नई दिल्ली4 मिनट पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 31 अगस्त को बिश्केक में SCO समिट के दौरान मुलाकात की थी।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट में शामिल होने के लिए भारत पहुंच गए हैं। पुतिन का प्लेन रात करीब 3 बजे नई दिल्ली पहुंचा।
ब्रिक्स समिट से पहले प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की बैठक होगी। इसमें Su-57 फाइटर जेट और अपडेटेड ब्रह्मोस समेत कई डिफेंस डील पर चर्चा हो सकती है।
रूस भारत को विमान की बिक्री के साथ भारत में इसका उत्पादन और जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पहले ही कर चुका है।
भारत चाहता है कि इस डील से उसे ऐसी तकनीक मिले, जिसका इस्तेमाल आगे स्वदेशी लड़ाकू विमान बनाने में भी किया जा सके।
इससे पहले, रूस की दूसरी Il-96 स्पेशल फ्लाइट राजनयिकों के साथ दिल्ली पहुंच गई है। पहले डिप्टी PM डेनिस मंतुरोव भी भारत पहुंच चुके हैं।

पुतिन के भारत दौरे से पहले गुरुवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूस के 3 सैन्य विमान उतरे। इनमें रूस का भारी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान IL-76 भी शामिल है।
S-400 की बाकी खेप और रखरखाव पर भी बात
भारत, S-400 की बाकी खेप की आपूर्ति और उसके रखरखाव से जुड़े मुद्दों पर रूस से बात कर सकता है। इसके अलावा SU-30MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने पर भी बात हो सकती है। ‘सुपर सुखोई’ योजना के तहत इनमें बेहतर रडार और नए हथियार लगाए जाएंगे।
ब्रह्मोस को लेकर दोनों देश इसके नए और हल्के संस्करण पर मिलकर काम बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसमें ब्रह्मोस-NG अहम है। यह मौजूदा ब्रह्मोस से हल्की होगी और इसे तेजस जैसे लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकेगा।

रक्षा के बाद परमाणु बिजली पर फोकस
रक्षा के अलावा परमाणु बिजली के क्षेत्र में भी भारत और रूस के बीच बातचीत हो सकती है। रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम भारत में कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र पर काम कर रही है। अब भारत में रूसी तकनीक से नए परमाणु बिजली संयंत्र लगाने पर भी चर्चा हो सकती है।
दोनों देश छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर बनाने में भी साथ काम करने की संभावनाएं तलाश सकते हैं। ये रिएक्टर बड़े परमाणु बिजली संयंत्रों के मुकाबले छोटे होते हैं।
रुपए-रूबल में कारोबार बढ़ाने की कोशिश
भारत और रूस डॉलर की जगह रुपये और रूबल में कारोबार बढ़ाना चाहते हैं। इससे दोनों देशों के बीच भुगतान अपनी-अपनी करेंसी में हो सकेगा।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि रूस डॉलर हटाने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि भुगतान के आसान तरीकों के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि BRICS देशों के साथ रूस का करीब 90% कारोबार स्थानीय करेंसी में हो रहा है।
दोनों देशों के पास एक-दूसरे की करेंसी भी जमा हो गई है। अब इन पैसों को कारोबार और निवेश में इस्तेमाल करने और रुपये-रूबल में भुगतान आसान बनाने पर बातचीत हो सकती है।
रूस तक पहुंचने के रास्ते होंगे आसान
दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग को आगे बढ़ाने पर भी बात कर सकते हैं।
INSTC भारत को ईरान के रास्ते रूस से जोड़ता है। वहीं चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग से भारत और रूस के पूर्वी हिस्से के बीच सामान पहुंचाने का समय करीब 40 दिन से घटकर 20-22 दिन हो सकता है।
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