मलाई सी कोमल, रोगों में संजीवनी…कांडा की गडेरी के कहने ही क्या, क्यों पहाड़ी थाली की जान, जानें सीक्रेट – Uttarakhand News

Last Updated:February 21, 2026, 22:22 IST कांडा की गडेरी को गरमा-गरम मडुवे की रोटी के साथ खाना पहाड़ की सबसे पसंदीदा परंपरा है. मडुवा पहाड़ों का प्रमुख अनाज है और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. गडेरी की मलाईदार सब्जी और मडुवे की मोटी रोटी पौष्टिक भोजन में शामिल है. स्थानीय लोग इसकी तुलना मलाई या मक्खन से करते हैं, क्योंकि पकने के बाद यह बेहद मुलायम हो जाती है. इसके टुकड़े इतने नरम होते हैं कि मुंह में रखते ही घुल जाते हैं. कांडा क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी और ठंडी जलवायु गडेरी की गुणवत्ता को कई गुना बढ़ा देती है. शहरों में लोग इसका और ऊंचे दाम देने को तैयार रहते हैं. उत्तराखंड के बागेश्वर जिला का कांडा क्षेत्र अपनी खास गडेरी के लिए जाना जाता है. यह गडेरी साधारण अरबी नहीं, बल्कि स्वाद और बनावट में बिल्कुल अलग मानी जाती है. स्थानीय लोग इसकी तुलना मलाई या मक्खन से करते हैं, क्योंकि पकने के बाद यह बेहद मुलायम हो जाती है. कांडा की गडेरी सिर्फ एक सब्जी नहीं, बल्कि यहां की कृषि परंपरा और जीवनशैली का अहम हिस्सा है. सर्दियों में यह हर घर की थाली में नजर आती है. इसकी लोकप्रियता अब पहाड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मैदानी इलाकों तक इसकी मांग बढ़ रही है. वरिष्ठ पत्रकार व स्थानीय जानकार पंकज डसीला लोकल 18 से बताते हैं कि कांडा की गडेरी को मलाई जैसा कहे जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी कोमलता है. जब इसे पकाया जाता है, तो यह बहुत जल्दी गल जाती है. इसके टुकड़े इतने नरम होते हैं कि मुंह में रखते ही घुल जाते हैं. यही गुण इसे आम अरबी से अलग बनाता है. स्वाद में हल्की प्राकृतिक मिठास और चिकनाहट इसे और खास बना देती है. पहाड़ों में जहां भोजन सादा लेकिन पौष्टिक होता है, वहां ऐसी मलाईदार सब्जी लोगों को खास लगती है. इसे बुजुर्ग और बच्चों दोनों के लिए बेहतर आहार माना जाता है. कांडा क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी और ठंडी जलवायु गडेरी की गुणवत्ता को कई गुना बढ़ा देती है. यहां दिन और रात के तापमान में अंतर रहता है, जिससे कंद का विकास बेहतर होता है. यही कारण है कि कांडा की गडेरी सामान्य अरबी से बड़ी हो जाती है. मिट्टी में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व इसके स्वाद और बनावट को निखारते हैं. किसान पीढ़ियों से इसी क्षेत्र में गडेरी की खेती करते आ रहे हैं, अनुभव के आधार पर बीज का चयन करते हैं. यह प्राकृतिक संतुलन ही कांडा की गडेरी को खास और दुर्लभ बनाता है. Add News18 as Preferred Source on Google कांडा की गडेरी की एक बड़ी खासियत है, इसकी जैविक खेती. यहां के किसान रासायनिक खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते है. गोबर की खाद और जंगल से मिलने वाली प्राकृतिक खाद का उपयोग किया जाता है. इससे गडेरी न सिर्फ स्वाद में बेहतर होती है, बल्कि सेहत के लिए भी सुरक्षित रहती है. आज के समय में जब लोग केमिकल युक्त सब्जियों से परेशान हैं, कांडा की गडेरी शुद्ध भोजन का उदाहरण बनती जा रही है. यही वजह है कि शहरों में भी लोग इसे खास तौर पर ढूंढते हैं और ऊंचे दाम देने को तैयार रहते हैं. पहाड़ी इलाकों में सर्दियां काफी कठोर होती हैं. ऐसे में कांडा की गडेरी को सर्दियों की खास डाइट माना जाता है. इसकी तासीर गर्म होती है, जिससे शरीर को अंदर से ऊर्जा मिलती है. यह ठंड से होने वाले जोड़ों के दर्द और कमजोरी में भी फायदेमंद है. खेतों में मेहनत करने वाले किसान इसे ताकत का स्रोत मानते हैं. सर्दियों के मौसम में गडेरी की सब्जी या भुजिया लगभग हर घर में बनती है, जिससे शरीर गर्म और सक्रिय बना रहता है. कांडा की गडेरी को बनाने का तरीका भी इसे खास बनाता है. इसे अक्सर लोहे की कड़ाही में पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और बढ़ जाता है. इसमें भांग के दानों का रस डाला जाता है, जो पहाड़ी खाने की पहचान है. भांग का हल्का स्वाद गडेरी की मलाईदार बनावट के साथ बेहतरीन मेल बनाता है. इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है ताकि इसके पोषक तत्व सुरक्षित रहें. यही पारंपरिक तरीका पीढ़ियों से चला आ रहा है, आज भी लोग इसे उसी तरह बनाना पसंद करते हैं. कांडा की गडेरी को गरमा-गरम मडुवे की रोटी के साथ खाना यहां की सबसे पसंदीदा परंपरा है. मडुवा पहाड़ों का प्रमुख अनाज है और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. गडेरी की मलाईदार सब्जी और मडुवे की मोटी रोटी पौष्टिक भोजन में शामिल है. साथ में भांग की चटनी स्वाद को और बढ़ा देती है. यह भोजन सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि पहाड़ की संस्कृति और परंपरा का स्वाद भी कराता है. कांडा क्षेत्र सिर्फ गडेरी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी जाना जाता है. यहां स्थित कालिका मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. साथ ही क्षेत्र के चाय बागान पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. जो लोग यहां घूमने आते हैं, वे कांडा की गडेरी का स्वाद लेना नहीं भूलते. धीरे-धीरे यह सब्जी स्थानीय पर्यटन का भी हिस्सा बनती जा रही है. स्वाद, सेहत और संस्कृति-तीनों का संगम कांडा की गडेरी को सच में खास बनाता है. First Published : February 21, 2026, 22:22 IST
सूजन से लेकर वेट लॉस तक…कच्ची हल्दी सेहत का सोना, इम्युनिटी बूस्टर के लिए वरदान – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 20, 2026, 23:56 IST भारतीय रसोई में आसानी से मिलने वाली कच्ची हल्दी इन दिनों सेहत की दुनिया में फिर सुर्खियां बटोर रही है. आयुर्वेद में इसे संजीवनी समान कहा गया है. इसमें करक्यूमिन और शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं. यह कई रोगों से निजात दिला सकती है. कच्ची हल्दी को इम्यूनिटी बूस्टर कहा गया है. इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो संक्रमण से बचाव में सहायक होते हैं. इसके नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे मौसमी बीमारियों के खतरे की संभावना कम रहती हैं. कच्ची हल्दी जोड़ों के दर्द और सूजन से परेशान लोगों के लिए भी फायदेमंद होती है. इसकी सूजनरोधी क्षमता गठिया जैसी समस्याओं में राहत दे सकती है. कच्ची हल्दी के करक्यूमिन तत्व सूजन को कम करने में मदद करते है, जिससे जोड़ों की जकड़न और दर्द में आराम मिलता हैं. कच्ची हल्दी का पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी योगदान बेहद महत्वपूर्ण है. यह गैस, अपच और ब्लोटिंग जैसी दिक्कतों को कम करने में लाभकारी सिद्ध हो सकती है. इसके नियमित सेवन से आंतों की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और पेट हल्का महसूस होता है, जिससे दिनभर शरीर ऊर्जावान रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी के अनुसार, कच्ची हल्दी की भूमिका शरीर को डिटॉक्स करने में खास मानी जाती है. यह लिवर की कार्यक्षमता को समर्थन दे सकती है और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मददगार साबित हो सकती है. खून को साफ करने में भी इसके गुण उपयोगी होते हैं, जिससे त्वचा पर भी सकारात्मक असर दिखता है. कच्ची हल्दी का गुनगुना दूध या काढ़ा सर्दी-खांसी या गले में खराश को दूर करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसकी तासीर गर्म होती है, जो गले को आराम देने में सहायक हो सकती है. कई घरों में बदलते मौसम में इसे रोगों से बचाव के उपाय के तौर पर प्रयोग किया जाता है. कच्ची हल्दी एक शानदार औषधि है. वजन को कंट्रोल करने में भी कच्ची हल्दी लाभकारी है. यह मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है, जिससे कैलोरी बर्न की प्रक्रिया शानदार होती है. यही नहीं, कच्ची हल्दी सूजन कम करने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भी बहुत उपयोगी हैं, क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं. कच्ची हल्दी को कद्दूकस कर दूध में उबालकर, चाय में मिलाकर या सुबह गुनगुने पानी के साथ सेवन जा सकता है. हालांकि, यदि किसी को पित्त की पथरी, मधुमेह या खून पतला करने वाली दवाएं चल रही हों, तो सेवन से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट से सलाह जरूरी ले. क्योंकि किन्हीं परिस्थितियों में यह हानिकारक भी हो सकती हैं. First Published : February 20, 2026, 23:56 IST
पानी में उगने वाले इस फूल का तना है बेहद पौष्टिक, सेवन से मिलेंगे ये जबरदस्त फायदे, खून की कमी है तो जरूर खाएं – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 20, 2026, 23:09 IST आप अक्सर हरी और ताजी सब्जियां खाते होंगे. कुछ सब्जियां देखने में बिल्कुल सब्जी नहीं लगती है, लेकिन उनमें पौष्टिक तत्व ग्रीन वेजिटेबल्स से भी अधिक होते हैं. ऐसी ही एक सब्जी है कमल ककड़ी. जिसे इंग्लिश में लोटस स्टेम कहते हैं. कमल ककड़ी में पोषक तत्वों का खजाना होता है. ये देखने में बेशक आपको सूखी लकड़ी लगे, लेकिन स्वाद जबरदस्त होता है. इससे कई तरह की चीजें बनाई जाती हैं जैसे ग्रेवी वाली सब्जी, कोफ्ता, अचार. आपको बता दें कि यह कमल के फूल की जड़ से आता है और इसका स्वाद हल्का और मीठा होता है. सेहतमंद रहने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है.सर्दियों के मौसम में बाजार में मिलने वाली कमल ककड़ी पोषण से भरपूर सब्जी मानी जाती है. कमल के तने से मिलने वाली यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है. आयुर्वेद में इसे शरीर को ताकत देने और कई रोगों से बचाव करने वाली प्राकृतिक औषधि के रूप में देखा जाता है. दरअसल रायबरेली जिले के आयुष चिकित्सक गौरव कुमार (बीएएमएस लखनऊ विश्वविद्यालय) लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि कमल ककड़ी फाइबर, आयरन, पोटैशियम और विटामिन-सी का अच्छा स्रोत है.इसका नियमित सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है. इसमें मौजूद फाइबर आंतों की सफाई में मदद करता है, जिससे शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलते है. कमल ककड़ी खून की कमी दूर करने में भी सहायक होती है.इसमें मौजूद आयरन हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और कमजोरी दूर होती है.जिन लोगों को थकान या एनीमिया की समस्या रहती है, उनके लिए यह सब्जी फायदेमंद मानी जाती है. Add News18 as Preferred Source on Google गौरव कुमार के मुताबिक कमल ककड़ी दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी है.इसमें पाया जाने वाला पोटैशियम रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है.यह शरीर में सोडियम के प्रभाव को संतुलित कर हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है.विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट तत्व इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, जिससे शरीर मौसमी बीमारियों से बचा रहता है. कमल ककड़ी का सेवन सब्जी, अचार या सूप के रूप में किया जा सकता है.हालांकि इसे अच्छी तरह साफ कर और पकाकर ही खाना चाहिए.जिन लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, वे इसे नियमित आहार में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. वह बताते हैं कि कमल ककड़ी एक पौष्टिक और गुणकारी सब्जी है, जो पाचन सुधारने, खून बढ़ाने, दिल को स्वस्थ रखने और शरीर को ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. First Published : February 20, 2026, 23:09 IST
कई बीमारियों का काल है ये पौधा, सेहत के लिए अमृत समान, सर्दी-खांसी, बुखार हमेशा रहेगा दूर – Uttarakhand News

Last Updated:February 20, 2026, 21:54 IST गिलोय, जिसे आयुर्वेद में अमृत बेल और अमृता कहा गया है. यह बेल किसी वरदान से कम नहीं क्योंकि यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने से लेकर थकान मिटाने, बुखार और पाचन की समस्या को दूर करने तक हर तरह की बीमारियों में असरदार मानी जाती है. स्थानीय लोग इसे देसी डॉक्टर के नाम से भी जानते हैं. गिलोय का सेवन कई रूपों में किया जा सकता है, जिसमें काढ़ा, चाय या जूस शामिल हैं. सुबह शाम इसका जूस लेने से मधुमेह जैसी गंभीर बीमारी को भी नियंत्रण में रखा जा सकता है. इसमें पाए जाने वाले तत्व लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं, जिससे शरीर में ऊर्जा और ताजगी बनी रहती है. बुखार, कमजोरी या बार-बार बीमार पड़ना आज के बदलते मौसम में आम समस्या बन चुकी है. लोग छोटी-छोटी बीमारियों से परेशान रहते है और अपने इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए उपाय ढूंढते है. ऐसे में आयुर्वेद की अमूल्य देन गिलोय को ‘इम्यूनिटी बूस्टर’ और ‘आयुर्वेद में अमृत’ के रूप में जाना जाता है. गिलोय केवल एक औषधीय पौधा नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य के कई पहलुओं में लाभकारी साबित होती है. लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि गिलोय का सेवन आयुर्वेद में हजारों सालों से होता आया है. इसे आयुर्वेद की दृष्टि से कई लाभकारी गुणों वाला माना गया है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है और शरीर को बाहरी संक्रमणों से लड़ने में सक्षम बनाता है. बदलते मौसम में जहां लोग अक्सर बुखार, सर्दी-खांसी और कमजोरी जैसी परेशानियों से जूझते है, वहीं गिलोय इन समस्याओं को कम करने में फायदेमंद हो सकती है. अंगों का स्वास्थ्य बेहतर रहतागिलोय शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक होती है. यह खून साफ करने और शरीर में जमा हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का काम करती है. इसके सेवन से लीवर और किडनी जैसी महत्वपूर्ण अंगों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है. इसके साथ ही यह पाचन शक्ति को मजबूत करती है और गैस, कब्ज और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करती है. गिलोय का सेवन कई रूपों में किया जा सकता है. सबसे आम तरीका इसके ताजे रस का है, जिसे लोग सुबह खाली पेट पीना पसंद करते हैं. इसके अलावा गिलोय की गोलियां, चूर्ण और कैप्सूल भी उपलब्ध है. ताकत और ऊर्जा बनाने में उपयोगीगिलोय केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. यह तनाव और चिंता को कम करने में मदद करती है और शरीर को तरोताजा बनाए रखती है. आयुर्वेद में इसे वृद्धावस्था में शरीर की ताकत और ऊर्जा बनाए रखने के लिए भी उपयोगी बताया गया है. इस तरह गिलोय का नियमित और सही सेवन शरीर और मन दोनों को मजबूत बनाने में सहायक होता है. About the Author Manish Rai काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें Location : Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand First Published : February 20, 2026, 21:54 IST









