Thursday, 30 Jul 2026 | 11:37 AM

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सुप्रीम कोर्ट बोला- मंत्री शाह को ऐसे कमेंट्स की आदत:कर्नल सोफिया मामले में एमपी सरकार को फटकार, कहा- बहुत हुआ, आदेश का पालन करें

सुप्रीम कोर्ट बोला- मंत्री शाह को ऐसे कमेंट्स की आदत:कर्नल सोफिया मामले में एमपी सरकार को फटकार, कहा- बहुत हुआ, आदेश का पालन करें

सेना की महिला अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अभियोजन स्वीकृति देने में हो रही देरी पर राज्य सरकार को फटकार लगाई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कड़े शब्दों में कहा- “Enough is enough (बस बहुत हुआ), अब हमारे आदेश का पालन कीजिए।” कोर्ट ने कहा- यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था सुनवाई के दौरान जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मंत्री का बचाव करते हुए कहा कि शायद उनके बयान को गलत समझा गया और वे महिला अधिकारी की प्रशंसा करना चाहते थे तो सीजेआई सूर्यकांत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा- यह सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था। एक राजनेता के तौर पर उन्हें अच्छी तरह पता है कि किसी महिला अधिकारी की प्रशंसा कैसे की जाती है। कोर्ट ने SIT की स्टेटस रिपोर्ट का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि मंत्री को इस तरह के कमेंट करने की आदत है। इंदौर के पास रायकुंडा गांव में दिया था विवाद बयान यह विवाद पिछले साल भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ की गई क्रॉस-बॉर्डर सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर के बाद शुरू हुआ था। कर्नल सोफिया कुरैशी ने इस ऑपरेशन की मीडिया ब्रीफिंग की थी। इसके बाद महू के रायकुंडा गांव में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने कहा था, “जिन्होंने हमारी बेटियों को विधवा किया, हमने उन्हें सबक सिखाने के लिए उनकी ही एक बहन को भेजा।” इस बयान को कर्नल कुरैशी के धर्म से जोड़कर देखा गया, जिसकी हर तरफ निंदा हुई। जज ने कहा था- अदालत के आदेश को लागू कराने जरूरत पड़ी तो नर्क भी एक कर दूंगा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे। उन्होंने यहां तक कहा था- “अदालत के आदेश को लागू कराने के लिए जरूरत पड़ी तो मैं नर्क भी एक कर दूंगा।” एसआईटी ने सरकार से केस चलाने की परमिशन मांगी, दो हफ्ते से लंबित सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर मंत्री के खिलाफ केस चलाने (अभियोजन) के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी है, जो पिछले दो हफ्तों से लंबित है। मंत्री शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152, 196 (1) (b) और 197(1)(c) के तहत मामला दर्ज है, जो राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरे में डालने और समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ाने से संबंधित हैं। अगली सुनवाई 4 हफ्ते बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह परिस्थितियों की समग्रता को देखते हुए जल्द निर्णय ले। कोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई 4 सप्ताह बाद तय की है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने मंत्री को गिरफ्तारी से सुरक्षा दे रखी है, लेकिन एफआईआर रद्द करने या माफी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। ……………………………. यह खबर भी पढ़ें MP के मंत्री विजय शाह बोले- जिन्होंने बहनों का सिंदूर उजाड़ा, उन्हीं की बहन को भेजकर ऐसी-तैसी कराई मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री विजय शाह ने भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने कहा- जिन लोगों ने हमारी बेटियों का सिंदूर उजाड़ा था, मोदी जी ने उन्हीं की बहन भेजकर उनकी ऐसी की तैसी करा दी। पढ़ें पूरी खबर

मोहन कैबिनेट ने लखुंदर सिंचाई परियोजना को दी मंजूरी:शाजापुर के लिए 155 करोड़ रुपए स्वीकृत; 9 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी

मोहन कैबिनेट ने लखुंदर सिंचाई परियोजना को दी मंजूरी:शाजापुर के लिए 155 करोड़ रुपए स्वीकृत; 9 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी

मध्य प्रदेश की मोहन कैबिनेट ने शाजापुर जिले के लिए लखुंदर उच्च दाब सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में इस परियोजना के लिए 155 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। इससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। यह परियोजना शाजापुर जिले के 17 गांवों और उज्जैन जिले की तराना तहसील के 7 गांवों को लाभान्वित करेगी। इसके तहत कुल 9,000 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है। कैबिनेट बैठक में आमजन के हित, प्रदेश के विकास, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े कई अहम फैसलों पर भी मुहर लगाई गई। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने बैठक के बाद इन निर्णयों की जानकारी दी। मंत्री काश्यप ने बताया कि कैबिनेट ने कुल 53 हजार करोड़ रुपए की विभिन्न योजनाओं को वर्ष 2031 तक जारी रखने को भी मंजूरी दी है। यह निर्णय प्रदेश के समग्र विकास और विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर प्रगति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

MP Pension Offices Closing; SBI Takes Over Payment Process From April 2026

MP Pension Offices Closing; SBI Takes Over Payment Process From April 2026

मध्य प्रदेश सरकार राज्य के लगभग साढ़े चार लाख पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए पेंशन भुगतान की व्यवस्था में बदलाव करने वाली है। नई व्यवस्था के तहत, अब किसी भी बैंक में खाता रखने वाले सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद सीधे अपने उसी खाते में पेंशन . राज्य शासन ने इस प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के मकसद से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एकमात्र ‘एग्रीगेटर बैंक’ के रूप में नियुक्त किया है। यह महत्वपूर्ण बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी होगा। बता दें कि एमपी में पेंशन की मौजूदा व्यवस्था में कई समस्याएं हैं इसकी वजह से पेंशन भुगतान की प्रक्रिया में अक्सर देरी होती है। साथ ही तकनीकी बाधाओं की वजह से भी पेंशन मिलने में दिक्कत होती है। सरकार ने जिला पेंशन कार्यालयों को भी बंद करने का फैसला किया है। आखिर क्या है नईे व्यवस्था? इसका कितना फायदा होगा और दूसरे बैंकों की भूमिका क्या रहेगी। पढ़िए रिपोर्ट मौजूदा व्यवस्था की 4 प्रमुख समस्याएं मौजूदा पेंशन प्रणाली कई जटिलताएं और चुनौतियां हैं। इसकी वजह से पेंशनर्स को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रमुख रूप से 4 समस्याएं हैं… बैंक बदलने की मजबूरी: कई मामलों में, पेंशनभोगियों को पेंशन लेने के लिए उन्हीं बैंकों में अकाउंट बनाए रखना पड़ता था, जहां उनका सैलरी अकाउंट था। तकनीकी असमानता: महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि या वेतनमान में संशोधन जैसी स्थितियों में पेंशन राशि को अपडेट करने की प्रक्रिया जटिल है। यह कार्य सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेल (CPPC) के माध्यम से किया जाता है, और यह सुविधा केवल 4 प्रमुख बैंकों में ही उपलब्ध है। जिन बैंकों में यह सिस्टम नहीं है, वहां पेंशन अपडेट होने में काफी समय लगता है, जिससे पेंशनर्स को एरियर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। PPO हस्तांतरण में देरी: सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी का पेंशन अदायगी आदेश (PPO) संबंधित बैंक को भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और समन्वय की कमी के कारण अक्सर सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पेंशन शुरू होने में देरी होती है। वेतनमान फिक्सेशन की त्रुटियां: कर्मचारियों के वेतनमान फिक्सेशन (Pay Fixation) में फिट-मेंट फैक्टर, मूल वेतन या महंगाई भत्ते की गणना में हुई मामूली गलती भी पेंशन प्रक्रिया को रोक देती है, जिसे सुधारने में महीनों लग जाते है। पेंशनर्स का आरोप- कर्मचारी रिश्वत लेते हैं पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेशदत्त जोशी इन समस्याओं के अलावा एक और मुद्दे पर ध्यान दिलाते हैं। उनके मुताबिक अभी पेंशन प्रकरणों का काम जिला और संभागीय पेंशन दफ्तरों के पास है। जैसे ही कोई कर्मचारी रिटायर होता है और उसका प्रकरण जब पेंशन कार्यालय में जाता है तो वहां मौजूद कर्मचारी एक ही प्रकार की कई आपत्तियां लगाते हैं। इन आपत्तियों को वो बार बार लगाकर कर्मचारी के संबंधित कार्यालय को भेजते हैं। जोशी के मुताबिक वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि रिटायर्ड कर्मचारी उनकी सेवा करें( रिश्वत) और इसके बदले वो उनका पीपीओ जारी करें। मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव होगा पूरी प्रोसेस को सेंट्रलाइज्ड किया जा रहा है। राज्य सरकार पेंशन की पूरी राशि केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को हस्तांतरित करेगी, जिसमें राज्य सरकार का मुख्य खाता है। SBI एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए, प्रदेश के सभी पेंशनभोगियों के बैंक खातों में पेंशन की राशि वितरित करेगा, चाहे उनका खाता किसी भी बैंक में क्यों न हो। अब तक जो क्लेम और कमीशन 11 अलग-अलग बैंकों को मिलता था, वह अब केवल SBI को मिलेगा, क्योंकि पेंशन वितरण का पूरा प्रबंधन और क्लेम भेजने की जिम्मेदारी सिर्फ SBI की होगी। प्रशासनिक स्तर पर बदलाव: बंद होंगे जिला पेंशन कार्यालय इस सुधार प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी जिलों में स्थित पेंशन कार्यालयों को बंद किया जाएगा। हालांकि, संभागीय मुख्यालयों में स्थित कार्यालय पहले की तरह काम करते रहेंगे। पेंशन निर्धारण की पूरी प्रक्रिया अब भोपाल स्थित मुख्यालय से केंद्रीकृत रूप से संचालित होगी। इस प्रणाली की सबसे खास बात इसकी पारदर्शिता और सीक्रेसी है। अब किसी भी कर्मचारी को यह पता नहीं चलेगा कि उसकी पेंशन का निर्धारण कौन-सा अधिकारी कर रहा है। उदाहरण के लिए, भिंड में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी की पेंशन फाइल का निर्धारण जबलपुर में बैठा कोई भी डिप्टी डायरेक्टर कर सकता है। सरकार का मानना है कि इस कदम से स्थानीय स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार और अनावश्यक दबाव पर पूरी तरह से रोक लगेगी। SBI ने शुरू की तैयारी, 2 लाख PPO होंगे ट्रांसफर इस नई व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए SBI ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में लगभग 4 लाख 46 हजार पेंशनर्स हैं, और इस साल 22 हजार और कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। SBI ने अन्य 10 बैंकों से 2 लाख से अधिक PPO वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बड़े पैमाने के कार्य को पूरा होने में 3 से 4 महीने लगने का अनुमान है। ये खबर भी पढ़ें…. MP के 22 लाख पेंशनर्स को झटका:केंद्र का सहायता राशि बढ़ाने से इनकार, नीति आयोग की सिफारिश के बावजूद वृद्धि नहीं मध्य प्रदेश के करीब 22.5 लाख बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनर्स के लिए दिल्ली से निराशाजनक खबर है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यसभा में स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत दी जाने वाली पेंशन राशि में बढ़ोतरी करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। केंद्र सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन लाखों लोगों पर पड़ेगा, जो महंगाई के इस दौर में आर्थिक मदद बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे थे। पूरी खबर पढ़ें….