Air India Appoints Tevolde Gebremariam As New CEO

Hindi News Business Air India Appoints Tevolde Gebremariam As New CEO | Campbell Wilson Exit 6 मिनट पहले कॉपी लिंक एयर इंडिया ने टेवोल्डे गेब्रेमैरियम को अपना नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर यानी MD यानी नियुक्त किया है। यह फैसला पूर्व सीईओ कैंपबेल विल्सन के इस्तीफे और एयरलाइन के घाटे से उबरने की धीमी रफ्तार के बीच लिया गया है। कैंपबेल विल्सन ने जुलाई 2022 में एयर इंडिया की कमान संभाली थी। घाटे और कंपनी के सुधार में हो रही देरी के बीच उन्होंने अपने पद से 2024 में इस्तीफा दे दिया था, जिसे बोर्ड ने स्वीकार कर लिया था। विल्सन नए उत्तराधिकारी की नियुक्ति तक नोटिस पीरियड के दौरान अपने पद पर बने रहे। अफ्रीकी एविएशन इंडस्ट्री के बड़े चेहरों में गिने जाते हैं टेवोल्डे टेवोल्डे गेब्रेमैरियम एक इथियोपियन बिजनेस एग्जीक्यूटिव हैं और उन्हें अफ्रीका के सबसे सफल एविएशन लीडर्स में से एक माना जाता है। उन्होंने 2011 से 2022 तक इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप के ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के रूप में काम किया। टेवोल्डे गेब्रेमैरियम ने 2011 से 2022 तक इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप के ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के रूप में काम किया। 11 साल के कार्यकाल में 4 गुना किया एयरक्रॉफ्ट फ्लीट टेवोल्डे के 11 साल के कार्यकाल के दौरान इथियोपियन एयरलाइंस ने तेजी से विस्तार किया और अफ्रीका की सबसे बड़ी एयरलाइन बन गई: विमानों की संख्या बढ़ाना: एयरलाइन का बेड़ा 33 एयरक्राफ्ट से बढ़कर 130 एयरक्राफ्ट हो गया। यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी: कोविड-19 महामारी से पहले सालाना यात्रियों की संख्या 30 लाख से बढ़कर 1.2 करोड़ तक पहुंच गई। रेवेन्यू में बंपर उछाल: उनके नेतृत्व में एयरलाइन का सालाना रेवेन्यू लगभग 1 अरब डॉलर से बढ़कर 4.5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹37,500 करोड़ हो गया। महामारी में बिना सरकारी मदद के एयरलाइन को फायदे में रखा कोविड-19 महामारी के दौरान जब दुनिया भर की विमानन कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर थीं और सरकारी वित्तीय पैकेज पर निर्भर थीं, तब टेवोल्डे ने कार्गो यानी माल ढुलाई ऑपरेशन्स का तेजी से विस्तार किया। इसके दम पर उन्होंने इथियोपियन एयरलाइंस को बिना किसी सरकारी बेलआउट पैकेज के मुनाफे में बनाए रखा। मार्च 2022 में, लगभग एक साल से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझने के कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब वह एयर इंडिया की कमान संभालकर टाटा ग्रुप के एविएशन बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास करेंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Air India Appoints Tevolde Gebremariam As New CEO

Hindi News Business Air India Appoints Tevolde Gebremariam As New CEO | Campbell Wilson Exit 38 मिनट पहले कॉपी लिंक एयर इंडिया ने टेवोल्डे गेब्रेमैरियम को अपना नया चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यानी CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर यानी MD यानी नियुक्त किया है। यह फैसला पूर्व सीईओ कैंपबेल विल्सन के इस्तीफे और एयरलाइन के घाटे से उबरने की धीमी रफ्तार के बीच लिया गया है। कैंपबेल विल्सन ने जुलाई 2022 में एयर इंडिया की कमान संभाली थी। घाटे और कंपनी के सुधार में हो रही देरी के बीच उन्होंने अपने पद से 2024 में इस्तीफा दे दिया था, जिसे बोर्ड ने स्वीकार कर लिया था। विल्सन नए उत्तराधिकारी की नियुक्ति तक नोटिस पीरियड के दौरान अपने पद पर बने रहे। विल्सन नए उत्तराधिकारी की नियुक्ति तक नोटिस पीरियड के दौरान अपने पद पर बने रहे। अफ्रीकी एविएशन इंडस्ट्री के बड़े चेहरों में गिने जाते हैं टेवोल्डे टेवोल्डे गेब्रेमैरियम एक इथियोपियन बिजनेस एग्जीक्यूटिव हैं और उन्हें अफ्रीका के सबसे सफल एविएशन लीडर्स में से एक माना जाता है। उन्होंने 2011 से 2022 तक इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप के ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के रूप में काम किया। टेवोल्डे गेब्रेमैरियम ने 2011 से 2022 तक इथियोपियन एयरलाइंस ग्रुप के ग्रुप चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के रूप में काम किया। 11 साल के कार्यकाल में 4 गुना किया एयरक्रॉफ्ट फ्लीट टेवोल्डे के 11 साल के कार्यकाल के दौरान इथियोपियन एयरलाइंस ने तेजी से विस्तार किया और अफ्रीका की सबसे बड़ी एयरलाइन बन गई: विमानों की संख्या बढ़ाना: एयरलाइन का बेड़ा 33 एयरक्राफ्ट से बढ़कर 130 एयरक्राफ्ट हो गया। यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी: कोविड-19 महामारी से पहले सालाना यात्रियों की संख्या 30 लाख से बढ़कर 1.2 करोड़ तक पहुंच गई। रेवेन्यू में बंपर उछाल: उनके नेतृत्व में एयरलाइन का सालाना रेवेन्यू लगभग 1 अरब डॉलर से बढ़कर 4.5 अरब डॉलर यानी लगभग ₹37,500 करोड़ हो गया। महामारी में बिना सरकारी मदद के एयरलाइन को फायदे में रखा कोविड-19 महामारी के दौरान जब दुनिया भर की विमानन कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर थीं और सरकारी वित्तीय पैकेज पर निर्भर थीं, तब टेवोल्डे ने कार्गो यानी माल ढुलाई ऑपरेशन्स का तेजी से विस्तार किया। इसके दम पर उन्होंने इथियोपियन एयरलाइंस को बिना किसी सरकारी बेलआउट पैकेज के मुनाफे में बनाए रखा। मार्च 2022 में, लगभग एक साल से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझने के कारण उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब वह एयर इंडिया की कमान संभालकर टाटा ग्रुप के एविएशन बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास करेंगे। चेयरमैन एन चंद्रशेखरन बोले- एयरलाइन अहम दौर में प्रवेश कर रही टाटा संस और एयर इंडिया के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि कैंपबेल के मार्गदर्शन में एयरलाइन ने शुरुआती दौर की स्थिरता, एकीकरण और नए विमानों फ्लीट के सौदों को पूरा करने का काम संभाल लिया है। अब एयरलाइन एक बेहद अहम दौर में प्रवेश कर रही है, जहां योजनाओं को जमीन पर उतारने और विस्तार करने पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा आगे कहा कि बोर्ड की तरफ से, मुझे एयर इंडिया में टेवोल्डे का स्वागत करते हुए बेहद खुशी हो रही है। कैंपबेल के मार्गदर्शन में स्थिरता, एकीकरण और नए विमानों की प्रतिबद्धताओं का पहला चरण पूरा करने के बाद, एयर इंडिया अब काम को तेजी से लागू करने और विस्तार के एक बेहद महत्वपूर्ण दौर में कदम रख रही है। टाटा संस और एयर इंडिया के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा कि एयर इंडिया अब काम को तेजी से लागू करने और विस्तार के एक बेहद महत्वपूर्ण दौर में कदम रख रही है। एअर इंडिया के लिए आगे क्या चुनौतियां हैं? नए CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुरानी पड़ चुकी फ्लीट यानी पुराने विमानों को सुधारना और एयरलाइन के वर्क कल्चर को टाटा के मानकों के अनुरूप ढालना होगा। एअर इंडिया फिलहाल इंडिगो के साथ मार्केट शेयर की जंग लड़ रही है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय रूट पर एमिरेट्स और कतर एयरवेज जैसे बड़े खिलाड़ियों से मुकाबला करने के लिए सर्विस क्वालिटी में सुधार की जरूरत है। 2026 में एअर इंडिया को करीब 20,000 करोड़ नुकसान की आशंका भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी एअर इंडिया इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में एयरलाइन को लगभग ₹20,000 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है। नुकसान का सबसे बड़ा कारण वेस्ट में जारी तनाव है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण एयरस्पेस प्रतिबंध लगे हैं, जिससे एयरलाइन को फ्लाइट्स के रूट बदलने और अतिरिक्त फ्यूल स्टॉप लेने पड़ रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा असर लॉन्ग-हॉल इंटरनेशनल रूट्स पर पड़ा है और ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ गई है। इसके साथ ही, नए विमानों की डिलीवरी में देरी से एयरलाइन की क्षमता बढ़ाने की योजना प्रभावित हो रही है, जिससे ऑपरेशंस पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा एअर इंडिया अभी भी पिछले साल हुए प्लेन क्रैश के असर से जूझ रही है। अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI 171 टेक-ऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी, जिसमें 260 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना का असर अब भी एयरलाइन की पब्लिक इमेज और ऑपरेशनल माहौल पर दिख रहा है। इन चुनौतियों के बीच कंपनी रीस्ट्रक्चरिंग और विस्तार योजनाओं पर काम जारी रखे हुए है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
RBI Plastic Notes Launch | India Currency Update Sanjay Malhotra Statement

Hindi News Business RBI Plastic Notes Launch | India Currency Update Sanjay Malhotra Statement 57 मिनट पहले कॉपी लिंक RBI अगले वित्तीय वर्ष यानी 2027-28 की शुरुआत से देश में लंबे समय तक चलने वाले पॉलिमर यानी प्लास्टिक के नोट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी, यानी MPC की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज 5 अगस्त को बताया कि शुरुआत में पॉलिमर नोट छोटे मूल्य यानी कम वैल्यू के करेंसी नोट जारी किए जाएंगे। इनका मार्केट में सर्कुलेशन और इस्तेमाल सबसे ज्यादा होता है। 30 साल तक चलते है पॉलिमर नोट प्रेस ब्रीफिंग के दौरान गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि दुनिया के कई देशों जैसे ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में पॉलिमर करेंसी नोट 30 साल से भी अधिक समय तक सफलतापूर्वक उपयोग में रहे हैं। भारत में कागजी नोट, विशेषकर ₹10, ₹20 और ₹50 के छोटे नोट, बहुत जल्द गंदे हो जाते हैं या फटने लगते हैं। पॉलिमर नोट आने से नोटों की उम्र बढ़ेगी, पानी या नमी से ये खराब नहीं होंगे और बार-बार नए नोट छापने का सरकारी खर्च भी कम होगा। सवाल-जवाब में जानें इस खबर से जुड़ी जरूरी बातें… सवाल 1: पॉलीमर नोट क्या होते हैं और सरकार इन्हें क्यों ला रही? जवाब: पॉलीमर बैंकनोट्स कागज के बजाय एक खास किस्म के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सबस्ट्रेट पर छापे जाते हैं। ये छूने में तो सामान्य नोटों जैसे ही हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने पर भी नहीं गलते और लंबे समय तक चलते हैं। इन्हें लाने की मुख्य वजहें- लंबी उम्र: ये नोट पानी, धूल और गंदगी से खराब नहीं होते और आसानी से फटते भी नहीं हैं। नकली नोटों पर लगाम: पॉलीमर शीट पर एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स आसानी से जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। छपाई खर्च में बचत: कागजी नोट जल्दी खराब होते हैं, जिससे छपाई का खर्च बढ़ता है। FY25 में आरबीआई ने कागजी नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च किए थे। पॉलीमर नोट लंबे चलेंगे, जिससे बार-बार छापने का खर्च घटेगा। सवाल 2: क्या पुरानेकागजी नोट बंद हो जाएंगे? जवाब: बिल्कुल नहीं। सरकार और आरबीआई ने पूरी तरह साफ किया है कि पॉलीमर नोट आने से पुराने कागजी नोट चलन से बाहर नहीं होंगे। को-एग्जिस्टेंस: बाजार में पॉलीमर और पेपर दोनों ही तरह के नोट एक साथ चलते रहेंगे। फेज में बदलाव: यह बदलाव धीरे-धीरे और फेज मैनर यानी अलग-अलग चरण में किया जाएगा। सर्कुलेशन जारी रहेगा: जब तक नए नोट पूरी तरह स्थापित नहीं होते, तब तक कागजी नोट सर्कुलेशन में बने रहेंगे। सवाल 3: पॉलीमर नोट का प्रस्ताव कब आया था? जवाब: भारत ने 2012 में पहली बार नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोट लाने का प्रयास किया था, लेकिन तकनीकी वजहों से प्रोजेक्ट रुक गया था। मई-जून : मीडिया रिपोर्ट्स और आरबीआई की रिपोर्ट में शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोटों पर विचार की बात आई। जून में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पुष्टि की कि पॉलीमर नोटों का प्रस्ताव विचाराधीन है और इसके नफा-नुकसान का वैल्यूएशन किया जा रहा है। सवाल 4: दुनिया के किन देशों में प्लास्टिक नोट चलते हैं? दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलीमर बैंकनोट्स चलन में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे देश शामिल हैं। सवाल 5: भारत में कब-कब नोट बदले गए? आजादी से लेकर अब तक भारत में बड़े पैमाने पर 3 बार नोटबंदी या बड़े मूल्य के नोटों को बंद करने का फैसला लिया गया है… 1. पहली बार – जनवरी 1946 (ब्रिटिश काल/आजादी से ठीक पहले): क्या हुआ: तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने ₹500, ₹1000 और ₹10,000 के बड़े नोटों को बंद कर दिया था। मकसद: काले धन और युद्ध के दौरान हुई अवैध कमाई को बाहर निकालना। बाद में: 1954 में सरकार ने ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के नोट फिर से शुरू किए थे। 2. दूसरी बार – जनवरी 1978 (मोरारजी देसाई सरकार): क्या हुआ: जनता पार्टी की सरकार ने ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के बड़े नोटों को बंद कर दिया। मकसद: चुनाव में होने वाले काले धन के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार को रोकना। 3. तीसरी बार – 8 नवंबर 2016 (नरेंद्र मोदी सरकार): क्या हुआ: रात 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने देश में चल रहे ₹500 और ₹1,000 के नोटों को रातों-रात अमान्य घोषित कर दिया। बदलाव: इनकी जगह ₹500 का नया नोट और पहली बार ₹2,000 का नया नोट जारी किया गया। ₹2000 के नोट की वापसी (मई 2023): 19 मई 2023 को RBI ने ‘क्लीन नोट पॉलिसी’ के तहत ₹2,000 के नोट को चलन (सर्कुलेशन) से वापस लेने का ऐलान किया। हालांकि इसे नोटबंदी नहीं कहा गया क्योंकि इसे बैंक में जमा करने या बदलने का समय दिया गया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
शेख हसीना 2 साल बाद आज नजर आएंगी:दिल्ली में भाषण, भारत का रोक लगाने से इनकार, बांग्लादेश बोला- पड़ोसी से रिश्ते बिगाड़ना नहीं चाहते

बांग्लादेश ने कहा है कि वह भारत के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहता और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है। दरअअसल, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ऐलान किया है कि वे 5 अगस्त को एक कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करेंगी। हसीना के देश छोड़ने के बाद 2 साल में यह पहली बार शेख हसीना किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में वर्चुअल भाषण देतीं नजर आएंगी। बांग्लादेश ने इस पर रोक लगाने की मांग की थी लेकिन भारत ने मंगलवार को इससे इनकार कर दिया था। भारत ने कहा- इसके बाद बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि हमारे रिश्ते खराब हों या उन पर कोई असर पड़े। उम्मीद है कि भारत भी इसे समझेगा।” बांग्लादेश लौटने का ऐलान कर चुकी हैं शेख हसीना शेख हसीना का कार्यक्रम में दिल्ली में सर मार्क टली ऑडिटोरियम में होगा। इसका आयोजन फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब कर रहा है। फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA) नई दिल्ली स्थित पत्रकारों का संगठन है। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक चलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हसीना इस कार्यक्रम में बांग्लादेश लौटने की तारीख का ऐलान कर सकती हैं। उन्होंने पिछले महीने कहा था कि वे दिसंबर में अपने देश लौटेंगी। इस दौरान उनकी हत्या भी हो जाए तो उन्हें मंजूर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हसीना अपने भाषण में देश के लिए अपना विजन भी पेश कर सकती हैं। उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय भी कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इसके अलावा अवामी लीग के कई सीनियर नेता भी इसमें हिस्सा लेंगे। शेख हसीना ने 5 अगस्त का दिन ही क्यों चुना 5 अगस्त 2024 को ही छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। प्रदर्शनकारी उनके सरकारी आवास तक पहुंच गए थे। इसके बाद वह इस्तीफा देकर सेना के विमान से भारत आ गई थीं। यानी जिस दिन उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी, उसी दिन वह दो साल बाद फिर लोगों के सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि वह इसी दिन अपनी राजनीतिक वापसी का मैसेज देना चाहती हैं। हसीना के भाषण को लेकर बांग्लादेश में क्या चर्चा है? बांग्लादेश सरकार ने इस भाषण के प्रसारित होने पर हर तरह से पाबंदी लगा दी है। प्रिंट, टीवी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को चेतावनी दी गई कि शेख हसीना का भारत से होने वाला भाषण प्रसारित या प्रकाशित नहीं किया जाए क्योंकि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) के आदेश के तहत इस बयान के प्रसारण पर रोक है। इस पाबंदी के बाद से ही सबसे ज्यादा चर्चा में ये है कि क्या हसीना वापस या सकती हैं या नहीं? हालांकि, बांग्लादेशी मीडिया में इस बात पर चर्चा चल रही है कि हसीना की वापसी से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर क्या असर होने वाला है। बांग्लादेश के बड़े अखबार प्रोथोम आलो लिखता है, ‘भारत को बांग्लादेश से अपने द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर गंभीर नजर आना चाहिए। इस तरह की राजनीतिक गतिविधि से रिश्तों पर खराब असर हो सकता है।’ द डेली स्टार का संपादकीय भी इसी लाइन पर है कि भारत की धरती से इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां हाल ही में सुधरते रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इस अखबार ने बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के विरोध को भी जायज ठहराया है। उधर, बंगाली अखबार जुगांतर ने हसीना के वापस आने को लेकर विपक्षी पार्टियों के रुख को ज्यादा प्रमुखता से छापा है। सोशल मीडिया पर क्या चल रहा: बांग्लादेशी फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (X) पर इन हैश टैग के जरिए चर्चा हो रही है- #SheikhHasina #AwamiLeague #August5 #JulyUprising #IndiaBangladesh न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश की मीडिया और सोशल मीडिया में हसीना के भाषण को लेकर तीन तरह के नैरेटिव बने हुए हैं: 1. सरकार: हसीना ‘फरार अपराधी’ हैं, उन्हें कोई राजनीतिक मंच नहीं मिलना चाहिए। 2. छात्र आंदोलन से जुड़ी पार्टियां: हसीना की वापसी नहीं होनी चाहिए। हसीना लौट कर अदालत का सामना करें। 3. अवामी लीग समर्थक: हसीना ही राजनीतिक स्थिरता का विकल्प हैं और उनके बिना चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे।
Sheikh Hasina Delhi Speech | Bangladesh India Relations Statement

नई दिल्ली/ढाका4 मिनट पहले कॉपी लिंक शेख हसीना ने देश छोड़ने से एक दिन पहले 25 जुलाई 2024 को ढाका में प्रदर्शन के दौरान क्षतिग्रस्त हुए मेट्रो स्टेशन का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने मीडिया से आखिरी बार बातचीत की थी। बांग्लादेश ने कहा है कि वह भारत के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहता और दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध बनाए रखना चाहता है। दरअअसल, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने ऐलान किया है कि वे 5 अगस्त को एक कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करेंगी। हसीना के देश छोड़ने के बाद 2 साल में यह पहली बार शेख हसीना किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में वर्चुअल भाषण देतीं नजर आएंगी। बांग्लादेश ने इस पर रोक लगाने की मांग की थी लेकिन भारत ने मंगलवार को इससे इनकार कर दिया था। भारत ने कहा- इसके बाद बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हम भारत के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि हमारे रिश्ते खराब हों या उन पर कोई असर पड़े। उम्मीद है कि भारत भी इसे समझेगा।” बांग्लादेश लौटने का ऐलान कर चुकी हैं शेख हसीना शेख हसीना का कार्यक्रम में दिल्ली में सर मार्क टली ऑडिटोरियम में होगा। इसका आयोजन फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब कर रहा है। फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA) नई दिल्ली स्थित पत्रकारों का संगठन है। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक चलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हसीना इस कार्यक्रम में बांग्लादेश लौटने की तारीख का ऐलान कर सकती हैं। उन्होंने पिछले महीने कहा था कि वे दिसंबर में अपने देश लौटेंगी। इस दौरान उनकी हत्या भी हो जाए तो उन्हें मंजूर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक हसीना अपने भाषण में देश के लिए अपना विजन भी पेश कर सकती हैं। उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय भी कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इसके अलावा अवामी लीग के कई सीनियर नेता भी इसमें हिस्सा लेंगे। शेख हसीना की यह फुटेज हेलिकॉप्टर में बैठने से पहले की है। उन्होंने 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ा था। शेख हसीना ने 5 अगस्त का दिन ही क्यों चुना 5 अगस्त 2024 को ही छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। प्रदर्शनकारी उनके सरकारी आवास तक पहुंच गए थे। इसके बाद वह इस्तीफा देकर सेना के विमान से भारत आ गई थीं। यानी जिस दिन उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी, उसी दिन वह दो साल बाद फिर लोगों के सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि वह इसी दिन अपनी राजनीतिक वापसी का मैसेज देना चाहती हैं। हसीना के भाषण को लेकर बांग्लादेश में क्या चर्चा है? बांग्लादेश सरकार ने इस भाषण के प्रसारित होने पर हर तरह से पाबंदी लगा दी है। प्रिंट, टीवी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को चेतावनी दी गई कि शेख हसीना का भारत से होने वाला भाषण प्रसारित या प्रकाशित नहीं किया जाए क्योंकि अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) के आदेश के तहत इस बयान के प्रसारण पर रोक है। इस पाबंदी के बाद से ही सबसे ज्यादा चर्चा में ये है कि क्या हसीना वापस या सकती हैं या नहीं? हालांकि, बांग्लादेशी मीडिया में इस बात पर चर्चा चल रही है कि हसीना की वापसी से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों पर क्या असर होने वाला है। बांग्लादेश के बड़े अखबार प्रोथोम आलो लिखता है, ‘भारत को बांग्लादेश से अपने द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर गंभीर नजर आना चाहिए। इस तरह की राजनीतिक गतिविधि से रिश्तों पर खराब असर हो सकता है।’ द डेली स्टार का संपादकीय भी इसी लाइन पर है कि भारत की धरती से इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां हाल ही में सुधरते रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इस अखबार ने बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के विरोध को भी जायज ठहराया है। उधर, बंगाली अखबार जुगांतर ने हसीना के वापस आने को लेकर विपक्षी पार्टियों के रुख को ज्यादा प्रमुखता से छापा है। सोशल मीडिया पर क्या चल रहा: बांग्लादेशी फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (X) पर इन हैश टैग के जरिए चर्चा हो रही है- #SheikhHasina #AwamiLeague #August5 #JulyUprising #IndiaBangladesh न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश की मीडिया और सोशल मीडिया में हसीना के भाषण को लेकर तीन तरह के नैरेटिव बने हुए हैं: 1. सरकार: हसीना ‘फरार अपराधी’ हैं, उन्हें कोई राजनीतिक मंच नहीं मिलना चाहिए। 2. छात्र आंदोलन से जुड़ी पार्टियां: हसीना की वापसी नहीं होनी चाहिए। हसीना लौट कर अदालत का सामना करें। 3. अवामी लीग समर्थक: हसीना ही राजनीतिक स्थिरता का विकल्प हैं और उनके बिना चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे। ——————————- बांग्लादेश से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें.. बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया:कहा- बीमार हूं, कई बार बेहोश हो जाता हूं; दावा- शेख हसीना से बातचीत की जानकारी लीक हुई बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा संसद (जातीय संसद) के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद को सौंपा। राष्ट्रपति ने इस्तीफे की वजह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बताया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Vishvesh Negi New India Ambassador Iran

Hindi News Career Vishvesh Negi New India Ambassador Iran | Annapurni Subramanyam Medal 17 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. विश्वेश नेगी ईरान में भारत के नए राजदूत होंगे 3 अगस्त को विश्वेश नेगी ईरान में भारत के अगले राजदूत अपॉइंट हुए। विश्वेश 2002 बैच के इंडियन फॉरेंन ऑफिसर हैं और वे वर्तमान राजदूत डॉ. मोहम्मद फतह अली की जगह लेंगे वर्तमान में विश्वेश विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर काम कर रहे हैं। विश्वेश 2002-2022 तक विदेश मंत्रालय में द्विपक्षीय कूटनीतिक दायित्व निभाए और भारत के विदेश मिशनों में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। सितंबर 2022 में विश्वेश भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) जॉइंट सेक्रेटरी अपॉइंट हुए। भारत-ईरान संबंध ऊर्जा सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह, रीजनल कनेक्टिविटी, व्यापार और पश्चिम एशिया की रणनीतिक स्थिति के कारण महत्वपूर्ण हैं। 2023 में विश्वेश नेगी रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में कार्यभार संभाला और रक्षा कूटनीति तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मामलों को देखा। 2. FSSAI ने डाबर के ‘100% शुद्ध’ दावों पर प्रतिबंध लगाया 4 अगस्त को फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने डाबर इंडिया के प्रोडक्ट्स पर 100% शुद्धता के दावे पर रोक लगाई। अब डाबर शहद, घी और खाद्य तेलों जैसे उत्पादों पर 100% शुद्धता जैसा दावा नहीं लिख सकेगा। FSSAI के मुताबिक ये लेबल भ्रामक होते हैं और उपभोक्ताओं को गलत जानकारी दे सकते हैं। इस मामले में FSSAI ने डाबर से 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है और इस दावे को FSS विनियम 2018 का उल्लंघन करता है, जो इसके मानदंड बनाता है। इससे पहले 2024 में FSSAI ने सभी कंपनियों को फलों के जूस पर ‘100% फ्रूट जूस’ जैसे दावे हटाने का निर्देश दिया था। FSSAI के मुताबिक, ये दावे अस्पष्ट, असत्यापित और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं। डाबर इण्डिया लिमिटेड भारत में हेल्थ, पर्सनल ग्रूमिंग और फूड प्रोडक्ट कंपनी है। डाबर शहद, च्यवनप्राश और हाजमोला सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। FSSAI फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) भारत की खाद्य सुरक्षा और मानक तय करने वाली सर्वोच्च संस्था है। FSSAI तय करता है कि देश में बिकने वाले खाद्य पदार्थ सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हों। FSSAI की इसकी स्थापना 5 सितंबर 2008 को हुई थी। इसका हेडक्वाटर्र नई दिल्ली में है। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 3. डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को विक्रम साराभाई मेडल मिला 4 अगस्त को भारतीय खगोल वैज्ञानिक डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम को COSPAR विक्रम साराभाई मेडल 2026 से सम्मानित किया गया। डॉ. अन्नपूर्णी ये मेडल पाने वाली पहली भारतीय महिला वैज्ञानिक हैं। अब तक कुल 4 भारतीयों को ये मेडल मिला है। डॉ.अन्नपूर्णी को स्पेस रिसर्च में उनके योगदान के लिए इटली के फ्लोरेंस में आयोजित 46वीं COSPAR साइंटिफिक असेंबली के दौरान ये मेडल दिया गया। डॉ. अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम वर्तमान में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA), बेंगलुरु की डायरेक्टर हैं। इसके साथ ही डॉ.अन्नपूर्णी सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) की एडिशनल डायरेक्टर भी हैं। डॉ. अन्नपूर्णी तारों (स्टार्स), तारागुच्छों (स्टार क्लस्टर्स) और निकटवर्ती आकाशगंगाओं (गैलेक्सी) पर अपनी रिसर्च के लिए जानी जाती हैं। डॉ.अन्नपूर्णी ने भारत के पहले अंतरिक्ष आधारित वेधशाला मिशन ‘AstroSat’ में लगे अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (UVIT) के लिए कैलिब्रेशन वैज्ञानिक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। COSPAR विक्रम साराभाई मेडल ‘COSPAR विक्रम साराभाई मेडल’ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में विकासशील देशों के वैज्ञानिकों को उनके असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है। ये पुरस्कार ‘कमेटी ऑन स्पेस रिसर्च’ (COSPAR) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा संयुक्त रूप से दिया जाता है। इस मेडल की स्थापना वर्ष 1990 में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में की गई थी। डॉ. अन्नपूर्णी अंतरिक्ष और जमीनी दूरबीनों से जुड़े वैज्ञानिक उपकरणों के डेवलपमेंट और यूज में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 4. AIR चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की वियतमान यात्रा 5 अगस्त को एयर स्टाफ के प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह वियतनाम की तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर पूरी की। इस यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करना और सैन्य सहयोग को बढ़ाना है। एयर स्टाफ प्रमुख सिंह ने हनोई पहुंचकर भारत के राजदूत शेरिंग डब्ल्यू. शेरपा से मुलाकात की। सिंह ने इस यात्रा के दौरान एयर डिफेंस-एयर फोर्स सर्विस के कमांडर लेफ्टिनेंट-जनरल वू होंग सोन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। ये यात्रा भारत और वियतनाम की उस साझा प्रतिबद्धता को दिखाती है, जिसके तहत वे अपनी बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी को गहरा करना चाहते हैं। डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार के मुताबिक, भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सौदा भी किया है। दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और सहयोग बढ़ाने के नए तरीकों पर भी बात की। 5. ग्लाव झील भारत की 101वीं रामसर साइट बनीं 4 अगस्त को अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील रामसर साइट घोषित हुई। ये भारत की 101वीं साइट है। इसके साथ ही ये यह अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट भी बन गई है। इसकी घोषणा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। ग्लॉ झील कामलांग टाइगर रिजर्व और वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में मौजूद, ग्लॉ झील पूर्वी हिमालय में मीठे पानी की झील है और ये बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट है। इस झील में पहाड़ों से निकलने वाली बारहमासी जलधाराओं से पानी आता है और यह घनी हरियाली से घिरी हुई है। ग्लॉ झील वेटलैंड और इसके कैचमेंट एरिया में 150 से ज्यादा तरह के पेड़ और 49 तरह के ऑर्किड पाए गए हैं। यह आर्द्रभूमि जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों तथा स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। रामसर साइट रामसर साइट ऐसी इंटरनेशनल महत्व की आर्द्रभूमि होती है, जिसे 1971 के रामसर कन्वेंशन (ईरान) के तहत संरक्षण के लिए मान्यता दी जाती है। भारत 1 फरवरी 1982 से इस कन्वेंशन का सदस्य है। रामसर नाम ईरान के रामसर शहर से आया है, यहीं ये संधि हुई थी। इसमें शामिल होने वाले देश वेटलैंड्स को नॉमिनेट कर सकते हैं, जिन्हें रामसर साइटों के रूप में जाना जाता है।
Sheikh Hasina Media Event | India Statement On Bangladesh Request

नई दिल्ली2 मिनट पहले कॉपी लिंक शेख हसीना 11 जनवरी 2024 को पांचवीं बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद संबोधित करतीं हुईं। भारत सरकार ने कहा है कि 5 अगस्त को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के ऑनलाइन संबोधन से उसका कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, यह कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। इस मंच पर रखे जाने वाले किसी भी विचार का सरकार समर्थन भी नहीं करती। दरअसल, शेख हसीना ने ऐलान किया है कि वह 5 अगस्त को नई दिल्ली स्थित ‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA)’ के कार्यक्रम में वीडियो लिंक के जरिए शामिल होंगी। अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद यह पहली बार होगा, जब वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आएंगी। बांग्लादेश ने भारत से भाषण रोकने की अपील की थी फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA) नई दिल्ली स्थित पत्रकारों का एक पेशेवर संगठन है। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी। शेख हसीना इसी संगठन के कार्यक्रम में वीडियो लिंक के जरिए शामिल होंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक चलेगा। बांग्लादेश ने कल सोमवार को भारत से अपील की थी कि शेख हसीना या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े किसी भी व्यक्ति को भारत की जमीन से राजनीतिक भाषण देने या ऐसी गतिविधियां करने की अनुमति न दी जाए, जिससे बांग्लादेश में अस्थिरता फैल सकती हो। यह मुद्दा सोमवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर और ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की मुलाकात के दौरान भी उठाया गया था। शेख हसीना ने 5 अगस्त का दिन ही क्यों चुना 5 अगस्त 2024 को ही छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। प्रदर्शनकारी उनके सरकारी आवास तक पहुंच गए थे। इसके बाद वह इस्तीफा देकर सेना के विमान से भारत आ गई थीं। यानी, जिस दिन उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी, उसी दिन वह दो साल बाद फिर लोगों के सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि वह इसी दिन अपनी राजनीतिक वापसी का संदेश देना चाहती हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
India Government Summons Meta Global Team Over Content Control Issues

2 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक को गंभीर विषय बताते हुए एक वीडियो जारी किया था। इसे मेटा ने रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक हटा दिया था। भारत सरकार और मेटा की ग्लोबल टीम के बीच 5 और 6 अगस्त को एक अहम बैठक होने जा रही है। केंद्र सरकार ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा के प्रतिनिधियों को समन भेजकर तलब किया है। केंद्र सरकार इस बैठक में चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटीरियल यानी CSAM पर लगाम लगाने में हुई चूक, फर्जी/सिंथेटिक एआई कंटेंट और बड़े नेताओं के वेरिफाइड अकाउंट्स पर गलत कार्रवाई जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने मेटा द्वारा अब तक दिए गए जवाबों को नाकाफी माना है। पीएम मोदी की पोस्ट हटने के बाद बढ़ी सख्ती यह बैठक हाल ही में फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो पोस्ट के कुछ समय के लिए हट जाने के विवाद के बाद तय की गई है। इस घटना के बाद सरकार ने मेटा के प्लेटफॉर्म्स की कंटेंट मॉडरेशन नीतियों, ऑटोमेटेड सिस्टम और बिग-टेक कंपनियों की जवाबदेही पर निगरानी सख्त कर दी है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक मेटा ने पीएम मोदी के वीडियो के हटने पर खेद व्यक्त किया है और वह इसके लिए औपचारिक माफी मांगने को भी तैयार है। दरअसल, पीएम मोदी ने 23 जुलाई को पेपर लीक को गंभीर विषय बताते हुए एक वीडियो जारी किया था। इसे मेटा ने रात 12:30 बजे से सुबह 5:00 बजे तक हटा दिया था। लेकिन बाद में उसे रिस्टोर कर दिया गया। मेटा ने अपनी सफाई में कहा कि दरअसल, यह एक टेक्निकल एरर था। इंस्टाग्राम विज्ञापनों में CSAM का मुद्दा भी उठा मेटा केवल VIP पोस्ट हटाने के मामले में ही नहीं, बल्कि सुरक्षा संबंधी अन्य गंभीर मामलों में भी जांच के दायरे में है। इससे पहले इंस्टाग्राम पर पेड एड्स यानी प्रायोजित विज्ञापनों के जरिए चाइल्ड CSAM के प्रचार-प्रसार को लेकर सरकार ने मेटा को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। 5-6 अगस्त की बैठक में सरकार यह भी समीक्षा करेगी कि उस नोटिस के बाद कंपनी ने क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं। BBC रिपोर्ट- Meta पर यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट सस्ता मिल रहा BBC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं। BBC ने जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद BBC ने मेटा से इस मामले पर जवाब मांगा। तब कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया। Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती। भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध सवाल 1: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है? जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। सवाल 2: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है? जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना। सवाल 3: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है? जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं। सवाल 4: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें? जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। सवाल 5: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है? जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है। सवाल 6: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है? जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
WhatsApp Account Review Issue In India

7 मिनट पहले कॉपी लिंक इंस्टेंट मैसेजिंग एप वॉट्सएप ने भारत समेत कुछ अन्य देशों में कई यूजर्स के अकाउंट्स को 24 घंटे के लिए रिव्यू में डाल दिया है। इस दौरान एप के सभी फीचर्स को ब्लॉक कर दिया गया। इस दिक्कत के बाद प्रभावित यूजर्स ने सोशल मीडिया पर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं। मामले पर कंपनी के प्रवक्ता ने बयान जारी कर सफाई दी है। 8 सवालों के जवाब में पूरे मामले को समझें… सवाल 1. वॉट्सएप में अचानक क्या दिक्कत आई है और कौन-कौन प्रभावित हुआ है? जवाब: सोमवार को वॉट्सएप ने भारत सहित दुनिया भर के कई यूजर्स के अकाउंट्स को अचानक ‘अंडर रिव्यू’ श्रेणी में डाल दिया। अकाउंट के सभी मैसेजिंग और कॉलिंग फीचर्स ब्लॉक कर दिए गए। सवाल 2. यूजर्स की स्क्रीन पर किस तरह का मैसेज दिखाई दे रहा है? जवाब: जब प्रभावित यूजर्स ने एप खोला, तो स्क्रीन पर मैसेज लिखकर आया: “अकाउंट इन रिव्यू। डेट रिक्वेस्टेड: 3 अगस्त 2026। आपकी अकाउंट एक्टिविटी और डिवाइस इंफो की जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह हमारी सेवा की शर्तों का पालन करता है। सवाल 3. यह समस्या किस समय शुरू हुई और क्या यूजर्स को पूर्व सूचना दी गई थी? जवाब: यह समस्या भारतीय समयानुसार रात करीब 8 बजे सामने आई। मेटा ने यूजर्स को अकाउंट ब्लॉक करने या रिव्यू में डालने से पहले किसी भी तरह की वार्निंग या नोटिफिकेशन नहीं दिया था। सवाल 4. वॉट्सएप कंपनी ने इस पूरी घटना पर क्या सफाई दी है? जवाब: मामले पर वॉट्सएप के प्रवक्ता ने कहा, “हम अपनी सेवा का गलत इस्तेमाल करने वालों से आगे रहने के लिए हमेशा काम करते हैं और अन्य यूजर्स को सुरक्षित रखने के लिए अकाउंट्स को बैन करते हैं। हालांकि, कभी-कभी हमसे गलती भी हो जाती है और जब ऐसा होता है, तो हम लोगों को वापस चैटिंग पर लाने के लिए इसे जितनी जल्दी हो सके ठीक करने की कोशिश करते हैं।” सवाल 5. स्क्रीन पर मैसेज के अलावा एप में और क्या विकल्प दिए गए हैं? जवाब: ‘अकाउंट इन रिव्यू’ वाले मैसेज के ठीक नीचे वॉट्सएप ने दो विकल्प दिए हैं। पहला विकल्प “जिम्मेदारी से वॉट्सएप का उपयोग कैसे करें” (How to use WhatsApp responsibly) नाम से गाइडेंस देता है और दूसरा विकल्प “चोरी हुए फोन और अकाउंट के बारे में” (About stolen phone and accounts) जानकारी के लिए है। अकाउंट रिव्यू प्रोसेस स्टेप 1: अचानक स्क्रीन पर ‘Account in Review’ का मैसेज दिखना। स्टेप 2: 24 घंटे का टाइमर शुरू होना और मैसेजिंग फीचर्स का ब्लॉक होना। स्टेप 3: वॉट्सएप की ऑटोमेटेड जांच और यूजर्स द्वारा अपील का विकल्प। स्टेप 4: जांच के बाद अकाउंट रिस्टोर होना या स्थायी बैन लगना। सवाल 6. प्रभावित यूजर्स का सोशल मीडिया पर क्या कहना है? जवाब: बिना किसी कारण अकाउंट ब्लॉक होने से परेशान यूजर्स ने एक्स और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर अपना गुस्सा जताया। एक यूजर ने लिखा, “मेरा वॉट्सएप अकाउंट बिना किसी स्पष्टीकरण के डिसेबल कर दिया गया है। मैंने अपील सबमिट कर दी है, लेकिन स्क्रीन पर बस 24 घंटे का मैसेज दिख रहा है।” सवाल 7. क्या इस टेक्निकल इश्यू से लोगों के कामकाज पर भी असर पड़ा है? जवाब: हां, सलोनी नाम की एक एक्स यूजर ने पोस्ट किया, “मेरा वॉट्सएप बिना किसी चेतावनी के अचानक डिसेबल हो गया। मैं केवल ऑफिशियल एप का ही इस्तेमाल करती हूं और मेरा पूरा काम वॉट्सएप पर ही निर्भर है। यह बहुत बेवजह की परेशानी है।” सवाल 8. अगर आपका अकाउंट भी रिव्यू में चला जाए, तो आपको क्या करना चाहिए? जवाब: अगर आपकी स्क्रीन पर 24 घंटे का समीक्षा मैसेज दिख रहा है, तो आपको कंपनी की ओर से जांच पूरी होने का इंतजार करना होगा। इसके अलावा, आप स्क्रीन पर दिख रहे अपील बटन या वॉट्सएप सपोर्ट पेज पर जाकर अपना पक्ष दर्ज करा सकते हैं। यदि आपने नियमों का उल्लंघन नहीं किया है, तो अकाउंट 24 घंटे में खुद रिस्टोर हो जाएगा। नॉलेज पार्ट: ‘जानिए क्यों बैन या रिव्यू में जाते हैं अकाउंट्स?’ वॉट्सएप अपनी प्राइवेसी और सुरक्षा नीति (Terms of Service) के तहत संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल करता है। अकाउंट्स रिव्यू में जाने के मुख्य कारण: थर्ड-पार्टी एप्स (जैसे GB WhatsApp या WhatsApp Plus) का इस्तेमाल करना। एक साथ कई अज्ञात नंबरों पर बल्क मैसेज भेजना या स्पैमिंग करना। कई यूजर्स द्वारा आपके नंबर को रिपोर्ट (Report) या ब्लॉक (Block) किया जाना। रीडर्स के लिए टिप्स: हमेशा ऑफिशियल एप चुनें: गूगल प्ले स्टोर या एप्पल एप स्टोर से डाउनलोड किए गए आधिकारिक वॉट्सएप का ही इस्तेमाल करें। थर्ड-पार्टी एप्स से बचें: किसी भी क्लोन या मॉडिफाइड एप में अपना वॉट्सएप नंबर न चलाएं, इससे परमानेंट बैन लग सकता है। संयम रखें: अगर आपका अकाउंट बिना गलती के रिव्यू में गया है, तो 24 घंटे का समय दें; अकाउंट अपने आप शुरू हो जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
India Hikes Windfall Tax on Petrol Diesel and ATF Exports

Hindi News Business India Hikes Windfall Tax On Petrol Diesel And ATF Exports | Latest Update 4 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी की है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह नई दरें 3 अगस्त से प्रभावी हो गई हैं। सरकार हर पखवाड़े इन दरों की समीक्षा करती है। सरकार ने डीजल के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी यानी SAED को 15.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वहीं, एटीएफ (विमान ईंधन) के निर्यात पर ड्यूटी को 14.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल के निर्यात पर भी ड्यूटी बढ़ाई गई है, जो अब 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 3.5 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह दरें 16 जुलाई को तय की गई थीं। घरेलू खपत के लिए दरों में कोई बदलाव नहीं वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि देश के भीतर खपत के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा ड्यूटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच 27 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर यह टैक्स लगाना शुरू किया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात पर भी यह लेवी लागू कर दी गई थी। क्यों लगाया गया है यह टैक्स? विंडफॉल टैक्स लगाने का मुख्य मकसद देश में ईंधन की उपलब्धता को बढ़ाना है। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था। ऐसे में निर्यातक कीमतों के अंतर का फायदा न उठा सकें और घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔









