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दिल्ली में रिक्शा चालक से Oppo मोबाइल लूट, चमन गिरफ्तार : delhi police anand parbat rickshaw puller mobile snatching robbery case arrest 22 year boy bns sections

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होमताजा खबरDelhi नाम- चमन, काम- रिक्शा चालकों से मोबाइल लूटना, ऐसे रगड़ दिया दिल्ली पुलिस Last Updated:February 05, 2026, 17:50 IST Delhi Crime News: दिल्ली पुलिस ने आनंद पर्वत की पंजाबी बस्ती निवासी चमन को रामस्वरूप विद्यार्थी मार्ग से गिरफ्तार किया, जिसने 3 फरवरी 2026 को ओप्पो मोबाइल लूट में दो साथियों संग रिक्शा चालक को निशाना बनाया था. फाइल फोटो- दिल्ली पुलिस नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने सनसनीखेज लूट की वारदात को सुलझाया है, जो आपको हैरान कर देगा. पुलिस ने एक शातिर लुटेरे को गिरफ्तार किया है, जिसने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर एक गरीब रिक्शा चालक को अपना निशाना बनाया था. घटना 3 फरवरी 2026 की हुई थी. रिक्शा चालक रात के समय पहाड़गंज से काम निपटाकर लौट रहा था. जैसे ही वह रोहतक रोड पर एक जूस की दुकान के पास पहुंचा, तीन लड़कों ने उसका रास्ता रोक लिया. वारदात को बड़े ही शातिर तरीके से अंजाम दिया गया. रिक्शा चालक ने बताया एक शख्स धक्का देकर नीचे गिरा दिया. दो अन्य ने उसके हाथ और पैर पकड़ लिए ताकि वह हिल न सके. तीसरे आरोपी ने जबरन उसकी पैंट की जेब से ओप्पो (Oppo) मोबाइल फोन निकाला और तीनों मौके से फरार हो गए. पीड़ित की शिकायत पर आनंद पर्वत थाने में बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया. दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन चमन लूट की गंभीरता को देखते हुए एसीपी पटेल नगर और आनंद पर्वत एसएचओ के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई. जांच के दौरान पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और अपने गुप्तचरों को सक्रिय किया. बीट पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई ताकि संदिग्धों पर नजर रखी जा सके. गुप्त सूचना पर मिली बड़ी कामयाबी तलाश के दौरान पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि लूट में शामिल एक आरोपी रामस्वरूप विद्यार्थी मार्ग पर सीएनजी पंप के पास खड़ा है. पुलिस टीम ने बिना देरी किए मौके पर दबिश दी और मुखबिर की निशानदेही पर आरोपी को धर दबोचा. पकड़े गए आरोपी की पहचान चमन, जिसकी उम्र 22 साल के रूप में हुई, जो आनंद पर्वत की पंजाबी बस्ती का रहने वाला है. तलाशी लेने पर उसके पास से रिक्शा चालक का लूटा हुआ मोबाइल फोन मिल गया. नशे की लत बनी जुर्म की वजह पूछताछ के दौरान आरोपी चमन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह कम समय में ज्यादा पैसे कमाने और अपनी नशे की जरूरतों को पूरा करने के लिए चोरी, झपटमारी और लूट जैसी वारदातों को अंजाम देता है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चमन का पुराना आपराधिक इतिहास भी है. वह साल 2025 में भी आर्म्स एक्ट के तहत आनंद पर्वत थाने में गिरफ्तार हो चुका है. पुलिस अब चमन के उन दो अन्य साथियों की तलाश कर रही है जो इस वारदात में शामिल थे और अभी फरार हैं. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : February 05, 2026, 17:48 IST

why girls are disappearing from delhi : special ground report doctor maid 16 year old daughter love story delhi police – क्यों गायब हो रही हैं दिल्ली से लड़कियां, नौकरानी की 16 साल की बेटी की कहानी से आपको समझ में आ जाएगा

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नई दिल्ली. पिछले साल नवंबर महीने में रात के तकरीबन 11.30 बज रहे थे. दिल्ली सरकार के एक बड़े अस्पताल के डॉक्टर ने न्यूज 18 हिंदी को फोन कर बताया, ‘उनकी नौकरानी की बेटी अचानक घर से गायब हो गई है. नौकरानी ने रोते कुछ देर पहले बताया कि सर देखिए न मेरी बेटी तीन-चार दिनों से लापता है. आनंद पर्वत थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन दिल्ली पुलिस कुछ कर नहीं रही है. कुछ लिंक है तो जरा बेटी का पता लगवा दीजिए. लड़की 4 दिनों से घर से गायब है. नाबालिग है सर डर लग रहा है. क्या दिल्ली पुलिस में कोई है, जो मेरी बेटी को खोजने में मदद करेगा? यह घटना दिल्ली के सिर्फ गुलाबी बाग एरिया की नहीं बल्कि कमोबेश हर थाने और हर इलाके की है. हालांकि, तकरीबन दो महीने बाद वह नाबालिग लड़की खुद ही घर लौट आई. लड़की अपने खुद के सगे रिश्तेदार के साथ गायब होकर मथुरा में रह रही थी. फिर दो महीने के बाद मां के पास लौट आई. लेकिन मां की शिकायत रह गई कि दिल्ली पुलिस ने एक बार भी मेरी बेटी के बारे में मुझसे कोई जानकारी नहीं ली और न ही खोजने की कोशिश की. बेटी आ गई तो ठीक है वरना नहीं आती तो हम क्या करते? दिल्ली से इस वजह से गायब हो रही लड़कियां इस एक घटना से आप समझ गए होंगे कि दिल्ली से कम उम्र की लड़कियां क्यों गायब हो रही हैं? क्या मां-बाप का गाइडेंस और पुलिसिंग खराब हो गई है या फिर बच्चे समय से पहले जवान और समझदार हो गए हैं? या फिर मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने क्रांति ला दिया है? दिल्ली में बच्चों के गायब होने के हाल के आंकड़े इसे और गंभीर बना रहे हैं. फरवरी 2026 तक के हालिया डेटा से पता चलता है कि जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में ही राजधानी से 807 लोग गायब हो गए, जिनमें 509 महिलाएं और बच्चियां शामिल थीं. इनमें 191 नाबालिग थे, जिनमें से ज्यादातर 146 लड़कियां थीं. 2025 में दिल्ली में कुल 24,508 मिसिंग केस दर्ज हुए, जिनमें 60% से ज्यादा महिलाएं करीब 14,870 और बच्चियां शामिल थीं. इनमें लड़कियों की उम्र 12-18 साल तक थी. ऐसे में बड़ा सवाल दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस का ह्यूमन ट्रैफिकिंग डिपार्टमेंट इसको कैसे देख रही है? दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी ने क्या कहा? दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी देवेश चंद्र श्रीवासस्तव कहते हैं, ‘दिल्ली में लापता व्यक्तियों, विशेषकर बच्चों के संबंध में किसी भी प्रकार की घबराहट या भय का कोई कारण नहीं है. पहले की तुलना में दिल्ली में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग में कोई तेजी नहीं आई है, जबकि, पिछले वर्षों की तुलना में जनवरी 2026 महीने में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग के मामलों में कमी दर्ज की गई है. क्योंकि, दिल्ली में निष्पक्ष एवं पारदर्शी रिपोर्टिंग की नीति अपनाई जाती है. लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट न केवल स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से तथा ERSS-112 के माध्यम से भी दर्ज कराई जा सकती है. निर्धारित SOP के द्वारा, दिल्ली पुलिस इन सभी मामलों में लापता व्यक्तियों का तुरन्त पता लगाने का प्रयास किया जाता है, जिसमें लापता बच्चों के मामलों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है. इस संबंध में सभी जिलों में dedicated Missing Persons Squads तथा क्राइम ब्रांच में Anti Human Trafficking Unit कार्यरत हैं, ताकि इस विषय में केंद्रित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. यह स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली में बच्चों के लापता होने अथवा अपहरण के मामलों में किसी भी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने नहीं आई है.’ क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक? देश के जाने-माने मनोवैज्ञानिक और दिल्ली यूनिवर्सिटी में डॉ अंबेडकर कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग के एचओडी नवीन कुमार कहते हैं, ‘आज के दौर में इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म सबसे बड़े खतरे बन गए हैं. फेक आईडी के जरिए अनजान लोग बच्चियों से दोस्ती करते हैं, उन्हें प्यार के जाल में फंसाते हैं या ग्लैमरस दुनिया का लालच देकर घर छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं. पढ़ाई का बोझ या माता-पिता की टोक-टाक से तंग आकर 12-18 साल के बच्चे-बच्चियां बिना सोचे-समझे घर से निकल जाती हैं. कुछ बच्चे ड्रग्स और अन्य नशों की लत के कारण भी आपराधिक गिरोहों के हत्थे चढ़ रहे हैं. लेकिन कहीं न कहीं घर के अंदर गाइडेंस और बाहर का माहौल बदला है. माता-पिता को अपने बच्चों पर नजर रखने की जरूरूत है. कोशिश करें कि मोबाइल और सोशल मिडिया से दूर रखकर खेलकूद में ध्यान दिलाएं.’ दिल्ली पुलिस क्या कर सकती है? दिल्ली पुलिस के पूर्व ज्वाइंट सीपी एसबीएस त्यागी कहते हैं, ‘देखिए यह बिल्कुल अलग मामला होता है. दिल्ली पुलिस का एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और क्राइम ब्रांच इस समस्या से निपटने के लिए नोडल एजेंसी है. दिल्ली पुलिस का यह विशेष अभियान गायब बच्चों को उनके परिवार से मिलाने का काम करता है. दिल्ली पुलिस ने अबतक हजारों बच्चों को रेस्क्यू किया है. दिल्ली में अब किसी भी नाबालिग के गायब होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज होती है और पहले 48 घंटे में सघन तलाशी शुरू की जाती है. गायब बच्चे की जानकारी 24 घंटे के भीतर Zonal Integrated Police Network पर डाल दी जाती है ताकि देशभर की पुलिस अलर्ट हो जाए. इसके बाद भी अगर इस तरह की घटना लगातार हो रही है, तो इसके पीछे के कारणों को दूर करने की जरूरत है. यह सिर्फ अकेले पुलिस की बस की बात नहीं है. पुलिस का काम है, मामला दर्ज होने के बाद जल्दी से जल्दी निपटाना.’ दिल्ली पुलिस हर दिन किसी न किसी को इस तरह के मामले को सुलझाती है. बीते माह जनवरी महीने में हीएक 14 साल की लड़की प्रिया की गायब होने की शिकायत मिली. प्रिया का इंस्टाग्राम पर एक अज्ञात दोस्त से बात करने की आदत लग गई. उस दोस्त ने खुद को मुंबई का एक कास्टिंग डायरेक्टर बताया. प्रिया घर से 50 हजार रुपये और जेवर लेकर उसे मिलने चली गई. एएचटीयू की टीम ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए प्रिया को आनंद विहार बस टर्मिनल से तब पकड़ा जब वह एक

MP की ‘लेडी गैंग’ चांदनी चौक में मारा बड़ा हाथ, हाईकोर्ट के एक बड़े वकील का ही उड़ाया कीमती हार, हो गए अब गिरफ्तार – delhi police arrest three women gang mp rajgarh diamond gold necklace recovery high court lawyer

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होमताजा खबरDelhi MP की ‘लेडी गैंग’ ने एक बड़े वकील का उड़ाया कीमती हार, ट्रेन से आती थी दिल्ली Last Updated:February 04, 2026, 19:20 IST दिल्ली पुलिस ने चांदनी चौक के किनारी बाजार में हुई एक बड़ी चोरी की गुत्थी को महज 72 घंटों में सुलझा लिया है. मध्य प्रदेश के राजगढ़ से आई शातिर महिला चोरों ने हाई कोर्ट की एक वकील का हीरा-सोना जड़ित हार और झुमके चोरी किए थे. सीसीटीवी और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से पुलिस ने मयूर विहार के चिल्ला गांव से तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर शत-प्रतिशत रिकवरी की है. पढ़ें इन तीनों महिला चोर की 12 साल की कहानी. नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के सबसे व्यस्त चांदनी चौक में सुरक्षा और सतर्कता को चुनौती देते हुए एक ‘लेडी गैंग’ ने बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया. तीन औरतों का यह गैंग दिल्ली हाईकोर्ट के वकील का सारा माल गायब कर दिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की ने कुशलता का परिचय देते हुए इस मामले को महज 3 दिनों के भीतर सुलझा लिया है. पकड़ी गई तीनों महिलाएं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली हैं, जो विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों में चोरी करने के लिए दिल्ली का रुख करती थीं. हाथ साफकर फिर दिल्ली से एमपी के तरफ चली जाती थीं. पढ़िए कैसे और किस तरह से दिल्ली पुलिस ने इन तीन महिलाओं को गिरप्तार किया. मामले की शुरुआत 28 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली हाई कोर्ट की एक महिला अधिवक्ता सुश्री एस. गर्गा अपने सोने और हीरे के गहनों की मरम्मत कराने के लिए पुरानी दिल्ली के मशहूर किनारी बाजार आईं थीं. उन्होंने अपना कीमती नेकलेस और झुमके एक बैग में रखे हुए थे. दोपहर के समय जब वह गहने ठीक कराकर बाजार से बाहर निकल रही थीं, तभी भीड़ का फायदा उठाकर किसी ने उनके बैग से गहने पार कर दिए. 72 घंटों का सस्पेंस और ‘चिल्ला गांव’ का कनेक्शन पीड़िता ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ई-एफआईआर दर्ज कराई. मामला एक प्रतिष्ठित वकील और लाखों के गहनों से जुड़ा था, इसलिए पुलिस ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया. उत्तरी जिला पुलिस के एडिशनल डीसीपी सुमित कुमार झा के अनुसार, कोतवाली थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर सुमन कुमार और इंस्पेक्टर ज्ञान प्रकाश के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई. इस टीम में पीएसआई प्रीति और महिला कांस्टेबलों को भी शामिल किया गया. 12 साल से चल रहा था खेल पुलिस ने किनारी बाजार और आसपास के इलाकों में लगे दर्जनों कैमरों की फुटेज खंगाली. एक फुटेज में दो संदिग्ध महिलाएं वकील के बैग से हार निकालते हुए साफ नजर आईं. पुलिस ने इन महिलाओं का पीछा जारी रखा. सीसीटीवी मैपिंग से पता चला कि चोरी के बाद इन महिलाओं ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई बार ऑटो-रिक्शा बदले. तकनीकी सर्विलांस से पता चला कि ये महिलाएं मयूर विहार के चिल्ला गांव में रुकी हुई हैं. जाल बिछाकर गिरफ्तारी 1 फरवरी 2026 को पुलिस ने चिल्ला गांव में दबिश दी और प्रीति और अनमोल को धर दबोचा. तलाशी के दौरान अनमोल के पास से चोरी के हार के 28 पत्थर बरामद हुए. पूछताछ में उन्होंने अपनी तीसरी साथी ‘सन्नो’ का नाम उगला, जिसके पास बाकी के गहने थे. पुलिस ने उसी दिन सन्नो को भी दबोच लिया. दिल्ली पुलिस की पूछताछ के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने पुलिस को भी हैरान कर दिया. ये महिलाएं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के गुलखेड़ी जाटखेड़ी गांव की रहने वाली हैं. यह गांव पहले भी ऐसी आपराधिक गतिविधियों के लिए चर्चा में रहा है. ये महिलाएं अक्सर ट्रेन से दिल्ली आती हैं और कुछ दिनों या महीनों के लिए किराए पर कमरा लेती हैं. इनका मुख्य निशाना चांदनी चौक, सदर बाजार और पुरानी दिल्ली के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाके होते हैं जहाँ लोगों का ध्यान अपने सामान पर कम और खरीदारी पर ज्यादा होता है. 10-12 साल से यह गिरोह इसी तरह काम कर रहा है. चोरी की कुछ वारदातों को अंजाम देने के बाद ये वापस अपने गांव लौट जाती हैं ताकि पुलिस की नजरों से बच सकें. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi Cantonment,New Delhi,Delhi First Published : February 04, 2026, 19:20 IST

राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से चंद सेकंड में उड़ गया लैपटॉप, फोन कॉल पर लगा था शख्स, चोरों ने लगा दिया चूना – dmrc action delhi police arrest laptop theft rajiv chowk metro station gate 5 security check cctv footage

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नई दिल्ली. अगर आप दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे हैं और वो भी राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर तो जरा होशियार हो जाएं. दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे चोर को गिरफ्तार किया है, जो आपके आंखों के सामने से आपका सामान गायब कर देता था. दिल्ली का सबसे व्यस्त और दिल कहा जाने वाला राजीव चौक मेट्रो स्टेशन अपनी भीड़भाड़ के लिए जाना जाता है. लेकिन इसी भीड़ का फायदा उठाकर अपराधी मासूम यात्रियों को अपना निशाना बना रहे हैं. यहां पर एक ऐसी वारदात सामने आई है जहां एक यात्री की महज चंद सेकंड की फोन कॉल की व्यस्तता ने उसका कीमती लैपटॉप चोरी करवा दिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट ने अपनी तकनीकी कुशलता और सीसीटीवी की मदद से आरोपी को धर दबोचा है. यह मामला 30 जनवरी 2026 का है. पीड़ित यात्री राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 5 और 6 के पास बने सिक्योरिटी चेक पॉइंट पर पहुंचा. सुरक्षा नियमों के मुताबिक, उसने अपना लैपटॉप बैग एक्स-बीआईएस (X-BIS) मशीन पर स्कैनिंग के लिए रखा. इसी दौरान पीड़ित के मोबाइल पर एक फोन कॉल आ गई. वह फोन पर बात करने में इतना मशगूल हो गया कि उसने मशीन की दूसरी तरफ से अपना बैग उठाना याद नहीं रहा. इसी चंद सेकंड की लापरवाही का फायदा पास खड़े एक शातिर चोर ने उठा लिया. चोर ने बड़ी सफाई से मशीन से बैग उठाया और चंपत हो गया. बैग में एक महंगा एचपी (HP) लैपटॉप और उसका चार्जर मौजूद था. पुलिस की जांच और सीसीटीवी का सुराग जब यात्री को अपनी भूल का अहसास हुआ, तब तक बैग गायब हो चुका था. मामले की शिकायत तुरंत राजीव चौक मेट्रो थाना पुलिस को दी गई. 1 फरवरी 2026 को पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की. दिल्ली पुलिस के मेट्रो डीसीपी कुशल पाल सिंह के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया.  जांच टीम ने सबसे पहले घटना स्थल के सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया. फुटेज की बारीकी से जांच करने पर एक संदिग्ध युवक बैग उठाते हुए साफ नजर आया. हालांकि, आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर मास्क लगा रखा था. पुलिस ने हार नहीं मानी और आरोपी के आने-जाने के रास्तों का तकनीकी विश्लेषण किया. विश्लेषण से एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया. आरोपी अक्सर सुबह 8:30 से 9:30 बजे के बीच राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलता था. जाल बिछाकर ऐसे हुई गिरफ्तारी पुलिस टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए 3 फरवरी की सुबह ट्रैप लगाया. सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मी राजीव चौक के एएफसी गेट्स और निकास द्वारों पर तैनात हो गए. सुबह करीब 9:30 बजे, पुलिस की नजर एक युवक पर पड़ी जो पीठ पर एक बैग लटकाए बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. उसकी कद-काठी सीसीटीवी में दिखे संदिग्ध से हूबहू मिल रही थी. पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में लिया. जब उसके बैग की तलाशी ली गई, तो उसमें से वही चोरी किया गया एचपी लैपटॉप और चार्जर बरामद हुआ. आरोपी का प्रोफाइल और कबूलनामा पकड़े गए आरोपी की पहचान 29 वर्षीय सुमित कुमार के रूप में हुई है, जो दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके का रहने वाला है. पूछताछ के दौरान सुमित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह मेट्रो स्टेशनों पर ऐसे यात्रियों की तलाश में रहता था जो सुरक्षा जांच के दौरान फोन या अन्य कामों में व्यस्त हो जाते थे. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सुमित ने पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है. आरोपी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. मेट्रो यात्रियों के लिए पुलिस की चेतावनी इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मेट्रो यात्रियों के लिए एक विशेष गाइडलाइन जारी की है: स्कैनिंग के समय ध्यान रखें: जब भी आप अपना बैग एक्स-रे मशीन पर रखें, तो उसे दूसरी तरफ से निकलने तक अपनी नजरों से ओझल न होने दें. फोन का इस्तेमाल कम करें: सुरक्षा जांच और भीड़भाड़ वाले इलाकों में फोन पर बात करने से बचें, क्योंकि यह अपराधियों को मौका देता है. मास्क के पीछे छिपे चेहरे: कोरोना के बाद अब अपराधी मास्क का इस्तेमाल अपनी पहचान छिपाने के लिए कर रहे हैं, इसलिए अपने आसपास के संदिग्धों पर नजर रखें. तुरंत रिपोर्ट करें: किसी भी सामान के गायब होने पर तुरंत नजदीकी मेट्रो स्टेशन के कंट्रोल रूम या पुलिस डेस्क को सूचित करें. राजीव चौक मेट्रो स्टेशन की यह घटना हमें याद दिलाती है कि सावधानी हटी, तो दुर्घटना घटी. दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक चोरी का मामला सुलझाया है, बल्कि अन्य अपराधियों को भी सख्त संदेश दिया है.

बिहार का वह डॉन जिसका श्रीप्रकाश शुक्ला बना था ड्राइवर, जरायम की दुनिया में आज भी क्यों होते हैं दोनों के चर्चे? | sriprakash shukla | sri prakash shukla godfather driver | sriprakash shukla surajbhna singh friendship | suraj bhan singh | up police | ghaziabad encounter story

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Sriprakash Shukla Crime Story: 90 के दशक में उत्तर प्रदेश में एक जुमला बड़ा मशहूर था- शाम के बाद घर से मत निकलो, कहीं श्रीप्रकाश शुक्ला की गोली का शिकार न हो जाओ. यह वो दौर था जब यूपी की पुलिस के पास पुरानी थ्री-नॉट-थ्री (303) राइफलें हुआ करती थीं और एक 25 साल का लड़का सड़कों पर 30 गाड़ियों से चलता, जिसमें 25 गाड़ियों में राइफल शीशे से बाहर निकली होती थी. कैसे शिव प्रकाश शुक्ला श्रीप्रकाश शुक्ला बना? श्रीप्रकाश शुक्ला को एके-47 राइफल सबसे पहले किसने थमाई? कैसे गोरखपुर के मामखौर गांव एक साधारण ब्राह्मण परिवार का लड़का जुर्म की दुनिया का पोस्टर बॉय बन गया? उस अधिकारी से समझेंगे, जो श्रीप्रकाश शुक्ला के एनकाउंटर में शामिल था. श्रीप्रकाश शुक्ला वह नाम था, जिसने पहली बार उत्तर प्रदेश पुलिस को अपनी ताकत के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था. जानेंगे बिहार के उस डॉन के यहां वाकई में श्रीप्रकाश शुक्ला क्या करता था? मामखौर गांव के लोगों का कहना है कि श्रीप्रकाश शुक्ला कोई पैदाइशी अपराधी नहीं था. वह एक अखाड़े का पहलवान हुआ करता था, जो पांच-पांच लीटर दूध अकेले पी जाता था. लेकिन 1993 में एक घटना ने उसे अपराधी बना दिया. एक मनचले ने उसकी बहन को देखकर सीटी बजा दी थी. पहलवानी के जोश और खून की गर्मी में श्रीप्रकाश ने उस शख्स को पीट-पीटकर मार डाला. पुलिस से बचने के लिए बिहार भाग गया. जहां उसको बिहार के मोकामा के एक बाहुबली सूरजभान सिंह ने उसे संरक्षण दिया. श्रीप्रकाश शुक्ला सूरजभान सिंह का दाहिना हाथ बन गया. फिर बाद में वह बैंकॉक भाग गया, लेकिन जब लौटा तो वह शिव प्रकाश शुक्ला नहीं, बल्कि जरायम जगत का उभरता हुआ डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला बन चुका था. बिहार का ठिकाना और सूरजभान सिंह से यारी एसटीएफ में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक, यूपी में पुलिस का दबाव बढ़ा तो श्रीप्रकाश ने बिहार का रुख किया. बिहार उस वक्त बाहुबलियों और गैंगवार का गढ़ था. श्रीप्रकाश शुक्ला की मुलाकात वहां मोकामा के डॉन सूरजभान सिंह से हुई. सूरजभान को एक ऐसे शूटर की तलाश थी जो बिना पलक झपकाए ट्रिगर दबा सके और श्रीप्रकाश को चाहिए था सियासी और बाहुबली संरक्षण. श्रीप्रकाश शुक्ला का मोकामा और बेगूसराय कनेक्शन श्रीप्रकाश बिहार के मोकामा और बेगूसराय इलाकों में काफी समय तक रहा. वह सूरजभान सिंह के लिए काम करने लगा. बिहार में रहते हुए उसने रेलवे के ठेकों और कोयले के काले कारोबार में अपनी पैठ बनाई. सूरजभान और श्रीप्रकाश की जोड़ी ने बिहार के अंडरवर्ल्ड में खलबली मचा दी थी. कहा जाता है कि श्रीप्रकाश शुक्ला ही वो शख्स था जिसने बिहार के अपराधियों को एके-47 की ‘लज्जत’ चखाई थी. बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड बिहार में श्रीप्रकाश शुक्ला के नाम की दहशत तब फैली जब उसने 1998 में बिहार के कद्दावर मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या कर दी. बृज बिहारी उस वक्त पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल में भर्ती थे और भारी सुरक्षा के बीच टहल रहे थे. श्रीप्रकाश और उसके साथियों ने अस्पताल के परिसर में ही अपनी लाल बत्ती वाली गाड़ी से उतरकर एके-47 से गोलियों की ऐसी बौछार की कि सुरक्षाकर्मी देखते रह गए. इस हत्याकांड ने पूरे देश को हिला दिया था क्योंकि यह पहली बार था जब किसी मंत्री को इतने हाई-प्रोफाइल जोन में घुसकर मारा गया था. इश्क, मोबाइल फोन और एसटीएफ का जाल कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर हो, कोई न कोई कमजोरी उसे ले डूबती है. श्रीप्रकाश की कमजोरी थी उसका इश्क और फोन. उस दौर में मोबाइल फोन बहुत महंगे होते थे और बहुत कम लोग इसका इस्तेमाल करते थे. श्रीप्रकाश की एक प्रेमिका गाजियाबाद में रहती थी. वह पुलिस से बचने के लिए जगह-जगह ठिकाने बदलता था, लेकिन अपनी प्रेमिका से लंबी बातें करना नहीं छोड़ता था. एसटीएफ का गठन इसी दौरान, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार ने अपराधियों के खात्मे के लिए STF यानी Special Task Force का गठन किया. एसटीएफ के पहले बड़े टारगेट के रूप में श्रीप्रकाश शुक्ला का नाम था. एसटीएफ ने मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल इंटरसेप्शन की तकनीक का इस्तेमाल किया. पुलिस को पता चला कि श्रीप्रकाश अपनी प्रेमिका को दिल्ली और गाजियाबाद के नंबरों पर फोन करता है. यही कॉल रिकॉर्ड्स उसकी मौत का वारंट बने. जब सीएम की ‘सुपारी’ लेकर की बड़ी गलती श्रीप्रकाश के अंत की शुरुआत तब हुई जब उसने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सुपारी लेने की जुर्रत की. इंटेलिजेंस को खबर मिली कि श्रीप्रकाश ने 6 करोड़ रुपये में सीएम को मारने का ठेका लिया है. यह खबर पुलिस के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी. इसके बाद आदेश साफ था ‘श्रीप्रकाश जिंदा नहीं बचना चाहिए’. गाजियाबाद में वो आखिरी एनकाउंटर 23 सितंबर 1998 का दिन था. एसटीएफ को पक्की सूचना मिली कि श्रीप्रकाश गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके से गुजरने वाला है. पुलिस ने जाल बिछाया. जैसे ही श्रीप्रकाश की नीले रंग की सिएलो कार दिखाई दी, पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया. श्रीप्रकाश ने अपनी आदत के मुताबिक गोलियां चलानी शुरू कर दीं, लेकिन इस बार उसका सामना यूपी के सबसे जांबाज पुलिस अधिकारियों से था. कुछ ही मिनटों की मुठभेड़ के बाद गाजियाबाद की सड़क पर श्रीप्रकाश शुक्ला का लहूलुहान शव पड़ा था. महज 25 साल की उम्र में जुर्म की ऊंचाइयों को छूने वाले श्रीप्रकाश शुक्ला का अंत हो चुका था. उसके पास से वही विदेशी हथियार और मोबाइल फोन मिले, जो कभी उसकी शान हुआ करते थे. उसकी कहानी आज भी यूपी-बिहार के अपराध जगत में सुनाई जाती है. कहा जाता है कि आज भी सूरजभान सिंह उसके परिवार का ख्याल रखता है. सूरजभान सिंह बाद में बलिया के सांसद बने और हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी वीणा देवी बाहुबली अनंत सिंह के खिलाफ लड़ी थी. हालांकि वह अनंत सिंह से हार गईं. लेकिन श्रीप्रकाश शुक्ला और सूरजभान सिंह में काफी नजदीकी थी.

सावधान! घर बैठे कमाई का लालच पड़ सकता है भारी, 12वीं पास साइबर ठग ने इस शख्स से झटके में कूट लिए 17 लाख रुपये | delhi police cyber crime arrest pathan uzef khalil khan maharashtra jalna work from home fraud case

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नई दिल्ली. डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां इंटरनेट ने हमारे जीवन को सुगम बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसे ठगी का नया हथियार बना लिया है. दिल्ली पुलिस की नॉर्थ-वेस्ट जिला साइबर सेल ने एक ऐसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो वर्क फ्रॉम होम यानी घर बैठे काम के नाम पर मासूम लोगों की मेहनत की कमाई डकार रहा था. इस मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के जालना जिले से 25 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे खेल का मुख्य किरदार था. इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत नए साल के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली के त्रिनगर के केशव पुरम निवासी राहुल सैनी ने पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई. राहुल ने बताया कि उसे घर बैठे ऑनलाइन टास्क पूरा करने के बदले मोटी कमाई का झांसा दिया गया था. शुरुआत में उसे कुछ छोटे-मोटे टास्क दिए गए और बदले में पैसे भी मिले, जिससे उसका भरोसा जीत लिया गया. लेकिन जैसे ही उसने बड़े निवेश वाले टास्क शुरू किए, साइबर ठगों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया. राहुल से अलग-अलग बहानों और टैक्स के नाम पर कुल 17,16,777 रुपये ठग लिए गए. जब राहुल को अहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है, तब तक काफी देर हो चुकी थी. दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर-पश्चिमी जिला पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर दिनेश दहिया कर रहे थे, जिसमें एसआई आरएन अशांग, हेड कांस्टेबल अमित, सोहन और संदीप शामिल थे. पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों की पड़ताल शुरू की जिनमें राहुल ने पैसे ट्रांसफर किए थे. जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मनी ट्रेल सामने आया. ठगी की गई रकम को कई म्यूल अकाउंट्स में घुमाया गया था ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके. तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस को पता चला कि इस गिरोह का एक मुख्य सदस्य महाराष्ट्र के जालना में बैठकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. पुलिस टीम ने तुरंत महाराष्ट्र का रुख किया और जालना में डेरा डाल दिया. कड़ी मेहनत और तकनीकी निगरानी के बाद आरोपी पठान उजेफ खलील खान को उसके ठिकाने से दबोच लिया गया. कौन है पठान उजेफ और क्या था उसका काम? 25 वर्षीय पठान उजेफ खलील खान केवल 12वीं पास है और पेशे से एक निजी होटल में शेफ का काम करता था. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह अपनी विलासितापूर्ण जीवनशैली और माता-पिता की खराब आर्थिक स्थिति के कारण इस अपराध की दुनिया में शामिल हुआ. पुलिस के अनुसार, उजेफ इस गिरोह का वह ‘वर्टिकल’ था जो ठगी के पैसे को लिक्विडेट (नकद में बदलना) करता था. गिरोह के अन्य सदस्य जब शिकार को फंसा लेते थे तो पैसे उजेफ द्वारा प्रबंधित खातों में आते थे. उजेफ इन पैसों को ‘सेल्फ चेक’ के जरिए बैंक से निकालता था और फिर अपना कमीशन काटकर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा देता था. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने मोबाइल नंबर और ठिकाने बदलता रहता था. पुलिस ने उसके पास से अपराध में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद किया है. कैसे काम करता है वर्क फ्रॉम होम स्कैम? यह स्कैम आमतौर पर टेलीग्राम या व्हाट्सएप मैसेज से शुरू होता है. ठग खुद को किसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी या मार्केटिंग फर्म का प्रतिनिधि बताते हैं. लुभावना ऑफर: आपको यूट्यूब वीडियो लाइक करने या होटल रिव्यू देने जैसे आसान काम दिए जाते हैं. भरोसा जीतना: पहले दो-तीन टास्क के लिए आपको 200-500 रुपये का भुगतान किया जाता है. बड़ा निवेश: इसके बाद आपको ‘वीआईपी टास्क’ के लिए पैसे जमा करने को कहा जाता है, जहाँ से ठगी का असली खेल शुरू होता है. पैसे की लेयरिंग: ठगी गई रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजा जाता है ताकि पुलिस मुख्य अपराधी तक न पहुँच सके. दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर नॉर्थ-वेस्ट जिला भीष्म सिंह ने कहा है कि किसी भी अज्ञात नंबर से आए ‘वर्क फ्रॉम होम’ के ऑफर्स पर भरोसा न करें. यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था काम देने से पहले आपसे पैसे की मांग करती है, तो वह निश्चित रूप से एक फ्रॉड है. पुलिस अब उजेफ से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके. उजेफ को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है और पुलिस को उम्मीद है कि उससे पूछताछ के बाद कई और बड़े खुलासे होंगे.

मुंबई पुलिस के रडार पर कैसे आया गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, रोहित शेट्टी केस में होगी पूछताछ? | mumbai police crime branch may interrogate lawrence bishnoi anmol bishnoi in bollywood director rohit shetty case

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Lawrence Bishnoi: बॉलीवुड डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर फायरिंग में क्या लॉरेंस बिश्नोई गैंग शामिल है? क्या लॉरेंस बिश्नोई या उसके भाई अनमोल बिश्नोई से मुंबई पुलिस पूछताछ करने वाली है? मुंबई के जूहू में बॉलीवुड निर्देशक रोहित शेट्टी के आवास के बाहर एक फरवरी को अज्ञात हमलावरों ने 4-5 राउंड फायरिंग की. गोलीबारी से बालकनी के ग्लास पैनल में निशान आए, लेकिन रोहित शेट्टी सुरक्षित बच गए. उस वक्त रोहित शेट्टी अपने घर के सातवें मंजिल पर थे. इस घटना के बाद मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 12 स्पेशल टीम बनाईं और 100 से ज्यादा CCTV चेक किए. मुंबई पुलिस को इस केस मेंपुणे से बाइक पर आए हमलावर का सुराग मिला. पुलिस ने 5 लोगों को हिरासत में लिया, बाद में 4 गिरफ्तार किए. शुरुआती जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से लिंक का शक, खासकर बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से जुड़े शुभम लोनकर का मिला है. यह घटना बॉलीवुड में संगठित अपराध और गैंगवार की आशंका बढ़ा रही है. ऐसे में इस हाई-प्रोफाइल केस पूरे देश में चर्चा में है. ऐसे में अहमदाबाद जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद अनमोल बिश्नोई से क्या मुंबई पुलिस पूछताछ करेगी? लॉरेंस बिश्नोई से होगी पूछताछ! बॉलीवुड निर्देशक रोहित शेट्टी के जूहू स्थित आवास शेट्टी टावर के बाहर 1 फरवरी की देर रात हुई गोलीबारी ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. अज्ञात हमलावरों ने करीब 4-5 राउंड फायर किए, जिसमें एक गोली बालकनी के ग्लास पैनल को तोड़ते हुए अंदर गई, लेकिन रोहित शेट्टी और उनके परिवार के कोई सदस्य घायल नहीं हुए. उस समय रोहित शेट्टी अपने घर की सातवीं मंजिल पर मौजूद थे. मुंबई पुलिस ने इस घटना के 12 घंटे के भीतर चार लोगों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए शख्स का नाम स्वप्निल साकत, सिद्धार्थ येन्पुरे, आदित्य गायकवाड़, समर्थ पोमाजी है. सभी गिरफ्तार शख्स का उम्र 18 साल से 23 साल के बीच है. इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने हमलावरों को लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया. मुंबई पुलिस के रडार पर क्यों और कैसे आया गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, रोहित शेट्टी केस में होगी पूछताछ? रोहित शेट्टी के घर फायरिंग पर बड़ा अपडेट मुबंई पुलिस ने एक और आरोपी अमन मारोटे को नोटिस जारी किया गया. ये सभी शुभम लोनकर के निर्देश पर काम कर रहे थे, जो लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य है और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में आरोपी है. शूटर अभी फरार है. गिरफ्तार लोगों ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए लोनकर से संपर्क किया और स्कूटर खरीदकर उसे जूहू में छोड़ दिया था. क्या बिश्नोई ब्रदर्स से होगी पूछताछ? रोहित शेट्टी के घर हमला करने के बाद कुछ घंटों बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी ली. शुभम लोंकर और आरजू बिश्नोई से जुड़े अकाउंट से पोस्ट में लिखा कि यह ट्रेलर है और अगर रोहित शेट्टी ने उनके काम में दखल दिया तो अगली गोलियां उनके छाती में या बेडरूम में लगेंगी. पोस्ट में पूरे बॉलीवुड को चेतावनी दी गई कि बाबा सिद्दीकी की तरह हालात न हों तो अपनी राह सुधारें. पुलिस इस पोस्ट की आईपी ट्रेस कर रही है. मुंबई पुलिस हल्के में नहीं ले रही ये घटना अब सवाल उठ रहा है कि क्या मुंबई पुलिस अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई से पूछताछ करेगी? सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच इस पर विचार कर रही है ताकि असली मोटिव और साजिश का पता लगे. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा है कि शुभम लोनकर ने लोकल लोगों को भर्ती किया, ऐसा लगता है वह बॉलीवुड में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है और एक्सटॉर्शन नेटवर्क को फिर से सक्रिय करना चाहता है.. हालांकि, यह भी संभव है कि लोनकर ने बिश्नोई की जानकारी के बिना यह कदम उठाया हो. फिलहाल कोई फाइनल फैसला नहीं हुआ है, लेकिन पूछताछ की संभावना मजबूत है. मुंबई पुलिस के रडार पर क्यों और कैसे आया गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, रोहित शेट्टी केस में होगी पूछताछ? लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई, जो तिहाड़ जेल में बंद हैं, इस केस में सीधे रडार पर नहीं दिख रहे. जांच अभी शूटर्स और लोनकर पर केंद्रित है, लेकिन अगर बड़े लेवल की साजिश सामने आई तो अनमोल पर भी नजर जा सकती है. यह घटना बॉलीवुड में संगठित अपराध और गैंगवार की आशंका को बढ़ा रही है. रोहित शेट्टी ने कोई पूर्व धमकी नहीं मिलने की बात कही है, लेकिन उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस अब शूटर को पकड़ने पर फोकस कर रही है, जिसकी गिरफ्तारी से पूरी साजिश खुल सकती है. जांच जारी है और अगले कुछ दिनों में बड़े खुलासे की उम्मीद है.