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भजनलाल की हत्या का राज एक महीने बाद खुला, पत्नी ने प्रेमी संग रची थी साजिश, नहर में फेंका था शव

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Last Updated:February 16, 2026, 23:31 IST Sri Ganganagar News : श्रीगंगानगर जिले में 32 वर्षीय भजनलाल हत्याकांड में पुलिस ने खुलासा किया है कि वारदात की साजिश घर के भीतर ही रची गई थी. जांच में सामने आया कि पत्नी ने अपने प्रेमी और एक नाबालिग के साथ मिलकर पति को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. पहले मारपीट की गई, फिर गला घोंटकर शव को नहर में फेंक दिया गया. पुलिस ने पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि नाबालिग को हिरासत में लिया गया है. मामले की जांच जारी है. श्रीगंगानगर. राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में एक महीने पहले हुई 32 साल के भजनलाल की हत्या का पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. पुलिस के मुताबिक यह हत्या किसी बाहरी दुश्मनी का नतीजा नहीं थी, बल्कि साजिश घर के अंदर ही रची गई थी. गांव चार जेडडब्ल्यूएम में 16 जनवरी को भजनलाल की हत्या कर दी गई थी. अब जांच में सामने आया है कि उसकी पत्नी इंद्रा देवी ने अपने प्रेमी प्रभुदयाल और एक नाबालिग के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया. पुलिस अधीक्षक अमृता दुहन ने बताया कि इंद्रा देवी और प्रभुदयाल के बीच प्रेम संबंध थे. दोनों ने मिलकर भजनलाल को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. 16 जनवरी को जब भजनलाल घर से मोटरसाइकिल लेकर किसी काम से निकला, तब इंद्रा देवी ने अपने प्रेमी प्रभुदयाल को फोन कर इसकी जानकारी दी. रास्ते में रोका, लाठी-डंडों से पीटाजानकारी मिलते ही प्रभुदयाल एक नाबालिग के साथ पहुंचा. दोनों ने रास्ते में भजनलाल को रोक लिया. पुलिस के अनुसार पहले उसे लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा गया. जब वह अधमरा हो गया तो प्रभुदयाल ने रस्सी से उसका गला घोंट दिया. हत्या के बाद शव और मोटरसाइकिल को इंदिरा गांधी नहर में फेंक दिया गया ताकि मामला हादसा लगे. 2 फरवरी को नहर से मिला शवदो फरवरी को फलोदी क्षेत्र में नहर से एक शव बरामद हुआ. पहचान भजनलाल के रूप में हुई. इसके बाद मामला हत्या का निकला. भजनलाल के पिता कृष्ण लाल ने बेटे की हत्या का मामला दर्ज कराया. पुलिस ने गहराई से जांच शुरू की. कॉल डिटेल और अन्य सुरागों के आधार पर शक की सुई घर के अंदर ही घूम गई. आरोपी गिरफ्तार, नाबालिग हिरासत मेंपुलिस ने इंद्रा देवी और उसके प्रेमी प्रभुदयाल को गिरफ्तार कर लिया है. इस मामले में शामिल एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है. पुलिस का कहना है कि पूछताछ में कई अहम बातें सामने आई हैं. मामले की जांच जारी है. गांव में इस घटना के बाद सनसनी का माहौल है. लोग हैरान हैं कि पति की हत्या की साजिश उसकी अपनी पत्नी ने रची. एक महीने तक यह राज दबा रहा, लेकिन आखिरकार पुलिस ने परतें खोल दीं. About the Author Anand Pandey नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें Location : Ganganagar,Rajasthan First Published : February 16, 2026, 23:31 IST

Epstein Files: US Seeks Indian Victim for Compensation

Epstein Files: US Seeks Indian Victim for Compensation

वॉशिंगटन डीसी/नई दिल्ली5 दिन पहले कॉपी लिंक यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइलों में खुलासा हुआ है कि एक भारतीय लड़की भी उसका शिकार हुई थी। दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने उसे पीड़ित मुआवजा फंड से भुगतान दिलाने के लिए भारत में तलाश शुरू की थी। 13 जनवरी 2020 की एक ईमेल में अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत सामने आई है। इसमें भारत में मौजूद पीड़िता का पता और जानकारी जुटाने को कहा गया है, ताकी भारत स्थित अमेरिकी दूतावास के जरिए उससे संपर्क किया जा सके। यह ईमेल एपस्टीन की अगस्त 2019 में जेल में हुई मौत के बाद की है। रिलीज दस्तावेजों में इस मेल का टाइटल ‘एपस्टीन विक्टिम्स’ है, हालांकि अधिकारियों के नाम और कुछ जानकारियां छुपाई गई हैं। दस्तावेज में अमेरिकी अधिकारियों से भारतीय लड़की और उसकी कॉन्टैक्ट डीटेल्स निकालने के लिए कहा गया है। फाइल्स में पूर्व केंद्रीय मंत्री हर्ष वर्धन का भी जिक्र नई फाइल्स में 5 जून 2014 को बिल गेट्स और एपस्टीन के बीच बातचीत की एक ईमेल शामिल है। इसमें एपस्टीन बिल गेट्स से पूछता है कि क्या डॉ. हर्ष वर्धन से 17 सितंबर को भारत में उनकी मीटिंग हैं। उस समय हर्ष वर्धन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री थे। इसके अलावा 2 अप्रैल 2017 की एक ईमेल में भारत के PR कंपनी प्रमोटर दिलीप चेरियन का भी जिक्र है। इस मेल में एपस्टीन के सहयोगी गिनो यू ने उनसे पूछा कि क्या वे दिलीप चेरियन से मिलना चाहेंगे। ईमेल में लिखा है कि दिलीप पेरिस में 3 से 6 अप्रैल तक रहेंगे और उन्होंने 160 मिलियन अमेरिकी डॉलर में अपनी विज्ञापन और पीआर कंपनी बेची है। 8 जुलाई 2010 की एक ईमेल में एक महिला ने एपस्टीन को अपने फ्लाइट अनुभव के बारे में लिखा। उसने बताया कि उसके पास बैठे एक बुजुर्ग भारतीय व्यक्ति ने शराब पी रखी थी और वह बार-बार उससे बात कर रहा था और छू रहा था। मेल में लिखा है कि वह व्यक्ति सोने के बाद जागा और उसने महिला को गले लगाते हुए कहा कि वह उससे प्यार करता है। डॉ हर्षवर्धन भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और दो बार भारत के स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। (फाइल फोटो) एपस्टीन से 3-4 बार मिले थे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 11 फरवरी को बताया था कि वह यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से तीन या चार बार मिले थे। यह बातचीत पूरी तरह से प्रोफेशनल थी, जो इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज्म और दूसरे इंटरनेशनल कामों से जुड़ी थी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एपस्टीन के आपराधिक मामलों से अपना कोई संबंध होने के आरोपों को बेबुनियाद बताया। पुरी ने कहा, जब मैंने मई 2009 से न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला था, तब से लेकर 2017 में मंत्री बनने तक की अवधि के 30 लाख ईमेल जारी किए गए हैं। इस दौरान, केवल तीन या चार बैठकों का ही जिक्र मिलता है और मेरी बातचीत पूरी तरह से पेशेवर थी। केंद्रीय मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एपस्टीन के आपराधिक मामलों से अपना कोई संबंध होने के आरोपों को बेबुनियाद बताया। यौन अपराधी और अनिल अंबानी की चैट भी सामने आई जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में अनिल अंबानी से जुड़े खुलासे हुए हैं। ये दस्तावेज एपस्टीन और उद्योगपति अनिल अंबानी के बीच 2017 से 2019 के दौरान हुई बातचीत से जुड़े हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें कारोबार, वैश्विक मामलों और महिलाओं को लेकर चर्चा हुई। 9 मार्च 2017 की बातचीत में अनिल ने एपस्टीन से पूछा- क्या सुझाव है? इस पर एपस्टीन ने लिखा- मुलाकात ‘मजेदार’ बनाने के लिए ‘लंबी स्वीडिश ब्लॉन्ड महिला’ बेहतर होगी। इसके बाद अंबानी ने जवाब दिया, ‘इसे अरेंज करो।’ बातचीत तब की है। यह बातचीत उस समय की है, जब एप्सटीन को पहले ही 2008 में नाबालिगों से जुड़े यौन आपराध के मामले में सजा मिल चुकी थी। इसके बावजूद एप्सटीन दुनिया के कई प्रभावशाली और ताकतवर लोगों के संपर्क में बना हुआ था। रिकॉर्ड बताते हैं कि दोनों के बीच पेरिस और न्यूयॉर्क में मिलने की योजना बनीं। मई 2019 में अनिल अंबानी के न्यूयॉर्क दौरे के वक्त एपस्टीन ने उन्हें मैनहैटन स्थित अपने घर बुलाया, जहां दोनों मिले। दूसरे ईमेल्स से यह भी पता चलता है कि अंबानी और एपस्टीन के बीच अंतरराष्ट्रीय यात्राओं, बिजनेस मीटिंग्स और वैश्विक मंचों पर होने वाले कार्यक्रमों को लेकर बातचीत हुई थी। इनमें पेरिस, न्यूयॉर्क और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के कार्यक्रमों में संभावित मुलाकातों का जिक्र है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने X पर पोस्ट कर अनिल अंबानी और एपस्टीन के बीच 16 मार्च 2017 को हुई चैट का स्क्रीनशॉट शेयर किया था। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है इसकी शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले

नसीमुद्दीन सिद्दीकी सपा में शामिल: क्या बसपा काल का मुस्लिम चेहरा और ‘मिनी सीएम’ बदल देगा 2027 यूपी चुनाव का गणित? | चुनाव समाचार

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आखरी अपडेट:16 फरवरी, 2026, 19:46 IST सपा के लिए, नसीमुद्दीन सिद्दीकी का शामिल होना पार्टी के मुस्लिम नेतृत्व प्रोफाइल को ऐसे समय में मजबूत करता है जब वरिष्ठ नेता आजम खान को लंबे समय तक कानूनी, राजनीतिक असफलताओं का सामना करना पड़ा है। रविवार को लखनऊ में सपा मुख्यालय में औपचारिक रूप से शामिल होने के दौरान पूर्व कांग्रेस नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी का स्वागत करते सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। (पीटीआई) क्या नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे अनुभवी मुस्लिम चेहरे की समाजवादी पार्टी में एंट्री 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गणित को नया आकार देगी? लखनऊ में समाजवादी पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा, “हमें पक्षी की आंख पर निशाना लगाना है। लक्ष्य स्पष्ट है – 2027 में सरकार बदलें और अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाएं।” यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में देखा जा रहा है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए सिद्दीकी के साथ 15,000 से अधिक समर्थक थे, जिनमें से कई लोग बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पूर्व कार्यकर्ता माने जाते हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि उनके प्रवेश से सपा को मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करने में मदद मिल सकती है, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में बसपा के पारंपरिक कैडर आधार में सेंध लग सकती है। न्यूज18 से बातचीत में सिद्दीकी ने कहा कि उनका तत्काल ध्यान जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर होगा. उन्होंने कहा, “आने वाले महीने महत्वपूर्ण हैं। मैं बड़े पैमाने पर यात्रा करूंगा और यह सुनिश्चित करूंगा कि समावेशी राजनीति का संदेश हर बूथ तक पहुंचे।” रेलवे ठेकेदार से लेकर राजनीतिक दिग्गज तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में नसीमुद्दीन सिद्दीकी का सफर काफी लंबा और घटनापूर्ण रहा है. 4 जून 1959 को जन्मे, वह किसी राजनीतिक परिवार से नहीं आते थे। अपने शुरुआती वर्षों में, उन्होंने कुछ समय के लिए सेना में सेवा की लेकिन अपनी माँ की बीमारी के कारण उन्हें सेना छोड़नी पड़ी। इसके बाद, वह एक रेलवे ठेकेदार के रूप में सक्रिय हो गए – एक ऐसा पेशा जिसने उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत को चिह्नित किया। 1990 के आसपास, सिद्दीकी बसपा संस्थापक कांशीराम के संपर्क में आये, एक ऐसी मुलाकात जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी। वह 1984 में औपचारिक रूप से बसपा में शामिल हो गए और नगरपालिका चुनावों के माध्यम से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। 1991 में, वह बांदा विधानसभा सीट से विधायक चुने गए और बसपा के सबसे शुरुआती और सबसे प्रमुख मुस्लिम विधायकों में से एक बन गए। समय के साथ, वह बसपा के भीतर एक प्रमुख संगठनात्मक व्यक्ति के रूप में उभरे। सिर्फ एक प्रतीकात्मक मुस्लिम चेहरा नहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​है कि सिद्दीकी की क्षेत्रीय सत्ता केंद्र में वापसी का व्यापक प्रभाव हो सकता है। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख, लखनऊ स्थित राजनीतिक विशेषज्ञ शशिकांत पांडे ने कहा, “नसीमुद्दीन सिद्दीकी सिर्फ एक प्रतीकात्मक मुस्लिम चेहरा नहीं हैं। उनके पास बूथ स्तर के संगठनात्मक अनुभव का दशकों का अनुभव है, खासकर बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में। पूर्व बसपा कार्यकर्ताओं के बीच उनका प्रभाव समाजवादी पार्टी को उन क्षेत्रों में प्रवेश करने में मदद कर सकता है जहां उसने ऐतिहासिक रूप से संघर्ष किया है। हालांकि वह अकेले दम पर वोट बैंक को स्थानांतरित नहीं कर सकते हैं, करीबी मुकाबले वाले चुनाव में, विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों में 2-3% का स्विंग भी परिणाम बदल सकता है।” पांडे ने कहा कि सिद्दीकी की एंट्री से कैडर को एक मनोवैज्ञानिक संदेश भी जाता है. “यह संकेत देता है कि समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक यादव-मुस्लिम आधार से परे अपने सामाजिक गठबंधन का विस्तार करने के बारे में गंभीर है। एक ऐसे नेता को लाना जो कभी बसपा की चुनावी मशीनरी का प्रबंधन करता था, अनुभव और ताकत की धारणा दोनों को जोड़ता है।” एसपी के लिए, यह नियुक्ति रणनीतिक और सामयिक दोनों प्रतीत होती है। सिद्दीकी के लिए, यह उनके लंबे राजनीतिक करियर में एक और पुनर्गणना का प्रतीक है – जो अब इस बात पर निर्भर करता है कि क्या उनका अनुभव 2027 में ठोस लाभ में तब्दील हो सकता है। बसपा सरकार के “मिनी सीएम” सिद्दीकी ने पार्टी सुप्रीमो मायावती के नेतृत्व वाली सभी बसपा नीत सरकारों में मंत्री के रूप में कार्य किया। उनका राजनीतिक कद 2007-2012 की बसपा सरकार के दौरान चरम पर था, जब उन्होंने एक साथ 18 मंत्रालयों को संभाला – जिससे उन्हें राजनीतिक हलकों में “मिनी मुख्यमंत्री” का उपनाम मिला। उन्हें व्यापक रूप से मायावती के सबसे करीबी विश्वासपात्रों में से एक माना जाता था, जिनका प्रभाव टिकट वितरण और पार्टी संगठन से लेकर वित्तीय प्रबंधन तक था। उनकी प्रशासनिक पकड़ और संगठनात्मक नियंत्रण ने उन्हें बसपा की बहुमत सरकार के दौरान सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से एक बना दिया। 2012 और 2017 के बीच, बसपा के सत्ता खोने के बाद, सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया, जिससे राज्य की राजनीति में उनका कद और मजबूत हो गया। हालाँकि, 2017 में, बसपा की चुनावी हार के बाद, मायावती ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया – एक दशक पुराने जुड़ाव का नाटकीय अंत। सिद्दीकी ने बाद में एक स्वतंत्र स्थान बनाने का प्रयास करते हुए अपना खुद का राजनीतिक दल बनाया। हालाँकि, प्रयोग से कोई महत्वपूर्ण लाभ नहीं मिला। “देश में पहली बार बेरोज़गारी बोचा, पी.पी. ने दिया तो समाजवादी पार्टी और समाजवादी पार्टी और ग़ुलाम अखिलेश यादव जी की सरकार ने।”- श्री नसीमुद्दीन रियाज़ जी pic.twitter.com/1uGwMNHuUM – समाजवादी पार्टी (@samajvadparty) 15 फ़रवरी 2026 कांग्रेस के भीतर बेचैनी 2018 में, सिद्दीकी कांग्रेस में शामिल हो गए, जहां उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख मुस्लिम चेहरे के रूप में प्रचारित किया गया। पार्टी ने उन क्षेत्रों में उनके प्रभाव का लाभ उठाने की कोशिश की जहां उनके पास लंबे समय से संगठनात्मक नेटवर्क था। हालाँकि, कथित तौर पर उनकी भूमिका और प्रभाव को लेकर कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ गया। 2024 के लोकसभा चुनावों में, उन्हें प्रमुखता नहीं दी गई, और 2027 के विधानसभा चुनावों के करीब आने के साथ,

दुनियाभर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X 2 घंटे डाउन रहा:एप और वेब दोनों जगह नहीं चला; 1 महीने में दूसरी बार सर्विस ठप हुई

दुनियाभर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X 2 घंटे डाउन रहा:एप और वेब दोनों जगह नहीं चला; 1 महीने में दूसरी बार सर्विस ठप हुई

इलॉन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) की सर्विस आज (16 फरवरी) को दुनियाभर में 2 घंटे ठप रहीं। हजारों यूजर्स फीड एक्सेस नहीं कर पाने और ब्लैंक स्क्रीन दिखने की शिकायत की। हालांकि यह बीच में कुछ समय के लिए फिर से चालू और बंद होता रहा। आउटेज को ट्रैक करने वाली वेबसाइट ‘डाउनडिटेक्टर’ पर शाम 6.30 से 8.30 बजे तक 45,000 से ज्यादा लोगों ने शिकायतें की। हालांकि फिर सर्विस बहाल हो गई। इस दौरान यूजर्स का कहना था कि वे न तो अपनी टाइमलाइन देख पा रहे थे और न ही नई पोस्ट कर पा रहे थे। X की सर्विस 1 महीने में दूसरी बार ठप हुई है। इससे पहले 16 जनवरी को भी भारत,अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा समेत कई देशों में हजारों यूजर्स को एक्सेस करने में परेशानी हुई थी। 49% यूजर्स वेबसाइट नहीं चला पा रहे थे डाउनडिटेक्टर के मुताबिक, दुनियाभर में X के 49% यूजर्स वेबसाइट नहीं चला पा रहे थे। वहीं,41% लोगों को एप इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है और करीब 10% ने बताया कि टाइमलाइन लोड करने में दिक्कत हुई। एप और वेब दोनों पर लोडिंग की समस्या, ग्रोक AI भी बंद रहा इस आउटेज का असर मोबाइल एप्लिकेशन और डेस्कटॉप वर्जन दोनों पर देखा गया। यूजर्स ने बताया कि एप खोलने पर उन्हें सिर्फ ब्लैंक स्क्रीन दिखी। इसके साथ ही मस्क की कंपनी xAI का चैटबॉट ‘ग्रोक’ भी काम नहीं कर रहा था। यूजर्स के रिफ्रेश करने पर पुरानी पोस्ट गायब हो रहीं और कोई नया डेटा लोड नहीं हो रहा था। X की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं इलॉन मस्क या X की सपोर्ट टीम ने अभी तक इस आउटेज की वजह या इसके ठीक होने के समय को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। आमतौर पर X ऐसे मामलों में आंतरिक रूप से पैच अपडेट जारी करता है, जिसके बाद सर्विस धीरे-धीरे बहाल होती है। बार-बार होने वाले इन तकनीकी हादसों ने प्लेटफॉर्म की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। X के 4 आउटेज इलॉन मस्क ने 2022 में खरीदा था X 27 अक्टूबर 2022 को इलॉन मस्क ने ट्विटर (अब X) खरीदा था। ये डील 44 बिलियन डॉलर में हुई थी। आज के हिसाब से ये रकम करीब 3.84 लाख करोड़ रुपए होती है। मस्क ने सबसे पहले कंपनी के चार टॉप ऑफिशियल्स CEO पराग अग्रवाल, फाइनेंस चीफ नेड सेगल, लीगल एग्जीक्यूटिव विजया गड्डे और सीन एडगेट को निकाला था। 5 जून 2023 को लिंडा याकारिनो ने X के CEO के तौर पर जॉइन किया था। इससे पहले वो NBC यूनिवर्सल में ग्लोबल एडवर्टाइजिंग एंड पार्टनरशिप की चेयरमैन थीं। ———————- ये खबर भी पढ़ें… रेलवे टिकट बुकिंग वेबसाइट और एप फिर से डाउन: छठ पर्व पर हजारों यात्री परेशान; तत्काल टिकट बुक नहीं कर पाए छठ पर्व के पहले दिन आज यानी, 25 अक्टूबर को IRCTC की वेबसाइट और एप डाउन हो गए। लोगों को सुबह 10 बजे से रेल टिकट बुक करने में परेशानी हो रही है। इससे पहले दिवाली पर भी IRCTC की वेबसाइट और एप डाउन हो चुके हैं। आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म डाउन डिटेक्टर के मुताबिक सुबह 9:00 बजे से लोगों ने साइट और एप डाउन होने की शिकायत दर्ज करानी शुरू कर दी थी। सुबह 10 बजे करीब 180 लोगों ने इसे रिपोर्ट किया था। सोशल मीडिया पर भी लोग वेबसाइट डाउन होने की शिकायत करते रहे। पूरी खबर पढ़ें…

मनिकम टैगोर, चक्रवर्ती की ‘द्रमुक विरोधी’ टिप्पणियों को लेकर तमिलनाडु कांग्रेस प्रमुख ने खड़गे से की मुलाकात | चुनाव समाचार

मनिकम टैगोर, चक्रवर्ती की 'द्रमुक विरोधी' टिप्पणियों को लेकर तमिलनाडु कांग्रेस प्रमुख ने खड़गे से की मुलाकात | चुनाव समाचार

सेल्वापेरुन्थागई ने कहा कि बैठक खड़गे के अनुरोध पर आयोजित की गई थी और दोनों नेताओं से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित थी। उन्होंने चर्चा के नतीजों के बारे में अधिक जानकारी साझा किए बिना कहा, “मैंने कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात की क्योंकि मुझे मनिकम टैगोर और प्रवीण चक्रवर्ती के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई के संबंध में बुलाया गया था।” यह ऐसे समय में आया है जब, तमिलनाडु विधानसभा चुनावों से पहले, कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग, विशेष रूप से विरुधुनगर के सांसद मनिकम टैगोर और पार्टी पदाधिकारी प्रवीण चक्रवर्ती द्वारा द्रविड़ पार्टी के खिलाफ आरोपों की एक श्रृंखला के बाद सत्तारूढ़ द्रमुक और उसकी सहयोगी कांग्रेस के बीच संबंधों में तनाव आ गया है। ऐसा विश्वसनीय रूप से पता चला है कि द्रमुक नेतृत्व ने परिणाम के लिए खुद को तैयार कर लिया है, चाहे कुछ भी हो। डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने सोमवार को द हिंदू को बताया, “अगर दोनों पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो हमारी पार्टी नेतृत्व सीट-बंटवारे की बातचीत के लिए कांग्रेस को बुलाने के लिए इच्छुक नहीं है।” “हमारे नेता परेशान हैं। हमें विश्वास है कि श्री टैगोर बार-बार हमें निशाना नहीं बनाएंगे और कांग्रेस आलाकमान के समर्थन के बिना सत्ता में हिस्सेदारी की मांग नहीं करेंगे। श्री टैगोर द्वारा हमारे नेतृत्व और पार्टी की आलोचना करने के बाद हमसे सीट-बंटवारे की बातचीत के लिए उनके साथ बैठने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?” नेता ने कहा. इससे पहले रविवार को, टैगोर ने कहा कि कांग्रेस को 2014 में द्रमुक की गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा और आरोप लगाया कि द्रविड़ पार्टी मदुरै में एक जिला सचिव और एक मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रही थी, जिन्होंने कथित तौर पर यहां तक ​​​​कहा कि कांग्रेस द्रमुक गठबंधन से बाहर निकलने के लिए स्वतंत्र थी। कांग्रेस की मदुरै दक्षिण जिला इकाई, जिसमें टैगोर ने भाग लिया, ने भी सत्ता में हिस्सेदारी की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। द्रमुक नेतृत्व को यह भी संदेह है कि कांग्रेस ने अपने विकल्प खुले रखे हैं, कथित तौर पर कुछ नेता अभिनेता विजय द्वारा शुरू की गई तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) के साथ गठबंधन की संभावना तलाश रहे हैं। मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन द्वारा गठबंधन सरकार के विचार को खारिज करने के बावजूद, टैगोर के बार-बार जोर देने से तमिलनाडु में राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है, कई लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या इस मुद्दे को उठाने के लिए उन्हें पार्टी नेतृत्व का मौन समर्थन प्राप्त है। (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी(टी)कांग्रेस डीएमके गठबंधन(टी)मनिकम टैगोर विवाद(टी)प्रवीण चक्रवर्ती कार्रवाई(टी)सेल्वापेरुंथगई की खड़गे से मुलाकात(टी)कांग्रेस सीट-बंटवारे की बातचीत(टी)डीएमके कांग्रेस संबंध(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव

क्या कर्नाटक के मंत्री ने कांग्रेस विधायकों को ‘सड़क का कुत्ता’ कहा? उनकी टिप्पणी से नेतृत्व विवाद की नई चिंगारी भड़की | राजनीति समाचार

क्या कर्नाटक के मंत्री ने कांग्रेस विधायकों को 'सड़क का कुत्ता' कहा? उनकी टिप्पणी से नेतृत्व विवाद की नई चिंगारी भड़की | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:16 फरवरी, 2026, 19:15 IST कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन पर सवालों का जवाब देते हुए, सामाजिक कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा ने कहा, “उच्च न्यायालय ने कहा है कि सड़क के कुत्तों को पकड़ो और उन्हें पिंजरे में बंद करो।” कर्नाटक के मंत्री सीएम सिद्धारमैया और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार के बीच कथित आंतरिक सत्ता संघर्ष से संबंधित सवालों का जवाब दे रहे थे। (छवि: @सिद्धारमैया/एक्स) कर्नाटक के एक मंत्री की अपने साथी विधायकों के साथ “सड़क का कुत्ता” उपमा ने कांग्रेस सरकार में कथित नेतृत्व संघर्ष को लेकर नई अटकलें शुरू कर दी हैं। जब समाज कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार के बीच आंतरिक सत्ता संघर्ष के संदर्भ में कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कांग्रेस में अपने सहयोगियों को कथित तौर पर “सड़क के कुत्ते” कहा। सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले महादेवप्पा ने जाहिर तौर पर मीडिया को जवाब देते हुए कहा, “उच्च न्यायालय ने कहा है कि सड़क के कुत्तों को पकड़ो और उन्हें पिंजरे में बंद करो”। महादेवप्पा ने कन्नड़ में कहा, “नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा कहां हो रही है? उच्च न्यायालय ने कहा है कि सड़क के कुत्तों को पकड़ो और उन्हें पिंजरे में बंद करो। यहां नेतृत्व मजबूत है।” इस पर मंत्री ने कहा, “मैंने कुछ नहीं कहा। मुझे नहीं पता। यहां नेतृत्व मजबूत है।” यह पूछे जाने पर कि क्या विधायक और मंत्री नई दिल्ली में आलाकमान से “स्पष्ट निर्देश” का इंतजार कर रहे हैं, उन्होंने कहा: “आलाकमान को हमें निर्देश देना होगा, न कि इसके विपरीत। क्या कुत्ते की पूंछ कुत्ते को नियंत्रित कर सकती है?” जबकि महादेवप्पा की उत्तेजक टिप्पणियों ने एक और विवाद खड़ा कर दिया है और तीखी आलोचना की है, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि मंत्री ने सार्वजनिक असंतोष को बढ़ावा देने वालों की तुलना “सड़क के कुत्तों” से की है जिन्हें पिंजरे में बंद करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, अपनी टिप्पणी के साथ, उन्होंने राष्ट्रीय रणनीति पर निचले स्तर के नेताओं के प्रभाव को भी खारिज कर दिया, और अलंकारिक रूप से पूछा कि क्या कुत्ते की पूंछ कभी कुत्ते को नियंत्रित कर सकती है। हालाँकि, ये टिप्पणियाँ कर्नाटक कांग्रेस के भीतर गहरी होती खाई को उजागर करती हैं क्योंकि विभिन्न गुट आधिकारिक इनकार के बावजूद नेतृत्व परिवर्तन की पैरवी कर रहे हैं। यहां तक ​​कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘बंद’ आदेश ने भी विधायकों को पक्ष लेने और अपने नेताओं के समर्थन में आवाज उठाने से नहीं रोका है। बाद में महादेवप्पा ने इस बात पर जोर देकर अपने शब्दों के विशिष्ट निहितार्थों से खुद को दूर करने का प्रयास किया कि वर्तमान नेतृत्व मजबूत और चुनौती रहित बना हुआ है। लेकिन मीडिया के साथ उनके आदान-प्रदान ने वफादारों के बीच बढ़ती निराशा को उजागर कर दिया है, जो लगातार अटकलों को शासन से ध्यान भटकाने के रूप में देखते हैं। हालाँकि पार्टी में कोई भी उनकी टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देने के लिए आगे नहीं आया है, लेकिन वे कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण संकट को रेखांकित करते हैं, जो अब तक राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को निर्णायक रूप से समाप्त करने में असमर्थ रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 16 फरवरी, 2026, 19:13 IST समाचार राजनीति क्या कर्नाटक के मंत्री ने कांग्रेस विधायकों को ‘सड़क का कुत्ता’ कहा? उनकी टिप्पणी से नेतृत्व विवाद की नई चिंगारी फूटती है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक कांग्रेस नेतृत्व विवाद(टी)कर्नाटक राजनीतिक संकट(टी)कांग्रेस आंतरिक संघर्ष(टी)एचसी महादेवप्पा स्ट्रीट डॉग टिप्पणी(टी)सिद्धारमैया डीके शिवकुमार प्रतिद्वंद्विता(टी)कांग्रेस नेतृत्व परिवर्तन कर्नाटक(टी)कर्नाटक विधायकों का असंतोष(टी)कांग्रेस पार्टी विवाद

दिल्ली: बुद्ध विहार में साली पर हमला, आरोपी जय प्रकाश यादव गिरफ्तार | delhi police arrested coaching teacher for attacked sister in law from rohini budh vihar west mega mall

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होमताजा खबरDelhi दिल्ली के रोहिणी में सनसनीखेज वारदात, जीजा ने सगी साली का रेत दिया गला Last Updated:February 16, 2026, 19:05 IST Delhi Crime News: दिल्ली के बुद्ध विहार इलाके में एक सिरफिरे जीजा ने अपनी साली पर जानलेवा हमला कर दिया. वेस्ट मेगा मॉल के पास आरोपी ने कटर से महिला का गला रेत दिया. दिल्ली पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए आरोपी टीचर को बगल की इमारत की छत से दबोच लिया. पारिवारिक विवाद के चलते इस खूनी खेल को अंजाम दिया गया. दिल्ली में जीजा ने साली का गला रेता नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-24 स्थित बुद्ध विहार इलाके में आज दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब एक शख्स ने अपनी ही साली का गला कटर से रेत दिया. यह घटना वेस्ट मेगा मॉल के पास पॉकेट-17 में हुई. घायल महिला को खून से लथपथ हालत में तुरंत बाबा साहेब अंबेडकर (BSA) अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है. दिल्ली पुलिस ने आरोपी जीजा को गिरफ्तार कर लिया है, जो वारदात के बाद पास की ही एक बिल्डिंग की छत पर छिपा हुआ था. दिल्ली पुलिस ने बताया कि दोपहर करीब 12:21 बजे बुद्ध विहार थाने में एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई, जिसमें बताया गया कि एक महिला का गला काट दिया गया है और वह गंभीर रूप से घायल है. सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुंची. जांच में पता चला कि घायल महिला एक थेरेपी सेंटर में काम करती है और वह अपनी ड्यूटी पर थी जब उस पर यह जानलेवा हमला हुआ. छत से दबोचा गया आरोपी टीचर वारदात को अंजाम देकर भाग रहे आरोपी को पकड़ने के लिए बुद्ध विहार थाने के एसआई साहिल, हेड कॉन्स्टेबल विकास सांगवान, कुलदीप, गणेश, मनदीप और कॉन्स्टेबल अजय व परमिंदर की टीम ने मोर्चा संभाला. पुलिस टीम ने आसपास की इमारतों की सघन तलाशी ली और बहादुरी का परिचय देते हुए आरोपी जय प्रकाश यादव को पास की एक इमारत की छत से धर दबोचा. आरोपी जय प्रकाश यादव नजफगढ़ के जनता विहार का रहने वाला है और वह एक कोचिंग सेंटर में शिक्षक है. पारिवारिक कलह दिल्ली पुलिस के पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. आरोपी जय प्रकाश का अपनी पत्नी जो खुद भी एक टीचर है और उसके परिवार के साथ अप्रैल 2025 से विवाद चल रहा था. इसी रंजिश के चलते उसने अपनी साली को निशाना बनाया. हमले के लिए उसने कटर ब्लेड का इस्तेमाल किया था, जिसे पुलिस ने मौके से बरामद कर लिया है. दिल्ली पुलिस घटना स्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए हैं. घायल महिला फिलहाल बयान देने की स्थिति में नहीं है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है. पुलिस ने आरोपी जय प्रकाश यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 109(1) हत्या का प्रयास के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस हमले में कोई और भी शामिल था या आरोपी ने अकेले ही इस साजिश को अंजाम दिया. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें First Published : February 16, 2026, 19:05 IST

Volodymyr Zelensky Vs Hungary PM; Viktor Orban – Russia Ukraine War

Volodymyr Zelensky Vs Hungary PM; Viktor Orban - Russia Ukraine War

म्यूनिख5 दिन पहले कॉपी लिंक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रविवार को जर्मनी के म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन, रूस से लड़ रहा है, इसलिए यूरोप के देश आज आजादी से जी पा रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि विक्टर ऑर्बन सोच रहे हैं कि अपना पेट कैसे बढ़ाया जाए, लेकिन ये नहीं सोच रहे कि सेना को कैसे बढ़ाया जाए, ताकि रूस टैंकों को बुडापेस्ट (हंगरी की राजधानी) की सड़कों पर फिर लौटने से रोका जा सके। जेलेंस्की का कहना है कि ऑर्बन रूस के खतरे को गंभीरता से लेने के बजाय अपनी राजनीति और आराम पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। वे सुरक्षा और रक्षा तैयारियों के बजाय दूसरी बातों में ज्यादा उलझे हुए हैं। ‘रूसी टैंकों के बुडापेस्ट की सड़कों पर लौटने’ की बात हंगरी के इतिहास से जुड़ी चेतावनी है। 1956 में सोवियत टैंक हंगरी में घुसे थे और विद्रोह को कुचल दिया गया था। जेलेंस्की याद दिलाना चाहते हैं कि अगर रूस को खुली छूट दी गई और समय रहते उसका विरोध नहीं किया गया, तो ऐसा खतरा दोबारा भी सामने आ सकता है। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन के साथ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की। यह तस्वीर जुलाई 2024 की है। ऑर्बन पर रूस को लेकर नरम रुख अपनाने का आरोप कोल्ड वॉर के समय हंगरी सोवियत यूनियन (आज का रूस) का हिस्सा था। बीते कुछ सालों में यूक्रेन और हंगरी के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हुए हैं। इसकी वजह यह है कि ऑर्बन पर रूस को लेकर नरम रुख अपनाने का आरोप है। हाल के हफ्तों में उन्होंने देश के चुनाव से पहले यूक्रेन के खिलाफ बयानबाजी भी तेज कर दी है। इससे पहले 2022 में रूसी हमले के बाद यूक्रेन ने यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने के लिए आवेदन किया था, लेकिन तब ऑर्बन के वीटो की वजह से आगे की बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी थी। बाकी यूरोपीय देशों के उलट, हंगरी ने यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भी रूस से अपने इंपोर्ट में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया। जेलेंस्की बोले- अमेरिका अब यूरोप को पहले जैसा साझेदार नहीं मानता जेलेंस्की ने कहा कि अब पुराने दिन खत्म हो चुके हैं। अमेरिका अब यूरोप को पहले जैसा साझेदार नहीं मानता। इसलिए यूरोप को यूक्रेन के साथ मिलकर अपनी खुद की सेना बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह युद्ध कुछ नेताओं के बीच बैठकर तय नहीं किया जा सकता। न तो डोनाल्ड ट्रम्प और व्लादिमीर पुतिन मिलकर इसका फैसला कर सकते हैं, न ही मैं खुद और पुतिन। म्यूनिख में बैठा कोई भी नेता अकेले पुतिन से बात करके इस युद्ध का अंत तय नहीं कर सकता। असली शांति के लिए सभी को मिलकर दबाव बनाना होगा। उन्होंने कहा कि कई नेता पहले भी कह चुके हैं कि यूरोप की अपनी सेना होनी चाहिए। उनके मुताबिक अब समय आ गया है कि यूरोप की सेनाएं बनाई जाएं। यूरोप को एक आवाज में बोलना होगा, अलग-अलग नहीं जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका को यूरोप एक बाजार के रूप में तो चाहिए, लेकिन क्या वह उसे सहयोगी के रूप में देखता है, यह साफ नहीं है। यूरोप को एक आवाज में बोलना होगा, अलग-अलग आवाजों में नहीं। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले राष्ट्रपति ट्रम्प ने उनसे पुतिन के साथ अपनी बातचीत के बारे में बताया, लेकिन एक बार भी यह नहीं कहा कि अमेरिका को बातचीत में यूरोप की जरूरत है। यह बात बहुत कुछ बताती है। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन आज ड्रोन युद्ध में दुनिया का नेता है। यह यूक्रेन की सफलता है, लेकिन यह दूसरों की भी सफलता है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपनी रक्षा के लिए जो कुछ भी बना रहा है, वह दूसरे देशों की सुरक्षा को भी मजबूत करता है। अमेरिका से करीबी रिश्ते बनाना जरूरी जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कर दिया है कि यूरोप और अमेरिका के बीच पुराने रिश्तों का दौर खत्म हो रहा है। अब हालात अलग होंगे और यूरोप को इसके मुताबिक खुद को ढालना होगा। उन्होंने कहा कि पहले अमेरिका सिर्फ इसलिए यूरोप का साथ देता था क्योंकि वह हमेशा से ऐसा करता आया था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। उन्होंने ट्रम्प के उस बयान का जिक्र किया कि इंसान के लिए वह परिवार ज्यादा मायने रखता है जिसे वह खुद बनाता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ सबसे करीबी रिश्ता बनाना जरूरी है। ट्रम्प ने पिछले महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में कहा था कि आर्थिक मामलों में यूरोप को अमेरिका जैसा बनना चाहिए। यूरोप वही करे जो अमेरिका कर रहा। यूक्रेन पर कोई फैसला यूक्रेन के बिना नहीं होना चाहिए जेलेंस्की ने साफ कहा कि यूक्रेन अपने पीछे या अपनी भागीदारी के बिना किए गए किसी भी समझौते को कभी स्वीकार नहीं करेगा। यही नियम पूरे यूरोप पर भी लागू होना चाहिए। यूक्रेन के बारे में कोई फैसला यूक्रेन के बिना नहीं और यूरोप के बारे में कोई फैसला यूरोप के बिना नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रूस हर हफ्ते नए सैन्य भर्ती केंद्र खोल रहा है और पुतिन ऐसा इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि तेल की कीमतें अभी भी इतनी ऊंची हैं कि वह दुनिया की परवाह किए बिना अपने फैसले ले सकते हैं। विक्टर ऑर्बन रूस पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर चुके हैं हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन पहले भी कह चुके हैं कि उनके देश ने कभी भी रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का समर्थन नहीं किया। कुछ साल पहले उन्होंने कहा कि फ्रांसीसी पत्रिका से कहा था कि उनका मकसद हमेशा हंगरी के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना रहा है। ऑर्बन ने कहा था कि यूरोप के इतिहास में शायद ही कोई उदाहरण हो, जब प्रतिबंधों से मनचाहा नतीजा मिला हो। रूस के मामले में प्रतिबंधों का असर सही तरीके से लागू नहीं हो रहा है और कई बार यूरोपीय देशों को रूस से ज्यादा नुकसान हो रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि रूस पर प्रतिबंधों की बात करने के बावजूद अमेरिका परमाणु ईंधन की खरीद कर रहा है। उनके मुताबिक जब यूरोप प्रतिबंधों की बात

महाराष्ट्र ने अजित पवार के निधन पर जताया शोक, 3 दिन में 75 संस्थानों को दिया गया अल्पसंख्यक दर्जा | राजनीति समाचार

महाराष्ट्र ने अजित पवार के निधन पर जताया शोक, 3 दिन में 75 संस्थानों को दिया गया अल्पसंख्यक दर्जा | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:16 फरवरी, 2026, 18:53 IST जबकि राज्य में शोक मनाया जा रहा था और सरकारी कार्यालय आधिकारिक तौर पर बंद थे, विभाग की ऑनलाइन प्रणाली से पता चला कि स्वीकृतियाँ दी जानी जारी रहीं यवतमाल में सेवादास महाराज टीचर्स एसोसिएशन को भी 28 जनवरी को एक प्रमाण पत्र जारी किया गया था, उसी दिन अजीत पवार की मृत्यु हो गई थी। महाराष्ट्र में राज्य प्रशासन के भीतर एक विवादास्पद प्रकरण सामने आया है, जिसने आधिकारिक शोक की अवधि के दौरान अधिकारियों के आचरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 28 जनवरी को बारामती में एक विमान दुर्घटना में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मृत्यु के बाद सरकार द्वारा छुट्टी और 3 दिन के राजकीय शोक की घोषणा के बावजूद, मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर अल्पसंख्यक विभाग से जुड़ी लंबे समय से लंबित फाइलों को संसाधित किया और मंजूरी दी। सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस दौरान राज्य भर के करीब 75 शिक्षण संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया. कथित तौर पर इन मंजूरियों से जुड़ी फाइलें अगस्त से लंबित थीं, लेकिन 28 जनवरी से 2 फरवरी के बीच इन्हें तेजी से मंजूरी दे दी गई। रिकॉर्ड बताते हैं कि पहला प्रमाणपत्र 28 जनवरी को दोपहर 3:09 बजे जारी किया गया था, जो कि पवार की मृत्यु की खबर के कुछ ही घंटों बाद था। जबकि राज्य में शोक मनाया जा रहा था और सरकारी कार्यालय आधिकारिक तौर पर बंद थे, विभाग की ऑनलाइन प्रणाली से पता चला कि अगले दिनों में भी मंजूरी दी जाती रही। कुल मिलाकर सात संस्थानों को घटना के दिन ही प्रमाणपत्र मिल गये. मंजूरी के समय पर सवाल खड़े हो गए हैं, प्रविष्टियों से पता चलता है कि कुछ फाइलों को नियमित कार्यालय समय के बाद भी मंजूरी दे दी गई थी, जिसमें शाम 6:30 और 7 बजे भी शामिल थे। अकेले 29 जनवरी को पोद्दार समूह से जुड़े 25 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया। स्वामी शांति प्रकाश और देव प्रकाश से जुड़े चार स्कूलों को भी इस दौरान मंजूरी मिली। इसके अतिरिक्त, यवतमाल में सेवादास महाराज शिक्षक संघ को 28 जनवरी को एक प्रमाण पत्र जारी किया गया था, उसी दिन पवार की मृत्यु हो गई थी। महीनों से अनिर्णीत पड़ी फाइलों की अचानक मंजूरी, खासकर ऐसे समय में जब प्रशासन को आधिकारिक शोक मनाने की उम्मीद थी, ने प्रक्रियात्मक अखंडता और उन परिस्थितियों पर चिंता पैदा कर दी है जिनके तहत इन मंजूरी में तेजी लाई गई थी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : महाराष्ट्र, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 16 फरवरी, 2026, 18:53 IST समाचार राजनीति महाराष्ट्र में अजित पवार के निधन पर शोक, 3 दिन में 75 संस्थानों को दिया गया अल्पसंख्यक दर्जा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महाराष्ट्र राज्य प्रशासन विवाद(टी)महाराष्ट्र आधिकारिक शोक(टी)अजित पवार विमान दुर्घटना(टी)अल्पसंख्यक स्थिति अनुमोदन(टी)महाराष्ट्र अल्पसंख्यक विभाग(टी)बारामती घटना(टी)शैक्षणिक संस्थान अल्पसंख्यक स्थिति(टी)प्रक्रियात्मक अखंडता महाराष्ट्र

JEE Main 2026 Session 1 Result Out

JEE Main 2026 Session 1 Result Out

Hindi News Career JEE Main 2026 Session 1 Result Out | NTA Releases Scores On Jeemain.nta.nic.in 5 दिन पहले कॉपी लिंक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE मेन्स 2026 सेशन – 1 का रिजल्‍ट जारी कर दिया है। स्टूडेंट्स ऑफिशियल वेबसाइट jeemain.nta.nic.in पर जाकर रिजल्ट चेक कर सकते हैं। परीक्षा में भाग लेने वाले छात्र एप्लीकेशन नंबर, पासवर्ड दर्ज करके स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। 12 कैंडिडेट्स को मिला 100 पर्सेंटाइल 13 लाख से ज्यादा स्टूडेंट ने दी थी एग्जाम : एनटीए ने JEE Main सेशन 1 एग्जाम का आयोजन 21 से लेकर 29 जनवरी तक किया था। इसमें 13 लाख से अधिक स्टूडेंट्स ने भाग लिया था। इस रिजल्ट में अभी रैंक जारी नहीं होगी, क्योंकि जेईई मेन का दूसरा सेशन अप्रैल में होना है। उसके बाद रैंक जारी की जाएगी। पिछले साल ड्रॉप हुए थे 6 क्वेश्चन : अप्रैल सेशन के बाद जारी होने वाले रिजल्ट में ऑल इंडिया रैंक जारी की जाएगी। इसके बाद जेईई एडवांस का पेपर होगा। पिछले साल जनवरी 2025 सेशन में ऑब्जेक्शन के बाद कुल 6 क्वेश्चन ड्रॉप किए गए थे और 2 प्रश्नों में एक से ज्यादा ऑप्शन सही माने गए थे। इनमें सबसे ज्यादा गलतियां फिजिक्स में पाई गई थीं, जहां 4 क्वेश्चन ड्रॉप किए गए थे। वहीं केमिस्ट्री और मैथ्स में एक-एक क्वेश्चन ड्रॉप हुआ था। जेईई मेन सेशन 1 एग्जाम का आयोजन 21, 22, 23, 24, 28 और 29 जनवरी को किया गया था। जेईई मेन सेशन 1 के पिछले वर्ष के एग्जाम में 14 स्टूडेंट्स ने 100 पर्सेंटाइल हासिल किए थे। क्यों हुई रिजल्ट जारी होने में देरी : इस एग्जाम का रिजल्ट सबसे पहले 12 फरवरी को आना था। लेकिन इस तारीख को प्रोविजनल आंसर-की को लेकर आए ऑब्जेक्शन की चांज करने के चलते एक्सटेंड किया गया। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने जेईई मेन-1 प्रोविजनल आंसर-की जारी कर 6 फरवरी तक छात्रों के ऑब्जेक्शन मांगे थे। एनटीए को जिन-जिन क्वेश्चंस के जवाब को लेकर ऑब्जेक्शन मिले, उन्हें एक्सपर्ट की एक कमेटी के सामने रखा गया। सूत्रों का कहना है कि पहले सत्र की परीक्षा में कम से कम 6 सवाल ड्रॉप किए जा सकते हैं। हालांकि इन सभी सवालों का विशेषज्ञ समिति फिर से जांच रही है। स्टूडेंट्स को मिलेगा एक और मौका : ऐसे छात्र जो जेईई सेशन – 1 एग्जाम में पास नहीं हो सके या अच्छी रैंक नहीं ला पाए, वे दूसरे सेशन की परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। फॉर्म भरने की लास्ट डेट 25 फरवरी तय की गई है। जेईई मेन फेज – 2 की परीक्षा 2 से 9 अप्रैल 2026 के बीच होगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…