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DRDO Pralay Missile Test | Assam Government Job Polygamy Ban Rules

DRDO Pralay Missile Test | Assam Government Job Polygamy Ban Rules

Hindi News Career DRDO Pralay Missile Test | Assam Government Job Polygamy Ban Rules 18 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं। नेशनल (NATIONAL) 1. DRDO ने प्रलय’ मिसाइल की सफल टेस्टिंग की 4 नवंबर को DRDO ने सतह-से-सतह पर मार करने वाली ‘प्रलय’ मिसाइल की सफल टेस्टिंग की। ये टेस्टिंग चांदीपुर के ओडिशा में की गई थी और इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस, कमांड सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाना है। इसकी मारक क्षमता लगभग 150 से 500 किमी है। ये मिसाइल हवा में ही अपना रास्ता बदल सकती है और ये दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को आसानी से रोक सकती है। ये मिसाइल 500 से 1000 किलोग्राम तक के पारंपरिक हथियार ले जाने में सक्षम है। ये एक सालिड फ्यूल बेस्ड मिसाइल है जो रॉकेट मोटर से ऑपरेट होती है। अत्याधुनिक नेविगेशन और इनर्शियल गाइडेंस सिस्टम से लैस होने की वजह से इसकी सटीकता काफी बेहतर है। ‘प्रलय’ मिसाइल का विकास चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात करने के उद्देश्य से किया गया है। DRDO की स्थापना 1958 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। 2. सुधाकर दलेला ने नेपाल के राजदूत का पद संभाला 3 नवंबर को इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) के सीनियर सुधाकर दलेला ने काठमांडू पहुंचकर नेपाल में भारत के नए राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला। सुधाकर 1993 बैच के IFS हैं और वे नवीन श्रीवास्तव की जगह अपॉइंट हुए हैं। सितंबर 2025 से सुधाकर विदेश मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सेक्रेटरी रहे हैं। सुधाकर के पास पड़ोसी देशों से जुड़े मामलों का अनुभव है। साल 2022 से 2025 तक सुधाकर भूटान में भारत के राजदूत रहे। नए राजदूत के तौर पर ध्यान द्विपक्षीय व्यापार, रेल-सड़क कनेक्टिविटी और क्रॉस-बॉर्डर ऊर्जा व्यापार को बढ़ावा देने पर होगा। भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक ‘1950 की शांति और मित्रता संधि’ है और दोनों देशों के बेहतर संबंध हैं। नेपाल में भारत की सहायता से बन रही अरुण-3 जलविद्युत परियोजना में भी सहयोग किया है। भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी के तहत नेपाल के साथ संबंधों को प्रगाढ़ बनाया जाएगा। 3. विदेश सचिव विक्रम मिसरी नेपाल दौरे पर पहुंचे 4 नवंबर को भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी दो दिन की यात्रा पर काठमांडू (नेपाल) पहुंचे। विदेश सचिव ने नेपाल के विदेश मंत्री खनाल से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों पर बात हुई। इस बैठक के दौरान भारत और नेपाल के बीच व्यापार, ऊर्जा सहयोग और सीमा पार कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स में पार्टनरशिप को मजबूत करने पर सहमति जताई। ये सहमति भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ पॉलिसी के तहत नेपाल की एक बेहद महत्वपूर्ण पार्टनरशिप है। दोनों पक्षों ने सांस्कृतिक व जन-दर-जन (People-to-People) संपर्कों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। भारत और नेपाल 1950 की शांति और मित्रता संधि के बाद से डिप्लोमेट रिलेशन साझा करते हैं। स्पोर्ट्स (SPORTS) 4. एशियन कप 2027 अनिश्चितकाल के लिए स्थगित 3 नवंबर को एशियाई फुटबॉल महासंघ (AFC) ने 2027 एशियन कप प्रतियोगिता को स्थगित करने का ऐलान किया। इस टूर्नामेंट के स्थगन का मुख्य कारण मिडल ईस्ट में जारी तनाव और सुरक्षा संबंधी स्थितियां को देखते हुए किया गया है। 2027 एशियन कप का आयोजन सऊदी अरब में होना तय था, जिसमें एशिया की 24 टॉप नेशनल टीमों को हिस्सा लेना था। AFC की कार्यकारी समिति ने खिलाड़ियों, प्रशंसकों और अधिकारियों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए ये फैसला लिया। नई तारीखों के संशोधित शेड्यूल की घोषणा सुरक्षा समीक्षा के बाद की जाएगी। इस फैसले से भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम (ब्लू टाइगर्स) के अंतरराष्ट्रीय मैच कैलेंडर पर भी असर पड़ेगा। AFC अध्यक्ष शेख सलमान बिन इब्राहिम अल खलीफा ने सभी सदस्य फुटबॉल संघों से इस फैसले में सहयोग देने की अपील की। एशियन फुटबॉल कॉन्फेडरेशन की स्थापना 1954 में हुई थी। इसका हेडक्वाटर्र मलेशिया में है। निधन (DEATH) 5. फुटबॉल स्ट्राइकर जीसस डी मिगुएल का निधन 3 नवंबर को स्पेन के फुटबॉल क्लब सीडी टेनेरिफ के स्ट्राइकर जीसस डी मिगुएल का निधन हो गया। वे 30 साल के थे। जीसस एक दिन पहले स्पेन की दूसरी डिवीजन लीग में एफसी अंडोरा के खिलाफ मुकाबले के आखिरी मिनटों में उनकी टक्कर विपक्षी टीम के गोलकीपर जीसस ओवोनो से हो गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक ओवोनो का घुटना डी मिगुएल के सीने से टकराया और स्ट्राइकर मैदान पर गिर पड़े थे। टेनेरिफ और अंडोरा के बीच मुकाबला स्पेन के सांता क्रूज डी टेनेरिफ स्थित हेलियोडोरो रोड्रिगेज लोपेज स्टेडियम में खेला जा रहा था। 2023 से 2025 के बीच जीसस डी ने CD कैस्टेलॉन कैस्टेलॉन क्लब में शामिल हुए थे। 2023- 24 सीजन में जीसस डी ने 16 गोल किए और लीग के टॉप स्कोरर रहे थे। अगस्त 2024 में 27 साल की उम्र में उन्होंने प्रोफेशनल्स में डेब्यू किया था। 2023 से 2025 के बीच जीसस डी ने CD कैस्टेलॉन कैस्टेलॉन क्लब में शामिल हुए थे। एग्रीमेंट (MoU) 6. CSIR और DAKSHIN-RIS ने MoU साइन किया 4 नवंबर को वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और DAKSHIN-RIS ने एक ऐतिहासिक MoU पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य विकासशील देशों (‘ग्लोबल साउथ’) के लिए साइंस, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन (STI) को बढ़ावा देना है। ये दोनों इंस्टीट्यूट में मिलकर हेल्थ, एग्रीकल्चर, ग्रीन एनर्जी और एनवायरमेंट डेवलपमेंट के क्षेत्रों में जॉइंट रिसर्च करेंगे। ये पहल ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बेहतर बनाएगी। DAKSHIN केंद्र भारत सरकार की ग्लोबल साउथ पहल का एक हिस्सा है, जिसे विदेश मंत्रालय का समर्थन मिलता है। CSIR भारत का सबसे बड़ा अनुसंधान और विकास संगठन है, जिसकी स्थापना सितंबर 1942 में हुई थी और भारत के प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। ये पहल ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को बेहतर बनाएगी। मिसलिनीयस 7. असम में बहुविवाह करने पर सरकारी नौकरी खत्म होगी 4 नवंबर को असम की हिमंता सरकार ने असम सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1964 में संशोधन को मंजूरी दी है। नए नियम के मुताबिक बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा। साथ ही बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी और

IIT Bombay Anti-Suicide Rules | Twin Sharing Rooms & Ceiling Fan Removal

IIT Bombay Anti-Suicide Rules | Twin Sharing Rooms & Ceiling Fan Removal

Hindi News Career IIT Bombay Anti Suicide Rules | Twin Sharing Rooms & Ceiling Fan Removal 6 मिनट पहले कॉपी लिंक IIT बॉम्बे में स्टूडेंट साहिल वाकोडे के सुसाइड के बाद स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ सुधारने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। आईआईटी बॉम्बे के हॉस्टल में ट्विन-शेयरिंग मॉडल लागू करने और काउंसलिंग के घंटे बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। ट्विन रूम शेयरिंग की वजह अकेले रहने से कई बार स्टूडेंट्स डिप्रेशन या अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं. ऐसे में किसी रूममेट के साथ होने से मानसिक संबल मिलता है और स्टूडेंट्स अपनी भावनाएं एक-दूसरे से शेयर कर पाते हैं. स्टूडेंट्स की मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता देते हुए आईआईटी बॉम्बे ने काउंसलिंग सेवाओं का दायरा काफी बढ़ा दिया है। घटना के तुरंत बाद डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स ने स्टूडेंट्स को ईमेल भेजकर जानकारी दी कि कैंपस के 6 प्रमुख हॉस्टल और स्टूडेंट्स वेलनेस सेंटर में काउंसलिंग के घंटे बढ़ा दिए गए हैं। इससे स्टूडेंट्स को जब भी जरूरत हो, तुरंत मदद मिल सके। कैंपस के बाहर की गई काउंसलिंग का खर्च उठाएगा संस्थान IIT बॉम्बे ने स्टूडेंट्स को आश्वासन दिया है कि वे कैंपस के बाहर भी अपनी पसंद के किसी प्रोफेशनल काउंसलर या एजेंसी से मदद ले सकते हैं। ऐसी बाहरी काउंसलिंग सेवाओं पर होने वाला पूरा खर्च संस्थान उठाएगा। स्टूडेंट्स को अपने फैकल्टी मेंटर्स के जरिए इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। IIT बॉम्बे प्रशासन की तरफ से प्रोफेसर्स और फैकल्टी सदस्यों से यह सलाह मांगी गई है कि छात्रों के तनाव को कम करने के लिए और क्या बेहतर कदम उठाए जा सकते हैं। डिपार्टमेंट और इंस्टीट्यूट लेवल पर कई दौर की बैठकें की जा रही हैं। सुसाइड केस से पहले ही लिया गया था पंखों का फैसला IIT मुंबई एडमिनिस्ट्रेशन ने तय किया है कि कमरों में सीलिंग फैन हटाकर वॉल-माउंटेड पंखे लगाए जाएंगे। हालांकि यह फैसला हॉस्टल के प्लान किए गए रेनोवेशन से जुड़ा है। यह फैसला सुसाइड केस से पहले ही ले लिया गया था। फिलहाल, IIT बॉम्बे के हॉस्टल रूम्स में वॉल-माउंटेड फैन लगाने शुरू कर दिए गए हैं। ये फैन कैंपस में लाए जा चुके हैं। 18 सितंबर को साहिल ने किया था सुसाइड मुंबई के IIT बॉम्बे में 18 सितंबर 2026 की शाम सेकेंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे ने हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। साहिल महाराष्ट्र के यवतमाल का रहने वाला था। वह एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। साहिल एग्जाम हॉल में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते पकड़ा गया था। उसने क्वेश्चन पेपर का फोटो चैट जीपीटी पर अपलोड करके नकल करने की कोशिश की थी। साहिल की आत्महत्या के बाद करीब 400 छात्रों ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। पिछले 7 महीने में सुसाइड का तीसरा मामला पिछले 7 महीने में IIT बॉम्बे कैंपस में सुसाइड का यह तीसरा मामला है। इससे पहले जुलाई में नया सेमेस्टर शुरू होते ही इसी हॉस्टल में 20 साल के बीटेक सेकेंड ईयर के छात्र ने जान दी थी। फरवरी में हॉस्टल-4 में सेकेंड ईयर के एक छात्र ने सुसाइड किया था। मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित IIT बॉम्बे ने छात्रों के विरोध को देखते हुए 26 और 27 सितंबर को होने वाली मिड-सेमेस्टर एग्जाम स्थगित कर दी हैं। अब ये परीक्षाएं 10 और 11 अक्टूबर को होंगी। ————————————————————————- ये खबर भी पढ़ें NTA ने निकाली सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की भर्ती:एज लिमिट 65 साल, NEET, JEE जैसे एग्जाम के पेपर बनाने का मौका, नि:शुल्क करें अप्लाई एनटीए ने सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की भर्ती निकाली है। ये एक्सपर्ट NTA द्वारा कराई जाने वाली परीक्षाओं के लिए पेपर तैयार करेंगे। साथ ही ट्रांसलेशन रिव्यू करने वालों की भी भर्ती निकाली गई है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट nta.ac.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों का पैनल 3 साल तक वैलिड रहेगा, जिसकी हर साल समीक्षा की जाएगी। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

National Scholarship Portal Rules Changed

National Scholarship Portal Rules Changed

Hindi News Career National Scholarship Portal Rules Changed | Students Apply 2 Scholarships 2 मिनट पहले कॉपी लिंक नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) पर स्कॉलरशिप के नियमों में बदलाव किया गया है, जो 2026-27 से लागू होंगे। केंद्र सरकार के नए नियम के अनुसार, अगर कोई स्टूडेंट, जिसे वेलफेयर-बेस्ड स्कॉलरशिप मिल रही है, मेरिट-बेस्ड स्कॉलरशिप के लिए भी योग्य हो जाता है, तो उसे मेरिट-बेस्ड स्कॉलरशिप भी मिलेगी। इसी तरह से मेरिट-बेस्ड स्कॉलरशिप पाने वाले स्टूडेंट को वेलफेयर बेस्ड स्कॉलरशिप भी मिल सकती है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने अपने सभी स्कूलों से कहा है कि वे इस संबंध में लोगों को अवेयर करने के लिए स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और अन्य संबंधित लोगों तक यह जानकारी पहुंचाएं। संबंधित विभागों ने उम्मीदवारों को डुप्लिकेट माना सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के लिए नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर ‘डिडुप्लिकेशन मॉड्यूल’ लागू करने के दौरान, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) व सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (DoSJE) के बीच कुछ समस्याएं सामने आईं, जिसमें कई उम्मीदवारों को ‘डुप्लिकेट’ माना गया। इन मामलों की जांच से यह बात सामने आई कि भारत सरकार द्वारा लागू की गई स्कॉलरशिप के क्लासिफिकेशन, लिमिट और मकसद को लेकर अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के बीच एक जैसी समझ होनी चाहिए। L1 वेरिफिकेशन के नए नियम : L1 वेरिफिकेशन के दौरान अपडेट की गई ट्यूशन फीस, एडमिशन फीस और अन्य नॉन-रिफंडेबल फीस की जानकारी बाद में किए गए आवेदनों में अपने आप भर जाएगी। आवेदक द्वारा जमा किए गए सभी आवेदन और उनका स्टेटस, इंस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर (INO) को दिखाई देंगे। आवेदनों को डिफेक्टिव मार्क करते समय, कमियों को अलग-अलग दो कैटेगरी यानी पहला स्कीम से जुड़ी जानकारी में कमियां और दूसरा सामान्य या एकेडमिक जानकारी में कमियों में बांटा जाएगा। L 2 वेरिफिकेशन के नए नियम : किसी आवेदक द्वारा जमा किए गए सभी आवेदन और उनका स्टेटस, संबंधित सभी L2 नोडल ऑफिसर को एक साथ दिखाई देंगे। इससे एक ही आवेदक द्वारा अलग-अलग स्कॉलरशिप कैटेगरी के तहत जमा किए गए कई आवेदनों पर निर्णय लेना आसान होगा। जिन मामलों में कमियां नॉर्मल या एजुकेशनल डिटेल्स से संबंधित होती हैं, वहां आवेदक के अन्य सभी आवेदनों को अपने-आप “रेड फ्लैग” कैटेगरी में डाल दिया जाएगा। NSP पर 1 जून से शुरू हैं आवेदन नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर एकेडमिक ईयर 2026-27 के आवेदन 1 जून 2026 से खुले हैं। अलग-अलग स्कॉलरशिप स्कीम की आखिरी तारीख अलग हो सकती है। NSP ऑफिशियल पोर्टल लिंक ——————————————————————- ये खबर भी पढ़ें NTA ने निकाली सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की भर्ती:एज लिमिट 65 साल, NEET, JEE जैसे एग्जाम के पेपर बनाने का मौका, नि:शुल्क करें अप्लाई एनटीए ने सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की भर्ती निकाली है। ये एक्सपर्ट NTA द्वारा कराई जाने वाली परीक्षाओं के लिए पेपर तैयार करेंगे। साथ ही ट्रांसलेशन रिव्यू करने वालों की भी भर्ती निकाली गई है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट nta.ac.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों का पैनल 3 साल तक वैलिड रहेगा, जिसकी हर साल समीक्षा की जाएगी। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

US Supreme Court Rejects Trump Mail Voting Rules

US Supreme Court Rejects Trump Mail Voting Rules

वॉशिंगटन29 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डाक से वोटिंग के नियम सख्त करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कोशिश पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सोमवार को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला 7-2 रहा। दो जजों ने इसका विरोध किया। मामला नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से जुड़ा है। ट्रम्प ने मार्च में आदेश जारी किया था। वे चाहते थे कि डाक से वोट भेजने वाले लोगों की लिस्ट राज्यों को अमेरिकी डाक सेवा (USPS) को दी जाए। ट्रम्प का कहना था कि डाक से वोटिंग में गड़बड़ी रोकने के लिए नए नियम जरूरी हैं। विरोध करने वालों ने कहा कि इन नियमों से सही वोट भी रुक सकते हैं और राष्ट्रपति राज्यों के चुनावी सिस्टम में जरूरत से ज्यादा दखल दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ट्रम्प के नियम लागू करने की अनुमति नहीं दी। ट्रम्प के नियम के तहत USPS रोक सकता था बैलेट अगर कोई बैलेट नए नियमों के मुताबिक नहीं होता या वोट देने वाले का नाम तय लिस्ट में नहीं मिलता, तो USPS उस बैलेट को रोक सकता था। डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार वाले राज्यों और वोटिंग अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इन नियमों का विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे चुनाव के दौरान लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। कोर्ट ने समय पर उठाया सवाल डाक से वोटिंग के मामले पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल समय का था। नवंबर के चुनाव में अब कुछ समय बचा है और कई राज्यों में बैलेट भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जस्टिस ब्रेट कावानॉ ने कहा कि ट्रंप की योजना भविष्य में लागू की जा सकती है, लेकिन नवंबर के चुनाव से ठीक पहले इसे लागू करना मुश्किल है। चुनाव अधिकारियों के पास नई व्यवस्था तैयार करने और उसे लागू करने के लिए जरूरी समय नहीं है। डाक से वोटिंग पर ट्रम्प ने पहले भी उठाए सवाल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद ट्रम्प ने डाक से वोटिंग पर सवाल उठाए थे। वह बिना सबूत यह दावा करते रहे कि चुनाव में गड़बड़ी हुई थी और उनसे जीत छीन ली गई। हालांकि, ट्रंप खुद भी डाक से वोट डाल चुके हैं। इस साल फ्लोरिडा के रिपब्लिकन प्राइमरी में उन्होंने मेल से वोट किया था। USPS ने भी ट्रंप के फैसले पर जताई थी चिंता ट्रंप की नई व्यवस्था को लेकर USPS के एक व्हिसलब्लोअर ने भी चिंता जताई थी। उसने कहा था कि नई तकनीकी व्यवस्था जल्दबाजी में तैयार की गई है। अगर इसमें कोई गड़बड़ी हुई तो लाखों लोगों के बैलेट समय पर नहीं पहुंच पाएंगे। नई व्यवस्था में बैलेट के लिफाफे पर मौजूद बारकोड और मतदाता की जानकारी को एक ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ना था। चुनाव से कुछ हफ्ते पहले इतना बड़ा बदलाव अधिकारियों के लिए भी चुनौती था। ट्रम्प के 5 और फैसलों पर SC की रोक टैरिफ – फरवरी 2026 सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ को अवैध ठहराया और कहा कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। इलिनॉय में नेशनल गार्ड – दिसंबर 2025 सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार को इलिनॉय में नेशनल गार्ड तैनात करने की तत्काल अनुमति नहीं दी। बर्थराइट सिटीजनशिप – जून 2026 ट्रम्प ने अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कानून राष्ट्रपति को ऐसा बदलाव करने की इजाजत नहीं देता। बर्थ टूरिज्म – सितंबर 2026 सुप्रीम कोर्ट से बर्थराइट सिटीजनशिप पर झटका लगने के बाद ट्रम्प ने बर्थ टूरिज्म रोकने और कुछ मामलों में बच्चों की नागरिकता सीमित करने के लिए नया आदेश जारी किया, लेकिरन कोर्ट ने इस पर भी रोक लगा दी। फेड गवर्नर को हटाने का मामला – जून 2026 ट्रम्प ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को पद से हटाने की कोशिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि फेड गवर्नर को राष्ट्रपति बिना उचित कानूनी कारण और तय प्रक्रिया के नहीं हटा सकते। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-मिडटर्म चुनाव जीता तो हर वोटर को ₹5 लाख: इस पर ₹128 लाख करोड़ खर्च करने होंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी बहुमत बरकरार रखती है, तो हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर (करीब 4.76 लाख रुपए) दिए जाएंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

DUSU Election 2026 Guidelines | 75% Attendance & Paperless Campaign Rules

DUSU Election 2026 Guidelines | 75% Attendance & Paperless Campaign Rules

Hindi News Career DUSU Election 2026 Guidelines | 75% Attendance & Paperless Campaign Rules 2 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) चुनाव 2026 के लिए मतदान 18 सितंबर को होगा, जबकि वोटों की गिनती 19 सितंबर को की जाएगी। नॉमिनेशन फाइल करने की लास्ट डेट 13 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक है। इसके बाद नॉमिनेशन पेपर्स की जांच तीन बजकर 15 मिनट तक की जाएगी और नॉमिनेटेड कैंडिडेट्स की फाइनल लिस्ट उसी दिन शाम 6 बजे तक जारी कर दी जाएगी। चुनाव से जुड़ी तारीखें जारी करने के साथ ही यूनिवर्सिटी ने आचार संहिता भी जारी कर दी है। डीयू चुनाव कैंपेन को लेकर इस साल के नियम : यूनियन या प्रतिनिधि संस्था में सिर्फ फुल टाइम कोर्स में एनरोल्ड रेगुलर स्टूडेंट्स ही चुनाव में शामिल हो सकते हैं। 17 से 22 साल की उम्र के UG स्टूडेंट्स आवेदन कर सकते हैं, जबकि, PG स्टूडेंट्स के लिए अधिकतम उम्र 25 साल है। न्यूनतम अटेंडेंस 75% होनी चाहिए। कैंडिडेट्स 12 सितंबर, 2026 को दोपहर 2 बजे तक चीफ इलेक्शन ऑफिसर के ऑफिस में 10 मिनट से कम का चुनावी भाषण वाला वीडियो क्लिप जमा कर सकते हैं। चीफ इलेक्शन ऑफिसर की मंजूरी के बाद वीडियो DU की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। कैंडिडेट्स प्रचार के लिए कागज के बजाय सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रत्याशी के किसी भी विषय में पेपर लंबित नहीं होना चाहिए। पिछले वर्ष में फेल होने या मौजूदा साल में दोबारा एडमिशन लेने वाले छात्र भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। कार्यकारी सदस्य के पद के लिए अधिकतम दो बार चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। कोई प्रत्याशी एक साथ दो पदों पर चुनाव नहीं लड़ सकेगा। प्रचार के लिए लाउडस्पीकर, वाहन और जानवरों का इस्तेमाल मना है। मनोरंजन या किसी चीज का प्रतिनिधित्व करने के लिए मैस्कॉट या कॉस्ट्यूम का इस्तेमाल करना सख्त मना है। कैंडिडेट्स को प्रचार के लिए प्रिंटेड पोस्टर, पैम्फलेट या किसी अन्य प्रिंटेड सामग्री का इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं दी जाएगी। कैंडिडेट्स केवल हाथ से बने पोस्टर का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रति कैंडिडेट अधिकतम खर्च 5000 रुपए है। DUSU चुनावों के लिए प्रचार का समय सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक है। कॉलेज कैंपस में प्रचार करते समय हर कैंडिडेट के साथ चार से ज्यादा छात्र नहीं हो सकते। उम्मीदवारों को प्रॉक्टर्स ऑफिस से ऑथराइज्ड व्हीकल स्टिकर लेना होगा। बिना स्टिकर वाले वाहनों को कैंपस/कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। फुटपाथ या सड़क पर ऐसी पार्किंग नहीं की जा सकती जिससे ट्रैफिक की दिक्क्त हो। किसी उम्मीदवार या उसके समर्थक को वाहन, पार्किंग ऐरिया, कैंपस या रोड़ साइड पर शराब या किसी नशीली चीजों का सेवन करते पाया गया, तो उम्मीदवार का नॉमिनेशनल कैंसिल किया जा सकता है। डीयू ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कैंपेन के दौरान नियम लगातार तोड़े गए तो चुनाव रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। शिकायतों के लिए बनेगी सेल डूसू चुनाव से संबंधित शिकायतें दूर करने के लिए सेल बनाया जाएगा। इसकी अध्यक्षता डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर करेंगे। सेल में एक सीनियर टीचर, एक सीनियर प्रशासनिक अधिकारी और फाइनल ईयर का एक छात्र व एक छात्रा को शामिल किया जाएगा। चुनाव से जुड़ी आपत्तिजनक घटनाओं की सूचना पुलिस को 12 घंटे के अंदर देने का प्रावधान भी किया गया है। साल 2024 में पोस्टर हटाने का खर्च 1 करोड़ दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में प्रचार के लिए इस्तेमाल पोस्टर को हटाने में खर्च हुए राशि की सीमा दिल्ली नगर निगम ने एक करोड़ रुपये बताई थी। इसकी जानकारी हाई कोर्ट को देते हुए भुगतान की मांग दिल्ली विश्वविद्यालय से की गई। इस विषय पर विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि उम्मीदवारों और छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर और आसपास की सार्वजनिक संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर प्रचार सामग्री लगाई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले दीवारों और सार्वजनिक संपत्ति को साफ किए जाने तक DUSU चुनाव की मतगणना पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि पहले पोस्टर-बैनर हटाकर संपत्ति को साफ किया जाए, उसके बाद मतगणना आगे बढ़े। MCD के अलावा DMRC ने भी सफाई पर लगभग ₹1 लाख खर्च होने की बात कही थी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि सफाई का खर्च संबंधित उम्मीदवारों से वसूलने का विकल्प देखा जा सकता है। 2025 के चुनाव के लिए ₹1 लाख का एंटी-डिफेसमेंट बॉन्ड लागू किया गया था। यह पोस्टर हटाने का खर्च नहीं, बल्कि उम्मीदवार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए था। इसके पीछे 2024 DUSU चुनाव के दौरान हुई भारी तोड़फोड़/पोस्टरबाजी की सफाई का खर्च था। ये खबर भी पढ़ें जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर स्टूडेंट्स ने धरना दिया:अधिकारियों से पूछा- अगर आपके बच्चे होते, तो क्या आप उन्हें ऐसी ही सुविधा देते अलवर के थानागाजी क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जोधावास में छात्र-छात्राओं ने धरना शुरू कर दिया। 13–14 अगस्त 2026 को जर्जर भवन और स्कूल की दूसरी बुनियादी समस्याओं को लेकर विद्यार्थियों ने विरोध किया। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

SEBI F&O Trading Rules | Retail Investor Loss Decreases in India

SEBI F&O Trading Rules | Retail Investor Loss Decreases in India

मुंबई4 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय शेयर बाजार के इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट में रिटेल निवेशकों को होने वाला कुल घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 91,685 करोड़ रुपए पर आ गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 1.12 लाख करोड़ रुपए था। वित्त मंत्रालय ने 11 अगस्त को संसद को यह अहम जानकारी दी है। मार्केट रेगुलेटर सेबी की ओर से F&O सेगमेंट में जोखिम कम करने के लिए उठाए गए कई कड़े और नए कदमों के बाद रिटेल निवेशकों के घाटे में यह गिरावट दर्ज की गई है। ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों की संख्या घटी, प्रति व्यक्ति एवरेज नुकसान बढ़ा सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सेबी के नए नियमों का बाजार पर सीधा असर दिखा। इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले यूनिक इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स की संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में 98.10 लाख थी, जो 2025-26 में घटकर 78.60 लाख रह गई। हालांकि, कम निवेशकों के बाद भी प्रति व्यक्ति औसत नुकसान में मामूली बढ़त देखी गई है। FY26 में F&O में ट्रेड करने वाले हर व्यक्ति का औसत घाटा बढ़कर 1.16 लाख रुपए हो गया, जो FY25 में 1.14 लाख रुपए था। 1. सेबी ने निवेशकों की सुरक्षा के लिए उठाए कड़े कदम वित्त मंत्रालय ने बताया कि सेबी ने स्टॉक मार्केट में स्थिरता लाने और आम निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कई रेगुलेटरी और सर्विलांस उपाय लागू किए हैं। इसमें सबसे पहले प्लेटफॉर्म पर रिस्क डिस्क्लोजर को अनिवार्य किया गया। अब जब भी कोई यूजर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लॉग इन करता है, तो ब्रोकर को यह चेतावनी दिखाना जरूरी है कि FY22 में F&O में ट्रेड करने वाले 10 में से 9 रिटेल ट्रेडर्स को नुकसान हुआ था। 2. नवंबर 2024 से लागू हुए 7 बड़े बदलाव F&O सेगमेंट को मजबूत करने के लिए सेबी ने नवंबर 2024 के बाद से एक पूरा रोडमैप लागू किया था… वीकली इंडेक्स डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को तार्किक बनाना। ऑप्शंस एक्सपायरी के दिन टेल रिस्क कवरेज को बढ़ाना। इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज में बढ़ोतरी करना। मंथली इंडेक्स डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को सही ढंग से व्यवस्थित करना। बायर्स से ऑप्शंस प्रीमियम का अग्रिम (अपफ्रंट) कलेक्शन सुनिश्चित करना। एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाना। पोजीशन लिमिट्स की इंट्राडे मॉनिटरिंग लागू करना। 3. मई 2025 में सेबी ने लिए और भी कड़े फैसले मई 2025 में सेबी ने बाजार में जोखिम को और बेहतर ढंग से मॉनिटर करने के लिए कुछ और महत्वपूर्ण फैसले लिए। इसके तहत अलग-अलग एक्सचेंजों पर अलग-अलग डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के दिनों को स्ट्रीमलाइन किया गया। साथ ही पोजीशन लिमिट्स के लिए उपयुक्त रिस्क मैट्रिक्स लागू किए गए, जिससे F&O सेगमेंट में जोखिमों का खुलासा और उनकी निगरानी आसान हो सके। 4. F&O में STT से सरकार की कमाई बढ़कर ₹27,695 करोड़ हुई वित्त मंत्रालय ने बताया कि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT को एक मॉडर्न और टेक्नोलॉजी-ऑपरेटेड कलेक्शन मैकेनिज्म के रूप में तैयार किया गया है। यह टैक्स सीधे रेगुलेटेड सिक्योरिटीज मार्केट के इंफ्रास्ट्रक्चर में एम्बेडेड यानी जुड़ा होता है। इससे टैक्स चोरी और लीकेज की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, F&O ट्रेड्स पर लगने वाले STT से सरकार का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 27,695 करोड़ रुपए हो गया। यह FY25 के 22,225 करोड़ रुपए के मुकाबले काफी ज्यादा है। अगर FY22 से तुलना करें तो उस वक्त सालाना STT कलेक्शन महज 6,634 करोड़ रुपए था। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O? F&O यानी ‘फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस’ शेयर बाजार का एक डेरिवेटिव सेगमेंट है। इसमें निवेशक सीधे शेयर खरीदने के बजाय किसी शेयर या इंडेक्स जैसे- निफ्टी या सेंसेक्स के भविष्य के दाम पर दांव लगाते हैं। यह काफी जोखिम भरा यानी हाई-रिस्क ट्रेडिंग मॉडल होता है, जिसमें कम समय में भारी मुनाफा या बड़ा घाटा हो सकता है। ये खबर भी पढ़ें… कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें: 5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Education Loan Guide | Interest EMI Repayment Rules & Eligibility 2026

Education Loan Guide | Interest EMI Repayment Rules & Eligibility 2026

Hindi News Career Education Loan Guide | Interest EMI Repayment Rules & Eligibility 2026 21 मिनट पहले कॉपी लिंक एडमिशन का दौर चल रहा है। ऐसे में छात्रों और उनके माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता पढ़ाई की फीस होती है। ऐसे में सबसे पहले एजुकेशन लोन का ख्याल आता है। लोन कितना मिलेगा, कौन पात्र है, बिना सिक्योरिटी लोन मिलेगा या नहीं, ब्याज और EMI कितनी होगी… इसे ध्यान में रखते हुए हमने पाठकों से इस विषय पर उनके सवाल मांगे। मिले सवालों का जवाब दे रहे हैं हमारे फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स। 1. किन छात्रों और कोर्स के लिए लोन मिलता है? मान्यता प्राप्त संस्थानों के यूजी, पीजी, प्रोफेशनल, टेक्निकल, वोकेशनल और स्किल-बेस्ड कोर्स के लिए लोन मिल सकता है। मैनेजमेंट, कानून, कंप्यूटर, कृषि, वेटरिनरी आदि भी शामिल हैं। भारत और विदेश की पढ़ाई के लिए लोन मिल सकता है। पॉलिटिकल साइंस, सर्टिफिकेट, डिस्टेंस, पार्ट-टाइम और एग्जीक्यूटिव कोर्स की पात्रता बैंक और मान्यता पर निर्भर है। पीएम-विद्यालक्ष्मी में पात्र क्वालिटी हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस में मेरिट या ओपन कॉम्पिटिटिव एग्जाम से प्रवेश जरूरी है। जहां नियम लागू हों, मैनेजमेंट कोटा पात्र नहीं है। 2. क्या हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी के लिए लोन मिलता है? नहीं। बैंक संस्थान की मान्यता, एफिलिएशन, रेगुलेटरी अप्रूवल, एडमिशन का तरीका, एकेडमिक रिकॉर्ड, कोर्स, फीस, रोजगार और प्लेसमेंट रिकॉर्ड के साथ अपनी अप्रूव्ड लिस्ट भी देखता है। 3. अधिकतम कितना लोन मिलता है? सभी बैंकों की एक समान सीमा नहीं है। राशि कोर्स की लागत, संस्थान, देश, छात्र और को-एप्लिकेंट की प्रोफाइल, सिक्योरिटी और बैंक की नीति पर निर्भर है। पुरानी आईबीए मॉडल स्कीम में भारत में 10 लाख रु. और विदेश में 20 लाख रु. तक की सीमा थी, लेकिन कई बैंक इससे ज्यादा भी देते हैं। विदेश में राशि आमतौर पर ज्यादा होती है। पूरा स्वीकृत लोन लेना जरूरी नहीं; भविष्य की ईएमआई और रीपेमेंट कैपेसिटी भी देखें। पीएम-विद्यालक्ष्मी में पात्र छात्रों को ट्यूशन फीस व अन्य कोर्स खर्च के लिए कोलेटरल-फ्री और गारंटर-फ्री लोन मिल सकता है। 4. बिना सिक्योरिटी कितना लोन मिलता है? कई मामलों में 7.5 लाख रु. तक का सामान्य एजुकेशन लोन बिना सिक्योरिटी मिलता है। यह क्रेडिट गारंटी और बैंक की शर्तों पर निर्भर है। ज्यादा राशि पर घर, जमीन, एफडी, बीमा पॉलिसी आदि कोलेटरल मांग सकते हैं। बैंक संपत्ति की कीमत और कानूनी स्थिति जांचता है। पीएम-विद्यालक्ष्मी के पात्र क्यूएचईआई छात्रों को कोलेटरल और गारंटर के बिना लोन मिल सकता है। 5. लोन से कौन-कौन से खर्च पूरे हो सकते हैं? ट्यूशन, एडमिशन, एग्जामिनेशन, लाइब्रेरी, लैबोरेटरी, हॉस्टल, किताबें, इक्विपमेंट, जरूरी लैपटॉप/कंप्यूटर, प्रोजेक्ट, थीसिस, स्टडी टूर और अन्य मंजूर शैक्षणिक खर्च शामिल हो सकते हैं। विदेश में कुछ ट्रैवल और लिविंग खर्च भी मिल सकते हैं। अंतिम सूची बैंक की सैंक्शन टर्म्स पर निर्भर है। 6. विदेश में पढ़ाई के लिए क्या ध्यान रखें? बैंक एडमिशन लेटर, यूनिवर्सिटी की रैंकिंग व रिकग्निशन, कोर्स, फीस, वीजा-पासपोर्ट दस्तावेज और रीपेमेंट कैपेसिटी देखता है। लोन रु. में सैंक्शन और फीस विदेशी मुद्रा में दी जा सकती है। रु. की कीमत गिरने पर खर्च और ईएमआई बढ़ सकती है। इसे करेंसी रिस्क कहते हैं। 7. लोन के लिए आवेदन कैसे करें? बैंक की शाखा, वेबसाइट या डिजिटल प्लेटफॉर्म से आवेदन कर सकते हैं। पीएम-विद्यालक्ष्मी पात्र योजनाओं के लिए यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यहां योजनाओं की जानकारी, आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा है। हर लोन के लिए योजना से आवेदन जरूरी नहीं है। 8. पीएम-विद्यालक्ष्मी और सीधे बैंक में आवेदन में क्या अंतर है? पीएम-विद्यालक्ष्मी पात्र योजनाओं और पार्टिसिपेटिंग लेंडर्स के लिए डिजिटल व्यवस्था देता है। सीधे बैंक में आवेदन करने पर उसकी अपनी पॉलिसी लागू होती है और अन्य लोन प्रोडक्ट भी मिल सकते हैं। ब्याज, कुल लागत, कोलेटरल, गारंटर, मॉरेटोरियम और रीपेमेंट पीरियड की तुलना करें। 9. कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए? केवाईसी, पैन/आधार, पता प्रमाण, मार्कशीट, एंट्रेंस रिजल्ट, एडमिशन/ऑफर लेटर, कॉलेज का पत्र, फीस स्ट्रक्चर और कोर्स की जानकारी चाहिए। जरूरत पर हॉस्टल अनुमान, को-एप्लिकेंट के इनकम डॉक्यूमेंट, बैंक स्टेटमेंट और कोलेटरल दस्तावेज भी देने होंगे। विदेश के लिए पासपोर्ट, वीजा और यूनिवर्सिटी के कागजात चाहिए। पीएम-विद्यालक्ष्मी में इनकम प्रूफ आदि भी मांगे जा सकते हैं। 10. को-एप्लिकेंट या गारंटर क्यों चाहिए? विद्यार्थी की आमतौर पर अपनी आय नहीं होती। इसलिए माता-पिता या योग्य परिवार के सदस्य को को-एप्लिकेंट/को-बॉरोअर बनाया जाता है। गारंटर की जरूरत राशि, बैंक और योजना पर निर्भर है। पीएम-विद्यालक्ष्मी के पात्र क्यूएचईआई लोन में गारंटर और कोलेटरल नहीं लिया जाता। 11. सीआईबीआईएल स्कोर का क्या असर पड़ता है? बैंक छात्र के साथ को-एप्लिकेंट की क्रेडिट प्रोफाइल भी देख सकता है। खराब सीआईबीआईएल से लोन हमेशा रिजेक्ट नहीं होता, लेकिन ज्यादा सिक्योरिटी, मजबूत को-एप्लिकेंट या कम लोन मांगा जा सकता है। पीएम-विद्यालक्ष्मी में कोलेटरल और गारंटर की छूट है, लेकिन बाकी क्रेडिट जांच रहती है। 12. लोन मंजूर होने में कितना समय लगता है? समय बैंक, दस्तावेज, संस्थान की जांच, कोलेटरल और केस पर है। पीएम-विद्यालक्ष्मी में पूरे आवेदन से सैंक्शन तक 14 दिन की सीमा है। फीस की आखिरी तारीख से पहले आवेदन करें। देरी पर बैंक शाखा/नोडल अधिकारी और जरूरत पर शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करें। 13. लोन रिजेक्ट होने के मुख्य कारण क्या हैं? संस्थान/कोर्स पात्र न होना, मैनेजमेंट कोटा, अधूरे दस्तावेज, फीस की अस्पष्ट जानकारी, कमजोर एकेडमिक रिकॉर्ड, रीपेमेंट कैपेसिटी या को-एप्लिकेंट की कमजोर प्रोफाइल, कोलेटरल की समस्या, जरूरत से ज्यादा लोन और गलत जानकारी कारण हो सकते हैं। रिजेक्शन पर लिखित कारण मांगकर कमी दूर कर दोबारा आवेदन करें। 14. लोन मंजूर होने के बाद पैसा कैसे मिलता है? पूरी रकम आमतौर पर एक साथ कैश में नहीं मिलती। फीस के शेड्यूल के अनुसार साल या सेमेस्टर के हिसाब से रकम जारी की जाती है। ट्यूशन फीस आमतौर पर सीधे संस्थान को भेजते हैं। सैंक्शन लेटर और डिस्बर्समेंट शेड्यूल जरूर देखें। 15. पढ़ाई के दौरान लोन बढ़ सकता है? हां, फीस या अन्य खर्च बढ़ने पर एन्हांसमेंट/एडिशनल लोन मांग सकते हैं। विदेश में करेंसी बदलने से खर्च बढ़ना भी कारण हो सकता है। बैंक कॉस्ट एस्टिमेट, एकेडमिक प्रोग्रेस, रीपेमेंट कैपेसिटी और सिक्योरिटी फिर जांच सकता है। मंजूरी बैंक की नीति पर है। 16. कम आय वाले परिवारों के लिए क्या मदद है? कम आय या कृषि आय वाले परिवार भी लोन ले सकते हैं।

Punjab Police Recruitment Rules Amended

Punjab Police Recruitment Rules Amended

पंजाब पुलिस में भर्ती नियम बदले गए हैं। फोटो एआई जनरेडेट है। पंजाब पुलिस में सीधे सब-इंस्पेक्टर (SI) बनने की तैयारी कर बैठे युवा अब सीधे SI नहीं बन पाएंगे। क्योंकि सरकार अब SI नहीं, बल्कि असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) के पदों पर सीधी भर्ती करेगी। इस संबंधी सरकार ने पंजाब पुलिस रूल्स, 1934 में संशोधन किया है। . इसके बाद पंजाब पुलिस (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जो कि भविष्य में होने वाली भर्तियों में लागू होगा। हालांकि, पहले SI के 50% तक पद सीधे भर्ती से भरे जाते थे। चंडीगढ़ में सीधे ASI की भर्ती होती है। जबकि, अन्य किसी पड़ोसी जिले में यह नियम नहीं है। अब 5 पॉइंट्स में जानिए, कैसे होगी भर्ती 1. सीधी भर्ती का कोटा अलग-अलग कैडर में तय: सरकार की तरफ से सीधी भर्ती का कोटा अलग-अलग कैडर में तय किया गया है। सबसे अधिक कोटा इंटेलिजेंस, इन्वेस्टिगेशन और टेक्निकल सपोर्ट कैडर में किया गया है। इसमें 30 फीसदी कोटा रखा गया है। जबकि, आर्म्ड कैडर में 10 फीसदी ASI की सीधी भर्ती की जाएगी। 2. खिलाड़ियों के लिए भी 3 फीसदी कोटा: सीधी भर्ती के कुल पदों में से 3 फीसदी पद मेधावी और उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए रिजर्व रहेंगे, ताकि उन्हें भी आगे आने के अवसर मिल सकें। हालांकि, भर्ती विभागीय नीति के अनुसार होगी। 3. उम्र 18 से 28 साल: ASI भर्ती के लिए उम्र 18 से 28 साल होनी चाहिए। साथ ही ग्रेजुएशन पास और 10वीं तक पंजाबी पढ़ी होना जरूरी है। 4. सीधी भर्ती से आए SI और ASI का रिकॉर्ड रखा जाएगा: सीधी भर्ती से आए SI और ASI का पूरा रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। हर पुलिस रेंज में वहां के DIG सीधे भर्ती हुए सभी SI और ASI की अपडेटेड सूची संभालकर रखेंगे। वहीं, रेलवे पुलिस (GRP) में सीधे भर्ती हुए अधिकारियों का रिकॉर्ड AIG, GRP के पास रहेगा। 5. पुलिसकर्मियों की जरूरी जानकारी भी रिकॉर्ड में रहेगी: सीधी भर्ती से आए पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के नंबर, सर्विस बुक, पोस्टिंग इतिहास और चरित्र सत्यापन से जुड़ी जानकारी भी रिकॉर्ड में रखी जाएगी। पंजाब में थानों और ASI की स्थिति पंजाब में पुलिस थानों और चौकियों को मिलाकर कानून-व्यवस्था संभालने वाले 400 से ज्यादा थाने और चौकियां हैं। बड़े थानों में औसतन 4 से 8 ASI तैनात होते हैं। इसके आधार पर राज्यभर में सक्रिय ड्यूटी पर ASI की संख्या करीब 5,000 से 7,000 आंकी गई है। SHO या मुंशी के तौर पर एक थाने में अधिकतम 3 साल तक तैनाती रह सकती है। न्यूनतम कार्यकाल आमतौर पर 1 साल का होता है। किसी SI या पुलिस अधिकारी को उसके गृह उप-मंडल के थाने में SHO नहीं लगाया जा सकता। FIR होने पर दूसरे जिले में तबादला किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ आपराधिक मामला या FIR दर्ज होने पर उसे दूसरे पुलिस जिले में ट्रांसफर करने का प्रावधान है। भर्ती के बाद पुलिसकर्मी को एक कैडर से दूसरे कैडर में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। जिले के भीतर SI और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों का ट्रांसफर SSP या पुलिस कमिश्नर कर सकते हैं। एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर रेंज IG या DGP के आदेश से होता है। पंजाब सरकार का नोटिफिकेशन ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… पंजाब में 2000 पीटीआई टीचरों की भर्ती:कल से शुरू होगा प्रोसेस, हेल्पलाइन नंबर जारी; योग्य उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका पंजाब में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए पंजाब सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने दो हजार प्राइमरी कैडर के PTI टीचरों की भर्ती निकाली है। इसके लिए 31 जुलाई से प्रक्रिया शुरू होगी। लंबे समय से शारीरिक शिक्षा भर्ती का इंतजार कर रहे योग्य उम्मीदवारों के लिए यह सुनहरा अवसर है। पढ़ें पूरी खबर…

RBI New FD Rules for Small Finance Banks

RBI New FD Rules for Small Finance Banks

नई दिल्ली19 मिनट पहले कॉपी लिंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले निवेशकों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों के ग्राहकों को ब्याज दर की पूरी जानकारी पहले मिलेगी। ये बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सेकेंड अमेंडमेंट डायरेक्टंस-2026 के तहत किए गए हैं। यह नए नियम और रेगुलेशंस 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं। RBI के इस कदम का मकसद देशभर के स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD में निवेश करने वाले डिपॉजिटर्स के लिए सिस्टम में ज्यादा स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना है। RBI के नए FD नियम: जानिए 5 बड़े बदलाव 1. डिपॉजिट ऑफर करने से पहले ब्याज दरों का खुलासा जरूरी नए फ्रेमवर्क के तहत अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों को अपना डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट शेड्यूल पहले से पब्लिश करना होगी। रेगुलर और बल्क डिपॉजिट पर दिया जाने वाला ब्याज बैंक की वेबसाइट पर दिखाई गई दरों के अनुसार ही होना चाहिए। इस कदम से ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की FD दरों की तुलना करने में आसानी होगी। 2. बल्क डिपॉजिट रेट्स अपडेट करने का समय तय बल्क डिपॉजिट के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों को हर बिजनेस डे यानी कामकाजी दिन में सुबह 10:00 बजे अपनी वेबसाइट पर लागू ब्याज दरें जारी करनी होंगी। इसमें 10 मिनट का ग्रेस पीरियड दिया जाएगा, यानी बैंक सुबह 10:10 बजे तक अपनी दरें अपडेट कर सकेंगे। शेड्यूल कॉमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की सिंगल रुपए टर्म डिपॉजिट को बल्क डिपॉजिट माना जाता है। 3. सभी ब्रांच पर एक समान ब्याज दरें मिलेंगी RBI ने साफ तौर पर कहा है कि डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट्स बैंक की सभी ब्रांच और सभी ग्राहकों के लिए एक समान होनी चाहिए। बैंक एक ही तारीख को स्वीकार किए गए समान राशि के डिपॉजिट्स पर अलग-अलग दरें ऑफर नहीं कर सकते। इससे ग्राहकों के साथ किसी भी ब्रांच या प्रोफाइल के आधार पर भेदभाव नहीं होगा और सभी को समान अधिकार मिलेगा। 4. बल्क डिपॉजिट के लिए अलग दरों की इजाजत यूनिफॉर्मिटी यानी समानता का नियम सामान्य या रेगुलर डिपॉजिट पर लागू रहेगा। हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंक बल्क डिपॉजिट्स पर अलग-अलग ब्याज दरों की पेशकश कर सकते हैं। इन नियमों को बैंक को पहले से स्पष्ट करना होगा। दरों में यह अंतर RBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत डिपॉजिट की स्थिरता और लिक्विडिटी आवश्यकताओं जैसे फैक्टर्स पर आधारित हो सकता है। यह छूट नॉन-रेजिडेंट ग्राहकों से मिलने वाले बल्क डिपॉजिट पर भी लागू होगी। 5. FD निवेशकों पर क्या होगा इसका असर एडवांस डिस्क्लोजर, एक समान प्राइसिंग और बल्क डिपॉजिट के लिए रेगुलेटेड छूट को लागू करके यह नया फ्रेमवर्क एक तरफ जहां डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा करेगा। वहीं दूसरी तरफ बैंकों को अपने फंड्स का बेहतर मैनेजमेंट करने में मदद देगा। कस्टमर्स के लिए इसके क्या मायने हैं? एडवांस जानकारी: निवेशक अब अपनी FD बुक करने से पहले लागू होने वाली सटीक ब्याज दरों को जान सकेंगे। फिक्स्ड टाइमिंग: बैंकों को बल्क डिपॉजिट की दरें रोजाना एक तय समय (सुबह 10:00 से 10:10 बजे) पर पब्लिश करनी होंगी। समानता: एक समान डिपॉजिट के लिए किसी भी ब्रांच में जाने पर ग्राहक को एक जैसी ही ब्याज दर मिलेगी। फ्लेक्सिबिलिटी: बैंक डिपॉजिट फैक्टर्स के आधार पर बल्क एफडी पर अलग-अलग दरें तय कर सकेंगे। क्या होता है बल्क डिपॉजिट? बैंकिंग नियमों के तहत शेड्यूल कॉमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की सिंगल टर्म डिपॉजिट (FD) को ‘बल्क डिपॉजिट’ माना जाता है। बड़ी संस्थाएं, कॉरपोरेट्स या हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) आमतौर पर इतनी बड़ी रकम की एफडी कराते हैं। ये खबर भी पढ़ें… 6 साल बाद फिर लग सकती है UPI फीस: 2020 में हटाया गया था MDR शुल्क; अब वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव रखा वित्त मंत्रालय ने डिजिटल पेमेंट से जुड़े कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इससे भविष्य में UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट दोबारा लागू किया जा सकता है। इस फैसले का आम यूजर्स, दुकानदारों और बैंकिंग सिस्टम पर क्या असर पड़ेगा सवाल-जवाब में जानें.. पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

RBI New FD Rules for Small Finance Banks

RBI New FD Rules for Small Finance Banks

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले निवेशकों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों के ग्राहकों को ब्याज दर की पूरी जानकारी पहले मिलेगी। ये बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सेकेंड अमेंडमेंट डायरेक्टंस-2026 के तहत किए गए हैं। यह नए नियम और रेगुलेशंस 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं। RBI के इस कदम का मकसद देशभर के स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD में निवेश करने वाले डिपॉजिटर्स के लिए सिस्टम में ज्यादा स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना है। RBI के नए FD नियम: जानिए 5 बड़े बदलाव 1. डिपॉजिट ऑफर करने से पहले ब्याज दरों का खुलासा जरूरी नए फ्रेमवर्क के तहत अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों को अपना डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट शेड्यूल पहले से पब्लिश करना होगी। रेगुलर और बल्क डिपॉजिट पर दिया जाने वाला ब्याज बैंक की वेबसाइट पर दिखाई गई दरों के अनुसार ही होना चाहिए। इस कदम से ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की FD दरों की तुलना करने में आसानी होगी। 2. बल्क डिपॉजिट रेट्स अपडेट करने का समय तय बल्क डिपॉजिट के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों को हर बिजनेस डे यानी कामकाजी दिन में सुबह 10:00 बजे अपनी वेबसाइट पर लागू ब्याज दरें जारी करनी होंगी। इसमें 10 मिनट का ग्रेस पीरियड दिया जाएगा, यानी बैंक सुबह 10:10 बजे तक अपनी दरें अपडेट कर सकेंगे। शेड्यूल कॉमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की सिंगल रुपए टर्म डिपॉजिट को बल्क डिपॉजिट माना जाता है। 3. सभी ब्रांच पर एक समान ब्याज दरें मिलेंगी RBI ने साफ तौर पर कहा है कि डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट्स बैंक की सभी ब्रांच और सभी ग्राहकों के लिए एक समान होनी चाहिए। बैंक एक ही तारीख को स्वीकार किए गए समान राशि के डिपॉजिट्स पर अलग-अलग दरें ऑफर नहीं कर सकते। इससे ग्राहकों के साथ किसी भी ब्रांच या प्रोफाइल के आधार पर भेदभाव नहीं होगा और सभी को समान अधिकार मिलेगा। 4. बल्क डिपॉजिट के लिए अलग दरों की इजाजत यूनिफॉर्मिटी यानी समानता का नियम सामान्य या रेगुलर डिपॉजिट पर लागू रहेगा। हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंक बल्क डिपॉजिट्स पर अलग-अलग ब्याज दरों की पेशकश कर सकते हैं। इन नियमों को बैंक को पहले से स्पष्ट करना होगा। दरों में यह अंतर RBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत डिपॉजिट की स्थिरता और लिक्विडिटी आवश्यकताओं जैसे फैक्टर्स पर आधारित हो सकता है। यह छूट नॉन-रेजिडेंट ग्राहकों से मिलने वाले बल्क डिपॉजिट पर भी लागू होगी। 5. FD निवेशकों पर क्या होगा इसका असर एडवांस डिस्क्लोजर, एक समान प्राइसिंग और बल्क डिपॉजिट के लिए रेगुलेटेड छूट को लागू करके यह नया फ्रेमवर्क एक तरफ जहां डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा करेगा। वहीं दूसरी तरफ बैंकों को अपने फंड्स का बेहतर मैनेजमेंट करने में मदद देगा। कस्टमर्स के लिए इसके क्या मायने हैं? एडवांस जानकारी: निवेशक अब अपनी FD बुक करने से पहले लागू होने वाली सटीक ब्याज दरों को जान सकेंगे। फिक्स्ड टाइमिंग: बैंकों को बल्क डिपॉजिट की दरें रोजाना एक तय समय (सुबह 10:00 से 10:10 बजे) पर पब्लिश करनी होंगी। समानता: एक समान डिपॉजिट के लिए किसी भी ब्रांच में जाने पर ग्राहक को एक जैसी ही ब्याज दर मिलेगी। फ्लेक्सिबिलिटी: बैंक डिपॉजिट फैक्टर्स के आधार पर बल्क एफडी पर अलग-अलग दरें तय कर सकेंगे। क्या होता है बल्क डिपॉजिट? बैंकिंग नियमों के तहत शेड्यूल कॉमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की सिंगल टर्म डिपॉजिट (FD) को ‘बल्क डिपॉजिट’ माना जाता है। बड़ी संस्थाएं, कॉरपोरेट्स या हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) आमतौर पर इतनी बड़ी रकम की एफडी कराते हैं। ये खबर भी पढ़ें… 6 साल बाद फिर लग सकती है UPI फीस: 2020 में हटाया गया था MDR शुल्क; अब वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव रखा वित्त मंत्रालय ने डिजिटल पेमेंट से जुड़े कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इससे भविष्य में UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट दोबारा लागू किया जा सकता है। इस फैसले का आम यूजर्स, दुकानदारों और बैंकिंग सिस्टम पर क्या असर पड़ेगा सवाल-जवाब में जानें.. पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…