Monday, 10 Aug 2026 | 07:47 PM

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PNG Gas Scam Alert; IGL Disconnection Fraud Safety Guideline

PNG Gas Scam Alert; IGL Disconnection Fraud Safety Guideline

Hindi News Lifestyle PNG Gas Scam Alert; IGL Disconnection Fraud Safety Guideline | Cyber Literacy 58 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल कॉपी लिंक भारत सरकार ने मार्च 2026 में ‘नेचुरल गैस एंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर, 2026’ के तहत नए नियम लागू किए हैं। इसके मुताबिक, जिन क्षेत्रों में PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) की सुविधा उपलब्ध है, वहां के उपभोक्ताओं को तीन महीने के भीतर PNG कनेक्शन लेना होगा। नहीं लेने पर LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की आपूर्ति रोक दी जाएगी। इस फैसले के बाद जहां PNG पाइपलाइन है, वहां तेजी से कनेक्शन लिए जा रहे हैं। साइबर ठग इस डर का फायदा उठाकर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। यह ठगी देश की लीडिंग गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ‘इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड’ (IGL) के ग्राहकों के साथ हो रही है। खतरे को देखते हुए IGL ने अलर्ट जारी किया है और अपने उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी है। इसलिए ‘साइबर लिटरेसी’ कॉलम में आज हम PNG के नाम पर होने वाले इस स्कैम की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे- ठग इस स्कैम को कैसे अंजाम दे रहे हैं? अगर गलती से स्कैम का शिकार हो जाएं तो क्या करें? एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस सवाल- ‘PNG गैस स्कैम‘ क्या है? जवाब- ये साइबर ठगी है, जिसमें ठग PNG गैस कंपनी के नाम पर फर्जी SMS या कॉल करते हैं। मैसेज में लिखा होता है कि, ‘आपका गैस कनेक्शन जल्द ही काट दिया जाएगा, इसलिए तुरंत बकाया बिल भरें।’ ठग डर और जल्दबाजी का फायदा उठाकर पेमेंट करवा लेते हैं। सवाल- ठग इस स्कैम को कैसे अंजाम दे रहे हैं? जवाब- ठग बेहद चालाकी से लोगों में डर और जल्दबाजी पैदा करके इस स्कैम को अंजाम दे रहे हैं। वे खुद को IGL का अधिकारी बताते हैं और लोगों को गुमराह करते हैं। इसे ग्राफिक से समझिए- सवाल- हाल ही में IGL ने अलर्ट जारी कर क्या कहा है? जवाब- ‘इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड’ ने कहा है कि ठग उनके नाम पर फर्जी मैसेज भेज रहे हैं। इसलिए अनजान कॉल, पेमेंट या लिंक पर भरोसा न करें और हमेशा सोर्स वेरिफाई करें। सवाल- ये स्कैम किन शहरों-इलाकों में ज्यादा हो रहा है? जवाब- जहां-जहां IGL की सर्विस है, वहां यह स्कैम ज्यादा देखने को मिल रहा है। जैसे- दिल्ली नोएडा और ग्रेटर नोएडा गाजियाबाद गुरुग्राम फरीदाबाद इसके अलावा इसी तरह के PNG स्कैम के मामले मुंबई, नवी मुंबई से भी सामने आए हैं, जहां दूसरी गैस कंपनियों के नाम पर लोगों को ठगा गया है। यानी जहां PNG कनेक्शन ज्यादा हैं, वहीं ये स्कैम हो रहा है। सवाल- ठग इस स्कैम में किसे निशाना बना रहे हैं? जवाब- इस स्कैम खासतौर पर उन लोगों को टारगेट किया जा रहा है, जो PNG गैस का इस्तेमाल करते हैं और ऑनलाइन पेमेंट करते हैं। जैसेकि- सवाल- लोग क्या गलती करते हैं कि वे स्कैमर्स के जाल में फंस जाते हैं? जवाब- PNG के नाम पर कुछ सामान्य गलतियों से लोग ठगों के जाल में फंस जाते हैं। सभी गलतियां ग्राफिक में देखिए- अब इन गलतियों को विस्तार से बात करते हैं। गलती No 1. डर और जल्दबाजी में फैसला लेना “कनेक्शन कट जाएगा,” “अभी पेमेंट करें” जैसे मैसेज पैनिक क्रिएट करते हैं। लोग बिना जांचे तुरंत एक्शन ले लेते हैं। सबक- ठहकर सोचें। तुरंत कदम न उठाएं। गलती No 2. अनजान कॉल/मैसेज पर भरोसा करना ग्राहक कंपनी के नाम से मैसेज देखकर भरोसा कर लेते हैं। ‘कंपनी से बोल रहा हूं।’ इस झांसे में आ जाते हैं। सबक- हमेशा सोर्स जरूर वेरिफाई करें। गलती No 3. OTP शेयर करना ‘वेरिफिकेशन’ या ‘रिफंड’ के नाम पर OTP दे देते हैं। सबक- OTP और PIN कभी किसी से शेयर न करें। गलती No 4. QR कोड/पेमेंट रिक्वेस्ट में फर्क न समझना ग्राहक ये मान लेते हैं कि QR स्कैन करने से पैसा आएगा। ‘कलेक्ट रिक्वेस्ट’ और ‘PAY’ में फर्क नहीं समझते हैं। सबक- पेमेंट से पहले स्क्रीन पर लिखे शब्दों को ध्यान से पढ़ें। गलती No 5. फर्जी लिंक पर क्लिक करना SMS/वॉट्सएप के लिंक पर क्लिक करके डिटेल्स भर देते हैं। नकली वेबसाइट को असली समझ लेते हैं। सबक- किसी भी लिंक पर क्लिक न करें। गलती No 6. रिमोट एक्सेस एप इंस्टॉल करना AnyDesk/TeamViewer जैसे एप इंस्टॉल कर लेते हैं। स्कैमर को अपने मोबाइल का पूरा कंट्रोल दे देते हैं। सबक- किसी अनजान एप को इंस्टॉल न करें। गलती No 7. साइबर अवेयरनेस की कमी बेसिक सेफ्टी रूल्स (OTP, लिंक, PIN) नहीं जानते। नए डिजिटल फ्रॉड के तरीकों से अनजान हैं। सबक- खुद को अपडेट और जागरूक रखें। गलती No 8. क्रॉस चेक न करना ऑफिशियल वेबसाइट या एप पर जाकर जानकारी वेरिफाई नहीं करते। सबक- हमेशा ऑफिशियल सोर्स से पुष्टि करें। सवाल- फेक मैसेज/मेल कैसे पहचानें? जवाब- फर्जी मैसेज में कुछ संकेत होते हैं, जिन्हें पहचानकर धोखा से बच सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या IGL कभी कनेक्शन काटने का मैसेज भेजता है? जवाब- अगर आपने लंबे समय तक बिल नहीं भरा है तो IGL प्रोसेस-बेस्ड और ऑफिशियल चैनल से नोटिस देती है। पॉइंटर्स से समझिए- IGL का कम्युनिकेशन कैसे होता है? पहले SMS/ईमेल के जरिए रिमाइंडर भेजना। मैसेज में आपका CA नंबर/कस्टमर आईडी होगा। बिल अमाउंट और ड्यू डेट लिखा होगा। भाषा सामान्य होती है। “तुरंत नहीं भरा तो अभी कट जाएगा” जैसी डरावनी भाषा नहीं होती है। ड्यू/ओवरड्यू नोटिस अगर पेमेंट नहीं हुआ तो दूसरा मैसेज भेजते हैं। इसमें लिखा हो सकता है- “आपका बिल बकाया है, कृपया जल्द भुगतान करें।” फिर भी कोई संदिग्ध लिंक या QR कोड नहीं भेजते हैं। डिसकनेक्शन से पहले सूचना काफी समय तक बिल न भरने पर कंपनी पूर्व सूचना देती है। कई मामलों में फील्ड स्टाफ विजिट भी हो सकता है। “आज ही कनेक्शन काट दिया जाएगा” ऐसा मैसेज नहीं भेजते हैं। नीचे ग्राफिक में देखिए IGL क्या नहीं करता है- सवाल- PNG स्कैम या किसी भी स्कैम से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतें? जवाब- स्कैम से बचने के लिए सतर्कता और सही जानकारी जरूरी है। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- PNG बिल पेमेंट करते समय किन बातों का ध्यान रखें? जवाब- कुछ बातों का ध्यान रखें- पेमेंट हमेशा IGL की आधिकारिक वेबसाइट/एप से करें। मैसेज

DGP Orders Strict Vigilance on Digital Fraud, Paper Leaks for NEET Exam 2026

DGP Orders Strict Vigilance on Digital Fraud, Paper Leaks for NEET Exam 2026

आईजी, एसपी के साथ बैठक के दौरान डीजीपी कैलाश मकवाणा। प्रदेश में 3 मई को होने वाली नीट (एनईईटी) 2026 को लेकर सुरक्षा और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने इसकी तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। प्रदेश के सभी जिलों में इस परीक्षा . इस परीक्षा में एक लाख 18 हजार उम्मीदवार शामिल होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, फर्जीवाड़ा, डिजिटल फ्रॉड, कोचिंग संस्थानों की संदिग्ध गतिविधियों और सोशल मीडिया अफवाहों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। साइबर टीम और स्थानीय पुलिस मिलकर हर संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत और सख्त कार्रवाई करेगी। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने आज सभी रेंज IG एवं SP के साथ बैठक कर 3 मई की परीक्षा के लिए प्रदेश के 283 केंद्रों पर मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अफसरों से कहा है कि 1.18 लाख परीक्षार्थी इसमें शामिल होने वाले हैं और हमारी जिम्मेदारी है कि हर परीक्षार्थी को बिना डर और पूरी निष्पक्षता के साथ परीक्षा देने का माहौल देना हमारी जिम्मेदारी है। डीजीपी ने सभी परीक्षा केंद्रों व स्ट्रॉन्ग रूम की जांच करने और पर्याप्त पुलिस बल तैनात रखने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि 24×7 घंटे सीसीटीवी निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र के परिवहन में पुलिस एस्कॉर्ट तथा परीक्षा के बाद OMR और प्रश्नपत्र की सुरक्षित वापसी तक पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी। पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक, फर्जीवाड़ा, डिजिटल फ्रॉड, कोचिंग संस्थानों की संदिग्ध गतिविधियों और सोशल मीडिया अफवाहों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। साइबर टीम और स्थानीय पुलिस मिलकर हर संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत और सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा कि हम तय करेंगे कि हर परीक्षार्थी बिना किसी परेशानी के सुरक्षित और निष्पक्ष माहौल में परीक्षा दे सके।

Kota BTech Student Nabbed for Cyber Fraud Linked to Pakistani Handler

Kota BTech Student Nabbed for Cyber Fraud Linked to Pakistani Handler

कोटा35 मिनट पहले कॉपी लिंक कोटा में साइबर ठगी नेटवर्क का पाकिस्तानी कनेक्शन भी मिला है। नेटवर्क का सरगना मोहम्मद अमजद पाकिस्तान हैंडलर से ऑर्डर ले रहा था। अमजद (21) इंजीनियरिंग स्टूडेंट है और करीब डेढ़ साल से ठगी नेटवर्क से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार अमजद के तीन साथी उसे बैंक अकाउंट उपलब्ध करवाते थे। इसके लिए उन्हें कमीशन मिलता था। इन अकाउंट्स में ठगी का पैसा ट्रांसफर किया जाता था। दरअसल, कोटा के विज्ञान नगर थाने में 8 दिसंबर 2025 को 43 लाख 50 हजार की ठगी को लेकर शिकायत दर्ज हुई थी। इसके बाद से पुलिस मामले की जांच कर रही थी। पुलिस ने 16 अप्रैल को अमजद और उसके तीन साथियों को भोपाल से पकड़ा था। एमपी के सागर में बीटेक कर रहा है अमजद साइबर थाना SHO सतीशचंद्र ने बताया- आरोपी पिछले तीन साल से भोपाल में रह रहा था। आरोपी मध्य प्रदेश के सागर जिले के प्राइवेट कॉलेज से बीटेक कर रहा है। उसने सबसे पहले आसपास रहने वाले और काम करने वाले मजदूरों को टारगेट किया। उनके बैंक अकाउंट का इस्तेमाल ठगी का पैसा ट्रांसफर करने में किया गया। ब्लैक टीशर्ट में शातिर ठग मो.अमजद। जांच एजेंसियों को आशंका है कि अमजद के कॉन्टैक्ट एक से ज्यादा हैंडलर्स से हो सकते हैं। कैसे चलता था पूरा खेल? अमजद अपने तीन साथियों दीपक, राहुल व विजय के साथ पूरा नेटवर्क चला रहा था। हर मेंबर को एक अकाउंट उपलब्ध कराने के बदले 7 हजार रूपए देता था। आरोपी अकाउंट के साथ अकाउंट नंबर से जुड़ी सिम, एटीएम, बैंक पासबुक (पूरी किट) भी लेता था। फिर काम होने पर खाताधारक को वापस लौटा देता। जांच टीम को ऐसे 50 से ज्यादा अकाउंट के बारे में पता लगा है। इनके जरिए ठगी की रकम यूपीआई व कैश डिपॉजिट से ट्रांसफर करवाई गई थी। इसके बाद अमजद और उसका पाकिस्तानी हैंडलर इन अकाउंट्स से पैसों को खुद के और दूसरे अलग-अलग अकाउंट में ट्रांसफर कर लेते थे। अमजद के भी 5 अकाउंट शुरुआती जांच में पुलिस को इंडिया में ऑपरेट हो रहे ऐसे 5 अकाउंट का पता लगा। आरोपी ठगी की रकम को ठिकाने लगाने में खुद के अकाउंट भी यूज करता था। पुलिस इन अकाउंट की डिटेल खंगाल रही है। शुरुआत जांच में आरोपी के अकाउंट में 10 लाख रूपए जमा होने की बात सामने आई है। आरोपियों के पास इस तरह के कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी मिले हैं। 9 फोन यूज करता आरोपी ने सबसे पहले भोपाल निवासी 80 साल के बुजुर्ग का अकाउंट यूज किया। जो उसके आसपास ही रहता था। इसके बदले आरोपी को कमीशन मिला। आरोपी के पास से 9 महंगे मोबाइल बरामद किए गए हैं। इनमें 2 आईफोन है। एक एप्पल कंपनी का लैपटॉप, गूगल पे स्कैनर, 29 एटीएम कार्ड, 13 बैंक पासबुक, अकाउंट ओपनिंग फॉर्म और 2 लाख रुपए नकद बरामद किए हैं। …. ये खबर भी पढ़िए… साइबर फ्रॉड गैंग के पाकिस्तान-दुबई से कनेक्शन:43 लाख की ठगी के 4 बदमाशों को पकड़ा, 29 ATM कार्ड, 13 बैंक पासबुक, मोबाइल-लैपटॉप समेत नकदी बरामद कोटा में साइबर ठगी की गिरफ्तारी के बाद कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद से पुलिस इनके विदेशी कनेक्शन भी खंगाल रही है। पूरी खबर पढ़िए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Anil Ambani Bank Account Fraud

Anil Ambani Bank Account Fraud

नई दिल्ली42 मिनट पहले कॉपी लिंक रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जो बैंकों को उनके लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी) घोषित करने की अनुमति देता है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का आदेश इस मामले में लंबित सिविल सूट के आड़े नहीं आएगा। क्या है पूरा मामला? दरअसल, इंडियन ओवरसीज बैंक सहित दो अन्य बैंकों ने अनिल अंबानी के लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ के तौर पर क्लासिफाई करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके खिलाफ अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने अंबानी को अंतरिम राहत देते हुए बैंकों की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट की ही डिवीजन बेंच ने इस रोक को हटा दिया और बैंकों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। इसी फैसले को अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो) सेटलमेंट की इच्छा पर कोर्ट की टिप्पणी सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे बैंकों के साथ इस मामले को सुलझाना चाहते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सेटलमेंट के विषय पर उनकी कोई राय नहीं है, यह बैंकों और कर्जदार के बीच का मामला है। अंबानी के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल? अगर बैंक किसी अकाउंट को ‘फ्रॉड’ घोषित कर देते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम होते हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, फ्रॉड घोषित होने के बाद संबंधित व्यक्ति या कंपनी को भविष्य में बैंकिंग सिस्टम से किसी भी तरह का कर्ज मिलने में भारी मुश्किल आती है। साथ ही, केंद्रीय जांच एजेंसियां जैसे CBI भी इस मामले में अपनी जांच शुरू कर सकती हैं। अनिल अंबानी पर कर्ज का पिछला बैकग्राउंड पिछले कुछ सालों में अनिल अंबानी की कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजरी हैं। रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom), रिलायंस नेवल और रिलायंस कैपिटल जैसी कंपनियों पर भारी कर्ज रहा है। हाल ही में रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा ने अपने कुछ कर्ज चुकाकर खुद को कर्ज मुक्त करने की कोशिश की है, लेकिन पुराने बैंक लोन के क्लासिफिकेशन के मामले अब भी उनके लिए कानूनी चुनौती बने हुए हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Anil Ambani Bank Account Fraud

Anil Ambani Bank Account Fraud

नई दिल्ली2 घंटे पहले कॉपी लिंक रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अंबानी की उस याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जो बैंकों को उनके लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी) घोषित करने की अनुमति देता है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का आदेश इस मामले में लंबित सिविल सूट के आड़े नहीं आएगा। क्या है पूरा मामला? दरअसल, इंडियन ओवरसीज बैंक सहित दो अन्य बैंकों ने अनिल अंबानी के लोन अकाउंट को ‘फ्रॉड’ के तौर पर क्लासिफाई करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके खिलाफ अंबानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिसंबर 2023 में हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने अंबानी को अंतरिम राहत देते हुए बैंकों की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। हालांकि, बाद में हाईकोर्ट की ही डिवीजन बेंच ने इस रोक को हटा दिया और बैंकों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी। इसी फैसले को अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। रिलायंस कम्युनिकेशंस के फाउंडर हैं अनिल अंबानी। (फाइल फोटो) सेटलमेंट की इच्छा पर कोर्ट की टिप्पणी सुनवाई के दौरान अनिल अंबानी के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे बैंकों के साथ इस मामले को सुलझाना चाहते हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सेटलमेंट के विषय पर उनकी कोई राय नहीं है, यह बैंकों और कर्जदार के बीच का मामला है। अंबानी के लिए क्यों बढ़ सकती है मुश्किल? अगर बैंक किसी अकाउंट को ‘फ्रॉड’ घोषित कर देते हैं, तो इसके गंभीर परिणाम होते हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, फ्रॉड घोषित होने के बाद संबंधित व्यक्ति या कंपनी को भविष्य में बैंकिंग सिस्टम से किसी भी तरह का कर्ज मिलने में भारी मुश्किल आती है। साथ ही, केंद्रीय जांच एजेंसियां जैसे CBI भी इस मामले में अपनी जांच शुरू कर सकती हैं। अनिल अंबानी पर कर्ज का पिछला बैकग्राउंड पिछले कुछ सालों में अनिल अंबानी की कई कंपनियां दिवालिया प्रक्रिया से गुजरी हैं। रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom), रिलायंस नेवल और रिलायंस कैपिटल जैसी कंपनियों पर भारी कर्ज रहा है। हाल ही में रिलायंस पावर और रिलायंस इंफ्रा ने अपने कुछ कर्ज चुकाकर खुद को कर्ज मुक्त करने की कोशिश की है, लेकिन पुराने बैंक लोन के क्लासिफिकेशन के मामले अब भी उनके लिए कानूनी चुनौती बने हुए हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

वॉट्सऐप आपके प्राइवेट मैसेज पढ़ रहा:कैलिफोर्निया की कोर्ट में हर्जाने की मांग; टेलीग्राम CEO बोले ये एन्क्रिप्शन इतिहास का सबसे बड़ा फ्रॉड

वॉट्सऐप आपके प्राइवेट मैसेज पढ़ रहा:कैलिफोर्निया की कोर्ट में हर्जाने की मांग; टेलीग्राम CEO बोले ये एन्क्रिप्शन इतिहास का सबसे बड़ा फ्रॉड

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के मालिक इलॉन मस्क और टेलीग्राम के CEO पावेल डुरोव ने वॉट्सऐप की प्राइवेसी पर सवाल उठाए हैं। मस्क ने कहा कि वॉट्सऐप पर भरोसा नहीं किया जा सकता। यह विवाद अमेरिका में वॉट्सऐप के खिलाफ दायर एक नए क्लास एक्शन मुकदमे के बाद शुरू हुआ है। एन्क्रिप्शन के बावजूद निजी मैसेज पढ़ रहा वॉट्सऐप अमेरिका की एक अदालत में दायर याचिका में दावा किया गया है कि वॉट्सऐप अपने यूजर्स के मैसेज को बीच में ही इंटरसेप्ट करता है। कंपनी दावा करती है कि उसके मैसेज ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड’ हैं, यानी भेजने वाले और पाने वाले के अलावा कोई तीसरा इन्हें नहीं पढ़ सकता। हालांकि, मुकदमे के मुताबिक मेटा इन मैसेज को एक्सेंचर जैसी तीसरी पार्टियों के साथ शेयर कर रहा है। मस्क और डुरोव बोले ‘इतिहास का सबसे बड़ा धोखा’ इलॉन मस्क ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “वॉट्सऐप पर भरोसा नहीं किया जा सकता।” उन्होंने यूजर्स से X चैट का इस्तेमाल करने की अपील की और दावा किया कि वहां ‘असली प्राइवेसी’ मिलती है। वहीं, टेलीग्राम के CEO पावेल डुरोव ने भी कहा कि वॉट्सऐप का ‘एन्क्रिप्शन’ इतिहास का सबसे बड़ा कंज्यूमर फ्रॉड हो सकता है, जो अरबों यूजर्स को गुमराह कर रहा है। डुरोव ने दावा किया कि टेलीग्राम ने कभी ऐसा नहीं किया और न ही कभी करेगा। मेटा बोला आरोप पूरी तरह गलत और बेतुके हैं इन गंभीर आरोपों पर मेटा ने तुरंत सफाई दी है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, “मुकदमे में किए गए दावे पूरी तरह से झूठे और बेतुके हैं। वॉट्सऐप पिछले एक दशक से सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कर रहा है। आपके मैसेज भेजने वाले और पाने वाले के अलावा कोई और नहीं पढ़ सकता। पुराना है मस्क और जुकरबर्ग का झगड़ा इलॉन मस्क और मार्क जुकरबर्ग के बीच विवाद कोई नया नहीं है। मस्क द्वारा ट्विटर (अब X) खरीदने के बाद जुकरबर्ग ने उसे टक्कर देने के लिए ‘थ्रेड्स’ लॉन्च किया था। 2025 में मस्क ने अपने AI चैटबॉट ‘ग्रोक’ को मेटा AI से बेहतर बताया था। जून 2023 में मस्क ने जुकरबर्ग को ‘केज फाइट’ की चुनौती भी दी थी, जिसके जवाब में जुकरबर्ग ने लोकेशन मांगी थी। कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट से हर्जाने की मांग वॉट्सऐप के खिलाफ यह क्लास एक्शन मुकदमा इसी साल जनवरी में ब्रायन वाई. शिराज़ी और निदा सैमसन नाम के दो यूजर्स ने कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में दायर किया गया था। इसमें मेटा प्लेटफॉर्म्स और एक्सेंचर को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने जूरी ट्रायल की मांग की है और कंपनी से भारी हर्जाने की अपील की है। फिलहाल मामला कोर्ट में है और पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं। नॉलेज बॉक्स : क्या होता है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? सरल शब्दों में कहें तो एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी सुरक्षा तकनीक है जो आपके मैसेज को एक गुप्त कोड में बदल देती है, जिसे सिर्फ भेजने वाला और प्राप्त करने वाला ही पढ़ सकता है। इसके बीच में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, हैकर या यहां तक कि सर्विस देने वाली कंपनी (जैसे वॉट्सऐप या मेटा) खुद भी आपके मैसेज, फोटो या कॉल को देख या सुन नहीं सकती है।

WhatsApp Encryption Fraud Controversy; Meta Vs Elon Musk Telegram

वॉट्सऐप आपके प्राइवेट मैसेज पढ़ रहा:कैलिफोर्निया की कोर्ट में हर्जाने की मांग; टेलीग्राम CEO बोले ये एन्क्रिप्शन इतिहास का सबसे बड़ा फ्रॉड

Hindi News Business WhatsApp Encryption Fraud Controversy; Meta Vs Elon Musk Telegram | Mark Zuckerberg वॉशिंगटन12 मिनट पहले कॉपी लिंक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के मालिक इलॉन मस्क और टेलीग्राम के CEO पावेल डुरोव ने वॉट्सऐप की प्राइवेसी पर सवाल उठाए हैं। मस्क ने कहा कि वॉट्सऐप पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वहीं डुरोव ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा ‘एन्क्रिप्शन’ फ्रॉड बताया। यह विवाद अमेरिका में वॉट्सऐप के खिलाफ दायर एक नए क्लास एक्शन मुकदमे के बाद शुरू हुआ है। यह मुकदमा इसी साल जनवरी में ब्रायन वाई. शिराज़ी और निदा सैमसन नाम के दो यूजर्स ने कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में दायर किया गया था। इसमें मेटा प्लेटफॉर्म्स और एक्सेंचर को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने जूरी ट्रायल की मांग की है और कंपनी से हर्जाने की अपील की है। एन्क्रिप्शन के बावजूद निजी मैसेज पढ़ रहा वॉट्सऐप याचिका में दावा किया गया है कि वॉट्सऐप अपने यूजर्स के मैसेज को बीच में ही इंटरसेप्ट करता है। इसमें कहा गया है कि मेटा इन मैसेजेस को एक्सेंचर जैसी तीसरी पार्टियों के साथ शेयर कर रहा है। जबकि कंपनी दावा करती है कि उसके मैसेज ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड’ हैं, यानी भेजने वाले और पाने वाले के अलावा कोई तीसरा इन्हें नहीं पढ़ सकता। मस्क बोले वॉट्सऐप की जगह X चैट इस्तेमाल करें इलॉन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए X चैट का इस्तेमाल करने की अपील की और दावा किया कि वहां ‘असली प्राइवेसी’ मिलती है। वहीं पावेल डुरोव ने वॉट्सऐप अरबों यूजर्स को गुमराह कर रहा है। डुरोव ने दावा किया कि टेलीग्राम ने कभी ऐसा नहीं किया और न ही कभी करेगा। मेटा बोला- आरोप पूरी तरह गलत और बेतुके हैं इन गंभीर आरोपों पर मेटा के प्रवक्ता ने कहा कि मुकदमे में किए गए दावे पूरी तरह से झूठे और बेतुके हैं। वॉट्सऐप पिछले एक दशक से सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कर रहा है। आपके मैसेज भेजने वाले और पाने वाले के अलावा कोई और नहीं पढ़ सकता। पुराना है मस्क और जुकरबर्ग का झगड़ा इलॉन मस्क और मार्क जुकरबर्ग के बीच विवाद कोई नया नहीं है। मस्क द्वारा ट्विटर (अब X) खरीदने के बाद जुकरबर्ग ने उसे टक्कर देने के लिए ‘थ्रेड्स’ लॉन्च किया था। 2025 में मस्क ने अपने AI चैटबॉट ‘ग्रोक’ को मेटा AI से बेहतर बताया था। जून 2023 में मस्क ने जुकरबर्ग को ‘केज फाइट’ की चुनौती भी दी थी, जिसके जवाब में जुकरबर्ग ने लोकेशन मांगी थी। नॉलेज बॉक्स : क्या होता है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? सरल शब्दों में कहें तो एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी सुरक्षा तकनीक है जो आपके मैसेज को एक गुप्त कोड में बदल देती है, जिसे सिर्फ भेजने वाला और प्राप्त करने वाला ही पढ़ सकता है। इसके बीच में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, हैकर या यहां तक कि सर्विस देने वाली कंपनी (जैसे वॉट्सऐप या मेटा) खुद भी आपके मैसेज, फोटो या कॉल को देख या सुन नहीं सकती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

SC: Borrower Notice & Chance to Reply Sufficient for Bank Fraud

SC: Borrower Notice & Chance to Reply Sufficient for Bank Fraud

Hindi News National SC: Borrower Notice & Chance To Reply Sufficient For Bank Fraud | Hearing Not Mandatory नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर बैंक किसी खाते को फ्रॉड घोषित करता है, तो उससे पहले उधार लेने वाले को आमने-सामने (पर्सनल) सुनवाई का मौका देना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस देना और जवाब का मौका देना ही काफी है। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने यह फैसला देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने बैंक से कहा था कि उधार लेने वाले के खाते को फ्रॉड घोषित करने से पहले मौखिक सुनवाई का मौका दिया जाए। ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी देना जरूरी कोर्ट ने कहा कि अगर बैंक ऑडिट रिपोर्ट, खासकर फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर फैसला ले रहा है, तो उसकी कॉपी उधार लेने वाले को देना जरूरी है। साथ ही, उस पर उधार लेने वाले का जवाब भी लिया जाना चाहिए। बेंच के मुताबिक RBI के नियमों में जो प्रक्रिया बताई गई है उसे अपनाना चाहिए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मामला किस तरह का है और कानून क्या कहता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में फैसले ज्यादातर कागजों, लेन-देन और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर लिए जाते हैं। पर्सनल सुनवाई से प्रक्रिया धीमी होगी कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर केस में पर्सनल सुनवाई जरूरी कर दी जाए, तो प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। इससे फ्रॉड पकड़ने में देरी हो सकती है और उधारकर्ता अपने पैसे या संपत्ति छिपाने की कोशिश कर सकते हैं। बेंच ने साफ किया कि पहले के फैसलों, खासकर SBI बनाम राजेश अग्रवाल केस में भी पर्सनल सुनवाई को अनिवार्य नहीं बताया गया था। उसमें सिर्फ नोटिस देने और जवाब का मौका देने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने RBI के पक्ष से सहमति जताई और कहा कि तय प्रक्रिया का पालन करने से न्याय भी होगा और गलत फैसले की संभावना भी कम होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम और जनता के पैसे की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि फ्रॉड के मामलों में जल्दी और सही कार्रवाई हो। —————————— ये खबर भी पढ़ें: केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं:सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है द कॉन्स्टिट्यूशन शेड्यूल कास्ट ऑर्डर 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू धर्म तक सीमित था, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म जोड़ा गया- फोटो AI जनरेटेड सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News National SC: Borrower Notice & Chance To Reply Sufficient For Bank Fraud | Hearing Not Mandatory नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर बैंक किसी खाते को फ्रॉड घोषित करता है, तो उससे पहले उधार लेने वाले को आमने-सामने (पर्सनल) सुनवाई का मौका देना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस देना और जवाब का मौका देना ही काफी है। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच ने यह फैसला देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने बैंक से कहा था कि उधार लेने वाले के खाते को फ्रॉड घोषित करने से पहले मौखिक सुनवाई का मौका दिया जाए। ऑडिट रिपोर्ट की कॉपी देना जरूरी कोर्ट ने कहा कि अगर बैंक ऑडिट रिपोर्ट, खासकर फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर फैसला ले रहा है, तो उसकी कॉपी उधार लेने वाले को देना जरूरी है। साथ ही, उस पर उधार लेने वाले का जवाब भी लिया जाना चाहिए। बेंच के मुताबिक RBI के नियमों में जो प्रक्रिया बताई गई है उसे अपनाना चाहिए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मामला किस तरह का है और कानून क्या कहता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में फैसले ज्यादातर कागजों, लेन-देन और ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर लिए जाते हैं। पर्सनल सुनवाई से प्रक्रिया धीमी होगी कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर केस में पर्सनल सुनवाई जरूरी कर दी जाए, तो प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। इससे फ्रॉड पकड़ने में देरी हो सकती है और उधारकर्ता अपने पैसे या संपत्ति छिपाने की कोशिश कर सकते हैं। बेंच ने साफ किया कि पहले के फैसलों, खासकर SBI बनाम राजेश अग्रवाल केस में भी पर्सनल सुनवाई को अनिवार्य नहीं बताया गया था। उसमें सिर्फ नोटिस देने और जवाब का मौका देने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने RBI के पक्ष से सहमति जताई और कहा कि तय प्रक्रिया का पालन करने से न्याय भी होगा और गलत फैसले की संभावना भी कम होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंकिंग सिस्टम और जनता के पैसे की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि फ्रॉड के मामलों में जल्दी और सही कार्रवाई हो। खाते को फ्रॉड घोषित करने के लिए RBI की प्रक्रिया 1. सबसे पहले जांच और ऑडिट बैंक को शक होने पर अकाउंट की जांच की जाती है। अक्सर फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाता है, इसमें ट्रांजेक्शन, फंड फ्लो और दस्तावेजों की पड़ताल होती है 2. नोटिस दिया जाता है बैंक सीधे फ्रॉड घोषित नहीं कर सकता, उधार लेने वाले को लिखित नोटिस दिया जाता है। इसमें आरोप और आधार स्पष्ट बताना होता है। जिस आधार पर फैसला लिया जा रहा है ,जैसे फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट आदि की कॉपी देना जरूरी है। इसके बाद उधार लेने वाले को अपनी सफाई देने का मौका मिलता है। वह दस्तावेज, स्पष्टीकरण या आपत्ति दे सकता है। 5. बैंक का अंतिम फैसला जवाब और रिकॉर्ड देखने के बाद बैंक निर्णय लेता है। अगर आरोप सही लगे, तो अकाउंट को फ्रॉड घोषित किया जाता है। 6.RBI को रिपोर्ट भेजी जाती है RBI को रिपोर्ट भेजी जाती है। CBI/ED जैसी एजेंसियों को मामला भेजा जा सकता है। उधार लेने वाले का नाम ‘फ्रॉड लिस्ट’ में डाल दिया जाता है। इसके बाद उसे भविष्य में लोन मिलना मुश्किल हो जाता है। —————————— ये खबर भी पढ़ें: केवल हिंदू-बौद्ध-सिख ही अनुसूचित जाति का दावा कर सकते हैं:सुप्रीम कोर्ट का फैसला- धर्म बदला तो अनुसूचित जाति का दर्जा भी खत्म हो जाता है द कॉन्स्टिट्यूशन शेड्यूल कास्ट ऑर्डर 1950 के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू धर्म तक सीमित था, 1956 में सिख और 1990 में बौद्ध धर्म जोड़ा गया- फोटो AI जनरेटेड सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़े लोग ही अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अगर कोई ईसाई या किसी और धर्म में धर्मांतरण करता है तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा खो देगा। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Baking Soda Used To Make Tourists Sick for Rescue Fraud

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काठमांडू48 मिनट पहले कॉपी लिंक नेपाल में माउंट एवरेस्ट से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ शेरपा और ट्रेकिंग से जुड़े लोग मिलकर खाने में बेकिंग सोडा या एक खास दवा मिलाकर पर्यटकों को बीमार बनाकर महंगे हेलिकॉप्टर रेस्क्यू के जरिए करोड़ों का बीमा घोटाला कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल पुलिस ने इस मामले में 32 लोगों पर केस दर्ज किया है। इनमें ट्रेकिंग कंपनी के मालिक, हेलिकॉप्टर ऑपरेटर और अस्पताल से जुड़े लोग शामिल हैं। इन पर संगठित अपराध और धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हेलिकॉप्टर रेस्क्यू बहुत महंगा होता है। इसमें 2.5 लाख से 6 लाख भारतीय रुपए लगते हैं। इंटरनेशनल बीमा कंपनियों से पैसा वसूली नेपाल के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू करना कई बार लोगों की जान बचाने का जरूरी तरीका होता है। वहां ऑक्सीजन कम होती है और मौसम अचानक खराब हो सकता है, इसलिए बीमार या फंसे ट्रेकर को जल्दी काठमांडू पहुंचाना जरूरी होता है। लेकिन इसी सिस्टम का गलत फायदा भी उठाया जा रहा है। जल्दीबाजी, साफ जानकारी की कमी और सही निगरानी न होने के कारण यहां एक बड़ा बीमा घोटाला भी चल रहा है। जांच में सामने आया कि कुछ शेरपा, ट्रेकिंग एजेंसियों के साथ मिलकर पर्यटकों के खाने में बेकिंग सोडा मिला देते हैं। इससे पर्यटकों को तेज पेट दर्द, उल्टी और अन्य दिक्कतें होती थीं, जो ऊंचाई पर होने वाली बीमारी (एल्टीट्यूड सिकनेस) जैसी लगती हैं। कुछ मामलों में लोगों को डायमॉक्स (एक दवा जो ऊंचाई की बीमारी के लिए दी जाती है) के साथ ज्यादा पानी पिलाकर ऐसे लक्षण पैदा किए गए, जिससे लगे कि हालत गंभीर है। जब पर्यटक बीमार पड़ जाते हैं, तो उन्हें महंगे हेलिकॉप्टरसे रेस्क्यू कराने के लिए दबाव बनाया जाता है। इसके बाद फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और फ्लाइट दस्तावेज बनाकर इंटरनेशनल बीमा कंपनियों से पैसे वसूले जाते हैं। नेपाल चार्टर सर्विस, एवरेस्ट एक्सपीरियंस एंड असिस्टेंस और माउंटेन रेस्क्यू जैसी कंपनियां इस घोटाले में मुख्य रूप से शामिल बताई जा रही हैं। अगर कोई व्यक्ति ऊंचाई पर बीमार हो जाए या घायल हो जाए, तो हेलीकॉप्टर उसे जल्दी अस्पताल तक पहुंचा सकता है। पहाड़ों में यही सबसे बड़ा सहारा होता है। बीमा कंपनियों के लिए सच का पता लगाना मुश्किल रिपोर्ट के मुताबिक रेस्क्यू के दौरान एक ही हेलिकॉप्टर में कई लोगों को बैठाया जाता है, लेकिन हर व्यक्ति के नाम से अलग-अलग पूरा बिल बीमा कंपनी को भेजा जाता है, जैसे हर किसी के लिए अलग उड़ान हुई हो। जैसे 4000 डॉलर की उड़ान को 12000 डॉलर का क्लेम बना दिया जाता है। इसके लिए फर्जी फ्लाइट रिकॉर्ड बनाए जाते हैं। अस्पताल में भी नकली कागज तैयार होते हैं। सीनियर डॉक्टर के डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल करके रिपोर्ट बनाई जाती है, जबकि वे डॉक्टर उस केस में शामिल ही नहीं होते। कई बार तो डॉक्टरों को खुद पता नहीं होता कि उनके नाम से कागज बनाए गए हैं। कुछ मामलों में फर्जी रिकॉर्ड बनाकर पर्यटकों को अस्पताल में भर्ती दिखाया गया, जबकि सच में वे उसी समय अस्पताल की कैंटीन में बैठकर बीयर पी रहे थे। विदेश में बैठी बीमा कंपनियों के लिए यह जांच करना बहुत मुश्किल होता है कि दूर पहाड़ों में असल में क्या हुआ। 3 बड़ी कंपनियो के 6 अफसर गिरफ्तार इस पूरे खेल में शेरपा, हेलिकॉप्टरकंपनियां, ट्रेकिंग एजेंसियां और अस्पताल मिलकर पैसा बांट लेते थे। जांच जनवरी में शुरू हुई थी, जब तीन बड़ी रेस्क्यू कंपनियों के 6 अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। इस घोटाले के जरिए करीब 19.69 मिलियन डॉलर (लगभग 188 करोड़ रुपए) की धोखाधड़ी की गई। एक कंपनी पर आरोप है कि उसने 1,248 रेस्क्यू में से 171 फर्जी दिखाए और 10 मिलियन डॉलर से ज्यादा का पैसा लिया। दूसरी कंपनी ने 471 में से 75 फर्जी रेस्क्यू दिखाकर करीब 8 मिलियन डॉलर कमाए। तीसरी कंपनी पर 71 फर्जी दावों के जरिए 1 मिलियन डॉलर से ज्यादा लेने का आरोप है। सरकारी पक्ष ने कुल 11.3 मिलियन डॉलर (करीब 107 करोड़ रुपए) के जुर्माने की मांग की है। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए इसे प्राथमिकता दी है। पहली बार 2018 में मामला उजागर यह फर्जी रेस्क्यू घोटाला नया नहीं है। पहली बार 2018 में यह उजागर हुआ था। इसके बाद सरकार ने जांच कराई, 700 पेज की रिपोर्ट बनाई और सुधारों का ऐलान किया। 2019 में इस पर एक लंबी जांच रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई। इसके बाद सरकार ने नियम बदलकर बिचौलियों को हटाया था और टूर ऑपरेटर को जिम्मेदार बनाया था, लेकिन पिछले साल जब नेपाल पुलिस की सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (CIB) ने फिर से जांच शुरू की, तो पता चला कि घोटाला रुका नहीं, बल्कि और बढ़ गया है। नेपाल पुलिस के अधिकारी मनोज कुमार केसी ने कहा कि जब अपराध पर कार्रवाई नहीं होती, तो वह बढ़ता जाता है, और यही वजह है कि यह बीमा घोटाला भी फैलता गया। नेपाल में पर्यटन से 10 लाख से ज्यादा लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। हाल के समय में बढ़ते घोटालों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों ने नेपाल में ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों का बीमा कवर करना बंद कर दिया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔