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DUSU Election 2026 LIVE | Delhi University Student Union Voting Updates

DUSU Election 2026 LIVE | Delhi University Student Union Voting Updates

Hindi News Career DUSU Election 2026 LIVE | Delhi University Student Union Voting Updates 11 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) चुनाव 2026 के लिए मतदान 18 सितंबर यानी आज होगा। जबकि वोटों की गिनती 19 सितंबर को की जाएगी। केवल एलिजिबल डीयू छात्र ही मतदान कर सकेंगे। वोटिंग के लिए डीयू का आईडी कार्ड जरूरी रहेगा। इस चुनाव में सुरक्षा के इंतजामों को देखते हुए कॉलेजों और विभागों के बाहर पुलिस तैनात रहेगी। संवेदनशील स्थानों पर गश्त और महिला कॉलेजों में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती का इंतजाम भी किया गया है। प्रचार का तरीका AI बेस्ड दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 में प्रचार का तरीका इस बार पूरी तरह बदल गया है। डीयू प्रशासन की सख्ती के कारण छात्र संगठनों ने कागजी पोस्टरों की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सोशल मीडिया रील्स के जरिये प्रचार किया है। इस साल डूसू चुनाव की जंग बेहतर और रचनात्मक प्रॉम्प्ट से लड़ी जा रही है। युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए उम्मीदवारों ने शॉर्ट वीडियोज, मीम्स और रील्स को अपना हथियार बनाया। 17 सितंबर को कॉलेज में पहुंची ईवीएम डीयू में मतदान से एक दिन पहले यानी 17 सितंबर को कॉलेजों तक ईवीएम पहुंचाने की प्रोसेस पूरी हुई। इसके लिए ट्रेंड मास्टर ट्रेनरों की तैनाती की गई है। मतदान का समय कॉलेज शिफ्ट के अनुसार अलग अलग रखा गया है। डे क्लास के लिए सुबह साढ़े 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक समय तय किया गया है। वहीं इनविंग क्लास के लिए दोपहर 3 बजे से शाम को साढ़े 7 बजे तक का समय तय है। मतदान केंद्रों पर खास प्रबंध मतदान केंद्रों पर छात्रों की सुविधा का विशेष ध्यान रखने के प्रबंध किए गए हैं। मतदान केंद्र पर छात्रों की कतार व्यवस्थित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी और स्वयंसेवक लगाए गए हैं। प्रवेश और निकास के लिए अलग अलग रास्तों का इंतजाम किया गया है। छात्रों को गर्मी और भीड़ से बचाने के लिए पानी और छांव की व्यवस्था की गई है। प्राथमिक उपचार का प्रबंध भी किया गया है। मतदान केंद्र पर आईडी वेरिफिकेशन जरूरी डूसू चुनाव में बड़ी संख्या में छात्रा मतदाता होते हैं। ऐसे में मतदान केंद्र पर सही वोटर्स की पहचान तय करना भी इस चुनाव का खास हिस्सा है। इसी वजह से यूनिवर्सिटी ने आइडेंटिटी वेरिफिकेशन और एंट्री की व्यवस्था पर खास ध्यान दिया है। 13 अगस्त को जारी हुआ चुनाव कार्यक्रम DU ने 13 अगस्त को DUSU इलेक्शन 2026-27 का चुनाव कार्यक्रम जारी किया था। इसी महीने में चुनाव आचार संहिता और कैंपेनिंग के नियम लागू किए गए। इसमें पेपरलेस कैंपेन, डिजिटल/वीडियो प्रचार पर जोर दिया गया है। साल 2025 में 1.55 लाख से ज्यादा छात्र वोटिंग में शामिल पिछले साल डूसू चुनाव में लगभग 1.55 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने वोट दिया था। इस चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP के आर्यन मान प्रेसिडेंट चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस बैक्ड नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया यानी NSUI की जोसलीन नंदिता चौधरी को 16,196 वोटों से हराया था। पिता और भाई मशहूर शराब व्यवसायी आर्यन मान बिजनेस परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता, सिकंदर मान बहादुरगढ़ स्थित ADS ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। ये कंपनी मशहूर रॉयल ग्रीन शराब बनाती है। आर्यन के बड़े भाई विराट मान ADS स्पिरिट्स प्राइवेट लिमिटेड के CEO हैं। साथ ही, वो रोकोब्रांड के फाउंडर भी हैं। स्पोर्ट्स कोटे से एडमिशन हुआ 2 नेशनल सर्टिफिकेट के आधार पर मान का एडमिशन स्पोर्ट्स कोटे से दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज में हुआ। उस समय कोविड चल रहा था। ऐसे में पहले साल ऑनलाइन मोड क्लासेस अटेंड की और ओपन बुक एग्जाम में शामिल हुए। हंसराज में रहते हुए जॉइन किया ABVP हंसराज कॉलेज जॉइन करने के 1 सप्ताह के भीतर ही उन्हें स्पोर्ट्स इक्विपमेंट्स की कमी महसूस हुई। इक्विपमेंट नहीं मिलने के चलते उन्होंने कॉलेज प्रिंसिपल को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया। फिर अपने साथियों के साथ आवेदन लेकर प्रिंसिपल को सौंपने गए। जब वे प्रिंसिपल ऑफिस की तरफ जा रहे थे, उसी दौरान रास्ते में ABVP के सपोर्टर्स और ऑफिस बियरर्स से मुलाकात हुई। उनके हाथों में पोस्टर और बैनर थे, जिस पर तीसरे लाइन में स्पोर्ट्स इक्विपमेंट प्रोवाइड करने की डिमांड लिखी थी। ये देखकर मान को लगा कि जो स्टूडेंट विंग हमारी मांग या जरूरत को अपना मुद्दा बनाता है, उससे जुड़ना बेहतर रहेगा। उसी दौरान वे ABVP से जुड़े। डीयू इलेक्शन कमीशन द्वारा जारी किया गया नोटिफिकेशन ———————————————————————————– ये खबर भी पढ़ें इंडियन आर्मी में अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी:ट्राइबल कम्युनिटी और धार्मिक टैटू बनवा सकते हैं, ये 6 तरह के टैटू प्रतिबंधित इंडियन आर्मी ने अग्निवीर रैली के लिए टैटू पॉलिसी जारी की है। इसमें बताया गया है कि शरीर पर कहां टैटू बनवाया जा सकता है और कहां नहीं। अग्निवीर भर्ती में शारीरिक गतिविधियों के साथ उम्मीदवारों के पूरे शरीर की जांच की जाती है। साथ में शरीर पर टैटू भी देखा जाता है क्योंकि सेना में टैटू को लेकर कड़े नियम तय किए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

US Supreme Court Rejects Trump Mail Voting Rules

US Supreme Court Rejects Trump Mail Voting Rules

वॉशिंगटन29 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डाक से वोटिंग के नियम सख्त करने की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कोशिश पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सोमवार को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला 7-2 रहा। दो जजों ने इसका विरोध किया। मामला नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव से जुड़ा है। ट्रम्प ने मार्च में आदेश जारी किया था। वे चाहते थे कि डाक से वोट भेजने वाले लोगों की लिस्ट राज्यों को अमेरिकी डाक सेवा (USPS) को दी जाए। ट्रम्प का कहना था कि डाक से वोटिंग में गड़बड़ी रोकने के लिए नए नियम जरूरी हैं। विरोध करने वालों ने कहा कि इन नियमों से सही वोट भी रुक सकते हैं और राष्ट्रपति राज्यों के चुनावी सिस्टम में जरूरत से ज्यादा दखल दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ट्रम्प के नियम लागू करने की अनुमति नहीं दी। ट्रम्प के नियम के तहत USPS रोक सकता था बैलेट अगर कोई बैलेट नए नियमों के मुताबिक नहीं होता या वोट देने वाले का नाम तय लिस्ट में नहीं मिलता, तो USPS उस बैलेट को रोक सकता था। डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार वाले राज्यों और वोटिंग अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इन नियमों का विरोध किया था। उनका कहना था कि इससे चुनाव के दौरान लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। कोर्ट ने समय पर उठाया सवाल डाक से वोटिंग के मामले पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल समय का था। नवंबर के चुनाव में अब कुछ समय बचा है और कई राज्यों में बैलेट भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जस्टिस ब्रेट कावानॉ ने कहा कि ट्रंप की योजना भविष्य में लागू की जा सकती है, लेकिन नवंबर के चुनाव से ठीक पहले इसे लागू करना मुश्किल है। चुनाव अधिकारियों के पास नई व्यवस्था तैयार करने और उसे लागू करने के लिए जरूरी समय नहीं है। डाक से वोटिंग पर ट्रम्प ने पहले भी उठाए सवाल 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद ट्रम्प ने डाक से वोटिंग पर सवाल उठाए थे। वह बिना सबूत यह दावा करते रहे कि चुनाव में गड़बड़ी हुई थी और उनसे जीत छीन ली गई। हालांकि, ट्रंप खुद भी डाक से वोट डाल चुके हैं। इस साल फ्लोरिडा के रिपब्लिकन प्राइमरी में उन्होंने मेल से वोट किया था। USPS ने भी ट्रंप के फैसले पर जताई थी चिंता ट्रंप की नई व्यवस्था को लेकर USPS के एक व्हिसलब्लोअर ने भी चिंता जताई थी। उसने कहा था कि नई तकनीकी व्यवस्था जल्दबाजी में तैयार की गई है। अगर इसमें कोई गड़बड़ी हुई तो लाखों लोगों के बैलेट समय पर नहीं पहुंच पाएंगे। नई व्यवस्था में बैलेट के लिफाफे पर मौजूद बारकोड और मतदाता की जानकारी को एक ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ना था। चुनाव से कुछ हफ्ते पहले इतना बड़ा बदलाव अधिकारियों के लिए भी चुनौती था। ट्रम्प के 5 और फैसलों पर SC की रोक टैरिफ – फरवरी 2026 सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ को अवैध ठहराया और कहा कि राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। इलिनॉय में नेशनल गार्ड – दिसंबर 2025 सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प सरकार को इलिनॉय में नेशनल गार्ड तैनात करने की तत्काल अनुमति नहीं दी। बर्थराइट सिटीजनशिप – जून 2026 ट्रम्प ने अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा कानून राष्ट्रपति को ऐसा बदलाव करने की इजाजत नहीं देता। बर्थ टूरिज्म – सितंबर 2026 सुप्रीम कोर्ट से बर्थराइट सिटीजनशिप पर झटका लगने के बाद ट्रम्प ने बर्थ टूरिज्म रोकने और कुछ मामलों में बच्चों की नागरिकता सीमित करने के लिए नया आदेश जारी किया, लेकिरन कोर्ट ने इस पर भी रोक लगा दी। फेड गवर्नर को हटाने का मामला – जून 2026 ट्रम्प ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को पद से हटाने की कोशिश की थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि फेड गवर्नर को राष्ट्रपति बिना उचित कानूनी कारण और तय प्रक्रिया के नहीं हटा सकते। ————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-मिडटर्म चुनाव जीता तो हर वोटर को ₹5 लाख: इस पर ₹128 लाख करोड़ खर्च करने होंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव में अगर रिपब्लिकन पार्टी बहुमत बरकरार रखती है, तो हर बालिग अमेरिकी को 5000 डॉलर (करीब 4.76 लाख रुपए) दिए जाएंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

PoK Assembly Election 2026 | Voting Begins in Three Phases

PoK Assembly Election 2026 | Voting Begins in Three Phases

13 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को विधानसभा चुनाव का पहला चरण हैं। पाकिस्तानी चुनाव आयोग के मुताबिक, मौजूदा सुरक्षा हालात और विरोध प्रदर्शनों के देखते हुए यह चुनाव तीन चरणों में होंगे। पहला 27 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त और तीसरा 10 अगस्त को मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान होगा। दो अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों और पाकिस्तान में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण में 10 अगस्त को पूंछ डिवीजन की 11 सीटों पर मतदान होगा। PoK में कई महीनों से चल रहा है विरोध प्रदर्शन PoK में पिछले कई महीनों से महंगाई, बिजली के बढ़े हुए बिल, सरकारी नीतियों और राजनीतिक दखल के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुआई जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) कर रही है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है। महंगाई के विरोध से शुरू हुआ ये आंदोलन, अब पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई जगह बल प्रयोग किया, रास्ते बंद किए और संचार सेवाएं रोक दीं। उनका कहना है कि इससे खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की भी कमी हो गई। कई प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी हटाने और क्षेत्र की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। PoK में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जून में प्रदर्शन करते स्थानीय लोग। (यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।) 12 शरणार्थी सीटों पर सबसे ज्यादा विवाद विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें भी हैं। ये सीटें पाकिस्तान में रहने वाले उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो दशकों पहले कश्मीर से वहां गए थे। JKJAAC और कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की सरकार चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है। इससे स्थानीय लोगों की राय कमजोर पड़ जाती है और केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस बार के चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब लोगों का बड़ा वर्ग पाकिस्तान सरकार की नीतियों से नाराज है। इसी वजह से चुनाव की निष्पक्षता और उसके नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, PoK के चुनाव आयुक्त गुलाम मुस्तफा मुगल ने बताया कि मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और सेना तैनात रहेगी। क्या चुनाव से खत्म होगी नाराजगी? एक्सपर्ट्स का मानना है कि मतदान तो हो जाएगा और वोटिंग भी हो सकती है, लेकिन इससे लोगों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। महंगाई, बिजली, राजनीतिक अधिकार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पाकिस्तान की भूमिका जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। ऐसे में चुनाव के बाद भी PoK में राजनीतिक तनाव जारी रहने की आशंका जताई जा रही है। भारत ने चुनाव पर विरोध दर्ज कराया भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत ने PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनावों पर पहले भी कई बार पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इन क्षेत्रों की तथाकथित विधानसभाओं को मान्यता नहीं दी है। मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हालात पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भी हिंसा में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK में मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। नवाज शरीफ ने PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई चुनावी माहौल के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) प्रमुख नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद की चुनावी रैली में कहा कि अगर उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे ताकि वे खुद इलाके के विकास की निगरानी कर सकें। नवाज शरीफ ने कहा कि PoK उनके लिए पंजाब जितना ही प्रिय है और उनके पूर्वज कश्मीर से आए थे। उन्होंने कहा कि यह उनका दूसरा घर है। इस चुनाव में PML-N का मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से है। खास बात यह है कि PPP इस समय केंद्र सरकार में PML-N की सहयोगी भी है। 2021 में इमरान खान की पार्टी ने बनाई थी सरकार PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

PoK Assembly Election 2026 | Voting Begins in Three Phases

PoK Assembly Election 2026 | Voting Begins in Three Phases

30 मिनट पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को विधानसभा चुनाव का पहला चरण हैं। पाकिस्तानी चुनाव आयोग के मुताबिक, मौजूदा सुरक्षा हालात और विरोध प्रदर्शनों के देखते हुए यह चुनाव तीन चरणों में होंगे। पहला 27 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त और तीसरा 10 अगस्त को मतदान कराया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान होगा। दो अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों और पाकिस्तान में रहने वाले शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंतिम चरण में 10 अगस्त को पूंछ डिवीजन की 11 सीटों पर मतदान होगा। PoK में कई महीनों से चल रहा है विरोध प्रदर्शन PoK में पिछले कई महीनों से महंगाई, बिजली के बढ़े हुए बिल, सरकारी नीतियों और राजनीतिक दखल के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की अगुआई जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) कर रही है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों की मौत हुई है। महंगाई के विरोध से शुरू हुआ ये आंदोलन, अब पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने कई जगह बल प्रयोग किया, रास्ते बंद किए और संचार सेवाएं रोक दीं। उनका कहना है कि इससे खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की भी कमी हो गई। कई प्रदर्शनकारी पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी हटाने और क्षेत्र की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं। PoK में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जून में प्रदर्शन करते स्थानीय लोग। (यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।) 12 शरणार्थी सीटों पर सबसे ज्यादा विवाद विरोध प्रदर्शनों की एक बड़ी वजह विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें भी हैं। ये सीटें पाकिस्तान में रहने वाले उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो दशकों पहले कश्मीर से वहां गए थे। JKJAAC और कई स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की सरकार चुनावी नतीजों को प्रभावित करती है। इससे स्थानीय लोगों की राय कमजोर पड़ जाती है और केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, इस बार के चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब लोगों का बड़ा वर्ग पाकिस्तान सरकार की नीतियों से नाराज है। इसी वजह से चुनाव की निष्पक्षता और उसके नतीजों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं, PoK के चुनाव आयुक्त गुलाम मुस्तफा मुगल ने बताया कि मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षा बल और सेना तैनात रहेगी। क्या चुनाव से खत्म होगी नाराजगी? एक्सपर्ट्स का मानना है कि मतदान तो हो जाएगा और वोटिंग भी हो सकती है, लेकिन इससे लोगों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा। महंगाई, बिजली, राजनीतिक अधिकार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पाकिस्तान की भूमिका जैसे मुद्दे अभी भी बने हुए हैं। ऐसे में चुनाव के बाद भी PoK में राजनीतिक तनाव जारी रहने की आशंका जताई जा रही है। भारत ने चुनाव पर विरोध दर्ज कराया भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश, जिनमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल हैं, भारत के अभिन्न हिस्से हैं। भारत ने PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले चुनावों पर पहले भी कई बार पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इन क्षेत्रों की तथाकथित विधानसभाओं को मान्यता नहीं दी है। मानवाधिकार संगठनों जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने हालात पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने भी हिंसा में हुई मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से PoK में मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। नवाज शरीफ ने PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई चुनावी माहौल के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) प्रमुख नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद की चुनावी रैली में कहा कि अगर उनकी पार्टी चुनाव जीतती है तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने के लिए कहेंगे ताकि वे खुद इलाके के विकास की निगरानी कर सकें। नवाज शरीफ ने कहा कि PoK उनके लिए पंजाब जितना ही प्रिय है और उनके पूर्वज कश्मीर से आए थे। उन्होंने कहा कि यह उनका दूसरा घर है। इस चुनाव में PML-N का मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से है। खास बात यह है कि PPP इस समय केंद्र सरकार में PML-N की सहयोगी भी है। 2021 में इमरान खान की पार्टी ने बनाई थी सरकार PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

West Bengal Election 2026 Voting Violence Video; Mamata Banerjee BJP TMC

West Bengal Election 2026 Voting Violence Video; Mamata Banerjee BJP TMC

Hindi News National West Bengal Election 2026 Voting Violence Video; Mamata Banerjee BJP TMC | Kolkata Hooghly Howrah Polling Booth Photos 6 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल में दूसरे फेज की वोटिंग के दौरान कई विधानसभा सीटों पर हिंसा और मारपीट की घटनाएं सामने आईं। नादिया जिले के छपरा में भाजपा एजेंट ने TMC कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया। वहीं शांतिपुर में भाजपा कैंप पर भी हमला हुआ है। बीजपुर में निर्दलीय प्रत्याशी और काउंसलर के बीच मारपीट हो गई। श्यामपुकुर में भाजपा उम्मीदवार के खिलाफ प्रदर्शन किया। BJP उम्मीदवार रत्ना देबनाथ ने TMC कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया है। 1. नादिया के छपरा में BJP एजेंट पर हमला नादिया जिले की छपरा विधानसभा सीट के हतरा पंचायत में BJP पोलिंग एजेंट मोशर्रफ मीर ने TMC के कार्यतर्ताओं पर सुबह करीब 5.30 बजे पर लोहे की रॉड और बंदूकों से हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि छपरा पुलिस ने उन्हें बचाया और छपरा ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उनका इलाज चल रहा है और उनके सिर पर छह टांके लगे हैं। 2. बीजपुर में निर्दलीय प्रत्याशी और पार्षद के बीच मारपीट बीजपुर में TMC पार्षद और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मारपीट हो गई। कांचरापाड़ा नगर पालिका के पार्षद कल्याण कर पोलिंग बूथ के 100 मीटर के दायरे में खड़े थे बीजेपी और निर्दलीय उम्मीदवार से उनकी बहस शुरू हो गई। इसके बाद निर्दलीय प्रत्याशी और TMC पार्षद के बीच मारपीट हो गई। पुलिस ने बीच बचाव किया और भीड़ को तितर-बितर किया। 3. साउथ 24 परगना में BJP उम्मीदवार की कार में तोड़फोड़ साउथ 24 परगना जिले में बसंती के बूथ नंबर 76 पर बीजेपी उम्मीदवार विकास सरदार ने कहा कि टीएमसी के गुंड़ों ने उनकी कार के शीशे तोड़ दिए। उनके सुरक्षाकर्मी की बंदूक छीनने की कोशिश भी की गई। घटना के बाद इलाके में तनाव है। 4. हुगली में TMC और ISF कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट हुई हुगली जिले के खानकुल में राजहाटी-1 पंचायत के रामचंद्रपुर में बूथ नंबर 147 पर नकली पोलिंग एजेंट नियुक्त करने के आरोपों को लेकर तनाव के कारण TMC और ISF समर्थकों के बीच मारपीट हो गई। 5. BJP उम्मीदवार रत्ना देबनाथ का आरोप- TMC के गुंडों ने हमला किया पानीहाटी में BJP उम्मीदवार रत्ना देबनाथ ने कहा- मैं अंदर गई, सब ठीक था, जब मैं बाहर आई तो देखा कि एक बुज़ुर्ग महिला, जिसके पैर में दर्द था और वह ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी, मुझे बुरा लगा और मैंने अपने सामने खड़े किसी व्यक्ति से कहा कि उसकी मदद करो। 10 मीटर के अंदर TMC के गुंडों ने मुझ पर हमला किया और कहा कि वे मुझे बाहर नहीं जाने देंगे। 6. श्यामपुकुर में BJP कैंडिडेट पूर्णिमा के खिलाफ प्रदर्शन श्यामपुकुर विधानसभा क्षेत्र में बूथ नंबर 100 और 101 पर BJP उम्मीदवार पूर्णिमा चक्रवर्ती के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया, जिससे इलाके में तनाव फैल गया। 7. भाजपा बोली- EVM में BJP की बटन पर टेप लगाकर बंद किया भाजपा ने आरोप लगाया है कि डायमंड हार्बर के फाल्टा में EVM में BJP का बटन टेप लगाकर ब्लॉक किया गया है। इलेक्शन कमीशन के सूत्रों ने कहा कि अगर शिकायत सही पाई गई तो फिर से मतदान कराया जाएगा। 8. नादिया में भाजपा कैंप पर हमला नादिया जिले में शांतिपुर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 16 के स्टीमर घाट इलाके में BJP कैंप पर हमले का मामला सामने आया है। दावा है कि कुछ बदमाशों ने बूथ नंबर 221 पर कैंप को निशाना बनाया। 9. हावड़ा में EVM में गड़बड़ी के बाद हंगामा हावड़ा के बाली में EVM में गड़बड़ी की बात को लेकर हंगामा हो गया है। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे 2 लोगों को CRPF ने हिरासत में लिया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bengal & TN Election Voting: Violence, BJP MLA Attack

Bengal & TN Election Voting: Violence, BJP MLA Attack

कोलकाता/चेन्नई1 घंटे पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार को रिकॉर्ड वोटिंग हुई। बंगाल की 294 में से 152 सीटों पर पहले फेज में 92.72% मतदान हुआ। दो भाजपा कैंडिडेट पर हमला हुआ। एक को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। वहीं, मुर्शिदाबाद के नौदा में बुधवार देर रात देसी बम से हमले में कई लोग घायल हो गए। नादौ में हुमायूं कबीर और उनके समर्थकों की टीएमसी के कार्यकर्ताओं के साथ झड़प हुई। वे नौदा के बाद जहां-जहां भी गए, वहां झड़प और हिंसा की घटनाएं हुईं। तमिलनाडु की सभी 234 सीटों पर 85.14% वोटिंग हुई। दोनों राज्यों में आजादी के बाद अब तक सबसे ज्यादा वोटिंग हुई है। इससे पहले तमिलनाडु में सबसे ज्यादा मतदान 2011 में 78.29% था, जबकि बंगाल में 2011 में 84.72% मतदान दर्ज किया गया था। ममता ने वोटिंग के बाद कहा कि बंगाल की जनता ने SIR के खिलाफ बंपर वोटिंग की है। गृह मंत्री शाह ने कहा कि TMC का सूरज ढल चुका है। इससे पहले असम, केरलम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को एकसाथ आएंगे। पूरी खबर पढ़ें… SIR के बाद वोटिंग बढ़ने का ट्रेंड बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड वोटिंग की वजह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) भी मानी जा रही है। इसी साल 9 अप्रैल को केरल, असम, पुडुचेरी और नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव में भी रिकॉर्ड मतदान हुआ था। केरलम में 78.27% वोटिंग के साथ 39 साल का रिकॉर्ड टूटा था। असम में 85.91%, बिहार में 66.90% और पुडुचेरी 89.87% में इतिहास की सबसे ज्यादा वोटिंग हुई। बंगाल-तमिलनाडु की तरह इन राज्यों-केंद्र शासित प्रदेश में SIR हुई है। पश्चिम बंगाल में पहली बार 90% से ज्यादा वोटिंग बंगाल में वोट प्रतिशत बढ़ने की 4 वजह SIR: राज्य में 91 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए, जिससे कुल मतदाता संख्या घट गई है। आंकड़े बताते हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव में इन्हीं 152 सीटों पर वोटिंग करीब 80% और 2021 विधानसभा चुनाव में करीब 82.17% रही थी। यानी कुल मतदाता घटे, लेकिन वोट डालने वालों की संख्या लगभग बराबर या ज्यादा रही। एंटी इनकंबेंसी: राज्य में 15 साल से तृणमूल सरकार है। नेताओं से असंतोष, रोजगार, भ्रष्टाचार, सिंडिकेट जैसे मुद्दे भी ज्यादा मतदान की वजह हो सकते हैं। वहीं, मुस्लिम बहुल जिलों और सीमावर्ती इलाकों में यह SIR और NRC के डर से उपजी प्रतिक्रिया भी मानी जा रही है। इस बार ध्रुवीकरण भी जबरदस्त है। इसलिए माना जा रहा है कि हिंदू मतदाताओं का भी वोट प्रतिशत ज्यादा रहा होगा। प्रवासी कामगार: यह भी बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ है। बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों से केवल वोट डालने बंगाल लौटे हैं। उन्हें लगा कि इस बार वोट नहीं दिया, तो हमेशा के लिए अधिकार छिन सकता है। TMC ने आरोप लगाया कि भाजपा ट्रेन भर कर वोट डालने के लिए लोगों को ला रही है। आयोग की सख्ती: निर्वाचन आयोग की अभूतपूर्व निगरानी और 2.40 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती के कारण मतदाताओं ने बिना किसी डर के मतदान किया। तमिलनाडु में अब तक 14 बार चुनाव, इस बार रिकॉर्ड वोटिंग तमिलनाडु के 5.73 करोड़ वोटर्स ने नया इतिहास रचा। 1967 से अब तक राज्य में कभी इतनी वोटिंग नहीं हुई। इससे पहले सबसे ज्यादा 78.12% वोटिंग 2011 में हुई थी, तब एआईएडीएमके की मुखिया रहीं जयललिता डीएमके को हराकर सत्ता में आई थीं और 10 साल राज्य किया था। SIR में करीब 74 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे। 2021 में कुल 6.29 करोड़ वोटर थे। तब इन 234 सीटों पर 72.81% मतदान हुआ था, जो 2016 की तुलना में करीब 2% कम था। तब इसे कोविड के असर से जोड़ा गया था। वैसे राज्य में औसत मतदान प्रतिशत आमतौर पर 70 से 75% के बीच रहता था, लेकिन इस बार यह करीब 12% बढ़ा है। बंगाल में MLA की कार तोड़ी; तमिलनाडु में पुलिस को चाकू मारा, 5 घटनाएं बंगाल के दक्षिण मिदनापुर में कुमारगंज सीट से भाजपा कैंडिडेट सुवेंदु सरकार को भीड़ ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। उनका सिक्योरिटी गार्ड उनके साथ था। इसके बावजूद भीड़ ने उन्हें खदेड़ दिया। भीड़ ने भाजपा कैंडिडेट को खदेड़ा और दौड़ा-दौड़ाकर थप्पड़-मुक्कों से पीटा। पश्चिम बर्धमान जिले के बर्नपुर में आसनसोल साउथ सीट से भाजपा की मौजूदा विधायक और उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल की कार पर हमला हुआ। इससे गाड़ी के पीछे का शीशा टूट गया। अग्निमित्रा ने बताया कि उनकी कार पर पत्थर फेंके गए। घटना के समय अग्निमित्रा पॉल कार में मौजूद थीं। तमिलनाडु के पोरैयार स्थित जमालिया मिडिल स्कूल में वोटिंग के दौरान हेड कांस्टेबल पर एक व्यक्ति ने चाकू से हमला कर दिया। हमलावर एक रिटायर्ड सेना कर्मीचारी है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। घायल कांस्टेबल को पोरैयार के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमलावर ने धारदार चाकू पर कई ब्लेड भी चिपकाए हुए थे। बंगाल की बेरहामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया कि उनके पार्टी एजेंट पर TMC कार्यकर्ताओं ने हमला किया। सुरक्षाबल और अन्य लोग पोलिंग बूथ से घायलों को गोद में उठाकर ले गए। एक युवक के सिर पर भी चोटें आईं। पोलिंग बूथ पर घायल एक शख्स को अस्पताल ले जाते जवान। मुर्शिदाबाद के नौदा में बुधवार देर रात देसी बम से हमले में कई लोग घायल हो गए। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) चीफ हुमायूं कबीर सुबह घटनास्थल पर पहुंचे। इस दौरान उनके समर्थकों और TMC कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट, पथराव हुआ। पुलिस ने लाठीचार्ज किया। हुमायूं की कार पर पत्थरों और लाठियों से हमला किया गया। मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर और TMC कार्यकर्ताओं के बीच लाठी-डंडे चले। मुर्शिदाबाद : भास्कर रिपोर्टर के सामने महज 50 सेकेंड में हिंसा भड़की बंगाल के नौदा में हिंसा के दौरान भास्कर की टीम वहीं मौजूद थी। उनके सामने महज 50 सेकेंड के भीतर हिंसा भड़क उठी। हुमायूं कबीर दैनिक भास्कर के पत्रकार से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘TMC के कार्यकर्ता गुंडागर्दी कर रहे हैं। उनके कार्यकर्ता हमें बूथ के पास नहीं जाने दे रहे हैं। उनके कहने पर पुलिस ने भी हमें रोक लिया।’ हुमायूं इसके विरोध में धरने पर बैठे थे। आसपास भारी

West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today

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Hindi News National West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today | 152 Seats Bengal First Phase कोलकाता/चेन्नई13 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज वोटिंग है। बंगाल में फर्स्ट फेज के 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर चुनाव होंगे। वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी। बंगाल में TMC और BJP के बीच मुख्य मुकाबला है। यहां के सभी बूथों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनीटरिंग) होगी। राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। रिजल्ट 4 मई को आएंगे। तमिलनाडु में DMK+ कांग्रेस और AIADMK+ BJP के बीच मुकाबला है। तमिल एक्टर थलापति विजय की नई पार्टी TVK इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है। महाराष्ट्र की बारामती सीट पर भी उपचुनाव है। यह सीट महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद से खाली है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के खिलाफ विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) की ओर से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है। चुनाव तैयारी से जुड़ी 2 तस्वीरें… पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में महिला कर्मचारी ईवीएम लेकिन पोलिंग बूथ पहुंची है। पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में चुनाव कर्मचारी ने धूप से बचने के लिए अपना सिर ढंक लिया। पश्चिम बंगाल: कुल 6.80 करोड़ वोटर्स, 5.23 लाख पहली बार मतदान करेंगे पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटे हैं। जिसमें 210 जनरल सीटें हैं। वहीं 68 सीटें एससी और 10 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 6.8 करोड़ वोटर्स हैं। पांच लाख से ज्यादा लोग पहली बार वोट डालेंगे। वहीं 3.79 लाख वोटर्स 85 से ज्यादा उम्र के हैं। फर्स्ट फेज में 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग होगी। 44,376 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। पश्चिम बंगाल: 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री बंगाल में 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं। ममता ने 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म किया, 15 साल से सत्ता में आजादी के बाद शुरुआती दौर (1947–1967) में कांग्रेस का वर्चस्व रहा और राज्य में स्थिर सरकारें रहीं। 1967 के बाद कांग्रेस कमजोर हुई और राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हुआ, कई गठबंधन सरकारें बनीं। 1977 में वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) सत्ता में आया और ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने। 1977 से 2011 तक करीब 34 साल तक लेफ्ट फ्रंट का लगातार शासन रहा। 2000 के दशक में औद्योगीकरण (सिंगूर, नंदीग्राम) को लेकर विवाद हुआ, जिससे लेफ्ट की पकड़ कमजोर हुई। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने किसान आंदोलनों के जरिए बड़ा जनसमर्थन हासिल किया। 2011 में TMC ने लेफ्ट को हराकर सत्ता हासिल की, 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म हुआ। 2016 और 2021 में TMC ने दोबारा जीत दर्ज की और ममता बनर्जी का दबदबा कायम रहा। वर्तमान में राजनीति TMC vs BJP के बीच मुख्य मुकाबले में बदल गई है, जबकि कांग्रेस-लेफ्ट सीमित भूमिका में हैं। तमिलनाडु- 12.51 लाख वोटर्स पहली बार वोटिंग करेंगे तमिलनाडु- कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आ सकी आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है। फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही। 1967 में पहली बार DMK ने कांग्रेस को हराया, द्रविड़ विचारधारा पर राजनीति आजादी के बाद (1947–1967) तक राज्य में कांग्रेस का वर्चस्व रहा, के. कामराज प्रमुख नेता थे। इसी दौर में पेरियार के नेतृत्व में द्रविड़ आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें सामाजिक न्याय और हिंदी विरोध मुख्य मुद्दे थे। 1967 में DMK ने कांग्रेस को हराकर पहली बार क्षेत्रीय राजनीति को सत्ता में स्थापित किया। सी.एन. अन्नादुरई पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री बने, यहीं से द्रविड़ राजनीति का दौर शुरू हुआ। उनके बाद एम. करुणानिधि ने DMK को मजबूत किया और संस्कृति-भाषा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाया। 1972 में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने AIADMK बनाई, जिससे दो-दलीय राजनीति (DMK vs AIADMK) स्थापित हुई। 1970 के दशक से 2010 तक DMK और AIADMK बारी-बारी से सत्ता में आती रहीं। जयललिता के दौर में AIADMK ने ‘अम्मा स्कीम्स’ के जरिए वेलफेयर पॉलिटिक्स को मजबूत किया। 2016 के बाद जयललिता और करुणानिधि के निधन से नेतृत्व परिवर्तन का दौर शुरू हुआ। 2021 के बाद एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK सत्ता में है, और आज भी राज्य की राजनीति द्रविड़ विचारधारा पर आधारित है। ————————– राज्यों में चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… इलेक्शन एक्सप्लेनर: मुस्लिम बहुल 6 जिले ममता को बनाते हैं अजेय, TMC की आधी सीटें यहीं से; क्या ममता के ‘चिकन नेक’ पर शिकंजा कसेगी बीजेपी हवा का रुख: तमिलनाडु में BJP का खाता खुलना मुश्किल, 120-140 सीटों के साथ स्टालिन की वापसी के आसार, थलापति विजय को 5 से 15 सीटें दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Hindi News National West Bengal & Tamil Nadu Elections Voting Today | 152 Seats Bengal First Phase कोलकाता/चेन्नईकुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में आज वोटिंग है। बंगाल में फर्स्ट फेज के 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। तमिलनाडु में सभी 234 सीटों पर चुनाव होंगे। वोटिंग सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक होगी। बंगाल में TMC और BJP के बीच मुख्य मुकाबला है। यहां के सभी बूथों पर वेबकास्टिंग (लाइव मॉनीटरिंग) होगी। राज्य की बाकी 142 सीटों पर दूसरे फेज में 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। रिजल्ट 4 मई को आएंगे। तमिलनाडु में DMK+ कांग्रेस और AIADMK+ BJP के बीच मुकाबला है। तमिल एक्टर थलापति विजय की नई पार्टी TVK इस लड़ाई को त्रिकोणीय बना रही है। महाराष्ट्र की बारामती सीट पर भी उपचुनाव है। यह सीट महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में निधन के बाद से खाली है। अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के खिलाफ विपक्षी ‘महा विकास अघाड़ी’ (MVA) की ओर से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं है। चुनाव तैयारी से जुड़ी 2 तस्वीरें… पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में महिला कर्मचारी ईवीएम लेकिन पोलिंग बूथ पहुंची है। पश्चिम बंगाल के बालुरघाट में चुनाव कर्मचारी ने धूप से बचने के लिए अपना सिर ढंक लिया। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की वोटिंग से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं… अपडेट्स 5 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल: कुल 6.80 करोड़ वोटर्स, 5.23 लाख पहली बार मतदान करेंगे पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटे हैं। जिसमें 210 जनरल सीटें हैं। वहीं 68 सीटें एससी और 10 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। राज्य में कुल 6.8 करोड़ वोटर्स हैं। पांच लाख से ज्यादा लोग पहली बार वोट डालेंगे। वहीं 3.79 लाख वोटर्स 85 से ज्यादा उम्र के हैं। फर्स्ट फेज में 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग होगी। 44,376 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। 5 मिनट पहले कॉपी लिंक 29 अप्रैल को दूसरे फेज में 142 सीटों पर मतदान होगा 6 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल: पिछले 2 चुनाव से 80% से ज्यादा वोटिंग 7 मिनट पहले कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल: 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री बंगाल में 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं। 8 मिनट पहले कॉपी लिंक पहले फेज में पश्चिम बंगाल की 4 हॉट सीटें 9 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता ने 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म किया, 15 साल से सत्ता में आजादी के बाद शुरुआती दौर (1947–1967) में कांग्रेस का वर्चस्व रहा और राज्य में स्थिर सरकारें रहीं। 1967 के बाद कांग्रेस कमजोर हुई और राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हुआ, कई गठबंधन सरकारें बनीं। 1977 में वाम मोर्चा (लेफ्ट फ्रंट) सत्ता में आया और ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने। 1977 से 2011 तक करीब 34 साल तक लेफ्ट फ्रंट का लगातार शासन रहा। 2000 के दशक में औद्योगीकरण (सिंगूर, नंदीग्राम) को लेकर विवाद हुआ, जिससे लेफ्ट की पकड़ कमजोर हुई। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने किसान आंदोलनों के जरिए बड़ा जनसमर्थन हासिल किया। 2011 में TMC ने लेफ्ट को हराकर सत्ता हासिल की, 34 साल का लेफ्ट शासन खत्म हुआ। 2016 और 2021 में TMC ने दोबारा जीत दर्ज की और ममता बनर्जी का दबदबा कायम रहा। वर्तमान में राजनीति TMC vs BJP के बीच मुख्य मुकाबले में बदल गई है, जबकि कांग्रेस-लेफ्ट सीमित भूमिका में हैं। 10 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु- 12.51 लाख वोटर्स पहली बार वोटिंग करेंगे 10 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु में पिछले 2 चुनाव से 75% से कम वोटिंग 12 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु- कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है। फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही। 12 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु की 4 हॉट सीटें: सीएम स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि भी मैदान में 14 मिनट पहले कॉपी लिंक 1967 में पहली बार DMK ने कांग्रेस को हराया, द्रविड़ विचारधारा पर राजनीति आजादी के बाद (1947–1967) तक राज्य में कांग्रेस का वर्चस्व रहा, के. कामराज प्रमुख नेता थे। इसी दौर में पेरियार के नेतृत्व में द्रविड़ आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें सामाजिक न्याय और हिंदी विरोध मुख्य मुद्दे थे। 1967 में DMK ने कांग्रेस को हराकर पहली बार क्षेत्रीय राजनीति को सत्ता में स्थापित किया। सी.एन. अन्नादुरई पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री बने, यहीं से द्रविड़ राजनीति का दौर शुरू हुआ। उनके बाद एम. करुणानिधि ने DMK को मजबूत किया और संस्कृति-भाषा आधारित राजनीति को आगे बढ़ाया। 1972 में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने AIADMK बनाई, जिससे दो-दलीय राजनीति (DMK vs AIADMK) स्थापित हुई। 1970 के दशक से 2010 तक DMK और AIADMK बारी-बारी से सत्ता में आती रहीं। जयललिता के दौर में AIADMK ने ‘अम्मा स्कीम्स’ के जरिए वेलफेयर पॉलिटिक्स को मजबूत किया। 2016 के बाद जयललिता और करुणानिधि के निधन से नेतृत्व परिवर्तन का दौर शुरू हुआ। 2021 के बाद एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK सत्ता में है, और आज भी राज्य की राजनीति द्रविड़ विचारधारा पर आधारित है। दैनिक भास्कर को Google पर 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बंगाल चुनाव को लेकर ECI की सख्ती, 20 साल में पहली बार चुनाव अधिकारी ने किया हवाई सर्वेक्षण

बंगाल चुनाव को लेकर ECI की सख्ती, 20 साल में पहली बार चुनाव अधिकारी ने किया हवाई सर्वेक्षण

पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर चुनाव आयोग (ईसीआई) ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चुनाव आयोग के दस्तावेज़ के अनुसार सभी बूथों के प्रधान अधिकारी को यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेज़ पर सभी बूथों के बटन स्पष्ट रूप से दिखाई दें। किसी भी अभ्यर्थी के बटन को टेप, गोंद या किसी अन्य सामग्री से ढका नहीं जाना चाहिए। म्युचुअल से चुराया हुआ महंगा- इलेक्शन कमीशनचुनाव आयोग द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि बैलेट यूनिट के उम्मीदवार बटन पर वोट की गोपनीयता बनाए रखें और किसी भी तरह का कोई रंग, हिस्सेदारी, पर फोम या अन्य रासायनिक पदार्थ का उपयोग न करें। ऐसे किसी भी इवेंट पर प्रीसाइडिंग ऑफिसर, तत्काल सेक्टर ऑफिस या रिटर्निंग ऑफिसर को सूचित किया जाएगा। स्टॉक में आगे कहा गया है कि ऐसे सभी मामलों को स्टॉक से स्टॉक / हेस्टस्कैप की श्रेणी में माना जा सकता है, जो एक स्टॉकअप अपराध है। ऐसे किसी भी मामले में ई.सी.आई. पुनर्मतदान का आदेश दिया गया जिसमें आपराधिक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। 20 साल में पहली बार चुनाव अधिकारी का हवाई सर्वेक्षणराज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने मालदा, उत्तर दिनाजपुर, कुश बिहार और मेदिनीपुर का हवाई सर्वेक्षण के लिए एयरफोर्स के हेलीकॉप्टरों का चुनाव किया। बता दें कि पिछले 20 सागरों में यह पहली बार है जब मुख्य चुनाव अधिकारी ने इस तरह का हवाई निरीक्षण किया है। मार्च कर रहे हैं अर्धसैनिक सेनाओं के जवानउन्होंने स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्वाचनों की समीक्षा की। चुनाव के दौरान पर्यवेक्षण को मजबूत करने के लिए फ्लाइंग स्क्वाड की तस्वीरों में कैमरे लगाए गए हैं, प्रोटोटाइप लाइव स्टूडियो सीधे नियंत्रण कक्ष में जारी किया जा रहा है। अर्धसैनिक आतंकवादियों के जवान बख्तरबंद टिकटें पूरे राज्य में टाइगर मार्च कर रहे हैं, इसलिए मतदान के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो सके। पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि चुनाव प्रचार 21 अप्रैल को हुआ था। चुनाव आयोग के अनुसार राज्य में अधिसूचना पर प्रतिबंध लागू किया गया है। पहले चरण में 20 अप्रैल से ही राज्य में शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। ये भी पढ़ें पहलगाम हमले की सालगिरह: ‘भारत आतंकवादियों के आगे कभी नहीं झुकेगा’, पहलगाम हमलों की घंटी पर पीएम मोदी ने पाकिस्तान को दिया अल्टीमेटम (टैग्सटूट्रांसलेट)ईसीआई(टी)दिशानिर्देश(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)मतदान(टी)विधानसभा सीटें(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)ई सीआई(टी)विधानसभा चुनाव(टी)मतदान(टी)मतदान(टी)हवाई सर्वेक्षण(टी) सुरक्षा

महिला आरक्षण-परिसीमन पर शाह आज लोकसभा में जवाब देंगे:प्रियंका का आरोप- असम की तरह देश की सीटों की काट-छांट होगी; शाम 4 बजे वोटिंग

महिला आरक्षण-परिसीमन पर शाह आज लोकसभा में जवाब देंगे:प्रियंका का आरोप- असम की तरह देश की सीटों की काट-छांट होगी; शाम 4 बजे वोटिंग

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन बिलों पर आज लोकसभा में दूसरे दिन चर्चा होगी। अमित शाह इस पर जवाब देंगे। गुरुवार को उन्होंने कहा था कि परिसीमन को लेकर विपक्ष के जितने भी सवाल हैं। वे केजी के बच्चों की तरह उन्हें समझाएंगे। शाम 4 बजे तीनों बिल पर वोटिंग कराई जाएगी। लोकसभा स्पीकर ने बिलों पर चर्चा के लिए 15 घंटे का समय तय किया। गुरुवार को करीब 12 घंटे तक पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपनी बात रखी। कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी, गौरव गोगोई, वेणुगोपाल ने बिल के विरोध में अपनी बातें कहीं। प्रियंका ने कहा कि असम की तरह देशभर की सीटों की काट-छांट की जाएगी। पीएम ने भी करीब 35 मिनट का भाषण दिया। उन्होंने कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। यह मोदी की गारंटी है और वादा है। विपक्ष इसका क्रेडिट ले सकता है। 16 अप्रैल: संसद के विशेष सत्र का पहला दिन; किसने क्या कहा पीएम मोदी बोले- मैं क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूं यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है। इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा। अगर साथ चलेंगे तो किसी को भी नहीं होगा। फिर अलग पहलू हो जाता है। हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं। सबकी फोटो छपवा देंगे। ले लो जी क्रेडिट। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं। प्रियंका बोलीं- महिलाएं बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को पहचान लेती प्रियंका गांधी ने कहा, पीएम के खोखले आश्वासनों के बावजूद संसद में राज्यों की मौजूदगी बदल जाएगी। जिस तरह असम में उन्होंने मनचाही सीटों को काटा, नई सीमाएं बनाएं उसी तरह यह देश में करेंगे। मौजूदा सरकार जनता की आंखों में धूल झोंक रही है। ये ओबीसी वर्ग का हक छीन रहे हैं, ताकि कुछ प्रदेशों की ताकत को कम किया जा सके। शाह जी हंस रहे हैं, पूरी प्लानिंग बना रखी है। चाणक्य आज जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते। अखिलेश बोले- हम चाहते हैं कि पहले जनगणना हो अखिलेश ने कहा- ये लोग पिछड़े वर्ग की 33 प्रतिशत महिलाओं को उनका हक नहीं देना चाहते हैं। जब परिसीमन की बारी आई तो इन लोगों ने पूरी रणनीति बनाई, कि कैसे क्षेत्र बनाए जाएं कि इसका फायदा इन लोगों को ही मिले। इसलिए हम चहते हैं कि पहले जनगणना हो, जब आंकड़े आ जाएं तभी परिसीमन हो। इसलिए हमारी मांग है कि आधी आबादी में पिछड़ी और मुस्लिम महिलाओं को जोड़कर भी जनगणना हो। कंगना रनोट बोलीं- कुछ अच्छा होता है, तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते हैं बीजेपी सांसद कंगना रनोट ने लोकसभा में कहा कि जब भी कुछ अच्छा होने लगता है तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते है। एक तरफ प्रधानमंत्री जी की नीति है, तो दूसरे तरफ विपक्ष के लोग। मुलायम सिंह यादव जी ने कहा था कि अगर ये बिल आएगा तो सिर्फ शहरी महिलाएं ही सदन में आएगी। ये है विपक्ष की सोच। अब जानिए संसद में किन तीन बिलों पर चर्चा हो रही है परिसीमन में क्या होगा: सरकार कानून बनाकर तय करेगी अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी, जो 2026 तक के लिए मान्य थी। परिसीमन कब होगा और किस जनगणना (जैसे 2011 या 2027) के आधार पर होगा, यह संविधान की जगह संसद एक साधारण कानून बनाकर तय कर सकेगी। सरकार इसमें बदलाव कर रही है। इसके लिए जनसंख्या (आबादी) की परिभाषा को बदला जाएगा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है। संविधान में संशोधन कर सरकार परिसीमन आयोग बनाएगी। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा। आयोग का निर्णय अंतिम होगा। इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते। क्या सरकार लोकसभा में बिल पास करा पाएगी संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को बैक-चैनल बातचीत करनी होगी। भारतीय संविधान के ऑर्टिकल 368 के तहत, संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 (कुल 543 में से) है। 3 सीटें खाली हैं। यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों (दो तिहाई‌) को इसके पक्ष में वोट देना होगा। वर्तमान में, भाजपा-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA (विपक्ष) के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं। तीन दशक से पेंडिंग था महिला आरक्षण बिल संसद में महिलाओं के आरक्षण का प्रस्ताव करीब 3 दशक से पेंडिंग है। यह मुद्दा पहली बार 1974 में महिलाओं की स्थिति का आकलन करने वाली समिति ने उठाया था। 2010 में मनमोहन सरकार ने राज्यसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण बिल को बहुमत से पारित करा लिया था। तब सपा और राजद ने बिल का विरोध करते हुए तत्कालीन UPA सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दी थी। इसके बाद बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया गया। तभी से महिला आरक्षण बिल पेंडिंग है। 2023 में मोदी सरकार ने महिला आरक्षण बिल को पास कराया। यह कानून बना, अब इसमें संसोधन के जरिए बदलाव किया जा रहा है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… PM ने दोस्त कहा तो अखिलेश ने हाथ जोड़ लिए; संसद के टॉप-8 मोमेंट्स केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधन बिल पेश किए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी स्पीच के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को अपना दोस्त कहा। इस पर अखिलेश ने हंसते हुए हाथ जोड़ लिए। प्रियंका गांधी ने शाह को देखते हुए कहा- अगर चाणक्य जिंदा होते तो आपको देखकर चौंक जाते। शाह मुस्कुराने लगे। पूरी खबर पढ़े…