MP की ‘लेडी गैंग’ ने एक बड़े वकील का उड़ाया कीमती हार, ट्रेन से आती थी दिल्ली
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दिल्ली पुलिस ने चांदनी चौक के किनारी बाजार में हुई एक बड़ी चोरी की गुत्थी को महज 72 घंटों में सुलझा लिया है. मध्य प्रदेश के राजगढ़ से आई शातिर महिला चोरों ने हाई कोर्ट की एक वकील का हीरा-सोना जड़ित हार और झुमके चोरी किए थे. सीसीटीवी और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से पुलिस ने मयूर विहार के चिल्ला गांव से तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर शत-प्रतिशत रिकवरी की है. पढ़ें इन तीनों महिला चोर की 12 साल की कहानी.
नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के सबसे व्यस्त चांदनी चौक में सुरक्षा और सतर्कता को चुनौती देते हुए एक ‘लेडी गैंग’ ने बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया. तीन औरतों का यह गैंग दिल्ली हाईकोर्ट के वकील का सारा माल गायब कर दिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की ने कुशलता का परिचय देते हुए इस मामले को महज 3 दिनों के भीतर सुलझा लिया है. पकड़ी गई तीनों महिलाएं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली हैं, जो विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों में चोरी करने के लिए दिल्ली का रुख करती थीं. हाथ साफकर फिर दिल्ली से एमपी के तरफ चली जाती थीं. पढ़िए कैसे और किस तरह से दिल्ली पुलिस ने इन तीन महिलाओं को गिरप्तार किया.
मामले की शुरुआत 28 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली हाई कोर्ट की एक महिला अधिवक्ता सुश्री एस. गर्गा अपने सोने और हीरे के गहनों की मरम्मत कराने के लिए पुरानी दिल्ली के मशहूर किनारी बाजार आईं थीं. उन्होंने अपना कीमती नेकलेस और झुमके एक बैग में रखे हुए थे. दोपहर के समय जब वह गहने ठीक कराकर बाजार से बाहर निकल रही थीं, तभी भीड़ का फायदा उठाकर किसी ने उनके बैग से गहने पार कर दिए.
72 घंटों का सस्पेंस और ‘चिल्ला गांव’ का कनेक्शन
पीड़िता ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ई-एफआईआर दर्ज कराई. मामला एक प्रतिष्ठित वकील और लाखों के गहनों से जुड़ा था, इसलिए पुलिस ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया. उत्तरी जिला पुलिस के एडिशनल डीसीपी सुमित कुमार झा के अनुसार, कोतवाली थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर सुमन कुमार और इंस्पेक्टर ज्ञान प्रकाश के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई. इस टीम में पीएसआई प्रीति और महिला कांस्टेबलों को भी शामिल किया गया.
12 साल से चल रहा था खेल
पुलिस ने किनारी बाजार और आसपास के इलाकों में लगे दर्जनों कैमरों की फुटेज खंगाली. एक फुटेज में दो संदिग्ध महिलाएं वकील के बैग से हार निकालते हुए साफ नजर आईं. पुलिस ने इन महिलाओं का पीछा जारी रखा. सीसीटीवी मैपिंग से पता चला कि चोरी के बाद इन महिलाओं ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई बार ऑटो-रिक्शा बदले. तकनीकी सर्विलांस से पता चला कि ये महिलाएं मयूर विहार के चिल्ला गांव में रुकी हुई हैं.
जाल बिछाकर गिरफ्तारी
1 फरवरी 2026 को पुलिस ने चिल्ला गांव में दबिश दी और प्रीति और अनमोल को धर दबोचा. तलाशी के दौरान अनमोल के पास से चोरी के हार के 28 पत्थर बरामद हुए. पूछताछ में उन्होंने अपनी तीसरी साथी ‘सन्नो’ का नाम उगला, जिसके पास बाकी के गहने थे. पुलिस ने उसी दिन सन्नो को भी दबोच लिया.
दिल्ली पुलिस की पूछताछ के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने पुलिस को भी हैरान कर दिया. ये महिलाएं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के गुलखेड़ी जाटखेड़ी गांव की रहने वाली हैं. यह गांव पहले भी ऐसी आपराधिक गतिविधियों के लिए चर्चा में रहा है. ये महिलाएं अक्सर ट्रेन से दिल्ली आती हैं और कुछ दिनों या महीनों के लिए किराए पर कमरा लेती हैं. इनका मुख्य निशाना चांदनी चौक, सदर बाजार और पुरानी दिल्ली के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाके होते हैं जहाँ लोगों का ध्यान अपने सामान पर कम और खरीदारी पर ज्यादा होता है. 10-12 साल से यह गिरोह इसी तरह काम कर रहा है. चोरी की कुछ वारदातों को अंजाम देने के बाद ये वापस अपने गांव लौट जाती हैं ताकि पुलिस की नजरों से बच सकें.
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भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें














































