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world update| trump, america, russia, putin, israel, iran, war, updates, world news| Virginia Ex-Governor Kills Wife, Then Self

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Hindi News International World Update| Trump, America, Russia, Putin, Israel, Iran, War, Updates, World News| Virginia Ex Governor Kills Wife, Then Self | Fairfax Tragedy 53 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के वर्जीनिया में पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर जस्टिन फेयरफैक्स ने पत्नी की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर खुद भी सुसाइड कर लिया। यह घटना गुरुवार रात एनानडेल स्थित उनके घर में हुई। पुलिस के मुताबिक, घटना के समय दंपती के दोनों बेटे घर में मौजूद थे, जिन्होंने कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जस्टिन फेयरफैक्स (47) और उनकी पत्नी सेरीना को मृत पाया। पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों के बीच तलाक को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस घर में लगे कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है। घटना को लेकर पुलिस प्रमुख ने कहा कि यह बेहद दुखद है, खासकर इसलिए क्योंकि बच्चे उसी समय घर में मौजूद थे। फिलहाल बच्चों को परिजनों की देखरेख में रखा गया है और उन्हें काउंसलिंग दी जा रही है। इससे पहले जनवरी में फेयरफैक्स ने पत्नी पर हमले का आरोप लगाया था, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई थी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World Hemophilia Day 2026: क्या है खून को पतला करने वाली बीमारी हीमोफीलिया, इन लक्षणों को नजरअंदाज साबित हो सकता है जानलेवा

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Last Updated:April 17, 2026, 02:31 IST What Is Hemophilia: हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें खून का थक्का बनना बंद हो जाता है. इससे अंदरूनी ब्लीडिंग का खतरा होता है, जो कि जानलेवा भी हो सकता है. हालांकि अगर हीमोफीलिया का समय पर पता चल जाए, तो इसका इलाज शुरू किया जा सकता है और गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है. ख़बरें फटाफट हीमोफीलिया एक गंभीर बीमारी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. इसलिए हर साल 17 अप्रैल को वर्ल्ड हीमोफीलिया डे के रूप में मनाया जाता है, जिससे लोगों को इस बीमारी के बारे में जागरूक किया जा सके. यह दिन वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ हीमोफिलिया के संस्थापक फ्रैंक श्नाबेल के जन्मदिन पर मनाया जाता है. इस मौके पर लोगों को बीमारी की जानकारी देने के साथ-साथ सही इलाज और जांच के महत्व को भी समझाया जाता है. इस बीमारी में खून सही तरीके से नहीं जम पाता, क्योंकि शरीर में खून का थक्का बनाने वाले जरूरी तत्व कम होने लगते हैं.ऐसे में छोटी चोट लगने पर भी ज्यादा खून बहने का खतरा होता है. कई बार बिना किसी बड़ी चोट के भी अंदरूनी ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, जो आगे चलकर खतरनाक बन सकती है. इसलिए इसके लक्षण समय पर पहचानना बहुत जरूरी है. हीमोफीलिया के शुरुआती लक्षण त्वचा पर नीले निशानहीमोफीलिया के लक्षण अक्सर धीरे-धीरे सामने आते हैं. खासकर बच्चों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है. जब बच्चे चलना या रेंगना शुरू करते हैं, तो उनके शरीर पर बार-बार नीले निशान दिख सकते हैं. कई बार ये निशान बिना किसी चोट के भी नजर आते हैं, जो एक चेतावनी हो सकती है. खून बहने से जुड़े संकेतअगर किसी छोटे कट या चोट के बाद खून देर तक बहता रहे और जल्दी बंद न हो, तो यह सामान्य नहीं है. इसी तरह इंजेक्शन या टीका लगने के बाद लंबे समय तक खून आना भी एक संकेत हो सकता है. कुछ बच्चों में बार-बार नाक से खून आना या मसूड़ों से खून बहना भी देखा जाता है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. जोड़ों में दर्द और सूजनहीमोफीलिया का एक बड़ा लक्षण जोड़ों में दर्द और सूजन भी है. कई बार बिना चोट के ही घुटनों, कोहनियों या टखनों में दर्द होने लगता है. यह अंदरूनी ब्लीडिंग के कारण हो सकता है. अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो जोड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है. अन्य गंभीर संकेतकुछ मामलों में पेशाब या मल में खून आना भी देखा जाता है, जो अंदरूनी ब्लीडिंग का संकेत है. इसके अलावा अगर किसी सर्जरी या दांत निकलवाने के बाद खून ज्यादा देर तक बहता रहे, तो यह भी चिंता की बात है. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. कारण और जांचहीमोफीलिया ज्यादातर आनुवंशिक बीमारी है, यानी यह परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चल सकती है. अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही है, तो बच्चों में इसका खतरा बढ़ जाता है. हालांकि, कुछ मामलों में यह बिना पारिवारिक इतिहास के भी हो सकता है. इसकी पहचान के लिए खून की साधारण जांच की जाती है, जिसमें यह देखा जाता है कि खून जमने में कितना समय लग रहा है और क्लॉटिंग फैक्टर का स्तर क्या है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 17, 2026, 02:31 IST

world updates| russia, china, USA, putin, trump| India to Host BRICS & QUAD Foreign Ministers Meet in May 2026

world updates| russia, china, USA, putin, trump| India to Host BRICS & QUAD Foreign Ministers Meet in May 2026

Hindi News International World Updates| Russia, China, USA, Putin, Trump| India To Host BRICS & QUAD Foreign Ministers Meet In May 2026 22 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत मई में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी करेगा। इस मंच पर ईरान और UAE के प्रतिनिधि आमने-सामने होंगे। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद दोनों देशों के बीच यह पहला सीधा संपर्क होगा। सूत्रों के मुताबिक, भारत इस बैठक के जरिए क्षेत्रीय तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा। ब्रिक्स मंच पर सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इधर, भारत मई के आखिरी हफ्ते में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की तैयारी में भी है। इसमें अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल होंगे। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी संकेत दिए हैं कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो मई में भारत आ सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में इस दौरे का जिक्र किया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… साउथ अफ्रीका ने अमेरिका में 1 साल बाद राजदूत की नियुक्ति की साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने अमेरिका में नए राजदूत की नियुक्ति कर दी है। उन्होंने वरिष्ठ नेता रूएल्फ मेयर को यह जिम्मेदारी सौंपी है। इसकी जानकारी राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने दी। रूएल्फ मेयर 1990 के दशक में रंगभेद खत्म करने के लिए हुई ऐतिहासिक बातचीत में सरकार के मुख्य वार्ताकार रह चुके हैं। बाद में वे नेल्सन मंडेला की एकता सरकार का भी हिस्सा बने थे। अमेरिका में यह पद लंबे समय से खाली था। मार्च 2025 में पूर्व राजदूत इब्राहिम रसूल को डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन से विवाद के बाद निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल के दौरान अमेरिका और साउथ अफ्रीका के संबंध और बिगड़े हैं। ट्रम्प ने साउथ अफ्रीका के श्वेत अफ्रीकानेर समुदाय पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। साथ ही उनके लिए एक विशेष शरणार्थी योजना भी शुरू की थी, जिसका साउथ अफ्रीका ने विरोध किया था। 78 साल के मेयर खुद अफ्रीकानेर समुदाय से आते हैं। उन्होंने 1979 में राजनीति में कदम रखा था और बाद में रक्षा व संवैधानिक मामलों के मंत्री भी रहे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World updates| Trump Wanted Gulf of Mexico Named After Him | Controversy

World updates| Trump Wanted Gulf of Mexico Named After Him | Controversy

Hindi News International World Updates| Trump Wanted Gulf Of Mexico Named After Him | Controversy| Iran, China, Russia, Usa, Putin, Trump, 3 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने एक समय गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम ‘गल्फ ऑफ ट्रम्प’ रखने पर भी विचार किया था, लेकिन बाद में यह फैसला छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह शायद काम नहीं करता और विवाद बढ़ सकता था। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि यह फैसला उनकी बड़ी योजना का हिस्सा था। इसके तहत उन्होंने इस खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ रखने का आदेश दिया था। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में, 20 जनवरी 2025 को, एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करके यह बदलाव लागू किया। इस आदेश के तहत अमेरिका के अंदर सभी सरकारी एजेंसियों को नया नाम अपनाने के निर्देश दिए गए। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने भी अपने रिकॉर्ड में यह बदलाव दर्ज किया। हालांकि, इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई। खासकर मेक्सिको ने इसका विरोध किया। वहां की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा कि गल्फ ऑफ मैक्सिको नाम सदियों से इस्तेमाल हो रहा है और पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World updates| Trump Wanted Gulf of Mexico Named After Him | Controversy

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Hindi News International World Updates| Trump Wanted Gulf Of Mexico Named After Him | Controversy| Iran, China, Russia, Usa, Putin, Trump, 26 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने एक समय गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम ‘गल्फ ऑफ ट्रम्प’ रखने पर भी विचार किया था, लेकिन बाद में यह फैसला छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह शायद काम नहीं करता और विवाद बढ़ सकता था। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि यह फैसला उनकी बड़ी योजना का हिस्सा था। इसके तहत उन्होंने इस खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ रखने का आदेश दिया था। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में, 20 जनवरी 2025 को, एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करके यह बदलाव लागू किया। इस आदेश के तहत अमेरिका के अंदर सभी सरकारी एजेंसियों को नया नाम अपनाने के निर्देश दिए गए। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने भी अपने रिकॉर्ड में यह बदलाव दर्ज किया। हालांकि, इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई। खासकर मेक्सिको ने इसका विरोध किया। वहां की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा कि गल्फ ऑफ मैक्सिको नाम सदियों से इस्तेमाल हो रहा है और पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Asha Bhosle Passes Away | Mumbai Singer World Record Career

Asha Bhosle Passes Away | Mumbai Singer World Record Career

15 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल और दिग्गज सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। आशा जी बीते 70 सालों से अधिक समय से हिंदी सिनेमा का अभिन्न हिस्सा थीं और शनिवार रात उन्हें चेस्ट इन्फेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। 10 साल की उम्र में अपना पहला गाना गाने वाली आशा का सिंगिंग करियर 82 साल का रहा, जिसमें उन्होंने 12 हजार से ज्यादा गाने गाकर अपना नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज कराया। शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे, पॉप, जैज और गजल तक, हर विधा में उन्होंने अपनी महारत साबित की। आशा भोसले ने 9 फिल्मफेयर जीते हैं। इनमें 7 बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, आशा को 100 से ज्यादा प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स मिले। आशा को कुल 18 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया। आशा का आखिरी गाना 2026 में रिलीज हुआ। पहले पढ़िए आशा जी के जीवन से जुड़े कुछ अनोखे किस्से… जब शाहरुख ने उठाया आशा जी का झूठा कप साल 2023 के क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल के दौरान शाहरुख, आशा भोसले के साथ बैठे थे। जब आशा जी ने चाय पी ली, तो शाहरुख ने बड़े सम्मान के साथ उनके हाथ से खाली कप लिया और खुद उठाकर दूसरी तरफ रखने चले गए। आशा जी और उनकी पोती जनाई ने उन्हें मना भी किया, लेकिन किंग खान ने अपनी सीट से उठकर यह काम किया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो उनके निधन के बाद दोबारा वायरल हो रहा है। रफी साहब से लगी 500 की शर्त आशा भोसले ने एक बार बताया था कि ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा’ गाने को लेकर उन्होंने मोहम्मद रफी से 500-500 रुपए की शर्त लगाई थी कि दोनों में से कौन बेहतर गाएगा। यह शर्त आशा जी ने जीती थी। इसी गाने के रियाज को लेकर उन्होंने मजेदार किस्सा सुनाया था कि वे इस गाने का इतना अभ्यास कर रही थीं कि उनके ड्राइवर को लगा उन्हें सांस लेने की कोई दिक्कत हो रही है। सोनू निगम ने धोए थे पैर सिंगर सोनू निगम ने आशा जी के निधन पर यादगार तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे आशा भोसले के पैर पानी से धोते हुए नजर आ रहे हैं। फोटो में तो सोनू खुशी-खुशी आशा जी के पैरों को पानी से धो रहे हैं। इसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी बैठे नजर आते हैं। वहीं दूसरी फोटो में वो स्टेज पर आशा भोसले के पांव को छू रहे हैं। रोते हुए रिकॉर्ड किया ‘अब के बरस भेज भैया’ फिल्म ‘बंदिनी’ का गाना ‘अब के बरस भेज भैया’ औरतों के दर्द को बयां करता था। आशा जी ने बताया था कि इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें अपने भाई की इतनी याद आई कि वे रो पड़ी थीं। उन्होंने रोते हुए ही इस गाने को सिर्फ एक टेक में रिकॉर्ड कर दिया था। वहीं, उनके मशहूर गाने ‘दम मारो दम’ को रेडियो और टीवी पर बैन कर दिया गया था, लेकिन इसी गाने के लिए उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला। लता दीदी के साथ प्रेशर और दूध-मलाई का शौक आशा जी बचपन में खेल-कूद और खाने-पीने की शौकीन थीं, खासकर दूध और मलाई उनकी कमजोरी थी। गायिकी के दौरान अपनी बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ उनके रिश्ते खास थे। उन्होंने बताया था कि जब वे दीदी के साथ ‘मन क्यों बहका’ गाना गाती थीं, तो एक-दूसरे की नजरों को देखकर लाइन उठाती थीं। उन्हें हमेशा लगता था कि दीदी के सामने उनकी गायिकी कम न पड़े। अब पढ़िए जन्म से आखिरी गाने तक की कहानी… सांगली में जन्म और गरीबी का संघर्ष 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा भोसले का बचपन बेहद तंगहाली में बीता। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक रंगमंच कलाकार और शास्त्रीय गायक थे। घर में संगीत का माहौल तो था, लेकिन आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। गरीबी का आलम यह था कि फीस न होने के चलते उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। बचपन का एक भावुक किस्सा है कि बड़ी बहन लता मंगेशकर जब स्कूल जाती थीं, तो वे आशा को चोरी-छिपे अपने साथ ले जाकर क्लास में बैठा लेती थीं। मास्टरजी से छिपकर दो दिन तो पढ़ाई चली, लेकिन तीसरे दिन पकड़ी गईं। आशा भोसले की 3 बहनें और एक भाई था। मास्टरजी ने साफ कह दिया कि एक फीस में एक ही बच्चा पढ़ सकता है और दोनों को बाहर कर दिया।उस दिन लता ने फैसला किया कि वह खुद नहीं पढ़ेंगी बल्कि छोटी बहन को पढ़ाएंगी। उन्होंने अपना नाम कटवाकर आशा का एडमिशन कराया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब आशा महज 9 साल की थीं (1942), तब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार पर अचानक आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा। तब बड़ी बहन लता ने जिम्मेदारी संभाली और मंगेशकर परिवार पुणे से मुंबई आकर बस गया। परिवार को सहारा देने के लिए लता और आशा दोनों ने ही कम उम्र में फिल्मों में गाना और छोटी भूमिकाएं करना शुरू कर दिया। करियर की शुरुआत और 1947 में रिजेक्शन आशा ने अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ के गाने ‘चला चला नव बाड़ा’ से की थी। इसके बाद 15 साल की उम्र में उन्हें 1948 में हिंदी फिल्म ‘चुनरिया’ का गाना ‘सावन आया’ मिला। उस दौर में नूर जहां, शमशाद बेगम और गीता दत्त जैसी बड़ी गायिकाओं का दबदबा था। आशा को केवल वही गाने मिलते थे जिन्हें बड़ी सिंगर्स या तो छोड़ देती थीं या उनकी फीस फिल्ममेकर्स नहीं दे पाते थे। आशा भोसले और किशोर कुमार। इसी संघर्ष के दौरान 1947 में आशा भोसले के साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। वे किशोर कुमार के साथ ‘फेमस स्टूडियो’ में फिल्म ‘जान पहचान’ के लिए गाना रिकॉर्ड करने गई थीं। संगीतकार खेमचंद प्रकाश वहां मौजूद थे। जैसे ही आशा और किशोर दा ने माइक के सामने गाना शुरू किया, रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने म्यूजिक डायरेक्टर से बंगाली में कहा- “इन दोनों

Asha Bhosle Passes Away | Mumbai Singer World Record Career

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10 मिनट पहले कॉपी लिंक भारतीय संगीत जगत की सबसे वर्सेटाइल और दिग्गज सिंगर आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है। उन्होंने रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। आशा जी बीते 70 सालों से अधिक समय से हिंदी सिनेमा का अभिन्न हिस्सा थीं। शनिवार रात उन्हें चेस्ट इन्फेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। आशा ने 10 साल की उम्र में अपना पहला गाना गाया। 82 साल का सिंगिंग करियर रहा। 12 हजार से ज्यादा गाने गाकर ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में नाम दर्ज कराया। शास्त्रीय संगीत से लेकर कैबरे, पॉप, जैज और गजल तक, हर विधा में उन्होंने अपनी महारत साबित की। आशा भोसले ने 9 फिल्मफेयर जीते हैं। इनमें 7 बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, आशा को 100 से ज्यादा प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स मिले। आशा को कुल 18 बार फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट किया गया। उनका आखिरी गाना 2026 में रिलीज हुआ। पहले पढ़िए आशा जी के जीवन से जुड़े कुछ अनोखे किस्से… जब शाहरुख ने उठाया आशा जी का जूठा कप साल 2023 के क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल के दौरान शाहरुख, आशा भोसले के साथ बैठे थे। जब आशा जी ने चाय पी ली, तो शाहरुख ने बड़े सम्मान के साथ उनके हाथ से खाली कप लिया और खुद उठाकर दूसरी तरफ रखने चले गए। आशा जी और उनकी पोती जनाई ने उन्हें मना भी किया, लेकिन किंग खान ने अपनी सीट से उठकर यह काम किया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो उनके निधन के बाद दोबारा वायरल हो रहा है। सोनू निगम ने धोए थे पैर सिंगर सोनू निगम ने आशा जी के निधन पर यादगार तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वे आशा भोसले के पैर धोते हुए नजर आ रहे हैं। आशा जी के बाजू में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत बैठे हैं। रफी साहब से लगी 500 की शर्त आशा भोसले ने एक बार बताया था कि ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा’ गाने को लेकर उन्होंने मोहम्मद रफी से 500-500 रुपए की शर्त लगाई थी कि दोनों में से कौन बेहतर गाएगा। यह शर्त आशा जी ने जीती थी। इसी गाने के रियाज को लेकर उन्होंने मजेदार किस्सा सुनाया था कि वे इस गाने के हिस्से ‘अ-अ-अ आजा’ का इतना अभ्यास कर रही थीं कि उनके ड्राइवर को लगा उन्हें सांस लेने की कोई दिक्कत हो रही है। रोते हुए रिकॉर्ड किया ‘अब के बरस भेज भैया’ फिल्म ‘बंदिनी’ का गाना ‘अब के बरस भेज भैया’ औरतों के दर्द को बयां करता गाना है। आशा जी ने बताया था कि इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें अपने भाई की इतनी याद आई कि वे रो पड़ीं। उन्होंने रोते हुए ही इस गाने को सिर्फ एक टेक में रिकॉर्ड कर दिया था। वहीं, उनके मशहूर गाने ‘दम मारो दम’ को रेडियो और टीवी पर बैन कर दिया गया था, लेकिन इसी गाने के लिए उन्हें बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड मिला। लता दीदी के साथ गाने का प्रेशर और दूध-मलाई का शौक आशा जी बचपन में खेल-कूद और खाने-पीने की शौकीन थीं, खासकर दूध-मलाई उनकी कमजोरी थी। गायिकी के दौरान बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ उनके रिश्ते खास थे। उन्होंने बताया था कि जब वे दीदी के साथ ‘मन क्यों बहका’ गाना गाती थीं, तो एक-दूसरे की नजरों को देखकर लाइन उठाती थीं। उन्हें हमेशा लगता था कि दीदी के सामने उनकी गायिकी कम न पड़े। अब पढ़िए जन्म से आखिरी गाने तक की कहानी… सांगली में जन्म और गरीबी का संघर्ष लता के अलावा आशा भोसले की 2 और बहनें- उषा (ऊपर बाएं) और मीना (नीचे दाएं) हैं। 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं आशा भोसले का बचपन बेहद तंगहाली में बीता। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक रंगमंच कलाकार और शास्त्रीय गायक थे। घर में संगीत का माहौल तो था, लेकिन आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। गरीबी का आलम यह था कि फीस न होने के चलते उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। बचपन का एक भावुक किस्सा है कि बड़ी बहन लता मंगेशकर जब स्कूल जाती थीं, तो वे आशा को चोरी-छिपे अपने साथ ले जाकर क्लास में बैठा लेती थीं। मास्टरजी से छिपकर दो दिन तो पढ़ाई चली, लेकिन तीसरे दिन पकड़ी गईं। मास्टरजी ने साफ कह दिया कि एक फीस में एक ही बच्चा पढ़ सकता है और दोनों को बाहर कर दिया। उस दिन लता ने फैसला किया कि वह खुद नहीं पढ़ेंगी बल्कि छोटी बहन को पढ़ाएंगी। उन्होंने अपना नाम कटवाकर आशा का एडमिशन कराया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जब आशा महज 9 साल की थीं (1942), तब उनके पिता का निधन हो गया। परिवार पर अचानक आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा। तब बड़ी बहन लता ने जिम्मेदारी संभाली और मंगेशकर परिवार पुणे से मुंबई आकर बस गया। परिवार को सहारा देने के लिए लता और आशा दोनों ने ही कम उम्र में फिल्मों में गाना और छोटी भूमिकाएं करना शुरू कर दिया। करियर की शुरुआत और 1947 में रिजेक्शन आशा भोसले और किशोर कुमार। आशा ने अपने सिंगिंग करियर की शुरुआत 1943 में मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ के गाने ‘चला चला नव बाड़ा’ से की थी। इसके बाद उन्हें 1948 में 15 साल की उम्र में हिंदी फिल्म ‘चुनरिया’ का गाना ‘सावन आया’ मिला। उस दौर में नूर जहां, शमशाद बेगम और गीता दत्त जैसी बड़ी गायिकाओं का दबदबा था। आशा को केवल वही गाने मिलते थे जिन्हें बड़ी सिंगर्स या तो छोड़ देती थीं या उनकी फीस फिल्ममेकर्स नहीं दे पाते थे। इसी संघर्ष के दौरान 1947 में आशा भोसले के साथ एक ऐसी घटना घटी जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। वे किशोर कुमार के साथ ‘फेमस स्टूडियो’ में फिल्म ‘जान पहचान’ के लिए गाना रिकॉर्ड करने गई थीं। संगीतकार खेमचंद प्रकाश वहां मौजूद थे। जैसे ही आशा और किशोर दा ने माइक के सामने गाना शुरू किया, रिकॉर्डिस्ट रॉबिन चटर्जी ने म्यूजिक डायरेक्टर से बंगाली में कहा- “इन दोनों की आवाज माइक में अच्छी नहीं लग रही, इनका गला खराब है, किसी और को बुलाओ।” उन्हें अपमानित कर स्टूडियो से निकाल दिया गया। रात के 2

World Updates| Haiti Fortress Stampede Kills 30 | Sudden Rain Worsens Chaos

World Updates| Haiti Fortress Stampede Kills 30 | Sudden Rain Worsens Chaos

Hindi News International World Updates| Haiti Fortress Stampede Kills 30 | Sudden Rain Worsens Chaos| Trump, Russia, China, America, Putin 13 मिनट पहले कॉपी लिंक अस्पताल में रखे मृतकों के शव। हैती के सिटाडेल लाफेरियेर किले में एक वार्षिक समारोह के दौरान भगदड़ मचने से कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई। कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह घटना किले के एंट्री गेट के पास हुई। अधिकारियों के मुताबिक, ज्यादा भीड़ और अचानक हुई बारिश के कारण हालात बिगड़ गए। लोग एक साथ बाहर निकलने की कोशिश करने लगे, जिससे भगदड़ मच गई। यह किला 19वीं सदी की शुरुआत में बनाया गया था और UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। हर साल यहां बड़ी संख्या में छात्र और पर्यटक आते हैं। हैती के कार्यवाहक प्रधानमंत्री एलिक्स डिडियर फिल्स-एमे ने घटना पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि मौके पर कई युवा मौजूद थे। राहत और बचाव टीम मौके पर तैनात है। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। फिलहाल सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है और घटना की जांच शुरू कर दी गई है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World News Updates; Kamala Harris 2028 Election, Trump Pakistan China

World News Updates; Kamala Harris 2028 Election, Trump Pakistan China

29 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर संकेत दिया है कि वह दोबारा चुनाव लड़ सकती हैं। न्यूयॉर्क में नेशनल एक्शन नेटवर्क की बैठक के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह फिर चुनाव लड़ेंगी, तो उन्होंने कहा, “हो सकता है, मैं इस बारे में सोच रही हूं।” उनके इस जवाब पर वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। हैरिस ने यह भी कहा कि वह 2028 में अपना फैसला इस आधार पर लेंगी कि अमेरिकी जनता के लिए कौन सबसे बेहतर काम कर सकता है। कमला हैरिस, जो जो बाइडेन के कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रही थीं, 2024 का राष्ट्रपति चुनाव हार गई थीं। उस चुनाव में उन्हें डोनाल्ड ट्रम्प ने हराया था। हैरिस इससे पहले कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल और अमेरिकी सीनेटर भी रह चुकी हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

World News Updates; Trump Pakistan China

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9 मिनट पहले कॉपी लिंक ईरान संकट के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का X पोस्ट विवादों में आ गया है। पोस्ट की एडिट हिस्ट्री में “ड्राफ्ट- पाकिस्तानी PM का मैसेज” दिखने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। शहबाज शरीफ ने अपने पोस्ट में ट्रम्प से ईरान को लेकर तय समयसीमा दो हफ्ते बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे कूटनीति को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। साथ ही ईरान से होर्मुज खोलने की भी अपील की। पोस्ट के वायरल स्क्रीनशॉट में एक पुराना वर्जन दिखा, जिसमें ड्राफ्ट लिखा था। यही लाइन विवाद का कारण बनी और सवाल उठे कि क्या यह मैसेज पहले से तैयार ड्राफ्ट था। कुछ यूजर्स ने इसे व्हाइट हाउस से जुड़े निर्देश जैसा बताया, जबकि कुछ ने कहा कि ट्रम्प पाकिस्तान की नीति को कंट्रोल कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। शरीफ ने अपने मैसेज में कहा था कि कूटनीतिक प्रयास तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। युद्धविराम से स्थायी समाधान निकल सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…