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जन्म से खराब कान, 1 इंजेक्शन से सुनायी देने लगी आवाजें, क्या है जीन थेरेपी?

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Birth Deafness Cure: कई लोगों में जन्म से ही सुनने की क्षमता नहीं होती है. इस समस्या को ठीक करने के लिए अब तक किसी तरह का इलाज नहीं था. लेकिन हालिया स्टडी में यह सामने आया है कि जीन थेरेपी के जरिए जन्म से बहरे लोगों की सुनने की क्षमता वापस लाई जा सकती है. जीन थेरेपी क्या है? कैसे काम करता है, चलिए समझते हैं.

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जन्म से सुनने की क्षमता न होने पर व्यक्ति साफ बोल भी नहीं पाता है. ये प्रॉब्लम लाइफ क्वालिटी को पूरी तरह खराब कर देती है. इससे जूझ रहे लोगों के साथ उनके परिवार की जिंदगी भी इससे प्रभावित होती है. अब तक इसके लिए कोई ठोस इलाज के विकल्प उपलब्ध नहीं थे लेकिन हालिया स्टडी ने उम्मीद की किरण जगा दी है.

एक क्लिनिकल स्टडी में यह सामने आया है कि जीन थेरेपी के जरिए जन्म से बहरे लोगों की सुनने की क्षमता वापस लाई जा सकती है. माओली डुआन
के नेतृत्व में करोलिंस्का संस्थान के वैज्ञानिकों ने 1 से 24 साल की उम्र के 10 मरीजों पर यह इलाज किया. इन सभी को OTOF जीन में गड़बड़ी के कारण जन्म से सुनने में दिक्कत थी.

1 इंजेक्शन से लौट आयी सुनने की क्षमता
यह स्टडी नेचर मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित हुई, जिसमें बताया गया कि एक ही इंजेक्शन के बाद सभी मरीजों की सुनने की क्षमता में सुधार देखा गया. कुछ मरीज तो कुछ ही हफ्तों में बोलचाल की आवाजें पहचानने लगे. इलाज में वैज्ञानिकों ने AAV (एडेनो-एसोसिएटेड वायरस) का इस्तेमाल किया, जिसके जरिए सही OTOF जीन को कान के अंदर पहुंचाया गया. यह इंजेक्शन कोक्लिया (कान के अंदर का हिस्सा) में दिया जाता है.

क्या है जीन थेरेपी?
यह थेरेपी OTOF जीन पर काम करती है, जो ओटोफ़र्लिन नाम का प्रोटीन बनाता है. यह प्रोटीन कान से दिमाग तक आवाज के सिग्नल पहुंचाने में जरूरी होता है. जब यह प्रोटीन नहीं बनता, तो व्यक्ति जन्म से ही सुन नहीं पाता. हालांकि, इस स्थिति में कान की बनावट सही रहती है, सिर्फ सिग्नल भेजने की प्रक्रिया खराब होती है, इसलिए इसे जीन थेरेपी से ठीक करना संभव है.यह तरीका कोक्लियर इम्प्लांट से अलग है, क्योंकि इसमें किसी मशीन की जरूरत नहीं होती, बल्कि सुनने की क्षमता को प्राकृतिक रूप से बहाल किया जाता है.

2 से 3 बच्चों को जन्मजात सुनने की समस्या
दुनिया में हर 1000 नवजात में से 2 से 3 बच्चों को जन्मजात सुनने की समस्या होती है, जिसमें 1 से 8 प्रतिशत मामले OTOF जीन से जुड़े होते हैं. अब तक इसका इलाज केवल कोक्लियर इम्प्लांट जैसे उपकरणों से ही किया जाता था, जो समस्या को ठीक नहीं बल्कि मैनेज करते हैं.

एक महीने के भीतर सुधार
इस स्टडी के नतीजे काफी तेज और प्रभावशाली रहे. मरीजों की सुनने की क्षमता औसतन 106 डेसिबल से सुधरकर 52 डेसिबल तक पहुंच गई, जिससे वे सामान्य बातचीत सुन सकते हैं. ज्यादातर मरीजों में एक महीने के भीतर सुधार दिखा और 6 महीने में सभी में अच्छा रिजल्ट मिला. एक 7 साल की बच्ची का केस सबसे खास रहा, जिसने 4 महीने में लगभग सामान्य सुनने की क्षमता हासिल कर ली और अपनी मां से रोजमर्रा की बातचीत करने लगी.

क्या सेफ है थेरेपी
सुरक्षा के लिहाज से भी यह थेरेपी सुरक्षित पाई गई. कुछ मरीजों में सफेद रक्त कोशिकाओं (न्यूट्रोफिल्स) में थोड़ी कमी देखी गई, लेकिन कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं हुआ. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है. आगे चलकर GJB2 और TMC1 जैसे अन्य जीन से जुड़ी सुनने की समस्याओं का भी इलाज इसी तरीके से किया जा सकता है. यह स्टडी जीन थेरेपी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव दिखाती है. अब केवल लक्षणों को मैनेज करने की बजाय बीमारी की जड़ को ठीक करने की दिशा में काम हो रहा है. भविष्य में यह तकनीक कई आनुवंशिक बीमारियों के इलाज का रास्ता खोल सकती है.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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जन्म से सुनने की क्षमता न होने पर व्यक्ति साफ बोल भी नहीं पाता है. ये प्रॉब्लम लाइफ क्वालिटी को पूरी तरह खराब कर देती है. इससे जूझ रहे लोगों के साथ उनके परिवार की जिंदगी भी इससे प्रभावित होती है. अब तक इसके लिए कोई ठोस इलाज के विकल्प उपलब्ध नहीं थे लेकिन हालिया स्टडी ने उम्मीद की किरण जगा दी है.

एक क्लिनिकल स्टडी में यह सामने आया है कि जीन थेरेपी के जरिए जन्म से बहरे लोगों की सुनने की क्षमता वापस लाई जा सकती है. माओली डुआन
के नेतृत्व में करोलिंस्का संस्थान के वैज्ञानिकों ने 1 से 24 साल की उम्र के 10 मरीजों पर यह इलाज किया. इन सभी को OTOF जीन में गड़बड़ी के कारण जन्म से सुनने में दिक्कत थी.

1 इंजेक्शन से लौट आयी सुनने की क्षमता
यह स्टडी नेचर मेडिसिन पत्रिका में प्रकाशित हुई, जिसमें बताया गया कि एक ही इंजेक्शन के बाद सभी मरीजों की सुनने की क्षमता में सुधार देखा गया. कुछ मरीज तो कुछ ही हफ्तों में बोलचाल की आवाजें पहचानने लगे. इलाज में वैज्ञानिकों ने AAV (एडेनो-एसोसिएटेड वायरस) का इस्तेमाल किया, जिसके जरिए सही OTOF जीन को कान के अंदर पहुंचाया गया. यह इंजेक्शन कोक्लिया (कान के अंदर का हिस्सा) में दिया जाता है.

क्या है जीन थेरेपी?
यह थेरेपी OTOF जीन पर काम करती है, जो ओटोफ़र्लिन नाम का प्रोटीन बनाता है. यह प्रोटीन कान से दिमाग तक आवाज के सिग्नल पहुंचाने में जरूरी होता है. जब यह प्रोटीन नहीं बनता, तो व्यक्ति जन्म से ही सुन नहीं पाता. हालांकि, इस स्थिति में कान की बनावट सही रहती है, सिर्फ सिग्नल भेजने की प्रक्रिया खराब होती है, इसलिए इसे जीन थेरेपी से ठीक करना संभव है.यह तरीका कोक्लियर इम्प्लांट से अलग है, क्योंकि इसमें किसी मशीन की जरूरत नहीं होती, बल्कि सुनने की क्षमता को प्राकृतिक रूप से बहाल किया जाता है.

2 से 3 बच्चों को जन्मजात सुनने की समस्या
दुनिया में हर 1000 नवजात में से 2 से 3 बच्चों को जन्मजात सुनने की समस्या होती है, जिसमें 1 से 8 प्रतिशत मामले OTOF जीन से जुड़े होते हैं. अब तक इसका इलाज केवल कोक्लियर इम्प्लांट जैसे उपकरणों से ही किया जाता था, जो समस्या को ठीक नहीं बल्कि मैनेज करते हैं.

एक महीने के भीतर सुधार
इस स्टडी के नतीजे काफी तेज और प्रभावशाली रहे. मरीजों की सुनने की क्षमता औसतन 106 डेसिबल से सुधरकर 52 डेसिबल तक पहुंच गई, जिससे वे सामान्य बातचीत सुन सकते हैं. ज्यादातर मरीजों में एक महीने के भीतर सुधार दिखा और 6 महीने में सभी में अच्छा रिजल्ट मिला. एक 7 साल की बच्ची का केस सबसे खास रहा, जिसने 4 महीने में लगभग सामान्य सुनने की क्षमता हासिल कर ली और अपनी मां से रोजमर्रा की बातचीत करने लगी.

क्या सेफ है थेरेपी
सुरक्षा के लिहाज से भी यह थेरेपी सुरक्षित पाई गई. कुछ मरीजों में सफेद रक्त कोशिकाओं (न्यूट्रोफिल्स) में थोड़ी कमी देखी गई, लेकिन कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं हुआ. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है. आगे चलकर GJB2 और TMC1 जैसे अन्य जीन से जुड़ी सुनने की समस्याओं का भी इलाज इसी तरीके से किया जा सकता है. यह स्टडी जीन थेरेपी के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव दिखाती है. अब केवल लक्षणों को मैनेज करने की बजाय बीमारी की जड़ को ठीक करने की दिशा में काम हो रहा है. भविष्य में यह तकनीक कई आनुवंशिक बीमारियों के इलाज का रास्ता खोल सकती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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