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MP की ‘लेडी गैंग’ चांदनी चौक में मारा बड़ा हाथ, हाईकोर्ट के एक बड़े वकील का ही उड़ाया कीमती हार, हो गए अब गिरफ्तार – delhi police arrest three women gang mp rajgarh diamond gold necklace recovery high court lawyer

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होमताजा खबरDelhi MP की ‘लेडी गैंग’ ने एक बड़े वकील का उड़ाया कीमती हार, ट्रेन से आती थी दिल्ली Last Updated:February 04, 2026, 19:20 IST दिल्ली पुलिस ने चांदनी चौक के किनारी बाजार में हुई एक बड़ी चोरी की गुत्थी को महज 72 घंटों में सुलझा लिया है. मध्य प्रदेश के राजगढ़ से आई शातिर महिला चोरों ने हाई कोर्ट की एक वकील का हीरा-सोना जड़ित हार और झुमके चोरी किए थे. सीसीटीवी और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से पुलिस ने मयूर विहार के चिल्ला गांव से तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर शत-प्रतिशत रिकवरी की है. पढ़ें इन तीनों महिला चोर की 12 साल की कहानी. नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के सबसे व्यस्त चांदनी चौक में सुरक्षा और सतर्कता को चुनौती देते हुए एक ‘लेडी गैंग’ ने बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया. तीन औरतों का यह गैंग दिल्ली हाईकोर्ट के वकील का सारा माल गायब कर दिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की ने कुशलता का परिचय देते हुए इस मामले को महज 3 दिनों के भीतर सुलझा लिया है. पकड़ी गई तीनों महिलाएं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली हैं, जो विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों में चोरी करने के लिए दिल्ली का रुख करती थीं. हाथ साफकर फिर दिल्ली से एमपी के तरफ चली जाती थीं. पढ़िए कैसे और किस तरह से दिल्ली पुलिस ने इन तीन महिलाओं को गिरप्तार किया. मामले की शुरुआत 28 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली हाई कोर्ट की एक महिला अधिवक्ता सुश्री एस. गर्गा अपने सोने और हीरे के गहनों की मरम्मत कराने के लिए पुरानी दिल्ली के मशहूर किनारी बाजार आईं थीं. उन्होंने अपना कीमती नेकलेस और झुमके एक बैग में रखे हुए थे. दोपहर के समय जब वह गहने ठीक कराकर बाजार से बाहर निकल रही थीं, तभी भीड़ का फायदा उठाकर किसी ने उनके बैग से गहने पार कर दिए. 72 घंटों का सस्पेंस और ‘चिल्ला गांव’ का कनेक्शन पीड़िता ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ई-एफआईआर दर्ज कराई. मामला एक प्रतिष्ठित वकील और लाखों के गहनों से जुड़ा था, इसलिए पुलिस ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया. उत्तरी जिला पुलिस के एडिशनल डीसीपी सुमित कुमार झा के अनुसार, कोतवाली थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर सुमन कुमार और इंस्पेक्टर ज्ञान प्रकाश के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई. इस टीम में पीएसआई प्रीति और महिला कांस्टेबलों को भी शामिल किया गया. 12 साल से चल रहा था खेल पुलिस ने किनारी बाजार और आसपास के इलाकों में लगे दर्जनों कैमरों की फुटेज खंगाली. एक फुटेज में दो संदिग्ध महिलाएं वकील के बैग से हार निकालते हुए साफ नजर आईं. पुलिस ने इन महिलाओं का पीछा जारी रखा. सीसीटीवी मैपिंग से पता चला कि चोरी के बाद इन महिलाओं ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई बार ऑटो-रिक्शा बदले. तकनीकी सर्विलांस से पता चला कि ये महिलाएं मयूर विहार के चिल्ला गांव में रुकी हुई हैं. जाल बिछाकर गिरफ्तारी 1 फरवरी 2026 को पुलिस ने चिल्ला गांव में दबिश दी और प्रीति और अनमोल को धर दबोचा. तलाशी के दौरान अनमोल के पास से चोरी के हार के 28 पत्थर बरामद हुए. पूछताछ में उन्होंने अपनी तीसरी साथी ‘सन्नो’ का नाम उगला, जिसके पास बाकी के गहने थे. पुलिस ने उसी दिन सन्नो को भी दबोच लिया. दिल्ली पुलिस की पूछताछ के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने पुलिस को भी हैरान कर दिया. ये महिलाएं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के गुलखेड़ी जाटखेड़ी गांव की रहने वाली हैं. यह गांव पहले भी ऐसी आपराधिक गतिविधियों के लिए चर्चा में रहा है. ये महिलाएं अक्सर ट्रेन से दिल्ली आती हैं और कुछ दिनों या महीनों के लिए किराए पर कमरा लेती हैं. इनका मुख्य निशाना चांदनी चौक, सदर बाजार और पुरानी दिल्ली के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाके होते हैं जहाँ लोगों का ध्यान अपने सामान पर कम और खरीदारी पर ज्यादा होता है. 10-12 साल से यह गिरोह इसी तरह काम कर रहा है. चोरी की कुछ वारदातों को अंजाम देने के बाद ये वापस अपने गांव लौट जाती हैं ताकि पुलिस की नजरों से बच सकें. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi Cantonment,New Delhi,Delhi First Published : February 04, 2026, 19:20 IST

राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से चंद सेकंड में उड़ गया लैपटॉप, फोन कॉल पर लगा था शख्स, चोरों ने लगा दिया चूना – dmrc action delhi police arrest laptop theft rajiv chowk metro station gate 5 security check cctv footage

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नई दिल्ली. अगर आप दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे हैं और वो भी राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर तो जरा होशियार हो जाएं. दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे चोर को गिरफ्तार किया है, जो आपके आंखों के सामने से आपका सामान गायब कर देता था. दिल्ली का सबसे व्यस्त और दिल कहा जाने वाला राजीव चौक मेट्रो स्टेशन अपनी भीड़भाड़ के लिए जाना जाता है. लेकिन इसी भीड़ का फायदा उठाकर अपराधी मासूम यात्रियों को अपना निशाना बना रहे हैं. यहां पर एक ऐसी वारदात सामने आई है जहां एक यात्री की महज चंद सेकंड की फोन कॉल की व्यस्तता ने उसका कीमती लैपटॉप चोरी करवा दिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट ने अपनी तकनीकी कुशलता और सीसीटीवी की मदद से आरोपी को धर दबोचा है. यह मामला 30 जनवरी 2026 का है. पीड़ित यात्री राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 5 और 6 के पास बने सिक्योरिटी चेक पॉइंट पर पहुंचा. सुरक्षा नियमों के मुताबिक, उसने अपना लैपटॉप बैग एक्स-बीआईएस (X-BIS) मशीन पर स्कैनिंग के लिए रखा. इसी दौरान पीड़ित के मोबाइल पर एक फोन कॉल आ गई. वह फोन पर बात करने में इतना मशगूल हो गया कि उसने मशीन की दूसरी तरफ से अपना बैग उठाना याद नहीं रहा. इसी चंद सेकंड की लापरवाही का फायदा पास खड़े एक शातिर चोर ने उठा लिया. चोर ने बड़ी सफाई से मशीन से बैग उठाया और चंपत हो गया. बैग में एक महंगा एचपी (HP) लैपटॉप और उसका चार्जर मौजूद था. पुलिस की जांच और सीसीटीवी का सुराग जब यात्री को अपनी भूल का अहसास हुआ, तब तक बैग गायब हो चुका था. मामले की शिकायत तुरंत राजीव चौक मेट्रो थाना पुलिस को दी गई. 1 फरवरी 2026 को पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की. दिल्ली पुलिस के मेट्रो डीसीपी कुशल पाल सिंह के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया.  जांच टीम ने सबसे पहले घटना स्थल के सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया. फुटेज की बारीकी से जांच करने पर एक संदिग्ध युवक बैग उठाते हुए साफ नजर आया. हालांकि, आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर मास्क लगा रखा था. पुलिस ने हार नहीं मानी और आरोपी के आने-जाने के रास्तों का तकनीकी विश्लेषण किया. विश्लेषण से एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया. आरोपी अक्सर सुबह 8:30 से 9:30 बजे के बीच राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलता था. जाल बिछाकर ऐसे हुई गिरफ्तारी पुलिस टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए 3 फरवरी की सुबह ट्रैप लगाया. सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मी राजीव चौक के एएफसी गेट्स और निकास द्वारों पर तैनात हो गए. सुबह करीब 9:30 बजे, पुलिस की नजर एक युवक पर पड़ी जो पीठ पर एक बैग लटकाए बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. उसकी कद-काठी सीसीटीवी में दिखे संदिग्ध से हूबहू मिल रही थी. पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में लिया. जब उसके बैग की तलाशी ली गई, तो उसमें से वही चोरी किया गया एचपी लैपटॉप और चार्जर बरामद हुआ. आरोपी का प्रोफाइल और कबूलनामा पकड़े गए आरोपी की पहचान 29 वर्षीय सुमित कुमार के रूप में हुई है, जो दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके का रहने वाला है. पूछताछ के दौरान सुमित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह मेट्रो स्टेशनों पर ऐसे यात्रियों की तलाश में रहता था जो सुरक्षा जांच के दौरान फोन या अन्य कामों में व्यस्त हो जाते थे. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सुमित ने पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है. आरोपी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. मेट्रो यात्रियों के लिए पुलिस की चेतावनी इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मेट्रो यात्रियों के लिए एक विशेष गाइडलाइन जारी की है: स्कैनिंग के समय ध्यान रखें: जब भी आप अपना बैग एक्स-रे मशीन पर रखें, तो उसे दूसरी तरफ से निकलने तक अपनी नजरों से ओझल न होने दें. फोन का इस्तेमाल कम करें: सुरक्षा जांच और भीड़भाड़ वाले इलाकों में फोन पर बात करने से बचें, क्योंकि यह अपराधियों को मौका देता है. मास्क के पीछे छिपे चेहरे: कोरोना के बाद अब अपराधी मास्क का इस्तेमाल अपनी पहचान छिपाने के लिए कर रहे हैं, इसलिए अपने आसपास के संदिग्धों पर नजर रखें. तुरंत रिपोर्ट करें: किसी भी सामान के गायब होने पर तुरंत नजदीकी मेट्रो स्टेशन के कंट्रोल रूम या पुलिस डेस्क को सूचित करें. राजीव चौक मेट्रो स्टेशन की यह घटना हमें याद दिलाती है कि सावधानी हटी, तो दुर्घटना घटी. दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक चोरी का मामला सुलझाया है, बल्कि अन्य अपराधियों को भी सख्त संदेश दिया है.

बिहार का वह डॉन जिसका श्रीप्रकाश शुक्ला बना था ड्राइवर, जरायम की दुनिया में आज भी क्यों होते हैं दोनों के चर्चे? | sriprakash shukla | sri prakash shukla godfather driver | sriprakash shukla surajbhna singh friendship | suraj bhan singh | up police | ghaziabad encounter story

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Sriprakash Shukla Crime Story: 90 के दशक में उत्तर प्रदेश में एक जुमला बड़ा मशहूर था- शाम के बाद घर से मत निकलो, कहीं श्रीप्रकाश शुक्ला की गोली का शिकार न हो जाओ. यह वो दौर था जब यूपी की पुलिस के पास पुरानी थ्री-नॉट-थ्री (303) राइफलें हुआ करती थीं और एक 25 साल का लड़का सड़कों पर 30 गाड़ियों से चलता, जिसमें 25 गाड़ियों में राइफल शीशे से बाहर निकली होती थी. कैसे शिव प्रकाश शुक्ला श्रीप्रकाश शुक्ला बना? श्रीप्रकाश शुक्ला को एके-47 राइफल सबसे पहले किसने थमाई? कैसे गोरखपुर के मामखौर गांव एक साधारण ब्राह्मण परिवार का लड़का जुर्म की दुनिया का पोस्टर बॉय बन गया? उस अधिकारी से समझेंगे, जो श्रीप्रकाश शुक्ला के एनकाउंटर में शामिल था. श्रीप्रकाश शुक्ला वह नाम था, जिसने पहली बार उत्तर प्रदेश पुलिस को अपनी ताकत के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था. जानेंगे बिहार के उस डॉन के यहां वाकई में श्रीप्रकाश शुक्ला क्या करता था? मामखौर गांव के लोगों का कहना है कि श्रीप्रकाश शुक्ला कोई पैदाइशी अपराधी नहीं था. वह एक अखाड़े का पहलवान हुआ करता था, जो पांच-पांच लीटर दूध अकेले पी जाता था. लेकिन 1993 में एक घटना ने उसे अपराधी बना दिया. एक मनचले ने उसकी बहन को देखकर सीटी बजा दी थी. पहलवानी के जोश और खून की गर्मी में श्रीप्रकाश ने उस शख्स को पीट-पीटकर मार डाला. पुलिस से बचने के लिए बिहार भाग गया. जहां उसको बिहार के मोकामा के एक बाहुबली सूरजभान सिंह ने उसे संरक्षण दिया. श्रीप्रकाश शुक्ला सूरजभान सिंह का दाहिना हाथ बन गया. फिर बाद में वह बैंकॉक भाग गया, लेकिन जब लौटा तो वह शिव प्रकाश शुक्ला नहीं, बल्कि जरायम जगत का उभरता हुआ डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला बन चुका था. बिहार का ठिकाना और सूरजभान सिंह से यारी एसटीएफ में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक, यूपी में पुलिस का दबाव बढ़ा तो श्रीप्रकाश ने बिहार का रुख किया. बिहार उस वक्त बाहुबलियों और गैंगवार का गढ़ था. श्रीप्रकाश शुक्ला की मुलाकात वहां मोकामा के डॉन सूरजभान सिंह से हुई. सूरजभान को एक ऐसे शूटर की तलाश थी जो बिना पलक झपकाए ट्रिगर दबा सके और श्रीप्रकाश को चाहिए था सियासी और बाहुबली संरक्षण. श्रीप्रकाश शुक्ला का मोकामा और बेगूसराय कनेक्शन श्रीप्रकाश बिहार के मोकामा और बेगूसराय इलाकों में काफी समय तक रहा. वह सूरजभान सिंह के लिए काम करने लगा. बिहार में रहते हुए उसने रेलवे के ठेकों और कोयले के काले कारोबार में अपनी पैठ बनाई. सूरजभान और श्रीप्रकाश की जोड़ी ने बिहार के अंडरवर्ल्ड में खलबली मचा दी थी. कहा जाता है कि श्रीप्रकाश शुक्ला ही वो शख्स था जिसने बिहार के अपराधियों को एके-47 की ‘लज्जत’ चखाई थी. बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड बिहार में श्रीप्रकाश शुक्ला के नाम की दहशत तब फैली जब उसने 1998 में बिहार के कद्दावर मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या कर दी. बृज बिहारी उस वक्त पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल में भर्ती थे और भारी सुरक्षा के बीच टहल रहे थे. श्रीप्रकाश और उसके साथियों ने अस्पताल के परिसर में ही अपनी लाल बत्ती वाली गाड़ी से उतरकर एके-47 से गोलियों की ऐसी बौछार की कि सुरक्षाकर्मी देखते रह गए. इस हत्याकांड ने पूरे देश को हिला दिया था क्योंकि यह पहली बार था जब किसी मंत्री को इतने हाई-प्रोफाइल जोन में घुसकर मारा गया था. इश्क, मोबाइल फोन और एसटीएफ का जाल कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर हो, कोई न कोई कमजोरी उसे ले डूबती है. श्रीप्रकाश की कमजोरी थी उसका इश्क और फोन. उस दौर में मोबाइल फोन बहुत महंगे होते थे और बहुत कम लोग इसका इस्तेमाल करते थे. श्रीप्रकाश की एक प्रेमिका गाजियाबाद में रहती थी. वह पुलिस से बचने के लिए जगह-जगह ठिकाने बदलता था, लेकिन अपनी प्रेमिका से लंबी बातें करना नहीं छोड़ता था. एसटीएफ का गठन इसी दौरान, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार ने अपराधियों के खात्मे के लिए STF यानी Special Task Force का गठन किया. एसटीएफ के पहले बड़े टारगेट के रूप में श्रीप्रकाश शुक्ला का नाम था. एसटीएफ ने मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल इंटरसेप्शन की तकनीक का इस्तेमाल किया. पुलिस को पता चला कि श्रीप्रकाश अपनी प्रेमिका को दिल्ली और गाजियाबाद के नंबरों पर फोन करता है. यही कॉल रिकॉर्ड्स उसकी मौत का वारंट बने. जब सीएम की ‘सुपारी’ लेकर की बड़ी गलती श्रीप्रकाश के अंत की शुरुआत तब हुई जब उसने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सुपारी लेने की जुर्रत की. इंटेलिजेंस को खबर मिली कि श्रीप्रकाश ने 6 करोड़ रुपये में सीएम को मारने का ठेका लिया है. यह खबर पुलिस के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी. इसके बाद आदेश साफ था ‘श्रीप्रकाश जिंदा नहीं बचना चाहिए’. गाजियाबाद में वो आखिरी एनकाउंटर 23 सितंबर 1998 का दिन था. एसटीएफ को पक्की सूचना मिली कि श्रीप्रकाश गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके से गुजरने वाला है. पुलिस ने जाल बिछाया. जैसे ही श्रीप्रकाश की नीले रंग की सिएलो कार दिखाई दी, पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया. श्रीप्रकाश ने अपनी आदत के मुताबिक गोलियां चलानी शुरू कर दीं, लेकिन इस बार उसका सामना यूपी के सबसे जांबाज पुलिस अधिकारियों से था. कुछ ही मिनटों की मुठभेड़ के बाद गाजियाबाद की सड़क पर श्रीप्रकाश शुक्ला का लहूलुहान शव पड़ा था. महज 25 साल की उम्र में जुर्म की ऊंचाइयों को छूने वाले श्रीप्रकाश शुक्ला का अंत हो चुका था. उसके पास से वही विदेशी हथियार और मोबाइल फोन मिले, जो कभी उसकी शान हुआ करते थे. उसकी कहानी आज भी यूपी-बिहार के अपराध जगत में सुनाई जाती है. कहा जाता है कि आज भी सूरजभान सिंह उसके परिवार का ख्याल रखता है. सूरजभान सिंह बाद में बलिया के सांसद बने और हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी वीणा देवी बाहुबली अनंत सिंह के खिलाफ लड़ी थी. हालांकि वह अनंत सिंह से हार गईं. लेकिन श्रीप्रकाश शुक्ला और सूरजभान सिंह में काफी नजदीकी थी.

तेलंगाना निकाय चुनाव: तेलंगाना निकाय चुनाव में 13 हजार से ज्यादा ताकतवर मुकाबले, 11 को वोट को लेकर पूरा।

तेलंगाना निकाय चुनाव: तेलंगाना निकाय चुनाव में 13 हजार से ज्यादा ताकतवर मुकाबले, 11 को वोट को लेकर पूरा।

नगर निगम निकाय चुनाव में लेकर राजनीतिक तापमान चरम पर है, जहां सत्ता की गलियों से लेकर झीलों तक तेलंगाना तट की घोषणा की जा रही है। राज्य के 7 नगर निगमों और 116 नगर निगमों में होने वाले इस ओलंपिक महाकुंभ में कुल 12,993 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, 2,996 वार्डों में इस चुनाव के लिए सभी खंडों को शामिल किया गया है, जहां प्रति वार्ड औसत चार ग्रीन के बीच कड़ी टक्कर को देखने को मिलता है। मतदान 11 तारीख को सुबह से शुरू होगा और 13 को प्रारंभिक के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा। रणनीतिकारों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में आबादी के मैदान में उतरने का मतलब यह है कि कोई भी बैठना आसान नहीं है और हर वार्ड में प्रतिस्पर्धा दिलचस्प होने वाली है। पॉलिटिकल ने चुनावी प्रचार को अपने चरम पर पहुंचा दिया है और 9 तारीख को प्रचार अवधि समाप्त होने से पहले वे वोटर्स को नारे लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पोलिंग आयोग ने आदर्श आचार संहिता के पालन के निर्देश दिए हैं, ताकि वोटिंग प्रक्रिया के दौरान मतदान करने वालों की संख्या कम हो सके। राजनीतिक के लिए अहम् परीक्षा यह चुनाव केवल स्थानीय डायनासोर के लिए नहीं, बल्कि राज्य के बड़े राजनीतिक चरित्र के लिए भी एक अहम परीक्षा की तरह है। मूर्तिकला से लेकर शहरी विकास तक, इस बार कई मुद्दों पर चर्चाओं में शामिल हैं। खैर ये चुनावी स्थानीय शास्त्रीय लड़ाई तो है, लेकिन इसके नतीजों का असर राज्य की राजनीति पर भी देखने को मिलता है। अब सभी परस्पर विरोधी 11 तारीख को मतदान प्रतिशत पर टिकी हैं, क्योंकि अधिकतर वोट होंगे, लोकतंत्र को समूह ही मजबूत माना जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गयी चुनाव आयोग ने चाक-चौबंद के लिए फिलीस्तीन मतदान के लिए सुरक्षा व्यवस्था शुरू की है और लोगों को डराने या धमकाने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की है। 13 तारीख को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि आम जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है और राज्य के शहरी क्षेत्र का विकास किस दिशा में होगा। ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में सबसे पीछे की कुर्सी पर बैठे हैं ममता बनर्जी, कर रही खुद सर के मुकदमे की लड़ाई (टैग्सटूट्रांसलेट)चुनाव(टी)तेलंगाना(टी)तेलंगाना नागरिक चुनाव(टी)तेलंगाना नगरपालिका चुनाव(टी)तेलंगाना स्थानीय निकाय चुनाव(टी)तेलंगाना राजनीति समाचार(टी)नगर निगम चुनाव(टी)वार्ड चुनाव तेलंगाना(टी)चुनाव(टी)तेलंगाना(टी)तेलंगाना नगर निगम चुनाव(टी)तेलंगाना नगरपालिका चुनाव(टी)तेलंगाना स्थानीय नगरपालिका चुनाव(टी)तेलंगाना राजनीति समाचार(टी)नगर निगम चुनाव(टी)वार्ड चुनावतेलंगाना

वह IPS जिसने कांपते हाथों से उठाया था बंदूक, वही बना देश का सबसे बड़ा एनकाउंटर स्पेशलिस्ट | ips navneet sikera first bullet firing incident trembling hands became country biggest encounter specialist

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IPS Success Story: कहानी देश के बड़े राज्यों में से एक का सबसे बड़े ‘सुपर कॉप’ की, जिसे कभी अंग्रेजी नहीं आने के कारण दिल्ली के बड़े कॉलेजों से एक में नहीं मिल सका था दाखिला. वह लड़का जो बाद में खुद से पढ़कर क्रैक किया आईआईटी जैसा एग्जाम और पहले ही प्रयास में यूपीएससी में झंडा गाड़कर बन गया आईपीएस अधिकारी. जिस शख्स का पुलिस की नौकरी में आने के बाद पहली बार बंदूक चलाने में कांप गया था हाथ, बाद में वही बन गया देश के सबसे बड़े एनकाउंटर स्पेशलिस्ट में से एक. आज कहानी उस आईपीएस अधिकारी की करेंगे, जो फिलहाल पुलिस सेवा में तो है, लेकिन लाइमलाइट से दूर रहकर सिर्फ नौकरी कर रहा है. जानेंगे कैसे वह लड़का अपने पिता का अपमान का बदला लेने के लिए बना था आईपीएस अधिकारी, जो आज भी हजारों युवाओं का बना हुआ है रोल मॉडल. देश का एक ऐसा आईपीएस अधिकारी, जिसके पिता किसान थे. जिसका फर्स्ट च्वाइस आईपीएस नहीं था. लेकिन एक घटना ने उसे बना दिया देश का चर्चित आईपीएस अधिकारी. कहानी उस आईपीएस अधिकारी की, जिसने क्राइम और क्राइम करने वालों पर नकेल कसा. एक ऐसा आईपीएस अधिकारी जिसका सिर्फ नाम सुनकर ही अपराधियों के पसीने छूटने लगते थे. खौफ ऐसा कि जहां पोस्टिंग होती थी वहां से पहले ही अपराधी भाग जाते. हम बात कर रहे हैं यूपी पुलिस के सबसे डायनमिक सुपर कॉप नवनीत सिकेरा की, जिनके खौफ की चर्चा आज भी यूपी में होता है. कहानी यूपी के एख दबंग आईपीएस अधिकारी की आज भी पश्चिमी यूपी का बच्चा-बच्चा इस पुलिसवाले के नाम से अंजान नहीं है. नवनीत सिकेरा का वह दौर आज भी लोगों के जुबां पर है. कहा जाता है कि नवनीत सिकेरा अपराधियों के लिए जितने सख्त थे आम जनता के लिए उतने ही नरम और मददगार थे. यूपी कैडर का 1996 बैच के इस आईपीएस अधिकारी की कहानी बेहद दिलचस्प है. 22 अक्टूबर 1971 को एटा जिले के एक गांव में नवनीत का जन्म हुआ. नवनीत के पिता एक साधारण किसान थे. उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में उन्होंने हिंदी मीडियम के स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की. स्कूलिंग करने के बाद वो एडमिशन लेने के लिए दिल्ली के हंसराज कॉलेज में आए. लेकिन अंग्रेजी नहीं आने के कारण फॉर्म नहीं मिला. बस ये बात उन्हें इतनी चुभी कि उन्होंने आईआईटी में एडमिशन लेने की ठान ली. पहले ही प्रयास में आईआईटी एग्जाम पास कर ली. नवनीत सिकेरा की चर्चा आज भी क्यों होती है? कैसे बना बड़ा सबसे बड़ा एनकाउंटर स्पेशलिस्ट? माता-पिता गांव में ही थे तो अक्सर उनका गांव जाना होता रहता. गांव की जमीन पर कुछ दबंगों ने कब्जा कर लिया था. सिकेरा पिता के साथ थाना पहुंचे तो उनके पिता के साथ बदसलूकी की गई. यही कारण था कि वह पुलिस अधिकारी बनने की ठानी. नवनीत ने इसके बाद एमटेक करने का इरादा छोड़कर करने लगे सिविल सर्विसेज की तैयारी. अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्रेक कर बन गए आईपीएस अधिकारी. एक टीवी शो में नवनीत ने कहा था कि सिविल सर्विसेज में उन्हें टॉप रैंकिंग मिली थी, जिससे आईएएस भी मिल सकती थी. लेकिन उन्होंने पहली च्वाइस आईपीएस ही भरा था. उन्होंने आईपीएस की नौकरी चुनी. एएसपी के रूप में पहली पोस्टिंग गोरखपुर में मिली. इसके बाद वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में रहे. मुजफ्फरनगर, मेरठ और लखनऊ में भी रहे. लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनके एक के बाद एक एनकाउंटर की आज बी खूब चर्चा होती है. सिकेरा ने कई बड़े-बड़े अपराधियों को ठिकाने लगाया. एक बार तो मेरठ में पोस्टिंग के दौरान उनका ट्रांकफर दूसरे जिले में हो गया तो लोगों ने उनका ट्रांसफर रुकवाने के लिए पूरे शहर में पोस्टर लगवा दिया. नवनीत सिकेरा से उत्तर प्रदेश के अपराधी थर-थर कांपते थे. वो क्रिमिनल्स का खात्मा करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थे. जहां नवनीत सेकेरा की पोस्टिंग होती थी, अपराधी भाग जाते थे. एक बार तो क्रिमिनल रमेश कालिया के एनकाउंटर को करने के लिए नवनीत ने फेक बारात ही तैयार कर डाली. दूल्हा-दुल्हन बाराती सबकुछ नकली था बस एनकाउंटर एकदम असली. उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पोस्टेड रहते हुए नवनीत ने ऐसे ही छोटे-बड़े करीब 60 अपराधियों को अपनी बंदूक से मार गिराया. नवनीत सिकेरा फिलहाल यूपी पुलिस में एडीजी पद पर तैनात हैं. वो इतने फेमस कॉप रहे हैं कि उन पर एक वेब सीरीज भौकाल-2 भी आ चुकी है.

2.50 लाख को 2.50 करोड़ बनाने का झांसा, बिलासपुर में तांत्रिक गिरफ्तार

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बिलासपुर/कोरिया.  तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला छत्‍तीसगढ़ के बिलासपुर में सामने आया है, जिसने न सिर्फ पुलिस बल्कि आम लोगों को भी हैरान कर दिया है. यहां एक कथित तांत्रिक ने अनुष्ठान और चमत्कार के नाम पर 2.50 लाख रुपए को 2.50 करोड़ बनाने का दावा किया. इस झांसे को सच साबित करने के लिए बाकायदा पूजा-पाठ का नाटक रचा गया. नोटों की गड्डियों के सामने नारियल, अगरबत्ती और मंत्रोच्चार के साथ ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे किसी फिल्म का सीन हो. इसी दौरान ऊपर से पैसों की बारिश होती दिखाई गई, जिसका वीडियो अब सामने आया है. यही वीडियो ठगी की सबसे बड़ी कड़ी बन गया. इस वीडियो को देखकर कोरिया जिले के चार युवक झांसे में आ गए और कथित तांत्रिक को ढाई लाख रुपए सौंप दिए. लेकिन जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो कहानी ने नया मोड़ ले लिया. तांत्रिक और उसके साथी पैसे लेकर फरार हो गए. इसके बाद पीड़ित युवकों ने खुद कानून हाथ में ले लिया. हाईवे पर बीच सड़क पर तांत्रिक को पकड़कर उसकी पिटाई की गई और लूटपाट की घटना भी सामने आई. अब इस पूरे मामले में ठगी और लूट, दोनों एंगल पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. कैसे रचा गया पैसों की बारिश का नाटकपुलिस जांच में सामने आया है कि यह पूरा खेल पहले से स्क्रिप्टेड था. बिल्हा थाना क्षेत्र के संबलपुरी गांव में कांग्रेस समर्थित सरपंच पति के घर अनुष्ठान का आयोजन किया गया. कथित तांत्रिक विजय कुमार राज ने पूजा स्थल सजाया. सामने नोटों की गड्डियां रखी गईं. मंत्र पढ़े गए और कैमरे के सामने अचानक ऊपर से नोट गिरते दिखाए गए. इस वीडियो को चमत्कार बताकर संभावित शिकारों को दिखाया गया. यही वीडियो देखकर कोरिया के चार युवक भरोसे में आ गए. कौन है कथित तांत्रिक विजय कुमार राजविजय कुमार राज उम्र 48 साल कोरबा जिले के दीपका का रहने वाला है. वह खुद को तांत्रिक बताता था और तंत्र विद्या से पैसा बढ़ाने का दावा करता था. पुलिस के मुताबिक उसके साथ इस ठगी में तीन महिलाएं और एक सरपंच पति शामिल था. महिलाएं लोगों को लालच देने और भरोसा जीतने का काम करती थीं. सरपंच पति स्थानीय स्तर पर व्यवस्था और संपर्क का जिम्मा संभालता था. ठगी से लूट तक पहुंचा मामला30 जनवरी को कोरिया के चार युवक ढाई लाख रुपए लेकर बिल्हा पहुंचे. अनुष्ठान के बाद पैसे विजय को सौंप दिए गए. अगले दिन जब युवकों को ठगी का शक हुआ और उन्होंने पैसे लौटाने की मांग की, तो तांत्रिक टालमटोल करने लगा. 31 जनवरी की रात करीब साढ़े तीन बजे विजय कार से जा रहा था. रतनपुर क्षेत्र में ढाबे के पास कार रोकी. तभी दो कारों में सवार पीड़ित युवक वहां पहुंचे और मारपीट शुरू कर दी. आरोप है कि इसके बाद तांत्रिक की कार, तीन मोबाइल और करीब 8 हजार रुपए कैश लूट लिया गया. SSP के निर्देश पर बनी विशेष टीमघटना की जानकारी मिलते ही SSP रजनेश सिंह के निर्देश पर विशेष पुलिस टीम गठित की गई. मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम अंबिकापुर और कोरिया तक पहुंची. 2 फरवरी को मारपीट और लूट के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर बिलासपुर लाया गया. उनके पास से लूटी गई कार, मोबाइल फोन, नकदी और वारदात में इस्तेमाल की गई क्रेटा और अर्टिगा कार भी जब्त की गई. तांत्रिक भी निकला ठगी का आरोपीजांच में यह भी सामने आया कि कथित तांत्रिक विजय कुमार राज ने शुरू में पुलिस से ठगी की बात छिपाई. लेकिन साक्ष्यों के आधार पर उसे भी आरोपी बनाया गया. पुलिस ने उसके खिलाफ बिल्हा थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है. वहीं लूट और मारपीट के मामले में पीड़ित युवक भी आरोपी बने हैं. दोनों पक्षों पर अलग-अलग धाराओं में कार्रवाई जारी है. पुलिस की चेतावनी और आगे की कार्रवाई पुलिस अफसरों ने की अपीलASP मधुलिका सिंह ने बताया कि तंत्र-मंत्र से पैसा दोगुना करने का दावा करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. SSP रजनेश सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि ऐसे चमत्कारी दावों के झांसे में न आएं. पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में लालच ही सबसे बड़ी कमजोरी बनता है.