Saturday, 01 Aug 2026 | 07:14 PM

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India Eyes Glory vs Chinese Taipei; HS Prannoy, Satwik-Chirag Boost

India Eyes Glory vs Chinese Taipei; HS Prannoy, Satwik-Chirag Boost

Hindi News Sports Thomas Cup: India Eyes Glory Vs Chinese Taipei; HS Prannoy, Satwik Chirag Boost स्पोर्ट्स डेस्क23 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत का शुक्रवार को चीनी ताइपे से मुकाबला होगा। भारत की पुरुष बैडमिंटन टीम का सामना थॉमस कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में चीनी ताइपे से होगा। यह मुकाबला शुक्रवार को डेनमार्क के हॉर्सेंस में सुबह 10 बजे से खेला जाएगा। भारत ग्रुप-A में दूसरे स्थान पर रहा। टीम ने कनाडा को 4-1 से और ऑस्ट्रेलिया को 5-0 से हराया। इसके बाद उसे चीन से 2-3 से हार मिली। दूसरी ओर चीनी ताइपे ग्रुप-C में पहले स्थान पर रही। पहला मैच उसने स्वीडन से 5-0 से जीता। इसके बाद दक्षिण कोरिया से 3-2 से हार मिली। फिर आखिरी मुकाबले में मेजबान डेनमार्क को 3-2 से हराया। भारत के लिए आयुष ने अपने तीनों मुकाबले जीते हैं। आयुष ने तीनों मैच जीते, डबल्स का भी अच्छा प्रदर्शन भारत के युवा आयुष शेट्टी ने अपने तीनों मैच जीते। एचएस प्रणय और किदांबी श्रीकांत तीसरे सिंगल्स की कमान संभाल रहे हैं। श्रीकांत ने चीन के खिलाफ कमबैक जीत दर्ज की। लक्ष्य सेन दो रोमांचक मुकाबले हार गए, लेकिन प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। सात्विक साईराज रंकिरेड्डी और चिराग शेट्टी की डबल्स जोड़ी ने शुरुआती दो मैच जीते, जबकि चीन से हार मिली। दूसरी डबल्स जोड़ी हरिहरन एएमएस और एमआर अर्जुन ने भी दो मैच जीते हैं। सात्विक-चिराग ने अपने 3 में 2 मुकाबले जीते हैं। चीनी ताइपे की टीम मजबूत चीनी ताइपे की टीम भी काफी मजबूत है। विश्व रैंकिंग में छठे नंबर के चाउ तियन चेन, विश्व नंबर 8 और ऑल इंग्लैंड चैंपियन लिन चुन-यी, जबकि विश्व नंबर 21 ची यू जेन सिंगल्स में गहराई देते हैं। डबल्स में चियू ह्सियांग चिए और वांग ची-लिन (विश्व नंबर 14), दूसरे डबल्स ली झे-हुई और यांग पो-ह्सुआन (विश्व नंबर 16) की जोड़ी खतरनाक है। भारत की नजरें दूसरे खिताब पर है। टीम ने चार साल पहले 2022 में थॉमस कप जीतकर इतिहास रचा था। इससे पहले टीम 1952, 1955 और 1979 में कांस्य पदक जीत चुकी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने बुधवार को न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात की। यह शाही जोड़ा 9/11 मेमोरियल पहुंचा था जहां उन्होंने 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। खास बात यह है कि इस मुलाकात से कुछ घंटे पहले ममदानी ने कहा था कि अगर उन्हें किंग चार्ल्स से अलग से बात करने का मौका मिला, तो वे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की बात उठाएंगे। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि इस छोटी बातचीत के दौरान ममदानी ने यह मुद्दा उठाया या नहीं। उनके ऑफिस से भी इस पर तुरंत कोई जवाब नहीं मिला। कोहिनूर वही हीरा है जो ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा है और टावर ऑफ लंदन में रखा गया है। यह 177 साल से ब्रिटेन के पास है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है। 1849 से ब्रिटेन के पास कोहिनूर हीरा कोहिनूर हीरा 1849 से ब्रिटेन के पास है। द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से सिख साम्राज्य के हारने के बाद अंग्रेजों ने पूरे पंजाब पर कब्जा कर लिया। उस समय सिख साम्राज्य के शासक दलीप सिंह थे, जिनकी उम्र सिर्फ 10 साल थी। युद्ध हारने के बाद अंग्रेजों ने उनसे लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर करवाए। इस संधि की शर्तें बहुत सख्त थीं। इसके तहत पंजाब को ब्रिटिश शासन के अधीन कर दिया गया और साथ ही कोहिनूर हीरा भी अंग्रेजों को सौंपना पड़ा। इसके बाद यह हीरा ब्रिटेन पहुंचा और क्वीन विक्टोरिया को दे दिया गया। विवादों से भरा है कोहिनूर का इतिहास कोहिनूर हीरे का इतिहास विवादों से भरा रहा है। कहा जाता है कि साल 1526 में हुमायूं ने आगरा किला पर हमला किया था। इसे जीतने पर बड़े पैमाने में खजाने के साथ-साथ विश्‍व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भी मिला था। बाबरनामा के मुताबिक, कोहिनूर हीरा इतना कीमती था कि इससे पूरी दुनिया को ढाई दिन का भोजन करवाया जा सकता था। 1739 में ईरानी शासक नादिर शाह ने आक्रमण किया। उसने आगरा और दिल्ली में लूटपाट की। वह कोहि‍नूर और मयूर सिंहासन को भी साथ ले गया। नादिर शाह की हत्या के बाद 1747 में यह हीरा अफगानिस्तान के अहमद शाह के पास पहुंचा। इसके बाद कोहिनूर हीरा शाह शुजा के हाथों से होते हुए महाराजा रणजीत सिंह तक पहुंचा। औरंगजेब के शासन के दौरान उसने यह हीरा शाहजहां की देख-रेख में रखा था। शाहजहां आगरा किले में कैद होकर इसी हीरे से ताजमहल को देखते थे। साल 1849 में जब अंग्रेजों ने पंजाब पर कब्जा किया तो इस हीरे को ब्रिटेन की तब की महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया। बाद में इसे और कई हीरों के साथ ब्रिटेन के शाही ताज में लगा दिया गया। महारानी एलिजाबेथ की मौत के बाद से कई बार कोहिनूर को वापस भारत लाने की मांग उठ चुकी है। भारत कई बार कोहिनूर वापस मांग चुका है कोहिनूर जड़े ताज को सबसे पहले ब्रिटेन की क्वीन मदर ने पहना था। इसके बाद ये ताज क्वीन एलिजाबेथ को मिला था। इस ताज में कोहिनूर के अलावा अफ्रीका का बेशकीमती हीरा ग्रेट स्टार ऑफ अफ्रीका सहित कई कीमती पत्थर जड़े हैं। इसकी कीमत करीब 40 करोड़ डॉलर आंकी गई है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है।

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग से मिले न्यूयॉर्क मेयर ममदानी:मुलाकात से पहले कहा था- कोहिनूर भारत को लौटाने बोलूंगा; यह हीरा 177 साल से ब्रिटेन के पास

ब्रिटिश किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने बुधवार को न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी से मुलाकात की। यह शाही जोड़ा 9/11 मेमोरियल पहुंचा था जहां उन्होंने 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। खास बात यह है कि इस मुलाकात से कुछ घंटे पहले ममदानी ने कहा था कि अगर उन्हें किंग चार्ल्स से अलग से बात करने का मौका मिला, तो वे कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की बात उठाएंगे। हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि इस छोटी बातचीत के दौरान ममदानी ने यह मुद्दा उठाया या नहीं। उनके ऑफिस से भी इस पर तुरंत कोई जवाब नहीं मिला। कोहिनूर वही हीरा है जो ब्रिटेन के शाही ताज में जड़ा है और टावर ऑफ लंदन में रखा गया है। यह 177 साल से ब्रिटेन के पास है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है। 1849 से ब्रिटेन के पास कोहिनूर हीरा कोहिनूर हीरा 1849 से ब्रिटेन के पास है। द्वितीय एंग्लो-सिख युद्ध में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से सिख साम्राज्य के हारने के बाद अंग्रेजों ने पूरे पंजाब पर कब्जा कर लिया। उस समय सिख साम्राज्य के शासक दलीप सिंह थे, जिनकी उम्र सिर्फ 10 साल थी। युद्ध हारने के बाद अंग्रेजों ने उनसे लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर करवाए। इस संधि की शर्तें बहुत सख्त थीं। इसके तहत पंजाब को ब्रिटिश शासन के अधीन कर दिया गया और साथ ही कोहिनूर हीरा भी अंग्रेजों को सौंपना पड़ा। इसके बाद यह हीरा ब्रिटेन पहुंचा और क्वीन विक्टोरिया को दे दिया गया। विवादों से भरा है कोहिनूर का इतिहास कोहिनूर हीरे का इतिहास विवादों से भरा रहा है। कहा जाता है कि साल 1526 में हुमायूं ने आगरा किला पर हमला किया था। इसे जीतने पर बड़े पैमाने में खजाने के साथ-साथ विश्‍व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भी मिला था। बाबरनामा के मुताबिक, कोहिनूर हीरा इतना कीमती था कि इससे पूरी दुनिया को ढाई दिन का भोजन करवाया जा सकता था। 1739 में ईरानी शासक नादिर शाह ने आक्रमण किया। उसने आगरा और दिल्ली में लूटपाट की। वह कोहि‍नूर और मयूर सिंहासन को भी साथ ले गया। नादिर शाह की हत्या के बाद 1747 में यह हीरा अफगानिस्तान के अहमद शाह के पास पहुंचा। इसके बाद कोहिनूर हीरा शाह शुजा के हाथों से होते हुए महाराजा रणजीत सिंह तक पहुंचा। औरंगजेब के शासन के दौरान उसने यह हीरा शाहजहां की देख-रेख में रखा था। शाहजहां आगरा किले में कैद होकर इसी हीरे से ताजमहल को देखते थे। साल 1849 में जब अंग्रेजों ने पंजाब पर कब्जा किया तो इस हीरे को ब्रिटेन की तब की महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया। बाद में इसे और कई हीरों के साथ ब्रिटेन के शाही ताज में लगा दिया गया। महारानी एलिजाबेथ की मौत के बाद से कई बार कोहिनूर को वापस भारत लाने की मांग उठ चुकी है। भारत कई बार कोहिनूर वापस मांग चुका है कोहिनूर जड़े ताज को सबसे पहले ब्रिटेन की क्वीन मदर ने पहना था। इसके बाद ये ताज क्वीन एलिजाबेथ को मिला था। इस ताज में कोहिनूर के अलावा अफ्रीका का बेशकीमती हीरा ग्रेट स्टार ऑफ अफ्रीका सहित कई कीमती पत्थर जड़े हैं। इसकी कीमत करीब 40 करोड़ डॉलर आंकी गई है। भारत ने ब्रिटेन के सामने कई बार कोहिनूर हीरे पर अपना कानूनी हक होने का दावा किया है।

India, China Yet to Buy Broadcasting Rights; Global Reach Doubtful

India, China Yet to Buy Broadcasting Rights; Global Reach Doubtful

Hindi News Sports FIFA World Cup 2026: India, China Yet To Buy Broadcasting Rights; Global Reach Doubtful नई दिल्ली28 मिनट पहले कॉपी लिंक फीफा वर्ल्ड कप 2026 11 जून से 26 जुलाई तक खेला जाएगा। भारत-चीन में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक किसी भी कंपनी ने नहीं खरीदे हैं। मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका में भी राइट्स के लिए कोई कंपनी इंटरनेस्ट नहीं दिखा रही। अगर यहीं स्थिति रही, तो दुनिया के करीब 300 करोड़ लोग सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट को नहीं देख पाएंगे। फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा लेंगी और 104 मैच खेले जाएंगे। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको संयुक्त मेजबान हैं। ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक क्यों नहीं खरीदे गए? फीफा ने शुरुआत में मैचों के राइट्स के लिए $100 मिलियन (948 करोड़ रुपए) की मांग की थी। जब कोई खरीदार नहीं मिला, तो इसका प्राइज घटाकर 35 मिलियन डॉलर (लगभग 332 करोड़ रुपए) कर दिए हैं। भारत या दूसरे देशों में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स नहीं खरीदने जाने की तीन बड़ी वजह है… भारत के हिसाब से मैचों की टाइमिंग सही नहींभारत में फुटबॉल फैंस के लिए सबसे बड़ी दिक्कत समय की है। टूूर्नामेंट में खेने जाने वाले 104 मैचों में सिर्फ 14 ही रात 12 बजे से पहले शुरू होंगे। फाइनल सहित बाकी सभी मैच भारतीय समय के अनुसार रात 12 बजे बाद शुरू होंगे। 2022 वर्ल्ड कप में 64 में से 44 मैच रात मिडनाइट से पहले शुरू हुए थे।कंपनियों को डर है कि इतनी रात को बहुत कम लोग मैच देखेंगे। चीन और बाकी देशों के साथ भी यहीं दिक्कत है।2022 कतर वर्ल्ड कप के मैच भारतीय समयानुसार रात 12 बजे से पहले शुरु हुए थे। कंपटीशन की कमी और क्रिकेट का असर2022 वर्ल्ड कप के लिए वायकॉम18 ने लगभग 62 मिलियन डॉलर (450 से 500 करोड़ रुपए) दिए थे। वहीं सोनी ने 2014 और 2018 के लिए 90 मिलियन डॉलर (करीब 600 करोड़ रुपए) खर्च किए थे। अब ब्रॉडकास्टिंग कंपनी वायकॉम18 और हॉटस्टार का विलय हो चुका है। इससे मार्केट में कंप्टीशन घटा है।दूसरी बड़ी वजह है कि फीफा, IPL खत्म होने के दो हफ्ते बाद ही शुरु हो रहा है। भारत में कंपनियां अपना सारा मार्केटिंग बजट आईपीएल पर खर्च कर देती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्पोर्ट्स मार्केट में 89% पैसा क्रिकेट पर खर्च होता है, बाकी सभी खेलों के लिए सिर्फ 11% बचता है।IPL भारत में स्पोर्ट्स का सबसे बड़ा मार्केट है। भारत में सब्सक्रिप्शन मॉडल नहीं चलताभारत एक ऐसा बाजार है जहां लोग खेल देखने के लिए ज्यादा पैसे नहीं देना चाहते। यहां तक की फ्री में देखने के लिए थर्ड पार्टी एप तक इस्तेमाल करते हैं। 2022 वर्ल्ड कप जियोसिनेमा पर मुफ्त दिखाया गया था। फ्री की आदत की वजह से चैनलों के लिए पैसा वसूलना मुश्किल हो गया है। खरीददार नहीं मिला तो FIFA क्या करेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘जियो-स्टार’ जानबूझकर आखिरी वक्त का इंतजार कर रहा है, ताकि FIFA राइट्स के रेट और कम कर दे। अगर कोई नहीं खरीदता, तो फीफा अपने खुद के ऐप ‘FIFA+’ पर मैचों को स्ट्रीम कर सकता है। एक आखिरी रास्ता यह है कि सरकार इसे ‘राष्ट्रीय महत्व’ का खेल घोषित कर दूरदर्शन पर दिखाए, लेकिन इसके लिए भी किसी प्राइवेट कंपनी का साथ होना जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Hindi News Sports FIFA World Cup 2026: India, China Yet To Buy Broadcasting Rights; Global Reach Doubtful नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक फीफा वर्ल्ड कप 2026 11 जून से 26 जुलाई तक खेला जाएगा। भारत-चीन में फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक किसी भी कंपनी ने नहीं खरीदे हैं। मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और श्रीलंका में भी राइट्स के लिए कोई कंपनी इंटरनेस्ट नहीं दिखा रही। अगर यहीं स्थिति रही, तो दुनिया के करीब 300 करोड़ लोग सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट को नहीं देख पाएंगे। फीफा वर्ल्ड कप 11 जून से 19 जुलाई तक अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। इस टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा लेंगी और 104 मैच खेले जाएंगे। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको संयुक्त मेजबान हैं। ब्रॉडकास्टिंग राइट्स अब तक क्यों नहीं खरीदे गए? फीफा ने शुरुआत में मैचों के राइट्स के लिए $100 मिलियन (948 करोड़ रुपए) की मांग की थी। जब कोई खरीदार नहीं मिला, तो इसका प्राइज घटाकर 35 मिलियन डॉलर (लगभग 332 करोड़ रुपए) कर दिए हैं। भारत या दूसरे देशों में ब्रॉडकास्टिंग राइट्स नहीं खरीदने जाने की तीन बड़ी वजह है… भारत के हिसाब से मैचों की टाइमिंग सही नहींभारत में फुटबॉल फैंस के लिए सबसे बड़ी दिक्कत समय की है। टूूर्नामेंट में खेने जाने वाले 104 मैचों में सिर्फ 14 ही रात 12 बजे से पहले शुरू होंगे। फाइनल सहित बाकी सभी मैच भारतीय समय के अनुसार रात 12 बजे बाद शुरू होंगे। 2022 वर्ल्ड कप में 64 में से 44 मैच रात मिडनाइट से पहले शुरू हुए थे।कंपनियों को डर है कि इतनी रात को बहुत कम लोग मैच देखेंगे। चीन और बाकी देशों के साथ भी यहीं दिक्कत है।2022 कतर वर्ल्ड कप के मैच भारतीय समयानुसार रात 12 बजे से पहले शुरु हुए थे। कंपटीशन की कमी और क्रिकेट का असर2022 वर्ल्ड कप के लिए वायकॉम18 ने लगभग 62 मिलियन डॉलर (450 से 500 करोड़ रुपए) दिए थे। वहीं सोनी ने 2014 और 2018 के लिए 90 मिलियन डॉलर (करीब 600 करोड़ रुपए) खर्च किए थे। अब ब्रॉडकास्टिंग कंपनी वायकॉम18 और हॉटस्टार का विलय हो चुका है। इससे मार्केट में कंप्टीशन घटा है।दूसरी बड़ी वजह है कि फीफा, IPL खत्म होने के दो हफ्ते बाद ही शुरु हो रहा है। भारत में कंपनियां अपना सारा मार्केटिंग बजट आईपीएल पर खर्च कर देती हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्पोर्ट्स मार्केट में 89% पैसा क्रिकेट पर खर्च होता है, बाकी सभी खेलों के लिए सिर्फ 11% बचता है।IPL भारत में स्पोर्ट्स का सबसे बड़ा मार्केट है। भारत में सब्सक्रिप्शन मॉडल नहीं चलताभारत एक ऐसा बाजार है जहां लोग खेल देखने के लिए ज्यादा पैसे नहीं देना चाहते। यहां तक की फ्री में देखने के लिए थर्ड पार्टी एप तक इस्तेमाल करते हैं। 2022 वर्ल्ड कप जियोसिनेमा पर मुफ्त दिखाया गया था। फ्री की आदत की वजह से चैनलों के लिए पैसा वसूलना मुश्किल हो गया है। खरीददार नहीं मिला तो FIFA क्या करेगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘जियो-स्टार’ जानबूझकर आखिरी वक्त का इंतजार कर रहा है, ताकि FIFA राइट्स के रेट और कम कर दे। अगर कोई नहीं खरीदता, तो फीफा अपने खुद के ऐप ‘FIFA+’ पर मैचों को स्ट्रीम कर सकता है। एक आखिरी रास्ता यह है कि सरकार इसे ‘राष्ट्रीय महत्व’ का खेल घोषित कर दूरदर्शन पर दिखाए, लेकिन इसके लिए भी किसी प्राइवेट कंपनी का साथ होना जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Bajaj Finance ₹6 Dividend; Rajiv Bajaj Exits Board

Bajaj Finance ₹6 Dividend; Rajiv Bajaj Exits Board

Hindi News Business Bajaj Finance ₹6 Dividend; Rajiv Bajaj Exits Board | 2026 Profit Up 22% नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही (Q4) में ₹5,465 करोड़ का शुद्ध मुनाफा यानी नेट प्रॉफिट कमाया है। पिछले साल की इसी तिमाही के ₹4,480 करोड़ के मुकाबले इसमें 22% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कंपनी ने अच्छे नतीजों के साथ ही यह भी जानकारी दी है कि राजीव बजाज बोर्ड से इस्तीफा दे रहे हैं। कंपनी के मुनाफे में इस उछाल की बड़ी वजह बैड लोन (फंसे हुए कर्ज) के लिए किए जाने वाले प्रोविजन में कमी आना है। विश्लेषकों ने इस तिमाही में ₹5,490 करोड़ के मुनाफे का अनुमान लगाया था, कंपनी के नतीजे लगभग उसी के आसपास रहे हैं। कंपनी का रेवेन्यू भी 18% बढ़कर ₹21,606 करोड़ पर पहुंच गया है, जो पिछले साल ₹18,294 करोड़ था। राजीव बजाज 30 जुलाई को पद छोड़ेंगे कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि राजीव बजाज ने बोर्ड से हटने की इच्छा जताई है। वे कंपनी की अपकमिंग एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे। ऐसे में 30 जुलाई 2026 को होने वाली AGM के बाद वे नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के पद को छोड़ देंगे। बोर्ड ने कंपनी में उनके लंबे योगदान की सराहना की है। शेयरहोल्डर्स को ₹6 का डिविडेंड मिलेगा रिजल्ट के साथ ही कंपनी ने अपने निवेशकों के लिए ₹6 प्रति शेयर डिविडेंड की घोषणा भी की है। इसमें ₹0.60 का स्पेशल डिविडेंड भी शामिल है, जो बजाज हाउसिंग फाइनेंस के शेयरों की बिक्री से हुए फायदे के तौर पर दिया जा रहा है। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 30 जून 2026 तय की गई है। कंपनियां अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा अपने शेयरधारकों के देती हैं, इसे डिविडेंड या लाभांश कहा जाता है। एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 21% की ग्रोथ बजाज फाइनेंस की लोन बुक यानी एसेट अंडर मैनेजमेंट में शानदार बढ़त देखी गई है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का AUM 21% बढ़कर ₹3,72,986 करोड़ हो गया है, जो एक साल पहले ₹3,08,832 करोड़ था। कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 20% बढ़कर ₹10,716 करोड़ रही। एसेट क्वालिटी में सुधार और MSME सेगमेंट का हाल कंपनी की एसेट क्वालिटी पिछले साल के मुकाबले बेहतर हुई है। ग्रॉस NPA 0.29% से घटकर 0.27% पर आ गया है, जबकि नेट NPA 0.11% पर स्थिर है। हालांकि, कंपनी MSME सेगमेंट में बढ़ते बैड लोन की समस्या से जूझ रही थी, लेकिन इस बार कुल प्रोविजन ₹2,167 करोड़ से घटकर ₹2,008 करोड़ रह गया है। कंपनी ने भविष्य के आर्थिक जोखिमों के लिए ₹142 करोड़ का अतिरिक्त क्रेडिट लॉस प्रोविजन भी रखा है। क्या होता है AUM, प्रोविजनिंग और स्पेशल डिविडेंड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM): किसी फाइनेंस कंपनी के पास मौजूद कुल लोन और निवेश की वैल्यू को AUM कहते हैं। स्पेशल डिविडेंड: जब कंपनी को किसी संपत्ति की बिक्री या अचानक बड़ा मुनाफा होता है, तो वह नियमित डिविडेंड के अलावा जो अतिरिक्त राशि देती है, उसे स्पेशल डिविडेंड कहते हैं। प्रोविजनिंग क्यों जरूरी: बैंकों और NBFC को भविष्य में होने वाले संभावित घाटे या न चुकाए जाने वाले लोन के लिए मुनाफे का एक हिस्सा अलग रखना पड़ता है, इसे ही प्रोविजनिंग कहते हैं। ये खबर भी पढ़ें… अडाणी पावर का चौथी तिमाही में मुनाफा 64% बढ़ा: यह ₹4,271 करोड़ रहा, रेवेन्यू भी 10% बढ़ा; नतीजों के बाद शेयर 2.5% गिरा अडाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 64% बढ़कर ₹4,271 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹2,599 करोड़ का मुनाफा हुआ था। हालांकि, मुनाफे में इस बड़ी बढ़त के बावजूद बुधवार को कंपनी का शेयर करीब 2.48% गिरकर ₹217.80 पर बंद हुआ। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Gold Silver Rates India | Silver Up ₹2370 to ₹2.39 LakhKg, Gold ₹1.49 Lakh10g

Gold Silver Rates India | Silver Up ₹2370 to ₹2.39 LakhKg, Gold ₹1.49 Lakh10g

Hindi News Business Gold Silver Rates India | Silver Up ₹2370 To ₹2.39 LakhKg, Gold ₹1.49 Lakh10g नई दिल्ली27 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी के दाम में आज यानी 29 अप्रैल को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 39 रुपए महंगा होकर 1,48,821 रुपए पर पहुंच गया है। इससे पहले इसकी कीमत 1,48,782 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं एक किलो चांदी 2,370 रुपए महंगी होकर 2,38,911 रुपए पर पहुंच गई है। इससे पहले 28 अप्रैल को इसकी कीमत 2,36,541 लाख रुपए प्रति किलो थी। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत कैरेट भाव (रुपए/10 ग्राम) 24 ₹1,48,821 22 ₹1,36,320 18 ₹1,11,616 14 ₹87,060 देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत शहर 10 ग्राम 24 कैरेट दिल्ली ₹1,51,530 मुंबई ₹1,51,370 कोलकाता ₹1,51,370 चेन्नई ₹1,52,190 जयपुर ₹1,51,530 भोपाल ₹1,51,430 पटना ₹1,51,430 लखनऊ ₹1,51,530 रायपुर ₹1,51,370 अहमदाबाद ₹1,51,430 सोर्स: goodreturns 29 अप्रैल, 2026 सोना इस साल 16 हजार और चांदी 9 हजार रुपए महंगी 2026 में सोना अब तक 18 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपए पर था, जो अब 1.49 लाख रुपए पर पहुंच गया है। इस साल चांदी 10 हजार रुपए महंगी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब बढ़कर 2.39 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल तारीख सोना चांदी 31 दिसंबर 2025 ₹1,33,195 ₹2,30,420 31 जनवरी 2026 ₹1,65,795 ₹3,39,350 28 फरवरी 2026 ₹1,50,997 ₹2,66,700 31 मार्च 2026 ₹1,46,733 ₹2,30,135 29 अप्रैल 2026 ₹1,48,821 ₹2,38,911 नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है। आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ तेजी से पिघलती है। स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आती है। क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

May Bank Holidays India | 12 Days Closure 2026

May Bank Holidays India | 12 Days Closure 2026

नई दिल्ली8 मिनट पहले कॉपी लिंक अगले महीने यानी मई में देश के अलग-अलग राज्यों में कुल 12 दिन बैंकों में कामकाज नहीं होगा। RBI की ओर से जारी कैलेंडर के अनुसार, अगले महीने 5 रविवार और दूसरे-चौथे शनिवार के अलावा 5 दिन अलग-अलग जगहों पर बैंक बंद रहेंगे। महीने की शुरुआत यानी 1 मई को छुट्‌टी से होगी। महाराष्ट्र दिवस, बुद्ध पूर्णिमा और मजदूर दिवस (लेबर डे) पर देश में लगभग सभी जगह बैंक के कारण बंद रहेंगे। यहां देखें मई 2026 में आपके राज्य या लोकेशन में बैंक कब-कब बंद रहेंगे… ये है मई की बैंक हॉलिडे लिस्ट तारीख बंद रहने का कारण कहां बंद रहेंगे 1 मई महाराष्ट्र दिवस, बुद्ध पूर्णिमा और मजदूर दिवस सभी जगह 3 मई रविवार सभी जगह 9 मई दूसरा शनिवार सभी जगह 10 मई रविवार सभी जगह 16 मई सिक्किम राज्य स्थापना दिवस सिक्किम 17 मई रविवार सभी जगह 23 मई चौथा शनिवार सभी जगह 24 मई रविवार सभी जगह 26 मई काजी नजरुल इस्लाम जयंती त्रिपुरा 27 मई ईद-उल-अजहा (बकरीद) / ईद-उज-जुहा सभी जगह 28 मई बकरीद/ ईद-उज-जुहा बेलापुर, बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर, जम्मू, मुंबई, नागपुर, पणजी, पटना और श्रीनगर 31 मई रविवार सभी जगह ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए निपटा सकेंगे काम आप बैंकों की छुट्टी के बावजूद ऑनलाइन बैंकिंग और ATM के जरिए पैसे का लेनदेन या अन्य काम कर सकते हैं। इन सुविधाओं पर बैंकों की छुट्टियों का कोई असर नहीं पड़ेगा। मई में शेयर बाजार में 12 दिन कारोबार नहीं मई 2026 में शेयर बाजार में 12 दिन कारोबार नहीं होगा। इसमें 10 दिन शनिवार और रविवार को कारोबार नहीं होगा। इसके अलावा शेयर बाजार 1 मई को महाराष्ट्र दिवस और 28 मई को बकरीद पर भी बंद रहेगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Hindu Nation, Ayodhya Ram Mandir Public Support

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Hindi News National RSS Chief Bhagwat: India Hindu Nation, Ayodhya Ram Mandir Public Support नागपुर13 मिनट पहले कॉपी लिंक भागवत ने डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के कार्यक्रम में संबोधन दिया। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र है। इसे घोषित करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सत्ता में बैठे लोगों की प्रतिबद्धता और देशभर के लोगों के समर्थन से हुआ। भागवत सोमवार को महाराष्ट्र के नागपुर के रेशिमबाग में डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम उन लोगों के सम्मान में था, जिनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में राम मंदिर का निर्माण हुआ। सम्मान समारोह के 2 फोटो: अयोध्या मंदिर के लिए मूर्ति बनाने वाले कलाकार अरुण योगीराज का सम्मान किया गया। स्वामी गोविंद गिरी का भी सम्मान किया गया। सूरज पूर्व में उगता है, क्या इसे घोषित करने की जरूरत है उन्होंने कहा कि अगर इतना बड़ा रामजन्मभूमि आंदोलन नहीं होता और सत्ता में प्रतिबद्धता नहीं होती, तो मंदिर का निर्माण संभव नहीं था। देश ने एक रास्ता चुना और उसी का नतीजा आज सामने है। भागवत ने कहा कि हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र कहने पर पहले लोग मजाक उड़ाते थे। लेकिन अब वही लोग इसे हिंदुओं की भूमि कहने लगे हैं। उन्होंने कहा, सूरज पूर्व में उगता है, क्या इसे घोषित करने की जरूरत है? उसी तरह भारत हिंदू राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह उन लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का तरीका है, जिन्होंने मंदिर निर्माण में योगदान दिया। अब समाज की जिम्मेदारी है कि वह देश को और मजबूत और समृद्ध बनाए। अंत में उन्होंने कहा कि भारत का उत्थान भारत के लोगों के प्रयास से ही होगा। कोई दूसरा देश भारत को नहीं बचाएगा। उन्होंने कहा कि भारत महान बनेगा और दुनिया को दिशा देगा, यह तय है। मंदिर बनाने में देश के हर व्यक्ति का सहयोग RSS के बयान के अनुसार भागवत ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण भगवान राम की इच्छा से हुआ। उन्होंने इसकी तुलना भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने से की। उन्होंने कहा कि जैसे गोवर्धन उठाने में सबका योगदान जरूरी था, वैसे ही मंदिर निर्माण में भी हर व्यक्ति का योगदान रहा। उन्होंने कहा, भगवान की उंगली पर पर्वत टिका रहता है, लेकिन वह उंगली तब तक नहीं उठती जब तक लोग अपनी लकड़ी नहीं लगाते। मंदिर भी उसी तरह बना है। उन्होंने कहा कि देश के हर व्यक्ति ने इसमें योगदान दिया। 1947 में आजादी पाई, लेकिन आत्मविश्वास नहीं था सनातन धर्म के पुनरुत्थान के लिए भारत का उत्थान जरूरी है। यह विचार 150 साल पहले योगी अरविंद ने रखा था। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे लोग योगदान देते हैं, यह संकल्प पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ता है। यह पुनरुत्थान की प्रक्रिया 1857 से शुरू हुई थी। इसी संदर्भ में उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार के शपथ लेने पर लंदन के द गार्डियन अखबार ने लिखा था कि इस दिन भारत ने आखिरकार अंग्रेजों को अलविदा कह दिया। भागवत ने कहा, “तकनीकी रूप से हमने 15 अगस्त 1947 को आजादी पाई, लेकिन तब पूरी तरह आत्मविश्वास नहीं था।” उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सत्ता में बैठे लोग प्रतिबद्ध नहीं होते, तो क्या राम मंदिर बन पाता। —————————————— ये खबर भी पढ़ें: भागवत बोले- भारत विश्वगुरु जरूर बनेगा, कोई संदेह नहीं:राम मंदिर बनने को लेकर भी लोग शक करते थे, वैसे ही यह लक्ष्य भी अब तय है राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा और इस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय था, जब लोग अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को लेकर संशय में रहते थे। इसे असंभव मानते थे। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

India Hindu Nation, Ayodhya Ram Mandir Public Support

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Hindi News National RSS Chief Bhagwat: India Hindu Nation, Ayodhya Ram Mandir Public Support नागपुर45 मिनट पहले कॉपी लिंक भागवत ने डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के कार्यक्रम में संबोधन दिया। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र है। इसे घोषित करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सत्ता में बैठे लोगों की प्रतिबद्धता और देशभर के लोगों के समर्थन से हुआ। भागवत सोमवार को महाराष्ट्र के नागपुर के रेशिमबाग में डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम उन लोगों के सम्मान में था, जिनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में राम मंदिर का निर्माण हुआ। सम्मान समारोह के 2 फोटो: अयोध्या मंदिर के लिए मूर्ति बनाने वाले कलाकार अरुण योगीराज का सम्मान किया गया। स्वामी गोविंद गिरी का भी सम्मान किया गया। सूरज पूर्व में उगता है, क्या इसे घोषित करने की जरूरत है उन्होंने कहा कि अगर इतना बड़ा रामजन्मभूमि आंदोलन नहीं होता और सत्ता में प्रतिबद्धता नहीं होती, तो मंदिर का निर्माण संभव नहीं था। देश ने एक रास्ता चुना और उसी का नतीजा आज सामने है। भागवत ने कहा कि हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र कहने पर पहले लोग मजाक उड़ाते थे। लेकिन अब वही लोग इसे हिंदुओं की भूमि कहने लगे हैं। उन्होंने कहा, सूरज पूर्व में उगता है, क्या इसे घोषित करने की जरूरत है? उसी तरह भारत हिंदू राष्ट्र है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान समारोह उन लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का तरीका है, जिन्होंने मंदिर निर्माण में योगदान दिया। अब समाज की जिम्मेदारी है कि वह देश को और मजबूत और समृद्ध बनाए। अंत में उन्होंने कहा कि भारत का उत्थान भारत के लोगों के प्रयास से ही होगा। कोई दूसरा देश भारत को नहीं बचाएगा। उन्होंने कहा कि भारत महान बनेगा और दुनिया को दिशा देगा, यह तय है। मंदिर बनाने में देश के हर व्यक्ति का सहयोग RSS के बयान के अनुसार भागवत ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण भगवान राम की इच्छा से हुआ। उन्होंने इसकी तुलना भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने से की। उन्होंने कहा कि जैसे गोवर्धन उठाने में सबका योगदान जरूरी था, वैसे ही मंदिर निर्माण में भी हर व्यक्ति का योगदान रहा। उन्होंने कहा, भगवान की उंगली पर पर्वत टिका रहता है, लेकिन वह उंगली तब तक नहीं उठती जब तक लोग अपनी लकड़ी नहीं लगाते। मंदिर भी उसी तरह बना है। उन्होंने कहा कि देश के हर व्यक्ति ने इसमें योगदान दिया। 1947 में आजादी पाई, लेकिन आत्मविश्वास नहीं था सनातन धर्म के पुनरुत्थान के लिए भारत का उत्थान जरूरी है। यह विचार 150 साल पहले योगी अरविंद ने रखा था। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे लोग योगदान देते हैं, यह संकल्प पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ता है। यह पुनरुत्थान की प्रक्रिया 1857 से शुरू हुई थी। इसी संदर्भ में उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार के शपथ लेने पर लंदन के द गार्डियन अखबार ने लिखा था कि इस दिन भारत ने आखिरकार अंग्रेजों को अलविदा कह दिया। भागवत ने कहा, “तकनीकी रूप से हमने 15 अगस्त 1947 को आजादी पाई, लेकिन तब पूरी तरह आत्मविश्वास नहीं था।” उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सत्ता में बैठे लोग प्रतिबद्ध नहीं होते, तो क्या राम मंदिर बन पाता। —————————————— ये खबर भी पढ़ें: भागवत बोले- भारत विश्वगुरु जरूर बनेगा, कोई संदेह नहीं:राम मंदिर बनने को लेकर भी लोग शक करते थे, वैसे ही यह लक्ष्य भी अब तय है राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु बनेगा और इस पर किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक समय था, जब लोग अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण को लेकर संशय में रहते थे। इसे असंभव मानते थे। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…