Sunday, 12 Apr 2026 | 08:48 PM

Trending :

EXCLUSIVE

World News Updates; Kamala Harris 2028 Election, Trump Pakistan China

World News Updates; Kamala Harris 2028 Election, Trump Pakistan China

29 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर संकेत दिया है कि वह दोबारा चुनाव लड़ सकती हैं। न्यूयॉर्क में नेशनल एक्शन नेटवर्क की बैठक के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह फिर चुनाव लड़ेंगी, तो उन्होंने कहा, “हो सकता है, मैं इस बारे में सोच रही हूं।” उनके इस जवाब पर वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। हैरिस ने यह भी कहा कि वह 2028 में अपना फैसला इस आधार पर लेंगी कि अमेरिकी जनता के लिए कौन सबसे बेहतर काम कर सकता है। कमला हैरिस, जो जो बाइडेन के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रही थीं, 2024 का राष्ट्रपति चुनाव हार गई थीं। उस चुनाव में उन्हें डोनाल्ड ट्रम्प ने हराया था। हैरिस इससे पहले कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल और अमेरिकी सीनेटर भी रह चुकी हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Netanyahu Trump Secret Meeting: Iran Attack Decision

Netanyahu Trump Secret Meeting: Iran Attack Decision

वॉशिंगटन डीसी14 मिनट पहले कॉपी लिंक तारीख: 11 फरवरी जगह: व्हाइट हाउस, वॉशिंगटन डीसी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सुबह ही व्हाइट हाउस पहुंच चुके थे। वह कई महीनों से अमेरिका पर दबाव डाल रहे थे कि ईरान पर बड़ा हमला किया जाए। हालांकि इस बार की मुलाकात बेहद सीक्रेट थी। उन्हें बिना किसी औपचारिक स्वागत के सीधे अंदर ले जाया गया ताकि मीडिया को कुछ पता न चले। पहले कैबिनेट रूम में बातचीत हुई और फिर उन्हें व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में ले जाया गया, जहां असली बैठक हुई। यह वही जगह है जहां अमेरिका युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े फैसले करता है, लेकिन आमतौर पर यहां विदेशी नेताओं को नहीं लाया जाता। आमतौर पर जब कोई बड़ी मीटिंग होती है, तो ट्रम्प वह टेबल के सबसे आगे यानी ‘हेड’ वाली कुर्सी पर बैठते हैं। वहां से वह सबको देखते हैं और बैठक को लीड करते हैं। लेकिन इस मीटिंग में ट्रम्प टेबल के किनारे (साइड) पर जाकर बैठे, और उनका चेहरा दीवार पर लगी बड़ी स्क्रीन की तरफ था। ट्रम्प-नेतन्याहू आमने-सामने थे। स्क्रीन पर इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेविड बार्निया और इजराइली सैन्य अधिकारी जुड़े हुए थे। इससे ऐसा माहौल बनाया गया जैसे नेतन्याहू युद्ध के समय अपने पूरे कमांड के साथ खड़े हैं। इस बैठक में बहुत कम लोग शामिल थे ताकि कोई जानकारी बाहर न जाए। विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ, जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन, ट्रम्प के दामाद जैरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ मौजूद थे। व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी वाइल्स भी वहां थीं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में नहीं थे क्योंकि वे अजरबैजान में थे और बैठक अचानक तय हुई थी। ईरान पर हमले से पहले सिचुएशनल रूम में राष्ट्रपति ट्रम्प और बाकी अधिकारी। तस्वीर जून 2025 की है। नेतन्याहू बोले- ईरान पर हमला करने का यह सही वक्त नेतन्याहू ने एक घंटे का प्रेजेंटेशन दिया और ट्रम्प को समझाने की कोशिश की कि यह ईरान पर हमला करने का सबसे सही समय है। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार कमजोर हो चुकी है और अगर अमेरिका और इजराइल मिलकर हमला करें तो ईरान की सैन्य ताकत जल्दी खत्म की जा सकती है। नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान का मिसाइल सिस्टम कुछ ही हफ्तों में तबाह किया जा सकता है और सरकार इतनी कमजोर हो जाएगी कि वह होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं कर पाएगी। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि ईरान के अंदर फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं और अगर इजराइल सीक्रेट तरीके से मदद करे तो ये प्रदर्शन सरकार गिराने तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इराक से कुर्द लड़ाके ईरान में घुसकर एक और मोर्चा खोल सकते हैं जिससे सरकार जल्दी गिर जाएगी। इस दौरान एक वीडियो भी दिखाया गया जिसमें उन संभावित नेताओं को दिखाया गया जो सरकार गिरने के बाद सत्ता संभाल सकते हैं। इसमें रजा पहलवी का नाम भी था, जो ईरान के आखिरी शाह के बेटे हैं और फिलहाल अमेरिका में रहते हैं। नेतन्याहू ने बार-बार कहा कि अभी हमला जरूरी है, क्योंकि देर हुई तो ईरान मजबूत हो जाएगा। उनका कहना था कि कुछ न करने का खतरा, हमला करने से ज्यादा है। ट्रम्प 29 दिसंबर 2025 को फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लागो क्लब में इजराइली PM नेतन्याहू से मुलाकात के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे हाथ मिलाते हुए। नेतन्याहू की बातों में आ गए ट्रम्प ट्रम्प इस पेशकश से काफी प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि यह प्लानिंग उन्हें सही लगती है। इससे नेतन्याहू को पता चल गया कि अमेरिका साथ आ सकता है। इसके बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का काम इस प्लानिंग को समझना था। अगले दिन सिचुएशन रूम में सिर्फ अमेरिकी अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें योजना को 4 हिस्सों में बांटा गया। 1. खामेनेई और टॉप लीडरशिप को खत्म करना 2. ईरान की सैन्य ताकत खत्म करना 3. देश में विद्रोह करवाना 4. सरकार बदलकर नई व्यवस्था लाना खुफिया एजेंसियों ने कहा कि पहले दो मकसद हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन बाकी दो असलियत से दूर हैं। CIA चीफ जॉन रैटक्लिफ ने इसे मजाक जैसा बताया और मार्को रूबियो ने इसे बेकार कहा। जब ट्रम्प बैठक में आए तो उन्हें यही रिपोर्ट दी गई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी वापस आ चुके थे और उन्होंने इस योजना पर गहरी चिंता जताई। जनरल डैन केन ने भी कहा कि इजराइल अक्सर योजनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है क्योंकि उसे अमेरिका की मदद चाहिए होती है। इसके बाद ट्रम्प ने साफ कहा कि अगर सरकार बदलना संभव नहीं भी है तो भी इससे फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि यह इजराइल या ईरान का मामला होगा, लेकिन उनका फैसला इस पर निर्भर नहीं करेगा। उनका ध्यान मुख्य रूप से ईरान के शीर्ष नेताओं को खत्म करने और उसकी सैन्य ताकत को तोड़ने पर था। नेतन्याहू 7 अप्रैल 2025 को व्हाइट हाउस में हुई बैठक के दौरान बोलते हुए। उनके साथ राष्ट्रपति ट्रम्प, उपराष्ट्रपति वेंस, विदेश मंत्री रूबियो और NSA माइकल वॉल्ट्ज भी मौजूद थे। ईरान को कमजोर समझने की भूल कर बैठे ट्रम्प आने वाले दिनों में कई बैठकें हुईं। इन बैठकों में जनरल केन ने चेतावनी दी कि अगर ईरान के खिलाफ बड़ा युद्ध शुरू होता है तो अमेरिका के हथियार तेजी से खत्म हो सकते हैं। खास तौर पर मिसाइल इंटरसेप्टर पहले से ही कम हैं क्योंकि अमेरिका यूक्रेन और इजराइल की मदद करता रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज को सुरक्षित रखना बहुत मुश्किल होगा और अगर ईरान इसे बंद कर देता है तो वैश्विक तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा। लेकिन ट्रम्प को भरोसा था कि युद्ध बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा। उन्हें लगा कि ईरान ज्यादा जवाब नहीं दे पाएगा, जैसा कि पहले जून में हुए हमलों के बाद देखा गया था। जंग शुरू करने का वेंस ने सबसे ज्यादा विरोध किया जनरल केन ने यह कभी नहीं कहा कि जंग गलत है लेकिन वे बार-बार इसके खतरे से आगाह कराते रहे। वह हर प्लानिंग पर पूछते थे कि उसके बाद क्या होगा, लेकिन ट्रम्प अक्सर वही बातों पर

दावा- अमेरिका ने पाकिस्तानी-पीएम को जंग रोकने का पोस्ट भेजा:ड्राफ्ट मैसेज लिखे होने पर सवाल, यूजर बोले- ट्रम्प की गुलामी कर रहा पाकिस्तान

दावा- अमेरिका ने पाकिस्तानी-पीएम को जंग रोकने का पोस्ट भेजा:ड्राफ्ट मैसेज लिखे होने पर सवाल, यूजर बोले- ट्रम्प की गुलामी कर रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यह पोस्ट अमेरिका-ईरान सीजफायर से जुड़ा था और सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में आ गया। पोस्ट की एडिट हिस्ट्री में ‘ड्राफ्ट- पाकिस्तानी PM का मैसेज’ दिखने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह मैसेज पहले से तैयार ड्राफ्ट था। कुछ यूजर्स ने इसे व्हाइट हाउस से जुड़े निर्देश जैसा बताया, जबकि कुछ ने कहा कि ट्रम्प पाकिस्तान की नीति को कंट्रोल कर रहे हैं, यह उनकी गुलामी करने जैसा है। हालांकि, पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। PM शहबाज ने 2 हफ्ते की डेडलाइन बढ़ाने की मांग की शहबाज शरीफ ने मंगवलार की रात X पर एक मैसेज पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से अपील की थी कि वे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी देने की अपनी समय-सीमा (डेडलाइन) को दो हफ्ते के लिए बढ़ा दें, ताकि बातचीत को आगे बढ़ने का मौका मिल सके। शरीफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ईमानदारी से ईरान से अपील करता है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को दो हफ्ते के लिए खोल दे, ताकि इसे एक अच्छा कदम माना जा सके। इसके साथ ही शरीफ ने सभी लड़ाई में शामिल पक्षों से कहा कि वे हर जगह दो हफ्ते के लिए जंग रोक दे, ताकि बातचीत के जरिए इस जंग को पूरी तरह खत्म किया जा सके और क्षेत्र में लंबे समय तक शांति और स्थिरता लाई जा सके। ड्राफ्ट वाला विवाद कैसे शुरू हुआ असल विवाद तब शुरू हुआ जब शहबाज शरीफ के अकाउंट से जो पहला पोस्ट गया, उसमें ऊपर लिखा था- ‘ड्राफ्ट- पाकिस्तानी PM का मैसेज’ यानी यह एक ड्राफ्ट मैसेज था, जो शायद पब्लिक के लिए नहीं था। थोड़ी ही देर में इस पोस्ट को एडिट कर दिया गया और ‘ड्राफ्ट’ शब्द हटा दिया गया, लेकिन बाकी पूरा मैसेज वैसा ही रखा गया। लेकिन तब तक सोशल मीडिया यूजर्स स्क्रीनशॉट ले चुके थे, जिससे यह मामला वायरल हो गया। दावा- अमेरिका या इजराइल ने ड्राफ्ट तैयार किया इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर हुई कि क्या यह मैसेज वास्तव में पाकिस्तान में तैयार हुआ था या कहीं बाहर से आया था। कुछ लोगों ने तो विदेशी दखल की बात भी कही, लेकिन अभी तक इन दावों की कोई पुष्टि नहीं हुई है। ड्रॉप साइट के फाउंडर रयान ग्रिम ने फोर्ब्स से कहा कि यह मैसेज शायद शहबाज शरीफ ने खुद नहीं लिखा। उन्होंने कहा कि अगर यह मैसेज उनकी अपनी टीम ने लिखा होता, तो वे अपने प्रधानमंत्री के लिए ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री’ जैसा शब्द इस्तेमाल नहीं करते। इससे ऐसा लगता है कि यह मैसेज शायद अमेरिका या इजराइल में तैयार किया गया हो सकता है। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने सवाल उठाए कुछ यूजर्स ने कहा कि यह पोस्ट शायद गलती से ‘ड्राफ्ट’ सहित कॉपी-पेस्ट कर दिया गया। एक यूजर ने लिखा कि अगर पाकिस्तान का प्रधानमंत्री ठीक से ट्वीट भी नहीं कर सकता, तो देश कैसे चलाएगा। दूसरे ने लिखा कि ऐसा लग रहा है जैसे ट्रम्प ने जो मैसेज दिया, वही शहबाज शरीफ ने पोस्ट कर दिया। तीसरे ने कहा कि यह कोई बड़ी साजिश नहीं, बल्कि शर्मनाक लापरवाही है। फोर्ब्स ने इस मामले पर शहबाज शरीफ के ऑफिस से जवाब मांगा, लेकिन तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। —————————————— ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने ईरान पर हमले 2 हफ्ते रोके:ईरान ने भी सीजफायर की पुष्टि की, होर्मुज खोलने पर राजी; नागरिकों से कहा- जीत का जश्न मनाएं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर 2 हफ्तों के लिए हमले रोकने का ऐलान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर बताया कि ईरान की तरफ से तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की शर्त पर बमबारी और हमले दो हफ्ते के लिए स्थगित करने के लिए राजी हूं। ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर के अपील के बाद लिया है। पूरी खबर पढ़ें…

World News Updates; Trump Pakistan China

World News Updates; Trump Pakistan China

9 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान संकट के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का X पोस्ट विवादों में आ गया है। पोस्ट की एडिट हिस्ट्री में “ड्राफ्ट- पाकिस्तानी PM का मैसेज” दिखने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। शहबाज शरीफ ने अपने पोस्ट में ट्रम्प से ईरान को लेकर तय समयसीमा दो हफ्ते बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे कूटनीति को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। साथ ही ईरान से होर्मुज खोलने की भी अपील की। पोस्ट के वायरल स्क्रीनशॉट में एक पुराना वर्जन दिखा, जिसमें ड्राफ्ट लिखा था। यही लाइन विवाद का कारण बनी और सवाल उठे कि क्या यह मैसेज पहले से तैयार ड्राफ्ट था। कुछ यूजर्स ने इसे व्हाइट हाउस से जुड़े निर्देश जैसा बताया, जबकि कुछ ने कहा कि ट्रम्प पाकिस्तान की नीति को कंट्रोल कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। शरीफ ने अपने मैसेज में कहा था कि कूटनीतिक प्रयास तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। युद्धविराम से स्थायी समाधान निकल सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

World News Updates; Trump Pakistan China

World News Updates; Trump Pakistan China

1 घंटे पहले कॉपी लिंक ईरान संकट के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का X पोस्ट विवादों में आ गया है। पोस्ट की एडिट हिस्ट्री में “ड्राफ्ट- पाकिस्तानी PM का मैसेज” दिखने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। शहबाज शरीफ ने अपने पोस्ट में ट्रम्प से ईरान को लेकर तय समयसीमा दो हफ्ते बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे कूटनीति को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। साथ ही ईरान से होर्मुज खोलने की भी अपील की। पोस्ट के वायरल स्क्रीनशॉट में एक पुराना वर्जन दिखा, जिसमें ड्राफ्ट लिखा था। यही लाइन विवाद का कारण बनी और सवाल उठे कि क्या यह मैसेज पहले से तैयार ड्राफ्ट था। कुछ यूजर्स ने इसे व्हाइट हाउस से जुड़े निर्देश जैसा बताया, जबकि कुछ ने कहा कि ट्रम्प पाकिस्तान की नीति को कंट्रोल कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। शरीफ ने अपने मैसेज में कहा था कि कूटनीतिक प्रयास तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। युद्धविराम से स्थायी समाधान निकल सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

SEAL Team 6 Rescue US Airman in Iran

SEAL Team 6 Rescue US Airman in Iran

वॉशिंगटन डीसी/तेहरान11 मिनट पहले कॉपी लिंक सील टीम-6 पर बनी एक फिक्शनल फिल्म का दृश्य अमेरिका ने ईरान में लापता दोनों पायलट्स को 36 घंटे के भीतर रेस्क्यू कर लिया। ईरान में 3 अप्रैल को एक ऑपरेशन पर गए F-15E फाइटर जेट्स पर हमला हुआ था। विमान के क्रैश होने से पहले दोनों पायलट्स पैराशूट की मदद से इजेक्ट हो गए थे। इसमें से एक पायलट को अमेरिकी सेना ने कुछ ही घंटे बाद ढूंढ़ लिया जबकि दूसरे के लिए एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। इसकी सफलता की तारीफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी की। उन्होंने इसे देश के इतिहास का सबसे खतरनाक रेस्क्यू मिशन बताया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकी नेवी की स्पेशल यूनिट ‘सील टीम-6’ ने इसे अंजाम दिया। यह वही स्पेशल फोर्स है जिसने 15 साल साल पहले 2011 में आतंकी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में घुसकर मारा था। इजराइल के साथ से संभव हुआ मिशन ईरान के साथ जारी संघर्ष के बीच यह 2026 का पहला कन्फर्म्ड अमेरिकी ग्राउंड ऑपरेशन माना जा रहा है। एक सैनिक को बचाने के लिए बड़े स्तर पर सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया गया, जो इस मिशन की अहमियत दिखाता है। मिशन को सफल बनाने के लिए अमेरिका ने कई लेयर में रणनीति बनाई। पहले, इजराइली खुफिया एजेंसी ने ईरानी सेना की मूवमेंट ट्रैक की। फिर हवाई हमले 36 घंटे के लिए रोके गए ताकि रेस्क्यू टीम आगे बढ़ सके। जिसके बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने फर्जी जानकारी फैलाई कि ऑफिसर सड़क के रास्ते से भाग निकला है। ऊपर अमेरिकी फाइटर जेट्स निगरानी कर रहे थे, जबकि जमीन पर कमांडो धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। अमेरिकी नेवी की स्पेशल यूनिट SEAL टीम-6 ने ऑपरेशन शुरू किया। जब कमांडो अफसर तक पहुंचे, तब ईरानी सेना बेहद करीब थी। ऐसे में भारी गोलीबारी कर दुश्मन को पीछे धकेला गया। इसके बाद ट्रांसपोर्ट विमान फायरिंग के बीच उतरे और घायल अफसर को बाहर निकाला गया। अमेरिकी सेना ने अपने ही दो विमान नष्ट किए ऑपरेशन के बीच इस्फाहन के पास तकनीकी खराबी के कारण दो अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान काम नहीं कर पाए। इन विमानों को मौके पर ही विस्फोट से नष्ट कर दिया गया, ताकि कोई संवेदनशील तकनीक दुश्मन के हाथ न लगे। इस मिशन की तुलना 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में हुए ऑपरेशन से की जा रही है, जब ओसामा बिन लादेन को मार गिराया गया था। तब भी अमेरिकी कमांडो ने खराब हेलीकॉप्टर को नष्ट कर दिया था। तस्वीर में अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान जलते हुए नजर आ रहे हैं, जिन्हें ईरान से निकलने से पहले आग लगा दी गई। (सोर्स- Osinttechnical) एबटाबाद से ज्यादा बड़ा था ईरान का रेस्क्यू मिशन ईरान में रेस्क्यू का यह मिशन एबटाबाद ऑपरेशन से ज्यादा बड़ा था। उसमें 24 सील कमांडो दो स्टेल्थ ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों में पाकिस्तान के अंदर घुसे थे। लेकिन इसमें सैकड़ों स्पेशल फोर्स सैनिक, दर्जनों लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर, साइबर और स्पेस टेक्नोलॉजी। सब एक ही मिशन के लिए जुटे थे। ईरान के अंदर, इस्फहान के पास एक छोड़े गए एयरस्ट्रिप पर फॉरवर्ड रिफ्यूलिंग पॉइंट बनाया गया। दो MC-130J कमांडो विमान और MH-6 हेलिकॉप्टर वहां उतरे। लेकिन दोनों ट्रांसपोर्ट विमान वहीं फंस गए और उड़ नहीं पाए। नए विमान बुलाए गए। वे गोलाबारी के बीच पहुंचे। आखिरकार, सील टीम 6 ने एयरमैन को ढूंढ लिया। मिशन कामयाब- एक भी अमेरिकी सैनिक नहीं मरा अब जरा सी भी गलती की गुंजाइश नहीं थी। ईरानी फोर्स पास पहुंच रही थी। कमांडो ने फायरिंग कर उन्हें रोका। ऊपर से हवाई हमले कर दुश्मन के काफिलों को निशाना बनाया गया। घायल एयरमैन को पहाड़ों से निकालकर विमान में बैठाया गया, साथ ही फंसी हुई रेस्क्यू टीम को भी। तीन नए ट्रांसपोर्ट विमान उन्हें लेकर ईरान से बाहर निकले। इस मिशन में अमेरिका का कोई सैनिक नहीं मरा। ईरान में ऑपरेशन नाकाम, फिर बनी सीगल टीम-6 1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा हो गया। इस दौरान 52 अमेरिकी बंधक बना लिए गए। इन्हें छुड़ाने के लिए अमेरिका ने अप्रैल 1980 में एक मिशन ऑपरेशन ईगल क्लॉ लॉन्च किया। ईरान के रेगिस्तान में तकनीकी खराबी, मौसम और कोऑर्डिनेशन फेल होने से यह मिशन असफल हो गया। इसमें 8 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। तब अमेरिका को एहसास हुआ कि उसके पास ऐसा यूनिट नहीं है जो हाई-रिस्क काउंटर-टेरर ऑपरेशन में हॉस्टेज रेस्क्यू और दुश्मन के इलाके में सीक्रेट मिशन को पूरी क्षमता से कर सके। इस नाकामी के तुरंत बाद अमेरिकी नेवी ने सील टीम-6 बनाया। इसका असली नाम नेवेल स्पेशल वारफेयर डेवलपमेंट ग्रुप है। इसका कोड नेम DEVGRU है। यह डेवलेपमेंट और ग्रुप से मिलकर बनाया गया है। सील टीम 6 को अफगानिस्तान के नेता हामिद करजई की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। साल 2002 में कंधार में उन पर एक जानलेवा हमला हुआ। इस दौरान एक कमांडो घायल हो गया था।उसने अपने शर्ट से सिर से निकल रहा खून रोककर स्थिति संभाली और ड्यूटी को अंजाम दिया। टीम-6 नाम सोवियत यूनियन को धोखा देने के लिए रखा इससे पहले रेगुलर स्पेशल ऑपरेशन के लिए सील टीम-1 और सील टीम- 2 थी। लेकिन सबसे सीक्रेट मिशन को पूरा करने के लिए सील टीम-6 बनाई गई। तब टीम-6 नाम जानबूझकर रखा गया था ताकि सोवियत यूनियन को लगे कि अमेरिका के पास कई सील टीमें हैं। सील टीम 6 को इस तरह तैयार किया जाता है कि वे जमीन, समुद्र और हवा तीनों जगह ऑपरेशन कर सकें। रात, खराब मौसम, दुश्मन के इलाके हर हालत में काम करें और बिना पहचान के सीक्रेट मिशन पूरा करें। जैसे अमेरिका सेना के पास डेल्टा फोर्स है वैसे ही नेवी की सील टीम-6 है। दोनों ही टायर-1 (सबसे ऊंचा स्तर) यूनिट हैं। फर्क सिर्फ ऑपरेटिंग डोमेन का है। जैसे डेल्टा फोर्स जमीन आधारित ऑपरेशन के लिए है। वहीं सील टीम-6 समुद्र और मल्टी डोमेन ऑपरेशन के लिए। दुनिया में सबसे कठिन एंट्री टेस्ट सील टीम 6 में शामिल होना दुनिया की सबसे कठिन स्पेशल फोर्स चयन प्रक्रियाओं में से एक माना जाता है। इसमें सीधे भर्ती नहीं होती। सबसे पहले अमेरिकी नेवी की स्पेशल यूनिट Navy

World News Updates: Iran Israel War, Trump Threats

World News Updates: Iran Israel War, Trump Threats

Hindi News International World News Updates: Iran Israel War, Trump Threats | Hormuz Crisis, Russia China Breaking News 9 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट से जुड़े रूस के प्रमुख वैज्ञानिक अलेक्जेंडर लियोनोव का 74 साल की उम्र में निधन हो गया है। वे रूस के प्रमुख मिसाइल डिजाइनरों में शामिल थे। लियोनोव NPO माशिनोस्ट्रोएनिया (NPOMASH) के CEO और चीफ डिजाइनर थे, जो भारत-रूस की ब्रह्मोस एयरोस्पेस का प्रमुख साझेदार है। उन्हें उन्नत मिसाइल तकनीक के विकास के लिए जाना जाता था। उन्होंने जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल समेत कई अहम प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया। इसके अलावा उन्होंने ग्रेनिट, वल्कन और बास्टियन जैसे मिसाइल और कोस्टल डिफेंस सिस्टम्स के विकास में भी भूमिका निभाई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World News Updates: Iran Israel War, Trump Threats

World News Updates: Iran Israel War, Trump Threats

Hindi News International World News Updates: Iran Israel War, Trump Threats | Hormuz Crisis, Russia China Breaking News 11 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट से जुड़े रूस के प्रमुख वैज्ञानिक अलेक्जेंडर लियोनोव का 74 साल की उम्र में निधन हो गया है। वे रूस के प्रमुख मिसाइल डिजाइनरों में शामिल थे। लियोनोव NPO माशिनोस्ट्रोएनिया (NPOMASH) के CEO और चीफ डिजाइनर थे, जो भारत-रूस की ब्रह्मोस एयरोस्पेस का प्रमुख साझेदार है। उन्हें उन्नत मिसाइल तकनीक के विकास के लिए जाना जाता था। उन्होंने जिरकॉन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल समेत कई अहम प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया। इसके अलावा उन्होंने ग्रेनिट, वल्कन और बास्टियन जैसे मिसाइल और कोस्टल डिफेंस सिस्टम्स के विकास में भी भूमिका निभाई थी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने संघर्ष रोकने के लिए तालिबान के सामने 3 मांगें रखी, चीन की मध्यस्थता में बातचीत शुरू पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालिया संघर्ष के बाद अब दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू हो गई है। चीन की मध्यस्थता में हो रही इस वार्ता में पाकिस्तान ने तालिबान के सामने तीन मांगें रखी हैं। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को आतंकी संगठन घोषित करने, उसके पूरे नेटवर्क को खत्म करने और कार्रवाई के ठोस सबूत देने की मांग की है। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उसकी सबसे बड़ी चिंता अफगानिस्तान की जमीन से संचालित आतंकी गतिविधियां हैं। इसी वजह से बातचीत को फिलहाल आतंकवाद और सीमा सुरक्षा तक सीमित रखा गया है। इस वार्ता में चीन अहम भूमिका निभा रहा है और दोनों पक्षों को एक साझा फ्रेमवर्क पर लाने की कोशिश कर रहा है। चीन ने पांच पॉइंट का फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसमें सीजफायर, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, आतंकी ठिकानों का खात्मा, सुरक्षित व्यापार मार्ग और औपचारिक बातचीत की व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World News Updates; Trump Pakistan China

World News Updates; Trump Pakistan China

12 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत को धमकी दी। उन्होंने शनिवार को कहा कि अगला संघर्ष सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोलकाता तक पहुंच सकता है। सियालकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन (छिपकर हमला करना) का आरोप लगाया, लेकिन इसके समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। आसिफ ने कहा कि अगर भारत कोई कार्रवाई करता है, तो पाकिस्तान जवाबी हमला भारतीय क्षेत्र के अंदर तक करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार संघर्ष 200-250 किमी तक सीमित नहीं रहेगा, हम उनके घरों तक जाएंगे। इससे पहले भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान की किसी भी हरकत का निर्णायक जवाब दिया जाएगा। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बसित ने भी भारत के शहरों को निशाना बनाने की बात कही थी। उन्होंने दिल्ली और मुंबई का नाम लिया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World News Updates; Trump Pakistan China

World News Updates; Trump Pakistan China

30 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बार फिर भारत को धमकी दी। उन्होंने शनिवार को कहा कि अगला संघर्ष सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोलकाता तक पहुंच सकता है। सियालकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन (छिपकर हमला करना) का आरोप लगाया, लेकिन इसके समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। आसिफ ने कहा कि अगर भारत कोई कार्रवाई करता है, तो पाकिस्तान जवाबी हमला भारतीय क्षेत्र के अंदर तक करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार संघर्ष 200-250 किमी तक सीमित नहीं रहेगा, हम उनके घरों तक जाएंगे। इससे पहले भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान की किसी भी हरकत का निर्णायक जवाब दिया जाएगा। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बसित ने भी भारत के शहरों को निशाना बनाने की बात कही थी। उन्होंने दिल्ली और मुंबई का नाम लिया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔