Wednesday, 24 Jun 2026 | 11:22 AM

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विटामिन D की कमी इन बीमारियों की दावत, क्या होता है कारण और लक्षण? डॉक्टर से जानें सबकुछ

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X विटामिन D की कमी इन बीमारियों की दावत, क्या होता है कारण और लक्षण?   Vitamin-D Deficiency cause: आजकल बड़ी संख्या में लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं, जो कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है. इस विषय पर डॉ. चंद्रकांत भास्कर बताते हैं कि लोगों का जीवन पूरी तरह से बदल चुका है. पहले जहां लोग खुले वातावरण में अधिक समय बिताते थे, वहीं अब ज्यादातर समय घर या दफ्तर के अंदर ही बीतता है. लंबे ऑफिस ऑवर्स, वर्क फ्रॉम होम और धूप में कम निकलना विटामिन डी की कमी के प्रमुख कारण बन गए हैं. यदि किसी व्यक्ति को लगातार थकान, कमजोरी या हड्डियों में दर्द जैसी समस्याएं महसूस होती हैं, तो उसे विटामिन डी की जांच जरूर करानी चाहिए. समय पर जांच और उपचार से कई गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है.

गर्मी में चेहरे पर कपड़ा बांधना पड़ सकता है भारी, स्किन को हो सकते हैं ये नुकसान, जानिए एक्सपर्ट की राय – News18 हिंदी

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X गर्मी में चेहरे पर कपड़ा बांधना पड़ सकता है भारी, हो सकते हैं ये नुकसान   Summer Health Tips: रीवा सुपर स्पेशलिस्टी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर अक्षय श्रीवास्तव कहते हैं कि गर्मियों के दिनों में पुरुष और महिलाएं दोनों ही अपने चेहरे पर कपड़ा बांधकर बाहर निकलते हैं, ताकि टैनिंग से बचा जा सके. लेकिन एक कपड़ा बांधने से आपकी स्किन टैन नहीं होगी या फिर धूप और धूल-मिट्टी आपकी त्वचा तक नहीं पहुंच पाएगी. मुंह पर सिर्फ कपड़ा बांधना, गर्मी में स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं को पैदा कर सकता है. अक्सर ऐसा देखा जाता है कि कई लोग एक ही कपड़े को हफ्तेभर मुंह में बांधकर घूमते हैं. ऐसे में इतने दिनों की जमी गंदगी आपके चेहरे को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे एक्ने, पिम्पल्स, तेलीय त्वचा, चेहरा फीका पड़ने और कई तरह की स्किन एलर्जी हो सकती है और धूप का असर भी होने लगता है. लेकिन क्या ऐसा करना सही है. गर्मी में मुंह पर कपड़ा बांधने के कई फायदे हैं, तो कई नुकसान भी हैं. गर्मी में हमेशा ही सूती और हल्के रंग के कपड़ों का इस्तेमाल करना चाहिए.

आम खाकर पानी पीना कितना घातक? 99% लोग करते हैं ये खतरनाक गलती – News18 हिंदी

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X Health tips : आम खाकर पानी पीना कितना घातक? 99% लोग करते हैं ये गलती   ऋषिकेश. गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में आम की खेप सजने लगेगी. आपने भी बचपन में एक बात जरूर सुनी होगी है कि आम खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना चाहिए. ये सेहत के लिए ठीक नहीं. इसके पीछे एक वैज्ञानिक सोच छिपी हुई है. लोकल 18 से ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि आम को गरम तासीर वाला फल माना जाता है. जब हम आम खाते हैं, तो शरीर उसे पचाने के लिए काम करना शुरू कर देता है. ऐसे में अगर हम तुरंत ठंडा पानी पी लेते हैं, तो यह पाचन क्रिया पर असर डाल सकता है. हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आम खाने के बाद पानी पीना पूरी तरह गलत है.

किसी के लिए अमृत, किसी के लिए जहर…जानिए एलोवेरा का घातकपन, पीते ही होने लगेगी ऐंठन-उल्टी

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X Health Tips : जानिए एलोवेरा का घातकपन, पीते ही होने लगेगी ऐंठन-उल्टी   ऋषिकेश. आयुर्वेद में एलोवेरा को अमृत समान माना गया है. ये त्वचा की सुंदरता बढ़ाने, पाचन सुधारने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करने में आगे है. सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस पीना हेल्थ ट्रेंड बन चुका है, लेकिन इसका अधिक सेवन भी घातक है. लोकल 18 से ऋषिकेश आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि एलोवेरा में विटामिन ए, सी और ई के साथ एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं. यह पेट की गर्मी को शांत करने, कब्ज दूर करने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. त्वचा पर लगाने से यह मॉइस्चराइजिंग का काम करता है. हालांकि हर शरीर की प्रकृति अलग होती है. एलोवेरा में पाए जाने वाले कुछ तत्व, खासकर लेटेक्स भाग, अधिक मात्रा में लेने पर पेट में ऐंठन, दस्त और उल्टी जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. कई बार लोग जल्दी फायदा पाने के लिए मात्रा बढ़ा देते हैं, लेकिन यही गलती नुकसान का कारण बनती है. गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को भी एलोवेरा का सेवन सावधानी से करना चाहिए. कुछ मामलों में यह गर्भाशय संकुचन को प्रभावित कर सकता है. बच्चों का पाचन तंत्र संवेदनशील होता है.

Benefits of Tendu Leaves | टिमरू के पत्तों के औषधीय लाभ | Ayurvedic Benefits of Tendu Leaves for Skin and Sugar

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Last Updated:April 24, 2026, 06:17 IST Ayurvedic Benefits of Tendu Leaves for Skin and Sugar: गर्मियों के मौसम में अरावली क्षेत्र में पाया जाने वाला टिमरू का फल स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है, लेकिन इसके पत्ते भी औषधीय गुणों से भरपूर हैं. आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य दामोदर प्रसाद चतुर्वेदी के अनुसार, तेंदू के पत्ते स्किन रोगों, घाव भरने, शुगर कंट्रोल और पेट की गर्मी शांत करने में सहायक होते हैं. इनमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं. लू के मौसम में यह शरीर के पित्त को संतुलित कर ठंडक प्रदान करते हैं. हालांकि, शुगर और गंभीर रोगियों को इसके उपयोग से पहले आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह अवश्य लेनी चाहिए. गर्मियों की आहट के साथ ही सिरोही, उदयपुर और अरावली की पहाड़ियों में ‘टिमरू’ (तेंदू) के फलों की बहार आ जाती है. यह फल न केवल अपने स्वाद, बल्कि अरावली क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत के रूप में भी पहचाना जाता है. स्थानीय आदिवासी परिवारों, विशेषकर महिलाओं के लिए यह फल आजीविका का एक बड़ा साधन है, जो इसे जंगलों से एकत्रित कर बाजारों में बेचकर अपनी आय अर्जित करती हैं. यह फल न केवल स्वाद और सेहत के लिए फायदेमंद है, बल्कि इसके पत्ते भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. हालांकि, व्यावसायिक स्तर पर इन पत्तों का मुख्य उपयोग बीड़ी बनाने के लिए किया जाता है, जिसके लिए वन विभाग द्वारा हर साल बाकायदा टेंडर जारी किए जाते हैं. लेकिन बीड़ी उद्योग के इतर, पारंपरिक चिकित्सा और घरेलू नुस्खों में इन पत्तों का उपयोग कई शारीरिक समस्याओं और तकलीफों से निजात पाने के लिए भी किया जाता है. अरावली के आदिवासी क्षेत्रों में लोग आज भी इसके पत्तों के गुणों को स्वास्थ्य लाभ के लिए पहचानते हैं. आयुर्वेद के दृष्टिकोण से टिमरू या तेंदू के पत्तों का महत्व अत्यंत गहरा है. सिरोही के सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेद अधिकारी और पिछले 40 वर्षों से आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में अनुभवी विशेषज्ञ, वैद्य दामोदर प्रसाद चतुर्वेदी के अनुसार, यह फल जितना पोषक तत्वों से भरपूर है, उतने ही इसके पत्ते भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सिद्ध होते हैं. उनके लंबे अनुभव के आधार पर, अरावली की कंदराओं में पाए जाने वाले इन पत्तों में कई ऐसे तत्व मौजूद हैं जो प्राकृतिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google आयुर्वेद में टिमरू के पत्तों को स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताया गया है. सिरोही के सेवानिवृत्त जिला आयुर्वेद अधिकारी वैद्य दामोदर प्रसाद चतुर्वेदी, जो पिछले 40 वर्षों से आयुर्वेद चिकित्सा में सक्रिय हैं, उन्होंने इसके गुणों पर प्रकाश डाला है. उनके अनुसार, जितना टिमरू का फल फायदेमंद है, उतने ही गुणकारी इसके पत्ते भी होते हैं. इन पत्तों का उपयोग आयुर्वेद में मुख्य रूप से त्वचा (स्किन) से जुड़ी तकलीफों, घावों को जल्दी भरने, दस्त, शुगर और शरीर की गर्मी को कम करने के लिए औषधीय रूप से किया जाता है. इन पत्तों में विशेष रूप से रोगाणुरोधी, एंटीऑक्सीडेंट और सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं. ये तत्व घावों को सुखाने, पेट दर्द में राहत देने और स्किन इन्फेक्शन को कम करने में काफी मददगार साबित होते हैं. पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में टिमरू के पत्तों का उपयोग सदियों से एक विश्वसनीय औषधि के रूप में किया जाता रहा है. विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में घाव और चोट लगने पर इन पत्तों को प्राथमिक उपचार की तरह इस्तेमाल किया जाता है. शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन या जलन होने पर टिमरू के पत्तों का लेप लगाने से तत्काल राहत मिलती है. इन पत्तों को पीसकर बनाए गए पेस्ट या इनके अर्क (लिक्विड) का लेप प्रभावित स्थान पर करने से दर्द और जलन में काफी कमी आती है. इसके प्राकृतिक हीलिंग गुण संक्रमण को रोकने और जख्म को जल्दी सुखाने में बेहद प्रभावी साबित होते हैं. तेंदू के पत्तों में मौजूद ‘कॉन्स्टिपेटिंग’ (Constipating) और ‘स्टिप्टिक’ (Styptic) गुणों के कारण इन्हें पेट से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान में बेहद कारगर माना जाता है. वर्तमान में गर्मी का प्रकोप बढ़ने के साथ ही लू लगने का खतरा भी काफी बढ़ गया है. ऐसे में तेंदू के पत्तों का औषधीय उपयोग शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत करने में सहायक होता है. ये पत्ते शरीर में बढ़े हुए पित्त दोष को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करते हैं और शरीर को भीतर से ठंडक प्रदान करते हैं. तेंदू के पत्तों का औषधीय महत्व मधुमेह (शुगर) के प्रबंधन में भी काफी प्रभावी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, इन पत्तों में मौजूद तत्व रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं. हालांकि, इसके उपयोग को लेकर सावधानी बरतना भी उतना ही अनिवार्य है. विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर शुगर रोगियों को बिना किसी प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के इसका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए. चूंकि शुगर लेवल का आवश्यकता से अधिक बढ़ना या घटना, दोनों ही स्थितियाँ स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं, इसलिए दवा की मात्रा और उपयोग का तरीका केवल एक विशेषज्ञ ही सही ढंग से तय कर सकता है. First Published : April 24, 2026, 06:17 IST

केसीआर की वापसी कविता के बड़े राजनीतिक कदम से मिलती है

केसीआर की वापसी कविता के बड़े राजनीतिक कदम से मिलती है

आखरी अपडेट:23 अप्रैल, 2026, 15:14 IST जैसे-जैसे केसीआर सार्वजनिक पहुंच बढ़ा रहे हैं और कविता एक पार्टी लॉन्च करने की तैयारी कर रही हैं, तेलंगाना का राजनीतिक परिदृश्य बदलते गठबंधनों और मतदाता अनिश्चितता के साथ एक उच्च जोखिम वाले चरण में प्रवेश कर रहा है। हाल ही में जगित्याल सार्वजनिक बैठक में सरकार की कड़ी आलोचना के बाद, केसीआर अब वारंगल में एक और बड़े राजनीतिक कार्यक्रम की तैयारी कर रहे हैं। कुछ ही हफ्तों में सार्वजनिक पहुंच की त्वरित वापसी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर दिया है। साथ ही, उन रिपोर्टों पर ध्यान बढ़ रहा है कि के. कविता 25 अप्रैल को एक नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च कर सकती हैं, एक ऐसा कदम जो बीआरएस की गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है। उम्मीद है कि बीआरएस मई के पहले सप्ताह में वारंगल में बड़े पैमाने पर ‘रयाथु आशीर्वाद सभा’ ​​आयोजित करेगा, जिसमें किसानों के मुद्दों पर स्पष्ट ध्यान दिया जाएगा। के.चंद्रशेखर राव फसल के नुकसान और कृषि चुनौतियों पर चिंताओं को संबोधित करने के साथ-साथ सरकार की नीतियों पर भी निशाना साध सकते हैं। इस बैठक को कृषक समुदाय के साथ फिर से जुड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस सरकार ने तेलंगाना में कई कल्याणकारी कदम उठाए हैं, जिनमें 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, सब्सिडी वाली रसोई गैस, आवास योजनाएं और महिला समूहों के लिए वित्तीय सहायता शामिल है। ये पहल कई लाभार्थियों तक पहुंची हैं। हालाँकि, बीआरएस अब अपने राजनीतिक आधार को फिर से बनाने के लिए उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जहां असंतोष अभी भी मौजूद हो सकता है, खासकर किसानों के बीच। हालांकि तेलंगाना में किसानों के बीच कुछ असंतोष है, लेकिन यह एक समान नहीं है। सरकार ने ऋण माफी और वित्तीय सहायता जैसे उपाय पेश किए हैं, लेकिन कार्यान्वयन में देरी ने चिंता पैदा कर दी है। किसान अक्सर समर्थन की प्रतीक्षा में ऋण पर निर्भर रहते हैं, जिससे उन पर वित्तीय बोझ बढ़ जाता है। इसके विपरीत, रायथु बंधु और सिंचाई परियोजनाओं जैसी पिछली योजनाओं को अभी भी बीआरएस द्वारा पिछले समर्थन के उदाहरण के रूप में उजागर किया जा रहा है। जगित्याल बैठक में भारी भीड़ के बाद, बीआरएस नेता वारंगल में भी उसी गति को दोहराने की उम्मीद कर रहे हैं। के.चंद्रशेखर राव की नए सिरे से सार्वजनिक उपस्थिति को पार्टी कैडर के लिए एक प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है। इस बीच, जैसे-जैसे कांग्रेस सरकार सत्ता में ढाई साल के करीब पहुंच रही है, कुछ वर्गों ने शासन की गति और दृश्यता पर असंतोष व्यक्त करना शुरू कर दिया है। कविता के इस कदम ने इसके संभावित प्रभाव पर बहस छेड़ दी है, खासकर बीआरएस के साथ उनके पिछले जुड़ाव को देखते हुए। जबकि उन्होंने कहा कि पार्टी उनकी स्वतंत्र पहल है, राजनीतिक पर्यवेक्षक बारीकी से देख रहे हैं कि यह गठबंधन और प्रतिस्पर्धा को कैसे नया आकार देती है। ऐसी चिंताएँ हैं कि एक नया राजनीतिक प्रवेशकर्ता तेलंगाना में विपक्षी वोटों को विभाजित कर सकता है। कांग्रेस के सत्ता में होने और बीआरएस और भाजपा दोनों के खुद को विकल्प के रूप में पेश करने के साथ, एक खंडित विपक्ष सत्तारूढ़ पार्टी को फायदा पहुंचा सकता है। यहां तक ​​कि वोट शेयर में एक छोटा सा बदलाव भी नतीजों को प्रभावित कर सकता है, जिससे भविष्य की चुनावी लड़ाई में एकता एक महत्वपूर्ण कारक बन जाएगी। इन घटनाक्रमों के बीच, के.चंद्रशेखर राव के जनता के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के फैसले को एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। जैसे-जैसे राजनीतिक गतिविधियां तेज होंगी, तेलंगाना में कांग्रेस, बीआरएस, बीजेपी और एक संभावित नई पार्टी के बीच बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है। जैसे-जैसे राज्य अगले चुनावों के करीब आएगा यह स्पष्ट हो जाएगा। आगे रहें, तेजी से पढ़ें News18 ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड को स्कैन करें और कभी भी, कहीं भी निर्बाध समाचार अनुभव का आनंद लें। लॉग इन करें हाल ही में जगित्याल सार्वजनिक बैठक में सरकार की कड़ी आलोचना के बाद, केसीआर अब वारंगल में एक और बड़े राजनीतिक कार्यक्रम की तैयारी कर रहे हैं। कुछ ही हफ्तों में सार्वजनिक पहुंच की त्वरित वापसी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर दिया है। साथ ही, उन रिपोर्टों पर ध्यान बढ़ रहा है कि के. कविता 25 अप्रैल को एक नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च कर सकती हैं, एक ऐसा कदम जो बीआरएस की गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है। अगली फोटोगैलरी

Health Tips: डाइट में शामिल करें इस छोटे से बीज के दो चम्मच, मोटापा और खराब कोलेस्ट्रॉल होगा कंट्रोल

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अलसी के बीज स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. यह वजन घटाने, कोलेस्ट्रॉल कम करने, डायबिटीज नियंत्रित करने और हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं. सही लाभ पाने के लिए इन्हें हल्का भूनकर पाउडर बनाकर सीमित मात्रा में रोजाना सेवन करना जरूरी है.

गर्मी में पानी की कमी बन सकती है किडनी फेल का कारण, एक्सपर्ट से जानें रोज कितना लीटर पिएं पानी

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X गर्मी में पानी की कमी बन सकती है किडनी फेल का कारण, जानें रोज कितना पिएं पानी   Health Tips: गर्मी में शरीर में पानी की कमी सिर्फ कमजोरी नहीं, किडनी के लिए भी खतरा बन सकती है. गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल के किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. एल.के. झा बताते है कि किडनी शरीर से जहरीले तत्व और अतिरिक्त पानी बाहर निकालती है. पानी कम होने पर पेशाब घटता है. गाढ़ा हो जाता है और हानिकारक तत्व शरीर में जमा होने लगते है. इससे किडनी स्टोन और किडनी फेल होने का खतरा बढ़ सकता है. डॉक्टर के अनुसार सामान्य दिनों में रोज 1.5 से 2 लीटर पानी पीना चाहिए, जबकि गर्मियों में 2.5 से 3 लीटर जरूरी है. ज्यादा पसीना आने या एक्सरसाइज करने वालों को 3 से 4 लीटर पानी लेना चाहिए. सांस फूलना, भूख कम लगना, उल्टी, कमजोरी या पेशाब में बदलाव जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं. बुजुर्ग और बच्चों को खास सावधानी रखनी चाहिए.

नाखून गिनना छोड़िए, वरना हो सकता है भारी नुकसान! जानिए क्यों रेबीज के सामने 18 या 20 का गणित है फेल – News18 हिंदी

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X नाखून गिनना छोड़िए, जानिए क्यों रेबीज के सामने 18 या 20 का गणित है फेल   Health News: क्या कुत्ते के नाखून गिनने से रेबीज का जहर कम हो जाता है? विज्ञान के दौर में भी पूर्णिया के ग्रामीण इलाकों में एक अजब-गजब गणित चल रहा है. यहां कुत्ता काटने पर लोग डॉक्टर के पास भागने के बजाय पहले कुत्ते के पैर पकड़कर उसके नाखून गिनने में जुट जाते हैं. दरअसल, गंगेली और आसपास के गांवों में यह पुरानी भ्रांति जड़ जमाए हुए है कि 18 नाखून वाला कुत्ता ‘साधारण’ होता है, जबकि 20 नाखून वाला कुत्ता ‘अत्यंत विषैला’ होता है. लोग मानते हैं कि 18 नाखून होने पर खतरा नहीं है, जो कि एक जानलेवा अंधविश्वास है. रामबहादुर सिंह जैसे गांव के बुजुर्ग अब इस भ्रम के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं. उनका कहना है कि कुत्ता चाहे 18 नाखून का हो या 20 का, वायरस नाखून देखकर हमला नहीं करता. अगर आप भी इस ‘नाखून वाले गणित’ के भरोसे बैठे हैं, तो सावधान हो जाएं. रेबीज का इलाज नाखून गिनना नहीं, बल्कि अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाना है. याद रखें, भ्रांति पालना जान जोखिम में डालना है.

सेहत का खजाना है ये घास, बालों से लेकर सांस की बीमारियों में वरदान! फायदे जानकर आप भी ढूंढेंगे – News18 हिंदी

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X सेहत का खजाना है ये घास, बालों से लेकर सांस की बीमारियों में वरदान!   Health Tips: दूधी घास, जो देखने में आम घास जैसी लगती है, लेकिन इसके फायदे चौंका देने वाले हैं. इस पौधे को तोड़ने पर इसमें से दूध जैसा सफेद रस निकलता है, इसी वजह से इसे दूधी घास कहा जाता है. दूधी घास बालों की समस्याओं में काफी फायदेमंद मानी जाती है. सफेद बाल, बाल झड़ना और गंजापन जैसी दिक्कतों में इसके पत्तों का रस उपयोगी होता है. कनेर के पत्तों के साथ मिलाकर लगाने से बाल मजबूत होते हैं और झड़ना कम होता है. खांसी, अस्थमा जैसी समस्याओं में भी यह पौधा कारगर माना जाता है. इसके पत्तों का पाउडर बनाकर काढ़ा तैयार किया जाता है, जिसे नियमित लेने से सांस की नली की सूजन कम होती है और श्वसन तंत्र मजबूत होता है. दूधी घास के दूध में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. दाद, खाज और खुजली जैसी समस्याओं में इसे लगाने से राहत मिलती है. हालांकि, दूधी घास के कई फायदे हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. गलत मात्रा या बिना जानकारी के उपयोग नुकसान भी पहुंचा सकता है.