राजस्थान की देसी सुपरफूड राबड़ी, जो 45 डिग्री गर्मी में भी आपको रखेगी कूल और फिट, Video

X राजस्थान की देसी सुपरफूड राबड़ी, जो 45 डिग्री गर्मी में भी आपको रखेगी कूल Traditional Rabdi Recipe: बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान में ‘राबड़ी’ आधुनिक फास्ट फूड को कड़ी टक्कर दे रही है. बाजरा-ज्वार और छाछ से बनी यह राबड़ी भीषण गर्मी में शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पाचन में भी सहायक है. बुजुर्ग इसे एक ‘देसी सुपरफूड’ मानते हैं जो डायबिटीज और बीपी जैसी बीमारियों से बचाने में कारगर है. घंटों की मेहनत से तैयार होने वाली राबड़ी आज भी राजस्थान की संस्कृति और सेहत का आधार बनी हुई है. रेगिस्तानी इलाकों में जब तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच जाता है, तब राबड़ी शरीर को ठंडक पहुंचाने और लू के असर को कम करने में रामबाण का काम करती है. ग्रामीण अंचलों में ज्येष्ठ सुदी चतुर्थी को ‘राबड़ी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जहां परिवार के लोग एक साथ बैठकर इस पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
फेंकने से पहले जान लें आम की गुठली के फायदे, शुगर से लेकर मोटापे तक कंट्रोल करती है ये घरेलू औषधि

X फेंकने से पहले जान लें आम की गुठली के फायदे, शुगर से मोटापा तक करती है कंट्रोल Aam Ki Guthli Ke Fayde: आम का गूदा खाने के बाद फेंक दी जाने वाली गुठली सेहत के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है, जो ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और वजन घटाने जैसी कई समस्याओं में बेहद फायदेमंद साबित होती है. मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर के आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, इसका उपयोग करने के लिए गुठली को धूप में अच्छी तरह सुखाकर उसके अंदर का हिस्सा निकाल लें और फिर उसका पाउडर बनाकर या सीधे खाली पेट ताजे पानी के साथ सीमित मात्रा में सेवन करें. हालांकि, इसके बेहतरीन फायदों के बावजूद इसका जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए किसी गंभीर बीमारी या पहले से दवा चलने की स्थिति में व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य के हिसाब से इसकी सही खुराक तय करने के लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Health Tips: गर्मी में अमृत समान हरा पुदीना, पेट, त्वचा और शरीर को देता है ठंडक व ताजगी, जाने इसके फायदे

गर्मी के मौसम में हरा पुदीना शरीर को ठंडक देने, पेट की समस्याओं से राहत पहुंचाने और ताजगी बनाए रखने में बेहद फायदेमंद माना जाता है. चटनी, शरबत और घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल होने वाला पुदीना त्वचा, सिरदर्द और मुंह की बदबू जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है.
अर्जुन की छाल के फायदे I health benefits of arjun chhaal

Last Updated:May 21, 2026, 20:32 IST Benefits of Arjun Chaal: अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में पेट की गर्मी, गैस, एसिडिटी और सीने की जलन से राहत दिलाने वाला प्राकृतिक उपाय माना जाता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और पेट की सूजन कम करने में मददगार हो सकती है. हालांकि इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना चाहिए. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लोग आज भी कई बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक और पारंपरिक उपचार अपनाते हैं. अर्जुन की छाल भी इन्हीं घरेलू नुस्खों का अहम हिस्सा मानी जाती है. पुराने समय से पेट की गर्मी, गैस और सीने की जलन में इसका उपयोग किया जाता रहा है. पहाड़ों में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है. प्राकृतिक चीजों का सही तरीके से उपयोग स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है. हालांकि आधुनिक जीवनशैली और खानपान के कारण कई समस्याएं बढ़ रही हैं. ऐसे में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाना भी जरूरी माना जाता है. अर्जुन की छाल फायदेमंद जरूर मानी जाती है, लेकिन इसका सेवन सोच-समझकर करना चाहिए. हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और बीमारी अलग होती है, इसलिए बिना सलाह के किसी भी औषधि का अधिक उपयोग नुकसान पहुंचा सकता है. खासकर जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, जो नियमित दवाइयां लेते हैं. उन्हें डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. आयुर्वेदिक चीजों का सही मात्रा और सही तरीके से सेवन ही लाभ देता है. यदि पेट की जलन, गैस या एसिडिटी लगातार बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर जांच और सही उपचार जरूरी होता है. अर्जुन की छाल का सेवन कई तरीकों से किया जाता है. कुछ लोग इसका काढ़ा बनाकर पीते हैं, जबकि कई लोग इसका पाउडर गुनगुने पानी के साथ लेते हैं. सुबह खाली पेट या भोजन के बाद सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है. काढ़ा बनाने के लिए इसकी छाल को पानी में उबालकर तैयार किया जाता है. यह तरीका पारंपरिक रूप से काफी लोकप्रिय है. वहीं पाउडर रूप में इसका उपयोग करना भी आसान माना जाता है. हालांकि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है. सही मात्रा में सेवन करने पर इसके बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अर्जुन की छाल सिर्फ पेट की गर्मी कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी मददगार मानी जाती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व भोजन को पचाने की प्रक्रिया को बेहतर करते हैं. जिन लोगों को खाना खाने के बाद भारीपन या अपच की शिकायत रहती है, उन्हें इससे लाभ मिल सकता है. अर्जुन की छाल पेट और आंतों को शांत रखने का काम करती है. इससे पाचन धीरे-धीरे बेहतर हो सकता है. ग्रामीण इलाकों में लोग इसे घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं. हालांकि किसी भी आयुर्वेदिक चीज का अत्यधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है. कई लोगों को भोजन के बाद पेट फूलने और गैस बनने की समस्या रहती है. यह परेशानी गलत खानपान, तली-भुनी चीजों और कमजोर पाचन के कारण बढ़ सकती है. डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि अर्जुन की छाल पेट को संतुलित रखने में मदद करती है. इसमें ऐसे गुण मौजूद होते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं. अर्जुन की छाल का सेवन करने से गैस बनने की समस्या में राहत मिल सकती है. खासकर खट्टी डकार और पेट में भारीपन महसूस होने पर लोग इसका उपयोग करते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में कई परिवार आज भी घरेलू नुस्खे के रूप में इसका इस्तेमाल करते हैं. सही खानपान के साथ इसका सेवन अधिक लाभकारी माना जाता है. अर्जुन की छाल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं. पेट और आंतों में सूजन होने पर कई बार जलन, गैस और दर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में अर्जुन की छाल राहत देने का काम कर सकती है. आयुर्वेद में इसे प्राकृतिक औषधि के रूप में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. यह पेट को शांत रखने और एसिडिटी कम करने में मददगार साबित हो सकती है. इसके नियमित और संतुलित सेवन से पाचन तंत्र को लाभ मिल सकता है. हालांकि किसी गंभीर बीमारी में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता है. जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है. बागेश्वर समेत पहाड़ी इलाकों में आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है. इन्हीं में अर्जुन की छाल को बेहद उपयोगी माना जाता है. इसकी तासीर ठंडी होती है, जो शरीर और पेट की अतिरिक्त गर्मी को कम करने में मदद करती है. गर्मियों में कई लोगों को पेट में जलन, भारीपन और बेचैनी की समस्या रहती है. ऐसे में अर्जुन की छाल का सेवन राहत पहुंचा सकता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करते हैं. इसे पारंपरिक घरेलू उपचार के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. नियमित और सही मात्रा में सेवन करने पर पेट को आराम मिल सकता है. आजकल गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के कारण एसिडिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. कई लोग सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन से परेशान रहते हैं. आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को इन समस्याओं में लाभकारी माना गया है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो पेट की अंदरूनी सूजन को कम करने में मदद करते हैं. इससे एसिड बनने की समस्या नियंत्रित हो सकती है. अर्जुन की छाल का काढ़ा पीने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और सीने की जलन कम हो सकती है. इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. लंबे समय तक परेशानी रहने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
बाजार की मिठाई छोड़िए, गर्मियों में घर पर बनाइए हेल्दी सत्तू के लड्डू, सेहत के लिए टॉनिक से कम नहीं – News18 हिंदी

X गर्मियों में घर पर बनाइए हेल्दी सत्तू के लड्डू, सेहत के लिए टॉनिक से कम नहीं Sattu Laddu Recipe: गर्मी के मौसम में बघेलखंड का देसी सुपरफूड सत्तू एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है. खास बात यह है कि अब सत्तू का इस्तेमाल सिर्फ शरबत या परंपरागत व्यंजनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे हेल्दी और टेस्टी मीठे लड्डू भी तैयार किए जा रहे हैं. फिटनेस पसंद लोग और हेल्दी डाइट फॉलो करने वाले लोग इन लड्डुओं को खूब पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इनमें रिफाइंड शुगर या चाशनी का इस्तेमाल नहीं होता. सीधी निवासी प्रियंका सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि सत्तू के लड्डू बनाना बेहद आसान है और इसके लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत भी नहीं पड़ती. सबसे पहले सत्तू को हल्के देसी घी में भूनकर उसकी खुशबू और स्वाद बढ़ाया जाता है. फिर इसमें गुड़ या खजूर का पेस्ट मिलाकर प्राकृतिक मिठास दी जाती है, जिससे ये लड्डू स्वादिष्ट होने के साथ बेहद पौष्टिक भी बन जाते हैं. सत्तू में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और आयरन पाया जाता है, जो शरीर को ताकत देने के साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Khairthal Tijara Weather | खैरथल-तिजारा में लू का रेड अलर्ट

Last Updated:May 21, 2026, 05:50 IST Heatwave Alert: खैरथल-तिजारा जिले में पारा 45 डिग्री सेल्सियस पहुंचने से भीषण गर्मी का प्रकोप है. जिला कलेक्टर अतुल प्रकाश ने बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को सुबह 10 से शाम 6 बजे तक धूप से बचने की सलाह दी है. अस्पतालों में कूलर, ओआरएस और बेड आरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं. सीएमएचओ डॉ. अरविंद गेट ने सिरदर्द, चक्कर आना और पसीना बंद होने जैसे लू के लक्षणों के प्रति सचेत किया है. बचाव के लिए नींबू पानी, ओआरएस का उपयोग करने और पीड़ित को तुरंत प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल ले जाने की अपील की गई है. ख़बरें फटाफट खैरथल-तिजारा में लू का रेड अलर्ट, कलेक्टर की सख्त एडवायजरी Khairthal Tijara: राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप का कहर जारी है. दोपहर के समय तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. लोग इस झुलसाने वाली गर्मी से बचने के लिए तरह-तरह के जतन कर रहे हैं. बढ़ते तापमान और गंभीर होती स्थिति को देखते हुए जिला कलेक्टर अतुल प्रकाश ने आमजन से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. उन्होंने साफ कहा है कि इस मौसम में थोड़ी सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. जिला कलेक्टर अतुल प्रकाश ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने सभी सरकारी अस्पतालों में लू और तापघात (Heatstroke) के मरीजों के लिए गाइडलाइन के अनुसार बेड आरक्षित रखने को कहा है. इसके साथ ही मरीजों की सहूलियत के लिए वार्डों में कूलर और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं. अस्पतालों के आपातकालीन किट में ओआरएस (ORS), ड्रिपसेट, जीवनरक्षक फ्लूड और सभी आवश्यक दवाइयां चौबीसों घंटे उपलब्ध रखने की हिदायत दी गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके. सुबह 10 से शाम 6 बजे तक रहें सावधान, स्वास्थ्य विभाग की एडवायजरीखैरथल-तिजारा के सीएमएचओ डॉ. अरविंद गेट के अनुसार, कुपोषित बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और खुले में काम करने वाले श्रमिक लू की चपेट में सबसे जल्दी आते हैं. प्रशासन ने अपील की है कि दोपहर के समय जहां तक संभव हो, धूप में निकलने से बचें. यदि बाहर जाना बेहद जरूरी हो, तो सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक तेज धूप से बचते हुए छायादार या ठंडे स्थानों पर रहने का प्रयास करें. बाहर निकलते समय शरीर पूरी तरह सूती कपड़े से ढका होना चाहिए. इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, बढ़ सकता है खतराचिकित्सकीय दृष्टि से जब शरीर में लवण (साल्ट) और पानी की भारी कमी हो जाती है, तो इंसान लू का शिकार होता है. डॉ. अरविंद गेट ने इसके मुख्य लक्षण बताए हैं: सिर में भारीपन और तेज दर्द होना. अत्यधिक प्यास लगना, चक्कर आना, जी मिचलाना और शरीर का तापमान 105 डिग्री फारेनहाइट या उससे ऊपर पहुंच जाना. अचानक पसीना आना बंद हो जाना, चेहरा लाल पड़ना और त्वचा का पूरी तरह सूख जाना. गंभीर स्थिति में मरीज का बेहोश हो जाना. वैज्ञानिक रूप से, अत्यधिक गर्मी के कारण मस्तिष्क का वो हिस्सा काम करना बंद कर देता है जो शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है. इससे लाल रक्त कोशिकाएं टूटने लगती हैं और पोटेशियम लवण सीधे ब्लड सर्कुलेशन में आ जाता है, जो दिल की धड़कन को प्रभावित कर मरीज को मौत के मुंह में धकेल सकता है. लू और तापघात से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स क्या खाएं-पीएं: खाली पेट घर से बाहर बिल्कुल न निकलें. हमेशा भोजन करके और पानी पीकर ही बाहर जाएं. शरीर में पानी की कमी न होने दें. नींबू पानी, नारियल पानी, जूस और कच्चे आम का पना (कैरी का पना) लगातार पीते रहें. बासी भोजन और सड़े-गले फलों के सेवन से पूरी तरह दूर रहें. कैसे निकलें बाहर: धूप में निकलते समय गर्दन के पिछले हिस्से, कान और सिर को गमछे या तौलिये से अच्छी तरह ढक लें. धूप के चश्मे और छतरी का उपयोग जरूर करें. हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें. कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक (कोल्ड ड्रिंक्स) पीने से बचें. श्रमिकों के लिए व्यवस्था: अकाल राहत कार्यों या निर्माण स्थलों पर श्रमिकों के लिए पर्याप्त छाया और ठंडे पानी का प्रबंध किया जाए, ताकि वे थोड़ी-थोड़ी देर में विश्राम कर सकें. अगर किसी को लू लग जाए, तो तुरंत करें ये प्राथमिक उपचारयदि आपके आसपास कोई व्यक्ति लू की चपेट में आता है, तो बिना वक्त गंवाए उसे तुरंत किसी ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं. उसके कपड़े ढीले कर दें और हवा करें. मरीज को तुरंत ठंडा पानी, ओआरएस घोल या नींबू पानी पिलाएं. पानी या बर्फ की पट्टियों से उसके शरीर को ठंडा करने का प्रयास करें और इसके तुरंत बाद मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लेकर जाएं. About the Author vicky Rathore Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Alwar,Alwar,Rajasthan
Benefits Of Arandi: अरंडी का तेल के फायदे

Last Updated:May 20, 2026, 16:41 IST गांवों और खेतों के आसपास आसानी से दिखाई देने वाला अरंडी का पौधा आयुर्वेद में बेहद उपयोगी माना जाता है. इसके तेल, पत्तों और बीजों का इस्तेमाल वर्षों से घरेलू उपचारों में किया जा रहा है. शरीर दर्द, सूजन, कब्ज, त्वचा और बालों की देखभाल में अरंडी के फायदे लोगों के बीच आज भी काफी लोकप्रिय हैं. गांवों और खेतों के आसपास अक्सर दिखाई देने वाला अरंडी का पौधा देखने में भले ही साधारण लगता हो, लेकिन इसके गुण बेहद खास माने जाते हैं. आयुर्वेद में अरंडी को एक उपयोगी औषधीय पौधे के रूप में जाना जाता है. इसके पत्ते, बीज और तेल का इस्तेमाल वर्षों से घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग कई छोटी-बड़ी समस्याओं में अरंडी का उपयोग करते हैं। यही वजह है कि यह पौधा लोगों के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग लंबे समय से अरंडी के तेल का इस्तेमाल शरीर के दर्द में करते आ रहे हैं. माना जाता है कि यह तेल शरीर की मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद कर सकता है. कई लोग घुटनों, कमर और जोड़ों के दर्द में अरंडी के तेल की मालिश करते हैं. बुजुर्गों के बीच यह घरेलू उपाय काफी लोकप्रिय है. कुछ लोग इसे हल्का गर्म करके मालिश करते हैं, जिससे शरीर को राहत महसूस होती है. अरंडी के तेल में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं. यही कारण है कि कई लोग मोच या हल्की सूजन होने पर भी इसका उपयोग करते हैं. हालांकि किसी गंभीर बीमारी या लगातार दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. अरंडी के पत्ते भी काफी उपयोगी माने जाते हैं. गांवों में पुराने समय से लोग इसके पत्तों को गर्म करके दर्द वाले हिस्से पर बांधते रहे हैं. माना जाता है कि इससे दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है. कई महिलाएं पारंपरिक घरेलू उपायों में भी अरंडी के पत्तों का इस्तेमाल करती हैं. कुछ लोग सिरदर्द या शरीर दर्द में भी इसके पत्तों का उपयोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google पुराने समय से अरंडी के तेल का उपयोग कब्ज की समस्या में घरेलू उपाय के रूप में किया जाता रहा है. गांवों में लोग पेट साफ करने के लिए थोड़ी मात्रा में अरंडी के तेल का सेवन करते थे. माना जाता है कि इसमें ऐसे गुण पाए जाते हैं जो आंतों की सफाई करने और पेट को साफ रखने में मदद कर सकते हैं. खासकर जब किसी को लंबे समय तक कब्ज की शिकायत रहती थी, तब बुजुर्ग लोग अरंडी के तेल का इस्तेमाल करने की सलाह देते थे. सुषमा चतुर्वेदी का कहना है कि अरंडी के बीज सीधे खाने योग्य नहीं होते. इनमें कुछ जहरीले तत्व पाए जाते हैं, जो नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए इसका उपयोग हमेशा सावधानी और सही जानकारी के साथ करना चाहिए. बिना विशेषज्ञ सलाह के इसका सेवन करना खतरनाक साबित हो सकता है. आयुर्वेद में भी अरंडी का उपयोग सही मात्रा और सही तरीके से करने की सलाह दी जाती है. किसी भी बीमारी में घरेलू उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी माना जाता है. सुषमा चतुर्वेदी बताती है कि अरंडी का पौधा प्रकृति का एक अनमोल उपहार माना जाता है. यह स्वास्थ्य, घरेलू उपयोग और खेती तीनों क्षेत्रों में लोगों के काम आता है. गांवों में वर्षों से इसका इस्तेमाल होता आ रहा है और आज भी इसकी उपयोगिता बनी हुई है. आधुनिक समय में भी अरंडी के तेल और इसके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि यह साधारण दिखने वाला पौधा लोगों के लिए बेहद खास माना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग अरंडी के तेल का इस्तेमाल त्वचा को मुलायम रखने के लिए भी करते हैं. सर्दियों में फटी एड़ियों और सूखी त्वचा पर भी इसका उपयोग किया जाता है. माना जाता है कि यह त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है. हालांकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को किसी भी तेल या घरेलू उपाय का उपयोग करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए. अरंडी का तेल बालों के लिए भी काफी उपयोगी माना जाता है. कई लोग इसे बालों में लगाने से बाल मजबूत और चमकदार बने रहने की बात कहते हैं. बाजार में मिलने वाले कई हेयर ऑयल और ब्यूटी प्रोडक्ट में भी अरंडी के तेल का इस्तेमाल किया जाता है. यह बाल झड़ने की समस्या को कम करने में मदद कर सकता है. कुछ लोग इसे नारियल तेल या दूसरे तेलों में मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं. यही कारण है कि सौंदर्य उत्पादों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
घर में बनी ये हेल्थ ड्रिंक बन सकती है समर सीजन का सुपरफूड, शरीर में आएगी ठंडक और ताजगी; कई बीमारियों से राहत

Last Updated:May 20, 2026, 09:20 IST Desi summer drink: यह देसी ड्रिंक कोई महंगी चीज नहीं, बल्कि हर घर में आसानी से मिलने वाले नींबू, काला नमक और सेंधा नमक से तैयार होती है. मात्र 2 रुपए के नींबू से बनने वाला यह घरेलू पेय शरीर को तुरंत एनर्जी देने का काम करता है. लोग इसे गर्मी से राहत पाने के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं. आयुर्वेद विशेषज्ञ भी इसे बेहद असरदार और स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं. Desi summer drink: निमाड़ अंचल सहित खरगोन जिले में इन दिनों भीषण गर्मी का असर लगातार बढ़ता जा रहा है. तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच चुका है, जिससे लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है. तेज धूप, गर्म हवाएं और उमस भरे मौसम के कारण लोग लू, डिहाइड्रेशन, कमजोरी और थकान जैसी समस्याओं से परेशान हैं. खासकर दोपहर के समय घर से बाहर निकलना लोगों के लिए मुश्किल बनता जा रहा है. ऐसे हालात में लोग खुद को ठंडा और फिट रखने के लिए कई तरह के उपाय अपना रहे हैं. इसी बीच घर में तैयार होने वाली एक देसी ड्रिंक लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है. दरअसल, यह देसी ड्रिंक कोई महंगी चीज नहीं, बल्कि हर घर में आसानी से मिलने वाले नींबू, काला नमक और सेंधा नमक से तैयार होती है. मात्र 2 रुपए के नींबू से बनने वाला यह घरेलू पेय शरीर को तुरंत एनर्जी देने का काम करता है. लोग इसे गर्मी से राहत पाने के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं. आयुर्वेद विशेषज्ञ भी इसे बेहद असरदार और स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं. क्यों जरूरी है नींबू पानीखरगोन के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. संतोष मौर्य बताते हैं कि गर्मी के मौसम में शरीर से अत्यधिक पसीना निकलता है. इसके साथ ही शरीर से जरूरी मिनरल्स और इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते हैं. यही कारण है कि लोगों को कमजोरी, चक्कर आना और थकावट महसूस होती है. ऐसे में अगर साधारण नींबू पानी में थोड़ा सा काला नमक या सेंधा नमक मिला दिया जाए, तो यह शरीर के लिए एक नेचुरल एनर्जी ड्रिंक बन जाता है. उन्होंने बताया कि नींबू में विटामिन-सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. वहीं काला और सेंधा नमक शरीर में सोडियम, पोटेशियम और क्लोराइड जैसे जरूरी तत्वों की पूर्ति करते हैं. इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती और इंसान लंबे समय तक तरोताजा महसूस करता है. यही वजह है कि यह ड्रिंक इंस्टेंट एनर्जी देने का काम करती है. नींबू और काला नमक के फायदेविशेषज्ञों के अनुसार काला नमक पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करता है. इससे गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है. वहीं सेंधा नमक शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में भी सहायक माना जाता है. अगर रोजाना एक या दो गिलास नींबू पानी में सेंधा या काला नमक मिलाकर पिया जाए, तो हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है. About the Author Deepti Sharma Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Khargone,Madhya Pradesh
दिल, दिमाग और पाचन का रक्षक वचा पौधा, आयुर्वेद में इसे क्यों माना जाता है संपूर्ण स्वास्थ्य का चमत्कारी उपाय?

Last Updated:May 19, 2026, 15:45 IST वचा (वच) एक औषधीय आयुर्वेदिक पौधा माना जाता है, जो दिल, दिमाग और पाचन के लिए लाभकारी बताया गया है. यह रक्त संचार सुधारने, तनाव कम करने, मानसिक शांति देने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है. आयुर्वेद के अनुसार इसके सेवन से हृदय पर दबाव कम होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. हालांकि इसके उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, वचा पौधा शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है और दिल को मजबूत रखने में सहायक माना जाता है. इसके अलावा यह तनाव कम करने, दिमाग को शांत रखने और पाचन सुधारने में भी उपयोगी बताया गया है. तनाव कम होने से हृदय पर पड़ने वाला दबाव भी घटता है. आयुर्वेद में वचा (वच) पौधे को एक खास औषधीय पौधा माना गया है. इसे पारंपरिक रूप से हृदय से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी बताया जाता है. वाच का उपयोग प्राचीन समय से आयुर्वेदिक उपचार में किया जा रहा है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि इसके अलावा वचा पौधा पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है. आयुर्वेद में माना जाता है कि खराब पाचन कई बीमारियों की जड़ होता है. वाच गैस, अपच और पेट की अन्य समस्याओं को दूर करने में मदद करता है. जब पाचन सही रहता है, तो शरीर में पोषक तत्व अच्छी तरह से अवशोषित होते हैं, जिससे हृदय समेत पूरे शरीर को लाभ मिलता है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ. अभिषेक मिश्रा के अनुसार, वचा पौधा शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है. जब शरीर में खून का प्रवाह सही तरीके से होता है, तो हृदय पर दबाव कम पड़ता है और दिल स्वस्थ रहता है. वाच के सेवन से नसों में जमा गंदगी को हटाने में मदद मिलती है, जिससे हार्ट ब्लॉकेज जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है. यही कारण है कि आयुर्वेदाचार्य इसे दिल को मजबूत बनाने वाला पौधा मानते हैं. लोकल 18 से बातचीत के दौरान रामनाथ आरोग्यधाम के वैद्य (डॉ.) अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वचा (वच) के पौधे दिल और दिमाग के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. माना जाता है कि इसके पंचमूल का प्रयोग करके दिल से और दिमाग से संबंधित बीमारियों को दूर किया जा सकता है. वचा पौधे का एक बड़ा गुण यह भी है कि यह तनाव और मानसिक थकान को कम करने में सहायक होता है. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव दिल की बीमारियों का एक बड़ा कारण बन चुका है. वाच दिमाग को शांत रखने में मदद करता है और चिंता को कम करता है. जब मन शांत रहता है, तो इसका सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ता है. तनाव कम होने से हृदय पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी घट जाता है. डॉ. अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि इसके जड़ को सुखाकर पाउडर बनाकर इसका प्रयोग किया जा सकता है और इसके पांचों मूल का भी प्रयोग किया जाता है. इसका प्रयोग 4 रत्ती से 3 ग्राम तक किया जाता है, लेकिन इसका प्रयोग करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी आयुर्वेदाचार्य से एक बार सलाह जरूर लें. डॉ अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वचा (वच) का पौधा लगाना भी काफी आसान है. इसको गमले में या किचन गार्डन में आसानी से लगाया जा सकता है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वचा का उपयोग सिर्फ दिल और पाचन के लिए ही नहीं, बल्कि सर्दी-खांसी, दमा और आवाज से जुड़ी समस्याओं में भी किया जाता है. कई जगहों पर इसे बच्चों की याददाश्त बढ़ाने और बोलने की क्षमता सुधारने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा के अनुसार, वाच में मौजूद औषधीय गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक होते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Heatwave | Pregnant Women Safety Tips | भीषण गर्मी में गर्भवती महिलाएं रखें खास ध्यान, डॉक्टर ने बताए जरूरी उपाय

Last Updated:May 18, 2026, 17:34 IST Tips To Be Safe In Summer Season For Pregnant Women: राजस्थान की भीषण गर्मी अब गर्भवती महिलाओं के लिए चिंता बढ़ाने लगी है. डॉक्टरों के मुताबिक तेज धूप, लू और शरीर में पानी की कमी का असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों पर पड़ सकता है. जोधपुर की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पूनम पारख ने सलाह दी है कि इस मौसम में पर्याप्त पानी, नारियल पानी, छाछ और हल्का भोजन बेहद जरूरी है. साथ ही धूप से बचाव और आराम का भी खास ध्यान रखना चाहिए. जोधपुर. राजस्थान में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी अब गर्भवती महिलाओं के लिए भी चिंता का कारण बनती जा रही है. तेज धूप, लू और शरीर में पानी की कमी का असर मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों की सेहत पर पड़ सकता है. ऐसे में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पूनम पारख ने गर्भवती महिलाओं को गर्मी के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. डॉक्टरों के अनुसार इस दौरान शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी होता है. इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. इसके अलावा नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन भी शरीर को राहत देता है. डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सतर्कता और सही देखभाल से इस भीषण गर्मी में भी गर्भवती महिलाएं खुद को और अपने होने वाले बच्चे को सुरक्षित रख सकती हैं. शरीर में पानी की कमी न होने देंडॉ. पूनम पारख के अनुसार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के शरीर का तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक रहता है. ऐसे में गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है. उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं को लंबे समय तक धूप में रहने से बचना चाहिए और बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखना चाहिए, ताकि लू का असर कम हो सके. डॉक्टरों के मुताबिक नारियल पानी, छाछ, ताजे फलों का जूस और स्मूदी शरीर में पानी की कमी नहीं होने देते. इसके साथ ही समय-समय पर आराम करना भी जरूरी है. अधिक देर तक गर्म वातावरण में रहने से कमजोरी और चक्कर जैसी परेशानी हो सकती है. खानपान और कपड़ों का भी रखें ध्यानविशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में ज्यादा तेल-मसाले और तली-भुनी चीजों का सेवन शरीर पर भारी पड़ सकता है. गर्भवती महिलाओं को हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए. दलिया, खिचड़ी, दही और मौसमी फल इस मौसम में बेहतर विकल्प माने जाते हैं. डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लंबे समय तक खाली पेट नहीं रहना चाहिए और समय पर भोजन करना जरूरी है. डॉ. पूनम ने बताया कि गर्मी से राहत पाने के लिए एसी का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन कमरे का तापमान बहुत ज्यादा कम नहीं रखना चाहिए. एसी वाले ठंडे कमरे से सीधे तेज गर्मी में जाने से शरीर पर अचानक असर पड़ सकता है. इसके अलावा महिलाओं को ढीले-ढाले और सूती कपड़े पहनने चाहिए, ताकि शरीर में हवा का संचार बना रहे और गर्मी कम महसूस हो. About the Author Anand Pandey आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan








