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Pakistan Debt Payment Prep | Saudi Qatar Aid Eases UAE Pressure

Pakistan Debt Payment Prep | Saudi Qatar Aid Eases UAE Pressure

1 घंटे पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान को सऊदी अरब और कतर से 5 अरब डॉलर (लगभग 46,500 करोड़ रुपए) की वित्तीय मदद मिलेगी। यह मदद ऐसे समय में आ रही है, जब देश को इस महीने के अंत तक UAE को 3.5 अरब डॉलर (लगभग 29,000 करोड़ रुपए) चुकाने हैं। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति संभालने के लिए यह मदद अहम मानी जा रही है। UAE ने हाल ही में कर्ज रोलओवर की नीति में बदलाव किए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने अप्रैल तक UAE का 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाने का फैसला किया। तय शेड्यूल के मुताबिक 23 अप्रैल तक पाकिस्तान को इस कर्ज की आखरी किस्त देनी है। इसका मतलब कर्ज चुकाने के लिए सिर्फ 11 दिन का समय बाकी है। इसके अलावा, अप्रैल में पाकिस्तान को कुल करीब 4.8 अरब डॉलर चुकाने हैं, जिसमें एक बड़ा बॉन्ड भी शामिल है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ दोहा में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मुलाकात करते हुए। फोटो 31 अक्टूबर, 2024 की है। IMF की पाकिस्तान में पैसे बनाए रखने की शर्त IMF ने पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए 3 साल का प्रोग्राम शुरू किया है, जिसके तहत उसे करीब 7 अरब डॉलर की मदद मिलेगी। इसके बदले IMF ने शर्त रखी है कि पाकिस्तान के बड़े कर्जदाता सऊदी अरब, चीन और UAE अपने कर्ज के पैसे 3 साल तक तक पाकिस्तान में ही रखेंगे, यानी वे पैसा वापस नहीं निकालेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आगे चलकर कतर, UAE की जगह ले सकता है। अप्रैल अंत तक UAE का पैसा चुकाना है UAE ने हाल में कर्ज रोलओवर की नीति बदलकर शॉर्ट-टर्म एक्सटेंशन शुरू कर दिया है, जिससे पाकिस्तान पर जल्दी भुगतान का दबाव बढ़ा। इसके बाद पाकिस्तान ने UAE का 3.5 अरब डॉलर यानी करीब 29,000 करोड़ रुपए का कर्ज 11, 17 और 23 अप्रैल को अलग-अलग किस्तों में लौटाने का फैसला लिया। ये फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब देश के विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा पहले ही दूसरे देशों की मदद पर टिका है। ये कर्ज पाकिस्तान को अलग-अलग समय पर मिला था। UAE ने 2018 में 2 अरब डॉलर का लोन दिया था, जिसे बार-बार बढ़ाया गया। 2023 में 1 अरब डॉलर और दिया गया था, ताकि पाकिस्तान IMF की शर्तें पूरी कर सके। शहबाज शरीफ UAE के शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ। फोटो 12 जून 2025 की है। साऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच साझेदारी साऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच साझेदारी काफी समय से चल रही है। इससे पहले औरंगजेब ने इस्लामाबाद में सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुल्ला अल-जादान से मुलाकात की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी मुलाकात की। इस बैठक के बाद अधिकारियों ने इसे सकारात्मक बताया था। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंध और आर्थिक सहयोग पर चर्चा की। औरंगजेब ने वॉशिंगटन में फिर से मुलाकात की इच्छा भी जताई। सऊदी अरब पहले से ही पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहा है। अब तक वह 5 अरब डॉलर के डिपॉजिट को आगे बढ़ा चुका है। इस बीच सऊदी अरब ने शनिवार को पुष्टि की कि पाकिस्तान एयरफोर्स के पहले बैच का स्टॉफ, फाइटर जेट्स और सपोर्ट विमान सऊदी अरब के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पहुंच चुके हैं। यह तैनाती दोनों देशों के बीच हुए एक जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत की गई है। शहबाज शरीफ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद के साथ। पाकिस्तान के वित्त मंत्री IMF मीटिंग के लिए वॉशिंगटन दौरे पर इसी बीच पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब वॉशिंगटन दौरे पर हैं। वह 13 से 18 अप्रैल तक होने वाली IMF और वर्ल्ड बैंक की स्प्रिंग मीटिंग में हिस्सा लेंगे। वह अपने दौरे में 50 से ज्यादा उच्च स्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। इनमें IMF, वर्ल्ड बैंक, निवेशक और कई देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। डॉन के मुताबिक, औरंगजेब चीन, सऊदी अरब, UAE, तुर्किये और ब्रिटेन के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। वे G24 फाइनेंस मिनिस्टर्स मीटिंग और क्लाइमेट एक्शन फोरम में भी हिस्सा लेंगे। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM बोले- कर्ज मांगने में अब शर्म आती है: दूसरे देशों के सामने हमारा सिर झुका रहता है, उनकी शर्तें मानना हमारी मजबूरी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज ने विदेशी कर्ज पर देश की बढ़ती निर्भरता को लेकर नाराजगी जताई है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, शहबाज ने शुक्रवार को माना कि देश की बदहाल आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें बार‑बार विदेशी दौरों पर जाकर कर्ज मांगना पड़ा। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री राजधानी इस्लामाबाद में कारोबारी नेताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और मैं दुनियाभर में पैसे मांगने जाते हैं तो हमें शर्म आती है।’ पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

MP Pension Offices Closing; SBI Takes Over Payment Process From April 2026

MP Pension Offices Closing; SBI Takes Over Payment Process From April 2026

मध्य प्रदेश सरकार राज्य के लगभग साढ़े चार लाख पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए पेंशन भुगतान की व्यवस्था में बदलाव करने वाली है। नई व्यवस्था के तहत, अब किसी भी बैंक में खाता रखने वाले सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद सीधे अपने उसी खाते में पेंशन . राज्य शासन ने इस प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के मकसद से भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एकमात्र ‘एग्रीगेटर बैंक’ के रूप में नियुक्त किया है। यह महत्वपूर्ण बदलाव 1 अप्रैल, 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी होगा। बता दें कि एमपी में पेंशन की मौजूदा व्यवस्था में कई समस्याएं हैं इसकी वजह से पेंशन भुगतान की प्रक्रिया में अक्सर देरी होती है। साथ ही तकनीकी बाधाओं की वजह से भी पेंशन मिलने में दिक्कत होती है। सरकार ने जिला पेंशन कार्यालयों को भी बंद करने का फैसला किया है। आखिर क्या है नईे व्यवस्था? इसका कितना फायदा होगा और दूसरे बैंकों की भूमिका क्या रहेगी। पढ़िए रिपोर्ट मौजूदा व्यवस्था की 4 प्रमुख समस्याएं मौजूदा पेंशन प्रणाली कई जटिलताएं और चुनौतियां हैं। इसकी वजह से पेंशनर्स को अक्सर परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रमुख रूप से 4 समस्याएं हैं… बैंक बदलने की मजबूरी: कई मामलों में, पेंशनभोगियों को पेंशन लेने के लिए उन्हीं बैंकों में अकाउंट बनाए रखना पड़ता था, जहां उनका सैलरी अकाउंट था। तकनीकी असमानता: महंगाई भत्ते (DA) में वृद्धि या वेतनमान में संशोधन जैसी स्थितियों में पेंशन राशि को अपडेट करने की प्रक्रिया जटिल है। यह कार्य सेंट्रलाइज्ड पेंशन प्रोसेसिंग सेल (CPPC) के माध्यम से किया जाता है, और यह सुविधा केवल 4 प्रमुख बैंकों में ही उपलब्ध है। जिन बैंकों में यह सिस्टम नहीं है, वहां पेंशन अपडेट होने में काफी समय लगता है, जिससे पेंशनर्स को एरियर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। PPO हस्तांतरण में देरी: सेवानिवृत्ति से पहले कर्मचारी का पेंशन अदायगी आदेश (PPO) संबंधित बैंक को भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और समन्वय की कमी के कारण अक्सर सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पेंशन शुरू होने में देरी होती है। वेतनमान फिक्सेशन की त्रुटियां: कर्मचारियों के वेतनमान फिक्सेशन (Pay Fixation) में फिट-मेंट फैक्टर, मूल वेतन या महंगाई भत्ते की गणना में हुई मामूली गलती भी पेंशन प्रक्रिया को रोक देती है, जिसे सुधारने में महीनों लग जाते है। पेंशनर्स का आरोप- कर्मचारी रिश्वत लेते हैं पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गणेशदत्त जोशी इन समस्याओं के अलावा एक और मुद्दे पर ध्यान दिलाते हैं। उनके मुताबिक अभी पेंशन प्रकरणों का काम जिला और संभागीय पेंशन दफ्तरों के पास है। जैसे ही कोई कर्मचारी रिटायर होता है और उसका प्रकरण जब पेंशन कार्यालय में जाता है तो वहां मौजूद कर्मचारी एक ही प्रकार की कई आपत्तियां लगाते हैं। इन आपत्तियों को वो बार बार लगाकर कर्मचारी के संबंधित कार्यालय को भेजते हैं। जोशी के मुताबिक वो ऐसा इसलिए करते हैं ताकि रिटायर्ड कर्मचारी उनकी सेवा करें( रिश्वत) और इसके बदले वो उनका पीपीओ जारी करें। मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव होगा पूरी प्रोसेस को सेंट्रलाइज्ड किया जा रहा है। राज्य सरकार पेंशन की पूरी राशि केवल भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को हस्तांतरित करेगी, जिसमें राज्य सरकार का मुख्य खाता है। SBI एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करते हुए, प्रदेश के सभी पेंशनभोगियों के बैंक खातों में पेंशन की राशि वितरित करेगा, चाहे उनका खाता किसी भी बैंक में क्यों न हो। अब तक जो क्लेम और कमीशन 11 अलग-अलग बैंकों को मिलता था, वह अब केवल SBI को मिलेगा, क्योंकि पेंशन वितरण का पूरा प्रबंधन और क्लेम भेजने की जिम्मेदारी सिर्फ SBI की होगी। प्रशासनिक स्तर पर बदलाव: बंद होंगे जिला पेंशन कार्यालय इस सुधार प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी जिलों में स्थित पेंशन कार्यालयों को बंद किया जाएगा। हालांकि, संभागीय मुख्यालयों में स्थित कार्यालय पहले की तरह काम करते रहेंगे। पेंशन निर्धारण की पूरी प्रक्रिया अब भोपाल स्थित मुख्यालय से केंद्रीकृत रूप से संचालित होगी। इस प्रणाली की सबसे खास बात इसकी पारदर्शिता और सीक्रेसी है। अब किसी भी कर्मचारी को यह पता नहीं चलेगा कि उसकी पेंशन का निर्धारण कौन-सा अधिकारी कर रहा है। उदाहरण के लिए, भिंड में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी की पेंशन फाइल का निर्धारण जबलपुर में बैठा कोई भी डिप्टी डायरेक्टर कर सकता है। सरकार का मानना है कि इस कदम से स्थानीय स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार और अनावश्यक दबाव पर पूरी तरह से रोक लगेगी। SBI ने शुरू की तैयारी, 2 लाख PPO होंगे ट्रांसफर इस नई व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए SBI ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। वर्तमान में लगभग 4 लाख 46 हजार पेंशनर्स हैं, और इस साल 22 हजार और कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। SBI ने अन्य 10 बैंकों से 2 लाख से अधिक PPO वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस बड़े पैमाने के कार्य को पूरा होने में 3 से 4 महीने लगने का अनुमान है। ये खबर भी पढ़ें…. MP के 22 लाख पेंशनर्स को झटका:केंद्र का सहायता राशि बढ़ाने से इनकार, नीति आयोग की सिफारिश के बावजूद वृद्धि नहीं मध्य प्रदेश के करीब 22.5 लाख बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनर्स के लिए दिल्ली से निराशाजनक खबर है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यसभा में स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत दी जाने वाली पेंशन राशि में बढ़ोतरी करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। केंद्र सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन लाखों लोगों पर पड़ेगा, जो महंगाई के इस दौर में आर्थिक मदद बढ़ने की उम्मीद लगाए बैठे थे। पूरी खबर पढ़ें….