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Cherry benefits I चेरी खाने के फायदे

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Last Updated:May 18, 2026, 14:00 IST चेरी सिर्फ एक स्वादिष्ट फल नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है. इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट दिल को स्वस्थ रखने, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित करने के साथ-साथ अच्छी नींद में भी मदद करते हैं. नियमित रूप से सीमित मात्रा में चेरी का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई बीमारियों से बचाव में सहायक माना जाता है. सुल्तानपुर. फलों का महत्व प्राचीन समय से ही चला आ रहा है, उन्हीं में एक फल है चेरी. जो स्वादिष्ट और गुणों से भरपूर फल माना जाता है. इसका रंग काफी आकर्षक होता है और मीठा स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है, वहीं स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह काफी लाभकारी होती है. चेरी में बहुत सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस, में विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है. इसमें मौजूद विटामिन-सी, विटामिन-ए, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ त्वचा की चमक और पाचन बेहतर बनाता है. इन बीमारियों में है रामबाण फिजीशियन डॉ. एस बी सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि चेरी का सेवन हृदय रोग के खतरे को कम करने में सहायक होता है, क्योंकि इसमें पाए जाने वाले एंथोसाइनिन और फ्लेवोनोइड्स खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाकर दिल को स्वस्थ रखते हैं. इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है. चेरी खाने से ब्लड शुगर लेवल भी संतुलित रहता है, इसलिए यह मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी मानी जाती है. इसमें मिलती है राहतचेरी का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह नींद से जुड़ी समस्याओं में राहत देती है. दरअसल, चेरी में मेलाटोनिन पाया जाता है, जो नींद के चक्र को नियंत्रित करता है और अच्छी नींद लाने में मदद करता है. यही कारण है कि इसे रात के खाने के बाद और सोने से कुछ समय पहले सेवन करने की सलाह देते हैं.इसके अलावा चेरी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गठिया और जोड़ों के दर्द में भी राहत पहुंचाते हैं. ऐसे करें सेवन अगर बात करें सेवन के तरीके की, तो चेरी को सुबह खाली पेट खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसे सीधे फल के रूप में खाया जा सकता है या फिर सलाद, स्मूदी और जूस में भी शामिल किया जा सकता है. दिन में 8 से 10 चेरी खाना पर्याप्त होता है.हालांकि, जिन लोगों को पेट से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, उन्हें इसे अधिक मात्रा में खाने से बचना चाहिए. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh

Chitrak Cheeta Benefits I चित्रक जड़ के फायदे

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Last Updated:May 17, 2026, 17:19 IST आयुर्वेद में चित्रक चीता को एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग कफ, गैस, अपच, कमजोरी और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है. हालांकि इसकी तासीर तेज मानी जाती है, इसलिए इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार कुछ औषधीय पौधों को शरीर में जमा कफ को संतुलित करने में सहायक माना जाता है. चित्रक चीता भी ऐसे पौधों में शामिल बताया जाता है, पारंपरिक चिकित्सा में इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, कफ और मौसम बदलने पर होने वाली कुछ सामान्य परेशानियों में किया जाता रहा है. माना जाता है कि यह शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, इसका उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति के शरीर पर इसका असर अलग हो सकता है. भारत में आयुर्वेद का इतिहास काफी पुराना है. प्राचीन समय से ही कई औषधीय पौधों का उपयोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है. ऐसे ही खास पौधों में चित्रक चीता का नाम भी शामिल है. आयुर्वेद में इसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है. इसकी जड़ और कुछ अन्य हिस्सों का उपयोग पारंपरिक उपचारों में लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि किसी भी औषधीय पौधे का इस्तेमाल डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए. आयुर्वेद में चित्रक चीता का उपयोग कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में भी बताया गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका इस्तेमाल अलग-अलग तरीकों से किया जाता रहा है. माना जाता है कि इसके कुछ गुण त्वचा से जुड़ी परेशानियों में सहायक हो सकते हैं. हालांकि इसकी तासीर तेज मानी जाती है, इसलिए इसका उपयोग बहुत सावधानी और सही मात्रा में करना जरूरी होता है. बिना जानकारी या विशेषज्ञ की सलाह के इसका प्रयोग करना नुकसानदायक भी हो सकता है. किसी भी औषधीय पौधे की तरह इसका उपयोग भी चिकित्सकीय सलाह के बाद ही करना बेहतर माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google  आजकल अनियमित खानपान और तली-भुनी चीजों के अधिक सेवन से कई लोगों को गैस और पेट फूलने की समस्या हो जाती है. आयुर्वेद में चित्रक चीता को पेट से जुड़ी परेशानियों में उपयोगी माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और गैस की समस्या को कम करने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि, किसी भी औषधीय पौधे का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि आयुर्वेद में चित्रक चीता को पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माना गया है. कहा जाता है कि यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. अपच, पेट भारी रहना, गैस या भोजन ठीक से न पचने जैसी समस्याओं में पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार चित्रक चीता को शरीर की कमजोरी और थकान दूर करने में उपयोगी माना जाता है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह शरीर को ऊर्जा देने और सुस्ती कम करने में मदद कर सकता है. जब व्यक्ति लगातार थकान या कमजोरी महसूस करता है, तब पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग बताया जाता है। हालांकि इसके प्रभाव व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर कर सकते हैं. कुछ आयुर्वेदिक जानकारों के अनुसार चित्रक चीता में ऐसे गुण बताए जाते हैं, जो शरीर की सूजन से जुड़ी समस्याओं में सहायक हो सकते हैं. कई बार शरीर में सूजन थकान, चोट या अन्य कारणों से भी हो सकती है. पारंपरिक उपचारों में चित्रक चीता का उपयोग ऐसी परेशानियों को कम करने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि इसके प्रभाव को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है. आज के समय में लोग प्राकृतिक और आयुर्वेदिक चीजों की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. लेकिन किसी भी पौधे को चमत्कारी मानकर इस्तेमाल करने से पहले सही जानकारी लेना जरूरी है. आयुर्वेद में चित्रक चीता का विशेष महत्व जरूर बताया गया है, लेकिन सुरक्षित और सही उपयोग ही सबसे ज्यादा जरूरी होता है. स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी परेशानी में डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है. बढ़ती उम्र, बदलती जीवनशैली और शरीर में पोषण की कमी के कारण कई लोगों को जोड़ों के दर्द और शरीर में अकड़न की समस्या होने लगती है. इससे चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी हो सकती है. आयुर्वेद में चित्रक चीता को ऐसी समस्याओं में उपयोगी माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. कुछ आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि यह जोड़ों से जुड़ी परेशानियों में सहायक हो सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तर प्रदेश की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|

गर्मी में डायबिटीज के मरीज भूलकर भी न करें ये गलती! डॉक्टर की खास सलाह, देखें वीडियो

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X गर्मी में डायबिटीज के मरीज भूलकर भी न करें ये गलती! डॉक्टर की खास सलाह, देखें   Diabetes Summer Care Tips: जोधपुर के एमडीएम अस्पताल के मधुमेह विशेषज्ञ डॉक्टर रौनक गांधी के अनुसार, भीषण गर्मी में डायबिटीज मरीजों के लिए डिहाइड्रेशन का खतरा काफी बढ़ जाता है. शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने पर ग्लूकोज के साथ पानी भी पेशाब के जरिए अधिक बाहर निकलता है. इसके अलावा, डापा और एम्पा ग्लिफ्लोज़िन जैसी दवाइयाँ लेने वाले मरीजों में भी यूरिन की मात्रा बढ़ने से पानी की कमी हो सकती है. इससे बचाव के लिए डॉक्टर ने मरीजों को बिना प्यास लगे भी समय-समय पर पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और नियमित शुगर जांच की सलाह दी है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

महिलाओं के लिए किसी अमृत से कम नहीं शतावरी, जानें इसके चौंकाने वाले फायदे – News18 हिंदी

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X महिलाओं के लिए किसी अमृत से कम नहीं शतावरी, जानें इसके चौंकाने वाले फायदे   Shatavari Ke Fayde: शतावरी एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जिसकी मदद से शरीर की कई परेशानियों को दूर किया जा सकता है. खासतौर पर महिलाओं की समस्याओं को दूर करने में यह काफी प्रभावी जड़ी-बूटी है. मध्य प्रदेश के रीवा में आयुर्वेद अस्पताल के डीन डॉक्टर दीपक कुलश्रेष्ठ ने बताया कि शतावरी महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए लाभकारी हो सकती है. इसका वैज्ञानिक नाम एस्पेरेगस रेसिमोसस है. आयुर्वेद के मुताबिक, शतावरी का इस्तेमाल 100 से अधिक बीमारियों को दूर करने में प्रभावी माना जाता है. जड़ी-बूटी के अलावा इसका इस्तेमाल भारत के कई क्षेत्रों में सब्जी के रूप में भी किया जाता है. आयुर्वेदाचार्य के अनुसार, महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य के लिए शतावरी काफी फायदेमंद होता है. इसके इस्तेमाल से यौन रोगों से लेकर प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानी को दूर किया जा सकता है. इसके अलावा महिलाओं के लिए शतावरी के कई अन्य फायदे हो सकते हैं. शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव की वजह से इन दिनों महिलाओं का वजन काफी ज्यादा बढ़ रहा है. ऐसे में शतावरी का इस्तेमाल महिलाओं के लिए लाभकारी हो सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

लू और डिहाइड्रेशन से बचने के आयुर्वेदिक उपाय | Rajasthan Heatwave Ayurvedic Tips

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Home Remedies for Dehydration: राजस्थान में गर्मी अब धीरे-धीरे अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है. मई का महीना आते ही मरुधरा के ज्यादातर शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है. आसमान से बरसती आग, तेज धूप और झुलसाने वाली गर्म हवाओं (लू) के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. इस मौसम में लोगों को हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन (पानी की कमी), अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी-दस्त और बदन टूटने जैसी शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. खासकर ग्रामीण इलाकों में खेतों और खुले आसमान के नीचे काम करने वाले मजदूर व किसान लू की चपेट में सबसे जल्दी आ रहे हैं. ऐसे में राजाबेटी राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय की प्रसिद्ध आयुर्वेद डॉ. गुरप्रीत लोगों को विशेष सावधानी बरतने और अचूक घरेलू उपाय अपनाने की सलाह दे रही हैं. डॉ. गुरप्रीत ने बताया कि गर्मी के मौसम में शरीर में पानी का स्तर गिरना सबसे बड़ी और गंभीर समस्या बन जाती है. कई बार लोग लू की चपेट में आ जाते हैं, लेकिन शुरुआत में वे इसके लक्षणों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. आयुर्वेद विशेषज्ञ के अनुसार, लू लगने पर मरीज को तेज बुखार आना, पूरे शरीर में असहनीय दर्द और जकड़न होना, बार-बार तेज प्यास लगना, जीभ और होंठ सूखना, उल्टी-दस्त होना और चक्कर आकर गिरना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. अगर इन लक्षणों को देखकर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए, तो यह स्थिति गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है. रसोई में छिपा है लू का इलाज: छाछ, नींबू पानी और गिलोय का चमत्कारी असरडॉ. गुरप्रीत बताती हैं कि हमारे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ऐसी कई घरेलू चीजें आसानी से उपलब्ध हैं, जिनका सही उपयोग करके लू और हीट स्ट्रोक से सौ फीसदी बचाव किया जा सकता है: मसाला छाछ: गर्मियों में अमृत मानी जाने वाली छाछ में पुदीना, काला नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर पीने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती. नींबू पानी व तुलसी का पानी: एक गिलास ठंडे पानी में नींबू निचोड़कर पीने से शरीर को तुरंत इलेक्ट्रोलाइट्स और एनर्जी मिलती है. इसके अलावा, तुलसी के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी को दिनभर थोड़ा-थोड़ा पीने से शरीर को अंदरूनी ठंडक मिलती है. गिलोय की डंडी का पानी: घर में गिलोय उपलब्ध हो तो उसकी एक डंडी को पानी में अच्छी तरह उबालकर उसका सेवन करें. इस पानी को चाय या दूध में मिलाकर भी पिया जा सकता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने के साथ लू से बचाता है. पुदीना, गुलकंद और गोंद कतीरा हैं गर्मियों के ‘सुपरफूड’डॉ. गुरप्रीत के अनुसार, पुदीना और हरा धनिया गर्मियों में पेट को ठंडा रखने में सबसे मददगार होते हैं, इसलिए इन्हें अपनी दैनिक डाइट या चटनी के रूप में जरूर शामिल करना चाहिए. वहीं, रात को सोते समय गुलकंद को ठंडे दूध के साथ खाने से शरीर की आंतरिक गर्मी शांत होती है, जो छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद फायदेमंद है. यदि बच्चों की इम्युनिटी कमजोर है, तो उन्हें रात में हल्दी वाला दूध देना चाहिए. इसके साथ ही ‘गोंद कतीरा’ को रात में पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इसे मिश्री व ताजे दही के साथ खाएं, इससे शरीर का तापमान तुरंत गिरता है और लू का असर खत्म हो जाता है. इस मौसम में बेल का शरबत और बेल का जूस पीना भी पेट के लिए रामबाण माना जाता है. उल्टी-दस्त होने पर इलायची का पानी और डॉक्टर की विशेष हिदायतअगर किसी व्यक्ति को लू लग चुकी है और उसके उल्टी-दस्त बंद नहीं हो रहे हैं, तो एक गिलास पानी में दो से तीन छोटी इलायची डालकर अच्छी तरह उबाल लें. इस पानी को छानकर मरीज को थोड़ा-थोड़ा करके पिलाएं, इससे पेट को तुरंत राहत मिलती है. डॉ. गुरप्रीत ने अंत में सख्त हिदायत दी कि दोपहर के समय धूप में बाहर निकलते समय अपने सिर और चेहरे को सूती तौलिये या सूती कपड़े से अच्छी तरह ढककर ही निकलें. इस मौसम में सिंथेटिक, भारी या नायलॉन के कपड़े पहनने से पूरी तरह बचें और केवल ढीले सूती कपड़े पहनें. यदि इन तमाम घरेलू उपायों के बाद भी मरीज को आराम न मिले, तो बिना देरी किए तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि हीट स्ट्रोक किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकता है.

Ayurveda for Infertility | धौलपुर आयुर्वेद चिकित्सालय | Rajabeti Ayurveda Hospital

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Last Updated:May 15, 2026, 09:50 IST Dholpur News: धौलपुर का राजाबेटी राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय निसंतान दंपतियों के लिए आशा का केंद्र बना हुआ है. डॉ. गुरप्रीत के मार्गदर्शन में पंचकर्म और प्राचीन औषधियों के जरिए PCOD और ट्यूब ब्लॉकेज जैसी समस्याओं का सफल इलाज किया जा रहा है. अब तक 100 से अधिक दंपतियों को संतान सुख मिल चुका है. आधुनिक इलाज में विफल रहे मरीज अब विदेशों से भी यहां पहुंच रहे हैं. राजस्थान सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं को निशुल्क औषधियां भी प्रदान की जा रही हैं. ख़बरें फटाफट Dholpur News: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और आधुनिक जीवनशैली ने स्वास्थ्य संबंधी कई जटिलताओं को जन्म दिया है, जिनमें निसंतानता (Infertility) एक गंभीर समस्या बनकर उभरी है. जहां लोग लाखों रुपये खर्च कर आईवीएफ (IVF) जैसे महंगे इलाजों का सहारा ले रहे हैं, वहीं राजस्थान के धौलपुर स्थित राजाबेटी राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय एक नई उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है. यहां की प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धतियों ने उन दंपतियों के जीवन में खुशियां भरी हैं, जो बरसों से संतान सुख के लिए भटक रहे थे. चिकित्सालय में कार्यरत डॉ. गुरप्रीत के अनुसार, आयुर्वेद न केवल बीमारी को दबाता है बल्कि उसे जड़ से खत्म करता है. यहां कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां महिलाओं ने बड़े शहरों में इलाज कराया लेकिन सफलता नहीं मिली, मगर यहां आयुर्वेदिक उपचार शुरू होने के कुछ ही समय बाद उन्हें सकारात्मक परिणाम मिले. चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मामलों में तो मात्र 9 दिन के उपचार के बाद ही गर्भधारण में सफलता मिली है. इसी सफलता का परिणाम है कि आज यहां राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदेशों से भी मरीज पहुंच रहे हैं. बांझपन के कारणों पर आयुर्वेद का प्रहारनिसंतानता के पीछे कई चिकित्सीय कारण होते हैं. डॉ. गुरप्रीत बताती हैं कि महिलाओं में PCOD, PCOS, बच्चेदानी में गांठ, फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना, और मासिक धर्म की अनियमितता प्रमुख समस्याएं हैं. वहीं, पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी एक बड़ा कारण है. इन सभी समस्याओं के लिए आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा को रामबाण माना गया है. पंचकर्म और डिटॉक्स का प्रभावचिकित्सालय में पंचकर्म के जरिए शरीर का शुद्धिकरण किया जाता है. इसमें स्नेहन, स्वेदन, वमन और विशेष रूप से ‘बस्ती’ प्रक्रिया का उपयोग होता है. ‘बस्ती’ पंचकर्म उन महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी है जिनकी ट्यूब ब्लॉक होती है या बच्चेदानी में सूजन रहती है. यह प्रक्रिया शरीर को अंदर से डिटॉक्स कर गर्भधारण के लिए अनुकूल बनाती है. अब तक करीब 100 से अधिक निसंतान दंपतियों का सफल इलाज यहां किया जा चुका है, जिससे आयुर्वेद के प्रति लोगों का अटूट विश्वास पैदा हुआ है. About the Author vicky Rathore Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan

खेत में सांप काट ले तो सबसे पहले क्या करें? यहां जानिए वो तरीका जो बचा सकता है आपकी जान

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फरीदाबाद: खेत में रात का समय… चारों तरफ अंधेरा… किसान फसल की सिंचाई कर रहा होता है. तभी अचानक पैर के पास कुछ हलचल होती है और पता चलता है कि सांप ने काट लिया. ऐसे समय में अक्सर लोग घबरा जाते हैं. कोई रस्सी बांध देता है कोई जहर चूसने लगता है तो कोई झाड़-फूंक करवाने के लिए दौड़ पड़ता है. लेकिन यही घबराहट कई बार मरीज की हालत और बिगाड़ देती है. फरीदाबाद जैसे इलाकों में जहां गांवों और खेतों के आसपास कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांप पाए जाते हैं वहां सही जानकारी होना बेहद जरूरी है. लोकल18 से बातचीत में फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल के डॉक्टर सुमित आपातकालीन एवं ट्रॉमा प्रबंधन विभाग के प्रभारी बताते हैं सांप काटने के बाद सबसे जरूरी चीज घबराना नहीं बल्कि मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना है. हर बार सांप काटने पर जहर शरीर में जाए ऐसा जरूरी नहीं होता. कई बार ड्राई बाइट होती है यानी सांप काटता है लेकिन जहर नहीं छोड़ता. वहीं कई बार सांप जहर भी इंजेक्ट कर देता है. ऐसी स्थिति में मरीज खुद यह तय नहीं कर सकता कि जहर गया है या नहीं इसलिए तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूरी है. सांप के काटने पर क्या न करें डॉक्टर सुमित बताते हैं गांवों में लोग अक्सर कई गलतियां कर बैठते हैं. कोई काटी हुई जगह पर कपड़ा या रस्सी कसकर बांध देता है तो कोई मुंह से खून चूसकर जहर निकालने की कोशिश करता है. कुछ लोग ब्लेड से काटकर खून निकालने लगते हैं. यह सब बिल्कुल गलत है और जानलेवा भी हो सकता है. डॉक्टर सुमित बताते हैं जहां सांप ने काटा है वहां मुंह से खून चूसने या ब्लेड से काटने से कोई फायदा नहीं होता. यह सिर्फ फिल्मों और पुराने मिथकों में दिखाया जाता है. कई बार लोग सोचते हैं कि रस्सी या कपड़ा कसकर बांध देंगे तो जहर ऊपर नहीं चढ़ेगा जबकि हकीकत इसके उलट है. ज्यादा टाइट बांधने से खून का संचार रुक जाता है और अस्पताल में खोलने के बाद शरीर को और नुकसान पहुंच सकता है. झाड़-फूंक से कभी सांप का जहर नहीं उतरता डॉक्टर सुमित बताते हैं झाड़-फूंक से कभी सांप का जहर नहीं उतरता. गांवों में आज भी कई लोग मरीज को अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़-फूंक कराने ले जाते हैं जिससे इलाज में देरी हो जाती है. जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचेगा उतनी जल्दी एंटी-वेनम देकर उसकी जान बचाई जा सकती है. कोबरा और करैत जैसे सांप जहरीले डॉक्टर सुमित बताते हैं बरसात के मौसम में फरीदाबाद में सांप काटने के मामले ज्यादा आते हैं. उस समय सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं. यहां सबसे ज्यादा कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांप पाए जाते हैं. अगर इन सांपों ने जहर छोड़ दिया, तो कुछ घंटों के भीतर मरीज की जान भी जा सकती है अगर समय पर इलाज न मिले. कब दिया जाता है एंटी-वेनम डॉक्टर सुमित बताते हैं अस्पताल पहुंचने के बाद सबसे पहले हम मरीज की जांच करते हैं. कई बार शरीर पर सांप काटने के निशान होते हैं, लेकिन जहर के कोई लक्षण नहीं दिखते. ऐसी स्थिति को ड्राई बाइट कहा जाता है और उसमें एंटी-वेनम की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन अगर मरीज में जहर के लक्षण दिखने लगें तो तुरंत एंटी-वेनम दिया जाता है. इलाज में देरी से ज्यादा नुकसान ज्यादातर मरीज दो से चार दिनों में ठीक हो जाते हैं. लेकिन अगर इलाज में देरी हो जाए तो जहर शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. कई बार मरीज को वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ जाती है. किडनी खराब होना ब्लीडिंग होना या शरीर के अन्य अंग प्रभावित होना जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं. डॉक्टर सुमित बताते हैं कई बार सांप काटने के तुरंत बाद लक्षण नहीं आते. कुछ मरीजों में दो से तीन दिन बाद भी असर दिखाई देता है. इसी वजह से ऐसे मरीजों को अस्पताल में निगरानी में रखा जाता है. गांवों में एक और अंधविश्वास देखने को मिलता है. कई लोग मानते हैं कि अगर सांप काटने से किसी की मौत हो जाए तो शव को जलाने की बजाय गंगा में बहा देने से वह जिंदा हो सकता है. इस पर डॉक्टर सुमित बताते हैं यह पूरी तरह मिथक है. अगर किसी व्यक्ति की मौत हो चुकी है तो पानी में डालने से वह जिंदा नहीं होगा. क्या सांप को मार देने से जहर नहीं चढ़ता डॉक्टर सुमित बताते हैं कई लोग सांप काटने के बाद मरीज को अस्पताल ले जाने की बजाय पहले सांप को मारने में लग जाते हैं. लोगों को लगता है कि सांप को मार देंगे तो जहर नहीं चढ़ेगा. यह बिल्कुल गलत सोच है. मरीज को छोड़कर सांप के पीछे भागने में समय बर्बाद होता है और यही देरी जानलेवा साबित हो सकती है. मरीज के लक्षण देखकर शुरू होता है इलाज डॉक्टर सुमित बताते हैं सांप को देखकर यह समझने में मदद मिल सकती है कि वह जहरीला था या नहीं लेकिन इसके लिए अपनी जान जोखिम में डालने की जरूरत नहीं है. डॉक्टर मरीज के लक्षण देखकर भी इलाज शुरू कर देते हैं. सांप काटने पर सबसे पहले मरीज को शांत रखें और बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल पहुंचाएं.

एनर्जी ड्रिंक नहीं, ये है बघेलखंड का असली ‘पावर पैक’ नाश्ता, दिनभर नहीं लगती थकान! – News18 हिंदी

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X ये है बघेलखंड का असली ‘पावर पैक’ नाश्ता, दिनभर नहीं लगती थकान!   Summer Food: बघेलखंड क्षेत्र के आदिवासी इलाकों में सुबह का नाश्ता शहरों की तुलना में बिल्कुल अलग और देसी होता है. यहां के ग्रामीण आज भी पारंपरिक खानपान को अपनाए हुए हैं, जो सस्ता होने के साथ-साथ शरीर को भरपूर ऊर्जा भी देता है. खासकर गर्मी के समय में खेतों में मेहनत करने वाले लोगों के लिए यह नाश्ता किसी प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक से कम नहीं माना जाता. हम बात कर रहे हैं गेहूं के दलिया और छाछ (मट्ठा) के मिश्रण की, जो आज भी गांवों में सुबह की शुरुआत का अहम हिस्सा है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. आरपी परौहा का कहना है कि दलिया और मट्ठा का यह मिश्रण शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता और लू से भी बचाव करता है. इसके अलावा यह वजन नियंत्रित रखने, पाचन सुधारने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में भी सहायक है. आज भले ही बाजार में तरह-तरह के एनर्जी ड्रिंक्स मौजूद हों, लेकिन गांवों का यह देसी पेय स्वास्थ्य के लिहाज से कहीं अधिक भरोसेमंद और असरदार साबित हो रहा है.

भूल जाएंगे ग्लूकोज और नींबू पानी… सिर्फ चबा लें इस पेड़ की दो पत्तियां; गर्मी में बॉडी रहेगी अंदर से बर्फ की तरह ठंडी!

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Last Updated:May 13, 2026, 09:27 IST Sheesham Leaves Benefits: शीशम का पेड़ न केवल मजबूत लकड़ी बल्कि बेहतरीन आयुर्वेदिक गुणों के लिए भी जाना जाता है. गर्मी के मौसम में इसकी 2-3 कोमल पत्तियां चबाने से शरीर अंदर से ठंडा रहता है और लू से बचाव होता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल तत्व पाचन सुधारने, त्वचा की जलन कम करने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं. हालांकि, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इसके सेवन से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में इसका सेवन शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है. ग्रामीण बुजुर्गों का यह पारंपरिक अनुभव रहा है कि यदि इसकी पत्तियों को नियमित रूप से चबाया जाए, तो यह न केवल शरीर को आंतरिक शीतलता प्रदान करती हैं, बल्कि लू के हानिकारक प्रभाव से बचाने में भी कारगर साबित होती हैं. शीशम के पत्ते पेट के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं. अक्सर गर्मियों के मौसम में लोगों को गैस, अपच और कब्ज जैसी पाचन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. ऐसी स्थिति में शीशम की कोमल पत्तियों का सेवन पाचन तंत्र को सुदृढ़ बनाने का कार्य करता है. इसके अतिरिक्त, ये पत्तियां शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालकर डिटॉक्स करने में भी काफी मददगार साबित होती हैं. शीशम के पत्ते शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को सुदृढ़ करने में भी काफी सहायक माने जाते हैं. अक्सर बदलते मौसम के दौरान होने वाले वायरल संक्रमण और शारीरिक कमजोरी से बचने के लिए ग्रामीण इलाकों में लोग इसे एक प्रभावी घरेलू नुस्खे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, सुरक्षा की दृष्टि से किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google त्वचा संबंधी विकारों के निवारण में भी शीशम के पत्तों का उपयोग अत्यंत गुणकारी माना गया है. करौली के आयुर्वेद चिकित्सालय के डॉ. महेश जंगम बताते हैं कि शीशम का पेड़ केवल अपनी कीमती लकड़ी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने औषधीय गुणों के लिए भी विशिष्ट स्थान रखता है. इस वृक्ष की लकड़ी, पत्तियां और छाल, सभी आयुर्वेद के गुणों से भरपूर होते हैं. इसके पत्तों का लेप लगाने से खुजली, दाद और त्वचा की जलन में त्वरित राहत मिल सकती है. साथ ही, भीषण गर्मी के कारण होने वाली शरीर की जलन और अत्यधिक पसीने की समस्या को नियंत्रित करने में भी इसके औषधीय गुण बेहद प्रभावशाली माने जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार शीशम की पत्तियों का सेवन हमेशा सीमित और संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए. विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्तियों को डॉक्टरी परामर्श के बिना इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. यदि सही मात्रा और उचित विधि से इसका उपयोग किया जाए, तो यह देसी पेड़ भीषण गर्मी में शरीर को शीतलता और राहत प्रदान करने वाला एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है. इन्हीं प्रभावशाली वनस्पतियों में से एक शीशम का पेड़ है. आयुर्वेद के अनुसार शीशम के पत्ते स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गुणकारी माने गए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग सुबह खाली पेट इसकी 2-3 कोमल पत्तियां चबाने की परंपरा का पालन करते हैं, जिससे शरीर को प्राकृतिक ठंडक प्राप्त होती है और कई रोगों से बचाव होता है. औषधीय विज्ञान की दृष्टि से देखें तो शीशम के पत्तों में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स करने यानी विषैले तत्वों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. भीषण गर्मी के मौसम में शरीर के आंतरिक तापमान को संतुलित बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. तेज धूप, चिलचिलाती लू और लगातार बढ़ते तापमान के कारण लोग अक्सर जल्दी थकान, शारीरिक कमजोरी और पाचन संबंधी विकारों का शिकार होने लगते हैं. ऐसी विषम परिस्थितियों में, ग्रामीण अंचलों में आज भी बड़ी संख्या में लोग गर्मी के दुष्प्रभावों से बचने के लिए पारंपरिक देसी और आयुर्वेदिक उपचारों पर अटूट भरोसा जताते हैं.

रेगिस्तान का ‘अमृत’ है पीलू: भीषण लू में भी शरीर को रखता है कूल, पीलिया और दांतों के रोगों में है रामबाण औषधि

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Last Updated:May 13, 2026, 06:21 IST Pilu Fruit Benefits: राजस्थान के मारवाड़ में 50 डिग्री तापमान के बीच ‘पीलू’ का फल ‘रेगिस्तान के अंगूर’ के रूप में चर्चा में है. ‘जाल’ के पेड़ पर उगने वाला यह फल भीषण गर्मी में और भी मीठा हो जाता है. इसे ‘प्राकृतिक AC’ कहा जाता है क्योंकि यह शरीर को शीतल रखता है और लू से बचाता है. औषधीय गुणों से भरपूर पीलू दांतों, लीवर और पीलिया के इलाज में सहायक है. यह पेड़ अपने आसपास का तापमान 8 डिग्री तक कम कर सकता है, जिससे इसे घरों के पास लगाना शुभ और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है. ख़बरें फटाफट Desert Fruit Pilu: जहाँ सूरज की तपिश पत्थर पिघलाने पर उतारू हो, जहाँ लू के थपेड़े आसमान को झुलसा रहे हों और पारा 50 डिग्री को छूने लगे. ऐसी भीषण परिस्थितियों में भी प्रकृति अपना करिश्मा दिखाना नहीं भूलती. राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के अंदर इन दिनों ‘जाल’ के पेड़ों पर एक छोटा-सा फल लद गया है, जिसे स्थानीय लोग बड़े चाव से ‘पीलू’ कहते हैं. पीलू को स्थानीय भाषा में ‘रेगिस्तान का अंगूर’ या ‘मावा’ कहा जाता है. यह फल मुख्य रूप से ‘जाल’ के पेड़ पर उगता है. इस फल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि रेगिस्तान में गर्मी जितनी प्रचंड होती है, पीलू का स्वाद उतना ही मीठा और रसीला होता जाता है. जब लू के कारण अन्य वनस्पतियां कुम्हलाने लगती हैं, तब पीलू जीवन का रस बनकर खिलता है और तपते मारवाड़ को राहत पहुँचाता है. आयुर्वेद में पीलू को एक अत्यंत शीतल फल माना गया है. इसके औषधीय गुणों के कारण इसे ‘प्रकृति का अपना AC’ भी कहा जाता है. पीलू के फायदों की सूची काफी लंबी है. रेगिस्तान के इस मेवे के बारे में यह प्रसिद्ध है कि यह पौष्टिकता से भरपूर होता है और इसे खाने से लू नहीं लगती. साथ ही इसमें कई प्रकार के औषधीय गुण भी होते हैं. इसी कारण मारवाड़ की महिलाएं पीलू को एकत्र कर सुखा लेती हैं और इसे प्रिजर्व (Preserve) कर लेती हैं, ताकि ऑफ-सीजन में भी जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल किया जा सके. यह फल न केवल स्वाद में मीठा होता है, बल्कि यह शरीर को भीतर से इतना ठंडा रखता है कि इसे ‘रेगिस्तान का अमृत’ भी कहा जाता है. सेहत के लिए रामबाण और पानी की कमी का समाधानपीलू (जिसे कई जगह डूंगर भी कहा जाता है) एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा है. इसका वनस्पतिक नाम ‘डाइओरपाइरोस कांडीफोलिया’ है. यह फल शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के साथ-साथ पीलिया जैसे गंभीर रोगों में रामबाण का काम करता है. इसकी छाल का काढ़ा लीवर से संबंधित विकारों में भी बेहद फायदेमंद पाया गया है. इसके पत्ते खट्टे-मीठे होते हैं और यह एक शुद्ध कुदरती पौधा है जो बिना किसी विशेष देखभाल के रेगिस्तान की आग में पनपता है. न केवल इंसान, बल्कि पक्षी भी इस फल को काफी पसंद करते हैं और भीषण गर्मी में इससे अपनी प्यास और भूख मिटाते हैं. हैरान कर देने वाले औषधीय और प्राकृतिक गुणपीलू के फल की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो आधुनिक तकनीक को भी पीछे छोड़ देती हैं: दातुन (Miswak): पीलू की टहनियों का उपयोग ‘मिसवाक’ के रूप में किया जाता है. यह दांतों के रोगों से बचाव करने और मुंह की दुर्गंध को जड़ से खत्म करने में बहुत असरदार है. रेगिस्तानी संजीवनी: यह तपती गर्मी में अपने नीचे के तापमान को सामान्य से 5-8 डिग्री तक कम करने की क्षमता रखता है. सर्दी-खांसी में राहत: इसके पत्तों का काढ़ा श्वसन संबंधी समस्याओं जैसे सर्दी और खांसी में औषधि की तरह काम करता है. पशु-पक्षियों का आधार: अकाल और भीषण सूखे के समय भी यह पेड़ हरा-भरा रहकर रेगिस्तान के पशु-पक्षियों के लिए जीवन का एकमात्र सहारा बनता है. सुख-समृद्धि और कुदरती ठंडक का प्रतीकस्थानीय अनुभवों के आधार पर यह माना जाता है कि जेठ की तपती दोपहर में यदि कोई व्यक्ति पीलू के फल का सेवन कर ले, तो उसे भयंकर लू के थपेड़े भी बीमार नहीं कर सकती. यही कारण है कि अब लोग इन पौधों को अपने घरों के आंगन या बगीचों में लगाने के प्रति उत्साहित रहते हैं, ताकि बिना बिजली के कुदरती ठंडक का आनंद लिया जा सके. इन पेड़ों का घर के पास होना मारवाड़ में सुख-समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. यह पेड़ जलते आसमान के नीचे भी जीवन की मिठास को बरकरार रखने की अद्भुत शक्ति रखता है. About the Author vicky Rathore Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Pali,Pali,Rajasthan