डार्क सर्कल्स: आंखों के नीचे से काले घेरे हटाने के लिए क्या करें? जानिए आसान घरेलू उपाय

डार्क सर्कल्स के लिए घरेलू उपचार: डार्क ऑर्केज़ आइज़ के नीचे ब्लैक एरियल अंडकोष जो एक आम समस्या बन रही है। भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान इतनी ज्यादा होती है कि हमारा ध्यान ही नहीं जाता कि चेहरे पर काले कमरे में हमारी सुंदरता कम कर रहे हैं। कई बार आयु भी अधिक होती है। हालाँकि अधिक तनाव, कम नींद, मधुमेह या आनुवंशिक कारणों से आँखों के नीचे कालापन देखने को मिलता है। लेकिन अच्छी बात ये है कि बिना किसी सस्ते उत्पाद के भी काम किया जा सकता है। आज हम कुछ घरेलू उपकरणों के बारे में बात करेंगे। खेड़ा डार्क सर्कल्स निकालने का सबसे आसान और प्रसिद्ध तरीका है। क्राफ्ट की प्रोजेक्टाइल उन्हें फ़्रिज में कूल करें और फिर 10-15 मिनट के लिए आंखों पर देखें। पोटेशियम में पानी और विटामिन-सी की मात्रा होती है, जो त्वचा को ठंडक प्रदान करता है। ये पफीनेस और डार्कनेस दोनों को कम करने में मदद करते हैं। गुलाब जल एक थोक टोनर है जो रेशम को मुलायम और चमकीला बनाता है। कॉटन बॉल को गुलाब जल में डुबोकर 10-15 मिनट तक नीचे देखें। ये एंटी-इंफ्लेमेट्री गुणधर्मों की प्रचुरता और डार्क सर्कल्स को प्रभावित करने का प्रयास साबित होता है। इस तरह के कूलिंग इफेक्ट वाले उपाय त्वचा को राहत देते हैं। एलोवेरा जेल औषधीय गुणों से भरपूर होता है और त्वचा के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। इसे सीधे नीचे की ओर देखें और 10 मिनट बाद धो लें। ये चैलेंजर्स और डार्कनेस को कम करते हैं। एलोवेरा जैसे सिलिकॉन इंग्रीडिएंट्स को त्वचा की देखभाल के लिए सुझाव दिया जाता है। चाय की जादुई दवाएं, विशेष रूप से ग्रीन या कैमोमाइल, गहरे रंग के दांतों के लिए शानदार रेमेडी हैं। 15 मिनट तक आंखें मूंदें और 15 मिनट तक कूल रहें। चाय में मौजूद टैनिन और कैफीन ब्लड वेसल्स को सिकोड़ते हैं। डार्क सर्कल्स की समस्या की समीक्षा के लिए सबसे जरूरी है अच्छी नींद लेना। प्रतिदिन 7-8 घंटे की नींद लें और सिर को थोड़ा ऊंचा उठा लें, ताकि तरल जमा न हो। नींद की कमी डार्क सर्कल्स का बड़ा कारण है और इसमें गुण शामिल हैं। यह उपाय नियमित रूप से अपनाएं और साथ में वस्तु, पानी की पर्याप्त मात्रा और सनस्क्रीन का उपयोग करें। हालाँकि, अगर डार्क सर्कल्स किसी मेडिकल कंडीशन से जुड़े हैं, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी पर आधारित है।
how to balance blood sugar: हाई और लो शुगर को बैलेंस करने का नेचुरल तरीका

Last Updated:February 21, 2026, 21:23 IST Low Blood Sugar Side Effect: शुगर हाई रहने से डायबिटीज की बीमारी होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि लो शुगर भी जानलेवा होता है. शरीर में शुगर का लेवल कम होने पर दिमाग डैमेज होने लगता है. ऐसे में व्यक्ति बेहोश हो सकता है या उसे दौरे भी आ सकते हैं. Low Sugar Se Kya Hota Hai: शुगर की बीमारी सिर्फ हाई ब्लड शुगर तक ही नहीं सीमित होती है. इसमें लो शुगर भी शामिल है. इस कंडीशन को मेडिकल भाषा में हाइपोग्लाइसीमिया भी कहा जाता है, जो कि डायबिटीज जितना ही जानलेवा साबित हो सकता है. आज की जीवनशैली शारीरिक गतिविधि बहुत कम हो गयी है. ऐसे में शरीर में धीरे-धीरे कई बीमारियां पनपने लगती हैं और सबसे पहले ब्लड में शुगर की मात्रा प्रभावित होती है. डायबिटीज को लेकर भी लोगों के बीच भ्रम की स्थिति रहती है. धारणा है कि हाई शुगर सबसे खतरनाक होता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि लो शुगर उससे ज्यादा खतरनाक होता है. इसमें मस्तिष्क को घातक क्षति पहुंचती है. यह तब होता है जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर बहुत कम हो जाता है और मस्तिष्क तक सभी तरीके से पोषण नहीं पहुंच पाता. ऐसी स्थिति अचानक बेहोशी, दौरे, और यहां तक कि आपातकालीन अवस्था तक ले जा सकती है. ब्लड शुगर कंट्रोल रखना जरूरीखून में ग्लूकोज की मात्रा संतुलित रहना बहुत जरूरी है. अगर ग्लूकोज की मात्रा 70 एमजी/डीएल होती है तो ये चिंता का विषय है. इसके साथ ही अगर स्तर 40-50 के बीच है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए. यह स्थिति आपातकालीन स्थिति होती है. इस स्थिति में तुरंत इलाज की जरूरत होती है. आयुर्वेद में कई ऐसे आसान और प्रभावी तरीके बताए गए हैं, जिनसे रक्त में कम होते ग्लूकोज के स्तर को संतुलित रखा जा सकता है. शुगर बैलेंस करना का नेचुरल तरीकाइसके लिए दिनचर्या में मुलेठी का हल्का काढ़ा, खजूर या किशमिश शामिल करें और इसके साथ ही छोटे-छोटे अंतराल पर भोजन लेना शुरू करें. इससे शरीर में ग्लूकोज बनता रहेगा और हल्का मीठा ग्लूकोज और ऊर्जा में वृद्धि करेगा. आयुर्वेद के अनुसार, ज्यादा उपवास, अनियमित भोजन और मानसिक तनाव ‘वात वृद्धि’ कर ऊर्जा असंतुलन पैदा कर सकते हैं, इसलिए लंबे समय तक खुद को भूखा न रखें और कुछ न कुछ खाते रहें. ग्लूकोज को संतुलित करने के लिए आहार में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का संयोजन शामिल करें. कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन का संयोजन शरीर को ऊर्जा और मस्तिष्क को मजबूती देता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें First Published : February 21, 2026, 21:20 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
आंवला के अत्यधिक सेवन से एसिडिटी, ब्लड शुगर कम और रक्तस्राव का खतरा.

Last Updated:February 21, 2026, 21:12 IST आंवला स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन या कुछ विशेष परिस्थितियों में यह नुकसानदायक हो सकता है. खाली पेट लेने, ज्यादा मात्रा में खाने, लो ब्लड शुगर या सर्जरी के आसपास इस्तेमाल करने पर यह एसिडिटी, पेट दर्द, रक्तस्राव और कमजोरी जैसी समस्याएँ पैदा कर सकता है। विशेषज्ञ डॉ. गीतिका शर्मा की सलाह है कि इसे सीमित मात्रा में ही लें. आंवले का अत्यधिक सेवन या कुछ विशेष शारीरिक स्थितियों में यह नुकसानदायक हो सकता है. यह एसिडिटी, पेट में जलन, कब्ज, दस्त, ब्लड शुगर कम होना, और रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकता है. इसे सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. एक्सपर्ट डॉ गीतिका शर्मा ने बताया कि खाली पेट या अत्यधिक सेवन करने पर यह एसिडिटी, जलन और पेट खराब जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है. चूंकि आंवला विटामिन C से भरपूर होता है. इसकी उच्च अम्लीय प्रकृति संवेदनशील पेट या हाइपरएसिडिटी वाले लोगों में एसिड रिफ्लक्स बढ़ा सकती है. लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) वाले लोगों के लिए आंवले का बहुत अधिक सेवन हानिकारक हो सकता है. आंवला रक्त शर्करा के स्तर को काफी कम करता है. यदि आपका शुगर लेवल पहले से ही कम है. तो आंवला इसे और कम कर सकता है. जिससे चक्कर आना, कमजोरी या बेहोशी हो सकती है. Add News18 as Preferred Source on Google सर्जरी से दो सप्ताह पहले और बाद में आंवले का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि यह खून को पतला कर सकता है. जिससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है. यह ब्लीडिंग जोखिम को बढ़ाता है और ब्लड शुगर/बीपी में उतार-चढ़ाव कर सकता है. आंवले का सेवन उन लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है जिन्हें इससे एलर्जी है. यह एक दुर्लभ प्रतिक्रिया है. लेकिन एलर्जी होने पर खुजली, पित्ती, त्वचा पर चकत्ते, सूजन, या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. इसके अलावा, अत्यधिक सेवन से एसिडिटी, पेट दर्द, लो ब्लड प्रेशर और किडनी स्टोन की समस्या भी बढ़ सकती है. अत्यधिक आंवला खाने या लगाने से बालों और त्वचा में रूखापन और डैंड्रफ की समस्या हो सकती है. आंवला में मौजूद प्राकृतिक टैनिन और एस्ट्रिंजेंट गुण बालों की प्राकृतिक नमी को कम कर सकते हैं. इसके अलावा, इसके मूत्रवर्धक प्रभाव के कारण डिहाइड्रेशन भी हो सकता है. वैसे तो यह सुरक्षित है, लेकिन अत्यधिक मात्रा में सेवन से दस्त, एसिडिटी और पेट में ऐंठन हो सकती है. गर्भावस्था में किसी भी प्राकृतिक उपाय से पहले विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक है. First Published : February 21, 2026, 21:12 IST
High Protein Diet Risks | Women Health Tips | स्वास्थ्य पर हाई प्रोटीन का असर क्या होता है | फिटनेस ट्रेंड का साइड इफेक्ट |

Last Updated:February 21, 2026, 21:08 IST Protein Side Effects: सोशल मीडिया पर दिखने वाली परफेक्ट बॉडी की चाहत कहीं आपकी सेहत की दुश्मन न बन जाए. दरअसल, महिलाओं में इन दिनों बिना डॉक्टरी सलाह के हाई-प्रोटीन डाइट और सप्लीमेंट लेने का एक ऐसा ट्रेंड बढ़ा है, जिसने चिंता बढ़ा दी है. आखिर वो कौन सी गलती है जो फिटनेस के नाम पर आपके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर भारी पड़ रही है? प्रोटीन की वह कौन सी सीमा है, जिसे पार करते ही शरीर के अंदर समस्याएं शुरू हो जाती है? जो उन महिलाओं के लिए एक चेतावनी है जो इंटरनेट इन्फ्लुएंसर्स की बातों को बिना सोचे-समझे सच मान बैठी हैं. कन्नौज: सोशल मीडिया पर इन दिनों वजन घटाने और फिट दिखने की होड़ मची हुई है, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक गंभीर स्वास्थ्य संकट भी छिपा है. इंटरनेट पर मौजूद फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स की बातों में आकर कई महिलाएं बिना किसी डॉक्टरी सलाह के हाई-प्रोटीन डाइट और महंगे सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रही हैं. कन्नौज जिला अस्पताल के विशेषज्ञों ने इस बढ़ते ट्रेंड पर गहरी चिंता जताई है और महिलाओं को आगाह किया है कि बिना विशेषज्ञ की देखरेख के पोषक तत्वों का असंतुलन शरीर को स्थाई नुकसान पहुंचा सकता है. जरूरत से ज्यादा प्रोटीन बन सकता है शरीर पर बोझप्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक जरूरी तत्व है, लेकिन इसकी अति सेहत के लिए घातक साबित हो सकती है. जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शक्ति बसु के अनुसार, जब महिलाएं शरीर की वास्तविक जरूरत को समझे बिना केवल प्रोटीन पर निर्भर हो जाती हैं, तो इसका सीधा असर उनके पाचन तंत्र पर पड़ता है. आवश्यकता से अधिक प्रोटीन का सेवन मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देता है जिससे गैस, पेट फूलने और कब्ज जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. इसके अलावा, यह स्थिति शरीर के भीतर के महत्वपूर्ण अंगों पर अतिरिक्त दबाव डालती है जिससे लंबे समय में अन्य जटिल बीमारियां जन्म ले सकती हैं. प्रोटीन की मात्रा तय करना बहुत जरूरी हैहर महिला के शरीर की बनावट और उसकी जीवनशैली अलग होती है, इसलिए प्रोटीन की मात्रा भी सबके लिए एक समान नहीं हो सकती. विशेषज्ञों का कहना है कि एक सामान्य महिला को उसके प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 1.75 से 1.80 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है. जो महिलाएं जिम में भारी कसरत करती हैं, उनके लिए यह मात्रा थोड़ी ज्यादा हो सकती है, लेकिन गर्भावस्था या मेनोपॉज जैसी विशेष स्थितियों में यह पूरी तरह डॉक्टर के परामर्श पर निर्भर होना चाहिए. बिना सोचे-समझे किसी भी डाइट चार्ट को फॉलो करना न केवल बेअसर रहता है बल्कि हार्मोनल असंतुलन का कारण भी बन सकता है. पाउडर के बजाय प्राकृतिक स्रोतों पर दें ध्यानडॉ. शक्ति बसु ने महिलाओं को सलाह दी है कि उन्हें बाजाBAर में बिकने वाले डिब्बाबंद प्रोटीन पाउडर के बजाय रसोई में मौजूद प्राकृतिक खाद्य पदार्थों पर भरोसा करना चाहिए. दालें, पनीर, मछली, अंडा, सोयाबीन, दही और नट्स प्रोटीन के सबसे सुरक्षित स्रोत हैं जो शरीर को अन्य जरूरी विटामिन भी प्रदान करते हैं. केवल प्रोटीन बढ़ाने से ही वजन कम नहीं होता है, बल्कि इसके लिए सही मात्रा में पानी पीना, पर्याप्त नींद लेना और नियमित शारीरिक व्यायाम करना भी उतना ही आवश्यक है. सेहत से जुड़े इन खतरों को पहचानना है जरूरीहाई-प्रोटीन डाइट के दौरान शरीर अक्सर कुछ चेतावनी भरे संकेत देता है जिन्हें महिलाएं अक्सर अनदेखा कर देती हैं. यदि डाइट बदलने के बाद आपको लगातार सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन या डिहाइड्रेशन महसूस हो रहा है, तो यह समझ लेना चाहिए कि शरीर इस बदलाव को स्वीकार नहीं कर पा रहा है. विशेषज्ञों ने अपील की है कि महिलाओं को सोशल मीडिया के शॉर्टकट तरीकों के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुभव को प्राथमिकता देनी चाहिए. फिट रहने की चाहत में अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करना किसी भी नजरिए से सही नहीं है और किसी भी बड़े बदलाव से पहले एक्सपर्ट की राय लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है. About the Author Seema Nath सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें Location : Kannauj,Uttar Pradesh First Published : February 21, 2026, 21:08 IST
नरसिंहपुर हाईवे चौराहे पर मुक्तिधाम नहीं:अंतिम संस्कार के लिए 2 किमी दूर लोलरी जाना पड़ता, लोग बोले- कई बार शिकायत की

नरसिंहपुर जिले में नेशनल हाईवे 44 और 45 को जोड़ने वाले चौराहे के पास रहने वाले लोगों को मुक्तिधाम नहीं होने से समस्या का सामना करना पड़ रहा है। करीब 500 की आबादी वाले इस इलाके में आज तक मुक्तिधाम (श्मशान घाट) की सुविधा नहीं मिल पाई है। मुक्तिधाम न होने की वजह से यहां के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए अपने गांव से लगभग 2 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत लोलरी जाना पड़ता है। दूरी ज्यादा होने के कारण परिजनों को शव यात्रा निकालने में काफी दिक्कत आती है। कई बार तो मजबूरी में शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर ले जाना पड़ता है। स्थानीय निवासी विमलेश पटेल का कहना है कि दुख की घड़ी में इस सुविधा का न होना लोगों की परेशानी और बढ़ा देता है। सरकारी जमीन की कमी बनी बाधा इस समस्या को लेकर जब ग्राम पंचायत लोलरी की सचिव उमा श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने एक बड़ी तकनीकी दिक्कत बताई। उनके अनुसार, राजमार्ग क्षेत्र में सरकार के पास अपनी कोई जमीन खाली नहीं है। वहां जितनी भी जमीन है, वह निजी (प्राइवेट) है और उसकी कीमत बहुत ज्यादा है। पंचायत के पास इतना बजट नहीं है कि वह इतनी महंगी जमीन खरीद सके, यही वजह है कि मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने की प्रशासन से मांग स्थानीय लोग कई बार इस मामले में गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का कोई रास्ता निकाला जाए और क्षेत्र में जल्द से जल्द मुक्तिधाम बनवाया जाए ताकि लोगों को भटकना न पड़े।
DSSSB Recruitment 911 Posts | Govt Job Delhi

16 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी DSSSB में 911 पदों पर निकली भर्ती की। यूपीएससी ने CAPF में 349 पदों पर निकाली भर्ती। साथ ही मुंबई महानगर विकास प्राधिकरण में 235 वैकेंसी की। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए.… 1. DSSSB में 911 पदों पर निकली भर्ती दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) ने 900 से ज्यादा पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट dsssb.delhi.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। फीस जमा करने की आखिरी तारीख 25 मार्च 2026 तय की गई है। वैकेंसी डिटेल्स : पद का नाम पदों की संख्या लीगल असिस्टेंट 10 असिस्टेंट इंजीनियर सिविल 33 जूनियर इंजीनियर सिविल 281 असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) 587 कुल 911 लीगल असिस्टेंट : मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से लॉ की डिग्री। साथ में 3 साल लीगल प्रैक्टिश्नर का अनुभव या किसी सरकारी डिपार्टमेंट में 1 साल का लीगल काम का अनुभव। असिस्टेंट इंजीनियर सिविल: सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री या तीन साल का सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के साथ 2 साल का अनुभव। जूनियर इंजीनियर सिविल: मान्यता प्राप्त इंस्टीट्यूट से सिविल इंजीनियरिंग में 3 साल का डिप्लोमा। असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO): बैचलर की डिग्री। साथ में कंप्यूटर का नॉलेज होना चाहिए। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम : 35 साल रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को नियमानुसार छूट मिलेगी। सैलरी : 35,400-1,42,400 रुपए प्रतिमाह सिलेक्शन प्रोसेस : टियर – 1 एग्जाम टियर – 2 एग्जाम डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल एग्जाम फीस : सामान्य, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 100 रुपए एससी, एसटी, पीएच : नि:शुल्क एग्जाम पैटर्न : लीगल असिस्टेंट के लिए : सब्जेक्ट प्रश्नों की संख्या टोटल मार्क्स जनरल अवेयरनेसजनरल इंटेलिजेंस एंड रिजनिंग एबिलिटीएरिथमेटिकल एंड न्यूमेरिकल एबिलिटीहिंदी लैंग्वेज एंड कॉम्प्रिहेंशन टेस्टइंग्लिश लैंग्वेज एंड कॉम्प्रिहेंशन टेस्ट 100 100 संबंधित विषय 100 100 टोटल 200 200 असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर ग्रेड – 2 : सब्जेक्ट प्रश्नों की संख्या टोटल मार्क्स जनरल अवेयरनेसजनरल इंटेलिजेंस एंड रिजनिंग एबिलिटीएरिथमेटिकल एंड न्यूमेरिकल एबिलिटीहिंदी लैंग्वेज एंड कॉम्प्रिहेंशन टेस्टइंग्लिश लैंग्वेज एंड कॉम्प्रिहेंशन टेस्ट 200 200 ऐसे करें आवेदन : DSSSB की वेबसाइट dsssb.delhi.gov.in पर जाएं। होम पेज पर Recruitment सेक्शन पर क्लिक करें। DSSSB Recruitment Advt 6/2024 पर क्लिक करें। अप्लाई ऑनलाइन पर क्लिक करें। जरूरी डाक्यूमेंट्स, फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। अपनी कैटेगरी के अनुसार फीस का भुगतान करें। आवेदन फॉर्म फाइनल सब्मिट कर दें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 2. यूपीएससी ने CAPF में 349 पदों पर निकाली भर्ती संघ लोक सेवा आयोग ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में असिस्टेंट कमांडेंट के पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार यूपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती के लिए लिखित परीक्षा 19 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : ग्रेजुएशन की डिग्री। एज लिमिट : न्यूनतम : 20 साल अधिकतम : 25 साल उम्मीदवारों की आयु की गणना 01 अगस्त, 2026 के आधार पर की जाएगी। एससी, एसटी : 5 साल की छूट ओबीसी : 3 साल की छूट सिलेक्शन प्रोसेस : रिटन एग्जाम फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट जरूरी डॉक्यूमेंट्स : वैलिड ईमेल आईडी मोबाइल नंबर स्कैन की गई फोटो और सिग्नेचर फोटो पहचान पत्र (आधार कार्ड/वोटर आईडी/पैन कार्ड/पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस) फीस : जनरल, ओबीसी : 200 रुपए एससी, एसटी, महिला : नि:शुल्क एग्जाम में लागू होंगे ये नियम : वन टाइम रजिस्ट्रेशन की जगह यूआरएन ने ले ली है जो हमेशा वैलिड रहेगा। फाइनल सब्मिशन के बाद आवेदन में सुधार करने का कोई मौका नहीं मिलेगा। अब पहले से खींची हुई फोटो अपलोड करने के बजाय आवेदन के समय लाइव फोटो कैप्चर करना जरूरी है। उम्मीदवारों को सफेद कागज पर काले पेन से तीन बार सिग्नेचर करके अपलोड करने होंगे। एग्जाम सेंटरों की संख्या 47 से बढ़ाकर 57 कर दी गई है। इसके अंतर्गत दिल्ली-एनसीआर (नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद) और भुवनेश्वर, इंदौर जैसे 10 नए सेंटर जोड़े गए हैं। इस बार असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा केंद्र पर सभी उम्मीदवारों का अनिवार्य फेस ऑथेंटिकेशन किया जाएगा। एग्जाम पैटर्न : पेपर सब्जेक्ट प्रश्नों की संख्या टोटल मार्क्स पेपर – 1 जनरल एंड मेंटल एबिलिटी 125 250 पेपर – 2 जनरल स्टडीज, निबंध एंड कॉम्प्रिहेंशन 7 200 ऐसे करें आवेदन : यूपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाएं। होमेपज पर ऑनलाइन अप्लाई लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद UPSC CAPF AC Recruitment 2026 लिंक पर क्लिक करें। मांगी गई जानकारी दर्ज करें। सभी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस जमा करके फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 3. मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण में 235 पदों पर भर्ती मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने वर्ष 2026 के लिए ग्रुप ए, बी और सी के पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट mmrda.maharashtra.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। फीस जमा करने की आखिरी तारीख 20 मार्च 2026 तय की गई है। एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : संबंधित क्षेत्र में इंजीनियरिंग की डिग्री, डिप्लोमा, आर्किटेक्चर या सिविल इंजीनियरिंग या प्लानिंग या इसके समकक्ष डिग्री, सोशल वर्क में मास्टर डिग्री, लॉ में बैचलर डिग्री, स्टेनोग्राफर के लिए 10वीं पास + 80 शब्द प्रति मिनट शॉर्टहैंड + 40 शब्द प्रति मिनट मराठी टाइपिंग, 10वीं पास के साथ वर्क एक्सपीरियंस। एज लिमिट : न्यूनतम : 18 साल अधिकतम (सामान्य वर्ग) : 38 साल अधिकतम (आरक्षित वर्ग) : 43 साल पीडब्ल्यूबीडी : 45 साल एससी, एसटी : 5 साल की छूट पीडब्ल्यूबीडी : 7 साल की छूट सिलेक्शन प्रोसेस : ऑनलाइन कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम स्किल टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन फीस : सामान्य : 1,000 रुपए पिछड़ा वर्ग (OBC/SC/ST/VJ-NT/SBC) : 900 रुपए अनाथ श्रेणी: 900 रुपए पूर्व सैनिक/पीडब्ल्यूबीडी : नि:शुल्क सैलरी : 19,100 से 1,77,500 रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट mmrda.maharashtra.gov.in पर जाएं। होम पेज पर Recruitment सेक्शन में क्लिक करें। अप्लाई ऑनलाइन पर क्लिक करें। सभी डिटेल्स पढ़ें। जरूरी डाक्यूमेंट्स, फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। अपनी कैटेगरी के अनुसार फीस का भुगतान करें। फॉर्म पूरा भरने के बाद इसे सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक ऑफिशियल वेबसाइट लिंक 4. हरियाणा में 4,227 पदों पर भर्ती, लास्ट डेट 23 फरवरी हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) ने कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET)
शिखर धवन ने गर्लफ्रेंड सोफी शाइन से शादी की:युजवेंद्र चहल ने बारात में डांस किया; क्रिकेटर ने 2023 में पहली पत्नी से तलाक लिया था

पूर्व भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन ने गर्लफ्रेंड सोफी शाइन के साथ शादी कर ली है। स्पिनर युजवेंद्र चहल ने शनिवार को एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें वे मौजा ही मौजा गाने पर डांस करते दिख रहे हैं। चहल ने कुछ फोटो भी पोस्ट किए। इनमें धवन और उनकी पत्नी सोफी शाइन स्टेज पर हैं। 40 साल के पूर्व भारतीय ओपनर ने एक महीने पहले 12 जनवरी को अपनी आयरिश गर्लफ्रेंड के साथ सगाई की थी। दोनों पिछले कुछ समय से रिलेशनशिप में थे और मई 2025 में अपने रिश्ते को सार्वजनिक किया था। इससे पहले धवन ने 2023 में अपनी पहली पत्नी आयशा मुखर्जी से तलाक ले लिया था। दोनों ने 2011 में शादी की थी। आयशा-धवन का एक बेटा भी है। धवन की शादी की फोटो देखिए चहल ने धवन की शादी में डांस की वीडियो भी पोस्ट किया, देखिए… पिछले महीने धवन ने सगाई की थी धवन ने 12 जनवरी को इंस्टाग्राम पर लिखा था- मुस्कान से लेकर सपनों तक, सब कुछ साझा करते हुए। हमारी सगाई के लिए मिले प्यार, आशीर्वाद और शुभकामनाओं के लिए आभारी हूं। हम हमेशा के लिए एक-दूसरे का साथ चुन रहे हैं। इससे पहले IPL में शिखर के पंजाब किंग्स के लिए खेलने के दौरान भी सोफी टीम को सपोर्ट करती नजर आई थीं। कौन हैं सोफी शाइन? सोफी शाइन आयरलैंड की रहने वाली हैं। जब वह धवन से मिली थी तब UAE में जॉब करती थी। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक वह अमेरिका की फाइनेंशियल सर्विस कंपनी नॉर्दर्न ट्रस्ट कॉरपोरेशन में सेकेंड वाइस प्रेसिडेंट (प्रोडक्ट कंसल्टेंट) के पद पर कार्यरत रही हैं। सोफी पिछले साल जुलाई से धवन की स्पोर्ट्स कंपनी डा वन स्पोर्ट्स की COO (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) हैं। उन्होंने आयरलैंड के लिमरिक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मार्केटिंग और मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। शुरुआती शिक्षा उन्होंने कैसलरॉय कॉलेज से पूरी की। सोफी, धवन के इंस्टाग्राम पर आने वाले कई मजेदार वीडियो में भी नजर आती रहती हैं। धवन तलाक के बाद मुश्किल दौर से गुजरे थे पिछले साल एक इंटरव्यू में धवन ने अपने तलाक के बाद के मुश्किल दौर को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि वह लंबे समय से अपने बेटे जोरावर से नहीं मिल पाए हैं और संपर्क भी टूट गया है। धवन और उनकी पूर्व पत्नी आयशा मुखर्जी का अक्टूबर 2023 में आधिकारिक तौर पर तलाक हुआ था। दोनों की शादी 2011 में हुई थी और यह रिश्ता करीब 11 साल चला। आयशा की पहले की शादी से दो बेटियां हैं। धवन के साथ उन्होंने बेटे जोरावर को जन्म दिया। तलाक के फैसले के दौरान दिल्ली की अदालत ने कहा था कि धवन को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी और उन्हें कई सालों तक अपने इकलौते बेटे से दूर रखा गया। हालांकि कोर्ट ने धवन को स्थायी कस्टडी नहीं दी थी, बल्कि मिलने और वीडियो कॉल की सीमित अनुमति दी थी। धवन का कहना है कि बाद में उन्हें बेटे से वर्चुअल बातचीत से भी रोक दिया गया। घरवालों के मना करने के बावजूद शिखर ने पहली शादी की थी ऑस्ट्रेलियन नागरिक आयशा का जन्म हिंदुस्तान में हुआ था। उनके पिता भारतीय और उनकी मां ब्रिटिश मूल की हैं। शिखर से 10 साल बड़ी आयशा किक बॉक्सर हैं और नेशनल व इंटरनेशनल इवेंट में हिस्सा ले चुकी हैं। आयशा की पहली शादी एक ऑस्ट्रेलियाई बिजनेसमैन से हुई थी। इस शादी के बाद आयशा की दो बेटियां आलिया और रिया हुईं। शिखर ने आयशा को पहली बार फेसबुक पर देखा था और यहीं से प्यार की शुरुआत हुई थी। इस लव स्टोरी में हरभजन सिंह मीडिएटर थे। धवन के घरवाले आयशा से शादी के खिलाफ थे। वे नहीं चाहते थे कि तलाकशुदा और 10 साल बड़ी औरत जिसकी दो बेटियां हों, उससे वे शादी करें। हालांकि, बाद में परिवार ने इस रिश्ते को मंजूरी दे दी। 2012 में सिख परंपरा से शादी हुई। शिखर की बारात में विराट कोहली समेत कई क्रिकेटर्स शामिल हुए थे। शिखर ने 2022 में भारत के लिए आखिरी मैच खेला शिखर धवन ने 2010 में टी-20 और 2011 में भारत के लिए वनडे डेब्यू किया। हालांकि, टीम में जगह बनाने में उन्हें 3 साल लग गए। 2013 में उन्होंने टेस्ट डेब्यू किया, यहीं से वे तीनों फॉर्मेट में फिक्स हो गए। उन्होंने 10 दिसंबर 2022 तक भारत के लिए 167 वनडे, 68 टी-20 और 34 टेस्ट खेले। इनमें 24 शतक और 55 फिफ्टी शामिल रहीं। —————————————————— भारतीय क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… सूर्या बोले– अभिषेक के फॉर्म की चिंता न करें टी-20 वर्ल्ड कप के तीन मैचों में बिना खाता खोले आउट हुए टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा के सपोर्ट में कप्तान सूर्यकुमार यादव का बयान आया है। शनिवार को सूर्या ने कहा- ‘अभिषेक शर्मा का फॉर्म चिंता का विषय नहीं है। मुझे चिंता उन लोगों की है, जो अभिषेक की चिंता कर रहे हैं। मुझे फिक्र उन टीमों की है, जिनके खिलाफ अभिषेक का बल्ला चलेगा।’ पढ़ें पूरी खबर
How Body Senses Cold | शरीर को ठंड का अहसास कैसे होता है? वैज्ञानिकों ने सुलझाई शरीर की सबसे बड़ी मिस्ट्री, अंदर छिपा है ‘माइक्रोस्कोपिक थर्मामीटर’, वो सेंसर जो दिमाग को भेजता है कूल सिग्नल

नई दिल्ली: जब आप सर्दियों की सुबह घर से बाहर निकलते हैं या मुंह में पुदीने की गोली (Mint) रखते हैं, तो आपके शरीर के भीतर एक छोटा सा मॉलिक्यूलर सेंसर तुरंत एक्टिव हो जाता है. यह सेंसर आपके दिमाग को अलर्ट करता है कि बाहर ठंड है या आपने कुछ ठंडा खाया है. वैज्ञानिकों ने अब इस सेंसर की पहली विस्तृत तस्वीरें कैद करने में सफलता हासिल की है. इस रिसर्च से यह साफ हो गया है कि हमारा शरीर असली ठंड और मेंथॉल (Menthol) से मिलने वाली बनावटी ठंडक के बीच कैसे फर्क करता है या कैसे दोनों को एक ही तरह से महसूस करता है. सैन फ्रांसिस्को में 21-25 फरवरी, 2026 तक चलने वाली ’70वीं बायोफिजिकल सोसाइटी एनुअल मीटिंग’ में इस रिसर्च को पेश किया गया. 1. क्या है TRPM8 और यह कैसे काम करता है? इस पूरी रिसर्च का केंद्र ‘TRPM8’ नामक एक प्रोटीन चैनल है. ड्यूक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर ह्युक-जून ली ने इसे शरीर के भीतर मौजूद एक ‘माइक्रोस्कोपिक थर्मामीटर’ की तरह बताया है. यह प्रोटीन हमारे सेंसरी न्यूरॉन्स की झिल्लियों (Membranes) में स्थित होता है, जो हमारी त्वचा, मुंह और आंखों तक फैले होते हैं. जब तापमान 46°F से 82°F (लगभग 8°C से 28°C) के बीच होता है, तो यह चैनल खुल जाता है. इसके खुलते ही कोशिका के अंदर आयन (Ions) का प्रवाह शुरू होता है, जो दिमाग को ठंडक का इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजता है. 2. मेंथॉल कैसे देता है दिमाग को धोखा? रिसर्च में यह दिलचस्प खुलासा हुआ कि मेंथॉल वास्तव में शरीर को ‘बेवकूफ’ बनाता है. ली के अनुसार, मेंथॉल एक ट्रिक की तरह काम करता है. यह प्रोटीन चैनल के एक खास हिस्से से जुड़ जाता है और उसे बिल्कुल वैसे ही खोल देता है जैसे असली ठंडक खोलती है. हालांकि मेंथॉल किसी चीज को बर्फ की तरह जमाता नहीं है, लेकिन आपका शरीर दिमाग को वही सिग्नल भेजता है जो बर्फ छूने पर मिलता है. यही कारण है कि पुदीना खाने पर या नीलगिरी (Eucalyptus) का तेल लगाने पर हमें तेज ठंडक का एहसास होता है. क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी एक ऐसी तकनीक जो इलेक्ट्रॉन बीम से फ्लैश-फ्रोजन प्रोटीन की इमेज बनाती है. इसका इस्तेमाल करके रिसर्चर्स ने कोल्ड सेंसिंग चैनल, TRPM8 के कई कन्फर्मेशनल स्नैपशॉट कैप्चर किए, जब यह बंद से खुले में बदलता है. (Credit: Hyuk-Joon Lee) 3.क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से खुला राज? वैज्ञानिकों ने इस सेंसर को काम करते हुए देखने के लिए ‘क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी’ तकनीक का इस्तेमाल किया. इसमें प्रोटीन को अचानक जमा दिया जाता है और फिर इलेक्ट्रॉन बीम के जरिए उसकी इमेज ली जाती है. टीम ने TRPM8 के बंद होने से लेकर खुलने तक की कई तस्वीरें लीं. उन्होंने पाया कि ठंड और मेंथॉल दोनों ही इस चैनल को सक्रिय करते हैं, लेकिन उनके तरीके अलग-अलग हैं. ठंड सीधे उस रास्ते (Pore) को प्रभावित करती है जहां से आयन गुजरते हैं, जबकि मेंथॉल प्रोटीन के दूसरे हिस्से से जुड़कर उसमें बदलाव लाता है, जो अंततः रास्ते को खोल देता है. 4. बीमारियों के इलाज में कैसे मिलेगी मदद? इस खोज के मेडिकल मायने बहुत गहरे हैं. जब TRPM8 सेंसर सही से काम नहीं करता, तो यह क्रोनिक पेन (लगातार होने वाला दर्द), माइग्रेन, आंखों का सूखापन (Dry Eye) और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर से जुड़ जाता है. फिलहाल ‘एकोल्ट्रेमोन’ नामक दवा, जो TRPM8 को सक्रिय करती है, ड्राई आई के इलाज के लिए इस्तेमाल की जा रही है. यह दवा मेंथॉल की तरह ही काम करती है और आंखों में ठंडक का अहसास कराकर आंसू बनाने की प्रक्रिया को तेज करती है. AI की मदद से बनाई प्रतीकात्मक तस्वीर. 5. क्या भविष्य में दर्द से मिलेगी पूरी राहत? रिसर्चर्स ने प्रोटीन के अंदर एक ‘कोल्ड स्पॉट’ (Cold Spot) की भी पहचान की है. यह हिस्सा तापमान को भांपने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार होता है. यह खोज वैज्ञानिकों को ऐसी नई दवाएं विकसित करने का आधार प्रदान करती है जो सीधे इस रास्ते को टारगेट कर सकें. इससे न केवल दर्द के इलाज में मदद मिलेगी, बल्कि यह भी समझ में आएगा कि लंबे समय तक ठंड में रहने पर हमारा शरीर उसे सहने के अनुकूल कैसे हो जाता है. दशकों से वैज्ञानिक जिस सवाल का जवाब ढूंढ रहे थे, वह अब हमारे सामने है.
मीनाक्षी शेषाद्री बोलीं- शास्त्रीय नृत्य गांव तक ले जाऊंगी:30 साल बाद खरगोन में दूसरी पारी का ऐलान; कहा- भविष्य को लेकर बहुत उत्सुक

फिल्म अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्री शनिवार शाम 5:30 बजे खरगोन पहुंची। वे नवग्रह मेले के समापन पर शास्त्रीय शास्त्री नृत्य प्रस्तुति में शामिल हो रही हैं। खरगोन पहुंचने पर 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री मीनाक्षी ने कहा कि वह बॉलीवुड में 30 साल के ब्रेक के बाद अपनी दूसरी पारी के लिए तैयार हैं। भरतनाट्यम थोड़ा मुश्किल जरूर है लेकिन इस विशेष तरीके से किया जाए तो गांव तक के लोग आसानी से समझ सकते हैं। वे लेवल 1 व लेवल 2 सिटी से लेकर हिंदुस्तान के गांव तक शास्त्रीय संगीत को पहुंचाना चाहती है। खरगोन से इसकी शुरुआत कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं एक ऐसे परिवार में जन्मी जहां संगीत, नृत्य, अभिनय, शास्त्रीय ज्ञान व संस्कृत प्रचलित रहा। उसे वजह से मैं चलने से पहले नृत्य करना सीख लिया। मेरी मां ही मेरी गुरु थी भरतनाट्यम शैली में। शादी कर USA चली गईं थी पूर्व मिस इंडिया मीनाक्षी ने बताया दिल्ली में जब स्कूल की 12वीं कक्षा में थी तब मजाक में ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भाग ले लिया था आश्चर्य की बात थी कि मिस इंडिया भी चुन ली गई। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। फौरन कई फिल्म भी ऑफर हो गई। मेरे पापा अंग्रेजी में समझाते थे सक्सेस इस एपीसी। ए मतलब एबिलिटी यानी योग्यता। बी यानी ब्रेक। यानी अपॉर्चुनिटी का सही दरवाजे से दस्तक देना। सी मतलब करेज यानी आत्म शक्ति, आत्मविश्वास व बड़ी शक्ति में विश्वास। मेरे सफर में यह तीन बातें सम्मिलित थी। 80-90 के दशक में 80 से 90 फिल्में की थी जिसमें हिंदी भाषा के अलावा तमिल तेलुगू की फिल्में भी शामिल हैं। उसके बाद शादी कर USA चली गई। 30 साल के गैप के बाद मैं भविष्य को लेकर उत्सुक हूं। दामिनी एक फिल्म है और मैंने उसमें दामिनी का पात्र किया। फिल्म में जो बताया गया आज भी हिंदुस्तान में वह हावी है। इसका दमन जरूरी है। महिलाओं को साहस दिखाने की आवश्यकता है और यह भारत है जहां शक्ति रूप से संसार रचा गया। शक्ति रूप से ही ठीक किया जा सकता है। मुझे अश्लीलता पसंद नहीं है। मैं वैसे ही पत्र निभाउं जो परिवार के साथ देख सकूं। शॉर्टकट से सक्सेस पर उन्होंने कहा, आज घोर कलयुग है। लक्ष्मी को शॉर्टकट से पा सकते हैं लेकिन सत्य की राह ही सही लक्ष्मी है। परिवर्तन का दौर है। सोशल मीडिया की वजह से बड़े भी फिल्में भी नहीं चल रही है।
Javed Akhtar Condemns Taliban Law on Domestic Violence

59 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉलीवुड के जाने-माने गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने तालिबान के उस नए कानून की कड़ी निंदा की है, जिसमें घरेलू हिंसा को जायज बताया गया है। उन्होंने इसे धर्म के नाम पर इंसानियत का अपमान कहा और भारतीय मौलवियों-मुफ्तियों से बिना शर्त इसे खारिज करने की अपील की। तालिबान की नई 90 पेज की दंड संहिता के तहत घरेलू हिंसा को बड़े स्तर पर अनुमति दी गई है। इस कानून के मुताबिक यदि पति अपनी पत्नी को बिना हड्डी टूटे या खुले घाव के मारता है, तो वह अपराध नहीं माना जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई महिला बिना पति की अनुमति अपने मायके जाती है, तो उसे तीन महीने तक जेल की सजा का सामना भी करना पड़ सकता है। जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया x पर पोस्ट शेयर कर कहा कि तालिबान ने पत्नी की पिटाई को तभी अपराध माना है जब हड्डी टुटे या गंभीर चोट हो, और इसके लिए भी सबूत का जिम्मा महिला पर डाला है, जो कि एक भयावह सामाजिक चुनौति है। उन्होंने इसके लिए पूरे धार्मिक समुदाय की प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि इस तरह के नियमों को धर्म के नाम पर लागू होने से रोका जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान द्वारा जारी यह कोड महिलाओं के कानूनी अधिकारों को कमजोर करने वाला है और इससे घरेलू हिंसा जैसी कुप्रथाएं सरकारी मान्यता पाती दिखाई देती हैं। पहले के अधिकार, जैसे कि 2009 का EVAW (Elimination of Violence Against Women) कानून, अब पूरी तरह प्रभावहीन होते जा रहे हैं, जिससे महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में अब न्याय पाना और भी कठिन हो गया है। तालिबान के इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारी आलोचना बटोरी है। कई मानवाधिकार समूहों और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय निकायों ने इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ एक गंभीर और विघातक कदम बताया है। आलोचकों का कहना है कि यह कानून सिर्फ महिलाओं के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देगा बल्कि उन्हें सामाजिक और कानूनी रूप से भी असमर्थ बनाएगा। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔









