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Malaysia PM Anwar Ibrahim Viral Bollywood Playlist At BRICS Summit

Malaysia PM Anwar Ibrahim Viral Bollywood Playlist At BRICS Summit

2 मिनट पहले कॉपी लिंक मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने PM मोदी के साथ वीडियो पर दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे फिल्म का गाना लगाया। 18वें BRICS समिट के बाद मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की बॉलीवुड प्लेलिस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा में है। उन्होंने भारत दौरे की अलग-अलग तस्वीरों और वीडियो के साथ बॉलीवुड के मशहूर गाने लगाए हैं। हर तस्वीर के लिए चुना गया गाना उसके मौके से जुड़ा नजर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे नेताओं के साथ अपनी रील पर अनवर इब्राहिम ने शाहरुख खान और काजोल की फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का गाना ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ लगाया। मोदी के साथ एक दूसरी तस्वीर पर शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर की फिल्म ‘दिल तो पागल है’ का टाइटल सॉन्ग इस्तेमाल किया। पुतिन के साथ ‘चले चलो’ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोटो पर अनवर इब्राहिम ने आमिर खान की फिल्म ‘लगान’ का ‘चले चलो’ गाना लगाया। इस गाने के जरिए भी साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया गया। अपनी तस्वीरों पर ‘हर दिल जो प्यार करेगा’ BRICS समिट को संबोधित करते हुए अपनी तस्वीरों के साथ अनवर ने सलमान खान, रानी मुखर्जी और प्रीति जिंटा की फिल्म ‘हर दिल जो प्यार करेगा’ का गाना लगाया। भारत से विदाई के वीडियो में उन्होंने फिल्म ‘लक्ष्य’ का ‘कंधों से मिलते हैं कंधे’ गाना इस्तेमाल किया। दोनों गाने साथ आने और एकजुटता का संदेश देते हैं। राहुल और प्रियंका गांधी के साथ ‘ऐसा देश है मेरा’ भारत दौरे के दौरान अनवर इब्राहिम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी मुलाकात की। उनके साथ भोजन की तस्वीरें शेयर करते हुए उन्होंने फिल्म ‘वीर-जारा’ का ‘ऐसा देश है मेरा’ गाना लगाया। यह गाना भारत की सांस्कृतिक विविधता को दिखाता है। ईरानी राष्ट्रपति के साथ ‘साथी हाथ बढ़ाना’ ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ मुलाकात की तस्वीर पर अनवर ने 1957 की फिल्म ‘नया दौर’ का ‘साथी हाथ बढ़ाना’ गाना लगाया। यह गाना साथ मिलकर आगे बढ़ने का संदेश देता है। BRICS डिनर में किशोर-मनोज के गाने गाए अनवर इब्राहिम ने 12 सितंबर को BRICS समिट के डिनर में किशोर कुमार का मशहूर गाना ‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत…’ गाया था। साथ ही उन्होंने मुकेश का गीत दोस्त दोस्त ना रहा… भी गुनगुनाया। अनवर ने इसका वीडियो अपने सोशल मीडिया X के अकाउंट पर शेयर किया।उन्होंने लिखा- गुरु, थोड़ा सा गाने की इजाजत है? वीडियो करीब डेढ़ मिनट का है। ख्वाब हो या तुम कोई हकीकत… गाने के दौरान झूमते हुए भी नजर आए। अनवर किशोर कुमार के फैन हैं, पहले भी यह गाना गुनगुना चुके मलेशिया के पीएम पहले भी किशोर कुमार के फैन होने की बात कह चुके हैं। उन्होंने 2024 में भारत में एक इंटरव्यू के दौरान भी यही गीत गुनगुनाया था। इसके अलावा, फरवरी 2026 में पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान उन्होंने एक आधिकारिक वीडियो मोंटाज साझा किया था। इसमें ‘कभी खुशी कभी गम’ का लोकप्रिय गाना ‘बोले चूड़ियां’ इस्तेमाल किया गया था। पीएम मोदी इस साल 8 फरवरी को मलेशिया दौरे पर पहुंचे थे। तब अनवर इब्राहिम उनका स्वागत करने खुद एयरपोर्ट पहुंचे थे। मलेशिया में 27 लाख लोग भारतीय मूल के, बॉलीवुड और तमिल मूवी लोकप्रिय विदेश मंत्रालय के अनुसार मलेशिया में करीब 27.5 लाख भारतीय मूल के लोग हैं, जो देश की आबादी का लगभग 9% हैं। इनमें करीब 20 लाख लोग तमिल बोलते हैं। यहां बॉलीवुड और तमिल मूवी काफी देखी जाती हैं। शाहरुख खान की ‘दिलवाले’ ने मलेशिया में करीब 29 करोड़ रुपए की कमाई की थी। वहीं ‘जवान’ ने करीब 22 करोड़ और ‘पठान’ ने करीब 9 करोड़ रुपए का कारोबार किया था। तमिल फिल्मों का भी यहां बड़ा बाजार है। 2025 में रिलीज हुई रजनीकांत की ‘कुली’ ने मलेशिया में करीब ₹26-27 करोड़, जबकि अजित कुमार की ‘ गुड बैड अग्ली’ ने करीब ₹22 करोड़ का कारोबार किया था। 2026 की सूर्या स्टारर ‘ करुप्पु’ भी करीब ₹22 करोड़ के कलेक्शन के साथ मलेशिया की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में शामिल है। वहीं, विजय की ‘गोट’ ने करीब ₹32 करोड़ और शिवकार्तिकेयन की ‘अमरन’ ने करीब ₹26 करोड़ का कारोबार किया था। डिप्टी पीएम भी रह चुके हैं अनवर अनवर इब्राहिम मलेशिया के 10वें प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने 24 नवंबर 2022 को पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वे 1993 में मलेशिया के 7वें डिप्टी पीएम बने थे। 1998 में, अनवर को तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने सभी सरकारी पदों से हटा दिया गया था। उन्हें अप्रैल 1999 में भ्रष्टाचार और समलैंगिकता के आरोपों में जेल भेज दिया गया था और 2004 में उनकी सजा पलटने के बाद रिहा कर दिया गया था। इसके बाद अनवर 2008 से 2015 तक विपक्ष के नेता रहे। 2022 के आम चुनावों में जीत के बाद प्रधानमंत्री बने। ————— ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Delhi Declaration | BRICS Summit India China Global Influence Analysis

Delhi Declaration | BRICS Summit India China Global Influence Analysis

नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक नई दिल्ली में BRICS समिट के दौरान सदस्य देशों के नेताओं ने फैमिली फोटो खिंचवाई। BRICS समिट के बाद जारी नई दिल्ली डिक्लेरेशन ने दुनिया का ध्यान खींचा। घोषणापत्र में BRICS देशों ने एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की अपील की और विकासशील देशों को वैश्विक फैसलों में ज्यादा भागीदारी देने की बात कही। समिट को लेकर दुनिया के अलग-अलग मीडिया संस्थानों ने अपने-अपने नजरिए से रिपोर्टिंग की। कहीं भारत की कूटनीति चर्चा में रही, तो कहीं BRICS के भीतर भारत और चीन के बढ़ते प्रभाव की होड़ पर फोकस रहा। पढ़िए, दुनिया के बड़े मीडिया संस्थानों ने BRICS समिट और नई दिल्ली डिक्लेरेशन को किस नजरिए से देखा… रॉयटर्स- भारत अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाया रॉयटर्स ने BRICS के नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर लिखा कि भारत ने ईरान, सऊदी अरब, UAE, चीन और रूस जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और इन देशों के अलग-अलग रुख के बीच सभी को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए बड़ी चुनौती थी। NYT- चीन और भारत में प्रभाव बढ़ाने की होड़ द न्यूयॉर्क टाइम्स ने BRICS समिट को भारत और चीन के बीच बढ़ते प्रभाव की होड़ के नजरिए से देखा। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन BRICS को अमेरिकी दबदबे को चुनौती देने वाले मंच के तौर पर मजबूत करना चाहता है। वहीं, भारत की कोशिश है कि BRICS किसी एक देश या शक्ति के प्रभाव में न आए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चाहता है कि BRICS में अलग-अलग सोच और हित रखने वाले देश भी साथ मिलकर काम करें। यानी संगठन का फोकस किसी एक खेमे के साथ खड़े होने के बजाय आपसी सहयोग और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर रहे। चाइना डेली: BRICS बदल सकता है दुनिया में ताकत का संतुलन चीन के अखबार चाइना डेली ने BRICS को ऐसे मंच के तौर पर पेश किया, जो दुनिया में ताकत का संतुलन बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देश अब दुनिया के बड़े मुद्दों और फैसलों में अपनी आवाज ज्यादा मजबूती से रखना चाहते हैं। BRICS उन्हें इसके लिए एक ऐसा मंच दे रहा है, जहां वे मिलकर अपनी बात उठा सकते हैं। रिपोर्ट में चीन के इस रुख को भी प्रमुखता दी गई कि दुनिया की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और वैश्विक फैसलों पर कुछ गिने-चुने ताकतवर देशों का दबदबा नहीं रहना चाहिए। GT: BRICS में भारत-चीन साथ आए तो ग्लोबल साउथ को फायदा चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने BRICS को सिर्फ चीन या भारत के हितों का मंच नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए बड़े सहयोग के मौके के तौर पर पेश किया। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि BRICS में भारत और चीन का सहयोग सिर्फ दोनों देशों के आपसी रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे ग्लोबल साउथ को फायदा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्ट में मजबूत है, जबकि चीन मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन के मामले में आगे है। दोनों देशों की ये अलग-अलग ताकतें BRICS के भीतर सहयोग को और मजबूत कर सकती हैं। द गार्जियन: भारत-चीन रिश्तों में सुधार, लेकिन BRICS में सबकुछ ठीक नहीं ब्रिटिश मीडिया द गार्जियन ने BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी को भारत-चीन रिश्तों में सुधार की शुरुआत के तौर पर देखा। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह शी की पहली भारत यात्रा थी। दिल्ली में उनका जोरदार स्वागत हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और आने-जाने में भी सुधार हुआ है। हालांकि, BRICS के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। सदस्य देशों के अपने-अपने हित हैं और ईरान-सऊदी अरब जैसे देशों के बीच तनाव भी संगठन के लिए चुनौती है। इसके बावजूद BRICS देश एक साझा घोषणापत्र पर सहमत हुए। इसमें आपसी विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही गई। FT: चीन BRICS को ताकतवर बनाना चाहता है, भारत की राह अलग ब्रिटिश मीडिया फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, चीन BRICS को ऐसी वैश्विक ताकत के रूप में देखता है, जो अमेरिकी लीडरशिप वाली मौजूदा सिस्टम का विकल्प बन सके। शी जिनपिंग की मौजूदगी और उनकी अपील को भी इसी नजरिए से देखा गया। लेकिन भारत का रुख इससे अलग है। भारत BRICS को सीधे अमेरिका-विरोधी समूह के तौर पर आगे बढ़ाने के बजाय ऐसा मंच बनाए रखना चाहता है, जहां अलग-अलग देशों के हित और विचार होने के बावजूद साझा मुद्दों पर साथ काम किया जा सके। —————————– ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Delhi Declaration | BRICS Summit India China Global Influence Analysis

Delhi Declaration | BRICS Summit India China Global Influence Analysis

नई दिल्ली27 मिनट पहले कॉपी लिंक नई दिल्ली में BRICS समिट के दौरान सदस्य देशों के नेताओं ने ग्रुप फोटो खिंचवाई। BRICS समिट के बाद जारी नई दिल्ली डिक्लेरेशन में अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनी। वर्ल्ड मीडिया ने इसे भारत की बड़ी कामयाबी माना। खास बात यह रही कि BRICS अमेरिका-विरोधी गुट बनने के बजाय साझा मुद्दों पर साथ आया। समिट की रिपोर्टिंग में भारत की कूटनीति के साथ BRICS में भारत-चीन के बढ़ते प्रभाव की होड़ भी चर्चा में रही। पढ़िए, दुनिया के बड़े मीडिया ने BRICS समिट और नई दिल्ली डिक्लेरेशन को कैसे देखा… रॉयटर्स- भारत अलग-अलग हितों वाले देशों को एक मंच पर लाया रॉयटर्स ने BRICS के नई दिल्ली घोषणापत्र को लेकर लिखा कि भारत ने ईरान, सऊदी अरब, UAE, चीन और रूस जैसे अलग-अलग हितों वाले देशों के बीच सहमति बनाने में अहम भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और इन देशों के अलग-अलग रुख के बीच सभी को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए बड़ी चुनौती थी। NYT- चीन और भारत में प्रभाव बढ़ाने की होड़ द न्यूयॉर्क टाइम्स ने BRICS समिट को भारत और चीन के बीच बढ़ते प्रभाव की होड़ के नजरिए से देखा। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन BRICS को अमेरिकी दबदबे को चुनौती देने वाले मंच के तौर पर मजबूत करना चाहता है। वहीं, भारत की कोशिश है कि BRICS किसी एक देश या शक्ति के प्रभाव में न आए। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चाहता है कि BRICS में अलग-अलग सोच और हित रखने वाले देश भी साथ मिलकर काम करें। यानी संगठन का फोकस किसी एक खेमे के साथ खड़े होने के बजाय आपसी सहयोग और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर रहे। चाइना डेली: BRICS बदल सकता है दुनिया में ताकत का संतुलन चीन के अखबार चाइना डेली ने BRICS को ऐसे मंच के तौर पर पेश किया, जो दुनिया में ताकत का संतुलन बदलने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकासशील देश अब दुनिया के बड़े मुद्दों और फैसलों में अपनी आवाज ज्यादा मजबूती से रखना चाहते हैं। BRICS उन्हें इसके लिए एक ऐसा मंच दे रहा है, जहां वे मिलकर अपनी बात उठा सकते हैं। रिपोर्ट में चीन के इस रुख को भी प्रमुखता दी गई कि दुनिया की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए और वैश्विक फैसलों पर कुछ गिने-चुने ताकतवर देशों का दबदबा नहीं रहना चाहिए। GT: BRICS में भारत-चीन साथ आए तो ग्लोबल साउथ को फायदा चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने BRICS को सिर्फ चीन या भारत के हितों का मंच नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए बड़े सहयोग के मौके के तौर पर पेश किया। रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि BRICS में भारत और चीन का सहयोग सिर्फ दोनों देशों के आपसी रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे ग्लोबल साउथ को फायदा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्ट में मजबूत है, जबकि चीन मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन के मामले में आगे है। दोनों देशों की ये अलग-अलग ताकतें BRICS के भीतर सहयोग को और मजबूत कर सकती हैं। द गार्जियन: भारत-चीन रिश्तों में सुधार, लेकिन BRICS में सबकुछ ठीक नहीं ब्रिटिश मीडिया द गार्जियन ने BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी को भारत-चीन रिश्तों में सुधार की शुरुआत के तौर पर देखा। 2020 के सीमा विवाद के बाद यह शी की पहली भारत यात्रा थी। दिल्ली में उनका जोरदार स्वागत हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच बातचीत और आने-जाने में भी सुधार हुआ है। हालांकि, BRICS के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। सदस्य देशों के अपने-अपने हित हैं और ईरान-सऊदी अरब जैसे देशों के बीच तनाव भी संगठन के लिए चुनौती है। इसके बावजूद BRICS देश एक साझा घोषणापत्र पर सहमत हुए। इसमें आपसी विवादों को बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की बात कही गई। FT: चीन BRICS को ताकतवर बनाना चाहता है, भारत की राह अलग ब्रिटिश मीडिया फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, चीन BRICS को ऐसी वैश्विक ताकत के रूप में देखता है, जो अमेरिकी लीडरशिप वाली मौजूदा सिस्टम का विकल्प बन सके। शी जिनपिंग की मौजूदगी और उनकी अपील को भी इसी नजरिए से देखा गया। लेकिन भारत का रुख इससे अलग है। भारत BRICS को सीधे अमेरिका-विरोधी समूह के तौर पर आगे बढ़ाने के बजाय ऐसा मंच बनाए रखना चाहता है, जहां अलग-अलग देशों के हित और विचार होने के बावजूद साझा मुद्दों पर साथ काम किया जा सके। —————————– ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

BRICS Summit Finale | PM Modi To Meet 4 Global Leaders In India

BRICS Summit Finale | PM Modi To Meet 4 Global Leaders In India

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिक्स समिट के दौरान शनिवार को PM मोदी, पुतिन और जिनपिंग का हाथ थामे नजर आए। BRICS समिट का आज आखिरी दिन है। आज ओपन मीटिंग होगी, जिसमें सदस्य देशों के नेता और दूसरे आमंत्रित देशों के प्रमुख शामिल होंगे। बैठक में BRICS से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद PM मोदी 4 देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। समिट के पहले दिन भारत ने साफ कर दिया कि फिलहाल BRICS देशों की अपनी कोई साझा करेंसी बनाने का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने कहा कि BRICS में स्थानीय करेंसी में आपसी व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर चर्चा जरूर चल रही है। इसका मकसद देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना और लेन-देन की लागत कम करना है। BRICS देशों ने नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी BRICS देशों ने शनिवार को समिट के दौरान नई दिल्ली डेक्लरेशन को मंजूरी दी। इसमें कई मुद्दों पर साझा बयान जारी किया गया। डेक्लरेशन में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी। BRICS देशों के बीच संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ऐसे समय में बनी है, जब पश्चिम एशिया में तनाव है और ईरान, सऊदी अरब और UAE के कई मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं। ब्रिक्स समिट में PM मोदी के बयान की 5 अहम बातें अगले 20 साल का नया एजेंडा बनाएं: BRICS के अगले 20 साल के लिए नया एजेंडा और फैसलों पर अमल की स्थायी व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव। ग्लोबल साउथ नियम बनाने में हिस्सा ले: AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी के नियम तय करने में विकासशील देशों की बराबर भागीदारी पर जोर। युवाओं को तैयार करें: युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत और कानून की ट्रेनिंग देने का सुझाव। नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क बने: मुसीबत में फंसे नाविकों को इलाज, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकालने के लिए देशों के बीच नेटवर्क बनाने की बात। भविष्य सबका, फैसला भी सबका: मोदी ने कहा- दुनिया का भविष्य साझा है तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए। PM मोदी ने शनिवार को BRICS समिट 2026 के औपचारिक शुरुआत की घोषणा की। तनाव के बीच ईरान-UAE राष्ट्रपतियों ने बातचीत की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने BRICS समिट से इतर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है और कई क्षेत्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के रुख अलग हैं। हालांकि, ईरान और UAE पिछले कुछ सालों से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यह मुलाकात तनाव के बीच दोनों देशों के बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत है। पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है। इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए। इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है। एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताया। तब BRIC कोई संगठन नहीं था। 2006 में चारों देश साथ आए और BRIC समूह बना। 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया। पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी पूर्ण सदस्य बने। आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की करीब 14% है। ———————- BRICS से जुड़ी यह खबरें भी पढ़ें… 1. BRICS के साझा बयान में पहलगाम हमले की निंदा: टेरर फंडिंग रोकने पर जोर; कहा- आतंकियों को पनाह देने वालों पर मिलकर एक्शन लेंगे रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी। पूरी खबर पढ़ें… 2. पुतिन का अमेरिका-यूरोप पर तंज:कमजोर देश खुद को G7 क्यों कहते हैं; मोदी बोले- ब्रिक्स देशों में दुनिया की 40% GDP प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स लीडर्स ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ग्लोबल ट्रेड पर बात की। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

BRICS 2026 New Delhi Summit

BRICS 2026 New Delhi Summit

Hindi News Career BRICS 2026 New Delhi Summit | India France Space Technology Partnership 5 मिनट पहले कॉपी लिंक आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) 1. BRICS समिट आज से नई दिल्ली में शुरू होगी 12 सितंबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में ब्रिक्स (BRICS) 2026 समिट शुरू होगी। इससे पहले कल पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भारत मंडप्पम में मुलाकात की। भारत चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भारत ने 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता की थी। इस बार ब्रिक्स की थीम ‘बिल्डिंग फॉर रेसिलेंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सन्सटेनिबलिटी’ है। साल 2026 में ब्रिक्स की स्थापना के 20 साल पूरे हो रहे हैं। इस सम्मेलन में ब्रिक्स के सभी 11 मुख्य सदस्य देश हिस्सा ले रहे हैं ब्रिक्स में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अलावा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भाग ले रहे हैं। ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों में भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) शामिल हैं। ब्रिक्स के भागीदार देशों में बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल किताब की रूसी भाषा में अनुवाद की एक प्रति भेंट की। इंटरनेशनल (INTERNATIONAL) 2. भारत-मलेशिया नौसैन्य अभ्यास ‘समुद्र लक्ष्मण 2026’ शुरू 11 सितंबर को भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS मैसूर (INS Mysore) मलेशिया के लुमुत बंदरगाह पहुंचा। INS मैसूर की ये यात्रा भारत और मलेशिया के बीच होने वाले द्विपक्षीय नौसैन्य अभ्यास ‘समुद्र लक्ष्मण’ के चौथे संस्करण से जुड़ी है। भारत और मलेशिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू हुआ। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना है। इसमें दोनों नौसेनाएं समुद्री संचालन, संचार और सामरिक अभ्यास के जरिए अपनी क्षमताओं को मजबूत करने पर काम करेंगी। ये अभ्यास भारत की एक्स ईस्ट पॉलिसी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों से भी जुड़ा है। भारत और मलेशिया के बीच रक्षा सहयोग में नौसैनिक अभ्यास, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। INS मैसूर भारतीय नौसेना का एक निर्देशित मिसाइल विनाशक युद्धपोत है इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह अभ्यास महत्वपूर्ण है। 3. भारत और फ्रांस के बीच स्पेस से जुड़े 3 MoU हुए 11 सितंबर को भारत और फ्रांस ने स्पेस सेक्टर में सहयोग बढ़ाने के लिए 3 MoU पर साइन किए। इनकी घोषणा पेरिस में हुए इंटरनेशनल स्पेस समिट के दौरान की गई। ये MoU भारत की ISRO और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस (CNES) के बीच हुआ है। इन MoU का मुख्य उद्देश्य सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च और जॉइंट प्रोग्रामों पर केंद्रित है। भारत की प्रस्तावित 52-सैटेलाइट स्पेस सर्विलांस कंसल्टेशन में इन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा। इस कंसल्टेशन के तहत सैटेलाइट्स को 2027–2030 के बीच इसे पूरा किया जाएगा। ये समझौते भारत की स्वदेशी और रणनीतिक अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेंगे। भारत और फ्रांस का अंतरिक्ष सहयोग पांच दशकों से ज्यादा पुराना है और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। नए MoU कमर्शियल स्पेस टेक्नोलॉजी एक्टिविटीज और साइंटिफिक डेटा शेयरिंग को बढ़ावा देना है। फ्रांस यूरोप में भारत का एक प्रमुख रणनीतिक और हाई टेक्नोलॉजी पार्टनर है। निधन (DEATH) 4. पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री भगत चुन्नी लाल का निधन 11 सितंबर को पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता भगत चुन्नी लाल का निधन हो गया। वे 94 वर्ष के थे। भगत चुन्नी लाल जालंधर की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे। उन्होंने 1997, 2007 और 2012 में विधायक चुने गए। चुन्नी लाल 2011 में पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष बने और 2012 में प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली SAD-BJP सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। चुन्नी लाल के पास स्थानीय निकाय, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान, श्रम तथा वन एवं वन्यजीव जैसे विभाग रहे। चुन्नी लाल ने 2017 में चुनावी राजनीति से संन्यास लिया था। मिसलीनियस 5. TRAI ने 12 मिनट एडवर्टाइजमेंट के फैसले को रद्द किया 10 सितंबर को टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) द्वारा टीवी विज्ञापनों पर 12 मिनट की सीमा का नियम रद्द किया। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 2012 के टीवी विज्ञापन नियमों को निरस्त किया। ट्राई द्वारा निरस्त किए गए नियम के तहत प्रति घंटे टीवी पर अधिकतम 12 मिनट के विज्ञापन की सीमा को अब हटा दिया गया है। 22 अगस्त को सरकार ने टेलीविजन चैनलों के लिए 12 मिनट की विज्ञापन अवधि सीमा को हटाने का नोटिफिकेशन जारी किया था। मंत्रालय का मानना ​​है कि टेलीविजन उद्योग और डिजिटल मीडिया के बीच पर्याप्त प्रतिस्पर्धा मौजूद है। टेलीविजन के लिए एडवर्टाइज की टाइम लिमिट साल 2006 में केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के तहत लागू की गई थी। हालांकि अब टीवी चैनल बढ़ गए हैं 2006 में इनकी संख्या 62 थी जो अब बढ़कर 900 हो गई है। उस समय, टीवी चैनलों को प्रसारित करने के मुख्य माध्यम केबल टीवी की प्रसारण क्षमता सीमित थी और उपभोक्ताओं के पास बहुत कम विकल्प थे। केबल टीवी क्षेत्र के डिजिटलीकरण के बाद, डीटीएच, एच.आई.एस.टी. और आई.पी.टीवी. सहित सभी प्लेटफॉर्म अब डिजिटल हैं। ट्राई (TRAI) भारत में दूरसंचार और प्रसारण (Broadcasting) सेवाओं का नियामक निकाय है। आज का इतिहास 1931 में महात्मा गांधी सेकेंड गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने लंदन पहुंचे। 1959 में सोवियत संघ का अंतरिक्ष यान ‘लूना-2’ चंद्रमा की सतह पर पहुंचा था। यह चंद्रमा पर पहुँचने वाली पहली मानव निर्मित वस्तु थी। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… 11 सितंबर के करेंट अफेयर्स:शी जिनपिंग BRICS में हिस्सा लेने भारत आएंगे, पैरा आर्चर शीतल देवी ने गोल्ड जीता आज के प्रमुख करेंट अफेयर्स, जो सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए जरूरी हैं- नेशनल (NATIONAL) दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

BRICS Summit New Delhi | Modi, Putin & Jinping Meet After 10 Years

BRICS Summit New Delhi | Modi, Putin & Jinping Meet After 10 Years

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक BRICS समिट शनिवार से नई दिल्ली में शुरू होने जा रहा है। भारत में होने वाले BRICS समिट में 10 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। तीनों नेता इससे पहले 2016 में गोवा में हुए BRICS समिट में एक साथ शामिल हुए थे। समिट में BRICS के 11 सदस्य देशों के अलावा 10 पार्टनर देशों के नेता भी शामिल होंगे। BRICS की ताकत को सिर्फ सदस्य देशों की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी आबादी और अर्थव्यवस्था से भी समझा जा सकता है। 11 सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49.5% आबादी रहती है। यानी दुनिया के लगभग हर दो में से एक व्यक्ति BRICS देशों में रहता है। अर्थव्यवस्था की बात करें तो PPP यानी खरीदने की क्षमता के आधार पर BRICS देशों की कुल अर्थव्यवस्था दुनिया की करीब 39% है। यह अमेरिका की अर्थव्यवस्था के मुकाबले करीब 3 गुना है। गोवा में ब्रिक्स समिट से पहले 15 अक्टूबर 2016 को चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारतीय अंदाज के कपड़ों में नजर आए थे। PM मोदी 4 वर्ल्ड लीडर्स से मिलेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को कई विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। सुबह 10 बजे- हैदराबाद हाउस में इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली। सुबह 10:30 बजे- मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम। सुबर 11 बजे- अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद। सुबह 11:30 बजे- वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग। शाम 6 से 7 बजे*- भारत मंडपम में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है। जिनपिंग का गलवान हिंसा के बाद पहला भारत दौरा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत में पहली आमने-सामने की बैठक होगी। गलवान के बाद करीब 4 साल तक LAC पर दोनों देशों के बीच तनाव रहा। अब भारत और चीन LAC से लेकर कारोबार तक 6 बड़े मुद्दों पर काम कर रहे हैं। इनमें सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा है। दोनों देश सीमा विवाद पर एक विशेषज्ञ समूह बनाने पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा सीमा पर 2 अतिरिक्त सैन्य संपर्क केंद्र और पूर्वी व मध्य सेक्टर में 2 सैन्य हॉटलाइन बनाने पर भी सहमति बनी है। अब इन फैसलों को दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलनी है। दूसरा बड़ा मुद्दा दोनों देशों के बीच कारोबार है। 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 11.4 लाख करोड़ रुपए का सामान आयात किया। इससे भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 8.6 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा रहा। प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग 11 अक्टूबर, 2019 को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में ‘कृष्णाज बटर बॉल’ पर। यह जिनपिंग की आखिरी भारत यात्रा थी। पश्चिमी देशों के लिए BRICS की बढ़ती चुनौती BRICS देश अब आपस में कारोबार करते समय डॉलर का इस्तेमाल कम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे एक-दूसरे की अपनी-अपनी करेंसी में लेन-देन बढ़ाना चाहते हैं। साथ ही, अलग-अलग देशों के ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने पर भी काम हो रहा है। हालांकि, अभी BRICS का अपना कोई एक पेमेंट सिस्टम या एक साझा करेंसी नहीं है। इस साल भारत की अध्यक्षता में होने वाले BRICS समिट में भी अपनी करेंसी में कारोबार और आसान ऑनलाइन पेमेंट पर जोर दिया जाएगा। भारत चाहता है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम और उनकी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ा जाए। इससे एक देश से दूसरे देश में पैसे भेजना आसान हो सकता है और हर बार डॉलर की जरूरत कम हो सकती है। ब्रिक्स तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं का संगठन BRICS 11 देशों का ऐसा समूह है, जिसमें दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। BRICS का मकसद सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है। शुरुआत में इसमें 4 देश थे और इसे BRIC कहा जाता था। BRIC नाम 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने दिया था। बाद में दूसरे देश जुड़ते गए और इसका नाम BRICS हो गया। भारत 2026 में BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है। एक बैंक की रिपोर्ट से निकला BRICS का नाम BRICS की शुरुआत किसी सरकार ने नहीं, बल्कि एक बैंक की रिपोर्ट से हुई थी। 2001 में अमेरिकी निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने अपनी रिपोर्ट में BRIC शब्द इस्तेमाल किया। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन को तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाएं बताया था। तब BRIC कोई संगठन नहीं था। लेकिन बाद में ये चारों देश एक साथ आने लगे। 2006 में BRIC समूह बना और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसकी पहली आधिकारिक बैठक हुई। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद BRIC का नाम BRICS हो गया। पिछले साल ईरान, मिस्र और इथियोपिया भी इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके साथ BRICS का दायरा और बढ़ गया। आज BRICS दुनिया के बड़े आर्थिक मंचों में शामिल है। इसके सदस्य देशों की ग्लोबल GDP में हिस्सेदारी 27% से ज्यादा है, जबकि यूरोपियन यूनियन की करीब 14% है। पाकिस्तान के चाहने के बावजूद BRICS में नहीं मिली एंट्री BRICS के विस्तार के बाद कई देशों ने इसमें शामिल होने की कोशिश की। इनमें पाकिस्तान और तुर्किये भी थे। पाकिस्तान ने 2023 में सदस्यता के लिए आधिकारिक आवेदन किया था। उसे चीन और रूस का समर्थन भी मिला, लेकिन अब तक BRICS में उसकी एंट्री नहीं हो पाई है। तुर्किये ने भी सदस्यता की कोशिश की, लेकिन उसे भी सफलता नहीं मिली। इससे सवाल उठा कि दोनों देशों की एंट्री क्यों अटकी। कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत पाकिस्तान और तुर्की को BRICS में शामिल करने के पक्ष में नहीं था। नए सदस्य को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। यानी किसी एक देश की आपत्ति से सदस्यता रुक सकती है। हालांकि, भारत ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की सदस्यता रोकने की बात नहीं कही है। ——————- यह खबर

BRICS Summit Delhi Goodie Bag

BRICS Summit Delhi Goodie Bag

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वीं BRICS समिट होगी। इसमें शामिल पत्रकारों और प्रतिनिधियों को खास गुडी बैग दिया जाएगा। इस बैग में देश के अलग-अलग हिस्सों के उत्पाद शामिल हैं। इसका मकसद विदेशी और भारतीय मेहमानों को भारत की संस्कृति और स्थानीय उत्पादों से परिचित कराना है। इस बैग में बिहार का सत्तू और मखाना शामिल है। इसके साथ ही बैग में केले के चिप्स, ओडिशा की कॉफी और गुजरात का स्टोल भी मौजूद है। गुडी बैग के अंदर के सामान की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। खबर अपडेट हो रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

BRICS Summit Security Arrangements 2026; Vladimir Putin Xi Jinping Hotels – NSG Commando

BRICS Summit Security Arrangements 2026; Vladimir Putin Xi Jinping Hotels - NSG Commando

12-13 सितंबर को BRICS समिट के लिए दिल्ली में 20 से ज्यादा देशों के नेता होंगे। इनमें जिनपिंग, पुतिन, पजशकियान जैसे बड़े खतरे वाले नेता शामिल हैं। इनके लिए दिल्ली की किलेबंदी की गई है। . आसमान से सड़क तक, होटल से भारत मंडपम तक; दुनिया के ताकतवर नेताओं के सुरक्षा इंतजामों की पूरी कहानी… ******** रिपोर्टर्स इनपुटः सुनील मौर्य, उदय भटनागर ग्राफिक्सः गौतम रजक, दृगचंद्र भुर्जी ———— ये खबर भी पढ़िए… BRICS में जिनपिंग-पुतिन दोनों आएंगे: चीनी राष्ट्रपति का गलवान झड़प के बाद पहला भारत दौरा, PM मोदी से बैठक संभव BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों भारत आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि की। इससे दो दिन पहले रूस ने भी पुतिन के भारत आने की पुष्टि की थी। पूरी खबर पढ़िए…

India-Russia BRICS Summit | PM Modi Putin Su-57 Brahmos Defense Deal

India-Russia BRICS Summit | PM Modi Putin Su-57 Brahmos Defense Deal

नई दिल्ली4 मिनट पहले कॉपी लिंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 31 अगस्त को बिश्केक में SCO समिट के दौरान मुलाकात की थी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंच गए हैं। पुतिन का प्लेन रात करीब 3 बजे नई दिल्ली पहुंचा। ब्रिक्स समिट से पहले प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की बैठक होगी। इसमें Su-57 फाइटर जेट और अपडेटेड ब्रह्मोस समेत कई डिफेंस डील पर चर्चा हो सकती है। रूस भारत को विमान की बिक्री के साथ भारत में इसका उत्पादन और जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पहले ही कर चुका है। भारत चाहता है कि इस डील से उसे ऐसी तकनीक मिले, जिसका इस्तेमाल आगे स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने में भी किया जा सके। इससे पहले, रूस की दूसरी Il-96 स्पेशल फ्लाइट राजनयिकों के साथ दिल्ली पहुंच गई है। पहले डिप्टी PM डेनिस मंतुरोव भी भारत पहुंच चुके हैं। पुतिन के भारत दौरे से पहले गुरुवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमान उतरे। इनमें रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान IL-76 भी शामिल है। S-400 की बाकी खेप और रखरखाव पर भी बात भारत, S-400 की बाकी खेप की आपूर्ति और उसके रखरखाव से जुड़े मुद्दों पर रूस से बात कर सकता है। इसके अलावा SU-30MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने पर भी बात हो सकती है। ‘सुपर सुखोई’ योजना के तहत इनमें बेहतर रडार और नए हथियार लगाए जाएंगे। ब्रह्मोस को लेकर दोनों देश इसके नए और हल्के संस्करण पर मिलकर काम बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसमें ब्रह्मोस-NG अहम है। यह मौजूदा ब्रह्मोस से हल्की होगी और इसे तेजस जैसे लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकेगा। रक्षा के बाद परमाणु बिजली पर फोकस रक्षा के अलावा परमाणु बिजली के क्षेत्र में भी भारत और रूस के बीच बातचीत हो सकती है। रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम भारत में कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र पर काम कर रही है। अब भारत में रूसी तकनीक से नए परमाणु बिजली संयंत्र लगाने पर भी चर्चा हो सकती है। दोनों देश छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर बनाने में भी साथ काम करने की संभावनाएं तलाश सकते हैं। ये रिएक्टर बड़े परमाणु बिजली संयंत्रों के मुकाबले छोटे होते हैं। रुपए-रूबल में कारोबार बढ़ाने की कोशिश भारत और रूस डॉलर की जगह रुपये और रूबल में कारोबार बढ़ाना चाहते हैं। इससे दोनों देशों के बीच भुगतान अपनी-अपनी करेंसी में हो सकेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि रूस डॉलर हटाने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि भुगतान के आसान तरीकों के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि BRICS देशों के साथ रूस का करीब 90% कारोबार स्थानीय करेंसी में हो रहा है। दोनों देशों के पास एक-दूसरे की करेंसी भी जमा हो गई है। अब इन पैसों को कारोबार और निवेश में इस्तेमाल करने और रुपये-रूबल में भुगतान आसान बनाने पर बातचीत हो सकती है। रूस तक पहुंचने के रास्ते होंगे आसान दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग को आगे बढ़ाने पर भी बात कर सकते हैं। INSTC भारत को ईरान के रास्ते रूस से जोड़ता है। वहीं चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग से भारत और रूस के पूर्वी हिस्से के बीच सामान पहुंचाने का समय करीब 40 दिन से घटकर 20-22 दिन हो सकता है। ————————— यह खबर भी पढ़ें… BRICS समिट में भारत नहीं आएंगे बांग्लादेशी PM रहमान:बांग्लादेश बोला- प्रधानमंत्री के तौर पर न्योता नहीं मिला था; दूसरी बार भारत यात्रा टली बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल होने भारत नहीं आएंगे। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इसकी पुष्टि की है। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Bangladesh PM Tariq Rahman BRICS Summit

Bangladesh PM Tariq Rahman BRICS Summit

14 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल होने भारत नहीं आएंगे। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि भारत ने रहमान को प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि BIMSTEC चेयरमैन के रूप में बुलाया था। बांग्लादेश समिट में अपना कोई प्रतिनिधि भेज सकता है। PM रहमान की भारत यात्रा दूसरी बार टली है। इससे पहले अगस्त में भी उनका भारत दौरा नहीं हो पाया था। तब बांग्लादेश ने भारत के सामने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की शर्त रख दी थी। BIMSTEC 7 देशों का क्षेत्रीय संगठन है। भारत-बांग्लादेश समेत इसमें 7 देश हैं। ये सभी देश बंगाल की खाड़ी के आसपास बसे हैं। ये सभी मिलकर व्यापार, सुरक्षा जैसे मुद्दों पर साथ काम करते हैं। फिलहाल इसकी अध्यक्षता बांग्लादेश के पास है। खबर लगातार अपडेट हो रही है… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔