'रामायण' ट्रेलर लॉन्च इवेंट:रणबीर ने सनी देओल के पैर छुए; बाबा रामदेव ने ₹4000 करोड़ के बजट पर ली चुटकी, मंच पर किया योग

फिल्म ‘रामायण: प्रथम संकल्प’ का ट्रेलर शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इवेंट में लॉन्च किया गया। इस मौके पर डायरेक्टर नितेश तिवारी, प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा और फिल्म की स्टार कास्ट मौजूद रही। मेकर्स ने घोषणा की कि ट्रेलर 24 जुलाई को दुनियाभर में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगा। इवेंट में भगवान राम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश, सनी देओल, रवि दुबे, विवेक ओबेराय सहित अन्य कलाकार शामिल हुए। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर ने सनी देओल के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। करीब चार मिनट के ट्रेलर में फिल्म के भव्य विजुअल्स, बड़े पैमाने पर तैयार की गई दुनिया और प्रमुख किरदारों की पहली विस्तृत झलक दिखाई गई। बता दें कि रामायण: पार्ट 1 दिवाली 2026 पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जबकि रामायण: पार्ट 2 दिवाली 2027 में रिलीज की जाएगी। कार्यक्रम में बाबा रामदेव और कुमार विश्वास भी थे। इवेंट में बाबा रामदेव ने मंच पर योग भी करके दिखाया। वहीं, बाबा रामदेव ने हंसते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार सुना कि इस फिल्म का बजट 4000 करोड़ रुपये है, तो यह सुनकर उनकी समाधि लग गई। इस पर मंच पर मौजूद कवि कुमार विश्वास ने चुटकी लेते हुए कहा, “स्वामी जी, आपका खुद का पतंजलि साम्राज्य तो 2 लाख करोड़ रुपए का है।” कुमार विश्वास की इस बात पर रणबीर कपूर समेत पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। वहीं, बाबा रामदेव ने अपने खास अंदाज में योग और अध्यात्म से जुड़ी बातें भी साझा कीं, जिन्हें सुनकर रणबीर कपूर मुस्कुराते नजर आए। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने मंच पर जाकर बाबा रामदेव का अभिवादन किया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर ने काला चश्मा पहना हुआ था। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं एक चीज कहना चाहूंगा कि ये काला चश्मा पहनने के लिए मैं आप सब से क्षमा मांगता हूं। मेरी आंखों में इन्फेक्शन हुआ है, पर आज इस शुभ अवसर पर मेरे दिल में सिर्फ अफेक्शन (प्यार) है।” सनी देओल ने कहा, ‘मैं वाहेगुरु जी का शुक्रिया करता हूं कि मुझे हनुमान जी के किरदार को निभाने का मौका मिला। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि मैं सही तरह से इसे निभा सकूं, क्योंकि हनुमान जी का किरदार निभाना आसान नहीं है, लेकिन मजा बहुत आएगा, क्योंकि वो नटखट, मासूम, ताकतवर हैं, आप सबके प्यारे हैं और राम जी के भक्त हैं।’ फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें- फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के रोल में नजर आएंगे। 1987 के टीवी शो ‘रामायण’ में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल इस फिल्म में राजा दशरथ की भूमिका में दिखेंगे। फिल्म का कुल बजट लगभग 4,000 करोड़ रुपए बताया जा रहा है, जो इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल करता है। फिल्म को नितेश तिवारी डायरेक्ट कर रहे हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म दंगल बनाई थी। फिल्म का म्यूजिक ऑस्कर विनर ए.आर. रहमान और हॉलीवुड कंपोजर हैंस जिमर तैयार कर रहे हैं। फिल्म को नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज, DNEG और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स बना रहे हैं। फिल्म IMAX पर रिलीज होगी। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) का काम ऑस्कर विनर स्टूडियो DNEG और प्राइम फोकस संभाल रहे हैं। फिल्म को दो भाग में रिलीज किया जाएगा। पहला भाग दिवाली 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होगा।
'रामायण' ट्रेलर लॉन्च इवेंट:रणबीर ने सनी देओल के पैर छुए; बाबा रामदेव ने ₹4000 करोड़ के बजट पर ली चुटकी, मंच पर किया योग

फिल्म ‘रामायण: प्रथम संकल्प’ का ट्रेलर शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इवेंट में लॉन्च किया गया। इस मौके पर डायरेक्टर नितेश तिवारी, प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा और फिल्म की स्टार कास्ट मौजूद रही। मेकर्स ने घोषणा की कि ट्रेलर 24 जुलाई को दुनियाभर में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगा। इवेंट में भगवान राम की भूमिका निभा रहे रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश, सनी देओल, रवि दुबे, विवेक ओबेराय सहित अन्य कलाकार शामिल हुए। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर ने सनी देओल के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। करीब चार मिनट के ट्रेलर में फिल्म के भव्य विजुअल्स, बड़े पैमाने पर तैयार की गई दुनिया और प्रमुख किरदारों की पहली विस्तृत झलक दिखाई गई। बता दें कि रामायण: पार्ट 1 दिवाली 2026 पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जबकि रामायण: पार्ट 2 दिवाली 2027 में रिलीज की जाएगी। कार्यक्रम में बाबा रामदेव और कुमार विश्वास भी थे। इवेंट में बाबा रामदेव ने मंच पर योग भी करके दिखाया। वहीं, बाबा रामदेव ने हंसते हुए कहा कि जब उन्होंने पहली बार सुना कि इस फिल्म का बजट 4000 करोड़ रुपये है, तो यह सुनकर उनकी समाधि लग गई। इस पर मंच पर मौजूद कवि कुमार विश्वास ने चुटकी लेते हुए कहा, “स्वामी जी, आपका खुद का पतंजलि साम्राज्य तो 2 लाख करोड़ रुपए का है।” कुमार विश्वास की इस बात पर रणबीर कपूर समेत पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। वहीं, बाबा रामदेव ने अपने खास अंदाज में योग और अध्यात्म से जुड़ी बातें भी साझा कीं, जिन्हें सुनकर रणबीर कपूर मुस्कुराते नजर आए। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने मंच पर जाकर बाबा रामदेव का अभिवादन किया और उनके पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया। इवेंट के दौरान रणबीर कपूर ने काला चश्मा पहना हुआ था। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं एक चीज कहना चाहूंगा कि ये काला चश्मा पहनने के लिए मैं आप सब से क्षमा मांगता हूं। मेरी आंखों में इन्फेक्शन हुआ है, पर आज इस शुभ अवसर पर मेरे दिल में सिर्फ अफेक्शन (प्यार) है।” सनी देओल ने कहा, ‘मैं वाहेगुरु जी का शुक्रिया करता हूं कि मुझे हनुमान जी के किरदार को निभाने का मौका मिला। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि मैं सही तरह से इसे निभा सकूं, क्योंकि हनुमान जी का किरदार निभाना आसान नहीं है, लेकिन मजा बहुत आएगा, क्योंकि वो नटखट, मासूम, ताकतवर हैं, आप सबके प्यारे हैं और राम जी के भक्त हैं।’ फिल्म ‘रामायण’ से जुड़ी अहम बातें- फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के रोल में नजर आएंगे। 1987 के टीवी शो ‘रामायण’ में राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल इस फिल्म में राजा दशरथ की भूमिका में दिखेंगे। फिल्म का कुल बजट लगभग 4,000 करोड़ रुपए बताया जा रहा है, जो इसे भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल करता है। फिल्म को नितेश तिवारी डायरेक्ट कर रहे हैं, जिन्होंने सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म दंगल बनाई थी। फिल्म का म्यूजिक ऑस्कर विनर ए.आर. रहमान और हॉलीवुड कंपोजर हैंस जिमर तैयार कर रहे हैं। फिल्म को नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज, DNEG और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स बना रहे हैं। फिल्म IMAX पर रिलीज होगी। फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स (VFX) का काम ऑस्कर विनर स्टूडियो DNEG और प्राइम फोकस संभाल रहे हैं। फिल्म को दो भाग में रिलीज किया जाएगा। पहला भाग दिवाली 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होगा।
जापान की PM ताकाइची राष्ट्रपति भवन पहुंची:गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत; आज मोदी से निवेश और सुरक्षा सहयोग द्विपक्षीय चर्चा होगी

जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्वागत समारोह में मौजूद रहे। ताकाइची आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच निवेश, व्यापार, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। यह प्रधानमंत्री बनने के बाद ताकाइची का पहला भारत दौरा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। भारत-जापान में डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका कम करने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में हो सके। इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद ऐलान किया जा सकता है। साने ताकाइची आज 3 दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। दोनों नेताओं के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉलर पर निर्भरता घटेगी, स्पेशल अकाउंट के जरिए सीधे पेमेंट अगर भारत और जापान के बीच भुगतान से जुड़ा ये प्रस्ताव लागू होता है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी। यानी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होगा, पैसे भेजने की लागत घटेगी और भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी हो सकेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। 2025 में बनी थी सहमति, अब लागू करने की तैयारी स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC ) करने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसमें भी पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की बात कही गई थी। अब उसी योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत भी पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने ‘स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट’ शुरू किया था, ताकि दूसरे देशों के साथ रुपए में व्यापार हो सके। बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया और विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त रकम भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में कारोबार संसद में सरकार ने बताया था कि अब तक 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ेगा। जापान भी एशिया के दूसरे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। दिसंबर 2025 में उसने इंडोनेशिया के साथ भी ऐसा ही समझौता किया था, जिससे दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में सभी तरह के लेनदेन को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बढ़ रहा जापानी निवेश भारत और जापान के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। वहीं जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करने का लक्ष्य भी तय कर चुका है। फिलहाल भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना समेत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रहा है। हाल ही में जापानी कंपनी ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर का निवेश भी किया है। दोनों नेता इस दौरे के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत-जापान व्यापार की 5 खास बातें जापान भारत में निवेश करने वाला पांचवां सबसे बड़ा देश है। मार्च 2026 तक उसका कुल निवेश ₹4.58 लाख करोड़ पहुंच चुका था। भारत-जापान ने साल 2025 में अगले 10 साल के लिए 10 ट्रिलियन जापानी येन (₹5.84 लाख करोड़) के जापानी निजी निवेश का टारगेट तय किया। यह निवेश मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और हाई-टेक डिफेंस उद्योगों में होगा। एक सर्वे के मुताबिक, जापानी कंपनियों के लिए भारत दुनिया का सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद निवेश देश है। भारत में व्यापार कर रही 75% से अधिक जापानी कंपनियां मुनाफे में हैं। चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने के लिए भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 2025 में एक विशेष रणनीतिक डायलॉग शुरू किया है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पूरी तरह जापानी शिनकानसेन तकनीक और जापानी लोन की मदद से आगे बढ़ रहा है, जो दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक है। ———————————— जापान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जापान में पहली बार महिला प्रधानमंत्री बनी:मजबूत सेना और संविधान में संशोधन की समर्थक हैं, मोदी-ट्रम्प ने दी बधाई साने ताकाइची जापान की प्रधानमंत्री चुनी गई हैं। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ताकाइची को संसद के निचले सदन में
जापान की PM ताकाइची राष्ट्रपति भवन पहुंची:गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत; आज मोदी से निवेश और सुरक्षा सहयोग द्विपक्षीय चर्चा होगी

जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची का गुरुवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया गया। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी स्वागत समारोह में मौजूद रहे। ताकाइची आज प्रधानमंत्री मोदी के साथ भारत-जापान की 16वीं वार्षिक शिखर बैठक में हिस्सा लेंगी। दोनों नेताओं के बीच निवेश, व्यापार, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। यह प्रधानमंत्री बनने के बाद ताकाइची का पहला भारत दौरा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। भारत-जापान में डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी भारत और जापान व्यापार में अमेरिकी डॉलर की भूमिका कम करने की तैयारी कर रहे हैं। निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं, जिससे कारोबार का भुगतान सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में हो सके। इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की नई दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद ऐलान किया जा सकता है। साने ताकाइची आज 3 दिन के भारत दौरे पर आ रही हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। दोनों नेताओं के बीच होने वाले 16वें भारत-जापान सलाना शिखर सम्मेलन में व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमोबाइल, सप्लाई चेन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। डॉलर पर निर्भरता घटेगी, स्पेशल अकाउंट के जरिए सीधे पेमेंट अगर भारत और जापान के बीच भुगतान से जुड़ा ये प्रस्ताव लागू होता है तो दोनों देशों के बीच पहली बार स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को लेकर औपचारिक व्यवस्था बनेगी। इस योजना के तहत जापानी कंपनियां भारत के बैंकों में विशेष खाते खोलकर सीधे रुपए और येन में लेनदेन कर सकेंगी। यानी लेनदेन के लिए अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से विदेशी मुद्रा बदलने का खर्च कम होगा, पैसे भेजने की लागत घटेगी और भुगतान पहले के मुकाबले जल्दी हो सकेगा। दोनों देशों को उम्मीद है कि इससे व्यापार करना आसान होगा और कंपनियों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। 2025 में बनी थी सहमति, अब लागू करने की तैयारी स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC ) करने की तैयारी में है। यह प्रस्ताव पूरी तरह नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के लिए साझा विजन दस्तावेज जारी किया था। उसमें भी पेमेंट सिस्टम और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की बात कही गई थी। अब उसी योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। भारत भी पिछले कुछ वर्षों से रुपए में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। जुलाई 2022 में RBI ने ‘स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट’ शुरू किया था, ताकि दूसरे देशों के साथ रुपए में व्यापार हो सके। बाद में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाया गया और विदेशी बैंकों को इन खातों में जमा अतिरिक्त रकम भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की भी अनुमति दी गई। भारत पहले से बढ़ा रहा रुपए में कारोबार संसद में सरकार ने बताया था कि अब तक 30 देशों के 123 विदेशी बैंकों के लिए भारत के 26 बैंकों में 156 विशेष रुपया वोस्त्रो खाते खोले जा चुके हैं। RBI का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में मजबूत विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम होगी और रुपए का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ेगा। जापान भी एशिया के दूसरे देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा दे रहा है। दिसंबर 2025 में उसने इंडोनेशिया के साथ भी ऐसा ही समझौता किया था, जिससे दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में सभी तरह के लेनदेन को बढ़ावा दिया जा सके। भारत में बढ़ रहा जापानी निवेश भारत और जापान के आर्थिक रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया। वहीं जापान अगले 10 वर्षों में भारत में 61 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश करने का लक्ष्य भी तय कर चुका है। फिलहाल भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। जापान मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना समेत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर रहा है। हाल ही में जापानी कंपनी ने यस बैंक में 20% हिस्सेदारी खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर का निवेश भी किया है। दोनों नेता इस दौरे के दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत-जापान व्यापार की 5 खास बातें जापान भारत में निवेश करने वाला पांचवां सबसे बड़ा देश है। मार्च 2026 तक उसका कुल निवेश ₹4.58 लाख करोड़ पहुंच चुका था। भारत-जापान ने साल 2025 में अगले 10 साल के लिए 10 ट्रिलियन जापानी येन (₹5.84 लाख करोड़) के जापानी निजी निवेश का टारगेट तय किया। यह निवेश मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और हाई-टेक डिफेंस उद्योगों में होगा। एक सर्वे के मुताबिक, जापानी कंपनियों के लिए भारत दुनिया का सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद निवेश देश है। भारत में व्यापार कर रही 75% से अधिक जापानी कंपनियां मुनाफे में हैं। चीन पर वैश्विक निर्भरता को कम करने के लिए भारत और जापान ने सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए 2025 में एक विशेष रणनीतिक डायलॉग शुरू किया है। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट पूरी तरह जापानी शिनकानसेन तकनीक और जापानी लोन की मदद से आगे बढ़ रहा है, जो दोनों देशों के सहयोग का सबसे बड़ा प्रतीक है। ———————————— जापान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… जापान में पहली बार महिला प्रधानमंत्री बनी:मजबूत सेना और संविधान में संशोधन की समर्थक हैं, मोदी-ट्रम्प ने दी बधाई साने ताकाइची जापान की प्रधानमंत्री चुनी गई हैं। वह जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं। ताकाइची को संसद के निचले सदन में
मोदी ने मेलोनी को भारत आने का न्योता दिया:मेलोनी बोलीं- भारत-इटली काफी करीब आए, हमने आपसी भरोसे से दोस्ती बनाई

पीएम मोदी ने आज इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के साथ में जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं पीएम मेलोनी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मुझे और मेरे प्रतिनिधिमंडल को भव्य स्वागत दिया। उन्होंने जॉर्जिया मेलोनी को भारत आने का न्योता दिया। मोदी ने कहा कि रोम को दुनिया में ‘इटरनल सिटी’ कहा जाता है। भारत में मेरी लोकसभा सीट काशी को भी इसी तरह जाना जाता है। जब दो सभ्यताएं मिलती हैं, तो बातचीत सिर्फ एजेंडे तक सीमित नहीं रहती। उसमें इतिहास की गहराई, भविष्य की झलक और दोस्ती की सादगी दिखाई देती है।” मेलोनी और मोदी ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को रोम में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की। यह बैठक मोदी के पांच देशों के दौरे के आखिरी चरण का हिस्सा है। बैठक से पहले मेलोनी ने कहा कि भारत और इटली के रिश्ते अब “निर्णायक दौर” में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध दोस्ती से आगे बढ़कर विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं, जो लोकतंत्र, आजादी और साझा भविष्य की सोच पर आधारित है। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर और इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी भी मौजूद रहे। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, संस्कृति, एआई, स्पेस, क्रिटिकल मिनरल्स और परमाणु ऊर्जा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक हालात पर भी विचार साझा किए। मेलोनी बोलीं- भारत-इटली के रिश्तो का ऐतिहासिक दिन रोम में पीएम मोदी के साथ जॉइंट प्रेस बयान के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कहा, “पीएम मोदी और उनके प्रतिनिधिमंडल का रोम में स्वागत करना मेरे लिए सम्मान और खुशी की बात है। मुझे सच में लगता है कि यह भारत और इटली के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक दिन है। मेलोनी ने कहा कि भारत और इटली के रिश्ते अब अपनी पूरी क्षमता हासिल करने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं और अब सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सही समय है। मेलोनी ने कहा कि भारत और इटली अपने रिश्तों को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है और अब संबंध नई दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भारत और इटली इस समय 2025-2029 संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच 2025 में व्यापार करीब 16.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 के बीच इटली का भारत में कुल निवेश 3.66 अरब डॉलर रहा है।
PM Modi Giorgia Meloni India italy relations

रोम2 मिनट पहले कॉपी लिंक पीएम मोदी ने आज इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं पीएम मेलोनी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने मेरा और मेरे प्रतिनिधिमंडल को स्वागत किया। उन्होंने जॉर्जिया मेलोनी को भारत आने का न्योता दिया। मोदी ने कहा कि रोम को दुनिया में ‘इटरनल सिटी’ कहा जाता है। भारत में मेरी लोकसभा सीट काशी को भी इसी तरह जाना जाता है। जब दो सभ्यताएं मिलती हैं, तो बातचीत सिर्फ एजेंडे तक सीमित नहीं रहती। उसमें इतिहास की गहराई, भविष्य की झलक और दोस्ती की सादगी दिखाई देती है।” वहीं मेलोनी ने कहा कि इटली और भारत पहले से कहीं ज्यादा करीब हैं। हमारे रिश्ते अब अपनी पूरी क्षमता दिखाने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। पिछले साढ़े तीन सालों में मेरी पीएम मोदी के साथ 7 मुलाकातें हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन बैठकों के दौरान हमने एक-दूसरे के नजरिए को गहराई से समझा है। हमने सम्मान और आपसी भरोसे से एक ईमानदार दोस्ती बनाई है। पीएम मोदी के भाषण की 5 बड़ी बातें भारत और इटली के रिश्ते अब और मजबूत होंगे। दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा देने का फैसला किया है। इटली डिजाइन और तकनीक के लिए मशहूर है, जबकि भारत अपनी प्रतिभा और सस्ते इनोवेशन के लिए जाना जाता है। दोनों देश मिलकर दुनिया के लिए काम करेंगे। भारत और इटली के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और इसे 20 अरब यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत में 400 से ज्यादा इतालवी कंपनियां काम कर रही हैं। पिछले साढ़े तीन साल में मुझे कई बार पीएम मेलोनी से मिलने का मौका मिला, जो दोनों देशों के लगातार मजबूत होते सहयोग को दिखाता है। रोम को दुनिया में एटरनल सिटी कहा जाता है, जबकि मेरी लोकसभा सीट काशी भी इसी तरह अपनी प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान के लिए जानी जाती है। पीएम जॉर्जिया मेलोनी के भाषण की 5 बड़ी बातें… पीएम मोदी और उनके प्रतिनिधिमंडल का रोम में स्वागत करना मेरे लिए सम्मान और खुशी की बात है। मुझे सच में लगता है कि यह भारत और इटली के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक दिन है। भारत और इटली के रिश्ते अब अपनी पूरी क्षमता हासिल करने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। दोनों देशों के संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं और अब सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का सही समय है। हमने भारत और इटली के रिश्तों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक पहुंचाने का फैसला लिया है। मेरी साढ़े तीन साल में पीएम मोदी से सात मुलाकातों ने दोनों देशों को और करीब लाया। हमने 2029 तक भारत और इटली के बीच व्यापार को 20 अरब यूरो तक बढ़ाने का टारगेट रखा है। हमने नई दिल्ली में इनोवेशन सेंटर बनाने का फैसला किया है, जिससे स्टार्टअप और रिसर्च सहयोग बढ़ेगा। भारत और इटली इस समय 2025-2029 की नई साझेदारी योजना पर साथ काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार 2025 में करीब 16.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, अप्रैल 2000 से सितंबर 2025 तक इटली ने भारत में 3.66 अरब डॉलर का निवेश किया है।#WATCH | Rome: At the joint press statement with PM Modi, Italian PM Giorgia Meloni says, “We certainly want to foster our already strong trade up to 20 Billion Euros, all the way up from the current 14 Billion Euros by 2029. This is a very ambitious target which can be achieved… pic.twitter.com/uJCRPneiEB— ANI (@ANI) May 20, 2026 मेलोनी और मोदी ने प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को रोम में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की। यह बैठक मोदी के पांच देशों के दौरे के आखिरी चरण का हिस्सा है। बैठक से पहले मेलोनी ने कहा कि भारत और इटली के रिश्ते अब “निर्णायक दौर” में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध दोस्ती से आगे बढ़कर विशेष रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं, जो लोकतंत्र, आजादी और साझा भविष्य की सोच पर आधारित है। बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर और इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी भी मौजूद रहे। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मातारेला से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, संस्कृति, एआई, स्पेस, क्रिटिकल मिनरल्स और परमाणु ऊर्जा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक हालात पर भी विचार साझा किए। ——————- यह खबर भी पढ़ें… मोदी ने मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की:इटली में एक ही कार में घूमे, 2000 साल पुराने कोलोजियम में सेल्फी ली; 15 PHOTOS प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की। पीएम मेलोनी ने एक्स पर इस वीडियो को पोस्ट कर कहा- “प्रधानमंत्री मोदी मेरे लिए गिफ्ट में बहुत-बहुत अच्छी टॉफी लेकर आए- मेलोडी। गिफ्ट के लिए थैंक्यू”। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Putin to visit India for BRICS Summit from September 12 to 13

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत पहुंचे थे। पीएम मोदी ने उनका आधिकारिक आवास पर स्वागत किया था। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सितंबर में भारत दौरे पर आएंगे। रूसी सरकार ने मंगलवार को कहा कि पुतिन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेंगे। PM मोदी ने पुतिन को दिसंबर 2025 में उनके भारत दौरे के दौरान आधिकारिक तौर पर समिट में शामिल होने का न्योता दिया था। एक साल के भीतर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले पुतिन दिसंबर 2025 में भारत आए थे। उस दौरान उन्होंने पीएम मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। 2025 का दौरा इसलिए भी खास माना गया था क्योंकि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन का पहला भारत दौरा था। इससे पहले वह आखिरी बार 2021 में नई दिल्ली आए थे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत पहुंचे थे। उसी दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पालम हवाई अड्डे से एक ही टोयोटा एसयूवी में पीएम आवास के लिए रवाना हुए थे। BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत इस साल भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी शामिल हो चुके हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान पूरे साल देश के अलग-अलग शहरों में कई बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कार्यकारी समूहों की चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं। भारत ने अपनी अध्यक्षता का फोकस ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आतंकवाद विरोधी सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर रखा है। भारत यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि BRICS सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, तकनीक और विकास से जुड़ा बड़ा आर्थिक समूह भी बन सकता है। इस महीने की शुरुआत में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी भारत आए थे। उन्होंने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में पश्चिम एशिया के तनाव, वैश्विक सुरक्षा, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, आतंकवाद और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने बैठक के दौरान यह भी कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में ग्लोबल साउथ देशों के बीच सहयोग और ज्यादा जरूरी हो गया है। भारत की अध्यक्षता इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इस समय दुनिया कई बड़े संकटों से गुजर रही है। अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच ब्रिक्स खुद को पश्चिमी देशों के प्रभाव के मुकाबले एक वैकल्पिक मंच के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Putin to visit India for BRICS Summit from September 12 to 13

नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत पहुंचे थे। पीएम मोदी ने उनका आधिकारिक आवास पर स्वागत किया था। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सितंबर में भारत दौरे पर आएंगे। रूसी सरकार ने मंगलवार को कहा कि पुतिन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में हिस्सा लेंगे। PM मोदी ने पुतिन को दिसंबर 2025 में उनके भारत दौरे के दौरान आधिकारिक तौर पर समिट में शामिल होने का न्योता दिया था। एक साल के भीतर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले पुतिन दिसंबर 2025 में भारत आए थे। उस दौरान उन्होंने पीएम मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था। 2025 का दौरा इसलिए भी खास माना गया था क्योंकि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पुतिन का पहला भारत दौरा था। इससे पहले वह आखिरी बार 2021 में नई दिल्ली आए थे। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को भारत पहुंचे थे। उसी दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पालम हवाई अड्डे से एक ही टोयोटा एसयूवी में पीएम आवास के लिए रवाना हुए थे। BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत इस साल भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका के अलावा अब मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी शामिल हो चुके हैं। भारत की अध्यक्षता के दौरान पूरे साल देश के अलग-अलग शहरों में कई बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कार्यकारी समूहों की चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं। भारत ने अपनी अध्यक्षता का फोकस ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आतंकवाद विरोधी सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर रखा है। भारत यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि BRICS सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश, तकनीक और विकास से जुड़ा बड़ा आर्थिक समूह भी बन सकता है। इस महीने की शुरुआत में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी भारत आए थे। उन्होंने BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक में पश्चिम एशिया के तनाव, वैश्विक सुरक्षा, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, आतंकवाद और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने बैठक के दौरान यह भी कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में ग्लोबल साउथ देशों के बीच सहयोग और ज्यादा जरूरी हो गया है। भारत की अध्यक्षता इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इस समय दुनिया कई बड़े संकटों से गुजर रही है। अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा, रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच BRICS खुद को पश्चिमी देशों के प्रभाव के मुकाबले एक वैकल्पिक मंच के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। PM मोदी भी इसी साल रूस जाएंगे इससे पहले भारत दौरे पर आए रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने 15 मई को कहा था कि वे PM मोदी की रूस यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मोदी ने रूस आने की पुष्टि कर दी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कई अन्य क्षेत्रों में मजबूत सहयोग जारी है और रूस चाहता है कि यह साझेदारी आगे भी तेजी से मजबूत होती रहे। उनके बयान से माना जा रहा है कि मोदी इस साल भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए रूस जा सकते हैं। हालांकि अभी तक यात्रा की आधिकारिक तारीख या कार्यक्रम का औपचारिक एलान नहीं हुआ है। भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन ज्यादातर अक्टूबर, नवंबर या दिसंबर में आयोजित होता है। पिछले कई सालों में यह अधिकतर साल के आखिरी महीनों में हुआ है। इसलिए इस बार भी माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा और शिखर सम्मेलन साल के आखिरी महीनों में हो सकता है। भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन आमतौर पर हर साल आयोजित होता है। इसकी शुरुआत साल 2000 में हुई थी। इसके बाद से दोनों देशों के नेता लगभग हर साल बारी-बारी से भारत और रूस में इस समिट में हिस्सा लेते रहे हैं। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन आमने-सामने बातचीत करते हैं। इसमें रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, परमाणु सहयोग, अंतरिक्ष, कनेक्टिविटी और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होती है। पिछले साल दिसंबर में भारत दौरे पर आए रूसी राष्ट्रपति पुतिन को PM मोदी भगवत गीता भेंट की थी। भारत-रूस के बीच दिसंबर 2025 में हुए अहम समझौते ऊर्जा सहयोग:रूस ने भरोसा दिलाया कि वह भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए लगातार और बिना रुकावट ईंधन की सप्लाई करता रहेगा। उद्योगिक साझेदारी:भारतीय कंपनियों ने रूस की URALCHEM के साथ एक यूरिया प्लांट रूस में ही स्थापित करने का समझौता किया। फूड सेफ्टी:भारत की FSSAI और रूस की उपभोक्ता सुरक्षा एजेंसी के बीच खाद्य सुरक्षा नियमों को मजबूत करने के लिए औपचारिक समझौते हुए। हेल्थकेयर सहयोग:मेडिकल रिसर्च और हेल्थ सर्विस में सहयोग बढ़ाने के लिए कई MoU साइन किए गए। समुद्री लॉजिस्टिक्स:बंदरगाह और शिपिंग ऑपरेशन में भारत-रूस के सहयोग को बढ़ाने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर हुए। माइग्रेशन और मोबिलिटी:दोनों देशों ने लोगों की आवाजाही को आसान बनाने और माइग्रेशन प्रक्रियाओं को सरल करने के लिए समझौते किए। ——————————– यह खबर भी पढ़ें… PM मोदी डेनमार्क, आइसलैंड, फिनलैंड के प्रधानमंत्रियों से मिले:कुछ देर में इंडिया-नॉर्डिक समिट, ग्रीन एनर्जी और स्पेस सेक्टर पर बातचीत होगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओस्लो में तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट से पहले डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रिश्ते मजबूत करने की कोशिशों का हिस्सा मानी जा रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक 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पत्नी को खोकर भी ‘देवदूत’ बना आर्मी ऑफिसर, वाइफ का दिल दान कर बचा ली 14 वर्षीय अनजान बच्चे की जान

अंगदान करना सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सबसे सुंदर अभिव्यक्तियों में से एक है. जब कोई व्यक्ति या किसी ब्रेन डेड घोषित पेशेंट की फैमिली अंग दान करने का फैसला लेती है तो ये निर्णय किसी अनजान की जिंदगी में नई सुबह बनकर लौटता है. जब मरीज की सांसें थमने लगती हैं, तो उसे फिर से जीने का अवसर मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं. और, जो ये नेक काम करता है, वह उस परिवार के लिए भगवान सा लगने लगता है. किसी जरूरतमंद को अंग दान करने का यह निस्वार्थ कदम समाज में करुणा, दया भाव दिखाने और उम्मीद की नई किरण जगाता है. नई दिल्ली में एक ऐसी ही प्रेरणादायक घटना सामने आई है, जिसमें भारतीय सेना के एक अधिकारी ने अपनी ब्रेन डेड घोषित पत्नी का दिल एक 14 वर्षीय बीमार लड़के को दान करने का फैसला लिया. यह लड़का पिछले एक वर्ष से एंड-स्टेज हार्ट फेल्योर से जूझ रहा था. इस लड़के को सफल हृदय प्रत्यारोपण (Heart transplant) के जरिए नई जिंदगी प्राप्त हुई. यह जीवनरक्षक ऑपरेशन कई संस्थाओं और व्यक्तियों के सामूहिक प्रयास से संभव हो पाया. दरअसल, 2 मई 2026 को पंचकुला स्थित कमांड हॉस्पिटल, चंडीमंदिर में इस 41 वर्षीय महिला को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था. इस कठिन समय में महिला के पति और दो बेटियों ने मिलकर ऑर्गन डोनेट करने का एक प्रेरणादायक निर्णय लिया. इससे कई लोगों को जीवनदान मिलने का मौका मिला. ब्रेन डेड घोषित करने के बाद, महिला के हृदय को नई दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल को आवंटित किया गया. हॉस्पिटल की सपोर्ट टीम डॉ. मुकेश गोयल, डॉ. अरावली, संजय, करुणा और रिंकू के साथ-साथ ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर दिव्या ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चंडीगढ़ पहुंची. कमांड हॉस्पिटल, चंडीमंदिर से हार्ट को प्राप्त किया. फिर चार्टर्ड फ्लाइट के जरिए हृदय को निर्धारित समय सीमा (कोल्ड इस्केमिक टाइम) के भीतर दिल्ली लेकर आ गई. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. ग्रीन कॉरिडोर से मिला समय पर उपचारदिल्ली पहुंचने के बाद, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एयरपोर्ट से हॉस्पिटल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया. इस व्यवस्था के कारण हृदय को केवल 20 मिनट में हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया, जिससे समय पर सफलतापूर्वक 14 वर्षीय हार्ट पेशेंट में दिल को ट्रांसप्लांट कर दिया गया. फिलहाल मरीज की कंडीशन स्थिर है और आईसीयू में डॉक्टर्स की निगरानी में है. जटिल सर्जरी को सफल बनाने में कई एजेंसियों का मिला योगदानइस पूरे मिशन में नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन, हरियाणा और पंजाब पुलिस, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और निजी जेट सेवा ‘एसीएस एनी टाइम एनी व्हेयर’ का महत्वपूर्ण योगदान रहा. सभी के सपोर्ट और कोऑर्डिनेशन की वजह से यह जटिल प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकी. डॉक्टर ने क्या कहा?इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट- कार्डियोथोरेसिक सर्जरी- हार्ट एंड लंग ट्रांसप्लांट, डॉ. मुकेश गोयल ने कहा कि बच्चे की हालत लंबे समय से गंभीर थी और हृदय प्रत्यारोपण ही उसके जीवन को बचाने का एकमात्र उपाय था. सौभाग्य से समय पर उपयुक्त डोनर मिल गया, जिससे पूरी प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई. अंगदान का प्रेरणादायक संदेशयह घटना अंगदान के महत्व को उजागर करती है. एक परिवार के साहसिक फैसले ने न सिर्फ एक कम उम्र के लड़के को नई जिंदगी दी, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है.
PM Modi to Address Women Leadership; Parliament Special Session

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करेंगे। यह सम्मेलन ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को लागू करने के लिए प्रस्तावित संशोधन के समर्थन में किया जा रहा है। PM मोदी ने कहा कि यह कार्यक्रम संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के विषय पर चर्चा को आगे बढ़ाएगा। PMO के अनुसार, सम्मेलन में सरकार, एजुकेशन, विज्ञान, खेल, उद्यमिता, मीडिया, समाज सेवा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों के प्रतिनिधि एक साथ जुटेंगे। गौरतलब है कि सितंबर 2023 में, संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें रिजर्व करने का प्रावधान है। संसद में 16 अप्रैल से विशेष सत्र भी होगा महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करने के उद्देश्य से 16 अप्रैल को संसद का एक सत्र बुलाया जा रहा है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ ने महिलाओं के लिए आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन (सीमांकन) से जोड़ दिया था। जनगणना में हुई देरी के चलते, अब 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही आगे बढ़ने की योजना है। संशोधन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो सकती है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में 2 बड़े संशोधन की प्लानिंग सरकार ने दो बड़े संशोधनों की योजना बनाई है, जिसमें एक अलग परिसीमन विधेयक भी शामिल है। महिलाओं के लिए रिजर्वेशन तय करने के लिए इन दोनों विधेयकों को संवैधानिक संशोधन के तौर पर पारित किया जाना जरूरी है। मौजूदा स्थिति को बरकरार रखते हुए, OBC आरक्षण के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जबकि SC/ST आरक्षण पहले की तरह ही जारी रहेगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… सोनिया गांधी का दावा- महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन असली मुद्दा: पूछा- चुनाव प्रचार के बीच विशेष सत्र की क्या जरूरत सोनिया गांधी ने सोमवार को महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने द हिन्दू (अखबार) में लिखा कि पीएम विपक्षी दलों से उन बिलों का समर्थन करने की अपील कर रहे हैं, जिन्हें सरकार संसद के विशेष सत्र में जबरदस्ती पास कराना चाहती है। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔








