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Anil Ambani LIC ₹3,750 Cr Fraud Case

Anil Ambani LIC ₹3,750 Cr Fraud Case

नई दिल्ली22 मिनट पहले

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RCom और अनिल अंबानी के खिलाफ यह चौथा केस है।

CBI ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और अनिल अंबानी के खिलाफ एक नया केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई LIC की शिकायत पर की गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने मिलीभगत कर LIC से करीब ₹3,750 करोड़ का फ्रॉड किया है।

RCom और अनिल अंबानी के खिलाफ यह चौथा मामला है। CBI ने इस केस में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।

झूठी जानकारी देकर LIC से निवेश कराया

CBI की जांच में सामने आया है कि 2009 से 2012 के बीच रिलायंस कम्युनिकेशंस ने LIC को नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में ₹4,500 करोड़ निवेश करने के लिए राजी किया था।

आरोप है कि कंपनी के मैनेजमेंट ने LIC के सामने अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर झूठे दावे किए थे। इसके अलावा निवेश के बदले जो सिक्योरिटी और एसेट कवर का भरोसा दिया गया था, वह भी पूरी तरह गलत था।

फॉरेंसिक ऑडिट में हुआ फंड की हेराफेरी का खुलासा

इस मामले में LIC की शिकायत के बाद एक फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया था। 15 अक्टूबर 2020 को आई BDO इंडिया LLP की ऑडिट रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं…

  • फंड का गलत इस्तेमाल: बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुटाए गए पैसों को कंपनी ने अपने मूल उद्देश्य के बजाय दूसरी जगहों पर इस्तेमाल किया।
  • शेल कंपनियों का इस्तेमाल: फंड को इधर-उधर करने के लिए कई सब्सिडियरी और शेल (नकली) कंपनियों का सहारा लिया गया।
  • फर्जी बिलिंग: सेल इनवॉइस फाइनेंसिंग का गलत इस्तेमाल हुआ और फर्जी बिलों के जरिए पैसे निकाले गए।
  • कागजी देनदार: कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को बेहतर दिखाने के लिए फर्जी देनदार और रिसीवेबल्स खड़े किए और बाद में उन्हें राइट-ऑफ कर दिया।

RCom ने संपत्तियों की वैल्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, RCom ने अपनी संपत्तियों यानी एसेट्स की वैल्यू को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था। असल में उन संपत्तियों और उन पर लिए गए कर्ज के बीच कोई कनेक्शन नहीं था। CBI का कहना है कि इसी धोखाधड़ी की वजह से LIC को ₹3,750 करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ है।

क्या होते हैं नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs)?

यह एक तरह का लोन इंस्ट्रूमेंट होता है जिसे कंपनियां जनता या संस्थाओं से पैसा जुटाने के लिए जारी करती हैं। इसमें निवेश करने वालों को एक तय दर से ब्याज मिलता है। इन्हें शेयरों में नहीं बदला जा सकता, इसलिए इन्हें ‘नॉन-कन्वर्टिबल’ कहा जाता है।

ये खबर भी पढ़ें…

अनिल अंबानी से दूसरे-दिन CBI-हेडक्वार्टर में 6 घंटे पूछताछ: SBI से ₹2,929 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला; पहले दिन 8 घंटे तक सवाल-जवाब हुए थे

रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड यानी RCOM से जुड़े 2,929 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी शुक्रवार (20 मार्च) को दूसरे दिन की पूछताछ के लिए दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय पहुंचे। जांच अधिकारियों ने उनसे आज करीब 6 घंटे तक सवाल-जवाब किए। वे सुबह 10 बजे CBI मुख्यालय पहुंचे और वहां से शाम को 5.15 बजे निकले।

इससे पहले गुरुवार को भी उनसे करीब 8 घंटे तक पूछताछ की थी। यह पूरी कार्रवाई SBI की शिकायत पर दर्ज की गई FIR के आधार पर की जा रही है। CBI ने यह आपराधिक मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, अनिल अंबानी और कुछ अज्ञात लोक सेवकों के खिलाफ दर्ज किया है। पूरी खबर पढ़ें…

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CBI ने रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) और अनिल अंबानी के खिलाफ एक नया केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई LIC की शिकायत पर की गई है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने मिलीभगत कर LIC से करीब ₹3,750 करोड़ का फ्रॉड किया है।

RCom और अनिल अंबानी के खिलाफ यह चौथा मामला है। CBI ने इस केस में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।

झूठी जानकारी देकर LIC से निवेश कराया

CBI की जांच में सामने आया है कि 2009 से 2012 के बीच रिलायंस कम्युनिकेशंस ने LIC को नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में ₹4,500 करोड़ निवेश करने के लिए राजी किया था।

आरोप है कि कंपनी के मैनेजमेंट ने LIC के सामने अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर झूठे दावे किए थे। इसके अलावा निवेश के बदले जो सिक्योरिटी और एसेट कवर का भरोसा दिया गया था, वह भी पूरी तरह गलत था।

फॉरेंसिक ऑडिट में हुआ फंड की हेराफेरी का खुलासा

इस मामले में LIC की शिकायत के बाद एक फॉरेंसिक ऑडिट कराया गया था। 15 अक्टूबर 2020 को आई BDO इंडिया LLP की ऑडिट रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं…

  • फंड का गलत इस्तेमाल: बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुटाए गए पैसों को कंपनी ने अपने मूल उद्देश्य के बजाय दूसरी जगहों पर इस्तेमाल किया।
  • शेल कंपनियों का इस्तेमाल: फंड को इधर-उधर करने के लिए कई सब्सिडियरी और शेल (नकली) कंपनियों का सहारा लिया गया।
  • फर्जी बिलिंग: सेल इनवॉइस फाइनेंसिंग का गलत इस्तेमाल हुआ और फर्जी बिलों के जरिए पैसे निकाले गए।
  • कागजी देनदार: कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को बेहतर दिखाने के लिए फर्जी देनदार और रिसीवेबल्स खड़े किए और बाद में उन्हें राइट-ऑफ कर दिया।

RCom ने संपत्तियों की वैल्यू बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, RCom ने अपनी संपत्तियों यानी एसेट्स की वैल्यू को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया था। असल में उन संपत्तियों और उन पर लिए गए कर्ज के बीच कोई कनेक्शन नहीं था। CBI का कहना है कि इसी धोखाधड़ी की वजह से LIC को ₹3,750 करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ है।

क्या होते हैं नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs)?

यह एक तरह का लोन इंस्ट्रूमेंट होता है जिसे कंपनियां जनता या संस्थाओं से पैसा जुटाने के लिए जारी करती हैं। इसमें निवेश करने वालों को एक तय दर से ब्याज मिलता है। इन्हें शेयरों में नहीं बदला जा सकता, इसलिए इन्हें ‘नॉन-कन्वर्टिबल’ कहा जाता है।

ये खबर भी पढ़ें…

अनिल अंबानी से दूसरे-दिन CBI-हेडक्वार्टर में 6 घंटे पूछताछ: SBI से ₹2,929 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला; पहले दिन 8 घंटे तक सवाल-जवाब हुए थे

रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड यानी RCOM से जुड़े 2,929 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी मामले में अनिल अंबानी शुक्रवार (20 मार्च) को दूसरे दिन की पूछताछ के लिए दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय पहुंचे। जांच अधिकारियों ने उनसे आज करीब 6 घंटे तक सवाल-जवाब किए। वे सुबह 10 बजे CBI मुख्यालय पहुंचे और वहां से शाम को 5.15 बजे निकले।

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