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अस्पताल में चूहे-बिल्ली आना मरीजों के लिए कितना खतरनाक? किन बीमारियों का बढ़ेगा रिस्क, डॉक्टर से समझें

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Diseases Linked to Rats and Cats: अस्पतालों को मरीजों के लिए सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है. उम्मीद की जाती है कि अस्पताल में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाएगा, लेकिन देश के कई नामी अस्पताल इस पर खरे नहीं उतर रहे हैं. खासतौर से सरकारी अस्पतालों का हाल-बेहाल है. पिछले साल इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में चूहों के काटने से नवजात बच्ची की मौत का मामला सामने आया था, जिसने अस्पतालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे.

अब भोपाल एम्स से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे. भोपाल एम्स के NICU में चूहों का आतंक देखने को मिल रहा है. एम्स प्रशासन का कहना है कि पेस्ट कंट्रोल के बावजूद चूहे कंट्रोल नहीं हो रहे हैं. कई अस्पतालों में कुत्ते और बिल्ली घूमते हुए भी नजर आते हैं. अब सवाल है कि अस्पतालों में कुत्ते-बिल्ली और चूहे घूमना मरीजों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है और इससे कौन-कौन सी बीमारियां फैल सकती हैं. इस बारे में डॉक्टर से जरूरी बातें जान लेते हैं.

गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की फिजीशियन डॉ. दीक्षा गोयल ने News18 को बताया कि अस्पताल में कुत्ता, बिल्ली और चूहे घूमने से कई गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है. प्रेग्नेंट महिलाओं, नवजात शिशुओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों को सबसे ज्यादा जोखिम होता है. कुत्ते के काटने से रेबीज हो सकता है, बिल्ली के काटने से कैट स्क्रैच डिजीज और चूहे के काटने से लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं. चूहे और बिल्लियां कई खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस लेकर घूमते हैं. इनके संपर्क में आने से भी जानलेवा कंडीशंस पैदा हो सकती हैं. ऐसे में अस्पतालों में इनकी मौजूदगी मरीजों के लिए गंभीर समस्या है. इससे अस्पताल के स्टाफ के लिए भी खतरा पैदा हो जाता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

कुत्ते बन सकते हैं रेबीज का कारण

डॉक्टर दीक्षा के मुताबिक अस्पतालों में आवारा कुत्ते घूमना गंभीर समस्या है, क्योंकि अगर कुत्ता किसी को काट ले, तो इससे लोगों में रेबीज वायरस फैल सकता है. ऐसी कंडीशन में सही समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी पड़ेगी और अगर इसमें लापरवाही बरती गई, तो व्यक्ति की जान जा सकती है. अगर कुत्ता किसी खुले घाव को चाट ले, तब भी उसकी लार में मौजूद वायरस शरीर में पहुंच सकता है. कुत्ते की जरा सी खरोंच भी रेबीज की वजह बन सकती है. बच्चों को कुत्ते जल्दी टारगेट करते हैं और लोगों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए. कुत्ते से जितना दूर रहेंगे, उतना सुरक्षित रहेंगे.

बिल्ली फैला सकती है कई बीमारियां

एक्सपर्ट ने बताया कि अस्पताल में बिल्ली आने से कई बीमारियां फैल सकती हैं. बिल्ली के काटने से कैट स्क्रैच डिजीज हो सकती है, जिसकी वजह बिल्ली में पाया जाने वाला बार्टोनेला बैक्टीरिया होता है. इस डिजीज में प्रभावित हिस्से के पास लिम्फ नोड्स में सूजन और बुखार शामिल है. इसका रिस्क 20 साल से कम उम्र के लोगों को ज्यादा होता है. इसके अलावा बिल्लियों के मल के संपर्क में आने से टॉक्सोप्लाज्मोसिस इंफेक्शन हो सकता है. यह इंफेक्शन टॉक्सोप्लाज्मा गॉन्डियाइ नामक पैरासाइट के कारण होता है. यह बिल्ली के आसपास घूमने से हो सकता है. पालतू बिल्ली से बच्चों और लोगों में यह इंफेक्शन फैल सकता है. बच्चों में यह बेहद खतरनाक हो सकता है. इसमें बहुत ज्यादा तेज फीवर और मिर्गी होने लगती है. यह बिल्ली के मल से फैलता है और जो उसे क्लीन करता है, उसे भी इस इंफेक्शन का रिस्क सबसे ज्यादा होता है.

अगर प्रेग्नेंट लेडी को टॉक्सोप्लाज्मोसिस इंफेक्शन हो जाए, तो यह सीरियस कंडीशन पैदा कर सकता है. कई बार बिल्लियां टाइफाइड बैक्टीरिया और क्रिप्टोस्पोरिडियम पैरासाइट को फैला देती हैं. ये इंफेक्शन आमतौर पर तब होते हैं, जब बिल्ली आपके खाने में मुंह मार दे या उसका लार खाने में गिर जाए. इस समस्या में पेट में ऐंठन और दस्त अचानक शुरू हो सकते हैं. कभी-कभी मतली, उल्टी, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं. कई मरीजों को एंटीपैरासाइट दवाई लेनी पड़ती है, ताकि इस परेशानी से छुटकारा मिल सके. इसके अलावा भी बिल्ली कई अन्य बीमारियां फैला सकती है.

अस्पताल में चूहे घूमने से क्या खतरे हैं?

डॉक्टर दीक्षा गोयल कहती हैं कि अस्पताल में चूहे घूमने से भी कई तरह के संक्रमण फैल सकते हैं. इसमें लेप्टोस्पायरोसिस सबसे ज्यादा कॉमन है. यह चूहे की यूरिन और फीकल मैटर से फैलता है. चूहे अगर खाने में मुंह मार दें, तब भी यह बीमारी फैल सकती है. इसके अलावा रैट बाइट फीवर बहुत खतरनाक होता है, जो चूहे के काटने से फैलता है. इसमें 7 से 10 दिन में व्यक्ति की मौत हो सकती है और रैट बाइट के 2 से 10 दिन के बाद इसके लक्षण शुरू हो सकते हैं. घर के अंदर भी अगर किसी को चूहा काट ले, तो यह समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए रैट बाइट के बाद उस जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद टिटनेस का इंजेक्शन दिया जाता है और फिर एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं. इन समस्याओं से बचने के लिए अस्पतालों में पेस्ट कंट्रोल कराना जरूरी है. घरों में लोग DEET वाले रिपेलेंट यूज कर सकते हैं.

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अब भोपाल एम्स से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर आप हैरान रह जाएंगे. भोपाल एम्स के NICU में चूहों का आतंक देखने को मिल रहा है. एम्स प्रशासन का कहना है कि पेस्ट कंट्रोल के बावजूद चूहे कंट्रोल नहीं हो रहे हैं. कई अस्पतालों में कुत्ते और बिल्ली घूमते हुए भी नजर आते हैं. अब सवाल है कि अस्पतालों में कुत्ते-बिल्ली और चूहे घूमना मरीजों के लिए कितना खतरनाक हो सकता है और इससे कौन-कौन सी बीमारियां फैल सकती हैं. इस बारे में डॉक्टर से जरूरी बातें जान लेते हैं.

गुरुग्राम के मारेंगो एशिया हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की फिजीशियन डॉ. दीक्षा गोयल ने News18 को बताया कि अस्पताल में कुत्ता, बिल्ली और चूहे घूमने से कई गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है. प्रेग्नेंट महिलाओं, नवजात शिशुओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों को सबसे ज्यादा जोखिम होता है. कुत्ते के काटने से रेबीज हो सकता है, बिल्ली के काटने से कैट स्क्रैच डिजीज और चूहे के काटने से लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं. चूहे और बिल्लियां कई खतरनाक बैक्टीरिया और वायरस लेकर घूमते हैं. इनके संपर्क में आने से भी जानलेवा कंडीशंस पैदा हो सकती हैं. ऐसे में अस्पतालों में इनकी मौजूदगी मरीजों के लिए गंभीर समस्या है. इससे अस्पताल के स्टाफ के लिए भी खतरा पैदा हो जाता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

कुत्ते बन सकते हैं रेबीज का कारण

डॉक्टर दीक्षा के मुताबिक अस्पतालों में आवारा कुत्ते घूमना गंभीर समस्या है, क्योंकि अगर कुत्ता किसी को काट ले, तो इससे लोगों में रेबीज वायरस फैल सकता है. ऐसी कंडीशन में सही समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी पड़ेगी और अगर इसमें लापरवाही बरती गई, तो व्यक्ति की जान जा सकती है. अगर कुत्ता किसी खुले घाव को चाट ले, तब भी उसकी लार में मौजूद वायरस शरीर में पहुंच सकता है. कुत्ते की जरा सी खरोंच भी रेबीज की वजह बन सकती है. बच्चों को कुत्ते जल्दी टारगेट करते हैं और लोगों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए. कुत्ते से जितना दूर रहेंगे, उतना सुरक्षित रहेंगे.

बिल्ली फैला सकती है कई बीमारियां

एक्सपर्ट ने बताया कि अस्पताल में बिल्ली आने से कई बीमारियां फैल सकती हैं. बिल्ली के काटने से कैट स्क्रैच डिजीज हो सकती है, जिसकी वजह बिल्ली में पाया जाने वाला बार्टोनेला बैक्टीरिया होता है. इस डिजीज में प्रभावित हिस्से के पास लिम्फ नोड्स में सूजन और बुखार शामिल है. इसका रिस्क 20 साल से कम उम्र के लोगों को ज्यादा होता है. इसके अलावा बिल्लियों के मल के संपर्क में आने से टॉक्सोप्लाज्मोसिस इंफेक्शन हो सकता है. यह इंफेक्शन टॉक्सोप्लाज्मा गॉन्डियाइ नामक पैरासाइट के कारण होता है. यह बिल्ली के आसपास घूमने से हो सकता है. पालतू बिल्ली से बच्चों और लोगों में यह इंफेक्शन फैल सकता है. बच्चों में यह बेहद खतरनाक हो सकता है. इसमें बहुत ज्यादा तेज फीवर और मिर्गी होने लगती है. यह बिल्ली के मल से फैलता है और जो उसे क्लीन करता है, उसे भी इस इंफेक्शन का रिस्क सबसे ज्यादा होता है.

अगर प्रेग्नेंट लेडी को टॉक्सोप्लाज्मोसिस इंफेक्शन हो जाए, तो यह सीरियस कंडीशन पैदा कर सकता है. कई बार बिल्लियां टाइफाइड बैक्टीरिया और क्रिप्टोस्पोरिडियम पैरासाइट को फैला देती हैं. ये इंफेक्शन आमतौर पर तब होते हैं, जब बिल्ली आपके खाने में मुंह मार दे या उसका लार खाने में गिर जाए. इस समस्या में पेट में ऐंठन और दस्त अचानक शुरू हो सकते हैं. कभी-कभी मतली, उल्टी, बुखार और कमजोरी जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं. कई मरीजों को एंटीपैरासाइट दवाई लेनी पड़ती है, ताकि इस परेशानी से छुटकारा मिल सके. इसके अलावा भी बिल्ली कई अन्य बीमारियां फैला सकती है.

अस्पताल में चूहे घूमने से क्या खतरे हैं?

डॉक्टर दीक्षा गोयल कहती हैं कि अस्पताल में चूहे घूमने से भी कई तरह के संक्रमण फैल सकते हैं. इसमें लेप्टोस्पायरोसिस सबसे ज्यादा कॉमन है. यह चूहे की यूरिन और फीकल मैटर से फैलता है. चूहे अगर खाने में मुंह मार दें, तब भी यह बीमारी फैल सकती है. इसके अलावा रैट बाइट फीवर बहुत खतरनाक होता है, जो चूहे के काटने से फैलता है. इसमें 7 से 10 दिन में व्यक्ति की मौत हो सकती है और रैट बाइट के 2 से 10 दिन के बाद इसके लक्षण शुरू हो सकते हैं. घर के अंदर भी अगर किसी को चूहा काट ले, तो यह समस्या हो सकती है. इससे बचने के लिए रैट बाइट के बाद उस जगह को साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद टिटनेस का इंजेक्शन दिया जाता है और फिर एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं. इन समस्याओं से बचने के लिए अस्पतालों में पेस्ट कंट्रोल कराना जरूरी है. घरों में लोग DEET वाले रिपेलेंट यूज कर सकते हैं.

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