Nifty GDP Data & Trump Tariffs Watch; 25,900 Crucial for Markets

मुंबई1 घंटे पहले कॉपी लिंक भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता उतार-चढ़ाव भरा रहा। अब सोमवार 23 फरवरी से शुरू हो रहे नए कारोबारी हफ्ते में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ से लेकर भारत के जीडीपी जैसे आर्थिक आंकड़ों तक, कई ऐसी चीजें हैं जो निवेशकों की जेब पर असर डालेंगी। चलिए समझते हैं कि इस हफ्ते बाजार में क्या हो सकता है… एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि ट्रम्प के फैसलों से भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए शॉर्ट-टर्म में अनिश्चितता पैदा हो गई है। निफ्टी के लिए 25,500–25,600 के लेवल को सपोर्ट बताया, जबकि ऊपर की ओर 25,700 से 25,900 के बीच रेजिस्टेंस दिख रहा है। रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा ने कहा कि निफ्टी के लिए 25,400 का लेवल बहुत अहम सपोर्ट है और 25,800–26,000 का जोन मुख्य रेजिस्टेंस बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर निफ्टी 25,400 के नीचे गिरता है, तो यह 25,100 के लेवल तक जा सकता है। अब 3 फैक्टर्स जो बाजार की दिशा तय करने में अहम होंगे… 1. ट्रम्प के नए टैरिफ और अमेरिका-भारत ट्रेड डील अमेरिका की टैरिफ से जुड़ी घोषणाओं पर पूरी दुनिया की नजर है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को ट्रम्प के दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था। इस फैसले के बाद ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही। फिर एक दिन बाद 21 फरवरी को ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया। बार-बार टैरिफ को लेकर किए जा रहे इस बदलाव से दुनियाभर में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसी बीच भारतीय अधिकारी एक ट्रेड डील को फाइनल करने के लिए अमेरिका जा रहे हैं। इस डील से जुड़ी कोई भी पॉजिटिव खबर बाजार के लिए बूस्टर का काम कर सकती है। 2. शुक्रवार को आएंगे भारत के GDP के आंकड़े सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) 27 फरवरी को नई सीरीज के आधार पर GDP के अनुमान जारी करेगा। इसके अलावा सरकार के बजट आंकड़े, विदेशी मुद्रा भंडार और इंफ्रास्ट्रक्चर आउटपुट के आंकड़े भी इसी हफ्ते आएंगे। ये आंकड़े बताएंगे कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार कैसी है। 3. F&O एक्सपायरी से बढ़ेगी अस्थिरता फरवरी महीने की मंथली F&O एक्सपायरी 24 फरवरी को है। आमतौर पर एक्सपायरी वाले हफ्ते में बाजार में काफी उठापटक देखने को मिलती है। ट्रेडर अपनी पुरानी पोजीशन को सेटल करते हैं या अगली सीरीज में ले जाते हैं, जिससे मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है। 4. अमेरिकी बाजार घरेलू बाजार की चाल अमेरिकी शेयर बाजार से भी प्रभावित होती है। शुक्रवार को डाओ जोंस 0.17% गिरकर 49,359 पर बंद हुआ। वहीं, S&P 500 में 0.06% गिरकर 6,940 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट भी मामूली 14.63 अंक (0.06%) फिसलकर 23,515 पर आ गया। 5. FII/DII की एक्टिविटी शुक्रवार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से 934 करोड़ रुपए निकाले। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 2,637.15 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की। हालांकि फरवरी में अब तक FII का निवेश पॉजिटिव रहा है। शुक्रवार को 316 अंक चढ़कर बंद हुआ था सेंसेक्स पिछले पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 0.2% चढ़ा। वहीं शुक्रवार को यह 316 अंक यानी 0.38% चढ़कर 82,814 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 इस हफ्ते 0.4% मजबूत हुआ। शुक्रवार को इसमें 117 अंक यानी 0.46% की तेजी आई और यह 25,571 पर बंद हुआ। डिस्क्लेमर: ये लेख सिर्फ जानकारी और सीखने के लिए है। ऊपर दी गई राय और सलाह व्यक्तिगत विश्लेषकों या ब्रोकिंग कंपनियों की हैं, न कि दैनिक भास्कर की। हम निवेशकों को सलाह देते हैं कि कोई भी निवेश फैसला लेने से पहले सर्टिफाइड विशेषज्ञों से सलाह जरूर लें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
World News Updates; Trump Pakistan China

46 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में हिंदू सबसे ज्यादा शिक्षित धार्मिक समुदाय हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की 2023-24 रिलिजियस लैंडस्केप स्टडी (RLS) के मुताबिक 70% हिंदुओं के पास बैचलर या उससे अधिक की डिग्री है। इस अध्ययन के अनुसार, हिंदुओं के बाद 65 प्रतिशत यहूदियों के पास बैचलर डिग्री या उससे ऊंची शिक्षा है। यह आंकड़ा पूरे अमेरिका के वयस्कों के औसत से काफी अधिक है, जहां सिर्फ 35 प्रतिशत लोगों के पास बैचलर डिग्री या उससे ऊपर की पढ़ाई है। रिपोर्ट 19 फरवरी को सार्वजनिक की गई थी। अन्य धार्मिक समूहों में भी औसत से ज्यादा शिक्षा स्तर देखा गया है। मुस्लिम, बौद्ध और ऑर्थोडॉक्स ईसाई समुदायों में 40 प्रतिशत से अधिक वयस्कों के पास कम से कम बैचलर डिग्री है। मेनलाइन प्रोटेस्टेंट ईसाई भी राष्ट्रीय औसत से ऊपर हैं। वहीं, इवैंजेलिकल प्रोटेस्टेंट, कैथोलिक और ऐतिहासिक रूप से ब्लैक प्रोटेस्टेंट चर्चों के सदस्यों में कॉलेज ग्रेजुएट्स का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से कम है। यह सर्वेक्षण 17 जुलाई 2023 से 4 मार्च 2024 तक चला, जिसमें कुल 36,908 अमेरिकी वयस्कों ने हिस्सा लिया। यह अध्ययन अमेरिका में धर्म, शिक्षा और सामाजिक जीवन के बीच संबंधों को समझने में महत्वपूर्ण है। प्यू के मुताबिक इन शैक्षिक अंतर की बड़ी वजह इमिग्रेशन और जनसांख्यिकीय पैटर्न हैं। हिंदू, मुस्लिम और बौद्ध समुदाय के कई लोग उच्च शिक्षा या स्किल्ड वर्कर कार्यक्रमों के जरिए अमेरिका पहुंचे, जिससे इन समुदायों में उच्च शिक्षित आबादी का अनुपात अधिक है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, 16 मौतें: सभी एक परिवार के; PAK बोला- TTP के 7 कैंपों को निशाना बनाया पाकिस्तान की सेना ने रविवार तड़के अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की। अल-जजीरा के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट से जुड़े सात कैंपों और ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान सरकार ने इसे हालिया आत्मघाती हमलों के बाद जवाबी अटैक बताया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि यह इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन था। पाकिस्तान ने कहा, ‘हमारे पास पुख्ता सबूत हैं कि हमले अफगानिस्तान की जमीन से चल रहे नेटवर्क ने कराए।’ अफगानिस्तानी मीडिया टोलो न्यूज के मुताबिक हमले में नांगरहार के एक घर को निशाना बनाया, जिससे एक ही परिवार के 23 लोग मलबे के नीचे दब गए। अब तक सिर्फ चार लोगों को निकाला जा सका है। हमले के समय परिवार सो रहा था, इसलिए उन्हें भागने का मौका ही नहीं मिला। पूरी खबर पढ़ें… ट्रम्प ने 24 घंटे में ग्लोबल टैरिफ बढ़ाकर 15% किया: कल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ रद्द किए, फिर नाराज ट्रम्प ने 10% टैरिफ लगाया था अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है। उन्होंने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही थी। दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रम्प के दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रम्प को IEEPA कानून का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है। इससे नाराज होकर ट्रम्प ने दुनियाभर के देशों पर नए कानून (सेक्शन-122) का इस्तेमाल कर 10% टैरिफ लगा दिया था। इस कानून के तहत अधिकतम 15% टैरिफ ही लगाया जा सकता है। हालांकि यह टैरिफ सिर्फ 150 दिन के लिए ही लागू रहेगा। अगर इसे आगे बढ़ाना है तो कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Toll Plazas Cashless April 1; Trump Raises Tariffs

नई दिल्ली19 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर टैरिफ से जुड़ी रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है। उन्होंने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही थी। वहीं, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) देश के टोल प्लाजा को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी कर रही है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे के सभी टोल प्लाजा पर कैश ट्रांजेक्शन को पूरी तरह बंद किया जा सकता है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… आज रविवार को शेयर बाजार बंद रहेगा। पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% किया: 24 घंटे में दो बार नए टैरिफ लगाए, सुप्रीम कोर्ट ने पुराने टैरिफ रद्द किए थे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है। उन्होंने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही थी। दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रम्प के दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रम्प को IEEPA कानून का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. 1 अप्रैल से कैश में टोल नहीं दे पाएंगे: फास्टैग या UPI से ही होगा पेमेंट, नकद लेनदेन पूरी तरह बंद करने की तैयारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) देश के टोल प्लाजा को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी कर रही है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे के सभी टोल प्लाजा पर कैश ट्रांजेक्शन को पूरी तरह बंद किया जा सकता है। इसके बाद टोल का भुगतान केवल फास्टैग (FASTag) या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ही हो सकेगा। NHAI का उद्देश्य टोल ऑपरेशन को ज्यादा पारदर्शी और सही बनाना है। अभी देश के 1,150 से ज्यादा टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम लागू है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. फोन-पे से बिना पिन डाले होंगे UPI पेमेंट:फिंगरप्रिंट और फेस आईडी से कर सकेंगे ₹5000 तक का भुगतान, जानें इसे एक्टिवेट करने की प्रोसेस डिजिटल पेमेंट दिग्गज फोन-पे (PhonePe) ने अपने यूजर्स के लिए एक खास फीचर लॉन्च किया है। अब यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन करने के लिए बार-बार 4 या 6 अंकों का पिन (PIN) डालने की जरूरत नहीं होगी। यूजर्स अपने स्मार्टफोन के बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन यानी फिंगरप्रिंट या फेस आईडी का इस्तेमाल करके सीधे भुगतान कर सकेंगे। फोन-पे ने बताया कि इस फीचर का मकसद पेमेंट को पहले से ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाना है। फिलहाल यह सुविधा एंड्रॉयड यूजर्स के लिए शुरू की गई है, जिसे जल्द ही आईफोन (iOS) यूजर्स के लिए भी रोलआउट किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. इस हफ्ते सोने-चांदी में बढ़त रही: सोना ₹2,300 बढ़कर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम हुआ, चांदी ₹8,000 महंगी हुई इस हफ्ते सोने-चांदी के दाम में बढ़त रही। सोना 2,300 रुपए बढ़कर 1.55 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 13 फरवरी, शुक्रवार को 1,53 लाख रुपए पर था। वहीं चांदी 2.42 लाख किलो से बढ़कर 2.50 लाख रुपए पर पहुंच गई है। यानी इसकी कीमत 8,000 रुपए बढ़ी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… कल दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल बाजार बंद था तो शुक्रवार के शेयर मार्केट और सोना-चांदी का हाल जानिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जानिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Toll Plazas Cashless April 1; Trump Raises Tariffs

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर टैरिफ से जुड़ी रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है। उन्होंने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही थी। वहीं, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) देश के टोल प्लाजा को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी कर रही है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे के सभी टोल प्लाजा पर कैश ट्रांजेक्शन को पूरी तरह बंद किया जा सकता है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… आज रविवार को शेयर बाजार बंद रहेगा। पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% किया: 24 घंटे में दो बार नए टैरिफ लगाए, सुप्रीम कोर्ट ने पुराने टैरिफ रद्द किए थे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है। उन्होंने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही थी। दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रम्प के दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रम्प को IEEPA कानून का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. 1 अप्रैल से कैश में टोल नहीं दे पाएंगे: फास्टैग या UPI से ही होगा पेमेंट, नकद लेनदेन पूरी तरह बंद करने की तैयारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) देश के टोल प्लाजा को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी कर रही है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे के सभी टोल प्लाजा पर कैश ट्रांजेक्शन को पूरी तरह बंद किया जा सकता है। इसके बाद टोल का भुगतान केवल फास्टैग (FASTag) या UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से ही हो सकेगा। NHAI का उद्देश्य टोल ऑपरेशन को ज्यादा पारदर्शी और सही बनाना है। अभी देश के 1,150 से ज्यादा टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम लागू है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. फोन-पे से बिना पिन डाले होंगे UPI पेमेंट:फिंगरप्रिंट और फेस आईडी से कर सकेंगे ₹5000 तक का भुगतान, जानें इसे एक्टिवेट करने की प्रोसेस डिजिटल पेमेंट दिग्गज फोन-पे (PhonePe) ने अपने यूजर्स के लिए एक खास फीचर लॉन्च किया है। अब यूपीआई (UPI) ट्रांजेक्शन करने के लिए बार-बार 4 या 6 अंकों का पिन (PIN) डालने की जरूरत नहीं होगी। यूजर्स अपने स्मार्टफोन के बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन यानी फिंगरप्रिंट या फेस आईडी का इस्तेमाल करके सीधे भुगतान कर सकेंगे। फोन-पे ने बताया कि इस फीचर का मकसद पेमेंट को पहले से ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाना है। फिलहाल यह सुविधा एंड्रॉयड यूजर्स के लिए शुरू की गई है, जिसे जल्द ही आईफोन (iOS) यूजर्स के लिए भी रोलआउट किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. इस हफ्ते सोने-चांदी में बढ़त रही: सोना ₹2,300 बढ़कर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम हुआ, चांदी ₹8,000 महंगी हुई इस हफ्ते सोने-चांदी के दाम में बढ़त रही। सोना 2,300 रुपए बढ़कर 1.55 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 13 फरवरी, शुक्रवार को 1,53 लाख रुपए पर था। वहीं चांदी 2.42 लाख किलो से बढ़कर 2.50 लाख रुपए पर पहुंच गई है। यानी इसकी कीमत 8,000 रुपए बढ़ी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… कल दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल बाजार बंद था तो शुक्रवार के शेयर मार्केट और सोना-चांदी का हाल जानिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जानिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Trump Tariffs Cancelled by Supreme Court; 10% Hike Announced

वॉशिंगटन डीसी1 घंटे पहले कॉपी लिंक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% करने का ऐलान किया है। उन्होंने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इससे पहले ट्रम्प ने शुक्रवार रात प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी देशों पर 10% टैरिफ लगाने की बात कही थी। दरअसल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रम्प के दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रम्प को IEEPA कानून का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है। इससे नाराज होकर ट्रम्प ने दुनियाभर के देशों पर नए कानून (सेक्शन-122) का इस्तेमाल कर 10% टैरिफ लगा दिया था। इस कानून के तहत अधिकतम 15% टैरिफ ही लगाया जा सकता है।हालांकि यह टैरिफ सिर्फ 150 दिन के लिए ही लागू रहेगा। अगर इन्हें आगे बढ़ाना है तो कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी। 24 फरवरी से लागू होगा 15% टैरिफ ट्रम्प ने एक आदेश पर हस्ताक्षर कर दुनियाभर के देशों पर नया टैरिफ लगाया है। यह 15% टैरिफ 24 फरवरी से लागू हो जाएगा। इससे पहले उन्होंने कल टैरिफ को अवैध बताने वाले जजों की भी आलोचना की। ट्रम्प ने कहा- मुझे कोर्ट के कुछ जजों पर शर्म आ रही है। वे देश के लिए कलंक हैं, उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है। भारत के साथ ट्रेड डील पर ट्रम्प ने कहा कि, इस डील में कोई बदलाव नहीं होगा। पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं। ट्रम्प ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ट्रम्प के प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 अहम बातें… सुप्रीम कोर्ट के रद्द किए गए टैरिफ लागू करने के लिए मुझे संसद की जरूरत नहीं है। मैं इन्हें राष्ट्रपति के मिले अधिकारों के जरिए लागू कर सकता हूं। सुप्रीम कोर्ट में रिफंड को लेकर कोई साफ बात नहीं कही गई है। इसलिए अमेरिकी सरकार किसी भी कंपनी को टैरिफ के रूप में वसूला गया पैसा वापस नहीं करेगी। जज ने बहुत ही घटिया फैसला सुनाया है। मुझे लगता है कि अब इस मामले पर अगले दो साल तक कोर्ट में मुकदमा चलेगा। हम अगले 5 साल तक कोर्ट में ही रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विदेशी ताकतों का असर पड़ा है। अगर टैरिफ नहीं लगाए गए, तो विदेशी देश कुछ उद्योगों में अमेरिका से आगे निकलते रहेंगे। टैरिफ लगाने का यह कदम कई साल पहले के राष्ट्रपतियों को उठा लेना चाहिए था। उन्होंने हमारे देश को कमजोर होने दिया और दूसरे देशों को फायदा उठाने दिया। सेक्शन 122 के जरिए नया टैरिफ लगाएंगे ट्रम्प सेक्शन 122 अमेरिका के एक कानून का हिस्सा है, जिसे ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 कहा जाता है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे तुरंत आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं। इसके तहत राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अस्थायी तौर पर टैरिफ लगा सकते हैं। आमतौर पर यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकता है। इस दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है और आगे का फैसला लेती है। NBC न्यूज के मुताबिक दुनिया के सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर 15% का एक जैसा ग्लोबल टैरिफ लगाने का मतलब होगा कि जिन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगा है वह खुद घट जाएगा। कुछ उत्पादों को छूट दी गई है, जैसे कुछ कृषि उत्पाद (बीफ, टमाटर, संतरा), महत्वपूर्ण खनिज, दवाइयां, कुछ इलेक्ट्रॉनिक्स और पैसेंजर वाहन। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि यह टैरिफ पुराने वाले की जगह लेगा और वे अधिक पैसा कमाने की कोशिश जारी रखेंगे। निक्सन ने 55 साल पहले लगाया था 10% ग्लोबल टैरिफ साल 1971 में अमेरिका और दुनिया के बीच व्यापार और भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) में भारी असंतुलन हो गया था। अमेरिका लगातार ज्यादा आयात कर रहा था और निर्यात कम कर पा रहा था, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था। इसके बाद निक्सन ने दुनियाभर के देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद यह महसूस किया गया कि भविष्य में अगर ऐसी आर्थिक आपात स्थिति आती है, तो राष्ट्रपति के पास ऐसी चीजों से निपटने के लिए कानूनी अधिकार होने चाहिए। इसी मकसद से 1974 में “ट्रेड एक्ट 1974” पारित किया गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्शन 122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसलिए यह भी साफ नहीं है कि अगर इसे अदालत में चुनौती दी गई, तो अदालतें इसकी व्याख्या किस तरह करेंगी। ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल में ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया था। (फाइल फोटो) कोर्ट की ट्रम्प को फटकार, कहा- हर देश से युद्ध की स्थिति में नहीं इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकारते हुए कहा था कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि फैसले को लेकर 3 जजों जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इस फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन उनके मुताबिक यह कानूनी तौर पर वैध थी। कैवनॉ ने अपने नोट में भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि ये टैरिफ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के तहत लगाए गए थे। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जजों को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया है, जबकि 3 जज डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए। फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए थे। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में 6 अक्टूबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया था। कोर्ट के फैसले से सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं कोर्ट के आदेश से ट्रम्प के सभी टैरिफ खत्म नहीं हुए हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए टैरिफ अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे, इसलिए वे अभी भी लागू रहेंगे। हालांकि, दो बड़े कैटेगरी
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2 घंटे पहले कॉपी लिंक ब्रिटेन की फास्ट-फैशन कंपनी ASOS के सह-संस्थापक क्वेंटिन ग्रिफिथ्स की थाईलैंड के पटाया में 17वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई। पुलिस को मौके से किसी साजिश या हत्या के सबूत नहीं मिले हैं और शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई है। थाई पुलिस के मुताबिक, 9 फरवरी को पटाया के एक 18 मंजिला अपार्टमेंट की बालकनी से ग्रिफिथ्स गिर गए। उनका शव बालकनी के ठीक नीचे जमीन पर मिला। जांच में सामने आया कि अपार्टमेंट अंदर से बंद था और जबरन प्रवेश के कोई निशान नहीं थे। सीसीटीवी फुटेज में भी किसी अन्य व्यक्ति के कमरे में आने-जाने का रिकॉर्ड नहीं मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी किसी तरह की साजिश या हमले के संकेत नहीं पाए गए। पुलिस ने कहा कि सभी सबूत आत्महत्या की ओर इशारा करते हैं। जांच अधिकारियों को अपार्टमेंट से चल रहे मुकदमों से जुड़े दस्तावेज मिले। पुलिस के मुताबिक, ग्रिफिथ्स अपनी पूर्व पत्नी के साथ कानूनी विवाद को लेकर चिंतित थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी दूसरी पत्नी, जो थाई नागरिक हैं, ने उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने दोनों के साझा व्यवसाय से 6.73 लाख डॉलर से ज्यादा की रकम हड़पी। पिछले साल उन्हें दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन के शेयर बेचने के आरोप में गिरफ्तार भी किया गया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था, लेकिन जांच जारी थी। क्वेंटिन ग्रिफिथ्स ने लंदन में निक रॉबर्टसन, एंड्रयू रीगन और डेबोरा थॉर्प के साथ मिलकर ASOS की स्थापना की थी। यह आगे चलकर एक ग्लोबल ऑनलाइन फैशन मार्केटप्लेस बनी, जहां सैकड़ों ब्रांड्स और अपने लेबल के उत्पाद बेचे जाते थे। एक समय कंपनी का मूल्यांकन 6 अरब यूरो से अधिक और बाद में 8 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Trump Tariff Cancelled by US Supreme Court

वॉशिंगटन डीसी40 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के तीन घंटे बाद ट्रम्प ने प्रेस कांफ्रेंस करके नए टैरिफ का ऐलान किया। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे के अंदर डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह आज एक आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके तहत 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह टैरिफ पहले से लगाए जा रहे बेसलाइन टैरिफ के ऊपर होगा। यानी जो टैरिफ अभी लिया जा रहा है, उसके अलावा यह नया 10% एक्स्ट्रा टैरिफ होगा। इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, सिर्फ संसद को है। ट्रम्प ने इसकी आलोचना करते हुए कहा- यह बहुत निराशाजनक है। मुझे कोर्ट के कुछ जजों पर शर्म आ रही है। वे देश के लिए कलंक हैं, उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है। भारत के साथ ट्रेड डील पर ट्रम्प ने कहा कि, इस डील में कोई बदलाव नहीं होगा। पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं। ट्रम्प ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ट्रम्प बोले- जजों में सही काम करने की हिम्मत नहीं ट्रम्प ने कहा कि जज ‘कट्टर वामपंथियों के पालतू’ हैं। वे देशभक्ति नहीं दिखा रहे हैं और संविधान के प्रति वफादार भी नहीं हैं। जज कुछ लोगों से डरते हैं इसलिए सही फैसला लेना नहीं चाहते। ट्रम्प ने इस फैसले को “बहुत निराशाजनक” बताया और कहा, “मुझे अदालत के कुछ लोगों पर शर्म आती है। बिल्कुल शर्म आती है कि उनमें हमारे देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।” उन्होंने उन तीन कंजरवेटिव जजों की तारीफ की, जिन्होंने इस फैसले से असहमति जताई थी। जिन जजों ने टैरिफ को रद्द किया, उनकी आलोचना करते हुए ट्रम्प ने कहा, “वे हर उस चीज के खिलाफ हैं जो अमेरिका को मजबूत और फिर से महान बनाती है। वे हमारे देश के लिए शर्म की बात हैं। वे हर बार ‘ना’ कहने वाले जज हैं।” ट्रम्प के प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 अहम बातें… सुप्रीम कोर्ट के रद्द किए गए टैरिफ लागू करने के लिए मुझे संसद की जरूरत नहीं है। मैं इन्हें राष्ट्रपति के मिले अधिकारों के जरिए लागू कर सकता हूं। सुप्रीम कोर्ट में रिफंड को लेकर कोई साफ बात नहीं कही गई है। इसलिए अमेरिकी सरकार किसी भी कंपनी को टैरिफ के रूप में वसूला गया पैसा वापस नहीं करेगी। जज ने बहुत ही घटिया फैसला सुनाया है। मुझे लगता है कि अब इस मामले पर अगले दो साल तक कोर्ट में मुकदमा चलेगा। हम अगले 5 साल तक कोर्ट में ही रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विदेशी ताकतों का असर पड़ा है। अगर टैरिफ नहीं लगाए गए, तो विदेशी देश कुछ उद्योगों में अमेरिका से आगे निकलते रहेंगे। टैरिफ लगाने का यह कदम कई साल पहले के राष्ट्रपतियों को उठा लेना चाहिए था। उन्होंने हमारे देश को कमजोर होने दिया और दूसरे देशों को फायदा उठाने दिया। सेक्शन 122 के जरिए टैरिफ लगाएंगे ट्रम्प सेक्शन 122 अमेरिका के एक कानून का हिस्सा है, जिसे ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 कहा जाता है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकार देता है कि अगर देश को अचानक व्यापार घाटे या आर्थिक संकट का खतरा हो, तो वे तुरंत आयात पर टैरिफ लगा सकते हैं। इसके तहत राष्ट्रपति बिना लंबी जांच प्रक्रिया के अस्थायी तौर पर टैरिफ लगा सकते हैं। आमतौर पर यह टैरिफ 150 दिनों तक लागू रह सकता है। इस दौरान सरकार स्थिति की समीक्षा करती है और आगे का फैसला लेती है। NBC न्यूज के मुताबिक दुनिया के सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर 10% का एक जैसा ग्लोबल टैरिफ लगाने का मतलब होगा कि जिन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगा है वह खुद घट जाएगा। निक्सन ने 55 साल पहले लगाया था 10% ग्लोबल टैरिफ साल 1971 में अमेरिका और दुनिया के बीच व्यापार और भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट) में भारी असंतुलन हो गया था। अमेरिका लगातार ज्यादा आयात कर रहा था और निर्यात कम कर पा रहा था, जिससे डॉलर पर दबाव बढ़ रहा था। इसके बाद निक्सन ने दुनियाभर के देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लगा दिया था। इसके बाद यह महसूस किया गया कि भविष्य में अगर ऐसी आर्थिक आपात स्थिति आती है, तो राष्ट्रपति के पास ऐसी चीजों से निपटने के लिए कानूनी अधिकार होने चाहिए। इसी मकसद से 1974 में “ट्रेड एक्ट 1974” पारित किया गया था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेक्शन 122 का पहले कभी इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसलिए यह भी साफ नहीं है कि अगर इसे अदालत में चुनौती दी गई, तो अदालतें इसकी व्याख्या किस तरह करेंगी। ट्रम्प ने पिछले साल अप्रैल में ग्लोबल टैरिफ का ऐलान किया था। (फाइल फोटो) कोर्ट की ट्रम्प को फटकार, कहा- हर देश से युद्ध की स्थिति में नहीं इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को फटकारते हुए कहा था कि अमेरिका दुनिया के हर देश के साथ युद्ध की स्थिति में नहीं है। हालांकि फैसले को लेकर 3 जजों जस्टिस सैमुअल एलिटो, क्लेरेंस थॉमस और ब्रेट कैवनॉ ने इस फैसले से असहमति जताई। कैवनॉ ने अपने नोट में लिखा कि टैरिफ नीति समझदारी भरी है या नहीं, यह अलग सवाल है, लेकिन उनके मुताबिक यह कानूनी तौर पर वैध थी। कैवनॉ ने अपने नोट में भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए टैरिफ का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि ये टैरिफ विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के तहत लगाए गए थे। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में कुल 9 जज हैं। इनमें से 6 जजों को रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किया है, जबकि 3 जज डेमोक्रेटिक राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए। फैसले के खिलाफ वोट करने वाले तीनों जज रिपब्लिकन राष्ट्रपतियों ने नियुक्त किए थे। जस्टिस ब्रेट कैवनॉ को राष्ट्रपति
UK US RAF Airbase Conflict; Donald Trump Iran Attack

लंदन7 घंटे पहले कॉपी लिंक चागोस आइलैंड्स में डिएगो गार्सिया मौजूद है, जहां ब्रिटेन-अमेरिका का कॉमन मिलिट्री बेस मौजूद है। ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए अपने एयरबेस देने से मना कर दिया है। अमेरिका इन सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करना चाहता था, लेकिन ब्रिटेन ने इनकार कर दिया। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन के इस फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नाराज हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के उस समझौते से समर्थन वापस ले लिया है, जिसमें चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने की बात थी। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ईरान पर हमले की तैयारी कर रहा है। इसके लिए वह डिएगो गार्सिया और ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयरबेस का इस्तेमाल करना चाहता है। डिएगो गार्सिया, चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है। 1970 के दशक से यह ब्रिटेन और अमेरिका का साझा सैन्य अड्डा रहा है। दरअसल पुराने समझौतों के मुताबिक, ब्रिटेन के किसी भी सैन्य ठिकाने का इस्तेमाल तभी हो सकता है, जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री इसकी मंजूरी दें। अंतरराष्ट्रीय कानून भी कहता है कि अगर कोई देश जानता है कि सैन्य कार्रवाई गलत है और फिर भी मदद करता है, तो उसे भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। ट्रम्प बोले- चागोस आइलैंड्स छोड़ना बहुत बड़ी गलती ट्रम्प ने चागोस आइलैंड्स को लेकर ब्रिटेन की आलोचना की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर गुरुवार को लिखा कि 100 साल की लीज किसी देश के मामले में ठीक फैसला नहीं है। डिएगो गार्सिया जैसा ठिकाना छोड़ना बहुत बड़ी गलती होगी। ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान, अमेरिका के साथ समझौता नहीं करता, तो अमेरिका को हिंद महासागर में मौजूद डिएगो गार्सिया और फेयरफोर्ड के एयरफील्ड का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। ऐसे में इन ठिकानों का कंट्रोल बेहद जरूरी है। वहीं ब्रिटिश सरकार का कहना है कि मॉरीशस के साथ समझौता सुरक्षा कारणों से जरूरी है। उनका तर्क है कि इससे लंबे और महंगे कानूनी विवाद से बचा जा सकेगा। बताया जा रहा है कि इस पूरे समझौते पर करीब 35 बिलियन पाउंड (4 हजार अरब रुपए से ज्यादा) का खर्च आ सकता है। डिएगो गार्सिया, हिंद महासागर में स्थित चागोस आइलैंड्स का हिस्सा है। ब्रिटेन ने 1814 में नेपोलियन को हराने के बाद इन आइलैंड्स पर कब्जा किया था। 1965 में इन्हें मॉरीशस से अलग कर ‘ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र’ बना दिया गया। 1968 में जब मॉरीशस को आजादी मिली, तब यह तय हुआ था कि जब इन द्वीपों की रक्षा के लिए जरूरत नहीं रहेगी, तो इन्हें मॉरीशस को लौटा दिया जाएगा। बाद में डिएगो गार्सिया पर अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर एक जॉइंट मिलिट्री बेस बनाया था। ईरान पर हमले के लिए अहम हो सकता है डिएगो गार्सिया ईरान पर हमले के लिए डिएगो गार्सिया इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि यह हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित एक बड़ा सैन्य ठिकाना है। यहां से अमेरिका दूर तक और तेजी से सैन्य ऑपरेशन चला सकता है। यह ईरान की राजधानी तेहरान से करीब 3,800 किलोमीटर दूर है। इतनी दूरी होने के कारण अमेरिका यहां से बिना सीधे खतरे के दायरे में आए लंबी दूरी के मिशन लॉन्च कर सकता है। इस बेस पर बड़ा एयरफील्ड है, जहां भारी बमवर्षक विमान जैसे B-2 और B-52 उड़ान भर सकते हैं। यहां बड़े टैंकर विमान (जैसे KC-135) और निगरानी करने वाले विमान भी काम कर सकते हैं। इसका मतलब है कि लंबे समय तक और दूर तक हवाई कार्रवाई संभव है। सिर्फ हवाई सुविधा ही नहीं, यहां गहरे पानी का बंदरगाह भी है। यानी बड़े जहाज और युद्धपोत यहां रुक सकते हैं, ईंधन ले सकते हैं और जरूरी सामान भर सकते हैं। यह ठिकाना ब्रिटेन और अमेरिका दोनों मिलकर इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अमेरिका के लिए यह एक बड़ा ऑपरेशन सेंटर बन चुका है। पहले भी मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान और अफ्रीका में सैन्य कार्रवाई के दौरान इसका इस्तेमाल हो चुका है। मॉरीशस 50 साल से इन आइलैंड्स का अधिकार मांग रहा मॉरीशस 1980 के दशक से इन आइलैंड्स पर अपना अधिकार मांगता रहा है और उसने यह मामला अंतरराष्ट्रीय अदालतों में उठाया। साल 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने एक फैसले में कहा कि 1968 में मॉरीशस को आजादी देते वक्त उपनिवेश खत्म करने की प्रोसेस पूरी नहीं हुई थी और ब्रिटेन को जल्द से जल्द चागोस आइलैंड्स का प्रशासन खत्म करना चाहिए। ऋषि सुनक के लीडरशिप वाली कंजरवेटिव सरकार ने 2022 में ऐलान किया कि ब्रिटेन और मॉरीशस चागोस आइलैंड्स की संप्रभुता को लेकर बातचीत शुरू करेंगे। सरकार ने कहा कि सुरक्षा और कानूनी विवादों से बचने के लिए स्थिति साफ करना जरूरी था, ताकि डिएगो गार्सिया में ब्रिटेन-अमेरिका का मिलिट्री बेस बिना रुकावट चलता रहे। इसी कारण जुलाई 2024 के चुनाव से पहले मॉरीशस से 11 दौर की बातचीत हुई। ब्रिटेन-अमेरिकी की सालों पुरानी दोस्ती में खटास ब्रिटेन और अमेरिका की दोस्ती बहुत पुरानी है। दूसरे विश्व युद्ध से लेकर NATO तक, इराक-अफगानिस्तान युद्ध से लेकर खुफिया नेटवर्क ‘फाइव आइज’ तक, दोनों देश ज्यादातर मामलों में एक ही लाइन पर चलते रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ वक्त में हालात बदल गए हैं, दोनों देशों में कई मुद्दों पर विरोध नजर आ रहा है। अमेरिका और ब्रिटेन में दूरी की चार वजहें… 1. अंतरराष्ट्रीय हालात को लेकर दोनों की अलग सोच सबसे पहला फर्क सैन्य कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर है। ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर लंदन थोड़ा संभलकर चल रहा है। इराक युद्ध के बाद ब्रिटेन में ‘पहले हमला करने’ की नीति पर काफी सवाल उठे थे। इसलिए अब ब्रिटेन चाहता है कि कोई भी सैन्य कदम उठाने से पहले कानूनी मंजूरी और अंतरराष्ट्रीय समर्थन साफ हो। वहीं अमेरिका सुरक्षा खतरे का हवाला देकर जल्दी और सख्त कदम उठाने के पक्ष में रहता है। 2. अमेरिका चागोस आइलैंड्स को लेकर नाराज दूसरा मुद्दा चागोस द्वीप समूह का है। चागोस आइलैंड्स और खासकर डिएगो गार्सिया रणनीतिक रूप से बहुत अहम जगह है। ब्रिटेन, मॉरीशस के साथ समझौता कर रहा है, लेकिन अमेरिका को लगता है कि इससे हिंद महासागर में उसकी पकड़ कमजोर हो सकती है। 3. अमेरिकE की सख्त विदेशी नीति तीसरी वजह दोनों देशों की अंदरूनी राजनीति
Donald Trump Vs Emmanuel Macron; Message Leak Controversy

नई दिल्ली12 घंटे पहले कॉपी लिंक मैक्रों ने कहा कि असहमति जताना गलत नहीं है, लेकिन उसका तरीका सही होना चाहिए। (बैकग्राउंड में मैक्रों के लीक मैसेज का स्कीनशॉट) फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि देशों के बीच रिश्तों में सम्मान बहुत जरूरी होता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों नेताओं के बीच हुए प्राइवेट मैसेज लीक कर दिए। भारत के तीन दिन के दौरे पर आए मैक्रों ने भारतीय पॉडकास्टर राज शमानी के शो में यह बात कही। उनसे पूछा गया कि उनके निजी मैसेज लीक होने पर उन्हें कैसा लगा। इस पर मैक्रों ने सीधे ट्रम्प का नाम लेकर कुछ नहीं कहा, लेकिन इतना जरूर कहा कि कूटनीति में एक-दूसरे का सम्मान जरूरी है। मैक्रों ने कहा कि देश आपस में सहमत हों या असहमत, लेकिन अपनी बात सम्मान के साथ रखनी चाहिए। असहमति जताना गलत नहीं है, लेकिन उसका तरीका सही होना चाहिए। मैक्रों ने ट्रम्प पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ नेता आगे बढ़ने के बजाए पीछे जाते हुए दिख रहे हैं। मैक्रों के मैसेज का स्क्रीनशॉट ट्रम्प ने 20 जनवरी को मैक्रों का निजी मैसेज लीक किया था। उस मैसेज में मैक्रों ने ट्रम्प से कहा था कि वे समझ नहीं पा रहे हैं कि ट्रम्प ग्रीनलैंड को लेकर क्या करना चाहते हैं। उन्होंने आगे मिलकर काम करने की बात भी कही थी और G7 बैठक की मेजबानी का सुझाव दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि इस बैठक में यूक्रेन, डेनमार्क, सीरिया और रूस जैसे देशों को शामिल किया जा सकता है। मैक्रों बोले- हिंसा और अपमान की जरूरत नहीं मैक्रों ने पॉडकास्ट में यह भी कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपने नेता बदलने का अधिकार होता है, इसलिए हिंसा और अपमान की जरूरत नहीं है। वे समाज में नफरत भरी भाषा और हिंसा के खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जब फ्रांसीसी राष्ट्रपति से पूछा गया कि क्या दुनिया को अमेरिका के मौजूदा लीडरशिप से डरने की जरूरत है, तो उन्होंने कहा कि आज के हालात में यह थोड़ा हैरान करने वाला है कि कुछ नेता आगे बढ़ने की बजाय पीछे की तरफ जाते दिख रहे हैं। ट्रम्प ने फ्रांसीसी वाइन पर 200% टैरिफ की धमकी दी थी ट्रम्प और मैक्रों के बीच लंबे समय के तल्खी रही है, लेकिन हाल में विवाद तब बढ़ा जब फ्रांस ने ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता ठुकरा दिया। यह बोर्ड गाजा के विकास के लिए बनाया गया है। फ्रांस समेत कई देशों ने इस बात पर चिंता जताई कि बोर्ड के दस्तावेज में गाजा और इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष का साफ जिक्र नहीं है। इसके बाद ट्रम्प ने फ्रांस की वाइन और शैम्पेन पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी और कहा कि इससे मैक्रों पर दबाव पड़ेगा। बाद में ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दोनों के बीच हुए निजी मैसेज भी शेयर कर दिए, जिनमें मैक्रों ने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की दिलचस्पी पर चिंता जताई थी। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने पिछले महीने दावोस में कहा था कि फ्रांस धमकी नहीं, सम्मान में भरोसा करता है। यूरोप पर और पाबंदियां लगाने की धमकी देना गलत है। फ्रांस दुनिया की वाइन राजधानी कही जाती है फ्रेंच वाइन और शैम्पेन दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध हैं। फ्रांस की वाइन संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता हैं। फ्रांस को दुनिया की वाइन राजधानी कहा जाता है। फ्रेंच वाइन में कई तरह की रेड, व्हाइट, रोजे और स्पार्कलिंग वाइन शामिल हैं। फ्रेंच वाइन फ्रांस के विभिन्न क्षेत्रों में उगाए गए अंगूरों से बनाई जाती है। फ्रेंच वाइन में आमतौर पर कोई बुलबुले नहीं होते। ये स्टिल वाइन होती हैं, जिनमें अल्कोहल 11-15% तक होता है। इनकी क्वालिटी मिट्टी, मौसम और अंगूर की किस्म पर निर्भर करती है। इटली के बाद फ्रांस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा वाइन उत्पादक देश है। 2025 में वैश्विक वाइन उत्पादन लगभग 23.2 खरब मिलीलीटर रहा, जिसमें फ्रांस का उत्पादन 3.59 खरब मिलीलीटर है, यानी दुनिया की कुल वाइन का लगभग 15-16%। फ्रेंच वाइन फ्रांस के अलग-अलग इलाकों में उगाए गए अंगूरों से बनाई जाती है। इसमें 11-15% तक अल्कोहल होता है। ट्रम्प और मैक्रों के बीच कई बार तनातनी हुई अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के बीच पिछले कुछ समय में कई बार तनातनी देखी गई है। 1. बोर्ड ऑफ पीस विवाद (2026) जब ट्रम्प ने गाजा के विकास के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बनाया, तो फ्रांस ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। फ्रांस समेत कई देशों ने कहा कि बोर्ड के दस्तावेज में गाजा और इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष का साफ जिक्र नहीं है। 2. ग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी (2026) ग्रीनलैंड में अमेरिका की दिलचस्पी को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आए। ट्रम्प ने शेयर किए गए मैसेज में मैक्रों ने ग्रीनलैंड को लेकर अपनी चिंता जताई थी। 3. ट्रेड और टैरिफ को लेकर तनाव ट्रम्प ने फ्रांस के उत्पादों, खासकर वाइन और शैम्पेन पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी और कहा कि इससे फ्रांस पर दबाव बनेगा। इस पर फ्रांस ने नाराजगी जताई थी। 4. NATO और डिफेंस खर्च (2018–2019) ट्रम्प बार-बार कहते है कि यूरोपीय देश NATO पर कम खर्च कर रहे हैं और अमेरिका पर ज्यादा बोझ है। मैक्रों ने एक बार NATO को “ब्रेन-डेड” (दिमागी रूप से निष्क्रिय) तक कह दिया था। इस बयान पर ट्रम्प ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और दोनों के बीच सार्वजनिक बहस हुई थी। 5. डिजिटल टैक्स विवाद (2019) फ्रांस ने बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगाने का फैसला किया था। ट्रम्प ने इसे अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ कदम बताया और फ्रांसीसी सामान पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। बाद में बातचीत के जरिए मामला कुछ हद तक सुलझ गया था। 6. ईरान परमाणु समझौता (2018) ट्रम्प ने अमेरिका को जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) से बाहर कर लिया था। यह एक एक परमाणु समझौता था, जो 2015 में ईरान और दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच हुआ था। मैक्रों चाहते थे कि समझौता बना रहे और उन्होंने ट्रम्प को मनाने की कोशिश भी की, लेकिन
Shehbaz Sharif Donald Trump; Board Of Peace Summit Video

वॉशिंगटन डीसी4 घंटे पहले कॉपी लिंक ट्रम्प ने पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ को खड़े होकर अपनी बात सुनने को कहा और शरीफ खड़े हो गए। यह घटना गुरुवार की है। पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और ट्रम्प के बीच हुई मुलाकात सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। दरअसल, शहबाज बोर्ड ऑफ पीस समिट में शामिल होने पहुंचे थे। लेकिन उन्हें वहां पर ज्यादा तवज्जो नहीं मिली। इसे लेकर उनका मजाक भी बन रहा है। गाजा को लेकर हुई पहली बैठक में शहबाज पीछे की कतार में और अलग-थलग नजर आए। एक पल तो ऐसा भी आया जब ट्रम्प ने भाषण देते हुए शहबाज को इशारा किया और वे तुरंत अपनी सीट से खड़े भी हो गए। ट्रम्प ने मंच से कहा- ‘पाकिस्तान और भारत… यह बड़ा मामला था। आपको खड़ा होना चाहिए, कृपया एक पल के लिए खड़े हो जाइए।’ यह सुनते ही शरीफ तुरंत खड़े भी हो गए। इस दौरान शहबाज बेहद असहज दिखे। सोशल मीडिया पर इसे ‘स्कूल असेंबली वाला मोमेंट’ कहा गया यानी जब टीचर खड़ा होने को कहे और छात्र तुरंत खड़ा हो जाए। एक और वायरल वीडियो में शहबाज, ट्रम्प को गले लगाने की कोशिश करते हुए भी दिखाई देते हैं। इस घटना का VIDEO शहबाज के दौरे की ‘गड़बड़ी’ से शुरुआत अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में गुरुवार को बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक हुई थी। इसमें करीब 40 देशों के अधिकारी शामिल हुए थे। भारत भी इसमें पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हुआ था। शरीफ की अमेरिका यात्रा की शुरुआत ही विवादों से हुई। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के बयान में कई टाइपो थे, जैसे कि विदेश मंत्रालय की ऑफिशियल प्रेस रिलीज में ‘यूनाइटेड स्टेट्स’ की जगह ‘Unites States of Americas’ लिखा गया। सोशल मीडिया पर स्क्रीनशॉट वायरल हो गए और लोग सरकारी स्तर की प्रूफरीडिंग पर सवाल उठाने लगे। पिछले साल इजराइल के ईरान पर हमले की निंदा करते समय शरीफ ने आई कंडेम (I condemn) की जगह आई कंडोम ‘I condom’ लिख दिया था, जिसे तब काफी ट्रोल किया गया। सबसे पीछे नजर आए पाकिस्तानी PM वॉशिंगटन पहुंचने के बाद भी हालात आसान नहीं रहे। ग्रुप फोटो में शरीफ मुश्किल से दिखाई दे रहे थे। ट्रम्प आगे की कतार में खड़े थे, उनके साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो थे। सऊदी अरब, इंडोनेशिया और कतर के नेता उनके ठीक पीछे खड़े थे, जबकि शरीफ पीछे की ओर नजर आए। भाषण के दौरान ट्रम्प ने शरीफ को खड़े होने के लिए कहा। शरीफ तुरंत खड़े हो गए, जिसका सोशल मीडिया पर मजाक बना और कुछ लोगों ने उन्हें ‘ट्रम्प का पपेट’ कहा। इसी दौरान ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘महान व्यक्ति’ और ‘बहुत अच्छे दोस्त’ बताया, जिससे शरीफ और असहज दिखे। बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग गुरुवार को हुई, इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ दुनियाभर के नेता एक मंच पर नजर आए। शहबाज शरीफ पीछे की कतार में दाएं से तीसरे नंबर पर हैं। शहबाज ट्रम्प की चापलूसी करते दिखे अपने भाषण में शरीफ ने ट्रम्प को ‘मैन ऑफ पीस’ कहकर संबोधित किया और उन्होंने दक्षिण एशिया का सच्चा रक्षक बता डाला। इस दौरान शहबाज शरीफ ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई में सैन्य टकराव के बाद हुए युद्धविराम का क्रेडिट भी ट्रम्प को दे दिया। हालांकि इतनी तारीफ के बावजूद ट्रम्प को इससे खास फर्क नहीं पड़ा। शरीफ ने ट्रम्प को संबोधित करते हुए कहा- “भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाने के लिए आपके समय पर और असरदार हस्तक्षेप ने शायद 2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई। आप सच में मैन ऑफ पीस साबित हुए हैं। मैं कहना चाहता हूं कि आप सच में दक्षिण एशिया के मसीहा हैं। गाजा आपकी विरासत होगी।” ————————————– पाकिस्तानी PM से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… रूसी मीडिया ने पाकिस्तानी PM से जुड़ा वीडियो डिलीट किया:40 मिनट तक इंतजार करते रहे शहबाज, फिर पुतिन की मीटिंग में जबरन घुसे थे पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की मीटिंग में जबरन घुसने वाला वीडियो रशिया टुडे (आरटी न्यूज) ने सोशल मीडिया से हटा दिया। इसमें दिख रहा है कि पाकिस्तानी पीएम जबरन पुतिन के मीटिंग हॉल में घुस जाते हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








