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Trump Fury Erupts, White House Denies Report

Trump Fury Erupts, White House Denies Report

वॉशिंगटन डीसी16 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान युद्ध के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी F-15 जेट गिरने के बाद भड़क गए थे। वे कई घंटों तक अधिकारियों पर चिल्लाते रहे। द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी वजह से अधिकारियों ने उन्हें वार रूम की अहम ब्रीफिंग्स से दूर रखा। हालांकि, व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है। 3 अप्रैल को ईरान के ऊपर अमेरिकी F-15 जेट गिरने के बाद दो एयरमैन लापता हो गए थे। एक को तुरंत बचा लिया गया, लेकिन दूसरा 24 घंटे से ज्यादा समय तक दुश्मन इलाके में फंसा रहा। रिपोर्ट में सीनियर अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि ट्रम्प को स्थिति की जानकारी केवल जरूरी मौकों पर फोन से दी जा रही थी। उन्हें रियल-टाइम ऑपरेशन वाली बैठकों में शामिल नहीं किया गया क्योंकि अधिकारियों को लगा कि उनकी बेसब्री का असर फैसलों पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में बताया है कि, F-15 जेट के ईरान में गिरने की खबर सुन ट्रम्प अधिकारियों पर भड़क उठे थे। (फाइल फोटो) ट्रम्प ने तुरंत कार्रवाई का दबाव बनाया रिपोर्ट के अनुसार, गुड फ्राइडे के दिन जब ट्रम्प को एयरमैन के लापता होने की जानकारी मिली तो उन्होंने सेना से कहा कि ‘उन्हें तुरंत वापस लाओ।’ उन्होंने तेज कार्रवाई की मांग की, जबकि ईरान के अंदर ऑपरेशन जटिल और जोखिम भरा था। अमेरिकी सेना दशकों से ईरान की जमीन पर ऑपरेशन नहीं कर रही थी। ऐसे में अधिकारियों को तय करना था कि बिना पकड़े दुश्मन इलाके में कैसे घुसा जाए और एयरमैन को कैसे निकाला जाए। ट्रम्प रेस्क्यू के वक्त सिचुएशन रूम में नहीं थे एयरमैन के रेस्कयू ऑपरेशन के दौरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स समेत कई अधिकारी सिचुएशन रूम से लगातार अपडेट ले रहे थे। ये बैठकें अगले 24 घंटे तक चलीं लेकिन ट्रम्प इनमें शामिल नहीं थे। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रम्प इस स्थिति की तुलना ईरान बंधक संकट से कर रहे थे जिसमें तत्कालीन राष्ट्रपति को चुनाव में भारी नुकसान उठाना पड़ा था। यह घटना उनके दिमाग में लगातार चल रही थी और जैसे-जैसे ऑपरेशन आगे बढ़ा, उनकी चिंता भी बढ़ती गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी करते हुए। यह फोटो 28 फरवरी की है। ऑपरेशन सफल होने के बाद ट्रम्प ने तारीफ की अमेरिकी एजेंसियों ने लापता एयरमैन को लगातार खोज रही थीं। 4 अप्रैल की शाम को उसे भी सुरक्षित निकाल लिया गया। एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, यह मिशन CIA की मदद से पूरा हुआ, जिसने एयरमैन की लोकेशन का पता लगाया। अधिकारियों ने इस ऑपरेशन को “घास के ढेर में सुई खोजने” जैसा बताया। रिपोर्ट के अनुसार, CIA ने एक भ्रामक अभियान भी चलाया, जिसमें यह फैलाया गया कि एयरमैन पहले ही मिल चुका है, ताकि दुश्मन गुमराह रहे। रेस्क्यू के बाद ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर ऑपरेशन की तारीफ की और बचाए गए सैनिक को बहादुर योद्धा बताया। अगले ही दिन ट्रम्प ने गालियों भरा पोस्ट किया रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद ट्रम्प ने अगले ही दिन सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी दी। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर गालियों भरा संदेश पोस्ट किया। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रम्प ने जानबूझकर संदेश में धार्मिक भाषा और ‘अल्लाह’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया ताकि ईरान के नेताओं को असहज किया जा सके। 7 अप्रैल को उन्होंने और सख्त बयान दिया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो “पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।” हालांकि, कुछ घंटों बाद उन्होंने 8 अप्रैल से दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान भी किया। WSJ के मुताबिक, इन बयानों के बाद दुनिया भर में चिंता बढ़ी और अमेरिकी सांसदों ने व्हाइट हाउस से ट्रम्प की मानसिक स्थिति को लेकर जानकारी मांगी। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:36 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन अमेरिका के F-15E फाइटर जेट के दोनों पायलट्स को 36 घंटे के भीतर ईरान से रेस्क्यू कर लिया गया। इसके मेन पायलट को शुक्रवार रात को ही बचा लिया था, जबकि एयरमैन यानी वेपन सिस्टम ऑफिसर को शनिवार रात रेस्क्यू किया गया। अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने एयरमैन को बचाने के लिए एक खास ऑपरेशन चलाया था, जिसमें सैकड़ों अमेरिकी कमांडो शामिल थे। इन्होंने ईरान के कॉफी अंदर जाकर रेस्क्यू ऑपरेशन किया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार सुबह सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “अफसर को चोटें आई हैं, लेकिन वह पूरी तरह ठीक हो जाएगा।” ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

World News Updates; Trump Pakistan China

World News Updates; Trump Pakistan China

1 मिनट पहले कॉपी लिंक जापान में सोमवार को 7.4 रिक्टर तीव्रता का भूकंप आया। जिसके बाद तटीय क्षेत्रों में सुनामी चेतावनी जारी कर दी गई है। जापान मौसम एजेंसी के मुताबिक, इवाते प्रांत और होक्काइडो के कुछ हिस्सों में 3 मीटर तक ऊंची लहरें पहुंचने की आशंका है। अधिकारियों ने लोगों से तुरंत ऊंचे इलाकों में जाने और तट तथा नदियों से दूर रहने की अपील की है। राहत और आपात सेवाएं हालात पर नजर बनाए हुए हैं और संभावित नुकसान का आकलन किया जा रहा है। जापान भूकंप के लिहाज से दुनिया के सबसे सक्रिय देशों में से एक है। हर साल जापान में हजारों झटके दर्ज होते हैं। यह देश चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के संगम पर स्थित है, जिसके कारण यहां भूकंपीय गतिविधियां आम हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा- अमेरिका से करीबी रिश्ते अब कमजोरी बने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि अमेरिका के साथ करीबी रिश्ते अब उनके देश के लिए कमजोरी बन रहे हैं। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया पर 10 मिनट का एक वीडियो जारी किया। इसमें कार्नी ने कहा कि अमेरिका ने व्यापार नीति में बड़ा बदलाव किया है और टैरिफ को ग्रेट डिप्रेशन जैसे स्तर तक बढ़ाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया पहले से ज्यादा खतरनाक और बंट गई है इसलिए कनाडा को अपनी नीतियां बदलनी होंगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ रिश्ते अब पहले जैसे नहीं रहेंगे इसलिए इस भ्रम से बाहर निकलना जरूरी है। कनाडा को नए देशों के साथ व्यापार बढ़ाना होगा। इसी दिशा में भारत के साथ CEPA ट्रेड समझौते पर बातचीत आगे बढ़ रही है। मार्च में उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की थी और इस साल के अंत तक डील पूरी होने की उम्मीद है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

ट्रम्प बोले- ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका लाएंगे:साथ मिलकर परमाणु ठिकानों की खुदाई करेंगे; ईरान बोला- यूरेनियम कहीं ट्रांसफर नहीं होगा

ट्रम्प बोले- ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका लाएंगे:साथ मिलकर परमाणु ठिकानों की खुदाई करेंगे; ईरान बोला- यूरेनियम कहीं ट्रांसफर नहीं होगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान मिलकर परमाणु ठिकानों की खुदाई करेंगे और वहां मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम को निकालकर अमेरिका लाया जाएगा। ट्रम्प ने कहा कि बमबारी से प्रभावित परमाणु ठिकानों में दोनों देश साथ मिलकर जाएंगे और भारी मशीनों की मदद से खुदाई कर यूरेनियम बाहर निकाला जाएगा। इसके बाद इसे अमेरिका ले जाया जाएगा। ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है और वीकेंड पर मीटिंग हो सकती है। उनके मुताबिक, एक-दो दिन में शांति समझौता हो सकता है। हालांकि, ईरान ने इसे खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा, “ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम कहीं भी ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।” होर्मुज खोलने को लेकर स्थिति साफ नहीं ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में चेतावनी दी कि अगर अमेरिका अपनी नाकेबंदी जारी रखता है, तो होर्मुज स्ट्रेट खुला नहीं रहेगा और वहां से गुजरने के लिए ईरान की इजाजत जरूरी होगी। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड USCC ने कहा है कि नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक राष्ट्रपति ट्रम्प इसे हटाने का आदेश नहीं देते। ट्रम्प पहले ही साफ कर चुके हैं कि जब तक ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता, तब तक नाकेबंदी नहीं हटेगी। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… होर्मुज स्ट्रेट खुला: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट फिलहाल सभी व्यापारिक जहाजों के लिए खुला है और आवाजाही सामान्य है। ईरान की धमकी: ईरान ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रही तो होर्मुज स्ट्रेट खुला नहीं रहेगा। ईरान ने ट्रम्प के कई दावे को गलत बताया। अमेरिकी नाकेबंदी जारी: ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ समझौते में अब कोई बड़ी अड़चन नहीं बची है, हालांकि डील पूरी होने तक नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। घर वापसी: इजराइल और लेबरनान के बीच सीजफायर लागू होने के बाद लेबनान में हजारों लोग अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। इजराइल पर दबाव: ट्रम्प ने कहा कि लेबनान में 10 दिन के सीजफायर के दौरान इजराइल को बमबारी करने की अनुमति नहीं है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

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Hindi News International World Update| Trump, America, Russia, Putin, Israel, Iran, War, Updates, World News| Virginia Ex Governor Kills Wife, Then Self | Fairfax Tragedy 17 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के वर्जीनिया में पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर जस्टिन फेयरफैक्स ने पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद भी सुसाइड कर लिया। यह घटना गुरुवार रात एनानडेल स्थित उनके घर में हुई। पुलिस के मुताबिक, घटना के समय दंपती के दोनों बेटे घर में मौजूद थे, जिन्होंने कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जस्टिन फेयरफैक्स (47) और उनकी पत्नी सेरीना को मृत पाया। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों के बीच तलाक को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस घर में लगे कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है। घटना को लेकर पुलिस प्रमुख ने कहा कि यह बेहद दुखद है, खासकर इसलिए क्योंकि बच्चे उसी समय घर में मौजूद थे। फिलहाल बच्चों को परिजनों की देखरेख में रखा गया है और उन्हें काउंसलिंग दी जा रही है। इससे पहले जनवरी में फेयरफैक्स ने पत्नी पर हमले का आरोप लगाया था, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Hindi News International World Update| Trump, America, Russia, Putin, Israel, Iran, War, Updates, World News| Virginia Ex Governor Kills Wife, Then Self | Fairfax Tragedy 53 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के वर्जीनिया में पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर जस्टिन फेयरफैक्स ने पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद भी सुसाइड कर लिया। यह घटना गुरुवार रात एनानडेल स्थित उनके घर में हुई। पुलिस के मुताबिक, घटना के समय दंपती के दोनों बेटे घर में मौजूद थे, जिन्होंने कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जस्टिन फेयरफैक्स (47) और उनकी पत्नी सेरीना को मृत पाया। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों के बीच तलाक को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस घर में लगे कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है। घटना को लेकर पुलिस प्रमुख ने कहा कि यह बेहद दुखद है, खासकर इसलिए क्योंकि बच्चे उसी समय घर में मौजूद थे। फिलहाल बच्चों को परिजनों की देखरेख में रखा गया है और उन्हें काउंसलिंग दी जा रही है। इससे पहले जनवरी में फेयरफैक्स ने पत्नी पर हमले का आरोप लगाया था, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

होर्मुज के बाद अब ट्रम्प की मलक्का स्ट्रेट पर नजर:इंडोनेशिया से रक्षा करार किया, अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशियाई इलाके में जाने की इजाजत

होर्मुज के बाद अब ट्रम्प की मलक्का स्ट्रेट पर नजर:इंडोनेशिया से रक्षा करार किया, अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशियाई इलाके में जाने की इजाजत

हॉर्मुज स्ट्रेट में इस समय हालात काफी तनाव भरे हैं। अमेरिका वहां ईरान से जुड़ी जहाजों की गतिविधियों पर सख्ती कर रहा है। इसी बीच अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक नया रक्षा समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अब अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में ज्यादा आसानी से आने-जाने की इजाजत मिल गई है। इसे आधिकारिक तौर पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का कदम बताया जा रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह डील ऐसे समय हुई है जब US ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए होर्मुज में नाकाबंदी शुरू कर दी है। इसके बाद तेल सप्लाई लगभग ठहर गई और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका ने मलक्का स्ट्रेट पर नजर रखने के लिए यह करार किया है। होर्मुज के बाद मलक्का पर फोकस मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यह वही रास्ता है जो हिंद महासागर को पूर्वी एशिया से जोड़ता है और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से करीब 40% वैश्विक व्यापार और लगभग 30% तेल सप्लाई गुजरती है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है। फिलिप चैनल पर इसकी चौड़ाई 3 किलोमीटर है, जो इसे बड़ा बॉटलनेक बनाती है। यह होर्मुज से करीब नौ गुना ज्यादा संकरा है। मलक्का स्ट्रेट पर इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर का कंट्रोल है। इस रास्ते से दुनिया का बहुत बड़ा व्यापार गुजरता है। यही वजह है कि इस इलाके में कोई भी हलचल सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है। US-इंडोनेशिया डील के बाद एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक में बड़े समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स और पूर्व सैनिकों ने कहा है कि दुनिया के चोकपॉइंट्स पर US अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। चीन के लिए सबसे बड़ी कमजोरी अगर हॉर्मुज को तेल की सप्लाई का मुख्य रास्ता माना जाता है, तो मलक्का को पूरी दुनिया के ट्रेड की लाइफलाइन कहा जा सकता है। यहां से तेल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनें और बाकी सामान भी बड़ी मात्रा में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं। चीन के लिए तो मलक्का को सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी माना जाता है। चीन के करीब 80% तेल आयात इसी रास्ते से आते हैं। ये इंडस्ट्रियल इकॉनमी और एक्सपोर्ट सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। इसी वजह से चीन लंबे समय से इस पर अपनी निर्भरता को एक कमजोरी मानता है। यही कारण है कि पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इसे ‘मलक्का डिलेमा’ कहा था। हाल में चीन ने इलाके के आसपास समुद्री मैपिंग और मॉनिटरिंग गतिविधियां बढ़ाई हैं। भारत के लिए क्यों अहम है मलक्का मलक्का स्ट्रेट भारत के लिए भी उतना ही अहम है। देश का करीब 55% व्यापार इसी रास्ते और सिंगापुर क्षेत्र से होकर गुजरता है। भारत की भौगोलिक स्थिति उसे इस इलाके में रणनीतिक बढ़त देती है। अंडमान और निकोबार आइलैंड्स इस स्ट्रेट के पश्चिमी मुहाने के पास हैं, जहां से पोर्ट ब्लेयर से 24 घंटे में पहुंचा जा सकता है। भारत का INS बाज एयर स्टेशन, जो कैंपबेल बे में है, इस इलाके की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह भारत को समुद्री ट्रैफिक पर नजर रखने की ताकत देता है। क्या US-भारत सहयोग बढ़ सकता है एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका मलक्का में अपनी भूमिका बढ़ाता है, तो भारत की भागीदारी अहम हो सकती है। सिंगापुर ने पहली बार मलक्का स्ट्रेट पेट्रोल में भारत की दिलचस्पी को औपचारिक तौर पर माना है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि, मलक्का स्ट्रेट में अमेरिका के लिए सब कुछ आसान नहीं होगा। इंडोनेशिया और मलेशिया इस इलाके को लेकर काफी संवेदनशील रहते हैं और अपनी संप्रभुता को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते। सिंगापुर का हिस्सा छोटा जरूर है, लेकिन वैश्विक शिपिंग में उसकी भूमिका बहुत बड़ी है। उसका पोर्ट और समुद्री सेवाएं उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए वह इस रास्ते में किसी भी तरह की अस्थिरता नहीं चाहता। हाल के समय में समुद्री टैक्स और नियमों को लेकर भी बहस तेज हुई है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में अमेरिका की बढ़ती गतिविधियां यह दिखाती हैं कि वह अब एक साथ कई अहम समुद्री रास्तों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… होर्मुज पर अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी शुरू:ट्रम्प की धमकी- इसके पास आए ईरानी जहाज तबाह करेंगे, ईरान बोला- भारत से कोई टोल नहीं लिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री नाकाबंदी शुरू हो गई है। यह फैसला आज शाम 7:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार सुबह 10 बजे) से लागू हुआ। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी ईरानी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए वही तरीका इस्तेमाल होगा, जिससे समुद्र में ड्रग तस्करों के जहाज रोके जाते हैं, यानी तेजी और सख्ती से। पूरी खबर पढ़ें…

होर्मुज के बाद अब ट्रम्प की मलक्का स्ट्रेट पर नजर:इंडोनेशिया से रक्षा करार किया, अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशियाई इलाके में जाने की इजाजत

होर्मुज के बाद अब ट्रम्प की मलक्का स्ट्रेट पर नजर:इंडोनेशिया से रक्षा करार किया, अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशियाई इलाके में जाने की इजाजत

हॉर्मुज स्ट्रेट में इस समय हालात काफी तनाव भरे हैं। अमेरिका वहां ईरान से जुड़ी जहाजों की गतिविधियों पर सख्ती कर रहा है। इसी बीच अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक नया रक्षा समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अब अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में ज्यादा आसानी से आने-जाने की इजाजत मिल गई है। इसे आधिकारिक तौर पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने का कदम बताया जा रहा है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यह डील ऐसे समय हुई है जब US ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए होर्मुज में नाकाबंदी शुरू कर दी है। इसके बाद तेल सप्लाई लगभग ठहर गई और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अमेरिका ने मलक्का स्ट्रेट पर नजर रखने के लिए यह करार किया है। होर्मुज के बाद मलक्का पर फोकस मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यह वही रास्ता है जो हिंद महासागर को पूर्वी एशिया से जोड़ता है और दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से करीब 40% वैश्विक व्यापार और लगभग 30% तेल सप्लाई गुजरती है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे खास बनाती है। फिलिप चैनल पर इसकी चौड़ाई 3 किलोमीटर है, जो इसे बड़ा बॉटलनेक बनाती है। यह होर्मुज से करीब नौ गुना ज्यादा संकरा है। मलक्का स्ट्रेट पर इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर का कंट्रोल है। इस रास्ते से दुनिया का बहुत बड़ा व्यापार गुजरता है। यही वजह है कि इस इलाके में कोई भी हलचल सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है। US-इंडोनेशिया डील के बाद एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक में बड़े समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स और पूर्व सैनिकों ने कहा है कि दुनिया के चोकपॉइंट्स पर US अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। चीन के लिए सबसे बड़ी कमजोरी अगर हॉर्मुज को तेल की सप्लाई का मुख्य रास्ता माना जाता है, तो मलक्का को पूरी दुनिया के ट्रेड की लाइफलाइन कहा जा सकता है। यहां से तेल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनें और बाकी सामान भी बड़ी मात्रा में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते हैं। चीन के लिए तो मलक्का को सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी माना जाता है। चीन के करीब 80% तेल आयात इसी रास्ते से आते हैं। ये इंडस्ट्रियल इकॉनमी और एक्सपोर्ट सिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। इसी वजह से चीन लंबे समय से इस पर अपनी निर्भरता को एक कमजोरी मानता है। यही कारण है कि पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ ने इसे ‘मलक्का डिलेमा’ कहा था। हाल में चीन ने इलाके के आसपास समुद्री मैपिंग और मॉनिटरिंग गतिविधियां बढ़ाई हैं। भारत के लिए क्यों अहम है मलक्का मलक्का स्ट्रेट भारत के लिए भी उतना ही अहम है। देश का करीब 55% व्यापार इसी रास्ते और सिंगापुर क्षेत्र से होकर गुजरता है। भारत की भौगोलिक स्थिति उसे इस इलाके में रणनीतिक बढ़त देती है। अंडमान और निकोबार आइलैंड्स इस स्ट्रेट के पश्चिमी मुहाने के पास हैं, जहां से पोर्ट ब्लेयर से 24 घंटे में पहुंचा जा सकता है। भारत का INS बाज एयर स्टेशन, जो कैंपबेल बे में है, इस इलाके की निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह भारत को समुद्री ट्रैफिक पर नजर रखने की ताकत देता है। क्या US-भारत सहयोग बढ़ सकता है एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका मलक्का में अपनी भूमिका बढ़ाता है, तो भारत की भागीदारी अहम हो सकती है। सिंगापुर ने पहली बार मलक्का स्ट्रेट पेट्रोल में भारत की दिलचस्पी को औपचारिक तौर पर माना है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय सहयोग बढ़ सकता है। हालांकि, मलक्का स्ट्रेट में अमेरिका के लिए सब कुछ आसान नहीं होगा। इंडोनेशिया और मलेशिया इस इलाके को लेकर काफी संवेदनशील रहते हैं और अपनी संप्रभुता को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते। सिंगापुर का हिस्सा छोटा जरूर है, लेकिन वैश्विक शिपिंग में उसकी भूमिका बहुत बड़ी है। उसका पोर्ट और समुद्री सेवाएं उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, इसलिए वह इस रास्ते में किसी भी तरह की अस्थिरता नहीं चाहता। हाल के समय में समुद्री टैक्स और नियमों को लेकर भी बहस तेज हुई है, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में अमेरिका की बढ़ती गतिविधियां यह दिखाती हैं कि वह अब एक साथ कई अहम समुद्री रास्तों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… होर्मुज पर अमेरिकी नेवी की नाकाबंदी शुरू:ट्रम्प की धमकी- इसके पास आए ईरानी जहाज तबाह करेंगे, ईरान बोला- भारत से कोई टोल नहीं लिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री नाकाबंदी शुरू हो गई है। यह फैसला आज शाम 7:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार सुबह 10 बजे) से लागू हुआ। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी ईरानी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए वही तरीका इस्तेमाल होगा, जिससे समुद्र में ड्रग तस्करों के जहाज रोके जाते हैं, यानी तेजी और सख्ती से। पूरी खबर पढ़ें…

world updates| russia, china, USA, putin, trump| India to Host BRICS & QUAD Foreign Ministers Meet in May 2026

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Hindi News International World Updates| Russia, China, USA, Putin, Trump| India To Host BRICS & QUAD Foreign Ministers Meet In May 2026 22 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत मई में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। इस मंच पर ईरान और UAE के प्रतिनिधि आमने-सामने होंगे। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला सीधा संपर्क होगा। सूत्रों के मुताबिक, भारत इस बैठक के जरिए क्षेत्रीय तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। ब्रिक्स मंच पर सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इधर, भारत मई के आखिरी हफ्ते में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की तैयारी में भी है। इसमें अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल होंगे। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी संकेत दिए हैं कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो मई में भारत आ सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में इस दौरे का जिक्र किया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… साउथ अफ्रीका ने अमेरिका में 1 साल बाद राजदूत की नियुक्ति की साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने अमेरिका में नए राजदूत की नियुक्ति कर दी है। उन्होंने वरिष्ठ नेता रूएल्फ मेयर को यह जिम्मेदारी सौंपी है। इसकी जानकारी राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने दी। रूएल्फ मेयर 1990 के दशक में रंगभेद खत्म करने के लिए हुई ऐतिहासिक बातचीत में सरकार के मुख्य वार्ताकार रह चुके हैं। बाद में वे नेल्सन मंडेला की एकता सरकार का भी हिस्सा बने थे। अमेरिका में यह पद लंबे समय से खाली था। मार्च 2025 में पूर्व राजदूत इब्राहिम रसूल को डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन से विवाद के बाद निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका और साउथ अफ्रीका के संबंध और बिगड़े हैं। ट्रम्प ने साउथ अफ्रीका के श्वेत अफ्रीकानेर समुदाय पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। साथ ही उनके लिए एक विशेष शरणार्थी योजना भी शुरू की थी, जिसका साउथ अफ्रीका ने विरोध किया था। 78 साल के मेयर खुद अफ्रीकानेर समुदाय से आते हैं। उन्होंने 1979 में राजनीति में कदम रखा था और बाद में रक्षा व संवैधानिक मामलों के मंत्री भी रहे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World updates| Trump Wanted Gulf of Mexico Named After Him | Controversy

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Hindi News International World Updates| Trump Wanted Gulf Of Mexico Named After Him | Controversy| Iran, China, Russia, Usa, Putin, Trump, 26 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने एक समय गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम ‘गल्फ ऑफ ट्रम्प’ रखने पर भी विचार किया था, लेकिन बाद में यह फैसला छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह शायद काम नहीं करता और विवाद बढ़ सकता था। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि यह फैसला उनकी बड़ी योजना का हिस्सा था। इसके तहत उन्होंने इस खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ रखने का आदेश दिया था। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में, 20 जनवरी 2025 को, एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करके यह बदलाव लागू किया। इस आदेश के तहत अमेरिका के अंदर सभी सरकारी एजेंसियों को नया नाम अपनाने के निर्देश दिए गए। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने भी अपने रिकॉर्ड में यह बदलाव दर्ज किया। हालांकि, इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई। खासकर मेक्सिको ने इसका विरोध किया। वहां की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा कि गल्फ ऑफ मैक्सिको नाम सदियों से इस्तेमाल हो रहा है और पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World updates| Trump Wanted Gulf of Mexico Named After Him | Controversy

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Hindi News International World Updates| Trump Wanted Gulf Of Mexico Named After Him | Controversy| Iran, China, Russia, Usa, Putin, Trump, 3 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने एक समय गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम ‘गल्फ ऑफ ट्रम्प’ रखने पर भी विचार किया था, लेकिन बाद में यह फैसला छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह शायद काम नहीं करता और विवाद बढ़ सकता था। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि यह फैसला उनकी बड़ी योजना का हिस्सा था। इसके तहत उन्होंने इस खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ रखने का आदेश दिया था। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में, 20 जनवरी 2025 को, एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करके यह बदलाव लागू किया। इस आदेश के तहत अमेरिका के अंदर सभी सरकारी एजेंसियों को नया नाम अपनाने के निर्देश दिए गए। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने भी अपने रिकॉर्ड में यह बदलाव दर्ज किया। हालांकि, इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई। खासकर मेक्सिको ने इसका विरोध किया। वहां की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा कि गल्फ ऑफ मैक्सिको नाम सदियों से इस्तेमाल हो रहा है और पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔