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सूजन से लेकर वेट लॉस तक…कच्ची हल्दी सेहत का सोना, इम्युनिटी बूस्टर के लिए वरदान – Uttar Pradesh News

इम्युनिटी बूस्टर

Last Updated:February 20, 2026, 23:56 IST भारतीय रसोई में आसानी से मिलने वाली कच्ची हल्दी इन दिनों सेहत की दुनिया में फिर सुर्खियां बटोर रही है. आयुर्वेद में इसे संजीवनी समान कहा गया है. इसमें करक्यूमिन और शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो शरीर को भीतर से मजबूत बनाते हैं. यह कई रोगों से निजात दिला सकती है. कच्ची हल्दी को इम्यूनिटी बूस्टर कहा गया है. इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण होते हैं, जो संक्रमण से बचाव में सहायक होते हैं. इसके नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे मौसमी बीमारियों के खतरे की संभावना कम रहती हैं. कच्ची हल्दी जोड़ों के दर्द और सूजन से परेशान लोगों के लिए भी फायदेमंद होती है. इसकी सूजनरोधी क्षमता गठिया जैसी समस्याओं में राहत दे सकती है. कच्ची हल्दी के करक्यूमिन तत्व सूजन को कम करने में मदद करते है, जिससे जोड़ों की जकड़न और दर्द में आराम मिलता हैं. कच्ची हल्दी का पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी योगदान बेहद महत्वपूर्ण है. यह गैस, अपच और ब्लोटिंग जैसी दिक्कतों को कम करने में लाभकारी सिद्ध हो सकती है. इसके नियमित सेवन से आंतों की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और पेट हल्का महसूस होता है, जिससे दिनभर शरीर ऊर्जावान रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना तिवारी के अनुसार, कच्ची हल्दी की भूमिका शरीर को डिटॉक्स करने में खास मानी जाती है. यह लिवर की कार्यक्षमता को समर्थन दे सकती है और शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मददगार साबित हो सकती है. खून को साफ करने में भी इसके गुण उपयोगी होते हैं, जिससे त्वचा पर भी सकारात्मक असर दिखता है. कच्ची हल्दी का गुनगुना दूध या काढ़ा सर्दी-खांसी या गले में खराश को दूर करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसकी तासीर गर्म होती है, जो गले को आराम देने में सहायक हो सकती है. कई घरों में बदलते मौसम में इसे रोगों से बचाव के उपाय के तौर पर प्रयोग किया जाता है. कच्ची हल्दी एक शानदार औषधि है. वजन को कंट्रोल करने में भी कच्ची हल्दी लाभकारी है. यह मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है, जिससे कैलोरी बर्न की प्रक्रिया शानदार होती है. यही नहीं, कच्ची हल्दी सूजन कम करने और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भी बहुत उपयोगी हैं, क्योंकि यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती हैं. कच्ची हल्दी को कद्दूकस कर दूध में उबालकर, चाय में मिलाकर या सुबह गुनगुने पानी के साथ सेवन जा सकता है. हालांकि, यदि किसी को पित्त की पथरी, मधुमेह या खून पतला करने वाली दवाएं चल रही हों, तो सेवन से पहले आयुर्वेद एक्सपर्ट से सलाह जरूरी ले. क्योंकि किन्हीं परिस्थितियों में यह हानिकारक भी हो सकती हैं. First Published : February 20, 2026, 23:56 IST

आलू चीला रेसिपी: परांठे से भी ज्यादा टेस्टी और स्वादिष्ट… आलू चीला रेसिपी, नोट कर लें रेसिपी

Crispy Aloo Cheela

क्रिस्पी आलू चीला रेसिपी: अगर रोज सुबह पराठे या बेड-बटर खांच बोर हो गए हैं और कुछ नया और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं तो आपके पास क्रिस्पी आलू चीला एक बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पाद है। जो कुरकुरा, चटपटा और ज्वालामुखी होता है। यह डिश न सिर्फ स्वाद में लाजवाब है, बल्कि इसे बनाना भी बहुत आसान है। घरेलू सामग्री 10-15 मिनट में तैयार हो जाती है, जिसका असर महिलाओं, बच्चों और बच्चों पर पड़ता है। यह चीला इसलिए भी खास है क्योंकि ये बेसन और आलू के कॉम्बिनेशन से बनता है, जिसमें चावल के आटे से एक्स्ट्रा क्रिस्पी टेक्स्ट बनता है। कम तेल में तवे पर सेंका जाता है, इसलिए तेल-भुना कम होता है। आलू से कार्बोहाइड्रेट और ऊर्जा घटक होते हैं, जबकि घटक और पोषक तत्व पाचन और स्वाद के पैमाने होते हैं। इसे सीरम ब्रेकफ़ास्ट भी कहा जा सकता है। क्रिस्पी आलू चीला कैसे बनाये? सबसे पहले कद्दूकस किए हुए आलू को 5-7 मिनट तक पानी में डुबोकर रॉपन निकाल लें और अच्छे से पका लें।एक बाउल में आलू, बेसन, चावल का आटा, प्याज, हरी मिर्च, अदरक, धनियां और सभी समेकित कच्चे माल।धीरे-धीरे पानी के टुकड़े टुकड़े बैटर तैयार करें, न अधिकतर टुकड़े, न अधिकतर टुकड़े।स्टिक-स्टिक तवे को गर्म करें, नॉन लिटिल ऑयल के टुकड़े और बैटर को मोयन से गोल करें।नामांकित पर दोनों तरफ से सुनहरा और क्रिस्पी होने तक सेंकें। स्वाद के लिए बीच में घी या मक्खन दाल ले सकते हैं. बस तैयार है आपका चीला। इसे धनिया-पुदीने की चटनी, टमाटर सॉस या दही के साथ खरीदें। मित्र तो बीच में पनीर या चीज स्टफिंग करके वैरायटी बढ़ा सकते हैं। यह रेसिपी न सिर्फ टेस्टी है, बल्कि रासायनिक भी है, आलू से स्वादिष्ट और विटामिन सी है। कई स्वास्थ्य लेबल इसे बच्चों के लिए वाइटिशियस बास्टर्ड के रूप में पहचानते हैं। अगर आप इसे सही से बनाना सीखें तो आलू के पराठे भूल जायेंगे। (टैग्सटूट्रांसलेट)क्रिस्पी आलू चीला रेसिपी(टी)आलू चीला रेसिपी(टी)चीला रेसिपी(टी)आलू चीला कैसे बनाएं(टी)आलू चीला रेसिपी हिंदी में(टी)आलू का चीला(टी)आलू चीला(टी)आलू चीला बनाने की रेसिपी(टी)आटा चीला रेसिपी(टी)आलू चीला

हड्डियों के दर्द का काल है ये पत्ता! सीने में दर्द हो या सूखी खांसी, खाज-खुजली, त्वचा रोग में भी कारगर – Uttar Pradesh News

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Last Updated:February 20, 2026, 23:33 IST सफेद चंपा एक ऐसा पेड़ है, जो धरती पर आसानी से पाया जाने वाला अद्भुत औषधीय गुणों से भरपूर है. इसके न केवल पत्ते, बल्कि सभी अंग संजीवनी के समान माने जाते हैं. यह पेड़ अल्सर, कुष्ठ रोग, सूजन, गठिया, अस्थमा, बुखार, और कब्ज़ जैसी कई बीमारियों में बेहद लाभकारी साबित होता है. इसके फूलों का उपयोग नारियल के तेल को सुगंधित करने के लिए भी किया जाता है, और इसकी पत्तियां पुराने घावों को भरने में सक्षम मानी जाती हैं. सफेद चंपा की छाल को पीसकर लेप बनाने की परंपरा पुरानी है. इससे पुराने घाव, खुजली और कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है. इसके प्राकृतिक तत्व त्वचा को शांत करने और संक्रमण के जोखिम को कम करने में मददगार होते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में अपनाते हैं, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सावधान से प्रयोग करना चाहिए. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, चंपा की छाल का लेप प्रभावित हिस्से पर लगाने से सूजन में कमी और आराम मिल सकता है. यह रक्त संचार को बेहतर करने में सहायक होता है. हालांकि, गंभीर गठिया या अन्य रोगों में चिकित्सकीय जांच आवश्यक है. चंपा की जड़ का उपयोग पेट संबंधी समस्याओं में भी किया जाता रहा है. इसे पेट के अल्सर के लिए लाभकारी माना गया है. जड़ से तैयार काढ़ा पाचन तंत्र को संतुलित करने में सहायक बताया जाता है. हालांकि, अल्सर जैसी गंभीर स्थिति में स्वयं उपचार के बजाय डॉक्टर की सलाह जरूरी है, ताकि स्थिति खराब न हो सके. Add News18 as Preferred Source on Google पारंपरिक उपचार पद्धतियों में चंपा की जड़ का काढ़ा बहुत ही उपयोगी माना गया है. यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकता है. हालांकि, बहुत तेज बुखार या लंबे समय तक रहने वाले बुखार में चिकित्सकीय जांच अनिवार्य है. प्राकृतिक उपाय केवल सहायक रूप में ही अपनाना उचित होता है. सफेद चंपा के फूलों की सुगंध मन को शांति देने के लिए जानी जाती है. इसकी खुशबू सिरदर्द में राहत पहुंचा सकती है और तनाव कम करने में सहायक मानी जाती है. फूलों से बने तेल का उपयोग आरामदायक नींद के लिए किया जाता है. अरोमाथेरेपी में भी इसकी सुगंध को सकारात्मक प्रभाव वाला माना गया है. चंपा के फूलों का लेप छाती के दर्द और पुरानी खांसी में राहत देने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके लाभकारी तत्व सूजन कम करने और श्वसन मार्ग को आराम देने में सहायक हो सकते हैं. लेकिन हमेशा ध्यान रखें कि, दमा या गंभीर फेफड़ों की बीमारी में यह केवल पूरक उपाय है, मुख्य उपचार का विकल्प नहीं है. चंपा का रस पथरी और मूत्र संबंधी समस्याओं में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसे मूत्र मार्ग को साफ रखने और जलन कम करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. पथरी जैसी स्थिति में आयुर्वेद एक्सपर्ट की राय बेहद जरूरी है. प्राकृतिक उपचारों को अपनाने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श करना हमेशा सुरक्षित और समझदारी भरा कदम साबित होता रहा है. First Published : February 20, 2026, 23:33 IST

बीमारियों का काल है ये हरा पत्ता, रोजाना चबाइए 5 पत्ते, फैटी लिवर से लेकर कैंसर तक में लाभकारी – Uttar Pradesh News

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के वो 6 जज कौन हैं जिसने टैरिफ को रद्द कर दिया?

Last Updated:February 20, 2026, 23:17 IST नीम को आयुर्वेद में सर्वरोग निवारणी कहा गया है. यानी एक ऐसी जड़ी-बूटी जो कई बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है. डॉक्टर के मुताबिक नीम सिर्फ दातुन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी पूरी बॉडी को अंदर से मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है. डॉक्टर का कहना है कि आज भी नीम की एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी का कोई तोड़ नहीं है. इसलिए इसे रोजमर्रा की लाइफ में जरूर शामिल करना चाहिए. रायबरेलीः मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं. ऐसे समय में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना बेहद जरूरी हो जाता है. आयुर्वेद में नीम को प्राकृतिक औषधि का दर्जा दिया गया है. सुबह खाली पेट नीम की कोमल पत्तियों का सीमित मात्रा में सेवन करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते है. दरअसल, रायबरेली जिले के आयुष विशेषज्ञ गौरव कुमार लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग बदलते मौसम में नीम की पत्तियां चबाने की परंपरा निभाते है. इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक: गौरव कुमार के मुताबिक नीम की पत्तियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं. नियमित और सीमित सेवन से वायरल संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. खून की सफाई और त्वचा के लिए लाभकारी: नीम को रक्त शुद्ध करने वाला माना जाता है. सुबह खाली पेट 4-5 कोमल पत्तियां चबाने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलने में मदद मिलती है।.इसका असर त्वचा पर भी दिखाई देता है और मुंहासे या फोड़े-फुंसी जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. पाचन तंत्र को रखे दुरुस्त: नीम की पत्तियां पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में भी सहायक मानी जाती हैं. यह गैस, अपच और पेट के कीड़ों की समस्या में लाभ पहुंचा सकती हैं. ध्यान रखें ये सावधानियां: हालांकि नीम प्राकृतिक औषधि है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है.गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. कड़वाहट के कारण इसे अधिक मात्रा में लेने से उल्टी या पेट दर्द की समस्या भी हो सकती है. Location : Rae Bareli,Uttar Pradesh First Published : February 20, 2026, 23:16 IST

पानी में उगने वाले इस फूल का तना है बेहद पौष्टिक, सेवन से मिलेंगे ये जबरदस्त फायदे, खून की कमी है तो जरूर खाएं – Uttar Pradesh News

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Last Updated:February 20, 2026, 23:09 IST आप अक्सर हरी और ताजी सब्जियां खाते होंगे. कुछ सब्जियां देखने में बिल्कुल सब्जी नहीं लगती है, लेकिन उनमें पौष्टिक तत्व ग्रीन वेजिटेबल्स से भी अधिक होते हैं. ऐसी ही एक सब्जी है कमल ककड़ी. जिसे इंग्लिश में लोटस स्टेम कहते हैं. कमल ककड़ी में पोषक तत्वों का खजाना होता है. ये देखने में बेशक आपको सूखी लकड़ी लगे, लेकिन स्वाद जबरदस्त होता है. इससे कई तरह की चीजें बनाई जाती हैं जैसे ग्रेवी वाली सब्जी, कोफ्ता, अचार. आपको बता दें कि यह कमल के फूल की जड़ से आता है और इसका स्वाद हल्का और मीठा होता है. सेहतमंद रहने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है.सर्दियों के मौसम में बाजार में मिलने वाली कमल ककड़ी पोषण से भरपूर सब्जी मानी जाती है. कमल के तने से मिलने वाली यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है. आयुर्वेद में इसे शरीर को ताकत देने और कई रोगों से बचाव करने वाली प्राकृतिक औषधि के रूप में देखा जाता है. दरअसल रायबरेली जिले के आयुष चिकित्सक गौरव कुमार (बीएएमएस लखनऊ विश्वविद्यालय) लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि कमल ककड़ी फाइबर, आयरन, पोटैशियम और विटामिन-सी का अच्छा स्रोत है.इसका नियमित सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है. इसमें मौजूद फाइबर आंतों की सफाई में मदद करता है, जिससे शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलते है. कमल ककड़ी खून की कमी दूर करने में भी सहायक होती है.इसमें मौजूद आयरन हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और कमजोरी दूर होती है.जिन लोगों को थकान या एनीमिया की समस्या रहती है, उनके लिए यह सब्जी फायदेमंद मानी जाती है. Add News18 as Preferred Source on Google गौरव कुमार के मुताबिक कमल ककड़ी दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी है.इसमें पाया जाने वाला पोटैशियम रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है.यह शरीर में सोडियम के प्रभाव को संतुलित कर हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है.विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट तत्व इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, जिससे शरीर मौसमी बीमारियों से बचा रहता है. कमल ककड़ी का सेवन सब्जी, अचार या सूप के रूप में किया जा सकता है.हालांकि इसे अच्छी तरह साफ कर और पकाकर ही खाना चाहिए.जिन लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, वे इसे नियमित आहार में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. वह बताते हैं कि कमल ककड़ी एक पौष्टिक और गुणकारी सब्जी है, जो पाचन सुधारने, खून बढ़ाने, दिल को स्वस्थ रखने और शरीर को ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. First Published : February 20, 2026, 23:09 IST

‘No Beef With Anyone’: Kerala Tourism’s Clever Jab At ‘The Kerala Story 2’ Stirs Buzz | Movies News

US President Donald Trump. (IMAGE: REUTERS)

Last Updated:February 20, 2026, 22:51 IST The Kerala tourism campaign’s light-hearted approach appears to be a direct response to the ongoing row about the film, which centres on religious conversion. The poster, shared across all of Kerala Tourism’s social media platforms, features an elderly man and a foreigner sitting together, sipping tea. (Image via X/@KeralaTourism) Kerala’s tourism department has sparked a wave of attention with a playful and sly promotional poster featuring the tagline, “No beef with anyone… that’s our recipe for happiness.” The poster, shared across all of Kerala Tourism’s social media platforms on Thursday, features an elderly man and a foreigner sitting together, sipping tea and sharing a smile. The image is accompanied by the message: “Love, harmony and hearts big enough for everyone. Welcome to God’s Own Country.” The post, widely shared, comes amid growing controversy over the upcoming release of ‘The Kerala Story 2: Goes Beyond‘, the second part of a film that has already been at the heart of political and religious disputes. ALSO READ: ‘The Kerala Story 2’ Release In Trouble? HC Sends Notice To Producers The Kerala tourism campaign’s light-hearted approach appears to be a direct response to the ongoing row about the film, which centres on religious conversion. The first part of ‘The Kerala Story‘ faced heavy criticism from Kerala’s ruling Left government, who accused the film of being BJP-backed propaganda. Now, with the sequel set for release on February 27, controversy has intensified. Directed by Kamakhya Narayan Singh, ‘The Kerala Story 2: Goes Beyond‘ stars Ulka Gupta, Aditi Bhatia, and Aishwarya Ojha. The film portrays the stories of three Hindu women who are allegedly coerced into marriage and conversion to Islam, with some trailers depicting a character being force-fed beef. Kerala’s Chief Minister Pinarayi Vijayan had condemned the film, accusing it of spreading hate and undermining the state’s secular values. “Having already seen through the communal agenda and blatant lies of the first part, Kerala will once again reject this attempt to demonise our secular fabric with contempt,” he shared on X. (With inputs from agencies) Handpicked stories, in your inbox A newsletter with the best of our journalism submit Click here to add News18 as your preferred news source on Google. Get the latest entertainment news related to bollywood, hollywood movies, telugu, tamil, other south films and tv shows. Updates on upcoming movies, ott releases, movie reviews, celebrity news, and box office, korean drama and music. Join the fun, play games on News18. Download the News18 App. Location : Kerala, India, India First Published: February 20, 2026, 22:48 IST News movies ‘No Beef With Anyone’: Kerala Tourism’s Clever Jab At ‘The Kerala Story 2’ Stirs Buzz Disclaimer: Comments reflect users’ views, not News18’s. Please keep discussions respectful and constructive. Abusive, defamatory, or illegal comments will be removed. News18 may disable any comment at its discretion. By posting, you agree to our Terms of Use and Privacy Policy.

लाल-काला छुटकू सा फल सेहत का है खजाना, हड्डियों को बना दे फौलादी, जानें ये बड़े फायदे – Uttar Pradesh News

अमेरिका फर्स्ट की हुंकार: ट्रंप बोले - कोर्ट रोके, लेकिन मैं खेल बदल दूंगा

Last Updated:February 20, 2026, 22:43 IST गर्मियों के मौसम में खाने-पीने की चीजों की कमी नहीं होती है. आप कई तरह के फलों, सब्जियों का सेवन करके खुद को स्वस्थ और फिट बनाए रख सकते हैं. फल खाने से आप कई रोगों से बचे तो रहेंगी ही साथ ही पोषक तत्व भी भरपूर मिलेगा. ऐसा ही एक छोटा सा गोल मटोल लाल, काले रंग का फल है, जिसका नाम है शहतूत. हो सकता है आपने कई बार इसका नाम सुना हो या देखा दो.चलिए आज शहतूत के फायदों के बारे में जान लेते हैं. शहतूत स्वाद के साथ सेहत का भी खजाना है. काले, लाल या बैंगनी रंग का यह छोटा सा फल पोषक तत्वों से भरपूर होता है. आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में शहतूत को कई रोगों में लाभकारी माना गया है. नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकता है. दरअसल रायबरेली जिले के आयुष चिकित्सा विशेषज्ञ गौरव कुमार लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि शहतूत में विटामिन सी विटामिन के आयरन, पोटैशियम और फाइबर का अच्छा स्रोत है.इसमें एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद करते हैं. खून की कमी दूर करने में सहायक: गौरव कुमार के मुताबिक शहतूत में आयरन की मात्रा अच्छी होती है, जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करती है.एनीमिया से पीड़ित लोगों के लिए यह फल लाभकारी माना जाता है. पाचन तंत्र को बनाए मजबूत: शहतूत में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है. यह कब्ज की समस्या में राहत देता है और आंतों को स्वस्थ रखने में मदद करता है. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद: इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट और पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकते हैं.नियमित सेवन से हृदय रोगों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है. त्वचा और इम्युनिटी के लिए लाभकारी: विटामिन से भरपूर शहतूत त्वचा को चमकदार बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. यह शरीर को मौसमी संक्रमण से बचाने में भी सहायक माना जाता है. डायबिटीज में उपयोगी: शहतूत के पत्तों और फल में ऐसे तत्व पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं.हालांकि, मधुमेह के मरीजों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए. First Published : February 20, 2026, 22:43 IST

दमोह पुलिस ने शहर में निकाला फ्लैग मार्च:घंटाघर, पुराना थाना, कसाई मंडी समेत कई इलाकों से गुजरा, कहा- त्योहार शांति से मनाएं

दमोह पुलिस ने शहर में निकाला फ्लैग मार्च:घंटाघर, पुराना थाना, कसाई मंडी समेत कई इलाकों से गुजरा, कहा- त्योहार शांति से मनाएं

दमोह पुलिस ने शुक्रवार रात शहर के प्रमुख रास्तों पर फ्लैग मार्च निकालकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। आने वाले होली, रमजान और अन्य त्योहारों के दौरान शहर में शांति और सुरक्षा का माहौल बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। यह फ्लैग मार्च कोतवाली थाने से शुरू हुआ। पुलिस का यह दल शहर के भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों जैसे घंटाघर, पुराना थाना, कसाई मंडी, बिलवारी मोहल्ला और पठानी मोहल्ला से होते हुए गुजरा। मार्च का समापन वापस कोतवाली थाने पर हुआ। भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से बात की और अपील की कि सभी त्योहार आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ मनाएं। इस मार्च के जरिए पुलिस ने यह संदेश भी दिया कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों पर पुलिस की पैनी नजर है। भारी संख्या में तैनात रहा पुलिस बल सीएसपी एचआर पांडे के नेतृत्व में निकले इस मार्च में कोतवाली टीआई मनीष कुमार, देहात थाना प्रभारी रचना मिश्रा और शहर की विभिन्न चौकियों के प्रभारी शामिल रहे। बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी ने नागरिकों में सुरक्षा का भाव जगाया।

जनपद सीईओ से अभद्रता कर गालियां दीं, FIR:राजगढ़ में विधायक को भी अपशब्द कहे; अवैध खनन शिकायत करने पहुंचा था

जनपद सीईओ से अभद्रता कर गालियां दीं, FIR:राजगढ़ में विधायक को भी अपशब्द कहे; अवैध खनन शिकायत करने पहुंचा था

खिलचीपुर जनपद पंचायत कार्यालय में अवैध खनन की शिकायत लेकर पहुंचे एक युवक ने गुरुवार को हंगामा कर दिया। घटना का वीडियो शुक्रवार शाम सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया। दुआखेड़ी निवासी हेमराज दांगी अवैध खनन की शिकायत लेकर कार्यालय पहुंचा था। जनपद सीईओ गोविंद सिंह सोलंकी ने उसे संबंधित प्रकरण में एसडीएम कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। इसी बात पर युवक नाराज हो गया। बताया जा रहा है कि वह नशे की हालत में था। सीईओ चेंबर में अभद्रता आरोप है कि युवक सीधे सीईओ के चेंबर में घुस गया और ऊंची आवाज में बहस करते हुए अभद्रता करने लगा। स्थिति बिगड़ती देख मौजूद लोगों ने उसे चेंबर से बाहर निकाल दिया। बाहर आने के बाद भी युवक शांत नहीं हुआ। उसने सीईओ और स्थानीय विधायक के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की। इसी दौरान किसी ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में वायरल हो गया। जनपद सीईओ की शिकायत पर खिलचीपुर थाने में युवक के खिलाफ गाली-गलौज और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार आरोपी की तलाश जारी है और मामले की जांच की जा रही है। सीईओ बोले- सलाह देने पर भड़का, विधायक को अपशब्द कहे सीईओ गोविंद सिंह सोलंकी ने बताया कि युवक अवैध खनन की शिकायत लेकर आया था, लेकिन उसे संबंधित प्राधिकरण के पास जाने की सलाह देने पर वह भड़क गया। उन्होंने कहा कि युवक 10–20 प्रतिशत जैसी बातें कर रहा था और विधायक के संबंध में भी अपशब्द कह रहा था। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई और बाद में एफआईआर दर्ज करवाई गई।

मृत्युभोज देने की जगह अनाथ बेटी का विवाह:गृहस्थी का सामान, 20 हजार की एफडी भेंट की; व्यापारी की हार्ट अटैक से हुई थी मौत

मृत्युभोज देने की जगह अनाथ बेटी का विवाह:गृहस्थी का सामान, 20 हजार की एफडी भेंट की; व्यापारी की हार्ट अटैक से हुई थी मौत

छतरपुर के नौगांव में एक परिवार ने रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए मिसाल पेश की है। नगर के प्रतिष्ठित सर्राफा व्यवसायी स्वर्गीय गोपाल कठेल के निधन के बाद परिवार ने पारंपरिक मृत्यु भोज करने से इनकार कर सामाजिक संदेश दिया। परिवार ने तेरहवीं पर भोज कराने के बजाय एक जरूरतमंद अनाथ बेटी के विवाह की पूरी सामग्री भेंट करने का फैसला लिया। यह विवाह 22 फरवरी को संपन्न होना है। निधन और पारिवारिक स्थिति गोपाल कठेल का निधन करीब 13 दिन पहले झांसी में हृदय गति रुकने से हुआ था। उनके परिवार में तीन बेटियां और 6 वर्षीय पुत्र कान्हा हैं। शोक के बीच भी परिवार ने समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का निर्णय लिया। अनाथ बेटी के विवाह की जिम्मेदारी परिवार ने 21 वर्षीय अनाथ बेटी के विवाह का पूरा खर्च उठाया। तेरहवीं के अवसर पर घर के आंगन में विवाह सामग्री भेंट की गई, जहां सामान्यतः मृत्यु भोज आयोजित किया जाता है। मृतक की बहन व समाजसेविका तृप्ति कठेल ने लक्ष्मी को लगभग 40 प्रकार की गृहस्थी सामग्री के साथ 20 हजार रुपये की एफडी भेंट की, ताकि उसके वैवाहिक जीवन की शुरुआत सम्मानपूर्वक हो सके। सकारात्मक कदम बढ़ाएं लोग तृप्ति कठेल ने अपील की कि मृत्यु भोज जैसी कुप्रथाओं पर खर्च करने के बजाय गरीब व असहाय लोगों की मदद की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यही सच्ची श्रद्धांजलि और समाज में सकारात्मक बदलाव का मार्ग है। कठेल परिवार की इस पहल की पूरे जिले में सराहना हो रही है और इसे मानवता व सामाजिक बदलाव की प्रेरक मिसाल माना जा रहा है।