Iran US Israel War Ceasefire LIVE Update; Donald Trump Hormuz Strait

Hindi News International Iran US Israel War Ceasefire LIVE Update; Donald Trump Hormuz Strait | Middle East Oil Crisis तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी14 मिनट पहले कॉपी लिंक ट्रम्प ने ईरान युद्ध की मंजूरी के लिए संसद में प्रस्ताव रखने का इरादा अभी टाल दिया है। युद्ध की 60 दिन का समय पूरा होने के बाद ट्रम्प को आगे इसे जारी रखने के लिए 1 मई को प्रस्ताव रखना था। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को संसद में कहा कि राष्ट्रपति को 60 दिन से ज्यादा युद्ध जारी रखने के लिए संसद की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि ईरान के साथ जो सीजफायर (युद्धविराम) हुआ है, उससे यह 60 दिन की समय सीमा रुक गई है। अमेरिका-ईरान जंग 7 अप्रैल को रुक गया था। इसका मतलब है कि यह जंग करीब 40 दिन चला। हेगसेथ ने यह भी कहा कि इस समय सबसे बड़ा खतरा ईरान नहीं, बल्कि युद्ध विरोधी हैं। इनमें कुछ डेमोक्रेट और कुछ रिपब्लिकन हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ लगातार दूसरे दिन गुरुवार को संसद में पेश हुए। वियतनाम जंग के बाद 60 दिन का कानून आया अमेरिका में वियतनाम युद्ध के बाद एक कानून बनाया गया था, जिसे ‘वॉर पावर्स रिजोल्यूशन’ कहा जाता है। इस कानून के मुताबिक, राष्ट्रपति संसद की मंजूरी के बिना सिर्फ 60 दिन ही सेना का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को या तो सेना वापस बुलानी होती है, या युद्ध जारी रखने के लिए संसद से मंजूरी लेनी होती है, या फिर 30 दिन का एक्स्ट्रा समय मांगना होता है। ट्रम्प ने 1 मार्च को संसद में ईरान पर हमले की जानकारी दी थी। ऐसे में 60 दिन की समयसीमा 1 मई को पूरी हो जाएगी। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प की धमकी: ट्रम्प ने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर अपनी फोटो शेयर कर कहा, तूफान आगे बढ़ रहा है। इसे कोई रोक नहीं पाएगा। 2. ईरान का जवाब: सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने कहा, हम हमलावरों को समंदर में डुबो देंगे। फारस की खाड़ी में उनके लिए कोई जगह नहीं है। 3. भारत को राहत: भारत में ईरान के राजदूत ने कहा है कि ईरान होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही तय कर रहा है। भारत के जहाजों पर किसी तरह की रोक नहीं है। 4. मुजतबा की सेहत पर सस्पेंस: मुजतबा खामेनेई की सेहत को लेकर अब भी साफ जानकारी सामने नहीं आई है। वह अभी तक कभी सार्वजनिक तौर पर नजर नहीं आए हैं। 5. अमेरिकी एयरक्राफ्ट लौटा: दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड अब 300 दिनों से ज्यादा की रिकॉर्ड तैनाती के बाद अमेरिका लौट रहा है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 14 मिनट पहले कॉपी लिंक रिपोर्ट: ईरान के साथ जंग खत्म मानी जा रही रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि ईरान के साथ जो लड़ाई फरवरी में शुरू हुई थी, वह अब ‘खत्म’ मानी जा रही है। अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों ने मंगलवार, 7 अप्रैल को 2 हफ्ते के लिए युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति बनाई थी, जिसे बाद में आगे बढ़ा दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि 7 अप्रैल के बाद से अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच कोई गोलीबारी या हमला नहीं हुआ है। 32 मिनट पहले कॉपी लिंक लेबनान में फिर इजराइली हमले, 32 लोगों की मौत लेबनान में एक बार फिर से इजराइल ने हमले किए। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक हारौफ शहर को निशाना बनाकर की गई एयर स्ट्राइक में एक महिला की मौत हो गई। इस स्ट्राइक में एक बच्चे समेत तीन लोग घायल भी हुए। इसके साथ ही गुरुवार को पूरे लेबनान में इजराइली हमलों में मरने वालों की कुल संख्या 32 हो गई। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Major Blow to Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win for Trump

Hindi News Business UAE Quits OPEC & OPEC+ Effective May 1: Major Blow To Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win For Trump नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार (28 अप्रैल) को कच्चे तेल का निर्यात करने वाले देशों के ऑर्गेनाइजेशन ओपेक और ओपेक प्लस से अलग होने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से दुनिया भर में एनर्जी यानी ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। लंबे समय से ओपेक का हिस्सा रहे UAE के इस कदम से सऊदी अरब की लीडरशिप वाले इस ग्रुप की एकता पर बड़ा असर पड़ सकता है। ओपेक देशों के बीच तालमेल की कमी और नाराजगी UAE का यह फैसला उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है। UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश ने सोमवार को एक फोरम में कहा कि ईरान के हमलों के दौरान अरब और खाड़ी देशों का रुख काफी कमजोर रहा है। गरगाश के मुताबिक, गल्फ कॉरपोरेशन काउंसिल (GCC) के देशों ने एक-दूसरे की लॉजिस्टिक मदद तो की, लेकिन राजनीतिक और सैन्य स्तर पर उनकी भूमिका सबसे कमजोर रही है। उन्होंने कहा कि अरब लीग से तो उन्हें ऐसी ही उम्मीद थी, लेकिन GCC के रुख ने उन्हें हैरान कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत UAE के इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रम्प लंबे समय से ओपेक की आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि यह संगठन तेल की कीमतों को जानबूझकर बढ़ाकर पूरी दुनिया को लूट रहा है। ट्रम्प ने कई बार खाड़ी देशों को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सुरक्षा को तेल की कीमतों से जोड़ा है। उनका कहना है कि अमेरिका इन देशों की रक्षा करता है, जबकि ये देश तेल के दाम बढ़ाकर अमेरिका का शोषण करते हैं। अब UAE के बाहर होने से ओपेक की ताकत कम होगी, जिससे बाजार पर अमेरिका का कंट्रोल बढ़ सकता है। ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज रूट में तनाव का असर ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी देशों के लिए तेल का निर्यात करना पहले से ही मुश्किल बना हुआ है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) ओमान और ईरान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरती है। ईरान की धमकियों और जहाजों पर हमलों की वजह से यह सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस अस्थिरता के बीच UAE का ओपेक से अलग होना तेल बाजार में और ज्यादा अनिश्चितता पैदा कर सकता है। क्या है ओपेक और ओपेक प्लस? ओपेक (OPEC): इसकी स्थापना 1960 में हुई थी। इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान और कुवैत जैसे देश शामिल हैं। इनका मुख्य काम दुनिया में तेल की सप्लाई को कंट्रोल करना है ताकि कीमतें स्थिर रहें। ओपेक प्लस (OPEC+): 2016 में जब तेल की कीमतें बहुत गिर गई थीं, तब ओपेक देशों ने रूस जैसे अन्य बड़े तेल उत्पादकों के साथ मिलकर यह नया गठबंधन बनाया था। बाजार पर कब्जा: दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 40% हिस्सा इन्ही देशों के पास है। ये देश जब उत्पादन घटाते हैं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? अगर ओपेक के सदस्य देश एकजुट नहीं रहते हैं, तो तेल के उत्पादन पर उनका कंट्रोल कमजोर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग देश अपनी मर्जी से ज्यादा तेल बाजार में उतार सकते हैं, जिससे कीमतों में गिरावट आने की संभावना बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में कमी या स्थिरता भारत के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। हालांकि, ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई का खतरा अभी भी बना हुआ है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Major Blow to Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win for Trump

Hindi News Business UAE Quits OPEC & OPEC+ Effective May 1: Major Blow To Saudi Leadership Amid Iran War, Big Win For Trump नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार (28 अप्रैल) को कच्चे तेल का उत्पादन और निर्यात करने वाले देशों के ऑर्गेनाइजेशन ओपेक और ओपेक प्लस से अलग होने का ऐलान कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ जारी युद्ध की वजह से दुनिया भर में एनर्जी यानी ऊर्जा संकट गहराया हुआ है। लंबे समय से ओपेक का हिस्सा रहे UAE के इस कदम से सऊदी अरब की लीडरशिप वाले इस ग्रुप की एकता पर बड़ा असर पड़ सकता है। ओपेक देशों के बीच तालमेल की कमी और नाराजगी UAE का यह फैसला उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के प्रति नाराजगी का नतीजा माना जा रहा है। UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गरगाश ने सोमवार को एक फोरम में कहा कि ईरान के हमलों के दौरान अरब और खाड़ी देशों का रुख काफी कमजोर रहा है। गरगाश के मुताबिक, गल्फ कॉरपोरेशन काउंसिल (GCC) के देशों ने एक-दूसरे की लॉजिस्टिक मदद तो की, लेकिन राजनीतिक और सैन्य स्तर पर उनकी भूमिका सबसे कमजोर रही है। उन्होंने कहा कि अरब लीग से तो उन्हें ऐसी ही उम्मीद थी, लेकिन GCC के रुख ने उन्हें हैरान कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत UAE के इस फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रम्प लंबे समय से ओपेक की आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि यह संगठन तेल की कीमतों को जानबूझकर बढ़ाकर पूरी दुनिया को लूट रहा है। ट्रम्प ने कई बार खाड़ी देशों को दी जाने वाली अमेरिकी सैन्य सुरक्षा को तेल की कीमतों से जोड़ा है। उनका कहना है कि अमेरिका इन देशों की रक्षा करता है, जबकि ये देश तेल के दाम बढ़ाकर अमेरिका का शोषण करते हैं। अब UAE के बाहर होने से ओपेक की ताकत कम होगी, जिससे बाजार पर अमेरिका का कंट्रोल बढ़ सकता है। ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज रूट में तनाव का असर ईरान युद्ध की वजह से खाड़ी देशों के लिए तेल का निर्यात करना पहले से ही मुश्किल बना हुआ है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (LNG) ओमान और ईरान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरती है। ईरान की धमकियों और जहाजों पर हमलों की वजह से यह सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस अस्थिरता के बीच UAE का ओपेक से अलग होना तेल बाजार में और ज्यादा अनिश्चितता पैदा कर सकता है। क्या है ओपेक और ओपेक प्लस? ओपेक (OPEC): इसकी स्थापना 1960 में हुई थी। इसमें सऊदी अरब, इराक, ईरान और कुवैत जैसे देश शामिल हैं। इनका मुख्य काम दुनिया में तेल की सप्लाई को कंट्रोल करना है ताकि कीमतें स्थिर रहें। ओपेक प्लस (OPEC+): 2016 में जब तेल की कीमतें बहुत गिर गई थीं, तब ओपेक देशों ने रूस जैसे अन्य बड़े तेल उत्पादकों के साथ मिलकर यह नया गठबंधन बनाया था। बाजार पर कब्जा: दुनिया के कुल तेल उत्पादन का करीब 40% हिस्सा इन्ही देशों के पास है। ये देश जब उत्पादन घटाते हैं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने लगती हैं। भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? अगर ओपेक के सदस्य देश एकजुट नहीं रहते हैं, तो तेल के उत्पादन पर उनका कंट्रोल कमजोर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में अलग-अलग देश अपनी मर्जी से ज्यादा तेल बाजार में उतार सकते हैं, जिससे कीमतों में गिरावट आने की संभावना बढ़ जाती है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में कमी या स्थिरता भारत के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। हालांकि, ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई का खतरा अभी भी बना हुआ है। ये खबर भी पढ़ें… इंडिगो-एअर इंडिया ने कहा- फ्लाइट्स बंद होने की कगार पर:फ्यूल महंगा होने से ऑपरेशन मुश्किल, एक्साइज ड्यूटी और वैट घटाए सरकार मिडिल ईस्ट जंग के चलते देश की एयरलाइंस मुश्किल में हैं। एअर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी बड़ी एयरलाइन कंपनियों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने कहा- एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) महंगा होने से उनका ऑपरेशन कॉस्ट 20% तक बढ़ गया है। FIA ने इस बारे में नागरिक उड्डयन मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी है। इसके मुताबिक घरेलू एयरलाइंस का कामकाज जारी रखना मुश्किल हो गया है। हालात इतने खराब हैं कि कंपनियां ऑपरेशंस रोकने या अपने विमानों को खड़ा करने की कगार पर पहुंच गई हैं। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Trump Assassination Attempt Arrested at White House Dinner

वॉशिंगटन डीसी9 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर में फायरिंग करने वाले हमलावर 31 वर्षीय कोल टॉमस एलन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की हत्या की कोशिश का आरोप लगाया है। डिनर कार्यक्रम में ट्रम्प, फर्स्ट लेडी मेलानिया, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, कैबिनेट सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार मौजूद थे। आरोपी पर राष्ट्रपति की हत्या की कोशिश, हथियारों को राज्य सीमा पार ले जाने, हिंसक अपराध के दौरान गोली चलाने और फेडरल अधिकारियों पर हमला करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। दोषी पाए जाने पर उसे कम से कम 10 साल जेल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी कैलिफोर्निया के टॉरेंस का रहने वाला है। FBI के अनुसार उसने 6 अप्रैल को होटल में कमरा बुक कराया था। वह 21 अप्रैल को लॉस एंजिलिस क्षेत्र से निकला, पहले ट्रेन से शिकागो पहुंचा और फिर वॉशिंगटन आया। जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी शॉटगन, पिस्तौल और कई चाकुओं के साथ सुरक्षा जांच क्षेत्र तक पहुंचा और मेटल डिटेक्टर पार करने की कोशिश की। इसी दौरान गोली चलने की आवाज सुनी गई। वॉशिंगटन डीसी की अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो शनिवार को हुए व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर शूटिंग मामले के आरोपी कोल टोमस एलन के पास मिली शॉटगन की तस्वीर दिखाती हुईं। घटना में एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी घायल हुआ, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट होने से उसकी जान बच गई। अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि चली गोली आरोपी के हथियार से थी या नहीं। FBI ने कहा कि आरोपी ने एक ईमेल भी तैयार किया था, जिसमें प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बताया गया था। हमले के करीब डेढ़ घंटे बाद ट्रम्प ने मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने कहा- अमेरिका के संविधान पर हमला हुआ। सीक्रेट सर्विस ने मेरी जान बचाई। सुरक्षाकर्मियों ने बहादुरी से काम किया। जिस अफसर को गोली लगी, वह सुरक्षित है। उसने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी थी। हमलावर के पास पावरफुल गन थी। डिनर के दौरान फायरिंग करने वाला शख्स कौन BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावर की पहचान 31 साल के कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है। वह अमेरिका के कैलिफोर्निया का है। पब्लिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, एलन पार्ट-टाइम टीचर और वीडियो गेम डेवलपर था। उसकी प्रोफाइल के मुताबिक, वह दिसंबर 2024 में ‘टीचर ऑफ द मंथ’ चुना गया था। उसने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनोलॉजी से 2017 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। पिछले साल कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी डोमिंगुएज हिल्स से कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल की थी। डोनाल्ड ट्रम्प ने हमलवार की तस्वीर सोशल मीडिया ट्रुथ सोशल पर शेयर की। इसका नाम कोल टॉमस एलन बताया जा रहा है। यह कैलिफोर्निया का रहने वाला है। चश्मदीद बोले- तेज धमाके की आवाज सुनी CNN की व्हाइट हाउस चीफ कॉरस्पॉन्डेंट कैटलिन कोलिंस ने बताया, हम हिल्टन के बॉलरूम के अंदर थे। गोलियों की आवाज सुनाई देने के कुछ ही मिनटों के अंदर एजेंटों ने कमरे को घेर लिया और मुख्य गलियारे से दौड़ते हुए अंदर आए। क्योंकि कैबिनेट के अधिकारी पूरे कमरे में अलग-अलग जगहों पर बैठे थे, इसलिए उनमें से कई लोग जमीन पर ही लेटे रहे और जब राष्ट्रपति को मंच से बाहर निकाला जा रहा था, तब तक वे मेजों के नीचे दुबके रहे। व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर सालाना कार्यक्रम है कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर मीडिया और राजनीति का एक एक खास सालाना कार्यक्रम होता है। इसे व्हाइट हाउस कवर करने वाले पत्रकारों का संगठन व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन आयोजित करता है। इसमें राष्ट्रपति खुद पर, अपने विरोधियों पर और मीडिया पर मजाक करते हैं। ट्रम्प पिछले साल इसमें शामिल नहीं हुए थे। वे 2011 में एक गेस्ट के रूप में आए थे। तभी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनका मजाक बनाया था, जिसके बाद ट्रम्प ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का फैसला किया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
US President Trump Blasts Journalist Over Rapist Allegations

वॉशिंगटन डीसी32 मिनट पहले कॉपी लिंक ट्रम्प CBC न्यूज के इंटव्यू देते हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक इंटरव्यू के दौरान महिला पत्रकार पर भड़क गए। यह मामला कोल टॉमस एलेन के मैसेज से जुड़ा था, जिस पर गोलीबारी करने का आरोप है। एलेन ने हमले से 10 मिनट पहले परिवार को एक मैनिफेस्टो (लिखित बयान) भेजा था। इसमें उसने ‘पेडोफाइल, रेपिस्ट और गद्दार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था, लेकिन उसने किसी का नाम सीधेतौर पर नहीं लिया। इसी मामले को लेकर पत्रकार नोरा ओ डोनल ने जब ट्रम्प से पूछा कि क्या ये आरोप उन्हीं की तरफ इशारा करते हैं? इस पर ट्रम्प ने कहा कि वे न तो रेपिस्ट हैं और न ही किसी का रेप किया है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, “तुमने एक बीमार आदमी की बकवास टीवी पर पढ़ दी। मुझे उन चीजों से जोड़ा गया जिनसे मेरा कोई लेना-देना नहीं है। मुझे पहले ही पूरी तरह क्लीन चिट मिल चुकी है।” इस पर नोरा ने साफ किया कि वो उनके अपने शब्द नहीं थे, बल्कि आरोपी ने लिखा था। लेकिन ट्रम्प ने कहा कि ऐसे आरोप टीवी पर पढ़ना ही गलत था। ट्रम्प बोले- गोलीबारी के दौरान डर नहीं लगा इंटरव्यू में जब ट्रम्प से पूछा गया कि क्या वह खुद निशाने पर थे, तो उन्होंने कहा कि उन्हें पक्का नहीं है। ट्रम्प ने आगे कहा कि इस घटना के दौरान उन्हें डर नहीं लगा, क्योंकि दुनिया ऐसी ही है और ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगा था कि यह छोटी घटना है, लेकिन फिर समझ आया कि मामला गंभीर है। उस वक्त एक कलाकार शो कर रहा था और माहौल सामान्य लग रहा था, लेकिन अचानक सब बदल गया। ट्रम्प ने कहा कि सुरक्षा टीम उन्हें तुरंत बाहर ले जाना चाहती थी, लेकिन वह पहले देखना चाहते थे कि क्या हो रहा है। बाद में एजेंट्स ने उन्हें नीचे झुकने को कहा, तो वह और मेलानिया दोनों जमीन पर लेट गए और फिर सुरक्षित जगह ले जाए गए। उन्होंने बताया कि वह आधे रास्ते तक खड़े होकर जा रहे थे, फिर एजेंट्स के कहने पर नीचे झुक गए क्योंकि वहां खतरा ज्यादा था। ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने पहले भी ऐसी स्थितियां देखी हैं, लेकिन मेलानिया के लिए यह नया अनुभव था। फिर भी उन्होंने स्थिति को अच्छे से संभाला। गोलीबारी के दौरान ट्रम्प डिनर कर रहे थे। वह भागने के दौरान गिर गए। ट्रम्प बोले- डेमोक्रेटिक नेताओं के बयानों से हिंसा भड़क रही इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि घटना खराब थी, लेकिन उतनी बड़ी नहीं बनी क्योंकि किसी की मौत नहीं हुई और कोई घायल नहीं हुआ। ऐसी हिंसा कोई नई बात नहीं है। यह 20, 50, 100 या 500 साल से होती आ रही है। लोग मारे जाते हैं, घायल होते हैं। उन्हें नहीं लगता कि आज यह पहले से ज्यादा हो रहा है। उन्होंने राजनीतिक हिंसा भड़काने के लिए डेमोक्रेट नेताओं की “हेट स्पीच” को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि यह बहुत खतरनाक स्थिति है। ट्रम्प सरकार के कई मंत्री हमलावर के निशाने पर थे आरोपी ने अपने लिखे नोट में कहा था कि सरकार के बड़े नेता उसके निशाने पर थे और वह उन्हें एक-एक करके टारगेट करना चाहता था। उसने लिखा कि वह अब किसी “देशद्रोही” के काम में शामिल नहीं होना चाहता। अच्छी बात यह रही कि वह उस हॉल तक नहीं पहुंच पाया, जहां ट्रम्प, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रम्प और बड़े अधिकारी मौजूद थे। सुरक्षा टीम ने समय रहते उसे रोक लिया और ट्रम्प को तुरंत वहां से बाहर ले जाया गया। इस घटना के बाद एक बार फिर ट्रम्प की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं, क्योंकि पहले भी उन पर हमले की कोशिश हो चुकी है। ————————————– वॉशिंगटन डिनर से जुड़ी खबर यहां पढ़ें… वॉशिंगटन में डिनर के दौरान फायरिंग, ट्रम्प को सुरक्षित निकाला:चश्मदीद बोले- 7 राउंड फायरिंग हुई, गेस्ट टेबल के नीचे छिपे; हमलावर पकड़ाया अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में सालाना व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट डिनर के दौरान फायरिंग हो गई। शनिवार शाम के इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पत्नी मेलानिया और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत कई बडे़ अफसर मौजूद थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
ट्रम्प बोले- ईरान के पास बहुत कम वक्त बचा है:3 दिन में सीजफायर की शर्त नहीं मानी तो तेल पाइपलाइन ब्लास्ट हो जाएंगी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को ईरान को चेतावनी दी कि उसके पास सिर्फ तीन दिन हैं कि वह युद्ध खत्म करने के लिए सीजफायर पर सहमत हो जाए, नहीं तो उसकी तेल पाइपलाइन भीतर से फट जाएगी। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान तेल का निर्यात नहीं कर पाता, तो पाइपलाइन में दबाव बढ़ेगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि तेल को जहाजों या स्टोरेज टैंकों में भेजने का रास्ता बंद है और उस पर नाकेबंदी लगी हुई है। उन्होंने दावा किया कि जब तेल का बहाव अचानक रोकना पड़ता है, तो पाइपलाइन के अंदर दबाव बनता है और तकनीकी व प्राकृतिक कारणों से वह फट सकती है। ट्रम्प के मुताबिक, अगर ऐसा हुआ तो पाइपलाइन को पहले जैसी हालत में दोबारा बनाना लगभग नामुमकिन होगा और उसकी क्षमता भी काफी घट जाएगी। ईरान का न्यूक्लियर और होर्मुज पर समझौते से इनकार ईरान ने अमेरिका के साथ समझौते को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उसने कहा है कि न्यूक्लियर कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह संदेश पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया है। ईरान ने इन दोनों मुद्दों को अपनी ‘रेड लाइन’ बताया है और कहा है कि इन पर किसी भी तरह का समझौता संभव नहीं है। साथ ही, यह भी साफ किया कि यह कोई औपचारिक बातचीत नहीं है, बल्कि अपनी स्थिति साफ करने की एक कूटनीतिक पहल है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस पूरे मामले में तय सीमाओं के भीतर रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
White House Shooting | Trump Safe, VIPs Evacuated, Attacker Neutralized

वाशिंगटन2 मिनट पहले कॉपी लिंक व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान फायरिंग की घटना सामने आई, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को तुरंत सुरक्षित बाहर ले जाया गया। जिसके बाद हमलावार को तुरंत ही मार गिराया गया। सीक्रेट सर्विस के निर्देश पर कार्यक्रम में मौजूद मेहमानों को टेबल के नीचे झुकने को कहा गया, जबकि ट्रम्प, फर्स्ट लेडी और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत अन्य VIP को हॉल से बाहर निकाला गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारी हथियारों से लैस सुरक्षा कर्मी तुरंत स्टेज पर पहुंच गए और पूरे कार्यक्रम स्थल को सुरक्षित किया गया। फायरिंग की घटना डिनर हॉल के ऊपर स्थित लॉबी एरिया में हुई बताई जा रही है, जहां से तुरंत सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो समेत कई कैबिनेट सदस्य और वरिष्ठ सांसदों को तेजी से बाहर निकाला गया, हालांकि ज्यादातर मेहमान अभी भी हॉल के अंदर मौजूद थे। घटना के बाद कई लोग बाहर निकलते नजर आए, लेकिन स्टेज से यह घोषणा की गई कि “कार्यक्रम जल्द ही फिर शुरू होगा।” हालांकि यह साफ नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रम्प वापस कार्यक्रम में शामिल होंगे या नहीं। यह ट्रम्प का राष्ट्रपति बनने के बाद इस डिनर में पहला मौका था। वह घटना से कुछ मिनट पहले ही पहुंचे थे और फर्स्ट लेडी के साथ बातचीत कर रहे थे। उसी दौरान मंच पर मौजूद मेंटलिस्ट उनके साथ इंटरैक्शन कर रहे थे। (खबर लगातार अपडेट हो रही है…) दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Trump Cancels Pakistan Visit; Iran Decision-Maker Unclear

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी15 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान में फैसले कौन ले रहा है, यह साफ नहीं है। उन्होंने ईरान से बातचीत के लिए पाकिस्तान जाने वाले अपने दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर का दौरा रद्द कर दिया। ट्रम्प ने कहा कि 18 घंटे की लंबी यात्रा का कोई फायदा नहीं था और इसमें समय बर्बाद हो रहा था। ट्रम्प ने यह भी साफ किया कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ईरान के साथ फिर से जंग शुरू करेगा। उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। ट्रम्प ने दावा किया कि मौजूदा हालात में अमेरिका मजबूत स्थिति में है और “हमारे पास सारे पत्ते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है, तो वह खुद अमेरिका से संपर्क कर सकता है। दूसरी तरफ ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शनिवार को अमेरिकी अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही पाकिस्तान से रवाना हो गए। उन्होंने PAK पीएम और आर्मी चीफ से मुलाकात कर ईरान की शर्तें और अमेरिकी मांगों पर अपनी आपत्तियां भी सौंपी। अराघची के इस्लामाबाद दौरे का वीडियो… पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स ईरानी विदेश मंत्री बोले- पाकिस्तान दौरा काफी उपयोगी रहाअब्बास अराघची ने पाकिस्तान दौरे को काफी उपयोगी बताया। उन्होंने शांति बहाल करने के लिए पाकिस्तान की कोशिशों की तारीफ की। जर्मनी होर्मुज स्ट्रेट मिशन में शामिल होगाजर्मनी ने कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद वह होर्मुज स्ट्रेट से माइंस हटाने के अंतरराष्ट्रीय मिशन में हिस्सा लेगा। इजराइल ने हिजबुल्लाह का संदिग्ध ड्रोन मार गिरायाइजराइल ने वेस्टर्न गलीली इलाके में एयर डिफेंस सिस्टम से ड्रोन को नष्ट किया गया। इसे सीजफायर उल्लंघन बताया गया। मिनाब स्कूल हमले पर AI वीडियो जारीईरान ने 28 फरवरी को मिनाब स्कूल हमले में मारी गई एक छात्रा का AI वीडियो जारी किया। इसे फातिमा की कहानी नाम दिया। जंग के बाद हज यात्रियों का पहला जत्था मदीना पहुंचाईरान से हज यात्रियों का पहला जत्था सऊदी अरब पहुंचा। इसे दोनों देशों के संबंधों के सामान्य होने के तौर पर देखा जा रहा है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए… लाइव अपडेट्स 15 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान के विदेश मंत्री की मिस्र और तुर्किये से बातचीत ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने मिस्र और तुर्किये के काउंटरपार्ट्स से फोन पर बातचीत की है। अल जजीरा के मुताबिक, अराघची और मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअत्ती के बीच सीजफायर, कूटनीतिक प्रयासों और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई। इसके अलावा, अराघची ने तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान से भी बातचीत की, हालांकि इस कॉल की ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई। तुर्किये की रिपोर्ट के अनुसार, फिदान और अराघची के बीच अमेरिका-ईरान वार्ता की मौजूदा स्थिति पर फोकस रहा। 01:09 AM26 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक व्हाइट हाउस डिनर के दौरान फायरिंग, ट्रम्प सुरक्षित निकले व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान फायरिंग की घटना सामने आई, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को तुरंत सुरक्षित बाहर ले जाया गया। सीक्रेट सर्विस के निर्देश पर कार्यक्रम में मौजूद मेहमानों को टेबल के नीचे झुकने को कहा गया, जबकि ट्रम्प, फर्स्ट लेडी और उपराष्ट्रपति समेत अन्य VIP को हॉल से बाहर निकाला गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारी हथियारों से लैस सुरक्षा कर्मी तुरंत स्टेज पर पहुंच गए और पूरे कार्यक्रम स्थल को सुरक्षित किया गया। पूरी खबर पढ़ें… 12:47 AM26 अप्रैल 2026 कॉपी लिंक ओमान दौरे के बाद ईरानी विदेश मंत्री फिर जाएंगे पाकिस्तान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची एक बार फिर पाकिस्तान का दौरा करेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, वह ओमान यात्रा के बाद रूस जाते समय इस्लामाबाद लौटेंगे, जहां युद्ध खत्म करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। ईरान की IRNA न्यूज एजेंसी के अनुसार, अराघची रविवार को पाकिस्तान पहुंच सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अराघची के प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य पहले ही तेहरान लौट गए हैं, जहां वे युद्ध खत्म करने से जुड़े मुद्दों पर परामर्श और निर्देश ले रहे हैं। ये सदस्य बाद में दोबारा इस्लामाबाद में अराघची के साथ जुड़ेंगे, ताकि आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और शांति वार्ता को लेकर कोशिशें जारी हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Argentina May Back Falklands Claim Amid UK-US Tensions

3 मिनट पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन और स्पेन ने NATO से जुड़ी एक अमेरिकी रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। इसमें कहा गया था कि ट्रम्प सरकार इन दोनों देशों को सजा देने पर विचार कर रही हैं। इसकी वजह ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका का खुलकर साथ नहीं देना है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा मंत्री यानी पेंटागन के भीतर अधिकारियों के बीच एक ईमेल के जरिए बातचीत हुई, जिसमें अलग-अलग संभावित कदमों (ऑप्शन्स) पर विचार किया जा रहा था। जैसे कि विरोधी माने जा रहे देशों को NATO के अहम पदों से हटाना, स्पेन जैसे देश को गठबंधन में उसकी भूमिका को सीमित करना और ब्रिटेन के फॉकलैंड द्वीप पर दावे को लेकर अमेरिका की नीति की समीक्षा करना। हालांकि पेंटागन ने इस ईमेल पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी और यह ईमेल सार्वजनिक रूप से भी सामने नहीं आया है। ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 2025 में गाजा सम्मेलन के दौरान। शुरूआत में ब्रिटेन ने एयरबेस देने से इनकार किया था ईरान पर हमलों के दौरान ट्रम्प और स्टार्मर के बीच तनाव देखने को मिला था। शुरुआत में ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी। बाद में ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद ब्रिटेन ने कुछ एयरबेस इस्तेमाल करने की इजाजत दी, ताकि होर्मुज या ब्रिटिश ठिकानों को खतरा पैदा करने वाले ईरानी ठिकानों पर हमला किया जा सके। हालांकि फिर ट्रम्प इससे खुश नहीं हुए। दूसरी तरफ अर्जेंटीना में इस खबर को लेकर खुशी का माहौल है। सरकार के प्रवक्ता जेवियर लानारी ने कहा कि उनका देश ‘माल्विनास’ को वापस पाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ट्रम्प के करीबी माने जाते हैं। मिलेई ने भी कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। फॉकलैंड को लेकर अर्जेंटीना और ब्रिटेन में विवाद फॉकलैंड द्वीप का मामला ब्रिटेन और अर्जेंटीना दोनों के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है। दोनों देश इस पर दावा करते हैं। अर्जेंटीना इस द्वीप को माल्विनास कहता है। फॉकलैंड दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित हैं और अर्जेंटीना से सिर्फ 500 किमी दूर है। वहीं ब्रिटेन से यह 13,000 किमी दूर स्थित है। अर्जेंटीना ऐतिहासिक रूप से इस द्वीप को अपना बताता आया है। अर्जेंटीना का कहना है कि ये द्वीप उसके पास होने चाहिए, क्योंकि ये उसके इलाके के करीब हैं। वहीं ब्रिटेन कहता है कि वहां रहने वाले लोग खुद को ब्रिटिश मानते हैं और उन्होंने वोट करके भी ब्रिटेन के साथ रहने की इच्छा जताई है, इसलिए यह उसका क्षेत्र है। 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ब्रिटेन की तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने सेना भेजकर सिर्फ 10 हफ्ते में इन्हें वापस हासिल किया था। अर्जेंटीना के आत्मसमर्पण करने से पहले लगभग 650 अर्जेंटीनाई सैनिक और 255 ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे। फॉकलैंड नीति की समीक्षा कर सकता है अमेरिका अब लीक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, फॉकलैंड द्वीप को लेकर अमेरिका की नीति की समीक्षा कर सकता है। दरअसल, जब 1982 में फॉकलैंड युद्ध शुरू हुआ तब अमेरिका ने खुद को बीच में रखने की कोशिश की। अमेरिका चाहता था कि ब्रिटेन और अर्जेंटीना आपस में बात करके मामला सुलझाएं, क्योंकि दोनों ही उसके सहयोगी थे। लेकिन जब बातचीत से हल नहीं निकला, तो अमेरिका ब्रिटेन के पक्ष में आ गया। अमेरिका ने ब्रिटेन को खुफिया जानकारी, सैन्य सपोर्ट और लॉजिस्टिक मदद दी। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन थे और उन्होंने ब्रिटेन की प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर का साथ दिया। अमेरिका आधिकारिक तौर पर साफ-साफ नहीं कहता कि फॉकलैंड किसका है, लेकिन व्यवहार में वह ब्रिटेन के बहुत करीब है और उसे अपना अहम सहयोगी मानता है। हाल के समय में ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका, ब्रिटेन पर दबाव डालने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर सकता है। स्पेन बोला- ईमेल के आधार पर फैसले नहीं लेते वहीं, स्पेन ने भी अमेरिका के रुख का विरोध किया है। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने कहा कि वे किसी ईमेल के आधार पर काम नहीं करते, बल्कि आधिकारिक दस्तावेजों और नीतियों के आधार पर फैसले लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्पेन अपने सहयोगियों के साथ रहेगा, लेकिन हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में। NATO के एक अधिकारी ने भी कहा कि संगठन के नियमों में किसी सदस्य देश को सस्पेंड या बाहर करने का प्रावधान ही नहीं है, इसलिए स्पेन को हटाना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं लगता। —————————— यह खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन ने अमेरिका को एयरबेस देने से इनकार किया:फैसले से डोनाल्ड ट्रम्प नाराज, रिपोर्ट- US एयरबेस से ईरान पर हमला करना चाहता है ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए अपने एयरबेस देने से मना कर दिया है। अमेरिका इन सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करना चाहता था, लेकिन ब्रिटेन ने इनकार कर दिया। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नाराज हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के उस समझौते से समर्थन वापस ले लिया है, जिसमें चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने की बात थी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
ट्रम्प के ऐलान से पहले दांव लगाकर करोड़ों कमाए:इनसाइडर ट्रेडिंग का शक गहराया, निवेशकों का भरोसा हिला

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान एक दिलचस्प और विवादित ट्रेंड देखने को मिला है। कई ट्रेडर्स (शेयर बाजार में दांव लगाने वाले लोग) बड़े ऐलान से ठीक पहले करोड़ों डॉलर के दांव लगाते दिखे हैं। BBC ने अलग-अलग फाइनेंशियल मार्केट के ट्रेड डेटा का विश्लेषण किया और उसे ट्रम्प के बड़े बयानों और घोषणाओं के समय से मिलाया। इसमें एक पैटर्न सामने आया कि कई बार उनके बयान आने से कुछ घंटे या मिनट पहले ही ट्रेडिंग में अचानक तेज उछाल दिखा। कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि यह इनसाइडर ट्रेडिंग का मामला हो सकता है। यानी सूचनाएं पहले ही लीक हो रही थीं, जिससे आम निवेशकों के भरोसे के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं कुछ दूसरे एक्सपर्ट्स कहते हैं कि मामला इतना सीधा नहीं है। कुछ ट्रेडर्स अब ट्रम्प के फैसलों और बयानों को पहले से भांपने में माहिर हो गए हैं। नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने पिछले महीने आरोप लगाया था कि ट्रम्प के करीबी लोगों ने अंदरूनी जानकारी का फायदा उठाकर क्रूड ऑयल मार्केट में करोड़ों डॉलर का खेल खेला है। इन 5 उदाहरणों से समझें कैसे कुछ चुनिंदा लोगों ने की कमाई… 28 फरवरी 2026: ईरान पर हमले के बाद 6 नए अकाउंट ब्लॉकचेन विश्लेषण साइट ‘बबलमैप्स’ ने खुलासा किया कि फरवरी में अचानक 6 नए अकाउंट बने। दांव: इन सभी अकाउंट्स ने 28 फरवरी तक ईरान पर अमेरिकी हमला होने के पक्ष में भारी पैसा लगाया। नतीजा: जैसे ही ट्रम्प ने हमले की पुष्टि की, इन अकाउंट्स ने कुल 9.9 करोड़ (12 लाख डॉलर) कमाए। पैटर्न: इनमें से 5 अकाउंट्स ने इसके बाद कभी कोई दांव नहीं लगाया। एक अन्य अकाउंट ने बाद में युद्धविराम की सही भविष्यवाणी करके 1.35 करोड़ रुपए और कमाए। 3 जनवरी 2026: मादुरो पर अनुमान पर अकाउंट बना, कमाई के बाद बंद ऑनलाइन प्रेडिक्शन मार्केट (जैसे पॉलीमार्केट और कलसी) भी संदेह के घेरे में आए। डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर इन मंचों से जुड़े हैं। दिसंबर 2025 में ‘बर्डनसम-मिक्स’ नाम का एक नया अकाउंट बना। 30 दिसंबर से 2 जनवरी के बीच, इस अकाउंट ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पद छोड़ने पर कुल 32,500 डॉलर लगाए। 3 जनवरी को मादुरो को पद से हटा दिया गया। उस अकाउंट ने 4.36 लाख डॉलर (करीब 4 करोड़ रुपए) जीते और तुरंत अपना यूजरनेम बदलकर अनएक्टिव हो गया। इसी वजह से लोगों को शक है कि शायद उसे पहले से अंदर की जानकारी थी। 23 मार्च 2026: 14 मिनट के खेल में 250 करोड़ से ज्यादा का मुनाफा ट्रम्प ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट तेहरान के साथ समस्या हल करने की घोषणा की। पोस्ट के तुरंत बाद शेयर बाजार में उछाल आया और अमेरिकी तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। संदिग्ध गतिविधि: ट्रम्प के पोस्ट से 14 मिनट पहले तेल की कीमतें गिरने पर बड़े दांव लगाए गए थे। इसे ‘शॉर्ट सेलिंग’ कहते हैं, जिसमें ट्रेडर्स ऊंची कीमत पर तेल बेचने का सौदा कर लेते हैं और दाम गिरते ही उसे सस्ते में खरीदकर मुनाफा कमाते हैं। प्रति बैरल 15 डॉलर की गिरावट से उस संदिग्ध समय में किसी को अनुमानित 250 करोड़ रुपए से ज्यादा का मुनाफा हुआ। टाइमलाइन: 9 मार्च 2026: तेल में 47 मिनट पहले दांव लगा मुनाफा कमाया ईरान युद्ध के 9वें दिन ट्रम्प ने इंटरव्यू में संघर्ष खत्म होने का दावा किया। खबर रात 7:16 बजे सोशल मीडिया पर आई, जिससे तेल की कीमतें 25% गिर गईं। लेकिन संदिग्ध ट्रेडिंग 47 मिनट पहले (6:29 बजे) ही शुरू हो गई थी। ‘शॉर्ट सेलिंग’ के जरिए 4,000 कॉन्ट्रैक्ट्स पर दांव लगाकर कुछ निवेशकों ने करीब 460 करोड़ का भारी मुनाफा कमाया, जो इनसाइडर ट्रेडिंग का संकेत है। टाइमलाइन: 2 अप्रैल 2025: टैरिफ पर 90 दिन की रोक, ट्रेडिंग में 30 गुना तक उछाल ट्रम्प ने वैश्विक आयात पर भारी टैरिफ लगाए, लेकिन एक हफ्ते बाद अचानक चीन को छोड़कर अन्य देशों को 90 दिनों की राहत दे दी। इस ऐलान से बाजार में सुनामी आई और एसएंडपी 500 इंडेक्स 9.5% उछला, जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी बढ़त थी। संदिग्ध रूप से शाम 6:00 बजे ट्रेडिंग रफ्तार अचानक 10,000 कॉन्ट्रैक्ट प्रति मिनट पार कर गई। 16.5 करोड़ का दांव लगाकर कुछ ट्रेडर्स ने 165 करोड़ का मुनाफा कमाया। सांसदों ने इसकी जांच की मांग की। टाइमलाइन: अमेरिका में 93 साल से इनसाइडर ट्रेडिंग गैरकानूनी इनसाइडर ट्रेडिंग इसलिए गैरकानूनी मानी जाती है क्योंकि इसमें कुछ लोगों को ऐसी गोपनीय जानकारी मिल जाती है जो आम निवेशकों को नहीं पता होती। इसी जानकारी के आधार पर वे पहले ही पैसा लगा देते हैं और बाद में बड़ा मुनाफा कमा लेते हैं। इससे बाजार में बराबरी खत्म हो जाती है और आम लोगों का भरोसा टूटता है। अमेरिका में 1933 से इनसाइडर ट्रेडिंग गैरकानूनी है। 2012 में नियम और सख्त किए गए और सरकारी अधिकारी, सांसद और उनके स्टाफ भी इस कानून के दायरे में आ गए। यानी अगर किसी नेता या सरकारी व्यक्ति को अंदर की जानकारी मिलती है, तो वह उसका इस्तेमाल करके ट्रेड नहीं कर सकता। लेकिन असली समस्या यह है कि ऐसे मामलों में सजा दिलाना बहुत मुश्किल होता है। कानून के तहत यह साबित करना जरूरी होता है कि जानकारी सच में गोपनीय थी, उसे जानबूझकर लीक किया गया था, और जिसने ट्रेड किया उसे वही अंदर की जानकारी मिली थी। अगर यह पूरी कड़ी साबित नहीं होती, तो केस आगे नहीं बढ़ता। इएसएसईसी बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर पॉल ओडिन का कहना है कि कई बार ट्रेडिंग का पैटर्न देखकर साफ लगता है कि किसी को पहले से जानकारी थी, जैसे बड़े ऐलान से ठीक पहले अचानक भारी दांव लगना। लेकिन जब तक यह पता न चले कि जानकारी कहां से आई और किसने दी, तब तक कानूनी कार्रवाई करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।








