Jodhpur News : जोधपुर में रिश्तों का खौफनाक अंत, मौसेरे भाई ने बहन की हत्या कर खुद दी जान

Last Updated:February 18, 2026, 18:29 IST Jodhpur News : जोधपुर के यूआईटी कॉलोनी स्थित गायत्री नगर में पारिवारिक विवाद ने भयावह रूप ले लिया. आरोप है कि मौसेरे भाई ने युवती पर भारी वस्तु से हमला कर उसकी जान ले ली और बाद में खुद फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. मौके से सुसाइड नोट के कुछ टुकड़े मिले हैं. पुलिस पूरे घटनाक्रम की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है. जोधपुर. जोधपुर के यूआईटी कॉलोनी स्थित गायत्री नगर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया. यहां रिश्तों को झकझोर देने वाली वारदात में मौसेरे भाई ने अपनी बहन की हत्या कर दी और बाद में खुद भी फांसी लगाकर जान दे दी. घटना की सूचना मिलते ही हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस मौके पर पहुंची. घर का मंजर देखकर पुलिस भी हैरान रह गई. दोनों के शव बरामद कर कब्जे में लिए गए और पोस्टमार्टम के लिए मथुरादास माथुर अस्पताल भिजवाए गए. मृतका की पहचान भगवती के रूप में हुई है. वह बीएसटीसी की ट्रेनिंग कर रही थी और पाली के एक हॉस्टल में रह रही थी. जानकारी के मुताबिक वह हाल ही में घर आई हुई थी. परिवार के लोग अब भी सदमे में हैं. बताया जा रहा है कि किसी बात को लेकर घर में विवाद हुआ. इसी विवाद के बाद मामला इतना बढ़ गया कि मौसेरे भाई कैलाश ने लोहे की भारी वस्तु से भगवती पर हमला कर दिया. हमला इतना गंभीर था कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हत्या के बाद फांसी लगाईबहन की हत्या करने के बाद कैलाश ने खुद भी फांसी लगाकर जान दे दी. जब तक परिजन और आसपास के लोग कुछ समझ पाते, दोनों की सांसें थम चुकी थीं. पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट के फटे हुए टुकड़े भी मिले हैं. हालांकि उन टुकड़ों में क्या लिखा है, इस पर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. पुलिस उन्हें जोड़कर पढ़ने की कोशिश कर रही है. हर एंगल से जांचमामले में पुलिस अधिकारी ईश्वर पारीक ने कहा है कि जांच हर एंगल से की जा रही है. फिलहाल यह साफ नहीं है कि विवाद किस बात को लेकर था और अचानक इतना बड़ा कदम क्यों उठा लिया गया. पुलिस परिजनों और आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रही है. मोबाइल फोन और अन्य चीजों की भी जांच की जा रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके. गायत्री नगर में इस घटना के बाद सन्नाटा पसरा हुआ है. पड़ोसी भी यही कह रहे हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक ही घर में ऐसा कुछ हो जाएगा. रिश्तों में आई दरार कैसे इस हद तक पहुंची, यह अब जांच का विषय है. फिलहाल दो जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं और पीछे रह गया है कई सवालों का बोझ. About the Author Anand Pandey नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें Location : Jodhpur,Rajasthan First Published : February 18, 2026, 18:29 IST
indore mba student piyush dhamnodia case: how boyfriend kill girlfriend | psycho lover inside story | indore police investigation | गर्लफ्रेंड के हाथ-पैर बांधे फिर घोंट दिया गला, जानें MBA छात्र की तंत्र-मंत्र वाली कहानी का असली सच

इंदौर न्यूज: मध्यप्रदेश का इंदौर शहर, जिसे भारत का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है. जिस शहर को लोग स्वच्छता और शिक्षा के लिए जानते हैं, वहां से एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है. यह कहानी एक ऐसे युवक की है, जो मैनेजमेंट की पढ़ाई करता था, लेकिन उसके दिमाग में शैतान प्रवेश कर गया. उस एमबीए के छात्र ने अपनी ही प्रेमिका को पहले घर बुलाता है और फिर उसको बड़ी बेरहमी से हत्या कर देता है. खास बात यह है कि इस वारदात को जिस तरह से अंजाम दिया और मुंबई फरार हो गया, वह हैरान करने वाला था. इंदौर पुलिस की जांच में अब हर घंटे नए-नए खुलासे हो रहे हैं. वह खुलासा किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं हैं. पढ़ें एक गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड की लव की इनसाइड स्टोरी, जो आपको हिला देगा. इंदौर के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र के अंकल गली स्थित एक फ्लैट से बदबू आने की शिकायत पुलिस को मिलती है. इंदौर पुलिस जब उस फ्लैट में पहुंचती है तो बिस्तर पर एक नग्न अवस्था में लड़की की लाश मिलती है. लड़की की पहचान होती है. इंदौर पुलिस इसके बाद हत्या के आरोप में युवती के बॉयफ्रेंड पियूष धामनोदिया को मुंबई से गिरफ्तार करती है. लेकिन यह घटना क्यों हुई और कैसे हुई इसको सुनकर हर कौई हैरान है. इंदौर मर्डर की इनसाइड स्टोरी इंदौर पुलिस के अनुसार जिस फ्लैट में मृतका का शव मिला था, वह फ्लैट मृतका के साथ पढ़ने वाले उसके बॉयफ्रेंड पियूष धामनोदिया ने किराए पर लिया था. पुलिस को परिवार से जानकारी मिली की दोनों के बीच प्रेम संबंध सालों से थे. लेकिन शादी को लेकर अक्सर दोनों के बीच विवाद होता रहता था. इस बीच पियूष को शक होने लगा कि उसकी प्रेमिका का किसी और लड़के के साथ प्रेम संबंध हो गए हैं. घटनावाली रात को क्या-क्या हुआ? इंदौर पुलिस के मुताबिक घटना वाले दिन दोनों विवाद सुलझाने के लिए लड़के के फ्लैट पहुंचे थे. पहले दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने, लेकिन बाद में शादी की बात पर दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया. इसके बाद गुस्से में आकर पियूष ने युवती का गला घोंटकर हत्या कर दी. पुलिस ने कहा है कि आरोपी युवक ने मारने से पहले लड़की को रस्सी से हाथ-पैर बांधा था. मारने के बाद बाजार से बियर लाकर पी और फिर शव के साथ संबंध बनाए. लड़के ने लड़की के साथ संबंध बनाने का फिजिकल वीडियो भी कॉलेज ग्रुप में शेयर किया था. इंदौर पुलिस का दावा इंदौर के डीसीपी कृष्ण लालचंदानी ने बताया कि हत्या के बाद पियूष पनवेल पहुंचा, जहां उसने एक होटल में रात बिताई. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने मुंबई के नालासोपारा के खुले मैदान में अपनी प्रेमिका की आत्मा से बात करने के लिए तांत्रिक क्रिया का सहारा लिया. इस दौरान उनसने प्रेमिका का फोटो रख सिंदूर, चुनरी पूजा सामग्री सामने रख इंटरनेट से सीखी तंत्र क्रिया कर आत्मा से बात करने का असफल प्रयास किया था. सांकेतिक. कैसे इंदौर से मुंबई पहुंचा किलर? इसके बाद वह मुंबई पहुंचा और पूरी रात लोकल ट्रेनों में सफर करता रहा. इस दौरान वह मृतका का मोबाइल भी अपने साथ ले गया था, जिसे बाद में नष्ट कर दिया गया. पुलिस के अनुसार आरोपी को शक था कि युवती अन्य लड़कों से मोबाइल ऐप के जरिए बात करती थी. जांच के दौरान पता चला कि मृतका की गुमशुदगी की रिपोर्ट 11 फरवरी को इंदौर के पंढरीनाथ थाने में उसके पिता द्वारा दर्ज कराई गई थी. पिता ने भी बताया था कि 10 फरवरी को उन्होंने अपनी बेटी को कलेक्टर ऑफिस के सामने छोड़ा था, जिसके बाद से वह लापता हो गई थी. इस खौफनाक कहानी की शुरुआत इंदौर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से होती है. इंदौर के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र में आरोपी युवक पियूष, जो इंदौर में रहकर एमबीए की पढ़ाई कर रहा था. इसके बाद जो हुआ वह किसी भी इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी है. पुलिस की थ्योरी के अनुसार, आरोपी ने युवती को घंटों तक टॉर्चर किया. वह उससे सच उगलवाना चाहता था कि वह किससे बात करती है. जब युवती ने इनकार किया तो आरोपी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. उसने बेरहमी से उसका गला घोंट दिया और तब तक नहीं छोड़ा जब तक उसकी जान नहीं निकल गई. पकड़े जाने के वक्त भी उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, जो उसके ‘साइको’ व्यवहार की ओर इशारा करती है.
कनाडा ने 2025 में 2,800 भारतीयों को निकाला:6500 भारतीय को निकालने की तैयारी; शरणार्थी नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई

कनाडा सरकार ने 2025 के पहले 10 महीनों में 2,831 भारतीय नागरिकों को देश से बाहर निकाला है। ये जानकारी कनाडा की कैनेडियन बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) के आंकड़ों से सामने आई है। इसके मुताबिक पिछले साल कुल 18,785 लोगों को कनाडा से निकाला गया, जिनमें भारतीय दूसरे नंबर पर हैं। सबसे ज्यादा 3,972 लोग मेक्सिको के थे। इतना ही नहीं, अभी 29,542 लोगों को निकालने की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें 6,515 भारतीय भी शामिल हैं। यानी आने वाले समय में और भारतीयों पर भी कार्रवाई हो सकती है। कनाडा सरकार ने बताया है कि जिन लोगों को निकाला गया, उनमें से कई पर क्रिमिनल मामले थे। लेकिन बड़ी संख्या उन लोगों की भी थी जिन्होंने शरणार्थी दावे से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया। कनाडा में तीन तरीके बाहर निकाला जाता है कनाडा में किसी को बाहर करने के तीन तरीके होते हैं- डिपार्चर ऑर्डर, एक्सक्लूजन ऑर्डर और डिपोर्टेशन ऑर्डर। कुछ लोगों को 30 दिन के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया जाता है। अगर वे नहीं जाते तो उन पर कड़ी कार्रवाई होती है। कुछ मामलों में एक साल या पांच साल तक दोबारा कनाडा आने पर रोक लगती है। वहीं डिपोर्टेशन ऑर्डर में बिना खास अनुमति के दोबारा एंट्री नहीं मिलती। कनाडा के इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार की कोशिश कनाडा में इमिग्रेशन इस समय बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। पिछले साल चुनाव के दौरान भी यही सबसे अहम मुद्दा था और अब भी सरकार और विपक्ष के बीच इसी पर बहस चल रही है। मुकाबला मुख्य रूप से लिबरल पार्टी और कंजर्वेटिव पार्टी के बीच है। लिबरल पार्टी के नेता पीएम मार्क कार्नी का कहना है कि इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार की जरूरत है। उनका कहना है कि जब तक घरों की कमी की समस्या ठीक नहीं होती, तब तक इमिग्रेशन की संख्या को कंट्रोल में रखा जाएगा। 2025 के लिए करीब 3 लाख 95 हजार लोगों को स्थायी निवास देने का टारगेट रखा गया था, जो देश की आबादी के 1% से कम है। सीमा सुरक्षा को लेकर भी सरकार कड़े कदम उठा रही है। 1.3 बिलियन डॉलर की योजना के तहत सीमा पर ड्रोन और नई निगरानी तकनीक लगाई गई है। जून 2025 में सरकार ने स्ट्रांग बॉर्डर एक्ट नाम का नया कानून भी पेश किया, जिसका मकसद सीमा को और मजबूत करना और इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा सख्त बनाना है। कनाडा में हर चौथा व्यक्ति विदेशी मूल का कनाडा दुनिया के उन देशों में है जहाँ प्रवासियों (इमिग्रेंट) की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 की आधिकारिक जनगणना के मुताबिक, कनाडा में लगभग 83.6 लाख (8.3 मिलियन) लोग विदेश में जन्मे हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 23% है। यह आंकड़ा स्टैटिस्टिक्स कनाडा ने जारी किया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या वृद्धि में प्रवासियों का खास रोल रही है, लेकिन हाल के सालों में इस मुद्दे पर बहस भी तेज हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा में भारतीय मूल के लगभग 13 लाख (1.3 मिलियन) लोग रहते हैं। वहीं करीब 3 लाख (लगभग 3.03 लाख) लोग पाकिस्तानी मूल के हैं। कनाडा सरकार विदेशी छात्रों को PHD के लिए बुला रही कनाडा सरकार एक तरफ जहां शर्णार्थियों की संख्या कंट्रोल करना चाहती है, वहीं विदेशों से ज्यादा मास्टर्स और पीएचडी करने वाले छात्रों को बुलाना चाहती है। द ग्लोबल एंड मेल की रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए इमिग्रेशन विभाग सोशल मीडिया पर प्रचार कर रहा है। पोस्ट में बताया जा रहा है कि अगर छात्र कनाडा पढ़ने आएंगे तो उनके परिवार वाले भी साथ आने के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि पिछले एक साल में कनाडा आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या काफी कम हो गई है। ‘इमिग्रेशन, रिफ्यूजी और सिटिजनशिप कनाडा’ के मुताबिक 2025 में पिछले साल के मुकाबले 61% कम नए छात्र आए। जनवरी 2024 में सरकार ने विदेशी छात्रों की संख्या पर लिमिट लगा दी थी, जिसके बाद कुल छात्रों की संख्या करीब एक-तिहाई घट गई। —————– यह खबर भी पढ़ें… कनाडा के स्कूल में गोलीबारी, शूटर समेत 9 की मौत:25 घायल, स्कूल में 175 स्टूडेंट पढ़ते हैं; PM कार्नी ने जर्मनी दौरा रद्द किया कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के टम्बलर रिज शहर में मंगलवार को एक हाईस्कूल में गोलीबारी हुई। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 घायल हैं। अभी तक ये जानकारी नहीं आई है कि मरने वालों में कोई छात्र है या नहीं। स्कूल को एहतियातन बंद कर दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
‘गोविंदा बदलते हैं तो मैं माफ कर दूंगी’:एक्टर की पत्नी सुनीता आहूजा बोलीं- 40 साल का प्यार है, लेकिन अब दिल मजबूत है

गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा अक्सर अपनी शादीशुदा जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहते हैं। कभी दोनों के तलाक की खबरें सामने आती हैं तो कभी इन्हें अफवाह बताया जाता है। अब हाल ही में सुनीता ने अपने नए व्लॉग में एक बार फिर गोविंदा के साथ अपने रिश्ते पर खुलकर बात की। इस बार उन्होंने उन्हें माफ करने को लेकर भी रिएक्शन दिया। जब सुनीता से पूछा गया कि क्या उनकी माफी की लिस्ट में गोविंदा का नाम है, तो उन्होंने जवाब दिया, कुछ कहा नहीं जा सकता। वह मेरे बचपन का प्यार हैं। अगर वह बदल जाते हैं और मेरे नियमों के मुताबिक जीवन जीते हैं तो मैं उन्हें माफ कर दूंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह खबरों में आने वाली हर बात पर ध्यान नहीं देना चाहतीं। यह वह उम्र नहीं है जब मैं इतना तनाव झेल सकूं। मैं मेनोपॉज से गुजर रही हूं। इस समय पति और बच्चों के सपोर्ट की जरूरत होती है, दबाव की नहीं। सुनीता ने आगे कहा कि गोविंदा अपनी मां से डरते थे, लेकिन उनके निधन के बाद वह ज्यादा बेफिक्र हो गए। अब वह किसी से नहीं डरते और जो चाहते हैं वही करते हैं। उनकी संगत भी अच्छी नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि कई लोगों ने उनकी मासूमियत का फायदा उठाया। मैंने बहुत कुछ सहा है, लेकिन अब और नहीं। मैंने अपनी अलग पहचान बना ली है। 40 साल का रिश्ता रातोंरात नहीं टूटता, इसलिए मैं इमोशनल रहूंगी। लेकिन अब मेरा दिल मजबूत हो गया है। मैं हमेशा सच बोलती हूं। सुनीता ने महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। जब मेरे ससुराल वाले आसपास होते थे तो मैं चुप रहती थी, क्योंकि मैं उनका सम्मान करती थी। लेकिन अब जब गोविंदा और मैं दोस्त हैं, तो मैं क्यों चुप रहूं या डर में जीऊं?।
16 मार्च को 37 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव: पूर्ण कार्यक्रम देखें, सेवानिवृत्त होने वाले सांसदों के नाम और अधिक | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:फ़रवरी 18, 2026, 16:58 IST चुनाव 10 राज्यों में होंगे: महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान और मतगणना 16 मार्च को होगी। (प्रतीकात्मक छवि/संसद टीवी) भारत निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव की घोषणा कर दी है. मतदान और मतगणना 16 मार्च को होगी। 37 सीटों पर चुनाव की घोषणा इसलिए की गई है क्योंकि उन सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है। चुनाव 10 राज्यों में 37 में होंगे: महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश। राज्यसभा चुनाव का पूरा कार्यक्रम क्या है? अधिसूचना जारी: 26 फरवरी, 2026 नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि: 5 मार्च, 2026 नामांकन की जांच: 6 मार्च, 2026 नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि: 9 मार्च, 2026 मतदान: 16 मार्च 2026, सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटों की गिनती: 16 मार्च 2026, शाम 5 बजे से पूरी प्रक्रिया 20 मार्च 2026 तक पूरी हो जाएगी. रिटायर होने वाले 37 सांसद कौन हैं? अप्रैल में सेवानिवृत्त होने वाले 37 सांसद हैं: महाराष्ट्र: डॉ भागवत किशनराव कराड डॉ फौजिया तहसीन अहमद खान प्रियंका विक्रम चतुवेर्दी शरदचंद्र गोविंदराव पवार धैर्यशील मोहन पाटिल रजनी अशोकराव पाटिल रामदास बंडू अठावले तमिलनाडु: एनआर एलंगो पी सेल्वारासु एम थंबीदुरई तिरुचि शिव डॉ कनिमोझी एनवीएन सोमू जीके वासन पश्चिम बंगाल: साकेत गोखले ऋतब्रत बनर्जी विकास रंजन भट्टाचार्य मौसम नूर (5 जनवरी 2026 को रिक्त – सीट गिनती) सुब्रत बख्शी बिहार: अमरेंद्र धारी सिंह प्रेम चंद गुप्ता रामनाथ ठाकुर उपेन्द्र कुशवाहा हरिबंश नारायण सिंह ओडिशा: ममता मोहंता मुजीबुल्ला खान सुजीत कुमार निरंजन बिशी असम: -रामेश्वर तेली भुवनेश्वर कलिता अजीत कुमार भुइयां छत्तीसगढ़: कवि तेजपाल सिंह तुलसी फूलो देवी नेताम हरयाणा: किरण चौधरी राम चंदर जांगड़ा तेलंगाना: डॉ अभिषेक मनु सिंघवी केआर सुरेश रेड्डी हिमाचल प्रदेश: राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग कैसे होती है? राज्यसभा के लिए मतदान आम चुनाव से अलग होता है। इन चुनावों में आम नागरिक वोट नहीं डालते. इसके बजाय, प्रत्येक राज्य की विधान सभा के सदस्य (विधायक) उस राज्य से राज्यसभा सांसदों का चुनाव करते हैं। यह प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग द्वारा संचालित की जाती है। प्रत्येक राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल छह साल का होता है और हर दो साल में कुछ सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं। जब उनका कार्यकाल ख़त्म होने वाला होता है तो उन सीटों को भरने के लिए चुनाव कराए जाते हैं. किसी राज्य में भरी जाने वाली सीटों की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि उस राज्य से कितने सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। मतदान के दिन, विधायक अपने संबंधित राज्य विधानसभाओं के अंदर अपना वोट डालते हैं। वे केवल एक उम्मीदवार को वोट नहीं देते। इसके बजाय, वे उम्मीदवारों को वरीयता के क्रम में रैंक करते हैं – उनकी पहली पसंद के लिए “1”, उनकी दूसरी पसंद के लिए “2”, और इसी तरह। इस प्रणाली को एकल हस्तांतरणीय मत के माध्यम से आनुपातिक प्रतिनिधित्व कहा जाता है। सरल शब्दों में, यह सुनिश्चित करता है कि पार्टियों को राज्य विधानसभा में उनकी ताकत के अनुपात में सीटें मिलें। जीतने के लिए, एक उम्मीदवार को न्यूनतम संख्या में वोट प्राप्त करने होंगे, जिसे कोटा कहा जाता है। इस कोटा की गणना मतदान करने वाले विधायकों की कुल संख्या और उपलब्ध सीटों की संख्या के आधार पर की जाती है। यदि किसी उम्मीदवार को कोटा पूरा करने के लिए पर्याप्त प्रथम-वरीयता वोट मिलते हैं, तो उन्हें निर्वाचित घोषित किया जाता है। यदि सभी सीटें नहीं भरी जाती हैं, तो सभी सीटों पर निर्णय होने तक वोट दूसरी या बाद की प्राथमिकताओं के आधार पर स्थानांतरित किए जाते हैं। राज्यसभा चुनाव भी खुले मतपत्र के माध्यम से होते हैं। इसका मतलब है कि विधायकों को अपना चिन्हित मतपत्र मतपेटी में डालने से पहले अपनी पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि को दिखाना होगा। इसका उद्देश्य गुप्त क्रॉस-वोटिंग को कम करना है। हालाँकि, राजनीतिक क्रॉस-वोटिंग अभी भी हो सकती है, और यह अक्सर करीबी मुकाबलों में एक महत्वपूर्ण कारक बन जाता है। प्राथमिकताओं को चिह्नित करने के लिए विशेष स्केच पेन एकरूपता सुनिश्चित करने और छेड़छाड़ या भ्रम को कम करने के लिए, चुनाव आयोग ने कहा है कि विधायकों को मतपत्रों पर अपनी प्राथमिकता संख्या अंकित करने के लिए रिटर्निंग अधिकारी द्वारा आपूर्ति किए गए एकीकृत बैंगनी रंग के स्केच पेन का ही उपयोग करना चाहिए। इस राज्यसभा चुनाव में प्राथमिकताएं अंकित करने के लिए किसी अन्य कलम या लेखन उपकरण की अनुमति नहीं है। आयोग ने कहा कि वह प्रत्येक राज्य में जहां चुनाव होंगे वहां पर्यवेक्षक नियुक्त करेगा। ये पर्यवेक्षक यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया की निगरानी करेंगे कि यह सभी नियमों और दिशानिर्देशों का पालन करते हुए सुचारू, स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से संचालित हो। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: फ़रवरी 18, 2026, 16:58 IST समाचार राजनीति 16 मार्च को 37 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव: पूर्ण कार्यक्रम देखें, सेवानिवृत्त होने वाले सांसदों के नाम और अधिक अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)राज्यसभा चुनाव 2026(टी)राज्यसभा चुनाव(टी)सेवानिवृत्त राज्यसभा सांसद(टी)राज्यसभा सदस्य(टी)भारत निर्वाचन आयोग
इंटरनेट था स्लो, टीवी बार-बार कर रहा था बफरिंग, इतनी सी बात पर 15 साल के नाराज भतीजे ने चाची को मार डाला

Last Updated:February 18, 2026, 16:28 IST महाराष्ट्र के वसई में स्मार्ट टीवी की स्लो बफरिंग और डांट से नाराज 15 वर्षीय किशोर ने अपनी 60 वर्षीय चाची की बांस के डंडे से हत्या कर दी.आरोपी ने दोस्त की मदद से शव को सोफा-कम-बेड में छिपा दिया और साक्ष्य मिटाने के लिए मोबाइल तोड़ दिए. पुलिस ने बाथरूम की खिड़की के रास्ते घर में घुसकर शव बरामद किया और दोनों नाबालिगों को हिरासत में ले लिया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. महाराष्ट्र के वसई से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने, जहां महज एक मामूली विवाद ने खूनी रूप ले लिया. एक 15 वर्षीय किशोर ने अपनी ही 60 वर्षीय चाची, दुर्गा बनसोड की बेरहमी से हत्या कर दी. यह सनसनीखेज घटना रविवार रात की है. आरोपी किशोर अपनी चाची के साथ ही रहता था. पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी और उसके एक दोस्त को हिरासत में लिया है. वारदात का खुलासा तब हुआ जब मृतका की बेटी ने बोइसर से अपनी मां को फोन किया. बार-बार कॉल करने पर भी जब कोई जवाब नहीं मिला तो वह घबरा गई. दरअसल, आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से मृतका के दोनों मोबाइल फोन तोड़ दिए थे. बेटी ने तुरंत अपने भाई को फोन कर मां का हाल जानने को कहा. जब बेटा घर पहुंचा तो मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था. खिड़की से झांकने पर उसे फर्श पर खून से लथपथ मां के पैर दिखाई दिए. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. घर अंदर से पूरी तरह लॉक था और दरवाजों को पेचकस से जाम किया गया था. पुलिस टीम को घर में घुसने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. करीब तीन घंटे के ऑपरेशन के बाद बाथरूम की खिड़की के स्लैब हटाकर पुलिस अंदर दाखिल हुई. घर का नजारा भयावह था. बुजुर्ग महिला का सिर बांस के डंडे से कुचला गया था और फर्श पर चारों तरफ खून फैला हुआ था. हत्या की वजह और पुलिस कार्रवाईहत्या के पीछे का मुख्य कारण क्या था?पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ. स्मार्ट टीवी के धीमे चलने (बफरिंग) को लेकर विवाद शुरू हुआ था. चाची ने भतीजे को पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी थी जिससे नाराज होकर उसने डंडे से हमला कर दिया. आरोपी ने पकड़े जाने से बचने के लिए क्या किया?आरोपी ने अपने 15 वर्षीय दोस्त को बुलाकर शव को सोफा-कम-बेड के अंदर छिपा दिया. उन्होंने सबूत मिटाने के लिए मोबाइल फोन तोड़ दिए और दरवाजे अंदर से लॉक कर दिए. पुलिस को भतीजे पर शक कैसे हुआ?जांच के दौरान किशोर काफी घबराया हुआ था. वह बार-बार अपना चेहरा छिपा रहा था और उसी कमरे की ओर देख रहा था जहां शव छिपाया गया था. उसकी संदिग्ध हरकतों ने पुलिस का काम आसान कर दिया. About the Author Sandeep Gupta पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें Location : Vasai-Virar City,Thane,Maharashtra First Published : February 18, 2026, 16:28 IST
Rajpal Yadav Jail Reform Shahjahanpur Visit; Smoking Area Suggestion

शाहजहांपुर2 दिन पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव चेक बाउंस मामले में 30 दिनों की अंतरिम जमानत पर हैं। तिहाड़ जेल से रिहाई के बाद बुधवार को राजपाल शाहजहांपुर में अपने पैतृक गांव कुंडरा पहुंचे। तमाम लोग उनसे मिलने पहुंचे। मीडिया से बातचीत में राजपाल यादव ने कहा, मेरे लिए जेल एक चिंतन शिविर जैसा रहा है। जिस तरह देश की हर व्यवस्था अपग्रेड हो रही है, वैसे ही जेलों को भी आधुनिक बनाना चाहिए। उन्होंने कहा, जेलों में स्मोकिंग जोन बनाया जाना चाहिए। ताकि दूसरों को कोई बीमारी न हो। कोई प्रभावित न हो। राजपाल ने कहा, हम स्मोकिंग को प्रमोट नहीं कर रहे हैं। लेकिन जब देश में इसकी बिक्री होती है और इसका कारोबार चलता है तो जेल और सुधार गृहों में इसके लिए भी अलग जगह होनी चाहिए। हम खुद भी धूम्रपान के शिकार हैं, छोड़ने की बहुत कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अभी तक पूरी तरह छोड़ नहीं पाए। तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद राजपाल यादव शाहजहांपुर पहुंचे। लोगों ने उनके साथ सेल्फी ली। राजपाल बोले- 600 करोड़ लोग मुझे नाम से जानते हैं कॉमेडियन राजपाल ने कहा, पूरी दुनिया में मेरे प्रशंसक हैं। 800 करोड़ लोगों की आबादी में से लगभग 600 करोड़ लोग मुझे नाम से जानते हैं। राजपाल ने खुद को भारतीय सिनेमा का एक जिम्मेदार अभिनेता बताया, जो कॉमेडी, गंभीर और विविध प्रकार की भूमिकाएं निभाना जानता है। उन्होंने कहा, कला एक विज्ञान है और मैं खुद को विज्ञान का विद्यार्थी मानता हूं। मेरे लिए आटा, दाल, चावल और खेती-बाड़ी जीवन का आधार रहे हैं। जिस गांव में मैं खड़ा हूं, इससे मेरा बचपन का नाता है। कला को जीने की जो भूख मेरे भीतर है, वही मेरी असली पूंजी है। पिछले 30 साल में मुझे कभी काम ढूंढना नहीं पड़ा, क्योंकि मैं काम को जीता हूं। जब तक मेरे शरीर में सांस है, तब तक यह सब लोगों के आशीर्वाद और साथ का परिणाम है। जेल में बीते पल एक ‘चिंतन शिविर’ की तरह राजपाल यादव ने कहा, मैं बड़ी जिम्मेदारी से कह रहा हूं तिहाड़ जेल मेरे लिए एक चिंतन शिविर रही। जब देश में हर क्षेत्र में बदलाव हो रहा है, तो जेलों का भी आधुनिकीकरण होना चाहिए। कानून सबके लिए बराबर है। कानून से बड़ा कोई नहीं है। हम सभी कानून के अधीन हैं। कानून सजा देता है, लेकिन कैदियों के आचरण, व्यवहार और संस्कार को भी देखा जाना चाहिए। मेरी इच्छा है कि कम से कम 10 प्रतिशत ऐसे कैदियों को, जो सजायाफ्ता हैं और बार-बार अदालत नहीं जा पाते, उनके अच्छे आचरण और व्यवहार के आधार पर एक नया जीवन जीने का अवसर दिया जाए। ऐसे हजारों लोग समाज की धरोहर बन सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे यह नहीं कह रहे कि किसे रिहा किया जाए और किसे नहीं, बल्कि इस विषय पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। राजपाल यादव ने घर पहुंचकर अपने डॉग को दुलारा। राजपाल बोले- घृणा पाप से करो, पापी से नहीं राजपाल यादव ने कहा, घृणा पाप से करनी चाहिए, पापी से नहीं। यदि हर जगह, जैसे एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर, स्मोकिंग एरिया बनाए जाते हैं, तो जेलों में भी प्रत्येक वार्ड में एक या दो धूम्रपान क्षेत्र निर्धारित होने चाहिए। ताकि अन्य लोग उसके प्रभाव से बच सकें। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वे स्वयं धूम्रपान की आदत से ग्रस्त हैं और बहुत प्रयासों के बावजूद इसे छोड़ नहीं पा रहे हैं। गांव में राजपाल यादव का आलीशान मकान… शाहजहांपुर के कुंडरा गांव में राजपाल यादव का आलीशान मकान है। राजपाल पिछले साल अपने पिता नौरंगी लाल के निधन पर गांव आए थे। गांव में उनके बड़े भाई श्रीपाल और उनका परिवार रहता है। क्यों जेल में बंद थे राजपाल यादव? साल 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म अता पता लापता बनाने के लिए प्राइवेट कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। ये फिल्म फ्लॉप रही और राजपाल यादव को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। राजपाल समय रहते कर्ज की रकम नहीं लौटा सके। लोन लेते समय राजपाल ने जो चेक कंपनी को दिए थे वो बाउंस हो गए, जिसके बाद एक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई। दोनों पार्टी के बीच समझौते के बावजूद पूरी पेमेंट नहीं हुई और समय के साथ ब्याज जुड़ता गया, जिससे कुल कर्ज काफी बढ़ गया। साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में अपील की, जहां उन्हें कई बार राहत मिली, क्योंकि उन्होंने भुगतान और समझौते का भरोसा दिया था। हालांकि, फरवरी की शुरुआत में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टर को पूर्व में दी गई रियायतों और समय सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने उन्हें 4 फरवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया था, जिसके बाद उन्होंने 5 फरवरी को शाम लगभग 4 बजे आत्मसमर्पण किया। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव 17 फरवरी, 2026 को तिहाड़ जेल से 18 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा हो गए हैं। वह 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में 12 दिनों तक जेल में रहे। सरेंडर से पहले कहा था- मेरे पास पैसे नहीं हैं सरेंडर करने से पहले राजपाल ने कहा था कि उनके पास लौटाने के लिए पैसे नहीं हैं। जब वो जेल गए तो सोनू सूद ने इंडस्ट्री से एकजुट होकर एक्टर की मदद करने की अपील की। इसके बाद कई लोग राजपाल यादव की मदद के लिए आगे आए। सलमान खान, अजय देवगन, डेविड धवन जैसे कई लोगों ने एक्टर को आर्थिक मदद दी। राजपाल यादव 17 फरवरी, 2026 को तिहाड़ जेल से 18 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा हुए। वह 12 दिनों तक जेल में रहे। हंगामा, हलचल जैसी फिल्मों से कॉमेडी किंग बने 2003 में फिल्म हंगामा, 2005 में गरम मसाला, 2006 में चुप चुप के और फिर हेरा फेरी और 2007 में भूल भुलैया जैसी फिल्मों से उन्हें कॉमेडी मे पहचान मिली। कॉमिक डायरेक्टर प्रियदर्शन के साथ उन्होंने लगभग 8 से 10 फिल्मों मे काम किया है। बेस्ट वर्सटाइल एक्टर अवॉर्ड जीत
ईशान किशन टी-20 ICC बैटर रैंकिंग के टॉप 10 में:17 पायदान की छलांग लगाई, पाकिस्तान के खिलाफ 77 रन की आतिशी पारी का फायदा

ICC ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के बीच ताजा टी-20 रैंकिंग जारी कर दी है। इंडिया के विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन टॉप-10 बैटर्स में शामिल हो गए हैं। उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ वर्ल्डकप में खेली गई 77 रनों की पारी का फायदा मिला। ईशान 17 पायदान चढ़कर बल्लेबाजों की लिस्ट में 8वें नंबर पर पहुंच गए हैं। लिस्ट में टॉप पर भारत के ही अभिषेक शर्मा हैं। गेंदबाजी में भारत के मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती दुनिया के नंबर-1 टी-20 गेंदबाज बने हुए हैं। वहीं, ऑलराउंडर्स की लिस्ट में पाकिस्तान के सईम अयूब एक बार फिर नंबर-1 बन गए हैं। PAK के खिलाफ जीरो पर आउट होने वाले अभिषेक नंबर-1 भारतीय सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा पाकिस्तान के खिलाफ डक पर आउट होने के बाद भी T20I बल्लेबाजों की रैंकिंग में नंबर-1 स्थान पर बने हुए हैं। इंग्लैंड के फिल सॉल्ट दूसरे स्थान पर काबिज हैं। श्रीलंका के विस्फोटक बल्लेबाज पथुम निसंका ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कैंडी में शानदार शतक जड़कर तीन स्थान की छलांग लगाई और तीसरे नंबर पर पहुंच गए। इंडिया के तिलक वर्मा भी एक पायदान की छलांग लगाते हुए चौथे स्थान पर पहुंच गए हैं। PAK बैटर साहिबजादा फरहान को नुकसान दूसरी तरफ पाकिस्तान के साहिबजादा फरहान 2 स्थान नीचे लुढ़क गए हैं। साहिबजादा अब 5वें स्थान पर खिसक गए हैं। इंग्लैंड के जोस बटलर को भी तीन स्थान का नुकसान हुआ है और अब वह 7वें पायदान पर खिसक गए हैं। न्यूजीलैंड के टिम सीफर्ट और ऑस्ट्रेलिया के ट्रैविस हेड को भी एक-एक स्थान का नुकसान हुआ है, बावजूद इसके दोनों बल्लेबाज टॉप-10 में बने हुए हैं। अब सीफर्ट 9वें जबकि हेड 10वें स्थान पर खिसक गए हैं। बॉलिंग में वरुण नंबर-1, राशिद खान दूसरे स्थान पर गेंदबाजों की ताजा रैंकिंग में भारत के वरुण चक्रवर्ती 787 रेटिंग पॉइंट्स के साथ पहले स्थान पर मजबूत बने हुए हैं। हालांकि, अफगानिस्तान के राशिद खान अब एक पायदान ऊपर चढ़कर दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं और वे वरुण के काफी करीब हैं। जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्रैड इवांस को वर्ल्ड कप में लगातार दो मैचों में 3-3 विकेट लेने का फायदा हुआ है। वे अब 10 पायदान की छलांग लगाकर करियर की बेस्ट 5वीं रैंकिंग पर पहुंच गए हैं। भारतीय पेसर जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल भी 15वें और 14वें स्थान पर पहुंच गए हैं। ऑलराउंडर्स में सईम अयूब ने सिकंदर रजा को पछाड़ा ऑलराउंडर्स की कैटेगरी में नंबर-1की कुर्सी के लिए सईम अयूब और सिकंदर रजा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। पाकिस्तान के सईम अयूब ने भारत के खिलाफ कोलंबो में 25 रन देकर 3 विकेट लिए थे,जिसके दम पर उन्होंने जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा को पीछे छोड़ते हुए एक बार फिर पहला स्थान हासिल कर लिया है। भारतीय ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर बरकरार हैं। ———————————- स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… T20 वर्ल्डकप सुपर-8 की 7 टीमें तय:नंबर-8 का फैसला आज, नामीबिया जीता तो पाकिस्तान बाहर हो जाएगा टी-20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 स्टेज की 7 टीमें तय हो चुकी हैं। आखिरी टीम का फैसला बुधवार को पाकिस्तान-नामीबिया मैच से होगा। अगर पाकिस्तान जीता तो टीम सुपर-8 के ग्रुप-2 में पहुंचेगा। अगर नामीबिया जीत गया तो अमेरिका ग्रुप-2 में पहुंच जाएगा। पूरी खबर
चड्डी-बनियान, ठक-ठक और बैंड-बाजा के बाद राजधानी में ‘गला घोटू गैंग’ का आतंक! मौजपुर वाली घटना से दिल्ली सन्न | gala ghotu gang active in delhi after maujpur cctv video thak thak band baja chaddi bnaiyan gangs delhi police

नई दिल्ली. दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले के मौजपुर इलाके से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है. 10 फरवरी 2026 की रात करीब 1:00 बजे एक युवक अपने काम से घर लौट रहा था. तभी ‘गला घोटू गैंग’ के तीन सदस्यों ने उसे पीछे से दबोच लिया. एक बदमाश ने उसका गला इतनी जोर से घोंटा कि वह बेदम होकर सड़क पर गिर पड़ा. इसके बाद बदमाशों ने उसकी जेब से 250 रुपये और बैग छीना और फरार हो गए. सबसे शर्मनाक बात यह रही कि सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखा कि कई गाड़ियां वहां से गुजरीं, लेकिन किसी ने रुककर मदद करना जरूरी नहीं समझा. दिल्ली में ठक-ठक, चड्डी बनियान और बैंड-बाजा गैंग के बाद गला घोटू गैंग ने आतंक फैला रखा है. दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड और हालिया ‘ऑपरेशन गैंग-बस्ट 2026’ के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली की सड़कों पर फिलहाल एक दर्जन से अधिक छोटे-बड़े गैंग सक्रिय हैं. बढ़ते अपराधों को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जनवरी 2026 में एक बड़ा अभियान शुरू कर रखा है. इसके बाद भी इस तरह के वारदा सामने आ रहे हैं, जो हैरान करने वाले हैं. मौजपुर की घटना के बाद पुलिस ने विशेष गश्त बढ़ा दी है और ‘गला घोटू गैंग’ के कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है. 1. गला घोटू गैंग: यह गैंग अंधेरे और सुनसान रास्तों पर पैदल चलने वालों को निशाना बनाता है. एक सदस्य पीछे से अचानक गला दबाता है जिससे शिकार बेहोश या सुन्न हो जाता है और बाकी सदस्य कुछ ही सेकंड में लूटपाट कर भाग जाते हैं. 2. ठक-ठक गैंग: यह दिल्ली का सबसे पुराना और शातिर गैंग है. ये कार की खिड़की थपथपाकर ड्राइवर को झांसा देते हैं कि ‘नीचे तेल गिर रहा है’ या ‘आपका टायर पंचर है’ जैसे ही ड्राइवर बाहर निकलता है, ये कार के अंदर रखे बैग या कीमती सामान लेकर चंपत हो जाते हैं. 3. नमस्ते गैंग: इस गैंग के सदस्य बहुत ही सभ्य बनकर आते हैं. ये राहगीरों को ‘नमस्ते’ करते हैं और ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे वे पुराने जानकार हों. बातों-बातों में ये हाथ मिलाते हैं या गले मिलते हैं और इसी दौरान चेन या मोबाइल उड़ा लेते हैं. 4. छल्ला गैंग: ये सड़क पर नकली ‘सोने का छल्ला’ गिरा देते हैं और राहगीर से पूछते हैं कि क्या यह उनका है. जैसे ही शिकार लालच में आता है, इनके अन्य साथी वहां आकर विवाद शुरू कर देते हैं और इसी शोर-शराबे में शिकार का पर्स या फोन लूट लिया जाता है. 5. बैंड-बाजा गैंग: ये गैंग शादियों के सीजन में सक्रिय होता है. अच्छे कपड़े पहनकर ये शादियों में मेहमान बनकर घुसते हैं और शगुन के लिफाफे या गहनों के बैग पर हाथ साफ करते हैं. दिल्ली की सड़कों पर ‘गला घोटू गैंग’ जैसी वारदातें एक-दो नहीं बल्कि कई अलग-अलग गिरोहों के सक्रिय होने की वजह से हो रही हैं. दिल्ली में पुलिस की रिपोर्टों के मुताबिक राजधानी में कुल लगभग 95 से ज़्यादा गैंग सक्रिय हैं जो लूट-डकैती, हत्या, रंगदारी, शस्त्र अपराध और अन्य संगठित अपराधों में शामिल हैं.
चीनी रोबोट्स का इंसानों जैसा डांस वायरल:बच्चों के साथ मार्शल आर्ट्स भी किया, एक्सपर्ट्स बोले-चीन ने रोबोटिक्स में अमेरिका को पछाड़ा

चीन ने सोमवार को दुनिया को अपनी तकनीकी ताकत दिखाई। एक कार्यक्रम में इंसानों जैसे दिखने वाले ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने मार्शल आर्ट्स और डांस किया। करीब 25 रोबोट्स बच्चों के साथ तलवार भांजते, बैकलिफ्ट करते और डंडे घुमाते हुए डांस करते दिखाई दिए। खास बात यह रही कि एक भी रोबोट गिरा नहीं। यह प्रदर्शन देख दुनिया हैरान रह गई। कई लोगों के मन में सवाल उठा कि अगर रोबोट अब नाच सकते हैं और कुंग फू कर सकते हैं, तो वे और क्या कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह प्रदर्शन पिछले साल के मुकाबले बिल्कुल अलग था। पिछले साल रोबोट्स सिर्फ रुमाल घुमाते और साधारण हरकतें करते नजर आए थे। लेकिन एक साल में सबकुछ बदल चुका है। चीन दुनिया को खासकर अमेरिका को दिखाना चाहता है कि वह तकनीक में बहुत आगे निकल चुका है। टेक्नोलॉजी का शोकेस है गाला, रोबोट कंपनियों को फायदा एशिया में टेक्नोलॉजी कंसल्टेंसी कंपनी के प्रमुख जॉर्ज स्टीलर ने कहा कि जिस गाला में इन रोबोट्स ने प्रदर्शन किया, वह कई सालों से चीन की तकनीकी ताकत दिखाने का बड़ा मंच रहा है। इसी मंच पर चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम, ड्रोन और रोबोट जैसी नई तकनीकों को दुनिया के सामने पेश करता रहा है। उन्होंने कहा कि इस गाला की सबसे खास बात यह है कि यहां सरकार की औद्योगिक नीति और टीवी के बड़े शो के बीच सीधा संबंध दिखाई देता है। यानी जिन कंपनियों को इस मंच पर अपने प्रोडक्ट दिखाने का मौका मिलता है, उन्हें बाद में सरकारी ऑर्डर, निवेशकों की दिलचस्पी और बाजार में आसानी से एंट्री जैसे फायदे मिलते हैं। स्टीलर के मुताबिक सिर्फ एक साल में रोबोट्स की क्षमता में बड़ा बदलाव आया है। अब उनकी चाल-ढाल और मूवमेंट पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हो गई है। इससे साफ है कि यूनिट्री जैसी कंपनियां रोबोट के ‘दिमाग’ यानी एआई सॉफ्टवेयर को मजबूत बनाने पर काम कर रही हैं, ताकि ये रोबोट भविष्य में फैक्ट्रियों में बारीक और असली काम भी कर सकें। दुनियाभर में 90% रोबोट्स चीन के रिसर्च फर्म ओम्डिया के अनुसार, पिछले साल दुनियाभर में भेजे गए लगभग 13 हजार ह्यूमनॉइड रोबोट्स में से 90 प्रतिशत चीन से थे। यह अमेरिकी कंपनियों से काफी आगे है। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि इस साल चीन में ह्यूमनॉइड रोबोट की बिक्री दोगुने से ज्यादा बढ़कर 28 हजार यूनिट तक पहुंच सकती है। दुनिया के सबसे रईस शख्स इलॉन मस्क का कहना है कि उन्हें अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी के रूप में चीनी कंपनियां नजर आती हैं, क्योंकि वह टेस्ला को एआई आधारित रोबोटिक्स की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में कहा, “चीन को बाहर के लोग कम आंकते हैं, लेकिन चीन अगले स्तर का दमदार खिलाड़ी है।” बीजिंग के टेक विश्लेषक पो झाओ का कहना है कि रोबोट्स का मैराथन दौड़ना, कुंग-फू किक लगाना या बैकफ्लिप करना सिर्फ दिखावा नहीं है। इसके पीछे बड़ी रणनीति है। चीन ने रोबोटिक्स और एआई को अपनी अगली पीढ़ी की “AI+ मैन्युफैक्चरिंग” योजना के केंद्र में रखा है। सरकार को उम्मीद है कि मशीनों के ज्यादा इस्तेमाल से फैक्ट्रियों में उत्पादन बढ़ेगा और देश की बूढ़ी होती आबादी से पड़ने वाला दबाव कम होगा। रोबोट के विकास से लोगों की चिंता बढ़ी AI पॉलिसी एक्सपर्ट रमेश श्रीनिवासन ने अल जजीरा से कहा कि यह प्रदर्शन दिखाता है कि चीन ह्यूमनॉइड रोबोटिक्स के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लंबे समय में इन रोबोट्स का इस्तेमाल उद्योग और खेती जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब चीन की आबादी लगातार घट रही है। इन घटनाओं ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोबोट के रूप में हमारे बीच आएगा, तो इसका असर आम कामगार लोगों की नौकरी और कमाई पर क्या होगा? अगर ऐसे रोबोट युद्ध के मैदान में इस्तेमाल होने लगे तो क्या स्थिति बनेगी? श्रीनिवासन का कहना है कि यह तकनीक हमारे भविष्य को आर्थिक, सैन्य और निजी जीवन के स्तर पर बदल देगी। लोग रोबोट और एआई को थेरेपिस्ट, साथी और यहां तक कि संभावित जीवनसाथी के रूप में भी अपनाने लग सकते हैं। उनके मुताबिक असली सवाल यह है कि क्या हम सच में ऐसा भविष्य चाहते हैं? और ह्यूमनॉइड रोबोट्स का इस्तेमाल किन क्षेत्रों में सही है और किन क्षेत्रों में नहीं होना चाहिए? उन्होंने कहा कि तकनीक के साथ ऐसा संतुलन बनाना होगा जिससे भविष्य बेहतर हो। सबसे जरूरी है कि लोग खुद को सुरक्षित महसूस करें, क्योंकि खासकर अमेरिका में AI लोगों को एक-दूसरे से दूर कर रहा है और इस बारे में साफ रिसर्च भी सामने आ रहे हैं।









