Health Alert : वजन कम के चक्कर में आप भी कर रहे ये गलती? बॉडी स्टोर करने लगेगी फैट

Last Updated:May 11, 2026, 16:22 IST Weight loss mistakes : फरीदाबाद में बदलती लाइफस्टाइल और जंक फूड की आदत लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है. कई लोग मोटापा घटाने के लिए अपनी डाइट कम कर देते हैं. लोकल 18 से फरीदाबाद की चिकित्सक डॉ. रितिका शर्मा बताती हैं कि खाना छोड़ना वजन घटाने का सही तरीका नहीं है, बल्कि इससे शरीर कमजोर होता है. इससे बॉडी स्ट्रेस मोड में चली जाती है और फैट को स्टोर करने लगती है. सही डाइट, हाइड्रेशन और हेल्दी दिनचर्या अपनाकर मोटापा, डायबिटीज और थकान जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है. डॉ. रितिका बताती हैं कि कई बार लोग काम में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि खाना खाना भूल जाते हैं. ये गलती आगे चलकर घातक हो सकती है. फरीदाबाद. भागदौड़ भरी जिंदगी, बाहर का खाना, ठंडे ड्रिंक और देर रात तक खाने की आदत लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है. बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी जंक फूड की वजह से मोटापा, कमजोरी और थकान जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. कई लोग जल्दी वजन घटाने के चक्कर में खाना छोड़ देते हैं, लेकिन इससे शरीर को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है. ऐसे में सही खानपान और अच्छी दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी हो गया है. लोकल 18 से फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की सीनियर डाइटिशियन और न्यूट्रिशन कंसल्टेंट डॉ. रितिका शर्मा बताती हैं कि आजकल लोग अपने वजन को लेकर बहुत ज्यादा फोकस रहते हैं, लेकिन इसी दौरान कई गलतियां कर बैठते हैं. डॉ. रितिका कहती हैं कि सबसे बड़ी गलती लोग खाना छोड़कर करते हैं. लोगों को लगता है कि अगर खाना छोड़ देंगे तो वजन जल्दी कम हो जाएगा, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. जब हम लंबे समय तक खाना नहीं खाते तो शरीर स्ट्रेस मोड में चला जाता है और फैट को स्टोर करने लगता है. इससे वजन कम होने के बजाय शरीर कमजोर होने लगता है, एनर्जी भी घटती है. गर्मियों में इसका ध्यान जरूरी डॉ. रितिका बताती हैं कि कई बार लोग काम में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि खाना खाना भूल जाते हैं. खासकर युवा सोचते हैं कि अभी शरीर में ताकत है तो खाना मिस करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन यही आदत आगे चलकर शरीर को नुकसान पहुंचाती है. शरीर को सही समय पर पोषण मिलना बहुत जरूरी है. गर्मियों में पानी पी लेना ही हाइड्रेशन नहीं बल्कि सही तरीके से पानी पीना जरूरी है. लोग इन्फ्यूज वॉटर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें फल और सब्जियों को पानी में डालकर रखा जाता है, जिससे शरीर को विटामिन और मिनरल भी मिलते रहते हैं. तरबूज और खरबूजा जैसे फलों का सेवन भी गर्मियों में काफी फायदेमंद रहता है, क्योंकि इनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है और शरीर को ठंडक मिलती है. बच्चों को कैसे रोकें डॉ. रितिका के मुताबिक, बच्चे आजकल जंग फूड ज्यादा खाते हैं. बच्चों को जबरदस्ती रोकना आसान नहीं होता लेकिन समझदारी से इसे कंट्रोल किया जा सकता है. अगर बच्चा बाहर की चीजें पसंद करता है तो वही चीज घर पर हेल्दी तरीके से बनाकर दें. बच्चे पैकेट देखकर आकर्षित होते हैं इसलिए घर की बनी चीजों को उसी तरह पैक करके दिया जा सकता है. बच्चों को बाहर ले जाने से पहले घर का खाना जरूर खिलाएं ताकि बाहर जाकर उनकी भूख ज्यादा न बढ़े और वे जंक फूड की तरफ कम आकर्षित हों. सुबह उठते ही पानी पीने के ये फायदे डॉ. रितिका बताती हैं कि डायबिटीज, बीपी और मोटापे जैसी बीमारियां काफी हद तक लाइफस्टाइल और खानपान से जुड़ी होती हैं. अगर लोग बैलेंस डाइट और सही दिनचर्या अपनाएं तो इन बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है. सुबह उठते ही सबसे पहले पानी पीना चाहिए क्योंकि पूरी रात शरीर बिना पानी और खाने के रहता है. सुबह खाली पेट चाय या कॉफी पीना नहीं चाहिए. इसकी जगह एक या दो गिलास पानी, ग्रीन जूस या इन्फ्यूज वॉटर लेना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद रहता है. इससे शरीर को विटामिन, मिनरल और अच्छी एनर्जी मिलती है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Faridabad,Haryana
बच्चों के पैरों में दर्द I leg pain in childrens

Last Updated:May 11, 2026, 15:54 IST बच्चों के पैरों में बार-बार होने वाला दर्द सिर्फ थकान नहीं, बल्कि ग्रोथ पेन, कमजोरी या पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने बच्चों की डाइट, मसाज और घरेलू उपायों को लेकर जरूरी सलाह दी है. मिर्जापुर. अक्सर छोटे बच्चों के पैरों में दर्द होता है, बच्चों के पैरों में दर्द होने के बाद कई बार मालिश के बाद भी दर्द ठीक नहीं होता है. अगर आपके बच्चों के पैरों में दर्द है तो इसके कुछ खास वजह हो सकती है. पहले ग्रोथ हो सकता है और दूसरा कारण थकान हो सकता है. वहीं, कई बार न्यूट्रिएंट्स की कमी की वजह से भी दर्द होता है. मंडलीय अस्पताल में तैनात डाइटीशियन डॉक्टर ज्योति सिंह ने बच्चों को लेकर टिप्स दिए हैं. डॉक्टर ज्योति सिंह ने घरेलू नुस्खे के साथ ही चिकित्सकीय पद्धति से बच्चों का ध्यान रखने की बात कही है. उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रॉपर न्यूट्रिएंट्स दें और शाम में जरूर पैरों की मालिश करें. मंडलीय अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने लोकल 18 से बताया कि बच्चों के पैरों में दो चीजों से दर्द होता है. एक होता है ग्रोथ पैन, जो बच्चों के शारीरिक विकास की वजह से होता है. वहीं, दूसरा दर्द ज्यादा खेल-कूद आदि की वजह से होता है, कभी दर्द कमजोरी की वजह से भी हो सकता है. ऐसे में सबसे जरूरी बच्चों का खान-पान होता है. बच्चों को प्रॉपर प्रोटीन वाले सामान पनीर, अंडे, राजमा, सोयाबीन आदि को डाइट में रखना चाहिए. बच्चों को दूसरी जरूरी चीज कैल्शियम की आवश्यकता होती है. कैल्शियम के लिए बच्चों को रागी, चौराई, रामदाना, शिमला मिर्च, चने, खजूर और अंजीर आदि दे सकते हैं. बच्चों के पैरों में दर्द है तो इप्सम सॉल्ट है तो कुनकुने पानी में डालकर पैर को कुछ देर के लिए रोककर रखना चाहिए. ये टिप्स भी है बेहद कारगरडॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि ध्यान रहे कि ज्यादा देर तक पैरों को पानी के अंदर नहीं रखे, वरना लूज मोशन जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे में कम से कम समय तक पैरों को पानी में रखे. उन्होंने बताया कि बच्चों के पैरों में दर्द होन पर देसी तरीका है मसाज. थोड़ा मसाज बच्चों का रात में करना चाहिए. इसको करने से सोते समय बच्चों को बेहतर फील होता है. उनको अच्छी नींद लगती है, ये कुछ तरीके थे, जिनका उपयोग बच्चों के लिए पैरों में होने वाले दर्द को कम करने के लिए कर सकते हैं. अगर दर्द असहनीय हो या ज्यादा हो तो किसी पीडियाट्रिक को दिखा सकते हैं. मंडलीय अस्पताल में भी बाल रोग विशेषज्ञ है, यहां सम्पूर्ण इलाज है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Mirzapur,Uttar Pradesh
किडनी फंक्शन टेस्ट I किडनी बीमारी के लक्षण

Last Updated:May 11, 2026, 14:55 IST सिर्फ क्रिएटिनिन टेस्ट से किडनी की असली हालत का पता नहीं चलता. डॉक्टरों के मुताबिक पेशाब जांच, eGFR और UACR जैसे टेस्ट शुरुआती किडनी डैमेज पकड़ने में बेहद जरूरी हैं. समय रहते जांच और इलाज से डायलिसिस जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है. कानपुर. जब भी लोगों को किडनी से जुड़ी कोई परेशानी होती है या डॉक्टर जांच लिखते हैं, तो ज्यादातर लोग सिर्फ क्रिएटिनिन और किडनी फंक्शन जांच करवाकर निश्चिंत हो जाते हैं. रिपोर्ट सामान्य आते ही उन्हें लगता है कि उनकी किडनी पूरी तरह स्वस्थ है. लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है. कई बार किडनी अंदर ही अंदर खराब होती रहती है और साधारण जांच में इसका पता तक नहीं चलता. बीमारी जब गंभीर स्तर तक पहुंच जाती है, तब जाकर क्रिएटिनिन स्तर बढ़ा हुआ नजर आता है. कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर युवराज गुलाटी ने बताया कि सिर्फ किडनी फंक्शन जांच के भरोसे रहना खतरनाक हो सकता है. किडनी की असली स्थिति जानने के लिए दूसरी जरूरी जांचें भी करानी चाहिए. इनमें सबसे महत्वपूर्ण पेशाब की जांच मानी जाती है. इससे यह पता चलता है कि कहीं पेशाब में प्रोटीन या खून तो नहीं आ रहा. पेशाब में प्रोटीन आना किडनी खराब होने का शुरुआती संकेत माना जाता है. डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों में क्रिएटिनिन सामान्य रहता है, लेकिन पेशाब की जांच में गड़बड़ी सामने आ जाती है. ऐसे मामलों में अगर समय रहते इलाज शुरू हो जाए तो किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है. GSVM Medical College के डॉक्टरों के मुताबिक किडनी की बीमारी पकड़ने के लिए सिर्फ एक जांच काफी नहीं होती. किडनी फंक्शन जांच के अलावा ईजीएफआर जांच भी बेहद जरूरी है. इस जांच से यह पता चलता है कि किडनी कितनी क्षमता से खून साफ कर रही है. इसके साथ ही यूएसीआर जांच भी अहम मानी जाती है, जिससे पेशाब में एल्ब्यूमिन यानी प्रोटीन की मात्रा का पता चलता है. यह जांच शुरुआती दौर में ही किडनी की खराबी का संकेत दे सकती है. पेशाब की जांच को हल्के में लेना पड़ सकता है भारीविशेषज्ञों का कहना है कि बहुत से लोग पेशाब की जांच को सामान्य समझकर टाल देते हैं, जबकि यही जांच कई बार बड़ी बीमारी का संकेत दे देती है. पेशाब में झाग बनना, खून आना या बार-बार संक्रमण होना किडनी की खराबी की तरफ इशारा कर सकता है. डॉक्टर युवराज गुलाटी के मुताबिक शरीर भी पहले से संकेत देने लगता है. जैसे पैरों और चेहरे पर सूजन आना, बिना वजह थकान रहना, भूख कम लगना, रात में बार-बार पेशाब आना या रक्तचाप लगातार बढ़ा रहना किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों को ज्यादा खतरा डॉक्टरों का कहना है कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. ऐसे लोगों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन जांच, ईजीएफआर, यूएसीआर और पेशाब की जांच जरूर करानी चाहिए. समय रहते बीमारी पकड़ में आ जाए तो दवा और खानपान से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. लेकिन लापरवाही करने पर मरीज को डायलिसिस तक की जरूरत पड़ सकती है. विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि सिर्फ एक सामान्य रिपोर्ट देखकर निश्चिंत न हों. अगर शरीर में लगातार कोई परेशानी महसूस हो रही है तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेकर पूरी जांच कराएं. समय पर जांच ही किडनी को गंभीर बीमारी बनने से बचा सकती है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh
जौ या चना… मई-जून में कौन सा सत्तू शरीर को देता ज्यादा ताकत और ठंडक? एक्सपर्ट से समझें

Last Updated:May 11, 2026, 09:48 IST Jau vs chana sattu : गर्मी बढ़ते ही लोग शरीर को ठंडा रखने वाले देसी ड्रिंक्स की तलाश में जुट जाते हैं. ऐसे में सत्तू का शरबत फिर से लोगों की पहली पसंद बन रहा है. लेकिन अब सवाल यह उठने लगा है कि जौ का सत्तू ज्यादा फायदेमंद है या चने का? दोनों ही देसी सुपरफूड माने जाते हैं और गांव से लेकर शहर तक खूब पिए जाते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों सत्तू के फायदे अलग-अलग हैं और जरूरत के हिसाब से इनका चुनाव करना चाहिए. प्रयागराज के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ सुबोध ने कंफ्यूजन दूर कर दिया है. आयुर्वेद के सतुआ में फायदे – आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, गर्मी के दिनों में लू से बचने के लिए घर से निकलने से पहले सत्तू या सत्तू का शरबत पी लें तो लू लगने का खतरा बहुत कम हो जाता है. सत्तू प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होता है, जो गर्मियों में शरीर को ठंडा और स्वस्थ रखने में मदद करता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सुबोध बताते हैं कि चने का सत्तू प्रोटीन और फाइबर से भरपूर माना जाता है. यही वजह है कि इसे पीने से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है और शरीर को एनर्जी मिलती है. गर्मियों में मजदूर, किसान और जिम जाने वाले लोग इसे खूब पसंद करते हैं. कई लोग इसे “देसी प्रोटीन ड्रिंक” भी कहते हैं. वहीं जौ का सत्तू शरीर को ठंडक पहुंचाने के लिए ज्यादा जाना जाता है. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक जिन्हें गर्मी ज्यादा लगती है या पेट में जलन और एसिडिटी की समस्या रहती है, उनके लिए जौ का सत्तू बेहतर विकल्प माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग सुबह खाली पेट नमक, नींबू और भुना जीरा डालकर सत्तू का घोल पीते हैं. इससे शरीर में पानी की कमी कम महसूस होती है और लंबे समय तक ताजगी बनी रहती है. कई जगहों पर जौ और चने का सत्तू मिलाकर भी पिया जाता है, ताकि दोनों का फायदा एक साथ मिल सके. फूड एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर वजन घटाना चाहते हैं, तो जौ का सत्तू ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह हल्का होता है. वहीं शरीर को ताकत और प्रोटीन चाहिए, तो चने का सत्तू बेहतर विकल्प हो सकता है. हालांकि दोनों को सही मात्रा में ही पीना चाहिए. जरूरत से ज्यादा सत्तू पीने पर कुछ लोगों को गैस या पेट फूलने जैसी दिक्कत भी हो सकती है. आजकल बाजार में फ्लेवर्ड और पैकेट वाले सत्तू भी आने लगे हैं, लेकिन गांवों में लोग अब भी देसी तरीके से तैयार सत्तू को ज्यादा पसंद करते हैं. कम खर्च में शरीर को ठंडक, ताकत और भरपूर एनर्जी देने की वजह से सत्तू आज भी गर्मियों का सबसे भरोसेमंद देसी ड्रिंक माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी I GIMS Greater Noida

Last Updated:May 10, 2026, 15:34 IST ग्रेटर नोएडा के गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, जिम्स में बच्चों के लिए एडवांस पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी यूनिट शुरू की गई है. अब हड्डियों और जोड़ों की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से बेहतर इलाज मिल सकेगा. इस सुविधा से खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. ग्रेटर नोएडा. अब बच्चों के इलाज के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पतालों के महंगे खर्च और लंबी भागदौड़ का सामना कम करना पड़ेगा. जिम्स हॉस्पिटल में बच्चों के लिए एडवांस पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी यूनिट की शुरुआत की गई है. इस नई हाईटेक सुविधा के शुरू होने से हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को अब सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक इलाज मिल सकेगा. जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया कि नई यूनिट में बच्चों की सर्जरी के लिए आधुनिक मशीनें और अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से जटिल ऑपरेशन भी आसानी से किए जा सकेंगे. उन्होंने बताया की यूनिट में हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक ड्रिल सिस्टम, पीडियाट्रिक हिप प्लेटिंग सेट, स्मॉल बोन ड्रिल सिस्टम और पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक इंस्ट्रूमेंट्स जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं. इन उपकरणों के आने से बच्चों की हड्डियों की सर्जरी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और बेहतर तरीके से हो सकेगी. खास बात यह है कि इन सेवाओं का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी मिलेगा, जो अब तक महंगे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर थे. देश में मेडिकल डिवाइस की तेजी से बढ़ रही है मांग उन्होंने कहा कि देश में मेडिकल डिवाइस की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में उपकरण विदेशों से मंगाने पड़ते हैं. ऐसे में सरकार मेडिकल सेक्टर को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि सेक्टर-28 में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिससे आने वाले समय में चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और आधुनिक तकनीक आसानी से उपलब्ध हो सकेगी. उन्होंने यह भी कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हर जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े. जिम्स हॉस्पिटल के ऑर्थो डिपार्टमेंट के प्रोफेसर हेड विकास सक्सेना ने बताया कि इस यूनिट से हर साल एक हजार से अधिक बच्चों को फायदा मिलने की संभावना है. जन्मजात हड्डी संबंधी समस्याएं, दुर्घटनाओं में लगी चोटें और ऑर्थोपेडिक बीमारियों से पीड़ित बच्चों का इलाज अब बेहतर तरीके से हो सकेगा. उन्होंने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि समय पर इलाज मिलने से बच्चों को भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों से भी बचाया जा सकेगा. अस्पताल में शुरू हुई इस नई सुविधा को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में भी खुशी का माहौल है. लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी. अब बच्चों के इलाज के लिए महंगे प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Greater Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh
हीटवेब से कैस बचें? डॉक्टर ने बताए देसी उपाय, काम करने वालों के लिए बेहद जरूरी सलाह

X हीटवेब से कैस बचें? डॉक्टर ने बताए देसी उपाय, काम करने वालों के लिए बेहद जरूरी Health Tips: Bhiwadi के औद्योगिक क्षेत्रों में गर्मी अब खतरनाक रूप लेने लगी है. खासकर भट्टी आधारित फैक्ट्रियों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों के लिए मई-जून की तपती दोपहर किसी चुनौती से कम नहीं है. बढ़ते तापमान और लू के बीच डॉक्टरों ने ऐसे घरेलू उपाय बताए हैं, जो हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से बचाने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं. भिवाड़ी के चिकित्सक Dr. Roop Singh के अनुसार, गर्मी में खाली पेट काम पर जाना शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है. उन्होंने सलाह दी कि घर से निकलने से पहले छाछ, सत्तू, नींबू पानी, जलजीरा और आम का पना जैसी चीजों का सेवन जरूर करना चाहिए. ये शरीर में पानी और ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि अगर काम करते समय अचानक चक्कर आए, चेहरा लाल हो जाए, शरीर सूखने लगे या घबराहट महसूस हो तो यह हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत व्यक्ति को ठंडी जगह पर ले जाना चाहिए और ORS का घोल देना चाहिए. विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बेहोश व्यक्ति को जबरदस्ती कुछ खिलाना-पिलाना खतरनाक हो सकता है. गर्मी से राहत के लिए योग और प्राणायाम को भी काफी असरदार माना जा रहा है. अनुलोम-विलोम, शीतली और चंद्रभेदी प्राणायाम शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. सोशल मीडिया पर भी अब लोग इन देसी उपायों को तेजी से शेयर कर रहे हैं, क्योंकि बिना महंगे साधनों के भी गर्मी से बचाव संभव है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
काले धब्बों वाला केला नुकसानदायक या फायदेमंद? एक्सपर्ट से समझें सब

Last Updated:May 09, 2026, 11:49 IST Health Tips : केला ऐसा फल है, जो हर घर में आसानी से मिल जाता है. लेकिन अक्सर लोग एक बात को लेकर परेशान रहते हैं कि केला काटने के कुछ देर बाद काला क्यों पड़ जाता है और क्या इसे खाना सुरक्षित होता है? कई बार केले के ऊपर काले धब्बे दिखते ही लोग उसे खराब समझकर फेंक देते हैं, जबकि हर बार ऐसा करना जरूरी नहीं होता. प्रयागराज के हेल्थ एक्सपर्ट डॉ संजीव कुमार ने कुछ जरूरी बातें बताई है. केला काटने के बाद हवा के संपर्क में आते ही उसमें ऑक्सीडेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. इसी वजह से उसका रंग धीरे-धीरे भूरा या काला होने लगता है. गर्मियों में यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है, क्योंकि ज्यादा तापमान और नमी केले को जल्दी पकाने का काम करते हैं. जानकारों के अनुसार, केले पर हल्के काले धब्बे दिखना आम बात है. यह इस बात का संकेत होता है कि केला पूरी तरह पक चुका है और अंदर से ज्यादा मीठा हो गया है. ऐसे केले खाने में नुकसानदायक नहीं माने जाते. कई लोग इन्हीं पके केले का इस्तेमाल शेक, स्मूदी और बनाना ब्रेड बनाने में करते हैं. हालांकि हर काला केला खाना सही नहीं होता. अगर केले से सड़ी हुई गंध आने लगे, उसमें फफूंदी दिखाई दे या अंदर का हिस्सा पूरी तरह काला और चिपचिपा हो जाए, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसे केले में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google केले को ज्यादा देर तक ताजा रखने के लिए उसे ठंडी और हवादार जगह पर रखना बेहतर माना जाता है. कई लोग केले के डंठल को फॉयल या प्लास्टिक से कवर कर देते हैं, जिससे वह जल्दी नहीं पकता. वहीं कटे हुए केले पर थोड़ा नींबू रस लगाने से उसका रंग जल्दी काला नहीं पड़ता. आजकल सोशल मीडिया पर केले के काले धब्बों को लेकर कई तरह की अफवाहें भी फैलती रहती हैं, लेकिन विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि सामान्य काले धब्बे पकने की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं. इसलिए अगली बार केला थोड़ा काला दिखे, तो उसे तुरंत खराब समझने की गलती न करें. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
हर वक्त पानी पीना समझते हैं फायदेमंद? डॉक्टर ने बताया कब यही आदत पहुंचा सकती है बड़ा नुकसान

X हर वक्त पानी पीना समझते हैं फायदेमंद? जानें कब यही आदत पहुंचा सकती है नुकसान Health Tips: गर्मियों के मौसम में शरीर को हाइड्रेटेड रखना बेहद जरूरी है, लेकिन देहरादून के आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. सिराज सिद्दीकी के अनुसार जरूरत से ज्यादा पानी पीना सेहत के लिए उतना ही नुकसानदेह हो सकता है जितना कि कम पीना. पानी की सही मात्रा व्यक्ति की उम्र और वजन पर निर्भर करती है. जैसे 9 से 13 साल के बच्चों को लगभग 2 लीटर और वयस्कों को अपने वजन के प्रति किलोग्राम पर 30 से 35 मिलीलीटर पानी पीना चाहिए (उदाहरण के तौर पर 40 किलो वजन पर 2 लीटर और 80 किलो पर 3 लीटर). यदि हम अपनी शारीरिक जरूरत से अधिक पानी पीते हैं, तो इससे किडनी पर काम का अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है, जिससे वह शरीर से टॉक्सिन्स को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाती. इसका सबसे गंभीर परिणाम हाइपोनेट्रेमिया के रूप में सामने आ सकता है, जिसमें खून में पानी अधिक होने से सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से गिर जाता है और शरीर की कोशिकाओं में सूजन आने लगती है, जो मस्तिष्क और अन्य अंगों के लिए जानलेवा हो सकती है. इसलिए स्वस्थ रहने के लिए हमेशा सही नियम और सही मात्रा में ही पानी का सेवन करना चाहिए. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
स्वाद और सेहत का खजाना है ये जंगल जलेबी, साल में मिलती है सिर्फ 2 महीने, खाते ही कहेंगे ‘वाह’ – News18 हिंदी

X स्वाद और सेहत का खजाना है ये जंगल जलेबी, साल में मिलती है सिर्फ 2 महीने Jungal Jalebi Health Benefits: जंगलों में पाया जाने वाला कीकर, जिसे स्थानीय भाषा में जंगल जलेबी के नाम से जाना जाता है, इन दिनों शहरों के बाजारों में खासा लोकप्रिय हो रहा है. खट्टी-मीठी स्वाद वाला यह जंगली फल न केवल लोगों की जुबान पर चढ़ रहा है बल्कि आदिवासी क्षेत्र की महिलाओं के लिए आय का साधन भी बनते जा रहा है. सीधी जिले के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में इसकी भरपूर पैदावार होती है. यह केवल दो महीने ही मिलती है. आयुर्वेदिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ आरपी परौहा ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि गर्मी के मौसम में मिलने वाली जंगल जलेबी का सेवन शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है. इसके नियमित सेवन से इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है, त्वचा रोगों में राहत मिलती है, आंखों की रोशनी बेहतर होती है और शुगर नियंत्रण में मदद मिलती है. साथ ही यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी सहायक है. उन्होंने बताया कि यह फल शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम कर गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने का काम करता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
घमौरी का इलाज I skin care tips in summers

Last Updated:May 07, 2026, 16:00 IST गर्मी और उमस के बढ़ते असर से त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. जिला एमएमजी अस्पताल में घमौरी के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है, जिसमें छोटे बच्चों से लेकर बड़े लोग तक शामिल हैं. डॉक्टरों के अनुसार, अधिक पसीना आने और पसीने की ग्रंथियां बंद हो जाने से त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने उभर आते हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण और पस का रूप ले सकते हैं. गाजियाबाद. गर्मियों की बढ़ती तपिश और उमस अब लोगों की त्वचा पर भी असर दिखाने लगी है, जिला एमएमजी अस्पताल में इन दिनों घमौरी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. छोटे बच्चों से लेकर बड़े तक इस समस्या से परेशान होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि तेज गर्मी और ज्यादा पसीना आने के कारण त्वचा की पसीने वाली ग्रंथियां बंद हो जाती हैं, जिससे पसीना बाहर नहीं निकल पाता और त्वचा के अंदर ही फंस जाता है. यही स्थिति आगे चलकर घमौरी का रूप ले लेती है. शुरुआत में छोटे-छोटे दाने दिखाई देते हैं, लेकिन लापरवाही करने पर इनमें लालपन, जलन और पस तक पड़ सकती है.जिला एमएमजी अस्पताल की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या द्विवेदी ने बताया कि मई की शुरुआत के साथ ही तापमान लगातार बढ़ रहा है. गर्मी के कारण शरीर से अधिक पसीना निकलता है. कई बार पसीने वाली ग्रंथियां बंद हो जाती हैं जिससे पसीना त्वचा के अंदर जमा हो जाता है और छोटे-छोटे लाल दाने बनने लगते हैं. इन दानों में पानी जैसा पदार्थ भी भरा दिखाई देता है, उन्होंने बताया कि घमौरी तीन चरणों में बढ़ती है. शुरुआत में हल्के दाने निकलते हैं फिर उनमें लालपन आता है और समय पर इलाज न मिलने पर उनमें संक्रमण होकर पस भी पड़ सकता है. अधिक पसीना आने पर शरीर को रखें साफ डॉक्टरों के अनुसार घमौरी से बचने के लिए शरीर को ठंडा और सूखा रखना बेहद जरूरी है. कोशिश करनी चाहिए कि ज्यादा देर तक धूप और गर्मी में न रहें, घर से बाहर निकलने पर ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि हवा शरीर तक पहुंच सके. टाइट कपड़े, लेगिंग और ज्यादा फिटिंग वाले कपड़े गर्मियों में परेशानी बढ़ा सकते हैं. अधिक पसीना आने पर समय-समय पर शरीर को साफ करना चाहिए और दिन में कम से कम दो बार ठंडे पानी से नहाना फायदेमंद रहता है. डॉ. दिव्या द्विवेदी ने बताया कि छोटे बच्चों में भी घमौरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में माता-पिता को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, कई लोग बच्चों के शरीर पर ज्यादा मात्रा में पाउडर लगा देते हैं लेकिन यह नुकसानदायक हो सकता है. पाउडर पसीने वाली ग्रंथियों को और बंद कर देता है जिससे समस्या बढ़ जाती है. इसकी जगह ठंडे या गीले सूती कपड़े से शरीर को साफ करना बेहतर होता है. डॉक्टरों ने लोगों को गर्मियों में ज्यादा पानी पीने, तरल पदार्थ लेने और मौसमी फलों का सेवन करने की सलाह दी है. साथ ही यदि घमौरी में ज्यादा लालपन, जलन या पस दिखाई दे तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी गई है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Ghaziabad,Uttar Pradesh








