West Bengal Election 2026 Voting Violence Video; Mamata Banerjee BJP TMC

Hindi News National West Bengal Election 2026 Voting Violence Video; Mamata Banerjee BJP TMC | Kolkata Hooghly Howrah Polling Booth Photos 6 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल में दूसरे फेज की वोटिंग के दौरान कई विधानसभा सीटों पर हिंसा और मारपीट की घटनाएं सामने आईं। नादिया जिले के छपरा में भाजपा एजेंट ने TMC कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया। वहीं शांतिपुर में भाजपा कैंप पर भी हमला हुआ है। बीजपुर में निर्दलीय प्रत्याशी और काउंसलर के बीच मारपीट हो गई। श्यामपुकुर में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ प्रदर्शन किया। BJP उम्मीदवार रत्ना देबनाथ ने TMC कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया है। 1. नादिया के छपरा में BJP एजेंट पर हमला नादिया जिले की छपरा विधानसभा सीट के हतरा पंचायत में BJP पोलिंग एजेंट मोशर्रफ मीर ने TMC के कार्यतर्ताओं पर सुबह करीब 5.30 बजे पर लोहे की रॉड और बंदूकों से हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि छपरा पुलिस ने उन्हें बचाया और छपरा ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उनका इलाज चल रहा है और उनके सिर पर छह टांके लगे हैं। 2. बीजपुर में निर्दलीय प्रत्याशी और पार्षद के बीच मारपीट बीजपुर में TMC पार्षद और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मारपीट हो गई। कांचरापाड़ा नगर पालिका के पार्षद कल्याण कर पोलिंग बूथ के 100 मीटर के दायरे में खड़े थे बीजेपी और निर्दलीय उम्मीदवार से उनकी बहस शुरू हो गई। इसके बाद निर्दलीय प्रत्याशी और TMC पार्षद के बीच मारपीट हो गई। पुलिस ने बीच बचाव किया और भीड़ को तितर-बितर किया। 3. साउथ 24 परगना में BJP उम्मीदवार की कार में तोड़फोड़ साउथ 24 परगना जिले में बसंती के बूथ नंबर 76 पर बीजेपी उम्मीदवार विकास सरदार ने कहा कि टीएमसी के गुंड़ों ने उनकी कार के शीशे तोड़ दिए। उनके सुरक्षाकर्मी की बंदूक छीनने की कोशिश भी की गई। घटना के बाद इलाके में तनाव है। 4. हुगली में TMC और ISF कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट हुई हुगली जिले के खानकुल में राजहाटी-1 पंचायत के रामचंद्रपुर में बूथ नंबर 147 पर नकली पोलिंग एजेंट नियुक्त करने के आरोपों को लेकर तनाव के कारण TMC और ISF समर्थकों के बीच मारपीट हो गई। 5. BJP उम्मीदवार रत्ना देबनाथ का आरोप- TMC के गुंडों ने हमला किया पानीहाटी में BJP उम्मीदवार रत्ना देबनाथ ने कहा- मैं अंदर गई, सब ठीक था, जब मैं बाहर आई तो देखा कि एक बुज़ुर्ग महिला, जिसके पैर में दर्द था और वह ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी, मुझे बुरा लगा और मैंने अपने सामने खड़े किसी व्यक्ति से कहा कि उसकी मदद करो। 10 मीटर के अंदर TMC के गुंडों ने मुझ पर हमला किया और कहा कि वे मुझे बाहर नहीं जाने देंगे। 6. श्यामपुकुर में BJP कैंडिडेट पूर्णिमा के खिलाफ प्रदर्शन श्यामपुकुर विधानसभा क्षेत्र में बूथ नंबर 100 और 101 पर BJP उम्मीदवार पूर्णिमा चक्रवर्ती के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया, जिससे इलाके में तनाव फैल गया। 7. भाजपा बोली- EVM में BJP की बटन पर टेप लगाकर बंद किया भाजपा ने आरोप लगाया है कि डायमंड हार्बर के फाल्टा में EVM में BJP का बटन टेप लगाकर ब्लॉक किया गया है। इलेक्शन कमीशन के सूत्रों ने कहा कि अगर शिकायत सही पाई गई तो फिर से मतदान कराया जाएगा। 8. नादिया में भाजपा कैंप पर हमला नादिया जिले में शांतिपुर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 16 के स्टीमर घाट इलाके में BJP कैंप पर हमले का मामला सामने आया है। दावा है कि कुछ बदमाशों ने बूथ नंबर 221 पर कैंप को निशाना बनाया। 9. हावड़ा में EVM में गड़बड़ी के बाद हंगामा हावड़ा के बाली में EVM में गड़बड़ी की बात को लेकर हंगामा हो गया है। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे 2 लोगों को CRPF ने हिरासत में लिया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Bengal & TN Election Voting: Violence, BJP MLA Attack

कोलकाता/चेन्नई1 घंटे पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को रिकॉर्ड वोटिंग हुई। बंगाल की 294 में से 152 सीटों पर पहले फेज में 92.72% मतदान हुआ। दो भाजपा कैंडिडेट पर हमला हुआ। एक को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। वहीं, मुर्शिदाबाद के नौदा में बुधवार देर रात देसी बम से हमले में कई लोग घायल हो गए। नादौ में हुमायूं कबीर और उनके समर्थकों की टीएमसी के कार्यकर्ताओं के साथ झड़प हुई। वे नौदा के बाद जहां-जहां भी गए, वहां झड़प और हिंसा की घटनाएं हुईं। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 85.14% वोटिंग हुई। दोनों राज्यों में आजादी के बाद अब तक सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। इससे पहले तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मतदान 2011 में 78.29% था, जबकि बंगाल में 2011 में 84.72% मतदान दर्ज किया गया था। ममता ने वोटिंग के बाद कहा कि बंगाल की जनता ने SIR के खिलाफ बंपर वोटिंग की है। गृह मंत्री शाह ने कहा कि TMC का सूरज ढल चुका है। इससे पहले असम, केरलम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को एकसाथ आएंगे। पूरी खबर पढ़ें… SIR के बाद वोटिंग बढ़ने का ट्रेंड बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड वोटिंग की वजह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) भी मानी जा रही है। इसी साल 9 अप्रैल को केरल, असम, पुडुचेरी और नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव में भी रिकॉर्ड मतदान हुआ था। केरलम में 78.27% वोटिंग के साथ 39 साल का रिकॉर्ड टूटा था। असम में 85.91%, बिहार में 66.90% और पुडुचेरी 89.87% में इतिहास की सबसे ज्यादा वोटिंग हुई। बंगाल-तमिलनाडु की तरह इन राज्यों-केंद्र शासित प्रदेश में SIR हुई है। पश्चिम बंगाल में पहली बार 90% से ज्यादा वोटिंग बंगाल में वोट प्रतिशत बढ़ने की 4 वजह SIR: राज्य में 91 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए, जिससे कुल मतदाता संख्या घट गई है। आंकड़े बताते हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव में इन्हीं 152 सीटों पर वोटिंग करीब 80% और 2021 विधानसभा चुनाव में करीब 82.17% रही थी। यानी कुल मतदाता घटे, लेकिन वोट डालने वालों की संख्या लगभग बराबर या ज्यादा रही। एंटी इनकंबेंसी: राज्य में 15 साल से तृणमूल सरकार है। नेताओं से असंतोष, रोजगार, भ्रष्टाचार, सिंडिकेट जैसे मुद्दे भी ज्यादा मतदान की वजह हो सकते हैं। वहीं, मुस्लिम बहुल जिलों और सीमावर्ती इलाकों में यह SIR और NRC के डर से उपजी प्रतिक्रिया भी मानी जा रही है। इस बार ध्रुवीकरण भी जबरदस्त है। इसलिए माना जा रहा है कि हिंदू मतदाताओं का भी वोट प्रतिशत ज्यादा रहा होगा। प्रवासी कामगार: यह भी बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ है। बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों से केवल वोट डालने बंगाल लौटे हैं। उन्हें लगा कि इस बार वोट नहीं दिया, तो हमेशा के लिए अधिकार छिन सकता है। TMC ने आरोप लगाया कि भाजपा ट्रेन भर कर वोट डालने के लिए लोगों को ला रही है। आयोग की सख्ती: निर्वाचन आयोग की अभूतपूर्व निगरानी और 2.40 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती के कारण मतदाताओं ने बिना किसी डर के मतदान किया। तमिलनाडु में अब तक 14 बार चुनाव, इस बार रिकॉर्ड वोटिंग तमिलनाडु के 5.73 करोड़ वोटर्स ने नया इतिहास रचा। 1967 से अब तक राज्य में कभी इतनी वोटिंग नहीं हुई। इससे पहले सबसे ज्यादा 78.12% वोटिंग 2011 में हुई थी, तब एआईएडीएमके की मुखिया रहीं जयललिता डीएमके को हराकर सत्ता में आई थीं और 10 साल राज्य किया था। SIR में करीब 74 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। 2021 में कुल 6.29 करोड़ वोटर थे। तब इन 234 सीटों पर 72.81% मतदान हुआ था, जो 2016 की तुलना में करीब 2% कम था। तब इसे कोविड के असर से जोड़ा गया था। वैसे राज्य में औसत मतदान प्रतिशत आमतौर पर 70 से 75% के बीच रहता था, लेकिन इस बार यह करीब 12% बढ़ा है। बंगाल में MLA की कार तोड़ी; तमिलनाडु में पुलिस को चाकू मारा, 5 घटनाएं बंगाल के दक्षिण मिदनापुर में कुमारगंज सीट से भाजपा कैंडिडेट सुवेंदु सरकार को भीड़ ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। उनका सिक्योरिटी गार्ड उनके साथ था। इसके बावजूद भीड़ ने उन्हें खदेड़ दिया। भीड़ ने भाजपा कैंडिडेट को खदेड़ा और दौड़ा-दौड़ाकर थप्पड़-मुक्कों से पीटा। पश्चिम बर्धमान जिले के बर्नपुर में आसनसोल साउथ सीट से भाजपा की मौजूदा विधायक और उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की कार पर हमला हुआ। इससे गाड़ी के पीछे का शीशा टूट गया। अग्निमित्रा ने बताया कि उनकी कार पर पत्थर फेंके गए। घटना के समय अग्निमित्रा पॉल कार में मौजूद थीं। तमिलनाडु के पोरैयार स्थित जमालिया मिडिल स्कूल में वोटिंग के दौरान हेड कांस्टेबल पर एक व्यक्ति ने चाकू से हमला कर दिया। हमलावर एक रिटायर्ड सेना कर्मीचारी है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। घायल कांस्टेबल को पोरैयार के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमलावर ने धारदार चाकू पर कई ब्लेड भी चिपकाए हुए थे। बंगाल की बेरहामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि उनके पार्टी एजेंट पर TMC कार्यकर्ताओं ने हमला किया। सुरक्षाबल और अन्य लोग पोलिंग बूथ से घायलों को गोद में उठाकर ले गए। एक युवक के सिर पर भी चोटें आईं। पोलिंग बूथ पर घायल एक शख्स को अस्पताल ले जाते जवान। मुर्शिदाबाद के नौदा में बुधवार देर रात देसी बम से हमले में कई लोग घायल हो गए। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) चीफ हुमायूं कबीर सुबह घटनास्थल पर पहुंचे। इस दौरान उनके समर्थकों और TMC कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट, पथराव हुआ। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। हुमायूं की कार पर पत्थरों और लाठियों से हमला किया गया। मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर और TMC कार्यकर्ताओं के बीच लाठी-डंडे चले। मुर्शिदाबाद : भास्कर रिपोर्टर के सामने महज 50 सेकेंड में हिंसा भड़की बंगाल के नौदा में हिंसा के दौरान भास्कर की टीम वहीं मौजूद थी। उनके सामने महज 50 सेकेंड के भीतर हिंसा भड़क उठी। हुमायूं कबीर दैनिक भास्कर के पत्रकार से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘TMC के कार्यकर्ता गुंडागर्दी कर रहे हैं। उनके कार्यकर्ता हमें बूथ के पास नहीं जाने दे रहे हैं। उनके कहने पर पुलिस ने भी हमें रोक लिया।’ हुमायूं इसके विरोध में धरने पर बैठे थे। आसपास भारी
West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today

Hindi News National West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today | 152 Seats Bengal First Phase कोलकाता/चेन्नई13 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज वोटिंग है। बंगाल में फर्स्ट फेज के 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर चुनाव होंगे। वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी। बंगाल में TMC और BJP के बीच मुख्य मुकाबला है। यहां के सभी बूथों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनीटरिंग) होगी। राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। रिजल्ट 4 मई को आएंगे। तमिलनाडु में DMK+ कांग्रेस और AIADMK+ BJP के बीच मुकाबला है। तमिल एक्टर थलापति विजय की नई पार्टी TVK इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है। महाराष्ट्र की बारामती सीट पर भी उपचुनाव है। यह सीट महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद से खाली है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के खिलाफ विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) की ओर से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है। चुनाव तैयारी से जुड़ी 2 तस्वीरें… पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में महिला कर्मचारी ईवीएम लेकिन पोलिंग बूथ पहुंची है। पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में चुनाव कर्मचारी ने धूप से बचने के लिए अपना सिर ढंक लिया। पश्चिम बंगाल: कुल 6.80 करोड़ वोटर्स, 5.23 लाख पहली बार मतदान करेंगे पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटे हैं। जिसमें 210 जनरल सीटें हैं। वहीं 68 सीटें एससी और 10 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 6.8 करोड़ वोटर्स हैं। पांच लाख से ज्यादा लोग पहली बार वोट डालेंगे। वहीं 3.79 लाख वोटर्स 85 से ज्यादा उम्र के हैं। फर्स्ट फेज में 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग होगी। 44,376 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। पश्चिम बंगाल: 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री बंगाल में 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं। ममता ने 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म किया, 15 साल से सत्ता में आजादी के बाद शुरुआती दौर (1947–1967) में कांग्रेस का वर्चस्व रहा और राज्य में स्थिर सरकारें रहीं। 1967 के बाद कांग्रेस कमजोर हुई और राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हुआ, कई गठबंधन सरकारें बनीं। 1977 में वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) सत्ता में आया और ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने। 1977 से 2011 तक करीब 34 साल तक लेफ्ट फ्रंट का लगातार शासन रहा। 2000 के दशक में औद्योगीकरण (सिंगूर, नंदीग्राम) को लेकर विवाद हुआ, जिससे लेफ्ट की पकड़ कमजोर हुई। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने किसान आंदोलनों के जरिए बड़ा जनसमर्थन हासिल किया। 2011 में TMC ने लेफ्ट को हराकर सत्ता हासिल की, 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म हुआ। 2016 और 2021 में TMC ने दोबारा जीत दर्ज की और ममता बनर्जी का दबदबा कायम रहा। वर्तमान में राजनीति TMC vs BJP के बीच मुख्य मुकाबले में बदल गई है, जबकि कांग्रेस-लेफ्ट सीमित भूमिका में हैं। तमिलनाडु- 12.51 लाख वोटर्स पहली बार वोटिंग करेंगे तमिलनाडु- कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आ सकी आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है। फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही। 1967 में पहली बार DMK ने कांग्रेस को हराया, द्रविड़ विचारधारा पर राजनीति आजादी के बाद (1947–1967) तक राज्य में कांग्रेस का वर्चस्व रहा, के. कामराज प्रमुख नेता थे। इसी दौर में पेरियार के नेतृत्व में द्रविड़ आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें सामाजिक न्याय और हिंदी विरोध मुख्य मुद्दे थे। 1967 में DMK ने कांग्रेस को हराकर पहली बार क्षेत्रीय राजनीति को सत्ता में स्थापित किया। सी.एन. अन्नादुरई पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री बने, यहीं से द्रविड़ राजनीति का दौर शुरू हुआ। उनके बाद एम. करुणानिधि ने DMK को मजबूत किया और संस्कृति-भाषा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाया। 1972 में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने AIADMK बनाई, जिससे दो-दलीय राजनीति (DMK vs AIADMK) स्थापित हुई। 1970 के दशक से 2010 तक DMK और AIADMK बारी-बारी से सत्ता में आती रहीं। जयललिता के दौर में AIADMK ने ‘अम्मा स्कीम्स’ के जरिए वेलफेयर पॉलिटिक्स को मजबूत किया। 2016 के बाद जयललिता और करुणानिधि के निधन से नेतृत्व परिवर्तन का दौर शुरू हुआ। 2021 के बाद एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK सत्ता में है, और आज भी राज्य की राजनीति द्रविड़ विचारधारा पर आधारित है। ————————– राज्यों में चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इलेक्शन एक्सप्लेनर: मुस्लिम बहुल 6 जिले ममता को बनाते हैं अजेय, TMC की आधी सीटें यहीं से; क्या ममता के ‘चिकन नेक’ पर शिकंजा कसेगी बीजेपी हवा का रुख: तमिलनाडु में BJP का खाता खुलना मुश्किल, 120-140 सीटों के साथ स्टालिन की वापसी के आसार, थलापति विजय को 5 से 15 सीटें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today

Hindi News National West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today | 152 Seats Bengal First Phase कोलकाता/चेन्नईकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज वोटिंग है। बंगाल में फर्स्ट फेज के 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर चुनाव होंगे। वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी। बंगाल में TMC और BJP के बीच मुख्य मुकाबला है। यहां के सभी बूथों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनीटरिंग) होगी। राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। रिजल्ट 4 मई को आएंगे। तमिलनाडु में DMK+ कांग्रेस और AIADMK+ BJP के बीच मुकाबला है। तमिल एक्टर थलापति विजय की नई पार्टी TVK इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है। महाराष्ट्र की बारामती सीट पर भी उपचुनाव है। यह सीट महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद से खाली है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के खिलाफ विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) की ओर से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है। चुनाव तैयारी से जुड़ी 2 तस्वीरें… पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में महिला कर्मचारी ईवीएम लेकिन पोलिंग बूथ पहुंची है। पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में चुनाव कर्मचारी ने धूप से बचने के लिए अपना सिर ढंक लिया। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की वोटिंग से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं… अपडेट्स 5 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल: कुल 6.80 करोड़ वोटर्स, 5.23 लाख पहली बार मतदान करेंगे पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटे हैं। जिसमें 210 जनरल सीटें हैं। वहीं 68 सीटें एससी और 10 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 6.8 करोड़ वोटर्स हैं। पांच लाख से ज्यादा लोग पहली बार वोट डालेंगे। वहीं 3.79 लाख वोटर्स 85 से ज्यादा उम्र के हैं। फर्स्ट फेज में 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग होगी। 44,376 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। 5 मिनट पहले कॉपी लिंक 29 अप्रैल को दूसरे फेज में 142 सीटों पर मतदान होगा 6 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल: पिछले 2 चुनाव से 80% से ज्यादा वोटिंग 7 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल: 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री बंगाल में 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं। 8 मिनट पहले कॉपी लिंक पहले फेज में पश्चिम बंगाल की 4 हॉट सीटें 9 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता ने 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म किया, 15 साल से सत्ता में आजादी के बाद शुरुआती दौर (1947–1967) में कांग्रेस का वर्चस्व रहा और राज्य में स्थिर सरकारें रहीं। 1967 के बाद कांग्रेस कमजोर हुई और राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हुआ, कई गठबंधन सरकारें बनीं। 1977 में वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) सत्ता में आया और ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने। 1977 से 2011 तक करीब 34 साल तक लेफ्ट फ्रंट का लगातार शासन रहा। 2000 के दशक में औद्योगीकरण (सिंगूर, नंदीग्राम) को लेकर विवाद हुआ, जिससे लेफ्ट की पकड़ कमजोर हुई। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने किसान आंदोलनों के जरिए बड़ा जनसमर्थन हासिल किया। 2011 में TMC ने लेफ्ट को हराकर सत्ता हासिल की, 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म हुआ। 2016 और 2021 में TMC ने दोबारा जीत दर्ज की और ममता बनर्जी का दबदबा कायम रहा। वर्तमान में राजनीति TMC vs BJP के बीच मुख्य मुकाबले में बदल गई है, जबकि कांग्रेस-लेफ्ट सीमित भूमिका में हैं। 10 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु- 12.51 लाख वोटर्स पहली बार वोटिंग करेंगे 10 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु में पिछले 2 चुनाव से 75% से कम वोटिंग 12 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु- कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है। फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही। 12 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु की 4 हॉट सीटें: सीएम स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि भी मैदान में 14 मिनट पहले कॉपी लिंक 1967 में पहली बार DMK ने कांग्रेस को हराया, द्रविड़ विचारधारा पर राजनीति आजादी के बाद (1947–1967) तक राज्य में कांग्रेस का वर्चस्व रहा, के. कामराज प्रमुख नेता थे। इसी दौर में पेरियार के नेतृत्व में द्रविड़ आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें सामाजिक न्याय और हिंदी विरोध मुख्य मुद्दे थे। 1967 में DMK ने कांग्रेस को हराकर पहली बार क्षेत्रीय राजनीति को सत्ता में स्थापित किया। सी.एन. अन्नादुरई पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री बने, यहीं से द्रविड़ राजनीति का दौर शुरू हुआ। उनके बाद एम. करुणानिधि ने DMK को मजबूत किया और संस्कृति-भाषा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाया। 1972 में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने AIADMK बनाई, जिससे दो-दलीय राजनीति (DMK vs AIADMK) स्थापित हुई। 1970 के दशक से 2010 तक DMK और AIADMK बारी-बारी से सत्ता में आती रहीं। जयललिता के दौर में AIADMK ने ‘अम्मा स्कीम्स’ के जरिए वेलफेयर पॉलिटिक्स को मजबूत किया। 2016 के बाद जयललिता और करुणानिधि के निधन से नेतृत्व परिवर्तन का दौर शुरू हुआ। 2021 के बाद एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK सत्ता में है, और आज भी राज्य की राजनीति द्रविड़ विचारधारा पर आधारित है। दैनिक भास्कर को Google पर 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बंगाल चुनाव को लेकर ECI की सख्ती, 20 साल में पहली बार चुनाव अधिकारी ने किया हवाई सर्वेक्षण

पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर चुनाव आयोग (ईसीआई) ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चुनाव आयोग के दस्तावेज़ के अनुसार सभी बूथों के प्रधान अधिकारी को यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेज़ पर सभी बूथों के बटन स्पष्ट रूप से दिखाई दें। किसी भी अभ्यर्थी के बटन को टेप, गोंद या किसी अन्य सामग्री से ढका नहीं जाना चाहिए। म्युचुअल से चुराया हुआ महंगा- इलेक्शन कमीशनचुनाव आयोग द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि बैलेट यूनिट के उम्मीदवार बटन पर वोट की गोपनीयता बनाए रखें और किसी भी तरह का कोई रंग, हिस्सेदारी, पर फोम या अन्य रासायनिक पदार्थ का उपयोग न करें। ऐसे किसी भी इवेंट पर प्रीसाइडिंग ऑफिसर, तत्काल सेक्टर ऑफिस या रिटर्निंग ऑफिसर को सूचित किया जाएगा। स्टॉक में आगे कहा गया है कि ऐसे सभी मामलों को स्टॉक से स्टॉक / हेस्टस्कैप की श्रेणी में माना जा सकता है, जो एक स्टॉकअप अपराध है। ऐसे किसी भी मामले में ई.सी.आई. पुनर्मतदान का आदेश दिया गया जिसमें आपराधिक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। 20 साल में पहली बार चुनाव अधिकारी का हवाई सर्वेक्षणराज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने मालदा, उत्तर दिनाजपुर, कुश बिहार और मेदिनीपुर का हवाई सर्वेक्षण के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टरों का चुनाव किया। बता दें कि पिछले 20 सागरों में यह पहली बार है जब मुख्य चुनाव अधिकारी ने इस तरह का हवाई निरीक्षण किया है। मार्च कर रहे हैं अर्धसैनिक सेनाओं के जवानउन्होंने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्वाचनों की समीक्षा की। चुनाव के दौरान पर्यवेक्षण को मजबूत करने के लिए फ्लाइंग स्क्वाड की तस्वीरों में कैमरे लगाए गए हैं, प्रोटोटाइप लाइव स्टूडियो सीधे नियंत्रण कक्ष में जारी किया जा रहा है। अर्धसैनिक आतंकवादियों के जवान बख्तरबंद टिकटें पूरे राज्य में टाइगर मार्च कर रहे हैं, इसलिए मतदान के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो सके। पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि चुनाव प्रचार 21 अप्रैल को हुआ था। चुनाव आयोग के अनुसार राज्य में अधिसूचना पर प्रतिबंध लागू किया गया है। पहले चरण में 20 अप्रैल से ही राज्य में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। ये भी पढ़ें पहलगाम हमले की सालगिरह: ‘भारत आतंकवादियों के आगे कभी नहीं झुकेगा’, पहलगाम हमलों की घंटी पर पीएम मोदी ने पाकिस्तान को दिया अल्टीमेटम (टैग्सटूट्रांसलेट)ईसीआई(टी)दिशानिर्देश(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)मतदान(टी)विधानसभा सीटें(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)ई सीआई(टी)विधानसभा चुनाव(टी)मतदान(टी)मतदान(टी)हवाई सर्वेक्षण(टी) सुरक्षा
महिला आरक्षण-परिसीमन पर शाह आज लोकसभा में जवाब देंगे:प्रियंका का आरोप- असम की तरह देश की सीटों की काट-छांट होगी; शाम 4 बजे वोटिंग

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन बिलों पर आज लोकसभा में दूसरे दिन चर्चा होगी। अमित शाह इस पर जवाब देंगे। गुरुवार को उन्होंने कहा था कि परिसीमन को लेकर विपक्ष के जितने भी सवाल हैं। वे केजी के बच्चों की तरह उन्हें समझाएंगे। शाम 4 बजे तीनों बिल पर वोटिंग कराई जाएगी। लोकसभा स्पीकर ने बिलों पर चर्चा के लिए 15 घंटे का समय तय किया। गुरुवार को करीब 12 घंटे तक पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपनी बात रखी। कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी, गौरव गोगोई, वेणुगोपाल ने बिल के विरोध में अपनी बातें कहीं। प्रियंका ने कहा कि असम की तरह देशभर की सीटों की काट-छांट की जाएगी। पीएम ने भी करीब 35 मिनट का भाषण दिया। उन्होंने कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। यह मोदी की गारंटी है और वादा है। विपक्ष इसका क्रेडिट ले सकता है। 16 अप्रैल: संसद के विशेष सत्र का पहला दिन; किसने क्या कहा पीएम मोदी बोले- मैं क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। अगर साथ चलेंगे तो किसी को भी नहीं होगा। फिर अलग पहलू हो जाता है। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं। सबकी फोटो छपवा देंगे। ले लो जी क्रेडिट। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं। प्रियंका बोलीं- महिलाएं बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को पहचान लेती प्रियंका गांधी ने कहा, पीएम के खोखले आश्वासनों के बावजूद संसद में राज्यों की मौजूदगी बदल जाएगी। जिस तरह असम में उन्होंने मनचाही सीटों को काटा, नई सीमाएं बनाएं उसी तरह यह देश में करेंगे। मौजूदा सरकार जनता की आंखों में धूल झोंक रही है। ये ओबीसी वर्ग का हक छीन रहे हैं, ताकि कुछ प्रदेशों की ताकत को कम किया जा सके। शाह जी हंस रहे हैं, पूरी प्लानिंग बना रखी है। चाणक्य आज जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते। अखिलेश बोले- हम चाहते हैं कि पहले जनगणना हो अखिलेश ने कहा- ये लोग पिछड़े वर्ग की 33 प्रतिशत महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते हैं। जब परिसीमन की बारी आई तो इन लोगों ने पूरी रणनीति बनाई, कि कैसे क्षेत्र बनाए जाएं कि इसका फायदा इन लोगों को ही मिले। इसलिए हम चहते हैं कि पहले जनगणना हो, जब आंकड़े आ जाएं तभी परिसीमन हो। इसलिए हमारी मांग है कि आधी आबादी में पिछड़ी और मुस्लिम महिलाओं को जोड़कर भी जनगणना हो। कंगना रनोट बोलीं- कुछ अच्छा होता है, तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते हैं बीजेपी सांसद कंगना रनोट ने लोकसभा में कहा कि जब भी कुछ अच्छा होने लगता है तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते है। एक तरफ प्रधानमंत्री जी की नीति है, तो दूसरे तरफ विपक्ष के लोग। मुलायम सिंह यादव जी ने कहा था कि अगर ये बिल आएगा तो सिर्फ शहरी महिलाएं ही सदन में आएगी। ये है विपक्ष की सोच। अब जानिए संसद में किन तीन बिलों पर चर्चा हो रही है परिसीमन में क्या होगा: सरकार कानून बनाकर तय करेगी अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी, जो 2026 तक के लिए मान्य थी। परिसीमन कब होगा और किस जनगणना (जैसे 2011 या 2027) के आधार पर होगा, यह संविधान की जगह संसद एक साधारण कानून बनाकर तय कर सकेगी। सरकार इसमें बदलाव कर रही है। इसके लिए जनसंख्या (आबादी) की परिभाषा को बदला जाएगा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है। संविधान में संशोधन कर सरकार परिसीमन आयोग बनाएगी। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा। आयोग का निर्णय अंतिम होगा। इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते। क्या सरकार लोकसभा में बिल पास करा पाएगी संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को बैक-चैनल बातचीत करनी होगी। भारतीय संविधान के ऑर्टिकल 368 के तहत, संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 (कुल 543 में से) है। 3 सीटें खाली हैं। यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों (दो तिहाई) को इसके पक्ष में वोट देना होगा। वर्तमान में, भाजपा-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA (विपक्ष) के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं। तीन दशक से पेंडिंग था महिला आरक्षण बिल संसद में महिलाओं के आरक्षण का प्रस्ताव करीब 3 दशक से पेंडिंग है। यह मुद्दा पहली बार 1974 में महिलाओं की स्थिति का आकलन करने वाली समिति ने उठाया था। 2010 में मनमोहन सरकार ने राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण बिल को बहुमत से पारित करा लिया था। तब सपा और राजद ने बिल का विरोध करते हुए तत्कालीन UPA सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दी थी। इसके बाद बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया गया। तभी से महिला आरक्षण बिल पेंडिंग है। 2023 में मोदी सरकार ने महिला आरक्षण बिल को पास कराया। यह कानून बना, अब इसमें संसोधन के जरिए बदलाव किया जा रहा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… PM ने दोस्त कहा तो अखिलेश ने हाथ जोड़ लिए; संसद के टॉप-8 मोमेंट्स केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधन बिल पेश किए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी स्पीच के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को अपना दोस्त कहा। इस पर अखिलेश ने हंसते हुए हाथ जोड़ लिए। प्रियंका गांधी ने शाह को देखते हुए कहा- अगर चाणक्य जिंदा होते तो आपको देखकर चौंक जाते। शाह मुस्कुराने लगे। पूरी खबर पढ़े…
BJP Manifesto Bengal | narendra Modi, rahul gandhi, Assam, Kerala, Puducherry Voting

Hindi News National BJP Manifesto Bengal | Narendra Modi, Rahul Gandhi, Assam, Kerala, Puducherry Voting कोलकाता/चेन्नई11 मिनट पहले कॉपी लिंक भाजपा, कांग्रेस और टीएमसी समेत अन्य दल अब बंगाल और तमिलनाडु में अपने प्रचार अभियान को और तेज करने जा रहे हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के तहत गुरुवार को असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में वोटिंग हुई। बंगाल में वोटिंग दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा जबकि तमिलनाडु में सभी सीटों पर 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। भाजपा आज पश्चिम बंगाल के लिए अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करेगी। इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा शाह पश्चिमी मेदिनीपुर में जनसभा और खड़गपुर में रोड शो करेंगे। वहीं पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में तीन बड़ी चुनावी रैलियां कीं। उन्होंने हल्दिया, आसनसोल और बीरभूम में जनसभा की। पीएम मोदी ने भाजपा की 6 गारंटी दीं। साथ ही कहा- मैं आपको एक और गारंटी भी देता हूं कि अब तक जिन्होंने प. बंगाल को लूटा है, उन सबका हिसाब होगा। पीएम मोदी की बंगाल में 6 गारंटियां भय के माहौल में आज लोगों को बार-बार कानून से मदद मांगनी पड़ती है। लेकिन हमारी सरकार में आपको न्याय मिलेगा। सरकारी सिस्टम जनता के लिए जवाबदेह होगा। घोटाले, दुष्कर्म हर क्राइम की फाइल खुलेगी। जिसने भी करप्शन किया है, उसकी जगह जेल में होगी। मंत्री हो या संत्री, जनता का पैसा नहीं खाने देंगे। जो शरणार्थी हैं, उन्हें सम्मान मिलेगा, जो घुसपैठी हैं, उन्हें खदेड़ा जाएगा। सभी सरकारी कर्मचारियों को इस निर्मम सरकार ने भयभीत करके रखा है। मोदी सरकार आपके साथ खड़ी है। सरकार बनते ही यहां 7वां पे कमीशन लागू करवाएंगे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Assam Election Voting | High Turnout Impact; CM Himanta Biswa Sarma Trend

Hindi News National Assam Election Voting | High Turnout Impact; CM Himanta Biswa Sarma Trend गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुडुचेरी12 मिनट पहले कॉपी लिंक देश के दो राज्यों असम, केरलम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में गुरुवार को विधानसभा चुनाव के लिए वोट डाले गए। 1950 में असम के बनने के बाद से राज्य में सबसे ज्यादा 85.40% वोटिंग हुई। इससे पहले 2016 में 84.7% मतदान हुआ था। वहीं पुडुचेरी में आजादी के बाद सबसे ज्यादा 89.87% मतदान हुआ। इससे पहले का रिकॉर्ड 85% (2006, 2011 और 2016 विधानसभा चुनाव) का था। केरलम में पिछले 49 सालों में दूसरी सबसे ज्यादा वोटिंग हुई, यहां 78.09% वोट डाले गए। 1977 में रिकॉर्ड 79.2% मतदान हुआ था। वोटिंग परसेंट के आंकड़े 9 अप्रैल की रात 10 बजे तक के हैं। चुनाव आयोग का फाइनल आंकड़े जारी करना बाकी है। असम के 26 से ज्यादा जिलों में 80% से ऊपर वोटिंग असम में 126 सीटों पर 41 पार्टियों के 722 उम्मीदवारों का भाग्य का फैसला होगा। 35 जिलों में से 26 से ज्यादा जिलों में 80% से ऊपर वोटिंग हुई। सबसे ज्यादा 95.56% मतदान साउथ सलमारा मनकचर जिले में हुआ। सबसे कम 75.25% वोटिंग वेस्ट कार्बी एंगलोंग में हुई। सीएम हिमंता बोले- असमिया समाज वोटर की वजह से बढ़ा मतदान असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, बांग्लादेशी मूल के मुसलमान समाज का 95 से 96 प्रतिशत वोट प्रतिशत हुआ करता था लेकिन बाकि जो असमिया समाज है, वहां पर 75-76% तक का वोट प्रतिशत होता था। इस बार दोनों समाज के बीच प्रतियोगिता रही। पारंपरिक तौर पर जो समाज सक्रिय मतदान करता है उन्होंने तो ज्यादा मतदान किया ही है लेकिन जिस समाज में पारंपरिक तौर पर अधिक मतदान नहीं होता है, उस समाज ने भी बढ़-चढ़कर मतदान किया है। केरल के कोझिकोड में सबसे ज्यादा 81.32% वोटिंग केरलम में140 विधानसभा सीटों पर 2.6 करोड़ मतदाता हैं। वहीं 883 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। राज्य के 14 जिले में से दो जिलों में 80% से ऊपर मतदान हुआ। सबसे ज्यादा वोटिंग 81.32% वोटिंग कोझिकोड में हुई। वहीं सबसे कम 70.76% मतदान पथनमथिट्टा में हुआ। केरलम में 2.71 करोड़ वोटर 890 उम्मीदवारों में से अपना नेता चुन रहे हैं। भाजपा ने कहा- महिला वोटर्स की वजह से बढ़ा मतदान CPI(M) नेता सीएन मोहनन ने कहा कि जिन लोगों की मौत हो चुकी है या जो कहीं और चले गए हैं। उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इसी वजह से वोटिंग का प्रतिशत बढ़ा है। BJP नेता केएस शैजू ने कहा, हमारे एनालिसिस से पता चलता है कि इस बार ज्यादा महिला मतदाताओं ने वोट डाला है। पुडुचेरी में रिकॉर्ड 90% वोटिंग पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों में कुल 10 लाख मतदाता हैं। यहां 90% के करीब वोटिंग हुई। केंद्र शासित प्रदेश में कुल दो जिले हैं। सबसे ज्यादा 90.47% मतदान पुडुचेरी जिले में हुआ। वहीं करईकल में 86.77% वोटिंग हुई। पुडुचेरी के इतिहास में पहली बार इतनी वोटिंग हुई है। अब तीनों राज्यों में चुनावी गणित को समझें… असम: 51 साल सत्ता में काबिज रही कांग्रेस, भाजपा की हैट्रिक लगाने की कोशिश बीते 76 साल में असम में राज्य में 15 मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इनमें से सबसे लंबे समय तक कांग्रेस का दबदबा रहा। करीब 51 साल तक कांग्रेस के 10 मुख्यमंत्रियों ने सत्ता संभाली। 1978 में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। जनता पार्टी के गोलाप बोरबोरा पहले गैर-कांग्रेसी सीएम बने। लेकिन 2 साल बाद फिर कांग्रेस सत्ता में लौटी। 1985 में ‘असम गण परिषद’ नई रीजनल पार्टी के तौर पर उभरी, जिसने कांग्रेस को चुनौती दी। इसी साल AGP के प्रफुल्ल कुमार महंत सीएम बने। उन्होंने अल्टरनेटिव 2 टर्म पूरे किए। इसके बाद 2001 में कांग्रेस के तरुण गोगोई ने सत्ता संभाली। उन्होंने लगातार 3 चुनाव जीते और रिकॉर्ड 15 साल तक सीएम की कुर्सी संभाली। 2016 में पूरे नॉर्थ-ईस्ट में असम ऐसा राज्य बना, जहां बीजेपी ने पहली बार सरकार बनाई। सर्बानंद सोनोवाल सीएम बने। 2021 में लगातार दूसरी बार बीजेपी ने बहुमत हासिल किया और सत्ता संभाली हिमंता बिस्व सरमा ने। हिमंता के कांग्रेस, AGP और बीजेपी तीनों से रिश्ते हैं। वे AGP के प्रफुल्ल कुमार महंत के राजनीतिक शिष्य, कांग्रेस के तरुण गोगोई के भरोसेमंद सिपहसालार और बीजेपी में नॉर्थ-ईस्ट का चेहरा हैं। केरल: केवल पिनराई विजयन लगातार 2 बार सीएम बने 1956 में केरलम के गठन के बाद से अब तक राज्य में 12 मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इनमें से 6 सीएम लेफ्ट के रहे, जिन्होंने 39 साल सत्ता संभाली। वहीं 4 सीएम कांग्रेस के बने, जिन्होंने 28 साल सरकार चलाई। CPI(M) के ई.के. नयनार सबसे लंबे समय तक 11 साल सीएम रहे। उन्होंने 3 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन लगातार कभी कुर्सी नहीं संभाली। 1980 में UDF बनाम LDF की राजनीति शुरु हुई। बीते 46 साल से दोनों ने बारी-बारी सरकार चलाई, लेकिन 2021 में ये अनकही परंपरा टूट गई। 2021 में CPI(M) के पिनराई विजयन ने बतौर सीएम पहला कार्यकाल पूरा कर दोबारा सत्ता संभाली। 70 साल में केवल विजयन ऐसे सीएम ही हैं, जिन्होंने लगातार 2 बार शपथ ली। पुडुचेरी में 10 में से 7 सीएम कांग्रेस के रहे 1963 में पुडुचेरी विधानसभा का गठन हुआ। तब से अब तक यहां 10 मुख्यमंत्री रह चुके हैं। यहां की राजनीति केंद्र के प्रभाव और स्थानीय गठबंधनों के हिसाब से चलती है। इसी के चलते पुडुचेरी के 7 सीएम कांग्रेस से रहे, जिन्होंने करीब 32 साल सत्ता संभाली। फिर 1970 के दशक में DMK और AIADMK जैसी द्रविड़ पार्टियों की एंट्री हुई। DMK ने 4 बार और AIADMK ने 2 बार सरकार बनाई। इसके बाद फिर कांग्रेस का शासन शुरू हुआ, जो 2011 तक चला। लेकिन कांग्रेस के कद्दावर नेता एन. रंगासामी ने खुद की पार्टी AINRC बना ली और चुनाव जीतकर सत्ता संभाली। एन. रंगासामी एक नेता हैं, जिन्होंने कांग्रेस में रहते हुए और फिर अपनी की पार्टी AINRC बनाकर कुल 4 बार सीएम पद की शपथ ली। 2021 में रंगासामी ने बीजेपी के साथ अलायंस किया और सरकार बनाई। रंगासामी सबसे लंबे वक्त तक करीब 17 साल से सीएम हैं। हालांकि ये लगातार नहीं है। वोटिंग की 6 तस्वीरें… असम में वोट डालने के लिए महिलाएं अपने छोटे बच्चों को साथ में
केरल में शांत उलटी गिनती: जैसे ही चुनाव प्रचार समाप्त हुआ, ‘व्हाट्सएप वोट’ और ‘डिजिटल प्रॉक्सी’ पर ध्यान केंद्रित करें | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:07 अप्रैल, 2026, 18:18 IST चुनाव प्रचार के अंतिम 72 घंटों में, पश्चिम एशिया में संघर्ष की छाया केरल के 9 अप्रैल के चुनाव के लिए एक माध्यमिक चर्चा के बिंदु से प्राथमिक कथा की ओर बढ़ गई। चुनाव प्रचार ख़त्म होते ही ‘प्रवासी’ वोट पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं. प्रतीकात्मक तस्वीर/पीटीआई केरल भर में उच्च-डेसिबल रैलियों, “कलासकोट्टू” जुलूसों और गहन रोड शो का शोर आधिकारिक तौर पर मंगलवार शाम को समाप्त हो गया। यह राज्य में गुरुवार को उच्च जोखिम वाले एकल-चरण विधानसभा चुनाव के लिए मतदान से पहले अनिवार्य 48 घंटे की “मौन अवधि” की शुरुआत का प्रतीक है। एक ऐसे राज्य के लिए जो अपनी उच्च मतदाता साक्षरता और गहरी जड़ें जमा चुकी राजनीतिक निष्ठाओं के लिए जाना जाता है, 2026 का अभियान हाल के इतिहास में सबसे अप्रत्याशित में से एक रहा है, जिसे पारंपरिक स्थानीय शिकायतों की तुलना में वैश्विक आर्थिक चिंताओं और नए राजनीतिक व्यवधानों के प्रवेश द्वारा अधिक परिभाषित किया गया है। जैसे-जैसे लाउडस्पीकरों की स्थिरता कम होती जाती है, ध्यान “मूक प्रभाव” चरण पर केंद्रित हो जाता है, जहां पार्टी कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करने के लिए घर-घर जाकर प्रचार करते हैं कि प्रत्येक पंजीकृत मतदाता बूथ तक पहुंचे। 140 निर्वाचन क्षेत्रों पर कब्ज़ा होने के साथ, परिणाम यह निर्धारित करेंगे कि क्या वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) लगातार तीसरी बार ऐतिहासिक कार्यकाल हासिल कर सकता है या क्या यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) अपने पारंपरिक वैकल्पिक शक्ति चक्र को पुनः प्राप्त कर सकता है। पश्चिम एशिया संघर्ष ने अंतिम अभियान को कैसे बदल दिया है? चुनाव प्रचार के अंतिम 72 घंटों में, पश्चिम एशिया में संघर्ष की छाया एक माध्यमिक चर्चा बिंदु से प्राथमिक कथा की ओर बढ़ गई। केरल, एक राज्य जो वार्षिक प्रेषण में 2.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त करता है, खाड़ी में समुद्री अवरोधों के कारण आय में अनुमानित 20% की गिरावट का सामना कर रहा है। इस आर्थिक “सदमे” ने सभी प्रमुख गठबंधनों को अपने घोषणापत्रों को “आजीविका सुरक्षा” की ओर मोड़ने के लिए मजबूर किया। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने अभियान के अंतिम दिन एलडीएफ को “स्थिरता ढाल” के रूप में बिताए, जिसमें लौटने वाले प्रवासियों का समर्थन करने के लिए राज्य के कल्याण सुरक्षा जाल का विस्तार करने का वादा किया गया। इसके विपरीत, वीडी सतीसन के नेतृत्व में यूडीएफ नेतृत्व ने राज्य का औद्योगीकरण करने में विफल रहने के लिए सरकार पर हमला किया और तर्क दिया कि युद्ध ने अस्थिर पश्चिम एशिया पर केरल की खतरनाक अति-निर्भरता को उजागर कर दिया है। इस बीच, भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने अंतिम घंटों का उपयोग केंद्र सरकार के सफल निकासी प्रोटोकॉल और “वंदे भारत” की तैयारी को उजागर करने के लिए किया, जिसका लक्ष्य ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे संघर्ष क्षेत्रों में अपने रिश्तेदारों के लिए चिंतित मध्यमवर्गीय परिवारों पर जीत हासिल करना है। इस वर्ष ‘तीसरे मोर्चे’ के विघ्नकर्ताओं का क्या महत्व है? 2026 के अभियान में सबसे उल्लेखनीय बदलावों में से एक अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व में तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) का दृश्यमान प्रभाव रहा है। जबकि पार्टी मुख्य रूप से तमिलनाडु में स्थित है, इसका “थलपति” प्रभाव सीमावर्ती जिलों पलक्कड़, इडुक्की और तिरुवनंतपुरम में काफी कम हो गया है। “कॉर्पोरेट-स्वच्छ” प्रशासन और हाई-टेक रोजगार सृजन पर टीवीके का ध्यान युवा जनसांख्यिकीय के साथ प्रतिध्वनित हुआ है जो बारहमासी एलडीएफ-यूडीएफ प्रतिद्वंद्विता से मोहभंग महसूस करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भले ही टीवीके महत्वपूर्ण संख्या में सीटें नहीं जीत सके, लेकिन कड़े त्रिकोणीय मुकाबलों में 5% से 8% वोट खींचने की इसकी क्षमता प्रमुख मोर्चों के लिए “बिगाड़ने” का काम कर सकती है। इस वर्ष, “युवा वोट” केवल विचारधारा के बारे में नहीं है; यह अर्धचालकों, डेटा केंद्रों और बेंगलुरु में “प्रतिभा पलायन” को रोकने के बारे में है। अंतिम रैलियों में टीवीके और एनडीए कार्यक्रमों में भाग लेने वाले युवा मतदाताओं में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई, जिससे पता चलता है कि केरल की राजनीति की पारंपरिक द्विध्रुवीय प्रकृति दशकों में सबसे बड़े तनाव में है। क्या एनआरआई मतदान में गिरावट ‘बहुत पतली’ सीटों का फैसला करेगी? जैसे-जैसे चुनाव प्रचार ख़त्म हो रहा है, “प्रवासी” वोटों पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, वडकारा और पोन्नानी जैसे “स्विंग” निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करने के लिए 50,000 मलयाली खाड़ी से घर आते हैं। हालाँकि, युद्धकालीन आसमान छूते हवाई किराए और क्षेत्रीय यात्रा प्रतिबंधों के कारण, इस वर्ष यह संख्या 5,000 से कम होने की उम्मीद है। यह अनुपस्थिति यूडीएफ और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है, जो परंपरागत रूप से केएमसीसी द्वारा आयोजित “वोट उड़ानों” पर भरोसा करते हैं। इसकी भरपाई के लिए, अभियान के अंतिम घंटों में “डिजिटल प्रॉक्सी” वोटिंग की ओर बड़े पैमाने पर बदलाव देखा गया। पार्टियों ने खाड़ी स्थित मलयाली लोगों को लक्षित करते हुए उच्च-उत्पादन वाली व्हाट्सएप सामग्री तैनात की है, जिसमें उनसे वीडियो कॉल के माध्यम से अपने परिवार के सदस्यों को प्रभावित करने का आग्रह किया गया है। ऐसे राज्य में जहां जीत अक्सर 1,000 से कम वोटों से तय होती है, दुबई में एक बेटे का “व्हाट्सएप वोट” केरल की धरती पर आयोजित किसी भी रैली से अधिक निर्णायक साबित हो सकता है। पहले प्रकाशित: 07 अप्रैल, 2026, 18:18 IST समाचार चुनाव केरल में शांत उलटी गिनती: चुनाव प्रचार समाप्त होते ही, ‘व्हाट्सएप वोट’ और ‘डिजिटल प्रॉक्सी’ पर ध्यान केंद्रित करें अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल चुनाव(टी)व्हाट्सएप(टी)केरल चुनाव(टी)पश्चिम एशिया(टी)वोटिंग(टी)एलडीएफ(टी)यूडीएफ
CEC Removal Notice | Opposition Alleges Govt Control, Voting Rights Snatch

Hindi News National CEC Removal Notice | Opposition Alleges Govt Control, Voting Rights Snatch नई दिल्ली24 मिनट पहले कॉपी लिंक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार- फाइल फोटो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में विपक्षी सांसदों ने नोटिस दिया है। लोकसभा-राज्यसभा में लाए गए नोटिस में CEC पर 7 आरोप है लगाए गए हैं। यह कहा गया है कि वे सरकार के इशारे पर काम करते हैं। विपक्ष का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने SIR के जरिए लोगों के वोट देने के अधिकार छीन लिया। नोटिस में उनकी नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं। 12 मार्च को संसद के दोनों सदन में जमा किए गए नोटिस में CEC के खिलाफ साबित दुर्व्यवहार के आधार पर उन्हें हटाने की मांग की गई है। लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 विपक्षी सांसदों ने CEC को हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने की भी मांग की है। CEC के खिलाफ विपक्ष के 7 आरोप विपक्ष के आरोपों में कुमार की CEC के तौर पर नियुक्ति की प्रक्रिया, 17 अगस्त 2025 को राहुल गांधी को निशाना बनाते हुए उनकी पक्षपातपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस, विपक्ष और सत्ताधारी दल के सदस्यों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार, जांच में बाधा डालना, पारदर्शिता के साधन उपलब्ध कराने से इनकार करना और सत्ताधारी दल के राजनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया को लागू करना शामिल है। यह दावा किया जा रहा है कि विपक्ष मानसूत्र सत्र के दौरान CEC के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव ला सकता है। महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी होता है। पढ़ें विपक्ष के नोटिस की बड़ी बातें… चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल: विपक्ष CEC ने ECI को एक निष्पक्ष चुनावी संस्था से बदलकर, कार्यपालिका के राजनीतिक एजेंडे को लागू करने वाले एक ‘माध्यम’ में बदल दिया है। उन्होंने इसे एक निष्पक्ष चुनाव कराने वाली संस्था से बदलकर, नागरिकता तय करने वाले एक ट्रिब्यूनल में तब्दील कर दिया है। बिहार चुनाव से पहले SIR की शर्तें थोपीं: बिहार विधानसभा चुनावों से ठीक 5 महीने पहले की गई SIR की प्रक्रिया ने दस्तावेजों से जुड़ी ऐसी शर्तें थोप दी थीं, जिनका नतीजा हुआ कि समाज के सबसे कमजोर तबकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। 65 लाख वोटर्स इससे प्रभावित हुए। पक्षपाती मानसिकता और कार्यशैली: CEC ने बड़े राज्यों में जहां 2-3 महीने में चुनाव होने थे, वहां SIR की प्रक्रिया रॉकेट जैसी तेजी से की। समय-सीमा पर दोबारा विचार करने को लेकर अड़ियल रवैया रखा। लोगों की तकलीफों को लेकर पूरी तरह से असंवेदनशीलता रहे। विपक्ष की हर गुहार को जान-बूझकर नजरअंदाज किया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔







