड चेक और मीटिंग्स स्किप हो गईं। डॉक्यूमेंट्स ब्लैंक या डेटलेस मिले। ED ने इसे ‘इंटेंशनल कंट्रोल फेल्योर’ बताया है। जांच PMLA की धारा 5(1) के तहत चल रही है और 31 अक्टूबर 2025 को अटैचमेंट ऑर्डर जारी हुए। —————— अनिल अंबानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… अनिल अंबानी के बाद बेटे अनमोल पर FIR: यूनियन बैंक से ₹228 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप; पहली बार क्रिमिनल केस में सीधे आरोपी बने CBI ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के बड़े बेटे जय अनमोल के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोप है कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कॉमर्शियल फाइनेंस से जुड़ी कंपनियों ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ 228.06 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Vikram Bhatt Bail Update; Rs 30 Crore Fraud Case Supreme Court

फिल्म बनाने के नाम पर 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दोनों को नियमित जमानत (रेगुलर बेल) दे दी। . विक्रम भट्ट के आज शाम तक उदयपुर जेल से बाहर आने की संभावना है। इससे पहले 13 फरवरी को श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम जमानत दी गई थी। वह जेल से बाहर आ चुकी हैं। विक्रम भट्ट को 7 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया था। कोर्ट का सुझाव- आपसी समझौते से सुलझाएं मामला सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सुझाव भी दिया है। कोर्ट ने दोनों ही पक्षों को मिडिएशन सेल (मध्यस्थता केंद्र) में जाने को कहा है। कोर्ट का मानना है कि दोनों पक्षों को वहां उपस्थित होकर आपसी समझौते से इस मामले को सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांबरी को 13 फरवरी को ही अंतरिम जमानत मिल गई थी, जिसके बाद वह जेल से बाहर आ चुकी हैं। कोर्ट ने कहा- यह कमर्शियल विवाद है विक्रम भट्ट के वकील कमलेश दवे ने कोर्ट में अपनी दलील पेश की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह एक तरह का कमर्शियल डिस्प्यूट (व्यापारिक विवाद) है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस मामले को मुंबई कोर्ट ट्रांसफर करने के लिए बेवजह मजबूर न किया जाए। भट्ट के वकील तर्क दिया कि इस फिल्म और प्रोजेक्ट से जुड़े ज्यादातर वेंडर और लोग मुंबई के ही रहने वाले हैं। ऐसे में मामले की कानूनी बारीकियों को समझते हुए कोर्ट ने जमानत की अर्जी स्वीकार कर ली। उदयपुर पुलिस मुंबई से पकड़कर लेकर आई थी 7 दिसंबर को उदयपुर डीएसपी छगन राजपुरोहित की 6 सदस्यीय टीम ने मुंबई पहुंचकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को उनके जुहू स्थित गंगाभवन कॉम्प्लेक्स के फ्लैट से गिरफ्तार किया था। यहां भट्ट के सुरक्षा गार्डों ने पुलिस को रोका भी था। सुरक्षा गार्डों ने पुलिस से कहा था कि साहब व उनकी पत्नी घर पर नहीं हैं। हालांकि पुलिस को हकीकत पता थी और दोनों गिरफ्तार कर लिए गए थे। ये फोटो 7 दिसंबर का है। जब उदयपुर डीएसपी छगन राजपुरोहित की 6 सदस्यीय टीम ने मुंबई पहुंचकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया था। व्यापारी की पत्नी की बायोपिक बनाने के नाम पर रुपए लिए राजस्थान के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के मालिक डॉ. अजय मुर्डिया ने 17 नवंबर को विक्रम भट्ट समेत 8 लोगों के खिलाफ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की FIR उदयपुर में दर्ज कराई थी। डॉ. अजय मुर्डिया का आरोप है कि एक इवेंट में उनकी मुलाकात दिनेश कटारिया से हुई थी। दिनेश कटारिया ने उन्हें पत्नी की बायोपिक बनाने का प्रस्ताव दिया। इस सिलसिले में दिनेश कटारिया ने 24 अप्रैल 2024 को मुंबई स्थित वृंदावन स्टूडियो बुलाया था। कटारिया ने उन्हें विक्रम भट्ट से मिलवाया, जहां भट्ट से बायोपिक बनाने पर चर्चा हुई थी। कुछ दिन बाद विक्रम और श्वेतांबरी भट्ट ने डॉक्टर अजय मुर्डिया को कहा- 7 करोड़ रुपए और फाइनेंस करके वे 4 फिल्में 47 करोड़ में बना सकते हैं। इन फिल्मों की रिलीज से 100 से 200 करोड़ रुपए तक मुनाफा हो जाएगा। इसके बाद उनके स्टाफ में अमनदीप मंजीत सिंह, मुदित, फरजाना आमिर अली, अबजानी, राहुल कुमार, सचिन गरगोटे, सबोबा भिमाना अडकरी के नाम के अकाउंट में 77 लाख 86 हजार 979 रुपए ट्रांसफर करवाए। इस तरह 2 करोड़ 45 लाख 61 हजार 400 रुपए ट्रांसफर किए। वहीं इंदिरा एंटरटेनमेंट से 42 करोड़ 70 लाख 82 हजार 232 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि चार फिल्मों का निर्माण 47 करोड़ में किया जाना तय हुआ था। विधानसभा में भी उठा था मामला यह मामला काफी समय से चर्चा में है। राजस्थान की विधानसभा में भी इसकी गूंज सुनाई दी थी। छबड़ा से विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने पिछले दिनों इस मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठाया था। …… विक्रम भट्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… डायरेक्टर विक्रम भट्ट को राहत नहीं,पत्नी जेल से रिहा होगी:सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 18 को; फिल्म बनाने के लिए 30 करोड़ की धोखाधड़ी फिल्म बनाने के नाम पर 30 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी मामले में बॉलीवुड डायरेक्टर विक्रम भट्ट की पत्नी श्वेतांभरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अंतरिम जमानत दे दी। (पढ़िए पूरी खबर)
Pension Fraud; Life Certificate APK Files Scam Case Explained

6 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक कुछ दिनों पहले दिल्ली के एक 79 वर्षीय रिटायर्ड सिविल इंजीनियर के साथ साइबर ठगी हुई। स्कैमर्स ने फर्जी विज्ञापन के जरिए उन्हें लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का झांसा दिया। इसके बाद उनके बैंक खाते से पैसे निकाल लिए। हाल ही में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अपने ‘एक्स’ हैंडल से ऐसी ही एक घटना का वीडियो शेयर किया है। इसमें पेंशनधारकों को लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर होने वाले स्कैम के बारे में सतर्क किया गया है। साइबर ठग बुजुर्गों की तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। ऐसे में हमें अपने घर के बुजुर्गों को डिजिटल दुनिया के पीछे छिपे खतरों के बारे में बताना जरूरी है। चलिए, आज साइबर लिटरेसी कॉलम में हम इस स्कैम के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- स्कैमर पेंशनर्स को अपने जाल में कैसे फंसाते हैं? ऐसे स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट क्या है, ठगों ने रिटायर्ड बुजुर्ग को कैसे चूना लगाया? जवाब- यह पेंशन धारक के जीवित होने का आधिकारिक प्रमाणपत्र है। पेंशनर्स को हर साल यह सर्टिफिकेट अपने बैंक या अधिकृत पोर्टल के माध्यम से अपडेट कराना होता है। अगर यह समय पर जमा न हो तो पेंशन रुक सकती है। ठग इसी का फायदा उठाते हैं। नीचे दो अलग-अलग मामले समझिए- पहला मामला I4C द्वारा शेयर किए गए वीडियो के मुताबिक, एक रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर को फेसबुक स्क्रॉल करते हुए पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का एक एड दिखा। जैसे ही उन्होंने इस एड पर क्लिक किया, एक वेबपेज खुला। इसमें ऑलरेडी उनकी कुछ पर्सनल डिटेल्स ऑटो-फिल थीं। उन्होंने ज्यादा सोचा नहीं और फॉर्म सबमिट कर दिया। कुछ देर बाद उन्हें एक फोन कॉल आया और वॉट्सएप पर .apk फाइल भेजी आई। उनसे कहा गया कि ये फाइल डाउनलोड करके फॉर्म भर दीजिए। आपका पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट हो जाएगा। उन्होंने फॉर्म में अपना आधार नंबर, फोन नंबर दर्ज किया और ओटीपी सबमिट किया। ऐसा करते ही उनके फोन का कंट्रोल साइबर क्रिमिनल्स के पास चला गया। कुछ ही समय में उनके बैंक अकाउंट से 2.40 लाख रुपए कट गए। दूसरा मामला दूसरी घटना में रिटायर्ड सिविल इंजीनियर को फेसबुक स्क्रॉलिंग के दौरान PNB लाइफ सर्टिफिकेट का विज्ञापन दिखा। लिंक पर क्लिक करते ही उनसे नाम और मोबाइल नंबर लिया गया। कॉलर ने खुद को PNB स्टाफ बताकर वॉट्सएप पर ‘PNB Pension Life Certificate Update.apk’ भेजा और एप डाउनलोड करवाया। एप के जरिए पर्सनल व बैंक डिटेल ली गई और भरोसे के लिए 1 रुपए कटते दिखाया गया। कुछ ही घंटों में खाते से 4.15 लाख रुपए निकाल लिए गए। सवाल- रिटायर्ड बुजुर्गों की तरफ से क्या गलती हुई, जिसके कारण वे ठगी का शिकार हो गए? जवाब- दोनों रिटायर्ड बुजुर्गों ने तीन बड़ी गलतियां की थीं- उन्होंने सोशल मीडिया पर दिखे विज्ञापन पर भरोसा कर लिया। अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड की, जो कभी भी बैंक या सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होती है। अनजान एप में अपनी पर्सनल और बैंक से जुड़ी जानकारी भर दी। इन्हीं तीन गलतियों के कारण उनकी मेहनत की कमाई एक बार में उड़ गई। सवाल- पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर साइबर स्कैमर्स ठगी को कैसे अंजाम देते हैं? जवाब- स्कैमर्स पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर फर्जी एप और कॉल के जरिए बैंक डिटेल्स हासिल करते हैं। इसके बाद खाते से पैसे ऐंठ लेते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल- लोग इतनी आसानी से इस तरह के स्कैम के झांसे में क्यों फंस जाते हैं? जवाब- इस स्कैम में ठग पेंशनर्स की सीमित तकनीकी जानकारी का फायदा उठाते हैं। ‘लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट’ जैसी जरूरी प्रक्रिया का नाम लेकर वे पेंशनर्स को डराते हैं कि अगर तुरंत अपडेट नहीं किया गया तो पेंशन रुक सकती है। इस डर से वे बिना जांच-पड़ताल के फर्जी लिंक पर क्लिक कर देते हैं। सवाल- इस तरह के किसी भी स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? जवाब- इसके लिए घर के बुजुर्गों को तकनीक के बारे में जागरूक करना जरूरी है। उन्हें ये बताएं कि बैंक या सरकार कभी भी APK फाइल भेजकर या फोन पर डिटेल्स मांगकर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट नहीं कराती है। इसके साथ ही उन्हें कुछ और बुनियादी बातों की जानकारी दें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए- सवाल– पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट कराने या प्राप्त करने का सही तरीका क्या है? जवाब– लाइफ सर्टिफिकेट सिर्फ बैंक ब्रांच, पोस्ट ऑफिस या सरकारी jeevanpramaan.gov.in पोर्टल के जरिए ही अपडेट होता है। यह कभी भी सोशल मीडिया लिंक, कॉल या APK फाइल से नहीं होता है। सवाल- घर के बुजुर्गों को स्कैम से बचाने के लिए क्या जरूरी कदम उठाने चाहिए? जवाब- इसके लिए घर के बुजुर्गों को कुछ बातें जरूर बताएं। जैसेकि- उन्हें समझाएं कि बैंक कभी भी फोन, वॉट्सएप या लिंक से डिटेल नहीं मांगते हैं। सोशल मीडिया विज्ञापनों पर तुरंत भरोसा न करें। अनजान एप डाउनलोड न करने के लिए मना करें। अनजान कॉल, मैसेज या लिंक से इंटरैक्ट न करें। समय-समय पर उनके मोबाइल फोन चेक करते रहें। देखें कोई संदिग्ध एप तो नहीं है। उनके फोन में सिर्फ जरूरी और भरोसेमंद एप ही रखें। बैंकिंग एप में डेली ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करें। नेट बैंकिंग और UPI पर अलर्ट/SMS नोटिफिकेशन हमेशा ऑन रखें। उनके फोन में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 सेव करें। बैंक और परिवार के दो भरोसेमंद नंबर स्पीड डायल में डालें। समय-समय पर उनके साथ बैठकर स्कैम के नए तरीकों के बारे में बताएं। प्ले स्टोर में ‘प्ले प्रोटेक्ट’ विकल्प हमेशा ऑन रखें। किसी के कहने पर भी इसे बंद न करें। सेटिंग्स से ‘इंस्टॉलेशन फ्रॉम अननोन सोर्स’ विकल्प को हमेशा ऑफ रखें। सवाल- किसी भी स्कैम से बचने के लिए किन बुनियादी बातों का ध्यान रखना जरूरी है? जवाब- इसके लिए 6 बुनियादी बातों का खास ख्याल रखें। अगर इसे समझ लिए तो किसी भी स्कैम से बच सकते हैं। किसी भी कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी अनजान लिंक पर कभी क्लिक न करें। .apk फाइल कभी भी








