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US Mini India Growth | Indian Diaspora American Dream Trump Visa Policy

US Mini India Growth | Indian Diaspora American Dream Trump Visa Policy

वॉशिंगटन6 मिनट पहलेलेखक: न्यूयॉर्क से भास्कर के लिए मोहम्मद अली कॉपी लिंक भारतीयों का ‘अमेरिकन ड्रीम’ अब भी कायम है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प – की वीजा, ट्रेड और ग्रीनकार्ड जैसी पाबंदियों के बावजूद इस पर रोक नहीं लगी है। एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में टेक, हेल्थकेयर और – फार्मा सेक्टर के कारण भारतीय परिवार अब पुराने घने इलाकों से निकलकर नए उपनगरों में बस रहे हैं। अमेरिका में पिछले 20 साल के दौरान 50 से ज्यादा ‘मिनी इंडिया’ यानी भारतीयों की टाउनशिप वजूद में आई हैं। अगले 5 साल में ये बढ़कर 75 हो जाएंगी। इन इलाकों में रहने वाले भारतीय परिवार स्थानीय श्वेत अमेरिकियों से दोगुने अमीर हैं। भारतीय परिवारों की औसत आय लगभग 1.54 करोड़ रुपए है जबकि अमेरिकी परिवार की औसत आय लगभग 80 लाख रुपए है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले समय में ये अंतर और बढ़ेगा। कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा भारतवंशी कैलिफोर्निया में सबसे ज्यादा 9.30 लाख भारतवंशी रहते हैं। इसका कारण यहां का आईटी सेक्टर है। दूसरे नंबर पर टेक्सास में 5.40 लाख भारतवंशी हैं। बैचलर्स डिग्री पाने वालों में 54% भारतवंशी अमेरिकियों के मुकाबले में भारतवंशियों के पास अधिक बैचलर डिग्री है। बैचलर्स डिग्री पाने वालों में 25% अमेरिकी जबकि 54% भारतवंशी हैं। मास्टर्स या फिर डॉक्टरेट डिग्री पाने वालों में 60% भारतवंशी हैं। अमेरिका में किसी भी प्रवासी समूह में से भारतीय मूल के लोगों का प्रतिशत सबसे अधिक है। दो अहम मिनी इंडिया फ्रिस्को, टेक्सस 25 साल पहले सिर्फ खेत था, आज आबादी 2.5 लाख। यहां 19% भारतीय मूल के लोग हैं। 2008 में बना कार्य सिद्धि हनुमान मंदिर अब पूरे इलाके का सामुदायिक केंद्र है। पड़ोसी शहर प्लेनो और एलन में भी मंदिर, रेस्तरां और दुकानों का जाल फैल चुका है। डबलिन-सैन रेमन भारतीय आबादी अब 18% है। डबलिन के स्कूलों में 41% दाखिले भारतीय मूल के बच्चों के हैं। दूसरी पीढ़ी अब दिवाली भी मनाती है और वीकेंड पर क्रिकेट खेलने का लुत्फ भी उठाती है। भारतीय फूड बेहद लोकप्रिय, ड्राइव-थू तक खुल गए हैं। भास्कर एक्सपर्ट विलियम फ्रे के अनुसार सिलिकॉन वैली के भारतीय ग्रोथ इंजन की स्पीड बढ़ेगी। विलियम फ्रे ने बताया कि भारतीयों ने सिलिकॉन वैली से 25 साल पहले सफर शुरू किया था। अब इस ग्रोथ इंजन की रफ्तार और बढ़ेगी। करीब 35% सिलिकॉन वैली स्टार्टअप्स में कम से कम एक भारतीय मूल का सह-संस्थापक है। आईटी सेक्टर में भारतीयों की दमदार मौजूदगी से अमेरिका के अन्य राज्यों में भी भारतीयों की टाउनशिप में इजाफा करेगी। भारतीयों की मौजूदगी सीधे-सीधे अमेरिका के इकॉनॉमिक मॉडल पर आधारित है। अमेरिका में आने वाले किसी भी विदेशी समुदाय से ज्यादा भारतीय इसके योगदान देते हैं। ————————- ये खबर भी पढ़ें… आतंकी लादेन की हिट लिस्ट में भारत भी था: CIA के खुफिया दस्तावेज में खुलासा आतंकी संगठन अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन 9/11 हमले से पहले भारत को भी निशाना बनाना चाहता था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Delhi Declaration | BRICS Summit India China Global Influence Analysis

Delhi Declaration | BRICS Summit India China Global Influence Analysis

नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक नई दिल्ली में BRICS समिट के दौरान सदस्य देशों के नेताओं ने फैमिली फोटो खिंचवाई। BRICS समिट के बाद जारी नई दिल्ली डिक्लेरेशन ने दुनिया का ध्यान खींचा। घोषणापत्र में BRICS देशों ने एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की अपील की और विकासशील देशों को वैश्विक फैसलों में ज्यादा भागीदारी देने की बात कही। समिट को लेकर दुनिया के अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने अपने-अपने नजरिए से रिपोर्टिंग की। कहीं भारत की कूटनीति चर्चा में रही, तो कहीं BRICS के भीतर भारत और चीन के बढ़ते प्रभाव की होड़ पर फोकस रहा। पढ़िए, दुनिया के बड़े मीडिया संस्थानों ने BRICS समिट और नई दिल्ली डिक्लेरेशन को किस नजरिए से देखा… रॉयटर्स- भारत अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाया रॉयटर्स ने BRICS के नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर लिखा कि भारत ने ईरान, सऊदी अरब, UAE, चीन और रूस जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और इन देशों के अलग-अलग रुख के बीच सभी को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए बड़ी चुनौती थी। NYT- चीन और भारत में प्रभाव बढ़ाने की होड़ द न्यूयॉर्क टाइम्स ने BRICS समिट को भारत और चीन के बीच बढ़ते प्रभाव की होड़ के नजरिए से देखा। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन BRICS को अमेरिकी दबदबे को चुनौती देने वाले मंच के तौर पर मजबूत करना चाहता है। वहीं, भारत की कोशिश है कि BRICS किसी एक देश या शक्ति के प्रभाव में न आए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चाहता है कि BRICS में अलग-अलग सोच और हित रखने वाले देश भी साथ मिलकर काम करें। यानी संगठन का फोकस किसी एक खेमे के साथ खड़े होने के बजाय आपसी सहयोग और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर रहे। चाइना डेली: BRICS बदल सकता है दुनिया में ताकत का संतुलन चीन के अखबार चाइना डेली ने BRICS को ऐसे मंच के तौर पर पेश किया, जो दुनिया में ताकत का संतुलन बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देश अब दुनिया के बड़े मुद्दों और फैसलों में अपनी आवाज ज्यादा मजबूती से रखना चाहते हैं। BRICS उन्हें इसके लिए एक ऐसा मंच दे रहा है, जहां वे मिलकर अपनी बात उठा सकते हैं। रिपोर्ट में चीन के इस रुख को भी प्रमुखता दी गई कि दुनिया की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और वैश्विक फैसलों पर कुछ गिने-चुने ताकतवर देशों का दबदबा नहीं रहना चाहिए। GT: BRICS में भारत-चीन साथ आए तो ग्लोबल साउथ को फायदा चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने BRICS को सिर्फ चीन या भारत के हितों का मंच नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए बड़े सहयोग के मौके के तौर पर पेश किया। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि BRICS में भारत और चीन का सहयोग सिर्फ दोनों देशों के आपसी रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे ग्लोबल साउथ को फायदा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्ट में मजबूत है, जबकि चीन मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन के मामले में आगे है। दोनों देशों की ये अलग-अलग ताकतें BRICS के भीतर सहयोग को और मजबूत कर सकती हैं। द गार्जियन: भारत-चीन रिश्तों में सुधार, लेकिन BRICS में सबकुछ ठीक नहीं ब्रिटिश मीडिया द गार्जियन ने BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी को भारत-चीन रिश्तों में सुधार की शुरुआत के तौर पर देखा। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह शी की पहली भारत यात्रा थी। दिल्ली में उनका जोरदार स्वागत हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और आने-जाने में भी सुधार हुआ है। हालांकि, BRICS के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। सदस्य देशों के अपने-अपने हित हैं और ईरान-सऊदी अरब जैसे देशों के बीच तनाव भी संगठन के लिए चुनौती है। इसके बावजूद BRICS देश एक साझा घोषणापत्र पर सहमत हुए। इसमें आपसी विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही गई। FT: चीन BRICS को ताकतवर बनाना चाहता है, भारत की राह अलग ब्रिटिश मीडिया फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, चीन BRICS को ऐसी वैश्विक ताकत के रूप में देखता है, जो अमेरिकी लीडरशिप वाली मौजूदा सिस्टम का विकल्प बन सके। शी जिनपिंग की मौजूदगी और उनकी अपील को भी इसी नजरिए से देखा गया। लेकिन भारत का रुख इससे अलग है। भारत BRICS को सीधे अमेरिका-विरोधी समूह के तौर पर आगे बढ़ाने के बजाय ऐसा मंच बनाए रखना चाहता है, जहां अलग-अलग देशों के हित और विचार होने के बावजूद साझा मुद्दों पर साथ काम किया जा सके। —————————– ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Delhi Declaration | BRICS Summit India China Global Influence Analysis

Delhi Declaration | BRICS Summit India China Global Influence Analysis

नई दिल्ली27 मिनट पहले कॉपी लिंक नई दिल्ली में BRICS समिट के दौरान सदस्य देशों के नेताओं ने ग्रुप फोटो खिंचवाई। BRICS समिट के बाद जारी नई दिल्ली डिक्लेरेशन में अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनी। वर्ल्ड मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कामयाबी माना। खास बात यह रही कि BRICS अमेरिका-विरोधी गुट बनने के बजाय साझा मुद्दों पर साथ आया। समिट की रिपोर्टिंग में भारत की कूटनीति के साथ BRICS में भारत-चीन के बढ़ते प्रभाव की होड़ भी चर्चा में रही। पढ़िए, दुनिया के बड़े मीडिया ने BRICS समिट और नई दिल्ली डिक्लेरेशन को कैसे देखा… रॉयटर्स- भारत अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाया रॉयटर्स ने BRICS के नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर लिखा कि भारत ने ईरान, सऊदी अरब, UAE, चीन और रूस जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और इन देशों के अलग-अलग रुख के बीच सभी को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए बड़ी चुनौती थी। NYT- चीन और भारत में प्रभाव बढ़ाने की होड़ द न्यूयॉर्क टाइम्स ने BRICS समिट को भारत और चीन के बीच बढ़ते प्रभाव की होड़ के नजरिए से देखा। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन BRICS को अमेरिकी दबदबे को चुनौती देने वाले मंच के तौर पर मजबूत करना चाहता है। वहीं, भारत की कोशिश है कि BRICS किसी एक देश या शक्ति के प्रभाव में न आए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चाहता है कि BRICS में अलग-अलग सोच और हित रखने वाले देश भी साथ मिलकर काम करें। यानी संगठन का फोकस किसी एक खेमे के साथ खड़े होने के बजाय आपसी सहयोग और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर रहे। चाइना डेली: BRICS बदल सकता है दुनिया में ताकत का संतुलन चीन के अखबार चाइना डेली ने BRICS को ऐसे मंच के तौर पर पेश किया, जो दुनिया में ताकत का संतुलन बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देश अब दुनिया के बड़े मुद्दों और फैसलों में अपनी आवाज ज्यादा मजबूती से रखना चाहते हैं। BRICS उन्हें इसके लिए एक ऐसा मंच दे रहा है, जहां वे मिलकर अपनी बात उठा सकते हैं। रिपोर्ट में चीन के इस रुख को भी प्रमुखता दी गई कि दुनिया की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और वैश्विक फैसलों पर कुछ गिने-चुने ताकतवर देशों का दबदबा नहीं रहना चाहिए। GT: BRICS में भारत-चीन साथ आए तो ग्लोबल साउथ को फायदा चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने BRICS को सिर्फ चीन या भारत के हितों का मंच नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए बड़े सहयोग के मौके के तौर पर पेश किया। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि BRICS में भारत और चीन का सहयोग सिर्फ दोनों देशों के आपसी रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे ग्लोबल साउथ को फायदा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्ट में मजबूत है, जबकि चीन मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन के मामले में आगे है। दोनों देशों की ये अलग-अलग ताकतें BRICS के भीतर सहयोग को और मजबूत कर सकती हैं। द गार्जियन: भारत-चीन रिश्तों में सुधार, लेकिन BRICS में सबकुछ ठीक नहीं ब्रिटिश मीडिया द गार्जियन ने BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी को भारत-चीन रिश्तों में सुधार की शुरुआत के तौर पर देखा। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह शी की पहली भारत यात्रा थी। दिल्ली में उनका जोरदार स्वागत हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और आने-जाने में भी सुधार हुआ है। हालांकि, BRICS के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। सदस्य देशों के अपने-अपने हित हैं और ईरान-सऊदी अरब जैसे देशों के बीच तनाव भी संगठन के लिए चुनौती है। इसके बावजूद BRICS देश एक साझा घोषणापत्र पर सहमत हुए। इसमें आपसी विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही गई। FT: चीन BRICS को ताकतवर बनाना चाहता है, भारत की राह अलग ब्रिटिश मीडिया फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, चीन BRICS को ऐसी वैश्विक ताकत के रूप में देखता है, जो अमेरिकी लीडरशिप वाली मौजूदा सिस्टम का विकल्प बन सके। शी जिनपिंग की मौजूदगी और उनकी अपील को भी इसी नजरिए से देखा गया। लेकिन भारत का रुख इससे अलग है। भारत BRICS को सीधे अमेरिका-विरोधी समूह के तौर पर आगे बढ़ाने के बजाय ऐसा मंच बनाए रखना चाहता है, जहां अलग-अलग देशों के हित और विचार होने के बावजूद साझा मुद्दों पर साथ काम किया जा सके। —————————– ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India AI Kid Raul John Aju

India AI Kid Raul John Aju

Hindi News Career India AI Kid Raul John Aju | Kerala Teen Entrepreneur Success Story 5 मिनट पहले कॉपी लिंक राउल जॉन अजू महज 16 साल की उम्र में एआई कंपनी की शुरुआत को लेकर चर्चा में हैं। राउल को भारत के AI किड के नाम से जाना जाता है। वे केरल के कोच्चि जिले के कुन्नुमपुरम स्थित नॉर्थ एडप्पल्ली जीएचएस में कॉमर्स के साथ 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहा है। महज 9 साल की उम्र से की AI सीखने की शुरुआत राउल की कंपनी में करीब 15 लोग काम करते हैं। AI के क्षेत्र में उनका सफर किसी पारंपरिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई से शुरू नहीं हुआ। उन्होंने सिर्फ 9 साल की उम्र में खुद से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सीखना शुरू कर दिया था। शुरुआत में वीडियो एडिटिंग के जरिए उनकी तकनीक में रुचि बढ़ी। जब उनके पिता को Adobe में नौकरी मिली, तो राउल को कुछ प्रीमियम टेक्नोलॉजी टूल्स इस्तेमाल करने का मौका मिला। इससे AI को लेकर उनका नॉलेज बढ़ा। करीब 12 साल की उम्र में उन्होंने MeBot नाम का रोबोट बनाया। इसके बाद AI और रोबोटिक्स के क्षेत्र में उनकी पहचान बढ़ने लगी। 15 कर्मचारियों की टीम और 5 लाख छात्रों को ट्रेनिंग 12वीं की पढ़ाई और बोर्ड एग्जाम की तैयारियों के बीच राउल अपने स्टार्टअप की पूरी जिम्मेदारियां बखूबी संभालता है। राउल के स्टार्टअप ने अब तक दुनिया भर में 5 लाख से अधिक छात्रों को AI और नई तकनीकों की ट्रेनिंग देने का दावा किया है। राउल इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर भी AI और टेक्नोलॉजी के भविष्य पर अपने विचारों के बारे में बात कर चुके हैं। प्रोफेशनल्स को देते हैं AI टूल्स की ट्रेनिंग राउल के प्लेटफॉर्म का नाम ThinkCraft है। इसके जरिये वे छात्रों को AI सिखाते हैं, प्रोफेशनल्स को AI टूल्स की ट्रेनिंग देते है। छोटे-छोटे प्रैक्टिकल उपलब्ध कराते हैं। इसके साथ ही गेम जैसी सीखने की प्रोसेस को आम लोगों तक पहुंचाते भी हैं। राउल India AI Impact Summit 2026 के दौरान भी चर्चा में आए। उन्होंने AI, शिक्षा और जिम्मेदार तकनीकी इस्तेमाल पर बात की और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित प्रमुख लोगों से मुलाकात की। ————————————————————————— ये खबर भी पढ़ें इंडियन आर्मी में अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी:ट्राइबल कम्युनिटी और धार्मिक टैटू बनवा सकते हैं, ये 6 तरह के टैटू प्रतिबंधित इंडियन आर्मी ने अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी की है। इसमें बताया गया है कि शरीर पर कहां टैटू बनवाया जा सकता है और कहां नहीं। अग्निवीर भर्ती में शारीरिक गतिविधियों के साथ उम्मीदवारों के पूरे शरीर की जांच की जाती है। साथ में शरीर पर टैटू भी देखा जाता है क्योंकि सेना में टैटू को लेकर कड़े नियम तय किए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

BRICS Summit Finale | PM Modi To Meet 4 Global Leaders In India

BRICS Summit Finale | PM Modi To Meet 4 Global Leaders In India

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिक्स समिट के दौरान शनिवार को PM मोदी, पुतिन और जिनपिंग का हाथ थामे नजर आए। BRICS समिट का आज आखिरी दिन है। आज ओपन मीटिंग होगी, जिसमें सदस्य देशों के नेता और दूसरे आमंत्रित देशों के प्रमुख शामिल होंगे। बैठक में BRICS से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद PM मोदी 4 देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। समिट के पहले दिन भारत ने साफ कर दिया कि फिलहाल BRICS देशों की अपनी कोई साझा करेंसी बनाने का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि BRICS में स्थानीय करेंसी में आपसी व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर चर्चा जरूर चल रही है। इसका मकसद देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना और लेन-देन की लागत कम करना है। BRICS देशों ने नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी BRICS देशों ने शनिवार को समिट के दौरान नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इसमें कई मुद्दों पर साझा बयान जारी किया गया। डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी। BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं। ब्रिक्स समिट में PM मोदी के बयान की 5 अहम बातें अगले 20 साल का नया एजेंडा बनाएं: BRICS के अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा और फैसलों पर अमल की स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव। ग्लोबल साउथ नियम बनाने में हिस्सा ले: AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी के नियम तय करने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी पर जोर। युवाओं को तैयार करें: युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत और कानून की ट्रेनिंग देने का सुझाव। नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क बने: मुसीबत में फंसे नाविकों को इलाज, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकालने के लिए देशों के बीच नेटवर्क बनाने की बात। भविष्य सबका, फैसला भी सबका: मोदी ने कहा- दुनिया का भविष्य साझा है तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए। PM मोदी ने शनिवार को BRICS समिट 2026 के औपचारिक शुरुआत की घोषणा की। तनाव के बीच ईरान-UAE राष्ट्रपतियों ने बातचीत की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने BRICS समिट से इतर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के रुख अलग हैं। हालांकि, ईरान और UAE पिछले कुछ सालों से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह मुलाकात तनाव के बीच दोनों देशों के बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत है। पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है। इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए। इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है। एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताया। तब BRIC कोई संगठन नहीं था। 2006 में चारों देश साथ आए और BRIC समूह बना। 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी पूर्ण सदस्य बने। आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की करीब 14% है। ———————- BRICS से जुड़ी यह खबरें भी पढ़ें… 1. BRICS के साझा बयान में पहलगाम हमले की निंदा: टेरर फंडिंग रोकने पर जोर; कहा- आतंकियों को पनाह देने वालों पर मिलकर एक्शन लेंगे रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… 2. पुतिन का अमेरिका-यूरोप पर तंज:कमजोर देश खुद को G7 क्यों कहते हैं; मोदी बोले- ब्रिक्स देशों में दुनिया की 40% GDP प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स लीडर्स ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ग्लोबल ट्रेड पर बात की। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

China India Relations; Xi Jinping BRICS 2026 Diplomacy Explained | Delhi Beijing Trade

China India Relations; Xi Jinping BRICS 2026 Diplomacy Explained | Delhi Beijing Trade

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। वो BRICS समिट के अलावा पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। जिनपिंग आखिरी बार अक्टूबर 2019 में अनौपचारिक बैठक के लिए भारत आए थे। . 1. डिप्लोमेसी: कारोबारी मजबूरी में भारत-चीन का सियासी तनाव कम होगा जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच खूनी झड़प हुई। भारत के कैप्टन संतोष बाबू समेत 20 जवान शहीद हुए। हालात इतने बिगड़े कि दोनों ओर से फॉरवर्ड पोस्ट पर जवानों और हथियारों की भारी तैनाती की गई। 4 साल बाद अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के रिश्तों में कुछ नरमी आई। सीमा पर डिसइंगेजमेंट हुआ। रूस के कजान में मोदी-जिनपिंग की बातचीत हुई। अगस्त 2025 में मोदी SCO समिट के लिए चीन गए और जिनपिंग से मिले। हाल ही में किर्गिस्तान में भी दोनों नेताओं ने हैंडशेक किया। अब जिनपिंग भारत आ रहे हैं और मोदी के साथ बातचीत की मेज पर बैठेंगे। ये लगातार तीसरा साल है जब दोनों नेता मिल रहे हैं। अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग ने बातचीत की थी। तब जिनपिंग ने कहा था कि हमें प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार बनना चाहिए। ब्रिटिश थिंकटैंक चैथम हाउस के एशिया-पैसेफिक प्रोग्राम के सीनियर रिसर्च फेलो डॉ. चिएतिज बाजपेयी मानते हैं कि भारत-चीन के बीच यह स्ट्रैटेजिक रीसेट नहीं, बल्कि टैक्टिकल थॉ है। यानी रिश्तों में जमा बर्फ भले कुछ पिघली है, लेकिन सीमा विवाद और पाकिस्तान-चीन के रिश्ते को लेकर तनाव बना हुआ है। डिप्लोमेसी में टैक्टिकल थॉ का मतलब होता है- आर्थिक जरूरतों के चलते 2 प्रतिद्वंद्वी देशों में राजनीतिक और सैन्य तनाव का अस्थायी तौर पर कम होना। 2. ऑप्टिक्स: जिनपिंग, पुतिन और मोदी एक साथ दिखना भी बड़ी बात पिछले डेढ़ साल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की पॉलिसी का सीधा असर भारत, रूस और चीन पर पड़ा है। ट्रम्प ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया, जो सीरिया और म्यांमार जैसे देशों के बराबर था। वहीं चीन पर 145% तक टैरिफ और रूस पर कई तरह की आर्थिक और सैन्य पाबंदियां लगाईं। 1 सितंबर 2025 को चीन के तियानजिन में हुई SCO समिट के दौरान पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग की साथ वाली तस्वीरें वायरल हुईं। पूरी दुनिया में चर्चा शुरू हुई कि क्या भारत-रूस-चीन एक मेज पर आ गए हैं। ट्रम्प की सोशल मीडिया पोस्ट से उनकी नाराजगी भी दिखी। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर तीनों नेताओं की फोटो शेयर करते हुए लिखा, ‘ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया। उम्मीद करता हूं कि उनकी साझेदारी लंबी और समृद्ध हो।’ पिछले महीने किर्गिस्तान के बिश्केक में हुई SCO समिट के दौरान दोबारा ऐसी तस्वीरें आईं, जिन्हें फिर से अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ देखा गया। ऐसे में फिर से तीनों नेताओं का साथ आना, ऑप्टिक्स के लिहाज से काफी अहम होगा। इससे वॉशिंगटन को मैसेज जाएगा कि भारत के पास अमेरिका ही इकलौता विकल्प नहीं है। वहीं बीजिंग भी दिखाएगा कि पश्चिमी दुनिया ने भले ही उसे अलग-थलग करने की कोशिश की, लेकिन वो ग्लोबल स्टेज पर अकेला नहीं है, खासकर उस मंच पर है, जहां भारत और रूस भी हैं। दिल्ली में हो रही BRICS समिट के दौरान राष्ट्रपति पुतिन, पीएम मोदी और और राष्ट्रपति जिनपिंग। 3. मैसेजिंग: BRICS कोई दिखावे का मंच नहीं, सभी देश एकजुट BRICS अब सिर्फ 5 देशों- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका का ग्रुप नहीं रहा। इसमें ईरान, UAE, सऊदी अरब जैसे 6 और देश जुड़ चुके हैं, यानी कुल 11 ताकतें। इन देशों में दुनिया की आधी आबादी रहती है और ग्लोबल GDP में इनकी 40% हिस्सेदारी है। दूसरी तरफ ग्लोबल ऑर्डर में उठापटक मची है। ट्रम्प मनमाने फैसले ले रहे हैं। दुनिया 25 युद्धों की मार झेल रही है। तेल-गैस, अनाज, कच्चे माल जैसी जरूरी चीजों की ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित रही है। 2006 में BRICS की शुरुआती मीटिंग हुई, जिसमें भारत, चीन, रूस और ब्राजील के नेता शामिल हुए। बाद में इसमें साउथ अफ्रीका जुड़ा। तस्वीर- 2016 में भारत में हुए BRICS समिट की है। BRICS की अहमियत तब और बढ़ जाती है, जब 100 से ज्यादा देशों वाले ग्लोबल साउथ के ज्यादातर देश इससे उम्मीदें रखते हैं और मानते हैं कि BRICS पश्चिमी देशों के मुकाबले एक मजबूत मंच साबित होगा। हालांकि अलग-अलग सोच वाले BRICS के सभी 11 सदस्य देशों को एकजुट बनाए रखना आसान नहीं है। इनमें लोकतांत्रिक भारत है, तो सत्तावादी चीन-रूस भी हैं। ईरान का UAE और सऊदी अरब से संघर्ष जारी है। इथियोपिया और इजिप्ट भी आपस में विरोधी हैं। BRICS को एकजुट और कामयाब बनाए रखने की सबसे बड़ी शर्त है कि भारत और चीन आपस में खुले टकराव से बचें। भारतीय थिंकटैंक ऑर्गनाइजेशन फॉर रिसर्च ऑन चाइना एंड एशिया की डायरेक्टर ईरिशिका पंकज मानती हैं कि इस बार की BRICS समिट जितनी नई दिल्ली के लिए अहम है, उतनी ही बीजिंग के लिए। क्योंकि अगले साल वो BRICS का मेजबान है। अगर जिनपिंग मौजूदा चेयर, यानी भारत नहीं आते, तो चीन की ही साख को नुकसान पहुंचता। भारत और चीन के रिश्ते करवट ले रहे हैं, लेकिन 2 वजहों से फिलहाल दोनों देश एक पाले में नहीं आ सकते। पहला- ट्रस्ट डेफिसिट, यानी भरोसे की कमी और दूसरा- ट्रेड डेफिसिट, यानी व्यापार घाटा। पहली चुनौती: भारत-चीन के बीच भरोसे की कमी 1962 में दोनों देश जंग लड़ चुके हैं। सीमा विवाद के चलते 2013 में लद्दाख के देपसांग, 2014 में चुमार, 2017 में डोकलाम और 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान में दोनों सेनाओं के बीच झड़पें हो चुकी हैं। अभी भी LAC पर करीब 50,000 भारतीय जवान तैनात हैं। जून 2026 में अरुणाचल प्रदेश की जनजातियों ने दावा किया है कि चीनी सेना उनकी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा कर रही है। हालांकि भारत ने इसका खंडन किया। चीन ने माना कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए टकराव में उसने पाकिस्तान की मदद की। चीन-पाकिस्तान लगातार स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप भी बढ़ा रहे हैं। भारत का एक और पड़ोसी बांग्लादेश भी चीनी खेमे में जा रहा है। ग्लोबल अफेयर्स के एक्सपर्ट डॉ. डायलन लोह मानते हैं कि भारत-चीन का बातचीत की मेज पर आना रिस्क मैनेजमेंट

China India | PM Narendra Modi Xi Jinping Meeting Update; BRICS 2026

China India | PM Narendra Modi Xi Jinping Meeting Update; BRICS 2026

Hindi News National China India | PM Narendra Modi Xi Jinping Meeting Update; BRICS 2026 Galwan Clash नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक शी जिनपिंग भारत मंडपम पहुंचे उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की। गलवान झड़प के बाद यह जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा है। BRICS समिट में शामिल होने के बाद वह आज शाम पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। जिनपिंग के भारत पहुंचने से पहले चीन ने स्टेटमेंट जारी कर कहा- हम भारत के साथ बातचीत बढ़ाकर और आपसी मतभेदों को सुलझाकर काम करने के लिए तैयार हैं। जिनपिंग 11 अक्टूबर 2019 को भारत आए थे। 15 जून 2020 को गलवान झड़प हुई थी। इसके बाद भारत-चीन रिश्तों में तनाव बढ़ा, लेकिन कारोबार नहीं रुका। 2020-21 में चीन से भारत का आयात करीब 65 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में बढ़कर 132 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया। यानी गलवान झड़प के बाद चीन से आयात दोगुना हो गया है। जिनपिंग के साथ भारत आए चीन के दूसरे बड़े नेता चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कै शी भी भारत आए हैं। वे चीन की सत्ता के दूसरे सबसे बड़े नेता में शामिल हैं। उन्हें मिली अहम जिम्मेदारियों की वजह से कै शी को जिनपिंग के बाद देश के सबसे ताकतवर नेताओं में माना जाता है। कै शी कम्युनिस्ट पार्टी के सेंट्रल कमेटी के जनरल ऑफिस के प्रमुख हैं। यह पार्टी के सबसे बड़े नेताओं के कामकाज को संभालने वाला दफ्तर है। यहां बड़े नेताओं की मीटिंग, जरूरी कागज और सूचनाओं से जुड़े काम देखे जाते हैं। कै शी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की शक्तिशाली पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी के पांचवें सदस्य हैं और पार्टी सचिवालय के पहले रैंकिंग वाले सदस्य हैं। यानी बड़े नेता कब मिलेंगे, कौन-सी बैठक होगी और उससे जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार करने से लेकर कई दूसरे काम इसी दफ्तर के जरिए होते हैं। कै शी इसी दफ्तर के मुखिया हैं। यानी उनका काम सीधे शी जिनपिंग और पार्टी के दूसरे बड़े नेताओं के रोजमर्रा के कामकाज से जुड़ा है। इसी वजह से उन्हें शी जिनपिंग का ‘डी फैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ’ कहा जाता है। गोवा में BRICS समिट से पहले 15 अक्टूबर 2016 को चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारतीय अंदाज के कपड़ों में नजर आए थे। जिनपिंग की 18 फीट लंबी होंगकी N701 कार जिनपिंग पालम एयरपोर्ट से अपनी स्पेशल होंगकी N701 से रवाना हुए। करीब 18 फीट यानी 5.5 मीटर लंबी यह खास स्टेट लिमोजिन जिनपिंग के लिए तैयार की गई है। 2019 में भारत आए थे जिनपिंग प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग 11 अक्टूबर, 2019 को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ‘कृष्णाज बटर बॉल’ पर। यह जिनपिंग की आखिरी भारत यात्रा थी। 2019 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का तमिलनाडु के ऐतिहासिक तटीय शहर मामल्लपुरम (महाबलीपुरम) में पीएम मोदी ने स्वागत किया था। दोनों नेताओं ने पंच रथ और शोर मंदिर जैसे प्राचीन स्मारकों का भ्रमण करते हुए द्विपक्षीय संबंधों पर अनौपचारिक बातचीत की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे को कम करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए उच्च स्तरीय तंत्र स्थापित करने पर सहमति बनी थी। ———————————————- ये खबर भी पढ़ें… BRICS में मोदी बोले- हम किसी के खिलाफ नहीं:हमारी सोच सबको साथ लेकर चलने की; ईरान-सऊदी-UAE में मतभेद के बावजूद संयुक्त बयान पर सहमति बनी पीएम मोदी ने शनिवार को 18वें BRICS समिट को संबोधित करते हुए कहा कि BRICS किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि सबको साथ लेकर चलने का मंच है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Sukhoi Su-57 Fighter Jet; India Russia Defence Deal Reason Vs US | Pakistan China

Sukhoi Su-57 Fighter Jet; India Russia Defence Deal Reason Vs US | Pakistan China

जुलाई 2026, भारत के रक्षा सचिव ने साफ कहा था कि सुखोई-57 खरीदने की कोई योजना नहीं है। बमुश्किल दो महीने बाद, रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे पर सुखोई-57 पर डील की चर्चा जोरों पर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान को दिसंबर 2026 तक पांचवीं पीढ़ी का . भारत घूम-फिरकर पांचवीं पीढ़ी के इसी Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने पर वापस क्यों आ गया, पूरी कहानी आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कभी हां-कभी न… सुखोई-57 को लेकर भारत का रुख कैसे बदलता रहा है? जवाबः भारत ने 1990 के दशक से रूस के करीब 400 सुखोई-30 और सुखोई-30MKI विमान खरीदे हैं। इनमें से करीब आधे विमान रूस के साथ मिलकर भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, HAL के प्लांट में बने हैं… 2007 में दोनों देशों के बीच ‘फिफ्थ जनरेशन फाइटर एयरक्राफ्ट’, यानी FGFA समझौता हुआ। इसके तहत रूसी कंपनी सुखोई और HAL को मिलकर 5th जनरेशन का फाइटर जेट बनाना था। 2010 में भारत शुरुआती डिजाइन के लिए करीब 1,897 करोड़ रुपए देने को राजी हुआ। फिर भारत ने जेट में अपनी जरूरतों के मुताबिक, स्टील्थ टेक्नोलॉजी, यानी दुश्मन के रडार की नजर से बचने की क्षमता और रडार वगैरह से जुड़े 40 से ज्यादा बदलावों की मांग की। लंबी बातचीत के बावजूद प्रोजेक्ट अटका रहा। फरवरी 2018 में भारत ने प्रोजेक्ट छोड़ने का फैसला किया। भारतीय एयरफोर्स को इसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी पर भरोसा नहीं था। भारत जिस तरह का टू-सीटर, एडवांस्ड रडार और सेंसर वाला सुखोई-57 चाहता था, वो रूस के मूल फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट PAK-FA से कहीं अलग और महंगा था। लागत में हिस्सेदारी और टेक्नोलॉजी शेयरिंग वगैरह को लेकर भी मतभेद थे। हालांकि रूस ने सुखोई-57 का प्रोडक्शन जारी रखा और 2020 में इसे अपनी सेना में भी शामिल किया। फरवरी 2025 में बेंगलुरु में एयर शो के दौरान रूस ने सुखोई-57E की उड़ान दिखाई और भारत को एक ‘गोल्डन ऑफर’ दिया कि भारत को तैयार विमानों की सप्लाई मिलेगी, भारत में भी सुखोई बनेंगे और रूस भारत के ‘एडवांस्ड मीडिया कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोग्राम’, यानी AMCA के तहत स्वदेशी 5th जनरेशन एयरक्राफ्ट बनाने में भी मदद करेगा। सितंबर 2025 में चर्चा हुई कि दो स्क्वाड्रन, यानी करीब 40 सुखोई-57 रूस से ‘फ्लाई-एवे’ कंडीशन में आएंगे और 3 से 5 स्क्वाड्रन HAL और सुखोई मिलकर नासिक प्लांट में बनाएंगे। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपॉव के मुताबिक, ‘मई 2025 में रूस ने ये भी ऑफर दे दिया कि रूस 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करेगा और सुखोई का दो सीटों वाले वर्जन- ‘सुखोई-57E’ का भारत में ही प्रोडक्शन होगा। इसका रूसी वर्जन ‘सुखोई-57D’ मई 2026 में अपनी पहली टेस्ट फ्लाइट कर चुका है। 4-5 दिसंबर 2025 को पुतिन के भारत आने से पहले उनके प्रेस सेक्रेटरी दमित्री पेस्कोव ने कहा कि सुखोई-57 और S-400/500 एयर डिफेंस सिस्टम का सौदा पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात का मुख्य एजेंडा है। हालांकि सुखोई-57 पर बिना किसी फैसले के ही पुतिन वापस चले गए। मार्च 2026 में भारत के डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि फाइटर जेट्स को लेकर रूस, अमेरिका और फ्रांस के ऑफर्स पर विचार किया जा रहा है। हालांकि जुलाई 2026 में राजेश ने कहा, ‘भारत की सुखोई-57 खरीदने की कोई योजना नहीं है। हमारा फोकस सुखोई-MKI को अपग्रेड करने पर है।’ अब दोबारा पुतिन की यात्रा के दौरान चर्चा है कि भारत 75 सुखोई-57E जेट्स खरीद सकता है। 11 सितंबर को पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मिले। पुतिन BRICS समिट के लिए भारत आए हैं। सवाल-2: भारत की तलाश वापस सुखोई-57 पर क्यों टिक गई है? जवाबः 4 वजहों से भारत को सुखोई-57E जैसे एडवांस्ड फाइटर जेट्स की जरूरत है… 1. फाइटर स्क्वाड्रन की जरूरत के मुकाबले आधे रह गए भारतीय वायु सेना के पास लड़ाकू जेट्स के 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए। एक स्क्वाड्रन में करीब 20 लड़ाकू विमान होते हैं। सरकार स्क्वाड्रन क्षमता को 50 से 60 तक बढ़ाना चाहती है, जबकि अभी एयरफोर्स के पास सिर्फ 29 स्क्वाड्रन हैं। इनमें से 6 स्क्वाड्रन में पुराने ‘SEPECAT जगुआर’ फाइटर जेट्स हैं, जो रिटायर होने वाले हैं। मिग-21 और मिग-27 जैसे जेट्स रिटायर हो चुके हैं। वहीं 260 Su-30MKI जेट्स को नए रडार, सेंसर लगाकर अपग्रेड किया जाना है। हालांकि इस बेड़े में कोई नया विमान शामिल नहीं होगा। ऐसे में भारत को एडवांस्ड फाइटर जेट्स की जरूरत है। 2. पाकिस्तान-चीन के पास 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट चीन के पास 2017 से ही 5th जनरेशन का J-20 स्टील्थ फाइटर जेट है। सितंबर 2025 में चीन ने अपना दूसरा स्टील्थ फाइटर जेट J-35 भी सेना में शामिल किया है। इसके पहले सिर्फ अमेरिका के पास दो तरह के 5th जनरेशन जेट- F-22 और F-35 हैं। चीन, पाकिस्तान को भी J-35 जेट्स देने जा रहा है। जबकि भारतीय एयरफोर्स के पास अभी तक सबसे एडवांस्ड जेट्स फ्रांस से मिले 4.5 जनरेशन के राफेल हैं। 3. भारत का स्वदेशी 5th जनरेशन प्रोग्राम AMCA लेट-लतीफ AMCA प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय ने 2025 में औपचारिक मंजूरी दी थी। इसके तहत बनाए जा रहे 5th जनरेशन जेट्स की पहली टेस्ट फ्लाइट 2028 में हो सकती है। इसके 5 प्रोटोटाइप 2031 तक तैयार हो पाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 7 स्क्वाड्रन, यानी करीब 140-150 विमान बनने में 2035 तक का समय लग जाएगा। तेजस MK1A जैसे विमानों की डिलीवरी में भी देर हो रही है, क्योंकि इनमें लगने वाले अमेरिकी कंपनी जनरल मोटर्स, GE के F404 इंजन की सप्लाई में दिक्कत है। 4. भारत के पास दूसरा बेहतर ऑप्शन नहीं अमेरिका F-35 को भारत में बनाने के बजाय तैयार जेट्स देने को ही राजी है। वो इसकी टेक्नोलॉजी भी ट्रांसफर नहीं करना चाहता। बिना टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सोर्स कोड के इनमें अपने हथियार नहीं लगाए जा सकते। ये कोड एक तरह से विमान का डिजिटल ब्लूप्रिंट या दिमाग होता है। F-35 के एक्सपोर्ट वर्जन पर भरोसा भी नहीं किया जा सकता। जबकि F-35, सुखोई से करीब ढाई गुने महंगे हैं। फ्रांस से कुछ और राफेल खरीदने की बात चल रही है, लेकिन उसने भी भारत को राफेल के सोर्स कोड देने से इनकार कर दिया है। वहीं चीन पहले ही J-10 जैसे विमान पाकिस्तान को दे चुका है और J-35 देने की तैयारी है। इसलिए चीन के J-35

Xi Jinping India Visit BRICS 2026

Xi Jinping India Visit BRICS 2026

Hindi News Career Xi Jinping India Visit BRICS 2026 | India US Joint Military Exercise 5 मिनट पहले कॉपी लिंक 1. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आएंगे 11 सितंबर को चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को BRICS शिखर सम्मेलन होना है। इसमें चीन-रूस समेत 11 देश शामिल होंगे। रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी इसमें शामिल होने भारत आ रहे हैं। यदि दोनों प्रमुखों के बीच ये बैठक होती है तो जून 2020 में हुई गलवान हिंसा के बाद दोनों नेताओं की भारत में पहली द्विपक्षीय बातचीत होगी। पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने 4 सैनिकों की मौत की बात मानी थी। BRICS 2026 जनवरी को भारत ने ऑफिशियली 18वें ब्रिक्स (BRICS) 2026 की अध्यक्षता संभाली थी। भारत इस साल चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले साल 2012, 2016 और 2021 में भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता की है। 2026 में ब्रिक्स की स्थापना के 20 साल पूरे हुए हैं। 2009 में ब्रिक्स की पहली समिट रूस में हुई थी। ब्रिक्स के दौरान पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की भी संभावना है। 2. पीएम मोदी ने प्रिंस रहीम आगा खान V से मुलाकात की 10 सितंबर को पीएम मोदी ने नई दिल्ली में जाने-माने समाजसेवी और इस्लामी समाज के 50वें इमाम प्रिंस रहीम आगा खान V से मुलाकात की। पीएम ने हेल्थ सर्विस, एग्रीकल्चर, रूरल डेवलपमेंट और युवाओं व महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्रों में आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के साथ भारत की साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। इस्माइली मुस्लिम समुदाय के 50वें वंशानुगत इमाम और आगा खान डेवलपमेंट नेटवर्क के चेयरमैन, प्रिंस रहीम आगा खान V भारत की अपनी पहली यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। प्रिंस रहीम आगा खान की ये यात्रा सामाजिक विकास और विरासत संरक्षण को बढ़ाने के लिए है। इमाम प्रिंस रहीम ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से भी मुलाकात की। वे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा के हिस्से के रूप में, वे अहमदाबाद, मुंबई और हैदराबाद की यात्रा भी करेंगे। इस्माइली समुदाय के 50वें इमाम के रूप में पदभार संभालने के बाद प्रिंस रहीम आगा खान V की यह भारत की पहली यात्रा है। स्पोर्ट्स (SPORTS) 3. पैरा आर्चर शीतल देवी ने गोल्ड जीता 9 सितंबर को भारत की स्टार पैरा आर्चर शीतल देवी ने वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में गोल्ड जीता। शीतल ने पैरा कंपाउंड महिला व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में कजाकिस्तान की आइजादा सेइदान को हराया। ये ये सीरीज अहमदाबाद में आयोजित की गई थी और शीतल देवी का ये वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में पहला व्यक्तिगत गोल्ड है। शीतल वर्तमान में मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन और वर्ल्ड नंबर-1 पैरा कंपाउंड आर्चर हैं। प्रतियोगिता की क्वालिफिकेशन में शीतल 698 अंक के सीजन-बेस्ट स्कोर के साथ टॉप रैंकिंग हासिल की। भारत ने सीरीज के फाइनल में 2 गोल्ड और 4 ब्रॉन्ज समेत कुल 6 मेडल जीते हैं। टेस्टिंग (TESTING) 4. ISRO ने CE 20 क्रायोजेनिक इंजन का किया सफल परीक्षण 10 सितंबर को SRO ने CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण किया। CE-20 इंजन का उपयोग LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3) रॉकेट के ऊपरी हिस्से में किया जाता है। LVM3 का उपयोग भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान समेत विभिन्न महत्वपूर्ण मिशनों के लिए किया जा रहा है। CE-20 इंजन क्रायोजेनिक टेक्नोलॉजी पर आधारित है और इसमें ईंधन के तौर पर लिक्विड हाइड्रोजन (LH2) और लिक्विड ऑक्सीजन (LOX) का उपयोग किया जाता है। CE-20 को ISRO के लिक्विड प्रो पॉल्यूशन सिस्टम सेंटर (LPSC) ने डेवलप किया है। LVM3 भारत का भारी-भरकम लॉन्चिंग मशीन है। ISRO की स्थापना वर्ष 1969 में हुई थी और इसका मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित है। ये टेस्टिंग भारत की भारी उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। 5. भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास होगा 10 सितंबर को भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित होने का ऐलान हुआ। ये इस ‘युद्ध अभ्यास’ का 22वां संस्करण होगा। पहली बार दो अलग-अलग थिएटर राजस्थान के रेगिस्तान और उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में युद्ध अभ्यास किया जाएगा। इस ‘युद्ध अभ्यास’ की शुरुआत 2004 में हुई थी। 2026 का अभ्यास अपनी तरह का विशेष संस्करण होगा। इस अभ्यास का पहला चरण महाजन फील्ड फायरिंग रेंज, बीकानेर, राजस्थान में किया जाएगा। इसके बाद औली, उत्तराखंड के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में प्रशिक्षण किया जाएगा। इसका उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और संयुक्त सैन्य क्षमता को मजबूत करना है। अभ्यास में ड्रोन और काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तथा निगरानी क्षमताओं पर भी जोर रहेगा। यह अभ्यास भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाएगा। आज का इतिहास 1906 में महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की। 1948 में मुस्लिम लीग के अध्यक्ष और प्रमुख नेता मोहम्मद अली जिन्ना का निधन हुआ। ——————— ये खबर भी पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Putin India Visit: Russian Military Aircraft Land at Noida Airport

Putin India Visit: Russian Military Aircraft Land at Noida Airport

21 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान IL-76 नोएडा एयरपोर्ट के रनवे पर उतरा। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमान उतरे हैं। इनमें रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान IL-76 भी शामिल है। विमानों से रूसी सैन्य अधिकारी भारत पहुंचे हैं। इसी के साथ राष्ट्रपति पुतिन के काफिले की गाड़ियां भी भारत लाई गई हैं। तीनों विमान मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे नोएडा एयरपोर्ट के रनवे पर उतरे थे। बुधवार को भी तीनों विमान एयरपोर्ट पर खड़े रहे। एयरपोर्ट की सुरक्षा टीम के साथ रूसी टीम भी विमानों और सुरक्षा इंतजामों पर नजर रख रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहली बार किसी विदेशी विमान ने लैंडिंग की है। इससे पहले विदेशी सैन्य और वीवीआईपी विमानों के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का इस्तेमाल किया जाता रहा है। रूस के तीन एयरक्राफ्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर खड़े हैं। तैयारियों का जायजा लेने पहुंची टीम किसी बड़े विदेशी नेता के दौरे से पहले उसकी एडवांस टीम एयरपोर्ट, सुरक्षा व्यवस्था और वीवीआईपी मूवमेंट से जुड़ी तैयारियों का जायजा लेती है। इसी वजह से रूसी टीम भारत आई है। पुतिन का विमान भी नोएडा एयरपोर्ट पर ही उतरेगा या नहीं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्टों में इसकी संभावना जताई गई है। IL-76 क्या है? IL-76 रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य सामान और दूसरे भारी उपकरणों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए किया जाता है। इस तरह के विमान किसी बड़े सैन्य या वीवीआईपी दौरे से पहले जरूरी सामान और अधिकारियों को पहुंचाने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। नोएडा एयरपोर्ट पर पहुंची रूसी टीम भी पुतिन के दौरे से पहले सुरक्षा और दूसरी व्यवस्थाओं की तैयारी कर रही है। पुतिन की मोदी से अहम बैठक पुतिन शुक्रवार को भारत पहुंचेंगे। BRICS समिट से पहले उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा, Su-57 फाइटर जेट, S-400, रूसी तेल, परमाणु ऊर्जा और रुपये-रूबल में कारोबार जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। रक्षा क्षेत्र में सबसे ज्यादा नजर रूस के Su-57 5th जेनरेशन फाइटर के प्रस्ताव पर है। रूस भारत को यह विमान बेचने के साथ भारत में इसके उत्पादन और तकनीकी सहयोग का प्रस्ताव दे रहा है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… रूस से पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 ले सकता है भारत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे। इस दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग से जुड़े दो बड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…