US Supreme Court Rejects Trump Mail Voting Rules

वॉशिंगटन29 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डाक से वोटिंग के नियम सख्त करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कोशिश पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सोमवार को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला 7-2 रहा। दो जजों ने इसका विरोध किया। मामला नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से जुड़ा है। ट्रम्प ने मार्च में आदेश जारी किया था। वे चाहते थे कि डाक से वोट भेजने वाले लोगों की लिस्ट राज्यों को अमेरिकी डाक सेवा (USPS) को दी जाए। ट्रम्प का कहना था कि डाक से वोटिंग में गड़बड़ी रोकने के लिए नए नियम जरूरी हैं। विरोध करने वालों ने कहा कि इन नियमों से सही वोट भी रुक सकते हैं और राष्ट्रपति राज्यों के चुनावी सिस्टम में जरूरत से ज्यादा दखल दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ट्रम्प के नियम लागू करने की अनुमति नहीं दी। ट्रम्प के नियम के तहत USPS रोक सकता था बैलेट अगर कोई बैलेट नए नियमों के मुताबिक नहीं होता या वोट देने वाले का नाम तय लिस्ट में नहीं मिलता, तो USPS उस बैलेट को रोक सकता था। डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार वाले राज्यों और वोटिंग अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इन नियमों का विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे चुनाव के दौरान लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। कोर्ट ने समय पर उठाया सवाल डाक से वोटिंग के मामले पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल समय का था। नवंबर के चुनाव में अब कुछ समय बचा है और कई राज्यों में बैलेट भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जस्टिस ब्रेट कावानॉ ने कहा कि ट्रंप की योजना भविष्य में लागू की जा सकती है, लेकिन नवंबर के चुनाव से ठीक पहले इसे लागू करना मुश्किल है। चुनाव अधिकारियों के पास नई व्यवस्था तैयार करने और उसे लागू करने के लिए जरूरी समय नहीं है। डाक से वोटिंग पर ट्रम्प ने पहले भी उठाए सवाल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद ट्रम्प ने डाक से वोटिंग पर सवाल उठाए थे। वह बिना सबूत यह दावा करते रहे कि चुनाव में गड़बड़ी हुई थी और उनसे जीत छीन ली गई। हालांकि, ट्रंप खुद भी डाक से वोट डाल चुके हैं। इस साल फ्लोरिडा के रिपब्लिकन प्राइमरी में उन्होंने मेल से वोट किया था। USPS ने भी ट्रंप के फैसले पर जताई थी चिंता ट्रंप की नई व्यवस्था को लेकर USPS के एक व्हिसलब्लोअर ने भी चिंता जताई थी। उसने कहा था कि नई तकनीकी व्यवस्था जल्दबाजी में तैयार की गई है। अगर इसमें कोई गड़बड़ी हुई तो लाखों लोगों के बैलेट समय पर नहीं पहुंच पाएंगे। नई व्यवस्था में बैलेट के लिफाफे पर मौजूद बारकोड और मतदाता की जानकारी को एक ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ना था। चुनाव से कुछ हफ्ते पहले इतना बड़ा बदलाव अधिकारियों के लिए भी चुनौती था। ट्रम्प के 5 और फैसलों पर SC की रोक टैरिफ – फरवरी 2026 सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ को अवैध ठहराया और कहा कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। इलिनॉय में नेशनल गार्ड – दिसंबर 2025 सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार को इलिनॉय में नेशनल गार्ड तैनात करने की तत्काल अनुमति नहीं दी। बर्थराइट सिटीजनशिप – जून 2026 ट्रम्प ने अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कानून राष्ट्रपति को ऐसा बदलाव करने की इजाजत नहीं देता। बर्थ टूरिज्म – सितंबर 2026 सुप्रीम कोर्ट से बर्थराइट सिटीजनशिप पर झटका लगने के बाद ट्रम्प ने बर्थ टूरिज्म रोकने और कुछ मामलों में बच्चों की नागरिकता सीमित करने के लिए नया आदेश जारी किया, लेकिरन कोर्ट ने इस पर भी रोक लगा दी। फेड गवर्नर को हटाने का मामला – जून 2026 ट्रम्प ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को पद से हटाने की कोशिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि फेड गवर्नर को राष्ट्रपति बिना उचित कानूनी कारण और तय प्रक्रिया के नहीं हटा सकते। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-मिडटर्म चुनाव जीता तो हर वोटर को ₹5 लाख: इस पर ₹128 लाख करोड़ खर्च करने होंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी बहुमत बरकरार रखती है, तो हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर (करीब 4.76 लाख रुपए) दिए जाएंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
DUSU Election 2026 Guidelines | 75% Attendance & Paperless Campaign Rules

Hindi News Career DUSU Election 2026 Guidelines | 75% Attendance & Paperless Campaign Rules 2 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) चुनाव 2026 के लिए मतदान 18 सितंबर को होगा, जबकि वोटों की गिनती 19 सितंबर को की जाएगी। नॉमिनेशन फाइल करने की लास्ट डेट 13 सितंबर को दोपहर 3 बजे तक है। इसके बाद नॉमिनेशन पेपर्स की जांच तीन बजकर 15 मिनट तक की जाएगी और नॉमिनेटेड कैंडिडेट्स की फाइनल लिस्ट उसी दिन शाम 6 बजे तक जारी कर दी जाएगी। चुनाव से जुड़ी तारीखें जारी करने के साथ ही यूनिवर्सिटी ने आचार संहिता भी जारी कर दी है। डीयू चुनाव कैंपेन को लेकर इस साल के नियम : यूनियन या प्रतिनिधि संस्था में सिर्फ फुल टाइम कोर्स में एनरोल्ड रेगुलर स्टूडेंट्स ही चुनाव में शामिल हो सकते हैं। 17 से 22 साल की उम्र के UG स्टूडेंट्स आवेदन कर सकते हैं, जबकि, PG स्टूडेंट्स के लिए अधिकतम उम्र 25 साल है। न्यूनतम अटेंडेंस 75% होनी चाहिए। कैंडिडेट्स 12 सितंबर, 2026 को दोपहर 2 बजे तक चीफ इलेक्शन ऑफिसर के ऑफिस में 10 मिनट से कम का चुनावी भाषण वाला वीडियो क्लिप जमा कर सकते हैं। चीफ इलेक्शन ऑफिसर की मंजूरी के बाद वीडियो DU की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। कैंडिडेट्स प्रचार के लिए कागज के बजाय सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रत्याशी के किसी भी विषय में पेपर लंबित नहीं होना चाहिए। पिछले वर्ष में फेल होने या मौजूदा साल में दोबारा एडमिशन लेने वाले छात्र भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। कार्यकारी सदस्य के पद के लिए अधिकतम दो बार चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। कोई प्रत्याशी एक साथ दो पदों पर चुनाव नहीं लड़ सकेगा। प्रचार के लिए लाउडस्पीकर, वाहन और जानवरों का इस्तेमाल मना है। मनोरंजन या किसी चीज का प्रतिनिधित्व करने के लिए मैस्कॉट या कॉस्ट्यूम का इस्तेमाल करना सख्त मना है। कैंडिडेट्स को प्रचार के लिए प्रिंटेड पोस्टर, पैम्फलेट या किसी अन्य प्रिंटेड सामग्री का इस्तेमाल करने की परमिशन नहीं दी जाएगी। कैंडिडेट्स केवल हाथ से बने पोस्टर का इस्तेमाल कर सकते हैं। प्रति कैंडिडेट अधिकतम खर्च 5000 रुपए है। DUSU चुनावों के लिए प्रचार का समय सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक है। कॉलेज कैंपस में प्रचार करते समय हर कैंडिडेट के साथ चार से ज्यादा छात्र नहीं हो सकते। उम्मीदवारों को प्रॉक्टर्स ऑफिस से ऑथराइज्ड व्हीकल स्टिकर लेना होगा। बिना स्टिकर वाले वाहनों को कैंपस/कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। फुटपाथ या सड़क पर ऐसी पार्किंग नहीं की जा सकती जिससे ट्रैफिक की दिक्क्त हो। किसी उम्मीदवार या उसके समर्थक को वाहन, पार्किंग ऐरिया, कैंपस या रोड़ साइड पर शराब या किसी नशीली चीजों का सेवन करते पाया गया, तो उम्मीदवार का नॉमिनेशनल कैंसिल किया जा सकता है। डीयू ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कैंपेन के दौरान नियम लगातार तोड़े गए तो चुनाव रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। शिकायतों के लिए बनेगी सेल डूसू चुनाव से संबंधित शिकायतें दूर करने के लिए सेल बनाया जाएगा। इसकी अध्यक्षता डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर करेंगे। सेल में एक सीनियर टीचर, एक सीनियर प्रशासनिक अधिकारी और फाइनल ईयर का एक छात्र व एक छात्रा को शामिल किया जाएगा। चुनाव से जुड़ी आपत्तिजनक घटनाओं की सूचना पुलिस को 12 घंटे के अंदर देने का प्रावधान भी किया गया है। साल 2024 में पोस्टर हटाने का खर्च 1 करोड़ दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में प्रचार के लिए इस्तेमाल पोस्टर को हटाने में खर्च हुए राशि की सीमा दिल्ली नगर निगम ने एक करोड़ रुपये बताई थी। इसकी जानकारी हाई कोर्ट को देते हुए भुगतान की मांग दिल्ली विश्वविद्यालय से की गई। इस विषय पर विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि उम्मीदवारों और छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर और आसपास की सार्वजनिक संपत्तियों पर बड़े पैमाने पर प्रचार सामग्री लगाई थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले दीवारों और सार्वजनिक संपत्ति को साफ किए जाने तक DUSU चुनाव की मतगणना पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि पहले पोस्टर-बैनर हटाकर संपत्ति को साफ किया जाए, उसके बाद मतगणना आगे बढ़े। MCD के अलावा DMRC ने भी सफाई पर लगभग ₹1 लाख खर्च होने की बात कही थी। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया था कि सफाई का खर्च संबंधित उम्मीदवारों से वसूलने का विकल्प देखा जा सकता है। 2025 के चुनाव के लिए ₹1 लाख का एंटी-डिफेसमेंट बॉन्ड लागू किया गया था। यह पोस्टर हटाने का खर्च नहीं, बल्कि उम्मीदवार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए था। इसके पीछे 2024 DUSU चुनाव के दौरान हुई भारी तोड़फोड़/पोस्टरबाजी की सफाई का खर्च था। ये खबर भी पढ़ें जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर स्टूडेंट्स ने धरना दिया:अधिकारियों से पूछा- अगर आपके बच्चे होते, तो क्या आप उन्हें ऐसी ही सुविधा देते अलवर के थानागाजी क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, जोधावास में छात्र-छात्राओं ने धरना शुरू कर दिया। 13–14 अगस्त 2026 को जर्जर भवन और स्कूल की दूसरी बुनियादी समस्याओं को लेकर विद्यार्थियों ने विरोध किया। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
SEBI F&O Trading Rules | Retail Investor Loss Decreases in India

मुंबई4 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय शेयर बाजार के इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट में रिटेल निवेशकों को होने वाला कुल घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर 91,685 करोड़ रुपए पर आ गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 1.12 लाख करोड़ रुपए था। वित्त मंत्रालय ने 11 अगस्त को संसद को यह अहम जानकारी दी है। मार्केट रेगुलेटर सेबी की ओर से F&O सेगमेंट में जोखिम कम करने के लिए उठाए गए कई कड़े और नए कदमों के बाद रिटेल निवेशकों के घाटे में यह गिरावट दर्ज की गई है। ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों की संख्या घटी, प्रति व्यक्ति एवरेज नुकसान बढ़ा सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सेबी के नए नियमों का बाजार पर सीधा असर दिखा। इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वाले यूनिक इंडिविजुअल इन्वेस्टर्स की संख्या वित्त वर्ष 2024-25 में 98.10 लाख थी, जो 2025-26 में घटकर 78.60 लाख रह गई। हालांकि, कम निवेशकों के बाद भी प्रति व्यक्ति औसत नुकसान में मामूली बढ़त देखी गई है। FY26 में F&O में ट्रेड करने वाले हर व्यक्ति का औसत घाटा बढ़कर 1.16 लाख रुपए हो गया, जो FY25 में 1.14 लाख रुपए था। 1. सेबी ने निवेशकों की सुरक्षा के लिए उठाए कड़े कदम वित्त मंत्रालय ने बताया कि सेबी ने स्टॉक मार्केट में स्थिरता लाने और आम निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कई रेगुलेटरी और सर्विलांस उपाय लागू किए हैं। इसमें सबसे पहले प्लेटफॉर्म पर रिस्क डिस्क्लोजर को अनिवार्य किया गया। अब जब भी कोई यूजर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लॉग इन करता है, तो ब्रोकर को यह चेतावनी दिखाना जरूरी है कि FY22 में F&O में ट्रेड करने वाले 10 में से 9 रिटेल ट्रेडर्स को नुकसान हुआ था। 2. नवंबर 2024 से लागू हुए 7 बड़े बदलाव F&O सेगमेंट को मजबूत करने के लिए सेबी ने नवंबर 2024 के बाद से एक पूरा रोडमैप लागू किया था… वीकली इंडेक्स डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को तार्किक बनाना। ऑप्शंस एक्सपायरी के दिन टेल रिस्क कवरेज को बढ़ाना। इंडेक्स डेरिवेटिव्स के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइज में बढ़ोतरी करना। मंथली इंडेक्स डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को सही ढंग से व्यवस्थित करना। बायर्स से ऑप्शंस प्रीमियम का अग्रिम (अपफ्रंट) कलेक्शन सुनिश्चित करना। एक्सपायरी के दिन कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाना। पोजीशन लिमिट्स की इंट्राडे मॉनिटरिंग लागू करना। 3. मई 2025 में सेबी ने लिए और भी कड़े फैसले मई 2025 में सेबी ने बाजार में जोखिम को और बेहतर ढंग से मॉनिटर करने के लिए कुछ और महत्वपूर्ण फैसले लिए। इसके तहत अलग-अलग एक्सचेंजों पर अलग-अलग डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के दिनों को स्ट्रीमलाइन किया गया। साथ ही पोजीशन लिमिट्स के लिए उपयुक्त रिस्क मैट्रिक्स लागू किए गए, जिससे F&O सेगमेंट में जोखिमों का खुलासा और उनकी निगरानी आसान हो सके। 4. F&O में STT से सरकार की कमाई बढ़कर ₹27,695 करोड़ हुई वित्त मंत्रालय ने बताया कि सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT को एक मॉडर्न और टेक्नोलॉजी-ऑपरेटेड कलेक्शन मैकेनिज्म के रूप में तैयार किया गया है। यह टैक्स सीधे रेगुलेटेड सिक्योरिटीज मार्केट के इंफ्रास्ट्रक्चर में एम्बेडेड यानी जुड़ा होता है। इससे टैक्स चोरी और लीकेज की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, F&O ट्रेड्स पर लगने वाले STT से सरकार का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 27,695 करोड़ रुपए हो गया। यह FY25 के 22,225 करोड़ रुपए के मुकाबले काफी ज्यादा है। अगर FY22 से तुलना करें तो उस वक्त सालाना STT कलेक्शन महज 6,634 करोड़ रुपए था। नॉलेज बॉक्स: क्या होता है फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O? F&O यानी ‘फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस’ शेयर बाजार का एक डेरिवेटिव सेगमेंट है। इसमें निवेशक सीधे शेयर खरीदने के बजाय किसी शेयर या इंडेक्स जैसे- निफ्टी या सेंसेक्स के भविष्य के दाम पर दांव लगाते हैं। यह काफी जोखिम भरा यानी हाई-रिस्क ट्रेडिंग मॉडल होता है, जिसमें कम समय में भारी मुनाफा या बड़ा घाटा हो सकता है। ये खबर भी पढ़ें… कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें: 5 गलतियां बना सकती हैं आपकी नई गाड़ी महंगी; जानिए इससे बचने के तरीके कार खरीदते समय जब बात फाइनेंस और लोन की आती है, तो कई लोग जल्दबाजी में गलत फैसले ले लेते हैं। डीलर आपको एक आकर्षक मंथली किस्त यानी EMI बताता है, बैंक ब्याज दर बताता है और खरीदार का पूरा फोकस सिर्फ इस बात पर चला जाता है कि महीने की किस्त कम से कम कैसे हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कम EMI आपको लंबे समय में भारी पड़ सकती है? पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Education Loan Guide | Interest EMI Repayment Rules & Eligibility 2026

Hindi News Career Education Loan Guide | Interest EMI Repayment Rules & Eligibility 2026 21 मिनट पहले कॉपी लिंक एडमिशन का दौर चल रहा है। ऐसे में छात्रों और उनके माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता पढ़ाई की फीस होती है। ऐसे में सबसे पहले एजुकेशन लोन का ख्याल आता है। लोन कितना मिलेगा, कौन पात्र है, बिना सिक्योरिटी लोन मिलेगा या नहीं, ब्याज और EMI कितनी होगी… इसे ध्यान में रखते हुए हमने पाठकों से इस विषय पर उनके सवाल मांगे। मिले सवालों का जवाब दे रहे हैं हमारे फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स। 1. किन छात्रों और कोर्स के लिए लोन मिलता है? मान्यता प्राप्त संस्थानों के यूजी, पीजी, प्रोफेशनल, टेक्निकल, वोकेशनल और स्किल-बेस्ड कोर्स के लिए लोन मिल सकता है। मैनेजमेंट, कानून, कंप्यूटर, कृषि, वेटरिनरी आदि भी शामिल हैं। भारत और विदेश की पढ़ाई के लिए लोन मिल सकता है। पॉलिटिकल साइंस, सर्टिफिकेट, डिस्टेंस, पार्ट-टाइम और एग्जीक्यूटिव कोर्स की पात्रता बैंक और मान्यता पर निर्भर है। पीएम-विद्यालक्ष्मी में पात्र क्वालिटी हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस में मेरिट या ओपन कॉम्पिटिटिव एग्जाम से प्रवेश जरूरी है। जहां नियम लागू हों, मैनेजमेंट कोटा पात्र नहीं है। 2. क्या हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी के लिए लोन मिलता है? नहीं। बैंक संस्थान की मान्यता, एफिलिएशन, रेगुलेटरी अप्रूवल, एडमिशन का तरीका, एकेडमिक रिकॉर्ड, कोर्स, फीस, रोजगार और प्लेसमेंट रिकॉर्ड के साथ अपनी अप्रूव्ड लिस्ट भी देखता है। 3. अधिकतम कितना लोन मिलता है? सभी बैंकों की एक समान सीमा नहीं है। राशि कोर्स की लागत, संस्थान, देश, छात्र और को-एप्लिकेंट की प्रोफाइल, सिक्योरिटी और बैंक की नीति पर निर्भर है। पुरानी आईबीए मॉडल स्कीम में भारत में 10 लाख रु. और विदेश में 20 लाख रु. तक की सीमा थी, लेकिन कई बैंक इससे ज्यादा भी देते हैं। विदेश में राशि आमतौर पर ज्यादा होती है। पूरा स्वीकृत लोन लेना जरूरी नहीं; भविष्य की ईएमआई और रीपेमेंट कैपेसिटी भी देखें। पीएम-विद्यालक्ष्मी में पात्र छात्रों को ट्यूशन फीस व अन्य कोर्स खर्च के लिए कोलेटरल-फ्री और गारंटर-फ्री लोन मिल सकता है। 4. बिना सिक्योरिटी कितना लोन मिलता है? कई मामलों में 7.5 लाख रु. तक का सामान्य एजुकेशन लोन बिना सिक्योरिटी मिलता है। यह क्रेडिट गारंटी और बैंक की शर्तों पर निर्भर है। ज्यादा राशि पर घर, जमीन, एफडी, बीमा पॉलिसी आदि कोलेटरल मांग सकते हैं। बैंक संपत्ति की कीमत और कानूनी स्थिति जांचता है। पीएम-विद्यालक्ष्मी के पात्र क्यूएचईआई छात्रों को कोलेटरल और गारंटर के बिना लोन मिल सकता है। 5. लोन से कौन-कौन से खर्च पूरे हो सकते हैं? ट्यूशन, एडमिशन, एग्जामिनेशन, लाइब्रेरी, लैबोरेटरी, हॉस्टल, किताबें, इक्विपमेंट, जरूरी लैपटॉप/कंप्यूटर, प्रोजेक्ट, थीसिस, स्टडी टूर और अन्य मंजूर शैक्षणिक खर्च शामिल हो सकते हैं। विदेश में कुछ ट्रैवल और लिविंग खर्च भी मिल सकते हैं। अंतिम सूची बैंक की सैंक्शन टर्म्स पर निर्भर है। 6. विदेश में पढ़ाई के लिए क्या ध्यान रखें? बैंक एडमिशन लेटर, यूनिवर्सिटी की रैंकिंग व रिकग्निशन, कोर्स, फीस, वीजा-पासपोर्ट दस्तावेज और रीपेमेंट कैपेसिटी देखता है। लोन रु. में सैंक्शन और फीस विदेशी मुद्रा में दी जा सकती है। रु. की कीमत गिरने पर खर्च और ईएमआई बढ़ सकती है। इसे करेंसी रिस्क कहते हैं। 7. लोन के लिए आवेदन कैसे करें? बैंक की शाखा, वेबसाइट या डिजिटल प्लेटफॉर्म से आवेदन कर सकते हैं। पीएम-विद्यालक्ष्मी पात्र योजनाओं के लिए यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यहां योजनाओं की जानकारी, आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा है। हर लोन के लिए योजना से आवेदन जरूरी नहीं है। 8. पीएम-विद्यालक्ष्मी और सीधे बैंक में आवेदन में क्या अंतर है? पीएम-विद्यालक्ष्मी पात्र योजनाओं और पार्टिसिपेटिंग लेंडर्स के लिए डिजिटल व्यवस्था देता है। सीधे बैंक में आवेदन करने पर उसकी अपनी पॉलिसी लागू होती है और अन्य लोन प्रोडक्ट भी मिल सकते हैं। ब्याज, कुल लागत, कोलेटरल, गारंटर, मॉरेटोरियम और रीपेमेंट पीरियड की तुलना करें। 9. कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए? केवाईसी, पैन/आधार, पता प्रमाण, मार्कशीट, एंट्रेंस रिजल्ट, एडमिशन/ऑफर लेटर, कॉलेज का पत्र, फीस स्ट्रक्चर और कोर्स की जानकारी चाहिए। जरूरत पर हॉस्टल अनुमान, को-एप्लिकेंट के इनकम डॉक्यूमेंट, बैंक स्टेटमेंट और कोलेटरल दस्तावेज भी देने होंगे। विदेश के लिए पासपोर्ट, वीजा और यूनिवर्सिटी के कागजात चाहिए। पीएम-विद्यालक्ष्मी में इनकम प्रूफ आदि भी मांगे जा सकते हैं। 10. को-एप्लिकेंट या गारंटर क्यों चाहिए? विद्यार्थी की आमतौर पर अपनी आय नहीं होती। इसलिए माता-पिता या योग्य परिवार के सदस्य को को-एप्लिकेंट/को-बॉरोअर बनाया जाता है। गारंटर की जरूरत राशि, बैंक और योजना पर निर्भर है। पीएम-विद्यालक्ष्मी के पात्र क्यूएचईआई लोन में गारंटर और कोलेटरल नहीं लिया जाता। 11. सीआईबीआईएल स्कोर का क्या असर पड़ता है? बैंक छात्र के साथ को-एप्लिकेंट की क्रेडिट प्रोफाइल भी देख सकता है। खराब सीआईबीआईएल से लोन हमेशा रिजेक्ट नहीं होता, लेकिन ज्यादा सिक्योरिटी, मजबूत को-एप्लिकेंट या कम लोन मांगा जा सकता है। पीएम-विद्यालक्ष्मी में कोलेटरल और गारंटर की छूट है, लेकिन बाकी क्रेडिट जांच रहती है। 12. लोन मंजूर होने में कितना समय लगता है? समय बैंक, दस्तावेज, संस्थान की जांच, कोलेटरल और केस पर है। पीएम-विद्यालक्ष्मी में पूरे आवेदन से सैंक्शन तक 14 दिन की सीमा है। फीस की आखिरी तारीख से पहले आवेदन करें। देरी पर बैंक शाखा/नोडल अधिकारी और जरूरत पर शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल करें। 13. लोन रिजेक्ट होने के मुख्य कारण क्या हैं? संस्थान/कोर्स पात्र न होना, मैनेजमेंट कोटा, अधूरे दस्तावेज, फीस की अस्पष्ट जानकारी, कमजोर एकेडमिक रिकॉर्ड, रीपेमेंट कैपेसिटी या को-एप्लिकेंट की कमजोर प्रोफाइल, कोलेटरल की समस्या, जरूरत से ज्यादा लोन और गलत जानकारी कारण हो सकते हैं। रिजेक्शन पर लिखित कारण मांगकर कमी दूर कर दोबारा आवेदन करें। 14. लोन मंजूर होने के बाद पैसा कैसे मिलता है? पूरी रकम आमतौर पर एक साथ कैश में नहीं मिलती। फीस के शेड्यूल के अनुसार साल या सेमेस्टर के हिसाब से रकम जारी की जाती है। ट्यूशन फीस आमतौर पर सीधे संस्थान को भेजते हैं। सैंक्शन लेटर और डिस्बर्समेंट शेड्यूल जरूर देखें। 15. पढ़ाई के दौरान लोन बढ़ सकता है? हां, फीस या अन्य खर्च बढ़ने पर एन्हांसमेंट/एडिशनल लोन मांग सकते हैं। विदेश में करेंसी बदलने से खर्च बढ़ना भी कारण हो सकता है। बैंक कॉस्ट एस्टिमेट, एकेडमिक प्रोग्रेस, रीपेमेंट कैपेसिटी और सिक्योरिटी फिर जांच सकता है। मंजूरी बैंक की नीति पर है। 16. कम आय वाले परिवारों के लिए क्या मदद है? कम आय या कृषि आय वाले परिवार भी लोन ले सकते हैं।
Punjab Police Recruitment Rules Amended

पंजाब पुलिस में भर्ती नियम बदले गए हैं। फोटो एआई जनरेडेट है। पंजाब पुलिस में सीधे सब-इंस्पेक्टर (SI) बनने की तैयारी कर बैठे युवा अब सीधे SI नहीं बन पाएंगे। क्योंकि सरकार अब SI नहीं, बल्कि असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) के पदों पर सीधी भर्ती करेगी। इस संबंधी सरकार ने पंजाब पुलिस रूल्स, 1934 में संशोधन किया है। . इसके बाद पंजाब पुलिस (द्वितीय संशोधन) नियम, 2026 को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जो कि भविष्य में होने वाली भर्तियों में लागू होगा। हालांकि, पहले SI के 50% तक पद सीधे भर्ती से भरे जाते थे। चंडीगढ़ में सीधे ASI की भर्ती होती है। जबकि, अन्य किसी पड़ोसी जिले में यह नियम नहीं है। अब 5 पॉइंट्स में जानिए, कैसे होगी भर्ती 1. सीधी भर्ती का कोटा अलग-अलग कैडर में तय: सरकार की तरफ से सीधी भर्ती का कोटा अलग-अलग कैडर में तय किया गया है। सबसे अधिक कोटा इंटेलिजेंस, इन्वेस्टिगेशन और टेक्निकल सपोर्ट कैडर में किया गया है। इसमें 30 फीसदी कोटा रखा गया है। जबकि, आर्म्ड कैडर में 10 फीसदी ASI की सीधी भर्ती की जाएगी। 2. खिलाड़ियों के लिए भी 3 फीसदी कोटा: सीधी भर्ती के कुल पदों में से 3 फीसदी पद मेधावी और उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए रिजर्व रहेंगे, ताकि उन्हें भी आगे आने के अवसर मिल सकें। हालांकि, भर्ती विभागीय नीति के अनुसार होगी। 3. उम्र 18 से 28 साल: ASI भर्ती के लिए उम्र 18 से 28 साल होनी चाहिए। साथ ही ग्रेजुएशन पास और 10वीं तक पंजाबी पढ़ी होना जरूरी है। 4. सीधी भर्ती से आए SI और ASI का रिकॉर्ड रखा जाएगा: सीधी भर्ती से आए SI और ASI का पूरा रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। हर पुलिस रेंज में वहां के DIG सीधे भर्ती हुए सभी SI और ASI की अपडेटेड सूची संभालकर रखेंगे। वहीं, रेलवे पुलिस (GRP) में सीधे भर्ती हुए अधिकारियों का रिकॉर्ड AIG, GRP के पास रहेगा। 5. पुलिसकर्मियों की जरूरी जानकारी भी रिकॉर्ड में रहेगी: सीधी भर्ती से आए पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के नंबर, सर्विस बुक, पोस्टिंग इतिहास और चरित्र सत्यापन से जुड़ी जानकारी भी रिकॉर्ड में रखी जाएगी। पंजाब में थानों और ASI की स्थिति पंजाब में पुलिस थानों और चौकियों को मिलाकर कानून-व्यवस्था संभालने वाले 400 से ज्यादा थाने और चौकियां हैं। बड़े थानों में औसतन 4 से 8 ASI तैनात होते हैं। इसके आधार पर राज्यभर में सक्रिय ड्यूटी पर ASI की संख्या करीब 5,000 से 7,000 आंकी गई है। SHO या मुंशी के तौर पर एक थाने में अधिकतम 3 साल तक तैनाती रह सकती है। न्यूनतम कार्यकाल आमतौर पर 1 साल का होता है। किसी SI या पुलिस अधिकारी को उसके गृह उप-मंडल के थाने में SHO नहीं लगाया जा सकता। FIR होने पर दूसरे जिले में तबादला किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ आपराधिक मामला या FIR दर्ज होने पर उसे दूसरे पुलिस जिले में ट्रांसफर करने का प्रावधान है। भर्ती के बाद पुलिसकर्मी को एक कैडर से दूसरे कैडर में ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। जिले के भीतर SI और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों का ट्रांसफर SSP या पुलिस कमिश्नर कर सकते हैं। एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर रेंज IG या DGP के आदेश से होता है। पंजाब सरकार का नोटिफिकेशन ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… पंजाब में 2000 पीटीआई टीचरों की भर्ती:कल से शुरू होगा प्रोसेस, हेल्पलाइन नंबर जारी; योग्य उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका पंजाब में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए पंजाब सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने दो हजार प्राइमरी कैडर के PTI टीचरों की भर्ती निकाली है। इसके लिए 31 जुलाई से प्रक्रिया शुरू होगी। लंबे समय से शारीरिक शिक्षा भर्ती का इंतजार कर रहे योग्य उम्मीदवारों के लिए यह सुनहरा अवसर है। पढ़ें पूरी खबर…
RBI New FD Rules for Small Finance Banks

नई दिल्ली19 मिनट पहले कॉपी लिंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले निवेशकों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों के ग्राहकों को ब्याज दर की पूरी जानकारी पहले मिलेगी। ये बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सेकेंड अमेंडमेंट डायरेक्टंस-2026 के तहत किए गए हैं। यह नए नियम और रेगुलेशंस 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं। RBI के इस कदम का मकसद देशभर के स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD में निवेश करने वाले डिपॉजिटर्स के लिए सिस्टम में ज्यादा स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना है। RBI के नए FD नियम: जानिए 5 बड़े बदलाव 1. डिपॉजिट ऑफर करने से पहले ब्याज दरों का खुलासा जरूरी नए फ्रेमवर्क के तहत अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों को अपना डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट शेड्यूल पहले से पब्लिश करना होगी। रेगुलर और बल्क डिपॉजिट पर दिया जाने वाला ब्याज बैंक की वेबसाइट पर दिखाई गई दरों के अनुसार ही होना चाहिए। इस कदम से ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की FD दरों की तुलना करने में आसानी होगी। 2. बल्क डिपॉजिट रेट्स अपडेट करने का समय तय बल्क डिपॉजिट के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों को हर बिजनेस डे यानी कामकाजी दिन में सुबह 10:00 बजे अपनी वेबसाइट पर लागू ब्याज दरें जारी करनी होंगी। इसमें 10 मिनट का ग्रेस पीरियड दिया जाएगा, यानी बैंक सुबह 10:10 बजे तक अपनी दरें अपडेट कर सकेंगे। शेड्यूल कॉमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की सिंगल रुपए टर्म डिपॉजिट को बल्क डिपॉजिट माना जाता है। 3. सभी ब्रांच पर एक समान ब्याज दरें मिलेंगी RBI ने साफ तौर पर कहा है कि डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट्स बैंक की सभी ब्रांच और सभी ग्राहकों के लिए एक समान होनी चाहिए। बैंक एक ही तारीख को स्वीकार किए गए समान राशि के डिपॉजिट्स पर अलग-अलग दरें ऑफर नहीं कर सकते। इससे ग्राहकों के साथ किसी भी ब्रांच या प्रोफाइल के आधार पर भेदभाव नहीं होगा और सभी को समान अधिकार मिलेगा। 4. बल्क डिपॉजिट के लिए अलग दरों की इजाजत यूनिफॉर्मिटी यानी समानता का नियम सामान्य या रेगुलर डिपॉजिट पर लागू रहेगा। हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंक बल्क डिपॉजिट्स पर अलग-अलग ब्याज दरों की पेशकश कर सकते हैं। इन नियमों को बैंक को पहले से स्पष्ट करना होगा। दरों में यह अंतर RBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत डिपॉजिट की स्थिरता और लिक्विडिटी आवश्यकताओं जैसे फैक्टर्स पर आधारित हो सकता है। यह छूट नॉन-रेजिडेंट ग्राहकों से मिलने वाले बल्क डिपॉजिट पर भी लागू होगी। 5. FD निवेशकों पर क्या होगा इसका असर एडवांस डिस्क्लोजर, एक समान प्राइसिंग और बल्क डिपॉजिट के लिए रेगुलेटेड छूट को लागू करके यह नया फ्रेमवर्क एक तरफ जहां डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा करेगा। वहीं दूसरी तरफ बैंकों को अपने फंड्स का बेहतर मैनेजमेंट करने में मदद देगा। कस्टमर्स के लिए इसके क्या मायने हैं? एडवांस जानकारी: निवेशक अब अपनी FD बुक करने से पहले लागू होने वाली सटीक ब्याज दरों को जान सकेंगे। फिक्स्ड टाइमिंग: बैंकों को बल्क डिपॉजिट की दरें रोजाना एक तय समय (सुबह 10:00 से 10:10 बजे) पर पब्लिश करनी होंगी। समानता: एक समान डिपॉजिट के लिए किसी भी ब्रांच में जाने पर ग्राहक को एक जैसी ही ब्याज दर मिलेगी। फ्लेक्सिबिलिटी: बैंक डिपॉजिट फैक्टर्स के आधार पर बल्क एफडी पर अलग-अलग दरें तय कर सकेंगे। क्या होता है बल्क डिपॉजिट? बैंकिंग नियमों के तहत शेड्यूल कॉमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की सिंगल टर्म डिपॉजिट (FD) को ‘बल्क डिपॉजिट’ माना जाता है। बड़ी संस्थाएं, कॉरपोरेट्स या हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) आमतौर पर इतनी बड़ी रकम की एफडी कराते हैं। ये खबर भी पढ़ें… 6 साल बाद फिर लग सकती है UPI फीस: 2020 में हटाया गया था MDR शुल्क; अब वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव रखा वित्त मंत्रालय ने डिजिटल पेमेंट से जुड़े कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इससे भविष्य में UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट दोबारा लागू किया जा सकता है। इस फैसले का आम यूजर्स, दुकानदारों और बैंकिंग सिस्टम पर क्या असर पड़ेगा सवाल-जवाब में जानें.. पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
RBI New FD Rules for Small Finance Banks

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले निवेशकों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों के ग्राहकों को ब्याज दर की पूरी जानकारी पहले मिलेगी। ये बदलाव रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सेकेंड अमेंडमेंट डायरेक्टंस-2026 के तहत किए गए हैं। यह नए नियम और रेगुलेशंस 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गए हैं। RBI के इस कदम का मकसद देशभर के स्मॉल फाइनेंस बैंकों में FD में निवेश करने वाले डिपॉजिटर्स के लिए सिस्टम में ज्यादा स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता लाना है। RBI के नए FD नियम: जानिए 5 बड़े बदलाव 1. डिपॉजिट ऑफर करने से पहले ब्याज दरों का खुलासा जरूरी नए फ्रेमवर्क के तहत अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों को अपना डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट शेड्यूल पहले से पब्लिश करना होगी। रेगुलर और बल्क डिपॉजिट पर दिया जाने वाला ब्याज बैंक की वेबसाइट पर दिखाई गई दरों के अनुसार ही होना चाहिए। इस कदम से ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की FD दरों की तुलना करने में आसानी होगी। 2. बल्क डिपॉजिट रेट्स अपडेट करने का समय तय बल्क डिपॉजिट के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों को हर बिजनेस डे यानी कामकाजी दिन में सुबह 10:00 बजे अपनी वेबसाइट पर लागू ब्याज दरें जारी करनी होंगी। इसमें 10 मिनट का ग्रेस पीरियड दिया जाएगा, यानी बैंक सुबह 10:10 बजे तक अपनी दरें अपडेट कर सकेंगे। शेड्यूल कॉमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की सिंगल रुपए टर्म डिपॉजिट को बल्क डिपॉजिट माना जाता है। 3. सभी ब्रांच पर एक समान ब्याज दरें मिलेंगी RBI ने साफ तौर पर कहा है कि डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट्स बैंक की सभी ब्रांच और सभी ग्राहकों के लिए एक समान होनी चाहिए। बैंक एक ही तारीख को स्वीकार किए गए समान राशि के डिपॉजिट्स पर अलग-अलग दरें ऑफर नहीं कर सकते। इससे ग्राहकों के साथ किसी भी ब्रांच या प्रोफाइल के आधार पर भेदभाव नहीं होगा और सभी को समान अधिकार मिलेगा। 4. बल्क डिपॉजिट के लिए अलग दरों की इजाजत यूनिफॉर्मिटी यानी समानता का नियम सामान्य या रेगुलर डिपॉजिट पर लागू रहेगा। हालांकि, स्मॉल फाइनेंस बैंक बल्क डिपॉजिट्स पर अलग-अलग ब्याज दरों की पेशकश कर सकते हैं। इन नियमों को बैंक को पहले से स्पष्ट करना होगा। दरों में यह अंतर RBI के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत डिपॉजिट की स्थिरता और लिक्विडिटी आवश्यकताओं जैसे फैक्टर्स पर आधारित हो सकता है। यह छूट नॉन-रेजिडेंट ग्राहकों से मिलने वाले बल्क डिपॉजिट पर भी लागू होगी। 5. FD निवेशकों पर क्या होगा इसका असर एडवांस डिस्क्लोजर, एक समान प्राइसिंग और बल्क डिपॉजिट के लिए रेगुलेटेड छूट को लागू करके यह नया फ्रेमवर्क एक तरफ जहां डिपॉजिटर्स के हितों की रक्षा करेगा। वहीं दूसरी तरफ बैंकों को अपने फंड्स का बेहतर मैनेजमेंट करने में मदद देगा। कस्टमर्स के लिए इसके क्या मायने हैं? एडवांस जानकारी: निवेशक अब अपनी FD बुक करने से पहले लागू होने वाली सटीक ब्याज दरों को जान सकेंगे। फिक्स्ड टाइमिंग: बैंकों को बल्क डिपॉजिट की दरें रोजाना एक तय समय (सुबह 10:00 से 10:10 बजे) पर पब्लिश करनी होंगी। समानता: एक समान डिपॉजिट के लिए किसी भी ब्रांच में जाने पर ग्राहक को एक जैसी ही ब्याज दर मिलेगी। फ्लेक्सिबिलिटी: बैंक डिपॉजिट फैक्टर्स के आधार पर बल्क एफडी पर अलग-अलग दरें तय कर सकेंगे। क्या होता है बल्क डिपॉजिट? बैंकिंग नियमों के तहत शेड्यूल कॉमर्शियल बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की सिंगल टर्म डिपॉजिट (FD) को ‘बल्क डिपॉजिट’ माना जाता है। बड़ी संस्थाएं, कॉरपोरेट्स या हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) आमतौर पर इतनी बड़ी रकम की एफडी कराते हैं। ये खबर भी पढ़ें… 6 साल बाद फिर लग सकती है UPI फीस: 2020 में हटाया गया था MDR शुल्क; अब वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एक्ट में बदलाव का प्रस्ताव रखा वित्त मंत्रालय ने डिजिटल पेमेंट से जुड़े कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इससे भविष्य में UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट दोबारा लागू किया जा सकता है। इस फैसले का आम यूजर्स, दुकानदारों और बैंकिंग सिस्टम पर क्या असर पड़ेगा सवाल-जवाब में जानें.. पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Tatkal Ticket Rules Change & Festive Price Hike

Hindi News Business Tatkal Ticket Rules Change & Festive Price Hike | Commercial Cylinder Cost नई दिल्ली5 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर महंगाई से जुड़ी रही। देश की सबसे बड़ी FMCG और कंज्यूमर कंपनियां फेस्टिव सीजन से पहले प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। टूथपेस्ट से लेकर टायर और पेंट जैसे सामान महंगे होने वाले हैं। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर औसतम 200 रुपए तक सस्ता हो गया है। वहीं तत्काल ट्रेन बुकिंग नियम और CKYC के नियम बदल गए हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार आज अवकाश के चलते बंद रहेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. त्योहारों से पहले टूथपेस्ट से लेकर पेंट तक महंगे होंगे: HUL और एशियन पेंट्स समेत 8 कंपनियां जरूरत के सामानों की कीमतें बढ़ाएंगी देश की सबसे बड़ी FMCG और कंज्यूमर कंपनियां फेस्टिव सीजन से ठीक पहले और लगातार दूसरी तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। टूथपेस्ट से लेकर टायर और पेंट जैसे सामान महंगे होने वाले हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कमोडिटी लागत बढ़ रही है, जिससे देश में महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहने की आशंका है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. अगस्त में 5 बदलाव- कॉमर्शियल सिलेंडर 200 रुपए सस्ता: तत्काल टिकट के लिए नया टोकन सिस्टम; CKYC 2.0 का नया अपग्रेडेड सिस्टम भी लागू 1 अगस्त 2026 से कॉमर्शियल सिलेंडर औसतम 200 रुपए तक सस्ता हो गया है। वहीं तत्काल ट्रेन बुकिंग नियम और CKYC के नियम बदल गए हैं। इसके अलावा 3 से 5 अगस्त को होने वाली आरबीआई की मीटिंग में नई ब्याज दरों पर फैसले लिया जाएगा जिसका आपकी ईएमआई पर असर पड़ सकता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. जुलाई में ₹2.11 लाख करोड़ GST कलेक्शन: ये पिछले साल के मुकाबले 15.4% ज्यादा, जून में ₹1.94 लाख करोड़ रहा था जुलाई महीने में 2.11 लाख करोड़ रुपए GST कलेक्शन हुआ। ये पिछले साल यानी जुलाई 2025 से 15.4% ज्यादा है। पिछले साल जुलाई 2025 में GST कलेक्शन 1.83 लाख करोड़ रुपए था। इस महीने में सेंट्रल GST यानी CGST का कुल कलेक्शन 39,835 करोड़ रुपए रहा। वहीं स्टेट GST यानी SGST से 47,881 करोड़ रुपए और इंटीग्रेटेड GST यानी IGST से 1.23 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई हुई। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ ITR फाइल हुए: 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की डेडलाइन खत्म, अब ₹5000 तक लेट फीस लगेगी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना किसी पेनल्टी और ब्याज के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई निकल गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, इस डेडलाइन यानी 31 जुलाई तक देश में 5.9 करोड़ से अधिक टैक्सपेयर्स अपने ITR जमा कर चुके हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. CBI ने अनिल अंबानी पर FIR दर्ज की: रिलायंस कैपिटल पर EPFO को ₹1,816 करोड़ का नुकसान पहुंचाने का आरोप CBI ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड और इसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ FIR दर्ज की है। कंपनी पर EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को 1816.22 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के आरोप है। अधिकारियों ने शनिवार, 1 अगस्त को इसकी जानकारी दी। यह कार्रवाई केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21 जुलाई को दी गई एक शिकायत के आधार पर की। शिकायत में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और EPFO को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 6. E20 फ्यूल का विरोध- केजरीवाल PM आवास तक मार्च निकालेंगे:बोले- पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल भी मिले, सरकार इसे थोपे नहीं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा, ‘पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को शुद्ध पेट्रोल और E 20 के बीच चुनने का विकल्प दिया जाए। अगर ये मांग नहीं मानी जाती है तो 4 अगस्त को पीएम आवास तक मार्च निकाला जाएगा।’ यह बात केजरीवाल ने E20 फ्यूल के मुद्दे पर बुलाई ‘नेशनल टाउन हॉल’ में कही। उन्होंने बताया कि वे 3 अगस्त की दोपहर तक याचिकाएं इकट्ठा करेंगे। इसके बाद करीब 100 लोगों के साथ पीएम आवास तक विरोध प्रदर्शन करेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल बाजार बंद था तो शुक्रवार के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Tatkal Ticket Rules Change & Festive Price Hike

Hindi News Business Tatkal Ticket Rules Change & Festive Price Hike | Commercial Cylinder Cost नई दिल्ली19 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर महंगाई से जुड़ी रही। देश की सबसे बड़ी FMCG और कंज्यूमर कंपनियां फेस्टिव सीजन से पहले प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। टूथपेस्ट से लेकर टायर और पेंट जैसे सामान महंगे होने वाले हैं। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर औसतम 200 रुपए तक सस्ता हो गया है। वहीं तत्काल ट्रेन बुकिंग नियम और CKYC के नियम बदल गए हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार आज अवकाश के चलते बंद रहेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. त्योहारों से पहले टूथपेस्ट से लेकर पेंट तक महंगे होंगे: HUL और एशियन पेंट्स समेत 8 कंपनियां जरूरत के सामानों की कीमतें बढ़ाएंगी देश की सबसे बड़ी FMCG और कंज्यूमर कंपनियां फेस्टिव सीजन से ठीक पहले और लगातार दूसरी तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं। टूथपेस्ट से लेकर टायर और पेंट जैसे सामान महंगे होने वाले हैं। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कमोडिटी लागत बढ़ रही है, जिससे देश में महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहने की आशंका है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. अगस्त में 5 बदलाव- कॉमर्शियल सिलेंडर 200 रुपए सस्ता: तत्काल टिकट के लिए नया टोकन सिस्टम; CKYC 2.0 का नया अपग्रेडेड सिस्टम भी लागू 1 अगस्त 2026 से कॉमर्शियल सिलेंडर औसतम 200 रुपए तक सस्ता हो गया है। वहीं तत्काल ट्रेन बुकिंग नियम और CKYC के नियम बदल गए हैं। इसके अलावा 3 से 5 अगस्त को होने वाली आरबीआई की मीटिंग में नई ब्याज दरों पर फैसले लिया जाएगा जिसका आपकी ईएमआई पर असर पड़ सकता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. जुलाई में ₹2.11 लाख करोड़ GST कलेक्शन: ये पिछले साल के मुकाबले 15.4% ज्यादा, जून में ₹1.94 लाख करोड़ रहा था जुलाई महीने में 2.11 लाख करोड़ रुपए GST कलेक्शन हुआ। ये पिछले साल यानी जुलाई 2025 से 15.4% ज्यादा है। पिछले साल जुलाई 2025 में GST कलेक्शन 1.83 लाख करोड़ रुपए था। इस महीने में सेंट्रल GST यानी CGST का कुल कलेक्शन 39,835 करोड़ रुपए रहा। वहीं स्टेट GST यानी SGST से 47,881 करोड़ रुपए और इंटीग्रेटेड GST यानी IGST से 1.23 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई हुई। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. 31 जुलाई तक 5.9 करोड़ ITR फाइल हुए: 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की डेडलाइन खत्म, अब ₹5000 तक लेट फीस लगेगी वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना किसी पेनल्टी और ब्याज के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई निकल गई है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, इस डेडलाइन यानी 31 जुलाई तक देश में 5.9 करोड़ से अधिक टैक्सपेयर्स अपने ITR जमा कर चुके हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. CBI ने अनिल अंबानी पर FIR दर्ज की: रिलायंस कैपिटल पर EPFO को ₹1,816 करोड़ का नुकसान पहुंचाने का आरोप CBI ने रिलायंस कैपिटल लिमिटेड और इसके पूर्व चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ FIR दर्ज की है। कंपनी पर EPFO यानी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन को 1816.22 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाने के आरोप है। अधिकारियों ने शनिवार, 1 अगस्त को इसकी जानकारी दी। यह कार्रवाई केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 21 जुलाई को दी गई एक शिकायत के आधार पर की। शिकायत में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और EPFO को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 6. E20 फ्यूल का विरोध- केजरीवाल PM आवास तक मार्च निकालेंगे:बोले- पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल भी मिले, सरकार इसे थोपे नहीं आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा, ‘पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को शुद्ध पेट्रोल और E 20 के बीच चुनने का विकल्प दिया जाए। अगर ये मांग नहीं मानी जाती है तो 4 अगस्त को पीएम आवास तक मार्च निकाला जाएगा।’ यह बात केजरीवाल ने E20 फ्यूल के मुद्दे पर बुलाई ‘नेशनल टाउन हॉल’ में कही। उन्होंने बताया कि वे 3 अगस्त की दोपहर तक याचिकाएं इकट्ठा करेंगे। इसके बाद करीब 100 लोगों के साथ पीएम आवास तक विरोध प्रदर्शन करेंगे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल बाजार बंद था तो शुक्रवार के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Tatkal Ticket New Token System & CKYC 2.0 Rules

2 मिनट पहले कॉपी लिंक आज यानी, 1 अगस्त 2026 से कॉमर्शियल सिलेंडर औसतम 200 रुपए तक सस्ता हो गया है। वहीं तत्काल ट्रेन बुकिंग नियम और CKYC के नियम बदल गए हैं। इसके अलावा 3 से 5 अगस्त को होने वाली आरबीआई की मीटिंग में नई ब्याज दरों पर फैसले लिया जाएगा जिसका आपकी ईएमआई पर असर पड़ सकता है। अगस्त में होने जा रहे 5 बड़े बदलाव… 1. कॉमर्शियल गैस सिलेंडर ओसतन 180 रुपए सस्ता बदलाव: तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर औसतन ₹180 रुपए तक सस्ता कर दिया है। दिल्ली में इसकी कीमत ₹2930 हो गई है। पहले ये ₹3113.50 में मिल रहा था। असर: कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम घटने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च घटेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ते और थाली सस्ते कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी सस्ती हो सकती है। देश के प्रमुख शहरों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत शहर नई कीमत पुरानी कीमत अंतर दिल्ली ₹2738.00 ₹2930.00 ₹192 कोलकाता ₹2872.50 ₹3081.50 ₹209 मुंबई ₹2691.50 ₹2885.50 ₹194 चेन्नई ₹2906.00 ₹3106.00 ₹200 14 किलो वाले घरेलू सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं 2. रेलवे: तत्काल टिकट के लिए नया टोकन सिस्टम बदलाव: 1 अगस्त से रेलवे PRS रिज़र्वेशन काउंटरों पर भीड़ कम करने के लिए टोकन-बेस्ड सिस्टम लागू कर रहा है। काउंटरों से तत्काल टिकट लेने से पहले यात्रियों को टोकन लेना होगा। असर: इस नई व्यवस्था से काउंटरों पर यात्रियों का वेटिंग टाइम कम होगा। नए रिवाइज्ड प्रोसेस के तहत यात्री काउंटर से अपना टोकन कलेक्ट कर सकते हैं। टोकन मिलने के बाद वे अपने दिए गए अलॉटेड समय पर आकर आसानी से अपनी बुकिंग पूरी कर सकते हैं। 3. RBI मॉनेटरी पॉलिसी: लोन EMI और FD दरों पर असर बदलाव: रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 3 अगस्त से 5 अगस्त तक आयोजित होगी। इसके फैसलों का ऐलान 5 अगस्त को किया जाएगा। असर: ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद कम है, लेकिन अगर इसमें कोई भी बदवाल होता है तो आने वाले हफ्तों में आपके लोन की EMI, FD रिटर्न्स और लोन पर असर होगा। 4. CKYC 2.0: हर नई जगह कागजात जमा करने की जरूरत नहीं बदलाव: सेंट्रल नो योर कस्टमर यानी CKYC 2.0 का नया अपग्रेडेड सिस्टम रोलआउट हो रहा है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि अगर आप बैंक खाता खोलते हैं, बीमा लेते हैं या म्यूचुअल फंड/शेयर बाज़ार में निवेश करते हैं, तो आपकी मंज़ूरी से ये सभी कंपनियां एक ही सरकारी डेटाबेस से आपकी KYC की जानकारी ले लेंगी। पुराने सिस्टम में जो कमियां और गड़बड़ियां थीं, उन्हें ठीक कर डेटा को और सुरक्षित व सटीक बनाया गया है। असर: डेटा सिक्योरिटी मजबूत होगी, फ्रॉड पर लगाम लगेगी। अब आपको हर नई जगह पर बार-बार अपने कागज़ात (आईडी और एड्रेस प्रूफ) जमा करने की झंझट नहीं झेलनी पड़ेगी। 5. क्रेडिट कार्ड और बैंकिंग: बिलिंग में पारदर्शिता बदलाव: RBI ने क्रेडिट कार्ड के नियमों को अपडेट किया है ताकि बिलिंग में पारदर्शिता बढ़ाई जा सके। इसके अनुसार, यदि कोई ग्राहक क्रेडिट कार्ड का पूरा बिल नहीं भर पाता है, तो बाकी बचे बकाया पैसों पर ब्याज लगाते समय सुविधा शुल्क, पेनल्टी और टैक्स को उसमें शामिल नहीं किया जाएगा। असर: इस बदलाव से उन ग्राहकों को राहत मिलेगी जो पूरा बिल चुकाने के बजाय बकाया राशि को अगले महीने के लिए आगे बढ़ाते हैं, क्योंकि उनके लिए ब्याज का खर्च कम हो जाएगा। साथ ही, हिडन चार्ज और मनमानी पेनल्टी पर रोक लगने से बिलिंग सिस्टम अधिक पारदर्शी बनेगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…









